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हिन्दुत्व की हार

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों भाजपा क्रिकेट की बोली में 5-0 से मैच की सीरीज हार गई. इसका सबसे बडा कारण हिन्दुत्व का प्रचार करना था. विरोधी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार में कहीं भी हिन्दुत्व की बात नहीं की.

हिन्दुत्व का मतलब केवल पंडित्व है जो धर्म के नाम पर आम आदमी की जेब ढीली कराता है. एक तरफ भाजपा राहुल गांधी की जाति, धर्म, जनेऊ और गोत्र पर सवाल कर उनको घेरती रही. सबसे पहले गांधी को विधर्मी साबित करने का प्रयास किया गया. यह साबित करने का प्रयास किया गया कि राहुल गांधी फर्जी हिन्दू है.

राहुल गांधी ने जब अपने गोत्र का खुलासा कर बताया कि वह कौल गोत्र के कश्मीरी ब्राहमण हैं. इस पर भाजपा के लोगों ने यह कहना शुरू किया कि यह कौल गोत्र होता ही नहीं है. जाति ही नहीं परिवार के नाम पर भी राहुल गांधी की मां के नाम पर हमले किये गये. प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी को ‘कांग्रेस की विधवा कहा.

‘मोदी-शाह’ नागपुर के कहने पर देश में हिन्दू राज्य स्थापित करने में लगे हैं. जिसमें वर्ण व्यवस्था सबसे ऊपर है. यही वजह है कि हनुमान तक को दलित वनवासी और आदिवासी कहा गया. हिन्दू राज में राजाओं ने हमेशा ही जनहित के काम न करके पूजापाठ किया है. हिन्दू राजाओं के ऐसे कामों से पौराणिक कथायें भरी पडी हैं.

इन्ही में भोसलें, गायकवाड़ और सिंधिया वंश की कहानियां भी हैं जिनको हिन्दू राजा के नाम से जाना जाता था. हिन्दू राजाओं की तरह राज करने की प्रवृत्ति के चलते उनको सड़क, नहर, पानी और बिजली से मतलब नहीं है. यह सुविधाएं जनता अपने से जुटा लेती है. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इसी तरह से सरकार चला रहे हैं. शासन से अधिक वह अपने पूजापाठ और शहरों के नाम बदलने के कारण याद किये जाते हैं.

काम न आया योगी का प्रचार :

तीन सबसे प्रमुख राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ और राजस्थान में भाजपा की हार का सबसे बडा कारण हिन्दुत्व के नाम पर चुनाव लड़ना था. चुनाव प्रचार में केवल भाजपा ने हिन्दुत्व का प्रचार ही नहीं किया बल्कि विपक्षी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के गोत्र और वंश को भी मुद्दा बनाया. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ और राजस्थान उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे राज्य हैं. ऐसे में भाजपा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पार्टी का स्टार प्रचारक बनाकर उतारा. प्रमुख नेताओं में चुनावी प्रचार के लिये सबसे अधिक सभायें योगी ने की. इनमें मध्य प्रदेश में 17, छत्तीसगढ में 19, राजस्थान में 26 और तेलंगाना में 8 सभायें की गईं. इन सभाओं में योगी आदित्यनाथ ने धर्म, राम और देवी देवताओं को लेकर तमाम ऐसी बातें कही जो विवाद का भी कारण बन गई.

छत्तीसगढ के प्रचार अभियान की शुरूआत करते योगी ने कहा कि ‘छत्तीसगढ तो रामलला का ननिहाल है यहां तो राममंदिर बनना ही चाहिये.’ अपने प्रचार भाषण में योगी हर जगह योगी राममंदिर की चर्चा करते और कांग्रेस को दोषी ठहराते हुये धर्मविरोधी बताते थे. भाजपा नेता और छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह ने योगी के पैर छूकर आर्शिवाद लिया. राजस्थान में प्रचार के समय पर योगी आदित्यनाथ ने राम भक्त हनुमान को दलित और वनवासी, विंंचत बता दिया. जिसके विरोध् स्वरूप दलित हनुमान मंदिरों में अपना कब्जा करने लगे. योगी के बयान से हिन्दू धर्म में दलित और हिन्दूत्व की खाई और भी चौडी होती गई.

‘होली काउ स्टेट’ में लगा धक्का :

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ को भाजपा ‘होली काउ’ स्टेट मानती है. ‘होली काउ’ यानि गाय को माता मानने वाले राज्य. इन तीनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार थी. राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणामों ने बता दिया कि ‘होली काऊ’ प्रदेशों में भाजपा को जबरदस्त हार का सामना करना पडा. इन तीनों राज्यों में विधानसभा की कुल 519 सीटे हैं. 2013 में भाजपा को 377 सीटे यहां मिली थीं. भाजपा ने तीनों राज्यों में सरकार बनाई थी. 5 साल के बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को तीनों ही राज्यों में हार का सामना करना पडा. इस चुनाव में भाजपा को तीनों राज्यों में केवल 198 सीटे मिलीं. 179 सीटों का भाजपा का नुकसान हुआ.

