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बौलीवुड के रोमांटिक डायलौग से बनाएं वैलेंटाइन खास

बौलीवुड और रोमांस का पुराना नाता है. जब भी हम बड़े परदे पर हीरोहीरोइन को रोमांस करते देखते हैं तो हमारे दिल में भी ‘कुछकुछ होता है’, दिल में घंटियां बजने लगती हैं, सांसें थम सी जाती हैं. हम जिस से प्यार करते हैं उस का चेहरा नजर आने लगता है. हम भी राज और सिमरन बनना चाहते हैं, प्रेम की तरह निशा को अपने दिल की बात बताना चाहते हैं. प्यार के मीठे पलों को जीना चाहते हैं. अगर आप भी किसी से प्यार करते हैं लेकिन इजहार करने से कतराते हैं तो इस वैलेंटाइन बौलीवुड के इन 10 रोमांटिक डायलौग से अपने प्यार का इजहार करिए और वैलेंटाइन को खास व यादगार बनाइए.

1. आप अपनी बैस्ट फ्रैंड से प्यार करते हैं, लेकिन इस डर से बताने से हिचकिचाते हैं कि अगर आप ने उसे अपने दिल की बात बताई तो कहीं आप की दोस्ती न टूट जाए, तो डरना छोडि़ए और इस वैलेंटाइन फिल्म ‘कुछकुछ होता है’ का यह डायलौग कह कर अपने दिल की बात उसे जरूर बताएं.

‘प्यार दोस्ती है, अगर वह मेरी सब से अच्छी दोस्त नहीं बन सकती तो मैं उस से कभी प्यार कर ही नहीं सकता, क्योंकि दोस्ती बिना तो प्यार होता ही नहीं, सिंपल प्यार दोस्ती है.’’

अगर वह भी आप से प्यार करती है तो इस का जवाब जरूर देगी. लेकिन अगर वह इस बात से नाराज हो जाए तो उस से यह कहिए कि अरे यार तुम मेरी सब से अच्छी फ्रैंड हो और शाहरूख मेरा फेवरेट. बस और क्या, तुम भी ना. हर रिश्ते में प्यार होता है, हमारा रिश्ता तो सब से खास है माई डियर फ्रैंड.

2. आप थोड़े कंफ्यूज हैं कि कैसे प्रपोज करें तो शाहरूख स्टाइल को कौपी कर सकते हैं. फोन पर बातचीत करते हुए बातोंबातों में बोल दें. ‘‘आई लव यू ककक किरण.’’ यकीन मानिए आप की फ्रैंड खुद से कहेगी किरण नहीं, मेरा नाम श्वेता है. बस फिर क्या कह डालिए. ‘‘हां आई लव यू श्वेता.’’

3. अगर काम की वजह से या किसी अन्य कारण से इस वैलेंटाइन आप अपने पार्टनर के साथ नहीं हैं और वह आप से रूठी है, आप से बात नहीं कर रही है, आप का फोन नहीं उठा रही है तो ‘फना’ फिल्म का यह डायलौग मैसज कर के अपने रूठे पार्टनर को आप मना सकते हैं.

‘‘हम से दूर जाओगे कैसे, दिल से हमें भुलाओगे कैसे, हम वो खुशबू हैं जो सांसों में बसते हैं, खुद की सांसों को रोक पाओगे कैसे?’’

4. आप से कोई लड़का बेइंतजा प्यार करता था, लेकिन आप ने कभी उस के प्यार का जवाब नहीं दिया या हमेशा उस के प्यार को ठुकराया है, पर अब कुछ दिनों से आप भी उस से प्यार करने लगी हैं तो ‘रब ने बना दी जोड़ी’ फिल्म का यह डायलौग कह कर प्यार को एक नया नाम दें ‘‘हर इश्क का एक वक्त होता है, वो हमारा वक्त नहीं था, पर इस का ये मतलब नहीं की वो इश्क नहीं था.’’

5. ना चाहते हुए भी आप दोनों को एकदूसरे से दूर जाना पड़ रहा हो तो फिल्म ‘हमारी अधूरी कहानी’ का यह डायलौग कह कर बताएं कि वह आप के लिए कितनी खास है और आप की लाइफ में कितनी अहमियत रखती है. ‘‘तुम भी मुझ से प्यार करती हो बहुत प्यार, लेकिन कहोगी नहीं. तड़पोगी मेरे बगैर लेकिन जताओगी नहीं. मेरे पास आना चाहती हो, सीने से लग के रोना चाहती हो, दिल में रहना चाहती हो, लेकिन ऐसा करोगी नहीं. लेकिन मैं तुम्हारी तरह नहीं हूं. मैं तो रह ही नहीं सकता ये कहे बिना कि मुझे तुम से इश्क है.’’ यकीन मानिए आप दोनों को हिम्मत मिलेगी, अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचाने की.

6. आप जिस लड़की से प्यार करते हैं, वह हर बार आप का प्रपोजल ठुकरा रही है और आप फिर से उसे प्रपोज करना चाहते हैं तो इस बार अपने प्रपोज करने के स्टाइल में थोड़ा चेंज लाइए, उसे फिल्म ओम शांति ओम का यह डायलौग कह कर इंप्रैस करने की कोशिश करिए. ‘‘अगर किसी चीज को सच्चे दिल से चाहो, तो पूरी कायनात उसे तुम से मिलवाने की कोशिश में लग जाती है.’’ और मैं तुम्हें सच्चे दिल से चाहता हूं, मुझे पूरा यकीन है कि तुम मेरे प्यार को जरूर समझोगी.

7. कोई आप से प्यार करता है, आप को खुश रखता है, आप की केयर करता है, जाने अनजाने में आप से अपनी दिल की बात भी कह चुका है, लेकिन आप आज भी अपने अतीत को भुला नहीं पाईं हैं और आगे बढ़ने में आप को डर लग रहा है तो अतीत को भूल जाइए और अपने आज को ‘आशिकी-2’ फिल्म के इस डायलौग से खूबसूरत बनाइए, ‘‘ये जिंदगी चल तो रही थी, पर तेरे आने से मैं ने जीना शुरू किया.’’

8. ऐसा नहीं है कि वैलेंटाइन पर सिर्फ युवा ही अपने प्यार का इजहार कर सकते हैं, यह प्यार का दिन है, इस दिन हर कोई अपने दिल की बात बता सकता है. भले ही आप की शादी को कई साल हो गए हों, लेकिन इस दिन प्यार के तीन शब्द आप के रिश्ते में फिर से वैसी मिठास घोल देते हैं जैसा पहले हुआ करता था. इस दिन बागबान फिल्म का ‘‘प्यार ही तो वह जादू है, जो उम्र भर जवां बनाए रखता है,’’ यह डायलौग अपनी पत्नी से कह कर उन्हें जरूर बताएं कि वह आप के लिए कितनी खास है.

9. हम जिस से प्यार करते हैं, हम झगड़ते भी उसी से हैं. अगर आप ने किसी बात पर अपने पार्टनर को दुख पहुंचाया है तो इस दिन फिल्म मोहब्बतें का यह डायलौग कह कर उन्हें मनाएं ‘‘मोहब्बत बहुत खूबसूरत होती है तो क्या हुआ अगर वह अपने साथ थोड़ा दर्द लाती है.’’

10. आप जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं फोन पर बातें कर के एकदूसरे को जाननेसमझने, की कोशिश कर रहे हैं तो आप के लिए ‘विवाह’ फिल्म के इस डायलौग से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता. ‘‘ये जो सगाई और शादी के बीच का वक्त होता है ना बहुत ही अद्भुत होता

फरवरी के दौरान होने वाले खेती के खास काम

फरवरी में सर्दी के तेवर ढीले पड़ने से पिछले महीनों से ठंडाए किसान काफी राहत और सुकून महसूस करते हैं. फरवरी के मध्यम मौसम में किसानों को हर घड़ी बीमार पड़ जाने का खौफ नहीं रहता और वे खुल कर काम करने की हालत में रहते हैं. जनवरी में तो किसानों का ज्यादा वक्त आग तापते ही बीतता है. कंबल पर कंबल लादने के बाद भी बदन सर्दी से सुन्न बना रहता है, मगर फरवरी की फिजा और आबोहवा तनबदन में चुस्तीफुरती भरने वाली होती है. काम चाहे गन्ने की बोआई का हो या तेजी से तैयार हो रही गेहूं की फसल की देखभाल का, किसान पूरी शिद्दत से जुट जाते हैं. फरवरी में सुस्ती एकबारगी नौदोग्यारह हो चुकी होती है और खेतों में चहलपहल बढ़ जाती है.

