संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर की जयंती अब किसी त्योहार से कम नहीं होती जिसे मनाने के लिए देशभर में होड़ सी मची रहती है. हैरत की बात यह है कि दलितों के इस मसीहा की जयंती अब वे लोग ज्यादा समारोहपूर्वक मनाते हैं जिन के मुंह का कौर भी अंबेडकर का स्मरण हो आने पर नीचे उतरने से इनकार कर देता है. पर मजबूरी यह है कि इन सवर्णों ने ही अंबेडकरवाद खत्म करने का टैंडर भर रखा है. अंबेडकर जयंती पर थोक में दलित सम्मेलन होते हैं जिन में यह साबित करने की कोशिश की जाती है कि वे एक देवता थे.
हाथ में नीले झंडे थामे तालियां पीटती और जय भीम, जय भारत का गगनभेदी नारा लगाती भीड़ समझ ही नहीं पाती कि यह श्रद्धा नहीं, बल्कि सनातनी साजिश है. कभी हिंदू धर्म के पाखंडों, कर्मकांडों और जातिगत भेदभाव व प्रताड़ना से दुखी हो कर बुद्ध ने मनुवाद के चिथड़े उड़ा दिए थे, इसलिए उन्हें अवतार घोषित कर दिया गया था और फिर मनुवाद कायम हो गया था. अब भला यों श्रेष्ठ वर्ग अंबेडकर को यों ही तो महान घोषित नहीं कर रहा.
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जीएसटी यानी वस्तु और सेवाकर से होने वाली परेशानियों को ध्यान में न रखते हुए केंद्र सरकार ने कारोबारियों के लिए नई ई-वे बिल व्यवस्था लागू कर दी है, जिस में बहुत से ऐसे नियम हैं जो व्यापारियों के लिए सुविधाजनक नहीं हैं. व्यापारियों का कहना है कि अभी हम जीएसटी के जंजाल से जूझ ही रहे थे कि ई-वे बिल के रूप में नई मुसीबत सामने खड़ी हो गई है. हालात यह है कि कारोबारी को बजाय कारोबार करने के, औनलाइन खानापूर्ति करने में ही अपना समय लगाना होगा.
वहीं, सरकार का दावा है कि ई-वे बिल से कारोबारियों की मुसीबतें कम होंगी. उन को टैक्स औफिस के चक्कर नहीं लगाने होंगे. वे अपने फोन से ही ई-वे बिल बना सकेंगे. इस से वे पूरे देश में कहीं भी अपना माल भेजने के लिए स्वतंत्र होंगे.
उधर, कारोबारियों की परेशानी यह भी है कि ई-वे बिल के दायरे में अब 20 वस्तुओं को शामिल कर लिया गया है. इस से कारोबारियों के सामने और ज्यादा परेशानियां आई हैं.
जिन वस्तुओं को ई-वे बिल के दायरे में लाया गया है उन में सुपारी, लोहा, इस्पात, सभी प्रकार के खा• तेल, वनस्पति घी, कोलतार, कोल, सभी प्रकार की टाइल्स, अखबारी कागज, सभी तरह के दूसरे कागज, स्टोन, सिगरेट, सिगार, टायरट्यूब, कत्था, खैनी, जरदा, तंबाकू से बने प्रोडक्ट्स, लुंब्रीकेंट्स, स्किम्ड पाउडर, पेंट, वार्निश, सेनिटरी वेयर और फिटिंग, वुड और टिंबर शामिल हैं. ऐसे में करीबकरीब हर कारोबारी इस दायरे में आ गया. ई-वे बिल की परिधि में आई ज्यादातर चीजें रोजमर्रा की हैं. ऐसे में कारोबारियों की मुसीबतें तो बढ़ेंगी ही, ये चीजें महंगी भी हो जाएंगी.
कैसे बनेगा ई-वे बिल
सरकार ने ई-वे बिल के लिए जीएसटीएन पोर्टल से अलग वैबसाइट बनाई है. इस के जरिए देशभर के सभी कारोबारी और ट्रेडर्स इस वैबसाइट पर ई-वे बिल को जनरेट कर सकेंगे. सरकार ने व्यापारियों की सुविधा के लिए एंड्रौएड फोन के लिए ई-वे बिल का ऐप भी लौंच किया है. इस को मोबाइल के प्लेस्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. इस ऐप के जरिए भी कारोबारी ई-वे बिल को जनरेट कर सकते हैं. इस ऐप को डाउनलोड करने पर कारोबारी को अपनी डिटेल और जीएसटीएन नंबर रजिस्टर करना होगा.
इधर, कारोबारी ई-वे बिल की खामियों से खासे परेशान हैं. पोर्टल और इंटरनैट की दिक्कतों के साथ ही साथ उन्हें कई तरह की अव्यावहारिक दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है.
सरकार कहती है कि ई-वे बिल लागू होने से कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों को किसी भी टैक्स औफिस या चैकपोस्ट पर जाने की जरूरत नहीं होगी. कारोबारी ई-वे बिल को इलैक्ट्रौनिकली स्वयं निकाल पाएंगे. कारोबारी औफलाइन भी एसएमएस के जरिए ई-वे बिल बनवा सकेंगे.
जिन कारोबारियों के पास इंटरनैट की सुविधा नहीं होगी और जिन को एक दिन में ज्यादा ई-वे बिल जनरेट नहीं करने हैं, वे एसएमएस के जरिए ई-वे बिल को जनरेट करवा सकते हैं. इस के लिए कारोबारी को अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर कराना होगा. इसी नंबर से एसएमएस के जरिए ई-वे बिल की रिक्वैस्ट डिटेल दे कर वे ई-वे बिल जनरेट करवा सकते हैं. ई-वे बिल जनरेट करने पर क्यूआर कोड जनरेट होगा. इस कोड के जरिए ही जीएसटी अधिकारी कभी भी व्हीकल की चैकिंग कर सकते हैं. इस के जरिए ही व्हीकल को ट्रैस भी किया जा सकेगा.
कारोबारियों को ई-वे बिल बनाने के लिए वैबसाइट पर जा कर जीएसटी का यूजर पासवर्ड डालना होगा. इस के बाद ही वे अपना ई-वे बिल जनरेट कर सकेंगे. अगर कारोबारी ने अपना ई-वे बिल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो उन्हें अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इस के बाद ई-वे बिल पर रजिस्ट्रेशन क्लिक करना होगा. यहां पर जीएसटीएन नंबर भरने से पासवर्ड मिल जाएगा. इस से ही वे अपना ई-वे बिल बना सकेंगे.
हड़बड़ी में लिया गया फैसला
ई-वे बिल को ले कर कारोबारियों को पोर्टल के अलावा भी कुछ दिक्कतें हैं. कारोबारी चाहते हैं कि सरकार इस में संशोधन करे. अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष संदीप बंसल कहते हैं, ‘‘ई-वे बिल किसी भी तरह से कारोबार के हित में नहीं है. इस के लागू होने के बाद वे कारोबारी भी जीएसटीएन नंबर लेने के लिए मजबूर हो गए हैं जो जीएसटी के दायरे में नहीं आते. सरकार ने जीएसटी लागू करने में जिस तरह की हड़बड़ी दिखाई, वैसी ही हड़बड़ी उस ने ई-वे बिल के लिए भी दिखाई. बिना पूरी तैयारी के इस को लागू किया गया है. जीएसटी में रोज नए बदलाव हो रहे हैं, जिस से कारोबारी परेशान हो रहे हैं. इस तरह के बदलावों से यह लगता है कि सरकार कारोबारियों के हित के बजाय उन का अहित करने का काम कर रही है.’’
