दविंदर सिंह ने पैजामा पहनने के बाद अपनी 55 वर्षीय पत्नी गुरविंदर कौर को आवाज दे कर पूछा,

‘‘भाग्यवान, मेरी कमीज कहां है, मिल नहीं रही. ढूंढ कर जल्दी दे दो. मुझे देर हो रही है.’’

पति की आवाज सुन कर गुरविंदर कौर कमरे में आ गई. उन्होंने अलमारी से पति की कमीज निकाल कर उन की ओर बढ़ा दी. कमीज पहनने के बाद दविंदर सिंह ने पगड़ी बांधी और यह कह कर घर से निकल गए कि मैं दोपहर तक लौट आऊंगा.

यह 3 अगस्त, 2018 की बात है. लुधियाना के किशोर नगर के रहने वाले दविंदर सिंह गुरुद्वारे में ग्रंथी थे. उस दिन उन्हें किदवई नगर स्थित गुरुद्वारा साहब में पाठ करने जाना था. गुरुद्वारा साहब में श्री गुरुगं्रथ साहिब का अखंड पाठ चल रहा था.

गुरुद्वारा साहब में पाठ करने वाले ग्रंथी की हर 3-3 घंटे के अंतराल पर ड्यूटी बदलती थी. अपनी ड्यूटी खत्म कर के वह घर के लिए रवाना हुए और करीब ढाई बजे अपने घर पहुंचे. जब वह घर पहुंचे तब उन के घर के मुख्य दरवाजे पर ताला लगा हुआ था.

उन्होंने सोचा कि शायद उन की पत्नी गुरविंदर घर का कोई सामान लेने या अपने दोहता-दोहती को कुछ दिलवाने दुकान पर गई होगी. यह सोच कर वह घर के बाहर बैठ कर इंतजार करने लगे.

काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी पत्नी नहीं आई तो वह सोच में पड़ गए कि इतनी देर हो गई, गुरविंदर और बच्चे कहां चले गए. इस बीच वह बारबार पत्नी के मोबाइल पर फोन भी मिलाते रहे. पर हर बार फोन स्विच्ड औफ ही मिला.

गरमियों की तपती दोपहर में गली में बैठ कर इंतजार करते हुए उन्हें एक घंटे से ज्यादा बीत गया तो उन्होंने अपनी जगह से उठ कर पड़ोसियों से गुरविंदर और बच्चों के बारे में पूछा.

गुरविंदर को अचानक जरूरी काम से कहीं जाना होता था तो वह घर की चाबी किसी पड़ोसी को दे जाती थी. पर आज उस ने ऐसा नहीं किया था. किसी भी पड़ोसी को गुरविंदर के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

दविंदर सिंह के मन में बारबार यह प्रश्न उठ रहा था कि आखिर गुरविंदर गई तो गई कहां. उन्हें वहां इंतजार करते हुए डेढ़ घंटा हो गया था. अंत में हार कर उन्होंने अपने बेटे मनप्रीत को फोन कर के जानकारी दी. मनप्रीत घर के पास ही किसी फैक्ट्री में काम करता था.

अपने पिता का फोन सुनते ही वह दौड़ा चला आया था. उस ने आ कर 33 फुटा रोड पर रहने वाली अपनी बहन सोनम को फोन कर के पूछा कि क्या मां उन के घर पर हैं. सोनम ने बताया कि मां और बच्चे यहां नहीं हैं.

अब और कोई चारा नहीं बचा था सो मनप्रीत ने किसी से हथौड़ा ले कर घर के दरवाजे पर लगा ताला तोड़ा और बापबेटे घर के अंदर घुसे. बापबेटे दोनों ऊपरी मंजिल पर चले गए. मनप्रीत ने पिता को खाना परोस दिया. खाना खाते समय भी दोनों के दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि गुरविंदर और बच्चे कहां चले गए. इस बीच उन्हें मकान की छत से अपने कुत्ते के भौंकने की आवाजें सुनाई दीं. मनप्रीत ने ऊपर जा कर देखा तो कुत्ता छत पर बंधा हुआ था. उस की समझ में नहीं आया कि कुत्ते को छत पर किस ने बांधा.

