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अचारी गोभी रेसिपी

– फूलगोभी (01 नग मीडियम साइज)

– साबुत धनिया (02 छोटे चम्मच)

– सौंफ (02 छोटे चम्मच)

– जीरा (01 छोटा चम्मच)

– अजवाइन (01 छोटा चम्मच)

– कलौंजी (01 छोटा चम्मच)

– अमचूर पाउडर (01 छोटा चम्मच)

– लाल मिर्च पाउडर (01 छोटा चम्मच)

– हल्दी पाउडर (01 छोटा चम्मच)

– रिफाइंड तेल (02 बड़े चम्मच)

– हरी धनिया (02 बड़े चम्मच)

– नमक (स्वादानुसार)

गोभी की सब्जी बनाने की विधि :

– सबसे पहले गोभी को अच्छी तरह से धोकर छोटे-छोटे पीस में काट लें.

– गोभी को 10 मिनट तक रख दें, जिससे उसका पानी निचुड़ जाए.

– अब एक फ्राई पैन में तेल गर्म करें.

– जब तक तेल गर्म हो रहा है, फूल गोभी के ऊपर हल्दी पाउडर और स्वादानुसार नमक छिड़कें और अच्छी तरह से मिला लें.

– तेल गर्म होने पर उसमें गोभी के टुकड़े डालें और डीप फ्राई कर लें.

– उसके बाद तली हुई गोभी को किचेन पेपर पर निकाल लें.

– फ्राइ पैन में एक बड़ा चम्मच तेल छोड कर बाकी का तेल निकाल दें.

– गर्म तेल में आमचूर पाउडर और मिर्च पाउडर छोड कर सारे मसाले डाल दें और अच्छी तरह से भून लें.

– मसाले भुन जाने पर पैन में गोभी के टुकड़े, आमचूर पाउडर डालें और अच्छी तरह से चला लें और गैस     बंद कर दें.

लीजिये आपकी स्वादिष्ट गोभी की सब्जी तैयार है.

जोश जगा गया कांग्रेस का रोड शो

उत्तर प्रदेश की राजधनी लखनऊ में कांग्रेस के रोड शो में ‘राहुल भैया’ और ‘प्रियंका दीदी’ के नारों में कांग्रेस का उत्साह देखने वाला था. कांग्रेस के समर्थन के बीच ‘चौकीदार चोर है’ के नारे भाजपा को परेशानी में डालने वाले थे. आमौसी एयरपोर्ट से लेकर कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय तक 100 से अधिक स्वागत द्वार बनाये गये थे. बस को रथ बनाकर पंजाब से लखनऊ लाया गया था. कांग्रेस के रोड शो में बहुत दिनों के बाद ऐसा उत्साह देखने को मिला. उत्साह केवल पुराने कांग्रेसियों में ही नहीं था उनके परिवारों में भी देखा गया. कांग्रेस कार्यकर्ता बारबार यह नारा लगा रहे थे कि राहुल गांधी देश के प्रधनमंत्री और प्रियंका गांधी प्रदेश की मुख्यमंत्री बनेंगी.

जिस कांग्रेस के कार्यक्रमों में कभी पंडाल की पूरी कुर्सियां भी न भरती हो उसके रोडशो में जुटी भीड़ बता रही है कि अगर कांग्रेस ने मेहनत की तो उत्तर प्रदेश उसके लिये उम्मीदों का प्रदेश हो सकता है. लोकसभा चुनाव की नजर से उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा प्रदेश है. ‘गांधी-नेहरू परिवार’ की जडों से जुडा प्रदेश है. रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, इलाहाबाद और फूलपुर की लोकसभा सीटों से ‘गांधी-नेहरू परिवार’ का करीबी रिश्ता रहा है. कांग्रेस के पक्ष में सबसे बडी बात यह है कि उत्तर प्रदेश में सत्ता से बाहर हुये उसको 30 साल से अधिक का समय बीत गया है. बीतें 30 सालों में प्रदेश की जनता ने सपा-बसपा और भाजपा को बारीबारी से खूब आजमा कर देख लिया है. ऐसे में कांग्रेस प्रदेश की जनता के लिये उम्मीदों वाली पार्टी हो सकती है.

प्रियंका के साथ राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस रोड शो में हिस्सा लिया. इस रोड शो की सफलता के लिये कांग्रेस के लोगों ने पूरे शहर में जनसंपर्क किया. जनसंपर्क और रोड शो के प्रचार में लगे नेताओं को देखकर यह साफ दिखा कि पुराने कांग्रेसी नेताओं में उत्साह भर गया है. कांग्रेस के लोग कम भले हो पर उनके परिवार के लोगों ने भी उनका साथ दिया. सोशल मीडिया पर प्रचार के लिये कैंपन कांग्रेस के अपने परिवार के लोगों ने शुरू की. जिसके लिये उनको कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही थी. कांग्रेसी परिवारों के बच्चों ने इस काम में मदद की. यह कुछ उस तरह का उत्साह था जैसी आजादी के लडाई में इंदिरा गांधी के साथ उनकी बच्चा टीम ने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी.

कांग्रेस के लोग लंबे समय से प्रियंका को पार्टी में लाने की मांग करते रहे है. अब प्रियंका के आने के बाद केवल युवाओं में ही नहीं लडकियों और महिलाओं में नया जोश दिख रहा है. उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटे है. इनमें से 2014 के लोकसभा चुनाव में 73 सीटें भाजपा ने जीती थी. 2014 के लोकसभा और 2017 के विधनसभा चुनाव के बाद लोकसभा की 3 और विधनसभा की 1 सीट पर हुये उपचुनाव में एक भी सीट भाजपा नहीं जीत पाई. 5 राज्यों के विधनसभा चुनाव में एक भी राज्य भाजपा के पास नहीं गया. 2014 के लोकसभा चुनाव जैसे हालात 2019 में नहीं है. कांग्रेस को सबसे अधिक सीटे उत्तर प्रदेश से ही मिल सकती है. प्रियंका गांधी 18 पफरवरी से लोकसभा क्षेत्रों का दौरा करेगी. इसके जरीये ही कांग्रेस प्रत्याशी चयन का काम करेगी.

