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खाना बनाएं, तनाव भगाएं

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुकिंग को स्ट्रैस बस्टर माना जाता है, क्योंकि जब आप खाना बनाते हैं तो आप उसे बनाने और उस का स्वाद बढ़ाने के लिए तरहतरह की सामग्री का प्रयोग करते हैं. सब्जियों को काटने से ले कर बनाने तक की पूरी प्रक्रिया में आप का ध्यान बंट जाता है, जिस से आप का स्ट्रैस लैवल कम हो जाता है. एक सर्वे में यह पाया गया कि बेकिंग से महिलाओं और पुरुषों में करीब 40% स्ट्रैस कम हो जाता है. इसलिए खाना बनाने को बोझ नहीं, बल्कि अपनी मानसिक और शारीरिक हैल्थ के लिए उपयोगी मानने की जरूरत है.

इस बारे में हाइपर सिटी में आयोजित ‘कुकिंग विद ऐक्सपर्ट’ में आए सैलिब्रिटी शैफ रणवीर बरार का कहना है, ‘‘कुकिंग बैस्ट थेरैपी है, जो किसी भी दिमागी परेशानी को कम कर सकती है. बड़ेबड़े शहरों में कुकिंग से स्ट्रैस लैवल को कम करने की दिशा में वर्कशौप चलाई जा रही हैं. पूरा विश्व इसे थेरैपी मानता है. 5 साल पहले विदेशों में जो स्ट्रैस लैवल था उसे बेकिंग और कुकिंग से 80% तक कम करने में मदद मिली है. मेरी लाइफ में भी कुकिंग की वजह से बहुत परिवर्तन आया है. मैं 16 साल की उम्र में कोयला ढोता था और मसाले कूटता था. आज 23 वर्षों में मैं यहां तक पहुंच पाया हूं. मेरे हिसाब में लड़के हों या लड़कियां सभी के लिए कुकिंग आना आवश्यक है.’’

कुकिंग के निम्न फायदे हैं:

– खाना एकदूसरे को जोड़ता है, फिर चाहे वह फ्रैंड हो या परिवार वाले, अच्छे भोजन की सब की चाह रहती है.

– कुकिंग करते समय तरहतरह के व्यंजनों को काटना पड़ता है, जिस में सब्जियों के कलर और मसालों के फ्लेवर काटने वाले की नसों को शांति प्रदान करते हैं, जिस से तनाव कम होता है.

– सब्जियों को काटना, मसलना, क्रश करना, स्लाइस करना, छीलना आदि सभी काम ध्यान को प्रभावी तरीके से किसी भी समस्या से दूर हटाते हैं, जिस से आप तनावमुक्त हो जाते हैं.

– कुकिंग में क्रिएटिविटी खूब होती है. जितना आप उसे सही तरीके से पेश करेंगे, उतने ही आप नएनए तरीके सोचेंगे. इस से आप गुड फील करेंगे.

– अगर आप अच्छा खाना बनाती हैं, तो अधिकतर फ्रैंड या परिवार वाले आप के इस हुनर की तारीफ करते नहीं थकते. इस से आप का मनोबल ऊंचा होता है.

– जब आप खाना किसी दोस्त या परिवार वालों की पसंद का बनाती हैं और वे उसे खुश हो कर खाते हैं और आप के साथ खुशी को शेयर भी करते हैं, तो इस से आप पर स्ट्रैस की जगह फूड हावी हो जाता है.

– खाना बनाना एक कला है, जो हर व्यक्ति में अलगअलग होती है और शांति देती है.

– खाना बनाना आने पर आप अपना मनपसंद खाना खा सकते हैं, जिस से आप को सुकून मिलेगा और तनाव दूर होगा.

यह सही है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कामकाजी महिलाओं के लिए खाना बनाना आसान नहीं होता. ऐसे में आप अगर स्मार्ट कुकिंग करना चाहती हैं तो यह तैयारी पहले से कर लें:

– कुकिंग में प्रयोग होने वाली पूरी सामग्री का प्रबंध आप नहीं कर सकतीं तो ऐसे में स्मार्ट कुकिंग का सब से अच्छा तरीका यह है कि बाजार में मिलने वाले तरहतरह के मसालों का प्रयोग खाने में करें. इस के लिए पौष्टिकता, टेस्ट और सुगंध बनाने वाले मसालों का ध्यानपूर्वक चयन कर खरीद कर घर में रखें.

– सब्जियों को रात में काट कर, कच्चे मसाले की सामग्री को पीस कर, भिगो कर और भाप दे कर पहले से फ्रिज में रख लें.

– अगर दाल बनानी है तो उसे पहले से भिगो कर रखें ताकि जल्दी पक जाए. इस से उस के पोषक तत्त्व भी कायम रहते हैं और गल भी जल्दी जाती है.

कामकाजी महिलाओं के लिए रणवीर बरार कहते हैं, ‘‘कामकाजी महिलाएं अपना ध्यान न रख कर पूरे परिवार का खयाल रखती हैं. इस से उन का ‘मूड’ और ‘मौरल’ दोनों ही नीचे चले जाते हैं. ऐसे में उन्हें अपना खयाल पहले रखना चाहिए ताकि उन्हें काम के दौरान किसी प्रकार का तनाव न रहे.’’

हैल्दी डाइट प्लान है जरूरी

किचन क्वीन कही जाने वाली महिलाएं भले ही अपने परिवार के 1-1 सदस्य के स्वास्थ्य और स्वाद को ध्यान में रख कर भोजन पकाती हों, मगर जब बात खुद की सेहत और पसंद की आती है, तो वे समझौता कर लेती हैं. इस बाबत एशियन इंस्टिट्यूट औफ मैडिकल साइंस की सीनियर डाइटीशियन डाक्टर शिल्पा ठाकुर कहती हैं कि महिलाओं को खुद के लिए कुछ करना हो तो हमेशा आलस कर जाती हैं. खासतौर पर जब बात खानेपीने से जुड़ी हो, तो खुद के प्रति और भी लापरवाह हो जाती हैं. घर में कुछ भी बचा मिल जाए या फिर बाहर से पैक्ड फूड से ही उन का काम चल जाता है. मगर इस तरह उन के शरीर में सही तरह से पोषक तत्त्व नहीं पहुंच पाते और वे किसी न किसी बीमारी का शिकार हो जाती हैं. ऐसे में बिना सख्त डाइट प्लान के सिर्फ कुछ बातों का ध्यान रख कर भी महिलाएं पोषक आहार ले सकती हैं:

पैक्ड फूड का सेवन कम करें 

अच्छा और स्वास्थ्यवर्धक आहार लेने की कड़ी में महिलाओं को सब से पहले इस बात का ध्यान रखना है कि घर में पके भोजन को ज्यादा अहमियत देनी है. बिस्कुट, केक, नमकीन और पैक्ड फूड का सेवन कम से कम करना है. डा. शिल्पा कहती हैं कि महिलाएं अकसर सही आहार लेने की जगह पैक्ड नमकीन, केक, बिस्कुट और चिप्स खा कर पेट भर लेती हैं. इन सभी फूड आइटम्स में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत अधिक होती है जबकि रोजाना महिलाओं को अपने आहार में केवल 130 ग्राम कार्बोहाइड्रेट ही लेना चाहिए. कार्बोहाइड्रेट की इस मात्र में चीनी, फाइबर और स्टार्च तीनों ही शामिल होते हैं. आहार में इस से अधिक कार्बोहाइड्रेट लेने पर महिलाएं मोटापे का शिकार भी हो सकती हैं.

सुबह का नाश्ता जरूर करें

अधिकतर महिलाएं सुबह का नाश्ता नहीं करतीं और यदि करती भी हैं तो समय से नहीं करतीं. डा. शिल्पा कहती हैं कि सुबह का नाश्ता करना बेहद जरूरी है, क्योंकि रात के खाने के बाद सुबह तक लगभग 12 घंटे पेट में कुछ नहीं जाता. यदि ऐसे में नाश्ता न किया जाए तो ऐसिडिटी बनने लगती है. इसलिए सुबह का नाश्ता 8 से 9 बजे के बीच कर लेना चाहिए. नाश्ते में ताजे फल, स्प्राउट्स और लो फैट दूध लेना सब से अच्छा रहता है. महिलाओं के लिए एनर्जी लैवल को बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि उन्हें सुबह से ही शारीरिक और मानसिक गतिविधियों से जूझना पड़ता है. फल शरीर में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ाते हैं, जिस से ऐनर्जी बढ़ती है. साथ ही इन में मौजूद प्रोटीन और फाइबर्स आहार को संतुलित बनाते हैं.

संतुलित आहार लें

महिलाओं के शरीर को कई जैविक बदलावों से गुजरना पड़ता है. ये बदलाव पीरियड्स शुरू होने से ले कर गर्भधारण करने और मेनोपौज होने तक निरंतर चलते रहते हैं. इस में कई हारमोनल बदलाव भी होते हैं, जिन से महिलाओं को ऐनीमिया, हड्डियों के कमजोर होने और औस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है. इन बीमारियों से उबरने के लिए महिलाओं के शरीर को आयरन, मैग्नीशियम, कैल्सियम, विटामिन डी, विटामिन बी9 जैसे विभिन्न पोषक तत्त्वों की जरूरत पड़ती है. सिर्फ दालरोटी और सब्जी खाने से ये पोषक तत्त्व प्राप्त नहीं किए जा सकते हैं. इस के लिए महिलाओं को सुबहशाम, दिनरात के आहार में बदलाव की जरूरत है. साथ ही उन्हें अलगअलग वक्त पर अलगअलग पोषक तत्त्वों से भरपूर भोजन करने की आवश्यकता है. उदाहरण के तौर पर गेहूं की रोटी की जगह कभीकभी रागी, बाजरा, मक्का या सिंघाड़े के आटे की रोटी खानी चाहिए. इसी तरह दलिया, सूजी और बेसन से बने व्यंजन भी आहार में शामिल करने चाहिए. यदि फलों का सेवन कर रही हैं, तो रोज अलग फल खाएं. किसी एक फल को रोज न खाएं.

भरपूर पानी पीएं

अधिकतर महिलाओं को वाटर रिटैंशन की समस्या होती है. इस तरह की परेशानी में सुबह उठने के बाद चेहरे और शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन आ जाती है.  यह सोडियम और प्रिजर्वेटिव फूड आइटम्स का सेवन करने से होता है. इस से बचने के लिए महिलाओं को खूब पानी पीना चाहिए. पानी से इलैक्ट्रोलाइट लैवल अच्छा बना रहता है, जिस से बीपी में उतारचढ़ाव की समस्या नहीं होती. साथ ही मैटाबोलिज्म का स्तर भी बढ़ जाता है, जिस से शरीर की चरबी नहीं बढ़ती.

कैफीन कम लें

दफ्तर में बैठेबैठे काम करने वाली महिलाओं को चाय और कौफी की लत लग जाती है. डा. शिल्पा कहती हैं कि यह मिथ है कि चाय और कौफी लेने से नींद नहीं आती, बल्कि इस में मौजूद कैफीन के असर के खत्म होते ही और भी अधिक आलस्य घेर लेता है और कमजोरी महसूस होने लगती है. दरअसल, कैफीन कैल्सियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और विटामिन डी जैसे मिनरल्स को शरीर में अवशोषित होने से रोकती है, जिस से चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, अवसाद, थकावट, बेचैनी आदि परेशानियां उन्हें घेर लेती हैं. इसलिए चायकौफी की जगह कोई हैल्थ ड्रिंक लें या जूस लें. इन में मौजूद प्रोटीन और फाइबर से सेहत को लाभ मिलेगा.

