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मेरी शादी नहीं हुई है, मां मुझे ही दोष देती हैं कि मैं अच्छा नसीब लेकर पैदा नहीं हुई, क्या करूं?

सवाल

मैं 31 वर्षीय युवती हूं. मेरे घर वाले पढ़ेलिखे होने के बावजूद अंधविश्वासी हैं. उन के अनुसार शादीब्याह में लड़केलड़की की जन्मकुंडली मिलनी निहायत जरूरी है वरना शादी सफल नहीं होती. जन्मकुंडली मिलाने के चक्कर में ही कई अच्छेअच्छे विवाह प्रस्ताव हाथ से निकल गए. मैं इन बातों को नहीं मानती पर बोल भी नहीं सकती. मेरी सभी सहेलियों के विवाह हो गए हैं पर मैं अभी तक कुंआरी हूं. इतना ही नहीं इस के लिए भी मेरी मां मुझे ही दोष देती हैं कि मैं अच्छा नसीब ले कर पैदा नहीं हुई. क्या करूं कुछ समझ में नहीं आ रहा?

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जवाब

आज लोग चांद तक जा पहुंचे हैं और हमारे देश में कुछ लोग ऐसे हैं, जो पंडेपुजारियों द्वारा ईजाद किए अंधविश्वासों में फंस कर बेवकूफ बन रहे हैं. आप के घर वालों को समझना चाहिए कि पहले ही आप की उम्र काफी हो गई है. यदि 1-2 साल उन्होंने इन जन्मकुंडलियों के चक्कर में और निकाल दिए तो फिर आप की शादी होना और कठिन हो जाएगा. आप मैच्योर हैं. स्वयं भी किसी मैरिज ब्यूरो या शादी डौट कौम आदि के माध्यम से अपने लिए जीवनसाथी तलाश सकती हैं.

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प्यार का दर्दनाक अंत

5 फरवरी, 2019 मंगलवार की शाम लगभग 4 बजे का समय था. उसी समय आगरा जिले के थाना मनसुखपुरा में खून से सने हाथ और कपड़ों में एक युवक पहुंचा. पहरे की ड्यूटी पर तैनात सिपाही के पास जा कर वह बोला, ‘‘स…स…साहब, बड़े साहब कहां हैं, मुझे उन से कुछ बात कहनी है.’’

थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिंह उस समय थाना प्रांगण में धूप में बैठे कामकाज निपटा रहे थे. उन्होंने उस युवक की बात सुन ली थी, नजरें उठा कर उन्होंने उस की ओर देखा और सिपाही से अपने पास लाने को कहा. सिपाही उस शख्स को थानाप्रभारी के पास ले गया. थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिंह उस से कुछ पूछते, इस से पहले ही वह शख्स बोला, ‘‘साहब, मेरा नाम ऋषि तोमर है. मैं गांव बड़ापुरा में रहता हूं. मैं अपनी पत्नी और उस के प्रेमी की हत्या कर के आया हूं. दोनों की लाशें मेरे घर में पड़ी हुई हैं.’’

ऋषि तोमर के मुंह से 2 हत्याओं की बात सुन कर ओमप्रकाश सिंह दंग रह गए. युवक की बात सुन कर थानाप्रभारी के पैरों के नीचे से जैसे जमीन ही खिसक गई. वहां मौजूद सभी पुलिसकर्मी ऋषि को हैरानी से देखने लगे.

थानाप्रभारी के इशारे पर एक सिपाही ने उसे हिरासत में ले लिया. ओमप्रकाश सिंह ने टेबल पर रखे कागजों व डायरी को समेटा और ऋषि को अपनी जीप में बैठा कर मौकाएवारदात पर निकल गए.

हत्यारोपी ऋषि तोमर के साथ पुलिस जब मौके पर पहुंची तो वहां का मंजर देख होश उड़ गए. कमरे में घुसते ही फर्श पर एक युवती व एक युवक के रक्तरंजित शव पड़े दिखाई दिए. कमरे के अंदर ही चारपाई के पास फावड़ा पड़ा था.

दोनों मृतकों के सिर व गले पर कई घाव थे. लग रहा था कि उन के ऊपर उसी फावडे़ से प्रहार कर उन की हत्या की गई थी. कमरे का फर्श खून से लाल था. थानाप्रभारी ने अपने उच्चाधिकारियों को घटना से अवगत कराया.

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डबल मर्डर की जानकारी मिलते ही मौके पर एसपी (पश्चिमी) अखिलेश नारायण सिंह, सीओ (पिनाहट) सत्यम कुमार पहुंच गए. उन्होंने थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिंह से घटना की जानकारी ली. वहीं पुलिस द्वारा मृतक युवक दीपक के घर वालों को भी सूचना दी गई.

कुछ ही देर में दीपक के घर वाले रोतेबिलखते घटनास्थल पर आ गए थे. इस बीच मौके पर भीड़ एकत्र हो गई. ग्रामीणों को पुलिस के आने के बाद ही पता चला था कि घर में 2 मर्डर हो गए हैं. इस से गांव में सनसनी फैल गई. जिस ने भी घटना के बारे में सुना, दंग रह गया.

दोहरे हत्याकांड ने लोगों का दिल दहला दिया. पुलिस ने आला कत्ल फावड़ा और दोनों लाशों को कब्जे में लेने के बाद लाशें पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दीं. इस के बाद थानाप्रभारी ने हत्यारोपी ऋषि तोमर से पूछताछ की तो इस दोहरे हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला आगरा के थाना मनसुखपुरा के गांव बड़ापुरा के रहने वाले ऋषि तोमर की शादी लक्ष्मी से हुई थी. लक्ष्मी से शादी कर के ऋषि तो खुश था, लेकिन लक्ष्मी उस से खुश नहीं थी. क्योंकि ऋषि उस की चाहत के अनुरूप नहीं था.

ऋषि मेहनती तो था, लेकिन उस में कमी यह थी कि वह सीधासादा युवक था. वह ज्यादा पढ़ालिखा भी नहीं था. बड़ापुरा में कोई अच्छा काम न मिलने पर वह दिल्ली जा कर नौकरी करने लगा.

करीब 2 साल पहले की बात है. ससुराल में ही लक्ष्मी की मुलाकात यहीं के रहने वाले दीपक से हो गई. दोनों की नजरें मिलीं तो उन्होंने एकदूसरे के दिलों में जगह बना ली.

पहली ही नजर में खूबसूरत लक्ष्मी पर दीपक मर मिटा था तो गबरू जवान दीपक को देख कर लक्ष्मी भी बेचैन हो उठी थी. एकदूसरे को पाने की चाहत में उन के मन में हिलोरें उठने लगीं. पर भीड़ के चलते वे आपस में कोई बात नहीं कर सके थे, लेकिन आंखों में झांक कर वे एकदूसरे के दिल की बातें जरूर जान गए थे.

बाजार में मुलाकातों का सिलसिला चलने लगा. मौका मिलने पर वे बात भी करने लगे. दीपक लक्ष्मी के पति ऋषि से स्मार्ट भी था और तेजतर्रार भी. बलिष्ठ शरीर का दीपक बातें भी मजेदार करता था. भले ही लक्ष्मी के 3 बच्चे हो गए थे, लेकिन शुरू से ही उस के मन में पति के प्रति कोई भावनात्मक लगाव पैदा नहीं हुआ था.

लक्ष्मी दीपक को चाहने लगी थी. दीपक हर हाल में उसे पाना चाहता था. लक्ष्मी ने दीपक को बता दिया था कि उस का पति दिल्ली में नौकरी करता है और वह बड़ापुरा में अपनी बेटी के साथ अकेली रहती है, जबकि उस के 2 बच्चे अपने दादादादी के पास रहते थे.

मौका मिलने पर लक्ष्मी ने एक दिन दीपक को फोन कर अपने गांव बुला लिया. वहां पहुंच कर इधरउधर की बातों और हंसीमजाक के बीच दीपक ने लक्ष्मी का हाथ अपने हाथ में ले लिया. लक्ष्मी ने इस का विरोध नहीं किया.

दीपक के हाथों का स्पर्श कुछ अलग था. लक्ष्मी का हाथ अपने हाथ में ले कर दीपक सुधबुध खो कर एकटक उस के चेहरे पर निगाहें टिकाए रहा. फिर लक्ष्मी भी सीमाएं लांघने लगी. इस के बाद दोनों ने मर्यादा की दीवार तोड़ डाली.

एक बार हसरतें पूरी होने के बाद उन की हिम्मत बढ़ गई. अब दीपक को जब भी मौका मिलता, उस के घर पहुंच जाता था. ऋषि के दिल्ली जाते ही लक्ष्मी उसे बुला लेती फिर दोनों ऐश करते. अवैध संबंधों का यह सिलसिला करीब 2 सालों तक ऐसे ही चलता रहा.

लेकिन उन का यह खेल ज्यादा दिनों तक लोगों की नजरों से छिप नहीं सका. किसी तरह पड़ोसियों को लक्ष्मी और दीपक के अवैध संबंधों की भनक लग गई. ऋषि के परिचितों ने कई बार उसे उस की पत्नी और दीपक के संबंधों की बात बताई.

लेकिन वह इतना सीधासादा था कि उस ने परिचितों की बातों पर ध्यान नहीं दिया. क्योंकि उसे अपनी पत्नी पर पूरा विश्वास था, जबकि सच्चाई यह थी कि लक्ष्मी पति की आंखों में धूल झोंक कर हसरतें पूरी कर रही थी.

4 फरवरी, 2019 को ऋषि जब दिल्ली से अपने गांव आया तो उस ने अपनी पत्नी और दीपक को ले कर लोगों से तरहतरह की बातें सुनीं. अब ऋषि का धैर्य जवाब देने लगा. अब उस से पत्नी की बेवफाई और बेहयाई बिलकुल बरदाश्त नहीं हो रही थी. उस ने तय कर लिया कि वह पत्नी की सच्चाई का पता लगा कर रहेगा.

ऋषि के दिल्ली जाने के बाद उस की बड़ी बेटी अपनी मां लक्ष्मी के साथ रहती थी और एक बेटा और एक बेटी दादादादी के पास गांव राजाखेड़ा, जिला धौलपुर, राजस्थान में रहते थे.

ऋषि के दिमाग में पत्नी के चरित्र को ले कर शक पूरी तरह बैठ गया था. वह इस बारे में लक्ष्मी से पूछता तो घर में क्लेश हो जाता था. पत्नी हर बार उस की कसम खा कर यह भरोसा दिला देती थी कि वह गलत नहीं है बल्कि लोग उसे बेवजह बदनाम कर रहे हैं.

घटना से एक दिन पूर्व 4 फरवरी, 2019 को ऋषि दिल्ली से गांव आया था. दूसरे दिन उस ने जरूरी काम से रिश्तेदारी में जाने तथा वहां 2 दिन रुक कर घर लौटने की बात लक्ष्मी से कही थी. बेटी स्कूल गई थी. इत्तफाक से ऋषि अपना मोबाइल घर भूल गया था, लेकिन लक्ष्मी को यह पता नहीं था. करीब 2 घंटे बाद मोबाइल लेने जब घर आया तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था.

उस ने दरवाजा थपथपाया. पत्नी न तो दरवाजा खोलने के लिए आई और न ही उस ने अंदर से कोई जवाब दिया. तो ऋषि को गुस्सा आ गया और उस ने जोर से धक्का दिया तो कुंडी खुल गई.

जब वह कमरे के अंदर पहुंचा तो पत्नी और उस का प्रेमी दीपक आपत्तिजनक स्थिति में थे. यह देख कर उस का खून खौल उठा. पत्नी की बेवफाई पर ऋषि तड़प कर रह गया. वह अपना आपा खो बैठा. अचानक दरवाजा खुलने से प्रेमी दीपक सकपका गया था.

ऋषि ने सोच लिया कि वह आज दोनों को सबक सिखा कर ही रहेगा. गुस्से में आगबबूला हुए ऋषि कमरे से बाहर आया.

वहां रखा फावड़ा उठा कर उस ने दीपक पर ताबड़तोड़ प्रहार किए. पत्नी लक्ष्मी उसे बचाने के लिए आई तो फावड़े से प्रहार कर उस की भी हत्या कर दी. इस के बाद दोनों की लाशें कमरे में बंद कर वह थाने पहुंच गया.

ऋषि ने पुलिस को बताया कि उसे दोनों की हत्या पर कोई पछतावा नहीं है. यह कदम उसे बहुत पहले ही उठा लेना चाहिए था. पत्नी ने उस का भरोसा तोड़ा था. उस ने तो पत्नी पर कई साल भरोसा किया.

उधर दीपक के परिजन इस घटना को साजिश बता रहे थे. उन का आरोप था कि दीपक को फोन कर के ऋषि ने अपने यहां बहाने से बुलाया था. घर में बंधक बना कर उस की हत्या कर दी गई. उन्होंने शक जताया कि इस हत्याकांड में अकेला ऋषि शामिल नहीं है, उस के साथ अन्य लोग भी जरूर शामिल रहे होंगे.

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मृतक दीपक के चाचा राजेंद्र ने ऋषि तोमर एवं अज्ञात के खिलाफ तहरीर दे कर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई.

पुलिस ने हत्यारोपी ऋषि से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया.

