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व्हाट्सऐप बिजनेस ऐप लौन्च, जानें क्या है खास..?

व्हाट्सऐप बिजनेस ऐप को सबसे पहले इंडोनेशिया, इटली, मैक्सिको, ब्रिटेन और अमेरिका में शुक्रवार (19 जनवरी) को लौन्च किया था. इसके बाद इस ऐप को भारत में भी लौन्च कर दिया गया है. यह ऐप 4.0.3 और इससे ऊपर के सभी एंड्रायड वर्जन में काम करेगा. जिसे गूगल प्ले स्टोर से फ्री डाउनलोड किया जा सकता है. व्हाट्सऐप बिजनेस ऐप को खासतौर पर छोटे बिजनेसमैन को ध्यान में रखकर बनाया गया है. व्हाट्सऐप का यह नया ऐप बिजनेस के लिए एक सिंपल टूल के साथ आता है, इसके जरिए यूजर्स अपने क्लाइंट और कस्टमर्स के साथ आसान तरीके से बात कर सकते हैं. इसके लिए कंपनी ने BookMyShow, Netflix और MakeMyTrip के साथ साझेदारी में शुरुआत की है.

क्या है खास

ओरिजिनल व्हाट्सऐप से अलग, बिजनेस-केंद्रित इस ऐप में बिजनेसमैन अपनी प्रोफाइल बना सकते हैं और बिजनेस की जानकारी, ईमेल या स्टोर एड्रेस और वेबसाइट जैसी डिटेल्स डाल सकते हैं. इसके साथ ही यह स्मार्ट मैसेजिंग टूल भी मुहैया कराता है जिससे तेजी से अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के तेज और फटाफट जवाब दिए जा सकें. ऐप में नए ग्राहकों को ग्रीटिंग मैसेज भेजने और कंपनियों के व्यस्त होने पर ‘away’ सेट करने यानी दूर रहने का विकल्प भी मिलता है. इसके अलावा, ऐप व्हाट्सऐप वेब सपोर्ट करता है जिससे कंपनियां सीधे डेस्कटौप से ही मैसेज सेंड और रिसीव कर सके.

व्हाट्सऐप बिजनेस ऐप के फीचर्स

  • इंस्टौल करने के बाद रजिस्टर करते वक्त आप इसमें जो भी नाम सेट कर देंगे उसे फिर कभी नहीं बदला जा सकेगा.
  • ऐप में रजिस्टर करते वक्त आप अपने बिजनेस की कैटगरी चुन सकते हैं.
  • इस ऐप में रिप्लाई शिड्यूल किए जा सकते हैं.
  • बिजनेस में टेक्स्ट मैसेजों का औटोमैटिक रिप्लाई भी किया जा सकता है.
  • भेजे गए और रिसीव किए गए मैसेजों की संख्या भी देखी जा सकती है.
  • एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और ब्राजील में 80 प्रतिशत से ज्यादा छोटे कारोबारियों का मानना है कि व्हाट्सऐप के चलते उन्हें ग्राहकों से बातचीत करने और अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है. बताया जा रहा है कि व्हाट्सऐप की योजना छोटे कारोबारियों के लिए कौर्पोरेट कम्युनिकेशन को इनेबल करने वाले फीचर के साथ आने वाले समय में कुछ बिजनेस को कन्फर्म अकाउंट्स के तौर पर मार्क करने की है.

रिपब्लिक डे औफर : पेटीएम दे रहा है 80 फीसदी तक का कैशबैक

मोबाइल वालेट कंपनी पेटीएम के यूजर्स के लिए एक खुशखबरी है. पेटीएम अपने यूजर्स के लिए कैशबैक औफर लेकर आई है. जी हां, कंपनी ने अपने यूजर्स को लाभ देने के लिए पेटीएम माल पर रिपब्लिक डे सेल औफर निकाला हुआ है. इसके तहत यूजर्स को पेटीएम माल से किसी भी प्रोडक्ट की खरीदारी करने पर 80 फीसदी तक का डिस्काउंट और इतना ही कैशबैक औफर दिया जा रहा है. इतना ही नहीं पेटीएम अपने यूजर्स को क्यूआर कोड के जरिए ट्रांजेक्शन करने पर 70 रुपये का कैशबैक भी दे रही है.

ऐसे मिलेगा 70 रुपये का कैशबैक

पेटीएम 70 रुपये का कैशबैक अपने ऐसे यूजर्स को देगा, जो कि कम से कम सात ऐसे ट्रांजेक्शन करेंगे, जो कि क्यूआर कोड के जरिए किए जाएंगे. कैशबैक पाने के लिए यूजर्स को ट्रांजेक्शन के बाद इसकी जानकारी कंपनी को देनी होगी, जिसके बाद उनको कैशबैक दिया जाएगा.

किसी भी प्रोडक्ट की खरीद पर मिले कैशबैक को अब यूजर ‘Paytm Cash’ टैब में देख पाएंगे.

पेटीएम यूजर्स को यह खबर निराश कर सकती है. पेटीएम ने अपनी कैशबैक पौलिसी में हाल ही में बदलाव किया है. अब पेटीएम पर यूजर्स किसी भी तरह से मिलने वाले अपने कैशबैक मनी को किसी भी बैंक अकाउंट में ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे. साथ ही कैशबैक मनी को किसी अन्य यूजर्स को भी ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा.

