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साबूदाना कैसे आया भारत में, जानें यहां

साबूदाना काफी पौष्टीक आहार है. आमतौर पर इसका इस्तेमाल मीठे व्यंजनों के लिए किया जाता है. साबूदाना सैगो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है. वैसे साबूदाना का पौधा पूर्वी अफ्रीका में पाया जाता है. उबलने के बाद यह चिपचिपा, गुदगुदा और लहसदार हो जाता है.

आपको बता दें, साबूदाने का उत्पादन सबसे पहले भारत में तमिलनाडु के सेलम में हुआ था. लगभग 1943-44 में भारत में इसका उत्पादन एक छोटे रूप में हुआ. इसमें पहले टैपियाका की जड़ों को मसल कर उसके दूध को छानकर उसे जमने देते थे. फिर उसकी छोटी छोटी गोलियां बनाकर सेंक लेते थे. इस तरह साबूदाना तैयार किया जाता था.

क्या आप जानते हैं, टैपियाका एक जड़ का नाम है. साबुदाना के उत्पादन के लिए इसी जड़ का इस्तेमाल किया जाता है. इसे टैपियाका कहते हैं..

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घर पर बनाएं ढोकला

ढ़ोकला सेहतमंद के साथ साथ स्वादिष्ट व्यंजन भी है. इसे बनाना बहुत भी  आसान है. तो चलिए जानते हैं,  ढ़ोकला बनाने की रेसिपी.

सामग्री

1 चम्मच हरी मिर्च का पेस्ट

1 चम्मच चीनी

½ चम्मच धनिया पाउडर

½ खाने वाल सोडा

2 कटोरी चावल

½ कटोरी चने की दाल

½ कटोरी उड़द दाल

¼ तुवर दाल

2 टेबल स्पून दही

अदरक

लहसुन

नमक

छौंक के लिए

तिल्ली एक चम्मच

½ चम्मच राई

1 टेबल स्पून तेल

8 कड़ी पत्ता

4 लौंग

दालचीनी

2 साबुत लाल मिर्च

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बनाने की विधि

चावल और सारे दाल को 7-8 घंटे के लिए भिगो दें. इसके बाद इन्हें दही डालकर पीस लें.

पीसने के बाद 4-5 घंटे के लिए छोड़ दें ताकि उस मिश्रण मे खमीर उठ जाए.

अब इसमें नमक, सोडा, शक्कर डालकर 35 मिनट तक बेक करें.

ठंडा होने पर इसे टुकड़े में काटें. लौंग और दालचीनी को तवे पर हल्का भूनकर पीस लें.

गरम तेल में बघार की सारी सामग्री डालकर बघार लगाएं. हरे धनिए की चटनी के साथ परोसें.

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अंधविश्वास में जिंदा हमारा देश !

हमारे देश की पहचान दुनिया में एक शिक्षित प्रगतिशील देश की नहीं बल्कि एक पिछड़े हुए देश की है जहां पग पग पर अशिक्षा है, अंधविश्वास है. शायद  यही कारण है कि छोटी-छोटी बातों पर यहां टोना टोटका शुरू हो जाता है ऐसे में,  अब जब आषाढ़ सावन लग चुका है तब जहां एक तरफ भगवान शिव की अराधना मे  लोग अपनी जीभ मंदिरों में चढ़ा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ वर्षा ऋतु के लिए मेढक की शादी भी करा रहे हैं. यह सब देखकर आश्चर्य होता है कि हमारे देश में आज भी कैसा अंधविश्वास कूट-कूट कर भरा हुआ है यह तब अतिवाद पर पहुंच जाता है जब मंत्री और आईएएस,आईपीएस अंधविश्वास की शरण में दिखाई देते हैं. छत्तीसगढ़ में ऐसे ही कुछ दृश्य इन दिनों दिखाई दे रहे हैं प्रस्तुत है आपके लिए एक विशेष रिपोर्ट-

शिव भक्ति ऐसी की जीभ काट चढ़ा दी

सावन का महीना शुरू हो चूका है. ऐसे में शिव मंदिर में भक्तों की कतार लगी दिखाई देती  है. लेकिन ऐसा भी एक भक्त है जिसकी भक्ति अंधविश्वास और रूढ़िवादिता की पराकाष्ठा पर पहुंच गई ईश्वर को खुश करने के लिए उसने अपनी जीभ काटकर मंदिर में चढ़ा दी अब मजे की बात यह है कि गांव भर में पूजा-पाठ का दौर जारी है.  भगवन शिव को अपनी जीभ काटकर अर्पित कर देने की यह घटना  जिला कोरबा के करतला-सेन्द्रीपाली की है. यहां एक अंधविश्वासी अपढ़  भक्त लक्ष्मी प्रसाद ने भगवान शिव को रिझाने अपनी जीभ काटकर भगवान शिव में अर्पण कर दी. और जैसा कि हमारे देश में होता है भक्त के इस अराधना की खबर लगते ही श्रद्धालुओं का वहां पर तांता लग गया है.

जीभ काटने के बाद से वहां के आस पास के इलाकों में भक्त की ये भक्ति चर्चा का विषय बन चूकी है. श्रद्धालु पांच दिन से एक पेड़ के नीचे शिव जी की प्रतिमा को लेकर बैठा हुआ है उसकी इस कठोर तपस्या से ग्रामीण भी हैरान हैं.

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मेंढक मेंढकी की शादी!!

आधी बरसात गुजर जाने के बाद भी पानी के आवश्यकतानुरूप नहीं बरसने तथा सूखे की मार से फसल चौपट होने की कगार पर है.  मानसून की बेरुखी से चिंतित वह परेशान किसान तरह-तरह के टोटके आजमा मेघ के राजा ईन्द्र देव को प्रसन्न करने कोई कसर नही छोड रहे हैं. तरह-तरह के सामाजिकी धार्मिक अनुष्ठान कर वर्षा की आस लगा रहे हैं. मान्यता के अनुसार मेंढकों का शादी कराने से मेघराज ! प्रसन्न होते हैं, जिसके कारण छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल के लुण्ड्रा विकासखंड के धौरपुर में मेंढक मेंढकी का परंपरा अनुसार सामाजिक रीति-रिवाज के साथ विवाह संपन्न कराया गया. धौरपुर में आसपास के सैकड़ों लोगों ने जुट कर मेंढक मेंढकी का विवाह रचाया. मजे की बात यह है कि इस अंधविश्वास भरे ढोंग में  पूरे विधि विधान से धौरपुर महादेव पूजा स्थल पर मंडप गाड़ हल्दी, तेल, उबटन लगा मेंढक को दूल्हे की तरह तैयार कर बाजे गाजे के साथ नाचते, गाते, झूमते सैंकड़ों बाराती धौरपुर से 5 किलोमीटर दूर ग्राम सरईडीह तक गए. ग्राम सरईड़ीह  में पहले से ही तैयार ग्रामीण जन मेंढकी  को तैयार कर मंडप में बैठा कर रखे हुए थे, वहां पहुंचने उपरांत स्वागत इत्यादि पश्चात दोनों मेंढक मेंढकी को ग्राम के बेगाओं द्वारा धार्मिक अनुष्ठान करते हुए सामाजिक रीति-रिवाज के साथ कन्यादान जैसी रस्म अदायगी करते हुए ब्याह रचाया गया. तत्पश्चात दोनों मेंढक मेंढकी को सकुशल एक कुएं में छोड़ दूत के रूप में भगवान इंद्र के पास भेज वर्षा करवाने गुहार लगाई गई.

अंधविश्वास भरी मान्यता है कि ऐसा करने से मेघ राजा ईंद्र खुश होकर वर्षा करते हैं.

ग्रामीणों के इस अजीबोगरीब रस्म रिवाज मेंढक-मेंढकी विवाह को लेकर पूरे लुण्ड्रा, धौरपुर अंचल में कौतूहल वश चर्चा का माहौल बना हुआ है. विदित हो कि अंचल में अभी भी 60 फ़ीसदी खेती बारिश की वजह से नहीं हो पाई है, तथा कृषकों का थरहा,बीड़ा भी अब खराब होने लगा है. यदि जल्द ही बरसात नहीं हुई तो समूचा लुण्ड्रा, धौरपुर विकासखंड क्षेत्र सूखे की पूरी तरह चपेट में होगा.