आइए लेते हैं एक जायजा, फरवरी के दौरान खेतीजगत में होने वाले खास कामों का :

* शुरुआत मिठास से करें, तो 15 फरवरी के बाद गन्ने की बोआई का सिलसिला शुरू किया जा सकता है. बोआई के लिए गन्ने की ज्यादा पैदावार देने वाली किस्मों का चुनाव करना चाहिए. किस्मों के चयन में अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से मदद ली जा सकती है.

* गन्ने का जो बीज इस्तेमाल करें वह पक्के तौर पर बीमारी रहित होना चाहिए. इस के बावजूद बोआई से पहले बीजों को अच्छे किस्म के फफूंदीनाशक से उपचारित कर लेना चाहिए. बोआई के लिए 3 पोरी व 3 आंख वाले गन्ने के स्वस्थ टुकड़े बेहतर होते हैं.

* गन्ने के जिन खेतों में रटून यानी पेड़ी की फसल रखनी हो, तो नौलख फसल यानी पौधा फसल की कटाई खेत की सतह से बिलकुल सटाते हुए बढि़या धारदार गंड़ासे से करें.

* सही समय से बोई गई गेहूं की फसल में फरवरी में फूल लगने लगते हैं. इस दौरान खेत की सिंचाई हर हालत में कर देना जरूरी है. सिंचाई करते वक्त इस बात का खयाल रखें कि ज्यादा तेज हवाएं न चल रही हों. हवा चल रही हो तो उस के थमने का इंतजार करें और मौसम ठीक होने पर ही खेत की सिंचाई करें. हवा के फर्राटे के बीच सिंचाई करने से पौधों के उखड़ने का पूरा खतरा रहता है.

* इस बीच चना, मटर व मसूर के खेतों का मुआयना कर लेना चाहिए. अगर फसल पर फलीछेदक कीट का हमला नजर आए, तो बगैर चूके मोनोक्रोटोफास दवा का इस्तेमाल करें.

* चूर्णी फफूंदी नामक बीमारी मटर की फसल को काफी नुकसान पहुंचाती है. इस का हमला होने पर बचाव के लिए कैराथेन दवा के 0.06 फीसदी घोल का छिड़काव करें. कैराथेन काफी कारगर दवा है, लिहाजा इस के इस्तेमाल के बाद फसल उम्दा होगी.

* साल का यह दूसरा महीना लोबिया, राजमा व भिंडी जैसी फसलों की बोआई के लिए मुफीद होता है. अगर इन चीजों की खेती का इरादा हो, तो इन की बोआई निबटा लेनी चाहिए.

* मध्य फरवरी यानी 15 फरवरी के बाद तेल की फसल सूरजमुखी की बोआई करना मुनासिब रहता है. अगर यह फसल लगानी हो तो 15 से 29 फरवरी के बीच इस की बोआई कर देनी चाहिए. बोआई के लिए अपने इलाके के मुताबिक किस्मों का चयन करें. इस के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक से भी बात कर सकते हैं. हां, सूरजमुखी के बीजों को बोने से पहले कार्बंडाजिम या थीरम से उपचारित करना न भूलें.

* यदि अभी तक टमाटर की गरमी वाली फसल की रोपाई का काम बाकी पड़ा है, तो उसे फटाफट निबटाएं.

* टमाटर के पौधों की रोपाई 45×60 सेंटीमीटर के फासले पर करें. रोपाई धूप ढलने के बाद यानी शाम के वक्त करें. रोपाई के बाद बगैर चूके हलकी सिंचाई करें.

* जनवरी के दौरान लगाए गए टमाटर के पौधों को नाइट्रोजन मुहैया कराने के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया डालें. ऐसा करने से फसल उम्दा होगी.

* यह महीना बैगन की रोपाई के लिहाज से भी मुफीद होता है, लिहाजा उम्दा नस्ल का चयन कर के बैगन की रोपाई निबटा लें.

* बैगन की उम्दा फसल के लिए रोपाई से पहले खेत की कई बार जुताई कर के उस में खूब सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद भरपूर मात्रा में मिलाएं. इस के अलावा खेत में 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस व 80 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से डाल कर अच्छी तरह खेत की मिट्टी में मिला दें.

* बैगन के पौधों की रोपाई भी सूरज ढलने के बाद यानी शाम के वक्त ही करें, क्योंकि सुबह या दोपहर में रोपाई करने से धूप की वजह से पौधों के मुरझाने का डर रहता है. रोपाई करने के फौरन बाद पौधों की हलकी सिंचाई याद से करें.

* फरवरी में ही मैंथा की बोआई भी निबटा लेनी चाहिए. इस के लिए 400-500 किलोग्राम जड़ों का प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें. बोआई से पहले 30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 75 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश का प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें.

* मैंथा की बोआई करने से पहले खेत के तमाम खरपतवार निकालना न भूलें, क्योंकि ये फसल की बढ़वार में रुकावट पैदा करते हैं. बोआई के बाद खेत की हलकी सिंचाई करना न भूलें.

* अपने आम के बगीचे का मुआयना करें. इन दिनों आम में चूर्णिल आसिता बीमारी का काफी अंदेशा रहता है, लिहाजा कैराथेन दवा का छिड़काव करें. श्यामवर्ण और छोटी पत्ती वाले रोग की रोकथाम के लिए ब्लाइटाक्स 50 और जिंक सल्फेट का छिड़काव करें. ऐसा करने से आम के पेड़ महफूज रहेंगे.

* बीमारियों के साथसाथ इन दिनों आम के पेड़ों को कुछ कीटों का भी खतरा रहता है. अगर कीटों का हमला नजर आए तो कृषि विज्ञान केंद्र के फल वैज्ञानिक की राय ले कर कीटों का निबटारा करें.

* आम के साथसाथ सदाबहार फल केले के बागों का खयाल रखना भी लाजिम है. बाग में फैली तमाम सूखी पत्तियां बटोर कर खाद के गड्ढे में डाल दें. बाग की बाकायदा सफाई के बाद 15 दिनों के फासले पर 2 दफे सिंचाई भी करें.

* केले की उम्दा फसल हासिल करने के लिए बाग की निराईगुड़ाई करने के बाद पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन व पोटाश वाली खादें डालें.

* केले के पेड़ों पर अगर किसी बीमारी या कीटों का हमला नजर आए तो तुरंत उस का इलाज फल वैज्ञानिक की राय के मुताबिक करें.

* इस महीने नीबू नस्ल के पौधों के लिए बोआई करना मुनासिब रहता है, लिहाजा नीबू, संतरा व मौसमी वगैरह के बीजों की बोआई पौधशाल में की जा सकती है. पौधशाला में कली बांधने का काम भी निबटाएं.

* पहले से लगे नीबू, संतरा व मौसमी वगैरह के पेड़ों में नाइट्रोजन व पोटाश वाली खादें माहिरों से राय ले कर डालें.

* आड़ू के पेड़ों का मुआयना करें. उन में पर्णकुंचन माहू कीट लगने पर पत्तियां सिकुड़ जाती हैं. अगर कीट का असर हो तो बचाव के लिए मेटासिस्टाक्स दवा का छिड़काव करें. एक बार का छिड़काव पूरी तरह कारगर न हो, तो 2 हफ्ते बाद दोबारा छिड़काव करें.

* आड़ू के पेड़ पूरी तरह स्वस्थ भी नजर आएं, तो भी उन में निराईगुड़ाई कर के जरूरी खादें डालना न भूलें.

* इस कम ठंडे महीने में अंगूर की कलमें लगाना सही रहता है. कलमों की रोपाई के लिए उम्दा नस्ल की कलमों का बंदोबस्त करें.

* अंगूर की कलमों की रोपाई के साथसाथ पहले से लगी बेलों की देखभाल भी जरूरी है. अकसर इस दौरान अंगूर की बेलों पर श्यामवर्ण रोग लग जाता है. ऐसी हालत में इलाज के लिए ब्लाइटाक्स 50 ईसी दवा का इस्तेमाल करें. इस कारगर दवा के छिड़काव से श्यामवर्ण बीमारी ठीक हो जाती है.

