Download App

कोंकणा का निर्देशन

अभिनेत्रियों में अलग पहचान रखने वाली कोंकणा सेन अब निर्देशक की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं. वे फिल्म ‘अ डैथ इन द गंज’ से बतौर निर्देशक नई पारी शुरू करने जा रही हैं. फिल्म को ले कर कोंकणा इतनी संजीदा हैं कि इस फिल्म के सभी आर्टिस्ट लगातार वर्कशौप कर रहे हैं. वैसे, कोंकणा जिस तरह की फिल्में करती आई हैं, उस हिसाब से लगता है वे औफबीट तरह का सिनेमा ही बनाएंगी. उन की समकालीन अभिनेत्री नंदिता दास ने भी गुजरात दंगों पर ‘फिराक’ जैसी गंभीर फिल्म बना कर सब को चौंका दिया था. ऐसे में कोंकणा से भी कुछ ऐसे ही सरप्राइज की उम्मीद की जा रही है. गौरतलब है कि कोंकणा की मां भी हिंदी समेत कई अवार्ड विनिंग बंगाली फिल्मों का निर्देशन कर चुकी हैं.

काजोल का असहिष्णुता बोध

आमिर खान के असहिष्णुता पर दिए गए बयान पर हुआ विवाद थमा नहीं था कि अभिनेता अक्षय कुमार और शत्रुघ्न सिन्हा एक बार फिर आमिर पर बरस पडे़. इतना ही नहीं, जयपुर साहित्य उत्सव में भाग लेने आई अभिनेत्री काजोल भी असहिष्णुता का बोध करते हुए अपनी विशेष टिप्पणी देने लगीं. उन के मुताबिक, हमारा फिल्म उद्योग, समाज में जो चल रहा होता है उसे हमेशा दर्शाता रहेगा. बौलीवुड में कोई विभाजन रेखा नहीं है. न ही जाति, नस्ल है और न ही असहिष्णुता. बहरहाल, इस देश में असहिष्णुता इसी बात से जाहिर हो जाती है जब शाहरुख और आमिर खान जैसे कलाकारों के कुछ बोलने पर उन की फिल्मों का बायकाट करने का सुर सुनाई देने लगता है.

 

तेरी याद

दर्द की कीमत चुकाई जाएगी

याद तेरी जब भी पाई जाएगी

चैन फिर उड़ने लगेगा प्यार में

नींद आंखों से चुराई जाएगी

दूरियां उस को समझ आ जाएंगी

जब मेरी अरथी उठाई जाएगी

वो मुझ से मिलने का वादा तो करे

पथ पर चांदनी बिछाई जाएगी

उलटा दर्पण उस ने सीधा कर दिया

अब हकीकत ही दिखाई जाएगी

रूठने का भी सबब होता है क्या

बात कोई तो बनाई जाएगी.

 

             – बलविंदर बालम

भारत और नेपाल: दरकते रिश्ते

भारत और नेपाल के दशकों पुराने राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक रिश्तों पर पिछले 5-6 महीने से छाए काले बादल गहराते जा रहे हैं. भारत और नेपाल के शासक मामले को सुलझाने के बजाय आग में घी डालने का काम कर रहे हैं, जिस से चीन फायदा उठाने की जुगत में लगा हुआ है. मधेशियों के आंदोलन को ले कर भारत से नेपाल के बिगड़ते रिश्तों के बीच चीन नेपाल में अपनी पैठ बनाने की कोशिशों में लगा हुआ है और कुछेक मामलों में उसे कामयाबी भी मिल रही है. खास बात यह है कि नेपाल अब किसी भी तरह की मदद के लिए भारत की ओर देखने के बजाय चीन के सामने हाथ फैलाने लगा है और चीन भी बढ़चढ़ कर उस की मदद करने लगा है.

नेपाल में जारी हिंसा के बहाने नेपाल की नई सरकार चीन के साथ गुपचुप कारोबारी समझौता कर भारत के कारोबार को झटका देने की मुहिम में लगी हुई है. इस साजिश में चीन नेपाल का साथ दे कर अपना मतलब साधने में लग गया है. इस के तहत नेपाल के रसुआ जिला के टिमुरे इलाके में चीन ने ड्राईपोर्ट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है.