ऐसी हो डाइट

कैल्सियम: 19-50 वर्ष की महिलाओं को रोजाना आहार में 1000 मिलीग्राम कैल्सियम लेना चाहिए. इस के लिए दूध, हरी सब्जियां, टोफू और अनाज को भोजन में शामिल करना चाहिए.

मैग्नीशियम: मैग्नीशियम का काम कैल्सियम को रक्त से हड्डियों में अवशोषित करना है.  दिन भर में 400 मिलीग्राम मैग्नीशियम का सेवन महिलाओं के लिए जरूरी है. इस के लिए बीज वाली सब्जियां, खीरा और ब्रोकली खानी चाहिए.

आयरन: महिलाओं को रोजाना अपनी खुराक में 14 मिलीग्राम आयरन जरूर लेना चाहिए. हरी सब्जियां आयरन का सब से अच्छा स्रोत हैं. आयरन के अवशोषण के लिए खुराक में विटामिन सी युक्त पदार्थों को भी शामिल करें.

प्रोटीन: महिलाओं को अपने वजन के हिसाब से प्रति किलोग्राम वजन पर 0.8 ग्राम प्रोटीन हर दिन के आहार में शामिल करना चाहिए.

जिंक: 19 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं को अपने आहार में 8 मिलीग्राम जिंक की मात्र को भी शामिल करना चाहिए. यह त्वचा, बालों, अवसाद और मांसपेशियों से संबंधित समस्याओं को दूर करता है.  चीज, दूध और राजमा जिंक के सब से अच्छे स्रोत हैं.

विटामिन डी: शरीर में कैल्सियम के अवशोषण के लिए विटामिन डी भी बहुत महत्त्वपूर्ण है. सोया मिल्क व मशरूम विटामिन डी के सब से अच्छे स्रोत हैं.

क्या आपकी भी रातों की नींद छिन गई है तो आजमाएं ये घरेलू उपाय

अगर आप रात में अच्छी नींद नहीं लेती हैं तो इसका सबसे बड़ा कारण आपके आसपास मंडराने वाले मच्छर हैं. आप  इनसे बचने के लिए चाहे किसी भी कोने में छुप जाएं पर एक न एक मच्छर आपको ढ़ूढ़ ही लेंगे. मुसीबत ये है कि आप लाख हाथ चलाइए या फिर मशीन लगाइए ये कहीं न कहीं से आ ही जाते हैं. इनका कोई समय नहीं है.

आप कितनी भी सफाई कर लें, ये कभी भी पूरी तरह खत्म नहीं होते हैं. मलेरिया और डेंगू जैसी भयानक बीमारियों को फैलाने वाले ये मच्छर घर के हर कोने में मौजूद होते हैं . मच्छरदानी, स्प्रे, मशीन या दूसरे रासाय‍निक पदार्थों के इस्तेमाल के बावजूद ये जिंदा बच निकलते हैं. पर अगर आप इन घरेलू उपायों को अपनाएंगे तो मच्छर खुद ही आपसे दूरी बना लेंगे.

कपूर जलाकर या फिर मोमबत्ती जलाकर

धुएं से मच्छर दूर भागते हैं. ऐसे में अगर आपके कमरे में मच्छरों ने डेरा डाल रखा है तो वहां एक कैंडल जलाकर रख दें. अगर आपको सिट्रोनेला कैंडल मिल जाए तो और भी बेहतर है. इसके अलावा कपूर के धुंए से भी मच्छर दूर भागते हैं.

 लहसुन का सेवन करें

जो लोग अपने भोजन में लहसुन का अधिक इस्तेमाल करते हैं, मच्छर उनसे दूर ही रहते हैं. दरअसल, लहसुन में तेज गंध होती है. जिससे मच्छर दूर रहते हैं. ऐसे में जो शख्स अपनी डाइट में लहसुन का अधि‍क इस्तेमाल करता है स्वाभाविक रूप से मच्छर उससे दूर रहते हैं.

यूकेलिप्टस या फिर लेमन औयल

मच्छरों से दूर रहने का ये सबसे कारगर उपाय है. आप यूकेलिप्टस या फिर लेमन औयल को शरीर के खुले भाग पर मल लें. इसकी गंध से मच्छर आपके आस-पास भी नहीं भटकेंगे.

ये घरेलू उपाया मच्छरों को दूर रखने के साथ ही इस बात की भी संतुष्ट‍ि देते हैं कि इनके इस्तेमाल से किसी प्रकार का कोई साइडइफेक्ट नहीं होगा.

डीयू छात्रसंघ अध्यक्ष मामला : विश्वविद्यालयों की साख पर सवाल

हमारे शिक्षण संस्थान और शिक्षा पद्धति कितनी बदतर हालत में हैं, इस का शर्मनाक उदाहरण देश के प्रतिष्ठित माने जाने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय में सामने आया है. हाल में दिल्ली विश्वविद्यालय में चुने  गए अखिल भारतीय छात्र संघ के अध्यक्ष अंकिव बसोया को फर्जी डिग्री से प्रवेश लेने के मामले में उस का अध्यक्ष छीन लिया गया और प्रवेश भी रद्द करने की खबर है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी को थिरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी से जवाब मिल गया है कि अंकित की डिग्री फर्जी है. वह बुद्घिस्ट स्टडीज डिपार्टमेंट का छात्र था. इस मामले में दिल्ली पुलिस में चुनाव में उन के विरोधी एनएसयूआई के सन्नी छिल्लर ने शिकायत दी थी. विश्वविद्यालय इस मामले में मौन रहा.

हैरानी की बात है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अंकित बसोया को प्रवेश दे दिया, बिना वैरिफाई किए. इस से यूनिवर्सिटी द्वारा प्रवेश देने की गंभीरता का अंदाज लगाया जा सकता है. मजे की बात यह है कि जब अध्यक्ष की डिग्री पर एनएसयूआई ने सवाल उठाया और जांच की मांग की गई तो बहुत धीमी गति से मामले में जांच की कारवाई शुरू हुई.

देश में सालों से फर्जी डिग्रियों का कारोबार धड़ल्ले से फलफूल रहा है. डिग्रियों की वैद्यता जांचने का विश्वविद्यालयों के पास कोई कारगर पैमाना नहीं है. इसी का फायदा फर्जी डिग्रियों के कारोबारी उठा रहे हैं. इन में निश्चिततौर पर मिलीभगत रहती है. तभी यह धंधा पैर फैला रहा है.

फर्जी डिग्री हासिल करना निश्चित ही बेईमानों का शौर्टकट रास्ता है. ये वे लोग हैं जो धन के बल पर सब कुछ पा लेना चाहते हैं. ज्ञान से इन्हें कोई लेनादेना नहीं है. अच्छेअच्छे संस्थानों में ऐसे लोग घुसपैठ बनाने और ऊंचे पद हथियाने में कामयाब हो रहे हैं. ऐसे लोग ज्ञान के बल पर नहीं, तिकड़मों के महारथी होते है.

दरअसल इस से जो विद्यार्थी मेहनत के बल पर डिग्रियां हासिल करते हैं उन्हें सब से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है.

दिल्ली विश्वविद्यालय के अध्यक्ष पद तक पहुंचे अंकिव बसोया का मामला कोई नया नहीं है. अभी कई महारथियों की डिग्रियों पर सवाल खड़े हैं. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मानव संसाधन विकास फिर सूचना एवं प्रसारण और अब कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की संदिग्ध डिग्री के मामलों की सचाई भी अभी सामने नहीं आ पाई है. इन से पहले दिल्ली के आम आदमी पार्टी सरकार के कानून मंत्री की फर्जी एलएलबी की डिग्री की मामला चर्चित रहा.

यानी जिस देश के शिक्षा मंत्री, राज्य कानून मंत्री की एलएलबी की डिग्री की वैद्यता पर सवाल हो और यहां तक कि प्रधानमंत्री की डिग्री की सचाई देश के सामने न आ पाए तो समझा जा सकता है कि उस देश की शिक्षा व्यवस्था किस दिशा में जा रही हो.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मामले पर ट्वीट करने से पीछे नहीं रहे. उन्होंने भाजपा और संघ को निशाना बनाते हुए लिखा है, श्री छप्पन और उन के  मंत्रियों ने छात्रों को दिखाया है कि भाजपा में मंत्रिमंडल का शीघ्र द्वार फर्जी डिग्री दिखा कर खुलता है. शैक्षिक संस्थानों पर प्रहार और फर्जी डिग्री वालों को सत्ता में बैठाना संघ का पुराना सिद्घांत है इसीलिए डीयू पर संघ का फर्जीकल स्ट्राइक जारी है.

अर्टिगा 2018 : न्यू जेनेरेशन कार

कार उपभोक्ता मारुति सुजुकी अपनी एमपीवी कार अर्टिगा को लौंच करने जा रहा है. यह कार वर्ष 2012 में पहली बार भारतीय बाजार में उतारी गई थी और तब से ले कर अब तक यह अपने सैगमेंट में अव्वल नंबर पर है.

नई अर्टिगा अब कुछ नए फीचर्स जोड़ कर लौंच की जा रही है. यह पहले से ज्यादा लंबी और चौड़ी होगी. और इस गाड़ी में अब हार्टएक्ट प्लैटफौर्म का इस्तेमाल किया गया है जो कंपनी के मुताबिक कार को ज्यादा सुरक्षित बनाता है, साथ ही साथ बेहतर माईलेज भी प्रदान करता है.

यह कार पेट्रोल और डीजल इंजन के साथ आएगी. पेट्रोल में इसे नया 1-5 एल का इंजन दिया जाएगा और इस की हौर्सपावर 105 पीएस तक कर देगा.

डीजल में 1.3 एल का डीडीआईएस इंजन दिया जाएगा जिस की पावर 75 हौर्सपावर होगी.

इस कार में काफी नए फीचर्स उपलब्ध कराए गए हैं जैसे-टचस्क्रीन इनफोटेनमेंट सिस्टम, हाइट एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, औटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, 2 एयरबैग (स्टैंडर्ड), एबीस विद ईबीडी, प्रोजेक्टर हैडलैंप्स, 15 इंच एलौय व्हील और एलईडी लाइट्स भी दी गई हैं.

नई कार 5 रंगों में उपलब्ध होगी, जिन में पीयर मटैलिक, स्टैंडर्ड ग्रे, ब्लू, व्हाइट और सिल्वर शामिल होंगे. कार का इंटीरियर भी शानदार दिया गया है.

कंपनी ने इस की बुकिंग लेनी शुरू कर दी है. कार की बुकिंग के लिए 11,000 एडवांस बुकिंग है. गाड़ी को प्राइस कंपनी 21 नंवबर को ऐलान कर देगी. देखते हैं न्यू अर्टिगा का जलवा.