भाजपा के साथ ही साथ सपा और बसपा की खराब होती हालत का लाभ भी कांग्रेस को मिल सकता है. कांग्रेस के साथ दलित-मुसलिम और सवर्णों का एक बड़ा वर्ग खड़ा होता दिख रहा है. जो चुनावी समीकरण में कांग्रेस की जीत का आधर बन सकता है. कांग्रेस नेता सुरेन्द्र सिंह राजपूत कहते है ‘जनता को कांग्रेस केवल लड़ती हुई दिखनी चाहिये इसके बाद जनता खुद साथ आने को तैयार है. रोड शो की भीड ने दिखा दिया है कि जनता में कांग्रेस के प्रति क्या उत्साह है. अब इस उत्साह को वोट में बदलना कांग्रेस संगठन और नेताओं का काम है.’

मूर्तियों का सरोकार राजनीतिक है, सामाजिक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तरप्रदेश में मायावती सरकार के कार्यकाल में लगी मूर्तियों को ले कर सटीक टिप्पणी की है. हालांकि इस टिप्पणी से विवाद शुरू हो गया है पर अदालत का सुझाव नेताओं को सबक देने वाला और जनता के हित में है.

सुप्रीम कोर्ट ने बसपा सुप्रीमो मायावती से कहा है कि क्यों न उन के द्वारा बनाई गईं मूर्तियों का पैसा आप से वसूल किया जाए. मूर्तियां बनाने में जितना जनता का पैसा खर्च किया है, उसे वापस करना चाहिए.

मायावती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रविकांत नामक वकील ने 2009 में एक जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि सार्वजनिक धन का उपयोग अपनी मूर्तियां बनाने और राजनीति दल का प्रचार करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की पीठ कर रही है.

दरअसल मुख्यमंत्री रहते मायावती ने अपने शासनकाल में कई पार्कों का निर्माण कराया था. इन पार्कों में बसपा संस्थापक कांशीराम, मायावती और हाथियों की मूर्तियां लगवाई गई थीं. पार्क लखनऊ, नोएडा समेत अन्य कई शहरों में बनाए गए थे. इन मूर्तियों पर 6 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए.

यह मुद्दा बारबार उठता रहा है. मायावती विपक्षी दलों के निशाने पर रहीं. उन के इस कदम की आलोचना होती आई हैं. निर्वाचन आयोग को भी चुनावों के समय पार्कों में स्थित हाथी की मूर्तियों को ढकने के निर्देश दिए जाते हैं क्योंकि हाथी मायावती की पार्टी बसपा का चुनाव चिन्ह है.

कोर्ट की टिप्पणी के बाद बसपा का कहना है कि कैबिनेट ने इस बजट को पास किया था इसलिए यह रकम लौटाने की जिम्मेदारी सिर्फ व्यक्तिगत उन की नहीं बनती. बाद में मायावती ने यह भी कहा कि प्रदेश में बने पार्कों को पर्यटन स्थलों के तौर पर विकसित किया गया हैं जिन से राज्य को आय होती है.

यह सुप्रीम कोर्ट का सही सुझाव है. जनता के पैसे का राजनीतिक फायदे के लिए दुरुपयोग क्यों किया जाए? वह चाहे कोई भी पार्टी हो. हर राजनीतिक दलों और सरकारों में मूर्तियों बनाने की होड़ लगी हुई है. आजादी के बाद महात्मा और अंबेडकर की सब से अधिक मूर्तियां लगीं. इन का मकसद राजनीतिक ही रहा.

अब सरकारें और राजनीतिक दल देवीदेवताओं की मूर्तियां भी बनाने में आगे आ रहे हैं. अपनेअपने नेताओं की मूर्तियां बनाई जा रही हैं. एक से एक ऊंची मूर्ति बनाने की स्पर्धा चल रही है. गुजरात में भाजपा द्वारा सरदार पटेल की मूर्ति बनाई गई तो महाराष्ट्र में शिवसेना द्वारा शिवाजी की मूर्ति बनाने की योजना है.

अकेले भारत में जितनी मूर्तियां खड़ी हैं उतनी समूची दुनिया के देशों को मिला कर भी नहीं होंगी. मूर्तियों से अंधविश्वास, अंधश्रद्घा, व्यक्तिपूजा की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है, जिस से मिलता कुछ नहीं. नेता भी पंड़ों की तरह लोगों में आस्था, अंधभक्ति पैदा करते हैं ताकि वोटर सिर्फ उसी को वोट दे, उस की दुकान को छोड़ कर दूसरी दुकान पर न जाए.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट की अपनी सीमा है. अदालत संविधान के दायरे तक टिप्पणी कर सकती है लेकिन अगर मूर्तियों को ले कर व्यापक सामाजिकता को देखें तो सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से आगे जा कर होना यह चाहिए कि मूर्तियों पर ही प्रतिबंध लगा दिया जाए. क्योंकि आज  मूर्तियां किसी सामाजिक उद्देश्य के लिए नहीं लगाई जा रहीं. इन का मकसद विशुद्घ राजनीतिक हो गया है.

मूर्तियों के निर्माण का उद्देश्य जनता को उस नेता की अच्छाइयों से सीख लेना होना चाहिए पर यहां ऐसा बिल्कुल दिखाई नहीं देता. अब तो अलगअलग जातियों को उन की जाति के नेताओं की मूर्तियां बनवा कर दी जाने लगी हैं. यह काम हर पार्टी कर रही हैं. पिछड़ों को फुले, शिवाजी, सरदार पटेल, दलितों को अंबेडकर, कामराज, कांशीराम जैसे नेताओं की प्रतिमाएं इन दशकों में बहुतायत में लगाई जा रही हैं.

मूर्तियां सामाजिक विभाजन बढ़ा रही हैं. सामाजिक समरसता खत्म कर रही हैं. नफरत, वैमनस्य का कारण बन रही हैं. ब्राहमण अंबेडकर की मूर्ति से नफरत करते हैं, दलित महात्मा गांधी, मदनमोहन मालवीय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं को पसंद नहीं करते. यही वजह है कि आए दिन मूर्तियों पर कालिख पोतने, तोड़ने फोड़ने की घटनाएं होती रहती हैं. तनाव फैलता है, हिंसा तक होती है.