नेपाल और चीन के बीच यह गुप्त करार अप्रैल 2015 में ही हो चुका है. नेपाल वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय की ओर से नेपाल इंटर मौडल यातायात विकास समिति के कार्यकारी निदेशक लक्षुमन बहादुर वस्नेत और चीन की ओर से आर्किटैक्चर रिकौनसंस ऐंड डिजायन इंस्टिट्यूट औफ तिब्बत औटोनोमस रिजन कंपनी के अध्यक्ष फुंझिन झाउल ने करार पर हस्ताक्षर किए हैं.

करार में कहा गया है कि चीनी कंपनी अगले 3 महीने में प्रोजैक्ट रिपोर्ट नेपाल को पेश कर देगी, उस के बाद ड्राईपोर्ट बनाने का काम चालू किया जाएगा. चीनी कंपनी ने ड्राईपोर्ट बनाने के लिए प्रस्तावित 5 हेक्टेयर जमीन का मुआयना कर शुरुआती नक्शा तैयार कर लिया है. ड्राईपोर्ट को 4 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बनाया जाना है. इस के अलावा, चीन ने नेपाल में 2 बड़े सीमेंट प्लांट्स में भारी निवेश करने की मंजूरी दी है. मधेशी नेता उपेंद्र यादव बताते हैं कि मधेशी आंदोलन  के बहाने नेपाल भारत को ठेंगा दिखा कर चीन से सांठगांठ करने की साजिश में लगा हुआ है. वह चाहता है कि मधेशी आंदोलन में भारत को उलझा कर रखा जाए और चीन से दोस्ती बढ़ा कर भारत को सबक सिखाया जाए.

नेपाल की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि वह भारत की मदद के बगैर नहीं बढ़ सकता है. भारत और नेपाल के बीच लगभग 1850 किलोमीटर खुली सीमा है, जो बिहार और उत्तर प्रदेश से लगी हुई है. दोनों देश के लोग आसानी से इधरउधर आ और जा सकते हैं. नेपाल जाने के लिए भारत से ही हो कर जाया जा सकता है, इसलिए नेपाल की मजबूरी है कि वह भारत से रिश्ता बना कर रखे.

ऐसे बढ़ी दूरियां

भारत-नेपाल मैत्री संघ के सदस्य अनिल कुमार सिन्हा कहते हैं कि भारत-नेपाल शांति और मैत्री समझौता साल 1950 में हुआ था. उस के बाद से नेपाल की आर्थिक हालत को बनाने और बढ़ाने में भारत का बहुत बड़ा हाथ रहा है.  साल 1988 में जब नेपाल ने चीन से बड़े पैमाने पर हथियारों की खरीद की तो भारत ने नाराजगी जताई और उस के बाद से दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं. साल 1991 में भारत और नेपाल के बीच व्यापार व आर्थिक सहयोग को ले कर नया समझौता हुआ. इस के बाद साल 1995 में नेपाल के तब के प्रधानमंत्री मनमोहन अधिकारी ने दिल्ली यात्रा के दौरान 1950 के समझौते पर नए सिरे से विचार करने की मांग उठाई.

साल 2008 में जब नेपाल में माओवादियों की सरकार बनी और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने 1950 के समझौतों में बदलाव की आवाज बुलंद की. प्रचंड की सोच है कि 60 साल पुराने समझौते से भारत को ज्यादा और नेपाल को काफी कम फायदा हो रहा है. सरकार गंवाने के बाद भी प्रचंड ने भारत विरोध की सियासत जारी रखी, क्योंकि इस से जहां पहाड़ी नेपालियों का उन्हें पुरजोर समर्थन मिल सकता है, वहीं चीन को भी खुश रखा जा सकता है. 31 जुलाई, 1950 को नेपाल के तब के प्रधानमंत्री शमशेर जंग बहादुर राणा और नेपाल में भारत के राजदूत चंद्रशेखर प्रसाद नारायण सिंह ने भारत-नेपाल समझौते पर दस्तखत किए थे. समझौते के तहत दोनों देशों के बीच रक्षा के मामले पर सहयोग और माल की मुफ्त आवाजाही की अनुमति मिली है. इस के साथ ही, दोनों देशों को एकदूसरे की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और आजादी को स्वीकार व सम्मान करने पर सहमति जताई गई. समझौते में 10 अनुच्छेद हैं.

