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बैंकों का फर्जीवाड़ा : पांच सालों में हो चुके हैं इतने घोटाले

देश में बीते कुछ सालों में बैंकों के साथ धोखाधड़ी जैसी कई घटनाएं सामने आईं जिसकी वजह से देश को आर्थिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ा है, कुछ वक्त पहले नीरव मोदी द्वारा पंजाब नेशनल बैंक को धोखा देने तथा लगभग 11 हजार 360 करोंड़ का चूना लगाए जाने के बाद जनता सरकार से इसका जवाब जानना चाहती है की आखिर जनता के पैसों को कब तर लूटा जाएगा क्या इसपर लगाम लगेगी या जैसे चलता आया है वैसे ही घोटालों का क्रम चलता रहेगा. खैर इसी कड़ी में हम आपको बीते कुछ सालों में बैंकों से हुए उन सभी धोखाधड़ी के बारे में बताएंगे जिससे मौजूदा वक्त में देश को बड़ी आर्थिक परेशानी से होकर गुजरना पड़ रहा है.

एक आरटीआई के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में रिजर्व बैंक ने कहा है कि अप्रैल 2017 से 1 मार्च 2018 तक 5,152 बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं, 2016-17 में यह आंकड़ा 5,000 से अधिक था.

विभिन्न बैंकों में पिछले पांच साल में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के 23,000 बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं.

केंद्रीय बैंक के अनुसार अप्रैल 2017 से 1 मार्च 2018 के दौरान सबसे अधिक 28,459 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं.

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2016-17 में 5,076 मामलों में बैंकों के साथ 23,933 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी.

2013 से 1 मार्च 2018 के दौरान एक लाख रुपये या उससे अधिक के बैंक धोखाधड़ी के कुल 23,866 मामलों का पता चला है, आरटीआई से मिले जवाब के अनुसार इन मामलों में कुल 1,00,718 करोड़ रुपये की राशि फंसी हुई है.

इसका ब्योरा देते हुए रिजर्व बैंक ने कहा है कि 2015-16 में बैंकों के साथ धोखाधड़ी के 18,698 करोड़ रुपये के 4,693 मामला प्रकाश में आया.

2014-15 में 19,455 करोड़ रुपये के 4,639 मामले पकड़े गए थे. वित्त वर्ष 2013-14 में बैंकों में कुल 4,306 धोखाधड़ी के मामले सामने आए. इनमें कुल 10,170 करोड़ रुपये की राशि फंसी थी.

ये आंकड़े इस दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं कि केंद्रीय जांच एजेंसियां सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय कई बड़े बैंक धोखाधड़ी के मामलों की जांच कर रहा है.

इनमें पंजाब नेशनल बैंक का 13,000 करोड़ रुपये का घोटाला भी शामिल है. इस घोटाले का सूत्रधार नीरव मोदी और उसका मामा गीतांजली जेम्स का प्रवर्तक मेहुल चोकसी है.

सीबीआई ने हाल में आईडीबीआई बैंक के साथ 600 करोड़ रुपये की कर्ज धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2017 तक सभी बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) 8,40,958 करोड़ रुपये थीं. सबसे अधिक एनपीए सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक का 2,01,560 करोड़ रुपये था.

वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला द्वारा 9 मार्च को लोकसभा को दी गई जानकारी के अनुसार, इस अवधि तक पंजाब नेशनल बैंक का एनपीए 55,200 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक का 44,542 करोड़ रुपये, बैंक आफ इंडिया का 43,474 करोड़ रुपये, बैंक आफ बड़ौदा का 41,649 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक आफ इंडिया का 38,047 करोड़ रुपये, केनरा बैंक का 37,794 करोड़ रुपये, आईसीआईसीआई बैंक का 33,849 करोड़ रुपये था.

ट्विटर की चेतावनी, अपना पासवर्ड चेंज करें यूजर्स वरना…

ट्विटर (Twitter) ने अपने 336 मिलियन यूजर्स को अपने अकाउंट के पासवर्ड को जल्द से जल्द बदलने की करने की चेतावनी दी है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कंपनी ने खुद गुरुवार को एक ट्वीट के जरिए कहा कि हाल ही में कंपनी को एक बग का पता चला है जिसकी वजह से सभी यूजर्स के पासवर्ड टेक्स्ट फौर्म में सेव हो गए हैं.

ट्विटर के चीफ टेक्नोलौजी औफिसर पराग अग्रवाल ने भी इसकी जानकारी अपने ब्लौग पर पोस्ट के जरिए दी है. उन्होंने अपने ब्लौग पर लिखा, ‘ट्विटर ने इस बग को फिक्स कर दिया है और अभी तक किसी भी यूजर्स के पासवर्ड के चोरी होने या अकाउंट के हैक होने की रिपोर्ट नहीं है. हालांकि बावजूद इसके सभी यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने अकाउंट का पासवर्ड जितनी जल्दी हो सके बदल दें.’ वहीं ट्विटर के सीईओ जैक डार्सी ने भी एक ट्वीट कर यूजर्स से उनके पासवर्ड बदलने को कहा है.

दरअसल, ट्विटर अपने यूजर्स के पासवर्ड को सुरक्षित रखने के लिए hashing प्रक्रिया का इस्तेमाल करता है. इस प्रक्रिया में यूजर्स को पासवर्ड को यादृच्छिक अंकों और अक्षरों में बदल दिया जाता है, लेकिन इस बग के आने के कारण सभी पासवर्ड टेक्स्ट फौर्मेट में दिखने लगे थे. बता दें कि यूजर्स की सुविधाओं व उनतक इस बात की जानकारी पहुंचाने के लिए ट्विटर के मोबाइल ऐप या डेस्कटौप साइट पर विजिट करने पर भी पौप अप विंडो के रूप में पासवर्ड चेंज करने का नोटिफिकेशन दिया जा रहा है.

अफगानिस्तान के खिलाफ नहीं खेलेंगे विराट, अपना सीक्रेट मिशन करेंगे पूरा

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने जुलाई में शुरू होने वाले इंग्लैंड दौरे की तैयारी के मद्देनजर गुरुवार को आधिकारिक रूप से शीर्ष काउंटी टीम ‘सरे’ से करार पर हस्ताक्षर किए. काउंटी ने आधिकारिक रूप से आज अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी घोषणा की. कोहली जून में तीन काउंटी चैम्पियनशिप मैच खेलेंगे जिससे वह बेंगलुरु में 14 से 18 जून तक अफगानिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक पहला टेस्ट मैच नहीं खेल पाएंगे. प्रशासकों की समिति के प्रमुख विनोद राय पहले ही कह चुके हैं कि अगस्त में टेस्ट सीरीज की तैयारी के लिये कोहली को काउंटी खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

पिछली बार इंग्लैंड दौरे पर कोहली अच्छा नहीं कर सके थे और इस बार वह इसकी भरपाई करना चाहते हैं. इंग्लैंड में रन बनाने से उनका आधुनिक दौर के महान क्रिकेटरों का दर्जा पक्का हो जाएगा क्योंकि वह सभी टेस्ट खेलने वाले देशों में रन जुटा लेंगे. वह औस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका में कई टेस्ट शतक जड़ चुके हैं. इसके अलावा वह न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज में भी तिहरे आंकड़े तक पहुंच चुके हैं.

क्लब ने कहा, ‘सरे’ काउंटी क्रिकेट क्लब को भारतीय कप्तान विराट कोहली से जून के महीने के लिए करार की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है.

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इस मौके पर कोहली ने कहा, “मैं लंबे समय से काउंटी क्रिकेट में खेलना चाहता था और मैं एलेक स्टीवर्ट और सरे का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मुझे टीम के 2018 सत्र के दौरान जुड़ने का मौका प्रदान किया. मैं किया ओवल में खेलने के लिए बेताब हूं.”