पूर्व गृह मंत्री भी अंधविश्वासी! !

यहां यह बताना भी लाजिमी होगा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी नेता जो कभी पूर्व गृह  मंत्री रहे हैं नाम है ननकीराम कंवर, आप हर साल जब पानी नहीं बरसता  तो यज्ञ,  वरुण पूजा का ढोंग रचने बैठ जाते हैं और यह कहते नहीं अघाते की हमने जब वरुण देव की पूजा की तो पानी गिरने लगा है. यह शख्स बात बात में अंधविश्वास बघारते रहते हैं कभी कहते हैं मैं पूजा पाठ करके जंगल से हाथियों को भगा दूंगा. कभी कहते हैं मैं पूजा पाठ कर नक्सलियों को समूल नाश कर दूंगा. और वर्षा ऋतु में जब पानी नहीं बरसता  तो यज्ञ करने बैठ जाते हैं जब किसी प्रदेश में ऐसे नेता हो तो समझ सकते हैं कि वहां का भविष्य क्या हो सकता है. यही नहीं देशभर में बहुचर्चित आइपीएस अधिकारी  शिव राम प्रसाद कल्लूरी जिन्होंने नक्सलवाद को लेकर बड़ी मुहिम छेड़ दी और देशभर में प्रसिद्ध हो गए आप भी अंधविश्वास में पीछे नहीं हैं एक साल  तो आपने भी जब वर्षा नहीं हुई तो मेंढक मेंढकी का विवाह  स्वयं  पूजा मे बैठकर संपन्न कराया.

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मसूड़े से खून आने पर क्या करें

दांत शरीर का सब से कठोर हिस्सा माना जाता है. खाना खाने या चबाने के अतिरिक्त ये चेहरे की बनावट, सुंदरता और प्रस्तुति में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. स्वस्थ दांत उन्हें कहा जाता है जिन का आकार अच्छा हो, खोखले या पीले न हों और जिन के मसूढ़े स्वस्थ हों. मसूढ़े दांतों के बहुत महत्त्वपूर्ण हिस्से होते हैं. ये दांतों को पकड़ कर व उन्हें बचा कर रखते हैं ताकि उन में संक्रमण न हो और वे स्वस्थ रहें.

मसूढ़े दांतों के कोमल बाहरी आवरण होते हैं जो मूंगागुलाबी रंग के हों तो स्वस्थ माने जाते हैं. बैक्टीरिया, प्लाक और सही देखभाल न मिलने पर मसूढ़े कमजोर हो जाते हैं. इन का रंग गहरा लाल या मैरून हो जाता है. ये सूज जाते हैं, छिल जाते हैं और मुंह में दर्द रहने का कारण बनते हैं. आइए, मसूढ़ों के बारे में अन्य तथ्य और इन की देखभाल कैसे की जाए के विषय में विस्तार से जानते हैं…

खून आने के कारण

मसूढ़ों में संक्रमण होने के चलते खून आने लगता है. मुंह की सफाई न रखने से प्लाक, टार्टर व कैल्कुलस जमा हो जाता है जिस से मसूढ़े दांत की पकड़ छोड़ने लगते हैं और उन से खून आने लगता है.

चोट लगने के कारण मसूढ़ों से खून आ सकता है. तेज ब्रश करने से, टूथपिक का उचित प्रयोग न करने से, बाह्य पदार्थ से, कृत्रिम जबड़े से, खाद्य पदार्थ में मौजूद अम्ल व रसायन आदि की वजह से भी मसूढ़ों से खून आ जाता है.

रक्त संबंधित बीमारियां जैसे रक्त का थक्का जमाने के फैक्टर की कमी, हिमोफीलिया, ल्यूकीमिया व दूसरी बीमारियों की वजह से भी मसूढ़ों से खून आता है.

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अन्य बीमारियों, जैसे लिवर, किडनी, धमनियों की बीमारी आदि के समय भी मसूढ़ों से खून आने की समस्या होती है. विटामिन सी व विटामिन के की कमी से भी मसूढ़ों से खून आता है.

गर्भवती स्त्रियों में मसूढ़ों से खून आने की शिकायत होती है जो हार्मोन के असंतुलन से व मुंह की सफाई न रख पाने की वजह से होती है. इस के अलावा दवाइयां, जैसे एस्प्रिन का लंबे समय से प्रयोग, हेपरिन थेरैपी, कीमोथेरैपी, रैडिएशन थेरैपी आदि की वजह से भी मसूढ़ों से खून आता है.

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(लेखक मौलाना आजाद इंस्टिट्यूट औफ डैंटल साइंसेज, दिल्ली में डायरैक्टर, प्रिंसिपल और पद्मश्री अवार्डी हैं.) 

प्रोफैसर डा. महेश वर्मा

अपने कमरे को दें नया लुक

अगर आप अपने कमरे की डेकोरेशन को चेंज करना चाहते हैं तो आइए आज आपको कुछ बेहतरीन टिप्स बताते हैं,  जिससे आप अपने कमरे को नया लुक दे सकते हैं. जिसे देखते ही आपका मूड भी फ्रेश हो जाएगा.

केवल जरुरी सामान रखें – सबसे पहले आप कमरे में रखी उन चीजों को बदल दें जो आपके किसी काम की न हों. इस्तेमाल न होने वाली चीजें कमरे में सबसे ज्यादा जगह घेरती है. इन्हें निकालने से आपके कमरे में बहुत सी जगह खाली हो जाएगी.

सजावट– कमरे की सजावट करने के लिए आप कमरे में रंग-बिरंगे तकिए, वाल आर्ट, डैकोरेटिव फ्लावर वास या फिर डिफरेंट शो-पीस भी लगा सकती हैं.

फर्नीचर– कमरे की डैकोरेशन के लिए जरुरी नहीं कि आप नया फर्नीचर लाए बल्कि कमरे के कलर को बदल कर आप फर्नीचर के अनुसार करवा सकती है. आप ट्रेंड के हिसाब से दीवारों पर ब्राइट कलर करवा सकती हैं. इसके अलावा आप दीवारों पर पेपर कटिंग या फोटो कोलाज भी लगा सकती हैं.

एक फंकी सा लैंप– लैंप को चेज करके भी आप अपने कमरे को फंकी सा लुक दें सकती हैं. टेबल पर रखने वाले लैंप को हटा कर आप सीलिंग से लटकने वाला लैंप लगा सकती हैं. इससे भी आपके कमरे को यूनिक लुक मिल जाएगा.

शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को लेकर गर्म है अफवाहों का बाजार

शाहरुख खान के 21 वर्षीय बेटे आर्यन खान ने अभी तक बौलीवुड में अभिनय करना शुरू नहीं किया. मगर वह पिछले कुछ माह से लगातार चर्चाओं से घिरे हुए हैं. वास्तव में आर्यन खान ने जब से फिल्म ‘‘द लायन किंग’’ के एक किरदार सिम्बा को आवाज दी है. तब से अटकलों का बाजार गर्म है कि वह अभिनय के क्षेत्र में कदम रखेंगे. बौलीवुड के सूत्रों का मानना है कि आर्यन खान 21 वर्ष के हो गए है. अब यदि वह अभिनय के क्षेत्र में कदम नहीं रखेंगे, तो कब रखेंगे?

बौलीवुड से जुड़े एक शख्स का दावा है कि आर्यन खान को बौलीवुड में कोई फिल्म मिल नहीं रही है. इसलिए अब वह दक्षिण भारत के पुरस्कृत तेलगू फिल्म निर्देशक गुणशेखर के निर्देशन में फिल्म ‘‘हिरण्याकष्यप’’ में अभिनय करते हुए दक्षिण भारत की फिल्मों से अपने करियर की शुरूआत करेंगे. सूत्रों के अनुसार गुणशेखर अपनी फिल्म ‘हिरण्याकष्यप’ को ‘बाहुबली’ की ही तरह भव्य स्तर पर बना रहे हैं, जिसमें फिलहाल प्रभास, राणा डग्गुबत्ती, तमन्ना व अनुष्का शेट्टी जुड़ चुके हैं.