वे कहते हैं, ‘‘आज भी देश में तमाम ऐसे कारोबारी हैं जो इंटरनैट और कंप्यूटर की जटिलताओं से दूर हैं. वे मेहनत और ईमानदारी से कारोबार करते हैं, समय पर टैक्स देते हैं. वे चाहते हैं कि सरकार टैक्स को सरल करे, जिस से उन्हें इस झमेले से मुक्ति मिल सके.
केंद्र की भाजपा सरकार लगातार कारोबारियों को परेशान करने वाले कानून बना रही है. विपक्ष में रहते हुए कभी जिस एफडीआई का वह विरोध करती थी, आज खुद उस ने उसी को लागू कर दिया. महंगाई और पैट्रोलियम पदार्थों के दामों को ले कर वह पहले विरोध करती थी अब उस का समर्थन कर रही है. पूरे देश पर जीएसटी लागू किया पर पैट्रोलियम पदार्थों पर जीएसटी नहीं लगा रही है. अगर पैट्रोलियम पदार्थों पर जीएसटी लागू हो जाए तो ये काफी हद तक सस्ते हो जाएंगे.
बदलाव की मांग
कारोबारी ई-वे बिल के कुछ प्रावधानों में बदलाव चाहते हैं.
• 30 किलोमीटर से ज्यादा दूर माल भेजने पर ई-वे बिल बनाना होगा.
— कारोबारी चाहते हैं कि आज शहरों की घटती दूरी को देखते हुए यह कम है. इस में तो एक महल्ले से दूसरे महल्ले के बीच माल भेजने वाले को ई-वे बिल बनाना जरूरी हो जाएगा. ऐसे में ई-वे बिल के लिए कम से कम 60 किलोमीटर की दूरी का प्रावधान किया जाए.
• 50 हजार रुपए से ज्यादा का माल भेजने के लिए ई-वे बिल बनाना होगा.
— कारोबारी कहते हैं कि इस नियम से सभी के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो जाएगा. तब जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट की बात बेमानी होगी. इसलिए यह सीमा बढ़ा कर कम से कम 2 लाख रुपए की जाए.
• माल भेजने के लिए ट्रक का नंबर देना होगा.
— कारोबारी कहते हैं कि कई बार ट्रांसपोर्ट वाले माल भेजते समय ट्रक बदल देते हैं. कोई दूसरी परेशानी भी खड़ी हो सकती है. ऐसे में ट्रक का नंबर बाद में बदलने का प्रावधान शामिल किया जाए.
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‘‘यू आर लुकिंग नाइस. वैरी स्मार्ट, बल्कि कहूंगी सैक्सी लग रही हो. एकदम अलग हट कर ड्रैसेस पहनती हो. बंधीबंधाई लीक पर तू कपड़ों के मामले में भी नहीं चलती. लगता है तुझे नितनए प्रयोग करने का शौक है.’’ सान्या ने अपनी फ्रैंड लेखा से कहा तो वह मुसकराते हुए बोली, ‘‘मैं वही पहनती हूं जो मुझे अच्छा लगता है. किसी दूसरे के स्टाइल या फैशन की मैं नकल नहीं करती. अगर करूंगी तो फिर मनचाहा कभी पहन ही नहीं पाएंगे, लेकिन जो भी पहनती हूं उस में ऐक्सपैरिमैंट करने में पीछे नहीं रहती हूं. कई लोग इसे ले कर मेरा मजाक भी उड़ाते हैं पर किसी को अच्छा लगे या बुरा, मैं तो वही पहनूंगी जो मुझे पसंद है.’’
‘‘ठीक है, पर जो चलन में है वह पहनो तो सही रहता है. फिर बेवजह कोई आप को घूर कर भी नहीं देखता है. प्रयोग करने की क्या जरूरत. मैं तो नहीं करती. जो भी बाजार में उपलब्ध होता है. पहन लेती हूं,’’ सान्या बोली.
‘‘अरे, प्रयोग करने से घबराना कैसा, बल्कि इस से तो पहनने में वैराइटी मिल जाती है. एक ही ड्रैस को अलगअलग कौंबिनेशन के साथ मिक्स ऐंड मैच कर के पहनने का मौका मिल जाता है और साथ ही, बहुत खर्च भी नहीं करना पड़ता.’’ लेखा की बात सान्या को समझ आई कि नहीं, पर यह सही है कि प्रयोग करने से घबराना नहीं चाहिए.
इनोवेटिव होना जरूरी
किसी नए और ट्रैंडी स्टाइल को हम फैशन कहते हैं, पर अगर आप एक ही जैसे ड्रैसिंग सैंस को बारबार दोहराती हैं तो कुछ समय बाद भले ही आप उस स्टाइल में कितनी ही कूल क्यों न लगे, लेकिन आप खुद अपनेआप से बोर होने लगेंगी. इस तरह आप दूसरों को तो अपने ड्रैसिंग सैंस के बारे में बात करने का मौका देती ही हैं, साथ में इस से आप का खुद का कौन्फिडैंस भी डगमगाने लगता है. इसलिए जब भी आप को मौका मिले अपनी अलमारी को अपग्रेड करती रहें.
खुद को हमेशा स्टाइलिश दिखाने के लिए आप को अपने कपड़ों को मिक्समैच कर के पहनना चाहिए. किसी एक स्टाइल में बंध कर न रहें. इस तरह से कपड़ों को मिक्स ऐंड मैच कर के पहनने का असर आप को खुद नजर आएगा और आप काफी आकर्षक दिखेंगी, फैशन ट्रैंड को फौलो करना जैसे आजकल का टशन बन गया है.
टीनऐजर लड़कियां फैशन मैगजींस या सैलिब्रिटीज का स्टाइल कौपी करने की कोशिश करती हैं. उन्हें लगता है कि फैशन मौडल्स की तरह कपड़े पहन या फिल्मी सितारों की तरह दिखने से वे भी स्टाइलिश और टै्रंडी नजर आएंगी. इस नकल के चक्कर में वे मनपसंद कपड़े नहीं पहन पाती हैं और प्रयोग करने के बारे में तो सोचती ही नहीं है. पहनें वही जो मन को भाए और इस के लिए थोड़ा सा इनोवेटिव हो जाएं तो आप की सुंदरता में चारचांद लग जाएंगे.
ट्रैंडी साड़ी आजमाएं
माना जाता है कि साड़ी पहनने से एक टिपिकल लुक आता है और लोग आप को मौडर्न नहीं समझते, पर अगर आप अपनी साड़ी पहनने के ट्रैडिशनल तरीके को छोड़ कुछ नया प्रयोग उस के साथ करेंगी तो वह नया लुक आप को ग्लैमरस लुक देगा.
चाहे कोईर् भी अवसर हो, साड़ी में आप हमेशा ही बेहद खूबसूरत लग सकती हैं. यह बहुत हैरानी की बात है कि कैसे एक भारतीय परिधान होने के बावजूद साड़ी ने फैशन की दुनिया में हुए बदलाव में खुद को अच्छे तरीके से ढाल लिया है.