बहरहाल, कुत्ते को खोल कर वह नीचे ले आया. इस बीच उस की दोनों बहनें सोनम और नीरू भी वहां पहुंच गई थीं. वे भी मां के इस तरह बिना बताए कहीं चले जाने पर हैरान थीं. उसी दौरान सोनम नीचे वाले कमरे में आई.

दरअसल नीचे वाले पोर्शन में अंधेरा रहता था. उसे उन्होंने गोदाम बना रखा था. इसलिए सारा परिवार ऊपर ही रहता था. दविंदर सिंह पाठ करने के साथ शादीब्याह में गद्दे सप्लाई का काम भी करते थे. नीचे वाले पोर्शन को उन्होंने गद्दों का गोदाम बना रखा था.

सोनम जब नीचे आई तो उस ने गद्दे वाले कमरे में खून फैला देखा. घबरा कर उस ने अपनी बहन नीरू को आवाज दी और खून साफ करने के लिए पोंछा उठा लाई.

नीरू के साथ मनप्रीत सिंह भी नीचे आ गया था. गद्दे वाले कमरे में जब उन्होंने लाइट जला कर देखा तो सामने का दृश्य देख कर उन के होश उड़ गए.

सोनम तो उस भयावह दृश्य को देख कर गश खा कर गिर गई थी. कमरे में फर्श पर खून से लथपथ तीन लाशें पड़ी थीं. एक लाश गुरविंदर कौर की थी और 2 लाशें सोनम व नीरू के बच्चों 7 वर्षीय मनदीप कौर और 6 वर्षीय ऋतिक की थी.

3 लाशें मिलने पर कोहराम मच गया. पासपड़ोस की तो छोड़ो, वहां पूरी कालोनी के लोग जमा हो गए. रोने और चीखने की आवाजों से पूरी कालोनी कांप उठी थी. इस बीच किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को भी इस घटना की सूचना दे दी थी.

शहर के भीड़भाड़ वाले व्यस्त इलाके में दिनदहाड़े घर में घुस कर एक ही परिवार के 3-3 लोगों की हत्या करने की बात सुन कर पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया था.

लुधियाना पुलिस कमिश्नर डा. सुखचैन सिंह गिल, एडीसीपी-4 राजवीर सिंह बोपराय, एडीसीपी (क्राइम) रत्न सिंह, सीआईए इंचार्ज राजेश शर्मा, थाना डिवीजन नंबर 7 के प्रभारी व अन्य कई थानों के थानाप्रभारी क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम के साथ जल्दी ही मौकाएवारदात पर पहुंच गए. पुलिस ने वहां पहुंचते ही उस पूरे क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लिया.

लाशों को देख कर ऐसा लगा, जैसे हत्याएं किसी भारी चीज से वार कर के की गई थीं. तलाश करने पर एक कमरे से खून सना हथौड़ा बरामद हुआ. प्रारंभिक छानबीन में वारदात का मकसद लूटपाट दिखाई दे रहा था, क्योंकि घर के एक कमरे में अलमारी खुली हुई थी. दविंदर सिंह ने बताया कि इस में रखे करीब 40 हजार रुपए और सोने के जेवरात गायब हैं.

डौग स्क्वायड की मदद ली गई, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. जांच टीम को हथौड़े के अलावा वहां से कुछ फिंगरप्रिंट भी मिले. बहरहाल, पुलिस ने मौके की काररवाई कर के तीनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दीं और अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.

तफ्तीश के पहले चरण में पुलिस ने मृतकों के परिजनों और गलीमोहल्ले वालों से पूछताछ की. इस पूछताछ से पता चला कि दविंदर सिंह के परिवार में पत्नी गुरविंदर कौर के अलावा 3 बेटियां और एक अविवाहित बेटा मनप्रीत सिंह है. तीनों बेटियों की शादी कर चुके थे.