* आमतौर पर फरवरी तक ठंडक का मौसम काफी हद तक खत्म सा हो जाता है, लिहाजा कई पशुपालक लापरवाह हो जाते हैं और अपने मवेशियों को सर्दी से बचाने के उपाय बंद कर देते हैं. मगर ऐसा करना अकसर काफी घातक साबित होता है, लिहाजा सावधान रहें.

* हकीकत तो यह है कि जाती हुई सर्दी इनसानों के साथसाथ जानवरों को भी बीमार करने वाली होती है, इसलिए सर्दी से बचाव के उपाय एकदम से बंद न कर के धीरेधीरे बंद करें. बेहतर तो यह होगा कि मार्च की शुरुआत तक अपने जानवरों को गरम कपड़े ओढ़ा कर रखें.

* अपने मुरगामुरगियों के मामले में भी चौकन्ने रहें ताकि वे बीमार न होने पाएं.

* गाय या भैंस हीट में आए तो उसे पशु चिकित्सक के जरीए गाभिन कराने में लापरवाही न बरतें.

ठंडा तरबूज करेगा जेब गरम

गरमियों के तपिश भरे दिनों में अगर कुदरती तौर पर ठंडक पहुंचाने वाली चीज की बात की जाए तो तरबूज पहले नंबर पर आएगा.

इस की खेती ज्यादातर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आसाम, तामिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, बिहार व पश्चिम बंगाल राज्यों में की जाती है. अगर उन्नत तरीके से इस की थोड़ी अगेती खेती कर ली जाए तो मार्केट में पहले पेश हो कर यह ठंडा फल किसानों की जेब भी खूब गरम कर सकता है.

बेबी वाटरमैलन की बढ़ रही है मांग : इस बारे में कृषि विज्ञान केंद्र, दरियापुर, रायबरेली (उत्तर प्रदेश) के उद्यान विशेषज्ञ डा. एसबी सिंह कहते हैं कि किसानों को अच्छा मुनाफा लेने के लिए बोआई से पहले यह तय कर लेना चाहिए कि तरबूज की बिक्री आसपास के बाजारों में करनी है या फिर उसे बड़े शहरों में भेजना है. आजकल महानगरों में छोटे परिवारों की संख्या ज्यादा होने से छोटे आकार के तरबूजों (2-3 किलोग्राम वजन वाले) की मांग ज्यादा बनी रहती है. ऐसे तरबूजों को बेबी वाटरमैलन (छोटा तरबूज) के नाम से जाना जाता है. बेबी वाटरमैलन को फ्रिज में भी आसानी से रख सकते हैं. वैसे देहातों में आज भी बड़े आकार के तरबूजों की ही मांग ज्यादा है.

जमीन : तरबूज की फसल के लिए बलुई दोमट जमीन बेहतर होती है. इसी वजह से नदियों के किनारे की दियारा जमीन इस के लिए सब से अच्छी मानी जाती है. जमीन में जलनिकासी और सिंचाई का अच्छा इंतजाम होना चाहिए. जलभराव से इस फसल को काफी नुकसान पहुंचता है. परीक्षणों के मुताबिक पाया गया है कि दोमट मिट्टी जिस का पीएच मान 6.5 से 7 के बीच हो तरबूज की खेती के लिए ज्यादा बढि़या होती है.

बोआई का समय : तरबूज के बीजों के जमाव के लिए 21 डिगरी सेंटीग्रेड से नीचे का तापमान सही नहीं होता है. यह पाले को बर्दाश्त नहीं कर पाता है. इस की बढ़वार के लिए ज्यादा तापमान की जरूरत होती है. इसी वजह से इस की बोआई देश में अलगअलग समय पर की जाती है. उत्तरी भारत के मैदानी भागों में तरबूज की बोआई जनवरी के शुरुआती दिनों से ले कर मार्च तक की जाती है. उत्तरीपूर्वी और पश्चिमी भारत में इस की बोआई नवंबर से जनवरी तक की जाती है. दक्षिणी भारत में इस की बोआई दिसंबर से जनवरी महीनों के दौरान की जाती है.

खेत की तैयारी : सब से पहले खेत की गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए. उस के बाद 3-4 जुताइयां कल्टीवेटर या देशी हल से कर के मिट्टी को खूब भुरभुरी बना लेना चाहिए. नमी की कमी होने पर पलेवा जरूर करना चाहिए.

प्रजातियां : बेहतर होगा कि आप इलाकाई विशेषज्ञ से राय ले कर अपने इलाके के लिहाज से मुनासिब प्रजातियां ही बोएं. आप की सुविधा के लिए यहां तरबूज की तमाम प्रजातियों की एक सूची दी जा रही है.

बीज दर : बोआई करने से पहले बढि़या अंकुरण के लिए बीजों को पानी में भिगो दें. इस के बाद किसी फफूंदीनाशक दवा जैसे कार्बेंडाजिम, मैंकोजेब या थीरम से बीजशोधन करें. आमतौर पर छोटे बीज वाली किस्मों के लिए प्रति हेक्टेयर 2-3 किलोग्राम बीज पर्याप्त होते हैं. बड़े बीजों वाली किस्मों के लिए प्रति हेक्टेयर 5 किलोग्राम बीज लगते हैं.

बोआई की विधि : तरबूज की फसल पानी नहीं बर्दाश्त कर पाती है, लिहाजा इसे थोड़ा ऊपर 1 मीटर लंबे और 1 मीटर चौड़े रिज बेड में बोना चाहिए. इस से भी अच्छा होगा कि बीजों को अलगअलग किसी बर्तन जैसे मिट्टी के प्याले वगैरह में रख कर तैयार करें, इस से पौधे ज्यादा तंदुरुस्त होंगे.

पौधों को लाइनों में ही लगाना चाहिए. लाइन से लाइन की दूरी पौधों की किस्म पर निर्भर करती है. सुगर बेबी किस्म के लिए लाइन से लाइन की दूरी 2 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी 0.6 मीटर मुनासिब होती है.

खाद व उर्वरक : मिट्टी की जांच कराए बिना खाद व उर्वरकों की मात्रा तय नहीं की जा सकती है. मोटे तौर पर 200-300 क्विंटल खूब सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में डालनी चाहिए. 100-120 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से ले कर उस की आधी मात्रा शुरू में डालनी चाहिए और बाकी आधी मात्रा बोआई के लगभग 1 महीने बाद टापड्रेसिंग के रूप में देनी चाहिए. अगर बाद में नाइट्रोजन की कमी महसूस हो तो 2 फीसदी यूरिया के घोल का पर्णीय छिड़काव किया जा सकता है. बोआई के समय 50-60 किलोग्राम फास्फोरस और 50-60 किलोग्राम पोटाश भी प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेत में समान रूप से डालनी चाहिए. सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी पाए जाने पर 20-25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर के हिसाब से बोआई के समय ही प्रयोग करना चाहिए.

खरपतवार : खरपतवारों की रोकथाम के लिए बोआई के बाद व जमाव से पहले या नर्सरी में तैयार किया हुआ पौधा है, तो पौधरोपण के कुछ ही दिनों बाद पेंडीमेथलीन दवा की 3.5 लीटर मात्रा 800-1000 लीटर पानी में मिला कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए. समयसमय पर निराईगुड़ाई भी करते रहना चाहिए.

सिंचाई : सिंचाई हमेशा हलकी होनी चाहिए और पानी का ठहराव कभी नहीं होने देना चाहिए. 6-7 दिनों में सिंचाई की जरूरत पड़ती रहती है. फल पकने के समय सिंचाई रोक देनी चाहिए, क्योंकि इस अवस्था में सिंचाई करने से फलों के फटने व मिठास घटने की संभावना बढ़ जाती है. फलों की तोड़ाई करने से 1 हफ्ते पहले सिंचाई जरूर बंद कर देनी चाहिए.

कीट व रोग : कद्दू वर्गीय होने के कारण लगभग वे सारी बीमारियां और कीट इस में भी लगते हैं, जो करेला, कद्दू व लौकी वगैरह में पाए जाते हैं. फफूंदजनित बीमारियों से बचाव के लिए मैंकोजेब जैसे किसी फफूंदीनाशी और कीटों की रोकथाम के लिए किसी हलके कीटनाशी जैसे मैलाथियान वगैरह का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

भंडारण : तोड़ाई करने के बाद तरबूज के फलों का भंडारण 1 हफ्ते से ले कर 3 हफ्ते तक 2.20 डिगरी सेंटीग्रेड से 4.40 डिगरी सेंटीग्रेड तापमान और वायुनमी 80-85 फीसदी होने पर किया जा सकता है.