अनुच्छेद-1 में कहा गया है कि यह समझौता चिरस्थायी होगी, पर अनुच्छेद-10 कहता है कि एक साल के नोटिस पर इस समझौते को खत्म किया जा सकता है. अनुच्छेद-5 में इस बात का जिक्र है कि नेपाल की सुरक्षा के लिए भारत हथियार, गोलाबारूद, जंगी सामान और जरूरी मशीनों को अपने देश से आनेजाने देगा. वहीं अनुच्छेद-7 कहता है कि दोनों देशों के नागरिक एकदूसरे के देशों में बेरोकटोक आनेजाने के साथ कारोबार या नौकरी कर सकते हैं. कई नेपाली शासक और कुछ कट्टरपंथी नेता पिछले कुछ सालों से यह हल्ला मचा रहे हैं कि इस समझौते की नींव असमानता के आधार पर रखी गई है. नेपाली कानून खुली सीमा की अनुमति नहीं देता है. भारतीयों के नेपाल में जमीन खरीदने और कारोबार करने से भी कुछ नेता नाराज हैं. साल 2008 में जब माओवादी नेता प्रचंड नेपाल के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने संविधान सभा में इस समझौते को खत्म कर नया समझौता बनाने का प्रस्ताव पारित भी करा लिया था, पर सरकार बनने के 9 महीने के भीतर ही उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा और मामला खटाई में पड़ गया.

गौरतलब है कि माओवादी सुप्रीमो प्रचंड बारबार रट लगाते रहे कि इस संधि से सिर्फ भारत को ही फायदा हो रहा है. साल 2010 शुरू होते ही प्रचंड ने भारत पर यह आरोप लगाना चालू किया कि उस ने नेपाल के काफी बड़े भूभाग पर अवैध कब्जा जमा रखा है. इस के अलावा सीमा के पास भारत पर कई बांधों का एकतरफा निर्माण करने का भी आरोप लगाते हुए कहा कि इस से नेपाल के काफी बड़े हिस्से में बारहों महीने पानी जमा रहता है. गौरतलब है कि यह इलाका भारत-नेपाल-चीन का जंक्शन है. नेपाल के पहले प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल कहते हैं कि उन के देश की भी चिंता है कि उन की जमीन का भारत विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल न हो. दरअसल, भारत और चीन के बीच बफर स्टेट बने नेपाल की हालत सांपछछूंदर वाली रही है. नेपाल न भारत की अनदेखी कर सकता है न ही चीन की.

सीमा का समीकरण

नेपाल मामलों के जानकार हेमंत राव कहते हैं कि नेपाल की सब से बड़ी दिक्कत यह है कि उसे हमेशा यह खयाल रखना पड़ता है कि वह जानेअनजाने कोई ऐसा कदम न उठा ले जिस से दोनों में से किसी को तकलीफ हो. नेपाल के लिए सब से बड़ी परेशानी यह रही है कि भारत और चीन दोनों उसे अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं और एकदूसरे पर रौब व धौंस जमाने के लिए नेपाल की जमीन का बेजा इस्तेमाल करते रहे हैं. 2 बड़े एशियाई देशों की नाक की लड़ाई में नेपाल जंग का मैदान बना हुआ है. चीन के साथ नोपाल की 1,414.88 किलोमीटर सीमा लगती है. भारत के साथ लगभग 1,850 किलोमीटर सीमा लगी हुई है. यह उत्तराखंड से ले कर बिहार, बंगाल और सिक्किम तक फैली हुई है. इतनी लंबी खुली सीमा होने की वजह से नेपाल की सुरक्षा से ही भारत की सुरक्षा जुड़ी हुई है. नेपाल के प्रधानमंत्री भारत और नेपाल के लोगों को एकदूसरे देश में आनेजाने के लिए वीजा सिस्टम लागू करने की मांग उठा रहे हैं. उन का मानना है कि इस से आतंकियों और अपराधियों को भारत या नेपाल में पैठ बनानी मुश्किल होगी.