मगर शाहरूख खान के नजदीकी सूत्रों का दावा है कि आर्यन खान के दक्षिण भारत की फिल्म में काम करने की खबर कुछ लोगों की कपोल कल्पित खबर है. हकीकत में आर्यन खान स्वयं अभी बतौर अभिनेता अपने आपको पूरी तरह से तैयार नही मानते हैं. इसलिए वह खुद अभी अभिनय के क्षेत्र में कूदने का निर्णय नहीं ले पा रहे हैं.

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अब सच क्या है? यह तो पता नहीं. मगर हर दिन आर्यन खान को लेकर कोई न कोई खबर सोशल मीडिया पर गर्म रहती है. कभी उनके रोमांस की खबरें होती हैं, तो कभी उनके अभिनेता के रूप में करियर शुरू करने की अफवाहें बाजार में उड़ती रहती हैं.

शाहरूख खान से जुड़े नजदीकी सूत्र दावा करते हैं कि आर्यन खान जिस दिन अभिनेता बनने का निर्णय ले लेंगे, उसी दिन उन्हें फिल्म मिल जाएगी. क्योंकि कुछ फिल्मकारों को सिर्फ आर्यन खान के फिल्मों से जुड़ने के लिए हामी भरने का इंतजार है.

वैसे सर्वविदित है कि आर्यन खान के लिए तो उनके पिता शाहरूख खान की फिल्म प्रोडक्शन कंपनी ‘रेड चिल्लीस इंटरटेनमेंट’ भी फिल्म बना सकती है. तो दूसरी तरफ गाड फादर के रूप में करण जौहर की कंपनी ‘धर्मा प्रोडक्शन’ भी आर्यन खान को लेकर फिल्म शुरू करने में देरी नहीं करेगा.

पर अहम सवाल यह है कि आर्यन खान की किसी फिल्म से जुड़ने की घोषणा होने की बजाय सिर्फ तरह तरह की खबरें व अफवाहें सोशल मीडिया पर क्यों गर्म हो रही हैं? कुछ लोग इसे आर्यन खान को सोशल मीडिया का स्टार बनाने की कोशिश मान रहे हैं.

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प्रियंका चोपड़ा के सिगरेट विवाद पर परिणीती ने साधी चुप्पी

बौलीवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपडा ने जबसे अमेरिकन सिंगर निक जोनस से शादी की है तब से देखा जा रहा है की वे दोनो अपनी पर्सनल लाइफ काफी एंजौय कर रहे हैं. प्रियंका और निक लगातार वैकेशंस का मजा उठा रहे हैं. दोनो अपनी वैकेशंस की फोटोज इंटरनेट पर अपने फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं जिसकी वजह से दोनो अक्सर चर्चा मे रहते है.

हाल ही में 18 जुलाई को प्रियंका चोपडा का जन्मदिन था और वे अपना बर्थ-डे सैलिब्रेट करने मियामी गई थीं. उसी दौरान देसी गर्ल की एक एसी फोटो वायरल हुई जिससे की वे चर्चा का विषय बन गई. प्रियंका उस फोटो में सिगरेट पीती दिखाई दे रही थी, शायद यही बात उनके फैंस को पसंद न आई और लिखा कि- ‘प्रियंका चोपडा को तो अस्थमा है, फिर वो सिगरेट कैसे पी रही हैं.’

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प्रियंका चोपडा का बर्थ-डे सैलिब्रेट करने उनके साथ उनकी बहन परिणीति चोपड़ा भी शामिल थी जो इस समय अपनी अप्कमिंग फिल्म ‘जबरिया जोड़ी’ के प्रोमोशंस मे लगी हुई हैं. फिल्म के प्रोमोशन के चलते परिणीति चोपड़ा से उनकी बहन की फोटो के बारे मे पूछा गया तो उन्होने इस बारे मे बात करना ठीक नही समझा.

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक उन्होंने सिर्फ इतना कहा की, ‘मैं इस सवाल के जवाब में कहना चाहूंगी कि मेरा कोई हक नही बनता है कि मै इसका जवाब दूं, इसीलिए मैं चुप ही रहूंगी.’ और शायद परिणीति का इस विषय मे ना बोलना ही बेहतर है क्यूंकि इस सवाल का जवाब तो खुद प्रियंका चोपडा को ही देना चाहिए.

बता दें, परिणीति चोपड़ा की लास्ट फिल्म ‘केसरी’ को दर्शको ने काफी प्यार दिया था और अब वे फिल्म ‘जबरिया जोड़ी’ मे सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ दिखाई देंगी. फिल्म ‘जबरिया जोड़ी’ मे सिद्धार्थ मल्होत्रा, परिणीति चोपड़ा के अलावा जावेद जाफरी और एल्ली अवराम जैसे कलाकार भी दिखाई देंगे.

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Edited by- Karan manchanda

बाज मंडरा रहे हैं चारों ओर, यात्री रहें सावधान

सोनाली को घूमनेफिरने का शौक बचपन से ही था. अपने दोस्तों के साथ वह शहर के आसपास के सभी पर्यटन स्थल घूम चुकी थी. मगर जब उस को एडवैंचर टूरिज्म का चस्का लगा तो वह अकेले ही ऋ षिकेश निकल गई. सुना था वहां रिवर राफ्ंटिंग में बड़ा रोमांच है. घूमने फिरने की शौकीन सोनाली ने गूगल पर रिवर राफ्टिंग की सारी जानकारी ली और कानपुर से बस पकड़ कर अकेले ही ऋषिकेश पहुंच गई. उस की बस रात 9 बजे ऋषिकेश बसअड्डे पर पहुंची.

सोनाली ने रिवर राफ्ंिटग के बारे में तो जानकारी जरूर हासिल कर ली थी, मगर शहर के बारे में उस के पास कोई जानकारी नहीं थी. बस से उतर कर उस ने औटोरिकशा किया और औटो वाले से शहर के किसी ठीकठाक सस्ते होटल में पहुंचाने के लिए कहा. औटो वाला एक नजर में ताड़ गया कि मैडम शहर में बिलकुल नई हैं. उस की बातचीत के लहजे से वह यह भी समझ गया कि सोनाली यूपी के किसी शहर से है.

दरअसल, लखनऊ कानपुर के लोग बातचीत में बेहद सरल और सभ्य होते हैं. सोनाली के पास कपड़ों का एक बड़ा बैग था और एक हैंडबैग. हाथ में महंगा मोबाइल फोन, कान में सोने के टौप्स और गले में पतली सोने की चेन. ये सारी चीजें औटो वाले ने एक नजर में ताड़ ली थीं.

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सोनाली उस के औटो में बैठ गई और रिवर राफ्ंिटग के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की उत्सुकता में औटो वाले से ही बातें करने लगी. उस ने सोचा कि यह यहीं का बाश्ंिदा है, लिहाजा यहां के बारे में इस से ज्यादा जानकारी और किसे होगी? मगर यहीं पर सोनाली ने गलती कर दी. उस की पहली गलती तो यह थी कि वह जिस बस में बैठ कर आई थी, उस की टाइमिंग के बारे में उसे अंदाजा नहीं था. वह इतनी रात में ऋषिकेश पहुंचती है, उस ने सोचा ही नहीं था. रात में एक अनजान शहर में एक जवान लड़की का अकेले बस से उतरना कई लोगों की नजरों में चढ़ जाता है. उस ने दूसरी गलती यह की कि एक अनजान शहर में आने से पहले उस शहर के होटलों के बारे में कोई जानकारी गूगल पर सर्च नहीं की. वह औटो वाले के भरोसे थी कि वह तो रोजाना सैकड़ों सवारियां लाता व ले जाता है, तो उसे सारे होटलों के बारे में पता होगा. तीसरी गलती सोनाली ने यह की कि औटो में बैठने से पहले उस ने औटो का नंबर नोट नहीं किया और न ही अपने किसी रिश्तेदार या दोस्त को फोन कर के यह बताया कि वह ऋ षिकेश पहुंच गई है और अब औटो से होटल की ओर जा रही है.

