ऐसा नहीं है कि सिर्फ पुरुष ही पोर्न फिल्में देखते हैं. महिलाएं भी पोर्न  फिल्में देखना पसंद करती हैं. एक सर्वे के मुताबिक, भारत में तकरीबन 30 फीसदी महिलाएं पोर्न फिल्में देखती हैं. विश्व की प्रमुख एडल्ट वैबसाइट्स पोर्नहब और रैड्ट्यूब ने एकसाथ मिल कर भारतीय महिलाओं पर सर्वे किया और पाया कि पोर्न देखने वाली भारतीय महिलाओं की संख्या बढ़ रही है. पोर्न देखने के मामले में भारतीय महिलाएं पहले 7वें स्थान पर थीं, अब तीसरे स्थान पर आ गई हैं.

इन दोनों पोर्न साइट्स पर हर महीने करीब 4 करोड़ नए विजिटर आते हैं जिन में पुरुष विजिटर 76 फीसदी हैं और महिलाएं 24 फीसदी.

पोर्न देखने के मामले में भारतीय महिलाओं ने अमेरिकी महिलाओं को भी पीछे छोड़ दिया है. वहीं ब्राजील और फिलीपींस की महिलाएं तो भारतीय महिलाओं से भी आगे हैं. इस सर्वे में एक और कैटेगरी है जिस से पता चला है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं पोर्न देखने में ज्यादा समय बिताती हैं.

वहीं, एक अन्य संस्था ने आधुनिक महिलाओं और पोर्न से उन के जुड़ाव के बारे में एक सर्वे किया, जिस में उस ने पाया कि 3 में से 1 महिला पोर्न देखती है और ज्यादातर अपने पार्टनर के साथ नहीं बल्कि अकेले पोर्न देखना पसंद करती हैं. उन्होंने बताया कि महिलाओं का कहना है कि पोर्न वे अपनी खुशी के लिए देखती हैं और इसे देखने से उन की सैक्सलाइफ बेहतर होती है.

पोर्न देख कर वे सैक्सुएलिटी के बारे में नईनई तरकीबें सीखती हैं. सर्वे में हिस्सा लेने वाली 70 फीसदी महिलाओं की उम्र 18 से 34 साल के बीच थी.

स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह

आज युवाओं में भी पोर्न वीडियोज या तसवीरें देखना आम बात हो गई है, लेकिन कहीं न कहीं इसे रोकना जरूरी है, क्योंकि जानकारों की मानें तो ज्यादा पोर्न देखने की लत से दिमाग का आकार कम होता है. यही नहीं, इस से मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है. लोगों के स्वभाव पर दुष्प्रभाव पड़ता है. इतना ही नहीं, पोर्न देखने की लत आप की रिलेशनशिप और आप के क्रियात्मकता को नष्ट कर देती है. इस के कारण लोग अपने जरूरी कामों की भी अनदेखी करने लगते हैं. इस के अलावा बारबार एक ही तरह की साइट खोलने से समय और ऊर्जा दोनों व्यर्थ होते हैं.

पोर्न की अत्यधिक लत सैक्सुअल लाइफ को भी बरबाद कर देती है. इस लत की वजह से इंसान एग्रेसिव हो जाता है. उन की भावनाओं में कमी दिखाई देने लगती है. बहुत ज्यादा सैक्सुअल इच्छा आप के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है. अगर वक्त रहते इस लत से छुटकारा न पाया जाए तो इंसान की जिंदगी तबाह हो सकती है.

लड़का लड़की पर बुरा असर

हाल ही में ऐसी ही एक घटना घटी जहां 12वीं के एक छात्र ने अपने बोर्ड के पेपर में अपनी सैक्सुअल फैंटेसी के बारे में ही लिख डाला, जिसे पढ़ने के बाद महिला शिक्षिका ने खुद को अपमानित महसूस किया और फिर उस लड़के की शिकायत परीक्षा केंद्र के संचालक से जा कर कर दी. जिस के बाद उस की शिकायत पुलिस में कर दी गई. उस की इस हरकत से गुजरात शिक्षा बोर्ड ने उसे परीक्षा देने से वंचित कर दिया.

