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निजी स्कूलों पर सरकारी नकेल और पेरैंटस का नजरिया

निजी स्कूलों में फीस को घटाने की मांग कुछ वैसी ही है जैसे फाइवस्टार होटल से अपने फूड मैन्यू के  रेट को कम करने के लिए कहा जाए. वोट के लिए सरकार पेरैंट्स के साथ खड़ी दिखना चाहती है. स्कूल प्रबंधक इसे इंस्पैक्टरराज की वापसी की तरह से देख रहे हैं जिस से निजी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. ऐसे में डर इस बात का है कि कहीं निजी स्कूलों का हाल भी सरकारी स्कूलों की तरह न हो जाए.

पूरे देश में अभिभावक निजी स्कूलों की बढ़ रही फीस से परेशान हैं. ऐसे में वे उसी सरकार से उम्मीद भी कर रहे हैं जिस के स्कूलों से बचाने के लिए अपने बच्चों के निजी स्कूलों में दाखिले कराए थे. अभिभावकों के एकजुट होने से सरकार ने निजी स्कूलों के लिए नियमकानून बनाने शुरू कर दिए हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश बनाया है. इस में तमाम तरह के ऐसे प्रावधान हैं जिन से स्कूल संचालक बच्चों की फीस मनमाने तरीके से बढ़ा नहीं पाएंगे. फौरीतौर पर अभिभावकों को लग रहा है कि सरकार के हस्तक्षेप से उन को राहत मिलेगी.

शिक्षा के जानकार लोगों का कहना है कि सरकारी हस्तक्षेप का प्रभाव निजी स्कूलों की गुणवत्ता पर भी पडे़गा. निजी स्कूलों में इंस्पैक्टरराज शुरू होगा, भ्रष्टाचार बढे़गा. जिस से निबटने के लिए निजी स्कूल अपनी गुणवत्ता से समझौता करेंगे. धीरेधीरे निजी स्कूलों का हाल भी सरकारी स्कूलो सा हो जाएगा.

ज्यादातर निजी स्कूलों को सरकार किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं देती है. स्कूल संचालक स्कूल प्रबंधन पर खर्च होने वाला एकएक पैसे का प्रबंध खुद करता है. उस के पास केवल फीस ही अकेला जरिया होता है जिस से वह पैसों का प्रबंध कर सकता है. स्कूल आजकल चमचमाती दुकानों की तरह हो गए हैं. अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने के समय स्कूलों की गुणवत्ता से अधिक बाहरी चमकदमक देखते हैं. शायद ही कोई अभिभावक हो जिसे यह पता हो कि स्कूल में पढ़ाने वाले टीचर कितने योग्य हैं.

हर अभिभावक स्कूलबस, फर्नीचर, स्विमिंग पूल, एसी और ड्रैस की खूबसूरती को देखते हैं. स्कूल बच्चों के लिए हर सुविधा जुटा दे, हर अभिभावक यही चाहता है. जब स्कूल इस के बदले फीस बढ़ाता है तो पेरैंट्स परेशान होने लगते हैं. विरोध करते समय पेरैंट्स यह भूल जाते हैं कि स्कूल भी एक तरह का बिजनैस है. जितनी सुविधाएं बढ़ेंगी, फीस भी उतनी बढे़गी. फीस अगर घटेगी तो दूसरे बिजनैस की तरह स्कूल भी सुविधाओं से समझौते करने लगेंगे.

कम फीस वाले सरकारी स्कूल

आज सरकारी स्कूलों को देखें तो बहुत सारे स्कूलों का आधारभूत ढांचा पहले से अच्छा हो गया है. वहां फीस भी कम है और किताबें, भोजन सरकारी मिलता है. निजी स्कूलों से अच्छे टीचर सरकारी स्कूलों में हैं. वे ज्यादा टैलेंटेड हैं. उन का वेतन भी ज्यादा है. पेरैंट्स वहां बच्चों को नहीं भेजना चाहते हैं. इस की बड़ी वजह यह है कि वहां उन को माहौल अच्छा नहीं दिखता है. निजी स्कूलों की व्यवस्था सरकारी स्कूलों से बेहतर है क्योंकि वहां स्कूल संचालक पूरी तरह से स्कूलों पर ही ध्यान देता है. सरकारी स्कूलों में सरकार शिक्षा सुधार की बातें तो बहुत करती है पर वह अपने स्कूलों पर नियंत्रण नहीं रख पाती है. सरकार की नीतियों और सही से स्कूलों का ख्याल न रख पाने से सरकारी स्कूल धीरेधीरे बरबाद हो गए. जबकि प्रति बच्चा खर्च सरकारी और गैरसरकारी स्कूलों में बराबर सा ही होगा. सरकारी स्कूलों के चलाने के लिए मंत्रालय तक का खर्च जोड़ना होगा.

सरकारी स्कूलों को छोड़ कर निजी क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों का दाखिला पेरैंट्स ने इसी कारण कराना शुरू किया था क्योंकि ये बेहतर थे. यहां पर बच्चों को पढ़ाना एक तरह से सफलता की गांरटी मानी जाने लगी है. धीरेधीरे निजी स्कूलों में अब पढ़ाई का स्तर गिरने लगा है. वहां भी बच्चे अब सही से पढ़ नहीं पा रहे हैं.

स्कूलों में आपराधिक घटनाएं भी होने लगी हैं. ऐसे में सरकारी नियंत्रण में रहने के कारण अब निजी स्कूलों की दशा भी खराब हो सकती है. स्कूल प्रबंधक मानते हैं कि हर स्कूल अपनी तरह से सुविधाएं जुटाता है. हर सुविधा के लिए बजट का प्रबंध करना पड़ता है, ऐसे में अगर स्कूलों पर नकेल कसी गई तो परेशानी हो सकती है. स्कूलों की गुणवत्ता खराब हो सकती है.

सरकारी हस्तक्षेप

शिक्षा अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों का प्रवेश प्राइवेट स्कूलों में सरकार कराती है. इस की फीस सरकार देती है. निजी स्कूलों के प्रबंधक बताते हैं कि शिक्षा अधिकार कानून के तहत जिन बच्चों का प्रवेश सरकार ने कराया है, उन की फीस समय पर स्कूल में नहीं जमा होती. यही कारण है कि निजी स्कूल इस कानून के तहत बच्चों का प्रवेश अपने यहां करने से बचते हैं. ऐसे में सरकार उस प्राइवेट स्कूल में बच्चों को भेज देती है जहां बच्चे नहीं होते हैं. अगर सरकार सही तरह से योजना का संचालन करे तो ही जरूरतमंद बच्चों को लाभ होगा वरना यह योजना मजाक बन कर रह गई है.’’ निजी स्कूलों की फीस हर साल अलगअलग तरह से बढ़ती है. इस में 8 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जाती है. निजी स्कूलों के अपने अलग तर्क हैं.

स्कूल प्रबंधन कहता है कि लगातार महंगाई बढ़ रही है. स्कूलों में काम करने वालों का वेतन बढ़ रहा है. ऐसे में स्कूल प्रबंधन अपने खर्च कैसे निकाले? अभिभावक फीस कम करने की बात तो करते हैं पर सुविधाओं में एक भी कटौती नहीं चाहते. वे स्कूलबस से ले कर क्लास तक पूरी तरह से फिट चाहते हैं.