औटो वाला आधे घंटे तक सोनाली को यहांवहां सड़कों पर घुमाता रहा और फिर बोला, ‘मैडम, जहां रिवर राफ्टिंग होती है, उसी के पास एक अच्छा और सस्ता होटल है, रिवर राफ्ंिटग के लिए आने वाले ज्यादातर लोग वहीं रुकते हैं, ताकि सुबहसुबह आराम से पैदल ही नदी तक पहुंच जाएं. मैं आप को वहीं ले चलता हूं.’

यह सुन कर सोनाली बड़ी खुश हो गई. उसे क्या पता था कि ‘भैयाभैया’ कह कर वह जिस औटो वाले पर इतना भरोसा कर रही है, वह दरअसल उसे लूटने का पूरा खाका अपने दिमाग में खींच चुका है. थोड़ी देर में औटो एक सुनसान सी सड़क पर पहुंच गया. सड़क के दोनों ओर ऊंचेऊंचे दरख्त रात के अंधेरे में डरावने नजर आ रहे थे. दूरदूर तक कोई वाहन या राहगीर नहीं था. सोनाली का दिल अनजान आशंका से धड़कने लगा. मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी. औटो वाले ने अचानक एक कच्ची सड़क पर औटो मोड़ा और झटके से रोक लिया.

झटका तेज था, सोनाली आगे की ओर उछल सी गई और जब तक संभली औटो वाले ने अपनी सीट के नीचे से छुरा निकाल कर पीछे बैठी सोनाली के गले पर लगा दिया. उस ने बांह पकड़ कर उसे बाहर खींचा और जमीन पर गिरा दिया. अपना पैर उस के पेट पर दबाते हुए उस ने उस से कान और गले के जेवर उतारने को कहा.

सोनाली डर से कांप रही थी. गले पर चाकू रखा था. डर के मारे उस की चीख हलक में घुट गई थी. चारों तरफ अंधेरा था. उस ने जल्दीजल्दी जेवर निकाल कर औटो वाले को दे दिए. औटो वाले ने उस का फोन, पर्स, बैग सबकुछ छीन लिया और उस जंगल जैसी जगह पर उसे अकेला छोड़ कर औटो सहित फरार हो गया.

सोनाली के पर्स और बैग में करीब 15 हजार रुपए थे, क्रैडिट और डैबिट कार्ड्स थे. आधारकार्ड और पैनकार्ड भी थे. कपड़े, फुटवियर और जरूरत की दूसरी चीजों के अलावा जो कीमती चीज थी वह था उस का कैमरा.

उस अंधेरी रात में सोनाली एक अनजान शहर में एक औटोरिकशा वाले के हाथों लुट गईर्. गनीमत यह रही कि औटो वाले ने उस का बलात्कार नहीं किया या उसे कोई शारीरिक क्षति नहीं पहुंचाई. हो सकता है अगर सोनाली उस का विरोध करती तो वह चाकू के वार से उसे घायल कर देता या मार ही डालता, मगर ऐसा होने से बच गया.

दिनप्रतिदिन बढ़ता खतरा

ऐसी कितनी घटनाएं आएदिन सुनने में आती हैं. कितने ही पर्यटक लूट लिए जाते हैं और उन की शिकायत पर पुलिस कुछ नहीं करती. सोनाली के मामले में भी ऐसा ही हुआ. वह सारी रात ठंड में सड़क के किनारे किसी वाहन के इंतजार में बैठी रही. उस के पास न तो पैसा था और न मोबाइल फोन. वह कहां थी, इस का भी उसे अंदाजा नहीं था.

वह पुलिस स्टेशन का पता लगा कर किसी तरह पैदल वहां पहुंची तो उस की शिकायत तक दर्ज करने को पुलिस तैयार नहीं हुई. वजह यह कि उसे औटो का नंबर ही नहीं मालूम था. औटो वाले का हुलिया भी वह ठीक तरीके से बयां नहीं कर पा रही थी. फिर थानेदार कहने लगा कि मैडम, इतनी रात में अकेले निकलोगी तो कोई छोड़ देगा क्या? यह तो भला औटो वाला था कि सिर्फ थोड़ा सा सामान ले कर छोड़ दिया, वरना…

सोनाली ने जब देखा कि पुलिस उस के साथ हुए अपराध का ठीकरा उसी के सिर फोड़ रही है तो वह चुपचाप पुलिस स्टेशन से बाहर आ गई. दरअसल, पुलिस अपने इलाके में आपराधिक घटनाओं की बढ़ोतरी को दर्शाना नहीं चाहती.

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एफआईआर दर्ज होना मतलब पुलिस द्वारा एक मुकदमा लिखा जाना, उस की तफ्तीश में जुटना, अपराधी को ढूंढ़ना, गवाह ढूंढ़ना, केस को कोर्ट में दाखिल करना और तमाम तरह के सिरदर्द. ऐसे में शिकायतकर्ता अगर दमदार और रसूखदार न हुआ तो थाने में अधिकतर छोटेमोटे मामले दर्ज ही नहीं होते हैं. दूसरी बात यह कि इलाके के चोरउचक्कों से पुलिस स्वयं मिली रहती है. वे उन को हिस्सा जो पहुंचाते रहते हैं. ऐसे में इस तरह की ज्यादातर वारदातों में मुकदमे दर्ज ही नहीं होते हैं.

भारत में विदेशी सैलानियों के साथ भी इस तरह की घटनाएं बहुत होती हैं. कभी कोई बस में सहयात्री के हाथों लुट जाता है, तो कोई गाइड के हाथों. होटल और धर्मशालाओं में भी लूटनेखसोटने और बदन नोंचने वाले बाज मंडराते रहते हैं. इन घटनाओं के कारण पर्यटन का सारा मजा जाता रहता है और व्यक्ति डर, आशंका व दूसरी कई तरह की परेशानियों में फंस जाता है. पर्यटनप्रेमियों और एडवैंचर टूरिज्म पर जाने वाले यदि कुछ सावधानियां रखें तो ऐसे बाज सरीखे दुष्ट लोगों की क्रूरता और आपराधिक घटना का शिकार होने से बच सकते हैं.

समय का ध्यान रखें

एडवैंचर टूरिज्म का मजा तब है जब आप पूरी सुरक्षा के साथ अपने लक्ष्य तक पहुंचें. इस में सब से पहले आती है आप की यात्रा. आप की यात्रा सुरक्षित हो, इस के लिए अपने निकलने और पहुंचने के समय पर जरूर ध्यान दें. कोशिश करें कि आप को रात की यात्रा न करनी पड़े. आप सुबहसुबह निकलें और दिन ढलने से पहले अपने गंतव्य पर पहुंच जाएं तो अच्छा रहेगा. अनजान शहर या हिल स्टेशन पर रात में पहुंचने पर जहां आप को होटल इत्यादि ढूंढ़ने में परेशानी होगी, वहीं चोरउचक्कों और लुटेरों का डर भी बना रहेगा. इसलिए कोशिश करें कि शाम 5 बजे तक अपने गंतव्य तक पहुंच जाएं.

अकेले टैक्सी या कैब में न बैठें

कभी भी बसअड्डे या रेलवेस्टेशन से अकेले टैक्सी या कैब में न बैठें. ऐसा वाहन लें जिस में पहले से कुछ यात्री बैठे हों. यदि बसअड्डे के आसपास ही किसी होटल में जाना हो तो अकेले यात्रा करने के लिए रिकशा ठीक रहता है. वरना शेयरिंग टैक्सी या औटो करें. रोडवेज बस भी सुरक्षित है. किसी भी औटो, कैब या टैक्सी में बैठने से पहले उस का नंबर जरूर नोट कर लें. कोशिश करें कि अपने मोबाइल फोन से उस की एक फोटो खींच कर अपने किसी निकटतम को व्हाट्सऐप कर दें और यह ड्राइवर की नौलेज में करें ताकि ड्राइवर किसी तरह की गलत वारदात को अंजाम देने की सोच भी न सके.

अनजान व्यक्ति से खाने की चीज न लें

बस या ट्रेन में यात्रा के दौरान अपने सहयात्रियों से खानेपीने की कोई चीज शेयर न करें. आप के पास जो भोजनपानी है वही ग्रहण करें. कभीकभी औटो वाले यात्रियों को अपने पास रखी पानी की बोतल दे देते हैं कि लो जी, पानी पियो, गरमी बहुत है. उस का औफर शालीनता से ठुकरा दें. हो सकता है पानी में नशे की दवा मिली हो और आगे जा कर आप को नींद आ जाए और आप के साथ अनहोनी घट जाए.