होमगार्ड अर्चना हत्याकांड : मांगा साथ, मिली मौत

‘तुम मेरी बात को समझने की कोशिश करो अर्चना. मैं शादीशुदा हूं. मेरे परिवार में मातापिता, पत्नी और बच्चे हैं. मैं उन को छोड़ कर तुम्हारे साथ नहीं रह सकता. तमाम तरह की दिक्कतें आएंगी,’ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की पुलिस लाइन में तैनात सिपाही प्रदीप ने अपनी प्रेमिका होमगार्ड सिपाही अर्चना रावत को समझाते हुए कहा.

‘तुम केवल अपना मतलब देख रहे हो. जब तुम ने मेरे साथ जिस्मानी संबंध बनाए थे, उस समय यह सब तुम को याद नहीं था. मुझे भी अपने घरपरिवार में जवाब देना होता है,’ परेशान अर्चना ने प्रदीप को समझाने की कोशिश की.

‘देखो, मेरे और तुम्हारे बीच जोकुछ हुआ, उस में तुम्हारी रजामंदी थी,’ प्रदीप बोला.

‘ठीक है मेरी रजामंदी थी, पर तुम ने भी तो मुझे यह नहीं बताया था कि तुम शादीशुदा और बालबच्चेदार हो. मैं ने तो तुम से दोस्ती के बाद शादी का

सपना देखा था,’ रोंआसी हो कर अर्चना ने कहा.

‘अर्चना, तुम भी शादीशुदा थीं. तुम अपने पति को छोड़ चुकी थीं. तब तुम मेरे साथ आईं. मैं ने अपने परिवार को छोड़ा नहीं था. देर से ही सही, पर यह बात मैं ने तुम को बताई तो थी,’ प्रदीप ने कहा.

‘देखो, कब क्या हुआ क्या नहीं, यह सोचने का समय चला गया है. अब फैसला तुम को करना है कि तुम्हें किस के साथ रहना है. अगर मेरा साथ छोड़ने की सोच रहे हो, तो यह समझ लेना कि मैं तुम को भी सुकून से नहीं रहने दूंगी.’’  अर्चना ने धमकी दी.

‘अभी भी तुम गुस्से में हो. हम आराम से बातें करेंगे. अभी मैं चलता हूं,’ कह कर सिपाही प्रदीप अर्चना को छोड़ कर चला आया.

अपने कमरे पर आ कर प्रदीप सोचने लगा कि इस हालात से खुद को कैसे निकाल सके.

प्रदीप उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के गांव दुजाना का रहने वाला था. साल 2012 में उस की नौकरी उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में लगी थी. लखनऊ जिले के गाजीपुर थाने में उस की पहली पोस्टिंग हुई थी. राजधानी लखनऊ में जब मौडर्न पुलिस कंट्रोल रूम खुला, तो प्रदीप की ड्यूटी वहां  लग गई. वहीं पर उस की मुलाकात अर्चना रावत से हुई थी. अर्चना लखनऊ के ही विभूति खंड इलाके के गांव पासी विजयीपुर की रहने वाली थी. वह होमगार्ड में सिपाही थी.

अर्चना अपने परिवार में भाई कमलेश, हरीश और सुरेश के साथ रहती थी. वह अपनी भाभी रानी को बहुत मानती थी.

पुलिस कंट्रोल रूम के बाद अर्चना की तैनाती विभूति खंड थाने में हुई थी. उस ने थाने पर तैनाती नहीं ली, जिस से उस की ड्यूटी लखनऊ पुलिस लाइन में लगा दी गई थी. देखने में खूबसूरत 30 साल की अर्चना बातें भी बहुत प्यार भरी करती थी. मौडर्न पुलिस कंट्रोल रूम में आने वाली शिकायतों को वह बहुत अच्छी तरह से संभालती थी. उस को देख कर कोई कह नहीं सकता था कि वह होमगार्ड की सिपाही है. अर्चना की शादी हो चुकी थी. पति के साथ उस का संबंध ठीक नहीं चला, जिस के चलते उन में अलगाव हो गया. मौडर्न पुलिस कंट्रोल रूम में काम करतेकरते प्रदीप और अर्चना के बीच दोस्ती हो गई थी. वह कई बार अर्चना के घर चला जाता था और वहां आराम से रहता व खातापीता था. नतीजतन, उन की दोस्ती करीबी रिश्ते में बदल गई. अर्चना प्रदीप को अपने जीवनसाथी के रूप में देखने लगी थी. लेकिन प्रदीप ने कभी यह नहीं बताया कि वह शादीशुदा है.

रिश्तों में करीबी आने के बाद जब अर्चना ने एक दिन प्रदीप से अपनी शादी की बात चलाई, तो प्रदीप का सामना हकीकत से हुआ. पर उस ने अर्चना को समझा दिया कि वह शादीशुदा है. यह बात पता चलने के बाद अर्चना और प्रदीप के संबंधों में खिंचाव आना शुरू हो गया था. अपने कमरे पर परेशान प्रदीप को कोई रास्ता नहीं दिख रहा था. वह अर्चना के स्वभाव को जानता था. उसे यह भी पता था कि अर्चना उस को बहुत चाहती है और उस से दूर नहीं जा सकती. इसी बीच प्रदीप के 5 साल के बेटे की तबीयत खराब हो गई. उस ने यह बात अर्चना को बताई और घर जाने के लिए कहा, तो अर्चना को लगा कि प्रदीप बहाना बना कर अपने घर जाना चाहता है.

अर्चना ने प्रदीप को धमकी दी कि अगर वह अपने घर गया, तो वह उस के खिलाफ शोषण का मुकदमा लिखा देगी.

बदनामी से बचने के लिए प्रदीप अपने घर नहीं गया. बीमारी बढ़ने से उस के 5 साल के बेटे की मौत हो गई.

इस से प्रदीप परेशान हो गया था. वह किसी भी तरह से अर्चना से पीछा छुड़ाने की कोशिश करने लगा था.

अर्चना ने प्रदीप से उस की पत्नी और घर वालों का मोबाइल नंबर ले लिया और उन को भी फोन कर के धमकी देने लगी. अब वह पूरी तरह से प्रदीप को परेशान करने पर उतर आई थी.

कोई रास्ता न देख प्रदीप ने अपना तबादला लखनऊ से मुरादाबाद करा लिया. वहां उस की तैनाती पुलिस लाइन में हो गई. प्रदीप के लखनऊ से तबादला होने के बाद अर्चना ने 15 दिसंबर, 2015 को अपने घर वालों को बताया कि वह एक हत्याकांड की जांच के सिलसिले में पुलिस टीम के साथ लुधियाना जा रही है.

दरअसल, लखनऊ में बने एक फाइवस्टार होटल के मैनेजर नमन की हत्या हो गई थी. पुलिस हत्या के खुलासे के लिए हाथपैर मार रही थी. इस हाईप्रोफाइल केस के बारे में लखनऊ में हर किसी को पता था. अर्चना के घर वालों को भी इस बात पर यकीन हो गया था कि वह लुधियाना जा रही है. 19 दिसंबर, 2015 को हापुड़ के सिंभावली थाना क्षेत्र में नया बांस गांव के जंगल में एक लाश मिली. लाश को देख कर उस को पहचान पाना मुश्किल काम था. हापुड़ पुलिस को लाश के पास से एक एटीएम कार्ड मिला था. इस कार्ड की मदद से यह पता चल गया था कि मरने वाली अर्चना रावत है.

यह बात जब अर्चना के घर वालों को पता चली, तो उन का कहना था कि वह नमन हत्याकांड की जांच करने लुधियाना गई थी, तो हापुड़ कैसे पहुंच गई?इस गुत्थी को सुलझाने में लखनऊ और हापुड़ पुलिस को एक हफ्ते का समय लग गया. नमन हत्याकांड से जुड़ा नाम होने के नाते मामला सनसनीखेज हो चला था. 23 दिसंबर, 2015 को अर्चना हत्याकांड में पुलिस महकमे के ही सिपाही प्रदीप  को पकड़ कर पूछताछ की गई, तो सच सामने आया. 