संसद भवन में लगी मूर्तियों को ले कर विवाद होता रहा है. भाजपा केंद्र में आई तब उस ने दामोदर सावरकर तक की प्रतिमा भी संसद भवन में लगा दी. इस पर कांग्रेस ने आपत्ति की थी. भाजपा ने सावरकर जयंती पर संसद भवन में उन की मूर्ति पर माल्यार्पण कार्यक्रम किया जिस का विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया था.

महात्मा गांधी के पोस्टर पर गोली मारने की घटना पर जिस तरह की भाजपा नेताओं में चुप्पी दिख रही है, आने वाले समय में संसद भवन में सावरकर के बगल में गोडसे की प्रतिमा लग जाए तो कोई ताज्जुब नहीं होगा.

वास्तव में मूर्तियों का मकसद राजनीतिक है क्योंकि मूर्तियां सरकारें ही  लगाती हैं और सरकारों का सरोकार राजनीति से है सामाजिक नहीं. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी एक उम्मीद की किरण है इस देश को मूर्तियों के जंजाल से मुक्त कराने की.

अली फजल दीया मिर्जा के ‘माइंड द मल्होत्राज’ में कैमियो करेंगे

2019 में, अभिनेता अली फजल न केवल मिर्जापुर के अगले सीजन में गुड्डू पंडित के रूप में वापसी करेंगे, बल्कि दो बड़े प्रोजेक्ट्स, प्रस्थानाम और मिलन टौकीज के साथ बड़े पर्दे पर भी शानदार प्रदर्शन करने वाले हैं. इन बीगस्क्रीन आउटिंग्स के अलावा, अली जल्द ही एप्लौज एंटरटेनमेंट के ब्रांड न्यू प्रोडक्शन, माइंड द मल्होत्राज में एक कैमियो के रूप में भी दिखाई देंगे. शो का निर्माण अली के बेहद करीबी दोस्त दीया मिर्जा द्वारा एप्लौज के तहतकिया जा रहा है, जिनके साथ अली बौबी जासूस के फिल्मांकन के दौरान प्रस्तुत हुए थे, जिसका निर्माण भी मिर्जा के फिल्म बोर्न फ्री एंटरटेनमेंट द्वारा किया गया था. दीया के पति साहिल संघा इस शो का निर्देशन कर रहे हैं, और यह एक इजराइली शो ‘ला फेमिग्लिया’ से रूपांतरित किया गया है. यह दक्षिण मुंबई में रहने वाले एक परिवार के बारे में है, जिनके पास खुश रहने के सभी कारण हैं और उतने ही कारण उनके थेरेपी पर जाने के भी हैं. जब उनसे इसके लिए संपर्क किया गया, तो दीया और साहिल के साथ अपनी दोस्ती की वजह से अली ने शो को स्वीकार करने से पहले एक बार भी नहीं सोचा क्योंकि वे उन दोनों को काफी सराहते भी हैं. अली इस श्रृंखला में एक गेस्ट स्टार के रूप में नजर आएंगे और हमें शो में अली की उपस्थिति के साथ यकीनन कुछ मजेदार चीजें मिलने वाली हैं जो इसके अच्छे कथानक की क्वालिटी को और बढ़ाएगा.

अली ने कहा, “दीया और साहिल मुझे हमेशा से बहुत प्रिय रहे हैं, जाहिर है कि यह रिश्ता बौबी जासूस के साथ शुरू हुआ था. वे निर्माता थे और दीया ने मुझे विद्या मैम के साथ काम करने का मौका दिया. मैं वास्तव में उत्साहित हूं, मुझे लगता है कि इसका प्रारूप जो साहिल उपयोग कर रहे हैं, काफी वेस्टर्न है और बहुत ही क्लासिक भी है और मैं वास्तव में उत्साहित हूं कि लोगों को वेब पर उपलब्ध सेक्रेड गेम्स एवं मिर्जापुर जैसे अन्य सामग्री के बीच ऐसा शो भी देने को मिलेगा. यह एक मजेदार कौमेडी शो है जिसके एक एपिसोड में मैं एक छोटा पार्ट निभा रहा हूं, जो कि गेस्ट एपीयरेंस है. इसकी कहानी और सेट की वाइब्स आपको काफी प्रभावित करती है, उनका घर आपका घर बन जाता है. ऐसी ही कुछ बहुत ही रोमांचक बातें मैंने शो के बारे में देखी. इसकी कास्टिंग कमाल की है और साहिल संघा के निर्देशन में काम करने को लेकर भी मैं काफी उत्साहित हूं. माइंड द मल्होत्राज शो में काम करने का अनुभव कमाल का होगा.”

ऐसे लाएं स्किन पर ग्लो

ठंड के मौसम में अपने स्किन की देखभाल और चेहरे पर ग्लो लाना आसान नहीं होता. कठोर मौसम का स्किन पर बुरा असर पड़ता है. इस मौसम में त्वचा पर बहुत ज्यादा रूखापन आ जाता है और त्वचा खींची खींची बेजान सी नजर आने लगती है. अपनी त्‍वचा को बचाना हो तो अपनाइये ये टिप्‍स.

मौइस्चराइजर बदलें

अगर आप गर्मी और बसंत वाले मौइस्चराइजर का इस्तेमाल ठंड में भी कर रहे हैं तो इसे बदल दें. ऐसे मौइस्चराइजर का चुनाव करें जो ठंड के लिए उपयुक्त हों. ठंड में अपने स्किन को ग्लो कराने के लिए ऐसे मौइस्चराइजर का इस्तेमाल करें जो पानी के बजाय तेल पर आधारित हो. तेल आधारित मौइस्चराइजर को इस तरह बनाया जाता है ताकि यह स्किन की परत को सुरक्षित रखें.