कोहली नौ से 12 जून तक साउथम्पटन में रोज बाउल में हैम्पशर के खिलाफ काउंटी पदार्पण करेंगे. अगर यह मैच 12 जून को खत्म होता है तो वह अगले दिन 13 जून को ही बेंगुलुरु पहुंच सकते हैं जिससे वह अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट शुरू होने से एक दिन पहले पहुंच सकते हैं. इसका मतलब है कि वह दो महाद्वीप की यात्रा में एक दिन बिताने के साथ नौ दिन तक लगातार क्रिकेट खेलेंगे. दूसरा मैच गिल्डफोर्ड में 20 से 23 जून तक समरसेट के खिलाफ होगा जबकि अंतिम मैच स्कारबोरो में 25 से 28 जून तक यार्कशर के खिलाफ होगा जहां पुजारा उनके खिलाफ टीम में शामिल होंगे.

‘सरे’ के क्रिकेट निदेशक स्टीवर्ट ने कहा, “हम जून के महीने में विश्व क्रिकेट के बड़े नाम से करार करके रोमांचित हैं.” उन्होंने कहा, “हमारे खिलाड़ियों का विराट के साथ खेलना और ट्रेनिंग करना फायदेमंद होगा क्योंकि उन्हें उससे काफी कुछ सीखने का मौका मिलेगा.”

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ने कहा, “ऐसे समय में जब काउंटी क्रिकेट के भविष्य पर इतनी चर्चा हो रही है तो विराट के आने से हमारे घरेलू किकेट को मनोबल काफी बढ़ेगा जिससे हर काउंटी टीम को फायदा मिल सकता है.”

‘सरे’ की वेबसाइट के अनुसार, “कोहली पूरे महीने क्रिकेट खेलने के लिए उपलब्ध रहेंगे जिसमें ‘सरे’ के स्कारबोरो दौरे पर यार्कशर के खिलाफ मैच अंतिम होगा.”

यह 29 वर्षीय इस साल काउंटी क्रिकेट में खेलने वाला चौथा भारतीय टेस्ट खिलाड़ी बन जाएगा. साथी बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा इस समय यार्कशर के लिए, तेज गेंदबाज इशांत शर्मा, ससेक्स और वरुण आरोन लिसेस्टरशर के खिलाफ खेल रहे हैं. अक्षर पटेल को अगस्त में डरहम के लिए खेलना है. वर्ष 2011 में अपने टेस्ट पदार्पण के बाद कोहली ने पांच दिवसीय मैचों में 53.40 के औसत से 5554 रन बनाए हैं जबकि उन्होंने 58.10 के औसत से वनडे में 9588 रन जुटाए हैं. इस मध्यक्रम बल्लेबाज ने 2017 में आईसीसी वर्ल्ड क्रिकेटर औफ द ईयर के लिए प्रतिष्ठित सर गारफील्ड सोबर्स ट्रौफी जीती थी. अंतरराष्ट्रीय मैच के सभी तीनों फौर्मेट में उनका औसत 50 रन का है.

वर्ष 2014-15 में भारत के औस्ट्रेलिया दौरे के दौरान टेस्ट कप्तानी संभालने के बाद कोहली ने देश की टीम को 34 मैच में से 21 टेस्ट जीत से आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचा दिया. वर्ष 2017 कोहली को ‘विजडन लीडिंग क्रिकेटर इन द वर्ल्ड’ तथा वर्ष का सर्वश्रेष्ठ ‘कैप्टन औफ द आईसीसी टेस्ट एंड वनडे टीम’ चुना गया था.

JioInteract हुआ लौन्च, अमिताभ सहित कई स्टार्स से करें लाइव वीडियो चैट

भारतीय टेलीकौम कंपनी रिलायंस जियो ने अपने ग्राहकों के लिए एक और तोहफा पेश किया है. जियो ने अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए दुनिया का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ब्रांड-एंगेजमेंट वीडियो प्लेटफार्म JioInteract (जियोइंटरेक्ट) लौन्च किया है. आपको बता दें कि जियो वीडियो कौल JioInteract की पहली सर्विस है.

बताया जा रहा है कि इस प्लेटफौर्म पर लाइव वीडियो कौल जैसी कई सुविधाएं दी जाएंगी. जिसमें भारत की मशहूर हस्तियां शिरकत करेंगी. बता दें कि इसकी शुरुवात बौलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ की जाएगी. बता दें कि आज शुक्रवार यानी 4 मई 2018 से ही कोई भी जियो यूजर या अन्य स्मार्टफोन प्रयोगकर्ता अपने पसंदीदा सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ वीडियो चैट कर सकता है. वीडियो कौल करने वाले यूजर इसके जरिए अमिताभ बच्चन से उनकी कौमेडी फिल्म, ‘102 नाट आउट’ के बारे में सवाल पूछ सकते हैं.

कैसे करें ‘जियो वीडियो कौल’

  1. जियो वीडियो कौल करने के लिए सबसे पहले MyJio ऐप डाउनलोड करें.
  2. MyJio ऐप के अंदर JioInteract नाम से आने वाले आइकन पर क्लिक करें.
  3. यहां पर अमिताभ बच्चन के साथ अपनी वीडियो कौल शुरू करें और चैट करें.
  4. इसके अतिरिक्त ग्राहक ‘शेयर’ विकल्प पर क्लिक करके अपने वीडियो कौल का एक्सपिरियंस अपने परिवार और दोस्तों के साथ भी साझा कर सकते हैं.

बता दें कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर JioInteract ने एक आकर्षक ब्रांड एंगेजमेंट सौल्युशन बनाया है. मीडिया में आई जानकारी के अनुसार अगले कुछ हफ्तों में जियो, वीडियो कौल सेंटर, वीडियो कैटलौग और वर्चुअल शोरूम जैसी सेवाओं की भी शुरुआत करेगा.

नाइटराइडर्स के स्टार बने शुभमन गिल, बना डाले नये रिकौर्ड

युवा बल्लेबाज शुभमन गिल (नाबाद 57) और कप्तान दिनेश कार्तिक (नाबाद 45) की सुलझी हुई पारियां गुरुवार को चेन्नई पर भारी पड़ गईं. इन दोनों के दम पर कोलकाता ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 11वें संस्करण के मैच में छह विकेट से शानदार जीत दर्जकर चेन्नई के विजयी रथ को रोक दिया. ईडन गार्डन्स स्टेडियम में खेले गए इस मैच में चेन्नई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में पांच विकेट खोकर 177 रन बनाए. मेजबान कोलकाता ने इस लक्ष्य को 17.4 ओवरों में चार विकेट खोकर हासिल कर लिया.

शुभमन ने अपनी अर्धशतकीय पारी में 36 गेंदों का सामना किया और छह चौकों के अलावा दो छक्के लगाए. कप्तान कार्तिक ने 18 गेंदों पर सात चौके और एक छक्का लगाया. दोनों ने मुश्किल समय में पांचवें विकेट के लिए 83 रनों की साझेदारी कर टीम को जीत दिलाई.

इसी के साथ शुभमन गिल ने आईपीएल के कई रिकौर्ड अपने नाम कर लिये, जिसमें सबसे कम उम्र में अर्धशतक बनाने की सूची में शुभमन ने चौथा पायदान अपने नाम कर लिया. यह साझेदारी तब आई जब मेजबान टीम ने अपने चार विकेट 97 रनों पर ही खो दिए थे. क्रिस लिन ने पहले ओवर में लुंगी नगिदी पर दो शानदार छक्के जड़े, लेकिन आखिरी गेंद पर शेन वौटसन के हाथों लपके गए. उनके साथ पारी की शुरुआत करने आए सुनील नरेन दूसरे छोर से आक्रामक रुख अखित्यार किए हुए थे. उन्होंने 20 गेंदों में चार चौके और दो छक्कों की मदद से तेजी से 32 रन बनाए.