मुरादाबाद तबादला हो जाने के बाद भी अर्चना उस से बातचीत करती थी. वह दबाव बना रही थी कि प्रदीप उसे अपने मातापिता से मिलवाए.

15 दिसंबर, 2015 को अर्चना अपने घर से लुधियाना जाने का बहाना बना कर निकली. उस ने अपनी स्कूटी चारबाग रेलवे स्टेशन की पार्किंग में खड़ी की और दिल्ली जाने वाली ट्रेन पकड़ कर 16 दिसंबर, 2015 की सुबह मुरादाबाद पहुंच गई. प्रदीप ने अर्चना को मुरादाबाद में रेलवे स्टेशन के पास बने एक होटल में ठहराया था. अर्चना के साथ प्रदीप भी होटल में ही रुका था. रातभर वह अर्चना को समझाता रहा कि वह मातापिता से मिलने की बात जाने दे, पर अर्चना हर हाल में प्रदीप के गांव जाना चाहती थी. अर्चना चाहती थी कि प्रदीप के मातापिता भी उस का साथ देंगे, तो प्रदीप अपनी पत्नी और बच्चों को छोड़ कर उस के साथ रहने लगेगा.

17 दिसंबर, 2015 को ड्यूटी के बाद प्रदीप अर्चना को अपनी मोटरसाइकिल से ले कर गांव जाने लगा. रास्ते में भी प्रदीप उसे समझाने की कोशिश कर रहा था, पर अर्चना इस के लिए तैयार नहीं थी. रास्ते में ही प्रदीप ने अपनी मोटरसाइकिल हाईवे से नहर की पटरी पर मोड़ दी और सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव नया बांस के पास गन्ने के एक खेत के पास अर्चना को मोटरसाइकिल से नीचे उतरने को कहा और उसे थप्पड़ मारा. अर्चना ने जब विरोध किया, तो प्रदीप ने पास ही खेत में पडे़ डंडे से पीटपीट कर उसे मार डाला. इस के बाद उस ने डंडा दूर फेंक दिया और अर्चना की लाश को पास के एक कुएं में डाल दिया.

इस के बाद प्रदीप मुरादाबाद लौट आया. वह अपने साथ अर्चना का मोबाइल फोन और पर्स भी उठा लाया था. मुरादाबाद आ कर प्रदीप ने मोबाइल फोन बंद कर के बैग में रखा और उस बैग को लखनऊ जाने वाली ट्रेन में रख दिया. प्रदीप की योजना थी कि अर्चना के घर न पहुंचने पर जब गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी, तो पुलिस उस के मोबाइल नंबरों पर फोन करेगी. उन नंबरों को सर्विलांस पर लगाएगी. बैग में रखा मोबाइल जिस किसी को मिलेगा, वह उसे इस्तेमाल करेगा. पुलिस उस से ही अर्चना के संबंध में पूछताछ करेगी.

लेकिन प्रदीप से एक गलती हो गई कि उस ने अर्चना का जैकेट मौके पर ही छोड़ दिया था. जैकेट की जेब से पुलिस को एटीएम कार्ड मिल गया, जिस के बाद पुलिस अर्चना की लाश की शिनाख्त करने में कामयाब हो गई.

मुरादाबाद जिले के सिंभावली थाने के एसओ दीक्षित कुमार त्यागी ने बताया कि पुलिस के सामने प्रदीप ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. उसे हत्या के आरोप में पकड़ कर अदालत के सामने पेश किया जाएगा.

बाबा का सच

मेरा तबादला उज्जैन से इंदौर के एक थाने में हो गया था. मैं ने बोरियाबिस्तर बांधा और रेलवे स्टेशन आया. रेल चलने के साथ ही उज्जैन के थाने में रहते हुए वहां गुजारे दिनों की यादें ताजा होने लगीं. हुआ यह था कि एक दिन एक मुखबिर थाने में आ कर बोला, ‘‘सर, एक बाबा पास के ही एक गांव खाचरोंद में एक विधवा के घर ठहरा हुआ है. मुझे उस का बरताव कुछ गलत लग रहा है.’’

उस की बात सुन कर मैं सोच में पड़ गया. फिर मेरे पास उस बाबा के खिलाफ कोई ठोस सुबूत भी नहीं था. लेकिन मुखबिर से मिली सूचना को हलके में लेना भी गलत था, सो उसी रात  मैं सादा कपड़ों में उस विधवा के घर जा पहुंचा. उस औरत ने पूछा, ‘‘आप किस से मिलना चाहते हैं?’’

मैं ने कहा, ‘‘दीदी, मैं ने सुना है कि आप के यहां कोई चमत्कारी बाबा ठहरे हैं, इसीलिए मैं उन से मिलने आया हूं.’’

वह औरत बोली, ‘‘भैया, अभी तो बाबा अपने किसी भक्त के घर गए हैं.’’

‘‘अगर आप को कोई एतराज न हो, तो क्या मैं आप से उन बाबा के बारे में कुछ बातें जान सकता हूं? दरअसल, मेरी एक बेटी है, जो बचपन से ही बीमार रहती है. मैं उस का इलाज इन बाबा से कराना चाहता हूं.’’

वह औरत बोली, ‘‘भैया, जितनी जानकारी मेरे पास है, वह मैं आप को बता सकती हूं.

‘‘एक दिन ये बाबा अपने 2 शिष्यों के साथ रात 8 बजे मेरे घर आए थे.

‘‘बाबा बोले थे, ‘तुम्हारे पति के गुजरने के बाद से तुम तंगहाल जिंदगी जी रही हो, जबकि उस के दादाजी परिवार के लिए लाखों रुपयों का सोना इस घर में दबा कर गए हैं.

‘‘‘ऐसा कर कि तेरे बीच वाले कमरे की पूर्व दिशा वाला कोना थोड़ा खोद और फिर देख चमत्कार.’

‘‘मैं अपने बीच वाले कमरे में गई, तभी उन के दोनों शिष्य भी मेरे पीछेपीछे आ गए और बोले, ‘बहन, यह है तुम्हारे कमरे की पूर्व दिशा का कोना.’

‘‘मैं ने कोने को थोड़ा उकेरा, करीब 7-8 इंच कुरेदने के बाद मेरे हाथ में एक सिक्का लगा, जो एकदम पीला था.

‘‘उस सिक्के को अपनी हथेली पर रख कर बाबा बोले, ‘ऐसे हजारों सिक्के इस कमरे में दबे हैं. अगर तू चाहे, तो हम उन्हें निकाल कर तुझे दे सकते हैं.’

‘‘मैं ने बाबा से पूछा, ‘बाबा, ये दबे हुए सिक्के बाहर निकालने के लिए क्या करना होगा?’

‘‘वे बोले, ‘तुझे कुछ नहीं करना है. जो कुछ करेंगे, हम ही करेंगे, लेकिन तुम्हारे मकान के बीच के कमरे की खुदाई करनी होगी, वह भी रात में… चुपचाप… धीरेधीरे, क्योंकि अगर सरकार को यह मालूम पड़ गया कि तुम्हारे मकान में सोने के सिक्के गड़े हुए हैं, तो वह उस पर अपना हक जमा लेगी और तुम्हें उस में से कुछ नहीं मिलेगा.’

‘‘आगे वे बोले, ‘देखो, रात में चुपचाप खुदाई के लिए मजदूर लाने होंगे, वह भी किसी दूसरे गांव से, ताकि गांव वालों को कुछ पता न चल सके. इस खुदाई के काम में पैसा तो खर्च होगा ही. तुम्हारे पति ने तुम्हारे नाम पर डाकखाने में जो रुपया जमा कर रखा है, तुम उसे निकाल लो.’

‘‘इस के बाद बाबा ने कहा, ‘हम महीने भर बाद फिर से इस गांव में आएंगे, तब तक तुम पैसों का इंतजाम कर के रखना.’

‘‘डाकखाने में रखे 4 लाख रुपयों में से अब तक मैं बाबा को 2 लाख रुपए दे चुकी हूं.’’

‘‘दीदी, क्या मैं आप के बीच वाले कमरे को देख सकता हूं?’’