बिना संस्क्रीन के न निकलें घर से बाहर

यह तो हम सभी जानते हैं कि हल्के बादल और कुहासे के बावजूद भी 80 प्रतिशत सूरज की रोशनी हम तक पहुंच जाती है. ठंड के समय अपनी स्किन को ग्लो कराने के लिए यूवीए प्रोटेक्शन वाला कम से कम 15 एसपीएफ वाला संसक्रीन लगाएं. बेहतर होगा अगर आप बाहर जाने से पहले चेहरे और हाथों पर संसक्रीन की ज्यादा मोटी परत लगाएं.

गर्म पानी से नहाने से बचें

ठंड में स्किन ग्लो कराने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप गर्म पानी से ज्यादा देर तक न नहाएं. इससे स्किन की बची—खुची नमी भी चली जाएगी. सुपर हौट बाथ से आप शानदार अनुभव कर सकते हैं, जबकि हौट शावर से स्किन का लचीलापन खत्म हो जाएगा और कोलाजन भी टूट जाएगा.

नर्म साबुन

ऐसे साबुन के इस्तेमाल से बचें जिनमें कड़े डियोड्रेंट रहते हैं. अगर आप ठंड में स्किन ग्लो करना चाहते हैं तो तेल आधारित फोमिंग क्लेंजर के बजाय क्रीम आधारित डव या न्यूट्रोजीना का चुनाव करें. अपनी स्किन को हाइड्रेटेड रखने के लिए हल्के क्लेंजर का इस्तेमाल करें.

हाइड्रेटेड रहें

हर कोई चाहता है कि उनकी स्किन साफ और ग्लोइंग हो. पर इसके लिए आपको हाइड्रेटेड रहना होगा. पानी स्किन ग्लो होती है, क्योंकि शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल जाता है. साथ ही पानी आपकी सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है.

टोन अप

टोनर आपकी स्किन से गंदगी हटाने में मदद करता है. ठंड में स्किन ग्लो करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप ऐसे प्रोडक्ट के इस्तेमाल से बचें जो एल्कोहल आधारित हो. इसकी जगह आप ऐसे प्रोडक्ट का चुनाव करें जिसमें हाइलूरौनिक एसिड या पेंथोन हो. यह आप को हाइड्रेटेड रखेगा. इसे रूई पर छिड़क कर आप चेहरे की गंदगी आसानी से साफ कर सकते हैं.

परतदार स्किन को हटाएं

डेड स्किन को हटाने के लिए आप हल्का स्क्रब करें और एक्सफोलीएट मास्क का सहारा लें. मास्क ऐसा हो जिसमें 10 प्रतिशत ग्लाइकौलिक एसिड हो. होममेड फेशियल मास्क स्किन को ग्लो करने का एक और तरीका है. अपनी स्किन को साफ करने के लिए नेचुरल स्क्रब से मसाज करें.

मोटी आइब्रो पाने के घरेलू उपाय

आइब्रो चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका अदा करती है. अगर आपकी आइब्रो अव्यवस्थित है या फिर जरूरत से ज्यादा मोटी या पतली है तो आपका चेहरा विचित्र नजर आने लगेगा. अगर आप भी मोटे आइब्रो पाने की चाहत रखते हैं तो आपको इसके लिए प्राकृतिक तरीके ढूंढने चाहिए. मोटी आइब्रो पाने के लिए आप नीचे बताए गए प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

नारियल तेल

नारियल तेल बालों को बढ़ाने के लिए जाना जाता है. मोटी आइब्रो पाने का यह सबसे असरदार तरीका है. इससे न सिर्फ आइब्रो के बाल तेजी से बढ़ेंगे बल्कि इसका शेप भी अच्छा बनेगा.

प्याज का रस

प्याज में आमतौर पर बड़ी मात्रा में सल्फर पाया जाता है. यह ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है. प्याज का रस लगाकर आप अपनी आइब्रो के बालों को तेजी से बढ़ा सकते हैं. नियमित रूप से इस रस को लगाने से आप जल्द ही मोटी आइब्रो हासिल कर लेंगे.

पानी

पानी से कई तरह की समस्याओं से निजात पाया जा सकता है. अपने शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए आपको हर दिन करीब 6 से 8 लीटर पानी पीना चाहिए.

जैतून का तेल

आइब्रो के लिए जैतून का तेल भी काफी फायदेमंद होता है. मोटी आइब्रो पाने के लिए यह एक असरदार घरेलू उपाय है. जैतून के तेल को आइब्रो की लंबाई के साथ लगाने से बाल तेजी से बढ़ेंगे. साथ ही यह आपकी आइब्रो को शेप में भी रखता है.

कैस्टर का तेल

कैस्टर का तेल मोटी आइब्रो पाने का सबसे पुराना और सर्वाधिक इस्तेमाल में लाया जाने वाला तरीका है. आइब्रो स्ट्रैंड पर नियमित रूप से कैस्टर का तेल लगाने से आइब्रो की मोटाई में इजाफा होता है. यह एक ऐसा घरेलू उपाय है जो निश्चित रूप से असर दिखाता है.

पेट्रोलियम जेली

जब आप अपनी आइब्रो पर वैसलीन लगाते हैं तो आप इसे पूरी तरह से कंडीशन और नम रखते हैं. यह आपकी आइब्रो के बाल को सीधा और मजबूत रखता है. आप दिन में दो-तीन बार आइब्रो में वैसलीन लगाकर इसे मोटा कर सकते हैं.

एलोवेरा

शरीर के तकरीबन हर समस्या के लिए एलोवेरा कारगर होता है. आप चाहें तो एलोवेरा जेल खरीद सकते हैं या फिर इसे पत्तियों से सीधे हासिल कर सकते हैं. इसके जेल से आइब्रो को बढ़ने में मदद मिलेगी. इसे आप नियमित रूप से आइब्रो पर लगाएं.

अवसाद को दूर करता है अखरोट

अवसाद या कहें कि डिप्रेशन आज लोगों के लिए बेहद आम हो चला है. इसके लिए हमारा खानपान, हमारी लाइफस्टाइल जिम्मेदार है. पर हाल ही में एक अध्ययन में ये बात सामने आई कि अखरोट के नियमित सेवन से अवसाद का खतरा कम होता है और एकाग्रता बेहतर होती है.