उधर पोस्टमार्टम के बाद लक्ष्मी के शव को लेने उस के परिवार के लोग नहीं पहुंचे, जबकि दीपक के शव को उस के घर वाले ले गए.

हालांकि मृतका लक्ष्मी के परिजनों से पुलिस ने संपर्क भी किया, लेकिन उन्होंने अनसुनी कर दी. इस के बाद पुलिस ने लक्ष्मी के शव का अंतिम संस्कार कर दिया. थानाप्रभारी ओमप्रकाश सिंह मामले की तफ्तीश कर रहे थे.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

कहानी सौजन्य: मनोहर कहानी

नवजोत सिंह सिद्धू और बाबा जी का ठुल्लू

द कपिल शर्मा शो में नवजोत सिंह सिद्धू खूब ठहाके लगाते थे. बात-बात में आपके मुंह से  शेरो-शायरी के फूल झरते थे. और जब कभी कपिल शर्मा किसी पर तंज करते, कहते- बाबाजी का ठुल्लू ! तो नवजोत सिंह सिद्धू हो हो कर हंसने लगते. आज सिद्धू उसी मोड़ पर खड़े हैं. और कहा जा सकता है- नवजोत सिंह सिद्धू आपको राजनीति मे क्या मिला… बाबा जी का ठुल्लू  !

नवजोत सिंह सिद्धू जब तलक भाजपा में थे, उनका सितारा बुलंद होता चला गया. पंजाब की राजनीति में उनके पांव मजबूत होते चले गए एक क्रिकेटर को सन्यास के बाद कौन पूछता है मगर अपनी बेजोड़ कलाकारी के कारण नवजोत सिंह सिद्धू जहां टेलीविजन के छोटे पर्दे पर अपनी पहचान और जगह बनाने में कामयाब हुए वहीं राजनीति में पग रखा तो भाजपा ने उन्हें हाथों-हाथ लिया. यही नहीं उनकी पत्नी नवजोत कौर को भी ‘मंत्री’ पद मिला . यह वही सिद्धू है जिन्होंने कांग्रेस के बड़े चेहरे राहुल गांधी को ‘पप्पू’ कह कर संबोधित किया था और उनका खूब माखौल उड़ाते रहे. आज सिद्धू दु:ख भरे संक्रमण के दिन बिता रहे हैं. राजनीति में हाशिए पर हैं, टेलीविजन की दुनिया से आउट भाजपा से बाहर सत्ता विमुख आइए! नवजोत सिंह सिद्धू की पड़ताल करें देखें कैसी है- सिद्धू की हस्ती, और बखत..

सबसे बुरे दिन चल रहे सिद्धू के

80 के दशक में नवजोत सिंह सिद्धू भारतीय क्रिकेट के चमकते सितारे थे. अपने क्रिकेट के जौहर दिखाकर उन्होंने देश के करोड़ों लोगों का दिल जीत लिया. क्रिकेट के रत्नो मे एक सिद्धू, उन दिनों बहुत सीधे-साधे और सरल स्वभाव के थे. जैसा कि उन्होंने स्वयं एक साक्षात्कार में बताया था कि किसी के सामने उनके बोल नहीं फूटते थे, ऐसे थे सिद्धू. और अंग्रेजी तो उन्होंने कभी पढ़ी नहीं, सो अंग्रेजी बोलते, वे क्रिकेटर साथियों का मुंह देखते रह जाते थे. आज जो मकबूलियत सिद्धू को मिली है उसके पीछे उनके मुंह से बारंबार फूलों की तरह झरती शायरी है. उन दिनों वे शायरी भी नहीं बोल पाते थे. मगर उन्होंने धीरे-धीरे स्वयं को मजबूत बनाया और एक आधार स्तंभ बन गए .फिर एक समय आया जब रिटायरमेंट के बाद टीवी शो में मेहमां बतौर आने लगे. इसी बीच सिद्धू को राजनीति का चस्का लगा और भाजपा में लालकृष्ण आडवाणी के आशीर्वाद से सांसद बन गए. मगर जब नरेंद्र मोदी का राजनीति में पदार्पण हुआ तो सिद्धू की राजनीतिक महत्वाकांक्षा टकराने लगी.वह पंजाब को अपने हाथों में रखना चाहते थे जो

भाजपा  नेतृत्व को मंजूर नहीं हुआ. बेबस सिद्धू,  कांग्रेस में चले गए. जहां उन्हें बहुत कुछ फ्री हैंड मिला मगर जब वे पंजाब के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक चट्टान से भिड़ने लगे तो, उनके पर काट दिए गए… आज नवजोत सिंह सिद्धू न इघर के रहे न उधर के…आज अपने सबसे बुरे दिनों को जी रहे हैं सिद्धू.

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दल बदल की छवि से नुकसान

नवजोत सिंह सिद्धू जब तलक भाजपा में थे उन्हें बहुत कुछ मिला. मगर अति महत्वाकांक्षा की दौड़ में सिद्धू ने अपना सब कुछ अपने हाथों से तोड़ डाला. लुटा डाला. भाजपा में रहते इन्हें अमृतसर से सांसद बनने का स्वर्णिम अवसर मिला इस दरम्यान भाजपा आकाली दल की गवर्नमेंट में अपनी डा. पत्नी और हमनाम नवजोत कौर को स्वास्थ्य मंत्री का सम्मानजनक पद मिला . यह माना जा रहा है कि सिद्धू अगरचे निष्ठा पूर्वक भाजपा में बने रहते तो आगे उन्हें बहुत कुछ मिलता.मगर उन्हें लगने लगा, मैं सर्वथा योग्य हूं और मेरे बगैर भाजपा शून्य हो जाएगी. इस सोच के चलते उन्होंने बगावत करनी शुरू कर दी और दलबदल करके कांग्रेस में आ गए.

नवजोत सिंह सिद्धू के दल बदल से जहां उनकी छवि खराब हुई, वहीं उनके हाथ से सब कुछ निकलता चला गया. कांग्रेस में आकर सांसदी  खोनी पड़ी अब अमृतसर से अनुपम खेर की पत्नी किरण खेर सांसद बन बैठी है .दूसरी तरफ उनकी पत्नी को भी क्लीनिक मे बैठकर मरीज देखने पड़ रहे हैं .कांग्रेस में सिद्धू की बुरी गति हुई यहां भी एक मात्र कारण उनका अहम और अति महत्वाकांक्षा ही है.

“कैप्टन” से पंगा भारी पड़ा

नवजोत सिंह सिद्धू नि:सन्देह एक शानदार व्यक्तित्व के स्वामी है .जहां उनकी पहचान राष्ट्रव्यापी है, वहीं जब मंच से संबोधन करते हैं तो लोगों को मंत्रमुग्ध करने की अद्भुत क्षमता उनमें है. अपनी इन्हीं क्वालिटी के कारण सिद्धू में ‘अहम’ उत्पन्न हुआ और शायद यही अहम ही वह कारण है जो उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री और राहुल सोनिया गांधी के सबसे विश्वास्त हाथ   कैप्टन अमरिंदर सिंह से दो-दो हाथ करा बैठा. सिद्धू को अहम था की वे सीधे राहुल गांधी से ‘हाथ’ मिलाते हैं उन्हें अहम था उनकी हस्ती बड़ी है. उन्हें आत्म विश्वास था कि वे अर्थात सिद्धू जहां खड़े हो जाते हैं लाइन वहीं से शुरू होती है.

अपने अहम के कारण ही उन्होंने एक दफे एक पत्रकार को कहा था की उनके कैप्टन सिर्फ एक है… उनका इशारा राहुल गांधी की तरफ था. मगर यह ‘तंज’ उन्हें पंजाब के शेर अमरिंदर सिंह से रार करा बैठा और एक स्वर मैं पंजाब के मंत्री गण सिद्धू पर पिल पड़े. सिद्धू अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह से हाथ मिलाकर चलते तो कांग्रेस पार्टी का भला होता ही उनका भविष्य भी उज्जवल होता .उन्हें आज इस तरह पंजाब के कैबिनेट मंत्री के ‘पद’ को छोड़ने और कोप भवन में जाने की जरूरत नहीं पड़ती.

अब क्या करेंगे श्रीमान सिद्धू

नवजोत सिंह सिद्धू ने दुनिया देखी है. खूब उतार-चढ़ाव देखे हैं अब उन्हें क्या करना चाहिए और क्या करेंगे यह मंथन करें तो कहा जा सकता है राजनीति की सांप सीढ़ी के खेल में सिद्धू की बहुत बुरी गत बनी है. पंजाब के ‘कैप्टन’ के सामने कांग्रेस के बड़े ʼकैप्टनʼ राहुल की भी नहीं चली. और सिद्धू को राजनीति के मैदान से पेवेलियन जाना पड़ा है.

अब उन्हें ‘आप’ पार्टी आमंत्रित कर रही है. आप पार्टी पंजाब में बुरे दिन देख रही है क्या सिद्धू आप ज्वाइन करेंगे या कांग्रेस में मौन और धैर्य रखकर बढ़ेंगे ? इधर कपिल शर्मा शो की मेजबानी भी नरेंद्र मोदी से पंगा लेने के कारण कपिल शर्मा खो बैठे हैं  वहां अब  उनकी ठौर नहीं . नवजोत सिंह सिद्धू के यह दिन चिंतन मनन के हैं बैठकर सोचे कि उनसे क्या गलती हो गई है जो बैठे-बिठाए सब कुछ चला गया… आज उनके पास कपिल शर्मा शो का बाबाजी का ठुल्लू के अलावा है क्या.

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#Sareetwitter में शामिल हुए आयुष्मान खुराना

सोशल मीडिया पर आए दिन कुछ न कुछ ट्रेंड होता रहता है. और लोग इसे फौलो भी करते हैं. दरअसल आजकल ट्विटर पर साड़ी ट्रेंड चल रहा है. इससे बौलीवुड सेलेब्स भी बचे नहीं हैं. ट्विटर पर #SareeTwitter  काफी ट्रेंड हो रहा है. इसी लिस्ट में बौलीवुड एक्टर आयुष्मान खुरान का भी नाम शामिल हो गया हैं. एक्टर ने सोशल मीडिया पर अपनी एक फोटो शेयर की है. जिसमें वो साड़ी पहने दिखाई दे रहे हैं.

आपको बता दें, फिल्म ड्रीम गर्ल में आयुष्मान का किरदार ऐसा होगा जोकि महिलाओं की आवाज में बात कर सकता है. सामने आई इस तस्वीर में भी आप देख सकते हो कि साड़ी पहने हुई आयुष्मान खुराना माइक के सामने बैठे हुए हैं.

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फिल्म में आयुष्मान खुराना  के अलावा बौलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भरूचा भी लीड रोल में दिखाई देंगी. फिल्म में अरबाज खान, मनजोत सिंह और सुमोना चक्रवर्ती भी दिखाई देंगे. इस फिल्म को राज शांडिल्य ने लिखा है और डायरेक्ट किया है. तो वहीँ एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस ने फिल्म का निर्माण किया है.

हाल ही में आयुष्मान खुराना ‘आर्टिकल 15’ में दिखाई दिए थे. फिल्म में उनका किरदार पुलिसवाले का था. कम बजट की इस फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया था. बौक्स औफिस पर भी  इस फिल्म की कमाई काफी अच्छी रही.