शिमर बौर्डर की सिंपल नैट साड़ी क्लासिक औप्शन है. यह आप के लुक में ग्लैमरस लाने का काम करेगी, पर ध्यान रखें कि शिमर के साथ आप कोई भी भारी ज्वैलरी न पहनें. अगर आप इसे ले कर कोई ऐक्सपैरिमैंट नहीं करना चाहतीं तो आप एक प्लेन साड़ी को शिमर ब्लाउज के साथ पहन कर अपने लुक को और शानदार बना सकती हैं. साथ में हील्स पहनें और एक क्लच ले लें.
साड़ी पहनते समय पूरी ड्रैस मैच करने की कोशिश न करें. इस की जगह आप अलगअलग कलर्स और वैरायटी आजमाएं. इंडियन साड़ी पर वैस्टर्न ज्वैलरी पहनें. इंडियन कफ की जगह ज्योमैट्रिक शेप के कफ और नेकपीसेज चुनें. आप चाहें तो गले को खाली भी छोड़ सकती हैं या फिर हलके वजन के पैंडेट पहनें. अगर आप अपने लुक को थोड़ा और इनोवेटिव लुक देना चाहती हैं तो मैनडेरिन कौलर ब्लाउज पहनें. अगर आप की साड़ी प्लेन है तो हलकी जरी वाला ब्लाउज पहनें. आप चाहें तो हौल्टर नेक या स्लीवलैस ब्लाउज भी ट्राय कर सकती हैं.
अगर आप के पास एक अच्छी कुरती और साड़ी है तो दोनों को एकसाथ कैरी करें. कौलर वाली थाईलैंथ कुरती को बौर्डर वाली साड़ी के साथ पहनें.
स्कर्ट स्टाइल है कुछ हट कर
टीनएजर लड़की हो या 30-35 साल की औरत, स्कर्ट हर किसी को पहननी अच्छी लगती है. वजह है कि इस का फेमिनिन और ग्रैसफुल लुक कभी भी ट्रैंड से बाहर नहीं होता. लेकिन एक बनेबनाए स्टाइल से अलग भी आप इसे कई तरह से प्रयोग कर पहन सकती हैं, जैसे इसे ब्लाउज और कुरती के साथ पहना जा सकता है या टक किए हुए शर्ट के साथ भी यह बेहतरीन लुक देती है. जरूरत है बस, आप की एक क्रिएटिव नजर की. और इस में आप अपने लुक से हर किसी को लाजवाब कर सकती हैं. जैसे अगर आप इसे सर्दी में फौर्मल वेयर की तरह पहन रही हैं तो जैकेट, टाइट्स और बूट्स की पेयरिंग खूब जंचेगी, लेकिन अगर गरमी में दोस्तों के साथ बाहर घूमने के लिए इसे पहनती हैं तो क्रौप टौप के साथ पेयर करते हुए इस के साथ स्ट्रैप वाली सैंडिल्स पहनें.
स्कर्ट के साथ सब से अच्छी बात यह है कि यह कई तरह के शेप्स और स्टाइल में मिलती हैं और हर बौडीशेप में कोई न कोई स्कर्ट फिट हो ही जाती है. लैगिंग्स के साथ पहनी गई एक लौंग पैसिंल स्कर्ट या यहां तक कि स्किनी जींस और एक वैस्टकोर्ट भी सर्दी में आप को कमाल का लुक दे सकता है.
डिजाइनर स्कर्ट्स खरीद रही हैं तो उसे थोड़ा और मौडर्न व फैशनेबल बनाने के लिए उस के साथ बैल्ट और हैट पहनें. एसिमिट्रिकल हेमलाइंस आज के लेटैस्ट फैशन ट्रैंड में है. आप भी अपने स्कर्ट के साथ एक एसिमिट्रिकल हेमलाइन यूज करें. साथ में डिजाइनर शर्ट पहनेंगी तो इस स्कर्ट लुक में आप को देख लोग हैरान रह जाएंगे. शौर्ट बटनडाउन शर्ट के साथ घुटनों तक की एलाइन स्कर्ट भी खूब अच्छी व इनोवेटिव लगती है. इस के साथ हील्स और एक स्मार्ट टोटे बैग लेना न भूलें.
आप को लगता है कि इंडियन वेयर पसंद करने वाली महिलाओं की पसंद में स्कर्ट नहीं आ सकती है, तो आप गलत सोचती हैं. हमें नहीं भूलना चाहिए कि परंपरागत भारतीय पहनावे में घाघरा हमेशा ही शौक से पहना जाता रहा है. एसिमिट्रिकल कुरते के साथ आप फिं्रज और फ्लेयर्ड, फ्लोरलैंथ की स्कर्ट पहन कर एक नया प्रयोग कर सकती हैं. यह फ्यूजन लुक आप को एथनिक के साथ ही एक मौडर्न लुक भी देगा.
कुरते के साथ स्कर्ट पहनना भी एक नया प्रयोग हो सकता है. इस के साथ कमर पर बैल्ट पहन सकती हैं. यह ड्रैस पार्टीवेयर होने के साथ ही एक फ्यूजन एलिमैंट के साथ आप को कैजुअल लुक भी देगी. धोतीस्कर्ट नवीनतम ट्रैंड है. इसे क्रौप टौप या फिटेड वैस्ट के साथ पहनें. इस के साथ कोटजैकेट भी पहन सकती हैं.
दोस्तों के साथ शौपिंग पर जा रही हैं या फिर अपने पति के साथ किसी कैजुअल लंच पर, लेदर स्कर्ट एक अच्छा औप्शन हो सकता है. इसे आप लूज टीशर्ट, स्वेटर्स और स्वैट्स के साथ पहनें.
स्कर्ट टाइट फिटिंग के बजाय लूज फिटिंग की ही चुनें ताकि चलने में दिक्कत न आए. अगर नाइट पार्टी में जा रही हैं तो एक ब्लैक या व्हाइट टैंक टौप स्कर्ट के साथ पहन लें. इस के साथ एक सैक्सी स्टेटमैंट इयररिंग्स पहनें. आप चाहें तो एक सैक्सी सा क्रौप टौप भी पहन सकती हैं. थोड़ा पेट दिखाने में हर्ज ही क्या है. जब बात टौप के साथ ऐक्सपैरिमैंट करने की हो तो खुद को किसी सीमा में न बांधे. एक स्लीक लेदर स्कर्ट आप को क्लास देने के लिए काफी है. लेदर स्कर्ट स्लीक व्हाइट शर्ट और ब्लैक जैकेट के साथ बहुत जंचती हैं.
कुछ नया अंदाज
आम ऐक्सपैरिमैंट्स से अलग अगर आप कुछ नया करने की सोच रही हैं, तो क्रौप टौप के साथ शरारे की जोड़ी एक अच्छा आइडिया हो सकता है. पर आप भी यह तो नहीं सोच रही कि साड़ी, सूट या घाघरा से अलग क्या प्रयोग किया जा सकता है? ऐसे में आप हलके रंगों में शरारा के साथ कसीदा किया हुआ क्रौप टौप पहन सकती हैं. स्काई हाई हील और खूबसूरत क्लच बैग इस पर परफैक्ट लगेंगे.