अमेरिका में हुए एक शोध में ये बात खुले तौर पर सामने आई कि अखरोट खाने वालों में अवसाद का खतरा 26 फीसदी कम रहता है, वहीं इस तरह की चीजों को खाने वालों में इसका खतरा 8 फीसदी कम होता है. अध्ययन में पाया गया है कि अखरोट खाना शरीर में ऊर्जा में वृद्धि और बेहतर एकाग्रता से संबद्ध है.

अध्ययन में शामिल शोधार्थियों की माने तो अध्ययन में शामिल किए गए छह में से हर एक वयस्क जीवन में एक समय पर अवसादग्रस्त होगा. इससे बचने के लिए किफायती उपायों की जरूरत है जैसे कि खान-पान में बदलाव करना. जानकारों की माने तो अवसाद की स्थिति में अखरोट का सेवन बेहद ही लाभकारी है. आपको बता दें कि इस अध्ययन को 26,000 से अधिक अमेरिकी व्यस्कों पर किया गया था.

चिकन कोरमा रेसिपी

 सामग्री

– चिकन ( 01 किलो)

– दही ( 01 कप)

– प्याज ( 3 कटे हुए)

– छोटी इलायची ( 05 नग)

– लौंग ( 05 नग)

– बड़ी इलायची (03 नग)

– तेज पत्ते ( 02 नग)

– दालचीनी (02 स्टिक)

– लाल मिर्च पाउडर (03 छोटे चम्मच)

– धनिया पाउडर (02 छोटे चम्मच)

– हल्दी पाउडर ( 01 छोटे चम्मच)

– चिकन मसाला ( 01 छोटा चम्मच)

– गरम मसाला पाउडर (1/2 छोटा चम्मच)

– लहसुन पेस्ट (02 छोटे चम्मच)

– अदरक पेस्ट (02 छोटे चम्मच)

– हरी धनिया  (01 बड़ा चम्‍मच कटी हुई)

– तेल (04 बड़े चम्मच)

– नमक ( स्वादानुसार)

चिकन कोरमा बनाने का विधि

– सबसे पहले चिकन पीस अच्छी तरह से धो लें.

– अब एक फ्राई पैन में एक चम्‍मच तेल गर्म करें.

– तेल गरम होने पर उसमें प्याज डालें और सुनहरा होने तक भून लें.

– इसके बाद प्याज को ठंडा कर लें और थोडे से पानी के साथ मिक्सर में डाल कर पेस्ट बना लें.

– अब फ्राई पैन में 2 चम्‍मच तेल गर्म करके तेज पत्ते, छोटी इलायची, बड़ी इलायची, दालचीनी व लौंग   डालें और हल्‍का सा भून लें.

– इसके बाद चिकन पीस डालें और मीडियम आंच पर भून लें.

– चिकन पीस फ्राई होने के बाद प्लेट में निकाल कर रख दें.

– अब पैन में तेल में धनिया पाउडर, अदरक का पेस्‍ट, लहसुन का पेस्ट, हल्दी पाउडर और लाल मिर्च     पाउडर डालें और थोड़ा सा भून लें.

– फिर इसमें फ्राई चिकन पीस डाल कर चला लें.

– अब प्याज का पेस्ट, दही और नमक डालें और मिक्‍स करके धीमी आंच पर 15 मिनट तक ढक कर   पकायें.

– इसके बाद ग्रेवी के लिए आवश्‍यकतानुसार पानी डालें और पांच मिनट चिकन गलने तक पका लें.

– इसके बाद मिश्रण में गरम मसाला पाउडर, चिकन मसाला पाउडर डालें और हल्‍का सा चलाकर गैस बंद कर दें.

शेविंग के बाद जरूरी है फेस पैक का इस्तेमाल

किसी महत्वपूर्ण जगह या मीटिंग में जाने से पहले पुरुष अक्सर शेव करते हैं. क्योंकि उनके लिए उनका जेंटलमैन एक्सप्रेशन बेहद जरूरी होता है. शेविंग के दौरान आप एक तरह से त्वचा की एक या दो परत को हटा देते हैं. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप शेविंग के दौरान कितनी सावधानियां बरतते हैं. आपकी त्वचा कटेगी जरूर, जो खुले आंख से दिखाई नहीं देगी. इसलिए शेविंग के बाद आपकी त्वचा को देखभाल की जरूरत पड़ती है इसलिए बेहद जरूरी है कि आप अपनी रूखी त्वचा पर अच्छा फेशियल पैक लगाएं.

फेशियल पैक न सिर्फ शेविंग के बाद आपकी त्वचा को अंदर तक पोषण देता है, बल्कि त्वचा को नमी भी प्रदान करता है. अगर आप अच्छा परिणाम चाहते हैं तो जहां तक हो सके प्राकृतिक और हर्बल फेशियल पैक की मदद लें. तो आइए जानते हैं इसके बारे में.

खीरा

चेहरे के लिए जो नेचुरल कूलर पैक तैयार किया जाता है उसमें खीरा, ओटमील और दही रहता है. शेविंग के बाद आप इन तीनों का पेस्ट चेहरे पर लगा कर चिकनाहट और ठंडक प्राप्त कर सकते हैं. अच्छे परिणाम के लिए इस पेस्ट को करीब 30 मिनट तक चेहरे पर लगाकर रखें.

हल्दी

हल्दी पाउडर, बेसन, बादाम का तेल और पानी को मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें. शेविंग के बाद इस पेस्ट को चेहरे पर लगाने से कटने के निशान खत्म हो जाएंगे. साथ ही त्वचा को नमी भी मिलेगी.

शहद

शेविंग के बाद शहद को चेहरे पर लगाएं और इसे 20 से 30 मिनट के लिए छोड़ दें. बाद में इसे गर्म पानी से धो लें.

केला

अगर आपकी त्वचा रूखी है तो केला आपके लिए काफी कारगर हो सकता है. केला, दही और शहद को मिलाकर फेस पैक तैयार करें. आप इसके पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 10-20 मिनट तक छोड़े दें. आपकी त्वचा एकदम तरोताजा नजर आएगी.