इन तीनों राज्यों के चुनाव परिणाम का असर 2019 के आम चुनाव पर पडेगा. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ में लोकसभा की 65 सीटें हैं. विधानसभा चुनावों के परिणाम को लोकसभा चुनाव में बदल कर देखें तो भाजपा को 26 और कांग्रेस को 39 सीतें मिलती दिख रही हैं. जबकि 2014 के आमचुनाव में इन राज्यों में ही 62 सीटें मिली थीं. ऐसे में करीब 23 सीटो का नुकसान दिख रहा है. इस नुकसान का अंदाजा भाजपा को पहले से था यही वजह है कि भाजपा ने अपने विकास के मुददे को पीछे करके धर्म को चुनाव का मुददा बनाया. इसके बाद भी चुनाव हार गई.

भाजपा के तमाम प्रयासों के बाद भी ‘होली काउ’ राज्यों में पार्टी का जनाधर खिसक गया है. गंगा यमुना नदियों का यह क्षेत्र कृषि बाहुल्य है. यहां गांवों में किसानों की परेशानियों को कम करने की जगह पर गोरक्षा के नाम पर परेशानियां बढ गई हैं. छुटटा जानवर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो गोरक्षा के नाम पर होने वाले झगड़े गांवों की शांंत व्यवस्था को खतरा बने हैं. यह सच है कि एक बड़ा वर्ग इस तरह के झगडों से लाभ लेता है पर आम किसान इसमें परेशान हो रहा है.

आज लोगों को धर्म नहीं विकास चाहिये. मोदी ने विकास के नाम पर जो छवि बनाकर 2014 का आम चुनाव जीता था. धर्म का सहारा लेकर 2019 में वह अपना जनाधर घटाने का काम कर रहे हैं. ‘होली काउ’ राज्यों में पार्टी की हालत एक बागनी भर है. राम के राज्य उत्तर प्रदेश आते आते यह हालात और भी खराब हो जायेगी. अगर धर्म के नाम की राजनीति और अराजकता कम नहीं हुई तो 2019 में भाजपा के लिये आधी सीटें भी बचा पाना संभव नहीं होगा.

औस्ट्रेलियाई टीम ने 34 साल बाद ये क्या कर दिया

भारत और औस्ट्रेलिया के बीच चार टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला शुक्रवार (14 दिसंबर) से शुरू हो रहा है. मेजबान टीम पर यह मुकाबला जीतकर सीरीज में बराबरी पर आने का दबाव है. हालांकि, औस्ट्रेलियाई टीम के लिए यह आसान नहीं होगा.

मेजबान टीम का पिछले एक साल का प्रदर्शन उसके प्रशंसकों के लिए निराश करने वाला रहा है. उसके खराब खेल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे पहले 1984 में ही उसने इतना कमजोर प्रदर्शन किया था.

औस्ट्रेलिया की टीम पहले टेस्ट में पहली पारी में 235 और दूसरी पारी में 291 रन ही बना सकी. साफ है, वह दोनों ही पारियों में 300 का स्कोर नहीं छू सकी. दिलचस्प बात यह है कि 2018 में ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है.

यह टीम तो इस साल पिछली 13 पारियों में सिर्फ एक बार ही 300 का आंकड़ा छू सकी है. इससे पहले वह 1984 में इस दौर से गुजरी थी. तब वह 19 पारियों में सिर्फ एक बार 300 का स्कोर पार कर सकी थी.

आखिरी बार यूएई में बनाए थे 300+ रन

औस्ट्रेलिया की टीम ने आखिरी बार 300 रन का आंकड़ा इस साल पाकिस्तान के खिलाफ दुबई में पार किया था. उसने 7-11 अक्टूबर के बीच खेले गए टेस्ट मैच में पहली पारी में 202 रन बनाए. हालांकि, उसने दूसरी पारी में अपना प्रदर्शन सुधारते हुए 8 विकेट पर 362 रन बनाए. उसने इस प्रदर्शन की बदौलत यह टेस्ट मैच ड्रॉ करा लिया. लेकिन इसके बाद खेले गए दूसरे टेस्ट में वह 145 और 164 रन ही बना सका और मैच हार गया.

द. अफ्रीका में 8 पारी, एक बार 300+ बनाया

औस्ट्रेलिया ने इस साल मार्च-अप्रैल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चार टेस्ट मैच खेले थे. उसने एक मार्च से डरबन में खेले गए पहले टेस्ट की पहली पारी में 351 और दूसरी पारी में 227 रन बनाए. यह एकमात्र मौका था, जब उसने इस सीरीज में 300 का आंकड़ा पार किया. उसने यह मैच 118 रन से जीता. इसके बाद वह अगले तीन टेस्ट की छह पारियों में 243, 239, 255, 107 221 और 119 रन ही बना सका. वह ये तीनों मैच हार गया.

तीन सीरीज में सिर्फ दो बार 300+

इस तरह औस्ट्रेलिया ने मौजूदा सीरीज और पिछली दो सीरीज को मिलाकर सिर्फ दो बार ही 300 रन का आंकड़ा पार कर सकी है. महत्वपूर्ण यह है कि इन दोनों ही मौकों पर वह मैच नहीं हारी. संकेत साफ हैं, कि अगर औस्ट्रेलिया 300 रन बना लेता है तो उसे हराना आसान नहीं होगा.