सीबीआई और आरबीआई में घमासान

सीबीआई और आरबीआई दोनों में घमासान होने से यह पक्का हो गया है कि इस सरकार की पकड़ न आम लोगों की सुरक्षा पर है, न पैसे पर. अगर सीबीआई के सब से ऊंचे अफसर अपने से नीचे वालों को गिरफ्तार करने लगें और नीचे वाले खुद ऊपर वालों की शिकायतें करने लगें तो पक्का है कि सीबीआई यानी सैंट्रल ब्यूरो औफ इंटैलीजैंस की जगह सड़ा बैगन औफ इंडिया बन गया है. इसी तरह आरबीआई में रिजर्व बैंक औफ इंडिया की तरह काम नहीं कर रहा रुपया बरबादी इंजन बन गया है.

सरकार की समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करे. नरेंद्र मोदी को तो मंदिरों में पूजा करने, विदेशों के दौरे करने, मूर्तियों के फीते काटने, भाषण देने, नेहरू खानदान पर दोष मढ़ने के अलावा कुछ और काम नहीं है. उन के पहले दायां हाथ रहे अरुण जेटली केवल कमरे में बैठ कर बोल सकते हैं क्योंकि वे बीमार ही चल रहे हैं. आरबीआई उन की सुनता नहीं है या समझता है कि वकील को भला फाइनैंस के मामलों का क्या पता.

सीबीआई का काम राजनाथ सिंह के हाथों में होना चाहिए पर उन्हें भी और मंत्रियों की तरह देशभर में फालतू में हांफते देखा जा सकता है, देश का हिसाब रखते नहीं.

सीबीआई का अंदरूनी झगड़ा डराने वाला है क्योंकि ऊपर के दोनों अफसरों ने एकदूसरे पर करोड़ों की रिश्वत लेने का आरोप लगाया है. उम्मीद यह की जाती रही है कि सीबीआई ही बेईमानों को पकड़ेगी पर पिछले 4 डायरैक्टरों पर तरहतरह के इलजाम लग चुके हैं. अब हालात ये हो गए हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने एक तरह से दोनों ऊपरी अधिकारियों को कठघरे में खड़ा कर दिया है. जो नया अफसर सरकार ने बनाया है वह कोई फैसले नहीं ले सकता. सरकारी तोता अब पिंजरा तोड़ चुका है पर उस के पर तो सैकड़ों डोरों से बंधे हैं जो अपनी मनमरजी का काम कराते रहे हैं. साफ है कि जितने छापे सीबीआई ने पिछले 4 सालों में मारे हैं सारे सरकार ने बदले की भावना और विपक्षियों की टांग तोड़ने के लिए मरवाए हैं और सीबीआई ने बढ़चढ़ कर फायदा उठाया है.

अब जनता जनार्दन यह नहीं कह सकती कि पुलिस या सरकार गलत है तो सीबीआई से जांच कर लो. वे दिन हवा हो गए जब सीबीआई पर भरोसा था. अमेरिकी फिल्मों में अकसर एफबीआई और एनआईए (फैडरल ब्यूरो औफ इनवैस्टीगेशन और नैशनल इंटैलीजैंस एजेंसी) की ज्यादतियों के सीन दिखाए जाते हैं जबकि यहां सीबीआई को साफसुथरा, कर्मठ, मेहनती, देशप्रेमी ही दिखाया जाता रहा है. अब कलई उतर गई है. सोने की परत के नीचे पीतल का नहीं कच्ची मिट्टी का बरतन है जिस में जो चाहे जहां मरजी छेद कर ले.

आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना का झगड़ा सामने आया है क्योंकि दोनों को अब नरेंद्र मोदी की पकड़ पर भरोसा नहीं रह गया है. सरकार ने जो प्रधानमंत्री कार्यालय बना कर सत्ता कुछ हाथों में समेट ली थी, उन हाथों के काले कारनामे इन दोनों अफसरों के पास मौजूद हैं. इन का चाहे तो भी कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता, इसीलिए छुट्टी पर जाने के आदेशों के बावजूद इन दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की हिम्मत दिखाई. सरकार राज करना भूल चुकी है. इसे तो यज्ञहवन करना ही आता है.

प्रियतम न्यारा

तू कौन है मेरा,

यह अब मैं ने जाना,

तेरे बिन हर लमहा,

लगता है बेगाना.

हर क्षण तुझे ही जपती हूं,

तेरी सांसों की आहट भर से,

तितली बन खुशी से उड़ती हूं.

तू है उमड़ता सागर,

या कोई स्थिर किनारा,

मैं एक नन्हा सा मोती,

तुझ से ही वजूद सारा.

तू बूंद है पहली बारिश की,

मैं सदियों से प्यासी चातक,

हृदय चक्षु में बस गया तू ही,

अब देखूं कहां तक?

तू भावनाओं का इक दरिया,

मैं गोते लगाती कश्ती,

तू लहलहाता वृक्ष सा,

मैं चरणों में बिखरी मिट्टी.

तू है सुहावना मौसम,

मैं ठंडी मदमाती पवन,

तू भोर की अद्भुत लाली,

मैं राह ताकती विरहन,

मैं हूं अधूरी तुझ बिन.

तू ही तो मेरा साजन

शृंगार तू मेरे यौवन का,

पिया तू मेरा आभूषण.

तू श्रद्धा का जीवंत एहसास है,

तू मेरा जीवन तू ही प्यास है,

तू आरजू है मेरी तू प्रेरणा है,

तू ही अभिलाषा तू संवेदना है.

तेरा जो भी स्वरूप है,

मैं प्रिये हूं तेरी,

तू प्रियतम न्यारा.

     -प्रिया रानी

विधानसभा चुनाव : हर ओर बगावत का शोर

टिकट से ही नेता की वफादारी है, टिकट न मिलने पर नेता के सामने बगावत की लाचारी है. टिकट न मिले तो एक झटके में बगावत पर उतर आता है. वर्षों की वफादारी का गुणगान गालियों में तब्दील होते देर नहीं लगती. बगावती नेता अपनी ही पार्टी और नेतृत्व को खिलाफ आग उगलने लगता है.

विधानसभा चुनावों में बगावत का बवंडर उठ रहा है. इन दिनों 5 राज्य विधानसभा चुनावों में टिकट बंटवारा चल रहा है. टिकट की उम्मीद पर जिंदा जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला, वह अपने नेताओं को गरियाता फिर रहा है. कल तक जो पार्टी उस के लिए मांईबाप थी, उस में वह अब हजार दोष भर गए हैं.

राजस्थान से ले कर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड तक में टिकट के बिना बगावत का शोर है. पार्टियों में बगावत के झंडे बुलंद हो रहे हैं. अनगिनत नेता बगावत के झंडे लिए घूम रहे हैं.

राजस्थान के रणबांकुरे स्वभाव से बगावती रहे हैं. अभी भाजपा के बगावतियों का गुस्सा शांत हुआ ही नहीं था कि कांग्रेस ने 152 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की तो प्रदेश भर में बगावत का शोर मच गया. यहां 30 से ज्यादा सीटों पर बगावत का डंका बज रहा है. भाजपा के 23 विधायकों सहित मंत्रियों को टिकट न मिलने पर समर्थकों सहित पार्टी कार्यालयों और बड़े नेताओं के यहां प्रदर्शन पर उतर आए थे.

राजधानी जयपुर से ले कर राज्य के अलगअलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए. बड़े नेताओं का घेराव किया गया. भाजपा में देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां, जल संसाधन मंत्री सुरेंद्र गोयल का टिकट कटने से उन के समर्थकों ने जम कर हंगामा किया. पार्टी के प्रदेश महामंत्री कुलदीप धनकड़ ने पार्टी से ही इस्तीफा दे दिया. वह जयपुर की विराटनगर सीट से टिकट मांग रहे थे. भाजपा ने उन की जगह डा. फूलचंद को प्रत्याशी बना दिया.

उधर कांग्रेस की बात करें तो दिल्ली में नाराज नेताओं के समर्थकों ने राहुल गांधी के घर के बाहर प्रदर्शन किया. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यालय के बाहर अशोक गहलोत और भंवर जितेंद्र सिंह की गाड़ियां रोक कर नारेबाजी की. सचिन पायलट को आक्रोश देखते हुए पिछले दरवाजे से निकलना पड़ा.

राजस्थान कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. बीडी कल्ला को टिकट नहीं मिलने पर समर्थकों ने बीकानेर की सड़कों पर प्रदर्शन किया. जयपुर के पार्टी कार्यालय के बाहर आक्रोश का माहौल था. जयपुर की पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को किशनपोल से टिकट न मिलने पर विरोध में पार्टी के सभी पदों से राहुल गांधी को सीधे इस्तीफा भेज दिया. कोटा, धौलपुर, फलौदी, बसेड़ी, शाहपुरा, लाडपुरा में गुस्से का नजारा देखा गया.

भाजपा ने पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह और उन के पुत्र को तवज्जो नहीं दी तो उन के पुत्र मानवेंद्र सिंह ने भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस का थामने में देरी नहीं की. मानवेंद्र सिंह को कांग्रेस ने हाथोंहाथ लिया और उन्हें प्रदेश की मुख्यमंत्री व सब से ताकतवर नेता वसुंधरा राजे के सामने उतार दिया.

प्रदेश में विधानसभा की 200 सीटें हैं. यहां 19 नवंबर को नामांकन की आखिरी तारीख है और  7 दिसंबर को मतदान होगा. जनसेवा के लिए टिकट चाहिए. बिना टिकट और कुर्सी के जनता की सेवा कैसे करें नेताजी? नेता की जान टिकट औैर फिर कुर्सी में बसी है. टिकट नहीं तो कुछ नहीं. नेता की टिकट से वफादारी, न मिली तो बगावत की लाचारी.

तांत्रिक का मायाजाल : क्या हरिराम भी उनमें से एक था

आज के युग को भले ही वैज्ञानिक युग कहा जाता है, लेकिन समाज में आज भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो अंधविश्वास के चक्कर में अपनी सुखी जिंदगी को और खुशहाल बनाने के लिए तथाकथित चमत्कारी ढोंगी तांत्रिकों, पाखंडी बाबाओं की शरण में जाते हैं और अपनी जिंदगी को नरक बना लेते हैं. पैसा खर्च होता है अलग से. अंधविश्वासी लोगों के सहारे ही तांत्रिकों और पाखंडी बाबाओं की दुकानें चलती हैं.

जिस तांत्रिक की बात हम कर रहे हैं, वह भी ऐसा ही था. गांव शरीफ नगर, जिला मुरादाबाद निवासी राजेंद्र सिंह का बेटा बाबू काफी समय से बीमार चल रहा था. दिनबदिन राजेंद्र की माली हालत खराब होती जा रही थी. बाबू की बिगड़ती हालत को देखते हुए गांव के एक व्यक्ति ने राजेंद्र को सलाह दी कि वह उसे राजपुर गांव के तांत्रिक हरिराम के पास ले जाए.उसी व्यक्ति ने बताया कि तांत्रिक हरिराम के पास ऐसी सिद्धि है कि वह बाबू को कुछ ही दिन में ठीक कर देगा. अपने बेटे की हालत देख कर राजेंद्र ने यह बात अपनी बीवी आरती को बताई. अगले ही दिन यानी 17 जुलाई, 2018 को राजेंद्र अपनी पत्नी आरती और बेटे बाबू को साथ ले कर गांव राजपुर के तांत्रिक हरिराम के पास जा पहुंचा.