चीन, भारत और नेपाल के प्रति आक्रामक रवैया रखता है, जबकि भारत नेपाल को छोटे भाई के रूप में देखता है और चीन से भी मधुर रिश्ता बनाए रखना चाहता है. चीन नेपाल में अपना दबदबा बढ़ा कर भारत पर निशाना साधे रखने की जीतोड़ कोशिशों में लगा हुआ है. चीन के लिए सब से बड़ा सिरदर्द नेपाल में रहने वाले 20 हजार तिब्बती शरणार्थी हैं जो नेपाल के रास्ते चीन और भारत आतेजाते रहते हैं. नेपाल को आर्थिक मदद दे कर चीन उसे दिमागी रूप से अपना गुलाम बनाए रखना चाहता है

राष्ट्रीय जनता दल उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह कहते हैं कि नेपाल में जारी मधेशियों के आंदोलन में भारत को तुरंत ठोस दखल देना चाहिए, वरना नेपाल चीन की गोद में बैठ सकता है. नेपाल चीन के एहसान तले दब कर भारत से अपनी पुरानी दोस्ती तोड़ने को आतुर है. नेपाल में चीन की पैठ से भारत की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी और नेपाल, चीन के भारतविरोध की सियासत का अड्डा बन सकता है.

अंतरिक्ष में खिला फूल

शून्य गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में पहली बार जिंदगी की उम्मीद खिली है. नासा के वैज्ञानिकों ने अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में दुनिया का पहला फूल खिलाया है. और इस से इस बात को बल मिला है कि अंतरिक्ष में भी जीवन संभव है. नासा के वैज्ञानिकों ने ट्वीट कर इस की घोषणा की है. उन्होंने इस फूल का नाम जिन्निया रखा है. यह फूल खाने में सलाद की तरह प्रयोग हो सकता है. यह अमेरिका में उगाया जाता है. इस फूल को उगाने में 60 से 80 दिनों का समय लगा था. यह वैज्ञानिकों का दूसरा प्रयास था जब यह फूल खिल पाया है. इस से पहले भी वैज्ञानिकों ने स्पेस स्टेशन के वैजी लैब में पौधों को उगाने का प्रयास किया था. इस फूल के उगने से यह संभावना बढ़ी है कि भविष्य में स्पेस यात्री भी ताजी सब्जियों का मजा ले सकेंगे.

पिछले साल ही वहां सफलतापूर्वक गोभी उगाई गई थी. उगाने के बाद गोभी को वहीं पर फ्रीज कर दिया गया था. वैज्ञानिक परीक्षण में यह बात साफ होने पर कि यह गोभी सेहत के लिए हानिकारक नहीं है, नासा ने अंतरिक्ष में ऐसे अन्य प्रयोग करने की अनुमति दे

दी थी. स्पेस स्टेशन के निवासियों ने 10 अगस्त, 2015 को पहली बार अंतरिक्ष में उगाई गई सब्जियों का जायका लिया था. इस से धरती से आने वाले राशन पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की निर्भरता कुछ कम होगी. जिन्निया के खिलने की कामयाबी से वैज्ञानिक उत्साहित हैं और अब वे वर्ष 2018 तक अंतरिक्ष में टमाटर और चाइनीज कैबेज उगाने की कोशिश कर रहे हैं. अंतरिक्ष में टमाटर जैसी सब्जियों को उगाना नासा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण होगा. इस से अंतरिक्ष यात्रियों के लिए मार्स जैसे लंबी दूरी के मिशन तय करना आसान होगा.

वैटिरिनरी साइंस में बनाएं कैरियर

मनुष्य की तरह पशुपक्षी भी अनेक रोगों के शिकार होते हैं. मनुष्य तो आसानी से अपने दर्द को बयां कर सकता है और डाक्टर भी उस की बीमारी के अनुरूप उस का इलाज करता है, पर जानवर तो बेजबान होते हैं, वे अपनी पीड़ा किसी को नहीं बता सकते इसलिए उन के शारीरिक लक्षणों को देख कर वैटिरिनरी डाक्टर अंदाजा लगा लेते हैं कि पशु की तबीयत खराब है. मनुष्य की तरह पशुओं की बीमारियों को भी डाक्टर टैस्ट करता है और फिर उस का इलाज करता है.

वैटिरिनरी साइंस अपने में एक कंप्लीट साइंस है, इसलिए जिन युवाओं को पशुओं से प्रेम है वे वैटिरिनरी डाक्टर बन कर पशुओं का इलाज कर सकते हैं.