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दिलकश नजारों से रूबरू कराता पश्चिम बंगाल

पारंपरिक व आधुनिक संस्कृति को अपने में समेटे भौगोलिक विविधताओं से परिपूर्ण पश्चिम बंगाल में जहां प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना है वहीं इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों को भी यह बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है.
पश्चिम बंगाल के पर्यटन का नाम लेते ही दार्जिलिंग, सुंदरवन, दीघा का नाम जेहन में आता है. लेकिन उत्तर बंगाल के समतल मैदान से ले कर दक्षिण बंगाल के कई पर्यटन क्षेत्रों के बारे में जान कर आप का मन प्रफुल्लित हो उठेगा. दरअसल, बंगाल के कई जिलों का अपना पर्यटन महत्त्व है. राज्य में जलपाईगुड़ी जिले से हो कर कई पर्यटन स्थलों की सैर की जा सकती है. आइए, उत्तर बंगाल के राष्ट्रीय उद्यान से चर्चा शुरू करते हैं.
गोरूमारा राष्ट्रीय उद्यान: कोलकाता से जलपाईगुड़ी के रास्ते 52 किलोमीटर की दूरी पर गोरूमारा राष्ट्रीय उद्यान स्थित है. यह अपने प्राकृतिक सौंदर्य, मनमोहक दृश्य, घने जंगल और खूबसूरत झरनों के लिए जाना जाता है. ऊपरी हिमालय की पर्वतशृंखलाओं के नीचे समतल का खुला मैदान पर्यटकों को अपनी ओर खूब आकर्षित करता है. इस उद्यान के मुख्य आकर्षण गैंडा, हाथी, गौड़, तेंदुआ आदि वन्य जीव हैं.
जल्दपाड़ा अभयारण्य : भूटान की सीमा के नजदीक बंगाल के उत्तरी जिले जलपाईगुड़ी में 217 वर्ग किलोमीटर तक के क्षेत्र में फैला है जल्दपाड़ा वन्यजीव अभयारण्य. यह जलपाईगुड़ी की तोरसा नदी समेत इस की अन्य सहायक नदियों के करीबी समतल मैदानों के घने जंगलों से घिरा अभयारण्य है. यहां के जंगल में सागौन के पेड़ और एक विशेष प्रकार की घास, जो हाथी घास के नाम से जानी जाती है, बहुतायत में पाई जाती है. अभयारण्य के दलदल में हिरण, तेंदुए, सांबर, काकड़, पाड़ा, जंगली सूअर, जंगली मुरगी, मोर, बटेर, हाथी और बाघ पाए जाते हैं. अभयारण्य में हाथी  की सवारी का लुत्फ भी उठाया जा सकता है.
कासिम बाजार : जलपाईगुड़ी के बाद मुर्शिदाबाद पर्यटन के लिहाज से प्रमुख जिला है. वैसे भी मध्यकाल में मुर्शिदाबाद नवाबों की राजधानी के रूप में जाना जाता था. इस जिले की भागीरथी नदी के तट पर कासिम बाजार का अपना ऐतिहासिक महत्त्व है. इस की वजह यह है कि अंगरेज फ्रांसीसी, डच समेत यूरोपीय व्यापारियों के बीच इस का महत्त्व रहा है. यूरोपीय व्यापारियों ने यहां अपने कारखाने स्थापित किए थे. भारत के विभिन्न स्थानों पर अपना उपनिवेश बनाने की ताक में रही विदेशी शक्तियों के लिए कासिम बाजार में रहते हुए मुर्शिदाबाद पर नजर रखना आसान हो जाता था.
कासिम बाजार रेशम उत्पादन का वृहद केंद्र रहा है. जाहिर है यहां रेशम उद्योग के लिए कच्चे माल और कुशल बुनकर आसानी से उपलब्ध हो जाते थे. हौलैंड के व्यापारियों ने यहां रेशम का एक कारखाना खोला था, जिस में 700-800 कारीगर काम करते थे.
हजारद्वारी पैलेस : मुर्शिदाबाद जिले का सब से प्रमुख पर्यटक स्थल हजारद्वारी पैलेस है. इसे मीर जाफर के वंशज नजीम हुमायूं शाह ने बनवाया था. इस राजमहल के वास्तुकार डंकन मैकलियोड थे. यह यूरोपीय शैली का स्थापत्य है. जैसा कि इस के नाम से जाहिर है, इस में 1 हजार द्वार हैं. 3 मंजिला यह महल 40 एकड़ से भी अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है. महल के आसपास मनोरम दृश्य पर्यटकों के लिए दर्शनीय हैं. यहां एक बड़ा पुस्तकालय भी है.
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हजारद्वारी पैलेस में एक संग्रहालय भी है, जहां 18वीं शताब्दी की दुर्लभ चीजें हैं. शाही घरानों और नवाबों की जीवनशैली से जुड़ी बहुत सारी दर्शनीय चीजें संग्रहालय में हैं. 18वीं शताब्दी के 2,700 से भी अधिक प्रकार के हथियारों के अलावा सुंदर पेंटिंग्स, हाथीदांत से बनी वस्तुएं और कलाकृतियां प्रमुख हैं. पेंटिंग्स में नवाब सिराजुद्दौला समेत उन के पूर्वजों और नवाब अलीवर्दी खान की तलवारें भी संग्रहालय में हैं. संग्रहालय का बड़ा आकर्षण विंटेज कारों का बड़ा कलैक्शन है. बताया जाता है कि इन कारों का इस्तेमाल शाही घराने के सदस्य किया करते थे. इस के अलावा धर्मभीरु पर्यटक मायापुर इस्कौन मंदिर भी जा सकते हैं.
मुकुटमणिपुर
बांकुड़ा जिले का दूसरा प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है मुकुटमणिपुर. यह बांकुड़ा से 55 किलोमीटर दूर है. यह दरअसल एक बांध है. हरेभरे जंगल और पानी की विशाल धारा के साथ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए यह बहुत मशहूर है. यहां के विशाल जलाशय के पानी में आसमान का प्रतिबिंब इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है. पर्यटक यहां पहाड़ी पर ट्रैकिंग का भी मजा ले सकते हैं. यहां की सब से ऊंची पहाड़ी बिहारीनाथ के नाम से जानी जाती है. यह पहाड़ी पर्यटन के लिए मशहूर है. यहां का नैसर्गिक वातावरण पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है.
सुंदरवन
दुनिया के सब से बड़े डेल्टा के रूप में जाना जाता है सुंदरवन. पूरा सुंदरवन न केवल बंगाल के 2 जिलों उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना में, बल्कि बंगलादेश तक फैला हुआ है. सुंदरवन के भारतीय इलाकों में लगभग 54 द्वीप हैं, जो इस क्षेत्र का केवल 40 प्रतिशत है, शेष 60 प्रतिशत बंगलादेश के अंतर्गत आता है. यहां अकसर समुद्री चक्रवाती तूफान आते हैं. विशेष रूप से मार्च महीने से चक्रवाती तूफान का आना शुरू होता है. चक्रवाती तूफानों की वजह से गरमी के दिनों में यहां पर्यटकों को आने की अनुमति नहीं दी जाती है. यहां पर्यटन के लिए सब से अच्छा समय सितंबर से फरवरी तक का माना जाता है.
सुंदरवन रौयल बंगाल टाइगर, मैनग्रोव के जंगल और यहां पाए जाने वाले विशेष तरह के सुंदरी नामक पेड़ के लिए जाना जाता है. यहां के मैनग्रोव 10-12 फुट ऊंचे होते हैं और रौयल बंगाल टाइगर का यही निवासस्थल है. दरअसल, मैनग्रोव की पत्तियां पीलीहरीचितकबरी होती हैं और इसी की वजह से बाघ इन पत्तियों के बीच आसानी से छिप जाते हैं. इस के अलावा सुंदरवन लाल केंकड़े, कछुए, मगरमच्छ, हिरन, रंगबिरंगे पक्षियों, शिकारी बिल्लियों, प्रवासी पक्षियों तथा विभिन्न प्रजाति के विषैले सांपों व शहद के लिए भी जाना जाता है.
कोलकाता से यहां पहुंचने के लिए नियमित बस सेवाएं हैं. कैनिंग ‘गेटवे औफ सुंदरवन’ कहलाता है. सड़क के रास्ते 6 जगहों– कैनिंग, सोनाखाली, नामखाना, रायदीघी, जामतला और थामाखाली हो कर पहुंचा जा सकता है. कैनिंग तक पहुंचने के लिए सियालदह से टे्रन उपलब्ध है.
दीघा
कोलकाता से 187 किलोमीटर की दूरी पर दीघा नाम का समुद्रतट है. धर्मतल्ला और उल्टाडांगा से बसें जाती हैं. आजकल टे्रन भी उपलब्ध है. हावड़ा से ट्रेन के जरिए महज 2 घंटे में दीघा पहुंचा जा सकता है. नवंबर से मार्च तक का समय दीघा पर्यटन के अनुकूल होता है. पहले यह बारीकूल के नाम से जाना जाता था लेकिन अब दीघा के नाम से विश्वप्रसिद्ध है.
दीघा के करीब न्यू दीघा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है. यहां समुद्र तट के अलावा झील और पार्क हैं. झील में बोटिंग का मजा लिया जा सकता है. यहां पैडल बोट से ले कर मोटर बोट तक उपलब्ध हैं. दीघा से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर शंकरपुर नाम का एक और पर्यटन स्थल है. इसे फिशिंग प्रोजैक्ट के लिए जाना जाता है.
यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों का नजारा मनमोहक होता है. दीघा के समुद्र तट के किनारेकिनारे चल कर ओडिशा तक पहुंचा जा सकता है. यहां के लाल केंकड़े विश्वप्रसिद्ध हैं. इन केकड़ों के दर्शन पर्यटकों के लिए बहुत ही खुशी की बात है क्योंकि पर्यटन के मौसम में ये केंकड़े कम ही दिखाई देते हैं.

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दार्जिलिंग
पहाड़ों की सैर के लिए दार्जिलिंग अच्छा विकल्प है. बंगाल का पहाड़ी इलाका दार्जिलिंग कभी सिक्किम का हिस्सा हुआ करता था.
दार्जिलिंग अपनी चाय और टौय ट्रेन के लिए सब से अधिक जाना जाता है. यहां की चाय दुनिया की सब से बढि़या चाय में शुमार की जाती है. यहां की उम्दा चाय 3 हजार रुपए प्रति किलोग्राम तक बिकती है. टौय ट्रेन का स्थानीय नाम हिमालयन रेलवे है. 1878 में इस की स्थापना हुई. मुख्य शहर दार्जिलिंग से 80 किलोमीटर दूर घूम कर टौय ट्रेन की सवारी की जा सकती है. यहां की टौय ट्रेन विश्व विरासत का हिस्सा बन चुकी है.
दार्जिलिंग से बौद्धों के मठ और पहाड़ों के खूबसूरत नजारे नजर आते हैं. दार्जिलिंग में एक टाइगर हिल है. वहां से सुबहसुबह विश्व की सब से ऊंची चोटी एवरेस्ट और विश्व की तीसरी सब से ऊंची चोटी कंचनजंगा का नजारा देखने के लिए खासी भीड़ उमड़ती है.
मठों के लिए प्रसिद्ध दार्जिलिंग का सब से प्रसिद्ध मठ घूम मठ है. यह टाइगर हिल के करीब है. इस मठ में बुद्ध की 15 फुट की प्रतिमा है. कीमती पत्थर से बनी मूर्ति में सोने की परत चढ़ी है. यहां से थोड़ी दूर पर एक और मठ है, जिसे जेलूग्पा के नाम से जाना जाता है. दार्जिलिंग औब्जर्वेटरी हिल के पास भूटिया बस्ती मठ है.
कहते हैं, इस मठ में 1815 में नेपालियों ने लूटपाट की थी. 1879 में इस मठ को फिर से बनाया गया, जो नेपालीतिब्बती शैली का है. इस के अलावा माकडोग मठ, दू्रकचन चोलिंग मठ और शाक्या मठ भी हैं. माकडोग मठ का निर्माण 1914 में हुआ था. यह योलमोवा संप्रदाय का है. ये लोग नेपाल से यहां आ कर बस गए थे. दू्रकचन चोलिंग मठ तिब्बती शैली का मठ है. शाक्या मठ शाक्य संप्रदाय का है.
जापानी पैगोडा का निर्माण 1972 में शुरू किया गया, जिसे 1992 में आम लोगों के लिए खोल दिया गया. यहां लाल पांडा और स्नो लैपर्ड के लिए कृत्रिम प्रजनन केंद्र है, जो पद्मजा नायडू हिमालयन जैविक उद्यान के नाम से जाना जाता है. इस उद्यान में 50 से भी अधिक प्रजाति के और्किड का एक संग्रहालय है. यहां से करीब ही नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम भी है जहां विभिन्न प्रकार के पक्षियों, सरीसृपों, कीटपतंगों को संरक्षित रखा गया है.
दार्जिलिंग का पर्वतारोहण संग्रहालय भी दर्शनीय है. यहां एवरेस्ट के तमाम ऐतिहासिक अभियानों से जुड़ी वस्तुओं को रखा गया है. 1953 में एवरेस्ट पर पहली बार भारत का झंडा फहराने वाले शेरपा तेनजिंग के अभियान से संबंधित वस्तुएं देखी जा सकती हैं.
संग्रहालय के अलावा यहां पर्वतारोहण का प्रशिक्षण भी दिया जाता है. इन के अलावा दार्जिलिंग के अन्य पर्यटक स्थल हैं : गंबू चट्टान, गंगामाया पार्क, रौक गार्डन, श्रवरी पार्क और राज भवन. दार्जिलिंग से मानेभंज्जयांग हो कर संदाकफू की यात्रा पर्यटकों के लिए एक बहुत अच्छा अनुभव है. पैदल यात्रा से ही उन का लुत्फ उठाया जा सकता है.

अजब गजब: अनोखी बिल्ली

जैसा कि आप जानते हैं, पूरी दुनिया में कुछ न कुछ अजीबोगरीब चीजें होती है. जिससे आप अंजान होते हैं. और अगर आपको वो अजीबोगरीब चीजें देखने को मिल जाती हैं तो आपको आश्चर्य का ठिकाना नहीं होता. तो चलिए आज आपको एक ऐसी ही अनोखी बिल्ली के बारे में बताते हैं.

दरअसल, यह खबर अमेरिका से है. एक हौस्पिटल में पाल रसेल नाम का शख्स एक अजीबोगरीब बिल्ली को लेकर पंहुचा तो सभी लोग चौंक गए. यह 82 वर्ष का वृद्ध व्यक्ति था. इस बिल्ली की कई सारी तस्वीरों को पेन्सिलवेनिया के पिट्सबर्ग वाइल्ड लाइफ सेंटर की ओर से उनके फेसबुक पेज पर शेयर की गई थीं.