नरेन को हालांकि केएम आसिफ द्वारा फेंके गए दूसरे ओवर में रवींद्र जडेजा ने दो जीवनदान दिए. इसी बीच रोबिन उथप्पा (6) को आसिफ ने ड्वायन ब्रावो का हाथों कैच करा 40 के कुल स्कोर पर पवेलियन भेज दिया था. सातवें ओवर की चौथी गेंद पर जडेजा ने अपनी गलती सुधारी और नरेन को ब्रावो के हाथों कैच करा चेन्नई को थोड़ी राहत दी, लेकिन नरेन जिस काम के लिए आए थे वो कर गए थे.

नितीश राणा के स्थान पर आए रिंकू सिंह 16 रनों का योगदान दे सके. यहां से शुभमन और कप्तान ने मोर्चा संभाला और अपने अंदाज में ही बल्लेबाजी करते हुए कोलकाता को जीत दिलाई. इससे पहले चेन्नई के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अंत में आकर 25 गेंदों में चार छक्के और एक चौके की मदद से नाबाद 43 रनों की पारी खेले टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया. चेन्नई को एक बार फिर अच्छी शुरुआत मिली. फाफ डु प्लेसिस (27) और वौटसन (36) की सलामी जोड़ी ने टीम को पांच ओवरों में 48 के स्कोर तक पहुंचा दिया था. डु प्लेसिस अगले ओवर में पीयूष चावला की पहली गेंद पर बोल्ड हो गए.

सुरेश रैना ने वौटसन का अच्छा साथ दिया और दूसरे विकेट के लिए 43 रनों की साझेदारी की. 91 के कुल स्कोर पर वौटसन एक बड़ा शौट मारने के प्रयास में नरेन की गेंद पर शिवम मावी को कैच दे बैठे. सुरेश रैना अपने पुराने अंदाज में नजर आ रहे थे. उन्होंने अपनी पारी में चार चौके लगाए, लेकिन जैसे ही वह लय पकड़ रहे थे तभी कुलदीप यादव की गेंद पर सीमा रेखा के पास मिशेल जौनसन द्वारा लपक लिए गए. रैना ने 26 गेंदों में 31 रनों की पारी खेली.

इस सीजन में बल्ले से बेहतरीन फौर्म में चल रहे अंबाती रायुडू ने 17 गेंदों में तीन चौकों की मदद से 21 रन बनाए. रायुडू के जाने के बाद धोनी ने रवींद्र जडेजा के साथ पांचवें विकेट के लिए 54 रनों की साझेदारी कर टीम का स्कोर 174 तक पहुंचा दिया. इस साझेदारी में सिर्फ 12 रन ही जडेजा के थे. जडेजा का विकेट आखिरी ओवर की पांचवीं गेंद पर गिरा. कोलकाता के लिए चावला और नरेन ने दो-दो विकेट लिए. कुलदीप यादव को एक सफलता मिली.

इंटरनैट का सरकारी दुरुपयोग और एकतरफा हुकूमत का तरीका

फेसबुक द्वारा लाखों करोड़ों यूजर्स की निजी जानकारी को विज्ञापनदाताओं के लिए व कैंब्रिज एनालिटिका को चुनावों में दुरुपयोग करने के लिए उपलब्ध कराने पर अमेरिका की संसदीय कमेटी ने फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग से जो जिरह की, उस से साफ हो गया कि आज के राजनीतिबाज, चाहे अमेरिका के हों या भारत के, बेहद सतही व अज्ञानी हैं. उन्हें वोटरों को भ्रमित करना ही आता है. मार्क जुकरबर्ग ने यह तो कई बार माना कि उन्होंने गलतियां की, पर 40-50 सांसद मिल कर मार्क जुकरबर्ग पर कोई आपराधिक मामला न बना सके.

एक के बाद एक सांसद ने उन से सवाल पूछे पर सभी सवाल ऐसे थे जैसे 5वीं कक्षा के छात्र आइंसटाइन की परीक्षा ले रहे हों. मार्क जुकरबर्ग बेहद आत्मविश्वास के साथ बिना लड़खड़ाए जवाब देते रहे और उलटे, यह साबित करते रहे कि सांसदों को खुद नहीं मालूम कि वे पूछना क्या चाहते हैं.

आज दुनिया के सभी देशों में सत्ता चुने हुए जनप्रतिनिधियों के हाथों से फिसल कर बड़ी टैक, फार्मास्युटिकल, औटो, पैट्रोकैमिकल, खुदरा बिक्री करने वाली कंपनियों के हाथों में जाती जा रही हैं. देशों की सरकारें अब मंत्रालयों से नहीं, इन कंपनियों के हैडक्वार्टरों से चलने लगी हैं. कैंब्रिज एनालिटिका ने यह तक साबित कर दिया है कि इन कंपनियों ने अमेरिका में ही नहीं, दुनिया के सभी बड़े लोकतंत्रों पर कब्जा सा कर लिया है और फेसबुक व व्हाट्सऐप ऐसे हथियार बन गए हैं जिन में शिकार खुद अपने हाथों अपने को जंजीरें पहनाते हैं ताकि वे खुद इन के इशारे पर चल सकें और इन के इशारों पर अपने मनचाहे जनप्रतिनिधियों को चलाएं.

सोशल मीडिया क्रांति जनता के हाथों में अधिकारों को देने की क्रांति नहीं है, बल्कि यह पलट क्रांति है जिस में जनता को गुलाम बनाया जा रहा है. जनता उसी तरह भ्रम में डाली जा रही है जैसे लेनिन ने रूस की जनता को डाला था और एडोल्फ हिटलर ने जरमनी की जनता को. परिणाम में आजादी और मुक्ति दिलाने के नाम पर उन्हें पीढि़यों तक गुलामी सहनी पड़ी.

धर्मगुरु बातों के छल्लों की जंजीरें बनाते हैं और कई हजार वर्षों से आज तक उन का कहर दुनिया की 90 प्रतिशत जनता सह रही है. आज दुनियाभर में हिंसा का मुख्य कारण धर्मजनित सोच, अलगाव, नियम, आदेश हैं. फेसबुक और व्हाट्सऐप के सहारे मार्क जुकरबर्ग जैसे नए चक्रवृत्ति सम्राट पैदा हो गए हैं जो अपनी निरीह जनता की पलपल की जानकारी रखते हैं.

नरेंद्र मोदी की सरकार एक तरफ धर्म का सहारा और दूसरी तरफ कंप्यूटरइंटरनैट का सहारा ले कर आधार कार्ड के जरिए सब की जानकारी रखने वाली एकतरफा हुकूमत करना चाह रही है जिस में आप के पलपल की जानकारी मार्क जुकरबर्ग जैसों को रहे और आप केवल ऐसे कुत्ते हों जो गले में पड़ी जंजीर को सुरक्षा का निशान मानता है.

डैबिट/क्रैडिट कार्ड का दुरुपयोग रोकने की तकनीक

बैंकों में औनलाइन धोखाधड़ी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. आएदिन लोग इस के शिकार हो रहे हैं. बैंक अधिकारी बन कर फोन से एटीएम कार्ड की जानकारी ले कर खाते से पैसे उड़ाने की घटनाएं लगातार हो रही हैं जबकि इस दिशा में जनजागृति अभियान भी चल रहे हैं. इस के अलावा क्रैडिट या एटीएम कार्ड का इस्तेमाल किसी अन्य के लिए इस्तेमाल करना अब भी आसान नहीं है लेकिन इस का दुरुपयोग नहीं हो तथा इसे ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके, इस के लिए इसे औन और औफ करने की टैक्नोलौजी विकसित की जा रही है. इस का मतलब है कि जब आप को एटीएम का इस्तेमाल करना है तो आप एटीएम का कोड डाल कर उसे औन कर दो और पैसा निकालने के बाद औफ कर लो.