फैशन में घाघरा ड्रैस का चलन कम जरूर हुआ है लेकिन यह पूरी तरह बाहर नहीं हुआ है. इसलिए आप इसे अलमारी से बाहर का रास्ता न दिखाएं और क्रिएटिव तरीके से ऐक्सपैरिमैंट कर नया अंदाज दें. घाघरे को किसी ट्रैडिशनल साड़ी के साथ पहनें. साड़ी को दुपट्टे की तरह प्लीट्स डाल कर, सीधे पल्ले की तरह पहनें. अनारकली के साथ फ्लेयर्स पहनें और उस पर साड़ी के टुकड़े से बना बड़ी अर्ज का दुपट्टा लें.
ड्रैसेज कलर्स के साथ भी ऐक्सपैरिमैंट करें. अपने कलर पैलेट को सीमा में न बांधें. रंगों से डरें नहीं बल्कि उन्हें एंजौय करें. आप ब्राइट कलर्स से ऐक्सपैरिमैंट कर सकती हैं. दिन की किटी पार्टी में पिंक, औरेंज, रैड, लाइट ग्रीन और यलो आप पर बेहतरीन लगेंगे. आजकल प्रिंट्स काफी ट्रैंड में हैं, इसीलिए आप चाहें तो फ्लोरल प्रिंट्स, ग्राफिक प्रिंट्स, अमेजिंग ज्योमैट्रिक प्रिंट्स, स्ट्राइप्स और डिजिटल प्रिंट्स से ऐक्सपैरिमैंट कर सकती हैं. आप शर्ट्स के रंगों के साथ ऐक्सपैरिमैंट कर सकती हैं, लेकिन इन्हें सिंपल ही रखें या छोटे प्रिंट्स पहनें. इस के साथ फौर्मल हील्स पहनें. स्कर्ट रैड, बेज, ग्रीन जैसे कई शेड्स में मिल जाएंगी. स्कर्ट और टौप के कलर्स मैच न हों. ये आप के लुक को बिगाड़ देगा.
कैजुअल या फौर्मल विअर की डिजाइनिंग के लिए सिल्क, साटन, कौटन या खादी के साथ डिफरैंट प्रिंट्स को ऐक्सपैरिमैंट करें. प्रिंट में साइज मैटर नहीं करता है. फिर भी राइट साइज, कलर व डिजाइन के लिए राइट प्रिंट उपयोग किया जाए तो सुबह हो या शाम, एक वैल ड्रैस्ड एलिगैंट लुक मिल सकता है.
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सरकार देशी व विदेशी बड़ीबड़ी दुकानों को खोलने की खुली छूट ही नहीं दे रही, उन में विदेशी पूंजी लगाने की दावत भी दे रही है. इन बड़ी दुकानों, जिन्हें मौल कहा जाता है, को भारत एक बड़ा सुलभ बाजार दिख रहा है जहां अरबों का सामान बेचा जा सकता है क्योंकि यहां की जनसंख्या बहुत ज्यादा है और सुदूर गांवों तक थोड़ाबहुत पैसा आने लगा है.
ये दुकानें लगने को अच्छी लगती हैं. एक ही जगह सैकड़ों चीजें मिल जाएंगी. हर चीज को दिखा कर रखा जा रहा है. ज्यादातर माल नया. सही पैकिंग. दाम फिक्स. कोई मोलभाव नहीं. कभीकभार दुकान की अपनी ही स्कीम में किसी बची चीज पर बेहद कम दामों की छूट. दुकान में ही खानेपीने की जगह. मौज ही मौज.
पर ये मौल, मल्टी ब्रांड स्टोर, सुपर बाजार या किसी और नाम से इन्हें जानिए, देश की ज्यादातर जनता के लिए जख्म पर नमक छिड़कने का काम करेंगे. देश की अर्थव्यवस्था ऐसी है कि यहां ऊपर से नीचे तक उधारी जम कर चलती है. यहां बैंक हैं उधार देने के लिए पर अब तो साफ हो गया है कि बैंक सिर्फ बेईमान भगौड़े धन्ना सेठों को कर्ज देते हैं जिन में से कुछ भाग भी जाते हैं.
छोटे दुकानदार अपनी दुकानदारी उधार के बल पर ही चलाते हैं पर वे गरीब किसानमजदूर को भी उधार देते हैं. ये मल्टी ब्रांड मौल बैंकों से अरबों रुपए उधार लेंगे पर किसी को उधार देंगे नहीं. ये अपने सप्लायर्स से उधार माल खरीदेंगे पर ग्राहक को उधार पर नहीं देंगे. ये चूंकि पूरे बाजार पर कब्जा कर लेंगे, सप्लायर्स जो छोटे दुकानदारों को उधार पर सामान देते रहते हैं, उधारी बंद कर देंगे.
छोटे दुकानदार जो भारतीय जनता पार्टी की आंख मूंद कर पैरवी करते हैं, समझ ही नहीं रहे हैं कि पार्टी की मंशा तो इन्हें कंगाल बनाना है और इसीलिए विदेशी कंपनियों को लाया जा रहा है.
सरकार ने नोटबंदी इन्हीं व्यापारियों की कमर तोड़ने के लिए की थी. मकसद था कि छोटा व्यापार मर जाए ताकि बड़े वालमार्ट जैसे स्टोर खुल जाएं. विदेशी न हों तो रिलायंस, बिग बाजार, विशाल जैसे ही चलेंगे पर ये सब न छोटे दुकानदारों को माल उधार देंगे, न ग्राहक को. छोटा व्यापारी मुहताज रहे, हरदम पूजापाठ में लगा रहे कि उस का कल सुधर जाए.
उधारी पर व्यापार चलाना गलत है पर लगभग हर देश में व्यापार बैंकों से लिए गए कर्ज पर ही चलता है. भारत में भी ऐसा ही है पर सरकार नीरव मोदियों और विजय माल्याओं जैसों को कर्ज दिलवाना चाहती है खेत राम या गेंदा मल को नहीं.
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पार्टी की बात आते ही युवतियों के चेहरे खिल उठते हैं, क्योंकि जहां पार्टी मस्ती का दूसरा नाम है वहीं उन्हें पार्टी में न्यू ड्रैसेज पहनने का मौका जो मिलता है. ऐसे में अगर आप पार्टी में गौर्जियस लुक के साथ ऐंट्री करना चाहती हैं तो जानें किस पार्टी में कैसी हो आप की ड्रैस ताकि आप सैंटर औफ अट्रैक्शन बन जाएं.
वैडिंग पार्टी
चाहे फैमिली वैडिंग फंक्शन हो या फिर फ्रैंड की वैडिंग, ऐक्साइटमैंट तो होती ही है. ऐसे में यदि अवसर के हिसाब से ड्रैस हो, तो कहना ही क्या. और आजकल वैडिंग पार्टी के लिए लौंग गाउन से बैस्ट कुछ है ही नहीं, जो आप को मौडर्न लुक देने का काम करेगा. यह आप पर डिपैंड करता है कि आप स्लीवलैस गाउन कैरी करना चाहती हैं या फिर स्लीव के साथ. यह इतना कंफर्टेबल है कि आप इसे पहन कर पार्टी एंजौय कर सकती हैं.