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आपको बता दें, इस बिल्ली के शरीर पर करीब दो पौंड से ज्यादा बाल थे. इसलिए उसे अस्पताल में लाया गया था ताकि उसके बाल उसके शरीर से हटाए जा सके और बिल्ली को उस परेशानी से मुक्त किया जा सके. बिल्ली को देखकर इसकी असल हालत का पता साफ चल रहा था, जो की काफी दयनीय थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस तरह की बिल्ली कभी नहीं देखी गई. डौक्टरों द्वारा बिल्ली की खूबसूरती सबके सामने आई और उसको अपने लंबे बालों से भी आजादी मिली.

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दिशा की दृष्टिभ्रम

खुशी से दिशा के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे. फ्रैंड्स से बात करते हुए वह चिडि़यों की तरह चहक रही थी. उस की आवाज की खनक बता रही थी कि बहुत खुश है. यह स्वाभाविक भी था. मंगनी होना उस के लिए छोटी बात नहीं थी.

मंगनी की रस्म के लिए शहर के नामचीन होटल को चुना गया था. रात के 9 बज गए थे. सारे मेहमान भी आ चुके थे. फ्रैंड्स भी आ गई थीं. लेकिन मानस और उस के घर वाले अभी तक नहीं आए थे.

देर होते देख उस के पापा घबरा रहे थे. उन्होंने दिशा को मानस से पूछने के लिए कहा तो उस ने तुरंत उसे फोन लगाया. मानस ने बताया कि वे लोग ट्रैफिक में फंस गए हैं. 20-25 मिनट में पहुंच जाएंगे.

दिशा ने राहत की सांस ली. मानस के आने में देर होते देख न जाने क्यों उसे डर सा लगने लगा था. वह सोच रही थी कि कहीं उसे उस के बारे में कोई नई जानकारी तो नहीं मिल गई. लेकिन उस ने अपनी इस धारणा को यह सोच कर पीछे धकेल दिया कि वह आ तो रहा है. कोई बात होती तो टै्रफिक में फंसा होने की बात क्यों बताता.

अचानक उस के मोबाइल की घंटी बज उठी. उस ने ‘हैलो’ कहा तो परिमल की आवाज आई, ‘‘2 दिन पहले ही जेल से रिहा हुआ हूं. तुम्हारा पता किया तो जानकारी मिली कि आज मानस से तुम्हारी मंगनी होने जा रही है. मैं एक बार तुम्हें देखना और तुम से बात करना चाहता हूं. होटल के बाहर खड़ा हूं. 5 मिनट के लिए आ जाओ, नहीं तो मैं अंदर आ जाऊंगा.’’

दिशा घबरा गई. जानती थी कि परिमल अंदर आ गया तो उस की फजीहत हो जाएगी. मानस को सच्चाई का पता चल गया तो वह उस से मंगनी नहीं करेगा.

उसे परिमल से मिल लेने में ही भलाई नजर आई. लोगों की नजर बचा कर वह होटल से बाहर चली गई.

गेट से थोड़ी दूर आगे परिमल खड़ा था. उस के पास जा कर दिशा गुस्से में बोली, ‘‘क्यों परेशान कर रहे हो? बता चुकी हूं कि मैं तुम से किसी भी हाल में शादी नहीं कर सकती.’’

‘‘तुम ने मेरी जिंदगी बरबाद की है, फिर भी मैं तुम्हें परेशान नहीं कर सकता. मैं तो तुम से सिर्फ यह जानना चाहता हूं कि मेरी दुर्दशा करने के बाद तुम्हें कभी पछतावा हुआ या नहीं?’’

दिशा ने रूखे स्वर में जवाब दिया, ‘‘कैसा पछतावा? जो कुछ भी हुआ उस में सारा दोष तुम्हारा था. मैं ने तो पहले ही आगाह किया था कि मुझे बदनाम मत करो. आज के बाद अगर तुम ने मुझे फिर कभी बदनाम किया तो याद रखना पहली बार 3 साल के लिए जेल गए थे. अब उम्र भर के लिए जाओगे.’’

अपनी बात कह कर दिशा बिना परिमल का जवाब सुने होटल के अंदर आ गई. उस की फ्रैंडस उसे ढूंढ रही थीं. एक ने पूछ लिया, ‘‘कहां चली गई थी? तेरे पापा पूछ रहे थे.’’स्थिति संभालने के लिए दिशा ने बाथरूम जाने का बहाना कर दिया. पापा को भी बता दिया. फिर राहत की सांस ले कर सोफे पर बैठ गई.

उसे विश्वास था कि परिमल अब कभी परेशान नहीं करेगा और वह मानस के साथ आराम की जिंदगी गुजारेगी. परिमल से दिशा की पहली मुलाकात कालेज में उस समय हुई थी, जब वह बीटेक कर रही थी. परिमल भी उसी कालेज से बीटेक कर रहा था. वह उस की पर्सनैल्टी पर मुग्ध हुए बिना नहीं रह सकी थी. लंबी चौड़ी कद काठी, आकर्षक चेहरा, गोरा रंग, स्मार्ट और हैंडसम.

मन ही मन उस ने ठान लिया था कि एक न एक दिन उसे पा कर रहेगी, चाहे कालेज की कितनी भी लड़कियां उस के पीछे पड़ी हों. दरअसल, उसे पता चला था कि कई लड़कियां उस पर जान न्योछावर करती हैं. यह अलग बात थी कि उस ने किसी का भी प्रेम प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया था.

प्यार मोहब्बत के चक्कर में वह अपनी पढ़ाई खराब नहीं करना चाहता था. पढ़ाई में वह शुरू से ही मेधावी था. एक ही कालेज में पढ़ने के कारण दिशा उस से पढ़ाईलिखाई की ही बात करती थी. कई बार वह कैंटीन में उस के साथ चाय भी पी चुकी थी.

एक दिन कैंटीन में परिमल के साथ चाय पीते हुए उस ने कहा, ‘‘इन दिनों बहुत परेशान हूं. मेरी मदद करोगे तुम्हारा बड़ा अहसान होगा.’’

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‘‘परेशानी क्या है?’’ परिमल ने पूछा. ‘‘कहते हुए शर्म आ रही है पर समाधान तुम्हें ही करना है. इसलिए परेशानी तो बतानी ही पडे़गी. बात यह है कि पिछले 4-5 दिनों से तुम रातों में मेरे सपनों में आते हो और सारी रात जगाए रहते हो.

‘‘दिन में भी मेरे दिलोंदिमाग में तुम ही रहते हो. शायद इसे ही प्यार कहते हैं. सच कहती हूं परिमल तुम मेरा प्यार स्वीकार नहीं करोगे तो मैं जिंदा लाश बन कर रह जाऊंगी.’’

परिमल ने तुरंत जवाब नहीं दिया. उस ने कुछ सोचा फिर कहा, ‘‘यह तो पता नहीं कि तुम मुझे कितना चाहती हो, पर यह सच है कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो.’’

दिशा के चेहरे की मुसकान का सकारात्मक अर्थ निकालते हुए उस ने आगे कहा, ‘‘मैं भी तुम्हारा प्यार पाना चाहता हूं. लेकिन मैं ने इस डर से कदम आगे नहीं बढ़ाए कि तुम अमीर घराने की हो. तुम्हारे पापा रिटायर जज हैं. भाई पुलिस में बड़े अधिकारी हैं. धनदौलत की कमी नहीं है.’’

दिशा उस की बातों को बडे़ मनोयोग से सुन रही थी. परिमल ने अपनी बात जारी रखी, ‘‘मैं गरीब परिवार से हूं. पिता मामूली शिक्षक हैं. ऊपर से उन्हें 2 जवान बेटियों की शादी भी करनी है. यह  सच है कि तुम अप्सरा सी सुंदर हो. कोई भी अमीर युवक तुम से शादी कर के अपने आप को भाग्यशाली समझेगा. तुम्हारे घर वाले तुम्हारा हाथ भला मेरे हाथ में क्यों देंगे?’’

दिशा तुरंत बोली, ‘‘इतनी सी बात के लिए डर रहे हो? मुझ पर भरोसा रखो. हमारा मिलन हो कर रहेगा. हमें एक होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. तुम केवल मेरा प्यार स्वीकार करो, बाकी सब कुछ मेरे ऊपर छोड़ दो.’’

दिशा ने समझाया तो परिमल ने उस का प्यार स्वीकार कर लिया. उस के बाद दोनों को जब भी मौका मिलता कभी पार्क में, कभी मौल में तो कभी किसी रेस्तरां में जा कर घंटों प्यारमोहब्बत की बातें करते.

सारा खर्च दिशा की करती थी. परिमल खर्च करता भी तो कहां से? उसे सिर्फ 50 रुपए प्रतिदिन पौकेट मनी मिलती थी. उसी में घर से कालेज आनेजाने का किराया भी शामिल था.

2 महीने में ही दोनों का प्यार इतना अधिक गहरा हो गया कि एकदूसरे में समा जाने के लिए व्याकुल हो गए. अंतत: एक दिन दिशा परिमल को अपनी फ्रैंड के फ्लैट पर ले गई.

दिशा का प्यार पा कर परिमल उस का दीवाना हो गया. दिनरात लट्टू की तरह उस के आगेपीछे घूमने लगा. नतीजा यह हुआ कि पढ़ाई से मन हट गया और उसे दिशा के साथ उस की फ्रैंड के फ्लैट पर जाना अच्छा लगने लगा.

सहेली के मम्मीपापा दिन में औफिस में रहते थे. इसलिए उन्हें परेशानी नहीं होती थी. फ्रैंड तो राजदार थी ही.

इस तरह दोनों एक साल तक मौजमस्ती करते रहे. फिर अचानक दिशा को लगा कि परिमल के साथ ज्यादा दिनों तक रिश्ता बनाए रखने में खतरा है. वजह यह कि वह उस से शादी की उम्मीद में था.

दिशा ने परिमल से मिलनाजुलना बंद कर दिया. उस ने परिमल को छोड़ कर कालेज के ही एक छात्र वरुण से तनमन का रिश्ता जोड़ लिया. वरुण बहुत बड़े बिजनैसमैन का इकलौता बेटा था.

सच्चाई का पता चलते ही परिमल परेशान हो गया. वह हर हाल में दिशा से शादी करना चाहता था. लेकिन दिशा ने उसे बात करने का मौका ही नहीं दिया था. दिशा का व्यवहार देख कर परिमल ने कालेज में उसे बदनाम करना शुरू कर दिया. मजबूर हो कर दिशा को उस से मिलना पड़ा.

पार्क में परिमल से मिलते ही दिशा गुस्से में चीखी, ‘‘मुझे बदनाम क्यों कर रहे हो. मैं ने कभी कहा था कि तुम से शादी करूंगी?’’‘‘अपना वादा भूल गईं. तुम ने कहा था न कि हमारा मिलन हो कर रहेगा. तभी तो तुम्हारी तरफ कदम बढ़ाया था.’’ परिमल ने उस का वादा याद दिलाया.

‘‘मैं ने मिलन की बात की थी, शादी की नहीं. मेरी नजरों में तन का मिलन ही असल मिलन होता है. मैं ने अपना सर्वस्व तुम्हें सौंप कर अपना वादा पूरा किया था, फिर शादी के लिए क्यों पीछे पड़े हो? तुम छोटे परिवार के लड़के हो, इसलिए तुम से किसी भी हाल में शादी नहीं कर सकती.’’

परिमल शांत बैठा सुन रहा था. उस के चेहरे पर तनाव था और मन में गुस्सा. लेकिन उस सब की चिंता किए बगैर दिशा बोली, ‘‘तुम अच्छे लगे थे, इसीलिए संबंध बनाया था. अब हम दोनों को अपनेअपने रास्ते चले जाना चाहिए. वैसे भी मेरी जिंदगी में आने वाले तुम पहले लड़के नहीं हो. मेरी कई लड़कों से दोस्ती रही है. मैं सब से थोड़े ही शादी करूंगी? अगर आज के बाद मुझे कभी भी परेशान  करोगे तो तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा. बदनामी से बचने के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूं.’’

दिशा का लाइफस्टाइल जान कर परिमल को बहुत गुस्सा आया. इतना गुस्सा कि उस के वश में होता तो उस का गला दबा देता. जैसेतैसे गुस्से को काबू कर के उस ने खुद को समझाया. लेकिन सब की परवाह किए बिना दिशा उठ कर चली गई.

दिशा ने भले ही परिमल से बुरा व्यवहार किया, लेकिन उस ने उस की आंखों में गुस्से को देखा था, इसलिए उसे डर लग रहा था. उसे लगा कि परिमल अगर शांत नहीं बैठा तो उस की जिंदगी में तूफान आ सकता है.  वह बदनाम नहीं होना चाहती थी. इसलिए उस ने भाई की मदद ली. उस का भाई पुलिस में उच्च पद पर था, उसे चाहता भी था.

नमक मिर्च लगा कर उस ने परिमल को खलनायक बनाया और भाई से गुजारिश की कि परिमल को किसी भी मामले में फंसा कर  जेल भिजवा दे. फलस्वरूप परिमल को गिरफ्तार कर लिया गया. उस पर इल्जाम लगाया गया कि उस ने कालेज की एक लड़की की इज्जत लूटने की कोशिश की थी.

अदालत में सारे झूठे गवाह पेश कर दिए गए. पुलिस का मामला था, सो आरोपी लड़की भी तैयार कर ली गई. अदालत में उस का बयान हुआ तो 2-3 तारीख पर ही परिमल को 3 वर्ष की सजा हो गई.