होटल स्टाफ से बातें शेयर न करें

अकसर हम जब किसी अनजान शहर पहुंचते हैं और वहां होटल में ठहरते हैं, तो उस शहर के बारे में, वहां के बाजारों के बारे में या ऐतिहासिक जगहों के बारे में होटल के बौय या वेटर से जानकारी प्राप्त करने लगते हैं. अकसर होटल के रिसैप्शन पर खड़े हो कर लड़कियां रिसैप्शन बौय से ही बतियाती नजर आती हैं. यह बहुत गलत है. इस बातचीत से होटल में काम करने वाले स्टाफ को आप के बारे में तमाम जानकारियां हासिल हो जाती हैं, मसलन आप कितने दिन के लिए आए हैं, कहांकहां जाना चाहते हैं, क्याक्या खरीदने की ख्वाहिश रखते हैं, कितना पैसा कैरी कर रहे हैं, इत्यादि. इन सब जानकारियों का कोई भी गलत फायदा उठा सकता है. आप को गुमराह कर सकता है या साजिश कर के गलत स्थान पर घूमने के लिए भेज सकता है.

उत्तराखंड में एक विदेशी सैलानी अपने कमरे में मृत पाई गई. उस का सारा सामान, कैमरा, मोबाइल फोन, क्रैडिट कार्ड, पासपोर्ट, डौलर सब कमरे से गायब मिले. इस के साथ ही स्टाफ का एक वेटर भी गायब था. पुलिस पड़ताल से पता चला कि पिछली रात वह जरमन लड़की उस वेटर से देर तक बातें करती रही थी. वेटर ने ताड़ लिया था कि उस के पास काफी डौलर और कीमती कैमरे हैं. मौका पाते ही वह उस लड़की की हत्या कर के सारा सामान लूट ले गया.

खुली ड्रिंक कभी न पिएं

आप बस, ट्रेन या टैक्सी किसी में भी सफर करें तो इस बात का खयाल रखें कि किसी अनजान व्यक्ति द्वारा लाई गई खुली डिं्रक की बोतल कतई न लें. हमेशा सीलबंद बोतल ही लें. खुली बोतल में नशे की वस्तु मिला कर आप को दी जा सकती है. इसी तरह होटल में रुकने के दौरान भी खुले डिं्रक न पिएं. बोतलबंद पानी ही पिएं.

उत्तेजक या बहुत छोटे वस्त्र न पहनें

वैसे तो हम क्या पहनें, क्या न पहनें यह हमारे अपने मिजाज पर निर्भर करता है मगर कहावत है कि ‘जैसा देश वैसा भेष’ यानी जिस जगह आप जा रहे हैं वहां लोग किस तरह की वेशभूषा में रहते हैं, इस की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें और कोशिश करें कि वैसी ही ड्रैसेज आप भी पहनें. अगर आप किसी मुसलिम कंट्री में पर्यटन की दृष्टि से जा रहे हैं तो वहां छोटी स्कर्ट या शौर्ट्स पहनना उचित नहीं होगा क्योंकि इस से आप वहां के लोगों की निगाहों का निशाना बनेंगे और हो सकता है कि कोई आप पर छींटाकशी करे या आप से छेड़छाड़ अथवा रेप की कोशिश भी करे. हां, बुर्का पहनने की भी जरूरत नहीं है, बल्कि आप ऐसी ड्रैस पहनें जो आप के शरीर को ढकती हो.

पर्यटन के लिए हमेशा आप की ड्रैस कंफर्टेबल और पूरे शरीर को ढकने वाली होनी चाहिए ताकि आप लोगों की गलत नजरों से तो बचें ही, तेज धूप और बारिश से भी आप की त्वचा को नुकसान न पहुंचे. अधिक छोटी या उत्तेजक ड्रैस हमेशा अपराधी प्रवृत्ति के जवान लड़कों को आप की तरफ आकर्षित करती है और वे गलत भावना से आप के पीछे लग जाते हैं. ऐसे में कोई बड़ी और बुरी घटना आप के साथ घट सकती है.

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ऐसे बनाएं पालक पकौड़े

बारिश के मौसम में अगर आप  पकौड़े  खाना चाहते हैं तो आज हम आपको पालक पकौड़े की रेसिपी बताने जा रहे  हैं. आप पालक पकौड़ों को चंद मिनटों में बना सकते हैं और इसे चाय के साथ सर्व कर सकते है.

सामग्री

पालक के पत्ते – 10

हल्दी – 1/4 चम्मच

बेसन – 70 ग्राम

लाल मिर्च – 1/2 चम्मच

चाट मसाला – 1/2 चम्मच

अजवाइन – 1/2 चम्मच

नमक – 1/2 चम्मच

चावल का आटा – 1 चम्मच

तेल

पानी

सौस – सर्व के लिए

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विधि

पालक पकौड़े बनाने के लिए सबसे पहले आप पालक के पत्तों को काट लें. अब एक बाउल में बेसन, लाल मिर्च, हल्दी, अजवाइन, चावल का आटा, चाट मसाला और नमक डालें और अच्छे से मिला लें.

अब इसमें थोड़ा-सा पानी डालें और गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. इसमें कटे हुए पालक के पत्ते डालें.

फिर एक कड़ाही में तेल गर्म करें और पकोड़ों को फ्राई करें. इसे हल्का ब्राउन होने तक पकाएं. पालक पकौड़े बनकर तैयार हैं. इसे सौस के साथ सर्व करें.

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पौजिटिव नैगेटिव

तृषामलय के बेरुखी भरे व्यवहार से बहुत अचंभित थी. जब देखो तब बस एक ही रट लगाए रहता कि तृषा मैं तलाक चाहता हूं, आपसी सहमति से. ‘तलाक,’ वह सोचने को मजबूर हो जाती थी कि आखिर मलय को हो क्या गया है, जो हर समय तलाकतलाक की ही रट लगाए रहता है. मगर मलय से कभी कुछ पूछने की हिम्मत नहीं की. सोचती खुद ही बताएंगे कारण और फिर चुपचाप अपने काम में व्यस्त हो जाती थी.

‘‘मलय, आ जाओ खाना लग गया है,’’ डाइनिंग टेबल सैट करते हुए तृषा ने मलय को पुकारा तो वह जल्दी से तैयार हो कर आ गया.

तृषा ने उस की प्लेट लगा दी और फिर बड़े ही चाव से उस की ओर देखने लगी. शायद वह उस के मुंह से खाने की तारीफ सुनना चाहती थी, क्योंकि उस ने बड़े ही प्यार से मलय की पसंद का खाना बनाया था. लेकिन ऐसा लग रहा था मानो वह किसी प्रकार खाने को निगल रहा हो. चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी थी जैसे वह अंदर ही अंदर घुट सा रहा हो. किसी प्रकार खाना खत्म कर के उस ने जल्दी से अपने हाथ धोए.

तभी तृषा ने उस का पर्स व रूमाल ला कर उसे दे दिए.

‘‘तुम सोच लेना, जो मैं ने कहा है उस के विषय में… और हां समय पर मोहक को लेने स्कूल चली जाना. मैं गाड़ी भेज दूंगा. आज उस की बस नहीं आएगी,’’ कहता हुआ वह गाड़ी में बैठ गया. ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी.

‘आजकल यह कैसा विरोधाभास है मलय के व्यवहार में… एक तरफ तलाक की बातें करता है तो दूसरी ओर घरपरिवार की भी चिंता लगी रहती है… न जाने क्या हो गया है उसे,’ सोचते हुए तृषा अपने बचे कामों को निबटाने लगी. लेकिन उस का मन किसी और काम में नहीं लग रहा था. क्या जरा भी प्यार नहीं रहा है उस के मन में मेरे लिए जो तलाक लेने पर आमादा है? क्या करूं… पिछले 12 वर्षों से हम एकदूसरे के साथ हंसीखुशी रह रहे थे… कभी ऐसा नहीं लगा कि उसे मुझ से कोई शिकायत है या वह मुझ से ऊब गया है.