स्विमिंग पूल, प्लेग्राउंड, स्मार्टक्लास और साफसुथरा बाथरूम सभी को चाहिए. एक भी शिकायत होने पर पेरैंट्स हंगामा खड़ा कर देते हैं. जहां स्कूल प्रबंधन की गलती नहीं होती वहां भी वे उसी को जिम्मेदार ठहराते हैं.  ऐसे में स्कूलों के लिए अच्छी व्यवस्था करना संभव नहीं रह जाता. ऐसे में गुणवत्ता के साथ समझौता करने का प्रभाव स्कूल पर पडे़गा. पेरैंट्स देरसवेर इस बात को समझेंगे.

यह बात सच है कि कुछ स्कूल कौपी, किताब और ड्रैस तक स्कूलों से ही बेचने लगे हैं. इस के लिए मुख्यरूप से जिम्मेदारी पेरैंट्स की है जिन्हें लगता है कि सरकार के हस्तक्षेप से सब सरल हो सकता है. सरकार अगर खुद में ही इतना सक्षम होती तो उस के स्कूल खराब क्यों होते? जो सरकार लगातार प्रयास के बाद भी अपने स्कूलों में सुधार नहीं कर पा रही, वह निजी स्कूलों को केवल परेशान कर सकती है, उन में सुधार नहीं.

कुंडलियों में नहीं, इन बातों में छिपा है सुखी वैवाहिक जीवन का राज

पिछले साल एक समाचार ने लोगों का ध्यान आकृष्ट किया जब बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने लालू यादव (अब चारा घोटाले में कैद) के बेटे तेजप्रताप के लिए दुलहन ढूंढ़ने हेतु 3 शर्तें रख डालीं.

पहली शर्त यह कि वे अपनी शादी में दहेज नहीं लेंगे, दूसरी वे अंगदान करने का संकल्प लें और तीसरी यह कि भविष्य में किसी की भी शादी में तोड़फोड़ करने की धमकी नहीं देंगे.

गौरतलब है कि गत वर्ष के आखिर में सुशील मोदी के बेटे उत्कर्ष तथागत की शादी संपन्न हुई थी. दूसरे नेताओं और अन्य नामचीन लोगों के मुकाबले शादी सादगी से निबटाई गई. बिना बैंडबाजे और भोज वाली इस शादी में मेहमानों को ई निमंत्रण कार्ड से आमंत्रित किया गया था. मेहमानों से अपील की गई थी कि वे कोई गिफ्ट या लिफाफा ले कर न आएं. समारोह स्थल पर केवल चाय और पानी के स्टौल लगाए गए थे. यद्यपि तेजप्रताप ने पहले इस शादी में घुस कर तोड़फोड़ की धमकी दी थी पर बाद में उस ने पासा पलटा और दुलहन खोजने की बात कर दी.

तेजप्रताप की दुलहन खोजने हेतु सुशील मोदी द्वारा रखी गई शर्तें काबिलेगौर होने के बावजूद अधूरी हैं. कई और ऐसी महत्त्वपूर्ण बातें भी हैं, जिन के लिए शादी से पूर्व युवा लड़केलड़कियों और उन के परिवार वालों को राजी करवाना जरूरी होना चाहिए.

शादी में फुजूलखर्ची क्यों

हम शादियों में सजावट, बैंडबाजे, डीजे, रीतिरिवाजों और मेहमानों के स्वागतसत्कार में लाखों रुपए खर्च कर देते हैं. कईकई दिनों तक रीतिरिवाज चलते रहते हैं. पंडित और धर्म के तथाकथित ठेकेदारों की चांदी हो जाती है. वे मोटी रकम ऐंठते हैं. सजावट में लाखों रुपए बरबाद कर दिए जाते हैं. मेहमानों को तरहतरह के गिफ्ट दिए जाते हैं और कईकई दिनों तक उन के ठहरने के इंतजाम पर भी काफी रुपए बहा दिए जाते हैं. सीमित आय वाले परिवार बेटी की शादी में अच्छेखासे कर्ज में डूब जाते हैं. जहां तक संपन्न वर्ग, बड़े बिजनैसमैन्स और राजनेताओं का सवाल है, तो उन में दूसरों से बेहतर करने की होड़ लगी रहती है.

बीजेपी के पूर्व नेता जनार्दन रेड्डी (जिन्होंने गैरकानूनी माइनिंग के एक मामले में करीब 40 महीने जेल की सजा काटी) ने अपनी बेटी की शादी में कई सौ करोड़ रुपए खर्च कर दिए.

नवंबर, 2016 में संपन्न इस शादी में 40-50 हजार लोगों को आमंत्रित किया गया था. पांचसितारा होटलों में 1,500 कमरे बुक हुए. हैलिकौप्टर उतरने के लिए 15 हैलीपैड बनाए गए. विवाहस्थल की सुरक्षा हेतु 3 हजार सुरक्षा गार्ड लगाए गए. बौलीवुड के आर्ट डाइरैक्टर्स ने विजयनगर स्टाइल के मंदिरों के कई भव्य सैट तैयार किए. दुलहन ने क्व17 करोड़ की साड़ी पहनी.

खास बात यह थी कि जिस वक्त बैंगलुरु में रेड्डी 5 दिनों तक भव्य समारोह कर रहे थे उस समय देश की आम जनता नोटबंदी की वजह से एटीएम और बैंकों के बाहर लंबीलंबी कतारों से जूझ रही थी.

शादियों में बेहिसाब खर्च किसी एक नेता ने किया हो, ऐसा नहीं है. ज्यादातर नेताओं, अमीर बिजनैसमैन्स व सैलिब्रिटीज के घरों की शादियां यों ही संपन्न होती हैं.

मगर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के लासूर में एक व्यापारी ने लोगों के लिए मिसाल कायम की. उन्होंने फुजूलखर्ची करने के बजाए उन रुपयों से गरीबों के लिए घर बनवा दिए.

महाराष्ट्र के अजय भुनोत की बेटी श्रेया की शादी 16 दिसंबर, 2016 को बिजनैसमैन मनोज जैन के बेटे के साथ तय हुई. दोनों परिवार आर्थिक रूप से संपन्न थे पर इस शादी को यादगार बनाने के लिए उन्होंने शोशेबाजी करने के बजाय गरीबों की मदद का मार्ग चुना.

शादी का खर्च बचा कर उन्होंने डेढ़ करोड़ रुपए में 2 एकड़ जमीन पर 90 मकान बनवाए और फिर शादी वाले दिन उन मकानों को आसपास के गरीब परिवारों को तोहफे के रूप में बांट कर अपनी खुशियों में उन्हें भी शरीक कर लिया.

जो लोग आर्थिक रूप से संपन्न हैं वे वाकई इस तरह अपने साथ दूसरों की जिंदगी में भी खुशियां भर सकते हैं. मगर आम जनता जिस के पास बहुत रुपए नहीं वह भी दिखावे के चक्कर में फुजूलखर्ची करने से बाज नहीं आती.

क्यों न इस तरह रुपए बरबाद करने के बजाय उन रुपयों की एफडी बना कर लड़के/लड़की के नाम जमा कर दी जाए जो उन के सुरक्षित भविष्य की वजह बने. जिंदगी में ऊंचनीच होने पर आप की यह समझदारी उन्हें हौसला देगी.

