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काम नहीं आ रहा मुलायम का दांव

पुत्र और भाई के बीच पुल बने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का हर दांव फेल होता दिख रहा है. चुनाव के समय पार्टी दो राहे पर खड़ी है. कार्यकर्ता अपने अपने नेताओं के पक्ष में लामबंद खड़े हैं. जिससे नेताओं की आपसी खींचतान में पार्टी को नुकसान हो रहा है. मुलायम सिंह यादव ने 2017 के विधानसभा चुनाव के लिये सपा के 325 उम्मीदवारों के नामों की लिस्ट क्या जारी की सपा का विवाद फिर से खुलकर सामने आ गया.

चुनाव लड़ने वाले कुछ नामों पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के बीच मतभेद हैं. मतभेद का कारण यह है कि मुलायम ने जिन उम्मीदवारों की सूची जारी की है उनमे कुछ नाम अखिलेश यादव को पंसद नहीं हैं. बताया जाता है कि उम्मीदवारों की एक लिस्ट अखिलेश यादव की तरफ से गई थी और एक शिवपाल यादव की तरफ से. मुलायम सिंह यादव ने जो उम्मीदवार घोषित किये उनमें शिवपाल गुट का पलटा भारी है.

असल में सपा में परिवार का विवाद पुराना है. फौरीतौर इस विवाद पर विराम लग चुका था. अब टिकट वितरण के समय एक बार फिर से विवाद खड़ा हो गया. मुलायम सिंह यादव दिल से पुत्र अखिलेश यादव के साथ हैं. वह उपरी तौर पर भाई शिवपाल यादव के साथ दिखते हैं. शिवपाल और अखिलेश के बीच संबंधों को सहज करने के लिये मुलायम का हर दांव काम नही आ रहा. अधिकार की लड़ाई में दोनो समयसमय पर एक दूसरे के सामने आ जाते हैं.

धीरेधीरे पार्टी और परिवार दोनो ही जगहों पर अखिलेश ने अपनी ताकत बढ़ा ली है. यही कारण है कि पिछले विवाद को हल करने के समय अखिलेश ने जो भी फैसला लिया था वह कायम रहा. शिवपाल के पक्ष में कोई फैसला नहीं आ सका. टिकट वितरण में मुलायम ने शिवपाल को तवज्जो देने की कोशिश की तो अखिलेश फिर सामने आ गये. पार्टी में परिवार के बीच का झगड़ा कितना ही सुलझा हुआ दिखे पर तकरार का प्रभाव पार्टी में कार्यकर्ता स्तर तक पहुंच गया है. जिसका नुकसान पार्टी को चुनाव के मैदान में होगा.

मुलायम एक तरफ अखिलेश की साफ छवि को लेकर चुनाव मैदान में जाना चाहते हैं तो दूसरी तरफ वह शिवपाल के उन समर्थकों को भी साथ रखना चाहते हैं जो धन और बाहुबल से चुनाव जीतने की कला में माहिर हैं. दोनों के बीच संतुलन तब तक बन सकता था जब तक अखिलेश और शिवपाल एक साथ रहते. अब दोनों के आमने सामने आने से यह संतुलन मुश्किल हो गया है. ऐसे में लग नहीं रहा कि सपा पूरी ताकत से चुनाव लड़ पायेगी.

कर्ज चुकाने के लिए मिलेंगे 90 दिन

नोटबंदी से प्रभावित लोगों को राहत देते हुए रिजर्व बैंक ने कृषि कर्ज और 1 करोड़ रुपये तक की सीमा के होम लोन, कार लोन, कृषि और व्यावसायिक कर्ज लेने वालों को किस्त चुकाने के लिए 60 दिन के उपर 30 दिन यानी कुल 90 दिन का अतिरिक्त समय देने की घोषणा की है.

रिजर्व बैंक अपने नोटिफिकेशन में कहा कि समीक्षा के बाद फैसला किया गया है कि 21 नवंबर को कर्ज चुकाने के लिए जो 60 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया था, उसमें 30 दिन और अतिरिक्त दिए जाएं. ऐसे में कर्जदारों को उनके खाते को नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) बनने से रोकने के लिए 90 दिन की राहत मिल गई है. यह व्यवस्था एक नवंबर से 31 दिसंबर, 2016 तक के कर्ज बकाये पर लागू होगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1,000 का नोट बंद करने की घोषणा की थी. इससे बाजार में नकदी का संकट पैदा हो गया था जिसे कारोबार की रफ्तार थम गई है. ऐसे में कर्ज दारों की भुगतान की क्षमता प्रभावित हुई है और उनके खाते के एनपीए में आने की आशंका बढ़ी है. रिजर्व बैंक की नोटिफिकेशन के अनुसार कारोबारी पूंजी के लिए या फसल के लिए स्वीकृत एक करोड़ रुपये या उससे कम के कर्ज पर यह लाभ मिलेगा. यह नियम बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) दोनों के कर्जों के मामले में लागू होगा.