हरिराम घर पर ही मिल गया. घर आए ग्राहकों को देख वह खुश हुआ. आगंतुकों को जलपान कराने के बाद हरिराम ने राजेंद्र से आने का कारण पूछा. वैसे हरिराम बाबू का चेहरा देखते ही समझ गया था कि उन के बेटे को कोई परेशानी है. राजेंद्र कुछ बताता, इस से पहले ही आरती ने बोलना शुरू कर दिया, ‘‘बाबा, हमारा बेटा बाबू काफी दिनों से परेशान है. इस के चक्कर में हम भी परेशान रहते हैं. ये न तो ठीक से कुछ खातापीता है और न ही रात में ठीक से सो पाता है. ये अजीबअजीब सी हरकतें करता है. आप देख कर बताओ, इसे क्या परेशानी है.’’

आरती की बात खत्म होते ही हरिराम ने बाबू को अपने सामने बिठा कर उस का हाथ अपने हाथों में थाम लिया और उस के हाथ की नब्ज टटोलने लगा. इस दौरान उस की आंखें बाबू के चेहरे पर गड़ी रहीं. कुछ देर देखने के बाद वह अपने निर्णय पर पहुंच गया. हरिराम ने परेशानी भरी आवाज में कहा, ‘‘इस में तुम्हारे बच्चे का कोई दोष नहीं है. दोष उस का है जो इस के शरीर में समाया हुआ है. साफ कहूं तो तुम्हारे बेटे पर बहुत खतरनाक प्रेतात्मा का साया है. जिसे भगाने के लिए तंत्र विद्या का सहारा लेना होगा. अगर ऐसा न किया गया तो यह साया बच्चे को जीने नहीं देगा. ढील देने से लड़के की जान भी जा सकती है.’’

तांत्रिक हरिराम की बात सुन कर आरती का चेहरा उतर गया. ऐसे मामलों में महिलाएं कुछ ज्यादा ही भावुक हो जाती हैं. अपने बेटे के बारे में सुन कर आरती हरिराम की सारी बातें मानने को तैयार हो गई.
आरती देखनेभालने में ठीकठाक थी. हरिराम ने उस के मन की सारी कमजोरी पढ़ ली थी. वह समझ गया था कि उसे शीशे में उतारना मुश्किल नहीं है. भले ही उसे बाबू का इलाज करना था, लेकिन आरती को देख कर वह खुद दिल का मरीज बन गया था.हरिराम काफी दिनों से तंत्रमंत्र की दुकान चला रहा था. उसे इस सब का इतना तजुर्बा था कि वह रोगी को देख कर षडयंत्र रच डालता था. आरती को देखतेदेखते ही वह उस के बेटे की परेशानी भूल गया और मां के साथ भोगविलास की योजना बना डाली.

हरिराम ज्यादातर अपने घर पर ही छोटीमोटी झाड़फूंक किया करता था. लेकिन जब किसी औरत को देख कर उस का मन मैला हो जाता था तो वह दूसरा रास्ता खोजता था. ऐसे मामले वह सब कुछ मरीज के घर पर ही करना ठीक समझता था. वह समझता था कि मरीज का घर ज्यादा सुरक्षित जगह है.आरती को देखने के बाद उस ने उस के बेटे का इलाज उसी के घर पर करने की बात कही. हरिराम ने आरती को समझाते हुए कहा कि बाबू के ऊपर खतरनाक भूत का साया है जो तुम्हारे घर में ही मौजूद है. उसे भगाने के लिए मुझे तुम्हारे घर आ कर तंत्र विद्या करनी होगी.

आरती और राजेंद्र को यह सुविधाजनक लगा, इसलिए उन्होंने हां कर दी. विचारविमर्श के बाद अनुष्ठान करने के लिए 23 जुलाई सोमवार का दिन तय किया गया. हरिराम ने उन्हें यह भी बता दिया कि इस अनुष्ठान के लिए उन्हें 5 हजार रुपए देने होंगे. साथ ही यह भी कि तंत्रमंत्र का अनुष्ठान देर रात में होगा.
अनुष्ठान के लिए जिसजिस सामान की जरूरत थी, हरिराम ने उस की एक लिस्ट बना कर दे दी. घर लौट कर राजेंद्र और आरती ने हरिराम द्वारा दी गई लिस्ट के हिसाब से सामान खरीद कर रख दिया.23 जुलाई, 2018 को पूर्व योजनानुसार हरिराम तांत्रिक देर रात आरती के घर पहुंच गया. वहां पहुंच कर हरिराम ने घर वालों को एक साथ बिठा कर समझा दिया, जिस से अनुष्ठान में किसी तरह का विघ्न न आए. हरिराम ने उन लोगों को बताया कि तंत्रमंत्र का कार्यक्रम देर रात तक चलेगा. इस दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति का घर के आसपास या पूजास्थल पर आना वर्जित रहेगा. अगर किसी ने भी उस की बात नहीं मानी तो परिणाम उलटे भी हो सकते हैं.

घर के सदस्यों को जरूरी बातें बता कर हरिराम ने अनुष्ठान में काम आने वाला सामान जिस में कुछ हड्डियां, लोबान, धूप, गरुड़ का पंजा, नींबू, चाकू और हवन सामग्री वगैरह निकाल कर फर्श पर रख दिया. पूरी तैयारी कर के हरिराम ने लोहे के एक तसले को हवन कुंड बना कर मंत्रोच्चार शुरू कर दिया. उस ने आरती और उस के पति राजेंद्र व उन के बेटे बाबू को अपने पास बैठा लिया.

अनुष्ठान में हरिराम तांत्रिक ने मिट्टी की हांडी रखते हुए उस की पूजा की, फिर हांडी बापबेटे को थमाते हुए कहा, ‘‘आप दोनों इस हांडी को ले कर श्मशान जाओ और वहां से इस में किसी ठंडी पड़ी चिता की राख भर कर ले आओ. लेकिन ध्यान रखना कि वापसी में इस बरतन को कोई व्यक्ति देखने न पाए. एक बात ध्यान रखना कि मुझे अनुष्ठान करने में डेढ़-2 घंटे लग सकते हैं. अनुष्ठान खत्म होने से पहले हांडी को ले कर घर में मत घुसना. ऐसा किया तो मेरा अनुष्ठान तो व्यर्थ जाएगा ही, प्रेतात्मा तुम्हारे घर का अनिष्ट भी कर सकती है.’’

तांत्रिक की बात सुन कर डर के मारे राजेंद्र के पैर कांपने लगे. पहले तो उसे लगा कि वह इस काम को नहीं कर पाएगा लेकिन सवाल बेटे की जिंदगी का था. राजेंद्र ने हांडी को एक थैले में छिपाया और अपने बेटे को साथ ले कर सब की नजरों से बचतेबचाते श्मशान की ओर बढ़ गया.श्मशान में पहुंच कर डरतेडरते राजेंद्र ने जैसेतैसे श्मशान में ठंडी पड़ी एक चिता की राख हांडी में भर ली और बिना देर लगाए श्मशान की हद से बाहर निकल आया. बाहर आ कर उस ने हांडी को पूरी तरह से पैक कर के थैले में रख लिया फिर मोबाइल निकाल कर टाइम देखा. पता चला कि अभी उसे घर से निकले मात्र पौना घंटा हुआ था. जबकि तांत्रिक ने उसे 2 घंटे बाद आने को कहा था. वक्त के हिसाब से अभी उन्हें करीब सवा घंटा घर से बाहर रहना था.

राजेंद्र ने जैसेतैसे मुश्किल से आधा घंटा बाहर गुजारा और फिर आरती के मोबाइल पर फोन मिला दिया. लेकिन कई बार घंटी जाने के बाद भी मोबाइल नहीं उठाया गया तो राजेंद्र परेशान हो उठा. उस ने फिर से आरती का नंबर मिलाया तो बारबार काल आने से हरिराम समझ गया कि काल राजेंद्र की ही होगी. उस ने काल रिसीव कर के फोन कान से लगाया. राजेंद्र समझ गया कि लाइन पर हरिराम है. उस ने हरिराम से पूछा, ‘‘बाबा, आप की पूजा में कितना वक्त लगेगा?’’

हरिराम ने बताया कि सब कुछ ठीकठाक निपट गया. एक पूजा पूरी हो चुकी है, अभी एक और बाकी है. मैं उसी की तैयारी में लगा हूं. तुम अभी आधे घंटे बाद आना.राजेंद्र को फोन लगाए मुश्किल से 20 मिनट ही गुजरे थे कि हरिराम का फोन आ गया. राजेंद्र ने फुरती से काल रिसीव कर के पूछा, ‘‘हां बाबाजी, हम आ जाएं क्या?’’जवाब में हरिराम ने कहा, ‘‘जल्दी आओ, मैं ने तुम्हारे घर की प्रेतात्मा अपने कब्जे में कर ली है. तुम्हारे आते ही प्रेतात्मा तुम्हारे घर से हमेशाहमेशा के लिए चली जाएगी.’’

हरिराम की बात सुन कर राजेंद्र हांडी को छिपाते हुए बेटे के साथ घर पहुंच गया. घर पहुंच कर राजेंद्र ने पूजास्थल पर नजर दौड़ाई तो उस के होश उड़ गए. अनुष्ठान की जगह के पास उस की बीवी आरती और उस के भाई की बीवी बेहोशी की हालत में पड़ी थीं. उन दोनों को जमीन पर पड़े देख राजेंद्र घबरा गया.
उस ने इस बारे में हरिराम से पूछा तो वह बोला, ‘‘तुम्हें जरा भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हारे बेटे की बीमारी पूरी तरह खत्म हो गई. इस पर जो प्रेतात्मा सवार थी, बहुत ही खतरनाक थी. जातेजाते भी तुम्हारी बीवी और संगीता को जबरदस्त झटका दे गई, जिस की वजह से दोनों मूर्छित हो गईं. लेकिन तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है. दोनों जल्दी ही होशोहवास में आ जाएंगी.’’

इस के बाद हरिराम ने उसे और उस के बेटे को अनुष्ठान की जगह बैठने के लिए इशारा किया. दोनों बैठ गए तो हरिराम ने उन के माथे पर रोली और चावल का तिलक लगाया. साथ ही उस ने दोनों से हवनकुंड की ओर झुकने का इशारा किया. हरिराम ने सामने रखी हांडी की ओर इशारा कर के बताया कि तुम्हारे घर की बुरी आत्मा अब मेरे कब्जे में है, उसे मैं ने इस हांडी में कैद कर लिया है. छोटी सी वह हांडी मिट्टी के ढक्कन से ढकी हुई थी. हरिराम ने हांडी को लाल कपड़े से टाइट कर के बांधा हुआ था. उस ने बताया कि प्रेतात्मा को मुझे इसी वक्त श्मशान में ले जा कर गाड़ना होगा. यह काम मेरा है. तुम किसी भी तरह परेशान मत होना. तुम्हारी बीवी और तुम्हारे भाई की पत्नी कुछ समय बाद होश में आ जाएंगी.
राजेंद्र को समझाने के बाद हरिराम ने अपना सारा सामान झोले में डाला और रात में ही अपने घर चला गया. आरती और उस की देवरानी संगीता बाकी रात बेहोशी की हालत में पड़ी रहीं. अगली सुबह करीब 5 बजे दोनों को होश आया.