कुंडलियां नहीं हैल्थ रिपोर्ट मिलाएं

शादी में अमूमन लोग कुंडलियों और ग्रहनक्षत्रों का मिलान करते हैं. लड़केलड़की के 36 में से कम से कम 30-32 गुण भी मिल रहे हैं या नहीं, लड़की पर राहू या शनि की दशा तो नहीं चल रही, लड़की मंगली तो नहीं जैसे बेमतलब की बातों में उलझ कर पंडितों की जेबें गरम करते रहते हैं. पंडित अपनी मरजी से ग्रहनक्षत्रों के फेर बता कर लोगों से भरपूर माल लूटते रहते हैं.

पर क्या आप ने सोचा है कि आए दिन बीमारियां, कलह, संतानप्राप्ति में बाधा, तलाक जैसी परेशानियों से जूझ रहे युगल कुंडलियां मिलाने के बावजूद सुखशांति से क्यों नहीं जी पा रहे?

दरअसल, इस की वजह यह है कि हम धर्म के नाम पर ठगने वाले मौलवियों और पंडेपुजारियों के झांसे में तो आ जाते हैं पर स्वस्थ, सुखी और तनावरहित जिंदगी के लिए वास्तव में जो जरूरी है उसे नहीं समझ पाते. शादी के बंधन में बंधने से पहले कुछ मैडिकल टैस्ट आप को और आप के होने वाले बच्चे को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकते हैं.

इस संदर्भ में 3 एच केयर डौट इन की फाउंडर ऐंड सीईओ डा. रूचि गुप्ता ने कुछ जरूरी मैडिकल टैस्ट के बारे में बताया:

आरएच इनकमपैटिबिलिटी (आरएच असंगति): अधिकतर लोग आरएच पौजिटिव होते हैं, लेकिन जनसंख्या का एक छोटा सा हिस्सा (करीब 15%) आरएच नैगेटिव होता है. आरएच फैक्टर लाल रक्त कणिकाओं पर लगा एक प्रोटीन होता है. अगर आप में आरएच फैक्टर है तो आप आरएच पौजिटिव हैं. अगर नहीं है तो आरएच नैगेटिव हैं. वैसे आरएच फैक्टर हमारे सामान्य स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता है. लेकिन अगर मां और बच्चे का आरएच फैक्टर अलगअलग होगा तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए समस्याएं पैदा कर सकता है. यह घातक भी हो सकता है. इसलिए जरूरी है कि शादी से पहले आरएच फैक्टर की जांच करा ली जाए. अलगअलग आरएच फैक्टर्स वालों को आपस में शादी न करने की सलाह दी जाती है.

थैलेसीमिया की जांच: शादी से पहले थैलेसीमिया ट्रेट की जांच भी करा लें. भारत में करीब 6 करोड़ लोगों के थैलेसीमिया ट्रेट हैं. चूंकि इस ट्रेट का उन पर प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता है, इसलिए अधिकतर लोग इस के बारे में नहीं जानते. यदि वे 2 लोग जिन में थैलेसीमिया ट्रेट है विवाह कर लेते हैं तो उन के बच्चों में खतरनाक थैलेसीमिया मेजर डिसीज होने की आशंका 25% तक होती है. इस की जांच साधारण ब्लड टैस्ट से हो जाती है और यह सुनिश्चित हो जाता है कि आप थैलेसीमिया ट्रेट के वाहक तो नहीं हैं?

एचआईवी ऐंड अदर सैक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीजेज टैस्ट: एचआईवी, हैपेटाइटिस बी और सी ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं जो जीवन भर चलती हैं. अगर सही इलाज न हो तो वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण हो सकता है. आप को अपने जीवनसाथी के मैडिकल स्टेटस के बारे में शादी से पहले ही पता चल जाएगा तो आप के लिए यह निर्णय लेना आसान होगा कि आप विवाहबंधन में बंधना चाहते हैं या नहीं.

ओवेरियन सिस्ट: अगर लड़की को पेट के निचले हिस्से में दर्द हो या पीरियड्स अनियमित हों तो वह ओवेरियन सिस्ट का टैस्ट जरूर करा ले. अगर सामान्य पेल्विक परीक्षण के दौरान सिस्ट का पता चलता है तो सिस्ट के बारे में डिटेल पता लगाने के लिए एबडोमिनल अल्ट्रासाउंड किया जाता है. सिस्ट की वजह से गर्भधारण में भी कठिनाई आ सकती है.

क्रोनिक डिसऔर्डर टेस्ट: इन जांचों के द्वारा जल्द ही विवाह बंधन में बंधने वाले युगल अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को गंभीर होने और अपने वैवाहिक जीवन को तनावपूर्ण होने से बचा सकते हैं.

साइकोलौजिकल टैस्ट: आज के हालात देखते हुए साइकोलौजिकल टैस्ट भी बहुत जरूरी हो गए हैं. इन में सिजोफ्रैनिया, डिप्रैशन, पर्सनैलिटी डिसऔर्डर, बाई पोलर डिसऔर्डर आदि की जांच की जाती है.

कोई राज न हो दरमियां

शादी एक ऐसा बंधन है, जिस में किसी भी तरह के राज या दुरावछिपाव के लिए कोई जगह नहीं होती. 2 व्यक्ति एकदूसरे के पूरक और राजदार बन जाते हैं. मगर जब भी इन के बीच कोई राज सामने आता है तो रिश्तों में कड़वाहट पैदा होनी शुरू हो जाती है. पतिपत्नी के अवैध सबंध, कोई गंभीर बीमारी, शारीरिक अक्षमता या जौब के बारे में दी गई गलत जानकारी इस तरह के विवादों की जड़ बनती है और बात मरनेमारने तक पहुंच जाती है.

क्या यह बेहतर नहीं कि लड़केलड़कियां शादी से पहले ही यह संकल्प ले लें कि वे कभी अपने जीवनसाथी से कोई राज छिपा कर नहीं रखेंगे.

शादी करते वक्त सामान्य रूप से लड़के वाले इस बात का ध्यान जरूर रखते हैं कि जिस परिवार से उन का रिश्ता जुड़ रहा है वह समृद्ध हो, उन की टक्कर का हो. लड़की में किसी तरह का दोष न हो वगैरह.

लड़की भले ही दलित वर्ग की हो, अपंग हो या उस के साथ कोई हादसा हो चुका हो उस के अंदर यदि एक योग्य जीवनसाथी बनने की क्षमता है, जीने का जज्बा है तो क्या वह सहज स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए?

दुलहन ढूंढ़ते वक्त क्या लड़के से यह संकल्प नहीं कराना चाहिए कि वह लड़की की फिजीक, सुंदरता, रंग, जाति या आकर्षण देखने के बजाए उस की भीतरी खूबसूरती देखेगा.

सोच मिलनी जरूरी

शादी के बाद अकसर रिश्ते टूटते हैं, क्योंकि पतिपत्नी का नजरिया आपस में नहीं मिलता. शादी से पहले ही एकदूसरे को पूरी तरह समझने और अपने सपनों को डिसकस करने का प्रयास जरूर करें. लड़कों को यह संकल्प दिलाना भी जरूरी है कि वे आने वाले समय में अपनी बीवी के सपनों को भी तरजीह देंगे, पत्नी की भावनाओ को समझेंगे. जब भी मौका मिले पत्नी के कैरियर, सपनों के लिए स्वयं कुरबानी देने से भी हिचकेंगे नहीं. दोनों समान रूप से घरपरिवार और आपसी रिश्तों को संभालने के लिए जिम्मेदार होंगे.