आरबीआई ने होम लोन, कार लोन और दूसरे कई तरह के लोन पर ग्राहकों को बड़ी छूट दे दी है. नोटबंदी से परेशान लोगों को भारतीय रिजर्व बैंक ने और राहत दी है. मकान, कार, खेती और दूसरे तरह के 1 करोड़ रुपये तक के कर्ज लौटाने के लिए अब आरबीआई ने 30 दिन का और समय दिया है. 

क्या वरुण धवन व नताशा दलाल 2017 में करेंगे विवाह

अपने निजी जीवन पर खुलकर बात करने वाले अभिनेता वरुण धवन ने नताशा दलाल का नाम आने पर हमेशा यही कहा कि वह उनकी पारिवारिक दोस्त हैं. वरुण हमेशा इस बात से इंकार करते रहे कि उनके बीच कोई प्रेम का संबंध चल रहा है. जबकि वरुण के अति नजदीकी सूत्र हमेशा दावा करते रहे हैं कि वरुण धवन और नताशा दलाल के बीच बहुत गहरा रोमांस चल रहा है. नजदीकी सूत्रों के अनुसार वरुण भी हमेशा खुद को नताशा का बेहतरीन प्रेमी साबित करते रहे हैं.

बहरहाल, अब लगता है कि स्थितियां बदल गयी हैं. अब वरुण धवन खुलकर नताशा दलाल के साथ घूमने लगे हैं. वह सोशल मीडिया पर भी नताशा के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट करने लगे हैं. हाल ही में वरुण धवन ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट की है, जो कि वरुण धवन के घर के अंदर भोजन के टेबल की है. इस तस्वीर में वरुण धवन का पूरा परिवार एक साथ भोजन कर रहा है और इस तस्वीर में वरुण के पूरे परिवार के बीच में नताशा दलाल भी हैं. इससे बौलीवुड में चर्चाएं गर्म हो गयी हैं कि वरुण धवन ने नताशा दलाल के संग 2017 में शादी करने का फैसला कर लिया है..खैर, हमें तो 2017 में इस खुश खबर को सुनने का इंतजार रहेगा.

‘काबिल’ और ‘रईस’ के टकराव में आया नया मोड़

बौलीवुड में पहले भी एक ही दिन एक साथ दो दो फिल्में प्रदर्शित होती रही हैं. मगर इस बार रितिक रोशन के अभिनय से सजी फिल्म ‘‘काबिल’’ और शाहरुख खान के अभिनय से सजी फिल्म ‘‘रईस’’ के प्रदर्शन को लेकर जिस तरह की हायतोबा और शतरंजी चालें चली जा रही हैं, वैसा इससे पहले कभी नहीं हुआ. पहले यह दोनों ही फिल्में 27 जनवरी को प्रदर्शित होने वाली थी. मगर दोनों फिल्में एक साथ प्रदर्शित न हो और दर्शक न बंटें, यह सोचकर शाहरुख खान ने फिल्म ‘‘काबिल’’ के निर्माता राकेश रोशन से दो तीन मुलाकातें की, मगर राकेश रोशन ने साफ कर दिया कि वह अपनी फिल्म के प्रदर्शन की तारीख नहीं बदलेंगे.

उसके बाद दोनों फिल्मों के प्रदर्शन की तारीख बदलकर 26 जनवरी हो गई. पर अभी भी ‘काबिल’ और ‘रईस’ का टकराव होना था. अचानक एक दिन राकेश रोशन ने घोषित किया कि दो फिल्मों की सीधी टक्कर न हो, इसलिए वह फिल्म ‘‘काबिल’’ को अब 25 जनवरी को शाम छह बजे के शो से ही प्रदर्शित करेंगे. शाहरुख खान चुप रहे. मगर सात दिसंबर को अपनी फिल्म ‘‘रईस’’ का ट्रेलर लांच करते हुए शाहरुख खान ने घोषणा कर दी कि उनकी फिल्म ‘‘रईस’’ 25 जनवरी को सुबह नौ बजे के शो में ही प्रदर्शित की जाएगी. सूत्रों का दावा है कि इससे राकेश रोशन और रितिक रोशन को मिर्ची लगी. पर वह चुप रहे.

मगर कई शतरंजी चालें चलते हुए अब पूरे 20 दिन के बाद राकेश रोशन ने घोषणा की है कि ‘काबिल’ भी 25 जनवरी को सुबह नौ बजे के शो में ही प्रदर्शित होगी. राकेश रोशन कहते हैं-‘‘हमारी फिल्म ‘काबिल’ के वितरकों ने काफी सोच विचार कर ‘काबिल’ को 25 जनवरी की सुबह नौ बजे के शो के साथ प्रदर्शित करने का फैसला ले लिया है.’’