उन के होश में आते ही राजेंद्र ने उन से बेहोशी का कारण पूछा तो आरती ने बताया कि अनुष्ठान के दौरान बाबा ने उसे खाने के लिए प्रसाद और जल दिया था, जिसे खाते ही उसे चक्कर आने लगा था. फिर वह बेहोश हो गई. उस के बाद उस के साथ क्या हुआ, उसे नहीं मालूम. उसी समय संगीता की भी बेहोशी टूटी. जब दोनों सामान्य स्थिति में आईं तो घर वालों ने उन से विस्तार से पूरी बात बताने को कहा.

इस पर संगीता ने बताया कि जिस वक्त वह तंत्रमंत्र क्रिया देखने उस कमरे में गई तो आरती बेहोश पड़ी हुई थी. उस के सारे कपड़े भी अस्तव्यस्त थे. उस की हालत देखते ही उस ने आरती के कपड़े ठीक किए और बाबा से उस के बेहोश होने के बारे में पूछा. बाबा ने बताया कि अनुष्ठान के दौरान मैं ने आरती से प्रसाद लेने को कहा तो उस ने आनाकानी की, जिस की वजह से उस की यह हालत हुई. अगर वह मेरी बात मान कर प्रसाद ले लेती तो उस की यह हालत नहीं होती. यह प्रेतात्माओं का प्रसाद है, अगर कोई इस प्रसाद को खाने में आनाकानी करेगा तो उस का यही हश्र होगा.संगीता हिम्मत कर के अनुष्ठान स्थल पर चली तो आई थी लेकिन बाबा की बात सुन कर और आरती की हालत देख कर बुरी तरह घबरा गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह वहां से चली जाए या वहीं रुके.

सोचविचार कर उस ने वहां से चुपचाप खिसकने की सोची और पीछे मुड़ने लगी. उसे पीछे मुड़ते देख तांत्रिक हरिराम जोर से चीखा, ‘‘तुम भी वही गलती दोहराने जा रही हो, आगे कदम मत बढ़ाना वरना तुम्हारा भी वही हश्र होगा जो तुम्हारी जेठानी का हुआ है.’’तांत्रिक की बात सुन कर उस के आगे बढ़े कदम ठिठक गए. संगीता फुरती से पीछे मुड़ी और हवनकुंड के सामने जा कर बैठ गई.

हरिराम समझ गया कि उस की युक्ति कामयाब रही. संगीता के बैठते ही हरिराम ने उसे भी वही प्रसाद खाने के लिए दिया जो उस ने आरती को खिलाया था. प्रसाद ग्रहण करते ही संगीता की आंखें भी नींद से भारी होने लगीं. प्रसाद खाने के कुछ पल बाद वह भी वहीं लुढ़क गई. उस के बाद उस के साथ क्या हुआ, उसे कुछ पता नहीं था.पूरी तरह होश में आने के बाद दोनों ने अपने अंगवस्त्र देखे तो उन्हें पता चल गया कि तंत्रमंत्र के नाम पर तांत्रिक हरिराम ने उन के साथ कुकर्म किया था. हकीकत का अहसास होते ही आरती और संगीता खुद को ठगा सा महसूस करने लगीं. जब उन्हें पूरा विश्वास हो गया कि तांत्रिक ने उन की इज्जत लूट ली है, तो उन्हें बहुत गुस्सा आया.

आरती ने अपने पति राजेंद्र को हकीकत बता कर हरिराम को सबक सिखाने को कहा. सोचविचार कर इस बात को पूरी तरह गुप्त रखने का निर्णय लिया गया. आरती और उस के घर वाले जान चुके थे कि तांत्रिक हरिराम को पैसे और भोग के लिए कभी भी बुलाया जा सकता है.आरती, उस की देवरानी संगीता और राजेंद्र ने तांत्रिक को अपने जाल में फंसाने का फैसला ले लिया. तय हुआ कि तांत्रिक हरिराम के सामने इस बात का जिक्र नहीं आना चाहिए.

योजना के तहत 2 दिन बाद यह दिखाने के लिए कि दोनों महिलाओं को अपने साथ हुए दुराचार का पता नहीं लगा, आरती ने तांत्रिक के मोबाइल पर फोन कर के उस की खैरखबर पूछी. आरती ने हरिराम को खुश करने के लिए उसे बताया कि उस का तंत्रमंत्र अनुष्ठान काम कर गया है. बाबू की हालत पहले से बहुत अच्छी है.आरती की बात सुन कर तांत्रिक हरिराम फूला नहीं समाया. उस के दिल में बैठा डर पूरी तरह खत्म हो गया. दरअसल, उस रात के अपनेकुकर्म को ले कर वह काफी परेशान था. उसे डर था कि दोनों महिलाओं ने उस के कुकर्म की कहानी अगर अपने घर वालों को बता दी तो उस की शामत आ जाएगी. लेकिन आरती की बातों से उस के मन का डर पूरी तरह खत्म हो गया.

आरती की बात सुन कर हरिराम ने कहा कि तुम लोग परेशान न हो. तुम्हारे घर पर जो प्रेतात्मा थी, उसे मैं ने श्मशान में दफना दिया है. तुम्हारे घर पर इस तरह की कोई भी परेशानी नहीं आएगी. हरिराम की बात सुन आरती ने कहा कि बाबा हम चाहते हैं कि लगे हाथों तंत्रमंत्र अनुष्ठान एक बार फिर से करा लें, जिस से भविष्य में हमारे बेटे या परिवार के किसी भी सदस्य पर प्रेतात्मा का साया न पड़े. आरती की बात सुन कर हरिराम खुश हो गया. उस ने कहा कि अनुष्ठान का दिन बता दें, मैं आ जाऊंगा.

उसी दिन शाम को आरती ने हरिराम के मोबाइल पर काल कर के उसे जानकारी दी कि हम इसी 26 तारीख को पहले की तरह अनुष्ठान कराना चाहते हैं. आरती ने यह भी कहा कि वह आ कर अनुष्ठान के सामान के लिए पैसे ले जाए. बाकी सामान हम बाजार से खरीद लेंगे.आरती से हुई बात के अनुसार हरिराम 26 जुलाई को दिन में ही रुपए लेने पहुंच गया. तांत्रिक के घर आने तक घर में किसी को भी इस बात की भनक नहीं लगने दी गई. जब तांत्रिक को विश्वास हो गया कि सब कुछ ठीकठाक है, तो उस ने बाबू को अपने पास बुला कर उस के हाथ की नब्ज टटोली.

तभी योजनानुसार उस के घर वालों ने तांत्रिक को पकड़ लिया. पासपड़ोस वाले भी एकत्र हो गए थे. आरती ने उन्हें बताया कि यह ढोंगी तांत्रिक है और इस ने हमारी इज्जत से खेलने की कोशिश की थी.
यह सुनते ही आरती के घर पर लोगों का मजमा लग गया. आरती ने सब के सामने हरिराम तांत्रिक की करतूत रखते हुए अपनी इज्जत लूटने वाली बात बताई तो लोगों के माथे पर बल पड़ गए.

इस के बावजूद हरिराम अपनी गलती मानने को तैयार नहीं था. हरिराम ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि राजेंद्र के परिवार पर बहुत खतरनाक प्रेतात्मा थी, जिसे उस ने तंत्रमंत्र से भगाया. आप लोग मुझे ठीक से नहीं जानते. मैं ने कई महीने तक तंत्रमंत्र से भूत भगाने की साधना की है. अगर आप लोग मुझ से भिड़े तो अपनी तंत्र विद्या से सब का अहित कर दूंगा.

हरिराम की बातें सुन कर वहां मौजूद लोगों ने हरिराम की पिटाई करनी शुरू कर दी. जब हरिराम को लगने लगा कि अब उस की खैर नहीं तो वह लाइन पर आ गया. उस ने अपनी गलती के लिए सब के सामने हाथ जोड़ कर माफी मांगी.जब पिटतेपिटते उस की हालत खस्ता हो गई तो गांव के बुजुर्गों ने जैसेतैसे गांव वालों को समझाया. लोगों ने उस की पिटाई बंद कर दी. इसी दौरान किसी ने पुलिस को सूचना दे दी थी. लेकिन पुलिस वहां पर पहुंच पाती, इस से पहले ही गांव वालों ने उसे कोतवाली ठाकुरद्वारा की पुलिस के हवाले कर दिया.

कोतवाली प्रभारी रवींद्र प्रताप ने हरिराम को हिरासत में ले कर उस से कड़ी पूछताछ की. लेकिन हरिराम ने अपना मुंह बंद ही रखा. जब उसे लगा कि मुंह खोलना ही पड़ेगा तो वह टूट गया. पुलिस पूछताछ में उस ने जो बताया, वह हैरतअंगेज था. पता चला कि हरिराम तंत्रमंत्र विद्या की एबीसीडी तक नहीं जानता था. फिर भी उस की तंत्रमंत्र की दुकान काफी समय से चल रही थी. वह न तो कोई खास पढ़ालिखा था और न ही उस ने तंत्रमंत्र की कोई शिक्षा ली थी.

जिला ऊधमसिंह नगर, उत्तराखंड के थाना जसपुर से पश्चिम की ओर एक गांव है महुआडाबरा. इस के पास ही गांव है राजपुर नादेही. यही हरिराम का पुश्तैनी गांव है. हरिराम अपने 3 भाइयों में तीसरे नंबर का था. हरिराम के बड़े भाई रूपचंद ने 2 शादियां की थीं. उस की दोनों पत्नियों में से एक ही मां बन पाई, वह भी लड़की की. रूपचंद की माली हालत को देख उस की एक बीवी उसे छोड़ कर चली गई थी. पहली बीवी के चले जाने के बाद किसी ने रूपचंद की हत्या कर दी. तब तक हरिराम शादी लायक हो चुका था.
रूपचंद की बीवी जवानी में ही विधवा हो गई थी, उस के घर वालों ने हरिराम को समझाबुझा कर रूपचंद की बीवी को उस के गले बांध दिया. भाभी से शादी के बाद हरिराम की जिम्मेदारी बढ़ गई. बड़े भाई की बेटी भी अब उसे ही पालनी थी.

हरिराम शुरू से ही निकम्मा था. लेकिन जब वह गृहस्थी से बंध गया तो कामकाज देखना उस की मजबूरी बन गई. उस ने रोजीरोटी चलाने के लिए साइकिल से गांवगांव जा कर छोले बेचने का काम शुरू कर दिया. भागदौड़ कर के हरिराम इतना कमाने लगा था कि उस के छोटे से परिवार की गुजरबसर हो सके. छोले बेचने की वजह से क्षेत्र में उस की अच्छी जानपहचान बन गई थी.उसी दौरान हरिराम एक दिन एक मजार के सामने से गुजर रहा था. मजार पर काफी भीड़ थी. वहां बैठा एक मौलवी बारीबारी से लोगों को अपने पास बुलाता और उन की परेशानी सुन कर हल बताता. हर व्यक्ति को वह राख की पुडि़या थमा देता था. किसी को भूतप्रेत का साया बता कर वह ताबीज भी बना कर देता था.