यह तकनीक मोबाइल ऐप के जरिए ग्राहक को औनलाइन लेनदेन की सुविधा प्रदान करेगा. यह सुविधा दिए जाने से एटीएम या कै्रडिट कार्ड खो जाने पर कोई अन्य व्यक्ति उस का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा. औनलाइन फ्रौड बड़े स्तर पर हो रहे हैं, इसीलिए इस तकनीक की जरूरत थी और यह संभव हो गया है.

एक आंकड़े के अनुसार, पिछले वर्ष दिसंबर तक क्रैडिट और डैबिट कार्ड धोखाधड़ी में 25 हजार 800 मामले सामने आए. धोखाधड़ी के इन मामलों के जरिए बैंकों से लोगों  का करीब 179 करोड़ रुपए लूटा गया है. सब से बड़ी दिक्कत एटीएम की है जिस की सूचना फोन पर मांग कर बड़ी धोखाधड़ी हो रही है. कम पढ़ेलिखे लोग इन धोखेबाजों के चंगुल में फंस जाते हैं और अपने खूनपसीने की कमाई दो मिनट में लुटा बैठते हैं. इस ऐप के सामने आने से उम्मीद है कि गरीब अब लुटेगा नहीं.

ओमेर्टा : खलनायक को नायक बनाने वाली भावना शून्य फिल्म

इटालियन शब्द ‘ओमेर्टा’ का अर्थ होता है माफिया. मगर हंसल मेहता की फिल्म ‘ओमेर्टा’ इटालियन माफिया की कहानी नहीं है. बल्कि हंसल मेहता की बायोग्राफिकल अपराध कथा वाली फिल्म ‘‘ओमेर्टा’’ मशहूर आतंकवादी अहमद उमर सईद शेख के जीवन पर बनायी गयी है. इसे कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में  काफी सराहा जा चुका है. पर यह फिल्म फीचर फिल्म की बजाय डाक्यू ड्रामा वाली फिल्म है.

फिल्म की कहानी पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिक अहमद उमर सईद शेख (राज कुमार राव) के इर्द गिर्द घूमती है. लंदन में पढ़ाई कर रहा अहमद उमर सईद शेख एक अच्छे मध्यमवर्गीय परिवार से है. लेकिन 1994 में सीरिया व बोसनिया में जो कुछ होता है, उससे उसका ब्रेन वाश हो जाता है. फिर उमर एक गलत राह पकड़ लेता है. वह ‘कश्मीर स्वतंत्रता’ की मुहिम का हिस्सा बन जाता है. फिर उमर पाकिस्तानी कट्टर पंथियों और आई एस आई के इशारे पर रोहित वर्मा बनकर भारत आता है. और दिल्ली में कुछ विदेशी पर्यटकों को अगवा कर उनकी हत्या कर देता है.

पकड़े जाने पर उमर सईद को दिल्ली की तिहाड़ जेल में काफी टार्चर किया जाता है. फिर पाकिस्तानी आकाओं के इशारे पर कुछ आतंकवादी भारतीय जहाज आई सी -184 का अपहरण कर कंधार ले जाते हैं और विमान के यात्रियों को रिहा करने के बदले जेल से उमर सईद शेख व मसूद अजहर सहित चार आतंकवादी साथियों की रिहाई की मांग करते हैं. उमर सईद रिहा होकर पाकिस्तान चला जाता है और उन पर आतंकवादी का ठप्पा लग जाता है. जबकि उमर के पिता (केवल अरोड़ा) चिल्लाते रहते हैं कि उनका बेटा आतंकवादी नहीं है. पर उमर तो पाकिस्तानी सेना व जासूसी संस्था के इशारे पर काम करता रहता है.

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फिर 9/11 यानी कि ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ पर आतंकवादी हमले और मुंबई के 26/11 से उसके जुड़े होने की बात की गयी है. 2002 में उमर सईद, बशीर बनकर अमरीकन पत्रकार डैनियल पर्ल (तिमोथी रायन) से मिलता है और फिर उसकी हत्या करता है. अमरीकन सरकार के दबाव के चलते पाकिस्तानी सरकार को उमर को गिरफ्तार कर सजा सुनानी पड़ती है. उमर सईद शेख अभी भी पाकिस्तानी जेल में बंद है.

हंसल मेहता ने पहली बार एक खलनायक पर फिल्म बनायी है. कुछ लोगों की राय में एक खूंखार आतंकवादी का महिमा मंडन करना गलत है. जबकि हंसल मेहता का दावा है कि उन्होंने नकारात्मक सोच वाले इंसान का महिमा मंडन नहीं किया है, बल्कि यह बताने की कोशिश की है कि आज की पीढ़ी आतंकवादी संगठनों की तरफ क्यों आकर्षित हो रही है? मगर पूरी फिल्म देखने के बाद हंसल मेहता का तर्क सही नजर नहीं आता.

नब्बे के दशक में सीरिया व बोसनिया में मुस्लिमों के साथ जो कुछ हो रहा था, उस वजह से उमर सईद आतंकवादी बनता है. इसे जायज नहीं ठहराया जा सकता. उमर सईद को निजी स्तर पर या उनके परिवार या उनके बहुत करीबी रिश्तेदार या दोस्त के साथ ऐसा कुछ नहीं होता, जिसकी वजह से उसके अंदर का गुस्सा फूटता और वह आतंकवाद की राह पकड़ता. एक साधारण इंसान आतंकवादी क्यों बनता है, वह कई कारनामों को अंजाम क्यों देता है, इस पर यह फिल्म कोई बात नहीं करती. हां! हंसल मेहता ने पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे आंतकवादी कैंप, उनकी ट्रेनिंग आदि का सजीव चित्रण किया है.

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हंसल मेहता ने अपनी फिल्म में इस बात को जोरदार तरीके से रेखांकित किया है कि पाकिस्तानी हुकूमत आतंकवादियों को शरण देने के साथ उनकी मददगार बनी हुई है. हंसल मेहता ने फिल्म को कई वास्तविक लोकेशन पर फिल्माने के साथ ही कुछ घटनाक्रमों के वास्तविक वीडियो फुटेज भी उपयोग किए हैं. इससे यह फीचर फिल्म की बजाय डाक्यू ड्रामा बन जाती है.

फिल्म की पटकथा के अलावा इसमें जिस तरह से वास्तविक वीडियो जोड़े गए हैं, उसके चलते उमर सईद की कहानी से पूरी तरह ना वाकिफ दर्शक की समझ में नहीं आता कि क्या हो रहा है? फिल्म के कुछ दृश्य दर्शकों को विचलित जरुर करते हैं, मगर फिल्म दर्शकों को बांधने में पूरी तरह से विफल रहती है. फिल्मकार ने विदेशी पयर्टकों के अपहरण व उनकी हत्या के अलावा अमरीकी पत्रकार डैनियल पर्ल की हत्या को बेवजह काफी विस्तार से चित्रित किया है.

फिल्म में उमर सईद की शादी सहित कई  घटना क्रम हैं, मगर कमजोर पटकथा के चलते कई घटनाक्रम सही अनुपात में उकेरे नहीं जा सके. हंसल मेहता की पिछली फिल्मों की ही तर्ज पर बनी यह फिल्म दर्शकों को पसंद आए, इसकी उम्मीदें काफी कम हैं. फिल्म में अंग्रेजी भाषा /संवादों का काफी उपयोग किया गया है, जिसके चलते यह फिल्म काफी सीमित दर्शक वर्ग के लिए बनकर रह गयी.