साथ ही, आप इस मौके पर साड़ी पहन कर भी हौटैस्ट दिख सकती हैं. बस, जरूरत है कि सही साड़ी चूज करने की, जैसे शिफौन की साडि़यां काफी अच्छा गैटअप देती हैं. वहीं, आजकल नैट वाली साडि़यां भी डिमांड में हैं. इस पर पट्टी व स्ट्रिप वाले ब्लाउज पहन कर आप और भी हौट दिख सकती हैं.
कैसे हो ऐक्सैसरीज
यदि आप का गाउन या साड़ी हैवी है तो आप को गले में सिर्फ पतली चैन ही कैरी करनी है. गाउन या साड़ी के साथ कौलर नैकलेस और कड़ा स्टाइल ब्रैसलेट डालें. इस के साथ पैंसिल हील आप की ग्रेस बढ़ाने का काम करेगी.
फैमिली गेटटूगेदर
फैमिली गेटटूगेदर मतलब डबल मस्ती और फुल कंफर्ट. ऐसे मौके पर आप को ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं. बस, रेडी रहें, सनड्रैस, स्कर्ट और पैंट विद मिनी टौप के साथ, जो आप को वियर करने में भी इजी रहेंगे और कूल एहसास भी दिलवाएंगे. आप देखने वालों की नजरों में भी छा जाएंगी.
ऐक्सैसरीज हो स्मार्ट
सनड्रैस के साथ एथनिक ज्वैलरी आप के लुक में जहां चारचांद लगाएगी, वहीं स्कर्ट और पैंट के साथ सिर्फ हैंड ऐक्सैसरीज पहन कर आप खुद को ओवर लुक दे सकती हैं. दोनों ही ड्रैसेज के साथ हाईहील जंचेगी.
बर्थडे पार्टी
बर्थडे पार्टी के बहाने जब फ्रैंड्स से मिलने की बात हो तो आप खुद को सब से खूबसूरत दिखने में पीछे नहीं रहेंगी. ऐसे में आप मिनी, स्लिप ड्रैस, ह्यूब ड्रैस, कैप्री, प्लाजो विद कुरती पहन कर खुद को दें प्रिटी लुक ताकि आप के फ्रैंड्स आप को देख कर यह कहने से न रहें कि तुम तो बहुत ही सैक्सी लग रही हो.
ऐक्सैसरीज से नो कौंप्रोमाइज
इन ड्रैसेज के साथ आप हैंगिंग इयररिंग्स, एथनिक रिंग्स और सैंडिल्स में रौप सैंडिल्स, टिपटौप सैंडिल्स, किटन हील्स पहन सकती हैं.
किट्टी पार्टी
किटी पार्टी मतलब ट्रैंडी लुक, जहां खाने की ढेरों वैराइटियों का लुत्फ उठाने का मौका तो मिलता ही है, साथ ही, इस मौके पर एकदूसरे के आउटफिट्स भी देखने लायक होते हैं. ऐसे में यदि आप भी अपने गु्रप में अलग दिखना चाहती हैं तो स्कर्ट, प्लाजो टौप, फ्रौक, फ्रौक स्टाइल कुरती पहन कर किटी पार्टी में खुद को यूनीक दिखाने में पीछे न रहें. इन के साथ पंपस हील्स का कौंबिनेशन मस्त लगेगा.
कालेज फैस्ट
युवतियां कालेज फैस्ट को ले कर काफी क्रेजी रहती हैं. इस के लिए वे कई दिनों पहले से ही खुद को संवारने की तैयारी शुरू कर देती हैं, क्योंकि भले ही सब उन के फ्रैंड्स हैं, लेकिन इस मौके पर कोई उन की तारीफ न कर के उन के फ्रैंड्स की तारीफ करे तो यह उन्हें बिलकुल गवारा नहीं. ऐसे में मार्केट में क्या लेटैस्ट व यूनीक आउटफिट मौजूद है, इस पर उन की नजर रहती है. यदि आप भी अपने कालेज फैस्ट में वाहवाही लूटना चाहती हैं तो इस बार स्लिप व नैट ड्रैस, मिनी विद शौर्ट टौप, ब्लैक लौंग गाउन के साथ पार्टी में ऐंट्री कीजिए फिर देखिए अच्छेअच्छे आप के दीवाने हो जाएंगे.
ऐक्सैसरीज भी हो स्मार्ट
आप इन आउटफिट्स के साथ हैवी पैंडेंट वाली चेन ट्रैंडी ज्वैलरी पहन सकती हैं और हाई हील तो आप की ड्रैस में चारचादं लगाएगी ही, इसलिए हाई हील कैरी करना न भूलें.
आउटिंग
फैमिली या फ्रैंड्स के साथ आउटिंग पर जाना किसी पार्टी को एंजौय करने से कम नहीं होता. ऐसे में अगर आप आउटिंग पर गोवा वगैरा जाने का मूड बना रही हैं तो शौर्ट्स के साथ शौर्ट टौप, जिस में टमी भी दिखें, आप को काफी सैक्सी फील करवाएगी. इस आउटफिट में आप बीच पर भी काफी कंफर्टेबल हो कर एंजौय कर पाएंगी. इस के साथ आप फ्लैट चप्पल व ब्रैसलेट भी वियर करें. तो बहुत ही स्मार्टी लुक पा सकती हैं.
लेकिन, ध्यान रखें कि ड्रैस के हिसाब से ही आप का मेकअप व हेयरस्टाइल हो, तभी आप के आउटफिट्स निखर कर आ पाएंगे.
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पहले जहां आउटफिट्स से मैच करते फुटवियर पहनना स्टाइल स्टेटमैंट माना जाता था, वहीं अब ड्रैस के अपोजिट फुटवियर कैरी करना फैशन स्टेटमैंट बन गया है.
आज कालेजगोइंग गर्ल व्हाइट ड्रैस पर चेरी रैड फुटवियर पहने कालेज कैंपस में नजर आती हैं कंट्रास्ट कलर के फुटवियर्स पहनना आज ट्रैंड में है. ब्लू, पिंक गोल्ड और सिल्वर फुटवियर्स को आप स्ट्राइप्ड, प्लेन यहां तक कि फ्लोरल आउटफिट्स के साथ भी टीमअप कर सकती हैं. अगर आप ऐसा सोच रही हैं कि यह फैशन रूल सिर्फ कालेजगोइंग गर्ल्स के लिए है तो ऐसा बिलकुल नहीं, औफिसगोइंग लेडीज भी इन्हें कंफर्टेबली कैरी कर रही हैं.
गोल्डन सैंडिल पहनना भी गर्ल्स का स्टाइल स्टेटमैंट बनता जा रहा है, लेकिन इन्हें गोल्ड, ब्लैक, व्हाइट, रैड, नेवी ब्लू, पिंक और न्यूट्रल्स के साथ भी खूब पहना जा रहा है. कालेज से ले कर पार्टी और कैजुअल लुक के लिए भी इसे बिंदास हो कर कैरी कर सकती हैं.
फुटवियर में रैड कलर को थोड़ा बोल्ड माना जाता है. वैसे तो इन्हें सब से ज्यादा ब्लैक, व्हाइट, न्यूट्रल्स, नेवी ब्लू, औरेंज और पिंक आउटफिट्स के साथ कैरी किया जाता है लेकिन अब रैड आउटफिट के साथ भी रैड फुटवियर पहना जा रहा है.