इस आसान तरीकों को अपनाकर बढ़ाएं स्मार्टफोन, टैबलेट या फिर लैपटौप की बैटरी लाइफ

आप भी स्मार्टफोन, टैबलेट या फिर लैपटौप का इस्तेमाल करते होंगे. लेकिन अगर आप इसके बैटरी लाइफ से परेशान है तो आप हम आपक लिए ऐसे टिप्स लेकर आएं हैं, जो आपके डिवाइस की बैटरी लाइफ बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे. तो देर किस बात की आइए जानते हैं इन खास टिप्स के बारें में.

तापमान का रखें ध्यान    

बैटरी को ऊंचे तापमान में इस्तेमाल करना, इसकी साइकलिंग से भी ज्यादा परेशान करने वाला हो सकता है. कम तापमान (30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान को ज्यादा माना जाता है) में डिवाइस का इस्तेमाल करने से उसकी लाइफ साइकल बेहतर होगी. टेस्टिंग में पाया गया है कि तीन महीने के लिए बैटरी को 60 डिग्री तापमान में इस्तेमाल करने पर परफौर्मेंस 60 फीसदी तक पहुंच जाती है और 40 डिग्री तापमान में परफौर्मेंस 65 फीसदी पर. लैपटौप में कूलिंग पैड का इस्तेमाल करें ताकि सीपीयू वेंट से गर्म हवा आसानी से निकल जाए.

मुफ्त ऐप से बचें, ऐप्स खरीदना शुरू करें

अध्ययन के मुताबिक विज्ञापन के साथ आने वाले ऐप्स आपके डिवाइस की बैटरी लाइफ औसतन 2.5 से 2.1 घंटे तक कम कर सकते हैं. ऐसा नहीं है कि सभी फ्री ऐप्स आपकी बैटरी पर असर डाल रहे हैं, लेकिन अगर आपको उस पर कोई विज्ञापन नजर आए तो समझ लीजिए कि यह बैंडविथ और प्रोसेसर पर असर डालेगा ही डालेगा. ऐसे में आपके ले यही सही है कि मुफ्त के ऐप्स की बजाय ऐप्स को खरीदना शुरू करें.

लोकेशन ट्रैकिंग बंद कर दें

हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फेसबुक ऐप आईफोन की बैटरी को जल्दी खत्म कर देता है क्योंकि यह बार-बार जीपीएस मौड्यूल का इस्तेमाल करके यूजर की लोकेशन के ट्रैक करता रहता है. ऐसे में जिन ऐप को आपके लोकेशन की जरूरत नहीं है, उनके लोकेशन ट्रैकिंग को आफ कर देना ही बेहतर है.

पूरी तरह से चार्ज करने से बेहतर है थोड़ा-थोड़ा चार्ज करें

बैटरी को 100 फीसदी से सीधे ले जाकर शून्य पर खत्म करने से बेहतर है कि आप इसे 50 फीसदी तक ही डिस्चार्ज होने दें. 30 से 80 फीसदी के बीच का क्रम बनाए रखें. ऐसा करने से आपके बैटरी की डिस्चार्ज साइकिल तीन गुनी बढ़ जाएगी.

इसके अलावा अगर आप इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर कर रहे हैं तो वाई-फाई का कनेक्शन आफ कर दें. अपने फोन, लैपटौप डिस्प्ले की ब्राइटनेस कम करें, लो पावर मोड को आन करें और फ्लाइट मोड का इस्तेमाल करें. इससे आपको इस समस्या से जल्द ही राहत मिलगी और बैटरी लाइफ पर असर पड़ेगा. इन सुझावों का पालन करने पर आप पाएंगे कि आपका फोन पहले की तुलना में ज्यादा बेहतर बैटरी लाइफ दे रहा है.

VIDEO : हॉलीवुड सेलेब्रिटी सिंगर सेलेना गोमेज़ लुक

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वीडियो : दिशा पटानी ने अपने जबरदस्त मूव्स से डांस फ्लोर पर लगाई आग

बौलीवुड आदाकारा दिशा पटानी इन दिनों अपनी फिल्म ‘बागी 2’ की सफलता को एन्जाय कर रही हैं. टाइगर श्रौफ और दिशा स्टारर एक्शन से भरपूर इस फिल्म को काफी पसंद किया गया था. साल 2018 की सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्मों में शामिल ‘बागी 2’ की अभिनेत्री दिशा ने अपना एक शानदार वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसे लेकर वो सुर्खियों में आ गई हैं. इस वीडियो में वह कोरियोग्राफर के साथ मदमस्त होकर डांस करती दिखाई दे रही हैं.

वीडियो में दिशा रीमिक्स गाने पर लौकिंग करती दिखाई दे रही हैं. कोरियोग्राफर के साथ उनकी ट्यूनिंग साफ देखी जा सकती है. खास बात यह हैं कुछ ही घंटे पहले पोस्ट किया गया दिशा का ये वीडियो बड़ी ही तेजी से वायरल हो रहा हैं. इस वीडियो को अब तक 11 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है.

हालांकि ये पहली बार नहीं हैं इससे पहले भी दिशा कई बार अपने लाजवाब डांस का जलवा दिखा चुकी हैं. उनके डांस का वीडियो अक्सर हा सोशल मीडिया पर वायरल होता रहता है.

बता दें कि दिशा पटानी ने अपने करियर की शुरुआत साल 2015 में तेलुगु फिल्म ‘लोफर’ से की थी. साल 2016 में आई ‘एम एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ उनकी पहली बौलीवुड फिल्म थी. 2017 में उनकी पहली हौलीवुड फिल्म ‘कुंग फू योगा’ रिलीज हुई. 2018 में ‘बागी 2’ के बाद अदाकारा ‘संघमित्रा’ में नजर आएंगी.

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कोलकाता – चेन्नई मैच से पहले बाहर हो सकते हैं नितीश राणा

गुरुवार को यानि आज आईपीएल के सीजन 11 के 33वें मैच में मेजबान कोलकाता के सामने चेन्नई जैसी ताकतवर टीम को हरा कर पलेऔफ में अपना दावा मजबूत करने की चुनौती है. कोलकाता की टीम अपने घर ईडन गार्डन्स स्टेडियम में खेल रही है लेकिन उसके लिए पाइंट टेबल में टौप पर काबिज महेंद्र सिंह धोनी की  चेन्नई को रोकना आसान नही होने वाला है. वहीं दो साल बाद वापसी करने वाली चेन्नई की टीम ने अपने तूफानी प्रदर्शन से सभी टीमो के लिए कड़ी चुनौती पेश की है और उसे हराना किसी भी टीम के लिए मुश्किल काम ही है.

वैसे तो दिनेश कार्तिक की अगुवाई में कोलकाता की टीम भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है लेकिन कई मैचों में उस नजदीकी हार का सामना करना पड़ा है. कोलकाता ने अपने पिछले मैच में रौयल चैलेंजर्स बेंगलोर को हराने का बाद टीम के हौसला बढ़ गया है. टीम की बल्लेबाजी मजबूत है. बेंगलुरु के खिलाफ पिछले मैच में सफल रहे लिन को रोकना चेन्नई के लिए आसान नहीं होगा. लिन के अलावा सुनील नरेन भी ताबड़तोड़ पारी खेलने में सक्षम हैं और फौर्म में चल रहे हैं. इनके अलावा कप्तान दिनेश कार्तिक और उप-कप्तान रोबिन उथप्पा भी अच्छी फौर्म में हैं.