मजेदार बात यह है कि शाहरुख खान और रितिक रोशन तथा इन फिल्मों के निर्माता अपनी सारी ऊर्जा सिर्फ फिल्म के प्रदर्शन की तारीखों को इधर उधर करने में और एक दूसरे को टक्कर देने में ही लगा रहे हैं. मगर दोनों फिल्मों से जुड़े लोग मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं. दोनों फिल्मों का प्रमोशन एकदम ठंडा है. खुद रितिक रोशन मीडिया /पत्रकारों के साथ बातचीत करने की बनिस्बत अपने बेटों के साथ फ्रांस घूम रहे हैं. शाहरुख खान कहां है, वह भी पता नहीं…आखिर इस तरह आपस में एक दूसरे की टांग खिंचाई कर दोनो क्या लाभ उठाना चाहते हैं, यह तो वही जाने.

ये हैं साल के सबसे हाईटेक स्मार्टफोन

साल 2016 में अब तक के सबसे हाईटेक स्मार्टफोन लॉन्च हुए हैं. एप्पल, सैंमसंग, गूगल समेत कई मल्टिनेशनल वाली कंपनियों ने अपने बेहतर से बेहतर स्मार्टफोन मार्केट में लाए. मोटोरोला कंपनी ने जहां सबसे पावरफुल स्मार्टफोन लॉन्च करने का दावा किया तो वहीं एप्पल ने भी हाईटेक स्मार्टफोन मार्केट में उपलब्ध कराया.

आइए जानते हैं कि साल 2016 में लॉन्च हुए अब तक के सबसे हाईटेक स्मार्टफोन के बारे में…

आईफोन 7 और 7 प्लस

आईफोन 7 के 32 जीबी वैरिएंट की कीमत 60 हजार रुपये होगी, वहीं 128 जीबी वैरियंट 70,000 रुपये में उपलब्ध होगा. इसके आलावा 256 जीबी वाले वैरिएंट की कीमत 80,000 रुपये है. आईफोन 7 प्लस की बात करें तो इसका 32 जीबी वैरिएंट 72 हजार रुपये का, 128 जीबी वैरिएंट 82,000 रुपये का और 256 जीबी वाला वैरिएंट 92,000 रुपये का होगा. एप्पल ने 7 सितंबर को अपने इवेंट में आईफोन 7 और 7 प्लस लांच किये थे|

इन फोन्स के कैमरे को अपग्रेड किया गया है जिसमें अब कम रोशनी में भी शार्प फोटो ली जा सकती हैं. आईफोन 7 में 12 एमपी सेंसर दिया गया है जो कि एफ/1.8 लेंस से लैस है. ये सेंसर पहले से 60 फीसदी ज्यादा तेज और 30 फीसदी ज्यादा बेहतर है.

वहीं, आईफोन 7 प्लस में डुअल 12 एमपी कैमरा दिया गया है. जिसमें से एक वाइड एंगल लेंस है और दूसरे में टेलीफोटो लेंस लगा है जो की ऑप्टिकल और सॉफ्ट जूम से 10 गुना जूम क्वालिटी देने में सक्षम है. दोनों ही फोन्स से 4000 वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है. इसके अलावा एप्पल ने इन फोन्स में 4 एलईडी फ्लैश दिए हैं. वहीं, दोनों फोन्स में 7 एमपी फेसटाइम कैमरा और 5 एमपी सेल्फी कैमरा दिया गया है.

सबसे बड़ा बदलाव एप्पल ने हैडफोन जैक में किया है. कंपनी इन दोनों फोन्स में से हैडफोन जैक को हटा दिया है. आईफोन 7 और आईफोन 7 प्लस के साथ लाइटनिंग इयरपोड्स यानि वायरलैस इयरफोन्स दिए गए हैं. इसके साथ ही आईफोन 7 में पहली बार स्टीरियो स्पीकर की सुविधा भी दी गई है.

दोनों फोन 64-बिट 4 कोर सीपीयू ए10 फ्यूजन प्रोसेसर से लैस है जो कि ए9 से 40 फीसदी तेज है. इसके अलावा एप्पल ने आईफोन 7 सीरीज को वॉटर रेजिस्टेंट बनाया है. इसे IPX67 रेटिंग दी गई है.

इनका होम बटन एप्पल मैकबुक के ट्रैकपैड जैसा बनाया गया है.

इन दोनों मॉडल्स में अब तक की सबसे ज्यादा बैटरी लाइफ दी गई है. आईफोन 7 वाइ-फाइ यूज करने के दौरान 14 घंटे और 4जी इस्तेमाल करने पर 12 घंटे की बैटरी लाइफ देता है. वहीं, आईफोन 7 वाइ-फाइ यूज करने के दौरान 15 घंटे और 4जी इस्तेमाल करने पर 15 घंटे की बैटरी लाइफ देता है.