माना जा रहा है कि कैशबैक पौलिसी में बदलाव, ऐप पर खरीदारी बढ़ाने के लिए किया गया है. इस बदलाव के बाद यूजर्स को कैशबैक मनी का इस्तेमाल पेटीएम में खरीदारी के लिए ही करना पड़ेगा.

सरफराज को पूर्व पाक कप्तान ने दी ऐसी सलाह, सुनकर आ जाएगी शर्म

धोनी की कौपी करने पर पाकिस्तान के पूर्व कप्तान यूसुफ ने पाक कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज सरफराज को उनकी फिटनेस और फौर्म संबंधी मसलों से उबरने के लिए टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से सलाह लेने की नसीहत दी है.

यूसुफ ने कहा, ‘मेरा मानना है कि सरफराज को अपनी फिटनेस और कौशल पर काम करने की जरूरत है. जब तक वह अच्छी फौर्म में नहीं आते तब तक वो टीम से भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद नहीं कर सकते. धोनी ने लंबे समय तक टीम इंडिया की तीनों फौर्मेटों में अच्छी तरह से अगुवाई की है. उन्होंने कप्तान ही नहीं बल्कि बल्लेबाज और विकेट कीपर के रूप में भी अपनी भूमिका अच्छी तरह से निभायी है. सरफराज उनसे काफी कुछ सीख सकते हैं.’

हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के पहले मैच में सरफराज स्टंप आउट हुए थे. दरअसल, बड़ा स्कोर खड़ा करने के लिए सफराज अहमद पर पूरी जिम्मेदारी थी. क्योंकि शुरुआती बल्लेबाज जल्द ही आउट हो चुके थे. इसलिए सरफराज आउट होने से बचने के लिए धौनी की तरह स्टंट करते नजर आए, वो मिशेल सैंटनर की बौल को समझ नहीं पाए. बौल टर्न लेते हुए विकेटकीपर के हाथ में आ गई और सरफराज बाहर निकल आए. क्रीज काफी दूर थी तो उन्होंने धोनी स्टाइल में क्रीज पर पैर रखने की कोशिश की. लेकिन वो अपना विकेट नहीं बचा पाए. इसे लेकर उनका सोशल मीडिया पर खूब मजाक बनाया गया.

सरफराज ने धोनी की नकल करने की कोशिश तो कर ली, लेकिन उन्हें सफलता न मिल सकी. ऐसे में ये समझना बेहद जरूरी है कि किसी भी खिलाड़ी के लिए फिट होना बहुत ही आवश्यक होता है. जब आप ऐसे खिलाड़ी की कौपी करने की कोशिश करते हैं तो आपको उसी के जैसा फिट होने की जरूरत होती है.

‘पद्मावात’ पर शहर-शहर बवाल : कहीं आगजनी तो कहीं धारा 144 लागू

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ का विरोध जारी है. पद्मावात के विरोध में गुजरात के अहमदाबाद में आगजनी बड़ी घटना सामने आई है. यहां करणी सेना के सदस्यों ने पहले एक माल को निशाना बनाया और फिर वहां खड़ी करीब 40 गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया.

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आग की चपेट में आसपास की दुकानें भी आ गईं. पुलिस को इन उपद्रवियों को रोकने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. खबरों के मुताबिक पुलिस को हवाई फायरिंग तक करनी पड़ी. हिमालयन माल के मैनेजर राकेश मेहता ने कहा है कि उन्होंने माल के बाहर पहले ही एक बोर्ड में यह लिखकर टंगवा दिया था कि यहां ‘पद्मावत’ फिल्म नहीं दिखाई जाएगी. इसके बावजूद तोड़फोड़, आगजनी कर पूरे माल को तबाह कर दिया गया.

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अहमदाबाद में माल के करीब मौजूद लोगों का कहना था कि आगजनी करने वालों की भीड़ में करीब 2 हजार तक लोग शामिल थे. बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ घंटे तक करणी सेना के सदस्यों ने पूरा इलाका जाम करके रखा था. इसके अलावा अहमदाबाद के थलतेज इलाके में भी ‘पद्मावत’ के विरोध में एक्रो पोलिस माल में पथराव किया गया.

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इस घटना पर करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कलवी ने कहा कि तोड़फोड़ की घटनाएं नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘सबको सन्मति दे भगवान!’.

बता दें कि देश के कई शहरों में इस फिल्म को लेकर विरोध जारी है. यहां तक कि राष्ट्रीय राजधानी सहित बिहार, यूपी, राजस्थान जैसे राज्यों में भी छिटपुट घटनाएं देखने को मिली हैं. उत्तर प्रदेश के कानपुर में काकादेव के सर्वोदय नगर इलाके में स्थित एक मल्टीप्लेक्स माल में करणी सेना के करीब एक दर्जन सदस्यों ने संजय लीला फिल्म ‘पद्मावत’ के खिलाफ प्रदर्शन किया.

गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि राज्य में ज्यादातर सिनेमाघर मालिकों ने स्वेच्छा से विवादास्पद बौलीवुड फिल्म ‘पद्मावत’ नहीं दिखाने का फैसला किया है. उन्होंने जोर दिया कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था कायम रखने के लिये अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है.

