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रहने दो इन सवालों को : भाग 3

वे लोग रिजवाना को अब तक बाहर खींच लाए थे. रिजवाना की अम्मी दहाड़े मार कर रोने लगीं. बहनों ने उन्हें डपटा, तो चुप हो गईं. मृगांक ने बाहर आ कर उन्हें रोकने के लिए कहा, ‘‘क्यों मासूम परिवार को सता रहे हो आप लोग? मुझे अपने पिताजी के काम से अब कोई मतलब नहीं.’’

पंचायत के एक आदमी ने कहा, ‘‘सात घाट का पानी पीने के लिए घर से भाग खड़ी हुई और अब नापाक हो कर वापस लौटी है. हमारे मजहब में ऐसी औरतों को बागी मान कर सजा के लायक माना गया है.’’ इतना कहते हुए उन लोगों ने उस की चुन्नी नीचे खींच दी और उस के हाथों को मरोड़ कर खुद के करीब ले आए.

मृगांक ने झपट कर रिजवाना को अपने पास खींचा और चीखा, ‘‘शर्म नहीं आती लड़की की इज्जत उतार कर गांव की इज्जत बचा रहे हो?’’

‘‘बात आप के पिताजी तक पहुंचेगी. आप लड़की हमें सौंप दें तो हम आप को और आप के इस लड़की के साथ ताल्लुकात को हजम कर जाएंगे.’’

‘‘नापाक कौन है मैं समझ नहीं पा रहा- लड़की को सौंप दूं- ताकि आप शौक से इस की बोटी नोचें. कह दें गगन त्रिपाठीजी से, मुझे कोई दिक्कत नहीं,’’ मृगांक ने साफ कहा.

वे दोनों इलाहाबाद वापस आ गए थे. दोनों के रिश्तों के बारे में इतने कसीदे काढ़े गए थे कि गगन त्रिपाठी और उन के बड़े बेटे शशांक आपे से बाहर हो गए. रिश्तेदारों में मृगांक के सामाजिक कामों को ले कर बड़ी छीछालेदार हुई. अब लेदे कर वेश्या ही बची थी, सपूत ने वह भी पूरा कर दिया. जातिबिरादरीधर्म सबकुछ उजड़ गया था त्रिपाठीजी का.

ब्राह्मण बिरादरी गगन त्रिपाठी पर बड़ा गर्व करती थी. कैसा दिमाग चला कर सत्ता के करीबी हो गया उन की ही बिरादरी का व्यक्ति. गगन त्रिपाठी अपनी जातिबिरादरी के गर्व थे. अब बेटे ने कुजात की लड़की की संगत कर के धर्मभ्रष्ट कर दिया. गगन त्रिपाठी जितना सोचते, उन का पारा उतना सातवें आसमान पर पहुंच जाता. सदलबल बड़े बेटे को साथ ले वे इलाहाबाद पहुंच गए.

नवलय संस्थान पर त्रिपाठीजी और उन के लोगों का जब धावा पड़ा तब मृगांक के वापस आने में एक घंटा बाकी था. उन के इस तरह यहां आने से यहां की दीदियां घबरा गईं. सहयोगी नेकराम ने मृगांक को फोन लगाया. जब तक मृगांक यहां पहुंचे, शशांक रिजवाना के कमरे में घुस आया था.

रिजवाना के कमरे में 3 और लड़कियां थीं, जिन्हें बाहर कर दिया गया था. शशांक बुरी तरह रिजवाना को जलील कर रहा था और उसे शारीरिक चोट भी पहुंचाई थी. मृगांक तुरंत रिजवाना को अपनी तरफ खींचते हुए अभी कुछ कहता, उस से पहले गगन त्रिपाठी मृगांक पर बुरी तरह चीखे, ‘‘क्या रासलीला चल रही है यहां मुसलिम वेश्या के साथ?’’

साफ शब्दों में मगर ऊंची आवाज में मृगांक ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद नहीं थी कि आप लोग मुझे इतना अपना समझते हैं कि यहां तक पहुंच जाएंगे. नीति, ज्ञान और सचाई को सीढ़ी बना कर आप लोगों ने लोगों के सरल विश्वास का जितना बलात्कार किया है उतना ही इन मासूम लड़कियों के साथ हुआ है. छोटी बच्चियों को मांस के भाव खरीदबिक्री करने वाले लोग भी आप जैसे हैं और उन की बोटी नोचने वाले भी आप जैसे. धर्म की आड़, कभी जाति की आड़, कभी संस्कृति की आड़ में बस लोगों के झांसे में आने की देर है, आप उन के विश्वास का शोषण भी करते हैं और उन के उद्धार करने का श्रेय भी स्वयं लेते हैं.’’

गगन त्रिपाठी की पूरी पौलिश उतर चुकी थी. वे क्रोधित हो सभी को ले वहां से निकल गए. उन के जाने के बाद रिजवाना की ओर देखा मृगांक ने. मृगांक की तरफ पीठ कर के वह बगीचे में शांति से खड़े पेड़ों को देख रही थी. फल हो या छाया, हमेशा सबकुछ लुटाने को तैयार थे पेड़, मगर हमेशा हर व्यवहार को सहन कर जाने को विवश भी.

उस की पीठ की आधी फटी कुरती की ओर नजर गई मृगांक की. शशांक ने कुरती को फाड़ डाला था. झक गोरी पीठ पर झुलसे हुए इलैक्ट्रिक शौक के दाग. मृगांक करुणा से भर उठा. अब तक छोटी बच्चियों के प्रति उस के मन में हमेशा पिता सा वात्सल्य रहा. लेकिन रिजवाना ने अपनी दृष्टि से मृगांक की अनुभूतियों को विराग से रागिनी के मदमाते निर्झर की ओर मोड़ दिया था. नेहभरे स्वर में पुकारा उस ने, ‘‘रिजवाना.’’

वह अब तक खिड़की के पास खड़ी बाहर देख रही थी. पुकारते ही आंखों में मूकभाषा लिए अपनी मुखर दृष्टि उस की आंखों में डाल दी.

मृगांक ने पूछा, ‘‘बताओगी तुम्हारी पीठ पर जो झुलसे हुए दाग हैं, क्या ये उन्हीं दरिंदों की वजह से हैं.’’

‘‘हां, भूखे भेडि़यों के आगे शरीर न डालने की बेकार कोशिशों का नतीजा. और भी हैं, पेट के पास,’’ यह कह कर उस ने अपनी कमीज उठा कर दिखाई. फिर धीरे से कहा, ‘‘जाने क्यों मैं आप के सामने खुद को बहुत महफूज समझती हूं. लगता है जैसे…’’ और उस ने सिर झुका लिया. रिजवाना के अनकहे शब्दों की गरमी मृगांक के जज्बातों को पिघलाने लगी. मृगांक स्थिर नेत्रों से उस की ओर देखता रहा. एक नशा सा छाने लगा, कहा, ‘‘और कहो.’’