सैमसंग एस7 और एस7 एज

सैमसंग गैलक्सी S7 (32GB वैरियंट) की कीमत अब 43,400 रुपए और गैलक्सी S7 एज (32GB वैरियंट) की 50,900 रुपये है. गौरलतब है कि गैलक्सी S7 48,900 रुपये में लॉन्च हुआ था, जबकि गैलक्सी S7 एज का लॉन्चिंग प्राइस 56,900 रुपये था.

सैमसंग के नए स्मार्टफोन गैलेक्सी एस7 और गैलेक्सी एस7 एज के कुछ लोकप्रिय फीचर हैं जो इसके पिछले स्मार्टफोन में नहीं थे.

गैलेक्सी एस7 और गैलेक्सी एस7 एज दोनों में माइक्रोएसडी कार्ड लगता है. इससे 200 गीगाबाइट (जीबी) तक स्टोरेज क्षमता बढ़ाई जा सकती है. इनकी बैटरियों की क्षमता भी पहले के मुकाबले ज्यादा है. एक बार पूरा चार्ज करने पर एस7 एज पर 15 घंटे तक हाई डेफिनिशन वीडियो देखा जा सकता है. यह फोन आधे घंटे तक पानी में सुरक्षित रह सकता है.

इस फोन में एक 'ऑलवेज ऑन डिस्प्ले' फंक्शन है, जो स्क्रीन को खोले बगैर भी नोटिफिकेशन और समय दिखाता रहता है. इसमें नई गेमिंग तकनीक और एक रियर कैमरा है, जो कम रोशनी में भी अच्छी तरह काम करता है. इसमें एस6 मॉडल की वॉयरलेस चार्जिंग क्षमता भी है.

मोटो जेड और जेड प्ले

5.5 इंच फुल एचडी एमोलेड डिस्प्ले वाले इस स्मार्टफोन में क्वॉल्कॉम स्नैपड्रैगन 625 प्रोसेसर के साथ 3GB रैम दिया गया है. इसकी बैट्री 3,510mAh की है और यह स्मार्टफोन 45 घंटे की बैट्री बैकअप दे सकता है. साथ ही इसे जल्दी चार्ज करने के लिए इसमें टर्बो चार्जिंग सपोर्ट भी दिया गया है.

इसमें लेजर ऑटोफोकस के साथ 16 मेगापिक्सल रियर ऑटोफोकस कैमरा दिया गया है. सेल्फी के लिए 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. दोनों स्मार्टफोन्स में फिंगरप्रिंट स्कैनर दिए गए हैं. 5.5 इंच क्वॉड एचडी सुपर एमोलेड डिस्प्ले वाले इस स्मार्टफोन में क्वॉल्कॉम स्नैपड्रैगन 820 प्रोसेसर के साथ 4GB रैम दिया गया है.

यह स्मार्टफोन एल्यूमिनियम और स्टील का बना है और कंपनी का दावा है कि यह बाजार का सबसे पावरफुल स्मार्टफोन है. इसकी बैट्री 2,500mAh की है जो 24 घंटे की बैकअप देगी. इसके अलावा इसे सिर्फ 15 मिनट चार्ज करके 7 घंटे तक चलाया जा सकता है.

लेजर ऑटोफोकस के साथ इसमें 13 मेगापिक्सल कैमरा दिया गया है. लो लाइट में बेहतरीन फोटोग्राफी होगी. यह मोटोरोला का पहला स्मार्टफोन है जिसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेब्लाइजेशन दिया गया है. बैकग्राउंड ब्लर करने वाले फीचर्स भी हैं जिसे बोके इफेक्ट भी कहा जाता है. सेल्फी के लिए इसमें 5 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है.

गूगल पिक्सल और गूगल पिक्सल एक्सएल

गूगल पिक्सल व गूगल पिक्सल एक्सएल स्माटफोन में एल्युमिनियम यूनिबॉडी दी गई है. इसके अलावा रियर पर पॉलिश्ड ग्लास कॉम्बिनेशन है. गूगल पिक्सल में एक 5 इंच फुल एचडी एमोलेड डिस्प्ले और गूगल पिक्सल एक्सएल में 5.5 इंच क्वाड एचडी एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है.

यह कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 4 प्रोटेक्शन के साथ आता है. दोनों ही स्मार्टफोन में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 821 प्रोसेसर और 4 जीबी एलपीडीडीआर4 रैम है. दोनों फोन में एक इम्प्रिंट फिंगरप्रिंट सेंसर है. ये स्मार्टफोन 32 जीबी और 128 जीबी इंटरनल स्टोरेज वेरिएंट में आते हैं.

पिक्सल स्मार्टफोन भारत में उपलब्ध हैं. पिक्सल 32 जीबी वेरिएंट की कीमत 57,000 रुपये जबकि 128 जीबी वेरिएंट की कीमत 66,000 रुपये है. वहीं बड़े पिक्सल एक्सएल 32 जीबी वेरिएंट की कीमत 67,000 रुपये और 128 जीबी वेरिएंट की कीमत 76,000 रुपये है.

