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मैं एक लड़के से प्यार करती हूं. उस के घर वाले उस का विवाह किसी और से करवा रहे हैं. मैं क्या करूं.

सवाल

मैं अविवाहित युवती हूं, एक लड़के से प्यार करती हूं. वह भी मुझे प्यार करता है. लेकिन उस के घर वाले हमारी भिन्न जाति होने के कारण उस का विवाह किसी और से करवा रहे हैं. ऐसे में वह मुझ से विवाह नहीं कर सकता. लेकिन मैं उस से दूरी सह नहीं सकती. मैं क्या करूं, सलाह दें.

जवाब

वह लड़का सचमुच आप से प्यार करता होता और विवाह कर के आप के साथ जिंदगी गुजारना चाहता तो किसी न किसी तरह अपने घरवालों को आप से विवाह करने के लिए मना लेता.

वर्तमान स्थिति में आप का उस को भूल जाना ही बेहतर होगा. आप अपना ध्यान उस लड़के से हटा कर कहीं और लगाइए. माना कि ऐसा कर पाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं. समय के साथ जब कोई और लड़का आप की जिंदगी में आ जाएगा तो आप पुरानी सारी बातें धीरेधीरे भूल जाएंगी और यही आप के आने वाले जीवन के लिए सही होगा.

 

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मुझे शक है कि मेरी बीवी का कोई प्रेमी है. बीवी कहती है कि वह उसे छोड़ चुकी है. क्या करना चाहिए.

सवाल

मैं 28 साल का हूं. मेरी शादी को 14 महीने हो चुके हैं. मुझे शक है कि मेरी बीवी का कोई प्रेमी है. बीवी कहती है कि वह उसे छोड़ चुकी है. मैं उस से बहुत प्यार करता हूं. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

शादी का रिश्ता प्यार व यकीन पर ही चल पाता है. जब बीवी कह रही है कि वह प्रेमी का साथ छोड़ चुकी है, तो आप को यकीन करना चाहिए. आप उसे प्यार करते ही हैं, तो अपने प्यार को इतना ज्यादा कर दें कि उस में दूसरे की गुंजाइश न रहे.

 

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इस साल रेलवे ने लिए कई बड़े फैसले

2016 के आखिरी कुछ दिन. पर इस भारतीय रेल ने अपने यात्रियों के लिए कई अहम फैसले लिए. रेलवे ने साल 2016 में कई बड़े फैसले लिए. इन में से कई फैसलों से आप सीधे प्रभावित होंगे. रेल मंत्रालय द्वारा इस साल कई नए नियम बनाए गए और कई पुराने नियमों में संशोधन किए गए. हम आपको बताने जा रहे हैं रेलवे द्वारा लिए गए कुछ ऐतिहासिक फैसलों के बारे में.

खत्म हो गया रेल बजट

यह रेल मंत्रालय का ऐतिहासिक फैसला था. आजादी के पहले से चली आ रही रेल बजट को इस साल आम बजट में ही सम्मिलत कर दिया गया. 2017 में आने वाले यूनियन बजट के साथ रेल बजट भी पेश किया जाएगा.

टिकट में छूट के लिए आधार कार्ड जरूरी

वरिष्ट नागरिकों को रेलवे किरायों में छूट पाने के लिए, आधार कार्ड उपलब्ध करवाना अनिवार्य हो जाएगा. यह काउंटर टिकट लेने और ई-टिकट दोनों पर लागू होगा. यह नियम 1 अप्रैल 2017 से लागू किया जाएगा.

ट्रेनों में बढ़ेंगी आरएसी सीटें

रेलवे ने अहम फैसले का ऐलान करते हुए कहा कि सभी ट्रेनों में आरएसी सीटें बढ़ाईं जाएंगी. आरएसी सीट पर दो लोग बैठकर यात्रा करते हैं. रेलवे का ये मानना है कि कि ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को ट्रेन यात्रा करने का मौका मिले इसलिए यह फैसला लिया गया है. यह योजना 17 जनवरी 2017 से लागू होगी.

महज 92 पैसे में 10 लाख का बीमा

अगर आपने ई-टिकट बुक करवाया है तो आपको बस 92 पैसे के प्रीमियम पर 10 लाख रुपये तक का यात्रा बीमा कवर मिलेगा. यह वैक्लिप है, और आप चाहें तो इसे नहीं भी ले सकते हैं.

ट्रांसजेंडर को मिला 'तीसरे लिंग' का दर्जा

रेलवे और आईआरसीटीसी ने टिकट आरक्षण और टिकट रद्द कराने वाले फॉर्म में महिला एवं पुरुष के साथ-साथ 'ट्रांसजेंडर को तीसरे लिंग' के तौर पर शामिल कर लिया है.

एसएमएस के जरिए टिकट बुकिंग संभव

अब से एसएमएस के जरिए भी टिकट बुकिंग संभव हो गई है. 139 पर सारे डिटेल्स भेजने पर आप इस सुविधा का लुत्फ उठा सकते हैं. मोबाईल से भुगतान भी संभव कर दिया गया है.