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गुड़गांव में धारा 144 लागू

‘पद्मावत’ के 25 जनवरी को रिलीज से पहले राजपूत करणी सेना की धमकी के मद्देनजर गुड़गांव में रविवार तक धारा 144 लगा दी गयी है. करणी सेना ने फिल्म की स्क्रीनिंग कर रहे सिनेमाघरों को निशाना बनाने की धमकी दी है. गुड़गांव में 40 से ज्यादा सिनेमाघर और मल्टीप्लेक्स हैं. हरियाणा सरकार ने हालांकि कहा कि वह फिल्म के प्रदर्शन को लेकर उच्चतम न्यायालय के आदेश को लागू करेगी. गुड़गांव में डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह ने कहा, ‘‘कानून व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर धारा 144 लगाई है।’’ 25 जनवरी को फिल्म ‘पद्मावत’ रिलीज हो रही है.

कानपुर में फिल्‍म के पोस्‍टर फाड़े और मस्टीप्लेक्स के शीशे तोड़े गये

कानपुर में काकादेव के सर्वोदय नगर इलाके में स्थित एक माल मल्टीप्लेक्स में करणी सेना के करीब एक दर्जन सदस्यों ने फिल्म ‘पद्मावत’ के खिलाफ प्रदर्शन किया. काकादेव के थानाध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने बताया कि करणी सेना के सदस्यों ने फिल्म के पोस्टर फाड़ दिये, शीशे तोड़े और वहां मल्टीप्लेक्स के कर्मचारियों के साथ अभद्रता की. प्रदर्शनकारियों ने धमकी दी कि करणी सेना शहर में फिल्म का प्रदर्शन किसी भी हालत में नहीं होने देगी.

मध्‍यप्रदेश में संजय लीला भंसाली का पुतला जलाया

मध्यप्रदेश राजपूत समाज ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और अधिकारियों को अपनी मांगों के समर्थन एक ज्ञापन सौंपा. मध्यप्रदेश राजपूत समाज के महासचिव दीपक चौहान ने कहा, “जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ‘पद्मावत’ की भोपाल में रिलीज रोकने के लिए हमने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है.” चौहान ने कहा कि विरोध प्रदर्शन में अन्य संगठन के लोग भी शामिल हुए. इसमें फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली का पुतला और फिल्म के पोस्टर का दहन किया गया. लोगों ने प्रदेश के अन्य भागों में भी फिल्म के विरोध में प्रदर्शन किया.

बता दें फिल्म से बैन हटाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश और राजस्थान द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका को SC ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने फिल्म बैन से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज किया है. कोर्ट ने कहा है कि हिंसक तत्वों को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता, राज्य सरकारों को कानून व्यवस्था संभालनी होगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब फिल्म ‘पद्मावत’ पूरे देश में अपनी तय तारीख 25 जनवरी को रिलीज होगी.

माइक्रोसौफ्ट ने लौंच किए 4 सस्ते लैपटौप, छात्रों को ध्यान में रखकर बनाया

अमेरिकी मल्टीनेशनल टेक्नोलौजी कंपनी माइक्रोसौफ्ट (Microsoft) ने चार नए लैपटौप लौन्च किए हैं. इन लैपटौप की खासियत यह है कि इन कंपनी ने छात्रों को ध्यान में रखकर पेश किया है. चारों ही विंडोज 10 पर काम करते हैं. साथ ही माइक्रोसौफ्ट ने 146 देशो में अध्यापकों को Office 365 Education के मुफ्त एक्सेस औफर करने की योजना भी पेश की है. माइक्रोसौफ्ट के नए लैपटौप पेश करने के बाद माना जा रहा है कि इससे लैपटौप मार्केट में नई क्रांति आ सकती है. इन लैपटौप में से दो को लेनोवा और दो को जेपी ने विकसित किया है.

10 घंटे की बैटरी लाइफ

माइक्रोसौफ्ट के लैपटौप Lenovo 100e में कंपनी ने इंटेल सेलिरौन अपोलो लेक प्रोसेसर और 2 GB एलपीडीडीआर 4 रैम है. इसमें 1366×768 पिक्सल रिज्यूलूशन वाली 11.6 इंच की एचडी एंटीग्लेयर डिस्प्ले है. कंपनी की तरफ से लैपटौप से 10 घंटे तक की बैटरी लाइफ मिलने का दावा किया गया है. इसका वजन 1.22 किलोग्राम है. खासतौर पर छात्रों को ध्यान में रखकर लौन्च किए गए Lenovo 100e की कीमत करीब 189 डौलर (करीब 12,100 रुपए) से शुरू होती है.

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11.6 इंच की एचडी मल्टीटच डिस्प्ले

माइक्रोसौफ्ट के दूसरे लैपटौप Lenovo 300e टू-इन-वन कनवर्टेबल पीसी को माइक्रोसौफ्ट एजुकेशन सीरीज के तहत लौन्च किया है. इसमें इंटेल पेंटियम प्रोसेसर और 4 GB एलपीडीडीआर4 रैम व 16 GB ईएमएमसी स्टोरेज है. लैपटौप में 1366×768 पिक्सल की 11.6 इंच की एचडी मल्टीटच डिस्प्ले है. इसकी कीमत 279 डौलर (करीब 17,800 रुपए) से शुरू होती है. लैपटौप से 8 घंटे तक की बैटरी लाइफ मिलने का दावा किया गया है.