‘‘मैं आप के पास रहना चाहती हूं हमेशा के लिए. जानती हूं, यह कहां मुमकिन होगा- आप ब्राह्मण और मैं मुसलमान, वह भी मैं बदनाम.’’

‘‘बस, यह मत कहो. जाति, धर्म और पेशे से इंसान कभी इंसान नहीं होता, न कोई इन्हें मानने से पाक होता है. जो दिल दूसरों के दर्द में पसीजे और दूसरों को हमेशा अपने प्रेम के काबिल समझे, बराबर समझे, वहीं इंसान है. और इस लिहाज से तुम पाक हो, प्यार के काबिल हो. लेकिन, एक दिक्कत है.’’

यह सुन कर आंखों में रिजवाना के खुशियां तैरने लगी थीं. अचानक  वह खुशियों में डूबने लगी, पूछा,  ‘‘क्या?’’

‘‘मैं तुम से उम्र में 20 साल बड़ा हूं. तुम्हारे साथ जुल्म न हो जाएगा? कैसे चाह सकोगी मुझे?’’

‘‘सच कहूं तो उम्र का यह फासला आप की शख्सियत में रूमानियत भरता है.’’

उस ने अपनी आंखें झुका लीं. मृगांक ने अपनी दोनों बांहें उस की ओर पसार दीं. रिजवाना अपने दोनों बाजुओं के घेरे में मृगांक को ले कर खुद उस में समा गई. एक महीने के भीतर ही दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली. दोनों मिल कर नवलय का काम देखने लगे.

इन दोनों की शादी की बात गगन त्रिपाठी तक पहुंच चुकी थी. गगन त्रिपाठी अब सांसद बनने की तैयारी में थे, बड़ा बेटा विधायक. ब्राह्मण की ऊंची नाक की इस बेटे ने ऐसीतैसी कर दी तो सीधा असर वोटबैंक पर आ पड़ा. कम से कम मुसलिम वोट और देहव्यापार तथा नाचगाने करने वाली औरतों के वोट गगन त्रिपाठी को मिल जाएं तो ब्राह्मण वोट के खिसकने का दर्द कुछ कम हो. इस बीच, ब्राह्मण वोटर मान जाएं तो वारेन्यारे.

गगन त्रिपाठी सदलबल पहुंच गए चिल्लाघाट. पंचायतसभा बुलाई गई. रिजवाना के भाई को नौकरी, गांव में 2 हैंडपंप, बिजली की व्यवस्था तत्काल करवाई गई.

पंचायत और मुसलिम समाज के साथ चर्चा कर के इस नतीजे पर पहुंचा गया कि रिजवाना गांव की बेटी है, जब इस गांव की बेटी गगन त्रिपाठी के घर की बहू बन गई है तो उसे बदनाम औरत न समझ, पूरी इज्जत बख्शी जाए. अगर त्रिपाठी की पार्टी को जिताने का वादा किया जाए तो गांव के लोगों की मुंहमांगी मुराद पूरी होगी.

उधर, मुसलिम भाई, जो रिजवाना के साथ हाथापाई में उतरे थे, अब उस की बदौलत बांदा की कुछ मुख्य सीटों पर त्रिपाठी की पार्टी से खुद के भाईभतीजों को उतारना चाहते थे, आपस में जबरदस्त गठबंधन.

मृगांक और रिजवाना को हिंदुमुसलिम एकता का प्रतीक बना कर चुनावी रणनीति तैयार होने लगी. बड़ेबड़े होर्डिंग्स में दोनों की तसवीरें लग गईं. उन दोनों को सार्वजनिक चुनावी सभा में उपस्थित होने का निमंत्रण भेजा गया.

मंच पर आज मृगांक, रिजवाना और उस की बेटी शीरी उपस्थित थे. काफी लुभावने भाषणों के बाद मृगांक की बारी आई. उस ने माइक संभाला, कहा, ‘‘आज जो भी मैं कहूंगा, जरूरी नहीं कि उस से सब के मनोरथ पूरे हो पाएं. मैं ने रिजवाना से इसलिए शादी नहीं की कि मुझे हिंदूमुसलिम एकता के झंडे गाड़ने थे. सच कहूं तो जातिधर्म को ले कर मैं कोई भेद महसूस नहीं करता, जो जोड़ने की जुगत करूं. उस का मुसलिम होना, मेरा हिंदू होना सबकुछ सामान्य है मेरे लिए, जैसे इंसान होना.

यह भी नहीं कि लाचार औरत पर मैं ने कोई कृपा बरसाई है. उस ने मुझे पसंद किया, मैं ने उसे. उम्र का फासला उसे डिगा नहीं पाया और हम एक हो गए. और हमारी बेटी, जो उस के किसी पाप का नतीजा नहीं है, हमदोनों के

प्रेम में माला सी है. मेरे पिता मुझे हमेशा बड़ा आदमी बनने की नसीहत देते थे. उन्हें अफसोस होगा उन के हिसाब से मैं बड़ा नहीं बन पाया.’’

रिजवाना की गोद से मृगांक ने बच्ची को लिया, रिजवाना का हाथ पकड़ा और स्टेज से उतर कर दोनों ने राह पकड़ी अपने तरीके से अपनी दुनिया बसाने. पीछे भीड़ देखती रही किंकर्तव्यविमूढ़ सी.

रहने दो इन सवालों को : भाग 2

हां, उस के दादाजी का कभी पुलिस विभाग में होना उसे पहचान का लाभ जरूर देता था. न जाने पहचान का लाभ लोग किसकिस वजह लेते हैं, मृगांक के लिए तो यह लाभ सिर्फ सर्वजनहिताय था.

5 फुट 10 इंच की लंबाई के साथ बलिष्ठ कदकाठी में सांवला रंग आकर्षण पैदा करता था उस में. रूमानी व्यक्तित्व में निर्विकार भाव.

दिनभर क्लास, फिर दोपहर 3 बजे से शाम 8 बजे तक भागादौड़ी और रात अपनी छोटी सी कोठरी में अध्ययन, चिंतन, मनन व निद्रा. घरपरिवार, राजनीति, रिश्तों के मलाल, आदेशनिर्देश, लाभनुकसान सब पीछे छूट गए थे. शादी के लिए घर वालों ने कितनी ही लड़कियों की तसवीरें भेजीं, मां ने कितने ही खत लिखे. दीदी ने सैकड़ों बार फोन किए. मगर मृगांक की आंखें लक्ष्य पर अर्जुन सी टिकी रहीं.

उधर, बांदा में पिता की राजनीतिक ताकत और बड़े भाई का राजपाट मृगांकनुमा बाधा के बिना बेरोकटोक फलफूल रहे थे. भाई की पत्नी ऊंचे घराने की बेटी थी जो बेटा पैदा कर के ससुर की आंखों का तारा बन बैठी थी.

जिंदगी की रफ्तार तेज थी, एकतरफ लावलश्कर के साथ ठसकभरी जिंदगी, दूसरी तरफ मृगांक के कंधों पर जमानेभर का दर्द. मगर सब अपनी धुन में रमे थे. मृगांक भी लक्ष्य की ओर दौड़ रहे थे मगर निजी जिंदगी से बेखबर.