वह औरत बोली, ‘‘भैया, वैसे तो बाबा ने मना किया है, लेकिन इस समय वे यहां नहीं हैं, इसलिए आप देख लीजिए.’’

मैं फौरन उठा और बीच के कमरे में जा पहुंचा. मैं ने देखा कि सारा कमरा 2-2 फुट खुदा हुआ था और उस की मिट्टी एक कोने में पड़ी हुई थी. मुझे लगा कि अगर अब कानूनी कार्यवाही करने में देर हुई, तो इस औरत के पास बचे 2 लाख रुपए भी वह बाबा ले जाएगा.

मैं ने उस औरत से कहा, ‘‘दीदी, मैं इस इलाके का थानेदार हूं और मुझे उस पाखंडी बाबा के बारे में जानकारी मिली थी, इसलिए मैं यहां आया हूं.

‘‘आप मेरे साथ थाने चलिए और उस बाबा के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाइए, ताकि मैं उसे गिरफ्तार कर सकूं.’’

उस औरत को भी अपने ठगे जाने का एहसास हो गया था, इसलिए वह मेरे साथ थाने आई और उस के खिलाफ रिपोर्ट लिखा दी. चूंकि बाबा घाघ था, इसलिए उस ने उस औरत के घर के नुक्कड़ पर ही अपने एक शिष्य को नजर रखने के लिए  बैठा दिया था. इसलिए उसे यह पता चलते ही कि मैं उस औरत को ले कर उस के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने थाने ले गया हूं. वह बाबा उस गांव को छोड़ कर भाग गया. इस के बाद मैं ने आसपास के गांवों में मुखबिरों से जानकारी भी निकलवाई, लेकिन उस का पता नहीं चल सका.

मैं यादों की बहती नदी से बाहर आया, तब तक गाड़ी इंदौर रेलवे स्टेशन पर आ कर ठहर गई थी. जब मैं ने इंदौर का थाना जौइन किया, तब एक दिन एक फाइल पर मेरी नजर रुक गई. उसे पढ़ कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए. रिपोर्ट में लिखा था, ‘गडे़ धन के लालच में एक मां ने अपने 7 साला बेटे का खून इंजैक्शन से निकाला.’ उस मां के खिलाफ लड़के के दादाजी और महल्ले वालों ने यह रिपोर्ट लिखाई थी. यह पढ़ कर मैं सोच में पड़ गया कि कहीं यह वही खाचरोंद गांव वाला बाबा ही तो नहीं है.

मैं ने सबइंस्पैक्टर मोहन से कहा, ‘‘मैं इस मामले में उस लड़के के दादाजी से बात करना चाहता हूं. उन्हें थाने आने के लिए कहिए.’’

रात के तकरीबन 10 बजे एक बुजुर्ग  मेरे क्वार्टर पर आए. मैं ने उन से उन का परिचय पूछा. तब वे बोले, ‘‘मैं ही उस लड़के का दादाजी हूं.’’

‘‘दादाजी, मैं इस केस को जानना चाहता हूं,’’ मैं ने पूछा.

वे बताने लगे, ‘‘सर, घर में गड़े धन के लालच में बहू ने अपने 7 साल के बेटे की जान की परवाह किए बगैर इंजैक्शन से उस का खून निकाला और तांत्रिक बाबा को पूजा के लिए सौंप दिया.’’

‘‘दादाजी, आप मुझे उस बाबा के बारे में कुछ बताइए?’’ मैं ने पूछा.

‘‘सर, यह बात तब शुरू हुई, जब कुछ दिनों के लिए मैं अपने गांव गया था. फसल कटने वाली थी, इसलिए मेरा गांव जाना जरूरी था. उन्हीं दिनों यह तांत्रिक बाबा हमारे घर आया और बहू से बोला कि तुम्हारे घर में गड़ा हुआ धन है. इसे निकालने से पहले थोड़ी पूजापाठ करानी पड़ेगी.’’

‘‘मेरी बहू उस के कहने में आ गई. फिर उस तांत्रिक बाबा ने रात को अपना काम करना शुरू किया. पहले दिन उस ने नीबू, अंडा, कलेजी और सिंदूर का धुआं कर उसे पूरे घर में घुमाया, फिर उस ने बीच के कमरे में अपना त्रिशूल एक जगह जमीन पर गाड़ा और कहा कि यहां खोदने पर गड़ा धन मिलेगा.

‘‘उस के शिष्यों ने एक जगह 2 फुट का गड्ढा खोदा. चूंकि रात के 12 बज चुके थे, इसलिए उन्होंने यह कहते हुए काम रोक दिया कि अब खुदाई कल करेंगे.

‘‘इसी बीच मेरी 5 साल की पोती उस कमरे में आ गई. उसे देख कर तांत्रिक गुस्से में लालपीला हो गया और बोला कि आज की पूजा का तो सत्यानाश हो गया है. यह बच्ची यहां कैसे आ गई? अब इस का कोई उपचार खोजना पड़ेगा.

‘‘अगले दिन रात के 12 बजे वह तांत्रिक अकेला ही घर आया और बहू से बोला, ‘तू गड़ा हुआ धन पाना चाहती है या नहीं?’

‘‘बहू लालची थी, इसलिए बोली, ‘हां बाबा.’

‘‘फिर बाबा तैश में आ कर बोला, ‘कल रात उस बच्ची को कमरे में नहीं आने देना चाहिए था. अब उस बच्ची को भी ‘पूजा’ में बैठा कर अकेले में तांत्रिक क्रिया करनी पड़ेगी. जाओ और उस बच्ची को ले आओ.

‘‘इस पर मेरी बहू ने कहा, ‘लेकिन बाबा, वह तो सो रही है.’

‘‘बाबा बोला, ‘ठीक है, मैं ही उसे अपनी विधि से यहां ले कर आता हूं.

‘‘अगले दिन सुबह उस बच्ची ने अपनी दादी को बताया, ‘रात को वह तांत्रिक बाबा मुझे उठा कर बीच के कमरे में ले गया और मेरे सारे कपड़े उतार कर उस ने मेरे साथ गंदा काम किया.’

‘‘जब मेरी पत्नी ने बहू से पूछा, तो वह बोली, ‘बच्ची तो नादान है. कुछ भी कहती रहती है. आप ध्यान मत दो.’

‘‘अगले दिन बाबा ने बीच का कमरा खोद दिया. लेकिन कुछ नहीं निकला. फिर वह बाबा बोला, ‘बाई, लगता है कि तुम्हारे ही पुरखे तुम्हारे वंश का खून चाहते हैं, तुम्हें अपने बेटे की ‘बलि’ देनी होगी या उस का खून निकाल कर चढ़ाना होगा.’

‘‘गड़े धन के लालच में मां ने बिना कोई परवाह किए अपने बेटे का खून ‘इंजैक्शन’ से खींचा और उस का इस्तेमाल तांत्रिक क्रिया करने के लिए बाबा को दे दिया.

‘‘यह सब देख कर मेरी पत्नी से रहा नहीं गया और उस ने फोन पर ये सब बातें मुझे बताईं. मैं तभी सारे काम छोड़ कर इंदौर आया और अपने पोते और महल्ले वालों को ले कर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई.’’

‘‘दादाजी, इस समय वह तांत्रिक बाबा कहां है?’’

‘‘सर, मेरी बहू अभी भी उस के मोहपाश में बंधी है. चूंकि उसे मालूम पड़ चुका है कि मैं ने उस के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है, इसलिए वह हमारे घर नहीं आ रहा है, लेकिन मैं उस पर नजर रखे हुए हूं.’’

सुबह एक मुखबिर आया और बोला, ‘‘सर, एक सूचना मिली है कि अपने इलाके की एक मलिन बस्ती में एक तांत्रिक आज ही आ कर ठहरा है.’’

रात के 12 बजे मैं अपने कुछ पुलिस वालों को साथ ले कर सादा कपड़ों में वहां जा पहुंचा. एक पुलिस वाले ने एक मकान से  धुआं निकलते देखा. हम ने चारों तरफ से उस मकान को घेर लिया. जब मैं ने उस मकान का दरवाजा खटखटाया, तो एक अधेड़ औरत ने दरवाजा खोला और पूछा, ‘‘क्या है? यहां पूजा हो रही है. आप जाइए.’’