वनप्लस 3टी

इस फोन में पिछले स्मार्टफोन से बेहतर प्रोसेसर दिया गया है. वनप्लस 3टी में क्वालकॉम का सबसे लेटेस्ट स्नैपड्रैगन 821 चिपसेट दिया गया है. इससे फोन के प्रोसेसिंग पावर, बैटरी बचत और यूजर अनुभव 10 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.

इस फोन में 6 जीबी एलपीडीडीआर4 रैम व 128 जीबी इनबिल्ट स्टोरेज है. आज हम जिस यूनिट को रिव्यू कर रहे हैं वो प्रीमियम वेरिएंट है और इसकी कीमत 34,999 रुपये है लेकिन वनप्लस 3टी के 64 जीबी वेरिएंट की कीमत 29,999 रुपये है.

दूसरे स्पेसिफिकेशन की बात करें तो इस फोन में वाई-फाई 802.11एसी, ब्लूटूथ 4.2, यूएसबी ओटीजी, एनएफसी और जीपीएस जैसे फ़ीचर दिए गए हैं. फोन में एफएम नहीं है. वीओएलटीई के साथ यह फोन 4जी सपोर्ट करता है. वनप्लस 3टी ऑक्सीजनओएस (3.5.3) पर चलता है जो एंड्रॉयड मार्शमैलो आधारित 6.0.1 आधारित है.

ये फीचर पिछले वनप्लस 3 की तरह ही हैं और इन्हें सिर्फ रीडिज़ाइन किया गया है. होम स्क्रीन पर दांयीं तरफ स्वाइप करने पर 'शेल्फ' को एक्सेस किया जा सकता है. यह एक कस्टमाइज़ कर सकने वाला स्क्रीन है जो क्विक एक्सेस के लिए विज़िट बनाता है. होमस्क्रीन पर नीचे व ऊपर की तरफ स्वाइप करने पर क्रमशः नोटिफिकेशन शेड व गूगल सर्च को एक्सेस किया जा सकता है.

कारें खरीदते हैं पर कर नहीं देते भारतीय

देश में केवल 24.4 लाख करदाता हैं, जो अपनी सालाना आय 10 लाख रुपए से ऊपर घोषित करते हैं. दूसरी तरफ पिछले 5 साल से हर साल देश में 35,000 लक्जरी कारों सहित कुल 25 लाख नई कारें खरीदी जाती हैं. आंकड़ों के हिसाब से देश की आबादी तो 125 करोड़ से अधिक है, पर 2014-15 में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या केवल 3.65 करोड़ थी. इससे संकेत मिलता है कि अभी भी बड़ी संख्या में लोग कर दायरे से बाहर हैं.

सूत्रों के मुताबिक आकलन वर्ष 2014-15 में रिटर्न भरने वाले 3.65 करोड़ लोगों में से केवल 5.5 लाख लोगों ने ही पांच लाख रुपए से अधिक का आयकर दिया, जो कि कुल कर संग्रह का 57 फीसद है. इसका मतलब यह है कि कर रिटर्न भरने वालों में से केवल 1.5 फीसद का कर राजस्व में 57 फीसद योगदान रहा है. कारों की बिक्री के साथ यदि कर रिटर्न की तुलना की जाए तो चौंका देने वाली तस्वीर सामने आती है.

पिछले 5 सालों के दौरान कारों की बिक्री पिछले औसतन 25 लाख सालाना रही है. पिछले तीन साल में कारों की बिक्री 25.03 लाख, 26, लाख और 27 लाख रही. यह आंकड़ा बताता है कि बड़ी संख्या में कारें खरीदने वाले ऐसे लोग हैं, जो कर दायरे से बाहर हैं. आमतौर पर कार का जीवन सात साल होता है और आम लोग दूसरी कार पांच साल से पहले नहीं खरीदते.

भारत का कर राजस्व 2016 में जीडीपी का 16.7 फीसद रहा, जबकि अमेरिका व जापान में यह क्रमश: 25.4 व 30.3 फीसद था. यानी उल्लेखनीय संख्या में लोग कर के दायरे में आते हैं. लेकिन वे कर नहीं भरते हैं. सरकार कर चोरी पर अंकुश लगाने के लिए भी काम कर रही है. आठ नवंबर को 500 और 1,000 रुपए के पुराने नोटों को अमान्य करने का फैसला इस समस्या से निपटने का ही एक उपाय है. लोगों को इस पुरानी मुद्रा को बैंकों में जमा कराने के पीछे मकसद यही था कि बिना हिसाब-किताब वाली राशि का पता लगाया जाए और उसे कर दायरे में लाया जाए.

मौनी रॉय के नखरे या..

पिछले दस वर्षों से छोटे परदे पर लगातार अभिनय करती आ रही अभिनेत्री मौनी रॉय के नखरे बढ़ते ही जा रहे हैं. तो दूसरी तरफ हर किसी को पता है कि इन दिनों टीवी काफी बोल्ड होता जा रहा है. टीवी सीरियलों में हमबिस्तर होने व सेक्स दृश्यों के अलावा भी कई बोल्ड सीन प्रसारित होने लगे हैं. इस तरह के अति बोल्ड सीन कई सीरियलों में मौनी रॉय भी दे चुकी हैं.