उन की एक बेटी सोनम 33 फुटा रोड पर किराए के मकान में अपनी 7 वर्षीय बेटी मनदीप कौर के साथ रहती थी. उस का अपने पति से तलाक का मुकदमा चल रहा था.

उस की दूसरी बेटी नीरू की शादी पटियाला के तरुण नामक युवक से हुई थी. पिछले कुछ महीनों से तरुण का काम बंद हो गया था, इसलिए पिछले ढाई महीनों से वह अपने पति और 6 वर्षीय बेटे ऋतिक के साथ मायके में रह रही थी. ससुराल में रहते हुए तरुण ने लौटरी बेचने का काम शुरू कर दिया था. तीसरी शादीशुदा बेटी अंबाला में अपने पति के साथ रहती थी.

सोनम की बेटी मनदीप और नीरू का बेटा ऋतिक चंडीगढ़ पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे. ऋतिक का दाखिला इस घटना से मात्र 10 दिन पहले ही करवाया गया था. स्कूल की छुट्टी के बाद रिक्शे वाला दोनों बच्चों को दोपहर करीब डेढ़ बजे गुरविंदर कौर के घर छोड़ जाता था.

दोनों बच्चे दिन भर नानी के पास रहते थे. शाम को सोनम मां के घर आ कर अपनी बेटी मनदीप को साथ ले जाती थी. पुलिस को यह भी पता चला कि सब से पहले सुबह 8 बजे दोनों बच्चे स्कूल जाते थे. उन के बाद 10 बजे तक गुरविंदर का बेटा मनप्रीत और दामाद तरुण अपनेअपने काम पर चले जाते थे. उन के बाद दविंदर सिंह गुरुद्वारे जाते थे. चूंकि सोनम पास में ही रहती थी, इसलिए घर का काम निपटा कर नीरू अपनी बहन सोनम के घर चली जाया करती थी. गुरविंदर कौर दिन भर घर में अकेली ही रहा करती थी.

पूछताछ में यह बात भी पता चली कि गुरविंदर के मामा का लड़का राजविंदर पिछले 2 सालों से उन के घर पर रह रहा था. राजविंदर किसी से भी कोई वास्ता नहीं रखता था. वह गुरविंदर कौर और उस के पारिवारिक सदस्यों के संपर्क में ही था.

राजविंदर सिंह पिछले 9 महीनों से किराए के मकान में रहने लगा था. उसे घर की हर चीज के बारे में पूरी खबर थी कि कौन सी चीज कहां रखी है. उस ने कमरा किराए पर जरूर ले लिया था लेकिन दिन भर वह गुरविंदर के घर पर ही रहता था.

दविंदर के बेटेबेटियों ने उस के वहां रहने पर ऐतराज भी जताया था पर गुरविंदर कौर ने सब को यह कह कर चुप करा दिया था कि वह उस का भाई है और गरीब भी है. अगर वह यहां दो वक्त की रोटी खा लेता है तो कोई हर्ज नहीं.

इस हत्याकांड के बाद से राजविंदर फरार था. पुलिस ने उस के भाई से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उसे राजविंदर से मिले हुए करीब 15 साल हो चुके हैं. उस का अपने भाई से कोई वास्ता नहीं है. इतना ही नहीं, राजविंदर अपने किसी रिश्तेदार के संपर्क में भी नहीं था.

करीब 17 साल से वह अपने भाई और घर वालों से भी नहीं मिला था. राजविंदर के बारे में उस के भाई ने बताया कि वह शुरू से ही काफी कम बोलता था. जिस की वजह से यह पता नहीं चलता था कि उस के दिमाग में क्या चल रहा है. गुरविंदर कौर या उस के पारिवारिक सदस्यों को भी राजविंदर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी.