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नितीश के खेलने पर संदेह के बादल

वहीं कोलकाता के मध्यक्रम के बल्लेबाज नितीश राणा पीठ दर्द से परेशान है जिससे उनका गुरुवार को चेन्नई के खिलाफ मैच में खेलना निश्चित नहीं है. राणा ने बुधवार को अभ्यास सत्र में हिस्सा नहीं लिया. केकेआर टीम के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘उनकी पीठ के निचले हिस्से में दर्द है. अब गुरुवार को ही उनके बारे में फैसला होगा.’’

बेंगलुरु के खिलाफ रिटायर्ड हर्ट हुए थे नितीश

नितीश बेंगलुरु के खिलाफ हुए मैच में जब 10 गेंदों पर 15 रन बना कर खेल रहे थे, तभी उनकी पीठ में तकलीफ होने की वजह से उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा था. राणा ने अब तक आठ मैचों में 31.33 की औसत से 188 रन बनाये हैं तथा उन्हें दो बार मैन औफ द मैच चुना गया. उनकी कामचलाऊ औफ स्पिन भी कारगर साबित हुई है.

कोलकाता के मुख्य कोच जाक कैलिस भी कह चुके हैं कि हरफनमौला नितीश राणा का समर्थन करने का फायदा अब टीम को हो रहा है. राणा नये रंग में ढले कोलकाता की बल्लेबाजी की रीढ़ की हड्डी हैं और वह पार्ट टाइम औफ स्पिन गेंदबाजी भी करते हैं. नितीश राणा ने आईपीएल के इस सीजन में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो बार मैन औफ द मैच का खिताब अपने नाम किया है. राणा ने गेंदबाजी में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है.

नितीश का बल्ला चलना मतलब कोलकाता की जीत तय

इस आईपीएल में जब भी नीतिश का बल्ला चला है उनकी टीम जीती ही है. राजस्थान के खिलाफ नितीश राणा ने शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं. अब तक आठ मैचों में नितीश ने पहले मैच में बेंगलुरु के खिलाफ 25 गेंदों पर 34 रन, दूसरे मैच में चेन्नई के खिलाफ 14 गेंद पर 16 रन, हैदराबाद के खिलाफ 16 गेंदों में 18 रन, दिल्ली के खिलाफ 35 गेंदों पर 59 रन, राजस्थान के खिलाफ 27 गेंदों में नाबाद 35 रन, पंजाब के खिलाफ 5 गेंद पर 3 रन, दिल्ली के खिलाफ 7 गेंदों में 8 रन, 10 गेंदों में 15 रन बनाए हैं. अभी तक जिस मैच में भी नितीश का बल्ला चला है, उनकी टीम मैच जीती है.

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करीना नहीं मैं सलमान के ज्यादा करीब हूं : करिश्मा कपूर

90 के दशक में सलमान खान और करिश्मा कपूर की जोड़ी सबसे सुपरहिट जोड़ी में से एक थी. उस समय इस जोड़ी ने चल मेरे भाई, दुल्हन हम ले जाएंगे, जुड़वा, जीत, अंदाज अपना अपना, बीवी नंबर 1 जैसी सुपरहिट फिल्में दी थीं. अब आज के समय में सलमान करीना के साथ बजरंगी भाईजान और बौडीगार्ड जैसी ब्लौकबस्टर फिल्में दे रहे हैं. इस अंतर पर बात करते हुए करिश्मा कपूर ने सलमान खान, करीना कपूर खान और अपने रिश्तों को लेकर कुछ ऐसा बयान दे दिया है, जिसे सुनकर करीना भी हैरान और परेशान हो सकती हैं. करिश्मा का कहना है कि भले ही सलमान करीना के साथ फिल्में करते हैं लेकिन फिर भी वो मेरे ज्यादा करीब हैं.

आपकी जानकारी के ले बता दें कि हाल ही में करिश्मा रियलिटी शो ‘एंटरटेंमेंट की रात-लिमिटेड एडिशन’ में पहुंचीं. जज के तौर पर पहुंची करिश्मा ने सलमान के साथ अपने रिश्तों को लेकर ढेर सारी बातें की. इस दौरान उन्होंने बताया कि करीना नहीं बल्कि सलमान उनके ज्यादा करीबी हैं. इस बात को जानकर हर कोई हैरान रह गया.  करिश्मा ने कहा, भले ही अब सलमान करीना के साथ फिल्में करते हैं लेकिन फिर भी करीना की तुलना में वो मेरे ज्यादा करीब हैं. हमारी दोस्ती लंबे समय से है. उसे करीना अभी भी बच्ची ही लगती है और वो उसे वैसा ही मानते हैं.

खास बात यह है कि करीना, सलमान के साथ ‘बौडीगार्ड’ और ‘बजरंगी भाईजान’ में काम कर चुकी हैं. करिश्मा ने फिल्म ‘बौडीगार्ड’ के बारें मे बात करते हुए कहा, मैंने बौडीगार्ड फिल्म में छाया को आवाज दी थी. वह मेरी आवाज थी जो फिल्म में सलमान के चरित्र बौडीगार्ड को परेशान करती थी. अब वह किस तरह की फिल्म करना चाहेंगी, इस पर करिश्मा ने कहा, सभी नंबर 1 नाम की फिल्मों में काम करने के बाद, मैं मम्मी नंबर 1 का हिस्सा बनना चाहूंगी, अगर इसे कोई बनाता है तो, मैं चाहती हूं कि यह फिल्म मां के अलग-अलग रूपों की व्याख्या करें, मैं इसका हिस्सा बनकर खुशी महसूस करूंगी.

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टाटा ने लौन्च की अपनी नई कार, फीचर्स हैं दमदार

टाटा मोटर्स की नैक्सन का बेसब्री से इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है. टाटा ने इसका औटोमैटिक वैरिएंट लौन्च कर दिया है. इसे कंपनी ने हाईपर ड्राइव का नाम दिया है. टाटा ने दिल्ली में पेट्रोल वैरिएंट की एक्स शोरूम कीमत 9.41 लाख रुपए रखी है. वहीं, डीजल वैरिएंट की एक्सशोरूम कीमत 10.3 लाख रुपए तय की गई है. टाटा की सबसे पौपुलर सबकौम्पैक्ट एसयूवी नैक्सन को अब औटोमैटिक गियरबौक्स के साथ लौन्च किया है. टाटा नैक्सन AMT का मुकाबला फोर्ड, मारुति और महिंद्रा की गाड़ियों सो होगा.

औटो एक्सपो में की गई थी पेश

टाटा ने अपनी नैक्सन को औटो एक्सपो 2018 में पेश किया था. अब कंपनी ने इसका औटोमैटिक वर्जन लौन्च कर दिया है. टाटा की पहली सबकौम्पैक्ट एसयूवी को 2017 में उतारा गया था, जिसे काफी पसंद किया गया. लौन्च के बाद से ही नैक्सन की करीब 25000 यूनिट बिकी थीं.