लेकिन जब हाल ही में ‘कलर्स’ चैनल पर प्रसारित हो रहे सीरियल ‘‘नागिन 2’’ के लिए मौनी रॉय को अभिनेता करणबीर बोहरा के संग हम बिस्तर होने का दृश्य फिल्माना था, तो मौनी रॉय ने पहले रूद्र रूप धारण कर लिया. उनके इस रूद्र रूप की वजह गलत दृश्य नहीं था और न ही उन्हे हम बिस्तर होने के सीन को देने में समस्या थी. न ही अभिनेता करणबीर बोहरा से उनकी अनबन थी. इतना ही नही वह सीरियल ‘‘नागिन’’ में तो इससे भी ज्यादा बोल्ड सीन पहले ही कर चुकी थी. पर उनकी समस्या यह थी कि निर्माता ने सेट पर इस सीन को कवर करने के लिए मीडिया को बुला रखा था. वह नहीं चाहती थी कि सेट पर मीडिया मौजूद रहे.

सीन के फिल्मांकन के लिए तैयार होकर जब मौनी रॉय सेट पर पहुंची, तो सेट पर मीडिया की मौजूदगी देखकर वह भडक गयी और कह दिया कि जब तक सेट पर मीडिया मौजूद रहेगी, तब तक वह हम बिस्तर हाने का सीन नहीं देंगी. निर्माता और चैनल के लोगों ने मौनी रॉय को समझाने का असफल प्रयास किया.अंततः मीडिया को सेट से बाहर किया गया, उसके बाद मौनी रॉय ने उस सीन की शूटिंग की.

आखिर मौनी रॉय ने  सीरियल की युनिट से जुडे़ कम से कम सौ लोगों के सामने वही सीन किया. और वह सीन करोड़ों लोग टीवी के परदे पर देखेंगे, पर इससे मौनी रॉय को समस्या नहीं है…तब उनकी आत्मा आहत न हुई और न होगी. इसके मायने यह हुए कि वह सिर्फ मीडिया के सामने नखरे दिखलाकर खुद को बड़ी अदकारा कहलाना चाहती हैं.

2016 के बेस्ट हाई बजट स्मार्टफोन

साल 2016 स्मार्टफोन के लिए बहुत अच्छा रहा. इस साल बाजार में कम कीमत में अच्छे स्मार्टफोन्स की भरमार रही. कुछ फोन तो बहुत लोकप्रिय हुए और कुछ कब आए और कब गए पता ही नहीं चला. यहां हम आपको बता रहे हैं साल के कुछ हाई बजट स्मार्टफोन के बारे में जिन्हें लोगों ने काफी पसंद किया. इनमें मोटोरोला, सैमसंग और शाओमी, एसस समेत कई कंपनियों के स्मार्टफोन्स शामिल हैं.

1. एसस जेनफोन 3 मैक्स

कीमत: 17,9991 रुपये

एसस जेनफोन 3 मैक्स को भारत में 17,999 रुपये में लॉन्च किया गया था. 4100 mAh की बैटरी वाला यह फोन 30 दिन तक स्टैंडबाइ मोड में रह सकता है. 20 घंटें का टॉकटाइम देने वाला यह 3जी फोन है. मिड-रेंज के इस स्मार्टफोन में 3जीबी रैम, फिंगरप्रिंट सेंसर, 5.5 इंच का फुल एचडी डस्प्ले, 32 जीबी स्टोरेज, 16 मेगापिक्सल बैक कैमरा और 8 मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा है.

2. मोटोरोला मोटो जी

कीमत: 39,9996 रुपये

मोटोरोला के फ्लैगशिप स्मार्टफोन मोटो जी ने अपने स्पेसिफिकेशंस से यूजर्स और विशेज्ञों को काफी प्रभावित किया है. दुनिया के सबसे स्लिम स्मार्टफोन्स में से एक इस फोन में हाई क्वॉलिटी कैमरा है.

3. एलजी वी20

कीमत: 54,999 रुपये से भारत में शुरू

एलजी वी20 स्मार्टफोन में गूगल नहीं है. इसमें ऐंड्रॉयड 7.0 नॉगट वर्जन है. इसका प्रोसेसर जबरदस्त है और इसकी ऑडियो रेकॉर्डिंग और ऑडियो ऑउटपुट भी बढ़िया है. इस फोन में ड्यूल ब्लैक कैमरा लगा है.

4. गूगल पिक्सेल XL

कीमत: 67,000 रुपये से भारत में शुरू

गूगल पिक्सल और पिक्सल XL इस साल लॉन्च होने वाले अच्छे स्पेसिफिकेशंस वाले स्मार्टफोन्स में से एक हैं. फोन में मौजूद गूगल असिस्टेंट और कैमरे आपको एक अलग फिलींग देगा.