पुलिस ने गली में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवा कर चैक की तो राजविंदर सिंह अपने किराए के कमरे से निकल कर सवा 2 बजे बाहर रोड की तरफ जाता दिखाई दिया. स्कूल के रिक्शे वाले ने बताया कि उस ने दोनों बच्चों को सवा एक बजे घर के बाहर छोड़ा था और बाकी बच्चों को उन के घर छोड़ने के बाद लगभग 2 बजे जब वह दोबारा उस गली से गुजरा तब गुरविंदर कौर के घर के दरवाजे पर ताला लगा था.

इस का मतलब यह था कि बच्चों के स्कूल से लौटने के तुरंत बाद इस वारदात को अंजाम दिया था. कुछ और लोगों के बयान लेने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि इस वारदात को राजविंदर ने ही अंजाम दिया था. पर क्यों? यह बात पुलिस की समझ में नहीं आ रही थी. अगर उसे घर में रखे रुपए ही लूटने होते तो इस के लिए उस के पास तमाम मौके थे, केवल लूट के लिए अपनी बहन और 2 मासूम बच्चों की हत्या करने की बात पुलिस की समझ से बाहर थी.

इस हत्याकांड की कोई दूसरी तसवीर भी थी, जो पुलिस को ठीक से दिखाई नहीं दे रही थी. बहरहाल, पुलिस ने राजविंदर के कमरे का ताला तोड़ कर वहां की तलाशी ली. पुलिस को किराए के कमरे से राजविंदर के खून से लथपथ कपडे़ मिले. इस का मतलब था कि हत्याएं करने के बाद वह अपने कमरे पर आया था. पुलिस ने मकान मालिक की बहू से इस बारे में पूछा, क्योंकि उस समय वही घर पर थी.

उस ने पुलिस को बताया कि राजविंदर कह रहा था कि वह किसी काम के लिए लुधियाना से बाहर जा रहा है. पुलिस को उस के कमरे से कुछ अजीबोगरीब चीजें भी मिलीं. मसलन काफी मात्रा में पिसी हुई लाल मिर्च, नींबू, तंत्रमंत्र में इस्तेमाल होने वाले सामान वगैरह.

पुलिस कमिश्नर के आदेश पर पुलिस युद्धस्तर पर हत्यारे राजविंदर की तलाश में जुट गई. पुलिस की अलगअलग टीमों ने अपने स्तर पर उस की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी.

पुलिस को राजविंदर का जो मोबाइल नंबर मिला था, वह पिछले एक हफ्ते से बंद था. उस की लास्ट काल समराला चौक के पास थी. इस ये पहले उस के फोन पर उस के बहनोई दविंदर सिंह का फोन आया था.

इस बारे में पुलिस ने दविंदर से पूछा तो उन्होंने बताया कि उसे फोन कर के घर की चाबी के बारे में जानना चाहा था. पहले तो राजविंदर ने फोन उठाया ही नहीं, बाद में उस ने फोन उठाया तो कुछ न बोल कर 13 सैकेंड तक काल होल्ड पर रखी और फिर काट दी. बाद में राजविंदर ने अपना फोन बंद कर दिया.

पुलिस की टीमें लगातार राजविंदर का पता लगाने के लिए पंजाब के शहरों और पड़ोसी राज्यों व महाराष्ट्र भी भेजी गईं. अगले दिन 4 अगस्त को 3 डाक्टरों के पैनल ने शवों का पोस्टमार्टम किया. पैनल में डा. बिंदू नलवा, डा. हरीश केयरपाल और डा. कुलवंत शामिल थे.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि हत्यारे ने केवल हथौड़े का ही नहीं, बल्कि तेजधार वाले हथियार का भी प्रयोग किया था. गुरविंदर कौर के शरीर पर 15, ऋतिक के शरीर पर 14 और मनदीप के शरीर पर 4 जगह चोटों के निशान पाए गए.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पहले गुरविंदर कौर के गले में चुन्नी डाल कर गला दबाया गया था, जबकि उस के दोनों हाथों पर रस्सी बांधने के निशान थे. गरदन पर तेजधार हथियार से दाईं तरफ वार किए गए थे. दाईं आंख हथौड़ा मार कर फोड़ दी थी. नाक की हड्डी और जबड़े पर भी मारा गया था और सिर पर कई वार किए गए थे.