एक वक्त था, जब पशुओं के चुनिंदा अस्पताल और डाक्टर होते थे, इसलिए बहुत से पशु तो बीमारी की वजह से बिना इलाज के मर जाते थे. इसी वजह से कई पक्षियों की तो प्रजातियां ही विलुप्त हो गईं. जानवरों की रक्षा और उन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए ‘वर्ल्ड एनिमल वेलफेयर डे’ 4 अक्तूबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है. अब जानवरों की रक्षा के लिए सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा अथक प्रयास किए जा रहे हैं. उन की रक्षा के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति से ले कर चिकित्सक तक रखे जा रहे हैं. हाल के वर्षों में बीमारियां फैलने के मामले सामने आ रहे हैं जैसे बर्ड फ्लू व स्वाइन फ्लू. इस कारण इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पशु विशेषज्ञों की आवश्यकता और बढ़ गई है. यदि आप साइंस बैकग्राउंड से हैं और पशुओं की रक्षा करना चाहते हैं, तो आप के लिए वैटिरिनरी साइंस में बेहतर कैरियर विकल्प हो सकता है.

क्या है वैटिरिनरी साइंस

पशुपक्षियों में होने वाली बीमारियों का पता लगा कर सही तरीके से इलाज कर उन्हें उन की तकलीफ से छुटकारा दिलाना ही वैटिरिनरी साइंस है. एक अनुमान के मुताबिक भारत में पशुओं की संख्या लगभग 50 करोड़ है जोकि विश्व में सब से अधिक है. लेकिन इन की देखभाल व इलाज के लिए वैटिरिनरी डाक्टर्स की भारी कमी है.

प्रमुख कोर्स

–       बैचलर औफ वैटिरिनरी साइंस ऐंड एनिमल हसबैंड्री -5 वर्ष.

–       वैटिरिनरी ऐंड लाइवस्टौक डैवलपमैंट डिप्लोमा – 2 वर्ष.

–       मास्टर औफ वैटिरिनरी साइंस – 2 वर्ष.

–       पीएचडी इन वैटिरिनरी साइंस – 2 वर्ष.

कैसे मिलेगा प्रवेश

वैटिरिनरी साइंस में ग्रैजुएशन के लिए प्रवेश परीक्षा होती है. इस परीक्षा में आवेदन के लिए फिजिक्स, कैमिस्ट्री व बायोलौजी विषयों में 50% अंकों के साथ 12वीं पास करना अनिवार्य है. यह परीक्षा वैटिरिनरी काउंसिल औफ इंडिया के द्वारा हर वर्ष मई व जून में आयोजित की जाती है. प्रत्येक राज्य के वैटिरिनरी कालेज की 15% सीटें इसी परीक्षा के द्वारा भरी जाती हैं. बाकी सीटें उसी राज्य के प्रतियोगियों के लिए आरक्षित होती हैं जहां वैटिरिनरी कालेज स्थित होता है.

किस तरह के पाठ्यक्रम

इस के पाठ्यक्रम में आप को थ्योरी तथा प्रैक्टिकल दोनों का ज्ञान दिया जाता है. शुरू में आप को एनाटोमी, बायोकैमिस्ट्री, फिजियोलौजी, न्यूट्रीशन, लाइवस्टौक मैनेजमैंट ऐंड प्रोडक्शन पैथोलौजी तथा जैनेटिक्स आदि विषय पढ़ाए जाते हैं. इस के बाद प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए वैटिरिनरी हौस्पिटलों में भेजा जाता है.

कार्यस्वरूप डाक्टर्स का कार्य पशुओं के स्वास्थ्य का खयाल रखना, उन्हें बीमारियों से छुटकारा दिलाना, उन के रहनसहन व खानपान में सुधार तथा उन की उत्पादन तथा प्रजनन क्षमता बढ़ाना होता है.

फ्यूचर प्रौस्पैक्टस

वैटिरिनरी इंडस्ट्री के कमर्शियलाइजेशन तथा भारत सरकार की उदारीकरण नीतियों के कारण यह इंडस्ट्री काफी उन्नति कर रही है. फूड मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्युटिकल्स, वैक्सीन प्रोडक्शन इंडस्ट्री से संबंधित मल्टीनैशनल कंपनियों के आने से वैटिरिनरी क्षेत्र में नौकरी की अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं.