स्मिथ और वार्नर की कमी खल रही

औस्ट्रेलिया की बैटिंग का यह बुरा हाल स्टीवन स्मिथ, डेविड वार्नर और कैमरन बेनक्रॉफ्ट पर लगे बैन के कारण हुआ है. इन तीनों को बौल टैम्परिंग मामले में दोषी पाए जाने के बाद प्रतिबंधित किया गया है. क्रिकेट औस्ट्रेलिया (सीए) ने स्मिथ और वार्नर पर एक-एक साल और बेनक्रॉफ्ट पर नौ महीने का बैन लगाया है.

आने वाली है शाहरुख की बेटी की फिल्म, लंदन में हो रही है शूटिंग

चर्चाएं हैं कि शाहरुख खान और गौरी खान की बेटी सुहाना खान विदेश में कहीं अपनी पहली लघु फिल्म की शूटिंग कर रही हैं. संभवतः यह जगह लंदन है. यह फिल्म उसके स्कूल के एसाइनमेंट की फिल्म हो सकती है. यह बात सुहाना खान के फैन क्लब द्वारा सोशल मीडिया पर डाली गयी तस्वीरों से चर्चा में आयी है. इस तस्वीर में सुहाना खान ने हरे रंग की टी शर्ट पर नीले रंग की जींस पहन रखी है.

सुहाना का झुकाव कला व अभिनय की तरफ है, यह बात सभी को पता है. पिछले सप्ताह ही शाहरुख खान लंदन में सुहाना का नाटक ‘रोमियो ज्यूलिएट’ देखने गए थे. इस नाटक में सुहाना खान ने ज्यूलिएट का किरदार निभाया है.

इंस्टाग्राम पर शाहरुख खान ने इस नाटक के पोस्टर के सामने खड़े होकर सुहाना के साथ खींची गयी तस्वीर डाली थी. इस तस्वीर के नीचे शाहरुख खान ने लिखा-‘‘विथ माई ज्यूलिएट इन लंदन. व्हाट ए वंडरफुल एक्सपीरियंस एंड एक्सेपशनल परफार्मेंस बाय द होल कास्ट. काग्रेच्युलेशन टू द होल टीम.’’(लंदन में मेरी ज्यूलिएट के साथ. एक अद्भुत अनुभव और पूरी टीम का जानदार परफार्मेंस रहा. पूरी टीम को बधाई.’’

सुहाना खान इन दिनों लंदन में पढ़ाई कर रही हैं. कुछ समय पहले वह अपने अभिनय के शौक का जिक्र कर चुकी हैं. एक अंग्रेजी पत्रिका के अगस्त अंक के मुख्य पृष्ठ की स्टोरी के इंटरव्यू में उन्होंने अभिनय को करियर बनाने की बात कही थी.

कुछ हट कर हैं ये 13 वेबसाइट

इंटरनेट पर करोड़ों वेबसाइट्स उपलब्ध हैं और हर रोज हजारों नई वेबसाइट्स तैयार होती हैं. लेकिन वेबसाइट्स के इस महासागर में कुछ ही वेबसाइट्स ऐसी हैं, जो अलग सी सर्विसेज ऑफर करती हैं. 13 ऐसी ही वेबसाइट्स हैं, जो बहुत काम की हैं.

1. Zamzar.com

एक फाइल को दूसरी फाइल में कन्वर्ट करना है तो इस वेबसाइट का उपयोग कर सकते है. इस वेबसाइट में साइनअप करने की भी जरूरत नहीं है. इसमें 1200 तरह की फाइल्स को कन्वर्ट किया जा सकता है. अगर आपके पास ऐसा फॉरमैट है जो साइट पर कन्वर्ट नहीं हो रहा, आप उस फॉरमेट को वेबसाइट पर ईमेल कर दीजिए और वेबसाइट के संचालक इसे कन्वर्ट करने की कोशिश करेंगे. लेकिन वेबसाइट में आप 50MB से बड़े साइज की फाइल फ्री वर्जन में आप अपलोड नहीं कर सकते, यह बात ध्यान रखनी होगी. फाइल बड़ी है तो उसे अपलोड करने के लिए पेड सर्विस लेनी होगी.

2. Mailinator.com

इन दिनों लगभग सभी वेबसाइट्स आपको साइन-अप करने के लिए ईमेल अड्रेस इस्तेमाल करने को कहती हैं. वे साइट्स आपकी ईमेल आईडी को अन्य सर्विसेज के साथ शेयर करेंगी या नहीं, इस बारे में आपको कोई जानकारी नहीं होती है. अगर उन्होंने शेयर कर दी तो आपके मेलबॉक्स में स्पैम्स की बाढ़ आ जाएगी. इसलिए Mailnator सर्विस का इस्तेमाल करके आप ऐसा ईमेल अड्रेस बना सकते हैं, जो कुछ ही घंटों बाद नष्ट हो जाता है. आप टेंपररी ईमेल के जरिए साइनअप करके अपना अकाउंट ऐक्टिवेट कर सकते हैं. स्पैम की चिंता किए बगैर आप ऐसा कई बार कर सकते हैं. आप कितने ईमेल अड्रेस बना सकते हैं, इस वेबसाइट में इसकी कोई लिमिट नहीं है. ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके जरिए आप मेल सिर्फ रिसीव कर पाएंगे, सेंड नहीं.