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जहां तक अभिनय का सवाल है तो बेहद शांत नजर आने वाले खूंखार व जालिम आतंकवादी उमर सईद शेख के किरदार को राज कुमार राव ने अपने अभिनय से जीवंत किया है. कुछ दृश्यों में राज कुमार राव महज कैरी केचर/काफी बनावटी बनकर उभरते हैं, फिर भी राज कुमार राव ने एक बार फिर खुद को बेहतरीन अभिनेता साबित किया है. ईशान छाबड़ा का पार्श्व संगीत ठीक ठाक है.

एक घंटा 36 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘ओमेर्टा’’ का निर्माण ‘स्विस इंटरटेनमेंट’ और ‘कर्मा फीचर्स’ ने मिलकर किया है. फिल्म के निर्देशक हंसल मेहता, संगीतकार ईशान छाबड़ा, लेखक मुकुल देव व हंसल मेहता, कैमरामैन अनुज राकेश धवन तथा कलाकार हैं – राज कुमार राव, राजेश तैलंग, रूपिंदर नागरा, केवल अरोड़ा, तिमोथी रायन, हरमीत सिंह व अन्य.

हत्यारा प्रेमी : दीपक क्यों चाहता था कि इंद्रा ससुराल न जाए

राजस्थान के जिला नागौर में एक कस्बा है. मेड़ता सिटी. इसी कस्बे में कभी मीराबाई जन्मी थीं. मीरा का मंदिर भी यहां बना हुआ है. मेड़ता सिटी की गांधी कालोनी में दीपक उर्फ दीपू रहता था. दीपक के पिता बंशीलाल डिस्काम कंपनी में नौकरी करते थे. उन की पोस्टिंग सातलावास जीएसएस पर थी. पिता की सरकारी नौकरी होने की वजह से घर में किसी तरह का अभाव नहीं था. जिस से दीपक भी खूब बनठन कर रहता था.

मेड़ता सिटी में नायकों की ढाणी की रहने वाली इंद्रा नाम की युवती से उसे प्यार हो गया था. दीपक चाहता था कि वह अपनी प्रेमिका पर दिल खोल कर पैसे खर्च करे पर उसे घर से जेब खर्च के जो पैसे मिलते थे उस से उस का ही खर्चा बड़ी मुश्किल से चल पाता था. चाह कर भी वह प्रेमिका इंद्रा को उस की पसंद का सामान नहीं दिलवा पाता था.

तब दीपक ने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और वह पिता के साथ डिस्काम में ही काम करने लगा. वहां काम करने से उसे अच्छी आय होने लगी. अपनी कमाई के दम पर वह इंद्रा को अपनी मोटरसाइकिल पर घुमाताफिराता. अपनी कमाई का अधिकांश भाग वह प्रेमिका इंद्रा पर ही खर्च करने लगा.

इंद्रा एक विधवा युवती थी. दरअसल इंद्रा की शादी करीब 3 साल पहले बीकानेर में हुई थी पर शादी के कुछ दिन बाद ही उस के पति की अचानक मौत हो गई. पति की मौत का उसे बड़ा सदमा लगा.

ऊपर से ससुराल वाले उसे ताने देने लगे कि वह डायन है. घर में आते ही उस ने पति को डस लिया. ससुराल में दिए जाने वाले तानों से वह और ज्यादा दुखी हो गई और फिर एक दिन अपने मायके आ गई.

मायके में रह कर वह पति की यादों को भुलाने की कोशिश करने लगी. धीरेधीरे उस का जीवन सामान्य होता गया. वह बाजार आदि भी आनेजाने लगी. उसी दौरान उस की मुलाकात दीपक उर्फ दीपू से हुई. बाद उन की फोन पर भी बात होने लगी. बातों मुलाकातों से बात आगे बढ़ते हुए प्यार तक पहुंच गई. इस के बाद तो वह दीपक के साथ मोटरसाइकिल पर घूमनेफिरने लगी.

यह काम इंद्रा के घर वालों को पता नहीं थी. उन्हें तो इस बात की चिंता होने लगी कि विधवा होने के कारण बेटी का पहाड़ सा जीवन कैसे कटेगा. वह उस के लिए लड़का तलाशने लगे.

आसोप कस्बे में एक रिश्तेदार के माध्यम से पंचाराम नाम के युवक से शादी की बात बन गई. फिर नाताप्रथा के तहत इंद्रा की पंचाराम से शादी कर दी. यह करीब 8 माह पहले की बात है.

दूसरी शादी के बाद इंद्रा ससुराल चली गई तो दीपक बुझा सा रहने लगा. उस के बिना उस का मन नहीं लग रहा था. वह कभीकभी इंद्रा से फोन पर बात कर लेता था. कुछ दिनों बाद इंद्रा आसोप से मायके आई तो वह दीपक से पहले की तरह मिलने लगी. दूसरे पति पंचाराम से ज्यादा वह दीपक को चाहती थी. क्योंकि वह उसे हर तरह से खुश रखता था.

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मार्च 2017 में दीपक के घर वालों ने अपने ही समाज की लड़की से दीपक की शादी कर दी. दीपक ने अपनी शादी की बात इंद्रा से काफी दिनों तक छिपाए रखी पर इंद्रा को किसी तरह अपने प्रेमी की शादी की बात पता चल गई. यह बात इंद्रा को ठीक नहीं लगी. तब इंद्रा ने दीपक से बातचीत कम कर दी.

जब दीपक उसे मिलने के लिए बुलाता तो वह बेमन से उस से मिलने जाती थी. अक्तूबर, 2017 के तीसरे हफ्ते में दीपक और इंद्रा की मुलाकात हुई तो इंद्रा ने कहा, ‘‘दीपू, ससुराल से पति का बुलावा आ रहा है. मैं 2-4 दिनों में ही चली जाऊंगी.’’

‘‘इंद्रा प्लीज, ऐसा मत करो. तुम चली जाओगी तो मैं तुम्हारे बिना कैसे जी पाऊंगा. याद है जब तुम शादी के बाद यहां से चली गई थी तो मेरा मन नहीं लग रहा था.’’ दीपक बोला.

‘‘मेरी दूसरी शादी हुई है. मैं पति को खोना नहीं चाहती. मुझे माफ करना. मुझे ससुराल जाना ही होगा.’’ इंद्रा ने कहा.

दीपक उसे बारबार ससुराल जाने को मना करता रहा. पर वह जाने की जिद करती रही. इसी बात पर दोनों में काफी देर तक बहस होती रही. इस के बाद दोनों ही मुंह फुला कर अपनेअपने घर चले गए.

उस रोज 27 अक्तूबर, 2017 का दिन था. मेड़ता सिटी थाने में किसी व्यक्ति ने सूचना दी कि एक युवती की अधजली लाश जोधपुर रोड पर स्थित जय गुरुदेव नगर कालोनी के सुनसान इलाके में पड़ी है. सुबहसुबह लाश मिलने की खबर से थाने में हलचल मच गई.

थानाप्रभारी अमराराम बिश्नोई पुलिस टीम के साथ सूचना में बताए पते पर पहुंच गए. घटनास्थल के आसपास भीड़ जमा थी. पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, मगर अधजले शव के पास ऐसी कोई चीज नहीं मिली जिस से मृतका की पहचान हो पाती.

थानाप्रभारी की सूचना पर सीओ राजेंद्र प्रसाद दिवाकर भी मौके पर पहुंच गए थे. उन्होंने भी मौके का निरीक्षण कर वहां खड़े लोगों से पूछताछ की. कोई भी उस शव की शिनाख्त नहीं कर सका.