हर समय तो उसे मेरी ही चिंता लगी रहती थी. कभी कहता कि लगता है आजकल तुम अपनी हैल्थ का ध्यान नहीं रख रही हो… कितनी दुबली हो गई हो, यह सुन कर खुशी से उस का मन झूमने लगता और इस खुशी में और वृद्धि तब हो गई जब विवाह के 3 वर्ष बाद उसे अपने शरीर में एक और जीव के आने की आहट महसूस होने लगी. उस ने बडे़ ही शरमाते हुए मलय को यह बात बताई, तो उस ने खुशी से उसे गोद में उठा लिया और फिर गोलगोल घुमाने लगा.

मोहक के जन्म पर मलय की खुशी का ठिकाना न था. जब तब उसे आगाह करता था कि देखो तृषा मेरा बेटा रोए नहीं, मैं बरदाश्त नहीं कर सकूंगा. तब उसे हंसी आने लगती कि अब भला बच्चा रोए नहीं ऐसा कैसे हो सकता है. वह मोहक के लिए मलय का एकाधिकार देख कर खुश भी होती थी तथा चिंतित भी रहती थी और फिर तन्मयता से अपने काम में लग जाती थी.

‘कहीं ऐसा तो नहीं कि मलय अब मुझ से मुक्ति पाना चाहता है. तो क्या अब मेरे साथ उस का दम घुट रहा है? अरे, अभी तो विवाह के केवल 12 वर्ष ही बीते हैं. अभी तो जीवन की लंबी डगर हमें साथसाथ चलते हुए तय करनी है. फिर क्यों वह म्यूच्युअल तलाक की बात करता रहता है? क्यों उसे मेरे साथ रहना असहनीय हो रहा है? मेरे प्यार में तो कोई भी कमी नहीं है… मैं तो आज भी उस की वही पहले वाली तृषा हूं, जिस की 1-1 मुसकान पर मलय फिदा रहता था. ‘कभी मेरी लहराती काली जुल्फों में अपना मुंह छिपा लेता था… अकसर कहता था कि तुम्हारी झील सी गहरी नीली आंखों में डूबने को जी चाहता है, सागर की लहरों सा लहराता तुम्हारा यह नाजुक बदन मुझे अपने आगोश में लपेटे लिए जा रहा है… तुम्हारे जिस्म की मादक खुशबू में मैं अपने होशोहवास खोने लगता हूं.

इतना टूट कर प्यार करने वाला पति आखिर तलाक क्यों चाहता हैं? नहींनहीं मैं तलाक के लिए कभी राजी नहीं होऊंगी, आखिर मैं ने भी तो उसे शिद्दत से प्यार किया है. घर वालों के तमाम विरोधों के बावजूद जातिपांति की ऊंचीऊंची दीवारों को फांद कर ही तो हम दोनों ने एकदूसरे को अपनाया है,’ तृषा सोच रही थी.

अतीत तृषा की आंखों के सामने किसी चलचित्र की भांति चलायमान हो उठा…

‘‘पापा, मैं मलय से विवाह करना चाहती हूं.’’

‘‘मलय, कौन मलय?’’ पापा थोड़ा चौंक उठे.

‘‘अपना मलय और कौन? आप उसे बचपन से जानते हैं… यहीं तो भैया के साथ खेलकूद कर बड़ा हुआ है. अब इंजीनियर बन चुका है… हम दोनों एकदूसरे से प्यार करते हैं और एकसाथ अपना जीवन बिताना चाहते हैं,’’ तृषा ने दृढ़ता से कहा.

पिता मनोज क्रोध से तिलमिला उठे. वे अपने क्रोध के लिए सर्वविदित थे. कनपटी की नसें फटने को आ गईं, चेहरा लाल हो गया. चीख कर बोले, ‘‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इतनी बड़ी बात कहने की.. कभी सोचा है कि उस की औकात ही क्या है हमारी बराबरी करने की? अरे, कहां हम ब्राह्मण और वह कुर्मी क्षत्रिय. हमारे उन के कुल की कोई बराबरी ही नहीं है. वैसे भी बेटी अपने से ऊंचे कुल में दी जाती है, जबकि उन का कुल हम से निम्न श्रेणी का है.’’

तृषा भी बड़ी नकचढ़ी बेटी थी. पिता के असीमित प्यारदुलार ने उसे जिद्दी भी बना दिया था. अत: तपाक से बोली, ‘‘मैं ने जाति विशेष से प्यार नहीं किया है पापा, इंसान से किया है और मलय किसी भी ऊंची जाति से कहीं ज्यादा ही ऊंचा है, क्योंकि वह एक अच्छा इंसान है, जिस से प्यार कर के मैं ने कोई गुनाह नहीं किया है.’’

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मनोजजी को इस का गुमान तक न था कि उन की दुलारी बेटी उन के विरोध में इस तरह खड़ी हो जाएगी. उन्हें अपने ऊंचे कुल का बड़ा घमंड था. उन के पुरखे अपने समय के बहुत बड़े ताल्लुकेदार थे. यद्यपि अब ताल्लुकेदारी नहीं रह गई थी, फिर भी वह कहते हैं न कि मरा हाथी तो 9 लाख का… मनोजजी के संदर्भ में यह कहावत पूरी तरह लागू होती थी.

अपने शहर के नामीगिरामी वकील थे. लक्ष्मी ने जैसे उन का वरण ही कर रखा था. तृषा अपने पिता की इकलौती लाडली बेटी थी. अपने बड़े भाई तनय की भी बड़ी ही दुलारी थी. तनय भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हो कर, अवर सचिव के पद पर आसाम में तैनात था.

मनोजजी को अपने कुल तथा अपने बच्चों पर बड़ा अभिमान था. वह सोच भी नहीं सकते

थे कि उन की बेटी इस प्रकार उन्हें झटका दे सकती है. उन के अनुसार, मलय के परिवार की उन के परिवार से कोई बराबरी नहीं है. उस के पिता अनिल कृषि विभाग में द्वितीय श्रेणी के अधिकारी थे, उन का रहनसहन भी अच्छा था. पढ़ालिखा परिवार था. दोनों परिवारों में मेलमिलाप भी था. मलय भी अच्छे संस्कारों वाला युवक था, किंतु उन के मध्य जातिपांति की जो दीवारें थीं, उन्हें तोड़ना इतना आसान नहीं था. तब अपनी बेटी का विवाह किस प्रकार अपने से निम्न कुल में कर देते.

जबतब मनोजजी अपने ऊंचे कुल का बखान करते हुए अनिलजी को परोक्ष रूप से उन की जाति का एहसास भी करा ही देते थे. अनिलजी इन सब बातों को समझते थे, किंतु शालीनतावश मौन ही रहते थे.

जब मनोजजी ने बेटी तृषा को अपनी जिद पर अड़े देखा तो उन्होंने अनिलजी से बात की और फिर आपसी सहमति से एक सादे समारोह में कुछ गिनेचुने लोगों की उपस्थिति में बेटी का विवाह मलय से कर दिया. जब तृषा विदा होने लगी तब उन्होंने ‘अब इस घर के दरवाजे तुम्हारे लिए हमेशा के लिए बंद हो गए हैं’ कह तृषा के लिए वर्जना की एक रेखा खींच दी.

बेटी तथा दामाद से हमेशा के लिए अपना रिश्ता समाप्त कर लिया. इस के विपरीत मलय के परिवार ने बांहें फैला कर उस का स्वागत किया. तब से 12 वर्ष का समय बीत चुका था. किंतु मायके की देहरी को वह न लांघ सकी. जब भी सावन का महीना आता उसे मायके की याद सताने लगती. शायद इस बार पापा उसे बुला लें की आशा बलवती होने लगती, कानों में यह गीत गूंजने लगता:

‘‘अबकी बरस भेजो भैया को बाबुल सावन में लीजो बुलाय रे,

लौटेंगी जब मेरे बचपन की सखियां दीजो संदेसा भिजाय रे.’’

इस प्रकार 12 वर्ष बीत गए, किंतु मायके से बुलावा नहीं आया. शायद उस के पिता को उसे अपनी बेटी मानने से इनकार था, क्योंकि अब वह दूसरी जाति की जो हो चुकी थी.