दो और लैपटौप पेश किए गए

इसके अलावा एजुकेशन रेंज में दो और लैपटौप पेश किए गए हैं, जिन्हें जेपी ने लौन्च किया है. Classmate Leap T303 लैपटौप हैलो सपोर्ट के साथ आया है. इसकी कीमत 199 डौलर (करीब 12,700 रुपए) से शुरू होती है. जबकि Trigono V401 टू-इन-वन लैपटौप की कीमत 299 डौलर (करीब 19,100 रुपए) से शुरू होती है. यह लैपटौप पेन और टच सपोर्ट के साथ आता है.

साथ ही कंपनी की तरफ से यह भी घोषणा की गई है कि कंपनी 146 देशों में स्कूल अध्यापकों को औफिस 365 एजुकेशन का मुफ्त एक्सेस देगी. इनमें माइक्रोसौफ्ट लर्निंग टूल शामिल हैं जिससे छात्रों के लिखने-पढ़ने की समझ और बेहतर होगी.

 

किसी की सलाह नहीं मानते कोहली – वीरेन्द्र सहवाग

वीरेंद्र सहवाग ने फिर से विराट कोहली पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान समय में कोई भी ऐसा खिलाड़ी नहीं है जो भारतीय कप्तान के सामने सिर उठाकर खड़ा हो सके और मैदान पर उन्हें उनकी गलती बता सके. सहवाग ने इससे पहले कोहली की उनकी चयन नीति को लेकर आलोचना की थी.

सहवाग ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि विराट कोहली को एक ऐसे खिलाड़ी की जरूरत है जो मैदान पर उन्हें उनकी गलतियां बता सके.’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक टीम में चार पांच ऐसे खिलाड़ी होते हैं जो कप्तान को सलाह देते हैं और उन्हें मैदान पर गलतियां करने से रोक सके. अभी कोई भी ऐसा नहीं है जो कोहली को गलत फैसला करने पर रोके या टोके.’’ सहवाग ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि मुख्य कोच रवि शास्त्री जरुर कोहली को सलाह देते होंगे. उन्होंने कहा ‘‘अगर टीम में कोई मतभेद हैं तो सपोर्ट स्टाफ सहित सबको बैठकर इसे दूर करना चाहिए।’’

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वीरू ने कहा कि दूसरे खिलाड़ियों से कोहली की जो अपेक्षाएं हैं, उससे उनकी कप्‍तानी प्रभावित होती है. पूर्व ओपनर ने कहा, ”विराट कोहली उस स्‍तर पर पहुंच चुके हैं जहां वो विपरीत परिस्थितियों में खेल सकते हैं और वह भारतीय टीम से भी यही अपेक्षा रखते हैं. हालांकि टीम के बाकी खिलाड़ी अब तक उस स्‍तर तक नहीं पहुंचे हैं जहां कोहली पहले से हैं. इसी का असर कोहली की कप्‍तानी पर पड़ रहा है.”

सहवाग के मुताबिक, कोहली बस यही चाहते हैं कि बाकी भारतीय बल्‍लेबाज भी उसकी तरह बेखौफ होकर खेलें. उन्‍होंने कहा, ”कोहली सिर्फ अपनी तरह रन बनाने को कह रहे हैं और इसमें कुछ गलत नहीं है. मुझे याद है जब सचिन तेंदुलकर कप्‍तान थे तो वह साथी खिलाड़ियों को रन बनाने के लिए कहते थे. अगर मैं रन बना सकता हूं तो तुम क्‍यों नहीं?”

कोहली ने मंगलवार को कहा कि वह दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए की गई टीम की तैयारी से खुश हैं. उन्होंने साथ ही माना कि टेस्ट सीरीज में हार का कारण टीम द्वारा की गई गलतियां रहीं हैं. मैच से पहले कोहली ने कहा, “मुझे व्यक्तिगत तौर पर नहीं लगता कि हमारी तैयारी में कोई कमी थी. मैं अब सीरीज हारने के बाद यहां बैठकर उन पर चर्चा नहीं करना चाहता.”

अब व्हाट्सऐप फौंट्स को बनाएं बोल्ड और इटैलिक

व्हाट्सऐप का इस्तेमाल तो स्मार्टफोन चलाने वाले लगभग सभी लोग कर रहे हैं. व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करने वालों में काफी लोग ऐसे होंगे जिन्हें इसके कई फीचर्स के बारे में जानकारी नहीं है. वहीं काफी यूजर्स तो ऐसे भी होंगे जिन्हें फीचर्स का पता है, लेकिन उसका इस्तेमाल कैसे करना है यह नहीं पता है या आज हम भी आपको व्हाट्सऐप के कुछ ऐसे ही फीचर्स के बारे में बताने जा रहे हैं. अपडेटेड व्हाट्सऐप पर एंड्रौयड यूजर्स टेक्‍स्ट मैसेज का प्रारूप (format) भी सेट कर सकते हैं. मतलब ई-मेल की तरह मैसेज में टेक्‍स्ट को बोल्ड या इटैलिक बनाया जा सकता है. इसके साथ की शेयर डौक्यूमेंट को गूगल ड्राइव में भी सेव किया जा सकता है. जानिए कैसे टाइप करें बोल्ड या इटैलिक मैसेज.