हरिराम ने देखा कि थोड़ी ही देर में मौलवी के सामने रुपयों का ढेर लग गया. हरिराम ने सोचा कि वह सारे दिन भागदौड़ कर के भी रोजीरोटी लायक ही कमा पाता है और यह मौलवी मजार के नाम पर बैठेबिठाए हजारों रुपए कमा रहा है.

मौलवी की कमाई देख उस का मन बदलने लगा. उस ने सोचा कि जब मौलवी बैठेबिठाए इतने रुपए कमा सकता है तो वह क्यों नहीं कमा सकता. इस के पहले हरिराम भी अपनी परेशानी ले कर कई बाबाओं से मिल चुका था. लेकिन अपनी समस्या के हल की जगह उसे पैसा ही गंवाना पड़ा था. उसी दिन हरिराम ने ठान लिया कि वह भी यही काम करेगा. फिर एक दिन हरिराम बिना कुछ बताए घर और गांव से गायब हो गया. घर वालों ने उसे ढूंढने की काफी कोशिश की लेकिन उस का कहीं पता नहीं चल सका. उधर हरिराम घर से निकल कर हरिद्वार पहुंच गया था.

वहां वह किसी ऐसे बाबा की खोज में लग गया, जिस की दुकानदारी ठीक से चलती हो. साथ ही वह तंत्रमंत्र भी जानता हो. इसी खोज में उस की मुलाकात एक बाबा से हुई. उस बाबा के पास काफी लोगों का आनाजाना था. हरिराम ने बाबा को अपनी परेशानी बता कर उस की सेवा करनी शुरू कर दी.महीनों बाद जब वह अपने घर लौटा तो उस के चेहरे पर लंबी दाढ़ी थी और वेशभूषा भी तांत्रिकों जैसी थी. उस के घर वालों और गांव के लोगों ने उस के गायब होने की बात जाननी चाही तो उस ने बताया कि वह हरिद्वार में एक पहुंचे हुए तांत्रिक की शागिर्दी कर रहा था. वहीं रह कर उस ने तंत्रमंत्र साधना और तंत्र विद्या सीखी.
उस वक्त हरिराम ने गांव में प्रचारित किया कि वह अपनी सिद्धि से किसी की भी बड़ी से बड़ी समस्या को पलभर में हल कर सकता है. धीरेधीरे यह बात गांव से निकल कर क्षेत्र में फैल गई.

परिणामस्वरूप आसपास के गांवों के भोलेभाले, अनपढ़, अंधविश्वासी लोग अपनी समस्याएं ले कर हरिराम के पास आने लगे. उन की समस्या के समाधान के लिए हरिराम गंडे ताबीज, टोनेटोटके के नाम पर अच्छे पैसे वसूलने लगा था.घर पर ही तंत्रमंत्र की दुकान चलते देख हरिराम ने अपने घर के सामने लिखवा दिया, ‘यहां हर तरह की परेशानी, बंधन से मुक्ति, फोटो से वशीकरण, सम्मोहन, प्रेमीप्रेमिका की शादी रोकने तोड़ने का उपाय, अपने दुश्मन को सबक सिखाने, अपने खोए हुए प्यार को पाने जैसी हर परेशानी का इलाज किया जाता है.’

अंधविश्वासी लोगों के सहारे उस की दुकानदारी चल निकली. धीरेधीरे कई औरतें भी उस के पास अपने पतियों की समस्याओं को ले कर आने लगी थीं, जिन की बातें सुन कर वह समझ जाता था कि उन के मर्द उन की तन की पीड़ा समझने में असमर्थ हैं. वह ऐसी महिलाओं के पतियों का इलाज करने के बहाने उन के घर पहुंच जाता था. उन के घर पर तंत्रमंत्र का ढोंग कर के वह ऐसी महिलाओं के साथ कामपिपासा शांत करने के बाद वहां से निकल लेता था. उन महिलाओं में अधिकांश ऐसी होती थीं जो मानमर्यादा की वजह से उन के साथ क्या हुआ, को भूल कर अपना मुंह बंद रखने में ही भलाई समझती थीं.

हरिराम का काम अच्छे से चल निकला. पैसे कमाने के साथसाथ वह मौजमस्ती भी करने लगा था. हरिराम ने पुलिस पूछताछ में कबूला कि उस ने इस से पहले अलगअलग गांवों में 18 महिलाओं के साथ कुकर्म किया था. लेकिन लोकलाज की वजह से किसी भी महिला ने उस के खिलाफ अपना मुंह नहीं खोला था. हालांकि हरिराम इस वक्त लगभग 45-50 की उम्र से गुजर रहा था, फिर भी वह इतना भोगविलासी था कि जो महिला उस की नजरों में चढ़ जाती थी, वह उस के साथ अपनी कामवासना शांत कर के ही दम लेता था.

उम्र के इस पड़ाव तक आतेआते हर इंसान की कामवासना शांत हो जाती है. हरिराम ने जो धंधा कर रखा था, उसे वह किसी भी सूरत में छोड़ना नहीं चाहता था. उम्र के हिसाब से उसे सैक्स की कुछ कमजोरी महसूस हुई तो उस ने मैडिकल स्टोर पर जा कर उस का हल भी निकाल लिया. इस के बाद हरिराम मैडिकल स्टोर से गोलियां ले कर अपना काम चलाने लगा.

हरिराम को जब किसी के यहां तंत्र साधना करनी होती थी तो वह अनुष्ठान का ढोंग करने से पहले ही एक गोली खा लेता और मौका पाते ही घर में मौजूद औरतों को प्रसाद के रूप में नशे की गोलियां दे देता था. उस के बाद बेहोश होते ही उन की इज्जत लूट लेता था.तांत्रिक हरिराम के गिरफ्तार होने की सूचना पर उस के घर वाले ठाकुरद्वारा कोतवाली जा पहुंचे. वे लोग हरिराम को निर्दोष बता कर उसे रिहा करने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे. उन का कहना था कि हरिराम के जेल चले जाने से उस का परिवार सड़क पर आ जाएगा.

हकीकत पता लगने के बाद ठाकुरद्वारा पुलिस ने हरिराम के खिलाफ नशीला पदार्थ खिला कर महिलाओं के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में भादंवि की धारा 328, 376 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. इस के साथ ही आरोपी को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया. ?

— कथा में आरोपी तांत्रिक हरिराम को छोड़ कर सभी पात्रों के नाम काल्पनिक हैं.

बरबादी का जलजला : राजविंदर का खूनी का कारनामा

दविंदर सिंह ने पैजामा पहनने के बाद अपनी 55 वर्षीय पत्नी गुरविंदर कौर को आवाज दे कर पूछा,

‘‘भाग्यवान, मेरी कमीज कहां है, मिल नहीं रही. ढूंढ कर जल्दी दे दो. मुझे देर हो रही है.’’

पति की आवाज सुन कर गुरविंदर कौर कमरे में आ गई. उन्होंने अलमारी से पति की कमीज निकाल कर उन की ओर बढ़ा दी. कमीज पहनने के बाद दविंदर सिंह ने पगड़ी बांधी और यह कह कर घर से निकल गए कि मैं दोपहर तक लौट आऊंगा.

यह 3 अगस्त, 2018 की बात है. लुधियाना के किशोर नगर के रहने वाले दविंदर सिंह गुरुद्वारे में ग्रंथी थे. उस दिन उन्हें किदवई नगर स्थित गुरुद्वारा साहब में पाठ करने जाना था. गुरुद्वारा साहब में श्री गुरुगं्रथ साहिब का अखंड पाठ चल रहा था.

गुरुद्वारा साहब में पाठ करने वाले ग्रंथी की हर 3-3 घंटे के अंतराल पर ड्यूटी बदलती थी. अपनी ड्यूटी खत्म कर के वह घर के लिए रवाना हुए और करीब ढाई बजे अपने घर पहुंचे. जब वह घर पहुंचे तब उन के घर के मुख्य दरवाजे पर ताला लगा हुआ था.

उन्होंने सोचा कि शायद उन की पत्नी गुरविंदर घर का कोई सामान लेने या अपने दोहता-दोहती को कुछ दिलवाने दुकान पर गई होगी. यह सोच कर वह घर के बाहर बैठ कर इंतजार करने लगे.

काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी पत्नी नहीं आई तो वह सोच में पड़ गए कि इतनी देर हो गई, गुरविंदर और बच्चे कहां चले गए. इस बीच वह बारबार पत्नी के मोबाइल पर फोन भी मिलाते रहे. पर हर बार फोन स्विच्ड औफ ही मिला.

गरमियों की तपती दोपहर में गली में बैठ कर इंतजार करते हुए उन्हें एक घंटे से ज्यादा बीत गया तो उन्होंने अपनी जगह से उठ कर पड़ोसियों से गुरविंदर और बच्चों के बारे में पूछा.

गुरविंदर को अचानक जरूरी काम से कहीं जाना होता था तो वह घर की चाबी किसी पड़ोसी को दे जाती थी. पर आज उस ने ऐसा नहीं किया था. किसी भी पड़ोसी को गुरविंदर के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

दविंदर सिंह के मन में बारबार यह प्रश्न उठ रहा था कि आखिर गुरविंदर गई तो गई कहां. उन्हें वहां इंतजार करते हुए डेढ़ घंटा हो गया था. अंत में हार कर उन्होंने अपने बेटे मनप्रीत को फोन कर के जानकारी दी. मनप्रीत घर के पास ही किसी फैक्ट्री में काम करता था.

अपने पिता का फोन सुनते ही वह दौड़ा चला आया था. उस ने आ कर 33 फुटा रोड पर रहने वाली अपनी बहन सोनम को फोन कर के पूछा कि क्या मां उन के घर पर हैं. सोनम ने बताया कि मां और बच्चे यहां नहीं हैं.

अब और कोई चारा नहीं बचा था सो मनप्रीत ने किसी से हथौड़ा ले कर घर के दरवाजे पर लगा ताला तोड़ा और बापबेटे घर के अंदर घुसे. बापबेटे दोनों ऊपरी मंजिल पर चले गए. मनप्रीत ने पिता को खाना परोस दिया. खाना खाते समय भी दोनों के दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि गुरविंदर और बच्चे कहां चले गए. इस बीच उन्हें मकान की छत से अपने कुत्ते के भौंकने की आवाजें सुनाई दीं. मनप्रीत ने ऊपर जा कर देखा तो कुत्ता छत पर बंधा हुआ था. उस की समझ में नहीं आया कि कुत्ते को छत पर किस ने बांधा.

बहरहाल, कुत्ते को खोल कर वह नीचे ले आया. इस बीच उस की दोनों बहनें सोनम और नीरू भी वहां पहुंच गई थीं. वे भी मां के इस तरह बिना बताए कहीं चले जाने पर हैरान थीं. उसी दौरान सोनम नीचे वाले कमरे में आई.

दरअसल नीचे वाले पोर्शन में अंधेरा रहता था. उसे उन्होंने गोदाम बना रखा था. इसलिए सारा परिवार ऊपर ही रहता था. दविंदर सिंह पाठ करने के साथ शादीब्याह में गद्दे सप्लाई का काम भी करते थे. नीचे वाले पोर्शन को उन्होंने गद्दों का गोदाम बना रखा था.