ब्लैक ऐंड व्हाइट की ही तरह ब्लू सैंडिल्स और शूज भी ट्रैंड में हैं, लेकिन ब्लैक की तरह इन्हें हर आउटफिट्स के साथ मैच करना आसान नहीं होता है. ब्लू फुटवियर्स के साथ ब्राउन, ग्रीन, व्हाइट, ब्लैक, न्यूट्रल्स और यलो कलर के आउटफिट्स परफैक्ट मैच बन रहे हैं. यहां तक कि आप इस कलर को फौर्मल वियर्स में भी ट्राय कर सकती हैं. कुछ इस तरह, यहां ब्लैक सूट के साथ ब्लू हील्स को पेयर किया गया है.
मजैंटा और पिंक कलर हमेशा गर्ल्स को अट्रैक्ट करता रहा है, प्लेन व्हाइट वनपीस या व्हाइट फ्लोरल आउटफिट्स के साथ मजैंटा कलर फुटवियर परफैक्ट मैच कर रहा है.
रैड वनपीस, जंपसूट्स, शौर्ट ड्रैसेज के अलावा आप रैड मैक्सी ड्रैस के साथ भी रैड पीप टो स्ट्रैप और मल्टी कलर्स स्ट्रैप वाले सैंडिल पहन सकती हैं. स्टाइलिश और डिफरैंट लुक के लिए यह कौंबिनेशन हौट है.
ट्रैंडी सोल लैस सैंडिल
सोल लैस स्ट्रैप सैंडिल को यंग जेनरेशन कौटन या लिनिन आउटफिट के साथ खूब कैरी कर रही हैं, लेदर या जूट के स्ट्रैप पैरों को अलग ही लुक देते हैं, लेकिन इन फुटवियर को सिर्फ इनडोर या रैंप पर ही टीमअप किया जा सकता है. इसी तरह जब से डैस्टिनेशन वैडिंग का ट्रैंड चला है, ब्राइड भारीभरकम ज्वैलरी व लहंगे के साथ सोल लैस सैंडिल कैरी कर रही हैं.
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सवाल मैं 18 साल की लड़की हूं और एक 21 साल के लड़के से प्यार करती हूं. वह शादी से पहले मेरे साथ हमबिस्तरी करना चाहता है. लेकिन मैं मना करती हूं, क्योंकि कल को मेरी शादी उस से न हो कर किसी और से हो गई तो मुश्किल हो जाएगी. मैं क्या करूं?
जवाब
जब खुद आप को समझ आ रहा है कि किसी और से शादी करने पर कोई दिक्कत खड़ी हो सकती है तो जहां तक हो सके हमबिस्तरी से परहेज ही करें. प्यार में हमबिस्तरी कभीकभी महंगी पड़ जाती है. बेहतर होगा कि आप दोनों पहले अपने पैरों पर खड़े हो जाएं और अपने प्यार को शादी के अंजाम तक ले जाएं. प्रेमी अगर हमबिस्तरी के बाबत ज्यादा जिद कर रहा है तो चौकन्नी रहें. सच्चे प्यार में आशिक और माशूका दोनों एकदूसरे के जज्बातों का खयाल रखते हैं. अगर वह आप को प्यार करता है तो मना करने का बुरा नहीं मानेगा.
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शादी से पहले शारीरिक संबंध
आजकल लगभग सभी समाचारपत्रों और पत्रिकाओं में पाठकों की समस्याओं वाले स्तंभ में युवकयुवतियों के पत्र छपते हैं, जिस में वे विवाहपूर्व शारीरिक संबंध बना लेने के बाद उत्पन्न हुई समस्याओं का समाधान पूछते हैं.
विवाहपूर्व प्रेम करना या स्वेच्छा से शारीरिक संबंध बनाना कोई अपराध नहीं है, मगर इस से उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर विचार अवश्य करना चाहिए. इन बातों पर युवकों से ज्यादा युवतियों को ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में उन्हें दिक्कतों का सामना न करना पड़े :
विवाहपूर्व शारीरिक संबंध भले ही कानूनन अपराध न हो, मगर आज भी ऐसे संबंधों को सामाजिक मान्यता नहीं है. विशेष कर यदि किसी लड़की के बारे में समाज को यह पता चल जाए कि उस के विवाहपूर्व शारीरिक संबंध हैं तो समाज उस के माथे पर बदचलन का टीका लगा देता है, साथ ही गलीमहल्ले के आवारा लड़के लड़की का न सिर्फ जीना दूभर कर देते हैं, बल्कि खुद भी उस से अवैध संबंध बनाने की कोशिश करते हैं.
युवती के मांबाप और भाइयों को इन संबंधों का पता चलने पर घोर मानसिक आघात लगता है. वृद्ध मातापिता कई बार इस की वजह से बीमार पड़ जाते हैं और उन्हें दिल का दौरा तक पड़ जाता है. लड़की के भाइयों द्वारा प्रेमी के साथ मारपीट और यहां तक कि प्रेमी की जान लेने के समाचार लगभग रोज ही सुर्खियों में रहते हैं. युवकों को तो अकसर मांबाप समझा कर सुधरने की हिदायत देते हैं, मगर लड़की के प्रति घर वालों का व्यवहार कई बार बड़ा क्रूर हो जाता है. प्रेमी के साथ मारपीट के कारण लड़की के परिवार को पुलिस और कानूनी कार्यवाही तक का सामना करना पड़ता है.
अधिकतर युवतियों की समस्या रहती है कि उन्हें शादीशुदा व्यक्ति से प्यार हो गया है व उन्होंने उस से शारीरिक संबंध भी कायम कर लिए हैं. शादीशुदा व्यक्ति आश्वासन देता है कि वह जल्दी ही अपनी पहली पत्नी से तलाक ले कर युवती से शादी कर लेगा, मगर वर्षों बीत जाने पर भी वह व्यक्ति युवती से या तो शादी नहीं करता या धीरेधीरे किनारा कर लेता है. ऐसे किस्से आजकल आम हो गए हैं.
इस तरह के हादसों के बाद युवतियां डिप्रेशन में आ जाती हैं व नौकरी छोड़ देती हैं. इस से उबरने में उन्हें वर्षों लग जाते हैं. कई बार युवक पहली पत्नी के होते हुए भी दूसरी शादी कर लेते हैं. मगर याद रखें, ऐसी शादी को कानूनी मान्यता नहीं है और बाद में बच्चों के अधिकार के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है जिस का फैसला युवती के पक्ष में आएगा, इस की संभावना बहुत कम रहती है.
शारीरिक संबंध होने पर गर्भधारण एक सामान्य बात है. विवाहित युवती द्वारा गर्भधारण करने पर दोनों परिवारों में खुशियां मनाई जाती हैं वहीं अविवाहित युवती द्वारा गर्भधारण उस की बदनामी के साथसाथ मौत का कारण भी बनता है.