इन दिनों उस ने ‘नवलय’ संस्थान की शुरुआत की. दरअसल, देहव्यापार से मुक्त हुई लड़कियां काफी असुरक्षित थीं. एक तरफ उन लोगों से इन्हें खतरा था जो इन्हें खरीदबेच रहे थे. दूसरे, घर परिवार इन लड़कियों को सहज स्वीकार नहीं करते थे, जिन के लिए अकसर वे अपनी जिंदगियां दांव पर लगाती रही थीं. ऐसे में मृगांक खुद को जिम्मेदार मान इन लड़कियों की सुव्यवस्था के लिए पूरी कोशिश करता. नवलय इन असुरक्षित लड़कियों का सुरक्षित आसरा था.

मृगांक ने बांदा जिले के चिल्लाघाट की रिजवाना को कल घर पहुंचाने की जिम्मेदारी ली थी. इस बहाने वह मां से भी मिल लेगा. कई साल हो गए थे घर गए हुए. बड़े भाई का बेटा भी अब 7 साल का हो चुका था.

शाम 5 बजे जब वह नवलय आया, तो नीम के पेड़ के पास खड़े हो कर रिजवाना को घुटघुट कर सुबकते देखा. वह संस्थान के औफिस में जा कर बैठ तो गया लेकिन मन उस का रिजवाना की ओर ही लगा रहा. अपने औफिसरूम से अब भी वह रिजवाना और उस की उदास भंगिमा को देख पा रहा था. चेहरा मृगांक का जितना ही पौरुष से भरा था, भावनाएं उस की उतनी ही मृदुल थीं. रसोइए कमल को बुला कर कहा कि वह रिजवाना को बुला लाए.

रिजवाना की रोनी सूरत देख वैसे तो उस का मिजाज उखड़ गया था, सो जरा सी डपट के साथ समझाने के लहजे में उस ने कहा, ‘‘जब घर से बाहर आ ही गई हो, काफी मुसीबतें झेल भी चुकी हो, तो अब रोना क्या? अब तो हम तुम्हारे घर जा ही रहे हैं.’’

गहरी चुप्पी.

‘‘क्यों, कुछ कहोगी?’’

चुप्पी…

‘‘देखो, मैं थप्पड़ जड़ दूंगा,’’ थकामांदा मृगांक आजकल कुछ चिड़चिड़ा सा हो रहा था. मृगांक के मुख से यह सुनते ही गुस्से से भर रिजवाना ने मृगांक की तरफ देखा. रोने से आंखें कुछ सूजी हुई थीं, मगर दृष्टि स्पष्ट. गोरे से रक्तिम चेहरे पर अनगिनत भाव, जिन में स्वाभिमान सब से मुखर था. तीखे नैननक्श, गोलाई में नुकीला चेहरा, ठुड्डी तक हीरे सी कटिंग. मृगांक के कंधे तक उस की ऊंचाई. दुबली ऐसी, कि वक्त की रेत ने चंचल नदी के किनारों को पाट दिया हो जैसे. नदी आधी जरूर हो गई थी, मगर प्यार और संभाल की बारिश मिले तो वह आबाद हो जाए.

मृगांक का गुस्सा उस के रूमानी नखरों के बीच काफूर हो गया. मन ही मन उस ने कहा, ‘वाह.’ एक मिनट तक दोनों एकदूसरे की ओर देखते रहे.

मृगांक ने चुप्पी तोड़ी, कहा, ‘‘क्या बात है, मुझ से कहो. यहां की सारी बच्चियों के लिए मैं ही पिता, मैं ही मां. तुम्हारी भी अगर…’’

‘‘मेरे हिस्से का रिश्ता मुझे तय करने दीजिए. जरूरी नहीं कि तुरंत 2 व्यक्तियों को किसी रिश्ते के नाम में बांध ही दिया जाए.’’ रिजवाना की इन बातों में बड़ी कशिश थी. वह क्या अनछुआ सा था अब तक जिसे छूने की प्यास सताने लगी मृगांक को. कभी ऐसा महसूस तो नहीं हुआ था उसे, आज क्यों…?

मृगांक ने मुसकराते हुए उस की तरफ देखा, फिर कहा, ‘‘क्यों दुखी हो, मुझ से कहो.’’

तड़पती सी वह धीरे से बोली, ‘‘मैं अपने घर चिल्लाघाट नहीं जाऊंगी. बच्ची को ले कर वहां जाऊंगी तो घर वाले तो क्या, पूरे गांव वाले कच्चा चबा जाएंगे.’’

मृगांक को बड़ा तरस आया उस पर. पूछा, ‘‘क्या हुआ था तुम्हारे साथ? मैं ने पुलिस की दबिश डलवा कर तुम 15 लड़कियों को जहां से छुड़ाया, वह तो नरक से कुछ कम नहीं था. इन में से कई लड़कियां असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से लाई गई हैं. तुम और 3 दूसरी लड़कियां उत्तर प्रदेश की हो. ये लोग दुबई आदि जगहों पर शेखों के पास तुम जैसी लड़कियों को बेच देते हैं.’’

‘‘3 महीनों से हमें इलाहाबाद में रखा हुआ था. हमारे साथ यहां बहुत बुरा सुलूक होता था. करंट देने से ले कर कोड़े बरसाने तक. 3-4 दिनों तक खाना नहीं देना, सब के सामने कपड़े फाड़ डालना, मारना, पीटना आदि.’’

रिजवाना की बातें सुन कर मृगांक की आंखों में दर्द भर आया. उस ने तड़प कर पूछा, ‘‘क्यों?’’

रिजवाना जमीन की ओर देखती, कहती गई, ‘‘ग्राहक के साथ सोने की जबरदस्ती, पैसे वे लोग रखेंगे, हम बस उन के गुलाम. जब तक हम कहीं और न बिकें, उन के लाए ग्राहकों को खुश करें. और उन्हें भी.’’

मृगांक ने पूछा, ‘‘तुम घर से निकल कर उन तक पहुंची कैसे?’’

‘‘आप को मालूम होगा, बांदा जिले में शजर पत्थरों के नक्काशीदार गहने बड़े भाव से बिकते हैं. मैं शजर पत्थरों से गहने बनाती थी, रोजीरोटी के लिए.

‘‘घर में मुझे मिला कर 3 बहनें थीं. एक भाई भी. अब्बा कौटन मिल में मजदूरी करतेकरते फेफड़े की बीमारी से चल बसे. भाई काम पर तो जाता लेकिन उम्र कम होने की वजह से मजदूरी नहीं मिलती थी. बहनों को घर पर काम होता था. 4 साल पहले जब मैं 16 साल की थी, सोचा शजर पत्थरों से गहने अच्छी बनाती हूं, क्यों न शहर में बेचा करूं, पैसे आएंगे.

