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‘रंग जाऊं तेरे रंग में’ में दो परिवारों की इज्जत बचाने के लिए लड़की की इच्छाओं का दमन! पढ़ें खबर

दंगल टीवी अपनी शुरूआत के साथ ही नारी सशक्तिकरण भारतीय सभ्यता व उत्तर भारत के परिवेश वाले सीरियलों का प्रसारण करता आ रहा है. मगर इन दिनों इस चैनल पर सीरियल रंग जाउं तेरे रंग में में जिस तरह से नारी सशक्तिकरण के नाम पर कुछ घटनाक्रम दिखाए जा रहे हैं. उससे यह सवाल उठना है कि नारी सशक्तिकरण और नारी शक्ति के नाम पर लड़कियों की महत्वाकांक्षाओं को कुचलना कितना सही है.

वास्तव में इन दिनों इस सीरियल की कहानी में एक नया मोड़ आया हुआ है. जहां बनारस के रहने वाले दो बेटियों के पिता सुरेंद्र चैबे की बड़ी बेटी सृष्टि की शादी काशीनाथ पांडे के बेटे ध्रुव के संग हो रही हैण्लड़के वाले बारात लेकर आ चुके हैंण्मगर शादी के मंडप के नीचे पहुंचने से पहले ही सृष्टि गायब हो चुकी है. तब सुरेंद्र चैबे व काशीनाथ पांडे इस निर्णय पर पहुंचते है कि दोनों परिवारों की इज्जत को बचाने के लिए सुरेंद्र चैबे अपनी छोटी बेटी धानी की शादी ध्रुव पांडे के साथ करा देंण्शादी संपन्न होने से पहले इस बात की भनक ध्रुव पांडे को नही लगने दी है.

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ज्ञातब्य है कि धानी चैबे अभी कालेज में पढ़ रही है. उसके अपने कुछ सपने हैंण्वह पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी कर अपने पैरों पर खड़ी होकर आत्म निर्भर बनना चाहती है. मगर उसके माता पिता उसे इमोशनल ब्लैकमेल करते हुए दो परिवारों की इज्जत को बचाने के लिए ध्रुव के संग विवाह के लिए राजी करते हैं. धानी चाहती है कि ध्रुव को सच बता दिया जाए कि सृष्टि  गायब हो चुकी है और सृष्टि की तलाश की जाए. क्योंकि धानी को यकीन है कि उसकी बहन के साथ कुछ गलत हुआ है. उसकी बहन सृष्टि परिवार की इज्जत को दांव पर लगाने के लिए घर से भाग नहीं सकती. मगर धानी की सलाह पर अमल करने की बजाय उसे भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल कर ध्रुव संग शादी करने के लिए राजी कर लिया जाता है. और धानी व ध्रुव की शादी हो जाती है. स्वाभाविक तौर पर अब आगे तमाशा होगा.

जब ध्रुव को पता चलेगा कि उसका व्याह धोखे से सृष्टि की बजाय धानी के साथ किया गया है. हो सकता है कि इससे सीरियल की टीआरपी बढ़ जाए. मगर अहम सवाल यह है कि क्या इस तरह सीरियल एक सही संदेश समाज को दे रहा है.

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सूत्रों की माने तो चैनल के अनुसार वह धानी के इस कदम को नारी सशक्तिकरण रूप में पेश कर रहा है.पर सवाल यह है कि यह कैसी नारी शक्ति है यह कैसी प्रगति शीलता है सीरियल में कहानी आगे किस तरह बढ़ेगी पता नहीं मगर निजी जीवन में यदि किसी लड़की के साथ ऐसा होने का मतलब उसकी सारे सपनों उसकी इच्छाओं का दमन करने के साथ ही उसे एक अंधकारमय भविष्य की कोठरी में धकेलना ही है. ऐसे में लड़की को बिना गलती की सजा भुगतना पड़ेगा. पति उसे स्वीकार नही करेगा या परिवार की इज्जत के लिए समाज के सामने स्वीकार करेगाएपर घर के अंदर उसे घुट घुटकर जीने पर मजबूर करेगा. लड़की भी आत्म निर्भर नही रह पाएगी. उसकी शिक्षा भी अधूरी रह गयी है तो यह सब न तो नारी सशक्तिकरण है और न ही नारी सशक्तिण. माना कि हमारे देश में आए दिन खबरें आती रहती हैं कि शादी के मंडप के नीचे लड़की बदल गयी. इसे सही ठहराने की बजाय इस पर रोक लगे. उन पर बात की जानी चाहिए.