पोर्न फिल्में देखने का असर न केवल पुरुषों और लड़कों पर पड़ता है, बल्कि महिलाओं और लड़कियों पर भी इस का बुरा असर हो रहा है. लड़कियों पर पोर्न फिल्मों का असर तकरीबन स्थायी होता है.

ज्यादा पोर्न देखने से न सिर्फ दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है बल्कि इंसान की मानसिक स्थिति भी खराब होने लगती है.

शोधकर्ताओं के मुताबिक, पुरुष या महिलाएं जब बहुत ज्यादा पोर्न वीडियो देखते हैं तो उन के दिमाग की रचनात्मकता धीरेधीरे कमजोर पड़ने लगती है. एक सर्वे की मानें तो, ज्यादा पोर्न फिल्में देखने से याददाश्त में भी कमी आने लगती है, क्योंकि हमेशा पोर्न देखने से दिमाग की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं और सिकुड़ सी जाती हैं, जोकि अच्छी बात नहीं है.

ट्विटर व इंस्टा पर भी पोर्न

आजकल एक ट्रैंड चल पड़ा है जिस के तहत लोग वैब ब्राउजर और ऐप्स के बजाय सोशल नैटवर्किंग साइट्स जैसे ट्विटर व इंस्टा पर भी पोर्न देखना पसंद करने लगे हैं. लोग सोचते हैं कि ऐसे देखने से वे ट्रैक नहीं किए जाएंगे कि सैक्सुअल पोर्न एक्टिविटी में शामिल हैं या नहीं. लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि सैक्स थेरैपिस्ट कहते हैं कि आमतौर पर लोग ट्विटर जैसी सोशल साइट्स पर इसलिए पोर्न देखते हैं ताकि लोगों को पता न चले, लेकिन अगर लोगों की आदत पर गौर किया जाए तो आसानी से ऐसे लोगों को ट्रैक किया जा सकता है जो पोर्न एक्टिविटी में लिप्त होते हैं.

उन का यह भी कहना है कि बहुत से पोर्न ऐप्स यह भी वादा करती हैं कि पोर्न देखने वालों की जानकारी गुप्त रखी जाएगी, लेकिन यह सच नहीं है. इंटरनैट की दुनिया में आज के समय में कुछ भी गुप्त नहीं रह गया है.

सैक्स थेरैपिस्ट कहते हैं कि लोग इसलिए सोशल मीडिया पर पोर्न देखते हैं, क्योंकि वह सब से ज्यादा आसान रास्ता लगता है.

ऐसे लोग नहीं देखते पोर्न

सैक्स थेरैपिस्ट का कहना है कि जो लोग कौमन रिलेशनशिप में होते हैं वे पोर्न देखना पसंद नहीं करते, खासतौर पर वे जिन का पोर्नोग्राफी के कारण पहले झगड़ा हो चुका हो. इस के अलावा जिन लोगों की सैक्सुअल लाइफ ऐक्टिव नहीं होती वे भी पोर्न नहीं देखते.

कैलिफोर्निया की सैक्स थेरैपिस्ट किबंरलन एंडरसन का कहना है, ‘‘जिन रिश्तों में आपसी विश्वास होता है वहां लोग अपने पार्टनर की ब्राउजिंग हिस्ट्री चैक नहीं करते हैं, जबकि जिन कपल्स में आपसी विश्वास कम होता है वे पोर्नोग्राफी देखने के लिए अपने वैब ब्राउजर को हाइड मोड में रखते हैं ताकि ब्राउजिंग हिस्ट्री में उन की कारगुजारियां पकड़ में न आएं.