बोल्ड या इटैलिक मैसेज टाइप करने के लिए किसी भी टेक्‍स्ट से पहले और बाद में स्टार (*) और अंडरस्कोर (_) का इस्तेमाल होगा. उदाहरण के लिए बोल्ड लिखने के लिए *YO* लिखना होगा यह टाइप करने के बाद ऐसा YO लिख जाएगा. वहीं अगर आपको इटैलिक में कुछ लिखना है तो इसके लिए _ How are you_ टाइप करना होगा. यह टाइप करने के बाद ऐसा How are you लिख जाएगा.

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आपको बता दें कि अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपके द्वारा भेजा गया व्हाट्सऐप मैसेज कब डिलीवर हुआ और कब पढ़ा गया तो यह आसानी से जान सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले अपना व्हाट्सऐप ओपन करें और उस चैट में जाएं जहां आपको मैसेज का पता करना है कि यह कब पढ़ा गया और कब डिलीवर हुआ. चैट में आने के बाद अपने द्वारा भेजे गए उस मैसेज पर थोड़ी देर प्रेस करें जिसकी जानकारी आपको लेनी है. थोड़ी देर मैसेज पर टैप करने के बाद व्हाट्सऐप में सबसे ऊपर कई औप्शन आ जाएंगे.

अब आपको ऊपर दिखाई दे रहे 7 औप्शन्स में से बीच में आ रहे (i) इस औप्शन पर क्लिक करना है. इसपर क्लिक करते ही मैसेज की पूरी डिटेल्स आपके सामने आ जाएंगी. इसमें सबसे ऊपर मैसेज इंफो लिखा होगा. इसके बाद वो मैसेज लिखा होगा जिसकी जानकारी आप निकाल रहे हो. उसके बाद नीले रंग के दो निशान के साथ Read लिखा होगा (अगर मैसेज पढ़ लिया है तो), इसके नीचे मैसेज पढ़ने का टाइम भी लिखा होगा. इसके नीचे मैसेज डिलीवर होने का टाइम लिखा होगा.

पद्मावत : राजपूतों के आन बान और शान का बेहतरीन चित्रण

जब किसी रचनात्मक इंसान के हाथ बंधे हों यानी कि रचनात्मक बंदिशों के साथ किसी विषय पर फिल्म बनानी हो, तो उस फिल्म का क्या हश्र हो सकता है, इसका नमूना है संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘‘पद्मावत’’. पटकथा लेखन में कुछ गलतियों के बावजूद सुकून की बात यह है कि फिल्म ‘‘पद्मावत’’ में राजपूतों की ‘आन बान व शान’ का बेहतरीन चित्रण है.

यूं तो हम बचपन से किताबों में दर्ज कहानी ‘‘एक था राजा एक थी रानी, दोनों मर गए, हो गयी खत्म कहानी’’ को सुनते आए हैं, पर उसी कहानी को फिल्म ‘‘पद्मावत’’ में नए अंदाज में देखते हुए भी इस सवाल का जवाब नहीं मिलता कि पुरुष (अपने पति व अपने लोगों) के सम्मान के लिए एक स्त्री का जबरन जौहर यानी कि आग में कूद कर मौत को गले लगाने के सत्य घटनाक्रम से कैसे निपटा जाए.

 

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फिल्म की कहानी 13वीं सदी में अफगानिस्तान से शुरू होती है. खिलजी वंश का शासक जलालुद्दीन खिलजी (रजा मुराद) अफगानिस्तान में अपने लोगों के साथ बैठ कर दिल्ली सल्तनत पर काबिज होने की योजना बना रहा है. उसी वक्त उनका भतीजा अलाउद्दीन खिलजी (रणवीर सिंह) जो कि वहशी, निर्दयी व अति गुससैल है, शुतुरमुर्ग के साथ पहुंचता है. शुतुरमुर्ग के एवज में जलालुद्दीन खिलजी की बेटी मेहरूनिशा (अदिति राव हैदरी) का हाथ मांग लेता है. शादी के वक्त जब कार्यक्रम हो रहे हैं, उसी वक्त अलाउद्दीन राजमहल में ही एक महिला के साथ शारीरिक संबंध स्थापित करता है. मेहरूनिशा से शादी के बाद जलालुद्दीन, अलाउद्दीन को कारा का शासक बना देता है. अलाउद्दीन खिलजी चाल चलता है कि जलालुद्दीन उसके पास कारा पहुंच जाएं, जहां सारे सैनिक उसके विश्वासपात्र हैं. वहां पर वह सबसे पहले जलालुद्दीन द्वारा भेंट में लाए गए मलिक काफूर की परीक्षा लेते हुए मलिक कफूर के हाथों जलालुद्दीन के साथ आए दो विश्वासपात्रों की हत्या करवा देता हैं. उसके बाद खुद ही जलालुद्दीन खिलजी की हत्या कर राजा यानी कि सुल्तान बन बैठता है और अपनी पत्नी मेहरूनिशा को पिता की मौत पर आंसू तक नहीं बहाने देता.