सीरियल रंग जाउं तेरे रंग में सृष्टि की छोटी बहन धानी एक बड़ा कदम उठाती है और समाज में अपने परिवार की लाज बचाने के लिए वह एक ऐसी भारतीय नारी का रूप धारण करती है. जो परिवार को बिखरने और टूटने से बचाती है. कुल मिलाकर सीरियल में किस्मत का खेल धानी को एक ऐसे मुकाम पर ले जाता है. जहां उसके लिए निर्णय लेना आसान नहीं होता. मगर धानी एक भारतीय सशक्त नारी होने का फर्ज निभाती है. यहां पर सबसे बड़ा सवाल सही है कि परिवार की लाज बचाने के लिए हर बार लड़की ही त्याग की मूर्ति क्यों बने. लड़का यानी कि पुरूष क्यों नहीं.

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किस्मत का खेल सिर्फ नारी संग ही क्यों. इस प्रकरण पर धानी का किरदार निभा रही अभिनेत्री मेघा रे कहती हैं. इन दिनों हमारे सीरियल ‘रंग जाउं तेरे रंग में’ में बहुत ही ज्यादा इंटेंस ड्रामा चल रहा है. दर्शक अपने अपने हिसाब से अंदाजा लगा रहे हैं कि अब सीरियल की कहानी आगे क्या रूप लेगी. लेकिन मैं यकीन के साथ कह सकती हूं कि दर्शक जैसा सोच रहे हैं वैसा कुछ नहीं हो. माना कि अभी सृष्टि शादी के दिन गायब है.  परिवार की सोच अलग है.मगर अकेली धानी ही है जो यह सोच रही है कि दीदी ऐसा क्यों करेगी. वह कहीं भाग नहीं सकती क्योंकि वह बचपन से अपनी बहन को देखती आई है.

लेकिन कोई धानी की बात मान ही नहीं रहा है. ऐसे में घर वाले धानी को इमोशनल ब्लैकमेल भी कर रहे हैं. धानी एक मुश्किल दौर से गुजर रही है. हालांकि धानी बड़ी खुशमिजाज और हंसी मजाक करने वाली लड़की है लेकिन अब उसकी जिंदगी में भी एक बड़ा बदलाव आने जा रहा है.सृष्टि दीदी बड़ी सुलझी हुई हैं. ऐसे में शादी के दिन उनका गायब होना हम सभी के लिए शॉकिंग पल हैण्घर वालों को शक इसलिए हो रहा है. क्योंकि उन्होंने एक अंजान लड़के के साथ सृष्टि को देखा था. लेकिन धानी मानने को तैयार नही कि उसकी बहन भाग गई है. धानी का कहना है कि ध्रुव को सृष्टि के गायब होने के बारे में बता दिया जाए मगर घर वाले उसे ऐसा करने नहीं दे रहे हैं कि दोनों खानदान की इज्जत दांव पर लग जाएगी.

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घर के बड़ों ने इस मामले में कुछ फैसला लिया हैए लेकिन धानी इसके खिलाफ है. वैसे धानी एक ऐसी भारतीय लड़की है. जो अपने माँ बाप परिवार वालों के लिए अपने सपने को छोड़ सकती हैण्वह कालेज में पढ़ाई कर रही है. मगर अब वह कुछ छोड़कर ऐसे लम्हों में परिवार को इमोशनल सपोर्ट करने के लिए आगे आती है.

सृष्टि चौबे का किरदार निभाने वाली केतकी कदम कहती हैं. यह ट्विस्ट दर्शकों को 440 वोल्ट का झटका देगा. मैं इतना कहूँगी कि लोगों को जल्द जज करना ठीक नहीं होता है. इंसान बुरा नहीं होता, सिचुएशन बुरी होती है. सृष्टि घर से भागी हैए गायब हुई है, उसके साथ कुछ बुरा हुआ है. इसके लिए आपको रंग जाऊं तेरे रंग में देखना होगा.