‘‘चिल्लाघाट से बांदा मुख्य बाजार आने के लिए बस पर चढ़ी, तभी अचानक किसी ने नाक पर रूमाल रख दिया. जब होश आया, खुद को होटल के कमरे में 4 लोगों के साथ पाया. कोठे में बेच दी गई. बेटी शीरी वहीं हुई.

‘‘अचानक उस कोठे पर पुलिस और महिला सुरक्षा संस्थान की दबिश पड़ी तो कोठे की मालकिन ने इन लोगों के हाथों हम 15 लड़कियों को बेच दिया था. हम महीनेभर से यहीं इलाहाबाद में थे.’’

‘‘चलो, एकबार कोशिश करते हैं. तुम्हारे घर वालों तक तुम्हें पहुंचाना मेरा काम है. स्वीकार न किए जाने पर नवलय तो है ही.’’ केन नदी के किनारे से मृगांक की जीप दौड़ती जा रही थी.

भुरागढ़ किला और विंध्य पठारों के पास से गुजरती जीप पर बैठे रिजवाना और मृगांक किले को ही एकटक देख रहे थे. मृगांक ने पूछा, ‘‘जानती हो इस भुरागढ़ किले के बारे में?’’

रिजवाना उदासीन थी, कहा, ‘‘ज्यादा नहीं, आप ही बताइए.’’

‘‘महाराजा धनसाल के बेटे जगत राई और उन के बेटे थे किराट सिंह. उन्हीं किराट सिंह ने यह किला बनवाया था. 1857 में नवाब अली बहादुर ने यहीं से ब्रिटिश अधीनता के विरुद्ध बिगुल फूंका था.’’ ‘‘हूं,’’ रिजवाना दूर काली मिट्टी और उस पर उपजे सरसों, मटर, गेहूं के खेतों में कहीं खो गई थी.

यमुना और केन की मिलनरेखा दूर से दिखने लगी थी. चिल्लाघाट आने को था, शाम की सुरमई शांति में दूर से फाग गीतों के धुन कानों में पड़ रहे थे. धर्म के मोह से ऊपर उठ कर फाग ने यौवन की मादकता को पुकारा था.

रिजवाना बचपन के दिनों की इस मनोरम जगह पर मृगांक की उपस्थिति से प्रफुल्लित सी सिहर गई. गोद में बच्ची और गांवघर के लोगों का अचानक खयाल आना उसे मायूस कर गया. रिजवाना के छोटे से घरआंगन में तब दीपक की रोशनी टिमटिमा रही थी. दोनों बहनें खाना बना रही थीं. भाई चारपाई पर लेटा था. बहन को देख दोनों बहनें दौड़ी आईं. लेकिन रिजवाना की गोद में बच्ची को देख दोनों ठिठक गईं. भाई चारपाई से उठ बैठा. मगर, बस बैठा देखता रहा. दोनों बहनें मां को बुला लाईं जो अंदर कढ़ाई और कशीदे का काम कर रही थीं.

मृगांक के साथ उस की अम्मी की बातों का सार यही रहा कि एक बेटी के चलते शबाना और अमीना, जिन का निकाह होना लगभग तय है, की जिंदगियों पर पानी फिर जाएगा. ऊपर से इस की गोद में हराम की औलाद. गांव वाले हुक्कापानी बंद कर देंगे. ऐसे भी, बेटी की गुमशुदगी से कम जिल्लतें नहीं हुई हैं.

मृगांक समझ गया कि दाल नहीं गलेगी. कम से कम सुबह तक तो ठहरें. इलाहाबाद से बांदा तक 7 घंटे के सफर के बाद अब रात को वापस जाना मुमकिन नहीं. इधर, रिजवाना को ले कर या छोड़ कर अपने घर जाना भी संभव नहीं. अम्मी ने रातभर के लिए खाना भी मुहैया कराया और पनाह भी.

बचाएं अपने स्मार्टफोन को हैक होने से

इंटरनेट के जमाने में दिनभर आपकी उंगलिया फोन पर लगी रहती हैं. जिससे फोन की बैटरी तो डिस्चार्ज हो ही जाती है. ऐसे में अक्सर लोग अपना फोन यूएसबी केबल के जरिए चार्ज करते हैं. क्या आप भी उनमें से एक हैं?

आपको जानकर हैरानी होगी कि यूएसबी केबल से फोन चार्ज करना आपको बहुत महंगा पड़ सकता है. क्योंकि आजकल के स्मार्ट हैकर स्मार्टफोन को हैक करने में इस तकनीक का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं.

कुछ लोग अपने फोन पर हा जरूरी डेटा भी रखते हैं. लेकिन ऐसा करना खतरनाक है. कई चोर और हैकर्स ऐसे ही डिवाइस की तलाश में रहते हैं, ताकि वे आम लोगों की आर्थिक और निजी जानकारियां तक पहुंच कर उन्हें चुरा सकें. तो चलिए बिना देर किए जान लिजिए कि कैसे स्मार्टफोन को हैक होने से बचाया जा सकता है.

ऐसे बचाएं अपने स्मार्टफोन को

फोन को पासकोड से लौक करें

चार डिजिट के पासकोड का इस्तेमाल और साथ में सेल्फ-डिस्ट्रक्ट फीचर को एक्टिवेट करना अपने फोन को हैक होने से बचाने का बेहद ही सुरक्षित तरीका है. 6 डिजिट का पासकोड इस्तेमाल करने का पर उसका अनुमान लगा पाना 100 गुना और मुश्किल हो जाता है. लेटर और कैरेक्टर का इस्तेमाल करके इसे और मुश्किल बनाया जा सकता है. यह विकल्प एंड्रायड और आईफोन दोनों पर उपलब्ध होते हैं.

इनक्रिप्शन का इस्तेमाल करें

अगर आप के पास आईफोन है तो आप का डाटा बहुत हद तक सुरक्षित है क्योंकि आईफोन के साथ अच्छी बात यह है कि इसमें डिफौल्ट में इनक्रिप्शन चलता है, इसका मतलब है कि फोन पर स्टोर किए गए डेटा को आप के अलावा किसी और के द्वारा निकाला नहीं जा सकता या फिर उसे दूसरे कंप्यूटर पर कोई और पढ़ नहीं सकता जब तक फोन को अनब्लौक नहीं किया जाए. अगर आप एंड्रायड मोबाइल इस्तेमाल करते हैं तो आपको सेटिंग्स में जाकर इसे एक्टिवेट करना होगा.

अगर बदकिस्मती से आप का मोबाइल चोरी हो जाये तो इसके जरिए आप फोन के डेटा को अपने कंप्यूटर के जरिए भी डिलीट कर सकते हैं.

डिवाइस फाइंडर सेटअप करें

यह ऐप आईफोन के साथ आता है, लेकिन आपको इसे अपने फोन खोने से पहले सेटअप करना होगा. आप एक्स्ट्रा फोल्डर में फाइंड आईफोन ऐप को खोज सकते हैं. एक्टिवेशन लौक के कारण कोई चोर आपके फोन को बेच नहीं पाएगा. इतना ही नहीं इसका इस्तेमाल करने पर चोरी हुआ फोन इस्तेमाल करने योग्य भी नहीं रह जाता. क्योंकि ऐप्पल आईडी जाने बिना इसे फिर से एक्टिवेट नहीं किया जा सकता.