नायकों की ढाणी का रहने वाला रामलाल नायक भी लाश मिलने की खबर पा कर जय गुरुदेव नगर कालोनी पहुंच गया. उस की बेटी  इंद्रा भी 26 अक्तूबर से लापता थी. झुलसी हुई लाश को वह भी नहीं पहचान सका. लाश की शिनाख्त न होने पर पुलिस ने जरूरी काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

मरने वाली युवती की शिनाख्त हुए बिना जांच आगे बढ़नी संभव नहीं थी. सीओ राजेंद्र प्रसाद दिवाकर और थानाप्रभारी अमराराम बिश्नोई इस बात पर विचारविमर्श करने लगे कि लाश की शिनाख्त कैसे हो. उसी समय उन के दिमाग में आइडिया आया कि यदि मृतका के अंगूठे के निशान ले कर उन की जांच कराई जाए तो उस की पहचान हो सकती है क्योंकि आधार कार्ड बनवाते समय भी फिंगर प्रिंट लिए जाते हैं. हो सकता है कि इस युवती का आधार कार्ड बना हुआ हो.

पुलिस ने आधार कार्ड मशीन में मृतका के अंगूठे का निशान लिया तो पता चला कि मृतका का आधार कार्ड बना हुआ है. इस जांच से यह पता चल गया कि मृतका का नाम इंद्रा पुत्री रामलाल नायक है. लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने रामलाल नायक को सिटी थाने बुलाया और उस की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली.

पुलिस ने रामलाल नायक से पूछताछ की तो उस ने बताया कि इंद्रा करीब डेढ़ महीने पहले गांधी कालोनी निवासी अपने दोस्त दीपक के साथ बिना कुछ बताए कहीं चली गई थी. उन दिनों गणपति उत्सव चल रहा था. वह 7-8 दिन बाद वापस घर लौट आई थी. इस बार भी सोचा था कि उसी के साथ कहीं चली गई होगी. मगर उस का मोबाइल बंद होने के कारण उन्हें शंका हुई.

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रामलाल ने शक जताया कि इंद्रा की हत्या दीपक ने ही की होगी. रामलाल से पुलिस को पता चला कि इंद्रा के पास मोबाइल फोन रहता था जो लाश के पास नहीं मिला था. अब दीपक के मिलने पर ही मृतका के फोन के बारे में पता चल सकता था.

28 अक्तूबर को डा. बलदेव सिहाग, डा. अल्पना गुप्ता और डा. भूपेंद्र कुड़ी के 3 सदस्यीय मैडिकल बोर्ड ने इंद्रा के शव का पोस्टमार्टम किया. पोस्टमार्टम के बाद शव उस के परिजनों को सौंप दिया गया.

केस को सुलझाने के लिए सीओ राजेंद्र प्रसाद दिवाकर के नेतृत्व में एक पुलिस टीम  बनाई गई. टीम में थानाप्रभारी (मेड़ता) अमराराम बिश्नोई, थानाप्रभारी (कुचेरा) महावीर प्रसाद, हैडकांस्टेबल भंवराराम, कांस्टेबल हरदीन, सूखाराम, अकरम, अनीस, हरीश, साबिर खान और महिला कांस्टेबल लक्ष्मी को शामिल किया गया. दीपक की तलाश में पुलिस ने इधरउधर छापेमारी की. तब कहीं 5 दिन बाद पहली नवंबर, 2017 को दीपक उर्फ दीपू पुलिस के हत्थे चढ़ पाया.

पुलिस ने थाने ला कर जब उस से इंद्रा की हत्या के बारे में पूछा तो वह थोड़ी देर इधरउधर की बातें करता रहा लेकिन थोड़ी सख्ती के बाद उस ने इंद्रा की हत्या करने का जुर्म स्वीकार कर लिया.

पुलिस ने उसी रोज दीपक को मेड़ता सिटी कोर्ट में पेश कर के 5 दिन के रिमांड पर ले लिया और कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में इंद्रा मर्डर की जो कहानी प्रकाश में आई वह इस प्रकार निकली.

दीपक और इंद्रा एकदूजे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे. लेकिन उन के संबंधों में दरार तब आई जब इंद्रा को दीपक की शादी होने की जानकारी मिली. इंद्रा को दीपक की यह बात बहुत बुरी लगी कि उस ने शादी करने की बात उस से छिपाए क्यों रखी. इंद्रा को यह महसूस हुआ कि दीपक उसे छल रहा है. इसलिए उस ने दीपक से संबंध खत्म कर पति के पास जाने का फैसला कर लिया. यही बात उस ने दीपक को साफसाफ बता दी.

दीपक ने उसी रोज तय कर लिया था कि अगर इंद्रा ने ससुराल जाने का कार्यक्रम नहीं बदला तो वह उसे जान से मार डालेगा. इंद्रा को यह खबर नहीं थी कि दीपक उस की जान लेने पर आमादा है. जब 26 अक्तूबर को दीपक ने इंद्रा को फोन कर के बुलाया तो उसे पता नहीं था कि प्रेमी के रूप में उसे मौत बुला रही है.

उसे 27 अक्तूबर को ससुराल जाना था इसलिए सोचा कि जाने से पहले एक बार दीपक से मिल ले. इसलिए उस के बुलावे पर वह उस से मिलने पहुंच गई. इंद्रा ने जब उसे बताया कि वह कल ससुराल जाएगी तो दीपक ने ससुराल जाने से उसे फिर मना किया. वह नहीं मानी तो वह उसे बहलाफुसला कर मोटरसाइकिल से सातलावास डिस्काम जीएसएस पर बने कमरे में ले गया.

ससुराल जाने के मुद्दे पर फिर इंद्रा से बहस हुई. दीपक को गुस्सा आ गया. उस ने पहले से बनाई योजनानुसार इंद्रा की चुन्नी उसी के गले में लपेट कर उस की हत्या कर दी. गला घोंटने से इंद्रा की आंखें बाहर निकल गईं और कुछ ही देर में उस की मौत हो गई.

इस के बाद उस की लाश को एक बोरे में डाला और बाइक पर रख कर उसे मेड़ता सिटी से बाहर जोधपुर रोड पर जय गुरुदेव कालोनी में सुनसान जगह पर ले गया.

इस के बाद अपनी मोटरसाइकिल से पैट्रोल निकाल कर रात के अंधेरे में लाश को आग लगा दी. उस ने सोचा कि अब शव की शिनाख्त नहीं हो पाएगी और वह बच जाएगा. लेकिन आधार मशीन पर मृतका के अंगूठे का निशान लेते ही लाश की शिनाख्त हो गई और फिर पुलिस दीपक तक पहुंच गई.

पुलिस ने दीपक की निशानदेही पर उस की बाइक भी जब्त कर ली, जो इंद्रा की लाश ठिकाने लगाने में प्रयुक्त की गई थी. पूछताछ पूरी होने पर दीपक उर्फ दीपू को 5 नवंबर, 2017 को पुन: कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. मामले की जांच थानाप्रभारी अमराराम बिश्नोई कर रहे थे. कथा लिखे जाने तक दीपक की जमानत नहीं हुई थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

ये हैं दुनिया की बेहतरीन जासूसी एजेंसियां

हम ने कई फिल्मों में रा और आईएसआई के एजेंटों के बारे में देखा है. टीवी पर भी इस से संबंधित कई सीरियल आए हैं.

जैसे अनिल कपूर का मशहूर शो ‘24’ भी काफी लोकप्रिय हुआ था. इस में अनिल कपूर ने एक रा एजेंट की भूमिका निभाई थी. आज के किशोर आधुनिक तकनीकी के साथ हर चीज से अपडेट रहना चाहते हैं तो क्यों न उन्हें दुनिया की खासखास और बेहतरीन खुफिया एजेंसियों के बारे में जानकारी दी जाए.

