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हसबैंड की प्रेमिका : ये कहानी आपकी आंखों में आंसू ला सकती है

इस कहानी में सिर्फ 3 कैरेक्टर हैं, मैं यानी पत्नी, मेरे पति और उन की प्रेमिका. 3 किरदारों की कहानी क्या होगी, यह सुन कर आप को थोड़ा अजीब जरूर लगेगा,

लेकिन सच मानिए आप बोर नहीं होंगे. सब से पहले मैं आप को अपना परिचय देती हूं. मेरा नाम विधि है. इस कहानी में दूसरे अहम किरदार यानी मेरे पति का नाम देव है और कहानी के तीसरे और सब से खास किरदार, जिस की वजह से कहानी में विभिन्न मोड़ आए, वह एक प्रेमिका है, जिस के किरदार के बारे में आप को आगे पता चलेगा.

देव से मेरी शादी को अभी केवल एक साल हुआ था. हमारी अरेंज मैरिज थी. मैं बनारस की हूं और देव मेरठ के. वह मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर हैं. देव के और मेरे पिता बड़े गहरे दोस्त हैं. सच तो यह है कि देव के पिता को मैं बचपन से पसंद थी और वह चाहते थे कि मेरी और देव की शादी हो जाए. देव सुंदर भी थे और होनहार भी, इसलिए शादी में कोई प्रौब्लम नहीं थी.

सच तो यह है कि शादी के बाद देव ने मुझे जितना प्यार दिया, मैं निहाल हो गई. मुझे लगा ही नहीं कि हमारी अरेंज मैरिज है. सब कुछ लव मैरिज जैसा था. हम हनीमून के लिए उत्तराखंड की पहाडि़यों में गए और वहां हम ने खूब एंजौय किया. देव भले ही गणित के प्रोफेसर थे, लेकिन गणित की तरह बोरिंग बिलकुल नहीं थे. वह मुझे जोक्स सुनासुना कर हंसाते रहते थे. मुझे कई बार आश्चर्य होता था कि उन जैसे जिंदादिल व्यक्ति ने गणित जैसा बोरिंग सब्जेक्ट क्यों चुना?

देव हमेशा बहुत खुशखुश नजर आते थे. एक दिन अचानक मुझे उन की खुशी के पीछे छिपे दर्द का पता चला. यह वाकई बहुत चौंका देने वाला था.

देव के कालेज में एनुअल फंक्शन था. उसी फंक्शन में मेरी मुलाकात सांची नाम की एक लड़की से हुई. सांची देव की स्टूडेंट थी. उस के साथ बातचीत में ही मुझे पता चला कि उस कालेज में इंग्लिश की एक प्रोफेसर थी रोशेल, जो सांस्कृतिक विभाग की अध्यक्ष भी थीं. कालेज में जितनी भी कल्चरल एक्टिविटीज होती थीं, प्रमुख बन कर सब रोशेल ही करवाती थीं. इतना ही नहीं, कालेज के एनुअल फंक्शन में रोशेल गिटार भी बजाती थीं, जबकि देव गाना गाते थे.

देव गाना भी गाते हैं, जान कर मैं चौंकी. मेरा चौंकना स्वाभाविक ही था, क्योंकि इतनी अवधि में मैं इस बात को नहीं जान सकी थी. देव जोक्स बहुत अच्छे सुनाते हैं, यह तो मैं जानती थी. लेकिन वह गाते भी बहुत अच्छा हैं, मुझे जरा भी मालूम नहीं था. मैं ने कभी उन्हें गाते सुना भी नहीं था. बाथरूम सिंगर के तौर पर भी नहीं.

मैं ने जब इंग्लिश की उस प्रोफेसर रोशेल के बारे में सांची से कुछ और जानना चाहा तो वह थोड़ी असमंजस में पड़ गई. मुझे लगा कि सांची मुझ से कुछ छिपा रही है. बहुत पूछने पर उस ने केवल इतना ही बताया कि जब से रोशेल कालेज छोड़ कर गई है, तब से देव ने कभी किसी फंक्शन में गाना नहीं गाया.

यह सुन कर मेरी बेचैनी बढ़ गई. मुझे किसी अनजाने खतरे की गंध आने लगी.

अगले दिन ही मैं ने सांची को घर बुलाया. मेरा सामना करते हुए वह असहज महसूस कर रही थी. शायद वह भी मेरे मन में चल रहे विचारों को भांप गई थी. देव घर पर नहीं थे. मैं ने सांची के लिए कौफी बनाई और फिर उस के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू किया. वह मुझ से जल्द ही खुल गई. उस ने देव को कुछ ना बताने की कसम ले कर मुझे जो बताया, वह चौंका देने वाला था.

दरअसल, देव और रोशेल एकदूसरे से बहुत प्यार करते थे. उन की लव स्टोरी पूरे कालेज में प्रसिद्ध थी. कालेज के स्टूडेंट उन के प्यार के किस्से बडे़ चटखारे लेले कर बयान करते थे. वे दोनों कालेज में लव बर्ड के नाम से मशहूर थे.

‘‘अगर ऐसा था तो दोनों ने शादी क्यों नहीं की?’’ मैं ने बेचैनी से पूछा.

‘‘मैं ज्यादा तो नहीं जानती, बस कालेज में यह अफवाह थी.’’ सांची थोड़ा हिचकिचाते हुए बोली, ‘‘प्रोफेसर साहब के पिता ने उन का रिश्ता आप के साथ पक्का कर दिया था, यही वजह थी उस संबंध के टूटने की. प्रोफेसर साहब अपने पिता की बहुत इज्जत करते थे, इसलिए उन्होंने पिता को कभी भी रोशेल के बारे में नहीं बताया. बस, उस के बाद रोशेल मैम कालेज छोड़ कर चली गई थीं.’’

‘‘अब कहां हैं रोशेल?’’

‘‘वह नोएडा के एक कालेज में शिफ्ट हो गई थीं. मुझे तो बस इतना पता है कि उन दोनों के प्यार के टूटने से पूरा कालेज दुखी था.’’

सांची की बात सुन कर मैं सन्न रह गई.

देव सचमुच बहुत अच्छे इंसान थे. उन्होंने मुझे कभी इस बात का अहसास तक नहीं होने दिया था कि वह कभी किसी और से प्यार करते थे. रोशेल को पूरी तरह भुला कर उन्होंने मुझ से सच्चा प्यार किया था.

एकाएक मैं खुद को अपराधी महसूस करने लगी, क्योंकि मैं उन दोनों के प्यार के बीच आ गई थी. शाम को देव आए. वह हमेशा की तरह बड़े खुश थे. मेरे लिए नई साड़ी लाए थे. आते ही उन्होंने मुझे गले लगाया, फिर मुझे नई साड़ी पहन कर दिखाने को कहा, साथ ही जोक्स भी सुनाए.

उन में कुछ नहीं बदला था. शायद मेरे अंदर ही कुछ बदल गया था. उस रात मैं सो न सकी. मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे वह प्यार रोशेल का था, जिसे मैं ने छीन लिया था.

काश! मैं सांची से न मिली होती. काश! मैं ने उस से वह सब कुछ न पूछा होता.

एकाएक मेरा मन रोशेल से मिलने के लिए छटपटाने लगा.

अगले दिन मैं फिर सांची से मिली और उस से कहा कि मैं नोएडा जा कर एक बार रोशेल से मिलना चाहती हूं. सांची ने मुझ से मना करते हुए कहा भी कि मुझे यह सब नहीं करना चाहिए. लेकिन मैं उस की कोई बात सुनने को तैयार नहीं थी. आखिर मैं ने सांची को अपने साथ नोएडा चलने के लिए तैयार कर ही लिया.

2 दिनों बाद हम नोएडा में थे. मैं ने देव से बहाना बना दिया था कि मेरी एक फ्रैंड की बर्थडे पार्टी है. मैं पूरा दिन उसी में व्यस्त हूं. देव ने मुझ से कोई पूछताछ नहीं की. सुबह ही मैं और सांची नोएडा के लिए निकल गए. मेरठ से नोएडा की दूरी करीब 3 घंटे की है. नोएडा में हम सीधे रोशेल के कालेज पहुंचे.

सांची ने भी रोशेल को जल्दी ढूंढ निकाला. वह तभी अपना लेक्चर खत्म कर के स्टाफ रूम में आई थी. मैं ने रोशेल को देखा तो बस देखती रह गई.

सच में वह बहुत खूबसूरत थी. उस ने केप शर्ट और लाइट ब्लू कलर की नैरो जींस पहन रखी थी. बालों की हाई पोनी बांधी हुई थी और साइड फ्लिक्स निकली थी. बात करते हुए वह बीचबीच में हंसती थी तो उस की साइड फ्लिक्स उस के गालों को छू जाती थी.

सांची को देखते ही वह पहचान गई और उस से बड़ी गर्मजोशी से मिली. आखिर सांची ने रोशेल से 2 साल इंग्लिश पढ़ी थी. सांची से मिलते ही रोशेल ने पूछा कि उस की पढ़ाई कैसी चल रही है?

उस के बाद सांची ने रोशेल से मेरा इंट्रोडक्शन भी कराया. उस ने मेरा परिचय कराते हुए बताया कि ये प्रोफेसर देव की वाइफ विधि हैं. नोएडा किसी पर्सनल काम से आई थीं तो मेरे साथ यूनिवर्सिटी भी आ गईं.

‘‘देव की वाइफ…’’ सुन कर रोशेल चौंकी.

इस के बाद उस ने बड़े अलग तरह से मेरी तरफ देखा. कुछ सैकेंड के लिए रोशेल की नजरें मेरे चेहरे पर ही जमी रहीं.

‘‘मैं ने सांची से आप की बहुत तारीफ सुनी थी,’’ मैं ने उस मौन को तोड़ा, ‘‘इसलिए आप से मिलने से खुद को रोक नहीं पाई.’’

‘‘ऐसी कोई बात नहीं है.’’ वह मुसकराई. लेकिन उस की मुसकराहट छनी हुई थी, ‘‘तारीफ के लायक तो आप हैं.’’

मैं कुछ नहीं बोली.

इस के बाद हम दोनों के बीच बातचीत का लंबा सिलसिला शुरू हो गया. बात करतेकरते बीचबीच में उस के बालों की फ्लिक्स उस के चेहरे पर आ जाती तो वह और खूबसूरत लगने लगती.

वह जैसे भूल गई थी कि मेरे साथ सांची भी है. जल्दी ही हम दोनों अच्छी दोस्त बन गईं. रोशेल मुझे और सांची को अपने घर ले गई और हमें लंच कराया.

घर बहुत साफसुथरा और करीने से सजा हुआ था. घर की दरोदीवार और कर्टंस के कलर रोशेल के क्लासिक टेस्ट का बखान कर रहे थे.

तब तक शायद उसे यह मालूम नहीं था कि मैं उस के और देव के प्रेमप्रसंग के बारे में काफी कुछ जानती हूं. हम दोनों आपस में कुछ इस तरह घुलमिल गए थे, जैसे बचपन की बिछड़ी 2 सहेलियां हों.

मैं जब उस के घर से विदा हुई तो मैं ने उसे मेरठ आने का इनविटेशन दे दिया. वैसे भी 2 दिन बाद मेरी फर्स्ट मैरिज एनिवर्सरी थी.

मेरठ आने के नाम पर वह फिर थोड़ा अनइजी हो गई. लेकिन जब मैं ने उस पर दबाव डाला तो वह मान गई. इस बीच चुपचाप बैठी सांची हम दोनों को देख रही थी.

जब हम नोएडा से वापस मेरठ लौट रहे थे तो सांची ने मुझ से थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, ‘‘मैम, यह आप ठीक नहीं कर रही हैं.’’

‘‘क्या?’’

‘‘रोशेल मैम को अपने घर बुला कर. प्रोफेसर और रोशेल मैम जब इतने टाइम बाद फिर मिलेंगे, तो…’’

‘‘हूं… मैं सब समझती हूं.’’ मेरी आवाज में गंभीरता थी, ‘‘सच कहूं सांची, जब से मुझे यह बात पता चली है, मुझे लग रहा है जैसे मैं अपराधी हूं. मेरी वजह से ही देव और रोशेल अलग हुए. वे दोनों ही कितने अच्छे हैं. अगर उन की शादी हुई होती तो कितने खुश रहते.’’

‘‘यह आप क्या कह रही हैं मैम?’’ सांची बुरी तरह चौंक गई, ‘‘कहीं आप उन दोनों को मिलाने के बारे में तो नहीं सोच रही हैं?’’

‘‘अगर वे दोनों मिल गए…’’ मैं खोएखोए अंदाज में बोली, ‘‘तो सब से अच्छा मुझे लगेगा सांची.’’

‘‘मैमऽऽ’’ हैरानी से सांची की चीख निकल गई, ‘‘आप भूल रही हैं, आप की प्रोफेसर देव से शादी हो चुकी है. आप पत्नी हैं उन की.’’

‘‘पत्नी हूं, इसीलिए तो यह बात कह रही हूं. पत्नी का अर्थ है अर्द्धांगिनी. पति के सुखदुख में आधेआधे की साथी. पत्नी का मतलब यह नहीं कि वह अपने पति को सिर्फ अपने पल्लू से बांध कर रखे. पत्नी का मतलब यह भी है कि वह पति के सुख का ध्यान रखे. और इस में हर्ज ही क्या है? ऐसे कितने परिवार हैं, जहां एक ही घर में एक आदमी के साथ 2 पत्नियां रहती हैं. रोशेल से मिल कर मुझे पूरा भरोसा हो गया है कि हम दोनों एक घर में 2 अच्छी बहनों की तरह रह सकती हैं.’’

‘‘मैम…’’ सांची को अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था, ‘‘मुझे उम्मीद नहीं थी कि आप अपने हाथों से अपने हंसतेखेलते परिवार को तबाह करेंगी. इस से तो अच्छा होता कि मैं इस बारे में आप को कुछ बताती ही नहीं.’’

‘‘ऐसी बात नहीं है सांची,’’ मैं उस की तरफ देख कर मुसकराई, ‘‘तुम सच में एक अच्छी लड़की हो, केयरिंग. लेकिन मुझे मेरे एक सवाल का जवाब दो, तुम्हारे प्रोफेसर ने मुझे आज तक हर खुशी दी. मुझ से उतना ही प्यार किया, जितना वह शायद रोशेल से करते. मुझे कभी इस बात का अहसास तक नहीं होने दिया कि उन की जिंदगी में कोई और लड़की भी थी.

‘‘उन्होंने अपने पति होने का फर्ज पूरी तरह निभाया. लेकिन आज जब मुझे पता चला कि उन की जिंदगी में कोई और लड़की थी तो तुम्हीं बताओ, एक पत्नी होने के नाते मेरा क्या फर्ज है? मैं अपनी मांग में जो सिंदूर भर रही हूं, गले में जो मंगलसूत्र पहन रही हूं, उस पर पहला हक किसी और का था. तो क्या एक अच्छी पत्नी होने के नाते मेरा फर्ज नहीं बनता कि मैं अपने पति को उस लड़की से मिलाऊं?’’

सांची मेरी बात सुन कर निरुत्तर हो गई. शायद मैं जिस तरह की बात कर रही थी, वह बात कोई साधारण लड़की नहीं कर सकती थी. इसीलिए वह चौंक रही थी. इस के बाद मेरे जीवन के अगले कुछ दिन बहुत चौंका देने वाले थे.

रोशेल मेरे इनविटेशन पर घर आई. हमारी मैरिज एनिवर्सरी के उपलक्ष्य में वह फूलों का एक बड़ा सुंदर बुके भी लाई. रोशेल को अचानक अपने घर पर देख कर देव चौंके. मैं ने देव को बताया, ‘‘सांची के जरिए हम दोनों की मुलाकात हुई थी और हम पहली ही मुलाकात में बड़े अच्छे दोस्त बन गए थे.’’

रोशेल कोई एक घंटा घर पर रही और वह सारे समय बस मुझ से ही बातें करती रही. देव की तरफ उस ने निगाह उठा कर भी नहीं देखा. बस, उन दोनों के बीच सामान्य हायहैलो हुई. कुछ ऐसे जैसे एकदूसरे को पहचानते ही न हों.

इस के बाद रोशेल चली गई. फिर कुछ दिनों बाद मैं देव को बहाने से नोएडा ले गई. अब मैं अकसर उन दोनों को मिलाने के बहाने खोजती रहती थी. उन दोनों को पता ही नहीं था कि मेरे मन में क्या चल रहा है.

रोशेल के बर्थडे पर भी हम मिले. मैं ने देव से कुछ गुनगुनाने का आग्रह किया तो रोशेल भी खुद को गिटार बजाने से नहीं रोक पाई. वह यादगार शाम थी. अब वे दोनों एकदूसरे से हलकीफुलकी बात भी कर लिया करते थे. लेकिन फिर भी उन दोनों के बीच एक अनदेखा, अनकहा सा फासला था.

कहते हैं, प्यार एक आग का दरिया होता है और मैं उस आग को हवा दे रही थी. देव के प्यार ने मेरे अंदर एक अजीब सा हौसला भर दिया था. मुझे किसी बात का डर नहीं रहा था. मैं तो चाहती थी कि बस देव खुश रहे. लेकिन मेरी चालाकी ज्यादा दिनों तक नहीं चली. जल्द ही देव को पता चल गया कि मुझे उस के और रोशेल के प्यार के बारे में सब कुछ मालूम है.

फिर तो सारी परिस्थितियां बड़ी तेजी से बदलीं. मेरे लिए वह सब से बड़ा झटका था, जब एकाएक रोशेल गायब हो गई. मुझे उस का एक लैटर मिला. लैटर बहुत संक्षिप्त सा था. रोशेल ने लिखा था—

विधि,

तुम से मिली, अच्छा लगा. मुझे लगता था कि देव का और मेरा प्यार अद्भुत है. लेकिन गलत थी मैं. तुम से मिल कर लगा कि देव सचमुच बहुत सौभाग्यशाली हैं, जो उन्हें तुम्हारे जैसी पत्नी मिली. तुम ने मुझे और देव को मिलाने की जो कोशिश की, वह शायद ही दूसरी कोई पत्नी कर पाती. मैं भी नहीं.

इसी से साबित होता है कि देव की खुशियां तुम्हारे लिए कितना मायने रखती हैं. देव के साथ तुम बहुत खुश रहोगी और देव तुम्हारे साथ. मैं नोएडा से कहीं दूर जा रही हूं, कहां, मुझे खुद नहीं मालूम. मुझे तलाशने की भी कोशिश मत करना. पहले सिर्फ देव की यादें थीं, अब तुम्हारी यादें भी साथ हैं. मैं उन यादों के सहारे जिंदगी गुजार लूंगी.

—तुम्हारी रोशेल

उस पत्र को पढ़तेपढ़ते मेरी आंखों में आंसू आ गए. देव ने भी वह पत्र पढ़ा, वह भी भावुक हो उठे. फिर हम दोनों ने रोशेल को सब जगह तलाशने की कोशिश की, लेकिन वह हमें कहीं नहीं मिली.

आज इस घटना को कई साल बीत चुके हैं. अब देव की और मेरी एक बेटी भी है. रोशेल तो फिर हमें कभी नहीं मिली, लेकिन उस की यादें आज भी हमारे साथ हैं. रोशेल आज भी हमारे परिवार का एक हिस्सा है. उस का प्यार मेरे और देव के साथसाथ है.

रास न आई बाहुबली : इश्क की आग में अंधा हो गया था ये शख्स

लखनऊ के पारा इलाके की रामविहार कालोनी में रिटायर्ड सूबेदार लालबहादुर सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी रेनू के अलावा 2 बेटियां आरती, अंतिमा और बेटा आशुतोष था. वैसे वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले थे. 24 साल का आशुतोष रामस्वरूप कालेज से बीबीए करने के बाद बाराबंकी जिले में एल एंड टी कंपनी में नौकरी करता था. 26 साल की आरती बीटेक की पढ़ाई पूरी कर के बीटीसी के दूसरे साल में पढ़ रही थी. जबकि 17 साल की अंतिमा सेंट मैरी स्कूल में इंटरमीडिएट की छात्रा थी.

लालबहादुर सिंह आर्मी में सूबेदार के पद से एक महीने पहले ही रिटायर हुए थे. वह राजस्थान के जोधपुर छावनी में तैनात थे. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने सब से पहले बड़ी बेटी की शादी करने की योजना बनाई.

9 मई, 2017 को सुबह 8 बजे के करीब लालबहादुर सिंह की पत्नी रेनू की तबीयत अचानक खराब हो गई. वह उन्हें ले कर कैंट एरिया स्थित कमांड अस्पताल गए. दोनों बेटियों को वह घर पर ही छोड़ गए थे. डाक्टर ने रेनू का सीटी स्कैन कराने की सलाह दी, पर उस दिन अस्पताल में सीटी स्कैन की मशीन खराब थी. वह एकडेढ़ घंटे में ही घर आ गए.

करीब साढ़े 9 बजे जब वह पत्नी के साथ घर पहुंचे तो घर का मेनगेट खुला था. अंदर दाखिल होते हुए वह बड़बड़ाए, ‘बच्चियां कितनी लापरवाह हैं, गेट भी बंद नहीं किया.’ जब वे अंदर पहुंचे तो घर में खून ही खून फैला दिखाई दिया. खून देख कर पतिपत्नी घबरा गए.crime news

बेटियों को आवाज देते हुए लालबहादुर सिंह आगे बढे तो उन्होंने देखा ड्राइंगरूम से गैलरी तक खून ही खून फैला है. सहमे हुए वह किचन की ओर बढे़ तो पता चला आरती और अंतिमा किचन में खून से लथपथ घायल पड़ी थीं.

बेटियों की हालत देख कर रेनू चीख पड़ीं, जबकि लालबहादुर सिंह घर से बाहर आ कर मदद के लिए चिल्लाने लगे. पड़ोस में रहने वाला रवि सब से पहले उन की आवाज सुन कर अपने घर से निकला तो उन्होंने उस से रोते हुए कहा, ‘मेरा तो सब कुछ तबाह हो गया.’

रवि समझ गया कि जरूर इन के घर कोई अनहोनी हुई है. कमरे से उन की पत्नी के रोने की आवाज आ रही थी. रवि उन के घर के अंदर गया तो देखा, दोनों बेटियां लहूलुहान पड़ी हैं. तब तक मोहल्ले के और लोग भी आ गए थे. रवि के पास स्विफ्ट डिजायर कार थी. लोगों की सहायता से उस ने दोनों बहनों को अपनी कार में डाला और लालबहादुर सिंह को साथ ले कर कमांड अस्पताल गया.

अस्पताल में डाक्टरों ने अंतिमा को तुरंत मृत घोषित कर दिया, जबकि आरती का इलाज शुरू कर दिया. पर इलाज के दौरान ही उस की भी मौत हो गई. पुलिस केस देखते हुए अस्पताल प्रशासन की तरफ से पुलिस को इत्तिला दी गई. सूचना पा कर तालकटोरा थाने की पुलिस कमांड अस्पताल पहुंच गई.

मामला 2 सगी बहनों की हत्या का था, इसलिए खबर मिलने पर आईजी सतीश गणेश, डीआईजी प्रवीण कुमार, एसएसपी दीपक कुमार भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो लालबहादुर सिंह और आरती के कमरे का सामान बिखरा पड़ा था. लग रहा था कि हत्याएं लूट के लिए की गई थीं. लेकिन जब लालबहादुर सिंह और उन की पत्नी ने घर का सामान देखा तो वहां से कुछ भी गायब नहीं था.

घटनास्थल को देखने से ही लग रहा था कि दोनों बहनों ने मरने से पहले हत्यारे के साथ जम कर मुकाबला किया था. किचन में भगौना, परात और गिलास जमीन पर गिरे पड़े थे. आरती चश्मा लगाती थी, उस का चश्मा टूटा पड़ा था. उस की मुट्ठी में किसी पुरुष के बाल भी मिले थे. आरती और अंतिमा को जिस तरह से शिकार बनाया गया था, उस से साफ लग रहा था कि हमलावर केवल उन की हत्या करने के इरादे से ही आया था.crime news

दोनों ही बहनों की कनपटी और गरदन के पास धारदार हथियार से वार किए गए थे. अंतिमा के हाथ की नस भी काटी गई थी. हत्यारे ने बाथरूम में जा कर अपने हाथ आदि पर लगा खून साफ किया था, जिस से वहां के फर्श और दीवार पर भी खून लग गया था.

पुलिस को वहां मिले दोनों मोबाइल फोन चालू हालत में थे, पर उन पर भी खून लगा था. एक मोबाइल से एसएमएस, काल लौग्स और वाट्सऐप मैसेज डिलीट किए गए थे, जिस से साफ लग रहा था कि हमलावर दोनों का परिचित था.

आरती की शादी तय हो चुकी थी. इस बात को भी ध्यान में रखा गया. लालबहादुर सिंह के मकान के निचले हिस्से में 2 छात्र किराए पर रहते थे. पुलिस ने डौग स्क्वायड के जरिए कुछ सुराग तलाशने की कोशिश की, पर कुछ भी हाथ नहीं लगा. इस दोहरी हत्या से बौखलाए लोगों ने स्थानीय विधायक सुरेशचंद्र श्रीवास्तव के घर पर प्रदर्शन भी किया.

पुलिस ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी. एसएसपी दीपक कुमार ने इस मामले को सुलझाने के लिए एक टीम बनाई, जिस में थाना पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच को भी लगा दिया गया. टीम में क्राइम ब्रांच के एएसपी संजय कुमार, सीओ (आलमबाग) मीनाक्षी गुप्ता, स्वाट टीम के प्रभारी फजलुर्रहमान, सर्विलांस प्रभारी अमरेश त्रिपाठी, एसआई संजय कुमार द्विवेदी आदि को शामिल किया गया.

पुलिस कई ऐंगल से जांच कर रही थी. एएसपी क्राइम संजय कुमार ने हर पहलू को पैनी नजरों से देखना शुरू किया. आरती के फोन की काल डिटेल्स में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर वह देर तक बातें करती थी. उस नंबर की जांच की गई तो वह नंबर किसी इंद्रजीत का था. पता चला कि उस से ही आरती की शादी होने वाली थी.crime news

हत्या के कुछ देर पहले आरती की जिस नंबर पर बात हुई थी, वह अखिलेश यादव का था. पुलिस ने अखिलेश से बात की तो उस ने आरती से दोस्ती की बात तो स्वीकारी, लेकिन किसी तरह के झगड़े या विवाद से इनकार कर दिया.

अखिलेश ने पुलिस को बताया कि आरती का अपने घर के सामने रहने वाले सौरभ शर्मा से विवाद हुआ था. उस ने कई बार इस का जिक्र उस से किया था. इस से पहले आरती के भाई आशुतोष ने भी सौरभ पर अपना शक जताया था.

क्राइम ब्रांच की टीम सौरभ शर्मा को रात में उस के घर से उठा लाई. पुलिस को उस के लंबे बाल देख कर शक हुआ. उस के हाथ में वैसी ही चोट लगी थी, जैसी उन दोनों बहनों के हाथ में लगी थी. पुलिस ने सौरभ से पूछताछ शुरू की तो पहले वह इधरउधर की बातें करता रहा.

लेकिन जब पुलिस ने उस के कपड़े उतार कर देखा तो उस के शरीर पर कई चोटें लगी दिखीं. सिर के पिछले हिस्से के बाल भी उखड़े मिले. ऐसे में पुलिस ने उस से सख्ती से पूछताछ शुरू की तो वह टूट गया. फिर उस ने दोनों बहनों की हत्या की बात स्वीकार कर के जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

सौरभ और आरती आमनेसामने के मकानों में रहते थे. इसी वजह से दोनों का एकदूसरे के यहां उठनाबैठना था. दोनों पढ़ाई में एकदूसरे का सहयोग भी लेते थे. दोनों साथ ही कोचिंग भी जाते थे, जिस से उन के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी.

बीटेक सैकेंड सेमेस्टर परीक्षा के दौरान आरती के हाथ में चोट लग गई थी, जिस की वजह से आरती एग्जाम में लिखने में असमर्थ थी. ऐसे में सौरभ उस का राइटर बना था. कालेज से अनुमति के बाद सौरभ ने उस का पेपर दिया था.

आरती सौरभ को अपना अच्छा दोस्त मानती थी. जबकि सौरभ इस दोस्ती को प्यार मान बैठा था. सौरभ पर इश्क का ऐसा भूत सवार हुआ कि उसे आरती का किसी के साथ घूमना या बातचीत करना अच्छा नहीं लगता था. सौरभ के अलावा आरती की दोस्ती इंद्रजीत और अखिलेश से भी थी. सौरभ ने जब उसे उन के साथ बातचीत करते देखा तो उसे बहुत बुरा लगा. इस बात को ले कर आरती और सौरभ के बीच कई बार झगड़ा भी हुआ, जिस से दोनों के बीच होने वाली बातचीत भी बंद हो गई.

इस के बाद भी सौरभ ने कई बार आरती को इंद्रजीत और अखिलेश के साथ अलगअलग देखा. इस से उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. सोमवार 8 मई को शाम के समय आरती और अखिलेश को सौरभ ने फीनिक्स मौल में देख लिया. दोनों ही बाहुबली-2 देख कर निकले थे. उसी समय सौरभ के मन में आरती से बदला लेने का खयाल आ गया.

सौरभ ने बीकौम की पढ़ाई की थी और बैंक औफिसर बनने की तैयारी कर रहा था. रात भर सौरभ गुस्से में जलता रहा. सुबह के समय जब उस ने देखा कि आरती के मातापिता घर से बाहर चले गए हैं तो वह उस के घर जा धमका. सौरभ को पता था कि आरती की छोटी बहन अंतिमा सुबह 7 बजे स्कूल चली गई होगी, इसलिए आरती घर में अकेली होगी.

यही सोच कर उस ने उस दिन आरती को सबक सिखाने की ठान ली. इस के लिए उस ने अपने पास एक कैंची रख ली थी. आरती के घर पर पहुंच कर उस ने कालबैल बजाई तो आरती की छोटी बहन अंतिमा ने दरवाजा खोला. वह उस से बोली कि मम्मीपापा अस्पताल गए हैं और दीदी बाथरूम में हैं.crime news

सौरभ ने बिना कुछ बोले अंतिमा पर कैंची से हमला कर दिया. वह चीखती हुई किचन की तरफ भागी. बहन की चीख सुन कर आरती ने फटाफट कपड़े पहने और बाथरूम से बाहर  आ गई. तब तक सौरभ ने अंतिमा पर अनगिनत वार कर दिए थे.

सौरभ ने जैसे ही आरती को देखा, वह उस पर टूट पड़ा. आरती ने अपना बचाव करने की कोशिश भी की, पर उस की कोशिश सफल नहीं हो सकी. जब उसे लगा कि आरती मर चुकी है तो उस ने खून के निशान आरती के पिता की शर्ट पर लगा दिए, जिस से लोग यह शक करें कि लालबहादुर सिंह ने ही अपनी बेटियों को मार दिया होगा. इस के बाद बाथरूम में हाथ धो कर वह अपने घर चला गया.

लालबहादुर सिंह घर आए और बेटियों को ले कर अस्पताल गए तो उन के साथ सौरभ भी अस्पताल गया था. वह लोगों से ऐसे पेश आ रहा था, जैसे उसे कुछ पता ही न हो. हत्याकांड के बाद विधायक सुरेशचंद्र श्रीवास्तव के घर पर लोग नारेबाजी करने गए तो सौरभ भी उस में था. वह इस बात की भी मोहल्ले में हवा दे रहा था कि दोनों बहनों में किसी बात को ले कर झगड़ा हुआ होगा, जिस से यह घटना घट गई.

सौरभ ने अपने बयान में पुलिस को बताया कि आरती की जान लेने का उसे कोई पछतावा नहीं है. आरती के लिए उस ने क्याक्या नहीं किया. वह छिपछिप कर उसे देखा करता था. कालेज और कोचिंग साथ जाता था. उस के  आनेजाने का इंतजार करता था. इस के बावजूद भी उस ने किसी और से शादी करने का फैसला कर लिया था.

सौरभ का परिवार दबंग किस्म का था. लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि सौरभ के पिता मुकुंदीलाल शर्मा ट्रांसपोर्टर हैं. घर पर उस के चाचा भी रहते हैं. इन की दबंगई की वजह से मोहल्ले वाले उन से दूर रहते हैं.

एएसपी क्राइम डा. संजय कुमार ने बताया कि सौरभ को कोर्ट में गुनहगार साबित करने के लिए पुलिस के पास पुख्ता सबूत हैं. आरती की मुट्ठी में बाल और नाखूनों में सौरभ की स्किन के टुकड़े मिले हैं. उन्हें डीएनए टेस्ट के लिए भेजा जाएगा.

इस के अलावा हत्या में प्रयुक्त कैंची और खून सने कपड़े व तमाम वैज्ञानिक साक्ष्य उसे गुनहगार साबित करने के लिए काफी हैं. पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए 2 दिन में ही इस दोहरे हत्याकांड का खुलासा कर दिया था. एसएसपी दीपक कुमार ने केस को खोलने वाली पुलिस टीम की सराहना की है. पुलिस ने सौरभ से पूछताछ कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

टटलू गिरोहों के कारनामे आपको हैरान कर देंगे

हरियाणा और राजस्थान में फैला मेवात चोरीचकारी, लूटपाट और छिनैती के लिए मशहूर रहा है. किसी जमाने में मेवात के मेव पशुधन की चोरी किया करते थे, लेकिन पूरी ईमानदारी से. ये पशुधन चुराते थे और उस के मालिक से फिरौती ले कर उस का पशु वापस कर देते थे. इस के लिए पशु मालिक को उस के चोरी गए पशु और फिरौती के लिए बाकायदा सूचना दी जाती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है. चोरियां अब भी होती हैं, लेकिन अब फिरौती ले कर माल की वापसी नहीं होती.

राजस्थान के भरतपुर, अलवर जिले और हरियाणा के नूंह, फिरोजपुर झिरका, पुनहाना, पलवल और उस के आसपास के इलाके मेवात में आते हैं. इन इलाकों में अल्पसंख्यक समुदाय के मेवों की बहुतायत है. मेवात पहले से ही पिछड़ा हुआ इलाका रहा है. हालांकि अब समय के साथ यहां हर स्तर पर बदलाव आ रहा है.

मेवात के कई युवा अब आईएएस अफसर भी बन गए हैं, साथ ही यहां के युवा अन्य विभागों में भी जा रहे हैं. खेतीबाड़ी करने वाले मेवों के रहनसहन और शिक्षादीक्षा में भी काफी सुधार हुआ है. लेकिन इस के बावजूद यहां के तमाम मेवों का पुस्तैनी धंधा अभी बंद नहीं हुआ है. अलबत्ता इस धंधे की कार्यशैली जरूर बदल गई है. अब नई पीढ़ी आधुनिक साधनों का सहारा ले कर लोगों को ठगने के नएनए हथकंडे अपनाने लगी हैं.

करीब 20-25 साल पहले मेवात के कुछ लोगों ने खुदाई में निकली सोने की ईंट के नाम पर लोगों को ठगने का धंधा शुरू किया था. देश भर में इन का यह धंधा अब भी चल रहा है. जिस तरह आजकल एटीएम नंबर पूछ कर औनलाइन साइबर ठगी की जा रही है, अब से करीब 10-15 साल पहले मेवात में उसी तरह सोने की ईंट के नाम पर ठगी का कारोबार चलता था.Crime story

शायद ही देश का कोई ऐसा राज्य और जिला हो, जहां के लोग सोने की चमक के लालच में मेवात आ कर अपनी जमापूंजी ना गंवा बैठे हों. आला अफसरों से ले कर जज, डाक्टर, व्यापारी, अभिनेता, मौडल, खिलाड़ी से ले कर आम आदमी तक इन लोगों की ठगी का शिकार बने हैं.

मेवात इलाके में सोने की ईंट के नाम पर ठगी करने वाले लोगों को टटलू और उन के गिरोह को टटलू गैंग कहते हैं. ये लोग जिसे अपना शिकार बनाते हैं, उसे टटलू काटना कहते हैं. ये लोग साइबर ठगों की तरह खुद को हरियाणा या राजस्थान का बता कर देशभर में अंजान नंबरों पर फोन कर के कहते हैं कि उन के मकान या खेत में जेसीबी से खुदाई करते समय सोने की ईंट निकली है.

ये लोग खुद को गरीब बता कर लोगों को अपनी चिकनीचुपड़ी बातों में फांस कर सोने की इस ईंट को सस्ते दामों पर बेचने की बात कहते हैं, साथ ही यह भी कि पुलिस से बचने के लिए वे उस ईंट को कम दाम पर चुपचाप बेच देना चाहते हैं.

2-4 बार फोन कर के ये लोग अपने शिकार को भरोसे में ले कर अपने इलाके में बुला लेते हैं. खरीदार के मेवात इलाके में आने पर टटलूबाज उसे पहले से तैयार की गई सोने की ईंट का टुकड़ा दिखाते हैं. उस पीली धातु की चमक देख कर ग्राहक आमतौर पर उस की जांच करने की बात कहता है. इस पर टटलूबाज नमूने के तौर पर उस ईंट के एक कोने से रेती से घिस कर 100-50 मिलीग्राम बुरादा ग्राहक को दे देते हैं. ग्राहक देशभर में जहां भी सोने की जांच कराने की बात कहता है, टटलूबाज राजी हो जाते हैं और उस के साथ चले जाते हैं. जांच में सोना असली निकलता है. इस के बाद ग्राहक के मन में लालच आ जाता है. सोने की उस ईंट का सौदा होता है. टटलूबाज उस ग्राहक से उसी की हैसियत के हिसाब से सौदा कर लेते हैं.

10-20 हजार से ले कर लाख-2 लाख रुपए तक सौदा हो जाने के बाद वे ग्राहक को रकम ले कर अपने इलाके में बुलाते हैं. वह आ जाता है तो उसे 2-4 घंटे तक इधरउधर घुमाया जाता है. फिर उसे मोटरसाइकिल पर बैठा कर बहाने से जंगल या खेतों की तरफ ले जाया जाता है, जहां उसे नकली सोने की ईंट का टुकड़ा थमा कर उस से रकम ले ली जाती, साथ ही उस से कहा जाता कि वह जल्दी से जल्दी वहां से निकल जाए.  इस के बाद ये लोग भी वहां से रफूचक्कर हो जाते हैं.Crime story

टटलूबाज कभी अकेले नहीं होते. गिरोह के 2-4 लोग साथ रहते हैं. अगर कोई ग्राहक समझदारी दिखाता है तो ये उस से मारपीट करने में भी पीछे नहीं रहते थे. मारपीट कर के उस से रकम छीन लेते हैं. जब कोई ग्राहक ईंट ले जाता है और बाद में उस की जांच कराता है तो वह पीतल की निकलती है.

ठगी के शिकार अधिकांश लोग अपनी बेवकूफी पर चुपचाप घर बैठ जाते हैं. कुछ लोग पुलिस तक पहुंचते हैं, मामला दर्ज भी होता है. पुलिस जांच भी करती है. कभीकभी कुछ टटलूबाज पकड़े भी जाते हैं. लेकिन वारदात सौ होती हैं और पकड़े जाते हैं केवल 10-20 अपराधी.

पिछले 20 सालों में राजस्थान में ऐसी हजारों वारदातें हुईर् हैं. सैकड़ों टटलूबाज पकड़े गए. कई टटलूबाज तो ऐसे हैं, जो 5-7 बार पकडे़ जा चुके हैं. छूटने के बाद ये लोग फिर नए तरीके से नए शिकार की तलाश शुरू कर देते हैं. पुलिस को इन टटलूबाजों से ठगी की रकम बरामद करने में सब से ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है. अव्वल तो रकम बरामद होती ही नहीं, होती भी है तो नाम मात्र की.

अपराधों के तौरतरीकों में आए बदलावों को देख कर अब इन टटलूबाजों ने भी अपने हथकंडे बदल दिए हैं. अब ये स्मार्ट फोन, वाट्सऐप और सोशल साइटों के माध्यम से ठगी के नये पैंतरें अपना रहे हैं. टटलूबाज अब सोने की ईंट के नाम पर लोगों को अपने झांसे में कम ही फंसाते हैं. सोशल साइटें इन के काम में मददगार बनी हुई हैं.

मेवात के एक टटलूबाज गिरोह ने चेन्नई के व्यापारी श्याम कुमार को सस्ता स्क्रैप बेचने के बहाने राजस्थान बुलाया. चेन्नई (तमिलनाडु) के जिला तिरवल्लूर के थाना तिरवर काडू के रहने वाले व्यापारी श्याम कुमार 3 मई, 2017 को हवाई जहाज से जयपुर पहुंचे. टटलूबाज गिरोह के बदमाश जयपुर के सांगानेर एयरपोर्ट पर पहले से तैयार थे.Crime story

इन बदमाशों ने श्याम कुमार को काले रंग की स्कौर्पियो में बैठा लिया. श्याम कुमार को बताया गया कि स्क्रैप का गोदाम भरतपुर में है, वहीं चलना पड़ेगा. इस के बाद ये लोग श्याम कुमार को जयपुर से स्कौर्पियो में बैठा कर भरतपुर के लिए चल दिए. भरतपुर पहुंच कर 2 बदमाश व्यापारी को घेर कर बैठ गए और स्कौर्पियो को कच्चे रास्ते पर ले गए. बाद में स्कौर्पियो कच्चे रास्ते पर चलती रही और बदमाशों ने श्याम कुमार की कनपटी पर पिस्तौल लगा कर उस के हाथपैर बांध दिए.

बदमाश श्याम कुमार को पहाड़ी (भरतपुर) थाना क्षेत्र के गांव हुजरा ले गए. वहां उन्हें एक कमरे में बंधक बना कर रखा गया. इस के साथ उन्हीं के मोबाइल से उन के घर वालों को फोन कर के उन्हें छोड़ने के एवज में 90 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई. लेकिन व्यापारी के घर वालों ने इतना पैसा होने से इनकार कर दिया. इस पर कई घंटे तक सौदेबाजी चलती रही. अंतत: 30 लाख रुपए में सौदा तय हुआ.

बदमाशों ने व्यापारी श्याम कुमार के बेटे सिंटू श्याम को खाता नंबर बता कर उस से 20 लाख रुपए बैंक खातों में डलवा लिए. इन में 4 मई को एक बैंक खाते में 10 लाख रुपए डलवाए गए. इस के बाद दूसरे बैंक खाते में एक बार 6 लाख रुपए और दूसरी बार उसी खाते में 4 लाख रुपए डलवाए गए. बदमाशों ने व्यापारी को छोड़ने के बदले उस से 10 लाख रुपए का चेक भी ले लिया. 30 लाख रुपए मिल जाने के बाद भी बदमाशों ने व्यापारी को नहीं छोड़ा और उस से मारपीट करते रहे.

इस घटना की सूचना किसी तरह अजमेर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) बीजू जार्ज जोसफ को मिली. उन के निर्देश पर अजमेर पुलिस ने इस मामले की सूचना भरतपुर पुलिस को दी. पुलिस ने सर्विलांस के जरिए व्यापारी के मोबाइल की लोकेशन के आधार पर उस की तलाश शुरू कर दी. श्याम कुमार के मोबाइल की लोकेशन भरतपुर के हुजरा गांव की मिली.

इस पर भरतपुर पुलिस ने 4 मई की आधी रात को भारी पुलिस बल के साथ पहाड़ी की तलहटी में बसे हुजरा गांव की घेराबंदी कर दी. आसपास के 6 थानों की पुलिस ने घरों का तलाशी अभियान चलाया. नतीजा यह हुआ कि एक मकान में हाथपैर बांध कर रखे गए श्याम कुमार को पुलिस ने मुक्त करा लिया.

पुलिस ने इस मामले में हुजरा गांव के रहने वाले साकिर मेव की पत्नी आसी को गिरफ्तार किया. इस से पहले पुलिस ने अजमेर जिले में मकराना के रहने वाले सरवन की पत्नी सिरजो और उत्तर प्रदेश के हाथिया के रहने वाले साकिर को गिरफ्तार कर लिया था. गिरोह ने सिरजो के 2 बैंक खातों में व्यापारी के घर वालें से फिरौती की रकम डलवाई थी. पुलिस ने सिरजो से 9 लाख 60 हजार रुपए बरामद कर लिए. जबकि उस के दूसरे खाते में डलवाए गए 10 लाख रुपए की रकम को पुलिस ने फ्रीज करवा दिया.

बाद में पुलिस ने श्याम कुमार के अपहरण के मालमे में 6 मई को गिरोह के मुखिया सलामुद्दीन उर्फ सलीम उर्फ भूरा मेव और साबिर रसीद मेव को गिरफ्तार कर लिया. ये दोनों बदमाश उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना थाना अंतर्गत हाथिया गांव के रहने वाले थे. पुलिस ने वह स्कौर्पियो भी बरामद कर ली, जिस से व्यापारी का अपहरण किया था. इस के अलावा श्याम कुमार से छीने गए 2 एटीएम कार्ड भी अभियुक्तों से मिल गए.

जांच में पता चला कि हाथिया गांव का रहने वाला साकिर मुंबई में भी अपहरण कर के फिरौती लेने के मामले में वांछित चल रहा था. उस पर मुंबई पुलिस की ओर से 25 हजार रुपए का इनाम घोषित था. साकिर का भाई साकिब भी मुंबई में आर्थर रोड जेल में बंद है.

गिरोह के सदस्यों से पूछताछ में पता चला कि कुछ दिनों पहले ही 2 व्यक्तियों का अपहरण कर के फिरौती वसूली गई थी. इन में एक व्यक्ति से 10 लाख रुपए और दूसरे से 5 लाख रुपए फिरौती के रूप में वसूले गए थे.

चेन्नई के व्यापारी के अपहरण एवं पिछले कुछ समय में हुई टटलूबाजी की वारदातों में पकड़े गए अभियुक्तों से टटलूबाज गिरोह की जो कहानी उभर कर सामने आई है, वह इस प्रकार है-

सोने की ईंट के नाम पर ठगी की अनगिनत वारदातें होने के बाद लोगों के सतर्क हो जाने के कारण टटलूबाजों ने ठगी व लूट की वारदातों को अंजाम देने के लिए अब अपना ट्रैंड बदल दिया है. वे अब ई-मार्केटिंग कंपनियों और सोशल वेबसाइटों पर सस्ते दामों में वाहन, जनरेटर, प्लास्टिक दाना, स्क्रैप, सीसीटीवी, मोबाइल एवं अन्य सामान बेचने-खरीदने का विज्ञापन देते हैं.

निजी कंपनी के मालिक या कर्मचारी, व्यापारी व अन्य व्यक्तियों को तलाश कर ये लोग उन्हें अपना निशाना बनाते हैं. कई बार ये निर्माण कार्य कराने या कोई बड़ा काम कराने के नाम पर विज्ञापन देते हैं या संबंधित व्यक्ति से संपर्क करते हैं. सस्ते में सामान खरीदने या बेचने के लालच या बड़ा काम मिलने की उम्मीद में जो लोग इन से संपर्क करते हैं, उन्हें ये अपने ठिकानों पर बुला कर मारपीट करते हैं और उन से नकदी व वाहन छीन लेते हैं.

कई बार ये बदमाश उस व्यक्ति को बंधक बना कर फिरौती की रकम मांगते हैं. फिरौती की रकम वसूलने के लिए ये लोग बाकायदा बैंक खातों के नंबर देते हैं. चेन्नई के व्यापारी से फिरौती वसूलने में भी बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था. अलवर, भरतपुर, धौलपुर व जयपुर में हाल ही में 3 महीने के दौरान ऐसी 18 वारदातें सामने आई हैं.

टटलू गिरोह के लोगों ने कुछ समय पहले फरीदाबाद (हरियाणा) की क्रेटिव पौली इंटोस्केप प्रा.लि. को जस्ट कौल डायल के जरिए फोन किया. गिरोह के सदस्यों ने कंपनी के अधिकारियों से कहा कि भरतपुर जिले में कामां के पास एक फार्महाउस में स्विमिंग पूल का निर्माण करवाना है. इस पर कंपनी के मालिक दिनेश कुमार ने कंपनी के 2 कर्मचारियों राजेश कुमार और हरिराम उपाध्याय को साइट देखने के लिए कामां (भरतपुर) भेज दिया.

ये दोनों कर्मचारी कामां पहुंचे तो गिरोह के सदस्य 2 मोटरसाइकिलों पर आए और उन्हें करीब 8 किलोमीटर दूर कामां-जुरहरा मार्ग पर ले गए और उन के मोबाइल व नकदी छीन ली. गिरोह के दोनों कर्मचारियों को छोड़ने के एवज में कंपनी के मालिक से फिरौती मांगी गई. कंपनी मालिक कामां पहुंचा और पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर दोनों कर्मचारियों की तलाश शुरू की. 4 मई को कामां पुलिस ने दोनों कर्मचारियों को तो मुक्त करा लिया, लेकिन एक भी अभियुक्त मौके पर नहीं पकड़ा जा सका.

पिछले साल अक्तूबर में हरियाणा की वेस्टर्न लिफ्ट एजेंसी के एक इंजीनियर को लिफ्ट लगवाने के बहाने टटलूबाजों ने अलवर बुला लिया. इंजीनियर को बदमाशों ने बंधक बना लिया और कंपनी के मालिक से 5 लाख रुपए की फिरौती मांगी. इस संबंध में हरियाणा में मुकदमा दर्ज हुआ.

जयपुर मंडल में ऐसे ही 3 मामले दर्ज हुए हैं. इन में जयपुर के मनोहरपुरा के रहने वाले दीपक व उस के साथी ने सोशल वेबसाइट ओएलएक्स पर स्विफ्ट कार बिकाऊ होने का विज्ञापन देखा. इस पर उन्होंने विज्ञापन में लिखे मोबाइल नंबर पर संपर्क किया. बदमाशों ने उन्हें 4 लाख रुपए ले कर भरतपुर बुलाया. दीपक और शिवशंकर इसी 3 अप्रैल को बदमाशों के बताए ठिकाने पर अलवर जिले के कठूमर इलाके में पहुंचे. वहां उन्हें 2 बाइक सवार मिले. वे उन्हें ऐसी सुनसान जगह पर ले गए, जहां पहले से उन के 4-5 साथी मौजूद थे. उन्होंने पहले तो दीपक और शिवशंकर को बंधक बना लिया. फिर मारपीट कर 4 लाख रुपए छीन लिए. जैसेतैसे दोनों युवक खुद को छुड़ा कर वहां से निकले और पुलिस को सूचना दी.

ऐसी ही एक वारदात जयपुर के निवारू रोड निवासी मनीष के साथ हुई. मनीष ने ओएलएकस पर 88 हजार रुपए में ड़्यूक बाइक बिकाऊ होने का विज्ञापन दिया. विज्ञापन देख कर नरेश नामक व्यक्ति ने मनीष से संपर्क किया. उस ने बाइक दिखाने का बहाना कर जयपुर में लोको कालोनी में बुलाया. मनीष बाइक ले कर पहुंचा तो नरेश ने उस पर चाकू से हमला कर बाइक लूटने की कोशिश की.

5 अप्रैल, 2017 को जयपुर के बनीपार्क में रहने वाले अरुण कुमार ने ओएलएक्स पर मोबाइल का विज्ञापन देख कर खरीदने के लिए उस से संपर्क किया. उस ने अरुण कुमार को जयपुर के क्रिस्टल मौल में बुलाया. वहां बदमाशों ने उसे प्लास्टिक का नकली मोबाइल दे कर 15 हजार रुपए ले लिए.

जांच में यह भी सामने आया है कि 8 नवंबर, 2016 की रात नोटबंदी के बाद इन टटलूबाजों ने कालेधन को ठिकाने लगाने के इच्छुक लोगों से काफी मोटी ठगी की थी. इन लोगों ने करोड़ों रुपए के 500 व 1000 रुपए के पुराने नोट ले कर बदले में नकली सोने की ईंट दे कर काली कमाई करने वालों को ठगा.

मेवात के लोगों ने राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, दिल्ली व कई अन्य राज्यों में ऐसी ही वारदातें कीं. जांच में जब ईंटें नकली निकलीं तो लोग अपना सिर पीटते रह गए. अधिकांश लोग काली कमाई की जांचपड़ताल के डर से चुप बैठ गए. एकदो मामले पुलिस में गए भी तो पुलिस ने जांच की.

जांच में पता चला कि यह काम अलवरभरतपुर के टटलूबाजों का था. उसी दौरान भरतपुर पुलिस ने जुरहरा, पहाड़ी के गांव तिलकपुरी, मूंगसका, अमरूका गांवों में दविश दे कर 8 टटलूबाजों को गिरफ्तार कर उन से नकली सोने की 19 ईंटें, ईंटों पर लगने वाली मोहर की डाई सहित अन्य औजार व हथियार बरामद किए.

राजस्थान व हरियाणा सीमा पर बसे कस्बे पुनहाना और जुरहरा के अधिकांश लोग पीतल की ईंटें बना कर आसपास के गांवों में रहने वाले टटलूबाज गिरोहों के सदस्यों को सप्लाई करते हैं और खुद भी बेचने का काम करते हैं. उन्होंने अपने घरों में ही नकली ईंट बनाने की भट्टियां लगा रखी हैं. इन लोगों के पास प्राचीन काल की सोने की ईंटों पर लगाने वाली मोहरें हैं, जो ईंट बनाते समय लगा दी जाती है, ताकि लोगों को लगे कि यह सोने की ईंट बहुत पुरानी है और खुदाई में मिली है.

गामड़ी गांव में सब से ज्यादा टटलू रहते हैं. इस गांव की आबादी करीब 5 सौ है. इन में से अधिकांश लोग नकली सोने की ईंटें बेचने का काम करते हैं. इस के अलावा कुंदन का नगला, बुआपुर गढ़ी, सीमाधरा, छीछरवाड़ी, रसूलपुर आदि गांव के अधिकांश लोग भी इसी धंधे से जुड़े हैं. मेवात जिले के गांव रूपड़ाका, कोट, उटावड़ व आलीमेव में टटलूबाजों के पूरे गैंग बने हुए हैं.

टटलूबाजी में उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना थाने का गांव हाथिया बहुत बदनाम है. लगातार बदनाम हो रहे इस गांव की साख को बचाने के लिए पिछले साल ग्रामीण खुद आगे आए थे. गांव जरैला नंगला में उन्होंने एक बैरियर लगाया है. हाथिया जाने वाले हर बाहरी व्यक्ति को रोक कर वह उस से पूछताछ करते हैं. गांव में वह किस से मिलने आया है और मिलने की वजह क्या है, साथ ही वह उस व्यक्ति को टटलूबाजों की ठगी की वारदातों की जानकारी दे कर सचेत भी करते हैं.

इन टटलूबाजों की वजह से गांव की जो बदनामी हो रही है, उस से बच्चों की शादी करने में भी परेशानी आती है. नकली सोने की ईंट बेचने के अलावा इन टटलूबाजों ने स्क्रैप बेचने के नाम पर बड़े व्यापारियों को बुला कर भी ठगा है. इस के अलावा जनरेटर लगवाने व बेचने, मोबाइल फोन टावर लगवाने के नाम पर भी इन्होंने लोगों को लूटा है. कई व्यापारियों को बुला कर उन का अपहरण कर उन के परिजनों से इन्होंने फिरौती भी वसूली है.

इस गांव में पुलिस पर भी हमले होते रहे हैं. आगरा की क्राइम ब्रांच की टीम पर यहां फायरिंग की गई थी. इस में एक कांस्टेबल सतीश परिहार की मौत भी हो गई थी. राजस्थान व हरियाणा पुलिस पर भी दबिश के दौरान हमले हुए हैं. गांव में गैंगवार भी चलती रहती है. ओएलएक्स पर सोने के बिस्कुट सस्ते दामों पर बेचने के नाम पर मैनपुरी के 3 सर्राफा व्यापारियों को मथुरा बुला कर लूट लिया गया था. बदलते समय को देखते हुए इन लोगों ने भी ठगी के अपने तरीके को बदल दिया है. अब इन्होंने इंटरनेट को ठगी का जरिया बना लिया है.

जब इस गाने के लिए सेट पर लुंगी पहनकर पहुंचे किशारे कुमार

किशोर कुमार का नाम तो सुना ही होगा 1978 में आई फिल्म डौन सुपर डूपर हिट रही थी. कहानी से लेकर कास्ट और गानों से डांस तक, सब कुछ चकाचक था. फिल्म का गाना ‘खई के पान बनारस वाला’ भी इन्हीं में से एक था.

जब यह गाना शूट हो रहा था तब संगीतकार किशोर कुमार सेट पर लुंगी पहन कर आ गए थे. ‘खई के पान बनारस वाला…’ डौन के हिट गानों में से एक है. आज भी यह गीत जुबां पर आने के बाद पान भांग का मजा दोगुना कर देता है. लेकिन फिल्म में यह बिल्कुल आखिरी समय पर डाला गया था.

दरअसल हुआ ये कि रिलीज होने से पहले डौन एक्टर मनोज कुमार को दिखाई गई थी. उन्हें इंटरवल के बाद फिल्म बहुत टाइट लगी. इसके बाद गाना डालने के बारे में सोचा जा रहा था. कल्याण जी, आनंद जी को पता लगा तो उन्होंने देवानंद की बनारसी बाबू के लिए कभी बनाया हुआ गाना इसके लिए खजाने से निकाला जो फिल्म का हिस्सा बना.

अब बारी थी गाने की रिकौर्डिंग की और यह गाना किशोर कुमार को गाना था. किशोर कुमार सेट पर पहुंचे तो जरुर लेकिन लुंगी पहनकर. उन्होंने एक प्लास्टिक का बैग मंगाया और अपनी जेब से एक दर्जन पान निकाले और चबाने लगे. किशोर गाने को रियलिस्टक बनाना चाहते थे.

यही कारण था कि उन्होंने भी अपना मूड उसी हिसाब से सेट किया और गाना गाने से पहले खुद भी ढ़ेर सारा पान चबाया था. बाद में जो गाना रिकौर्ड हुआ उसके बारे में हमें नहीं लगता की ज्यादा कहने की जरूरत है. वो गाना अपने आप में नायाब था और आज भी उस गाने को दर्शक काफी पसंद करते हैं.

जानिये चंकी पांडे के जन्मदिन पर उनसे जुड़ी कुछ खास बातें

अब तक 80 फिल्मों में काम कर चुके बौलीवुड के मशहूर अभिनेता चंकी पांडे का आज जन्मदिन है. 26 सितंबर 1962 को जन्में चंकी का असली नाम सुयश शरद पांडे है. चंकी पांडे पहले सशक्त फिल्मों मे काम करते थे, फिर उन्होंने अपना करियर हास्य फिल्मों की तरफ मोड़ लिया. चंकी अपनी जिंदगी मे अब और भी बहुत कुछ करना चाहते हैं. अभिनेता चंकी पांडे ने कहा कि हास्य फिल्में करके मैंने अपने लिये एक दायरा बना लिया है अब मुझे कुछ अलग करने की इच्छा है. चंकी को लगता है कि कोई ना कोई तो उसे हास्य रोल को छोड़कर किसी अच्छे रोल का आफर तो करेगा.

चंकी पांडे ने 1987 में पहलाज निहलानी की फिल्म ‘आग ही आग’ से बौलीवुड डेब्यू किया था. यह फिल्म सुपरहिट रही और उनके करियर कि राहें खुल गईं. इसके बाद उन्होंने ‘पाप की दुनिया’ (1988), ‘खतरों के खिलाड़ी’ (1988),’ ‘जहरीले’ (1990) और ‘आंखें’ (1992) जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया.

1988 की सुपरहिट फिल्म ‘तेजाब’ में उन्होंने अनिल कपूर के दोस्त का किरदार निभाया था और इसके लिए उन्हें 1989 में फिल्मफेयर का बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवार्ड भी मिला था.

चंकी पांडे ने रणदीप हुड्डा के साथ भी काम किया है. रणदीप के साथ चंकी ने ‘डी’ फिल्म में काम किया है. चंकी ने कहा कि अगर उनके पास और ऐसी फिल्मों के प्रस्ताव आते है तो वे जरूर करेंगे. अभी हाल ही में चंकी पांडे हमे विद्या बालन की फिल्म ‘बेगम जान’ में भी नजर आए थे. चंकी पांडे को अपनी हास्य फिल्मों के लिये बहुत प्रशंसा मिली है. चंकी ने ‘क्या कूल हैं हम’, ‘हाउसफुल’ और ‘हाउसफुल 2’ मे बहुत अच्छा रोल किया है. चंकी ने कहा कि ‘हाउसफुल’ फिल्म मे हास्य रोल निभाना आसान था. जैसा उन्हें साजिद ने करने को बोला उन्होंने वैसा ही किया.

आपको बता दें कि चंकी ने बांग्लादेश की फिल्मों में भी लीड रोल निभाया है. फिल्मों के साथ-साथ वह अपनी पत्नी भावना के साथ मुंबई में एक हेल्थ फूड रेस्टुरेन्ट भी चलाते हैं. इसके अलावा बौलीवुड इलेक्ट्रिक नाम से उनकी एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी है, जो खासकर स्टेज शोज के लिए जानी जाती है. चंकी पांडे की दो खूबसूरत बेटियां भी हैं जिनका नाम रीसा पांडे व अनन्या पांडे है. अनन्या की फिल्मों में आने की भी चर्चाएं हो रही है.

स्मार्टफोन खरीदने के बाद सबसे पहले कर लें ये 6 काम

हम हमेशा स्मार्टफोन खरीदने के बाद सुरक्षा के नजरिए से कई महत्वपूर्ण चीजों को करना भूल जाते हैं. स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए फोन खरीदने के बाद कुछ एक्सेसरीज और सिक्युरिटी एप्स की जरूरत होती है, जिससे आपका फोन सालों साल चल सकता है. नए स्मार्टफोन लेने के बाद किन बातों को ध्यान रखना जरूरी है यह सुनिश्चित करना जरूरी है. इसके लिए हम आपको बताते हैं ऐसे कुछ जरूरी बातें, जिनको फालो करके अपने फोन को लंबी उम्र दे सकते हैं.

डिस्प्ले की सुरक्षा से समझौता नहीं

अपने स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए उस पर अच्छी क्वालिटी का टेम्पर्ड ग्लास लगवाएं. सामान्य स्क्रीन गार्ड फोन की स्क्रीन को सिर्फ स्क्रैच आदि से बचाता है, लेकिन यदि आपने टेम्पर्ड ग्लास लगवाया है तो फोन गिरने पर भी यह उसकी स्क्रीन की सुरक्षा करता है.

बाजार में दो तरह के टेम्पर्ड ग्लास उपलब्ध हैं- ब्रेकेबल और अनब्रेकेबल. अगर आप फोन कहीं भा रख कर भूल जाते हैं या कुछ ज्यादा ही गिराते हैं तो अनब्रेकेबल टेम्पर्ड ग्लास आपके लिए बेस्ट है.

स्मार्टफोन का बीमा

अगर आपने महंगा स्मार्टफोन खरीदा है और आपको चिंता है कि कहीं फोन को गुम या चोरी न जाए. तो ऐसी स्थिति में आपको स्मार्टफोन का भी बीमा कराया जा सकता है. वर्तमान समय में ऐसी कई कंपनियां आ गई हैं, जो यूजर्स को स्मार्टफोन का बीमा औफर कर रही हैं. यदि स्मार्टफोन का बीमा करा लेते हैं तो इससे फिजिकल डैमेज, लिक्विड डैमेज और किसी मैकेनिकल गड़बड़ी के लिए बीमा शामिल है. अगर कभी समार्टफोन में इस तरह की दिक्कतें आ जाएं तो इसे क्लेम करके इसका फायदा उठाया जा सकता है.

ऐपलौक (AppLock) का इस्तेमाल करें

अपने निजी मेसेज, फोटो और दूसरे डेटा को दूसरों की नजर से बचाने के लिए आपको ऐपलौक का इस्तेमाल करना चाहिए. आप इसे एंड्रायड फोन के लिए गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. इसकी मदद से आप मोबाइल में मौजूद किसी भी ऐप, फोटो गैलरी आदि को लौक कर सकते हैं.

अच्छी क्वालिटी के बैक कवर का इस्तेमाल करें

अपने स्मार्टफोन की बौडी को स्क्रैच, निशान और डेंट आदि से बचाने के लिए हमेशा अच्छी क्वालिटी का ही बैक कवर खरीदें. आप बैक कवर की मदद से अपने फोन को तरह-तरह के स्टाइलिश लुक्स भी दे सकते हैं, हालांकि आपकी प्राथमिकता फोन की सुरक्षा ही होनी चाहिए.

ऐंटी-मैलवेयर साफ्टवेयर का इस्तेमाल

यह जरूरी है कि आप अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन की सुरक्षा की तरह ही उसके डेटा की सुरक्षा भी करें. नया फोन लेते ही सबसे पहले उसमें ऐंटी वायरस और डेटा सिक्यारिटी सौफ्टवेयर इंस्टाल करें जिससे मोबाइल के महत्वपूर्ण डेटा और दूसरे सौफ्टवेयरों से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

फोन चोरी होने पर पता लगाएं

अक्सर हमें इस बात का डर बना रहता है कि यदि हमारा फोन चोरी हो जाएंगा तो कैसे पता लगा सकेंगे. इसके लिए अब सभी स्मार्टफोन में औप्शन दिए जा चुके हैं, जिसका इस्तेमाल करके चोरी हुए फोन का फौरन पता लगाया जा सकता है. स्मार्टफोन के चोरी होने या खो जाने के बाद काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इससे बचने के लिए कुछ चींजों का ध्यान रखना होगा, आपने एंड्रायड स्मार्टफोन पर एंड्रायड डिवाइस मैनेजर ऐक्टिवेट होना जरूरी है. इससे आपको स्मार्टफोन की लोकेशन पता लगाने में मदद मिलेगी.

इसके लिए अपने स्मार्टफोन की गूगल सेटिंग में जाएं. नीचे करने पर आपको सेक्युरिटी का औप्शन नजर आएगा. इसे टैप करें और Android Device Manager पर जाएं. Remotely locate this device और Allow remote lock and erase on or off को टिक कर दें. इसमें यह भी ध्यान रखें की बात है कि Location की सेटिंग में जाकर Access to my location को भी ऑन करके रखना है. इसके अलावा फोन में गूगल साइन इन होना चाहिए.

17 साल की उम्र में इस भारतीय बल्लेबाज ने जड़ा अनोखा शतक

पदार्पण कर रहे युवा बल्लेबाज पृथ्वी शौ ने दिलीप ट्राफी के मैच में शतक जड़कर रिकार्ड बना दिया है. 25 सितंबर से शुरू हुए पांच दिवसीय दिलीप ट्राफी के फाइनल के पहले ही दिन उन्होंने शतक जमाया.

शौ दिलीप ट्राफी फाइनल में शतक जड़ने वाले दूसरे युवा क्रिकेटर बन गए हैं. उनसे पहले दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने 17 साल 262 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी. शौ ने 17 साल 320 दिन की उम्र में दिलीप ट्राफी में शतक लगाया. टास जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंडिया रेड के सलामी बल्लेबाज शौ ने शानदार शुरुआत की. उन्होंने 249 गेंद का सामना करते हुए 18 चौके और एक छक्के की मदद से 154 रन की पारी खेली.

अखिल हरवादकर 25 रन बनाकर रन आउट हुए. शौ और अखिल ने पहले विकेट पर 74 रन की साझेदारी की. सूर्यकुमार यादव महज आठ रन ही बना सके. इसके बाद कार्तिक क्रीज पर उतरे. कार्तिक ने शौ का अच्छा साथ निभाया और दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 211 रन की भागीदारी निभाई. कार्तिक ने 155 गेंदों पर 12 चौकों की मदद से 111 रन बनाए.

इंडिया रेड ने इंडिया ब्लू के खिलाफ दिलीप ट्राफी क्रिकेट के फाइनल के पहले दिन 83.3 ओवर में पांच विकेट पर 317 रन का मजबूत स्कोर बना लिया.

इससे पहले पृथ्वी ने भारत के अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व किया था. इंग्लैंड-ए के खिलाफ (20 जुलाई-16 अगस्त, 2017) उसी की धरती पर खेले गए 2 यूथ टेस्ट मैचों में पृथ्वी ने 62.50 की औसत से सर्वाधिक 250 रन बनाए थे. पृथ्वी नवंबर 2013 में तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने हैरिस शील्ड टूर्नामेंट में सेंट फ्रांसिस के खिलाफ रिजवी स्प्रिंगफील्ड की ओर से खेलते हुए 330 गेंदों में 546 रन बना डाले थे. उन्होंने इस पारी में 85 चौके तथा पांच छक्के लगाए थे.

पृथ्वी शौ ने रणजी ट्राफी के सेमीफाइनल (1-5 जनवरी 2017) में डेब्यू किया था और उस मैच में शतक जमाने के बाद मुंबई को फाइनल में पहुंचाया था. और अब दिलीप ट्राफी में उन्होंने डेब्यू किया है और फाइनल खेलते हुए शतक जमाया है.

ये स्कीमें टैक्स बचाने में ऐसे कर सकती हैं आपकी मदद

टैक्स बचाने के चक्कर में लोग न जानें क्या क्या करते हैं. कई लोग तो इसके लिए गैर-कानूनी काम तक करने को तैयार हो जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज कई ऐसे भी रास्ते मौजूद हैं जिनका इस्तेमाल करके आप कानून के दायरे में रहकर भी टैक्स बचा सकते हैं.

टैक्स बचाने के इन तरीकों को अगर अपनाया जाए तो निश्चित रूप से आपको भविष्य में इसका फायदा अवश्य होगा. दरअसल आज हम आपको कुछ ऐसे प्लान के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जिनमें निवेश करने पर टैक्स की छूट तो मिलेती ही है पर इसके साथ ही आपको अच्छा-खासा रिटर्न भी मिल जाता है.

कर्मचारी भविष्य निधि ( ईपीएफ)

ईपीएफ वेतनभोगी कर्मचारियों की लिए ऐसा फंड है जो उन्हें रिटायरमेंट के बाद उनके भविष्य के लिए दिया जाता है. यह पैसा उनकी ही सैलरी से काट कर जमा किया जाता है. इसकी खास बात यह है कि ईपीएफ पर ब्याज हर साल तय किया जाता है.

पीपीएफ

पोस्ट आफिसों की ओर से चलाई जा रही इस योजना में जमा रकम को 15 साल के बाद ही निकाला जा सकता है. इसके तहत कम से कम 500 और अधिकम 1.5 लाख रुपए जमा कर सकते हैं. इस स्कीम का फायदा यह है कि इसमें भी ब्याज रिटर्न के साथ ही मिलता है साथ ही टैक्स बचाने में भी लाभ मिलता है. इसके तहत 80 सी के तहत आयकर में छूट मिलती है. इसके साथ  ही इसमें कमाए ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है.

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी)

यह बचत योजना भारत सरकार की है. इसे डाक घरों से लिया जाता है. इसे एफडी से भी ज्यादा सुरक्षित निवेश माना जाता है. एनएससी में ब्याज प्रिंसिपल के साथ मैच्युरिटी पर भी मिलता है. एनएससी पर ब्याज 8 प्रतिशत फीसदी सालाना वह भी चक्रवृद्धि ब्याज के साथ मिलता है. इसमें टीडीएस भी तहत ब्याज राशि पर नहीं काटा जाता.

फिक्स्ड डिपाजिट

एफडी में निवेश को आज कल सबसे सुरक्षित माना जाता है. इसकी खास बात यह है कि इसमें निश्चित अंतराल पर रिटर्न मिलता है और बाजार का भी असर नहीं पड़ता है.

राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस)

इस योजना में अगर आप 24 साल की उम्र में 2 हजार रुपए हर महीने जमा करते हैं तो 12 फीसदी रिटर्न के हिसाब से 1 करोड़ 22 लाख रुपए रिटायर होने तक जमा कर सकते हैं और इन 35 सालों में आपको सिर्फ 8.40 लाख रुपए ही जमा करने पड़े. इतना ही नहीं आप 60 फीसदी रुपया एकसाथ भी निकाल सकते हैं.

फेक न्यूज का असर, फेसबुक, ट्विटर और गूगल को चुकानी पड़ रही है बड़ी कीमत

सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और उनके वायरल होने के बढ़ते ट्रेंड के चलते फेसबुक, ट्विटर और गूगल को बड़ी कीमतें चुकानी पड़ रही है. फेक न्यूज को लेकर लगातार आ रही शिकायतों ने इन दिग्गज सोशल मीडिया प्लेटफार्म की कमाई के बड़े स्त्रोत में भारी गिरावट ला दी है.

बताते चलें कि इनकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया है उन्हें विभिन्न कंपनियों द्वारा मिलने वाले विज्ञापन. लेकिन अब विभिन्न कम्पनियां उन्हें विज्ञापन देने से कतरा रही हैं. बताया जा रहा है कि कोई भी ब्रांड ये नहीं चाहता कि किसी भी तरह की फेक या विवादित समाचार के साथ उनका विज्ञापन नजर आए. उनका मानना है कि इससे उनकी छवि पर भी बुरा असर पड़ता है.

जानकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स ने डिजिटल मीडिया के स्ट्रान्ग नेटवर्क का इस्तेमाल कर रेवेन्यू में बढ़ोतरी की उम्मीद की थी, लेकिन फेक न्यूज के कारण उनकी उम्मीदों को गहरा झटका लगा है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गूगल, एफबी और यू-ट्यूब को इस साल की शुरुआत में आस थी कि साल के अंत तक उन्हें 15 फीसदी से ज्यादा रेवेन्यू मिलेगा, लेकिन नौ महीने बीत जाने पर भी ये आंकड़ा 11 फीसदी ही है. आखिर के महीनों में भी विज्ञापनों के मामले में कोई बड़ा फायदा होने की उम्मीद नहीं है.

डिजिटल मीडिया पर करीब 4 लाख करोड़ रुपए के एड-स्पेस बिजनेस का संचालन करने वाली कंपनी ग्रुप-एम के निदेशक एडम स्मिथ ने बताया, इस साल मार्च के बाद से कंपनियों का सोशल मीडिया पर विज्ञापन देने के प्रति नजरिया बदल गया. कंपनियां कंटेंट को लेकर यूजर्स की विश्वसनीयता घटने के कारण सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स को विज्ञापन देने से कतरा रही हैं. वहीं जो कंपनियां विज्ञापन दे भी रही हैं, वो एकमुश्त पेमेंट नहीं कर रही हैं. उन्होंने कहा कि ये बदलाव अचानक से नहीं हुआ है, बल्कि ये काफी समय से आ रही शिकायतों का असर है.

लंदन की एक मीडिया एजेंसी के अनुसार, फेक न्यूज के लिए 70 फीसदी यूजर फेसबुक और ट्विटर को ही जिम्मेदार मानते हैं.

फेसबुक पर हुआ इसका सबसे बुरा असर

दुनिया की सबसे बड़ी विज्ञापन कंपनी हावास ने जहां फेसबुक को दिए जाने वाले विज्ञापनों में कमी की है, वहीं यूके की बड़ी कंपनियां ओ-2, ईडीएफ और रायल मेल ने फेसबुक को दिए जाने वाले करीब 1500 करोड़ के ऐड देने ही बंद कर दिए हैं.

बड़े काम के हैं एंड्रायड स्मार्टफोन के ये सीक्रेट कोड, आपने ट्राई किये क्या?

हम से ज्यादातर लोग एंड्रायड स्मार्टफोन यूज करते हैं. वैसे देखा जाए तो एंड्रायड यूजर्स को अपने फोन के बारे में हर एक चीज का पता होता है. वहीं, कुछ बातें ऐसी है जो उनसे सीक्रेट बन कर ही रह जाती है. कई बार ऐसा होता है कि दुकानदार आपसे फोन के फीचर्स के बारे में बताता कुछ और है और आपको फोन में मिलता कुछ और है. आज हम आपको एंड्रायड स्मार्टफोन से जुड़े कुछ ऐसे सीक्रेट कोड के बारे में बताएंगे, जिन्हें शायद ही आप पहले जानते हो. बता दें कि इन सीक्रेट कोड के जरिए आप अपने फोन की पूरी जानकारी सही-सही जान सकते हैं.

*#*#4636#*#*

इस कोड से आप फोन की पूरी जानकारी जान सकते हैं. जैसे- बैटरी, मोबाइल की डिटेल, वाई-फाई दी जानकारी, ऐप यूजेज सहित कई सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

*2767*3855#

इस कोड को डायल करने आपका फोन रिसेट हो जाएगा. फोन मेमोरी डिलीट हो जाएगी.

*#*#2664#*#*

इस कोड की मदद से आप अपने फोन की टच स्क्रीन का टेस्ट कर सकते हैं कि वह ठीक से काम कर रहा है या नहीं.

*#*#0842#*#*

इस कोड की मदद से फोन का वाइब्रेशन टेस्ट किया जाता है.

*#*#34971539#*#*

यह कोड फोन के कैमरे के बारे में पूरी जानकारी देता है.

*#21#

इस कोड से आप जान सकते हैं कि आपके मैसेज, काल या कोई और डाटा को कहीं दूसरी जगह डायवर्ट तो नहीं किया जा रहा है.

*#62#

कई बार आपका नंबर no-service या no-answer बोलता है. ऐसे में इस कोड को आप अपने फोन में डायल कर सकते हैं. इस कोड की मदद से आप जान सकते हैं कि आपका फोन किसी दूसरे नंबर पर री-डायरेक्ट किया गया है या नहीं.

##002#

इस कोड की मदद से एंड्रायड फोन के सभी फॉरवर्डिंग को डी-एक्टिव कर सकते हैं. अगर आपको लगता है कि आपका काल कहीं डायवर्ट हो रहा है तो आप इस कोड को डायल कर सकते हैं.

*43#

इस कोड की मदद से आप अपने फोन में काल वेटिंग सर्विस चालू कर सकते हैं, वहीं #43# डायल करके उसे बंद भी कर सकते हैं.

*#06#

इस कोड की मदद से आप IMEI नंबर जान सकते हैं. इस कोड से ही किसी भी फोन की पहचान होती है. सभी फोन के लिए यह कोड अलग-अलग होता है. इस नंबर से पुलिस फोन को ट्रैक कर सकती है.

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