सोनम जब नीचे आई तो उस ने गद्दे वाले कमरे में खून फैला देखा. घबरा कर उस ने अपनी बहन नीरू को आवाज दी और खून साफ करने के लिए पोंछा उठा लाई.

नीरू के साथ मनप्रीत सिंह भी नीचे आ गया था. गद्दे वाले कमरे में जब उन्होंने लाइट जला कर देखा तो सामने का दृश्य देख कर उन के होश उड़ गए.

सोनम तो उस भयावह दृश्य को देख कर गश खा कर गिर गई थी. कमरे में फर्श पर खून से लथपथ तीन लाशें पड़ी थीं. एक लाश गुरविंदर कौर की थी और 2 लाशें सोनम व नीरू के बच्चों 7 वर्षीय मनदीप कौर और 6 वर्षीय ऋतिक की थी.

3 लाशें मिलने पर कोहराम मच गया. पासपड़ोस की तो छोड़ो, वहां पूरी कालोनी के लोग जमा हो गए. रोने और चीखने की आवाजों से पूरी कालोनी कांप उठी थी. इस बीच किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को भी इस घटना की सूचना दे दी थी.

शहर के भीड़भाड़ वाले व्यस्त इलाके में दिनदहाड़े घर में घुस कर एक ही परिवार के 3-3 लोगों की हत्या करने की बात सुन कर पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया था.

लुधियाना पुलिस कमिश्नर डा. सुखचैन सिंह गिल, एडीसीपी-4 राजवीर सिंह बोपराय, एडीसीपी (क्राइम) रत्न सिंह, सीआईए इंचार्ज राजेश शर्मा, थाना डिवीजन नंबर 7 के प्रभारी व अन्य कई थानों के थानाप्रभारी क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम के साथ जल्दी ही मौकाएवारदात पर पहुंच गए. पुलिस ने वहां पहुंचते ही उस पूरे क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लिया.

लाशों को देख कर ऐसा लगा, जैसे हत्याएं किसी भारी चीज से वार कर के की गई थीं. तलाश करने पर एक कमरे से खून सना हथौड़ा बरामद हुआ. प्रारंभिक छानबीन में वारदात का मकसद लूटपाट दिखाई दे रहा था, क्योंकि घर के एक कमरे में अलमारी खुली हुई थी. दविंदर सिंह ने बताया कि इस में रखे करीब 40 हजार रुपए और सोने के जेवरात गायब हैं.

डौग स्क्वायड की मदद ली गई, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. जांच टीम को हथौड़े के अलावा वहां से कुछ फिंगरप्रिंट भी मिले. बहरहाल, पुलिस ने मौके की काररवाई कर के तीनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दीं और अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.

तफ्तीश के पहले चरण में पुलिस ने मृतकों के परिजनों और गलीमोहल्ले वालों से पूछताछ की. इस पूछताछ से पता चला कि दविंदर सिंह के परिवार में पत्नी गुरविंदर कौर के अलावा 3 बेटियां और एक अविवाहित बेटा मनप्रीत सिंह है. तीनों बेटियों की शादी कर चुके थे.

उन की एक बेटी सोनम 33 फुटा रोड पर किराए के मकान में अपनी 7 वर्षीय बेटी मनदीप कौर के साथ रहती थी. उस का अपने पति से तलाक का मुकदमा चल रहा था.

उस की दूसरी बेटी नीरू की शादी पटियाला के तरुण नामक युवक से हुई थी. पिछले कुछ महीनों से तरुण का काम बंद हो गया था, इसलिए पिछले ढाई महीनों से वह अपने पति और 6 वर्षीय बेटे ऋतिक के साथ मायके में रह रही थी. ससुराल में रहते हुए तरुण ने लौटरी बेचने का काम शुरू कर दिया था. तीसरी शादीशुदा बेटी अंबाला में अपने पति के साथ रहती थी.

सोनम की बेटी मनदीप और नीरू का बेटा ऋतिक चंडीगढ़ पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे. ऋतिक का दाखिला इस घटना से मात्र 10 दिन पहले ही करवाया गया था. स्कूल की छुट्टी के बाद रिक्शे वाला दोनों बच्चों को दोपहर करीब डेढ़ बजे गुरविंदर कौर के घर छोड़ जाता था.

दोनों बच्चे दिन भर नानी के पास रहते थे. शाम को सोनम मां के घर आ कर अपनी बेटी मनदीप को साथ ले जाती थी. पुलिस को यह भी पता चला कि सब से पहले सुबह 8 बजे दोनों बच्चे स्कूल जाते थे. उन के बाद 10 बजे तक गुरविंदर का बेटा मनप्रीत और दामाद तरुण अपनेअपने काम पर चले जाते थे. उन के बाद दविंदर सिंह गुरुद्वारे जाते थे. चूंकि सोनम पास में ही रहती थी, इसलिए घर का काम निपटा कर नीरू अपनी बहन सोनम के घर चली जाया करती थी. गुरविंदर कौर दिन भर घर में अकेली ही रहा करती थी.

पूछताछ में यह बात भी पता चली कि गुरविंदर के मामा का लड़का राजविंदर पिछले 2 सालों से उन के घर पर रह रहा था. राजविंदर किसी से भी कोई वास्ता नहीं रखता था. वह गुरविंदर कौर और उस के पारिवारिक सदस्यों के संपर्क में ही था.

राजविंदर सिंह पिछले 9 महीनों से किराए के मकान में रहने लगा था. उसे घर की हर चीज के बारे में पूरी खबर थी कि कौन सी चीज कहां रखी है. उस ने कमरा किराए पर जरूर ले लिया था लेकिन दिन भर वह गुरविंदर के घर पर ही रहता था.

दविंदर के बेटेबेटियों ने उस के वहां रहने पर ऐतराज भी जताया था पर गुरविंदर कौर ने सब को यह कह कर चुप करा दिया था कि वह उस का भाई है और गरीब भी है. अगर वह यहां दो वक्त की रोटी खा लेता है तो कोई हर्ज नहीं.

इस हत्याकांड के बाद से राजविंदर फरार था. पुलिस ने उस के भाई से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उसे राजविंदर से मिले हुए करीब 15 साल हो चुके हैं. उस का अपने भाई से कोई वास्ता नहीं है. इतना ही नहीं, राजविंदर अपने किसी रिश्तेदार के संपर्क में भी नहीं था.

करीब 17 साल से वह अपने भाई और घर वालों से भी नहीं मिला था. राजविंदर के बारे में उस के भाई ने बताया कि वह शुरू से ही काफी कम बोलता था. जिस की वजह से यह पता नहीं चलता था कि उस के दिमाग में क्या चल रहा है. गुरविंदर कौर या उस के पारिवारिक सदस्यों को भी राजविंदर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी.

पुलिस ने गली में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवा कर चैक की तो राजविंदर सिंह अपने किराए के कमरे से निकल कर सवा 2 बजे बाहर रोड की तरफ जाता दिखाई दिया. स्कूल के रिक्शे वाले ने बताया कि उस ने दोनों बच्चों को सवा एक बजे घर के बाहर छोड़ा था और बाकी बच्चों को उन के घर छोड़ने के बाद लगभग 2 बजे जब वह दोबारा उस गली से गुजरा तब गुरविंदर कौर के घर के दरवाजे पर ताला लगा था.

इस का मतलब यह था कि बच्चों के स्कूल से लौटने के तुरंत बाद इस वारदात को अंजाम दिया था. कुछ और लोगों के बयान लेने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि इस वारदात को राजविंदर ने ही अंजाम दिया था. पर क्यों? यह बात पुलिस की समझ में नहीं आ रही थी. अगर उसे घर में रखे रुपए ही लूटने होते तो इस के लिए उस के पास तमाम मौके थे, केवल लूट के लिए अपनी बहन और 2 मासूम बच्चों की हत्या करने की बात पुलिस की समझ से बाहर थी.

इस हत्याकांड की कोई दूसरी तसवीर भी थी, जो पुलिस को ठीक से दिखाई नहीं दे रही थी. बहरहाल, पुलिस ने राजविंदर के कमरे का ताला तोड़ कर वहां की तलाशी ली. पुलिस को किराए के कमरे से राजविंदर के खून से लथपथ कपडे़ मिले. इस का मतलब था कि हत्याएं करने के बाद वह अपने कमरे पर आया था. पुलिस ने मकान मालिक की बहू से इस बारे में पूछा, क्योंकि उस समय वही घर पर थी.

उस ने पुलिस को बताया कि राजविंदर कह रहा था कि वह किसी काम के लिए लुधियाना से बाहर जा रहा है. पुलिस को उस के कमरे से कुछ अजीबोगरीब चीजें भी मिलीं. मसलन काफी मात्रा में पिसी हुई लाल मिर्च, नींबू, तंत्रमंत्र में इस्तेमाल होने वाले सामान वगैरह.

पुलिस कमिश्नर के आदेश पर पुलिस युद्धस्तर पर हत्यारे राजविंदर की तलाश में जुट गई. पुलिस की अलगअलग टीमों ने अपने स्तर पर उस की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी.

पुलिस को राजविंदर का जो मोबाइल नंबर मिला था, वह पिछले एक हफ्ते से बंद था. उस की लास्ट काल समराला चौक के पास थी. इस ये पहले उस के फोन पर उस के बहनोई दविंदर सिंह का फोन आया था.

इस बारे में पुलिस ने दविंदर से पूछा तो उन्होंने बताया कि उसे फोन कर के घर की चाबी के बारे में जानना चाहा था. पहले तो राजविंदर ने फोन उठाया ही नहीं, बाद में उस ने फोन उठाया तो कुछ न बोल कर 13 सैकेंड तक काल होल्ड पर रखी और फिर काट दी. बाद में राजविंदर ने अपना फोन बंद कर दिया.

पुलिस की टीमें लगातार राजविंदर का पता लगाने के लिए पंजाब के शहरों और पड़ोसी राज्यों व महाराष्ट्र भी भेजी गईं. अगले दिन 4 अगस्त को 3 डाक्टरों के पैनल ने शवों का पोस्टमार्टम किया. पैनल में डा. बिंदू नलवा, डा. हरीश केयरपाल और डा. कुलवंत शामिल थे.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि हत्यारे ने केवल हथौड़े का ही नहीं, बल्कि तेजधार वाले हथियार का भी प्रयोग किया था. गुरविंदर कौर के शरीर पर 15, ऋतिक के शरीर पर 14 और मनदीप के शरीर पर 4 जगह चोटों के निशान पाए गए.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पहले गुरविंदर कौर के गले में चुन्नी डाल कर गला दबाया गया था, जबकि उस के दोनों हाथों पर रस्सी बांधने के निशान थे. गरदन पर तेजधार हथियार से दाईं तरफ वार किए गए थे. दाईं आंख हथौड़ा मार कर फोड़ दी थी. नाक की हड्डी और जबड़े पर भी मारा गया था और सिर पर कई वार किए गए थे.

दोनों टांगों पर भी चोटों के निशान थे. इस के अलावा फेफड़े और लीवर पर भी हथौड़े से वार किए थे. जिस से लीवर और फेफड़े फट गए थे. शरीर पर और भी कई जगह चोटों के निशान थे.