पपीता

पपीते में एक खास तरह का एंजाइम जो डेड सेल को हटाता है और स्किन की गंदगी को दूर करता है. साथ ही यह सनबर्न और त्वचा की खुजलाहट को खत्म करने के साथ-साथ दाग-धब्बों को भी हटाता है.

लेकिन स बात का ध्यान रखें कि शेविंग के बाद कोई भी फेस पैक लगाने से पहले टी ट्री कंसेंट्रेशन या दूसरे एंटीसेप्टिक जरूर लगाएं. इससे आपकी रूखी और फूटी त्वचा एक बार फिर से नर्म और मुलायम हो जाएगी.

मोदी v/s ममता: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ममता को फायदा

बंगाल की शेरनी ने बंगाल की धरती पर चाणक्य का विमान उतरने से क्या रोका, साहेब का माथा गर्म हो गया. तोते का पिंजरा खोला और आदेश सुनाया – जाओ जाकर सबक सिखाओ… तोतों की फौज आनन-फानन में शत्रु पर हमला करने निकल पड़ी, मगर बंगाल की बिल्लियों ने तोतों के छक्के छुड़ा दिये… तोतों के पर नोंच लिये, उनको कैद कर लिया… और उसके बाद जो कुछ हुआ उसने साहेब की परेशानी और बढ़ा दी…. हम कोई पंचतंत्र की कहानी नहीं सुना रहे, बल्कि पश्चिम बंगाल में हुए घमासान के बाद स्थिति का आंकलन करने की कोशिश कर रहे हैं. राजनीतिक लालसा में सीबीआई को जिस तरह हथियार बना कर इस्तेमाल किया गया और जिस तरह आका के आदेश का पालन करके सीबीआई ने पश्चिम बंगाल में जलालत झेली, ऐसा देश के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया, और सोने पर सुहागा यह कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जो फैसला दिया, उसने जहां ममता बनर्जी को बड़ी राहत पहुंचायी, वहीं मोदी-शाह की साजिश के परखच्चे भी उड़ा दिये.

3 जनवरी 2019 को सीबीआई के कोई 40 धुरंधर ‘शारदा चिटफंड घोटाले’ में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से कथिततौर पर पूछताछ करने पहुंचे थे. अब एक वरिष्ठ आईपीएस से पूछताछ के लिए 40 सीबीआई अधिकारियों की क्या जरूरत थी? वह कोई डकैत या आतंकी तो थे नहीं कि इतनी बड़ी फौज भेजे जाने की जरूरत पड़ी? अगर पूछताछ ही करनी थी तो चार-पांच अधिकारी काफी थे, आखिर 40 लोग इकट्ठे क्या पूछताछ करने वाले थे? साफ है कि नीयत सिर्फ पूछताछ की नहीं थी. इतनी बड़ी फौज राजीव कुमार के घर-आॅफिस पर छापेमारी के लिए भेजी गयी थी. छापेमारी होती तो शारदा चिटफंड से जुड़े दस्तावेज मिलते या न मिलते, मगर पश्चिम बंगाल सरकार से सम्बन्धित फाइलें तो जरूर मिल जातीं, जिसका राजनीतिक फायदा उठाया जा सकता था. दूसरा इरादा था राजीव कुमार को गिरफ्तार करने का, ताकि उनके जरिये चुनावी दौर में ममता बनर्जी के चुनावी कार्यक्रमों की ऐसी-तैसी की जा सके. उनकी चुनावी रैलियों में व्यवधान डाला जा सके. मगर ममता भी बंगाल की शेरनी हैं, भला अपने जंगल में किसी दूसरे को उत्पात मचाने की छूट कैसे दे देतीं? ऐसी दहाड़ीं कि सीबीआई अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गयी. जिसे जिधर राह दिखी, निकल भागा, मगर पांच-छह फिर भी हत्थे चढ़ ही गये. इन्हें कोलकाता पुलिस ने जम कर धुना और घंटों हवालात में बिठा कर रखा. उधर ममता बनर्जी अपने कमिश्नर के बचाव में दहाड़ती हुई मोदी-सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गयीं. देखते ही देखते देश भर से उन्हें समर्थन के फोन आने शुरू हो गये. लगभग पूरा विपक्ष उनकी ताकत बन कर पीछे आ खड़ा हुआ और इतनी बुरी तरह बाजी पलटते देख दिल्ली थरथराने लगी. सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट की ओर दौड़ाया गया.

शीर्ष अदालत ने पूरी कहानी सुनी, समझी और फिर जो फैसला सुनाया उसे ममता बनर्जी की जीत के तौर पर तो देखा ही जा रहा है, इस घटना ने ममता बनर्जी के कद और ताकत में जो वृद्धि कर दी है, इसमें दोराय नहीं कि 2019 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए वह मजबूत दावेदार बन कर भी उभर सकती हैं. हालांकि यह उनकी इच्छा पर है कि वह अपने किले से बाहर आना पसन्द करती हैं या नहीं. बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की, तो इस फैसले को ममता ने अपनी नैतिक जीत करार दिया है. शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में सीबीआई से कहा कि वह कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को न तो गिरफ्तार कर सकती है और न ही किसी प्रकार उनके खिलाफ बल प्रयोग कर सकती है, हां, वह राजीव कुमार से किसी तीसरे स्थान पर पूछताछ कर सकती है. कोर्ट ने आदेश दिया कि सीबीआई शिलांग में राजीव कुमार से शारदा चिटफंड केस से सम्बन्धित पूछताछ करे, उधर राजीव कुमार से कहा गया है कि वह इस पूछताछ में सहयोग करें. शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद सीबीआई का उत्साह ठंडा पड़ चुका है क्योंकि शिलांग में उनके हाथ क्या लगेगा? राजीव कुमार से पूछताछ की आड़ में जो हंगामा कोलकाता में बरपाना था, वह मकसद तो अधूरा ही रह गया.

राजनीति की समझ रखने वालों का कहना है कि सीबीआई की कार्रवाई पूरी तरह राजनीति से प्रेरित थी और निश्चित तौर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ममता बनर्जी के पक्ष में गया है. कोलकाता में केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ ममता बनर्जी के धरने से जहां ममता का कद बढ़ा है, वहीं भाजपा का डर.

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी किस तरह सत्ता के इशारे पर नाच रही है, इस कांड के बाद यह सच पूरे देश के सामने आ चुका है. पांच साल से शारदा चिटफंड मामले में सो रही सीबीआई अचानक पांच साल बाद जाग उठती है और बिना किसी सर्च वारंट या अरेस्ट वारंट के कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को गिरफ्तार करने पहुंच जाती है! यह क्यों हुआ? इसकी वजह है. दरअसल बीते दिनों ममता बनर्जी की अगुवाई में विपक्षी दलों के साथ हुई एक बड़ी सभा ने मोदी-शाह की बेचैनी बढ़ा रखी थी. इस सभा को महागठबंधन के तौर पर देखा जा रहा है. वहीं ममता ने आग में घी डालने का काम यह किया कि चुनावी रैली के लिए बंगाल पहुंचे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के विमान को वहां उतरने की अनुमति ही नहीं दी. बस फिर क्या था – सबक सिखाने के लिए तोते उड़ाये गये.

दरअसल उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के साथ आ जाने से भाजपा के लिए वहां पर पर्याप्त सीटें निकालना टेढ़ी खीर हो गयी है, ऐसे में उसकी नजर अब 42 सीटों वाले पश्चिम बंगाल पर जमी हुई हैं. मोदी-शाह यहां धड़ाधड़ रैलियां कर रहे हैं, तो वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी भाजपा की जमीन पश्चिम बंगाल में मजबूत करने की कोशिशों में जुटे हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश की धरती से तो उनके अपने पैर उखड़ने लगे हैं. उधर ममता बनर्जी के लिए भी आगामी चुनाव काफी मायने रखता है. दो साल बाद 2021 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव भी होने हैं. ऐसे में उन्हें लोकसभा में अपनी पूरी ताकत दिखानी होगी. बीते कई सालों से ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के मुद्दों से ऊपर उठ  कर राष्ट्रीय मुद्दों पर भी काफी मुखर हैं. नोटबंदी और बेरोजगारी के मुद्दे पर वह मोदी सरकार को बेतरह घेर चुकी हैं, वहीं विपक्षी पार्टियां भी ममता के पीछे समर्थन में आ खड़ी हुई हैं, ऐसे में ममता के बढ़ते कद और महत्वाकांक्षा का अंदाजा सहज ही लग जाता है. उनके इस अन्दाज ने भाजपा को बुरी तरह डरा रखा है. शारदा चिटफंड जांच  का मामला तो एक बहाना है, मकसद तो चुनावी दौर में ममता बनर्जी के कन्सट्रेशन को डिस्टर्ब करने का है.

राजीव कुमार पर आरोप

शारदा चिटफंड मामले में राज्य सरकार ने पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की अगुवाई में 2013 में एसआईटी का गठन किया था. राजीव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने शारदा चिटफंड घोटाले में लाभान्वित रहे तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को बचाने के लिए इस केस के अहम दस्तावेज गायब कर दिये हैं.

क्या है शारदा चिटफंड घोटाला

कथित तौर पर यह घोटाला तीन हजार करोड़ रुपये का बताया जाता है. शारदा ग्रुप की कम्पनियों पर लोगों से गलत ढंग से पैसे जुटाने का आरोप है जिन्हें बाद में वापस नहीं किया गया. इस घोटाले में पश्चिम बंगाल सरकार पर उंगलियां उठी थीं. पश्चिम बंगाल की चिटफंड कम्पनी शारदा ग्रुप ने 2008 में आम लोगों के ठगने के लिए कई लुभावन औफर दिये थे. सागौन से जुड़े बौन्ड्स में निवेश से 25 साल में रकम 34 गुना करने का औफर दिया गया था. वहीं आलू के कारोबार में निवेश के जरिए 15 महीने में रकम दोगुना करने का सब्जबाग दिखाया गया था. इसमें करीब 10 लाख लोगों ने पैसे निवेश किये थे. जब यह रकम लौटाने की बारी आयी तो अपने दफ्तरों पर ताला लगा कर यह कम्पनी गायब हो गयी. सैकड़ों निवेशकों ने समूह पर आरोप लगाया कि उच्च लाभ का वादा करके उनसे पैसा लिया गया था, जिसे पूरा नहीं किया गया. इसके बाद ओडिशा में इस मामले की जांच शुरू हुई. शारदा समूह की पूर्व कर्मचारी ने शारदा के मालिक सुदीप्तो सेन के खिलाफ वेतन भुगतान नहीं करने का मामला दायर किया. सुदीप्तो ने अपनी सियासी जान-पहचान के दम पर खूब पैसे कमाये थे. सुदीप्तो सेन बाद में गिरफ्तार हुए. सुदीप्तो और उसके कई सहयोगी आज भी जेल में बंद हैं. इसी घोटाले में संलिप्तता के कारण तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष भी गिरफ्तार हुए थे.

साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को इस मामले की जांच का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस को इस मामले की जांच में सीबीआई को मदद करने का आदेश भी दिया था. इस मामले में छानबीन के लिए साल 2013 में पश्चिम बंगाल में एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसकी अगुवाई राजीव कुमार ने की थी, लेकिन साल 2014 में मामला सीबीआई के पास चला गया. आरोप है कि घोटाले की जांच से जुड़ी कुछ अहम फाइलें और दस्तावेज गायब हैं. इन्हीं गुम फाइलों और दस्तावेजों को लेकर सीबीआई पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करना चाहती है. आपको बता दें कि इस मामले के तार यूपीए सरकार के वित्तमंत्री रहे पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम से भी जुड़े हैं. उनका नाम भी आरोप पत्र दाखिल किया गया है. आरोप है कि चिट फंड घोटाले में घिरे शारदा ग्रुप की कम्पनियों से उन्हें 1.4 करोड़ रुपये मिले थे.

भाजपा की शरण में आये आरोपियों को बचा लिया सीबीआई ने

पश्चिम बंगाल में कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई से सियासी तापमान चढ़ा हुआ है. हालांकि, इस केस में कुछ ऐसे उदाहरण भी हैं, जहां भाजपा में शामिल होते ही कुछ आरोपियों पर से सीबीआई ने अपना शिकंजा ढीला कर दिया. शारदा चिटफंड घोटाले में आरोपी पूर्व तृणमूल कांग्रेस के नेता मुकुल रौय और असम के मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा के भाजपा में शामिल होते ही एक महीने के भीतर उनके खिलाफ जांच की आंच धीमी हो गयी. कथित घूसकांड में बिस्वा शर्मा से तो जांच एजेंसी ने पूछताछ भी की थी और उनके घर पर छापेमारी भी हुई थी, लेकिन अब सीबीआई के आरोप पत्र में उनका कहीं नाम नहीं है.

वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुकुल रौय और हेमंत बिस्वा शर्मा के खिलाफ सीबीआई की जांच शुरू हुई थी. रौय से 30 जनवरी 2015 को पूछताछ की गयी. शारदा चिटफंड घोटाले में मुकुल रौय पर कम्पनी के चेयरमैन सुदीप्तो सेन के साथ मिलीभगत का आरोप था. उस दौरान सीबीआई ने सुदीप्तो सेन के ड्राइवर का बयान दर्ज किया था, जिसमें उसने बताया था कि कोलकाता से सुदीप्तो सेन को भगाने में मुकुल रौय ने मदद की थी.

पूरे घटनाक्रम में सीबीआई ने 2015 में शिकंजा कसना शुरू किया. सीबीआई ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद कुणाल घोष के आरोपों के आधार पर तब मुकुल रौय को पूछताछ के लिए बुलाया. दरअसल 2013 में शारदा ग्रुप की शिकायत के बाद कुणाल घोष को गिरफ्तार कर लिया गया था. कम्पनी के कर्मचारियों को सैलरी नहीं देने के बाद घोष पर धोखाधड़ी, चोरी और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगा था. गौरतलब है कि गिरफ्तारी के महज एक घंटे के भीतर घोष ने शारदा घोटाले में 12 लोगों के नाम लिये थे, जिसमें एक नाम मुकुल रौय का भी था. मगर इसके बाद 3 नवम्बर 2017 को मुकुल रौय भाजपा में शामिल हो गये और उसके बाद उनके खिलाफ मामला रोक दिया गया. जहां तक हेमंत बिस्वा शर्मा की बात है तो सीबीआई ने उनसे 26 नवम्बर 2014 को पूछताछ की थी. इसके ठीक दो महीने पहले ही सीबीआई ने गुवाहाटी स्थित उनकी पत्नी के न्यूज चैनल और उनके घर पर छापेमारी भी की थी. शर्मा पर शारदा कम्पनी से हर महीने 20 लाख रुपये लेने का आरोप था. लेकिन जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की. 28 अगस्त 2015 को वह भी भाजपा में शामिल हो गये और उसके बाद से आज तक उन्हें भी सीबीआई ने पूछताछ के लिए कभी नहीं बुलाया.

विपक्षी पार्टियों ने निकाली भड़ास

सत्ता के इशारे पर सीबीआई के कारनामों पर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने ममता के पक्ष में खड़े होकर मोदी-सरकार के खिलाफ बढ़-चढ़ कर बयान दिये –

आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने ट्वीट किया, ‘देश का आम आवाम भाजपा और उसकी गठबंधन सहयोगी पक्षपाती सीबीआई के खिलाफ है. हम ममता जी के साथ खड़े है. तानाशाही का नंगा नाच हो रहा है. लोकतंत्र पर सबसे बड़ा खतरा. संविधान और संवैधानिक संस्थाओं पर अभूतपूर्व संकट. चुनावी जीत के लिए देश को गृह युद्ध में झोंकने की कोशिश.’

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन को व्यक्त करने के लिए ममता दीदी से बात की. सीबीआई का राजनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग मोदी सरकार के संस्थानों के दुरुपयोग के साथ सभी सीमाओं को पार कर गया है. एक पूर्व सीएम का भारत के संघवाद के लिए इतना कम सम्मान होना चौंकाने वाला है.’

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, ‘भाजपा सरकार की उत्पीड़नकारी नीतियों और सीबीआई के खुलेआम राजनीतिक दुरुपयोग के कारण जिस तरह देश, संविधान और जनता की आजादी खतरे में है, उसके खिलाफ ममता बनर्जी जी के धरने का हम पूर्ण समर्थन करते हैं. आज देश भर का विपक्ष और जनता अगले चुनाव में भाजपा को हराने के लिए एकजुट है.’

तेजस्वी यादव ने कहा, ‘बीते कुछ महीनों में सीबीआई पर भाजपा दफ्तर के दबाव में लिए गये राजनीतिक निर्णयों के कारण राज्य सरकारों को ऐसा निर्णय लेना पड़ेगा. अगर अब भी सीबीआई भाजपा के गठबंधन सहयोगी की तरह कार्यरत रही तो किसी दिन न्यायप्रिय आम अवाम अपने तरीके से इनका हिसाब ना कर दे. लोकतंत्र में जनता से बड़ा कोई नहीं. आदरणीय ममता बनर्जी जी से बात की. आरजेडी का  समर्थन दिया. भाजपा के पास न केवल विपक्षी नेताओं बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विषैला और नापाक एजेंडा है.’

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने ट्वीट किया, ‘विपक्षी दल एकजुट होने लगे और लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट होकर लड़ने लगे, तो मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा पूरी उम्मीद खो रही है. राज्यों में राजनीतिक विरोधियों को पीड़ित करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा संस्थानों का दुरुपयोग खतरनाक अनुपात तक पहुंच रहा है. हम कोलकाता में हो रही घटनाओं की कड़ी निंदा करते हैं, मोदी-शाह की जोड़ी संस्थानों को कैसे नष्ट कर रही है, इसका एक शानदार उदाहरण. लोकसभा चुनाव शुरू होने से कुछ दिन पहले विभिन्न राज्यों में राजनीतिक विरोधियों पर हमला, देश में विनाशकारी परिणाम होंगे.’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘ममता दीदी से बात की और एकजुटता व्यक्त की. मोदी-शाह की जोड़ी पूरी तरह से विचित्र और लोकतंत्र विरोधी है.’

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