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टौप मौडल में आया AMT वर्जन

टाटा मोटर्स ने औटो एक्सपो में नैक्सन का टौप मौडल नैक्सन XZ को शोकेस किया था. माना जा रहा है कि कंपनी ने सिर्फ इसी मौडल के साथ औटोमैटिक गियरबौक्स दिया है. टाटा नैक्सन AMT में 6-स्पीड ट्रांसमिशन के साथ क्रीप मोड भी दिया गया है. इससे ट्रैफिक में कार चलाने में मदद मिलती है.

हिल असिस्ट सिस्टम से लैस

टाटा नैक्सन का औटोमैटिक वर्जन हिल असिस्ट सिस्टम से लैस है. यह सिस्टम पहाड़ों पर ड्राइविंग के दौरान बेहतर कंट्रोल देने में मदद करेगा. टाटा नैक्सन के नए वैरिएंट में अगर कोई गियर कंट्रोल चाहता है तो कार में औटो मोड से मैनुअल में बदलने का विकल्प भी दिया गया है.

दोनों इंजन में मिलेगा नया वैरिएंट

टाटा नैक्सन में 1.2 लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल और 1.5 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड डीजल इंजन दिया गया है. टाटा नैक्सन AMT में नई पेंट स्कीम और औटोमैटिक गियरबौक्स के अलावा कोई बदलाव नहीं किया गया है. बाजार में उपलब्ध मौडल की तर्ज पर इको, सिटी और स्पोर्ट मोड दिए गए हैं.

इनसे होगा मुकाबला

टाटा नैक्सन AMT का मुकाबला फोर्ड की इकोस्पोर्ट पेट्रोल, महिंद्रा की TUV300 AMT से होगा. साथ ही मारुति भी जल्द ही विटारा ब्रेजा का AMT वैरिटएं लौन्च करने वाली है. ऐसे में औटोमोबाइल मार्केट में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.

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लैपटौप खरीदने की सोच रहे हैं? ये हैं आपके लिए 5 शानदार विकल्प

बाजार में रोज नई तकनीक के साथ नए-नए प्रोडक्ट आ रहे हैं. ऐसे में अगर आप नया लैपटौप खरीदने की सोच रहे हैं, तो उसके स्क्रीन साइज, डिजाइन, रैम, हार्ड डिस्क की क्षमता को बिल्कुल भी अनदेखा न करें. साथ ङी लेपटौप खरीदने से पहले इस बात का खास ख्याल रखें कि लैपटौप में रैम की क्षमता जितनी अधिक होगी, प्रोसेसर उतनी ही तेजी से आपके डाटा को प्रोसेस करता है. प्रोसेसर के बेहतर होने पर ही आप बेहतरीन तरीके से सारे काम कर पाते हैं. इन दिनों बाजार में इन सभी खूबियों से लैस कई लैपटौप मौजूद हैं, तो आइये जानें इनके बारें में.

आसुस जेनबुक फ्लिप S UX370UA

आसुस जेनबुक फ्लिप S UX370UA कन्वर्टिबल लैपटौप में 8वीं जेनरेशन इंटेल कोर i7 प्रोसेसर और 16 जीबी LPDDR3 रैम है. इसका वजन 1.1 किलोग्राम है और यह 11.2mm पतला है. आसुस का यह प्रीमियम लैपटौप मेटल फिनिशिंग वाला और स्टैंडर्ड एल्युमिनियम एलौय की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा मजबूत है. इसमें 300 निट्स ब्राइटनेस और फुल एचडी (1920×1080 पिक्सल) रिजोल्यूशन के साथ 13.3 इंच एंटी ग्लेयर, टचस्क्रीन डिस्प्ले दिया गया है. इस विंडोज 10 लैपटौप में 1.8GHz इंटेल कोर i7-8550 प्रोसेसर, इंटेल UHD ग्राफिक्स GPU और 512 जीबी SSD है. वीडियो कौल के लिए वीजीए कैमरा, फिंगरप्रिंट सेंसर और एक 2-सेल लिथियम-आयन बैटरी दी गई है. इसकी कीमत 82,000 रुपये है.

डेल G3 15 और डेल G3 17

डेल ने गेमिंग यूजर्स को ध्यान में रखकर जी सीरीज के चार लैपटौप लौन्च किए हैं. G3 15 अब तक का सबसे पतला लैपटौप है. इसमें 15 इंच का डिस्प्ले है, जबकि G317 में 17 इंच का डिस्प्ले दिया गया है. इन सभी लैपटौप में Nvidia GeForce GTX 1050 और 1060 Max-Q  ग्राफिक्स कार्ड लगे हुए हैं. इनमें 8वीं जेनरेशन का इंटेल कोर i7 प्रोसेसर लगा है. डेल G5 15 और डेल G7 15 में 15 इंच का डिस्प्ले है. दोनों ही लैपटौप में Nvidia GTX 1060 GPUs का ग्राफिक्स है. डेल G5 में 8वीं जेनरेशन तक का इंटेल कोर i7 प्रोसेसर मौजूद है, जबकि डेल G7 में 8वीं जेनरेशन तक का इंटेल कोर i9 प्रोसेसर उपलब्ध है. G7 15 में 4के डिस्प्ले का विकल्प है.

एसर स्विफ्ट 5

यह काफी पतला और हल्का लैपटौप है, जो विंडोज 10 होम पर चलता है. इसमें 14 इंच फुल-एचडी (1920×1080 पिक्सल) IPS-प्रो डिस्प्ले है. इसमें 8 जीबी DDR4 रैम के साथ 8th जेनरेशन इंटेल कोर i7 प्रोसेसर दिया गया है. इसमें 512 जीबी SSD स्टोरेज है और इसकी बैटरी 4670mAh की है. इसकी बौडी मैग्नीशियम-लिथियम अलौय से बनी हुई है. इसके अन्य फीचर्स में विंडोज हैलो फिंगरप्रिंट सेंसर, एक USB Type-C (3.1) पोर्ट, दो USB 3.0 पोर्ट और एक backlit की-बोर्ड दिया गया है. इसकी कीमत 79,999 रुपये है.

एचपी पवेलियन पावर

पवेलियन पावर नोटबुक Nvidia GeForce GTX 1050 ग्राफिक्स कार्ड और लेटेस्ट 7वीं जेनरेशन क्वाड कोर इंटेल प्रोसेसर से लैस है. इसे एचपी ने खास तौर पर क्रिएटिव प्रोफेशनल लोगों के लिए लौंट किया है.  इसमें 15.6-इंच फुल-एचडी (1920×1080 pixels) IPS डिस्प्ले है. इस डिवाइस में फुल-एचडी आईपीएस डिस्प्ले के साथ ‘B&O प्ले’ और एचपी ‘आडियो बूस्ट’ द्वारा आडियो भी दिया गया है. नोटबुक में 128जीबी पेरीफेरल कम्पोनेंट इंटरकनेक्ट एक्सप्रेस (PCIe), सोलिड-स्टेट स्टोरेज डिवाइस (SSD) और 1 टीबी हार्ड डिस्क ड्राइव स्टोरेज जैसी विशेषताएं हैं. इसकी शुरुआती कीमत 77,999 रुपये है.