अगर ये सारे नुस्खे फेल हो जाएं, तो आप फोन के डेटा को अपने कंप्यूटर के जरिए भी डिलीट कर सकते हैं. हालांकि, ऐसा करने से सारा डेटा खो जाएगा.

बिल्कुल ऐसा ही विकल्प एंड्रायड फोन में तो नहीं है. लेकिन आप गूगल के एंड्रायड डिवाइस मैनेजर ऐप के साथ कई थर्ड पार्टी ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं.

फोन का बैकअप बनाएं

अगर आप को मजबूरी में रिमोट सिस्टम से फोन का डेटा डिलीट करना पड़े तो फोन का बैकअप बनाते रहना एक अच्छी आदत साबित होगी. ऐसा करने से आप फोटो या फिर कोई महत्वपूर्ण डेटा नहीं खोएंगे.

हमेशा सौफ्टवेयर को अपडेट करें

सौफ्टवेयर अपडेट में हमेशा उन कमियों को दूर किया जाता है जिनका फायदा हैकर उठाकर आपके डिवाइस के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. इसलिए आपसे जब भी अपडेट के बारे में पूछा जाए तो उसे जरूर इंस्टाल करें.

अन्य उपाय

अपने डिवाइस को चार्ज करने के लिए केवल विश्वसनीय यूएसबी चार्जिंग प्वाइंट्स और कंप्यूटर का उपयोग करें.

अपने मोबाइल फोन को पासवर्ड के साथ या किसी अन्य तरीके से फिंगरप्रिंट पहचान के रूप में सुरक्षित रखें, और चार्ज करते समय इसे अनलौक न करें.

किसी प्रकार के एंटीवायरस सौफ्टवेयर स्थापित करें, जो मालवेयर का पता लगाने में सक्षम है.

संभव हो तो फोन के चार्जर से ही फोन चार्ज करें.

इस बैंक का एटीएम इस्तेमाल करने के लिए नहीं होगी कार्ड और पिन की जरूरत

सरकारी बैंक सेक्टर हो या प्राइवेट बैंक सेक्टर सभी नये साल के मौके पर अपने ग्राहकों के लिए तोहफे के तौर पर नई-नई सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं. ऐसे में यस बैंक भी अपने ग्राहकों को नई सुविधा देने की तैयारी कर रहा है.

प्राइवेट सेक्टर का यस बैंक अपने ग्राहकों को अब एक ऐसा एटीएम कार्ड देगा, जिसे चलाने के लिए उन्हें न कार्ड की जरूरत होगी और न ही किसी पिन की. ऐसा संभव हो सकेगा उस नई तकनीक से जो यस बैंक को अपने नए करार के जरिए मिल रही है.

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यस बैंक ने नियरबाय टेक्नोलौजीज के साथ किया करार

दरअसल यस बैंक ने फिनटेक क्षेत्र की स्टार्टअप नियरबाय टेक्नोलौजी के साथ करार किया है. इस करार के तहत नियरबाय टेक बैंक पर आधारित यस बैंक के ग्राहकों को एक ऐसा एटीएम मुहैया कराएगा जिसमें कार्ड या पिन की जरूरत नहीं होगी. ऐसे में बैंक ग्राहक रिटेलरों के पास पैसा जमा करा सकेंगे और निकाल सकेंगे.

यस बैंक और नियरबाय ने इस सेवा को शुरू करने के लिए नेशनल पेमेंट्स कौरपोरेशन आफ इंडिया के साथ काफी अच्छी तरह जुड़कर काम किया है.

नियरबाय ने आधार सेवाओं के बारे में जागरूकता और इसको लोकप्रिय बनाने के लिए रिटेलर्स एसोसिएशन आफ इंडिया से करार किया है. इसके तहत ग्राहकों को जागरूक किया जाएगा और यह सेवा देश के दूरदराज स्थानों तक पहुंचाई जाएगी.

नियरबाय टेक्नोलौजीज के संस्थापक आनंदकुमार बजाज ने कहा कि इस सर्विस के साथ हमारा उद्देश्य पेमेंट के लिए सुविधा प्रदान करना है.

डिजिटल अधिकारी रितेश पई ने कहा कि इस गठजोड़ के जरिये हम कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था के सपने को पूरा करना चाहते हैं.

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कैसे काम करेगा ये एटीएम

पेनियरबाय आधार एटीएम यस बैंक और बिजनेस कौरस्पौन्डेंट के जरिये उपलब्ध होगा. इसके नेटवर्क में 40,000 टच पौइंट होंगे.

यस बैंक ने बयान में कहा कि पेनियरबाय मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल स्मार्टफोन पर किया जाएगा. इसमें रिटेलर ग्राहकों के लिए आधार एटीएम-आधार बैंक शाखा के रूप में काम करेगा और नकदी जमा कराने या निकालने की सुविधा दी जा सकेगी.

आधार नंबर और उंगली की छाप का इस्तेमाल कर ग्राहक नकदी निकाल सकेंगे या किसी तरह का दूसरा ट्रांजेक्शन कर सकेंगे.

बर्थडे स्पेशल : कपिल देव के बेमिसाल 59 साल

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और सर्वश्रेष्ठ हरफनमौला खिलाड़ियों में शुमार कपिल देव आज (6 जनवरी) अपना 59वां जन्मदिन मना रहे हैं. आज से 59 साल पहले दुनिया को कपिल देव के रूप में ऐसा क्रिकेट खिलाड़ी मिला जिसने बतौर कप्तान, बल्लेबाज, गेंदबाज ऐसा प्रदर्शन किया कि सब देखते रह गए. यूं तो कपिल देव के नाम कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज हैं, लेकिन उनकी फिटनेस का जवाब नहीं.

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स्विंग गेंदबाजी, बेहद चुस्त फील्डिंग और ताबड़तोड़ बल्लेबाजी ने उन्हें दुनिया का सबसे बेहतरीन औल राउंडर और आक्रामक खिलाड़ी बनाया. मालूम हो कि कपिल देव को अर्जुन पुरस्कार, पद्म श्री, पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है.

यहां जानिए टीम इंडिया को उसका पहला विश्वकप दिलाने वाले कपिल पाजी के बारे में कुछ खास बातें –

कपिल का पूरा नाम कपिलदेव रामलाल निकंज है. कपिल 6 जनवरी 1959 में चंडीगढ़ में पैदा हुए थे. उनका परिवार 1947 में पाकिस्तान से भारत आया था. उनकी 4 बहनें और 2 भाई अविभाजित पाकिस्तान में ही पैदा हुए थे.

कपिल देव शुरुआत से ही क्रिकेट में दिलचस्पी रखते थें. 15 साल की उम्र में उन्हें एक खास क्रिकेट कैंप के लिए चुना गया जिसमें वह टैलेंटेड युवा क्रिकेटर बुलाए गए.

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1975 में हरियाणा के लिए कपिल ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया और पंजाब के खिलाफ पहले ही मैच में 6 विकेट लिए. पहले ही सीजन में कपिल ने 30 मैचों में 121 विकेट ले लिए.

1977-76 में कपिल ने एक ही मैच में 10 विकेट लिए. अपने इस शानदार प्रदर्शन के चलते वह दिलीप ट्रौफी, ईरानी ट्रौफी में भी चुने गए.

1978 में पाक में हुई सीरीज के दौरान कपिल की बाउंसर्स ने पाकिस्तानी बल्लेबाजों को परेशान कर दिया. सीरीज के तीसरे मैच में कपिल ने सिर्फ 33 गेंदों में हाफ सेंचुरी लगाई.

1979 में औस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में उन्होंने 28 विकेट झटके और 212 रन भी बनाए. इसी साल कपिल ने पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू सीरीज में एक ही मैच में 10 विकेट लिए. इस सीरीज के दौरान कपिल टेस्ट में 100 विकेट और 1000 रन बनाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने.

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भारत के औस्ट्रेलिया दौरे के दौरान एक मैच में कपिल ने चोट के बावजूद बेहतरीन गेंदबाजी की और सिर्फ 17 ओवर में 5 विकेट लेकर भारत को मैच जिता दिया.

1981-82 में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में कपिल ने 318 रन बनाए और 22 विकेट लेकर मैन औफ द सीरीज बने.

1983 के वनडे विश्वकप में भारत की कप्तानी कपिल के पास थी और टीम से किसी को ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं. जिम्बाबे के खिलाफ मैच में भारत ने 17 रन पर 5 विकेट खो दिए. लेकिन कपिल ने इसके बाद 175 रनों की यादगार पारी खेलकर न कि केवल भारत को जीत दिलाई बल्कि इतिहास भी रच दिया.

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इसी विश्वकप के फाइनल में भारत की पारी सिर्फ 183 रन पर सिमट गई. वेस्टइंडीज जैसी पक्की टीम तीसरी बार विश्व कप जीतने की कगार पर थी. ऐसे में कपिल ने विव रिचर्ड्स का कैच पकड़ कर मैच का रुख बदल दिया. इसके बाद शानदार गेंदबाजी के चलते भारत ने पहला विश्वकप जीता. इस जीत ने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर ही बदल कर रख दी थी.

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1987 विश्वकप में कपिल की ईमानदारी की मिसाल दुनिया ने देखी. औस्ट्रेलिया ने भारत के खिलाफ मैच में 268 रन बनाए लेकिन टीम ने कहा कि उनका एक शौट छक्के की जगह चौका दिया गया. भारतीय कप्तान कपिल ने ये बात मान ली और कंगारूओं का स्कोर 270 कर दिया गया. खास बात ये है कि भारतीय टीम 269 रन ही बना पाई और सिर्फ 1 रन से मैच हार गई.

1991-92 सीजन में कपिल ने कारनामा किया और टेस्ट इतिहास में 400 विकेट लेने वाले दूसरे गेंदबाज बने. 1994 में कपिल ने क्रिकेट से जब रिटायरमेंट लिया तो उनके नाम सबसे ज्यादा 434 टेस्ट विकेट का रिकार्ड दर्ज था.

कपिल देव इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने टेस्ट मैच में 400 से ज्यादा विकेट लिए और 5 हजार से ज्यादा रन बनाए. कपिल के नाम 131 टेस्ट में 434 विकेट और 5248 रन हैं.

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1999 से लेकर 2000 के बीच कपिल भारतीय क्रिकेट टीम के कोच भी रहे.

2007 में कपिल आईसीएल से बतौर चेयरमैन जुड़े. बीसीसीआई ने इसे विरोधी कदम माना और कपिल देव समेत आईसीएल से जुड़े सभी क्रिकेटरों की पेंशन बंद कर दी.

2008 में कपिल देव को सम्मान स्वरूप टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में शामिल किया गया.

सबसे बढ़कर 184 टेस्ट पारियों में बल्लेबाजी करते हुए कपिल देव कभी रन आउट नहीं हुए. हां, एक बार उन्हें जरूर टीम से निकाला गया था, जब दिसंबर 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में उन्हें ड्रौप कर दिया गया था. जिससे फैंस काफी नाराज हुए थे.

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कपिल देव ने साल 1980 में रोमी भाटिया से शादी की. दोनों की एक बेटी है अमिया देव.

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जल्द ही कपिल देव के जीवन पर एक फिल्म बनने वाली है, 1983 नाम की इस फिल्म में रणवीर सिंह कपिल देव का किरदार निभाते नजर आएंगे.

मोबाईल बैंकिंग इस्तेमाल करने वाले हो जाएं सावधान, वायरस का बढ़ रहा खतरा

डिजीटल बैंकिंग से एक तरफ जहां लोगों को सहूलियत हुई है, वहीं दूसरी तरफ कई मामलों में इसका दुरुपयोग भी बढ़ रहा है. ऐसे में इसका प्रयोग करते समय आपको सचेत रहने की जरूरत है. कई बार बैंकों की तरफ से भी आपको महत्वपूर्ण जानकारी किसी से भी शेयर नहीं करने की सलाह दी जाती है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में एंड्रायड यूजर्स को अलर्ट किया गया है. यदि आप भी एंड्रायड यूजर हैं और आप बैंक का लेनदेन चेक करने के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए है.

यह खबर आपके लिए इसलिए जरूरी है ताकि आप इसे पढ़कर आने वाले समय में आपके बैंक खाते में होने वाले किसी भी नुकसान से बच सकते हैं. यदि आपका खाता SBI, ICICI या HDFC बैंक में है और आपने संबंधित बैंक का ऐप डाउनलोड कर रखा है तो यह आपके लिए रिस्की साबित हो सकता है. ग्लोबल IT सिक्योरिटी कंपनी क्विक हील सिक्युरिटी लैब ने एक एंड्रायड बैंकिंग ट्रोजन के बारे में जानकरी दी है.

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इस खतरनाक ट्रोजन ने 232 से भी अधिक बैंकिंग एंड फाइनेंस ऐप को निशाने पर लिया हुआ है. इसका नाम एंड्रायड.बैंक.ए9480 (Android.banker.A9480) है. यह मालवेयर आपकी गोपनीय जानकारी को चुराने के लिए एसएमएस और फेक नोटिफिकेशन का सहारा ले रहा है. यह मालवेयर आपका इंटरनेट बैंकिंग लौगइन आईडी और पासवर्ड की जानकारी चुरा सकता है.