3. PrivNote.com

कई बार आप किसी निजी जानकारी को किसी के साथ शेयर करना चाहते हैं, मगर सेफ्टी की चिंता होती है. जैसे कि मान लीजिए किसी को एटीएम पिन, बैंक पासवर्ड या ईमेल अड्रेस वगैरह बताना हो. ऐसी स्थिति में SMS, चैट या ईमेल का इस्तेमाल करना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. इसलिए आप PrivNote का इस्तेमाल करते हैं. इसके जरिए आप ईमेल या चैट के जरिए टेक्स्ट नोट भेज सकते हैं, जो सामने वाले द्वारा पढ़ लिए जाने के बाद डिलीट हो जाता है. आप नोट को एनक्रिप्ट भी कर सकते हैं.

4. Disposablewebpage.com

इस वेबसाइट में ईमेल अड्रेस की ही तरह आप टेंपररी वेबपेज भी बना सकते हैं. जन्मदिन, शादी या रीयूनियन वगैरह के लिए पेज बनाना है तो टेंपररी वेबपेज बनाना ठीक रहता है. आपको बस साइनअप करके अपना पेज बनाना है. इसमें कोडिंग की भी जरूरत नहीं है, आइकॉन के जरिए आप पेज क्रिएट कर सकते हैं. टेक्स्ट, फोटो, विडियो और लोकेशन वगैरह आप इसमें ऐड कर सकते हैं. इसके बाद आप अपने दोस्तों वगैरह के साथ वेबपेज का लिंक शेयर कर सकते हैं. 90 दिन बाद यह पेज अपने आप डिलीट हो जाता है.

5. SimplyNoise & ASoftMurmur

किसी काम पर फोकस करना हो तो ये वेबसाइट्स आपकी मदद करेंगी. ये फ्री में आपको बहुत सारे ऐंबियंट साउंड ऑफर करती हैं. आप नॉइज सिलेक्ट करके ऑडियो लेवल और स्लीप टाइमर ऑप्शन वगैरह सेट कर सकते हैं. asoftmurmur पर आप बारिश, लहरों, पक्षियों और कॉफी शॉप तक के साउंड को चुन सकते हैं. दोनों वेबसाइट्स के ऐंड्रॉयड और iOS ऐप्स भी हैं.

6. ManualsLib.com

जब आप कोई नया प्रॉडक्ट खरीदते हैं, हो सकता है कि इसमें यूजर मैनुअल न हो. यह भी हो सकता है कि आपने वह फेंक दी हो या गुम हो गई हो. ऐसे में आप ManualsLib.com में जाकर विभिन्न डिवाइसेज की कैटिगरी में जाकर अपने डिवाइस या प्रॉडक्ट को सर्च कर सकते हैं. उसकी मैन्युअल आपके सामने होगी. आप उसे प्रिंट भी कर सकते हैं.

7. Newsmap.jp

क्या आपको कभी ऐसे सिंगल पेज की जरूरत महसूस हुई है जहां पर आप लेटेस्ट और ट्रेडिंग न्यूज को एक ही जगह पा सकें. Newsmap यही काम करता है. यह आपको हेडलाइन्स दिखाता है और हर कैटिगरी के हिसाब से अलग रंग में दिखाता है. आप इसे कस्टमाइज भी कर सकते हैं. हेडलाइन बॉक्स का साइज बताता है कि न्यूज कितनी ट्रेंड हो रही है. अगर आप कोई आर्टिकल पढ़ना चाहते हैं तो आपको किसी हेडलाइन पर क्लिक करना होगा और आर्टिकल नए टैब में खुल जाएगा.

8. AccountKiller.com

ज्यादातर सोशल नेटवर्क वेबसाइट्स अकाउंट क्लोज करने की प्रक्रिया को जटिल बनाकर रखती हैं. अगर आप अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को डिलीट करना चाहते हैं तो AccountKiller.com पर जाएं. यह आपको बताएगी कि कौन सी वेबसाइट से अकाउंट हटाना कितना मुश्किल है. क्लिक करने पर यह डिऐक्टिवेशन के लिए डायरेक्ट लिंक दे देता है.

9. TwoFoods.com

अगर आप अपनी सेहत को लेकर फिक्रमंद हैं और यह देखना चाहते हैं कि आप कितनी कैलोरीज ले रहे हैं, TwoFoods.com आपके लिए ही है. इसमें एक पेज का इंटरफेस है, जो अलग-अलग तरह के खाने की कैलोरीज के बारे में बताता है. आप किसी डिश का नाम इनपुट कीजिए और यह उसमें मौजूद कैलोरीज, कार्ब, फैट्स और प्रोटीन की जानकारी दे देगा. भारतीय व्यंजनों के लिए यह मिलते-जुलते व्यंजनों को सजेस्ट करता है, जिससे आपको कुछ आइडिया मिल जाए.

10. Pdfunlock.com

कुछ PDF फाइल्स प्रॉटेक्टेड होती हैं. अगर आपके पास प्रॉटेक्टेड फाइल का पासवर्ड भी है, तब भी आप इसमें बदलाव नहीं कर पाएंगे. प्रॉटेक्शन को रिमूव करने के लिए PDUnlock पर जाएं, पासवर्ड डालकर अनलॉक करें और यह वेबसाइट आपको अनप्रॉटेक्टेड PDF डाउनलोड करने को दे देगी.