बेटा मोहक जो अब 9 वर्ष का हो चुका था. अकसर पूछता, ‘‘मम्मी, मेरे दोस्तों के तो

नानानानी, मामामामी सभी हैं. छुट्टियों में वे सभी उन के घर जाते हैं. फिर मैं क्यों नहीं जाता? क्या मेरे नानानानी, मामामामी नहीं हैं?’’

तृषा की आंखें डबडबा जाती थीं लेकिन वह भाई से उस लक्षमणरेखा का जिक्र भी नहीं कर सकती थी जो उस के दंभी पिता ने खीचीं थी और जिसे वह चाह कर भी पार नहीं कर सकती थी.

ड्राइवर गाड़ी ले कर आ गया था. जब वह मोहक को स्कूल से ले कर लौटी, तो उस ने मलय को अपने कमरे में किसी पेपर को ढूंढ़ते देखा. तृषा को देख कर उस का चेहरा थोड़ा स्याह सा पड़ गया. अपने हाथ के पेपर्स को थोड़ा छिपाते हुए वह कमरे से बाहर जाने लगा.

‘‘क्या हुआ मलय इतने अपसैट क्यों हो, और ये पेपर्स कैसे हैं?’’

‘‘कुछ नहीं तृषा… कुछ जरूरी पेपर्स हैं… तुम परेशान न हो,’’ कह मलय चला गया.

तृषा के मन में अनेक संशय उठते, कहीं ये तलाक के पेपर्स तो नहीं…

पिछले 12 वर्षों में उस ने मलय को इतना उद्विग्न कभी नहीं देखा था. ‘क्या

मलय को अब उस से उतना प्यार नहीं रहा जितनी कि उसे अपेक्षा थी? क्या वह किसी और से अपना दिल लगा बैठा है और मुझ से दूर जाना चाहता है? क्यों मलय इतना बेजार हो गया है? कहां चूक हो गई उस से? क्या कमी रह गई थी उस के प्यार में’ जबतब अनेक प्रश्नों की शलाका उसे कोंचने लगती.

मलय के प्यार में उस ने अपनेआप को इतना आत्मसात कर लिया था कि उसे अपने आसपास की भी खबर नहीं रहती थी. मायके की स्मृतियों पर समय की जैसे एक झीनी सी चादर पड़ गई थी.

‘नहींनहीं मुझे पता करना ही पड़ेगा कि क्यों मलय मुझ से तलाक लेना चाहता है?’ वह सोचने लगी, ‘ठीक है आज डिनर पर मैं उस से पूछूंगी कि कौन सा अदृश्य साया उन दोनों के मध्य आ गया है. यदि वह किसी और को चाहने लगा है तो ठीक है, साफसाफ बता दे. कम से कम उन दोनों के बीच जो दूरी पनप रही है उसे कम करने का प्रयास तो किया ही जा सकता है.’

शाम के 5 बज गए थे. मलय के आने का समय हो रहा था. उस ने हाथमुंह धो कर हलका सा मेकअप किया, साड़ी बदली, मोहक को उठा कर उसे दूध पीने को दिया और फिर होमवर्क करने के लिए बैठा दिया. स्वयं रसोई में चली गई, मलय के लिए नाश्ता बनाने. आते ही उसे बहुत भूख लगती थी.

ये सब कार्य तृषा की दिनचर्या बन गई थी, लेकिन इधर कई दिनों से वह शाम का नाश्ता भी ठीक से नहीं कर रहा था. जो भी बना हो बिना किसी प्रतिक्रिया के चुपचाप खा लेता था. ऐसा लगता था मानो किसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है. कोई बात है जो अंदर ही अंदर उसे खाए जा रही थी, कैसे तोड़ूं मलय की इस चुप्पी को…

नाश्ते की टेबल पर फिर मलय ने अपना वही प्रश्न दोहराया, ‘‘क्या सोचा तुम ने?’’

‘‘किस विषय में?’’ उस ने भी अनजान बनते हुए प्रश्न उछाल दिया.

‘‘तलाक के विषय में और क्या,’’ मलय का स्वर गंभीर था. हालांकि उस के बोलने का लहजा बता रहा था कि यह ओढ़ी हुई गंभीरता है.

‘‘खुल कर बताओ मलय, यह तलाकतलाक की क्या रट लगा रखी है… क्या अब तुम मुझ से ऊब गए हो? क्या मेरे लिए तुम्हारा प्यार खत्म हो गया है या कोई और मिल गई है?’’ तनिक छेड़ने वाले अंदाज में उस ने पूछा.

‘‘नहीं तृषा, ऐसी कोई बात नहीं, बस यों ही अपनेआप को तुम्हारा अपराधी महसूस कर रहा हूं. मेरे लिए तुम्हें अपनों को भी हमेशा के लिए छोड़ना पड़ा, जबकि मेरा परिवार तो मेरे ही साथ है. मैं जब चाहे उन से मिल सकता हूं, मोहक का भी ननिहाल शब्द से कोई परिचय नहीं है. वह तो उन रिश्तों को जानता भी नहीं. मुझे तुम्हें उन अपनों से दूर करने का क्या अधिकार था,’’ कह मलय चुप हो गया.

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‘‘अकस्मात 12 वर्षों बाद तुम्हें इन बातों की याद क्यों आई? मुझे भी उन रिश्तों को खोने का दर्द है, किंतु मेरे दिल में तुम्हारे प्यार के सिवा और कुछ भी नहीं है… ठीक है, जीवन में मातापिता का बड़ा ही अहम स्थान होता है, किंतु जब वही लोग अपनी बेटी को किसी और के हाथों सौंप कर अपने दायित्वों से मुक्त हो जाते हैं तब प्यार हो या न हो बेटी को उन रिश्तों को ढोना ही पड़ता है, क्योंकि उन के सम्मान का सवाल जो होता है, भले ही बेटी को उस सम्मान की कीमत अपनी जान दे कर ही क्यों न चुकानी पड़े.

कभीकभी दहेज के कारण कितनी लड़कियां जिंदा जला दी जाती हैं और तब उन के पास पछताने के अलावा कुछ भी शेष नहीं रह जाता है. हम दोनों एकदूसरे के प्रति समर्पित हैं, प्यार करते हैं तो गलत कहां हुआ और मेरे मातापिता की बेटी भी जिंदा है भले ही उन से दूर हो,’’ तृषा के तर्कों ने मलय को निरुत्तर कर दिया.

रात का खाना खा कर मलय अपने कमरे में सोने चला गया. मोहक को सुला कर तृषा भी उस के पास आ कर लेट गई और अनुराग भरी दृष्टि से मलय को देखने लगी. मलय उसे अपनी बांहों में जकड़ कर उस के होंठों पर चुंबनों की बारिश करने लगा. तृषा का शरीर भी पिघलता जा रहा था. उस ने भी उस के सीने में अपना मुंह छिपा लिया.

तभी मलय एक झटके से अलग हो गया, ‘‘सो जाओ तृषा, रात बहुत हो गई है,’’ कह करवट बदल कर सोने का प्रयास करने लगा.

तृषा हैरान सी मलय को निहारने लगी कि क्या हो गया है इसे. क्यों मुझ से दूर जाना चाहता है? अवश्य इस के जीवन में कोई और आ गई है तभी यह मुझ से इतना बेजार हो गया है और वह मन ही मन सिसक उठी.

प्रात:कालीन दिनचर्या आरंभ हो गई. मलय को चाय बना कर दी. मोहक को स्कूल भेजा. फिर नहाधो कर नाश्ते की तैयारी करने लगी. रात के विषय में न उस ने ही कुछ पूछा न ही मलय ने कुछ कहा. एक अपराधभाव अवश्य ही उस के चेहरे पर झलक रहा था. ऐसा लग रहा था वह कुछ कहना चाहता है, लेकिन कोई अदृश्य शक्ति जैसे उसे रोक रही थी.