परिमल हकीकत जानता था, लेकिन चाह कर भी वह कुछ नहीं कर सकता था. लंबी लड़ाई के लिए उस के पास पैसा भी नहीं था. उस ने चुपचाप सजा काटना मुनासिब समझा. इस से दिशा ने राहत की सांस ली. साथ ही उस ने अपना लाइफस्टाइल भी बदलने का फैसला कर लिया. क्योंकि वह यह सोच कर डर गई थी कि परिमल जैसा कोई और उस की जिंदगी में आ गया तो वह घर परिवार और समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी.

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उस के दुश्चरित्र होने की बात पापा तक पहुंच गई तो वह उन की नजर में गिर जाएगी. पापा उसे इतना चाहते थे कि हर तरह की छूट दे रखी थी. उस के कहीं आनेजाने पर भी कोई पाबंदी नहीं थी. यहां तक कि उन्होंने कह दिया था कि अगर उसे किसी लड़के से प्यार हो गया तो उसी से शादी कर देंगे, बशर्ते लड़का अमीर परिवार से हो.

मम्मी थीं नहीं, 7 साल पहले गुजर गई थीं. भाभी अपने आप में मस्त रहती थीं. दिशा जब 12वीं में पढ़ती थी तो एक लड़के के प्रेम में आ कर उस ने अपना सर्वस्व सौंप दिया था. वह नायाब सुख से परिचित हुई तो उसे ही सच्चा सुख मान लिया.

वह बेखौफ उसी रास्ते पर आगे बढ़ती गई. नएनए साथी बनते और छूटते गए. वह किसी एक की हो कर नहीं रहना चाहती थी.

पहली बार परिमल ने ही उस से शादी की बात की थी. जब वह नहीं मानी तो उस ने उसे खूब बदनाम भी किया था.

वह बदनामी की जिंदगी नहीं जीना चाहती थी. इसलिए परिमल के जेल में रहते परिणय सूत्र में बंध जाना चाहती थी. तब उस की जिंदगी में वरुण आ चुका था.

परिमल के जेल जाने के 6 महीने बाद दिशा ने जब बीटेक कर लिया तो उस ने वरुण से अपने दिल की बात कही, ‘‘चोरीचोरी प्यार मोहब्बत का खेल बहुत हो गया. अब शादी कर के तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं.’’

वरुण दिशा की तरह इस मैदान का खिलाड़ी था. उस ने शादी से मना कर दिया, साथ ही उस से रिश्ता भी तोड़ दिया.

दिशा को अपने रूप यौवन पर घमंड था. उसे लगता था कि कोई भी युवक उसे शादी करने से मना नहीं करेगा. वरुण ने मना कर दिया तो आहत हो कर उस ने शादी से पहले अपने पैरों पर खड़ा होने का निश्चय किया.

पापा से नौकरी की इजाजत मिल गई तो उस ने जल्दी ही जौब ढूंढ लिया. जौब करते हुए 2 महीने ही बीते थे कि एक पार्टी में उस का परिचय रंजन से हुआ, जो पेशे से वकील था. उस के पास काफी संपत्ति थी. शादी के ख्याल से उस ने रंजन से दोस्ती की, फिर संबंध भी बनाया. लेकिन करीब एक साल बाद उस ने शादी से मना कर दिया.

रंजन से धोखा मिलने पर दिशा तिलमिलाई जरूर लेकिन उस ने निश्चय किया कि पुरानी बातों को भूल कर अब विवाह से पहले किसी से भी संबंध नहीं बनाएगी.

दिशा ने घर वालों को शादी की रजामंदी दे दी तो उस के लिए वर की तलाश शुरू हो गई. 4 महीने बाद मानस मिला. वह बहुत बड़ी कंपनी में सीईओ था. पुश्तैनी संपत्ति भी थी. उस के पिता रेलवे से रिटायर्ड थे. मम्मी हाईस्कूल में पढ़ाती थीं.

मानस से शादी होना तय हो गया तो दिशा उस से मिलने लगी. उस ने फैसला किया था कि शादी से पहले किसी से भी संबंध नहीं बनाएगी. लेकिन अपने फैसले पर वह टिकी नहीं रह सकी. हवस की आग में जलने लगी तो मानस से संबंध बना लिया.

2 महीने बाद जब मानस मंगनी से कतराने लगा तो दिशा ने पूछा, ‘‘सच बताओ, मुझ से शादी करना चाहते हो या नहीं?’’

‘‘नहीं.’’ मानस ने कह दिया.

‘‘क्यों?’’ दिशा ने पूछा. वह गुस्से में थी.

कुछ सोचते हुए मानस ने कहा, ‘‘पता चला है कि मुझ से पहले भी तुम्हारे कई मर्दों से संबंध रहे हैं.’’

पहले तो दिशा सकते में आ गई, लेकिन फिर अपने आप को संभाल लिया और कहा, ‘‘लगता है, मेरे किसी दुश्मन ने तुम्हारे कान भरे हैं. मुझ पर विश्वास करो तुम्हारे अलावा मेरे किसी से संबंध नहीं रहे.’’

मानस ने सोचने के लिए दिशा से कुछ दिन का समय मांगा, लेकिन उस ने समय नहीं दिया. उस पर दबाव बनाने के लिए दिशा ने अपने घर वालों को बताया कि मानस ने बहलाफुसला कर उस से संबंध बना लिए हैं और अब गलत इलजाम लगा कर शादी से मना कर रहा है.

उस के पिता और भाई गुस्से में मानस के घर गए. उस के मातापिता के सामने ही उसे खूब लताड़ा और दिशा की बेहयाई का सबूत मांगा.

मानस के पास कोई सबूत नहीं था. मजबूर हो कर वह दिशा से मंगनी करने के लिए राजी हो गया. 15 दिन बाद की तारीख रखी गई. आखिर वह दिन आ ही गया. मानस उस से मंगनी करने आ रहा था.

एक सहेली ने दिशा की तंद्रा भंग की तो वह वर्तमान में लौट आई. सहेली कह रही थी, ‘‘देखो, मानस आ गया है.’’

दिशा ने खुशी से दरवाजे की तरफ देखा. मानस अकेला था. उस के घर वाले नहीं आए थे. उस के साथ एक ऐसा शख्स था जिसे देखते ही दिशा के होश उड़ गए. वह शख्स था डा. अमरेंदु.

मानस को अकेला देख दिशा के भाई और पापा भी चौंके. उस का स्वागत करने के बाद भाई ने पूछा, ‘‘तुम्हारे घर वाले नहीं आए?’’

‘‘कोई नहीं आएगा.’’ मानस ने कहा.

‘‘क्यों नहीं आएगा?’’

‘‘क्योंकि मैं दिशा से शादी नहीं करना चाहता. मुझे उस से अकेले में बात करनी है? वह सब कुछ समझ जाएगी. खुद ही मुझ से शादी करने से मना कर देगी.’’

भाई और पिता के साथ दिशा भी सकते में आ गई. उस की भाभी उस के पास ही थी. उस की बोलती भी बंद हो गई थी.

दिशा के पिता ने उसे अकेले में बात करने की इजाजत नहीं दी. कहा, ‘‘जो कहना है, सब के सामने कहो.’’

मजबूर हो कर मानस ने लोगों के सामने ही कहा, ‘‘दिशा दुश्चरित्र लड़की है. अब तक कई लड़कों से संबंध बना चुकी है. 2 बार एबौर्शन भी करा चुकी है. इसीलिए मैं उस से शादी नहीं करना चाहता.’’

भाई को गुस्सा आ गया. उस ने मानस को जोरदार थप्पड़ मारा और कहा, ‘‘मेरी बहन पर इल्जाम लगाने की आज तक कभी किसी ने हिम्मत नहीं की. अगर तुम प्रमाण नहीं दोगे तो जेल की हवा खिला दूंगा.’’

‘‘भाईसाहब, आप गुस्सा मत कीजिए अभी सबूत देता हूं. जब मेरे शुभचिंतक ने बताया कि दिशा का चरित्र ठीक नहीं है, तभी से मैं सच्चाई का पता लगाने में जुट गया था. अंतत: उस का सच जान भी लिया.’’

मानस ने बात जारी रखते हुए कहा, ‘‘मेरे साथ जो शख्स हैं, उन का नाम डा. अमरेंदु है. दिशा ने उन के क्लिनिक में 2 बार एबौर्शन कराया था. आप उन से पूछताछ कर सकते हैं.’’

डा. अमरेंदु ने मानस की बात की पुष्टि करते हुए कुछ कागजात दिशा के भाई और पिता को दिए. कागजात में दिशा ने एबौर्शन के समय दस्तखत किए थे.

दिशा की पोल खुल गई तो चेहरा निष्प्राण सा हो गया. उस की समझ में नहीं आ रहा था  कि अब उसे क्या करना चाहिए. भाई और पापा का सिर शर्म से झुक गया था. फ्रैंड्स भी उसे हिकारत की नजरों से देखने लगी थीं.

दिशा अचानक मानस के पास जा कर बोली, ‘‘तुम ने मेरी जिंदगी तबाह कर दी. तुम्हें छोडूंगी नहीं. तुम्हारे जिंदगी भी बर्बाद कर के रख दूंगी. तुम नहीं जानते मैं क्या चीज हूं.’’

‘‘तुम्हारे साथ जो कुछ भी हो रहा है वह सब तुम्हारे लाइफस्टाइल की वजह से हो रहा है. इस में किसी का कोई दोष नहीं है. जब तक तुम अपने आप को नहीं सुधारोगी, ऐसे ही अपमानित होती रहोगी.’’

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पलभर चुप रहने के बाद मानस ने फिर कहा, ‘‘आज की तारीख में तुम इतना बदनाम हो चुकी हो कि तुम से कोई भी शादी करने के लिए तैयार नहीं होगा.’’

वह एक पल रुक कर बोला, ‘‘हां, एक ऐसा शख्स है जो तुम्हें बहुत प्यार करता है. तुम कहोगी तो खुशीखुशी शादी कर लेगा.’’

‘‘कौन?’’ दिशा ने पूछा.

‘‘परिमल…’’ मानस ने कहा, ‘‘गेट पर उस से मिल कर आने के बाद तुम उसे भूल गई थीं, पर वह तुम्हें नहीं भूला है. होटल के गेट पर अब तक इस उम्मीद से खड़ा है कि शायद तुम मुझ से शादी करने का अपना फैसला बदल दो. कहो तो उसे बुला दूं.’’

‘‘तुम उसे कैसे जानते हो?’’ दिशा ने पूछा.

मानस ने बताया कि वह परिमल को कब और कहां मिला था.

कार पार्क कर मानस डा. अमरेंदु के साथ होटल में आ रहा था तो गेट पर परिमल मिल गया था. न जाने वह उसे कैसे जानता था. उस ने पहले अपना परिचय दिया फिर दिशा और अपनी प्रेम कहानी बताई.

उस के बाद कहा, ‘‘तुम्हें दिशा की सच्चाई भविष्य में उस से सावधान रहने के लिए बताई है. अगर उस से सावधान नहीं रहोगे तो विवाह के बाद भी वह तुम्हें धोखा दे सकती है.’’

मानस ने परिमल को अंदर चलने के लिए कहा तो उस ने जाने से मना कर दिया. कहा, ‘‘मैं यहीं पर तुम्हारे लौटने का इंतजार करूंगा. बताना कि तुम से मंगनी कर वह खुश है या नहीं?’’

कुछ सोच कर मानस ने उस से पूछा, ‘‘मान लो दिशा तुम से शादी करने के लिए राजी हो जाए तो करोगे?’’

‘‘जो हो नहीं सकता, उस पर बात करने से क्या फायदा? जानता हूं कि वह कभी भी मुझ से शादी नहीं करेगी.’’ परिमल ने मायूसी से कहा.

मानस ने परिमल की आंखों में देखा तो पाया कि दिशा के प्रति उस की आंखों में प्यार ही प्यार था. उस ने चाह कर भी कुछ नहीं कहा और डा. अमरेंदु के साथ होटल में चला आया.

मानस ने दिशा को सच्चाई से दोचार करा दिया तो उसे भविष्य अंधकारमय लगा. परिमल के सिवाय उसे कोई नजर नहीं आया तो वह उस से बात करने के लिए व्याकुल हो गई.

उस का फोन नंबर उस के पास था ही, झट से फोन लगा दिया. परिमल ने फोन उठाया तो उस ने कहा, ‘‘तुम से कुछ बात करना चाहती हूं. प्लीज होटल में आ जाओ.’’

कुछ देर बाद ही परिमल आ गया और दिशा ने उस का हाथ अपने हाथ में ले कर कहा, ‘‘मुझे माफ कर दो, परिमल. मैं तुम्हारा प्यार समझ नहीं पाई थी, लेकिन अब समझ गई हूं. मैं तुम से शादी करना चाहती हूं. अभी मंगनी कर लो, बाद में जब कहोगे शादी कर लूंगी.’’