दोनों टांगों पर भी चोटों के निशान थे. इस के अलावा फेफड़े और लीवर पर भी हथौड़े से वार किए थे. जिस से लीवर और फेफड़े फट गए थे. शरीर पर और भी कई जगह चोटों के निशान थे.

6 वर्षीय ऋतिक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि हत्यारे ने उस की गरदन पर दाईं ओर 2 और छाती पर तेजधार हथियार से एक वार किए थे. इस के अलावा सिर पर हथौड़े से 4 से 5 वार किए. उस के शरीर पर कई जगह चोटें भी आई थीं. वहीं मनदीप कौर के सिर पर 2 से 3 बार हथौड़ा मारा गया था, जिस से उस के दिमाग का कुछ हिस्सा भी बाहर आ गया था.

डीजीपी डा. सुरेश अरोड़ा ने इस मामले को जल्द सुलझाने के लिए लुधियाना पुलिस कमिश्नर डा. सुखचैन सिंह गिल से बात की. पुलिस ने राजविंदर के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में ऐसे कई नंबर सामने आए, जो अमृतसर के रहने वाले लोगों के थे. उन में एक रिक्शे वाले का नंबर भी था.

पुलिस ने उन सब से पूछताछ की थी, पर कोई खास सुराग हाथ नहीं लगा. काल डिटेल्स से यह बात भी पता चली कि हत्यारे ने वारदात के दिन सुबह फोन पर अपने भांजे मनप्रीत सिंह से भी बात की थी और उस से काम ढूंढने को कहा था. हत्यारों की तलाश में पुलिस की कई टीमें अमृतसर भेजी गईं, जहां से पता चला है कि राजविंदर समयसमय पर किराए का कमरा बदलता रहता था.

जांच में यह बात भी पता चली थी कि हत्यारे पर दहेज प्रताड़ना का एक मामला भी दर्ज है. इस मामले में वह वांटेड था और पुलिस उसे तलाश रही थी. पुलिस की तरफ से उस की पत्नी और ससुर को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया, लेकिन उन से कुछ ज्यादा पता नहीं चल सका.

फिर एक दिन दविंदर सिंह के पास राजविंदर का फोन आया. उस ने कहा कि उस ने थाने में जो 40 हजार रुपए गायब होने की रिपोर्ट लिखाई है, वह गलत है. अलमारी में केवल 10 हजार रुपए मिले थे. उस ने यह भी बताया कि उस के चक्कर में गुरविंदर और बच्चों की हत्या हो गई लेकिन वह उन्हें छोड़ेगा नहीं. दविंदर सिंह ने यह सारी जानकारी थानाप्रभारी को बता दी.

राजविंदर के फोन की लोकेशन और अन्य जानकारी मिलने के बाद 19 अगस्त, 2018 को सीआईए-2 इंचार्ज राजेश कुमार शर्मा ने राजविंदर सिंह को संगरूर से गिरफ्तार कर लिया. वह एक धर्मशाला में छिपा बैठा था. उसे गिरफ्तार करने के बाद लुधियाना लाया गया और पुलिस कमिश्नर व अन्य आला अधिकारियों के सामने उस से पूछताछ की गई.

पूछताछ के दौरान राजविंदर ने बड़ी आसानी से अपना गुनाह कबूल करते हुए दिल दहला देने वाले इस तिहरे हत्याकांड की जो कहानी बताई, वह एक विवेकहीन आदमी की खराब मानसिकता का परिणाम थी.

दरअसल राजविंदर अपनी बहन गुरविंदर की हत्या नहीं करना चाहता था और न ही दोनों मासूमों से उस की कोई दुश्मनी थी. वह केवल अपने जीजा दविंदर सिंह की हत्या करना चाहता था. पर हालात ऐसे बन गए कि उसे इस तिहरे हत्याकांड को अंजाम देना पड़ा.