उधर सिंहल की राजकुमारी पद्मावती जंगल में शेर का शिकार कर रही है. पद्मावती का शेर पर चलाया गया तीर चित्तौड़ के राजा रतन रावल सिंह को लग जाता है, जो कि सिंहल नरेश के मेहमान हैं. राजा रतन रावल “सिंहल” में पाए जाने वाले खास तरह के मोती को लेने आए हैं. राजा रतन रावल की सेवा करते करते पद्मावती उसे दिल दे बैठती है और फिर राजा रतन रावल सिंह, पद्मावती से शादी करके ही वापस चित्तौड़ पहुंचते हैं. चित्तौड़ पहुंचने पर राजा रतन रावल सिंह अपनी पत्नी पद्मावती के साथ राज्य के गुरू राघव चेतन के पास ले जाते हैं. राघव चेतन, पद्मावती से कुछ सवाल पूछते हैं और जवाब पाकर वह खुद को हारा हुआ पाते हैं. रात में जब राजा रतन रावल सिंह और पद्मावती एकांत के क्षण बिताते हुए प्रेम मग्न हैं, तभी उन्हे गुप्त रूप से देखने राघव चेतन पहुंचते हैं और पकड़े जाते हैं. सजा के तौर पर पद्मावती उन्हें देश निकाला देने की बात करती है. देश निकाला मिलने पर राघव चेतन चितौड़ राज्य को मिटा देने की धमकी देते हुए बाहर निकलता है और दिल्ली सल्तनत पर काबिज हो चुके अलाउद्दीन खिलजी के पास जाकर पद्मावती के रूप सौंदर्य की तारीफ कर खिलजी को चित्तौड़ पर अधिकार जमाने की सलाह देता है.

पद्मावती के रूप सौंदर्य की प्रशंसा सुनकर पद्मावती को पाने की ख्वाहिश के साथ अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना लेकर चित्तौड़ पर आक्रमण के लिए निकलता है. कुछ दूर पर डेरा डालकर वह चित्तौड़ के राजा के पास संदेश भिजवाता है. राजा रतन रावल सिंह उससे डरते नहीं है और उसकी शर्त मानने के लिए तैयार नहीं होते. दूसरे दिन खिलजी अपने सैनिकों की एक छोटी सी टुकड़ी चित्तौड़ पर आक्रमण के लिए भेजता है, यह सभी मारे जाते हैं. अब राघव चेतन, खिलजी को समझाता है कि चित्तौड़ के किले को भेदना आसान नही है. तब खिलजी मनौवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए सैनिकों के साथ वहीं डेरा डाले रहता है. इधर महल में दिवाली का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. फिर होली का त्यौहार मनाया जाता है. अब खिलजी योजना के तहत राजा रतन रावल सिंह के पास सुलहनामे का संदेश भेजता है. खिलजी, चित्तौड़ के राजा की हर शर्त मानकर उनकी मेहमान नवाजी देखने के लिए निहत्था चित्तौड़ राज महल पहुंचता है. शतरंज की बिसात पर दोनों के बीच तीर चलते हैं. अंततः राज्य की जनता की भलाई के खिलजी से समझौता हो जाए, इसलिए पद्मावती की शक्ल दर्पण में खिलजी को दिखायी जाती है. उसके बाद तो खिलजी, पद्मावती को पाने के लिए और अधिक लालायित हो जाता है और राजा रतन रावल को अपने डेरे में बुलाता है. दूसरे दिन जब राजा रतन रावल, खिलजी के डेरे में पहुंचते हैं, तो वह उन्हे बंदी बनाकर दिल्ली ले जाकर जेल में कैद कर देता है. अब शर्त है कि कि जब पद्मावती, खिलजी से मिलने जाएंगी, तभी राजा रतन रावल की रिहाई होगी.

चित्तौड़ की बड़ी महारानी नागमती (अनुप्रिया गोयंका) के विरोध के बावजूद गोरा व बादल के संग योजना बनाकर कुछ शर्तों के साथ पालकी में बैठकर दिल्ली जाती हैं. इन पालकियों में चित्तौड़ के बहादुर सैनिक हैं. उधर दिल्ली में खिलजी की पत्नी मेहरूनिसा, पद्मावती की मदद करती है. पद्मावती, राजा रतन रावल को छुड़ाकर चित्तौड़ पहुंचती है, मगर चित्तौड़ राज्य को गोरा व बादल को खोना पड़ता है.

इस पराजय से खिलजी अतिक्रोधित होकर अपनी पूरी सेना लेकर चित्तौड़ पर हमला बोलते हुए आग के बम बनाकर चित्तौड़ के किले की दीवारों को क्षति पहुंचाता है. फिर राजा रतन रावल सिंह और खिलजी के बीच युद्ध होता है, जब खिलजी हारने लगता है, तो युद्ध के नियमों को ताक पर रखकर खिलजी का गुलाम मलिक काफूर छल करते हुए राजा रतन रावल को तीरों से छलनी कर देता है. अब दोनों तरफ की सेनाओं के बीच युद्ध शुरू हो जाता है. इधर महल के अंदर राजा के मारे जाने पर पद्मावती सभी महिलाओं को इकट्ठाकर जौहर करने के लिए कहती हैं. जब खिलजी, राजमहल में घुसकर पद्मावती तक पहुंचता है, तब तक पद्मावती के साथ सभी नारियां जौहर कर चुकी होती हैं.

बड़े कैनवास की अति भव्यता वाली ‘हम तो दिल दे चुके सनम’, ‘देवदास’, ‘रामलीला : गोलियों की रासलीला’ व ‘‘बाजीराव मस्तानी’’ जैसी फिल्में बना चुके फिल्मकार संजय लीला भंसाली इस बार ‘पद्मावती’ में बुरी तरह से चूके हैं. फिल्म के ज्यादातर दृष्य आंखों को भाते हैं, मगर पूर्णता में यह फिल्म प्रभावित नहीं कर पाती. महायुद्ध, प्रेम कथा और कास्ट्यूम ड्रामा वाली यह फिल्म संजय लीला भंसाली की महत्वाकांक्षी फिल्म होते हुए भी सतहीफिल्म नजर आती है.