अभी हाल ही में मेरी बेटी की एक परिचित के किराएदार के घर उन के भाई की लड़की गांव से 11वीं कक्षा में पढ़ने के लिए आई. अचानक एक शाम उस ने ट्रेन से कट कर अपनी जान दे दी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि लड़की गर्भवती थी. उसे एक अन्य धर्म के लड़के से प्यार हो गया और दोनों ने शारीरिक संबंध कायम कर लिए, मगर जब लड़के को लड़की के गर्भवती होने का पता चला तो वह युवती को छोड़ कर भाग गया. अब युवती ने आत्महत्या का रास्ता चुन लिया. ऐसे मामलों में अधिकतर युवतियां गर्भपात का रास्ता अपनाती हैं, लेकिन कोई भी योग्य चिकित्सक पहली बार गर्भधारण को गर्भपात कराने की सलाह नहीं देगा.
अधिकतर अविवाहित युवतियां गर्भपात चोरीछिपे किसी घटिया अस्पताल या क्लिनिक में नौसिखिया चिकित्सकों से करवाती हैं, जिस में गर्भपात के बाद संक्रमण और कई अन्य समस्याओं की आशंका बनी रहती है. दोबारा गर्भधारण में भी कठिनाई हो सकती है. अनाड़ी चिकित्सक द्वारा गर्भपात करने से जान तक जाने का खतरा रहता है.
युवती का विवाह यदि प्रेमी से हो जाता है तब तो विवाहोपरांत जीवन ठीकठाक चलता है, मगर किसी और से शादी होने पर यदि भविष्य में पति को किसी तरह से पत्नी के विवाहपूर्व संबंधों की जानकारी हो गई तो वैवाहिक जीवन न सिर्फ तबाह हो सकता है, बल्कि तलाक तक की नौबत आ सकती है.
विवाहपूर्व शारीरिक संबंधों में मुख्य खतरा यौन रोगों का रहता है. कई बार एड्स जैसा जानलेवा रोग भी हो जाता है. खास बात यह है कि इस रोग के लक्षण काफी समय तक दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन बाद में यह रोग उन के पति और होने वाले बच्चे को हो जाता है. प्रेमी और उस के दोस्तों द्वारा ब्लैकमेल की घटनाएं भी अकसर होती रहती हैं. उन के द्वारा शारीरिक यौन शोषण व अन्य तरह के शोषण की आशंकाएं हमेशा बनी रहती हैं.
युवती का विवाह यदि अन्यत्र हो जाता है और वैवाहिक जीवन ठीकठाक चलता रहता है, घर में बच्चे भी आ जाते हैं, लेकिन यदि भविष्य में बच्चों को अपनी मां के किसी दूसरे पुरुष से संबंधों के बारे में पता चले तो उन्हें गंभीर मानसिक आघात पहुंचेगा, खासकर तब जब बच्चे टीनएज में हों. मां के प्रति उन के मन में घृणा व उन के बौद्धिक विकास पर भी इस का असर पड़ता है.
इन संबंधों के कारण कई बार पारिवारिक, सामाजिक व धार्मिक विवाद व लड़ाईझगड़े भी हो जाते हैं, जिन में युवकयुवती के अलावा कई और लोगों की जानें जाती हैं. इस के बावजूद यदि युवकयुवती शारीरिक संबंध बना लेने का निर्णय कर ही लेते हैं, तो गर्भनिरोधक विशेषकर कंडोम का प्रयोग अवश्य करें, क्योंकि इस से गर्भधारण व यौन संक्रमण का खतरा काफी हद तक खत्म हो जाता है.
बाल हठ और बाल प्रेम की इस कहानी के केंद्र में हैं-आठ वर्ष का बालक हेमू (करण दवे) और युवा लड़की निम्मो( अंजली पाटिल). आठ वर्षीय बालक हेमू को निम्मो से प्यार हो जाता है. कहानी जबलपुर, मध्यप्रदेश के एक गांव की है. इस गांव के लोग आपस में एक परिवार की तरह रहते हैं. हेमू के पिता नहीं है. उसकी मां काम करती है.
गांव के एक अन्य परिवार की लड़की निम्मो, हेमू की देखभाल करती है. हेमू जब स्कूल से आता है, तो उसे स्नान कराकर उसे खाना खिलाने का काम निम्मो ही करती है. हेमू भी निम्मो के साथ हर जगह जाता है. निम्मो अकेले कहीं नहीं जाती. हेमू चित्रकारी करने में माहिर है. निम्मो की बहनों को भी जब स्कूल के किसी प्रोजेक्ट के लिए चित्रकारी करवानी होती है, तो वह हेमू को ही पकड़ती है. एक दिन निम्मो की शादी तय हो जाती है, तो हेमू का एक दोस्त उससे कहता है कि निम्मो उससे बहुत प्यार करती है, मगर वह हेमू से ‘वह’ वाला प्यार नहीं करती. क्योंकि हेमू, निम्मो से बहुत छोटा है. इसीलिए निम्मो शादी करके इस गांव से जाने वाली है.
उसके बाद हेमू एक बदलाव आने लगता है. वह जब भी निम्मो के पास होता है, तो कुछ अलग कल्पना करने लगता है. धीरे धीरे हेमू, निम्मो से प्यार करने लगता है. हेमू पर ‘बड़ा’ होने का भूत सवार होता है. यहां तक कि सगाई के वक्त जब निम्मो के पति को बेड़ाघाट घुमाने हेमू ले जाता है, तो वह निम्मो के होने वाले पति से कह देता है कि निम्मो से उसकी शादी नहीं हो पाएगी. उसके बाद जब निम्मो मंदिर पूजा करने जाती है, तो हेमू भी साथ में जाता है और चाहता है कि निम्मो की शादी टूट जाए.
इतना ही नहीं एक दिन हेमू, निम्मो को रूद्राक्ष, एक बटन और मैगनेट को धागे में पिरोकर मंगलसूत्र बनाकर पहना देता है. जबकि हेमू की मां और निम्मो के माता पिता व बहनों को निम्मो व हेमू पर पूरा विश्वास है. इसलिए मंगलूसत्र की इस घटना को सभी हेमू का बचपना समझते हैं.
उधर गांव का एक लड़का महेंद्र की निगाहें निम्मो पर है. पर महेंद्र ही नहीं महेंद्र के माता पिता भी जानते हैं कि महेंद्र की आदतों के चलते निम्मों के माता पिता निम्मो की शादी महेंद्र के साथ कभी नहीं करेंगे. इसी बीच महेंद्र कुछ ऐसी हरकत करता है कि निम्मो नाराज होकर हेमू से कहती है कि महेंद्र नीच है. उसके साथ न रहा करे. तब हेमू, महेंद्र को सबक सिखाने के लिए बाल सुलभ ऐसी हरकत करता है, जिसकी सजा के तौर पर महेंद्र को उसके पिता पढ़ने के लिए गांव से बाहर होस्टल भेज देते हैं.
इधर हेमू से निम्मो कह देती है कि वह शादी नहीं कर रही है. कुछ दिन बाद शादी टूटने की खबर आती है, तो हेमू को लगता है कि ईश्वर ने उसकी सुन ली. अब हेमू अपनी मां से कहता है कि उसकी शादी निम्मो से करा दे. मां उसे समझाती है कि निम्मो से उसकी शादी नहीं हो सकती, वह तो बहुत छोटा है. पर अब हेमू नाराज रहने लगता है. वह निम्मो की बात नहीं सुनता.