कुछ सोचने के बाद परिमल ने कहा, ‘‘यह सच है कि इतना सब कुछ होने के बाद भी मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं. पर तुम आज भी मुझ से बेवफाई कर रही हो. सच नहीं बता रही हो. सच यह नहीं है कि मेरा प्यार तुम समझ गई हो, इसलिए मुझ से शादी करना चाहती हो. सच यह है कि आज की तारीख में तुम इतना बदनाम हो गई हो कि तुम से कोई भी शादी नहीं करना चाहता. मानस ने भी शादी से मना कर दिया है. इसीलिए अब तुम मुझ से शादी कर अपनी इज्जत बचाना चाहती हो.

‘‘तुम से शादी करूंगा तो प्यार की नहीं, समझौते की शादी होगी, जो अधिक दिनों तक नहीं टिकेगी. अत: मुझे माफ कर दो और किसी और को बलि का बकरा बना लो. मैं भी तुम्हें सदैव के लिए भूल कर किसी और से शादी कर लूंगा.’’

परिमल रुका नहीं. दिशा की पकड़ से हाथ छुड़ा कर दरवाजे की तरफ बढ़ गया. वह देखती रह गई. किस अधिकार से रोकती?

कुछ देर बाद मानस और डा. अमरेंदु भी चले गए. दिशा के घर वाले भी चले गए. सहेलियां चली गईं. महफिल खाली हो गई, पर दिशा डबडबाई आंखों से बुत बनी रही.

पति की दहलीज पर प्रेमी का बलिदान

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दक्षिण में एक थाना है गोला. इसी थाने के अंतर्गत एक गांव है बेलपार. 35 वर्षीय शेषनाथ मौर्य अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहता था. उस के परिवार में विधवा मां मीना, पत्नी नीतू, 2 बेटे, 3 भाई और एक बहन थी.

पिता की असामयिक मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी का बोझ शेषनाथ के कंधों पर आ गया था. इस का दूसरे नंबर का भाई गोविंद विदेश में रहता है. भाईबहन की जिम्मेदारी जब शेषनाथ के कंधों पर आई तो वह घबराया नहीं, बल्कि उस ने डट कर मुकाबला किया.

वह कमाने के लिए गांव छोड़ कर दिल्ली चला गया. वहां जो भी कमाई होती थी, वह अपना खर्चा निकाल कर बाकी पैसे घर भेज देता था. घर वह 4-6 महीने में ही जा पाता था. तब भी वह 4-5 दिन घर रुक कर अपनी ड्यूटी पर लौट जाता था.

इसी साल फरवरी के अंतिम सप्ताह में शेषनाथ की रिश्तेदारी में शादी थी. शादी समारोह में शामिल होने के लिए वह 17 फरवरी, 2019 को दिल्ली से घर आया था.

22 फरवरी को वह घर पर ही था. रात 9 बज कर 22 मिनट पर शेषनाथ के मोबाइल पर किसी की काल आई. उस ने कुछ देर बात की. फिर दूसरी तरफ से फोन डिसकनेक्ट हो गया. उस के बाद उसी नंबर से उस के पास कई बार काल आई.

बारबार आ रही काल से शेषनाथ परेशान हो गया. उस वक्त रात के करीब सवा 10 बज चुके थे. तब तक उस की पत्नी नीतू को छोड़ कर घर के सभी लोग सो चुके थे. रसोई के कामों को निपटा कर नीतू कमरे में पहुंची तो पति को पैंट और शर्ट पहनते देख पूछा, ‘‘इतनी रात को तैयार हो कर कहां जा रहे हो?’’

‘‘मेरे दोस्त की कई बार काल आ चुकी है. उसी से मिलने जा रहा हूं. उस से मिल कर थोड़ी देर में लौट आऊंगा. बस यूं गया और यूं आया.’’ कह कर शेषनाथ अपनी मोटरसाइकिल ले कर निकल गया. नीतू फटी आंखों से पति को जाते देखती रह गई.

शेषनाथ को घर से निकले 2 घंटे बीत चुके थे. वह घर नहीं लौटा था. नीतू पति को ले कर परेशान हो रही थी. वह समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे, किस से कहे? क्योंकि पति के मोबाइल पर कई बार काल कर चुकी थी, लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ था.

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पति के लौटने की राह देखतेदेखते नीतू को कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला. जब उस की आंखें खुलीं तो सूरज सिर पर चढ़ आया था. सो कर उठते ही नीतू ने पहले घर में पति को देखा. उसे यकीन था कि उस के सोने के बाद वह घर लौट आए होंगे. लेकिन वह घर के किसी कमरे में नहीं दिखा तो नीतू ने यह बात सास मीना को बताई.

मीना को यह नहीं पता था कि शेषनाथ रात में किसी दोस्त से मिलने निकला था, अभी तक घर नहीं लौटा है. बहू की बात सुन कर मीना देवी भी परेशान हो गईं कि आखिर वह गया तो कहां गया.

नीतू रात से ही उस के मोबाइल पर फोन कर के थक गई थी. हर बार उस का मोबाइल स्विच्ड औफ ही बताता रहा था. मोबाइल का स्विच्ड औफ हो जाना सभी के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था कि आखिर उस ने मोबाइल को बंद क्यों कर रखा है. कहीं ऐसा तो नहीं कि उस के साथ कोई अनहोनी हो गई हो.

मीना देवी ने नातेरिश्तेदारों के यहां फोन करा कर बेटे के बारे में पता लगवाया. उन का सोचना था कि हो सकता है वह रात में किसी रिश्तेदार के घर रुक गया हो. लेकिन वह किसी रिश्तेदार के यहां नहीं गया था. शेषनाथ को ले कर घर वाले परेशान थे. उन के मन में बुरेबुरे खयाल आने लगे थे.

दोपहर बीत जाने के बाद भी जब शेषनाथ घर नहीं आया तो मीना देवी गांव के कुछ लोगों को साथ ले कर गोला थाने पहुंच गईं. उन्होंने एसओ नाजिर हुसैन को बेटे के गायब होने की जानकारी दे दी. एसओ ने शेषनाथ की गुमशुदगी दर्ज कर के मीना देवी को घर भेज दिया. यह बात 23 फरवरी, 2019 की है.

गुमशुदगी दर्ज करने के बाद थाना पुलिस शेषनाथ की तलाश में जुट गई. जैसेतैसे वह रात मीना और नीतू की आंखों में बीती. शेषनाथ को गायब हुए करीब 48 घंटे बीत चुके थे, लेकिन अब तक उस का कहीं पता नहीं चला और न ही वह लौट कर आया. पति को ले कर नीतू और उस के बच्चों का रोरो कर बुरा हुआ जा रहा था. नीतू ये सोचसोच कर परेशान थी कि पता नहीं वह कहां और किस हाल में होंगे.

24 फरवरी, 2019 को थाना गगहा की पुलिस ने रियांव इलाके के मोड़ से एक लावरिस मोटरसाइकिल बरामद की. उस का हैंडल लौक था. गांव के चौकीदार भूषण ने लावारिस मोटरसाइकिल के बारे में थाना गगहा में सूचना दी थी. पुलिस ने बताए गए स्थान पर जा कर मोटरसाइकिल बरामद कर ली.

तलाशी में मोटरसाइकिल की डिक्की से बाइक के रजिस्ट्रेशन के कागज मिले. उन कागजों के आधार पर पता चला कि बाइक शेषनाथ मौर्या, निवासी बेलपार, गोला गोरखपुर की है.

एक दिन पहले ही गोला थाने से शेषनाथ के गुम होने की सूचना जिले के सभी 26 थानों को दी गई थी. गगहा थाने को भी इस की सूचना मिल गई थी. एसओ गगहा ने फौरन यह सूचना गोला थाने के एसओ नाजिर हुसैन को दे दी. एसओ नाजिर हुसैन ने बाइक थाना गगहा से अपने यहां मंगा ली.

25 फरवरी को उन्होंने मीना को थाने बुलवा कर बरामद की गई बाइक दिखाई तो मीना ने पहचान कर कहा कि यह बाइक उस के बेटे शेषनाथ की है.

जांच में जुटे नाजिर हुसैन की समझ में यह नहीं आ रहा था कि शेषनाथ की मोटरसाइकिल गोला थाने से करीब 50 किलोमीटर दूर गगहा इलाके तक कैसे पहुंची? उस के रहस्यमय तरीके से गायब होने के पीछे कोई राज तो जरूर था.

28 फरवरी को इसी सिलसिले में वह शेषनाथ के घर बेलपार पहुंचे. उन्होंने शेषनाथ की मां मीना देवी, पत्नी नीतू और भाई मोनू से पूछताछ की. पूछताछ में उन्हें शेषनाथ की किसी से दुश्मनी होने की कोई जानकारी नहीं मिली.

पूछताछ के बाद एसओ थाने लौट आए. शेषनाथ के बारे में और जरूरी जानकारी एकत्र करने के लिए उन्होंने मुखबिर लगा दिए. इस के बाद उन्होंने शेषनाथ के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पता चला कि 22 फरवरी, 2019 की रात 10 बज कर 14 मिनट पर शेषनाथ के मोबाइल पर आखिरी काल आई थी.

उस के कुछ समय बाद ही उस का फोन बंद हो गया था. जिस नंबर से काल आई थी, वह नंबर किसी रामसरन मौर्या, निवासी बड़हलगंज गोरखपुर का था. उस रात उस फोन नंबर से 9 बज कर 22 मिनट से 10 बज कर 14 मिनट के बीच शेषनाथ के मोबाइल से कई बार काल आई थी.

पुलिस ने रामसरन मौर्या के बारे में शेषनाथ के घर वालों से पूछा तो उन्होंने बताया कि वे लोग उसे नहीं जानते. धीरेधीरे 10 दिन और बीत गए. शेषनाथ के बारे में कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस यह सोचसोच कर परेशान थी कि आखिर वह गया तो कहां गया.

11 मार्च, 2019 को मुखबिर ने पुलिस को एक चौंका देने वाली सूचना दी. मुखबिर ने बताया कि गांव की ही संजू मौर्या से शेषनाथ का कई सालों से चक्कर चल रहा है. 5 साल पहले संजू की शादी बड़हलगंज में हो गई थी. शादी के बाद भी संजू और शेषनाथ के बीच मधुर संबंध बने रहे. इस बात की पूरी संभावना थी कि उस के ये संबंध उस के लिए मुसीबत बन गए हों.

मुखबिर की सूचना में पुलिस को दम दिख रहा था. एसओ नाजिर हुसैन ने शेषनाथ मौर्या की निजी जिंदगी की डायरी खंगाली. उस की जिंदगी की डायरी के पन्ने में संजू की मोहब्बत भरी पड़ी थी. शेषनाथ और संजू के बीच करीब 10 सालों से प्रेम संबंध थे.

एसओ पूछताछ के लिए दोबारा शेषनाथ के घर पहुंचे. उन्होंने शेषनाथ की मां मीना देवी से संजू और शेषनाथ के बीच रहे संबंधों के बारे में पूछा तो वह अवाक रह गई. यह सुन कर मीना देवी ने आशंका जाहिर की कि बेटे के लापता होने में संजू का हाथ हो सकता है. मीना देवी ने बताया कि संजू की ससुराल बड़हलगंज, गोरखपुर में है.

यह सुन कर एसओ नाजिर हुसैन का माथा ठनका. लावारिस हालत में शेषनाथ की मोटरसाइकिल गगहा थाने के रियांव के पास से बरामद की थी. बड़हलगज से रियांव बेहद करीब था. इस का मतलब यह था कि शेषनाथ के गायब होने में संजू के साथसाथ उस के ससुराल वाले भी शामिल हो सकते थे.

उस के ससुराल वाले शक के दायरे में आए तो नाजिर हुसैन ने बिखरी कडि़यों को जोड़ना शुरू किया. फिर क्या था, कडि़यां खुदबखुद आपस में जुड़ने लगीं. जांचपड़ताल से संजू शक के दायरे में आ गई थी.

13 मार्च, 2019 को शक के आधार पर पुलिस ने संजू की ससुराल जगदीशपुर सुगरौली पहुंच कर दबिश दी. संयोग से संजू और उस का पति रामसरन मौर्या घर पर ही मिल गए. दरवाजे पर पुलिस देख कर रामसरन मौर्या सकपका गया. उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं.

एसओ हुसैन अपनी टीम को बाहर पहरे पर खड़ा कर के अकेले कमरे में गए. उधर रामसरन के दरवाजे पर बड़ी तादाद में पुलिस खड़ी देख गांव वाले जुटने लगे थे. वे नहीं समझ पाए कि रामसरन के घर में ऐसा क्या हो गया कि सुबहसुबह पुलिस आ गई. खैर, एसओ हुसैन ने रामसरन से संजू के बारे में पूछा तो उस ने संजू को बुला कर थानेदार के सामने खड़ा कर दिया. संजू रसोईघर में खाना पका रही थी.

पुलिस को सामने देख कर वह घबरा गई. उस के चहरे से रंग उड़ गया. यह देख एसओ नाजिर हुसैन समझ गए कि दाल में कुछ काला जरूर है. उन्होंने हवा में तीर चलाते हुए संजू से पूछा, ‘‘शेषनाथ कहां है?’’

शेषनाथ का नाम सुनते ही संजू एकदम से कांप गई, ‘‘कौन शेषनाथ…मैं किसी शेषनाथ को नहीं जानती.’’ कह कर संजू रसोई की ओर जाने लगी.