इंटरवल के बाद फिल्म पर से उनकी पकड़ छूट जाती है. इंटरवल से पहले भी एडिटिंग टेबल पर मेहनत की गयी होती, तो ठीक होता. फिल्म जरुरत से ज्यादा लंबी हो गयी है. राजा रतन रावल सिंह और रानी पद्मावती के बीच के रिश्तों वाले दृष्य भावनात्मक स्तर पर स्पर्श नही करते. इसी के साथ संजय लीला भंसाली की छाप वाले गीत संगीत व नृत्य देखने के शौकीन दर्शक इस बार ‘पद्मावत’ देखकर निराश होंगे. फिल्म का क्लायमेक्स प्रभावशाली नही बन पाया. राजपुताना औरतों के जौहर को प्रतीकात्मक रूप से दिखाना इस फिल्म की कमजोर कड़ी रही. वैसे इसके लिए फिल्मकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. क्योंकि देश के कानून के हिसाब से भी वह जौहर को उसके सही अंदाज में चित्रित नहीं कर सकते थे और यह बात संजय लीला भंसाली को शुरू से ही पता था.

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फिल्म के तमाम दृष्य जिस तरह से सुंदरता बन पड़े हैं, उसके लिए निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ ही कैमरामैन सुदीप चटर्जी बधाई के पात्र हैं. संजय लीला भंसाली ने राजस्थान के रग को बाखूबी पकड़ा है.

फिल्म में पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी का कोई भी स्वप्न दृष्य नही है. एक भी दृष्य दोनो आमने सामने नहीं आते हैं. फिल्म में राजपूतों के पराक्रम, उनके वसूलों व राजपूत महिलाओं के आत्म सम्मान का ही चित्रण है. इससे राजपूत संगठनों को राहत की सांस लेनी चाहिए.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो अति क्रूर व वहशी अलाउद्दीन खिलजी के किरदार में रणवीर सिंह ने दमदार अभिनय किया है. खुद रणवीर सिंह ने ट्वीटर पर अपने किरदार को दानव की संज्ञा दी है. उन्होने जिस तरह से इस किरदार को परदे पर उभारा है, उसके लिए उनकी तारीफ करनी ही पड़ेगी.एक वाक्य में कहे तो यह फिल्म पूरी तरह से रणवीर सिंह की है. रणवीर सिंह ने साबित कर दिखाया कि उनके अंदर अभिनय की असीम संभवनाएं हैं. ‘पद्मावती’ के किरदार में दीपिका पादुकोण ने भी जानदार अभिनय किया है.

राजा रतन रावल सिंह के किरदार में पहले शाहरुख खान को लिया जा रहा था, पर बाद में कई बदलाव हुए. विक्की कौशल सहित कई दूसरे कलाकारों के नामों की भी चर्चाएं रहीं. अंत में शाहिद कपूर को राजा रतन रावल सिंह के किरदार में चुना गया. राजपूत राजा के किरदार में शाहिद कपूर काफी निराश करते हैं. शाहिद कपूर तो संवाद अदागी करते हुए अपने पिता व मशहूर अभिनेता पंकज कपूर की नकल करते हुए नजर आते हैं.

यदि इस फिल्म को लेकर एक समुदाय के अति प्रतिक्रियावादियों ने विरोध कर फिल्म के प्रदर्शन को लटकाया न होता, तो यह संजय लीला भंसाली की एक और कास्ट्यूम ड्रामा वाली फिल्म के अलावा कुछ न साबित होती.

दो घंटे 43 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘पद्मावत’’ का निर्माण संजय लीला भंसाली, सुधांशु वत्स व ‘वायकौम 18’ ने किया है. फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली, लेखक संजय लीला भंसाली और प्रकाश कापड़िया संगीतकार. संजय लीला भंसाली व संचित बलभरा, कैमरामैन. सुदीप चटर्जी तथा फिल्म के कलाकार हैं – दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, शाहिद कपूर, अदिति राव हैदरी, जिम सर्भ, रजा मुराद व अन्य.

आइपीएल 2018 के मैचों के समय में हुआ बड़ा बदलाव

इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) के नए सीजन यानी IPL-11 में क्रिकेट फैन्स को एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. आइपीएल गवर्निग काउंसिल ने सोमवार को यह जानकारी दी कि IPL-11 सात अप्रैल से 27 मई तक चलेगा और इसके उद्घाटन मैच और फाइनल मैच दोनों की मेजबानी मुंबई करेगा. उद्घाटन समारोह मुंबई में छह अप्रैल को होगा.

नए समय पर शुरू होंगे मैच

नए बदलाव के तहत मैचों की टाइमिंग में हेरफेर किया गया है. नए शेड्यूल के मुताबिक पिछले सीजन तक जो मैच रात 8 बजे से शुरू हुआ करते थे, वे अब शाम 7 बजे से ही शुरू हो जाएंगे, जबकि दोपहर बाद चार बजे से शुरू होने वाला मैच शाम पांच बजकर 30 मिनट से शुरू होगा.