एक बार यह जानकारी किसी दूसरे के हाथ लगी तो यह बहुत ही रिस्की हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक फेक फ्लैश प्लेयर ऐप के जरिए भी आपको परेशान कर सकता है. इस खतरनाम मालवेयर की जद में HDFC, ICICI, IDBI, SBI और एक्सिस बैंक सहित कई बड़े बैंक शामिल हैं. रिपोर्ट में इसमें 12 बड़े बैंकिंग ऐप बताए जा रहे हैं. खासतौर से इस ट्रोजन का निशाना बैंकिंग और क्रिप्टो करेंसी ऐप हैं.

एक बार यूजर को टारगेट करने के बाद इस ट्रोजन के माध्यम से फेक नोटिफिकेशन लौगिन और पासवर्ड एंटर करने के निर्देश दिए जाते हैं, जिसके जरिए हैकर आपकी लौगइन से जुड़ी जानकारी को आसानी से चुरा सके. यूजर्स को सलाह दी गई है कि वह थर्ड पार्टी ऐप, SMS और मेल के जरिए मिलने वाले अनजान लिंक से बचकर रहें.

वीडियो : क्रिकेट से बाहर चल रहे सुरेश रैना सिंगिंग में बना रहे अपना करियर

जहां क्रिकेट पिच पर सुरेश रैना के फैंस उन्हें बेहद मिस कर रहे हैं और वापस आने को कह रहे हैं तो वहीं इस भारतीय बल्लेबाज ने खुद को कहीं और व्यस्त कर रखा है. बता दें कि पिछले कुछ समय से खराब फौर्म की वजह से भारतीय टीम से बाहर चल रहे क्रिकेटर सुरेश रैना अब अपने दूसरे हुनर पर फोकस कर रहे हैं.

ये तो आप सभी जानते हैं कि टीम इंडिया के क्रिकेटर सिर्फ बल्लेबाजी और गेंदबाजी में ही माहिर नहीं हैं बल्कि उनके अंदर दूसरे तरह के हुनर भी हैं कोई डांस में माहिर है तो कोई गाने में. पिछले काफी समय से क्रिकेट से बाहर सुरेश रैना इन दिनों अपनी गायकी पर पूरा ध्यान दे रहे हैं. हाल ही उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी किया है, जो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

इस वीडियो को महज 2 घंटे में 212,778 लोग देख चुके हैं और वहीं हजारों शेयर हो गए हैं. इस वीडियो में सुरेश रैना ‘सपनों के ननिहाल में’ गाने गाते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो में उनके साथ पत्नी प्रियंका चौधरी भी साथ नजर आ रही हैं. रैना का यह गाना @redfmindia पर ब्रोडकास्ट होगा.

उनके गाने को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं और तारीफों के पुल बांध रहे हैं. गौरतलब है कि इससे पहले रैना ने 2015 में भी एक गाना ‘तू मिली सब मिला और क्या मांगू’ गाया था. इस गाने को भी फैंस ने खूब सराहा और शेयर किया था. सुरेश रैना के गायिकी के हुनर के बारे में उनके क्रिकेटर्स फ्रेंड्स तो जानते थे लेकिन अब उनके फैंस भी रूबरू हो रहे हैं.

रैना ने तू मिली सब मिला और क्या मांगू गाना फिल्म Meeruthiya Gangsters के लिए गाया था. सुरेश रैना की आवाज को सुनकर आप कहीं से भी ये अंदाजा नहीं लगा सकेंगे कि उनकी गायिकी में कोई कमी है. वह जो भी गाना गाते हैं पूरी इमोशंस के साथ गाते हैं.

2011 में सुरेश रैना स्टार प्लस के क एक अवौर्ड शो के दौरान भी 2 लाइनें ऐश्वर्या के लिए गुनगुनाई थी. रैना ने ऐश्वर्या के लिए गाना ‘मुझसे नाराज हो तो हो जाओ…लेकिन मुझसे यूं खफा-खफा न रहो..गाया था. हालांकि ये उन्होंने किसी स्टेज पर नहीं बल्कि शो को होस्ट कर रहे आयुष्मान खुराना के कहने पर गाया था. रैना के ताजा वीडियो से साफ जाहिर होता है कि अब उनकी गायिकी में काफी निखार आया है और वह गायिकी के क्षेत्र में भी अपना बेस्ट दे सकते हैं.

श्रद्धा कपूर के लिए 2018 की शुरूआत लेकर आया मनहूस खबर

श्रद्धा कपूर लंबे समय से साइना नेहवाल की बायोपिक फिल्म को लेकर चर्चा में रही हैं. वह साइना नेहवाल की बायोपिक फिल्म में साइना नेहवाल का किरदार निभा रही थी. साइना नेहवाल को यथार्थ परक ढंग से परदे पर निभा लेने के लिए श्रद्धा कपूर काफी तैयारी कर रही थीं. इसी सिलसिले में श्रद्धा कपूर दो तीन बार साइना से न सिर्फ मिली थी, बल्कि कुछ दिन उनके साथ बिताएं थे. मगर उनकी यह सारी मेहनत बेकार हो गयी है. क्योंकि साइना नेहवाल की बायोपिक बनाने वाले फिल्मकार अमोल गुप्ते ने इस फिल्म को हमेशा के लिए डिब्बे बंद कर दिया है.

2018 की शुरूआत में ही श्रद्धा कपूर के लिए साइना नेहवाल की बायोपिक फिल्म के बंद होने की बुरी खबर आयी है. सूत्रों के अनुसार 2017 में श्रद्धा कपूर की एक के बाद एक ‘‘ओ के जानू’’,‘‘हाफ गर्लफ्रेंड’’ और ‘‘हसीना’’सहित तीन फिल्मों के लगातार असफल होने के बाद ही अमोल गुप्ते ने साइना नेहवाल की बायोपिक फिल्म को बंद करने का निर्णय लिया है. इसी के साथ श्रद्धा कपूर के करियर पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लग गया है.

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सूत्रों पर यकीन किया जाए, तो फिलहाल श्रद्धा कपूर के पास एक मात्र फिल्म ‘साहो’ है, जिसमें उनके साथ दक्षिण भारत के सुपर स्टार व ‘बाहुबली’ फेम अभिनेता प्रभाष है. जानकारों का मानना है कि ‘साहो’ से श्रद्धा कपूर के करियर पर कोई असर नहीं पड़ना है, क्योंकि हर कोई मानकर चल रहा है कि ‘साहो’ तो प्रभाष की फिल्म है. उधर 2017 में जिस तरह से श्रद्धा कपूर की तीन फिल्मों की बौक्स आफिस पर दुर्गति हुई है, उससे बौलीवुड का कोई भी फिल्मकार उनके साथ फिल्म बनाने को लेकर उत्सुक नजर नहीं आ रहा है.

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अब अपने इंस्टाग्राम स्टोरी को व्हाट्सऐप पर भी कर सकेंगे शेयर

फेसबुक अपने उपभोक्ताओं के लिए प्रतिदिन कुछ नया करता रहता है. इसी कड़ी में फेसबुक एक परीक्षण कर रहा है जिससे उसके उपभोक्ता अपनी इंस्टाग्राम ‘स्टोरीज’ को सीधे व्हाट्सऐप स्टेटस पर साझा कर सकेंगे. नए फीचर से उपभोगकर्ता अपनी सजावटी फोटो, वीडियो, जीआईएफ व्हाट्सऐप पर पोस्ट कर सकेंगे जो 24 घंटों के बाद अपने आप गायब हो जाएंगे.