जब महिलाएं देखती हैं पोर्न

एंडरसन कहती हैं, ‘‘आमतौर पर महिलाएं पोर्न देखने के मामले में झूठ बोलती हैं और छिप कर पोर्न देखती हैं. ऐसे में उन के व्यवहार में आक्रामकता दिखाई पड़ती है. बाद में यही चीजें उन के रिश्तों पर असर डालती हैं. इतना ही नहीं, वे अपने पार्टनर से पोर्नोग्राफी में दिखाए गए ऐक्शन की उम्मीद करने लगती हैं और जब वह हो नहीं पाता है तब रिश्तों में कड़वाहट आने लगती है.

ऐसे लोग होते हैं पोर्न एडिक्ट

कुछ लोग ऐसा सोचते हैं कि पोर्न सैक्स किसी दूसरे व्यक्ति से करने की चीज है न कि प्यार करने के लिए और बच्चा पैदा करने के लिए. ऐसे लोगों के लिए पोर्न सैक्स आउटलेट बन जाता है. उन का यह भी कहना है कि बहुत से लोग पोर्न देखने के लिए सीक्रेट मैथड्स का इस्तेमाल करते हैं. बाद में उन्हें महसूस होता है कि वे कहीं फंस गए.

पोर्न पर प्रतिबंध के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद देशभर में इस बात पर बहस चली थी. कहा जा रहा था कि महिलाओं के प्रति रेप और हिंसा के मामलों के पीछे पोर्न एक बड़ी वजह है. लिहाजा, लोग इस पर प्रतिबंध लगाने की वकालत कर रहे थे, क्योंकि बलात्कार कांड के कई अभियुक्तों ने स्वीकारा कि उन्होंने पोर्न देखने के बाद ही ऐसी वारदातों को अंजाम दिया था.

लेकिन कुछ फिल्मी हस्तियों ने भी इस बात का विरोध किया था. उन का कहना था कि पोर्न पर बैन लगाने से बदलाव नहीं होगा, बल्कि सोच बदलने से बदलाव होगा. प्रतिबंध को ले कर एक वकील ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उसी याचिका को ले कर पोर्न से जुड़े 10 महत्त्वपूर्ण पौइंट से आप भी रूबरू होइए :

पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने को ले कर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि 2005 के बाद प्रति सैकंड 5 हजार साइट्स पर पोर्न देखा जा सकता है.

भारतीय बाजार में तकरीबन 20 करोड़ पोर्न वीडियो/पोर्न क्लिपिंग्स/चाइल्ड पोर्नोग्राफी मुफ्त में उपलब्ध हैं.

अमेरिका में हर 39 मिनट पर पोर्नोग्राफी का वीडियो बनता है.

पश्चिम के ज्यादातर देशों ने पोर्न पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि चाइल्ड पोर्न पर प्रतिबंध लगाया है.

35 फीसदी इंटरनैट डाउनलोड का संबंध सीधे पोर्नोग्राफी से है और प्रति सैकंड 28,258 यूजर इंटरनैट पर पोर्न देखते हैं.

हर सैकंड इंटरनैट पर पोर्न देखने के लिए 3,075.64 डौलर खर्च किए जाते हैं.

हर सैकंड 372 लोग सर्च इंजन में एडल्ट टाइप करते हैं.

40 करोड़ अमेरिकी हर रोज पोर्न साइट पर विजिट करते हैं.

इंटरनैट पर पोर्न देखने वालों में एकतिहाई संख्या महिलाओं की है.

पोर्न कंटैंट वाले 2.5 बिलियन ईमेल हर रोज सैंड या रिसीव किए जाते हैं.

पोर्नोग्राफी देखने की आदत थोड़ीबहुत तो ठीक है, लेकिन जब यह लत में बदल जाए तो इंसान की जिंदगी तबाह हो जाती है. कहा भी गया है, अति हर चीज की बुरी होती है. इस से पहले कि देर हो जाए, इस आदत को छोड़ने में ही समझदारी है.

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