पशु चिकित्सक जहां सरकारी तथा गैर सरकारी वैटिरिनरी अस्पतालों, एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमैंट, पौल्ट्री फार्म, डेयरी इंडस्ट्री, मिल्क ऐंड मीट प्रोसैसिंग इंडस्ट्री, फार्मास्युटिकल सैक्टर तथा एनिमल बायोटैक्नोलौजी के क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं वहीं निजी अस्पताल या क्लीनिक खोल कर भी अच्छी कमई कर सकते हैं. इस के अलावा रिसर्च ऐंड डैवलपमैंट के क्षेत्र तथा शिक्षण संस्थानों में शिक्षक के तौर पर भी काम किया जा सकता है

दूसरों के घोंसलों में अंडे देने वाले पक्षी

पक्षियों की दुनिया निराली है. कई पक्षी ऐसे शातिर होते हैं, जो न तो अपना घोंसला बनाते हैं, न अपने बच्चे पालते हैं. उन के अंडे भी दूसरे पक्षियों द्वारा सेए जाते हैं.

वैज्ञानिकों के अनुसार पक्षी वर्ग के 5 परिवार एनाटिडी, कुकुलिडि़, इंडिकेटोरिडि तथा प्लीसिडि के पक्षी अपने अंडे चोरीछिपे या डराधमका कर दूसरों के घोंसलों में रख देते हैं और दूसरा पक्षी अनजाने में या भयवश उन के अंडों, बच्चों की देखभाल करता है. इस प्रक्रिया को बु्रड परजीवीकरण कहते हैं. ऐसा 80 प्रजातियों के पक्षी करते हैं, जिन में 40 प्रजातियां अकेली कोयल की हैं.

कोयल न तो कभी अपना घोंसला बनाती है और न अपने बच्चे पालती है. जनवरीफरवरी से ले कर मईजून तक नर कोयल, बागों में पेड़ों पर बैठा कुहूकुहू करता गाता रहता है. यह प्रवासी पक्षी मादा को रिझाने के लिए गाता है और मादा चुपचाप श्रोता बन कर सुनती है.

जब जुलाई में मादा कोयल के अंडे देने का समय आता है तो यह अपने अंडे चुपके से कौए के घोंसले में या मैगपाई चिडि़या के घोंसले में रख आती है. अंडों का रंग एक सा होने के कारण मादा कौआ उन्हें पहचान नहीं पाती है. बच्चों का रंग भी कौए के बच्चों से मिलताजुलता होता है, इस कारण जब तक कौए व कोयल के बच्चे बोलने नहीं लगते, अपने को चालाक समझने वाला कौआ उन में भेद नहीं कर पाता.

दूसरी तरफ वैज्ञानिकों का कहना है कि कोयल लड़ाकू पक्षी है वह कौए को डराधमका कर अपनी मादा के अंडे कौए के घोंसले में रखवा देता है और बेचारा कौआ, कोयल के डर से उस के अंडे सेता है व बच्चे पालता है. मादा कोयल एक ऋतु में 16 से 26 अंडे दे सकती है.

फिनलैंड में पाई जाने वाली मादा कोयल अपना अंडा छोटाबड़ा कर सकती है. जब यह मादा कोयल रेड स्टार्ट तथा विनचिट पक्षी के घोंसले में अंडा रखती है तो अंडे को छोटा कर देती है तथा अंडे का रंग नीला होता है. अंडे से निकले अधिकांश पक्षियों के बच्चे पहले अंधे जैसे होते हैं और अपने पोषक पक्षी के बच्चों को घोंसले से गिरा देते हैं.

हनी गाइड नाम का पक्षी बार्वेट या कठफोड़वा जैसे तेजतर्रार पक्षियों के घोंसलों में कब्जा कर के अपने अंडे रखता है. जरमनी में पाया जाने वाला ब्रुड वार्बलर (फाइलोस्कापस सिविलेटरिक्स) पक्षी अपने घोंसले में कोयल के अंडे रखे देख, अपने अंडे भी छोड़ कर भाग जाता है.

यूरोप में पाई जाने वाली कोयल (कुकुलस केनोरस) भी दूसरे पक्षियों के घोंसले में अंडे रख देती है. यह कोयल शाम को पोषक पक्षी के लौटने से पहले ही उस के घोंसले में अपने अंडे रख आती है और उस के अंडे फेंक आती है.