तृषा की बेचैनी बढ़ती जा रही थी कि क्या करूं कैसे पता करूं कि कौन सी ऐसी परेशानी है जो बारबार तलाक की ही बात करता है… पता तो करना ही होगा. उस ने मलय के औफिस जाने के बाद उस के सामान को चैक करना शुरू किया कि शायद कोई सुबूत मिल ही जाए. उस की डायरी मिल गई, उसे ही पढ़ने लगी, तृषा के विषय में ही हर पन्ने पर लिखा था, ‘‘मैं तृषा से दूर नहीं रह सकता. वह मेरी जिंदगी है, लेकिन क्या करूं मजबूरी है. मुझे उस से दूर जाना ही होगा. मैं उसे अब और धोखे में नहीं रख सकता.’’

तृषा ये पंक्तियां पढ़ कर चौंक गई कि क्या मजबूरी हो सकती है. इन पंक्तियों को पढ़ कर पता चल जाता है कि किसी और का उस की जिंदगी में होने का तो कोई प्रश्न ही नहीं उठता है, फिर क्यों वह तलाक की बात करता है?

उस के मन में विचारों का झंझावात चल ही रहा था कि तभी उस की नजर मलय के

मोबाइल पर पड़ी, ‘‘अरे, यह तो अपना मोबाइल भूल कर औफिस चला गया है. चलो, इसी को देखती हूं. शायद कोई सुराग मिल जाए, फिर उस ने मलय के कौंटैक्ट्स को खंगालना शुरू कर दिया. तभी डाक्टर धीरज का नाम पढ़ कर चौंक उठी. 1 हफ्ते से लगातार उस से मलय की बात हो रही थी. डाक्टर धीरज से मलय को क्या काम हो सकता है, वह सोचने लगी, ‘‘कौल करूं… शायद कुछ पता चल जाए, और फिर कौल का बटन दबा दिया.

‘‘हैलो, मलयजी आप को अपना बहुत ध्यान रखना होगा, जैसाकि आप को पता है, आप को एचआईवी पौजिटिव है. इलाज संभव है पर बहुत खर्चीला है. कब तक चलेगा कुछ कहा नहीं जा सकता है, लेकिन आप परेशान न हों. कुदरत ने चाहा तो सब ठीक होगा,’’ डाक्टर धीरज ने समझा कि मलय ही कौल कर रहा है. उन्होंने सब कुछ बता दिया.

तृषा को अब अपने सवाल का जवाब मिल गया था. उस की आंखें छलछला उठीं कि तो यह बात है जो मलय मुझ से छिपा रहा था. लेकिन यह संक्रमण हुआ कैसे. वह तो सदा मेरे पास ही रहता था. फिर चूक कहां हो गई? क्या किसी और से भी मलय ने संबंध बना लिए हैं… आज सारी बातों का खुलासा हो कर ही रहेगा, उस ने मन ही मन प्रण किया.

मोहक स्कूल से आ गया था. उसे खाना खिला कर सुला दिया और स्वयं परिस्थितियों की मीमांसा करने लगी कि नहींनहीं इस बीमारी के कारण मैं मलय को तलाक नहीं दे सकती. जब इलाज संभव है तब दोनों के पृथक होने का कोई औचित्य ही नहीं है.

शाम को उस ने मलय का पहले की ही तरह हंस कर स्वागत किया. उस की पसंद

का नाश्ता कराया. जब वह थोड़ा फ्री हो गया तब उस ने बात छेड़ी, ‘‘मलय, डाक्टर धीरज से तुम किस बीमारी का इलाज करवा रहे हो?’’

मलय चौंक उठा, ‘‘कौन धीरज चोपड़ा? मैं इस नाम के किसी डाक्टर को नहीं जानता… न जाने तुम यह कौन सा राग ले बैठी, खीज उस के स्वर में स्पष्ट थी.

‘‘नहीं मलय यह कोई राग नहीं… मुझ से कुछ छिपाओ नहीं, मुझे सब पता चल चुका है. तुम अपना फोन घर भूल गए थे. मैं ने उस में डाक्टर चोपड़ा की कई कौल्स देखीं तो मन में शंका हुई और मैं ने उन्हें फोन मिला दिया. उन्होंने समझा कि तुम बोल रहे हो और सारा सच उगल दिया, साथ ही यह भी कहा कि इस का उपचार महंगा है, पर संभव है. हां, समय की कोई सीमा निर्धारित नहीं. इसीलिए तुम तलाक पर जोर दे रहे थे न… पहले ही बता दिया होता… छिपाने की जरूरत ही क्या थी.’’

अब मलय टूट सा गया. उस ने तृषा को अपने गले से लगा लिया और फिर धीरेधीरे सब कुछ बताने लगा, ‘‘तुम्हें तो पता ही है तृषा पिछले महीने मैं औफिस के एक सेमिनार में भाग लेने के लिए सिंगापुर गया था. मेरे 2-3 सहयोगी और भी थे. हम लोगों को एक बड़े होटल में ठहराया गया था. हमें 1 सप्ताह वहां रहना था और मेरा तुम से इतने दिन दूर रहना मुश्किल लग रहा था, फिर भी मैं अपने मन को समझाता रहा. दिन तो कट जाता था, किंतु रात में तुम्हारी बांहों का बंधन मुझे सोने नहीं देता था और मैं तुम्हारी याद में तड़प कर रह जाता था.

‘‘एक दिन बहुत बारिश हो रही थी. मेरे सभी साथी होटल में नीचे बार में बैठे

ड्रिंक ले रहे थे. मैं भी वहीं था, वहां मन बहलाने के और भी साधन थे, मसलन, रात बिताने के लिए वहां लड़कियां भी सप्लाई की जाती थीं. अलगअलग कमरों में सारी व्यवस्था रहती थी. तुम्हारी कमी मुझे बहुत खल रही थी. मैं ने भी एक कमरा बुक कर लिया और फिर मैं पतन के गर्त में गिरता चला गया.

‘‘यह संक्रमण उसी की देन है. बाद में मुझे बड़ा पश्चाताप हुआ कि यह क्या कर दिया मैं ने. नहींनहीं मेरे इस जघन्य अपराध की जितनी भी सजा दी जाए कम है. मैं ने दोबारा उस से कोई संपर्क नहीं किया. साथियों ने मेरी उदासीनता का मजाक भी बनाया, उन का कहना था पत्नी तो अपने घर की चीज है वह कहां जाएगी. हम तो थोड़े मजे ले रहे हैं. लेकिन मैं उस गलती को दोहराना नहीं चाहता था. बस तुम्हारे पास चला आया.

‘‘एक दिन मैं औफिस में बेहोश हो गया. बड़ी मुश्किल से मुझे होश आया. मेरे सहयोगी मुझे डाक्टर चोपड़ा के पास ले गए. उन्होंने मेरा ब्लड टैस्ट कराया. तब मुझे इस बीमारी का पता लगा. मैं समझ गया कि यह सौगात सिंगापुर की ही देन है. मैं अपराधबोध से ग्रस्त हो गया. हर पल मुझे यही खयाल आता रहा कि मुझे तुम्हारे जीवन से दूर चले जाना चाहिए. इसीलिए मैं तलाक की बात करता रहा. यह जानते हुए भी कि मेरेतुम्हारे प्यार की डोर इतनी मजबूत है कि आसानी से टूट नहीं सकती,’’ कहते हुए मलय फफक कर रो पड़ा.

तृषा हतप्रभ रह गई कि इतना बड़ा धोखा? वह मेरी जगह किसी और की बांहों में चला गया. क्या उस की आंखों पर वासना की पट्टी बंधी हुई थी. फिर तत्काल उस ने अपना कर्तव्य निर्धारित कर लिया कि नहीं वह मलय का साथ नहीं छोड़ेगी, उसे टूटने नहीं देगी, पतिपत्नी का रिश्ता इतना कच्चा थोड़े ही होता है कि जरा सा झटका लगा और टूट गया.

उस ने मलय को पूरी शिद्दत से प्यार किया है. वह इस प्यार को खोने नहीं देगी. इंसान है गलती हो गई तो क्या उस की सजा उसे उम्र भर देनी चाहिए… नहीं कदापि नहीं. वह मलय की एचआईवी पौजिटिव को नैगेटिव कर देगी. क्या हुआ यदि इस बीमारी का इलाज बहुत महंगा है… इस कारण वह अपने प्यार को मरने नहीं देगी. उस ने मलय का सिर अपने सीने पर टिका लिया. उस का ब्लाउज मलय के आंसुओं से तर हो रहा था.

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