इतना सुनते ही मैं ने दरवाजे को जोर से धक्का दिया और बीच के कमरे में पहुंचा. मुझे देखते ही वह तांत्रिक बाबा भागने की कोशिश करने लगा, तभी मेरे साथ आए पुलिस वालों ने उसे घेर लिया और गाड़ी में डाल कर थाने ले आए.

थाने में थर्ड डिगरी देने पर उस ने अपने सारे अपराध कबूल कर लिए, जिस में खाचरोंद गांव में की गई ठगी भी शामिल थी. मैं थाने में बैठा सोच रहा था कि अखबारों में गड़े धन निकालने के बारे में ऐसे ठग बाबाओं की खबरें अकसर छपती ही रहती हैं, फिर भी न जाने क्यों लोग ऐसे बाबाओं के बहकावे में आ कर अपनी मेहनत की कमाई को उन के हाथों सौंप कर ठगे जाते हैं?

इस वैलेंटाइन दिल से दें दिल का तोहफा

आजकल महिलाएं डायमंड ज्वैलरी में खासा इंटरैस्ट ले रही हैं. लें भी क्यों न? डायमंड हर अच्छे ओकेजन की खुशी को दोगुना जो कर देता है, खासतौर पर प्यार के दिन यानी वैलेंटाइन डे पर डायमंड ज्वैलरी एक ऐसा तोहफा है जो आपके दिल की बात को उनके दिल तक पहुंचा देता है.

दरअसल, जब भी वैलेंटाइन डे आता है तो हम इस सोच में डूब जाते हैं कि अपने नजदीकी और खास लोगों को ऐसा कौन सा तोहफा दें, जो भावनाओं को अच्छे से व्यक्त करने में मदद कर सके . खासतौर पर इस दिन अपनी मां, बहन, बीवी, बेटी और गर्लफ्रैंड के लिए तोहफा चुनते वक्त सोचविचार करना पड़ता है. आमतौर पर इस दिन लोग लेटैस्ट गैजेट, बुके, स्टाइलिश ड्रैस, कौस्मैटिक्स या फिर ज्वैलरी आदि गिफ्ट में देते हैं. इन तोहफों को पा कर महिलाओं को खुशी तो बहुत होती है लेकिन उनके चेहरे पर रौनक आती है तो सिर्फ डायमंड की चमक से. यदि ऐसा है तो अपनी वैलेंटाइन को इस बार गिफ्ट करें तारा ज्वैलर्स का हार्ट एम्बर्स कलैक्शन, क्योंकि इस कलैक्शन को सजाया गया है प्योर डायमंड्स से.

अब आपने सुना तो होगा ही कि हीरा महिलाओं का सबसे अच्छा दोस्त होता है. ऐसे में इस वैलेंटाइन डे पर यदि आपको किसी महिला को तोहफा देना हो तो तारा ज्वैलर्स का हार्ट एम्बर्स कलैक्शन बहुत अच्छा विकल्प है. इसे भेंट कर आप उन से अपने प्यार का इजहार कर सकते हैं. इस कलैक्शन में मौजूद हार्ट शेप्ड फिंगर रिंग, ईयररिंग्स और पैंडेंट की वैराइटी आपके दिल की बात को जुबान पर लाने में न केवल आपकी मदद करेगी, बल्कि आपके स्नेह को आपकी वैलेंटाइन तक बखूबी पहुंचाएगी भी.

प्यार जताने का बेहतर तरीका

कई बार पुरुष अपने शर्मीले और शांत स्वभाव की वजह से अपनी भावनाओं को बहुत प्रभावशाली ढंग से अपने दिल ऐ अजीज के आगे नहीं रख पाते. उदाहरण एक बेटे को अपनी मां के स्नेह के आगे सब कुछ छोटा लगता है. यहां तक की वह अपना उनसे लगाव कभी जाहिर नहीं कर पाता. लेकिन वैलेंटाइन डे एक ऐसा मौका है जब आप उन्हें बता सकते हैं कि वो कितनी महत्वपूर्ण हैं आपके लिए. इसी तरह पिता और बेटी का रिश्ता भी स्नेह भावनाओं से सराबोर होता है. ऐसे में बेटी पिता के जीवन में क्या महत्व रखती है इसे बताने के लिए वैलेंटाइन डे एक बहुत अच्छा दिन है और इस दिन को सैलिब्रेट करने के लिए हीरे से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता, क्योंकि यह आपके रिश्ते की डोर को प्यार और विश्वास की मोहर लगा कर और भी मजबूत बनाता है.

इतना ही नहीं हीरों के आभूषणों का महत्व शुरू से ही है. जब बहू ससुराल आती है तो सास उसे अपने पास रखे हीरों के गहने दे कर ही उसका स्वागत करती है. इस भेंट द्वारा सास बहू के लिए अपने स्नेह को प्रकट करती है और उसे नई जिम्मेदारियों को निभाने का हौसला देती है.  वैसे ही पति पत्नी को हीरे के गहने सुहागरात, मैरिज ऐनिवर्सरी, बर्थडे, वैलेंटाइन डे आदि पर गिफ्ट कर उसे खास होने का अहसास कराता है और जीवनभर साथ निभाने, प्यार देने का वादा करता है.वैलेंटाइन डे पर हीरों के गहनों को भेंट करने पर इस दिन की खासीयत और भी बढ़ जाती है. प्यार का यह दिन आपसी बौंडिंग को पहले से ज्यादा मजबूत करने का दिन होता है. रिश्ता कोई भी हो उसकी  मजबूती को हीरे के गहने और भी गहरा कर देते हैं औैर आपको अटूट प्यार के बंधन में बांध देते हैं.

हार्ट शेप की ज्वैलरी गिफ्ट करने के फायदे:

1. दिल के आकार को प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना जाता है. यदि आप अपने दिल की बात को लफ्जों में बयां करने में हिचक रहे हैं तो दिल के आकार की ज्वैलरी अपनी प्रेमिका को तोहफे में दें. आपके दिल की बात उन तक खुद ब खुद पहुंच जाएगी.

2. हार्ट शेप कभी भी आउट औफ फैशन नहीं होता, इसलिए आपका तोहफा भी कभी पुराना नहीं होगा. जब भी आपकी वैलेंटाइन इस तोहफे को पहनेगी उसे रिश्ते में हमेशा नएपन का अहसास होगा.

3. हार्ट के आकार की ज्वैलरी कैजुअल और ट्रैडिशनल दोनों ही तरह के आउटफिट्स पर आपकी वैलेंटाइन पहन सकती है. इसलिए आपका दिया तोहफा हर मौके पर आपकी दिल ए अजीज के नजदीक होगा.

4. दिल का आकार देख कर हमेशा सकारात्मक सोच बनती है, जो आपके रिश्ते को और भी बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्र्ण है.

5. आप हार्ट शेप की ज्वैलरी न केवल अपनी प्रेमिका बल्कि अपनी बेटी, बहन, मां किसी को भी गिफ्ट कर सकते हैं, क्योंकि ये सभी रिश्ते दिल के हैं.

6. हार्ट शेप ज्वैलरी की खासीयत यह भी है कि इसे किसी तय उम्र के लोग ही नहीं, बल्कि बच्चे, बूढ़े और जवान सभी उम्र के लोग आसानी से कैरी कर सकते हैं.

स्टेटस सिंबल है डायमंड

महिलाओं के लिए हीरा केवल ज्वैलरी ही नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल भी है. इसकी बड़ी वजह यह है कि हीरे की ज्वैलरी केवल किसी उत्सव में ही नहीं बल्कि औफिस वगैरह में भी पहनी जा सकती हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि डायमंड ज्यादा वजनदार नहीं होता, तारा ज्वैलर्स का हार्ट एम्बर्स कलैक्शन भी खासतौर पर लाइट वेट ज्वैलरी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. इस कलैक्शन की खासीयत यहीं नहीं खत्म होती. डायमंड के साथ ही इसमें कलर्ड स्टोन मसलन रूबी, इमरल्ड, रैड एंड व्हाइट इनेमल का भी इस्तेमाल किया गया है.कलैक्शन में मौजूद डिजाइन को मौडर्न महिलाओं की पसंद को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है. इस कलैक्शन में मौजूद ज्वैलरी की कीमत 12,000 रुपए से 52,000 रुपए तक है.