राजविंदर का असली नाम रविंदर बख्शी था लेकिन बाद में उस ने अपना नाम बदल कर राजविंदर कर लिया था. इस के पीछे कारण यह था कि उसे दहेज प्रताड़ना के एक केस में भगोड़ा घोषित किया गया था. वह पिछले 2 सालों से अपने जीजा दविंदर सिंह का कत्ल करने की योजना बना रहा था.

दरअसल राजविंदर सिंह को शक था कि उस की दोनों शादियां टूटने और उस का घर बरबाद होने के पीछे उस की बुआ की लड़की गुरविंदर कौर के पति दविंदर सिंह का हाथ है. असल में राजविंदर के पिता जसविंदर भी गुरुद्वारे में ग्रंथी थे और उन के हरचरण नगर व गुरु अर्जुनदेव नगर में अपने मकान थे, जो बिक चुके थे.

राजविंदर के पिता की मौत हो चुकी थी. उस के मन में यह बात बैठ गई थी कि उन के मकान बिकवाने के पीछे दविंदर की कोई साजिश थी. इन्हीं कारणों से उस के पिता की भी मौत हुई थी.

राजविंदर की पहली शादी सन 1997 में हुई थी. पत्नी के साथ विवाद के कारण उस की पत्नी ने सन 2000 में उस के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करवाया था और उसे छोड़ कर चली गई थी. दहेज उत्पीड़न मामले में राजविंदर भगोड़ा घोषित था. पुलिस से बचने के लिए वह अमृतसर चला गया था. उन दिनों उस के पिता दविंदर सिंह के साथ मिल कर काम करते थे.

पहली पत्नी से तलाक होने के बाद दविंदर ने अमृतसर की एक महिला से राजविंदर की दूसरी शादी करवा दी थी. दहेज उत्पीड़न केस में भगोड़ा होने के कारण राजविंदर ने अपनी पहचान छिपा कर फरजी दस्तावेजों के आधार पर अपना नाम बदल कर राजविंदर सिंह और पिता का नाम अजीत सिंह कर लिया था.

इस के बाद राजविंदर दूसरी पत्नी को ले कर दिल्ली और मुंबई में रहा. दूसरे शहरों में किराए पर रहते हुए वह कढ़ाई, लोन एजेंट, सेल्समैन आदि की अलगअलग नौकरियां करता रहा. वह फिल्म भी बनाना चाहता था, लेकिन जब उस की दूसरी पत्नी को उस की पहली शादी के बारे में पता चला तो वह उसे छोड़ कर चली गई. इस दौरान उसे सूचना मिली कि काम में नुकसान होने की वजह से उस के पिता ने अपने दोनों घर बेच दिए हैं.

अपने मन से हारे हुए राजविंदर को शक हुआ कि उस की दूसरी पत्नी को पहली शादी वाली बात दविंदर सिंह ने बताई है. जिस की वजह से उस के मन में दविंदर सिंह के प्रति रंजिश पैदा हो गई थी. वह उन का कत्ल करने की योजना बनाने लगा.

इस के लिए वह लुधियाना में दविंदर सिंह के घर पर भी रहा लेकिन बाद में पास ही किराए के मकान में रहने लगा. वह पिछले 2 सालों से दविंदर सिंह का कत्ल करने की योजना बना रहा था. इस के लिए उस ने हथौड़ा, कटर, करंट वाली तारें व अन्य प्रकार के सामान जुटा रखे थे.

पिछले कुछ महीनों में वह कई बार दविंदर सिंह को मारने के लिए अपने हथियार छिपा कर भी ले गया था लेकिन उसे मौका नहीं मिल सका. इस दौरान राजविंदर को उस के मकान मालिक ने घर खाली करने के लिए चेतावनी दे दी थी क्योंकि उस ने कई महीनों से उस का किराया नहीं दिया था. जिस के बाद रविंदर ने अब और देर करना उचित नहीं समझा. उस ने वारदात को जल्दी अंजाम देने का पक्का मन बना लिया था.

वारदात वाले दिन उसे पता चला कि दविंदर सिंह घर पर ही मौजूद है. अपने साथ हथौड़ा ले कर वह उन के घर चला गया.