किसी भी देश में सुरक्षा और चौकसी बनाए रखने के लिए कई तरह की सेनाओं, एजेंसियों और अन्य माध्यमों का प्रयोग किया जाता है. इन में से एक महत्त्वपूर्ण कार्य है जासूसी करना. यह काम सरकारी जासूसी एजेंसी से कराया जाता है. खुफिया एजेंसियों का काम दूसरे देशों और संगठनों में सेंध लगा कर उन की जानकारी अपने देश के लिए निकालना होता है.

यही कारण है कि हर देश अपनी सुरक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए खुफिया एजेंसियों पर निर्भर रहता है. वह खुफिया जानकारी ही होती है, जो किसी भी वारदात को अंजाम तक पहुंचने से पहले रोक सकती हैं.

दूसरे देशों की खुफिया एजेंसियों के असर को काटने के लिए अपनी खुफिया एजेंसी को ज्यादा कारगर बनाना जरूरी होता है. इन एजेंसियों में काम करने वाले लोग और इन के तरीके आम लोगों को पता नहीं होते. इन का सार्वजनिक रूप से कभी खुलासा भी नहीं किया जाता. इन के काम का भी कोई सेट फार्मूला नहीं होता है. यहां कुछ खुफिया एजेंसियों के बारे में बताया जा रहा है, जिन के काम करने की शैली आम लोगों के लिए हमेशा राज ही रहती है.

रा (रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग, भारत)

खुफिया एजेंसी किसी भी देश की सुरक्षा में अपना अलग महत्त्व रखती है. रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग (रा) का गठन 1962 के भारतचीन युद्ध और 1965 के भारतपाक युद्ध के बाद तब किया गया, जब इंदिरा गांधी सरकार ने भारत की सुरक्षा की जरूरत को महसूस किया. इस की स्थापना सन 1968 में की गई थी. इसे दुनिया की ताकतवर खुफिया एजेंसी माना जाता है.

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इस पर खासतौर से विदेशी धरती से भारत के खिलाफ रची जाने वाली साजिशों, योजनाओं का पता लगाने, अपराधियों और आतंकवादियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने और उस के हिसाब से देश के नीति निर्माताओं को जानकारी मुहैया कराने की जिम्मेदारी है, ताकि देश और यहां के लोगों की सुरक्षा संबंधी नीतियों को बेहतर बनाया जा सके.

इस का मुख्यालय दिल्ली में स्थित है. यह एजेंसी भारत के प्रधानमंत्री के अलावा किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है. यह विदेशी मामलों, अपराधियों, आतंकियों के बारे में पूरी जानकारी रखती है. रा अपने खुफिया औपरेशंस के लिए जानी जाती है. इस ने अपनी कार्यकुशलता के जरिए कई बडे़ आतंकी हमलों को नाकाम किया है.

इस के सभी मिशन इतने सीक्रेट होते हैं कि किसी को कानोंकान खबर तक नहीं होती. यहां तक कि एजेंसी में काम करने वालों के परिजनों तक को पता नहीं होता कि वह किस मिशन पर काम कर रहा है. यह एजेंसी इतनी खुफिया है कि किसी भी अखबार को इस के बारे में छापने की अनुमति नहीं है.

आईएसआई (इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस, पाकिस्तान)

यह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी है जो आतंकवाद और उपद्रव को बढ़ाने के लिए भी बदनाम रही है. आईएसआई की स्थापना सन 1948 में की गई थी. 1950 में पूरे पाकिस्तान की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा का जिम्मा आईएसआई को सौंप दिया गया था.

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इस में सेना के तीनों अंगों के अधिकारी मिल कर काम करते हैं. अमेरिका क्राइम रिपोर्ट के मुताबिक आईएसआई को सब से ताकतवर एजेंसी बताया गया था. हालांकि आईएसआई पर आए दिन आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं. भारत में हुए कई आतंकी हमलों में भी आईएसआई के एजेंटों की भूमिका उजागर हो चुकी है. इस का मुख्यालय इस्लामाबाद में है.

सीआईए (सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी, अमेरिका)

यह अमेरिका की बहुचर्चित खुफिया एजेंसी है. इस की स्थापना सन 1947 में तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी. सीआईए 4 भागों में बंटी हुई है. इस का मुख्यालय वर्जीनिया में है. सीआईए सीधे डायरेक्टर औफ नैशनल इंटेलिजेंस को रिपोर्ट करती है. 2013 में वाशिंगटन पोस्ट ने सीआईए को सब से ज्यादा बजट वाली खुफिया एजेंसी बताया था. साइबर क्राइम, आतंकवाद रोकने समेत सीआईए देश की सुरक्षा के लिए काम करती है. कहा जाता है कि अमेरिका को सुपर पावर का दरजा सीआईए के खुफिया कार्यक्रमों की वजह से ही मिल पाया है.

वैसे भारत में ही नहीं, दुनिया के कई देशों में सीआईए की गतिविधियों को ले कर सदैव प्रश्नचिह्न लगते रहे हैं. हालांकि ओसामा बिन लादेन को मार गिराने में सीआईए की सफलता एक लंबे अरसे के बाद मिली ऐतिहासिक विजय मानी गई थी. सीआईए के पास दूसरे देशों से खुफिया जानकारी जुटाने के अलावा आतंकवाद, परमाणु हथियार और देश के बड़े नेताओं की सुरक्षा का भी जिम्मा है.

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मौजूदा समय में सीआईए के सामने आतंकवाद एक बड़ी चुनौती है. कहा जाता है कि सीआईए का बजट अरबों डौलर का होता है. इसे मिलने वाले पैसे की जानकाररी को वैसे तो गुप्त रखा जाता है पर माना जाता है कि 2017 में इस के लिए अमेरिकी सरकार ने 12.82 अरब डौलर का बजट दिया था.

एमआई-6 (मिलिट्री इंटेलिजेंस सेक्शन-6, ब्रिटेन)

जेम्स बौंड सीरीज की फिल्मों में बौंड के किरदार को इसी इंटेलिजेंस एजेंसी का सीक्रेट एजेंट बताया जाता है. अब आप समझ ही गए होंगे कि तकनीक और बहादुरी में इस का कोई मुकाबला नहीं है. इस की स्थापना सन 1909 में की गई थी. यह सब से पुरानी खुफिया एजेंसियों में से एक है. माना जाता है कि इस एजेंसी ने अपनी सेवाएं प्रथम विश्वयुद्ध में भी दी थीं और हिटलर को हराने में इस की मुख्य भूमिका थी.

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इस एजेंसी की खास बात यह भी है कि यह दूसरे देशों की खुफिया एजेंसियों को भी उन के मिशन में मदद करती है. इसे यूनाइटेड किंगडम की सुरक्षा का गुप्त मोर्चा भी कहा जाता है. एमआई-6 जौइंट इंटेलिजेंस, डिफेंस सरकार के साथ जानकारी साझा करने जैसे काम करती है.

एमएसएस (मिनिस्ट्री औफ स्टेट सिक्योरिटी, चीन)

यह चीन की एकलौती खुफिया एजेंसी है, जो आंतरिक और बाहरी दोनों मामलों पर नजर रखती है. इस का मुख्यालय बीजिंग में है. यह एजेंसी चीन को विश्व की गतिविधियों से अवगत कराती है. इस एजेंसी के जिम्मे काउंटर इंटेलिजेंस औपरेशंस और विदेशी खुफिया औपरेशंस को चलाना है. इस का गठन सन 1983 में हुआ था.

यह एजेंसी देश के आंतरिक मामलों में दखल बस कम्युनिस्ट पार्टी की लोकप्रियता बनाए रखने के लिए देती है. चीन जैसे कम्युनिस्ट देश में कई बार सूचनाओं पर भी प्रतिबंध लग जाते हैं.