जितने क्रिकेटरों के साथ खेला, उनमें वॉ सबसे स्वार्थी : वार्न

स्टीव वॉ के साथ बरसों पुराने शेन वार्न के मतभेद फिर उजागर हो गए जब उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम के दौरान कहा कि जितने क्रिकेटरों के साथ उन्होंने खेला, उनमें आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान सबसे स्वार्थी थे .

वार्न ने चैनल टेन के कार्यक्रम आई एम अ सेलिब्रिटी, गेट मी आउट आफ हेयर कार्यक्रम में कहा, स्टीव वॉ को नापसंद करने के मेरे पास कई कारण हैं. मैने जितने क्रिकेटरों के साथ खेला, उनमें वह सबसे स्वार्थी थे .

वार्न ने 17 साल पुराने वाकये का जिक्र किया जब उन्हें 1999 में वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी टेस्ट से बाहर कर दिया गया था जब आस्ट्रेलिया 1- 2 से पीछे था . उन्होंने कहा, मैं उस पर सबसे ज्यादा उस टेस्ट में बाहर किये जाने के लिये चिढता हूं . हमें वह मैच हर हालत में जीतना था . उस समय कप्तान ( वॉ), उपकप्तान (मैं) और कोच (ज्यौफ मार्श) टीम चुनते थे. मैने अच्छी गेंदबाजी नहीं की लेकिन मुझे लगा कि मुझे बलि का बकरा बनाया गया है.

उन्होंने कहा, चयन के दौरान मैने सभी से राय पूछी तो वॉ ने कहा कि तुम नहीं खेल रहे हो. मैने कहा कि टीम क्या होनी चाहिये तो उसने कहा कि मैं कप्तान हूं और तुम नहीं खेल रहे हो . वार्न ने कहा, मैं काफी निराश था. दस साल बाद मेरे कंधे का आपरेशन हुआ. मैने सोचा कि जब हमें हर हालत में जीतना था तो मैं सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकता था. मैं कई अन्य कारणों से भी स्टीव वॉ को पसंद नहीं करता हूं .

उस टेस्ट में वार्न की जगह कोलिन मिलर खेले और आस्ट्रेलिया ने मैच 176 रन से जीता.

 

मिशेल स्टार्क जैसी गेंदबाजी करती है 17 साल की ये लड़की

17 साल की लॉरन चैटल अभी भी सिडनी के एक स्कूल में पड़ती हैं, लेकिन इस उम्र में ही उन्होंने कमाल कर दिया. वह बाएं हाथ की तेज गेंदबाज हैं और उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें भारत में होने वाले महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए टीम में चुन लिया है. उन्हें ऑस्ट्रेलिया की वर्ल्ड कप टी20 टीम में शामिल कर लिया गया है.

लॉरन की गेंदबाजी की खास बात है कि उनका गेंदबाजी एक्शन ऑस्ट्रेलिया के पुरुष तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क से बहुत मिलता है. लॉरन ने कहा कि उनको इस बात का अंदाजा नहीं था, लेकिन अब उनकी कोशिश होगी की वह स्टार्क की तरह ही असरदार हो सकें.

लॉरन के पिता इंग्लेंड में फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलते थे, लेकिन फिर ऑस्ट्रेलिया में आकर बस गए. लॉरन का घर ब्रेडमैन म्यूजियम के पास ही है और वह न्यू साउथ वेल्स के लिए खेलने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी भी बनी.

भारतीय महिला क्रिकेट टीम जब कुछ दिन पहले ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी तब तीन T-20 मैच की सीरीज़ के दूसरे मैच में उन्हें खेलने का मौका मिला हालांकि वह कुछ खास नहीं कर पाई थीं, लेकिन चयनकर्ताओं का भरोसा उन पर बना हुआ है.

 

हार पर बोले धौनी, यह भारतीय से ज्यादा इंग्लिश विकेट था

तीन मैचों की टी-20 श्रृंखला के पहले मैच में श्रीलंका से मिली हार पर टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने कहा कि टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए तैयार की गई पिच भारतीय विकेट की बजाय इंग्लिश विकेट था.

मैच के बाद धौनी ने कहा कि जिस तरह के विकेट पर हम पिछले एक महीने ऑस्ट्रेलिया में खेले हैं, उससे यह विकेट पूरी तरह से अलग था. यह इंग्लिश विकेट की तरह ज्यादा था. उछाल वाली और अलग तरह की पिच थी. विकेट को सही तरह से रोल नहीं किया गया. विकेट को देखते हुए हम बड़े शॉट नहीं खेल पाए जैसा कि हम खेलते हैं.

उनसे पूछा गया कि एक महीने ऑस्ट्रेलिया में खेलने के बाद क्या भारतीय परिस्थितियों में ढलना मुश्किल रहा, इस पर धोनी ने कहा कि भारतीय परिस्थितियों से ज्यादा इंग्लिश परिस्थितियां थीं.

धौनी ने कहा कि उन्हें लगा कि अगर 25-30 रन और बनते तो इससे मुकाबला और दिलचस्प हो सकता था. श्रीलंकाई कप्तान दिनेश चंडीमाल ने भी धौनी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि जब उन्होंने पिच पर नई घास देखी तो समझ गए थे कि टॉस महत्वपूर्ण होगा.

गौरतलब है कि शानदार गेंदबाजी और कप्तान दिनेश चंदीमल की सूझबूझ भरी पारी से श्रीलंका ने कम स्कोर वाले पहले ट्वेंटी20 मैच में पुणे में भारत को दो ओवर शेष रहते हुए पांच विकेट से हरा दिया.

 

 

पीला दुपट्टा, नीरजा और सोनम

अगले सप्ताह फिल्म नीरजा रिलीज हो रही है. फिल्म को रिलीज से पहले ही लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. फिल्म इंडस्ट्री में भी फिल्म का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है. ऐसे में रिलीज के करीब दो सप्ताह पहले नीरजा की स्पेशल स्क्रीनिंग की गई.

नीरजा की स्क्रीनिंग के समय पर सोनम कपूर एक पीले रंग के दुपट्टे के साथ आईं. फिल्म को बीच-बीच में मिल रही तारीफों के बीच सोनम बार-बार अपने दुपट्टे को देख रहीं थी, सहला रही थीं, मुस्कुरा रही थी, भावुक हो रही थी. इतनी महंगे गाउन के साथ एक पीले रंग का दुपट्टा सभी को थोड़ा सा ऑड लग रहा था. लेकिन स्क्रीनिंग के बाद सोनम कपूर के दुपट्टे रखने पर से सस्पेंस उठ गया. इस दुपट्टे को रमा भनोट जो नीरजा भनोट की मां थी. उन्होंने ही सोनम कपूर को गिफ्ट दिया था.

सोनम कपूर नीरजा के परिवार से मिलने जब चंडीगढ़ गई थी तो सोनम की आवाज़ से रमा अचानक बिफर गईं. लाडो-लाडो कहतीं दरवाजे तक बूढ़ीं आखें आ गई. तुरंत उस लाडो को गले से लगा लिया, जिसका वो पिछले 30 साल से इंतजार रही थी. हाथ तुरंत उस अलमीरा में भी चले गए. वहां से एक सुर्ख पीले रंग का दुपट्टा निकाला और नीरजा को दे दिया. रमा ने धीरे से सोनम के कान में कहा कि वो कब से इस दुपट्टे को लाकर अपने पास रखीं हुई थी पर उसने आने में देरी कर दी. सोनम कपूर को समझते देर नहीं लगी कि माजरा क्या है ?

रमा देवी की खुशी का ठिकाना नहीं था. जब तक सोनम उनके घर में थी, उन्होंने लाडो के नाम से पुकारा. फिल्म रिसर्च टीम की मानें तो नीरजा भनोट को पीला रंग पसंद था. पैनएम की फ्लाइट में जाने से पहले ही नीरजा की मां ने नीरजा के लिए पीले रंग का दुपट्टा लाया था. लेकिन जब तक वो उसे दे पाती नीरजा अपनी ड्यूटी के लिए निकल पड़ी थी. नीरजा के ड्यूटी से आने का इंतजार महीने भर पहले तक रमा देवी करती रहीं. उनकी आखिरी सांस तक इंतजार चलता रहा. लेकिन अपने देह त्यागने से पहले उन्होंने उस दुपट्टे को नीरजा का किरदार निभाने वाली सोनम कपूर को दे दिया.

 

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