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पीएफ डाटा लीक: खतरे में है आपका पैसा और जानकारी

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की वेबसाइट से पीएफधारकों के डाटा चोरी होने की खबरें हैं. हालांकि, संगठन इस बात से साफ इनकार कर रहा है कि कोई डाटा लीक हुआ है. दो दिन में दो बार ईपीएफओ इस मामले में सफाई दे चुका है. लेकिन, खतरा तो है. क्योंकि, बिना किसी गड़बड़ी के वेबसाइट को बंद नहीं किया जाता. सेवाएं नहीं रोकी जाती. ऐसे में 17 करोड़ मेंबर्स की पर्सनल डिटेल्स खतरे में है. साथ ही इन डिटेल्स का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है. खतरे में सिर्फ आधार नहीं है बल्कि डिटेल्स के जरिए पीएफ खाते से पैसा भी निकाला जा सकता है. आपके लिए यह जानना जरूरी है कि ईपीएफओ के डाटा बेस में आपकी जो डिटेल्स हैं उनके चोरी होने या लीक होने पर क्या नुकसान हो सकता है.

हैकिंग का खतरा

बैंकिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डाटा लीक का सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि आपकी पर्सनल डिटेल्स कई तरह के लोगों से शेयर होती है. ऐसे में आपके बैंक खाते और पीएफ खाते को हैक किया जा सकता है. आपके बैंक अकाउंट से पैसा निकाला जा सकता है. इसे एक तरह की फिशिंग कहते हैं. दरअसल, ईपीएफओ से डाटा लीक होने का मतलब है कि आपका पूरा केवाईसी (know your customer) डिटेल लीक हो जाना.

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खतरे में आधार

ईपीएफओ डाटा बेस में पीएफधारकों ने अपना आधार नंबर दर्ज कराया हुआ है. दरअसल, 2016 के बाद से औनलाइन पीएफ निकासी और पीएफ ट्रांसफर के लिए आपको अपने यूनीवर्सल अकाउंट नंबर से आधार को जोड़ना होता है. अब अगर मान लिया जाए कि पीएफ डाटा लीक हुआ है तो यह भी पक्का है कि आपका आधार भी सुरक्षित नहीं है. क्योंकि, आपके पीएफ डाटा के साथ आपके अकाउंट की डिटेल्स भी होती हैं, जिन्हें हासिल करने किसी भी हैकर के लिए मुमकिन है.

खतरे में बैंक खाता

ईपीएफओ डाटा बेस में आधार के अलावा आपका बैंक खाता भी दर्ज होता है. पीएफ निकासी के समय ईपीएफओ इसी खाते में आपका पैसा जमा करता है. लेकिन, पीएफ डाटा लीक होने से आपका बैंक भी हैक किया जा सकता है. अगर इसी अकाउंट से आप औनलाइन ट्रांजैक्शन भी करते हैं तो यह और बड़ा खतरा है. क्योंकि, बैंक खाते के हैक होने का चांस ज्यादा होता है. नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग जैसी सर्विस का इस्तेमाल करने पर खतरा बढ़ सकता है.

मोबाइल नंबर से भी खतरा

डिजिटल सर्विस होने के बाद से ईपीएफओ सदस्य अपना सारा काम मोबाइल या औनलाइन ही करते हैं. साथ ही खाता खुलवाते वक्त या बाद में हर किसी ने अपना मोबाइल नंबर भी इसमें दर्ज कराया है. अगर ईपीएफओ में दर्ज मोबाइल नंबर और नेट बैंकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले नंबर एक ही है, तो इससे फ्रौड का खतरा बढ़ सकता है. क्योंकि, ज्यादातर लोग ओटीपी की मदद से ट्रांजैक्शन करते हैं. अगर मोबाइल नंबर हैक होता है तो हैकर ओटीपी का भी इस्तेमाल आसानी से कर सकते हैं.

खतरे में PF अकाउंट

ईपीएफओ से डाटा लीक होने पर सबसे बड़ा खतरा यही है कि आपके पीएफ अकाउंट से पैसा निकाला जा सकता है. दरअसल, डाटा लीक होने पर आपका आधार, मोबाइल नंबर, डेट औफ बर्थ, बैंक अकाउंट नंबर और पीएफ अकाउंट नंबर जैसी जरूरी जानकारी दूसरे के हाथ लग जाती है. इसका इस्तेमाल वह धोखाधड़ी के लिये कर सकता है. सारी डिटेल्स होने से पीएफ अकाउंट से पैसा निकाला जा सकता है. हालांकि, ईपीएफओ निकासी के वक्त कई तरह के वेरिफिकेशन करता है. साथ ही सायबर सिक्योरिटी को लेकर भी कई ठोस कदम उठाए गए हैं.

EPFO ने जारी की सफाई

डाटा लीक और वेबसाइट हैक होने की खबरों के बाद EPFO और श्रम मंत्रालय ने बयान जारी किया कि कोई डाटा लीक नहीं हुआ है. पीएफ खाताधारकों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित है. कुछ सेवाएं सुरक्षा के लिहाज से बंद की गई हैं. साथ ही आधार संबंधित जानकारियां भी पूरी तरह सुरक्षित हैं. आधार डाटा लीक होने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

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व्यावहारिक और सरल हिंदी है आज की जरूरत

हिंदी के सफर को आगे बढ़ाने में हिंदी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्री महादेवी वर्मा की ‘हाट बाजार’ की भाषा ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है. हाट बाजार ने हिंदी को जनजन तक पहुंचाने का प्रयास किया है. वास्तव में हिंदी एक भाषा होने के साथसाथ एक सफर भी है. एक लंबे सफर में हिंदी कई पड़ावों और मोड़ों से गुजरी है. एक नदी की यात्रा है हिंदी, जिस ने अपने प्रवाह में कई धाराओं को जोड़ा है.

हिंदी ने अपने संपर्क में आई हर बोलीभाषा को अपने में समाया है और इस तरह से हिंदी एक समृद्ध और लोकप्रिय भाषा बनती गई. हिंदी ने असहजता को त्याग कर सहजता को स्वीकारा है, यह हिंदी की विशेषता भी है. ‘रंग महल’ सुनने व बोलने में सहज और स्वाभाविक लगता है, इसीलिए ‘रंग महल’ ने ‘रंग अट्टालिका’ शब्द को स्वीकार नहीं किया है.

सहज अभिव्यक्ति भाषा की विशेषता होती है. इसी सहजता की शृंखला में वर्णमाला में अभूतपूर्व परिवर्तन आते गए हैं, जिस से हिंदी लिखनापढ़ना आसान हो गया, इस के बारे में विस्तृत बातें निम्न पंक्तियों में साफ होती हैं :

पूर्व में ‘ख’ का ‘रव’ लिखा जाता था. इस से कई बार समझने व पढ़ने में भ्रम हो जाता था. इस के लिए कराची में आयोजित हिंदी सम्मेलन में यह निश्चय किया गया कि अगर ‘ख’ में ‘र’ के नीचे के हिस्से को ‘व’ के नीचे मिला कर लिखा जाए तो इस से ‘ख’ के संबंध में उत्पन्न भ्रम दूर हो जाएगा और इस तरह से ‘ख’ अस्तित्व में आ गया जो एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का परिचायक था. अब ‘रवाना’ और ‘खाना’ में स्पष्ट अंतर नजर आने लगा.

इस सम्मेलन में मौजूद बेढव बनारसी ने हास्य चुटकी लेते हुए कहा था : ‘‘वाकई अब तक हम ‘सखा’ को ‘सरवा’ ही समझते रहे थे.’’ यहां ‘सखा’ का मतलब ‘मित्र’ से है और ‘सरवा’ का अर्थ ‘पत्नी का भाई’ यानी ‘साले’ से है.

इसी प्रकार ‘घ’ और ‘म’ भी काफी समय तक भ्रम पैदा करते रहे. पहले सभी जगह ‘घ’ और ‘म’ का ही उपयोग होता था और वाक्यविन्यास के अनुसार उस के अर्थ ‘ध’ और ‘भ’ के लिए निकाला जाता था. जैसे ‘धन’ को भी ‘घन’ ही लिखा जाता था और ‘भान’ को ‘मान’. काफी विचारविमर्श के बाद इस का हल निकाला गया कि ‘घ’ में घुंडी बना कर ‘ध’ बनाया गया और ‘म’ में घुंडी लगा कर ‘भ’ बनाया गया. अब ‘मान’ और ‘भान’ में स्पष्ट अंतर दिखाई देने लगा तथा ‘घन’ और ‘धन’ अलगअलग हो गए.

पूर्व में ‘झ’ लिखने के लिए ‘भ’ में ‘क’ के आखिरी अर्धांश ‘क्त’ को मिला कर लिखा जाता था, इसे लिखने में समय अधिक लगता था और यह कठिन भी था. इसलिए आगे चल कर इसे ‘झ’ लिखा जाने लगा जो सर्वस्वीकार्य और सरल हो गया.

एक वर्ण ‘रा’ को इस तरह लिखा जाता था जो अवैज्ञानिक तथा भ्रम पैदा करने वाला था. आगे चल कर इसे ‘ण’ के रूप में लिखा जाने लगा, जिस से हिंदी वाक्यांश बनाना, पढ़ना और लिखना आसान व स्पष्ट हो गया.

जटिलता में कमी

पुरानी हिंदी में वर्णमाला के स्वरों में दीर्घ ‘ऋ’ और ‘लृ’ का भी अस्तित्व था जिस में से बाद में लृ को हटा दिया गया और हिंदी का भारीपन कम हो गया. शायद आगे जा कर ‘ऋ’ को भी खत्म किया जा सकता है क्योंकि ‘ऋतु’ और ‘रितु’ के उच्चारण में कोई भेद नहीं रह गया है.

इसी तरह पूर्व में ‘क्ष’ को ‘क्शा’, ‘त्र’ को ‘त्र’ और ‘ज्ञ’ को ‘ज्’ की तरह लिखा जाता था, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए इस में आवश्यक सुधार किए गए और ‘क्ष’ और ‘त्र’ को सर्वसहमति से स्वीकारा गया.

वर्तमान समय में हिंदी को सरल, सुलभ व सर्वसाधारण की भाषा बनाने पर जोर दिया जा रहा है, क्योंकि हिंदी विश्वस्तरीय भाषा बन गई है. इसी क्रम में ऐसी वर्तनी को अपनाना न्यायोचित होगा जिस में स्पष्टता अधिक हो और भ्रम नहीं हो.

इस क्रम में ‘ड़’ अथवा ‘ढ़’ में से एक अक्षर का उपयोग किया जा सकता है क्योंकि लगभग दोनों ही अक्षर एकसा संकेत देते हैं. हम ‘्र’ का उपयोग ‘रकार’ के लिए करते हैं, अब इसे आसान बनाने के लिए ‘प्र’ का उपयोग किया जाना ज्यादा सुविधाजनक होगा जैसे ‘प्रकार’ की जगह ‘प्रकार,’ ‘क्रम और भ्रम’ को ‘करम और भरम’ लिखना आसान रहेगा.

हिंदी को आसान बनाने के लिए इस तरह के प्रयोगों को किया जा सकता है, जो आज के कौर्पोरेट समय में काफी लोकप्रिय होगा. आज फेसबुक और ईमेल पर अंगरेजी वर्णमाला का उपयोग देवनागरी उच्चारण करते हुए हिंदी लिखने में किया जा रहा है, जिसे ‘हिंगलिश’ कहा जा रहा है. आज यह बहुत लोकप्रिय हो रही है और अनेकानेक लोग इस का उपयोग कर रहे हैं. इसी क्रम में हिंदी देवनागरी में भी नए प्रयोग स्वागतयोग्य होने चाहिए. इसी तरह ‘ र्’ का उपयोग जैसे ‘गर्म’, ‘शर्म’ में किया जाता है, उस की जगह ‘गरम’, ‘शरम’ भी लिखा जाने लगा है. यह प्रचलन में भी है. इस से भी हिंदी लिखने व समझने में आसानी होगी.

अब शब्द संबंध को लें, जो हिंदी के जानकार हैं वे तो एक बिंदी ‘ ं’ को ‘म्’ और दूसरी बिंदी ‘ ं’ को ‘न्’ समझ लेंगे लेकिन जब हम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की बात करते हैं तब ऐसा ‘संबंध’ लिखने में कोई दिक्कत नहीं है और यह सर्वमान्य भी होगा. इसी तरह अन्य शब्दों का भी सरलीकरण किया जा सकता है, जिस से अर्थ स्पष्ट हो और उपयोग में आसानी हो.

‘संभवत:’ शब्द को यदि ‘सम्भवतह’ लिखेंगे तब भी अर्थ में अंतर नहीं आएगा, बल्कि यह समझने में आसान होगा. इस तरह के प्रयोगों से लेखन में विस्तार अवश्य होगा और भारत के सभी राज्यों व विदेशों में इसे लिखने व समझने में आसानी भी होगी.

यह जान कर आश्चर्य होगा कि पहले हिंदी वर्णमाला में 63 वर्ण थे. इस में गैरजरूरी ध्वनियों को हटा कर और समान ध्वनि को मिला कर 33 व्यंजन तथा 11 वर्ण चलन में रखे गए हैं. इसी के साथ वर्तमान समय में क वर्ग के आखिरी वर्ण (ङ) को और च वर्ग के आखिरी वर्ण (ञ) को प्रयोग से हटा दिया गया है.

जैसी बोली वैसी लिखावट

हिंदी की विशेषता है कि यह जैसी बोली जाती है, वैसी ही लिखी भी जाती है. इस की वर्तनी में कोई भ्रम पैदा नहीं होता है, जबकि अंगरेजी की वर्तनी और उच्चारण में बहुत अंतर होता है. यह हिंदी की महानता है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक हिंदी अपना स्वरूप बदलती गई है, लेकिन हर हिंदुस्तानी के मुंह में हिंदी जरूर समाई हुई है, अपनी प्रांतीय और स्थानीय भाषा के समावेश से हिंदी में मिठास एवं अपनापन आता गया है. हर 12 किलोमीटर की दूरी पर बदलने वाली भाषाएं भी हिंदी से सराबोर हैं.

आज के उदारीकरण, भूमंडलीकरण तथा बाजारवादी दृष्टिकोण के कारण भाषाएं अपनी सीमाएं लांघ रही हैं और एकदूसरे देश में समाने के लिए लालायित हैं. हाल में चीन ने भारत में अपना बाजार फैलाने के लिए हिंदी की उपयोगिता समझी और वह अपने देश में इस के लिए अपने नागरिकों को प्रेरित कर रहा है, लगभग यही स्थिति यूरोपीय व अफ्रीकी देशों की भी है.

उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले समय में हिंदी और सरल एवं व्यावहारिक बनेगी और इस के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा.

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