वैसे भी यहां की कम्युनिस्ट सरकार को अगर कोई गुप्त सूचना या दुश्मन के बारे में जानना होता है तो वह एमएसएस को ही याद करती है. यह चीनी सरकार की सब से भरोसेमंद एजेंसी है. इस एजेंसी का एक ही मकसद है चीनी जनता की रक्षा और कम्युनिस्ट पार्टी का शासन बरकरार रखना.

पिछले 2 दशकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह तेजी से उभरी है. इस की खासियत यह है कि जितनी बारीकी से यह अपने देश के नागरिकों की हर गतिविधि का रिकौर्ड रखती है, उतना ही मजबूत तंत्र इस का विदेशों में भी है.

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चीन ने जिस तरह से आर्थिक क्षेत्र में पूरी दुनिया में अपना दबदबा बनाया है और उस से महाशक्ति अमेरिका तक परेशान है, ठीक इसी तरह उस की खुफिया एजेंसी भी काफी मजबूत हो गई है. उस के स्लीपर सेल आज दुनिया के कोनेकोने में फैले हुए हैं.

एएसआईएस (आस्ट्रेलियन सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस, आस्ट्रेलिया)

यह आस्ट्रेलिया की खुफिया एजेंसी है. पिछले 2 दशकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह तेजी से उभरी है. इस का मुख्यालय कैनबरा में है. इस का सहयोग व्यापार और विदेशी मामलों में भी लिया जाता है. 13 मई, 1952 को इस जांच एजेंसी का गठन किया गया था. इस की इंटेलिजेंसी काफी कुशल है जो अब तक इसे अंतरराष्ट्रीय खतरों से बचाए हुए है. इस का कार्यक्षेत्र एशिया और प्रशांत महासागर के क्षेत्र हैं.

यह खुफिया एजेंसी आस्ट्रेलियाई सरकार की एक तरह से वाचडौग है और यह चौबीसों घंटे देश की सेवा में लगी रहती है. पिछले कुछ सालों में इस ने कई घरेलू और बाहरी अपराधियों को गिरफ्तार करवाया है.

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मोसाद (इजराइल)

यह खुफिया एजेंसी दुनिया की सब से बेहतरीन खुफिया एजेंसी मानी जाती है. इस एजेंसी का अरब के देशों में काफी दबदबा है. इस की स्थापना सन 1949 में की गई थी. इस के बारे में खास बात यह है कि ये अपना काम बहुत ही क्रूरता के साथ करती है.

अगर इजराइल या फिर उस के नागरिकों के खिलाफ कोई साजिश रची जा रही हो तो जानकारी मिलने पर मोसाद के खूंखार एजेंट ऐसे साजिशकर्ताओं को दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढ कर मौत के घाट उतार देते हैं.

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यह दुनिया की सब से खतरनाक खुफिया एजेंसी है. कहा जाता है कि इस का कोई भी औपरेशन आज तक फेल नहीं हुआ. मोसाद मुख्यत: आतंक विरोधी औपरेशंस को अंजाम देती है और सीक्रेट औपरेशंस चलाती है, जिस का उद्देश्य देश की रक्षा करना होता है. वैसे तो मोसाद काम इजराइल में अन्य एजेंसियों के साथ मिल कर करती है, लेकिन उस की जवाबदेही केवल प्रधानमंत्री को ही है.

डीजीएसई (डायरेक्टोरेट जनरल फौर एक्सटर्नल सिक्योरिटी, फ्रांस)

इस एजेंसी को सन 1982 में बनाया गया था, जिस का मकसद फ्रांस सरकार के लिए विदेशों से खुफिया जानकारी एकत्र करना है. इस का मुख्यालय पेरिस में है. यह एजेंसी अन्य देशों की खुफिया एजेंसी से काफी अलग है. डीजीएसई सिर्फ देश के बाहरी मामलों पर नजर रखती है. इस का मुख्य काम सरकार को आईएसआई की गतिविधियों से आगाह कराना है.

यह लोकल पुलिस के साथ मिल कर भी काम करती है. इस एजेंसी के द्वारा सेना और पुलिस को रणनीति बनाने में बहुत सहयोग दिया जाता है. कुछ देशों की तरह यह एजेंसी भले ही शक्तिशाली न हो लेकिन 9/11 के बाद इस ने 15 आतंकवादी घटनाएं होने से बचाई है. संसाधनों की कमी के बावजूद इस के हजारों जासूस दुनिया भर में फैले हुए हैं.

बीएनडी (फेडरल इंटेलिजेंस सर्विस, जर्मनी)

जर्मनी की बीएनडी को बेहतरीन और आधुनिक तकनीकों से लैस खुफिया एजेंसी माना जाता है. इस का मुख्यालय म्यूनिख के पास पुलाच में है. इस एजेंसी की खास बात यह है कि यह दुनिया भर की फोन काल्स पर खास नजर रहती है. इस एजेंसी के बारे में बहुत कम लोगों को ही पता है.

इस की निगरानी प्रणाली इतनी शानदार है कि शायद ही कोई इंटेलिजेंस एजेंसी इसे मात दे पाए. खतरे को पहले ही भांप कर यह उसे खत्म कर देती है. इस का गठन सन 1956 में हुआ था. बीएनडी योजनाबद्ध अपराध, प्रौद्योगिकी के अवैध हस्तांतरण, हथियारों और नशीली दवाओं की तस्करी, मनी लांड्रिंग और गैरकानूनी ढंग से देश से आनेजाने वालों का भी मूल्यांकन करती है.

समय के साथसाथ इस एजेंसी ने अपने कदम काफी आगे बढ़ा लिए हैं, इस एजेंसी की सब से बड़ी ताकत इस के जासूस होते हैं. अपने जासूसों के बल पर ही यह एजेंसी जान पाती है कि दुनिया में क्या चल रहा है. कहते हैं कि मौजूदा समय में बीएनडी के पास लगभग 4 हजार जासूसों का नेटवर्क है.

देश की सुरक्षा से संबंधित इस एजेंसी के पास बहुत से अधिकार भी हैं जैसे कि सुरक्षा की बात हो तो यह कभी भी किसी का भी फोन टेप कर सकती है. किसी की निजी जानकारी लेने पर भी वह किसी भी प्रकार की बाधा में नहीं फंसते हैं.

एफएसबी (फेडरल सिक्योरिटी सर्विस, रूस)

1995 में स्थापित एफएसबी खुफिया एजेंसी का लोहा पूरी दुनिया मानती है. इस का मुख्यालय मौस्को में है. माना जाता है कि सूचना देने और सुरक्षा पहुंचाने में एफएसबी का कोई जवाब नहीं है. खुफिया से जुड़े मामलों के अलावा एफएसबी बौर्डर से जुड़े मामलों पर भी गहरी नजर रखती है. यह गंभीर अपराधों और संघीय कानूनों के उल्लंघन की जांच भी करती है. ऐसा रूस के शीर्ष सुरक्षा बलों का मानना है.

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यूं तो पिछले कई सालों तक जब सोवियत संघ का पतन नहीं हुआ था, तब रूस में खुफिया एजेंसी केजीबी का दबदबा था और राष्ट्रपति पुतिन उस के चीफ रह चुके हैं. लेकिन एफएसबी ने पिछले कुछ सालों से आतंकवाद के खात्मे के लिए जो कार्यक्रम चलाए हैं, उस से यह रूस की नंबर एक खुफिया एजेंसी बन गई है.

इस एजेंसी ने ही रूस को एक बार फिर सुपरपावर देशों के लिए एक बड़ी चुनौती बना दिया है वरना केजीबी के बंद होने के बाद रूस की परेशानी बढ़ गई थी. देश के बाहर ही नहीं, बल्कि देश में आतंकवाद की संभावित घटनाओं को रोकने के लिए यह मशहूर है.

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