उत्तरी अमेरिका में पाए जाने वाले मेलोथर्स नामक पक्षी की मादा अकसर अपने अंडे ओभन (सी पूरस आरोकैपिलस) चिडि़या के घोंसले में देती है. दक्षिण अमेरिका व अफ्रीका में पाई जाने वाली बतखें भी अपने अंडे दूसरों के घोंसलों में रख आती हैं.

हमारे घरों में रहने वाली सीधीसादी गौरैया भी कभीकभार क्लिफ्स्वैलो (पैटेकैनिडान पायरोनोटा) फुदकी चिडि़या के घोंसले में कब्जा कर अपने अंडे रखती व सेती है. ये पक्षी अपना अंडा रखते समय पोषक पक्षी के अंडे बाहर फेंक देते हैं ताकि गिनती की भूलभुलैया में पोषक पक्षी के अंडे गिनती से ज्यादा न निकलें.

जंगलों में पिहकने वाला पक्षी पपीहा भी अपने अंडे चिलचिल बैवलर पक्षी के घोंसले में रख आता है. बेचारे चिलचिल पक्षी की मादा कई बार तो कईकई पक्षियों के अंडे सेती व बच्चे पालती है.

जेएम हाउसिंग को मिला एसोचैम का अवार्ड

एसोचैम द्वारा हाल ही में आयोजित ‘स्मार्ट सिटीज़ : स्मार्ट इंडिया समिट’ में एनसीआर के जाने माने डेवलपर जेएम हाउसिंग को ‘बेस्ट रेजिडेंशियल हाई राइज इन नोएडा’ अवार्ड से सम्मानित किया गया. यह अवार्ड केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और प्रकाश जावड़ेकर द्वारा दिया गया.

यह समिट सरकार की 98 स्मार्ट सिटीज़ के विकास के ऊपर आधारित थी. इस मौके पर जेएम हाउसिंग के निदेशक रुपेश गुप्ता ने कहा कि इतने बड़े संस्थान द्वारा सम्मानित होना हमें खासा प्रोत्साहित करता है. इस सम्मान से यह साबित होता है कि अगर आप अच्छा और इमानदारी से काम कर रहे हों, तो उसे सरहाना हमेशा मिलती है.

गुप्ता ने कहा कि यह अवार्ड पूरी जेएम हाउसिंग की टीम को समर्पित है जो मेहनत और लगन से काम करती है, ताकि हम ग्राहकों से किये हुए वादों को पूरा कर सके. साथ ही मैं एसोचैम का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा जो उन्होंने हमें इस अवार्ड के काबिल समझा.

 

BCCI ने बिना सबूत लगाया बैन, मुकदमा ठोकूंगा: रउफ

पाकिस्तान के अंपायर असद रउफ ने कहा कि बीसीसीआई ने बिना किसी सबूत के उन्हें दोषी करार देकर उन पर प्रतिबंध लगा दिया. आईसीसी की एलीट पेनल के सदस्य रहे 59 बरस के रउफ पर सटोरियों से महंगे तोहफे लेने और आईपीएल 2013 के मैचों पर सट्टा लगाने का आरोप है.

रउफ ने कहा, ‘आईपीएल और बीसीसीआई को मुझ पर प्रतिबंध लगाने का क्या हक है जब मुंबई की एक अदालत ने पुलिस को बताया है कि उसके पास मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘बीसीसीआई और आईपीएल ने एक जांच आयुक्त नियुक्त कर दिया और दावा किया कि मैं आईपीएल में अपना काम पूरा किये बिना भारत से चला आया. यह गलत है. मैं काम पूरा करके भारत से आया.’

रउफ ने कहा, ‘अदालत ने कहा कि रउफ प्रतिमाह 30 लाख रुपये से अधिक कमाता है लिहाजा जींस, टीशर्ट या कैप जैसे छोटे तोहफे लेना बड़ी बात नहीं है.’ उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने वकील के मार्फत बीसीसीआई को लिखा है कि वह मुंबई में बीसीसीआई मुख्यालय जाकर किसी भी आयोग के सामने पेश होने को तैयार है.

उन्होंने कहा कि वह अपने वकील के जरिये बीसीसीआई और आईपीएल को नोटिस भेजेंगे और मानहानि का मुकदमा ठोकेंगे. उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड मेरा साथ दे या नहीं, मैं अपने वकील के जरिये खुद कदम उठाउंगा.’