काउंटर टिकट का ऑनलाइन कैंसल संभव

रेलवे ने इसी साल यात्रियों को एक बहुत बड़ी राहत दी. कस्टमर को पहले काउंटर टिकट का कैंसिलेशन के लिए काउंटर पर ही जाना होता था लेकिन अब आप आईआरसीटीसी की साइट पर काउंटर टिकट भी ऑनलाइन कैंसल कर सकते हैं.

अब चलती ट्रेन में भी टिकट पाना संभव

रेलवे ने यात्रियों को चलती ट्रेन में टिकट देने की सुविधा की शुरु की है. यह सुविधा अभी कुछ सुपर फास्ट ट्रेन में ही उपलब्ध है. इसके तहत टीटीई को टिकट वेंडिंग मशीन दी जाएगी.

ई-वॉलेट से टिकट के लिए भुगतान करने की सुविधा

इसी साल आईआरसीटीसी ने ई-वॉलेट से टिकट भुगतान की सुविधा भी शुरु की है. बैंक से या कार्ड से पेमेंट करने में थोड़ा समय लगता है इसके लिए तत्काल टिकट बुकिंग करवाने वालों को समय पर पेमेंट नहीं होने पर कन्फर्म टिकट नहीं मिलता. ई-वॉलेट से तेजी से पेमेंट किया जा सकता है.

कलमाडी-चौटाला को आईओ का आजीवन अध्यक्ष बनाने पर विवाद

सुरेश कलमाडी और अभय सिंह चौटाला को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) का आजीवन अध्‍यक्ष नामित किया गया है. चेन्‍नई में भारतीय ओलंपिक संघ की हुई वार्षिक आम बैठक में आम राय से यह फैसला लिया गया. इधर, दिल्ली में खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा है कि ये निुयक्तियां मंजूर नहीं हो सकती है, क्योंकि वे दोनों भ्रष्टाचार और आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं.

कलमाडी और चौटाला से पहले सिर्फ विजय कुमार मल्‍होत्रा (जिन्‍होंने 2011 और 2012 के बीच आईओए के कार्यवाहक अध्‍यक्ष रूप में कार्य किया) को आजीवन अध्यक्ष बनाया गया था. 1996 से 2011 तक आईओए के अध्‍यक्ष रहे कलमाडी को 2010 दिल्‍ली कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स घोटाले में 10 महीने की जेल भी हुई थी, लेकिन बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए.

खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा, ‘आईओए ने सुरेश कलमाडी और अभय सिंह चौटाला को आईओए का आजीवन अध्यक्ष बनाने के प्रस्ताव से हम हैरान हैं. यह हमें पूरी तरह से अस्वीकार्य है क्योंकि वे दोनों आपराधिक और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं.'

गोयल ने कहा, ‘सच्चाई यह है कि जब चौटाला और ललित भनोट आईओए का पदाधिकारी चुने गये थे तब आईओसी ने उन्हें निलंबित कर दिया था और इन दोनों को हटाने के बाद ही निलंबन हटाया गया.’

चौटाला दिसंबर 2012 से फरवरी 2014 तक आईओए अध्यक्ष रहे. उस समय अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने चुनावों में आईओए को निलंबित कर रखा था क्योंकि उसने चुनावों में ऐसे उम्मीद्वार उतारे थे जिनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल थे. आईओए अध्यक्ष के रूप में उनके चुनाव को आईओसी ने रद्द कर दिया था. आईओए संविधान में संशोधन करने के बाद ही आईओसी ने फरवरी 2014 में निलंबन हटाया था.

गोयल ने कहा कि मंत्रालय ने आईओए से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और इसके बाद ही इस मामले में उचित कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा, ‘हमने आईओए से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और इसके बाद हम स्थिति की समीक्षा करेंगे और फिर उचित कार्रवाई करेंगे. हमारी सरकार खेलों में सुशासन और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है.’

पहले अपनी कमाई बताएं राजनीतिक दल

राजनीतिक दल पारदर्शिता के नियमों और सूचना के अधिकार जैसी व्यवस्थाओं से परहेज क्यों करते हैं. अचरज नहीं कि नोटबंदी के जरिये कालेधन पर अंकुश लगा कर भ्रष्टाचार के खात्मे की बात हो रही है, तो कायदे से खुद को ऊपर रखने के कारनामे में अव्वल ये पार्टियां ही दिख रही हैं.

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सरकार नागरिकों से उनके जमा-खर्च के पाई-पाई का हिसाब पूछ सकती है, लेकिन नागरिक चाहे भी तो पार्टियों की कमाई की गुप्त-गंगोत्री का कोई इतिहास-भूगोल नहीं जान सकता है. ऐसे में लोगों के मन में पार्टियों के भ्रष्टाचार को रोकने के वादों और दावों पर भरोसा कैसे बनेगा?

