टिकट से ही नेता की वफादारी है, टिकट न मिलने पर नेता के सामने बगावत की लाचारी है. टिकट न मिले तो एक झटके में बगावत पर उतर आता है. वर्षों की वफादारी का गुणगान गालियों में तब्दील होते देर नहीं लगती. बगावती नेता अपनी ही पार्टी और नेतृत्व को खिलाफ आग उगलने लगता है.

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