अंततः निम्मो की शादी टूटने की खबर गलत निकलती है. निम्मो की शादी हो जाती है. मासूम हेमू का दिल टूट जाता है. वह बाल हठ में कुछ उल्टी सीधी हरकतें भी करता है. विदाई के वक्त वह निम्मो से नहीं मिलना चाहता. जबरन मिलाया जाता है. फिर वह भागकर अपने दोस्तों के सग क्रिकेट खेलने चला जाता है.
कुछ फिल्मो में आनंद एल राय के सहायक रहे राहुल गनोर शंकाल्य की बतौर लेखक व निर्देशक पहली फिल्म है. उन्होंने फिल्म में कुछ दृश्य बहुत अच्छे ढंग से रचे हे. मसलन एक दृश्य है, जहां बच्चे बल्ब की रोशनी में शाहरुख खान की फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ देख रहे हैं. एक दृश्य है जहां हेमू फिल्म के कुछ दृश्यों की नकल करते हुए निम्मों के साथ चिपकता है. मंगलसूत्र पहनाने का दृश्य भी अच्छा बना है. निर्देशक ने फिल्म के लिए लोकेशन भी कहानी के अनुरूप ही चुनी है.
जहां तक अभिनय का सवाल है, तो बाल कलाकार करण दवे ने कमाल का अभिनय किया है. पूरी फिल्म में वह बहुत प्यारा लगा है. उसके बाल हठ वाली हकरतें भी ध्यान खींचती हैं. धीरे धीरे उसे प्यार व बड़े होने का मतलब भी समझ में आता है. निम्मो के किरदार में अंजली पाटिल ने भी जानदार अभिनय किया है.
यह फिल्म 27 अप्रैल से डिजिटल माध्यम ‘ईरोज नाउ’ पर उपलब्ध होगी. लगभग डेढ़ घंटे की अवधि वाली फिल्म ‘‘मेरी निम्मो’’ के निर्माता आनंद एल राय, निर्देशक राहुल गनोर शंकाल्य तथा कलाकार हैं-अंजली पाटिल,करण दवे व अन्य.
स्टार भारत पर प्रसारित होने वाले पौपुलर शो ‘जीजी मां’ के लीड कलाकार फाल्गुनी – सुयश यानि तनवी डोगरा और दिशांक अरोड़ा के साथ हाल ही में सेट पर बड़ा हादसा हो गया. जिससे उभरने में उन्हें लगभग 1 महीने का समय लगेगा. दरअसल, शो के एक सीन में दोनों कलाकार को स्विमिंग पूल में कूदना था. जिसके बाद सुयश उस सीन में फाल्गुनी को बचाते हैं. लेकिन तभी इस सीन को दौरान शो दोनों कलाकार के साथ एक हादसा हो गया.
बताया जा रहा है कि पूल के पानी में ज्यादा मात्रा में क्लोरीन था, जिसका अंदाजा सेट पर मौजूद लोगों में से किसी को भी नहीं था. पानी में ज्यादा मात्रा में क्लोरीन होने के कारण दिशांक, तन्वी, एक टेक्नीशयन और एक फाइट मास्टर गंभीर रूप से जल गए.
मीडिया से बातचीत के दौरान सुयश ने बताया कि, “मेरी अपर बौडी और चेहरा जल गया है, मेरी हालत बेहद खराब है. मुझे पूरी तरह से ठीक होने में काफी समय लगेगा हो सकता है इसके लिए मुझे एक महीने का वक्त लगे. पानी में इतनी ज्यादा मात्रा में क्लोरीन है, यह मुझे बिल्कुल भी पता नहीं था. ये तो अच्छा रहा कि मेरी आंखों में कोई दिक्कत नहीं हुई और मै बच गया” सुयश ने आगे कहा, “फाल्गुनी भी ऐसी ही परेशानी का सामना कर रही हैं. हम दोनों के शरीर पर क्लोरीन ने बुरी तरह से अपना प्रभाव डाला है. मेरी हालत देखकर मम्मी रो रही हैं.
गौरतलब है कि हाल ही में शुरू हुआ शो ‘जीजी मां’ कुछ ही समय में लोगों के बीच अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा है. दर्शकों को इस शो में दिशांक और तन्वी की जोड़ी भा रही है. दर्शक इस शो को पौजिटिव रिस्पौन्स दे रहे हैं और शो टीआरपी चार्ट में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. बता दे कि कुछ ही समय पहले सुयश और फाल्गुनी के डेट करने की खबरें मीडिया में आ चुकी हैं. दोनों को अक्सर एक साथ स्पौट भी किया जाता रहा है. हालांकि, दोनों ने अपने रिश्ते पर सार्वजनिक रूप से कभी भी खुलकर बात नहीं की है.
कई बार हमारे फोन की बैटरी खत्म हो जाती है और हमारे पास लैपटाप तो होता है पर चार्जर नहीं या फिर चार्जर होता है पर उसे लगाने के लिए आस पास कोई पावर प्लग नहीं होता. ऐसे में हमारे पास सिर्फ एक ही विकल्प होता है और वो है लैपटाप. ऐसे में मोबाइल चार्ज करने के लिए हमें लैपटाप आन करके रखने की जरूरत होती है. लेकिन कभी कभी आपको भी दिमाग में आता होगा कि बिना काम लैपटाप आन रखने का क्या मतलब है.
अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो हम ये खबर आपके लिए ही लेकर आए हैं. ये खबर पढ़ने के बाद आप बंद कंप्यूटर या लैपटाप से भी अपने मोबाइल को चार्ज कर सकते हैं. आप में से कई लोग इसके बारे में नहीं जानते होंगे. तो चलिए आज आपको बताते हैं कि बंद लैपटाप से मोबाइल कैसे चार्ज करें.
सबसे पहले अपने कंप्यूटर या लैपटाप के ‘My Computer’ में जाएं. इसके बाद फाइल मैनेजर में जाएं. अब बाईं ओर सबसे ऊपर कोने में दिख रहे टिक या ‘Properties’ पर क्लिक करें.
अब सामने खुली विंडो में ‘Device Manager’ पर क्लिक करें.
डिवाइस मैनेजर पर क्लिक करने पर आपके सामने एक डिवाइस मैनेजर वाली विंडो खुलेगी. इसमें आपको बहुत सारे विकल्प दिखाई देंगे. इसमें दिख रहे ‘Universal Serial Bus Controllers’ पर क्लिक करें
अब सामने खुली विंडो पर में भी आपको कई सारे विकल्प दिखेंगे. इनमें से आपको ‘ USB Root Hub’ वाले विकल्प पर क्लिक करना है.
अब आपके सामने एक नई विंडो खुलेगी जिसमें ‘USB Root Hub’ की Properties वाली एक बौक्स खुलेगी. इसमें आपको सबसे अंत में दिख रहे ‘Power Management’ पर क्लिक करना है.
फिर ‘Allow The Computer To Turn Off This Device To Save The Power’ के विकल्प पर पहले से Tick लगा होगा उसे हटा दें और Ok पर क्लिक करें. अब आप लैपटाप या कंप्यूटर बंद होने पर भी आसानी से मोबाइल यूएसबी केबल के जरिए अपना मोबाइल बेहद आसानी से चार्ज कर सकते हैं.