5. एप्पल आईफोन 7 प्ल्स

कीमत: 72,000 रुपये से भारत में शुरू

ड्यूल बैक कैमरा वाला यह एप्पल का पहला फोन है. आईफोन 7 और आईफोन 7 प्लस कंपनी के पहले ऐसे स्मार्टफोन्स हैं, जिनका 256 जीबी स्टोरेज वाला वैरियंट भी लॉन्च किया गया है.

6. सैमसंग गैलेक्सी एस7 एज

कीमत: 50,900 रुपये

नोट 7 के ब्लास्ट होने की घटनाओं के बावजूद सैमसंग के फ्लैगशिप स्मार्टफोन गैलेक्सी एस7 एज को लोगों ने पसंद किया. इस फोन का कैमरा भी कमाल का है.

7. वन प्लस 3टी

कीमत: 29,999 रुपये

वनप्लस के पिछले फ्लैगशिप वनप्लस 3 का अगला वर्जन वनप्लस 3टी के स्पेसिफिकेशंस शानदार हैं. क्यूएचडी डिस्प्ले वाला यह भारत में सबसे सस्ता स्मार्टफोन है. 

अच्छा पिता बनने के लिए रितिक रोशन के प्रयास

हर पिता का कर्तव्य होता है कि वह अपने बेटे को पहली पंक्ति में बैठने योग्य बना दे. इस बात को ध्यान में रखकर अभिनेता रितिक रोशन अपने दोनों बेटों हे्रहान और हृधान को बेहतर परवरिश देने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं. इन दिनों वह अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताने लगे हैं. क्योंकि पत्नी से तलाक लेने के बाद अब वह अपने बेटों को पिता और मां दोनों का प्यार दे रहे हैं.

इन दिनों हृतिक रोशन अपने दोनो बेटों के साथ क्रिसमस और नए वर्ष की छुट्टियां बिताने के लिए फ्रांस के आल्प्स में कोर्चवेल रिसोर्ट में स्कीइंग छुट्टियां मनाने गए हैं. वास्तव में रितिक रोशन के दोनों बेटे हे्रहान और हृधान साहसिक व रोमांचक खेलों के शौकीन हैं. अपने आपको अपने बेटों की तरह रोमांचक खेलों में माहिर बनाने के लिए रितिक रोशन ने फ्रांस जाने से पहले गुप्त रूप से खुद काफी तैयारी की थी.

फ्रांस रवाना होने से पहले रितिक रोशन ने खुद अपनी कमजोरी व अपनी ट्रेनिंग की चर्चा करते हुए बताया-‘‘जब साहसिक  व रोमांचक खेलों का मसला आता है, तो मैं खुद को अपने बच्चों से काफी पीछे पाता हूं. रोमांचक खेलों का नाम सुनकर मैं काफी नर्वस हो जाता था. इसलिए इस बार इस कौशल में खुद को निपुण करने के लिए मैंने अपने बेटों को बिना बताए ट्रेनिंग ली. मुझे पता है कि मेरे बेटे चाहते हैं कि पहाड़ो की चढ़ाई करनी हो या बर्फ पर धमाल करना हो, तो उनके पिता उन्हीं के समकक्ष कदमताल करें. इसलिए जब मैं अपने प्रोफेशनल काम से तीन सप्ताह पहले दुबई गया था, तब मैंने अपने काम के बीच समय निकाल कर स्कीइंग की ट्रेनंग लेने के साथ साथ प्रैक्टिस भी की थी. अब मेरे अंदर आत्मविश्वास आ गया है कि मैं अपने बेटों का इस बार रोमांचक खेलों में बराबर साथ दे सकता हूं.’’

रितिक रोशन की फिल्म ‘‘काबिल’’ 25 जनवरी को प्रदर्शित होने वाली है. मगर अपने बेटों की खुशी के लिए वह समय निकालकर उनके साथ क्रिसमस और नए वर्ष की छुट्टी मनाने फ्रांस के रिसोर्ट गए हैं. इस बार रितिक रोशन के साथ उनके दोनों बेटे, उनकी मां पिंकी रोशन व उनका चचेरा भाई भी गया है.

कृष्ण ठाकरान: उजाले की चाहत में एक चमकता सितारा

जब कभी खेलों की बात चलती है, तो जेहन में एक सवाल आता है कि भारत में खेल ज्यादा लोकप्रिय हैं या खिलाड़ी? कुश्ती में भारत के सुशील कुमार ने साल 2008 के बीजिंग ओलंपिक में जब तक ब्रौंज मेडल नहीं जीता था, तब तक बहुत से लोगों को यह भी नहीं पता था कि वे पहलवान हैं या मुक्केबाज.