प्रसारक के आग्रह पर लिया गया फैसला

आइपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला ने कहा, ‘प्रसारकों ने मैचों के समय में बदलाव करने का आग्रह किया था और आइपीएल गवर्निग काउंसिल ने सैद्धांतिक तौर पर इसे स्वीकार भी कर लिया है. मैचों के रात आठ बजे शुरू होने से वह देर रात तक खिंच जाते हैं. जहां तक दोनों मैचों के प्रसारण समय में टकराव होने का सवाल है तो प्रसारक ने कहा कि उसके पास दोनों मैचों का एक साथ प्रसारण करने के लिए पर्याप्त चैनल हैं.’

27 और 28 जनवरी को होगी आइपीएल की नीलामी

आइपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला का कहना है कि यह मामला अदालत में है और मुझे लगता है कि 24 जनवरी को अदालत इस मामले का निस्तारण कर देगी. हम इसका इंतजार कर रहे हैं. अगर स्टेडियम तैयार रहता है और अदालत आरसीए की स्थिति को स्पष्ट कर देती तो जयपुर को प्राथमिकता दी जाएगी. अगर ऐसा नहीं होता है तो पुणे वैकल्पिक स्थल होगा.’ आइपीएल की 27 और 28 जनवरी को बेंगलुरु में नीलामी होगी, जिसमें 360 भारतीयों सहित 578 खिलाड़ियों की बोली लगेगी.’

इन दो टीमों की होगी वापसी

आइपीएल टूर्नामेंट की तैयारियां शुरू हो गयी हैं. इस साल आइपीएल में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रौयल्स की आइपीएल में वापसी होगी. वहीं, गुजरात लायंस और पुणे सुपर जाइंट्स बाहर हो गई हैं. बता दें कि मैच फिक्सिंग को लेकर इन टीमों पर 2 साल का बैन लगाया गया था.

लखनऊ महोत्सव पर भारी पड़ा उत्तर प्रदेश दिवस

लखनऊ महोत्सव का अयोजन लखनऊ में हर साल होता है. कला संस्कृति से जुडा यह महोत्सव लखनऊ की अपनी पहचान होती थी. हर साल नवम्बर-दिसम्बर माह में इसका आयोजन बडे धूमधाम से सरकारी खर्च पर होता था. देशविदेश के तमाम कलाकार इसमें हिस्सा लेते थे. मुख्यमंत्री और राज्यपाल इसके उदघाटन और समापन में अपना समय देते थे.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लखनऊ का आयोजन तय समय पर नहीं किया. इसके लिये नगर निगम चुनाव होने का बहाना किया गया. नगर निगम चुनाव नवम्बर में था देखा जाये तो दिसम्बर में लखनऊ महोत्सव का आयोजन किया जा सकता था. जिससे उसकी अलग पहचान बनी रहती. उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली बार 24 जनवरी का उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस मनाने की शुरूआत की.

ऐसे में लखनऊ महोत्सव को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस का एक हिस्सा बना दिया गया. जिसके तहत 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस मनाया जायेगा. यह 3 दिन चलेगा, 27 जनवरी से 2 फरवरी तक लखनऊ महोत्सव के लिये तय है.

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उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस मनाने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने अखिलेश सरकार के समक्ष भी रखा था. तब यह आयोजन नहीं हो पाया. योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस मनाने का फैसला किया. योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस को भव्य तरीके से मनाने का फैसला किया. अब इसमें उपराष्ट्रपति वेकैंया नायडू सहित राज्यपाल और मुख्यमंत्री इसमे हिस्सा लेगे. इस संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा विज्ञापन में दी गई जानकारी को देखने के बाद साफ झलकता है कि उत्तर प्रदेश महोत्सव लखनऊ महोत्सव पर भारी पड रहा है.

24 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत का नाम बदल कर उत्तर प्रदेश रखा गया था. इस वजह से 24 जनवरी को ही उत्तर प्रदेश का स्थापना दिवस माना गया. राज्यपाल राम नाइक ने उत्तर प्रदेश दिवस मनाने के औचित्य पर तर्क देते बताया कि हम महाराष्ट्र दिवस पहले मनाते थे. ऐसे में उत्तर प्रदेश दिवस मनाने का ख्याल आया. सरकार से जुड़े सूत्र कहते है अभी यह तय नहीं है कि आगे से लखनऊ महोत्सव और उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस एक साथ होगे या अलग अलग. जिस तरह से योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश महोत्सव को बडे स्तर पर मनाने की योजना बनाई है उससे साफ दिख रहा है कि आगे भी लखनऊ महोत्सव को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस से जोड कर मनाया जाए.

लखनऊ महोत्सव में लखनऊ की कला संस्कृति की झलक दिखती थी. अब उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के जुडने से पूरे प्रदेश की गतिविधियों को शामिल किया जायेगा. जिससे लखनऊ की कला संस्कृति को अहम जगह नहीं मिल पायेगी. ऐसे में लखनऊ का पुराना गौरव नहीं दिख सकेगा. इस बार यह महोत्सव अवध शिल्पग्राम में मनाया जा रहा है. सरकार ने अपने प्रचार में साफ लिखा है ‘नव निर्माण-नवोत्थान-नव-कार्य-संस्कृति‘. जिससे साफ है कि इस उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस से लखनऊ महोत्सव की पहचान भी बदल जायेगी.

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