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लालू के लालों में छिड़ी जंग की क्या है असल वजह

तारीख 11 जून. समय दिन के साढ़े 11 बजे. राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के छोटे लाड़ले तेजस्वी यादव के सरकारी बंगले 5, देशरत्न रोड में अच्छीखासी चहलपहल थी.

हाल में एक बड़ा सा केक रखा हुआ था. वजन में 7 पौंड का. लालू प्रसाद यादव का 71वां जन्मदिन मनाने के लिए यह सारा इंतजाम किया गया था. राजद के कार्यकर्ता ‘लालू यादव जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे. बीमार होने की वजह से लालू प्रसाद यादव इस गहमागहमी से दूर राबड़ी देवी के सरकारी बंगले 10, सर्कुलर रोड में आराम कर रहे थे.

राबड़ी देवी अपने दोनों बेटों को ले कर मुसकराते हुए केक के पास पहुंचीं. तीनों ने साथ मिल कर केक काटा. तेजप्रताप और तेजस्वी ने एकदूसरे को केक खिला कर यह जताने की पुरजोर कोशिश की कि उन के बीच कोई तनाव या विवाद नहीं है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे से नाराज चल रहे तेजप्रताप यादव को राबड़ी देवी ने इशारा किया कि वह उन्हें भी केक खिलाए.

तेजप्रताप ने रामचंद्र पूर्वे को केक खिला कर यह दिखाने की कवायद की कि लालू परिवार और राजद के भीतर कोई तल्खी नहीं है. लालू प्रसाद यादव के कुनबे में छिड़ी जंग के बीच उन के जन्मदिन के मौके पर राबड़ी देवी ने लोगों के बीच यह जताने की भी भरपूर कोशिश की कि तेजप्रताप साफ दिल का है और उस की नीयत खराब नहीं है.

तेजस्वी यादव ने सफाई देते हुए कहा कि तेजप्रताप उन के बड़े भाई हैं और उन के बीच कोई मतभेद हो

ही नहीं सकता है. उन्होंने दावा किया कि कोई कितनी भी तिकड़म लड़ा ले, लालू का परिवार और राजद टूट नहीं सकते हैं.

सब जानते हैं कि लालू प्रसाद यादव अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को अपनी राजनीतिक विरासत सौंप चुके हैं. इस से पार्टी पर उन की अच्छीखासी पकड़ है और सभी नेता उन की बातों को सुनते हैं. तेजप्रताप में इसी बात की कसक है. गौरतलब है कि 9 जून को तेजप्रताप यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने भाई तेजस्वी यादव और राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे के खिलाफ मोरचा खोलते हुए कहा था कि तेजस्वी को उन्होंने राजद का युवराज बनाया, लेकिन इस के बदले उन्हें केवल अपमान ही मिला.

वे इस कदर नाराज थे कि उन्होंने सबकुछ छोड़ कर संन्यास लेने तक का ऐलान कर डाला था. उन्होंने साफ लहजे में कहा था कि पार्टी में उन की कोई सुनता ही नहीं है. कई नेता पार्टी को डुबाने की साजिश में लगे हुए हैं. बेबाक तेजप्रताप ने राजद के भीतर उमड़घुमड़ रहे काले बादलों की ओर इशारा किया, लेकिन राजद के नेता उसे दूर करने के बजाय तेजप्रताप को चुप कराने की ही कवायद में लगे रहे.

अपना दर्द बयां करते हुए तेजप्रताप यादव ने कहा कि राजद के बड़े नेता उन का फोन तक नहीं उठाते हैं. वे यहीं तक नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा कि राजेंद्र प्रसाद नाम के एक मेहनती कार्यकर्ता को पार्टी में सम्मान देने के लिए रामचंद्र पूर्वे से कहा तो उन्होंने उन की बात ही नहीं सुनी. अपने भाई तेजस्वी से इस बारे में बात की तो भी कोई फायदा नहीं हुआ.

थकहार कर उन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव और मां राबड़ी देवी से बात की तो उन की सुनवाई हुई. तेजस्वी यादव ने बड़ी ही चालाकी के साथ तेजप्रताप यादव के गुस्से को विरोधियों की साजिश करार देते हुए कहा कि कुछ लोग लालू के बेटों के बीच दरार पैदा कराने में लगे हुए हैं.

ऐसे लोगों के मनसूबे कभी पूरे नहीं होने वाले हैं. तेजस्वी यादव ने कहा कि वे अपने भाई तेजप्रताप और पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ मिल कर 2019 के लोकसभा चुनाव और 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियों में मजबूती से लगे हुए हैं, जो विरोधियों को हजम नहीं हो रहा है.

तेजस्वी यादव समेत पूरा लालू परिवार तेजप्रताप यादव की बयानबाजी के बाद डैमेज कंट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन उन के विरोधियों की बांछें खिली हुई हैं. मौकेबेमौके शंख बजाने वाले तेजप्रताप यादव ने अपने घर में ही सत्ता के संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है. इस से अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों और राजग को तोड़ने की कोशिशों में लगे लालू और राजद को घर से ही बड़ा झटका मिला है. 12 मई को तेजप्रताप यादव की शादी राजद के ही एक नेता चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से हुई थी. ऐश्वर्या को भी इस विवाद से जोड़ कर देखा जा

रहा है. तेजप्रताप यादव ने भी कहा था कि जब पार्टी में अपनी अनदेखी के सवाल पर उन्होंने अपनी पत्नी से बात की तो उन्होंने कहा कि इस मसले पर उन्हें स्टैंड लेना चाहिए.

राजद सूत्रों की मानें तो पत्नी के बहकावे में आ कर तेजप्रताप यादव ने परिवार में ही हंगामा खड़ा कर दिया है. राजद के एक नेता दबी जबान में कहते हैं कि बहुत जल्दी तेजप्रताप को अंचरा (आंचल) की हवा लग गई है.

तेजप्रताप यादव आमतौर पर कम बोलते हैं पर जब बोलते हैं तो वे नफेनुकसान की नहीं सोचते हैं. सियासी दांवपेंच उन की समझ से परे हैं. वे बहुत जल्दी तैश में भी आ जाते हैं. पिछले साल 1 जनवरी के मौके पर उन्होंने अपने सिर पर पगड़ी बांधी थी और उस में मोर का पंख जड़ डाला था. उस के बाद गायों के साथ बांसुरी बजाने लगे थे. उस के बाद खुद को कृष्ण का वंशज बताया था.

सरस्वती पूजा के मौके पर वे हलवाई के साथ चूल्हे के पास जा बैठे थे और लगे जलेबियां छानने. जलेबी छानने के बाद उन्होंने स्कूली बच्चों को जलेबियां खिलाई थीं और खुद भी उन का लुत्फ उठाया था. पटना पुस्तक मेले में घूमने गए तो कुम्हार का चाक देख कर वे वहीं बैठ गए थे और चाक को घुमा कर मिट्टी के बरतन बनाने लगे थे.

हमेशा सुर्खियों में रहने वाले तेजप्रताप यादव साल 2016 में गौ हत्या पर रोक लगाने की मांग कर अपनी पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी कर चुके हैं. राज्य में मंत्री रहते हुए वृंदावन पहुंच कर उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार से अपील की थी कि नोटबंदी की तरह से गायों की हत्या पर भी रोक लगाई जाए.

उन्होंने यह भी कहा था कि बिहार में शराबबंदी के बाद गौ हत्या पर भी रोक लगानी चाहिए. उन की इस बयानबाजी से उन के पिता लालू प्रसाद यादव सकते में आ गए थे. गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव का बड़ा मुसलिम वोट बैंक है और तेजप्रताप ने गाय को मारने पर रोक लगाने की कह कर मुसलिमों को नाराज कर डाला था.

अकसर अपने माथे पर चंदन का टीका लगा कर घूमने वाले 30 साल के तेजप्रताप यादव राजद की टिकट और महुआ विधानसभा सीट से पहली बार 2015 में विधायक बने थे. बिहार में महागठबंधन की सरकार में उन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था. उस समय भी वे अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से खूब नाराज हुए थे.

कामसूत्र की तर्ज पर तैयार की गई है ये कार

आपने कई कार देखे होंगे. कुछ कारों में आपकी दिलचस्पी होगी तो कुछ में बिल्कुल भी नहीं. लेकिन जब आप गैरेज इटैलिया कस्टम्स की कामसूत्र की थीम पर आधारित कार को देखेंगे तब आपकी आंखें जरुर इस कार को ढूंढेंगी.

इस कार का नाम Fiat 500 Kar_masutra रखा गया है. जैसा कि नाम से ही मालूम होता है इस स्पेशल Fiat 500 को सेक्शुअल बिहेवियर पर वात्स्यायन द्वारा लिखे गए पौराणिक हिंदू ग्रंथ कामसूत्र के थीम पर तैयार किया गया है.

Garage Italia Customs, BMW i8 और i3 जैसे कारों को डिजाइन करने के लिए मशहूर है. कंपनी का कहना है कि वो आज की खास डिमांड के हिसाब से पारंपरिक इटैलियन बनावट को कला के रुप में अपने डिजाइन में उतारते हैं. हम मान सकते हैं कि कंपनी ने नए 500 मॉडल्स में यूनिकनेस की एक अलग परिभाषा गढ़ दी है.

कार के दो वर्जन तैयार

इस एडल्ट कार के दो वर्जन अब तक तैयार किए गए हैं, जिसमें से एक कामसूत्र के थीम पर आधारित हैं, जहां इसके एक्टिरियर में कपल्स अलग-अलग पोजिशन में नजर आ रहे हैं. वहीं दूसरे मॉडल को जापान के 19 वीं शताब्दी के शुंगा वूडब्लॉक के थीम पर बनाया गया है. जहां गुप्तांग नजर आ रहे हैं.

कार को दिया एडल्ट लुक

इस कार के बाहरी डिजाइन को जिस तरह एडल्ट लुक दिया गया है, वैसे ही इसके अंदरी बनावट को भी एडल्ट लुक दिया गया है. इसकी बनावट चटक लाल रंग में की गई है ताकी उस तरह का माहौल पैदा किया जा सके.

इसके अलावा डैशबोर्ड से लेकर केबिन और सीट तक को एडल्ट लुक में डिजाइन किया गया है. इसके बाद भी किसी को और भी ज्यादा प्राइवेसी चाहिए, तो वे लाल रंग के पर्दों से खिड़कियों को ढंक भी सकते हैं और एडल्ट ओन्ली वाला साइन ऑन भी कर सकते हैं.

चाहते हैं मकान बेचकर अच्छा पैसा कमाना तो करें ये उपाय

रियल एस्टेट मार्केट अब भी मंदी से वापस निकलने का रास्ता ढूंढ रहा है. इस तरह के मार्केट आउटलुक में एक मकान बेचने में काफी समय लग सकता है. एक मकान किसी के लिए भी एक सबसे बड़ा निवेश होता है और उसे बेचकर सही रिटर्न पाने के लिए उसका सही दाम निर्धारित करना जरूरी है. सही दाम पर अपना मकान बेचने के लिए इन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है.

मकान में बदलाव करें

अपने मकान के बारे में कोई विज्ञापन देने और उसे देखने के लिए ग्राहकों को बुलाने से पहले आपको मकान को साफ सुथरा कर लेना चाहिए, उसे अच्छी तरह पेंट कर लेना चाहिए और जरूरी मरम्मत करवा लेने चाहिए. आप अपने मकान को बेचने के लिए तैयार करने के लिए किसी प्रफेशनल की मदद भी ले सकते हैं. अच्छी तरह रखरखाव करके रखी गई संपत्ति को बेचना ज्यादा आसान होता है और धीमी गति से चलने वाले इस बाजार में अन्य प्रतिस्पर्धियों को मात देने में मदद मिलती है.

टैक्स को ध्यान में रखें

यदि आप दो साल के भीतर अपनी संपत्ति बेचते हैं तो ऐसे लेनदेन पर होने वाले लाभ को शौर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी) माना जाता है. दूसरी तरफ, किसी संपत्ति को दो साल रखने के बाद बेचने पर उससे होने वाले लाभ को लौन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) माना जाता है.

एक तरफ एसटीसीजी को आपकी टैक्सेबल आमदनी में जोड़ा जाता है और आपकी टैक्स सीमा के आधार पर टैक्स लिया जाता है, तो दूसरी तरफ एलटीसीजी पर इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20% टैक्स लिया जाता है.

आप टैक्स बचाने वाले उचित साधन में निवेश करके या निर्धारित समय सीमा के भीतर एक आवासीय संपत्ति खरीदकर, एलटीसीजी में दिए जाने वाले टैक्स को बचा सकते हैं. इसलिए, अपनी संपत्ति को अल्पकालिक अवधि में बेचने से बचें जब तक कोई इमरजेंसी न हो और एलटीसीजी पर लगने वाले टैक्स को बचाने के लिए आगे से ही पुनः निवेश के विकल्पों का पता लगाकर रखें.

उचित दाम रखें

आप जो दाम रखते हैं उससे काफी फर्क पड़ता है. कम दाम रखने पर आपको कम रिटर्न मिलेगा और ज्यादा दाम रखने पर ग्राहक दाम सुनकर भाग जाएंगे. इसलिए, कोई भी दाम रखने से पहले तरह-तरह के औनलाइन ऐसेट पोर्टलों में जाकर और आसपास के लोगों से पूछकर सही दाम का अंदाजा लगाने की कोशिश करें. अन्य संपत्तियों के साथ अपनी संपत्ति की तुलना करें और एक सही दाम रखने की कोशिश करें.

बेचने में ज्यादा समय न लगाएं

संपत्ति को बेचने का विज्ञापन देने के बाद उसे अक्सर किराए पर नहीं रखा जाता है. इसलिए, उसे बेचने में बहुत ज्यादा समय लगने पर संपत्ति के मालिक को उस दौरान मिल सकने वाले किराए की रकम से हाथ धोना पड़ता है. इस तरह के नुकसान से बचने के लिए संपत्ति को बेचने की एक समय सीमा निर्धारित करनी चाहिए.

इसके अलावा, समय-समय पर संपत्ति का दाम बदलते रहना चाहिए. किसी अन्य निवेश साधन की तरह एक संपत्ति को बेचने के लिए भी काफी खोजबीन और प्लानिंग करनी पड़ती है और संबंधित इलाके के आधार पर इसके बारे में खोजबीन करने के लिए अलग-अलग तरीके का इस्तेमाल करना पड़ता है.

फिल्में जिन्हें देख कर जवानी याद आ जाए

सिनेमा हमआप से उतना ही जुड़ा है जितना जीवन के और रंग, आप को इस का एहसास हो या न हो लेकिन जब प्यार खिलता है तो सारी दुनिया खूबसूरत नजर आती है. किशोरावस्था में हमें मुहब्बत और अचानक किसी के बहुत अच्छे लगने का एक अच्छा सा एहसास होने लगता है. इस एहसास की दुनिया में ही खो जाने का मन करता है. हम से कई गलतियां भी होती हैं, हमें प्यार की खुशी का भी पता चलता है, हमारा दिल टूटता है और किसी के नकारने का भी पता चलता है.

कुछ ऐसी फिल्में हैं जिन्हें देखने पर आप को किशोरावस्था की यादें ताजा हो जाएंगी, ऐसी यादें जो वक्त के साथ काम के बीच लगभग गायब हो गई थीं. राजकपूर की फिल्म ‘बौबी’ में अल्हड़ जोड़े की प्रेमकहानी जब भी परदे पर आती है तो उसे देख कर हम भी अपने अतीत की गहराइयों में गोते लगाने लगते हैं और जिंदगी के बीत गए पन्नों पर अपनी धुंधलाती प्रेमकहानी की तसवीर खोजने लगते हैं. अल्हड़ प्रेम का सजीव चित्रण हिंदी सिनेमा में कई बार किया गया है. हंसतेखिलखिलाते झरने की तरह हिंदी सिनेमा सामाजिक यथार्थ और मानवीय रिश्तों के आवेग, तपिश, त्रासदी और छिछोरापन सब को अपने में समेटे निरंतर आगे बढ़ता रहा है.

इस प्रबल सिनेमाई झरने ने जन्म दिया है कर्णप्रिय गीतसंगीत को, कालजयी कथाओं व पात्रों की प्रेम में डूबी कहानियों को जो आज के अंधेरे मल्टीप्लैक्स की डिजिटल स्क्रीन पर आ कर कभी आप को आप की जिंदगी के खुशनुमा 17वें साल में ले जाती हैं, कभी लोरियां सुनाती हैं और कभी डरातीहंसाती हैं.

प्रेम का बदलता रूप

पहले की सिनेमाई प्रेमकहानियों में पारिवारिक मूल्यों की प्राथमिकता होती थी ताकि सामान्य दर्शक उसे आसानी से पचा सकें. कुछ फिल्मों की प्रेमकहानियां इतनी लोकप्रिय हुईं कि वे आज भी लोगों के जेहन में बसी हुई हैं. ‘मोहब्बतें’, ‘दिल चाहता है’, ‘कयामत से कयामत तक’, ‘मैं ने प्यार किया’, ‘हम आप के हैं कौन’, ‘दिलवाले दुलहनिया ले जाएंगे’ ऐसी ही फिल्में हैं. इन्हें देख कर हमें अपनी जवानी का एहसास होता है.

‘मसान’ और ‘सरबजीत’ जैसी फिल्मों से अपने अभिनय की वाहवाही पा चुकीं रिचा चड्ढा का कहना है, ‘‘फिल्मों में प्रेमकहानियों का होना फिल्मों की जान जैसा है. पहले के दौर में प्रेम का प्रदर्शन सिर्फ आंखों की भाषा में होता था. आज फिल्मों में प्रेमप्रदर्शन के माने बदल गए हैं, पर अंदाज वही है.’’

संगीत की पवन में पनपता प्रेम

प्यार की पींगें बढ़ाने में प्रेम से भरे हुए कर्णप्रिय संगीत की अहम भूमिका होती है. श्वेतश्याम से ले कर डौल्बी डिजिटल साउंड वाली शायद ही कोई ऐसी फिल्म बौलीवुड में आई हो जिस में प्रेमभरे संगीत की औक्सीजन न हो. हमारी फिल्मों का किस्सा भी ऐसा है जहां बिना तरानों के कोई फिल्म पूरी नहीं होती.

अगर नायक, नायिका को छेड़ता है तो गा उठता है, ‘अरे लाल दुपट्टे वाली तेरा नाम तो बता…’, अगर नायिका के रूपशृंगार की तारीफ करनी हो तो धीमे स्वर में ‘चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो…’ गुनगुना उठता है. फिल्मों में संगीत का यह खुमार आज से 85 साल पहले बनी फिल्म ‘आलमआरा’ से शुरू हो गया था. तब से ले कर आज तक 8 दशकों के बीत जाने पर भी संगीत का सुरूर कम नहीं हुआ.

फिल्मों में बात अगर प्रेमकहानियों की की जाए तो रोमांटिक फिल्मों में संगीत हमेशा मधुर और ताजगीभरा रहा है. ‘मुझे कुछ कहना है’ (फिल्म बौबी) ‘हम बने तुम बने एक दूजे के लिए’, (फिल्म एकदूजे के लिए), ‘ऐ मेरे हमसफर’ (फिल्म कयामत से कयामत तक) ऐसे गीत हैं जिन्हें सुन कर आज भी हमारा दिल धड़कने लगता है.‘काला चश्मा जंचता है…’ जैसे हिट गीत देने वाली सिंगर नेहा कक्कड़ का कहना है, ‘‘बिना प्रेमगीतों के तो बौलीवुड फिल्मों की कल्पना ही नहीं की जा सकती है. गाने दर्शकों को खुद से जोड़ते हैं.’’

फिल्मों के शोमैन कहे जाने वाले राजकपूर की सभी फिल्मों में प्रेम में पगे हुए संगीत की मिठास हमेशा रहती थी. उन्हें संगीत की बहुत अच्छी समझ थी.

फिल्मों में टीनऐज रोमांस

रुपहले परदे पर टीनऐज रोमांस की शुरुआत तो बहुत पहले हो गई थी पर राजकपूर ने अपनी फिल्मों से इसे अच्छी तरह भुनाया. उन की फिल्मों में उन का नेहरू विचारधारा से प्रभावित होना साफ नजर आता था. अपनी अधिकांश फिल्मों के हीरो राजकपूर खुद रहते थे. ‘आग’, ‘श्री 420’, ‘आवारा’, ऐसी ही फिल्में थीं जो नरगिस के साथ उन्होंने कीं.

‘मेरा नाम जोकर’ उन की सर्वाधिक महत्त्वाकांक्षी फिल्म थी जोकि वर्ष 1970 में प्रदर्शित हुई और जिस के निर्माण में 6 वर्षों से भी अधिक समय लगा. ‘मेरा नाम जोकर’ बौक्स औफिस पर हिट फिल्म साबित नहीं हुई जिस से वे काफी मायूस हो गए थे. इस फिल्म को बनाने में उन्होंने काफी ज्यादा पैसा खर्च कर दिया था, जिस से आर के स्टूडियो घाटे में चला गया था. काफी दिनों तक फिल्म निर्माण से दूर रहने के बाद उन्होंने किशोरावस्था रोमांस के सहारे एक फिल्म बनाने की सोची. उस समय की मशहूर कौमिक आर्ची को देख कर उन्होंने अल्हड़ हीरोइन और किशोर हीरो की कल्पना की. जिस के लिए अपने बेटे ऋषि कपूर और डिंपल कपाडि़या को चुना. राजकपूर का यह फार्मूला काम कर गया और फिल्म ‘बौबी’ ने जबरदस्त कामयाबी हासिल की.

दिल सोलह साला बन जाए

फिल्मी दुनिया के पिटारे में ऐसी कई फिल्में पड़ी हैं जो अनमोल मोती के समान हैं. हर साल अपने साथ कामयाबी के उतारचढ़ाव ले कर आती हैं, जैसे इस बार ‘नीरजा’ से शुरू हुआ सफर आमिर खान की ‘दंगल’ पर जा कर खत्म हुआ. कुछ कामयाब फिल्में ऐसी हैं जिन्हें देख कर आज भी दिल झूम उठता है. बौलीवुड में कालेज और स्कूल की दोस्ती व रोमांस पर भी कई फिल्में बनी हैं. जिन्हें देख कर हमें अपने कालेज की कैंटीन और क्लास में पनपा पहला क्रश याद आ जाता है.

‘जो जीता वही सिकंदर’ स्कूल रोमांस पर बनी इस फिल्म ने आमिर खान को कई लड़कियों के दिलों की धड़कन बना दिया था. इस फिल्म का गाना ‘पहला नशा पहला खुमार…’ आज भी पहले क्रश की याद दिलाता है ‘मोहब्बतें’ फिल्म बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने वाले 3 युवा लड़कों की प्रेमकहानी के बीच शाहरुख जैसे लवगुरु की प्रेमशिक्षा और रोबदार प्रिंसिपल की कैमिस्ट्री पर बनी. इस फिल्म के संवाद बहुत लोकप्रिय हुए थे. इन सब के अलावा ‘स्टूडैंट औफ द ईयर’,‘गिप्पी’, ‘तेरे संग’, ‘उड़ान’, ‘कुछकुछ होता है’, ‘3 इडियट’, ‘मैं हूं न’, ‘फुकरे’, ‘जाने तू या जाने न’, ‘2 स्टेट’ आदि कई फिल्में हैं जिन में स्कूल, कालेज की गलियों, क्लास, कैंटीन में पनपते प्रेम को दर्शाया गया है.

अफसाना एक दीपा का : भाग 2

दीपा के 2 छोटे भाई भी घर में थे. लड़की मांबाप की इज्जत समझी जाती है. इस से पहले कि बेटी की वजह से मांबाप की इज्जत पर कोई आंच आए, मांबाप उस की शादी के लिए लड़का ढूंढने लगे.

अभी दीपा की उम्र महज 14 साल थी. मांबाप ने उस की शादी के लिए देवास जिले के गांव जलालखेड़ी में एक लड़का देख लिया, जिस का नाम राकेश वर्मा था. बात पक्की हो जाने पर उन्होंने राकेश वर्मा से दीपा की शादी कर दी. वह दीपा से 5 साल बड़ा था.

शादी के बाद राकेश की रातें गुलजार हो उठीं. वह दिनरात पत्नी के खिलते यौवन में डूबा रहता था. आमतौर पर भले ही शादी कम उम्र में हो जाए, फिर भी युवक जिम्मेदारी उठानी सीख जाते हैं. लेकिन राकेश के साथ उलटा हुआ. वह दिनरात बिस्तर पर पड़ा दीपा के जिस्म से खेला करता था.

शुरूशुरू में तो राकेश के घर वालों ने यह सोच कर कुछ नहीं कहा कि अभी बच्चा है, जब घरगृहस्थी के माने समझने लगेगा तो रास्ते पर आ जाएगा. लेकिन जब 5-6 साल गुजर गए और राकेश ने खुद कमानेखाने की कोई पहल नहीं की तो घर वाले उसे टोकने लगे.

सुधरने के बजाय राकेश और बिगड़ता चला गया और जल्द ही उसे शराब की लत लग गई. वह रोज शराब पीने लगा था. घर वालों ने उसे घर से तो नहीं निकाला लेकिन घर में ही रखते हुए उस का बहिष्कार सा कर दिया.

चारों तरफ से हैरानपरेशान राकेश अपनी नाकामी और निकम्मेपन की खीझ दीपा पर उतारने लगा. दीपा के जिस संगमरमरी जिस्म को सहलातेचूमते वह कभी थकता नहीं था, उस पर अब राकेश की पिटाई के निशान बनने लगे. दीपा भी कम हैरानपरेशान नहीं थी, पर उस के पास रोज की इस मारपिटाई से बचने का एक ही रास्ता था मायका, क्योंकि राकेश अब उस पर चरित्रहीनता का आरोप भी लगाने लगा था.

10 साल यानी 24 साल की उम्र तक दीपा पति के पास रही, फिर एक दिन अपने मायके आ गई. जिस से दीपा के मांबाप के सिर पर बोझ और बढ़ गया था. लेकिन थोड़ा सुकून उन्हें उस वक्त मिला, जब दीपा ने फ्रीगंज में साड़ी पर फाल लगाने और पीको करने की दुकान खोल ली.

दुकान चल निकली तो दीपा खुद के खर्चे उठाने लगी. पर जैसे ही लोगों को यह पता चला कि वह पति को छोड़ कर मायके में रह रही है तो फिर उस के दीवाने दुकान और घर के आसपास मंडराने लगे.

दिलीप बन गया पार्टटाइम पति

शुरुआत में उस ने कोशिश की कि वह किसी के चक्कर में न पड़े, लेकिन शरीर की मांग के आगे वह बेबस थी. कई लोगों ने प्रत्यक्षअप्रत्यक्ष तरीके से उसे प्रपोज किया, लेकिन अब तक दीपा काफी सयानी और समझदार हो चुकी थी.

दीपा को एक ऐसे पुरुष की जरूरत थी, जो शारीरिक के साथसाथ भावनात्मक और आर्थिक सहारा और सुरक्षा भी दे सके. आसपास मंडराते लोगों को देख वह समझ जाती थी कि उन का मकसद क्या है.

इसी ऊहापोह में उलझी दीपा की मुलाकात एक दिन दिलीप शर्मा से हुई तो वह उसे हर तरह उपयुक्त लगा. शादीशुदा दिलीप दीपा की खूबसूरती और अदाओं पर मर मिटा था. उस की पत्नी गांव में रहती थी, इसलिए उज्जैन में किसी महिला से मिलनेजुलने पर उसे कोई अड़ंगा या पाबंदी नहीं थी.

दोनों की मेलमुलाकातें बड़े सधे ढंग से आगे बढ़ीं. दोनों ने एकदूसरे की जरूरतों को समझा और दोनों के बीच मौखिक अनुबंध यह हुआ कि दिलीप दीपा का पूरा खर्च उठाएगा, उसे अलग घर दिलाएगा और ज्यादा से ज्यादा वक्त भी देगा. एवज में दीपा उस के लिए हर तरह से समर्पित रहेगी.

दिलीप ने दीपा को किराए के मकान में शिफ्ट करा कर घरगृहस्थी का सारा सामान जुटा दिया और पार्टटाइम पति की हैसियत से रहने भी लगा. दिलीप के पास पैसों की कमी नहीं थी. वह उन लोगों में से था, जो एक पत्नी गांव में और एक शहर में रखना अफोर्ड कर सकते हैं. दीपा के साथ दूसरा फायदा उसे यह था कि उस से उस की पारिवारिक और सामाजिक जिंदगी और प्रतिष्ठा पर कोई आंच नहीं आ रही थी.

लिवइन के ये 8 साल अच्छे से कटे, लेकिन जैसा कि आमतौर पर ऐसे मामलों में होता है, इन दोनों के साथ भी हुआ. दिलीप का दिल दीपा से भरने लगा तो उस ने उस के पास आनाजाना कम कर दिया. पर अपने इस वादे पर वह कायम रहा कि जिंदगी भर दीपा का खर्च उठाएगा.

दीपा समझ रही थी कि प्रेमी का मन उस से भर चला है लेकिन अभी पूरी तरह उचटा नहीं है. पर दिक्क्त यह थी कि 14 साल की उम्र से ही सैक्स की आदी हो जाने के कारण वह अकसर रोजाना ही सैक्स चाहती थी, जो दिलीप के लिए संभव नहीं था.

इसी साल जनवरी में दिलीप ने उसे माधवनगर इलाके के वल्लभनगर में किराए के मकान में शिफ्ट कर दिया. मकान मालिक लक्ष्मणदास पमनानी को उस ने यही बताया कि दीपा उस की पत्नी है और वह खेतीबाड़ी के सिलसिले में गांव जाता रहता है. पर पड़ोसियों का माथा उस वक्त ठनका, जब कई अंजान युवक दीपा के पास दिलीप की गैरमौजूदगी में आनेजाने लगे. आजकल बिना वजह कोई किसी के फटे में टांग नहीं अड़ाना चाहता, इसलिए लोगों ने दीपा से कहा कुछ नहीं, बस देखते रहते.

दिलीप को इस बात की भनक थी, इसलिए उस ने दीपा को समझाया कि वह फालतू लोगों का अपने यहां आनाजाना बंद करे. लेकिन दीपा नहीं मानी. दिलीप ने भी उस से कोई जबरदस्ती नहीं की. दिलीप को अब दीपा से ज्यादा अपनी इज्जत की चिंता होने लगी थी.

ये सारी बातें जब धर्मेंद्र को पता चलीं तो वह बहुत ज्यादा दिनों तक नहीं तिलमिलाया. दिलीप दीपा का पति नहीं है, यह जान कर उसे खुशी ही हुई. हैरतअंगेज तरीके से जल्द ही धर्मेंद्र और दिलीप में दोस्ती हो गई और दोनों दीपा के साथ बैठ कर दारूचिकन की दावत उड़ाने लगे.

अब दीपा 2 आशिकों की हो गई थी, जो उसे ले कर बजाय आपस में झगड़ने के उसे साझा कर रहे थे. पर वह यह नहीं समझ पा रही थी कि दोनों उस के शरीर और जवानी को भोग रहे हैं. दोनों में से कोई उसे प्यार नहीं करता. धर्मेंद्र और दिलीप को सहूलियत यह थी कि दीपा अब किसी एक पर भार नहीं थी.

 

दरोगा की कातिल पत्नी : भाग 3

उस के बाद कुछ देर बाद उस की बेटी आलिया और इरम बाहर आईं उन्होंने भी गली में इधरउधर देखा और वहां रुक कर मोबाइल देखती रहीं फिर वापस घर में भीतर चली गईं. इस के बाद मेहरबान अली की बड़ी बेटी शबा भी बाहर आई और कुछ देर रुक कर वह भी अंदर चली गई.

इस के बाद जाहिदा फिर एक बार दरवाजे पर आ कर लौट गई. फिर रात 10 बज कर 40 मिनट पर घर के बाहर 2 लोग जो सुबह घर के भीतर घुसे थे, वह एक बाइक पर मेहरबान अली को बीच में बैठा कर बाहर आते दिखाई दिए. घर से बाइक बाहर निकालने के लिए पीछे से जाहिदा और उस की 2 बेटियों को बाइक को धक्का लगाते देखा गया.

जाहिदा फिर गली में आई. उस ने देखा कि रोड पर कोई नहीं है तो रास्ता साफ होने का इशारा कर के बाइक को आगे ले जाने का उस ने इशारा किया.

इस के बाद 2 लोग बाइक को ले कर चले गए. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि इस दौरान मेहरबान अली का शरीर बेजान सा बीच में रखा था. सीसीटीवी फुटेज को देख कर ऐसा लग रहा था कि वह मेहरबान अली के मृत शरीर को मोटरसाइकिल पर ले जा रहे थे.

जाहिदा और बेटियां ही निकलीं कातिल

अब सब कुछ आईने की तरह साफ था. सीसीटीवी फुटेज कब्जे में ले कर थानाप्रभारी शर्मा एक बार फिर जाहिदा के घर पहुंचे. उन्होंने जब पूछा कि शनिवार की सुबह उन के यहां कौन 2 लोग आए थे तो कोई भी ठीकठाक उन के सवालों का जवाब नहीं दे सका. वह जानते थे कि कोई भी गुनहगार आसानी से अपना गुनाह नहीं कबूलता.

उन्होंने जाहिदा और उस की बेटियों को पुरुषोत्तम आहूजा के घर से बरामद की गई सीसीटीवी फुटेज दिखाई तो उन के पास बचने का कोई बहाना नहीं रहा. थोड़ी सी डांटफटकार के बाद ही जाहिदा ने कबूल कर लिया कि अपने पति मेहरबान अली की हत्या उस ने अपनी बेटियों के साथ साजिश रच कर भाडे़ के 2 हत्यारों से कराई थी. और उन की लाश को करीब 11 घंटे तक अपने कमरे में ही रखा. इस दौरान दोनों हत्यारे भी उन के साथ घर में मौजूद रहे. फिर मौका मिलने पर रात के अंधेरे में लाश फेंकी गई.

जाहिदा से पूछताछ के बाद थानाप्रभारी डी.के. शर्मा ने उसे व उस की चारों बेटियों जीनत, इरम, आलिया तथा शादीशुदा बेटी सबा को उन के घर से गिरफ्तार कर लिया. पांचों को थाने ला कर उन्होंने उच्चाधिकारियों को हत्याकांड का खुलासा करने की सूचना दे दी. इस के बाद एसपी सुभाषचंद्र शाक्य, एसपी (सिटी) दिनेश त्रिपाठी और सीओ(सदर) सुमित शुक्ला के समने मेहरबान अली हत्याकांड की साजिश बेनकाब हो गई.

जाहिदा के अपने बहनोई से थे अवैध संबंध

जाहिदा ने बताया कि उस के नाजायज संबंध मुजफ्फरनगर के गांव तावली में रहने वाले अपने बहनोई फारुख से थे. उस के संबंधों की जानकारी जब मेहरबान अली को हुई तो उस ने जाहिदा को समझानेबुझाने की कोशिश की लेकिन बाद में जब जाहिदा नहीं मानी तो मेहरबान अली उस के साथ मारपीट करने लगे इसलिए जाहिदा के मन में अपनी पति के लिए नफरत भर गई.

इतना सब तो ठीक था, लेकिन जाहिदा ने अपनी बेटियों को भी अपने रंग में ढालना शुरू कर दिया. मेहरबान अली धार्मिक प्रवृत्ति के थे उन्हें बेटियों का आधुनिक फैशन करना और बेपर्दा हो कर घर से निकलना पसंद नहीं था. वह उन के आधुनिक फैशन पर रोकटोक लगाते थे. इसलिए उन की बेटियां भी उन के से तंग थीं. वे भी अपनी मां की तरह चाहने लगीं कि ऐसे पिता उन की जिंदगी में न रहे.

आए दिन मेहरबान अली की टोकाटाकी और अपने बहनोई से मेलजोल में बाधा बनने की वजह से जाहिदा ने करीब 6 महीने पहले अपने पति मेहरबान अली की हत्या कराने की साजिश रचनी शुरू कर दी.

वह इस बात की कोशिश कर रही थी कि किसी तरह पति रास्ते से हट जाएगा तो उन की जगह अनुकंपा के आधार पर बेटी जीनत को नौकरी पर लगवा दिया जाएगा. इस से उस का रास्ता भी साफ हो जाएगा और परिवार की गुजरबसर भी होती रहेगी.

पति की हत्या कराने के लिए जाहिदा ने 6 महीने पहले अपने बहनोई फारुख के गांव के रहने वाले तहसीन तथा कासिम से बात की. वे दोनों फारुख के दूर के रिश्तेदार भी थे.

जाहिदा ने उन से एक लाख रुपए में सौदा तय कर लिया. इस के लिए वह सही मौके का इंतजार करने लगी. जिस के लिए वह अकसर उन दोनों से फोन पर बात करती रहती. इधर जीनत से एकतरफा प्यार करने के कारण अरशद ने जब सना की हत्या कर दी तो मेहरबान अली ने पत्नी और बेटियों पर ज्यादा सख्ती करनी शुरू कर दी.

भाड़े के हत्यारों से कराया था कत्ल

जाहिदा को लगा कि इस काम को अब जल्द अंजाम देना होगा. सना की भले ही हत्या हो चुकी थी लेकिन वह जानती थी कि मेहरबान अली की मौत हो जाएगी तो जीनत को ये नौकरी मिल जाएगी. लिहाजा इस के लिए 23 जून, 2018 जाहिदा ने तहसीन और कासिम को फोन कर के मुजफ्फरनगर से शाहजहांपुर बुला लिया.

क्योंकि उस दिन सुबह उस का दामाद अनीस शहर से बाहर जाने वाला था और उस के न होने पर बारदात को अंजाम देना आसान था. जाहिदा के बुलाने पर तहसीन और कासिम शाहजहांपुर आ गए. और सुबह करीब साढ़े 10 बजे घर में पहुंचे.

उस वक्त मेहरबान अली खाना खा कर रात की ड्यूटी से थका होने के कारण बिस्तर पर जा लेटे थे और जल्द ही गहरी नींद में सो गए. तहसीन और कासिम ने गहरी नींद में सोए हुए मेहरबान अली का गला दबा दिया.

बचने की कोई गुंजाइश न रहे, इसलिए उन्होंने उन के सिर को कई बार दीवार से दे कर मारा. जिस से उन के सिर में चोट आई. इस के बाद रात को उन्होंने करीब साढ़े 10 बजे मेहरबान अली की बाइक पर ही डैडबौडी को बीच में बैठाने की स्थिति में रखा और लाश 400 मीटर दूर नाले में ले जा कर डाल दी. लेकिन इस से पहले उन्होंने मेहरबान अली के शरीर पर वही कपड़े पहना दिए जिन्हें पहन कर वह ड्यूटी जाते थे.

हाथ में घड़ी और जेब पर्स डाल कर ऐसा बना दिया ताकि लगे कि वह वाकई अपनी ड्यूटी पर गया हो. जाहिदा ने अपने पति के वेतन में से 50 हजार रुपए भाडे़ के कातिलों को एडवांस के रूप में दे दिए. 5 जून, 2018 को ही मेहरबान अली अपनी सैलरी 68 हजार 500 रुपए निकाल कर घर लाए थे. वह पैसे उस ने जाहिदा को दिए थे.

जाहिदा ने उसी रकम में से 50 हजार रुपए हत्यारों को दिए थे. शेष रकम उस ने जल्द ही देने का आश्वासन दिया था और उन से यह भी कह दिया था कि वह उस से संपर्क न करें. काम निपटाने के बाद रात को ही अपने घर चले गए थे.

दरोगा की पत्नी और बेटियां हुईं गिरफ्ता

जाहिदा ने अपने नाजायज रिश्तों को बनाए रखने के लिए पति मेहरबान अली को रास्ते से हटाने की साजिश तो पुख्ता रची थी लेकिन वह यह बात शायद नहीं जानती थी कि अपराध चाहे कितनी भी चालाकी से क्यों न किया जाए, एक न एक दिन वह खुल ही जाता है.

कहते हैं कि कातिल कितना भी चालाक हो वह कोई चूक कर ही जाता है.

जरूरी पूछताछ के बाद थानाप्रभारी ने जाहिदा और उस की चारों बेटियों को अदालत में पेश किया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उन के जेल भेजने के बाद थानाप्रभारी डी.सी. शर्मा को आशंका थी कि हत्याकांड का खुलासा होने के बाद कहीं भाड़े के हत्यारे पुलिस के चंगुल से दूर न हो जाएं इसलिए शाहजहांपुर एसपी सुभाषचंद्र शाक्य ने एसएसपी मुजफ्फरनगर अनंत देव को वारदात की जानकारी देते हुए तावली गांव में रहने वाले दोनों आरोपियों तहसीन और कासिम को तुरंत गिरफ्तार कराने का अनुरोध किया.

तावली गांव शाहपुर थानाक्षेत्र में आता था. पता चला कि तहसीन और कासिम इलाके के शातिर बदमाश हैं. उन के ऊपर जिला पुलिस ने 5-5 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित किया हुआ था.

एसएसपी मुजफ्फरनगर अनंत देव के निर्देश पर शाहपुर के थानाप्रभारी कुशलपाल ने उक्त दोनों बदमाशों के घर दबिश दी लेकिन वह घर पर नहीं मिले. इस के बाद मुखबिर की सूचना पर उन दोनों को एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में कासिम और तहसीन ने बताया कि दोनों ने जाहिदा के कहने पर दरोगा मेहरबान अली की हत्या कर उन का शव नाले में डाला था. शाहजहांपुर पुलिस को जब उन के गिरफ्तार होने की जानकारी मिली तो उस ने मुजफ्फनगर पहुंच कर कोर्ट के द्वारा उन्हें हिरासत में ले लिया. बाद में वह उन्हें शाहजहांपुर ले आई. पुलिस ने रिमांड पर ले कर उन से विस्तार से पूछताछ की फिर कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

घर बैठे जानें अपने EPF का बैलेंस

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) कर्मचारी के बचत का एक अभिन्न अंग है. ईपीएफ में आपके मूल वेतन (बेसिक सैलरी) का 12 फीसदी योगदान हर महीने होता है. इसलिए, सलाह दी जाती है कि इस बचत पर ध्यान रखें. EPF बैलेंस अब किसी भी समय और कहीं से भी देखा जा सकता है. इसकेलिए किसी को भी किसी भी तरह के कागजात जमा करने या सरकारी कार्यालय में जाने की जरूरत नहीं है. वे दिन गए जब आपको अपने एम्प्लायर द्वारा EPF बैलेंस की जानने के लिए साल के अंत में भविष्य निधि विवरण साझा करने तक इंतजार करना होता था. आप अपने मोबाइल फोन के जरिए ही घर बैठे ईपीएफ का बैलेंस जान सकते हैं.

EPF Balance जानने के लिए आपको सिर्फ आधार कार्ड के जरिए सक्रिय यूएएन और वेरिफिकेशन की जरूरत है. आइए जानते हैं मोबाइल से ईपीएफ बैलेंस जानने के  तरीके.

मिस्ड कौल के जरिए

मिस्ड कौल के जरिए EPF Balance जानना सबसे आसान तरीकों में से है. इसके लिए आपका मोबाइल नंबर UAN से रजिस्टर्ड होना जरुरी है. आप अपने रजिस्टर्ड मोबाइल से 011-22901406 पर मिस्ड कौल देकर EPF Balance जान सकते हैं. मिस्ड कौल देने के बाद आपके रजिस्टर्ड नंबर पर EPF का एक मैसेज आएगा जिससे आपको EPF Balance का पता चलेगा. मैसेज में PF Number, नाम, जन्मतिथि, ईपीएफ बैलेंस के साथ आखिरी जमा राशि भी बताई जाती है.

SMS के जरिए

आप SMS के जरिए भी ईपीएफ बैलेंस जान सकते हैं. इसके लिए आपका मोबाइल नंबर UAN के साथ रजिस्टर्ड होना जरूरी है. आपको अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर मैसेज करना होगा. एसएमएस को EPFOHO UAN ENG लिख करके 7738299899 पर मैसेज करना होगा. ENG उन पहले तीन करैक्टर के बारे में बताता है जिस भाषा में आप जानकारी चाहते हैं. मैसेज की सुविधा इंग्लिश के साथ, हिंदी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, मलयालम और बंगाली भाषाओं में भी उपलब्ध है.

EPFO ऐप के जरिए

EPFO ऐप को डाउनलोड करें जिसे m-EPF कहा जाता है. ऐप के जरिए आप अपने स्मार्टफोन पर ईपीएफ बैलेंस जान सकते हैं. ऐप में “Member” पर क्लिक करें फिर “Balance/Passbook” अपर क्लिक करें. यहां आपको अपना बैलेंस जानने के लिए UAN नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर देना होगा.

बचाएं फोन को हैक होने से

ज्यादातर लोग स्मार्टफोन को बेफ्रिक अंदाज में इस्तेमाल करना चाहते हैं. उसपर कोई लौक ना हो तो बहुत बढ़िया. बस आसानी से खुल जाए. लेकिन ऐसा करना खतरनाक है. कई चोर और हैकर्स ऐसे ही डिवाइस की तलाश में रहते हैं, ताकि वे आम लोगों की आर्थिक और निजी जानकारियां चुरा सकें. उदाहरण के तौर पर, आपका ईमेल अकाउंट हैक हो जाने से बैंकिंग और अन्य संवेदनशील पासवर्ड लीक होने का खतरा बढ़ जाता है.

जिस तरह से मामूली साफ-सफाई से आप कई बीमारियों से बच सकते हैं. उसी तरह से इस डिजिटल युग में ‘साइबर हाइजीन’ की मदद से किसी बड़े खतरे को टाल सकते हैं.

अपने फोन को पासकोड से लौक करें

अब आप अपने घर का दरवाजा अपनी गैरमौजूदगी में खुला तो नहीं छोड़ते. फोन पर पासकोड नहीं इस्तेमाल करना भी कुछ वैसा ही है. चार डिजिट के पासकोड का इस्तेमाल और साथ में सेल्फ-डिस्ट्रक्ट फीचर को एक्टिवेट करना बेहद ही सुरक्षित तरीका है. सेल्फ डिस्ट्रक्ट फीचर में आपके फोन में बार-बार गलत पासकोड डालने से फोन का डेटा पूरी तरह से गायब हो जाएगा. 6 डिजिट का पासकोड इस्तेमाल करने का पर उसका अनुमान लगा पाना 100 गुना और मुश्किल हो जाता है. लेटर और कैरेक्टर का इस्तेमाल करके इसे और मुश्किल बनाया जा सकता है.

आईफोन के सेल्फ डिस्ट्रक्ट फीचर को यूजर सेटिंग्स में Touch ID & Passcode सेक्शन में जाकर एक्टिवेट कर सकते हैं. 10 बार गलत पासकोड डालने पर फोन अपने आप ही पूरे डेटा को हटा देगा. ध्यान रहे कि अगर आप पासकोड भूल जाते हैं या फिर आपका बच्चा भी खेलते वक्त गलती से नंबर पंच करता रहता है, तो भी डेटा डिलीट हो जाएगा. एंड्रायड में भी ऐसा फीचर है.

इनक्रिप्शन करें

आईफोन के साथ अच्छी बात यह है कि यह डिफॉल्ट में इनक्रिप्शन चलाता है. इसका मतलब है कि फोन पर स्टोर किए गए डेटा को निकाला नहीं जा सकता. या फिर उसे दूसरे कंप्यूटर पर पढ़ा नहीं जा सकता. जब तक फोन को अनब्लॉक नहीं किया जाए तब तक फोन से ली गई जानकारियां बिखरी हुईं हैं और पठनीय नहीं होती.

एंड्रायड में आपको यह सेटिंग्स में जाकर एक्टिवेट करना होगा. गूगल की पॉलिसी में इनक्रिप्शन उपलब्ध कराने का ज़िक्र है. लेकिन मार्केट में सिर्फ 2.3 एंड्रायड डिवाइस इस वर्ज़न में चल रहे हैं.

डिवाइस फाइंडर सेटअप करें

फाइंड माई आईफोन सिर्फ आपका फोन नहीं मिलने पर खोजने के लिए नहीं है.

अगर आपका डिवाइस किसी कारणवश गायब हो जाए, तो आपके काम आएगा लौस्ट मोड. ऐसा करने से आपके फोन का स्क्रीन पासकोड के साथ लौक हो जाएगा.

यह ऐप आईफोन के साथ आता है, लेकिन आपको इसे अपने फोन खोने से पहले सेटअप करना होगा. आप एक्स्ट्रा फोल्डर में फाइंड आईफोन ऐप को खोज सकते हैं. एक्टिवेशन लौक के कारण कोई चोर आपके फोन को बेच नहीं पाएगा. उसके लिए तो फोन इस्तेमाल करने योग्य भी नहीं रह जाता. ऐप्पल आईडी जाने बिना इसे फिर से एक्टिवेट नहीं किया जा सकता.

फोन का बैकअप बनाएं

अगर आप को मजबूरी में रिमोट सिस्टम से फोन का डेटा डिलीट करना पड़े तो फोन का बैकअप बनाते रहना एक अच्छी आदत साबित होगी. ऐसा करने से आप फोटो या फिर कोई महत्वपूर्ण डेटा नहीं खोएंगे.

ध्यान रहे कि फाइंड माई आईफोन और एंड्रायड डिवाइस मैनेजर को आपको पहले ही इंस्टौंल करना होगा. फोन खो जाने के बाद आप कुछ नहीं कर पाएंगे.

हमेशा सौफ्टवेयर को अपडेट करें

सौफ्टवेयर अपडेट में हमेशा उन कमियों को दूर किया जाता है जिनका फायदा हैकर उठाकर आपके डिवाइस के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं.

आईफोन पर तो ऐप्पल का अपडेट लगातार मिलता रहता है. हालांकि, एंड्रायड सिस्टम पर यह थोड़ा पेंचीदा है. गूगल अपडेट मोबाइल निर्माता कंपनियों के लिए रिलीज करती है. इसके बाद ये कंपनियां अपनी सुविधा अनुसार अपडेट को यूजर तक पहुंचाने के बारे में फैसला करती हैं. लेकिन आपसे जब भी अपडेट के बारे में पूछा जाए तो उसे जरूर इंस्टौंल करें.

देखें धोनी का बाइक कलेक्शन, उड़ जाएंगे होश

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और स्टार क्रिकेटर महेंद्र सिंह धौनी को अपनी बाइक्स से कितना प्यार है, ये तो जगजाहिर है. लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि धौनी के पास कितनी बाइक्स हैं. इंडियन से लेकर इंटरनेशनल ब्रैंड्स की बाइक्स धौनी खरीद चुके हैं. उनके पास इतनी सारी बाइक्स हैं कि उनके फार्महाउस पर बाइक्स का एक शो-रूम सा बना हुआ है.

धोनी के बाइक गैराज में महंगी से महंगी और पुरानी से पुरानी बाइक्स मिल जाएंगी. उनके पास 60 लाख रुपये की हेलकैट, लगभग 70 लाख रुपये की कावासाकी निंजा एच2आर भी है. इसके अलावा धोनी के पास हार्ली डेविडसन, राजदूत 350 जैसी बाइकें भी हैं. धोनी की ये सभी बाइक्स उनके रांची वाले घर पर मौजूद हैं.

धोनी के फार्महाउस पर मौजूद बाइक्स के शो-रूम की एक झलक तब देखने को मिली थी, जब विराट कोहली ने जिवा धौनी के साथ एक वीडियो शेयर किया था.

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अब पति के इस बाइक लव की एक छोटी सी झलक साक्षी धोनी ने सोशल मीडिया पर दिखाई है. साक्षी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक फोटो शेयर की, जिसमें एक बड़े से कांच के कमरे में धोनी की ढेरों बाइक्स खड़ी हुई हैं. बाइक्स को धोनी के खिलौने बताते हुए साक्षी ने लिखा, ‘यह लड़का (धोनी) अपने खिलौनों को सच में बहुत प्यार करता है.’

फोटो में दिख रहा है कि कमरे में ऊपर से नीचे तक बाइक्स ही बाइक खड़ी हुई हैं. धोनी ने यह कमरा नया बनवाया है या यह पहले से मौजूद है, इसकी फिलहाल कोई जानकारी नहीं है. जब भी धोनी मैच नहीं खेल रहे होते और घरपर होते हैं तो बाइक्स की राइड पर जरूर निकलते हैं. धोनी का बाइक्स से जो खास लगाव है उसे उनपर बनी फिल्म में भी दिखाया गया था.

हेडन और व्लादिमीर बेच देंगे सपनों का आशियाना

अमेरिका की मशहूर टीवी स्टार हेडन पैनिटेयरी और उक्रेन के पूर्व पेशेवर मुक्केबाज व्लादिमिर क्लिश्चको ने कुछ दिन पहले नौ साल पुराना रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लिया था. दोनों ने पांच साल पहले सगाई कर ली थी पर शादी हर बार टलती रही. इस बीच दोनों बेटी काया के माता-पिता भी बने, जो अब तीन साल की हो चुकी हैं.

रिश्ता खत्म होने के बाद दोनों ने सपनों का आशियाना बेचने का फैसला कर लिया, जिसकी हर चीज को दोनों ने साथ मिलकर संवारा और सजाया था. नाशविले में दोनों ने पांच हजार स्क्वेयर फीट का आलीशान बंगला बड़े मन से बनवाया था. चार बेडरूम और पांच बाथरूम वाला घर पारंपरिक होने के साथ बेहद अत्याधुनिक भी है. इसकी खिड़कियां और दरवाजे बुलेटपू्रफ होने साथ रिमोट से संचालित हैं. इसमें स्पा, स्वीमिंग पूल और काया के खेलने के लिए अलग पार्क है.

घर बेचने के बाद हेडन अभिनय करियर के लिए लॉस एंजिलिस में रहेंगी. काया अपने पिता के बेहद नजदीक है. हेडन जब भी काम के लिए बाहर जाती थी व्लादिमिर ही बेटी की देखभाल करते थे. बेटी के जन्म के बाद लंबा ब्रेक लेने के बाद हेडन फिर से अपने प्रिय सीरियल ‘नाशिविले’ की शूटिंग शुरू कर चुकी थी. पर अब यह शो जल्द खत्म होने वाला है.

हेडन बीते दो दिन से नशे की लत को लेकर चर्चाओं में हैं. लॉस एंजिलिस के क्लब के बाहर सड़क किनारे नंगे पांव बैठकर उल्टी करते हुए उनके फोटो स्थानीय टेबलॉयड ने प्रमुखता से छापे थे.

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