11. Savr.com

हम सभी कई सारे डिवाइसेज पर काम करते हैं, मगर उनके बीच फाइल्स को शेयर करना आसान नहीं होता है. अगर आप चाहते हैं कि यूएसबी ड्राइव के बिना या खुद को ही ईमेल भेजे बिना फाइल्स शेयर की जा सकें तो Savr.com का इस्तेमाल करें. यह आपको कॉमन क्लिपबोर्ड और कॉमन स्पेस देता है, जहां आप फाइल्स स्टोर कर सकते हैं. यह पीसी और मोबाइल पर भी काम करती है. इसमें 25MB तक की फाइल्स शेयर की जा सकती हैं.

12. Printfriendly.com

कभी ब्राउजर से किसी वेबपेज को डायरेक्ट प्रिंट करने की कोशिश की है, ऐसा करने पर अजीब सा प्रिंट आता है, जिसमें तस्वीरें, लिंक वगैरह नजर आते हैं. अगर आप चाहते हैं कि मुख्य टेक्स्ट ही प्रिंट हो, इसके लिए आपको उस पेज का URL लेकर Printfriendly.com में पेस्ट करना होगा. कुछ ही सेकंड्स में यह प्रिंटेबल पेज दिखा देता है, जहां से आप प्रिंट ले सकते हैं. Firefox, Chrome, Internet Explorer और Safari के लिए प्रिंटफ्रेंडली के एक्सटेंशन भी उपलब्ध हैं.

13. Spreeder.com

अगर आप जल्दी-जल्दी सब कुछ पढ़ना शुरू कर दें तो बहुत सी जानकारी जुटा पाएंगे. पढ़ने की स्पीड अभ्यास से बढ़ाई जा सकती है. Spreeder.com पर आप किसी टेक्स्ट का हिस्सा पोस्ट कीजिए. यह एक-एक शब्द आपके सामने डिस्प्ले करना शुरू कर देगा, जिसे आप पढ़ सकते हैं. आप टेक्स्ट वगैरह को कस्टमाइज कर सकते हैं और अपनी स्पीड माप सकते हैं. स्पीड वगैरह को भी अडजस्ट कर सकते हैं. इस तरह आप किसी भी पैरा को जल्दी पढ़ सकते हैं.

स्मार्ट किसान… स्मार्ट वर्ल्ड… स्मार्ट खेती…

स्मार्ट और स्मार्ट… अब सब कुछ होगा स्मार्ट.  खाना खाने के तौरतरीके बदल गए तो जो खाना खाया जाना है उसे स्मार्ट तरीके से तैयार किया जाए. ऐसा होगा भी क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने अन्नदाता यानी किसान को स्मार्ट बनाने का बीड़ा उठा लिया है. किसान अब साधारण तरीके से नहीं बल्कि स्मार्ट तरीके से खेती करते दिखाई देंगे. ऐसे भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के किसान स्मार्ट बनेंगे यानी मौडर्न तकनीक की मदद से खेती करेंगे और खेतों से भरपूर फसल हासिल करेंगे.

देश में खेतीबाड़ी में अब स्मार्ट खेती का चलन बढ़ रहा है. छोटे व सीमांत किसानों को भी इस का फायदा उठाने का मौका मिल रहा है. स्मार्ट खेती के क्षेत्र की दिग्गज अंतरराष्ट्रीय कंपनियां छोटे और सीमांत किसानों की जरूरत के हिसाब से नए तरीके पेश कर और स्पेशलिस्ट मौडल अपना कर उन की मदद कर रही हैं.

मौडर्न तकनीक के ज़रिए खेती में कम संसाधनों के साथ ज्यादा पैदावार हासिल की जाती है. इस में जीपीएस, जीएनएसएस और ड्रोन के इस्तेमाल से इस बात का सटीक अंदाज़ा लगाया जाता है कि ज्यादा से ज्यादा पैदावार के लिए कौन सी फसल और मिट्टी चाहिए, साथ ही फसल की बरबादी को कम कैसे किया जाए.  यही नहीं, फसल कटने के बाद के कार्यों में भी इस का इस्तेमाल होता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कृषि उत्पादों का भंडारण वहां हो, जहां मौसम व उपकरणों को कंट्रोल करने के लिए ऊर्जा का सटीक इस्तेमाल हो.

स्मार्ट खेती हालांकि पिछले कुछ समय से हो रही है लेकिन अभी तक कॉर्पोरेट फॉर्म और बड़ी जोत वाले किसानों में ही इस का इस्तेमाल करने की कूवत थी. इस की सीधी वजह यह थी कि इस के लिए जरूरी उपकरण खरीदने और लगाने में बहुत अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है और ज़्यादातर उपकरणों को दूसरे देशों से इम्पोर्ट करना पड़ता है. यही वजह है कि देश में इस का प्रसार नहीं हो पाया.

ट्रिबल इनफार्मेशन टेक्नोलौजीज इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर का कहना है कि वे किसानों को उन की ज़रुरत के मुताबिक़ उपकरण आदि किराए पर देने का मौडल अपना रहे हैं और मूल उपकरण बनाने वाले लोकल मैन्युफैक्चरर्स को अपने साथ ले रहे हैं. उन की मदद से वे उत्पादों को आगे बढ़ा सकते हैं.

गौरतलब है कि ट्रिंबल भारत में लौजिस्टिक्स, नौवहन और परिवहन में इनफार्मेशन टेक्नोलौजी बेस्ड सोल्यूशन मुहैया कराती है. अब उस की नजर स्मार्ट खेती में अपने कारोबार का विस्तार करने पर है. कम्पनी का मानना है कि भारत में ज़्यादातर छोटे किसान हैं और वे छोटी जोत पर निर्भर हैं. उन की हालत सुधरी तो स्मार्ट खेती का प्रचलन जोर पकडऩे लगेगा और फिर यह अरबों डॉलर का उद्योग बन जाएगा.

मालूम हो कि कई राज्य सरकारें अपने सब्सिडी कार्यक्रम में स्मार्ट खेती के उपकरण शामिल करने पर विचार कर रही हैं. राबर्ट बौश इंजीनियरिंग ऐंड बिज़नेस सौल्यूशंस के सीनियर एग्जीक्यूटिव का कहना है कि उन की कंपनी भारतीय किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर बने विशेष सौल्यूशंस पर जोर दे रही है.  उन्होंने कहा कि भारत में कौर्पोरेट खेती का चलन बढ़ रहा है जो हमारे उपकरण और सेंसर खरीद सकती है.  छोटे और सीमांत किसानों के लिए हमारे पास स्पेशल मेम्बरशिप मौडल है.  हम सहकारिता संघों के साथ भी काम कर रहे हैं जो हमारे उपकरण किराए पर ले सकते हैं.

अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के अलावा कई देसी स्टार्टअप भी इस क्षेत्र में काम कर रहें हैं. वे उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के लिए रोबोटिक्स, डेटा एनालिटिक्स, आईओटी और ब्लौकचेन तकनीक के इस्तेमाल कर रही हैं.

इस प्रकार अब देश के किसान खेती के पेशे में अमेरिका के किसानों की तरह स्मार्ट हो जाएंगे. देश का किसान खुश होगा तो देश का सही विकास हो सकेगा वर्ना उन के विकास के बिना विकास अधूरा ही माना जाएगा.

टी फेस मास्क से पाएं निखरी व बेदाग त्वचा

जिस तरह से सुबह की एक कप चाय आपमें ताजगी भरकर आपका दिन बना देती हैं ठीक उसी तरह चाय चेहरे को निखारकर उसे खूबसूरत और जवां बनाने का काम करती है. यानी कि चाय ना केवल सेहत के लिये ही अच्‍छी है बल्कि इसके अंदर कुछ ऐसे तत्‍व हैं जो कि त्‍वचा की सुंदरता को भी निखारते का काम करते हैं. इसके अंदर एंटी औक्‍सीडेंट पाया जाता है जो कि त्‍वचा को दिनभर तरो ताजा रखने का काम करता है. आइये जानें टी फेस मास्‍क की विधि के बारे में.

चाय, ओट्स और हनी मास्‍क

आधा कप ओट्स ले कर उसे पाउडर बना लें. इसे एक कंटेनर में डालें और फिर 3 चम्‍मच चाय तथा ½ चम्‍मच शहद मिलाएं. इस पेस्‍ट को अच्‍छी तरह से मिलाएं और पूरे चेहरे तथा गर्दन पर हल्‍के हाथों से लगा लें. इससे सुंदरता निखरेगी और चेहरा ग्‍लो करने लगेगा.

चाय और चौकलेट मास्‍क

चाय तथा चौकलेट दोंनो ही एंटीऔक्‍सीडेंट में रिच होते हैं. एक कटोरी में 4 चम्‍मच कोको पाउडर और 3 चम्‍मच चाय ले कर मिक्‍स कर लें. इस पेस्‍ट को अपने चेहरे पर 15-20 मिनट तक के लिये लगाएं. ऐसा करने से चेरहे से पिंपल तथा झुर्रियां दूर होती हैं.

चाय, चावल का आटा और लेमन मास्‍क

3 चम्‍मच चावल का आटा, 2 चम्‍मच चाय और 2-3 बूंद नींब के रस का ले कर अच्‍छी तरह से मिला लें. इस मिश्रण से अपने पूरे चेहरे पर हल्‍के हल्‍के मसाज करें और 20 मिनट के बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें. ऐसा करने से आंखों के नीचे पडे़ डार्क सर्कल मिटेंगे और आंखों की सूजन भी कम होगी.

चाय और केला मास्‍क

एक कटोरे में 2 चम्‍मच चाय और 1 केला पीस लें और पेस्‍ट बना लें. फिर इसे अपने चेहरे पर 15-20 मिनट तक के लिये लगा रहने दें, उसके बाद पानी से धो ले. इससे चेहरा हाइड्रेट हो कर ग्‍लो करने लगेगा.

शिक्षा या अशिक्षा

देश के शिक्षा संस्थानों में बड़ेबड़े लैक्चर दिए जाते हैं कि युवाओं को शराफत से रहना चाहिए, सच बोलना चाहिए, कानून मानना चाहिए. पर हालत यह है कि खुद ये शिक्षा संस्थान बेईमानी, चोरी, झूठ, धोखेबाजी, अनाचार, अत्याचार, बलात्कार का पाठ पढ़ाने वाले बन कर रह गए हैं. इस के जिम्मेदार भटके युवा नहीं, उन के मातापिता नहीं, दिशाहीन समाज नहीं, बल्कि शिक्षक और अधिकारी हैं.

अभी हाल ही में बिहार के मोतिहारी के विश्वविद्यालय के एक वाइस चांसलर अरविंद कुमार अग्रवाल ने अपने पद से इस्तीफा दिया क्योंकि उन की डिगरियों पर शक था और वे सुबूत पेश नहीं कर पाए. राष्ट्रपति के पास इसे ऐक्सैप्ट करने के अलावा चारा न था. वर्षों पहले ली गई डिगरियां झूठी पाई गईं यानी इतने साल तक एक झूठा व्यक्ति युवाओं को सदाचार का पाठ पढ़ाता रहा.

शिक्षा का विश्वदूत मानने वाली सरकार को 2014 के बाद 9वें वाइस चांसलर को निकालना पड़ा क्योंकि उन पर आरोप लगे थे. विश्व भारती, हेमवती नंदन बहुगुणा, इलाहाबाद, दिल्ली, जामिया मिलिया जैसे नामी विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर झूठे पाए गए हैं.

हमारे यहां पढ़ाई के नाम पर जगहजगह धंधे चल रहे हैं. कुछ को छोड़ कर सारे छात्र सिर्फ जुगाड़बाजी में लगे रहते हैं. पढ़ने से ज्यादा गुंडई का राज है क्योंकि शिक्षक अपनी सहूलियतों को ले कर धरनेप्रदर्शन करते रहते हैं. कक्षाओं में कोचिंग की बात होती है तो कोचिंग क्लासों में पेपर लीक करने की. यूनिवर्सिटी सरकारी हो या प्राइवेट, वहां आधे से ज्यादा शिक्षक झूठी, आधीअधूरी डिगरियों के बल पर नौकरियां पाते हैं और ड्यूटी के दौरान उन का समय ज्ञान देनेलेने में नहीं, बेईमानी करने में व्यतीत होता है.

जिस देश में शिक्षा को विरासत मान लिया गया हो, उस का यही हाल होगा. यहां तो 10-20 पीढ़ी पहले किसी ने 4 वेद पढ़ लिए तो आने वाली सारी पीढि़यां चतुर्वेदी हो जाती हैं, कभी किसी ने कुछ पढ़ लिया तो उस की संतानें त्रिपाठी बन जाती हैं. यहां शिक्षा का व्यक्ति के चरित्र से कुछ लेनादेना नहीं.

अगर यहां कुछ तेज हैं तो सिर्फ इसलिए कि इस देश की जमीन इतनी उपजाऊ है कि यहां असली फसल जैसे अपनेआप हो जाती है, वैसे ही योग्य व्यक्ति भी खुदबखुद तैयार हो जाते हैं. यह देश का सुनहरा पक्ष है कि हम बड़े देश होने के कारण सिर को कुछ तो उठा कर चल लेते हैं.

हल्की आई ब्रो को घना बनाने में ये उपाय हैं बेहद कारगर

आई ब्रो हमारे चेहरे का लुक डिसाइड करती हैं. हमें सुंदर और खूबसूरत दिखाने में आई ब्रो को अहम रोल होता है. लेकिन कई बार हार्मोनल इंबैलेंस, सही प्रकार का पोषण ना मिलने और भौंहो को ज्‍यादा थ्रेडिंग आदि करवाने की वजह से इसे दुबारा नार्मल होने में करीबन 6 से 8 महीने तक लग जाते हैं. अगर आपकी भी आई ब्रो हल्‍की है और आप उसे घना बनाना चाहती हैं तो इन प्राकृतिक चीजों का प्रयोग कीजिये और देखिये कि क्‍या सच-मुच लाभ हुआ.

नारियल तेल और नींबू

1/4 कप नारिल का तेल लीजिये और उसे नींबू की स्‍लाइस के साथ मिक्‍सर में पीस लीजिये. उसके बाद इस मिश्रण को रातभर के लिये ऐसे ही रख कर छोड़ दीजिये, फिर कुछ दिनों के लिये या फिर जब तक आई ब्रो घनी ना हो जाएं, इस मिश्रण को रूई की मदद से अपनी आई ब्रो पर लगाइये. इसे रात में सोने से पहले ही लगाएं क्‍योंकि इसको लगाने के बाद फिर 2 घंटे के लिये धूप में नहीं निकल सकती. नींबू के प्रभाव से त्‍वचा में जलन होने लगती है.

ऐलोवेरा

ऐलोवेरा की ताजी पत्‍तियों को छील कर उसके अंदर के गूदे को निकाल कर अपनी आई ब्रो पर लगाएं. ऐसा करने से आई ब्रो की ग्रोथ बढने लगेगी और स्‍किन भी.

दूध

दूध या उससे बने उत्‍पादों में विटामिन और प्रोटीन पाया जाता है. रात को सोने से पहले रूई को दूध में भिगो कर अपनी आइ ब्रो पर उसके आस पास की जगहों पर लगाएं. इससे दूध से मिले प्रोटीन और विटामिन से बालों की जडो़ को पोषण मिलेगा और वह फिर से ग्रो करने लगेंगी.

प्‍याज

इसमे पाया जाने वाला गंधक यानी की सल्‍फर आई ब्रो को दुबारा उगाने और उसे घना बनाने में मददगार साबित होता है. प्‍याज को पीस लीजिये और उसमें रस को अपनी आई ब्रो पर लगाइये.

कैस्‍टर औयल

हल्‍के हाथों से इस तेल को अपनी आई ब्रो पर केवल 2-3 मिनट के लिये मसाज कीजिये और छोड़ दीजिये. इसके बाद चेहरे को हल्‍के गरम पानी और फेस वॉश से 30 मिनट के बाद धो लीजिये. अगर यह तेल लगाने पर जलन या परेशानी पैदा हो तो इसे ना प्रयोग करें.

मेथी

नहाने से पहले या फिर रात को सोने से पहले मेथी को पीस लीजिये और उसे अपनी आई ब्रो पर लगा लीजिये. आप इसे पेस्‍ट में बादम का तेल भी मिला कर लगा सकती हैं, इससे आपकी त्‍वचा को नमी प्राप्‍त होगी.

जानिए कैसा होगा आप के रिलेशनशिप का भविष्य

एक रिलेशनशिप को चलाने के लिए दोनों साथियों का सहयोग जरुरी होता है. अगर दोनों साथी अपने रिश्ते को वक्त न दें तो रिश्ता टूट भी सकता है. एक आदर्श रिलेशनशिप में कमिटमेंट और निष्ठा का होना बेहद जरुरी है. इसके बिना रिश्ते के टूटने की सम्भावना ज्यादा हो जाती है.

चाहे आप लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में हो या लिव इन रिलेशनशिप में हो अगर आप अपने साथी को वक्त नहीं दे पा रहे हैं, अपने कमिटमेंट को निभा नहीं पा रहे हैं तो रिलेशनशिप के टूटने की संभावनाएं बढ़ जाती है. एक रिलेशनशिप का भविष्य कुछ बातों पर टिका होता है. हम आपको उन बातो के बारे में बताते हैं जो आपके रिश्ते के भविष्य के बारे में इशारा करते हैं.

  1. भविष्य के लक्ष्य: एक रिश्ते का भविष्य तभी निर्धारित किया जा सकता है जब व्यक्ति ने अपने भविष्य के बारे में कुछ सोच रखा हो. एक अच्छे रिलेशनशिप का उदाहरण उस तरह का रिलेशनशिप होता है जिसमे दोनों साथी को अपने जरूरतों और इच्छाओं के बारे में पता हो. जिनमे लड़का और लड़की दोनों को अपने लक्ष्य के बारे में पता होता है.

आज के दौर में उस रिश्ते का भविष्य ज्यादा सुरक्षित होता है जिसमे दोनों शादी जैसे फैसलों के बारे में खुल के बात करते है और भविष्य में कब शादी करनी है उसके बारे में पहले से आश्वश्त रहते हैं.

  1. भावनत्मक समीकरण: एक आदर्श रिश्ते में भावनात्मक समीकरण का होना बेहद जरुरी है. अगर लड़का लड़की एक दूसरे से सामान रूप से भावनात्मक रिश्ता कायम नहीं कर पाते तो रिश्ते में खटास आने की संभावनाएं पैदा हो जाती है. एक दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़ना, एक दूसरे की भावनाओं का ख्याल एक मजबूत रिश्ते की नींव रखता है.
  2. अपने साथी के प्रति ईमानदार रहना: अगर आप और आपका साथी एक दूसरे के प्रति ईमानदार रहते हैं और एक दूसरे से अपनी सारी बातें शेयर करते हैं तो आपके रिश्ते में किसी भी प्रकार के दिक्कत आने की संभावना न के बराबर हो जाती है.

वहीं अगर आप अपने पार्टनर से झूठ बोलते हैं या आपका पार्टनर आप से झूठ बोलता है तो रिश्ते में भरोसे की कमी हो जाती है और शक की समस्या बार-बार पैदा होने लगती है. ऐसे में रिलेशनशिप गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है और इसके टूटने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है.

  1. खुशी: अगर आप या आपका साथी रिलेशनशिप में खुश नहीं है तो जरुर कहीं कोई परेशानी है जिसे जल्दी दूर करना बेहद जरूरी है. अगर आप हर तरह से रिश्ते में अपना समर्पण देते हैं फिर भी आप या आपका साथी रिश्ते में खुश नहीं रहता तो ऐसे रिश्ते में आगे बढ़ना सही नहीं है. उसी रिश्ते का भविष्य ज्यादा सुरक्षित होता है जिसमे दोनों पार्टनर खुश रहते हैं और अपने रिलेशनशिप का आनंद उठाते हैं. रिलेशनशिप को लंबे समय तक अच्छे से चलने के लिए दोनों साथी को एक दूसरे को समझने, एक दूसरे की ख़ुशी में खुश रहना और एक दूसरे की ख़ुशी की वजह बननी चाहिए.
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