 

टी-20 में हैट्रिक लेने वाले चौथे गेंदबाज बने थिसारा परेरा

श्रीलंकाई तेज गेंदबाज थिसारा परेरा ने भारत के खिलाफ शुक्रवार को दूसरे अंतरराष्‍ट्रीय टी-20 में हैट्रिक लेने का कमाल किया. वह अंतरराष्‍ट्रीय टी-20 हैट्रिक लेने वाले चौथे गेंदबाज बन गए हैं. उनसे पहले न्‍यूजीलैंड के टिम साउदी और जैकब ओरम व ऑस्‍ट्रेलिया के ब्रेट ली यह कमाल कर चुके हैं.

थिसारा परेरा ने मैच में हार्दिक पंड्या, सुरेश रैना और युवराज सिंह को अपना शिकार बनाया. मजेदार बात यह है कि परेरा की गेंदबाजी तब चमकी जब पिच पर रनों का अंबार लगा हुआ था. श्रीलंका द्वारा पहले बल्‍लेबाजी के निमंत्रण पर भारत 18 ओवर में तीन विकेट पर 179 रन बनाकर खेल रहा था. उस समय लग रहा था कि दो ओवर में भारत अपने स्‍कोर को 215 तक पहुंचा लेगा. मगर परेरा की शानदार हैट्रिक की बदौलत भारतीय टीम निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट पर 196 रन ही बना सकी.

श्रीलंकाई कप्‍तान दिनेश चंदीमल ने पारी का 19वां ओवर पूरा करने के लिए परेरा को गेंद थमाई. उस समय पंड्या 25 और रैना 28 रन बनाकर क्रीज पर जमे हुए थे, परेरा ने शुरुआती तीन गेंदों में सात रन दिए. भारतीय बल्‍लेबाजों ने रन गति बढ़ाने के लिहाज से बड़े शॉट मारने की योजना बनाई.

परेरा की चौथी गेंद पर पंड्या (27 रन) ने हवा में शॉट लगाया जो सीधा लांग ऑन पर मुस्‍तैद गुनाथिलाका के हाथों में गया. अगली ही गेंद पर रैना (30 रन) भी स्‍क्‍वायर लेग पर चमीरा को आसान कैच देकर पैवेलियन लौट गए. ओवर की आखिरी गेंद पर परेरा ने युवराज सिंह को खाता खोलने का मौका भी नहीं दिया और लांग ऑन पर सेनानायके ने हाथों की शोभा बनाकर हैट्रिक पूरी की.

परेरा ने मैच में तीन ओवर किए और 33 रन खर्च करके तीन विकेट चटकाए. ऑस्‍ट्रेलिया के पूर्व महान तेज गेंदबाज ब्रेट ली के नाम टी-20 अंतरराष्‍ट्रीय की हैट्रिक दर्ज है. उन्‍होंने 2007-08 में बांग्‍लादेश के खिलाफ वर्ल्‍ड टी-20 में यह कमाल किया था. पारी के सातवें ओवर में लीग ने शकीब अल हसन, मशरफे मुर्तजा और आलोक कपाली को अपना शिकार बनाया था.

न्‍यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज जैकब ओरम टी-20 अंतरराष्‍ट्रीय में हैट्रिक लेने वाले गेंदबाजों की सूची में दूसरे खिलाड़ी बने. 2009 में श्रीलंका के खिलाफ ओरम की हैट्रिक अनोखे अंदाज में पूरी हुई. ओरम ने 17वें ओवर की आखिरी गेंद पर एंजेलो मैथ्‍यूज को आउट किया. इसके बाद आखिरी ओवर की पहली दो गेंदों पर मलिंगा बंडारा और नुवान कुलसेकरा को आउट करके हैट्रिक पूरी की.

जैकम ओरम के बाद दूसरे कीवी गेंदबाज तथा टी-20 इतिहास में हैट्रिक लेने वाले तीसरे गेंदबाज बने टिम साउदी. 2010 में पाकिस्‍तान के खिलाफ पारी के आठवें ओवर में साउदी ने यूनुस खान, मोहम्‍मद हफीज और उमर अकमल को आउट करके हैट्रिक पूरी की. उन्‍होंने इस मैच में 17 रन देकर पांच विकेट लिए थे.

 

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें