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एसबीआई ने दी सूचना, जल्द बंद हो जाएंगे करोड़ों एटीएम कार्ड्स

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक औफ इंडिया ने एटीएम कार्ड की सुरक्षा को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत ग्राहकों को जल्द ही अपना पुराना मैग्नैटिक स्ट्रिप वाला एटीएम कार्ड बदलवाना पड़ सकता है.

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एसबीआई ने अपने औफिशियल ट्विटर हैंडल से यह जानकारी दी है कि वे ग्राहक जिनके पास पुराने मैजिस्ट्रिप (मैग्नेटिक) डेबिट कार्ड हैं, उन्हें जल्द चिप वाले कार्ड से बदलावाना होगा. एसबीआई के मुताबिक, पुराने कार्ड के बदले ग्राहकों को ईएमवी चिप वाला डेबिट कार्ड लेना होगा, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहतर हैं. इसके लिए साल 2018 की समयसीमा तय की गई है.अगर ग्राहक डेडलाइन से पहले ऐसा नहीं करेंगे, तो वे एटीएम से ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेंगे. दरअसल, ये एटीएम मशीनें पुराने कार्ड को स्वीकार नहीं करेंगी.

एसबीआई ने यह भी बताया कि एटीएम कार्ड को बदलने की प्रक्रिया में कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. एसबीआई का हाल ही में 6 अन्य बैंकों के साथ विलय हुआ है और बैंक के ग्राहकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में इस कदम का असर करोड़ों बैंक ग्राहकों पर पड़ेगा.

सानिया मिर्जा ने कहा, भारत-पाकिस्तान को एकजुट करने के इरादे से नहीं की शादी

भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने जब 2010 में पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से शादी की तब काफी विवाद हुए थे. हालांकि, इन विवादों का असर इस जोड़ी पर नहीं हुआ और 8 साल के बाद भी दोनों एक-दूसरे के साथ बहुत खुश हैं. अब यह जोड़ी अपने पहले बेबी का इंतजार कर रही हैं, जिसके आने का समय अक्टूबर महीना बताया जा रहा है. सानिया ने इसके चलते टेनिस से ब्रेक लिया है.

हालांकि, हाल ही में सानिया ने अपनी प्रेगनेंसी और शादी के बारे में खुलकर बातचीत की और स्पष्ट भी किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान शोएब मलिक से शादी नहीं की. मगर उन्होंने साथ ही बताया कि पाकिस्तान से उन्हें काफी प्यार मिला और फैंस उन्हें भाभी बुलाते हैं. याद हो कि शादी के बाद भी दोनों खिलाड़ी अपने-अपने देश का प्रतिनिधित्व करते रहे. जहां मलिक पाकिस्तान क्रिकेट टीम के प्रमुख बल्लेबाज रहे, वहीं उनकी पत्नी ने टेनिस में भारत का नाम रोशन किया और डबल्स इवेंट में 6 ग्रैंडस्लैम खिताब जीते.

सानिया ने कहा, ‘कई लोग कहते हैं कि मैंने और शोएब ने इसलिए शादी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधर जाएंगे. यह सही नहीं है. जब भी मैं पाकिस्तान जाती हूं, मैं साल में एक बार अपने ससुराल वालों से मिलने जरूर जाती हूं. मुझे वहां से बहुत प्यार मिलता है. पूरा पाकिस्तान मुझे भाभी बुलाता है और वह मेरी काफी इज्जत करते हैं.’

इसके अलावा टेनिस स्टार ने उन विवादों को भी थाम दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि उनका बेबी भारतीय या पाकिस्तानी में से क्या कहलाएगा. सानिया ने कहा कि शोएब और मैं इस तरह की टिपण्णी को तवज्जो नहीं दे रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘पब्लिक फिगर का हिस्सा बनने के लिए लोग टैग दे रहे हैं. मैंने अपने देश, परिवार और अपने लिए खेल रही हूं, जैसे मेरे पति खेल रहे हैं. हमें अपनी जिम्मेदारियां पता है. हम उसके भारतीय या पाकिस्तानी होने को गंभीर रूप से नहीं ले रहे हैं. अच्छी सुर्खियां बनाने का यह जरिया बना हुआ है, लेकिन इसका हमारे घर पर कोई असर नहीं पड़ रहा है.’

देखिए ‘बिग बौस 12’ का पहला प्रोमो

टीवी शो पर सास बहू और ससुराल के अलावा जो चीज दर्शकों के एंटरटेनमेंट के मामले में दो कदम आगे है वो है रियलिटी शो. खासतौर पर कलर्स टीवी पर आने वाला ‘बिग बौस’. इस शो में न मायका है न ससुराल, न सास न बहू लेकिन ड्रामा इस लेवल का होता है कि कोई इससे बच नहीं पाता. इमोशन, लड़ाई, झगड़े, एक्शन और मस्ती से भरा ये शो जल्द वापसी करने वाला है.

सुपरस्टार सलमान खान बौलीवुड के साथ छोटे पर्दे पर भी तहलका मचा रहे हैं. इन दिनों अभिनेता गेम शो ‘दस का दम’ होस्ट कर रहे हैं. इसके तुरंत बाद सलमान खान देश के सबसे कौन्ट्रोवर्शियल शो ‘बिग बौस 12 ‘ की मेजबानी करते नजर आएंगे. ‘बिग बौस 12’ के मेकर्स ने शो का पहला प्रोमो रिलीज किया है.

इस प्रोमों में सलमान खान सीजन 12 के फौर्मेट को समझाते नजर आ रहे हैं. वीडियो में सलमान खान एक टीचर के अंदाज में सूट-बूट पहने क्लास रूम में धासू एंट्री मारते हैं. ‘बिग बौस 12 ‘  के प्रोमो में सलमान खान कहते हैं कि इस साल शो की ABCD बदल जाएगी. इसमें रैपर से लेकर जुड़वां बहने, सास-बहू से लेकर छोटे-बड़े सब लोग होंगे. वीडियो के आखिर में सलमान मस्ती भरे अंदाज में दिख रहे हैं.

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बता दें, बिग बौस’ का सीजन-11 जहां पड़ोसियों की वजह से सुर्खियों में रहा था, वहीं इसके अगले सीजन में जोड़ियों घर के अंदर तहलका मचाती दिखाई देंगी. मेकर्स ने शो के लिए जोड़ियों की तलाश शुरू कर दी है. खबरें गर्म हैं कि ‘बिग बौस-12’ के औडिशन भी शुरू हो चुके हैं. पिछले सीजन की तरह इस बार भी शो में सेलिब्रेटी और आम आदमी (कौमनर) का कौम्बिनेशन देखने को मिलेगा. कहा जा रहा है इस सीजन एक पोर्न स्टार की एंट्री होगी, साथ ही मिलिंद सोमन भी इसमें नजर आ सकते हैं.

गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हैं क्रिकेट के ये रिकार्ड्स

क्रिकेट का खेल आंकड़ो का खेल है और इन्ही आंकड़ो की वजह से रिकार्ड्स बनते और टूटते हैं. लेकिन कुछ कीर्तिमान ऐसे हैं जो गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड तक में जगह बना चुके हैं. तो आज हम आपको क्रिकेट से जुड़े उन्ही रिकार्ड्स के बार में बताएंगे जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में जगह मिली है.

सबसे महंगा बल्ला

2011 विश्व कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने जिस बल्ले से छक्का लगाकर भारत को विश्व चैंपियन बनाया था, वो बल्ला क्रिकेट इतिहास का सबसे महंगा बल्ला है. इस बल्ले को भारत की एक कंपनी आर के ग्लोबल शेयर एंड सिक्योरिटी लिमिटेड ने 161,295 डालर की भारी कीमत देकर खरीदा था.

 

सबसे बड़ा क्रिकेट टूर्नामेंट

क्रिकेट का सबसे बड़ा टूर्नामेंट ईनाडू क्रिकेट चैंपियन कप 2013 है. इस टूर्नामेंट में कुल 16,215 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इस टूर्नामेंट का आयोजन भारत के अलग-अलग हिस्सों में 30 दिसंबर 2013 से 20 फरवरी 2014 के बीच आयोजित किया गया.

क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज गेंद

क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज गेंद फेंकने का विश्व रिकार्ड पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के नाम दर्ज है. शोएब अख्तर ने 2003 विश्व कप में इंग्लैंड के बल्लेबाज निक नाइट को एक गेंद फेंकी जिसकी गति 161.3 किमी प्रति घंटा थी, यानी गेंद की रफ्तार 100 मील प्रति घंटे के पार थी. इस रिकार्ड को भी गिनीज बुक में दर्ज किया गया.

विश्व कप में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकार्ड

क्रिकेट विश्व कप में सबसे ज्यादा रन बनाने का कीर्तिमान गिनीज बुक औफ रिकार्ड में दर्ज है. भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम ये रिकार्ड दर्ज है. सचिन तेंदुलकर ने 6 विश्व कप में हिस्सा लेते हुए कुल 45 मैचों में 57 की शानदार औसत से 2278 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होने 6 शतक और 15 अर्धशतक भी बनाए.

सबसे ज्यादा उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलने का रिकार्ड

सबसे ज्यादा उम्र में फर्स्ट क्लास मैच खेलने का रिकार्ड बंबई के गवर्नर राजा महाराज सिंह के नाम दर्ज है. उन्होंने 72 साल 192 दिन की उम्र में अपना फर्स्ट क्लास मैच खेला. इस मैच में उन्होने सिर्फ 4 रन की पारी खेली.

ब्लाइंड वर्ल्ड कप में एक पारी में सबसे ज्यादा रन

1998 में पहला ब्लाइंड वर्ल्ड कप खेला गया. इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान के बल्लेबाज मसूद जन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 262 रन बनाकर विश्व रिकार्ड बनाया. इस रिकार्ड को गिनीज बुक में भी दर्ज किया गया.

सबसे ज्यादा देर तक नेट पर बल्लेबाजी करने का रिकार्ड

नेट पर सबसे ज्यादा देर तक बल्लेबाजी करने का रिकार्ड विशाखापत्तनम के नागराजू बुदुमुरू के नाम दर्ज है. नागराजू बुदुमुरू ने 82 घंटे तक नेट पर बल्लेबाजी कर ये रिकार्ड अपने नाम किया.

सबसे महंगा क्रिकेट सामान जो नीलामी में बिका

महान आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज सर डोनाल्ड ब्रेडमैन की 1948 की कैप क्रिकेट इतिहास की सबसे महंगी चीज के रूप में नीलाम हुई. जून 2003 टिम सिरिसर जिन्होंने ‘हू वांट्स टू बी ए मिलिनियर’ शो जीता ने ब्रेडमैन की इस टोपी को 283,000 यूएस डालर की बोली लगाकर खरीदा. ब्रेडमैन ने इस कैप को 1948 में इंग्लैंड के अपने अंतिम दौरे पर पहना था. इस कैप को पहन कर अपना अंतिम शतक बनाने वाले ब्रेडमैन अंतिम पारी में शून्य पर आउट हुए थे.

कप्तान के रूप में सबसे ज्यादा टेस्ट खेलने का रिकार्ड

एक कप्तान के रूप में सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का रिकार्ड साउथ अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ के नाम दर्ज है. ग्रीम स्मिथ ने साउथ अफ्रीका की कप्तानी करते हुए 100 टेस्ट मैच खेले. 24 अप्रैल 2003 को साउथ अफ्रीका की कप्तानी संभालने वाले ग्रीम स्मिथ ने 1 फरवरी 2013 को सौंवे टेस्ट में कप्तानी करते हुए ये रिकार्ड हासिल किया.

सपनों से सस्ता सिंदूर : भाग 1

31 वर्षीय कल्पना बसु कर्नाटक के जिला बेलगांव में आने वाले तालुका माहेर की रहने वाली थी. उस का जन्म एक मध्यवर्गीय किसान परिवार में हुआ था. उस के जन्म के कुछ दिनों पहले ही पिता का निधन हो गया था. मां ने मेहनतमजदूरी कर उसे पालापोसा. पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह ज्यादा पढ़ाईलिखाई भी नहीं कर पाई थी.

कल्पना खूबसूरत होने के साथसाथ महत्त्वाकांक्षी भी थी. वह चाहती थी कि उसे ऐसा जीवनसाथी मिले जो उस की तरह हैंडसम हो और उस की भावनाओं की कद्र करते हुए सभी इच्छाओं को पूरा करे. लेकिन उस के इन सपनों पर पानी तब फिर गया जब उस की शादी एक ऐसे मामूली टैक्सी ड्राइवर बसवराज बसु के साथ हो गई, जो उस के सपनों के पटल पर कहीं भी फिट नहीं बैठता था.

38 वर्षीय बसवराज बसु उसी तालुका का रहने वाला था, जिस तालुका में कल्पना रहती थी. प्यार तो उसे बचपन से ही नहीं मिला था. उस के पैदा होने के बाद ही मांबाप दोनों की मौत हो गई थी. उसे नानानानी ने पालपोस कर बड़ा किया था. नानानानी की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह भी पढ़लिख नहीं सका. जिंदगी का बोझ उठाने के लिए जैसेतैसे वह टैक्सी ड्राइवर बन गया था. ड्राइविंग का लाइसैंस मिलने पर वह माहेर शहर आ कर कैब चलाने लगा. जब वह अपने पैरों पर खड़ा हो गया तो नातेरिश्तेदारों ने उस की शादी कराने की सोची. आखिरकार उस की शादी कल्पना से हो गई.

खुले विचारों वाली कल्पना से शादी कर के वह खुश था. लेकिन कल्पना उस से खुश नहीं थी. ड्राइवर के साथ शादी हो जाने से उस की सारी ख्वाहिशों और सपनों पर जैसे पानी फिर गया था. पति के रूप में एक मामूली टैक्सी ड्राइवर को पा कर उस के सारे सपने कांच की तरह टूट कर बिखर गए थे.

कुल मिला कर बसवराज बसु और कल्पना का कोई मेल नहीं था, लेकिन मजबूरी यह थी कि वह करती भी तो क्या. बसवराज बसु अपनी आमदनी के अनुसार पत्नी की जरूरतों को पूरी करने की कोशिश करता था, पर पत्नी की ख्वाहिशें कम नहीं थीं. उस की आकांक्षाएं ऐसी थीं, जिन्हें पूरा करना बसवराज के वश की बात नहीं थी. लिहाजा वह अपनी किस्मत को ही कोसती रहती.

समय अपनी गति से चलता रहा. कल्पना 2 बच्चों की मां बन गई. इस के बाद कल्पना की जरूरतें और ज्यादा बढ़ गई थीं, जिन्हें बसवराज बसु पूरा नहीं कर पा रहा था. ऐसी स्थिति में कल्पना की समझ में नहीं आ रहा था कि वह करे तो क्या करे. उस का पति जब घर से टैक्सी ले कर निकलता था तो तीसरेचौथे दिन ही घर लौट कर आता था. घर आने के बाद भी वह कल्पना का साथ नहीं दे पाता था. ऐसे में कल्पना जल बिन मछली की तरह तड़प कर रह जाया करती थी.

उड़ान के लिए कल्पना को लगे पंख

कल्पना खूबसूरत और जवान थी. बस्ती में ऐसे कई युवक थे, जो उस को चाहत भरी नजरों से देखते थे. एक दिन कल्पना के मन में विचार आया कि क्यों न ऐसे युवकों से लाभ उठाया जाए. इस से उस के सपने तो पूरे हो ही सकते हैं, साथ ही शरीर की जरूरत भी पूरी हो जाएगी.

यही सोच कर कल्पना ने उन युवकों को हरी झंडी दे दी. कई युवक उस के जाल में फंस गए. बच्चों के स्कूल और पति के काम पर जाने के बाद वह मौका देख कर उन्हें घर बुला कर मौजमस्ती करने लगी, साथ ही उन से मनमुताबिक पैसे भी लेने लगी.

कल्पना का रहनसहन और घर के बदलते माहौल को पहले तो बसवराज समझ नहीं सका, लेकिन जब सच्चाई उस के सामने आई तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उस ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि जिस पत्नी को वह अपनी जान से भी ज्यादा चाहता है, जिस के लिए वह रातदिन मेहनत करता है, उस के पीठ पीछे वह इस तरह का काम करेगी. उस ने यह भी नहीं सोचा कि दोनों बच्चों पर इस का क्या असर पड़ेगा.

मामला काफी नाजुक था. मौका देख कर बसवराज बसु ने जब कल्पना को समझाना चाहा तो वह उस पर ही बरस पड़ी. उस ने पति को घुड़कते हुए कहा कि तुम्हारे और बच्चों के स्कूल चले जाने के बाद अगर मैं अकेली रहती हूं. ऐसे में अगर मैं किसी से दोचार बातें कर लेती हूं तो इस में बुरा क्या है. तुम्हें यह अच्छा नहीं लगता तो मैं आत्महत्या कर लेती हूं.

कल्पना का बदला व्यवहार और माहौल देख कर बसवराज बसु यह बात अच्छी तरह से समझ गया कि कल्पना को समझानेबुझाने से कोई फायदा नहीं होगा. इसलिए उस ने उस जगह को छोड़ देना ही सही समझा. वह पत्नी और बच्चों को ले कर बेलगांव शहर चला गया.

वहां बसवराज कुड़चड़े थाने के अंतर्गत आने वाले अनु अपार्टमेंट में किराए का फ्लैट ले कर रहने लगा. उस ने टैक्सी चलानी बंद कर दी और किसी की निजी कार चलाने लगा. उसे विश्वास था कि बेलगांव में रह कर पत्नी के आशिक छूट जाएंगे और वह सुधर जाएगी.

लेकिन बसवराज की यह सोच गलत साबित हुई. कल्पना चतुर और स्मार्ट महिला थी. बेलगांव आ कर वह और भी आजाद हो गई. यहां उसे न समाज का डर था और न गांव का. उस ने उसी अपार्टमेंट में रहने वाले पंकज पवार नाम के युवक को फांस लिया. पंकज एक निजी कंपनी में डाटा एंट्री औपरेटर था. वह मडगांव का रहने वाला था.

बसवराज की सोच हुई गलत साबित

31 वर्षीय पंकज पवार की शादी हो चुकी थी. उस के 2 बच्चे भी थे. लेकिन वह कल्पना के लटकोंझटकों से बच नहीं सका. कल्पना से संबंध बन जाने के बाद पंकज पवार उस के फ्लैट पर आनेजाने लगा. एक दिन पंकज कल्पना से मुलाकात कराने के लिए अपने 3 दोस्तों सुरेश सोलंकी, अब्दुल शेख और आदित्य को भी साथ ले आया. पहली ही मुलाकात में ही कल्पना ने उस के तीनों दोस्तों पर ऐसा जादू किया कि वे भी उस के मुरीद हो गए. उन तीनों से भी कल्पना के संबंध बन गए.

कुछ ही दिनों में कल्पना के यहां आने वाले युवकों की संख्या बढ़ने लगी. धीरेधीरे कल्पना के कारनामों की जानकारी इलाके भर में फैल गई. उस की वजह से बसवराज बसु की ही नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले की बदनामी होने लगी. ऐसे में बसवराज का वहां रहना मुश्किल हो गया. दोनों बच्चे अब काफी बड़े हो गए थे. बसवराज बसु ने अपने बच्चों के भविष्य के मद्देनजर कल्पना को काफी समझाया, लेकिन अपनी मौजमस्ती के आगे उस ने बच्चों को कोई अहमियत नहीं दी.

कंडोम से सैक्स को मजेदार बनाएं कुछ इस तरह

सुरेश को अपनी एक साथी के साथ शारीरिक संबंध बनाना भारी पड़ेगा, यह उस ने सपने में भी नहीं सोचा था.

दरअसल, उस साथी से सैक्स संबंध बनाते समय सुरेश ने कंडोम का इस्तेमाल नहीं किया था.

कुछ दिनों बाद सुरेश को अपने अंग में जलन सी महसूस होने लगी. छोटेछोटे दाने भी निकल आए. डाक्टर ने बताया कि यह असुरक्षित यौन संबंध बनाने की वजह से हुआ है. वह कंडोम का इस्तेमाल कर के सैक्स का मजा उठाता तो बाद में उसे यह परेशानी नहीं होती.

सबलोक क्लिनिक के यौन रोग विशेषज्ञ डाक्टर बिनोद सबलोक बताते हैं कि चाहे मर्द हो या औरत एचआईवी  समेत यौन संक्रामक रोगों को रोकने के लिए कंडोम एक आसान और बेहतर तरीका है. कंडोम न सिर्फ असुरक्षित गर्भधारण से, बल्कि यौन रोगों से भी शरीर की हिफाजत करता है.

शर्म क्यों

बाजार में आसानी से मिलने वाला कंडोम खरीदना अब शर्म वाली बात भी नहीं रही है. कंडोम खरीदने के लिए डाक्टर की परची की जरूरत भी नहीं होती है. इस की कीमत भी बहुत कम होती है. कई सरकारी व गैरसरकारी योजनाओं के तहत कंडोम मुफ्त में भी बांटे जाते हैं.

अब तो अलगअलग फ्लेवर व कई बनावटों में मिलने वाले कंडोम सैक्स संबंध बनाने के दौरान भरपूर मजा भी देते हैं.

कंडोम का इस्तेमाल कर खुले दिमाग से सैक्स का मजा लिया जा सकता है. अब तो बाजार में ऐसे भी कंडोम हैं जिन से लंबे समय तक सैक्स किया जा सकता है.

बेहतर साथी है कंडोम

कंडोम आप के लिए इस तरह एक बेहतर साथी साबित हो सकता है:

* यह बच्चा ठहरने से रोकने का सब से आसान और महफूज तरीका है.

* कंडोम का इस्तेमाल बिना किसी झिझक के कर सकते हैं.

* कोई साइड इफैक्ट नहीं होता.

* कंडोम यौन रोगों से बचाव में कारगर हथियार है.

ऐसे बढ़ाएं रोमांच

बाजार में वनीला, स्ट्राबेरी, केला, चौकलेट, बबलगम, कौफी वगैरह फ्लेवर में भी कंडोम मिलते हैं. मुंह से सैक्स के शौकीनों के लिए ये कंडोम सैक्स के दौरान ज्यादा मजा देते हैं और कोई बीमारी भी नहीं होती है.

जो लोग सैक्स का मजा लंबे समय यानी देर तक नहीं उठा पाते हैं उन के लिए लौंग लास्टिंग कंडोम इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा.

सैक्स बनाएं मजेदार

अगर आप सैक्स का मजा उठाना चाहते हैं तो बाजार में डौटेड कंडोम भी आते हैं. डौटेड कंडोम में अपनी साथी का जोश बढ़ाने के लिए इस की बाहरी सतह पर बिंदीनुमा छोटेछोटे उभरे हुए दाने होते हैं. यह चिकनाई वाला होता है.

इन बातों पर ध्यान दें

* कंडोम खरीदते समय उस की ऐक्सपायरी डेट जरूर देख लें.

* ज्यादा तेजी से सैक्स का मजा उठाते समय कंडोम फट भी सकता है. इस का ध्यान रखें और कंडोम को तुरंत बदल दें.

* इस्तेमाल करने से पहले कंडोम के सामने वाले भाग को चुटकी से दबा कर हवा को बाहर निकाल दें, फिर धीरेधीरे अंग पर चढ़ाएं.

* कंडोम खरीदते समय दुकानदार से खुल कर बात करें. बात करते समय जरा भी न शरमाएं.

* सैक्स कुदरत का दिया एक अनमोल तोहफा है. इस का जम कर मजा उठाएं, पर सावधानी और एहतियात भी बरतें.

अच्छे सैक्स के लिए सलोना चेहरा

श्यामा का पति प्रकाश उस से दूरदूर रहता था. शादी के बाद मुश्किल से 1-2 रातें ही उन्होंने साथसाथ गुजारी होंगी. इस के बाद श्यामा अपने मायके आ गई और यह बात अपनी भाभी को बताई.

भाभी ने एक दिन श्यामा के पति प्रकाश को घर पर दावत पर बुलाया. मजाकमजाक में भाभी ने प्रकाश से श्यामा के बारे में पूछा तो वह बोला, ‘‘श्यामा का हाल बहुत बुरा है. यह जब बिस्तर पर पहुंचती है तो लगता है जैसे सीधे रसोई से आ रही हो. सब्जी से ले कर अचार तक की पूरी खुशबू इस में मिल जाती है. ऐसे में लगता ही नहीं कि हम रसोई में हैं या बिस्तर पर.’’

श्यामा की भाभी ने उसे बताया कि पति का मन जीतने के लिए पत्नी को किस तरह से सजसंवर कर रहना चाहिए. उन्हें आपस में खुल कर बातचीत करनी चाहिए. श्यामा को यह बात समझ में आ गई. इस के बाद तो उन दोनों की जिंदगी की गाड़ी तेजी से पटरी पर आ गई.

शादीशुदा जिंदगी की कामयाबी के लिए सैक्स का होना बेहद जरूरी है.  सैक्स में दूरी का असर शादीशुदा जिंदगी पर पड़ता है.

जिस्मानी खिंचाव जरूरी

जिस्मानी तौर पर हर पतिपत्नी हीरोहीरोइन की तरह भले ही खूबसूरत न हों पर उन्हें बनठन कर रहने की कला आनी चाहिए. इस से दोनों के बीच जिस्मानी खिंचाव बना रहेगा.

पहले भी इस तरह की जरूरतों पर ध्यान दिया जाता रहा है. भारत में बहुत साल पहले वात्स्यायन ने कामकला पर पूरी किताब लिखी थी.

उन्होंने केवल सैक्स के कई आसन बताए, बल्कि सैक्स के पहले कैसे तैयार हों, सैक्स वाली जगह का माहौल कैसा हो, सैक्स के दौरान पहने जाने वाले कपड़ों का सैक्स के साथ कैसा रिश्ता हो यह सब भी बहुत अच्छी तरह बताया गया है.

आज के मौडर्न समाज ने भी इस को माना है. तमाम तरह के टूथपेस्ट का प्रचार करने वाले इश्तिहार बताते हैं कि मुंह की खुशबू नजदीकी रिश्तों में बहार लाती है. ऐसे में साफ है कि मेकअप, कपड़े, इत्र, अच्छी जगह और सलोना चेहरा सैक्स को कामयाब बनाता है.

ऐसे बनाएं सलोना चेहरा

* चेहरे को साफ करें. उस में किसी तरह की गंदगी न हो. पसीना सुखा लें. क्रीम, पाउडर और काजल का सलीके से इस्तेमाल करें.

* मुंह की गंध का खास खयाल रखें. बदबू आने पर सैक्स का मजा नहीं आता.

* काजल, बिंदी और होंठों की लाली का खास खयाल रखें.

* सैक्स के दौरान कपड़े ऐसे हों जिन में से खूबसूरत अंग दिख रहे हों.

* बिस्तर और एकांत का सैक्स में अपना मजा होता है. हड़बड़ी में सैक्स का मजा किरकिरा हो जाता है.

* मर्द को भी बनठन कर सैक्स के लिए तैयार होना चाहिए.

* आमतौर पर मर्द अपने चेहरे की शेविंग रात में नहीं करते हैं. इस का खयाल रखें और शेविंग करें.

मां की सेहत के लिए विटामिन

शादी के बाद हर लड़की का सपना होता है कि वह मां बनने का सुख भोगे. सरिता की शादी के 2 साल बाद उस के पैर भारी हुए. गांव में रहने के बावजूद पढ़ीलिखी सरिता ने अपनी और अपने होने वाले बच्चे की अच्छी सेहत का ध्यान रखना शुरू कर दिया.

वैसे, जब कोई औरत पेट से होती है तो उसे डाक्टर के अलावा भी दूसरों से तमाम तरह की नसीहतें मिलनी शुरू हो जाती हैं कि कैसे चलनाफिरना है, कौनकौन से घर के काम करने हैं, क्याक्या खानापीना है वगैरह.

गांव में आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता और शहरकसबे की डाक्टर भी उन्हें अपने खानपान पर खास ध्यान देने को कहती हैं.

इस मसले पर डाइटिशियन नेहा सागर का कहना है कि मां बनने वाली औरतों को संतुलित भोजन की बहुत ज्यादा जरूरत होती है क्योंकि उन में एक जान और पल रही होती है. उन के भोजन में कैल्शियम, विटामिन डी, विटामिन ए, आयरन, फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्त्व जरूर शामिल होने चाहिए.

पेट से हुई औरतें कभीकभार विटामिन लेने में कोताही बरतती हैं जबकि उन की कमी से उन्हें बड़ीबड़ी दिक्कतें भी पैदा हो सकती हैं. कुछ विटामिन तो उन के लिए बहुत ज्यादा जरूरी हो जाते हैं.

अगर कोई औरत पेट से होने के बाद विटामिन बी 12 का सेवन नहीं करती है तो वह अपने साथ ज्यादती करती है. बच्चे के दिमागी विकास के लिए विटामिन बी 12 बहुत ज्यादा फायदेमंद रहता है. यह चिकन और मटन में बहुत ज्यादा पाया जाता है. अगर आप मांसाहारी नहीं हैं तो अंकुरित बींस खाने चाहिए.

विटामिन बी 9 यानी फौलिक एसिड. यह सभी विटामिन बी कौंप्लैक्स में से सब से ज्यादा खास होता है. किसी औरत के पेट से होने के बाद डाक्टर फौलिक एसिड के सप्लीमैंट लेने की सलाह देते हैं. यह पालक, एवोकाडो, मटर वगैरह में खूब पाया जाता है.

इसी तरह विटामिन ए भी मां और बच्चे के लिए जरूरी होता है पर बेहद संतुलित मात्रा में,?क्योंकि इस के ज्यादा सेवन से जन्म दोष की समस्या भी पैदा हो सकती है जो पेट में पलते बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है. यह विटामिन ज्यादातर संतरा, गाजर, हरी सब्जियों, मांसमछली, दूध, मक्खन, अंडा वगैरह में पाया जाता?है.

हड्डियों में किसी तरह की कमजोरी को दूर करने के लिए विटामिन डी का सेवन करना चाहिए. पैदा होने वाले बच्चे की हड्डियां मजबूत रहें, इसलिए मां को विटामिन डी से भरपूर भोजन करना चाहिए. मछली, मशरूम, अंडे और मीट में विटामिन डी पाया जाता है. सूरज की रोशनी से भी विटामिन डी की भरपाई की जा सकती है.

जब ये विटामिन भोजन से?नहीं मिल पाते हैं तो डाक्टर की सलाह पर मल्टीविटामिन की दवाएं भी मां बनने वाली औरतों को दी जाती?हैं. ये दवाएं गोलियों, कैप्सूल और टौनिक के?रूप में बाजार में मिलती हैं.

मुन्ना बजरंगी : एक आतंक का अंत

9 जुलाई की सुबह उत्तर प्रदेश की बागपत जेल का नजारा कुछ बदला हुआ था. वजह यह कि कुख्यात बदमाश सुनील राठी ने 2 भाजपा नेताओं के हत्यारे और राठी से भी ज्यादा खूंखार बदमाश मुन्ना बजरंगी को मार डाला था, वह भी मैगजीन की पूरी गोलियां बरसा कर. बिलकुल उसी अंदाज में जैसे मुन्ना बजरंगी लोगों को मारता था.

सुनील राठी की उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली में काफी दहशत थी. बागपत जिले के टीकरी गांव का रहने वाला सुनील राठी दोघट थाने का हिस्ट्रीशीटर था.

18 साल पहले सुनील राठी तब चर्चा में आया था, जब उस के पिता नरेश राठी की बड़ौत के पास हत्या कर दी गई थी. इस हत्या के बदले में उस ने महक सिंह और मोहकम सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी थी.

इस मामले में सुनील राठी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. सुनील की हिम्मत को इसी से आंका जा सकता है कि उस ने अपने गैंग के अमित को देहरादून पुलिस पर हमला कर के छुड़ा लिया था.

सुनील पहले हरिद्वार जेल में था. जनवरी 2017 में वह बागपत जेल में आया था. वह जेल से ही अपने गिरोह का संचालन करता था. मुन्ना बजरंगी की सुनील राठी से जानपहचान थी. यही वजह थी, जब वह बागपत जेल में आया तो दोनों चाय पर मिले. सुनील को सूचना मिली थी कि मुन्ना बजरंगी उसे मारने के लिए जेल आया है. इसीलिए उस ने मुन्ना बजरंगी से पूछा, ‘‘सुना है, तुम ने मेरी हत्या की सुपारी ली है?’’

इस पर मुन्ना बजरंगी ने उसे जवाब देते हुए कहा कि ‘हम ऐसे गलत काम नहीं करते. मैं नहीं, तुम ने मेरी हत्या की सुपारी ली है.’ दोनों के बीच इस बात को ले कर बहस शुरू हो गई कि किस ने किस की हत्या की सुपारी ली है. विवाद बढ़ा तो सुनील राठी ने पिस्तौल निकाल कर मुन्ना बजरंगी पर गोलियां बरसा दीं. घायल मुन्ना ने बचने की कोशिश की तो सुनील ने पास जा कर कई गोलियां उस के पेट में उतार दीं.

गोलियों की आवाज सुन कर जेलर उदय प्रताप सिंह आए. उस वक्त मुन्ना बजरंगी खून से लथपथ पड़ा था और पास ही सुनील राठी पिस्तौल लिए खड़ा था. मुन्ना बजरंगी की हत्या की यह बात जंगल में आग की तरह पूरे देश में फैल गई. पूर्वांचल के रहने वाले कारोबारी उस की हत्या से इसलिए खुश थे कि अब उन्हें फिरौती और वसूली का शिकार नहीं होना पड़ेगा.

झांसी जेल से आया था मुन्ना बजरंगी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जिला बागपत दिल्ली की सीमा के करीब है. इस के बावजूद बागपत का उतना विकास नहीं हुआ, जितना होना चाहिए था. यहां की जेल के जेलर उदय प्रताप सिंह 22 दिसंबर, 2017 से यहां तैनात थे.

जेल में शातिर अपराधी बंद होने के बाद भी इस जेल में सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे थे. ऐसी जेल में रविवार 8 जुलाई, 2018 की रात करीब 9 बजे 7 लाख के ईनामी बदमाश मुन्ना बजरंगी उर्फ प्रेम प्रकाश सिंह को झांसी जेल से पेशी पर लाया गया था. यहां आ कर मुन्ना बजरंगी ने बागपत जेल में पहले से बंद कुख्यात अपराधी सुनील राठी और विक्की सुन्हैंडा से मुलाकात की. जेल प्रशासन ने मुन्ना बजरंगी को विक्की की बैरक में रखा था.

9 जुलाई की सुबह करीब 6 बजे बैरक खुलने के बाद मुन्ना बजरंगी ने सुनील राठी से मुलाकात की. दोनों ने साथसाथ चाय पी. दोनों के बीच हो रही बातचीत कब विवाद में बदल गई, पता ही नहीं चला. मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपने पति की हत्या की साजिश रचे जाने का अंदेशा जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा की अपील की थी.

मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खडे़ हो गए हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने आननफानन में जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, हेड वार्डन अरजिंदर सिंह और वार्डन माधव कुमार को सस्पेंड कर दिया. इस के साथ ही ज्यूडिशियल इंक्वायरी भी गठित की गई है.

खौफ का दूसरा नाम था मुन्ना बजरंगी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में 1967 में जन्मे मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह था. पारसनाथ सिंह के 4 बेटों में मुन्ना बजरंगी सब से बड़ा था. उस का घरपरिवार आर्थिक रूप से कमजोर था. अपने घर वालों की मदद के लिए प्रेम प्रकाश बचपन से ही मेहनतमजदूरी करता था. बाद में वह कालीन बुनने का काम करने लगा था.

यही काम करते हुए पहली बार उस के खिलाफ मारपीट और बलवा करने का मुकदमा दर्ज हुआ. इस घटना के बाद प्रेम प्रकाश अपराध की दुनिया में कूद गया.

प्रेम प्रकाश को पढ़ाई की जगह हथियार रखने का शौक था. वह फिल्मी गैंगस्टरों की तरह बड़ा गैंगस्टर बनना चाहता था. उस की इसी सोच के चलते 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उस के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ. 1982 का यह मुकदमा काकोगांव में मारपीट और बलवा करने पर दर्ज हुआ था.

जौनपुर के सुरेरी थाना में उस के खिलाफ मारपीट करने और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज हुआ था. इस के बाद मुन्ना अपराध की दलदल में धंसता चला गया. मुन्ना बजरंगी को दुश्मन को निशाना लगा कर मारना पसंद नहीं था. वह अपने दुश्मन को ताबड़तोड़ गोलियां बरसा कर मारता था, जिस से वह छलनी हो जाता था.

जब मुन्ना अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था, तभी उसे जौनपुर के दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण मिल गया. मुन्ना उस के लिए काम करने लगा था. इसी दौरान 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए कालीन व्यापारी भुल्लन जायसवाल की हत्या कर दी. फिर उस पर गोपालपुर में बड़ी लूट को अंजाम देने का आरोप लगा. इस लूट में उस के साथी भी साथ थे.

मुन्ना पुलिस की आंखों की किरकिरी बन गया था. पुलिस के दबाव की वजह से उसे जौनपुर छोड़ कर फैजाबाद को ठिकाना बनाना पड़ा. फैजाबाद में वह अपराधियों के एक बडे़ गिरोह में मिल गया. यहीं पर उस का नाम बदला यानी वह प्रेम प्रकाश से मुन्ना बजरंगी हो गया था.

ऐसे बढ़ा मुन्ना बजरंगी का दबदबा

मुन्ना पहली बार सुर्खियों में तब आया जब उस ने मई 1993 में बक्शा थानाक्षेत्र के भुतहा निवासी भाजपा नेता रामचंद्र सिंह, उन के सहयोगी भानुप्रताप सिंह और गनर आलमगीर की हत्या कर दी. मुन्ना ने ये तीनों हत्याएं जौनपुर के कचहरी रोड पर भीड़ के बीच की थीं और गनर की कारबाइन लूट ले गया था. इस का आरोप मुन्ना बजरंगी पर लगा जरूर, लेकिन अदालत ने उसे बरी कर दिया था.

बहरहाल इस के बाद अपराध जगत में उस का दबदबा बढ़ गया था. इस बीच मुन्ना ने छोटेमोटे अपराधियों को साथ ले कर अपना गिरोह बना लिया था. साथ ही एके 47 भी खरीद ली थी.

24 जनवरी, 1996 को मुन्ना बजरंगी ने रामपुर थानाक्षेत्र के जमालपुर बाजार में उस समय के ब्लाक प्रमुख कैलाश दुबे, जिला पंचायत सदस्य राज कुमार सिंह और अमीन बांके तिवारी की हत्या कर दी थी.

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और नेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया था. मुख्तार ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए. इस के बाद मुन्ना के गिरोह की ताकत और भी बढ़ गई. अब मुन्ना सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था. वह अपना काम मुख्तार अंसारी के निर्देशन में करता था.

पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था. लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उन के लिए चुनौती बनने लगे. उन पर मुख्तार के दुश्मन ब्रजेश सिंह का हाथ था. उसी के संरक्षण में कृष्णानंद राय का गैंग फलफूल रहा था.

दोनों गैंग अपनीअपनी ताकत बढ़ाने में लगे थे. दोनों गिरोहों के संबंध मुंबई अंडरवर्ल्ड के साथ जुड़ गए थे. कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था. उन्होंने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी.

मुख्तार का फरमान मिलने के बाद मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने के लिए साजिश रची. इसी साजिश के तहत माफिया डौन मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने 29 नवंबर, 2005 को अपने गिरोह के साथ लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की 2 गाडि़यों पर गोलियां बरसाईं.

इस हमले में मुहम्मदाबाद (गाजीपुर) से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उन के साथ जा रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे. पोस्टमार्टम के दौरान हर मृतक के शरीर से 60 से 100 तक गोलियां बरामद हुई थीं. इस हत्याकांड ने सूबे के सियासी हलकों में तहलका मचा दिया था. इस के बाद हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा. एक साथ 7 लोगों की हत्या के बाद मुन्ना बजरंगी मोस्टवांटेड बन गया था.

7 लाख का ईनामी बदमाश था मुन्ना बजरंगी

भाजपा विधायक की हत्या के अलावा अन्य कई मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई को मुन्ना बजरंगी की तलाश थी, इसलिए उस पर 7 लाख रुपए का ईनाम घोषित किया गया. मुन्ना पर हत्या, अपहरण और वसूली के दरजनों मामले दर्ज थे.

वह चूंकि लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहता था, इसलिए पुलिस की पकड़ से बाहर था. फिर भी उस पर पुलिस का दबाव बढ़ता जा रहा था. उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ लगातार मुन्ना बजरंगी को तलाश कर रही थी. उस का उत्तर प्रदेश और बिहार में रह पाना मुश्किल हो गया था. दिल्ली भी उस के लिए सुरक्षित नहीं थी.

crime story in hinfi munna bajrangi murder case

इसलिए मुन्ना भाग कर मुंबई चला गया. उस ने एक लंबा अरसा वहीं गुजारा. इस दौरान वह कई बार विदेश भी गया. अंडरवर्ल्ड के लोगों से दिनबदिन उस के रिश्ते मजबूत होते जा रहे थे. वह मुंबई से ही अपने गिरोह के लोगों को फोन पर दिशानिर्देश देता था.

मुन्ना बजरंगी पुलिस की पकड़ में तो आया पर पुलिस की गोलियों से बच गया. 1997 में स्पैशल टास्क फोर्स ने मुन्ना को पकड़ने के लिए जाल बिछाया, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया. बाद में 11 सितंबर, 1998 को दिल्ली पुलिस के साथ मिल कर मुन्ना को समयपुर बादली क्षानाक्षेत्र में घेर लिया गया.

इस मुठभेड़ में दोनों तरफ से ताबड़तोड़ गोलियां चलीं. मुन्ना को कई गोलियां लगीं. इस के बाद भी वह बच कर भाग निकला था. मुन्ना बजरंगी को छोटा राजन और बबलू श्रीवास्तव गैंग से भी मदद मिलती थी.

मुन्ना बजरंगी मुख्तार अंसारी की तरह राजनीति में जाना चाहता था. लेकिन इस के लिए अपराध की दुनिया से निकलना जरूरी था. इसी को ध्यान में रख कर उस ने लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना एक डमी उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश की. वह एक महिला को गाजीपुर से भाजपा का टिकट दिलवाने की कोशिश में भी लगा था, जिस के चलते मुख्तार अंसारी से उस के संबंध भी खराब हो रहे थे.

पकड़ा गया मुन्ना बजरंगी

मुख्तार अंसारी के लोग उस की मदद नहीं कर रहे थे. बीजेपी से निराश होने के बाद मुन्ना बजरंगी ने कांग्रेस का दामन थामा. वह कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की शरण में चला गया. वह कांग्रेसी नेता जौनपुर जिले के रहने वाले थे, लेकिन मुंबई में रह कर सियासत करते थे. मुन्ना बजरंगी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इस नेता को सपोर्ट भी किया था.

मुन्ना बजरंगी के खिलाफ उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में मुकदमे दर्ज थे. वह पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था. उस के खिलाफ सब से ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज थे. लेकिन 29 अक्तूबर, 2009 को दिल्ली पुलिस ने नाटकीय ढंग से मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में गिरफ्तार कर लिया.

बताते हैं कि मुन्ना को एनकाउंटर का डर सता रहा था. इसलिए उस ने एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी. मुन्ना की गिरफ्तारी के इस औपरेशन में मुंबई पुलिस को भी ऐन वक्त पर शामिल किया गया था.

बाद में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पैशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक है, इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया. तब से उसे अलगअलग जेल में रखा जा रहा था. इस दौरान भी उस पर जेल से लोगों को धमकाने, वसूली करने जैसे आरोप लगते रहे. बताया जाता है कि उस ने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में 40 हत्याएं की थीं.

मुन्ना बजरंगी पिछले 2 साल से खौफ में जी रहा था. अब वह अपनी पत्नी सीमा और बच्चों के साथ आराम से रहना चाहता था. शादी के समय उस की पत्नी सीमा उम्र में उस से 11 साल छोटी थी. वह अमेठी जिले की रहने वाली थी और इलाहाबाद में रह कर पढ़ाई कर रही थी. उसी दौरान मुन्ना को सीमा से प्यार हुआ.

दोनों की शादी सीमा के घर वालों की मरजी के खिलाफ हुई थी. सीमा को इस शादी से कोई मलाल नहीं था. वह सोचती थी कि एक न एक दिन मुन्ना सभी मुकदमों में बरी हो कर आएगा और परिवार के साथ रहेगा.

दिल्ली पुलिस ने जब मलाड, मुंबई से पकड़ कर उसे जेल भेजा तो उस का इंटरस्टेट गैंग नंबर 233 था. जब मुन्ना जेल में बंद था, तब उस का काम और रुपएपैसों का लेनदेन उस का साला पुष्पजीत सिंह देखता था. 16 मई, 2016 को लखनऊ के विकासनगर थानाक्षेत्र में मुन्ना के साले पुष्पजीत सिंह और उस के साथी संजय मिश्रा को मार दिया गया था. दोनों की हत्या में एक बाहुबली विधायक का हाथ था.

2017 में मुन्ना के करीबी ठेकेदार तारिक की भी गोली मार कर हत्या कर दी गई. गोमतीनगर क्षेत्र में हुई इस घटना का भी पुलिस परदाफाश नहीं कर पाई.

इन हत्याओं के बाद मुन्ना को लग रहा था कि लोग उस की हत्या कर देना चाहते हैं. मुन्ना पहले सुल्तानपुर जेल में था, पर वहां उसे खतरा लगा तो उस ने खुद को झांसी जेल में रखने की अपील की. झांसी से

वह मुकदमे की पेशी पर बागपत जेल गया था, जहां उसे गोलियों से छलनी कर दिया गया.

घटती नौकरियां

सरकार ने प्रौविडैंट फंड का जो कानून बना रखा है वह देश में रोजगारों की अच्छी जानकारी देता है. हाल में जारी हुए आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि सितंबर 2017 से मार्च 2018 के बीच प्रौविडैंट फंड का लाभ उठाने वालों की संख्या 39.35 लाख से घट कर 34.40 लाख रही यानी 5 लाख लोगों की नौकरी चली गई.

यह जीएसटी और नोटबंदी का बुरा असर है. छोटे और मझोले व्यापारों पर इन दोनों सरकारी प्रहारों की भारी मार पड़ी है और सरकार है कि बजाय खुद को सुधारने के, लगातार जीएसटी और नोटबंदी के गुणगान कर रही है.

व्यापारियों ने जबरन वसूले जा रहे टैक्स देने तो शुरू कर दिए हैं पर इस का मतलब यह नहीं कि उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है. अगर व्यापारी खुश होते तो इसे हाथोंहाथ लेते. इस ने तो व्यापारियों और उद्योगपतियों को चार्टर्ड अकाउंटैंटों का गुलाम बना दिया है. यह औनलाइन फाइलिंग, कहने को चाहे सरल लगे कि दफ्तर नहीं छोड़ना पड़ता, लेकिन आप इस तरह के सौफ्टवेयर के इतने गुलाम हो जाते हैं कि आप की अपनी सूझबूझ और सोच कुंठित होने लगती है.

नई नौकरियां न मिलने की बात तो एकतरफ है, सवाल यह उठता है कि 125 करोड़ जनता में से सिर्फ 39 लाख लोग ही प्रौविडैंट फंड के दायरे में क्यों आते हैं? क्या बाकी के लिए रोजगार सिर्फ खेती करने या पकौड़े बेचने में ही हैं? सवाल यह भी उठता है कि सरकार ने आखिर क्यों ऐसा कानून बना रखा है जो सिर्फ 39 लाख रोजी पाए लोगों पर लागू होता है?

सरकारों ने असल में ऐसा तंत्र बना रखा है कि सुधार और सुरक्षा के नाम पर एक खास वर्ग को ही काम मिल सके. देश के अधिकांश कामगार खेतों, दुकानों, सड़कों पर काम करते हैं. वे इतना कम वेतन पाते हैं कि उन्हें एंप्लौयड कहना ही गलत होगा. उन की आर्थिक हालत बेरोजगारों सी रहती है.

सरकार के ये आंकड़े सरकार की ही पोल खोलते हैं कि करोड़ों नौकरियां निकलेंगी. यहां तो नौकरियों का ही टोटा हो रहा है.

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