30 करोड़ सक्रिय उपभोक्ता

फेसबुक के एक प्रवक्ता के हवाले से बताया गया, ‘हम हमेशा से ऐसे तरीकों का परीक्षण करते रहे हैं, जो इंस्टाग्राम पर अनुभव बेहतर बनाता हो और उन लोगों से अपने पलों को साझा करने में आपको आसानी हो जो आपके लिए महत्व रखते हैं.’ फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने घोषणा की है कि ‘इंस्टाग्राम स्टोरीज’ और ‘व्हाट्सऐप स्टेटस’ के 30 करोड़ सक्रिय उपभोक्ता हैं.

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स्नैपचैट के 17.3 करोड़ यूजर     

प्रतिद्वंदी ऐप स्नैपचैट के फीचर्स की नकल कर बनाए गए इस ऐप के उपभोक्ताओं की संख्या स्नैपचैट के 17.3 करोड़ उपभोक्ताओं की तुलना में लगभग दोगुनी हो चुकी है. आपको बता दें कि फेसबुक अपने यूजर्स के लिए समय-समय पर नए फीचर्स लौन्च करता रहता है. इससे पहले फेसबुक ने बच्चों के लिए ऐसा मैसेंजर ऐप पेश किया था, जिसका कंट्रोल अभिभावकों के हाथ में रहेगा.

पैरंटल कंट्रोल का विकल्प

इससे 12 साल से कम उम्र वाले बच्चों के लिए फेसबुक को और आसान बनाने के साथ ही ऐप में पैरंटल कंट्रोल (यानी बच्चे के फेसबुक मैसेंजर का कंट्रोल अभिभावक के हाथों में) का भी विकल्प है. इसकी मदद से अभिभावक अपने बच्चों की गतिविधियों की निगरानी कर सकेंगे और उसे जरूरत के हिसाब से कंट्रोल कर सकेंगे. इसकी लौन्चिंग के समय फेसबुक अधिकारी ने कहा ‘फेसबुक मैसेंजर किड्स को इसलिए लाया गया है ताकि 12 साल से कम उम्र वाले बच्चे अपने खास लोगों से जुड़े रह सकें. साथ ही उनके अभिभावकों को इस बारे में जानकारी रहे कि वे किससे जुड़े हुए हैं.

इस ऐप को 6 से 12 साल की उम्र के बच्चों के लिए बनाया गया है. अभिभावक बच्चों की कौन्टैक्ट लिस्ट को कंट्रोल करने के साथ ही किसी खास व्यक्ति से बच्चे के बात करने की परमिशन को भी डिसेबल कर सकते हैं.

सुरों के बादशाह ए आर रहमान का आज है जन्मदिन

संगीत एक ऐसी चीज है, जो व्यक्ति को मानसिक रूप से शान्ति पहुंचाती है. यही वजह है कि संगीत की दुनिया में कई ऐसे धुरंधर पैदा हुए हैं, जो लोगों के दिलों को छू लेते हैं. इन्हीं लोगों में से एक ऐसा नाम है जिसे भगवान का दर्जा हासिल है और यह नाम है, ए आर रहमान. ए आर रहमान संगीत की दुनिया के ऐसे बादशाह हैं, जिनकी हुकूमत ना सिर्फ देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चलती है.

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सभी उनके सामने इज्जत से सिर झुकाते हैं और ऐसी शख्सियत के धनी ए आर रहमान का आज 51वां जन्मदिन है. इस मौके पर हम आज आपको बताने जा रहे हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें, जो बेहद कम लोग जानते हैं.

ए आर रहमान का असली नाम दिलीप कुमार है, जो आज संगीत की दुनिया में एक कंपोजर, म्यूजिक प्रोड्यूसर, सिंगर, सौन्ग राइटर और म्यूजिशियन सब कुछ है.

साल 1980 में ए आर रहमान ने अपना पहला TV डेब्यू दूरदर्शन के लिए बच्चों के प्रोग्राम वंडर बैलून से किया था. इसके बाद वे लोगों के बीच काफी पौपुलर हो गए, क्योंकि इस शो में उन्होंने चार अलग-अलग की बोर्ड से धुनें बजाई थी और उस समय उनकी उम्र मात्र 13 साल थी.

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ए आर रहमान ने स्कूल जाना 15 साल की उम्र में ही छोड़ दिया था, क्योंकि उनकी अटेंडेंस पूरी नहीं थी. उन्होंने स्कूलिंग भी कंप्लीट नहीं की है.

यह बात बहुत हैरान कर देने वाली है कि ए आर रहमान एक कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन ईश्वर ने उन्हें ऐसी कला दी है कि वे आज दुनिया के शिखर पर राज कर रहे हैं.

ए आर रहमान की शख्सियत से लोग इतने प्रभावित हुए हैं कि ओंटारियो कनाडा में एक सड़क का नाम ‘अल्लाह रखा रहमान’ रखा गया है, जो ए आर रहमान के नाम पर है.

जैसा कि सभी जानते हैं वह बौलीवुड के लिए ही नहीं, बल्कि हौलीवुड के लिए भी अपना म्यूजिक दे चुके हैं. जिसमें 127 आवर्स, स्लमडौग मिलेनियर, गौड औफ वार, मिलियन डौलर जैसी फिल्में शामिल है.

2007 में रहमान को लिम्का बुक औफ अवार्ड की ओर से इंडियन औफ द ईयर फौर कंट्रीब्यूशन टू पौपुलर म्यूजिक अवार्ड से नवाजा गया था.

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ए आर रहमान के पास 15 फिल्म फेयर अवार्ड हैं. इसके अलावा आज तक उन्हें 138 अवार्ड के लिए नौमिनेट किया गया है, जिसमें से उन्होंने 125 जीत दर्ज की हैं.

वे पहले एशियन हैं, जिन्हें औस्कर अवार्ड मिला है.

एयरटेल के लिए बनाई गई सिग्नेचर ट्यून को ए आर रहमान ने ही कंपोज किया था, जिसके डेढ़ सौ मिलियन डाउनलोड हुए थे.

ए आर रहमान का गाना टाइम्स के 10 बेस्ट साउंड ट्रेक्स में शामिल हुआ था, जो फिल्म ‘रोजा’ से था.

इसी के बाद 2009 में टाइम्स मैगजीन द्वारा वर्ल्ड मोस्ट इन्फ्लुएंशियल पीपल में ए आर रहमान का नाम शामिल किया गया.

ए आर रहमान को अब तक पांच बार डौक्टरेट की उपाधि से नवाजा गया है, इसके अलावा उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण अवार्ड भी भारतीय सरकार द्वारा दिए जा चुके हैं.

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