चुनाव आयोग के मुखिया ने भी चिंता जाहिर की है कि ऐसे ही चलता रहा, तो चुनावी प्रक्रिया से लोगों का विश्वास खत्म हो जायेगा. आयोग ने हाल ही में 200 कागजी पार्टियों की एक सूची बनायी है, जो चुनाव नहीं लड़तीं, मगर चंदा बटोरती हैं और आयकर पर छूट हासिल करती हैं. आयोग ऐसी पार्टियों की आमदनी का लेखा जानने के लिए आयकर विभाग को चिट्ठी लिखने का मन बना चुका है. आयोग को आशंका है कि ऐसी पार्टियां कालेधन को सफेद करने का एक जरिया हैं. इस आशंका से चुनाव लड़ने और जीतनेवाली पार्टियां भी परे नहीं हो सकती हैं.

नियम की ढाल लेकर राजनीतिक दल इनकार की तलवार भांजते हैं कि 20 हजार रुपये तक के चुनावी चंदे के स्रोत का खुलासा हम क्यों करें! दलों की बढ़ती कमाई को देख कर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं नियमों के तिनके टांग कर काली कमाई का ऊंट तो नहीं छिपाया जा रहा है. खबर है कि राष्ट्रीय दलों को बीते वित्त वर्ष में 102 करोड़ रुपये का चंदा 20 हजार से ऊपर वाली श्रेणी में हासिल हुआ.

क्या वजह है, जो दल अपनी कमाई के अधिकांश के बारे में बताते हैं कि वह 20 हजार या इससे कम की नकदी में हासिल हुआ है? एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2004 से 2015 के बीच हुए 71 विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों ने 3368.06 करोड़ रुपये जमा किये, जिसनें नकदी में मिला चंदा 63 फीसदी था.

नियमों की आड़ लेकर इस नकदी को दलों ने अपने गुमनामी खाते में रखा. चूंकि कंपनियों से राजनीतिक दलों को सबसे ज्यादा चंदा हासिल होता है, सो चुनाव आयोग का यह सुझाव सराहनीय है कि राजनीतिक दलों के लिए दो हजार से ऊपर के चंदे का स्रोत बताना जरूरी बना दिया जाये. कितना अच्छा होता, अगर ऐसी पहलें पार्टियां खुद ही करतीं.

जल महोत्सव : हनुवंतिया टापू

सैलानियों के बीच जल पर्यटन का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है. भारत में जल पर्यटन की जगहों की कमी नहीं है. मगर इनकी कहीं चर्चा नहीं होती. हर भारतीय हमेशा विदेशी जल पर्यटन स्थलों की ही चर्चा करता रहता है. जल पर्यटन के नाम पर लोगों को थाईलैंड, मारीशस, दुबई, आस्ट्रेलिया, पेरिस, ग्रीस, पुर्तगाल, बैंकाक, स्विटजरलैंड, जर्मनी की ही याद आती है. जबकि भारत में अंडमान निकोबार द्वीप समूह के अलावा गोवा, उत्तराखंड में रिषिकेश के साथ ही मध्य प्रदेश में कई जल पर्यटन हैं.

मध्य प्रदेश में एक नहीं कई जल पर्यटन स्थल हैं. जिनमें होशंगाबाद जिले में स्थित तवा, जबलपुर के समीप बरगी, भोपाल में बड़ा तालाब, ग्वालियर के समीप तिगड़ा, शहडोल में बाण सागर, मंदसौर में गांधी सागर प्रमुख हैं. जबकि इनमें खंडवा जिले से 45 किलोमीटर दूर इंदिरा सागर बांध के पास स्थित हनुवंतिया टापू अति महत्वपूर्ण व काफी बड़ा जल पर्यटन स्थल है. हनुवंतिया टापू पर जल पर्यटन के लिए पहुंचने वाले पर्यटक दावा करते हुए नहीं थकते कि यह तो स्विटजरलैंड से भी बेहतर है. मध्य प्रदेश सरकार ने इस जल पर्यटन स्थल को लोकप्रिय बनाने के मकसद से ही इस वक्त 15 दिसंबर 2016 से 15 जनवरी 2017 तक हनुवंतिया टापू पर ‘जल महोत्सव’ का आयोजन किया है. जबकि इसी वर्ष की शुरुआत में 12 से 21 फरवरी के बीच दस दिवसीय जल महोत्सव आयोजित किया गया था, जिसमें दस दिन के अंदर दो लाख पर्यटक पहुंचे थे. इसी वजह से अब यह आयोजन गुलाबी ठंड के मौसम में पूरे एक माह के लिए किया गया है.

नर्मदा नदी के किनारे स्थित हनुवंतिया प्रकृति के अनुपम सौंदर्य से युक्त जल पर्यटन स्थल है. अथाह जल राशि के बीच असंख्य टापू, क्रूज, मोटर बोट, जल परी का रोमांच, पानी से हथखेलियां करते पर्यटक, वाटर स्पोर्टस की मनभावन और साहसिक गतिविधियां हर पर्यटक को अपने मोह पाश में बांध लेते हैं. हनुवंतिया के चारों तरफ सघन वन क्षेत्र वन्य प्राणी और रंग बिरंगे पंक्षी इसे और रमणीय बना देते हैं. इसी वजह से हनुवंतिया दूसरे जल स्थलों से अलग है.