ताजा मिसाल लें, तो इस बार के रियो ओलंपिक में दुनिया का दिल जीतने वाली भारतीय जिमनास्ट दीपा करमाकर के वजूद से भी ज्यादातर भारतीय अनजान थे. पहलवान साक्षी मलिक और बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु का भी कमोबेश यही हाल था.

जिन खिलाड़ियों का अभी जिक्र किया गया है, उन्होंने तो ओलंपिक मेडल जीत कर या शानदार प्रदर्शन कर के भारत की जनता के दिलों में जगह बना ली है, लेकिन बहुत से ऐसे खेल हैं, जो ओलंपिक में शामिल नहीं हैं, फिर भी उन में बहुत से भारतीय खिलाड़ियों ने वर्ल्ड लैवल पर मेडल जीत कर देश का नाम रोशन किया है.

ऐसे ही एक खेल का नाम है किक बौक्सिंग. यह खेल बौक्सिंग से मिलता जुलता है, बस फर्क इतना है कि इस में खिलाड़ी अपने हाथों के साथ साथ पैरों का भी इस्तेमाल कर सकता है.

इसी खेल से जुड़े खिलाड़ी कृष्ण ठाकरान ने सितंबर, 2016 में रूस में हुए वर्ल्ड किक बौक्सिंग डायमंड कप में लाइट कौंटैंट कैटीगरी में गोल्ड और किक कौंटैंट कैटीगरी में सिल्वर मेडल जीत कर नया इतिहास बनाया है. इतना ही नहीं, इसी साल भारत के विशाखापट्टनम में हुई नैशनल किक बौक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था और उस के बाद दक्षिण कोरिया में हुई एशियन किक बौक्सिंग चैंपियनशिप में ब्रौंज मेडल अपने नाम किया था.

कृष्ण ठाकरान की इस तिहरी उपलब्धि में एक बात गौर करने लायक है कि उन्होंने हाल ही में किक बौक्सिंग में अपने हुनर को आजमाया है, क्योंकि इस से पहले तो वे पिछले 5 सालों से केवल बौक्सिंग की प्रैक्टिस करते थे.

क्या किक बौक्सिंग के लिए अलग तरह की ट्रेनिंग लेनी पड़ती है?

मुक्केबाजी में सिर्फ हाथों का इस्तेमाल होता है, लेकिन किक बौक्सिंग में लात भी चलाई जाती है. ट्रेनिंग थोड़ी अलग होती है, पर चूंकि मुझे मुक्केबाजी आती थी, इसलिए इस खेल की ट्रेनिंग करने में कुछ खास दिक्कतें नहीं आईं.

हां, इस खेल में कोच की भूमिका बड़ी अहम होती है, खासकर रिंग में. वे ही हमें सामने वाले खिलाड़ी की कमजोरियों और ताकत के बारे में बताते हैं. अपनी तकनीक को कहां और कब इस्तेमाल करना है, इस को भी समझाते हैं.

क्या आप के साथ रिंग में कोई हादसा हुआ है?

रिंग में तो चोटें लगती रहती हैं, पर कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है.

लेकिन क्या इस खेल के लिए यह हादसे जैसा नहीं है कि भारत में यह बहुत कम लोगों द्वारा पसंद किया जाता है? सुना है कि सरकार भी इस खेल के खिलाड़ियों को ज्यादा सुविधाएं नहीं देती है? आप की क्या राय है?

आप ने सही कहा कि भारत में इस तरह के खेलों को अभी ज्यादा पसंद नहीं किया जाता है, पर विदेशों में यह खेल बहुत मशहूर है.

जहां तक सरकार से मिलने वाली सुविधाओं की बात है, तो ऐसी कोई खास मदद नहीं मिल पाती है. इंटरनैशनल लैवल पर 3 मेडल जीतने के बाद भी सरकार की ओर से कोई पौजिटिव रिस्पौंस नहीं आया है. इस से खिलाड़ियों का मनोबल टूटता है.

सच तो यह है कि किसी इंटरनैशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए खिलाड़ी को अपनेआप ही सारा खर्च उठाना पड़ता है. भारत में किक बौक्सिंग को बढ़ावा देने की ऐसी कोई ठोस कोशिश नहीं की जा रही है.

यहां एकेडमी की कमी हैं. कोच नहीं मिल पाते हैं. दक्षिण भारत के खिलाड़ी तो प्राइवेट स्पौंसरशिप पा लेते हैं, लेकिन उत्तर भारत के खिलाड़ियों के साथ ऐसा नहीं है. इस से गरीब घरों के अच्छे खिलाड़ी पैसों की कमी में बीच में ही खेल को छोड़ देते हैं, जो दुख की बात है.

आप का अगला लक्ष्य क्या है और इस के लिए आप क्या कर रहे हैं?

अगले साल के शुरू में यूरोप में किक बौक्सिंग की बड़ी प्रतियोगिता होगी, जिस के लिए मैं ने क्वालिफाई किया है. उस की प्रैक्टिस चल रही है.

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