‘‘मैं ने कब कहा कि तुम शेषनाथ को जानती हो.’’ थानेदार नाजिर हुसैन ने पैंतरा बदला, ‘‘मैं ने तो यह पूछा कि शेषनाथ कहां है?’’

‘‘कहा न, मैं शेषनाथ को नहीं जानती हूं.’’

‘‘ठीक है, जब तुम नहीं जानती हो तो उस का नाम सुन कर तुम्हारे चेहरे पर इतना पसीना क्यों आ गया?’’ संजू को घूरते हुए एसओ हुसैन बोले, ‘‘देखो संजू, तुम्हारा खेल अब खत्म हो चुका है. सीधेसीधे बता दो कि तुम लोगों ने शेषनाथ के साथ क्या किया है. मैं जानता हूं कि इस खेल में तुम अकेली नहीं हो, तुम्हारे साथ कोई और भी है. सीधेसीधे सच्चाई बता दो, नहीं तो हमारे पास सच उगलवाने के और भी तरीके हैं.’’

एसओ नाजिर हुसैन की कड़क आवाज सुन कर संजू बुरी तरह डर गई और फफकफफक कर रोने लगी, ‘‘साहब, मुझे बचा लीजिए.’’ रोती हुई संजू एसओ के पैरों में गिर गई. वह बोली, ‘‘शेषनाथ को मैं ने नहीं, मेरे पति और मेरे जेठ ने मारा है, साहब.’’

‘‘लाश कहां है?’’ एसओ ने पूछा.

‘‘मुझे नहीं पता कि उन्होंने लाश का क्या किया.’’ संजू गिड़गिड़ाती हुई बोली.

इतना सुन कर रामसरन ने वहां से भागने की कोशिश की तो एसओ साहब ने उसे धर दबोचा. फिर क्या था, रामसरन ने भी कानून के सामने कबूल किया कि उस ने और उस के भाई विजय ने घर की इज्जत के साथ खेल रहे शेषनाथ को सदा के लिए रास्ते से हटा दिया. उस की लाश उन लोगों ने गांव के बाहर रामकृष्ण तिवारी के आलू के खेत में दफना दी है.

17 दिनों से रहस्य बनी शेषनाथ मौर्या की गुमशुदगी का राज खुल गया था. पुलिस रामसरन और उस की पत्नी संजू को हिरासत में ले कर गांव के बाहर रामकृष्ण तिवारी के खेत में पहुंची.

इधर एसओ नाजिर हुसैन ने यह जानकारी एसएसपी डा. सुनील गुप्ता, सीओ गोला सतीशचंद्र शुक्ला, एसपी (सिटी) विनय कुमार सिंह, एसपी (साउथ) विपुल कुमार श्रीवास्तव और एसडीएम गोला को दे दी. सूचना पा कर थोड़ी देर बाद सभी अधिकारी और मीडियाकर्मी मौके पर पहुंच गए.

एसडीएम की निगरानी में रामसरन तथा संजू की निशानदेही पर उस जगह की खुदाई की गई, जहां शेषनाथ की लाश दफनाई गई थी. 4 फीट गहरी खुदाई करने पर शेषनाथ की सड़ी हुई लाश बरामद हो गई.

लाश के ऊपर काफी मात्रा में नमक डाली गई थी ताकि लाश ही नहीं, हड्डी तक गल जाएं और किसी को कोई सबूत न मिले. लाश के पास से उस की मोटरसाइकिल की चाबी भी मिल गई. हत्यारों ने लाश के साथ चाबी भी डाल दी थी.

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लाश बरामद होने के बाद उस की शिनाख्त के लिए पुलिस ने मीना देवी को बुलवा लिया. बेटे की मौत की सूचना मिलते ही उस के घर में रोनापीटना शुरू हो गया. पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए गोरखपुर मैडिकल कालेज भिजवा दी.

कागजी काररवाई के बाद पुलिस रामसरन मौर्या और उस की पत्नी संजू को गिरफ्तार कर थाना गोला ले आई. तब तक मीना देवी भी थाने पहुंच गई थी. पुलिस ने लाश के कपड़े मीना देवी को दिखाए तो वह पहचान गई कि कपड़े उस के बेटे शेषनाथ के ही हैं.

बहरहाल, पुलिस ने दोनों से पूछताछ की तो रामसरन मौर्या ने इज्जत की खातिर हत्या की बात कबूल कर ली. संजू ने पुलिस को बताया कि शेषनाथ और उस के बीच करीब 11 सालों से प्रेम संबंध थे. शादी के बाद भी वे एकदूसरे से भावनात्मक रूप से अलग नहीं रह सके.

पुलिसिया पूछताछ और दोनों आरोपियों के बयान के आधार पर सुहाग की दहलीज पर प्यार के दर्दनाक अंत की कहानी इस प्रकार सामने आई—

35 वर्षीय शेषनाथ मौर्या मूलरूप से गोरखपुर के गोला के बेलपार का रहने वाला था. पिता की असामयिक मौत के बाद उस ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली थी. ईमानदार, कर्मठी और मिलनसार शेषनाथ के व्यवहार से घरपरिवार ही नहीं बल्कि गांव वाले भी कायल थे. उस पर सब से ज्यादा कोई मेहरबान था तो वह थी पड़ोस में रहने वाली संजू.

संजू के पिता रामू मौर्या किसान थे. उन के पास खेती की जो जमीन थी, उसी से घरगृहस्थी चलती थी. 3 भाईबहनों में संजू सब से बड़ी थी.

साधारण नैननक्श वाली संजू देखने में खूबसूरत तो नहीं थी पर थी बहुत चंचल. उस के कई दीवाने थे पर वह किसी को लिफ्ट नहीं देती थी. उस ने अपने दिल के कागज पर मोहब्बत की स्याही से शेषनाथ का नाम लिख लिया था. शेषनाथ को वह बहुत चाहती थी.

संजू ने कसम खाई थी कि शेषनाथ ही उस के जीवन में सब कुछ होगा. संजू की तरह शेषनाथ भी उसे प्यार करता था. यह बात 11 साल पहले की है. तब दोनों की उम्र 22-23 साल रही होगी. जैसेजैसे इन की उम्र बढ़ती गई, इन का प्यार भी जवां होता गया.

जवां होते प्रेम के साथ दोनों के प्रेम संबंध ज्यादा दिनों तक परदे के पीछे छिपे नहीं रह सके. फिजा में घुली हवा के साथ इन का प्रेम संबंध गांव में फैल गया था. बात जब संजू के पिता रामू तक पहुंची तो घर में भूचाल आगया. वह बेटी की करतूतों से शर्मसार हो गया था.

वह जब भी घर से बाहर निकलता, गांव में संजू और शेषनाथ के प्रेम के चर्चे होते थे. यह सुन कर रामू का खून खौल उठता था. इस के बाद उस ने एक कठोर फैसला लिया. संजू का घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी और उस के लिए वर तलाश करने लगा. थोड़ी भागदौड़ करने पर बड़हलगंज के जगदीशपुर सुगरौली के रामसरन मौर्या के साथ संजू का विवाह कर दिया.

संजू ने भले ही सामाजिक दबाव में आ कर अपने गले में रामसरन मौर्या के नाम की वरमाला डाल ली थी लेकिन वह प्यार तो शेषनाथ से ही करती थी. भले ही उस ने तन पति रामसरन को सौंप दिया था, लेकिन उस के दिल पर उस के प्रेमी शेषनाथ की ही हुकूमत थी.

इधर संजू के बिना शेषनाथ को कुछ भी अच्छा नहीं लगता था. उस की यादों में शेषनाथ घुटघुट कर जी रहा था. बेटे की हालत देख कर मीना देवी से रहा नहीं जा रहा था. उस ने सोचा कि उस की शादी कर दी जाए तो वह संजू को भुला देगा. अंतत: मीना देवी ने बेटे की शादी नीतू के संग करा दी.

शादी के बाद शेषनाथ कमाने दिल्ली चला गया. दिन ऐसे ही गुजरते गए. इस बीच शेषनाथ 2 बेटों का पिता बन गया था. उधर संजू भी एक बेटे की मां बन गई थी.

दोनों की शादी को करीब 5 साल बीत चुके थे. लोग यही समझते रहे कि इन सालों में संजू और शेषनाथ एकदूसरे को भूल चुके होंगे, क्योंकि शेषनाथ दिल्ली रहता था तो संजू अपनी ससुराल में. दोनों मिल नहीं पा रहे थे लेकिन इन की ये दूरियां मोबाइल फोन ने कम कर दी थीं.

संजू और शेषनाथ दिन में एक बार जरूर बात कर लिया करते थे. बिना बात किए दोनों को चैन नहीं मिलता था. शेषनाथ ने संजू को यकीन दिलाया था कि वह थोड़ा और इंतजार कर ले, आने वाले दिनों में वह उसे अपने पास ले आएगा.

पति की पीठ के पीछे संजू इतना बड़ा गुल खिला रही है, यह बात रामसरन नहीं जानता था. लेकिन जब उस के सामने पत्नी की सच्चाई की कलई खुली तो रामसरन के पैरों तले से जमीन खिसक गई.

हुआ यूं था कि एक दिन ड्यूटी से थकामांदा रामसरन शाम घर लौटा तो रात में जल्दी खाना खा कर अपने कमरे में जा कर सो गया. संजू भी बिस्तर पर लेट गई. उस समय रात के करीब 10 बज रहे थे, तभी संजू के मोबाइल की घंटी बजी. फोन शेषनाथ का था. संजू काल रिसीव कर के धीमी आवाज में बातें करने लगी. पत्नी को फोन पर बातें करते सुन रामसरन की नींद टूट गई और वह उठ कर बैठ गया. पति को अचानक उठ कर बैठा देख संजू एकदम से सकपका गई.

वह इतना घबरा गई थी कि उस के हाथ से फोन नीचे गिरतेगिरते बचा. पत्नी की हालत देख कर रामसरन समझ नहीं पाया कि उसे देख कर संजू इतना घबरा क्यों गई. उस ने पूछा भी कि क्या बात है और इतनी रात गए किस से बातें कर रही थी? लेकिन उस ने कोई जवाब नहीं दिया. वह सो गई तो रामसरन भी सो गया.

अगली सुबह रामसरन ने उठते ही पत्नी से रात की फोन वाली बात पूछी तो वह टालमटोल करने लगी. उस की टालमटोल से उसे संदेह हुआ तो उस ने पत्नी का मोबाइल फोन चैक किया. फोन के काल रिकौर्डर में जब पत्नी को किसी पराए मर्द से मीठीमीठी बातें करते सुना तो रामसरन का खून खौल उठा. उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि उस के पीछे पत्नी ऐसा गुल खिला रही थी.

रामसरन पत्नी को कमरे में ले गया. उस ने संजू से सारी बातें सचसच बताने को कहा तो संजू ने भी डर से अपने और शेषनाथ के बीच सालों से चले आ रहे मधुर संबंधों की बात बता दी. उस ने यह भी बताया कि उस के घर वालों ने उस की मरजी के खिलाफ उस की शादी की थी.

सारी सच्चाई सुनने के बाद रामसरन ने पत्नी से कह दिया कि वह अपने प्रेमी के साथ जा सकती है, वह अब उसे अपने साथ नहीं रखेगा.

पति की बात सुन संजू की आंखों के सामने अंधेरा छा गया. वह सोचने लगी कि 3 साल के बच्चे को ले कर वह कहां जाएगी. लोग उसे पति को छोड़ने का कारण पूछेंगे तो वह उन्हें क्या जवाब देगी.

संजू पति के पैरों में गिर गई. उस ने अपनी गलती के लिए माफी मांगी और कहा कि उस से बहुत बड़ी गलती हो गई. अब दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगी.

रामसरन ने उसे एक शर्त पर माफ करने को कहा. शर्त यह थी कि वह शेषनाथ को फोन कर के यहां बुलाएगी. संजू ने पति से वादा किया कि वह वही करेगी, जो वह चाहेगा. इत्तफाक से उस समय शेषनाथ दिल्ली से बेलपार एक शादी में शरीक होने आया था.

22 फरवरी, 2019 की रात 9 बज कर 22 मिनट पर संजू ने शेषनाथ को फोन कर के मिलने के लिए अपनी ससुराल जगदीशपुर सुगरौली, बड़हलगंज बुलाया. उस ने कहा कि पति कहीं बाहर गया है, वह घर में अकेली है. मौका है आ जाओ.

शेषनाथ भी संजू से मिलने के लिए कब से बेचैन था. सोचा इसी बहाने वह उस से मिल भी लेगा और रात भी सुहानी हो जाएगी.

उस के बाद संजू ने उसे कई बार फोन किया. शेषनाथ ने उस से कहा कि वह आ रहा है. उस के बाद शेषनाथ पत्नी नीतू से दोस्त के पास जाने की बात कह कर मोटरसाइकिल ले कर जगदीशपुर सुगरौली रवाना हो गया.

एक घंटे बाद वह संजू की ससुराल पहुंच गया. संजू को देख कर शेषनाथ का चेहरा खुशियों से खिल उठा. संजू ने भी मुसकरा कर उस का स्वागत किया. कमरे में बिस्तर पर संजू का 3 साल का बेटा सो रहा था. शेषनाथ ने एक नजर कमरे में चारों ओर दौड़ाई, फिर उस ने संजू को अपनी बांहों में भर लिया और प्यार भरी बातें करने लगा.

शेषनाथ जैसे ही मस्ती के आलम डूबा कि रामसरन ने पीछे से उस के सिर पर डंडे से वार कर दिया. वार इतना जोरदार था कि वह सिर पकड़ कर नीचे जा गिरा. उसे अपने साथ धोखा होने का अहसास हुआ. इधर रामसरन ने पत्नी को दूसरे कमरे में ले जा कर बंद कर दिया.

रामसरन का साथ दे रहे उस के बड़े भाई विजय ने शेषनाथ को संभाला ताकि वह भाग न पाए. कमरे में संजू को बंद करने के बाद रामसरन अपने कमरे में आया. फिर उस ने रस्सी से शेषनाथ का गला, तब तक कसे रखा जब तक उस की मौत न हो गई.

जब रामसरन और विजय को यकीन हो गया कि उस की मौत हो चुकी है तो दोनों भाई लाश ठिकाने लगाने के लिए उसे कंधे पर लाद कर गांव के बाहर रामकृष्ण तिवारी के खेत में ले गए.

रामसरन और विजय दोनों ने मिल कर करीब 4 फीट गहरा गड्ढा खोद कर उस में शेषनाथ की लाश डाल दी. उस के साथ उस की बाइक की चाबी भी गड्ढे में डाल दी. उस के ऊपर बड़ी मात्रा में नमक भी डाल दिया, ताकि लाश मिट्टी में गल जाए. इस से पहले उन्होंने उस की मोटरसाइकिल ले जा कर खड़ी कर दी थी. ये सब करतेकरते पूरी रात बीत गई थी.

अगले दिन विजय गांव से फरार हो गया. संजू और रामसरन ने चुप्पी साध ली. लेकिन मोटरसाइकिल ने इन की योजना पर पानी फेर दिया.

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पुलिस ने रामसरन मौर्या और संजू से पूछताछ करने के बाद उन्हें भादंवि की धारा 302, 365, 201, 120बी के तहत गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक संजू और रामसरन जेल में बंद थे. विजय फरार था.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

कहानी सौजन्य: मनोहर कहानी

इस मौत के तांडव का है इलाज?

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में नन्हेनन्हे बच्चे लगातार मौत के मुंह में समाते जा रहे हैं, मांबाप के विलाप से धरती कांप रही है, हर तरफ दर्द, चीखें, आंसू, छटपटाहट, बदहवासी का आलम है और पूरा तंत्र जैसे लकवाग्रस्त है. किसी के बस में नहीं कि मासूम बच्चों को काल के गाल में जाने से रोक ले.

एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या 150 हो गई है, वहीं अस्पतालों में भरती होने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. लेख लिखे जाने तक 414 बच्चे अस्पतालों में भरती हैं.

उत्तर प्रदेश और बिहार की खस्ताहाली तो बयान करने लायक ही नहीं है, मगर इस दुर्दशा से उबरने की कोई राजनीतिक इच्छा भी दिखती नहीं है. न राज्य स्तर पर और न ही केंद्रीय स्तर पर. बिहार का स्वास्थ्य विभाग तो खुद आईसीयू में है, आखिरी सांसें ले रहा है, वह क्या मरते हुए बच्चों को जीवनदान देगा. राज्य के अस्पतालों में न डाक्टर हैं, न दवाएं, न इंजैक्शन, न मरीजों के लिए पर्याप्त बैड.

वर्ष 2012 में इसी मुजफ्फरपुर में इंसेफेलाइटिस के चलते 120 बच्चों ने अपनी जानें गंवाई थीं. वर्ष 2013 में 39 बच्चे मर गए. 2014 में यहां 90 बच्चे खत्म हो गए. 2015 में 11 और 2016 में 4 बच्चे मारे गए. वर्ष 2017 में 11 बच्चे इंसेफेलाइटिस से मरे तो 2018 में 7 बच्चों की जानें गईं. मगर इस बार तो आंकड़ा बेहद डरावना है. यह सिर्फ मुजफ्फरपुर के आंकड़े हैं. अन्य जिलों में भी मौतों का आंकड़ा भयावह है. वैशाली, मोतीहारी, गया, चंपारण और बेगुसराय में भी लगातार मौतें हुई हैं. इस वक्त भी ये जिले इस बीमारी की चपेट में हैं.

गौरतलब है कि बिहार में कोई 25 साल पहले इंसेफेलाइटिस की बीमारी ने दस्तक दी थी, मगर इन 25 वर्षों में इस बीमारी से बचाव को ले कर न तो कोई विशेष शोध हुआ, न कोई सही इलाज ढूंढ़ा जा सका और न ही बीमारी से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता फैलाई गई.

100 बच्चों की मौत के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक नींद से जाग कर श्रीकृष्ण मैडिकल कालेज व अस्पताल का दौरा करने पहुंच जाते हैं और वहां खड़ेखड़े ऐलान कर देते हैं कि एक साल के अंदर एसकेएमसीएच में 2,500 बैड का वार्ड और मरीजों के परिजनों के लिए धर्मशाला बनाई जाएगी.

वे कहते हैं कि यहां 2,500 बैड का सुपरस्पैशलिटी अस्पताल बनेगा, जहां मरीजों को सारी सुविधाएं मिलेंगी. दरअसल, नीतीश कुमार को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह सपने बेचने का शौक चर्राया हुआ है. विधानसभा चुनाव से पहले अपनी इमेज चमकाने की लोलुपता में नीतीश कुमार ने सोचा कि उन का यह ऐलान अगले दिन के अखबारों की सुर्खियां बनेगा और इस की ओट में बच्चों की मौत का हाहाकार कुछ कम सुनाई देगा. 2,500 बैड का अस्पताल बनाने का बड़ा सपना तानने वाले नीतीश कुमार ने यह नहीं बताया कि इस के लिए पैसा कहां से आएगा.

पूरे बिहार के लिए उन का स्वास्थ्य बजट मात्र साढ़े 7 करोड़ रुपए का है, तो क्या पूरे बिहार के बजट को मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में झोंक देंगे? नीतीश कुमार 14 वर्षों से बिहार के मुख्यमंत्री हैं. हर साल गरमी और बरसात के मौसम में बिहार इसी आपदा से दोचार होता है, मगर नीतीश कुमार राज्य के स्वास्थ्य बजट को लगातार घटाते जा रहे हैं.

2016-17 की तुलना में 2017-18 का हैल्थ बजट 1,000 करोड़ रुपया कम हो गया था. जब बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं, बीमारों, हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है तो हैल्थ बजट को 1,000 करोड़ रुपए कम क्यों किया गया, इस का जवाब नीतीश कुमार नहीं देते हैं.

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वैंटिलेटर के अभाव में थमती सांसें

सरकारी अस्पतालों में वैंटिलेटर की कमी नई बात नहीं है. वैंटिलेटर के अभाव में अकसर मरीजों की सांसें थमती रहती हैं. निजी अस्पतालों के खिलाफ  तो तीमारदार हंगामा भी कर लेते हैं पर सरकारी अस्पतालों में मरीज की मौत के बाद अस्पताल पल्ला झाड़ लेते हैं.

यह आज की समस्या नहीं है. लखनऊ मैडिकल कालेज को 3 साल पहले वैंटिलेटर खरीदने के लिए कोर्ट ने आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने पल्मोनरी क्रिटिकल केयर के लिए 60 बैड के लिए 40 वैंटिलेटर की अतिरिक्तयूनिट का आदेश जारी किया. दिसंबर 2018 में 9 डाक्टर, 24 रैजिडैंट, 206 नर्स, और दूसरे पैरामैडिकल स्टाफ  के पद मंजूर किए गए.

उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन से फरवरी 2019 को 40 के बजाय 4 वैंटिलेटरों का उद्घाटन कराया गया. वैंटिलेटर चलाने के लिए मैडिकल कालेज ने भरती पूरी नहीं की. केवल कुछ लोगों की ही भरती और संविदा पर रखा गया है, जिस की वजह से बहुत सारे वैंटिलेटर खाली रखे हुए हैं.

मैडिकल कालेज में 205 वैंटिलेटर हैं. मरीजों की संख्या को देखते हुए ये काफी कम हैं. कुछ मरीजों को एंबुबैग के सहारे सांस देने का काम भी होता है. इस वजह से अकसर ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं.

कोई देखने सुनने वाला नहीं

देश की 70 फीसदी गरीब जनता के पास इतना पैसा नहीं है कि वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवा सके. गरीब आदमी जो दिनभर मेहनतमजदूरी कर के, पसीना बहा कर, भीख मांग कर दोवक्तकी रोटी का जुगाड़ ठीक से नहीं कर पाता, वह बाजार से महंगी दवाएं कैसे खरीदेगा? प्राइवेट में जा कर जांचें व एक्सरे कैसे करवाएगा? अपनी जान बचाने के लिए खून कहां से खरीदेगा?

सरकारी डाक्टर महंगीमहंगी दवाएं लिख रहे हैं, गरीब अपना घरबार बेच कर महंगीमहंगी दवाएं, इंजैक्शन, टौनिक खरीद रहा है. ढेरों पैसा दे कर बाहर डाक्टर की बताई जगहों से जांचें करवा रहा है. जबकि ये सब सरकारी अस्पतालों में मुफ्त होता है मगर सब कहने भर को हैं.

हमारे पैसे से सरकार अस्पताल बनवाती है, सरकारी डाक्टर को हमारे पैसे से तनख्वाह मिलती है और उस के बाद ये हमें ही लूटने में लगे हुए हैं, क्यों? क्योंकि इन के ऊपर निकम्मी सरकारों की कोई निगरानी नहीं है, क्योंकि लूट के इस बड़े गोरखधंधे में बड़ा हिस्सा सरकार में बैठे मंत्रियों, अधिकारियों की जेबों में जा रहा है. चोरचोर मौसेरे भाई वाली हालत है. जिन्हें भ्रष्टाचार पर नकेल कसनी है वे खुद इन के गुनाह में शामिल हैं. इसीलिए सरकारी अस्पतालों में गरीब आदमी को पूरी तरह से मुफ्त इलाज नहीं मिलता. मरीजों को दवा से ले कर जांच तक के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है. सारा खेल दवा कंपनियों, डीलर्स, रिटेलर्स, मैडिकल रिप्रेजैंटेटिव्स, स्वास्थ्य मंत्रालय, डाक्टरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से जारी है.

सरकारी डाक्टर वेतन में मोटीमोटी गड्डियां पा रहे हैं, फिर भी सरकारी अस्पताल में गरीब मरीजों को देखने की जगह अपना निजी क्लिनिक और अस्पताल खोल कर बैठे हैं. राज्यों के स्वास्थ्य विभाग सबकुछ जानते हैं, मगर आंखें बंद किए है.

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10 टिप्स: घर के छुपे कोने की ऐसे करें सफाई

घर की सफाई सिर्फ दिखावे और खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि आपके परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है. रसोई विशेषज्ञ कहते हैं कि घर के कुछ ऐसे कोने होते हैं, जिनपर आपका ध्यान नहीं जाता है. लेकिन ये कोने सबसे ज्यादा गंदे होते हैं. जैसे किचन कैबिनेट, रैक और एग्जौस्ट फैन की तरफ ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है.

आइए हम बताते हैं आपके घर का वो कौन सा कोना है, जहां आप सफाई नहीं कर पाती है.

  1. किचन और बाथरूम के एग्जौस्ट फैन के ब्लेड के साथ ही इसकी खिड़की में भी धूल और तेल की परत चढ़ी होती है. इसे नियमित साफ करना बहुत जरूरी है.
  2. किचन कैबिनेट और रैक के ऊपरी हिस्से धूल और धुएं के कारण बहुत गंदे हो जाते हैं. इसके ऊपर भाप और धूल से गंदगी जम जाती है, जिसे साफ करने में बहुत मुश्किल आती है.
  3. गीजर के ऊपर कभी किसी का ध्यान नहीं जाता, जहां सालों से गंदगी की परत जमा होती रहती है.
  4. स्विच बोर्ड को हर रोज साफ करना चाहिए क्योंकि यहां कीटाणु आसानी से पनपते हैं.
  5. पेंटिंग हटा के उसके पीछे दिवार को नियमित साफ करते रहना चाहिए.
  6. ट्यूबलाइट के ऊपरी हिस्से पर बहुत आसानी से धूल जम जाती है, जिसे साफ करते रहना चाहिए.
  7. एसी के साथ ही वोल्टेज रेग्युलेटर के ऊपरी हिस्से को भी साफ करना चाहिए.
  8. आपके चमकते सिंक भी गंदगी छिपाए रहते हैं. उसके निचले हिस्से की सफाई भी नियमित किया करें.
  9. सोफे और दीवार की बीच की जगह में गंदगी जमा होती है. जगह कम होने से वहां की सफाई भी रोज नहीं हो पाती है. सोफा रोज हटाकर सफाई करना मुश्क‍िल होता है. ऐसे में कुछ दिन बाद-बाद इन्हें साफ करना चाहिए.
  10. घर की ऊंची खिड़कियों पर रोजाना सफाई कर पाना मुश्कि‍ल होता है, लेकिन यहां भी हर कुछ दिन में सफाई होती रहनी चाहिए.
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