6 वर्षीय ऋतिक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि हत्यारे ने उस की गरदन पर दाईं ओर 2 और छाती पर तेजधार हथियार से एक वार किए थे. इस के अलावा सिर पर हथौड़े से 4 से 5 वार किए. उस के शरीर पर कई जगह चोटें भी आई थीं. वहीं मनदीप कौर के सिर पर 2 से 3 बार हथौड़ा मारा गया था, जिस से उस के दिमाग का कुछ हिस्सा भी बाहर आ गया था.

डीजीपी डा. सुरेश अरोड़ा ने इस मामले को जल्द सुलझाने के लिए लुधियाना पुलिस कमिश्नर डा. सुखचैन सिंह गिल से बात की. पुलिस ने राजविंदर के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में ऐसे कई नंबर सामने आए, जो अमृतसर के रहने वाले लोगों के थे. उन में एक रिक्शे वाले का नंबर भी था.

पुलिस ने उन सब से पूछताछ की थी, पर कोई खास सुराग हाथ नहीं लगा. काल डिटेल्स से यह बात भी पता चली कि हत्यारे ने वारदात के दिन सुबह फोन पर अपने भांजे मनप्रीत सिंह से भी बात की थी और उस से काम ढूंढने को कहा था. हत्यारों की तलाश में पुलिस की कई टीमें अमृतसर भेजी गईं, जहां से पता चला है कि राजविंदर समयसमय पर किराए का कमरा बदलता रहता था.

जांच में यह बात भी पता चली थी कि हत्यारे पर दहेज प्रताड़ना का एक मामला भी दर्ज है. इस मामले में वह वांटेड था और पुलिस उसे तलाश रही थी. पुलिस की तरफ से उस की पत्नी और ससुर को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया, लेकिन उन से कुछ ज्यादा पता नहीं चल सका.

फिर एक दिन दविंदर सिंह के पास राजविंदर का फोन आया. उस ने कहा कि उस ने थाने में जो 40 हजार रुपए गायब होने की रिपोर्ट लिखाई है, वह गलत है. अलमारी में केवल 10 हजार रुपए मिले थे. उस ने यह भी बताया कि उस के चक्कर में गुरविंदर और बच्चों की हत्या हो गई लेकिन वह उन्हें छोड़ेगा नहीं. दविंदर सिंह ने यह सारी जानकारी थानाप्रभारी को बता दी.

राजविंदर के फोन की लोकेशन और अन्य जानकारी मिलने के बाद 19 अगस्त, 2018 को सीआईए-2 इंचार्ज राजेश कुमार शर्मा ने राजविंदर सिंह को संगरूर से गिरफ्तार कर लिया. वह एक धर्मशाला में छिपा बैठा था. उसे गिरफ्तार करने के बाद लुधियाना लाया गया और पुलिस कमिश्नर व अन्य आला अधिकारियों के सामने उस से पूछताछ की गई.

पूछताछ के दौरान राजविंदर ने बड़ी आसानी से अपना गुनाह कबूल करते हुए दिल दहला देने वाले इस तिहरे हत्याकांड की जो कहानी बताई, वह एक विवेकहीन आदमी की खराब मानसिकता का परिणाम थी.

दरअसल राजविंदर अपनी बहन गुरविंदर की हत्या नहीं करना चाहता था और न ही दोनों मासूमों से उस की कोई दुश्मनी थी. वह केवल अपने जीजा दविंदर सिंह की हत्या करना चाहता था. पर हालात ऐसे बन गए कि उसे इस तिहरे हत्याकांड को अंजाम देना पड़ा.

राजविंदर का असली नाम रविंदर बख्शी था लेकिन बाद में उस ने अपना नाम बदल कर राजविंदर कर लिया था. इस के पीछे कारण यह था कि उसे दहेज प्रताड़ना के एक केस में भगोड़ा घोषित किया गया था. वह पिछले 2 सालों से अपने जीजा दविंदर सिंह का कत्ल करने की योजना बना रहा था.

दरअसल राजविंदर सिंह को शक था कि उस की दोनों शादियां टूटने और उस का घर बरबाद होने के पीछे उस की बुआ की लड़की गुरविंदर कौर के पति दविंदर सिंह का हाथ है. असल में राजविंदर के पिता जसविंदर भी गुरुद्वारे में ग्रंथी थे और उन के हरचरण नगर व गुरु अर्जुनदेव नगर में अपने मकान थे, जो बिक चुके थे.

राजविंदर के पिता की मौत हो चुकी थी. उस के मन में यह बात बैठ गई थी कि उन के मकान बिकवाने के पीछे दविंदर की कोई साजिश थी. इन्हीं कारणों से उस के पिता की भी मौत हुई थी.

राजविंदर की पहली शादी सन 1997 में हुई थी. पत्नी के साथ विवाद के कारण उस की पत्नी ने सन 2000 में उस के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करवाया था और उसे छोड़ कर चली गई थी. दहेज उत्पीड़न मामले में राजविंदर भगोड़ा घोषित था. पुलिस से बचने के लिए वह अमृतसर चला गया था. उन दिनों उस के पिता दविंदर सिंह के साथ मिल कर काम करते थे.

पहली पत्नी से तलाक होने के बाद दविंदर ने अमृतसर की एक महिला से राजविंदर की दूसरी शादी करवा दी थी. दहेज उत्पीड़न केस में भगोड़ा होने के कारण राजविंदर ने अपनी पहचान छिपा कर फरजी दस्तावेजों के आधार पर अपना नाम बदल कर राजविंदर सिंह और पिता का नाम अजीत सिंह कर लिया था.

इस के बाद राजविंदर दूसरी पत्नी को ले कर दिल्ली और मुंबई में रहा. दूसरे शहरों में किराए पर रहते हुए वह कढ़ाई, लोन एजेंट, सेल्समैन आदि की अलगअलग नौकरियां करता रहा. वह फिल्म भी बनाना चाहता था, लेकिन जब उस की दूसरी पत्नी को उस की पहली शादी के बारे में पता चला तो वह उसे छोड़ कर चली गई. इस दौरान उसे सूचना मिली कि काम में नुकसान होने की वजह से उस के पिता ने अपने दोनों घर बेच दिए हैं.

अपने मन से हारे हुए राजविंदर को शक हुआ कि उस की दूसरी पत्नी को पहली शादी वाली बात दविंदर सिंह ने बताई है. जिस की वजह से उस के मन में दविंदर सिंह के प्रति रंजिश पैदा हो गई थी. वह उन का कत्ल करने की योजना बनाने लगा.

इस के लिए वह लुधियाना में दविंदर सिंह के घर पर भी रहा लेकिन बाद में पास ही किराए के मकान में रहने लगा. वह पिछले 2 सालों से दविंदर सिंह का कत्ल करने की योजना बना रहा था. इस के लिए उस ने हथौड़ा, कटर, करंट वाली तारें व अन्य प्रकार के सामान जुटा रखे थे.

पिछले कुछ महीनों में वह कई बार दविंदर सिंह को मारने के लिए अपने हथियार छिपा कर भी ले गया था लेकिन उसे मौका नहीं मिल सका. इस दौरान राजविंदर को उस के मकान मालिक ने घर खाली करने के लिए चेतावनी दे दी थी क्योंकि उस ने कई महीनों से उस का किराया नहीं दिया था. जिस के बाद रविंदर ने अब और देर करना उचित नहीं समझा. उस ने वारदात को जल्दी अंजाम देने का पक्का मन बना लिया था.

वारदात वाले दिन उसे पता चला कि दविंदर सिंह घर पर ही मौजूद है. अपने साथ हथौड़ा ले कर वह उन के घर चला गया.

लेकिन दविंदर सिंह उस के आने से पहले ही किदवई नगर गुरुद्वारे चले गए थे. दविंदर सिंह को घर में न पा कर रविंदर का खून खौल उठा. वह ऊपरी मंजिल पर चला गया और वहां मौजूद गुरविंदर कौर के सिर पर पीछे से हथौड़े का एक भरपूर वार कर दिया.

हथौड़े का वार इतना शक्तिशाली था कि एक ही वार से गुरविंदर कौर चारों खाने चित्त हो कर वहीं गिर गईं. गुरविंदर की हत्या करने के बाद वह वहीं बैठ कर दविंदर सिंह के आने का इंतजार करने लगा.

वह मन ही मन तय कर के आया था कि आज अपनी बरबादी के कारण दविंदर सिंह की हत्या कर के ही वहां से जाएगा. इस बीच गुरविंदर कौर को दोबारा खड़े होने का प्रयास करता देख कर वह उन्हें घसीट कर नीचे ले आया और फिर से उन पर हथौड़े से वार किए. गुरविंदर कौर का काम तमाम करने के बाद उस ने ऊपरी मंजिल से सारा खून साफ कर दिया.

इस के बाद वह नीचे आ कर बैठ गया. इसी बीच बच्चों में पहले ऋतिक और बाद में मंदीप कौर स्कूल से घर आए, जिन्होंने वहां पर खून देख कर पूछा, ‘‘नानाजी, यह किस का खून है और नानी कहां हैं?’’

इतना पूछने के बाद दोनों बच्चे नानी को देखने के लिए ऊपर जाने लगे तो रविंदर उर्फ राजविंदर ने पहले ऋतिक और फिर मंदीप की हथौड़े और कटर से निर्मम हत्या कर दी. फिर उस ने अलमारी में रखे 10 हजार रुपए निकाल लिए.

तीनों हत्याएं किए हुए जब कुछ देर बीत गई और दविंदर फिर भी नहीं लौटे तो पकड़े जाने के डर से वह घर के बाहर ताला लगा कर वहां से फरार हो गया.

गुरविंदर के घर से निकलने के बाद वह अपने कमरे पर गया और हाथमुंह धो कर खून आदि साफ करने के बाद कपड़े बदल लिए. फिर वह वहां से चला गया.

राजविंदर पहले माछीवाड़ा गया. उस के बाद अमृतसर चला गया. अमृतसर में 2 दिन तक धर्मशाला में रहने के बाद वह राजस्थान स्थित हनुमानगढ़ चला गया. हनुमानगढ़ से वह संगरूर आ गया और एक धर्मशाला में रहने लगा. उस ने समाचारपत्रों में अपनी फोटो भी देख ली थी.

चूंकि उस का टारगेट दविंदर सिंह थे और उस के मन में यह बात बैठी हुई थी कि दविंदर सिंह बच गए हैं, इसलिए उस ने किसी अन्य आदमी के फोन से दविंदर सिंह को फोन कर जान से मारने की धमकी दी और यह भी बताया कि उन के घर से मात्र 10 हजार रुपए मिले थे, 40 हजार की बात झूठी है. दविंदर सिंह ने इस फोन के बारे में पुलिस को बता कर राजविंदर के खिलाफ धमकी देने की एक रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी.

इसी फोन की लोकेशन को ट्रेस करते हुए सीआईए की टीम ने आरोपी को संगरूर की एक धर्मशाला में जा कर धर दबोचा. राजविंदर ने मौके से कुछ नकदी भी उठाई थी, जिस के बारे में वेरीफाई करने के अलावा वारदात में प्रयुक्त हथौड़ा बरामद कर लिया. बाकी के हथियार बरामद करने के लिए पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया.

रिमांड के दौरान राजविंदर उर्फ रविंदर की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हुए कटर और छुरी भी बरामद कर ली.

रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद 21 अगस्त, 2018 को राजविंदर को पुन: अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

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