लेकिन दविंदर सिंह उस के आने से पहले ही किदवई नगर गुरुद्वारे चले गए थे. दविंदर सिंह को घर में न पा कर रविंदर का खून खौल उठा. वह ऊपरी मंजिल पर चला गया और वहां मौजूद गुरविंदर कौर के सिर पर पीछे से हथौड़े का एक भरपूर वार कर दिया.

हथौड़े का वार इतना शक्तिशाली था कि एक ही वार से गुरविंदर कौर चारों खाने चित्त हो कर वहीं गिर गईं. गुरविंदर की हत्या करने के बाद वह वहीं बैठ कर दविंदर सिंह के आने का इंतजार करने लगा.

वह मन ही मन तय कर के आया था कि आज अपनी बरबादी के कारण दविंदर सिंह की हत्या कर के ही वहां से जाएगा. इस बीच गुरविंदर कौर को दोबारा खड़े होने का प्रयास करता देख कर वह उन्हें घसीट कर नीचे ले आया और फिर से उन पर हथौड़े से वार किए. गुरविंदर कौर का काम तमाम करने के बाद उस ने ऊपरी मंजिल से सारा खून साफ कर दिया.

इस के बाद वह नीचे आ कर बैठ गया. इसी बीच बच्चों में पहले ऋतिक और बाद में मंदीप कौर स्कूल से घर आए, जिन्होंने वहां पर खून देख कर पूछा, ‘‘नानाजी, यह किस का खून है और नानी कहां हैं?’’

इतना पूछने के बाद दोनों बच्चे नानी को देखने के लिए ऊपर जाने लगे तो रविंदर उर्फ राजविंदर ने पहले ऋतिक और फिर मंदीप की हथौड़े और कटर से निर्मम हत्या कर दी. फिर उस ने अलमारी में रखे 10 हजार रुपए निकाल लिए.

तीनों हत्याएं किए हुए जब कुछ देर बीत गई और दविंदर फिर भी नहीं लौटे तो पकड़े जाने के डर से वह घर के बाहर ताला लगा कर वहां से फरार हो गया.

गुरविंदर के घर से निकलने के बाद वह अपने कमरे पर गया और हाथमुंह धो कर खून आदि साफ करने के बाद कपड़े बदल लिए. फिर वह वहां से चला गया.

राजविंदर पहले माछीवाड़ा गया. उस के बाद अमृतसर चला गया. अमृतसर में 2 दिन तक धर्मशाला में रहने के बाद वह राजस्थान स्थित हनुमानगढ़ चला गया. हनुमानगढ़ से वह संगरूर आ गया और एक धर्मशाला में रहने लगा. उस ने समाचारपत्रों में अपनी फोटो भी देख ली थी.

चूंकि उस का टारगेट दविंदर सिंह थे और उस के मन में यह बात बैठी हुई थी कि दविंदर सिंह बच गए हैं, इसलिए उस ने किसी अन्य आदमी के फोन से दविंदर सिंह को फोन कर जान से मारने की धमकी दी और यह भी बताया कि उन के घर से मात्र 10 हजार रुपए मिले थे, 40 हजार की बात झूठी है. दविंदर सिंह ने इस फोन के बारे में पुलिस को बता कर राजविंदर के खिलाफ धमकी देने की एक रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी.

इसी फोन की लोकेशन को ट्रेस करते हुए सीआईए की टीम ने आरोपी को संगरूर की एक धर्मशाला में जा कर धर दबोचा. राजविंदर ने मौके से कुछ नकदी भी उठाई थी, जिस के बारे में वेरीफाई करने के अलावा वारदात में प्रयुक्त हथौड़ा बरामद कर लिया. बाकी के हथियार बरामद करने के लिए पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया.

रिमांड के दौरान राजविंदर उर्फ रविंदर की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हुए कटर और छुरी भी बरामद कर ली.

रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद 21 अगस्त, 2018 को राजविंदर को पुन: अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

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