मध्य प्रदेश पर्यटन निगम ने हनुवंतिया को ‘वाटर स्पोर्टस काम्पलेक्स’ के रूप में विकसित कर इसे अति आनंद दायक जल पर्यटन स्थल बनाया है. यहां पूरे वर्ष पर्यटकों को समुचित सुविधाएं देने के मकसद से काटेज, रेस्टारेंट और बोट क्लब संचालित है. वोट क्लब के अंतर्गत जल परी, मोटर बोट का लुत्फ उठाया जा सकता है. साल में किसी भी दिन यहां पर्यटक पिकनिक मनाने जा सकते हैं.

हनुवंतिया टापू पर आयोजित हो रहे जल महोत्सव में हर दिन हजारों पर्यटक आ रहे हैं. मगर 25 दिसंबर को क्रिसमस व रविवार की दोहरी छुट्टी की वजह से एक ही दिन में करीबन बीस हजार पर्यटक पहुंचे. यह पर्यटक बोटिंग करते, जल  से अठखेलियां करते व सेल्फी लेते हुए नजर आए. दिन के समय हाट एअर बलून का आनंद लिया. तो वहीं शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का मजा ले रहे हैं. सांस्कृतिक कार्यक्रम में निमाड़ी फोक गीत संगीत व नृत्य से जुड़े कत्थक डांसर संजय महाजन हर दिन अलग अलग तरह के कार्यक्रम पेश कर रहे हैं. वह अमरकंटक की महिमा, वीरा का व्याह, आरा रजवाड़ी मटकी, कान ग्वाला हास्यप्रद नृत्य, झालरिया नृत्य रणबाई की विदाई, गणगौर नृत्य, सफी गान व कबीर गान को अपने बाड़वाह ग्रुप के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं. यहां सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि हर दिन सैकड़ों विदेशी पर्यटक भी हनुवंतिया टापू पर जल पर्यटन का लुत्फ उठाते हुए नजर आ रहे हैं.

‘‘जल महोत्सव’’ में कई तरह के आयोजन हो रहे हैं. एक तरफ बच्चे ‘‘एम पी में दिल हुआ बच्चा सा’’ प्रदर्शनी का लुत्फ उठाते हुए सेल्फी खिंचवा रहे हैं. तो वहीं कुछ लोग क्राफ्ट मेले में खरीददारी करते हुए नजर आ रहे हैं. इतना ही नहीं कई पर्यटक टर पैरा सेंलिग, हवा में पैरा सेलिंग, बनाना बोट, स्पीड बोट, जल परी, क्रूज सहित दूसरी राइड का मजा ले रहे हैं.

इस बार जल महोत्सव का आकर्षण शिकारा और हाउस बोट हैं. शिकारा में बैठकर पर्यटक कश्मीर की डल झील का एहसास कर सकता है. तो वहीं केरल की तर्ज पर हाउस बोट में ठहरने का आनंद ले सकता है. जो लोग गुलाबी ठंड के बीच नया वर्ष मनाना चाहते हैं, उनके लिए तो यह जल महोत्सव हमेशा के लिए एक यादगार बना रहेगा.

यहां राष्ट्रीय स्तर की पतंग उड़ाने, सायकल चलाने व वाल क्लाइंबिंग प्रतियोगिताएं हो रही हैं. वाल क्लाइंबिंग प्रतियोगिता मे हिस्सा लेने के लिए 60 राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पहुंचे हैं. इन्ही में से दस खिलाड़ी चुने जाएंगे, जो कि 2020 में आयोजित ओलंपिक खेल में हिस्सा लेंगे.

कैसे पहुंचेंगे हनुवंतियाः

हवाई मार्ग सेः

हवाई जहाज से यात्रा करने वालों को इंदौर या भोपाल हवाई अड्डा उतरना होगा. वहां से सड़क मार्ग से हनुवंतिया पहुंचा जा सकता है. इंदौर से 130 किलोमीटर और भोपाल से 330 किलोमीटर की दूरी पर हनुवंतिया है.

रेल मार्ग सेः      

रेल मार्ग से यात्रा करने वाले पर्यटक इंदौर अथवा खंडवा रेलवे स्टेशन उतर कर सडक मार्ग से हनुवंतिया पहुंच सकते हैं. इंदौर रेलवे स्टेशन से 130 किलोमीटर और खंडवा रेलवे स्टेशन से 45 किलोमीटर की दूरी है. यदि भोपाल रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग अपनाएं, तो अब्दुल्ला गंज, नसरूल्ला गंज, हरदा, खंडवा व मूंदी होते हुए यानी कि 280 किलोमीटर की यात्रा कर हनुवंतिया पहुंच सकते हैं. मूंदी से हनुवंतिया सिर्फ 15 किलोमीटर दूर है.

कहां ठहरें:

हनुवंतिया जल महोत्सव का लुत्फ उठाने वाले पर्यटक इस एक माह के दौरान हनुवंतिया में ही बने टेंट में ठहर सकते हैं. यह टेंट दो तरह के हैं. प्रीमियम और डिलक्स टेंट. यह सभी टेंट वातानुकूलित हैं. इनमें  5 जनवरी से 15 जनवरी 2017 के बीच एक रात दो दिन रूकने का किराया प्रति व्यक्ति 8100 और 7100 है. एक टेंट में दो लोगों के ठहरने की व्यवस्था है. जबकि 25 दिसंबर 2016 से 4 जनवरी 2017 के बीच  है राशि बढ़कर 9100 और 8100 है. इस राशि में सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात्रि का भोजन भी शामिल है. जो पर्यटक इन टेंट में ठहरने के लिए पहले से आरक्षण करवाते हैं, उन्हें  इंदौर अथवा खंडवा से हनुवंतिया पहुंचाने व वापस छोड़ने की मुफ्त व्यवस्था की गयी है.

पर जो पर्यटक पूरे वर्ष यहां पर्यटन के लिए आते हैं, उनके ठहरने के लिए निगम द्वारा बनाए गए काटेज या हाउस बोट हैं. काटेज के लिए 3290 प्रति व्यक्ति तथा हाउस बोट के लिए प्रति व्यक्ति 5990 देना होगा.

देशभक्ति राष्ट्रगान गाने से नहीं आती

सुप्रीम कोर्ट ने न जाने किस कानून के अंतर्गत यह आदेश दिया है कि हर थिएटर में दिखाई जाने वाली फिल्म के प्रारंभ में राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य है और उस दौरान सब को खड़ा होना पड़ेगा. किसी याचिकाकर्त्ता की याचिका पर निर्णय देते समय यह आदेश दिया गया है. कोई भी व्यक्ति किसी भी मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज रखने का मौलिक अधिकार रखता है और सुप्रीम कोर्ट कईयों पर विचार कर लेता है और ज्यादातर पर सुनवाई कर के उन्हें खारिज कर देता है.

देशभक्ति के नाम पर राष्ट्रगान थोपना ठीक उसी तरह का काम है जैसा हिंदू होने के नाते सुबह सूर्य नमस्कार करना या मुसलमान होने के कारण नमाज पढ़ना या फिर ईसाई होने के कारण खाने से पहले प्रार्थना करना. ये सब काम जन्म से घुट्टी की तरह पिला दिए जाते हैं ताकि एक तरह की अंधभक्ति पैदा हो जाए और कोई भी धर्म या देश के फैसलों को तर्क, व्यावहारिकता, कथनी, स्वतंत्रताओं, निजता के अधिकारों के नाम पर चुनौती न दे सके. देशभक्ति आज असल में धर्म भक्ति का पर्याप्त बन गई है. आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट इस से ऊपर रहा करता था और धर्म को या उस की छाया को राजनीतिक फैसलों से बचाती रही है पर न जाने क्यों इस पीठ ने एक ऐसा फैसला दे दिया जो ऊपर से अच्छा लगते हुए भी अंदर चोट पहुंचाता है.

देश के लिए जीना, काम करना और मरना सब के लिए हर देशवासी को तैयार रहना चाहिए, क्योंकि इसी से सामूहिक शक्ति और सुरक्षा मिलेगी. जिस देश में शारीरिक सुरक्षा नहीं है- 2014 के रेप कांड के बाद रेप बंद नहीं हुए, धार्मिक दंगे बंद नहीं हुए, कर चोरियां कम नहीं हुईं, दहेज हत्याओं में कमी आई है पर इसलिए कि अब हर युवा मौत को दहेज हत्या नहीं कहा जाता. आर्थिक सुरक्षा नहीं है. सरकार जेब, अलमारी में रखे धन को 8 मिनट के भाषण से छीन सकती है और घंटों, दिनों अपना पैसा लेने के लिए लाइनों में खड़ा कर सकती है. सरकार की निगाह हर औरत के सोने पर है. जहां सरकार महंगाई नहीं रोक पा रही हो. जहां सरकार करों की भरमार करने में लगी है. मानसिक सुरक्षा नहीं है. भारतपाक सीमा पर हर रोज घुसपैठिए आते हैं और सैनिकों को मार डालते हैं. मध्य भारत में माओवादी सक्रिय हैं, खालिस्तानी आज भी अलग देश का सपना देख रहे हैं. ऐसे देश में देशभक्ति क्या मनोरंजन के समय राष्ट्रगान से आ जाएगी?

इस जिद को कुतर्क बताते हुए लेखक चेतन भगत ने यह तक कह डाला कि क्या सैक्स करने पहले राष्ट्रगान गाया जाए? यही सवाल उठ सकता है कि क्या हर किट्टी पार्टी से पहले राष्ट्रगान गाया जाए जैसे बहुत सी धार्मिक किट्टियों में आरती गा ली जाती है. देशभक्ति राष्ट्रगान गाने से नहीं आती. यह अंध अतार्किक  भक्ति है, जो कट्टर बना सकती है. देश महान उत्पादन से होता है, रातदिन मेहनत करने से बनता है, बरबादी रोकने से बचत करता है, नई खोजों से आगे दौड़ता है. वंदे मातरम या शांति पाठों से न धर्म बढ़ता है, न राष्ट्रगान से देश बनता है.

तलाक का तोहफा, झंझट और बढ़ा

कहते हैं पति पत्नी का रिश्ता जन्मजन्मांतर का होता है, लेकिन यह बात अब सिर्फ  कहने भर की रह गई है. आजकल 50 प्रतिशत पतिपत्नी को छोड़ कर ज्यादातर विवाहित जोड़े ऐसे हैं जो 2-4 साल ही प्यार से गुजार लें तो गनीमत है. इसी सब के चलते तलाक के लाखों मामले अदालतों में लंबित हैं. कितने केस तो ऐसे हैं, जिन में पति या पत्नी की जिंदगी दूभर हो जाती है. विदेशों खासकर पश्चिमी देशों की बात करें तो वहां की स्थिति तो और भी भयावह है. गनीमत यही है कि वहां पतिपत्नी के अलग होने या तलाक के बाद दूसरी शादी रचा लेने को हमारे यहां की तरह गंभीर नहीं, बल्कि हलकीफुलकी बात माना जाता है. यहां हम जिस मामले का जिक्र कर रहे हैं, वह रूस का है. इस मामले का एक पक्ष सरगेई का है और दूसरा उन की भूतपूर्व पत्नी मार्गरिटा स्वित्नेनको का. अधेड़ उम्र के ये दोनों लोग काफी अमीर हैं.

मास्को के पौश इलाके रूब्लयोव्का स्थित इन का आलीशान बंगला 2 मिलियन पाउंड का है, इस से इन की अमीरी का अनुमान लगाया जा सकता है. 12 साल के बेटे और एक छोटी बच्ची के अभिभावकों सरगेई और मार्गरिटा के बीच तलाक का केस चल रहा था, जिस में संपत्ति के बंटवारे की भी बात थी. अदालत ने दोनों का तलाक करा दिया. साथ ही आदेश भी दिया कि बंगले के बीच दीवार खड़ी कर दी जाए ताकि न पति पत्नी के हिस्से में जा सके और न पत्नी पति के हिस्से में. इस से दोनों में झगड़ा नहीं होगा. कोर्ट के आदेश पर बिल्डर ने बंगले के बीचो बीच एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी. दीवार बनने के बाद 45 वर्षीय मार्गरिटा दूसरे फ्लोर पर स्थित अपने बेडरूम में नहीं जा पा रही थीं, क्योंकि वहां तक जाने वाली सीढि़यां सरगेई के हिस्से में आई थीं. इस बात को ले कर मार्गरिटा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की, जिस में उन्होंने रूम में जाने वाले रास्ते पर बनाई गई दीवार की फोटो अपलोड की. दूसरी ओर उन के पति सरगेई का कहना है, ‘मैं ने अपनी पत्नी को नहीं छोड़ा, वह खुद ही मुझे छोड़ कर अलग हुई है. मैं उसे बहुत प्यार करता था. मैं ने कभी अलग होने के बारे में सोचा तक नहीं था, क्योंकि इस से हमारे बच्चों पर गलत असर पड़ता. हम दोनों के मातापिता के समझाने के बावजूद मार्गरिटा नहीं मानी और तलाक के लिए याचिका दायर कर दी. वहीं दूसरी ओर मार्गरिटा ने सरगेई पर बेवफाई का आरोप लगाते हुए कहा, ‘मैं अपने पति के अफेयर से बहुत परेशान थी.’

बहरहाल, जब दीवार को ले कर विवाद बढ़ा तो मार्गरिटा फिर कोर्ट चली गई. कोर्ट ने उस से कहा कि वह अपने बेडरूम तक जाने के लिए खुद की सीढि़यां बनवा ले. इस पर मार्गरिटा ने अपील कर के 7 मार्च, 2017 तक का समय मांगा है. उन की दलील थी कि अभी उन के पास सीढि़यां बनवाने के लिए पैसे नहीं हैं.

मार्गरिटा ने बिल्डर पर भी आरोप लगाया है कि बंगले के विभाजन के दौरान उस ने कोर्ट के आदेश का उचित तरीके से पालन नहीं किया. दीवार जिस समय बनाई गई, तब मार्गरिटा की दोस्त उस के बेडरूम में सो रही थी. नींद खुलने पर वह नीचे आने लगी तो रास्ता बंद था. उस ने पूरी बात मार्गरिटा को बताई. तब मार्गरिटा ने पुलिस की मदद से अपनी दोस्त को नीचे उतारा. दूसरी मंजिल की ऊंचाई चूंकि काफी है, इसलिए कोई दुर्घटना भी हो सकती थी.

शर्मनाक : सैक्स सुख से होते काम

अब अपने हर काम में पैसे की मांग के साथसाथ सैक्स की मांग भी होने लगी है. अगर कोई लड़की यूनिवर्सिटी में किसी सब्जैक्ट पर रिसर्च करना चाहती है, तो जिस के डायरैक्शन में वह रिसर्च कर रही है, वह प्रोफैसर चाहे बूढ़ा हो या जवान, उस से सैक्स संबंध बनाने को तैयार रहता है. कई बूढ़े प्रोफैसर अपनी पोती से भी कम उम्र की छात्रा से सैक्स संबंध बना लेते हैं, तो कई स्कूल टीचर अपने स्कूल की 7वीं, 8वीं और 9वीं जमात में पढ़ने वाली छात्राओं से भी पढ़ाने के बहाने उन के जिस्म के नाजुक अंगों पर हाथ फिराते हुए उन्हें सैक्स के लिए उकसाते रहते हैं.

लोगों में सैक्स की लालसा इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि रात में उन के बच्चे ठीक से सो भी नहीं पाते हैं कि वे सैक्स संबंध बनाने लगते हैं. उन के मजे को बच्चे समझ जाते हैं. मांबाप की इस लापरवाही का नतीजा यह होता है कि उन के बच्चे भी अपने सगे भाईबहन से सैक्स संबंध बना कर उस के मजे लेने लगते हैं, जिस से कई बार तो कम उम्र की लड़कियां भी पेट से हो जाती हैं. सैक्स संबंधों की लालसा लोगों में इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि वे अपने रिश्तों की भी परवाह नहीं कर रहे हैं. बूआ अपने सगे भतीजे से सैक्स संबंध बना रही है, तो ससुर अपने बेटे की बीवी से सैक्स संबंध बना कर अपनी मर्यादा को भूल रहा है. बेटे की गैरहाजिरी में ससुर बहू के साथ शराब पी कर सैक्स संबंध बना रहा है और दादा अपनी ही पोती को हवस का शिकार बना रहा है. उन के ऐसे संबंधों पर कोई शक भी नहीं कर पाता है. भाभी को अपने प्रेमजाल में फंसाने के लिए देवर शहर से उस के लिए ऐसेऐसे तोहफे ले कर आते हैं कि भाभी खुश हो कर समझ जाती है कि उस का देवर उस के लिए ये सब चीजें क्यों लाता है. खुश हो कर भाभी भी मौका देख उस की बांहों में समा जाती है और फिर देवर अपनी भाभी से सैक्स संबंध बना कर अपने लाए हुए तोहफों की कीमत वसूल कर लेता है.

आजकल हर काम पैसे और सैक्स से होने लगे हैं. अगर किसी बाबू और अफसर से अपना कोई काम कराना है, तो उन्हें पैसे और सैक्स का सुख दे दो तो वे फौरन उन का काम कर देते हैं. अब तो बड़ेबड़े उद्योगपति भी अपने कामों को कराने के लिए नेताओं और अफसरों को पैसे और सैक्स सुख मुहैया कराने लगे हैं. एक उद्योगपति ने अपनी बेटी से कहा कि एक आईएएस अफसर से अपने बिलों का भुगतान लेना है. पैसे पहुंचा दिए हैं, लेकिन वह बिलों को पास नहीं कर रहा है. उस के नीचे के अफसर से बात की, तो उस ने बताया कि उन के बड़े साहब जरा रंगीनमिजाज हैं, इसलिए उन्हें शबाब की पार्टी दे दो. बेटी को उन की सेवा के लिए भेज दो. छोटी बहन को तुम अच्छी तरह समझा देना. बड़ी बेटी ने अपनी छोटी बहन को समझा कर उसे उन साहब की सेवा में उन के पास भेज दिया और दूसरे दिन ही उन के सभी बिल पास कर के उन्हें उन का पैसा मिल गया था.

इसी तरह से एक फिल्म हीरोइन जैसी नर्स दूरदराज के गांव में ड्यूटी देते हुए परेशान हो चुकी थी. तब एक नर्स ने उसे बताया कि किसी दिन बड़े डाक्टर साहब को सैक्स सुख दे दे, तो उस का तबादला दूसरे ही दिन हो सकता है. यह सुन कर उस ने ऐसा ही किया और दूसरे दिन ही उस का तबादला अपने शहर में हो गया. इसी तरह से एक टीचर एक दूरदराज के गांव में ड्यूटी दे रही थी. महीने में एक बार ही वह अपने घर पर आती थी. तबादले के लिए अर्जी देतेदेते वह परेशान हो चुकी थी. तब एक दिन किसी ने उसे बताया कि वह अपने तबादले के लिए कालेज में पढ़ने वाली बेटी को उस अफसर की सेवा में भेज दे, तो उस का तबादला हो सकता है.

यह सुन कर वह उस से बोली, ‘‘ऐसे काम के लिए वह कैसे तैयार होगी?’’ उस ने समझाते हुए कहा, ‘‘वह तैयार हो जाएगी. सैक्स के लिए तो आजकल लड़कियां मरी जाती हैं. अब तक न जाने कितने लड़कों के साथ वह सैक्स के मजे ले चुकी होगी.’’

यह सुन कर वह सब अपनी बेटी से कहने के लिए तैयार हो गई थी. घर आ कर उस ने अपनी बेटी से इस बाबत कहा, ‘‘बेटी, मेरे तबादले के लिए तुम्हें एक रात मेरे अफसर के पास रहना है.’’

‘‘क्यों नहीं मम्मी,’’ सुन कर बेटी ने खुशी से मुसकराते हुए कहा. अपने तबादले की अर्जी दे कर वह खुशी से मुसकरा उठी. वह अफसर उस की खूबसूरत बेटी से सैक्स सुख पा कर इतना ज्यादा खुश हुआ था कि दूसरे दिन ही उस के मनचाहे स्कूल में तबादला कर दिया गया था. तबादले का आदेश देख कर वह यह सोच रही थी कि अगर उसे मालूम होता, तो वह बेटी को पहले ही उन की सेवा में भेज कर अपना तबादला करवा चुकी होती. उस के बाद तो उस ने दूसरे लोगों के तबादले कराने का उन से ठेका ही ले लिया था. उन से पैसे ले कर वह अपनी बेटी और उस की खूबसूरत सहेलियों को उन की सेवा में भेज कर आज तक उन्होंने न जाने कितने ही लोगों के तबादले करवा दिए हैं. एक खूबसूरत लड़की के इम्तिहान में कम नंबर आए थे, इसलिए एक बड़े कालेज में उस का दाखिला नहीं हो पा रहा था. जब उसे अपनी एक सहेली से मालूम हुआ कि तुम वहां की प्रिंसिपल के बेटे से दोस्ती कर उसे सैक्स सुख दे दो, तो उन का बेटा अपनी मां से कह कर कालेज में दाखिला दिलवा सकता है. सुन कर उस ने ऐसा ही किया था. प्रिंसिपल के बेटे ने अपनी मां से कह कर उस का दाखिला उन के कालेज में करवा दिया था. यह देख कर वह लड़की समझ चुकी थी कि आज जो काम आसानी से नहीं हो सकता है, उसे सैक्स सुख दे कर कराया जा सकता है.

राजनीति का क्षेत्र भी इस से अछूता नहीं रहा है. हमारे बड़े बुजुर्ग नेता भी खूबसूरत लड़कियों से सैक्स सुख पाने को लालायित रहते हैं. कई खूबसूरत लड़कियां जो कभी उन की पार्टी की साधारण कार्यकर्ता थीं, वे भी आज अपने बड़े नेताओं की कृपादृष्टि से बड़ेबड़े पदों पर पहुंच कर सत्ता का सुख भोग रही हैं. अब देश की बहुत सी औरतों की यह सोच बन चुकी है कि अपने मतलब के लिए किसी को सैक्स सुख देने से उन का बिगड़ेगा ही क्या? यही सोच मर्दों की बन चुकी है कि अगर किसी काम को कराने के लिए अपनी बहन, बेटी और बीवी को उन के साथ सुला देंगे, तो उन का कुछ नहीं बिगड़ेगा, बल्कि उस से काम आसानी से हो जाएगा.           

पर्ल ग्रे ने छोड़ा युवराज मल्होत्रा का साथ

टीवी सीरियल निर्माता पर्ल ग्रे का भी जवाब नहीं. आखिर वह तीसरी बार रिश्ते से अलग हो गयीं. पर्ल ग्रे की जिंदगी किसी सीरियल या फिल्म से कम रोचक नहीं है. मुंबई पहुंचकर उन्होंने एक सीरियल निर्माता से विवाह कर उनके सीरियल ‘‘सुहाना सफर’’ का लेखन किया था. पर बाद में अपने पति को तलाक देकर अपने बेटे अंश (आज उनका यह बेटा 21 वर्ष का हो गया है) को लेकर अलग रहना शुरू किया तथा जीटीवी की प्रोग्रामिंग टीम में नौकरी करना शुरू कर दिया. जीटीवी की नौकरी छोड़ते ही वह सीरियल निर्माता बन गयी और उनकी मुलाकात सीरियल निर्देशक राजन साही से हुई. दोनों 2000 में शादी के बंधन में बंध गए. राजन साही से उन्हें एक बेटी इशिका, (जो कि अब 14 साल की है) है. राजन साही से आठ साल बाद यानी 2008 में तलाक हो गया था.

2009 में पर्ल ग्रे की जिंदगी में अभिनेता युवराज मल्होत्रा आ गए. युवराज मलहोत्रा, पर्ल ग्रे से उम्र में आठ साल छोटे हैं. मगर दोनों की प्रेम भरी जिंदगी चलती रही. 2011 में अपने इस संबंध को स्वीकार करते हुए पर्ल ग्रे ने कहा था कि वह युवराज मल्होत्रा के संग रहती हैं. साथ में उनका बेटा व बेटी रहती है, मगर वह युवराज मल्होत्रा से शादी नही रचाएंगी. दो बार तलाक के अनुभव ने उन्हे बहुत कुछ सिखा दिया है. पर वह युवराज के साथ अपना रिश्ता कभी खत्म नहीं करेंगी.

लेकिन सूत्रों पर यकीन किया जाए, तो 2016 के अंत में यह खबर आ ही गयी कि पर्ल ग्रे ने अभिनेता युवराज मल्होत्रा से हमेशा के लिए खुद को अलग कर लिया है. अब वह एक बार फिर अकेली हो गयी हैं.

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