शादी के बाद Mouni Roy ने शेयर की खूबसूरत फोटोज, पति के लिए  लिखा ‘आखिर मैंने तुम्हें पा ही लिया’

टीवी की मशहूर एक्ट्रेस मौनी रॉय (Mouni Roy) ने बॉयफ्रेंड सूरज नाम्बियार (Suraj Nambiar) के साथ शादी के बंधन में बंध गई हैं. दोनों की शादी की फोटोज सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. बता दें कि उन्होंने गोवा में मलयालम रीति-रिवाज से सात फेरे लिए. मौनी और सूरज की शादी में फैमिली और फ्रेंड्स मौजूद थे.

अब मौनी राय ने सोशल मीडिया पर शादी की खूबसूरत फोटोज शेयर की हैं. एक्ट्रेस ने इन फोटोज को शेयर करते हुए कैप्शन में अपने हमसफर के लिए दिल छू लेने वाली बात भी लिखी है.

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मौनी ने फोटोज को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, ‘आखिर मैंने तुम्हें पा लिया.’ हाथों में हाथ… फैमिली और फ्रेंड्स का आशीर्वाद… अब हम शादीशुदा हैं. आपका प्यार और आशीर्वाद चाहिए. लव सूरज और मौनी.

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एक फोटो में सूरज, मौनी की मांग भर रहे हैं. तो वहीं  सूरज नाम्बियार ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शादी की फोटोज शेयर की हैं. सूरज ने कैप्शन में लिखा है, मेरी बेस्ट फ्रेंड और मेरे जीवन के प्यार से शादी की. जीवन में सबसे भाग्यशाली व्यक्ति की तरह महसूस कर रहा हूं…

 

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मौनी रॉय ने शादी की एक वीडियो भी शेयर की थी.  फैंस और सेलिब्रिटी ने लगातार शुभकामनाएं दी थी.  मृणाल ठाकुर ने लव का इमोजी बनाया. तो वहीं नीति मोहन ने लिखा, पवित्रता और आनंद. एक यूजर ने लिखा, बहुत बहुत मुबारक और बधाई आप दोनों को.

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घर पर ऐसे बनाएं चिली फिश और फिश मौली

फिश मौली केरल की डिश है. यह स्पाइसी फिश करी है, इसमें नारियल का इस्तेमाल किया जाता है. यह एक बहुत ही स्वादिष्ट फिश करी है जिसे गाढ़े नारियल दूध के साथ पकाया जाता है. इस डिश को आप चावल के साथ डिनर या लंच में ​कभी भी खा सकते हैं तो चलिए जानते हैं  फिश मौली की रेसिपी.

  1. फिश मौली 

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सामग्री

लाल मिर्च पाउडर (1/2 टी स्पून)

धनिया पाउडर (1 टी स्पून)

नींबू का रस

कढ़ीपत्ता

रिफाइंड तेल (1 टेबल स्पून)

करी बनाने के लिए:

रिफाइंड औयल

सौंफ (1/2 टी स्पून)

हरी इलाइची (4-5)

नारियल दूध (आवश्यकतानुसार)

टमाटर (7-8 चेरी)

सरसों के दाने (1/2 टी स्पून)

कालीमिर्च (1/2 टी स्पून)

​बासा मछली

प्याज (2)

अदरक (एक इंच)

लहसुन की कलियां 5-6

हरी मिर्च (6-7)

हल्दी (1 टी स्पून)

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बनाने की वि​धि

अदरक, लहसुन और प्याज को काट लें.

हरी मिर्च को लम्बाई को काटने के बाद छोटे टुकड़ों में काट लें.

एक बाउल में कटी हुई हरी मिर्च, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च, प्याज, हल्दी पाउडर, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, थोड़ा सा कढ़ीपत्ता, आधा नींबू का रस, नमक और एक बड़ा रिफाइंड तेल लें.

इन सभी को अच्छी तरह मिला लें.

करी तैयार करने के लिए:

एक पैन में थोड़ा सा रिफाइंड तेल गर्म करें.

इसमें कढ़ीपता, सरसों के दाने, कालीमिर्च, सौंफ और हरी इलाइची डालें.

इसे तब तक भूनें जब तक यह चटकने न लगें.

इसमें मैरेनेटिड फिश, नारियल दूध और चेरी टमाटर डालें.

हरे धनिए से गार्निश सर्न करें.

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2. चिली फिश

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चिली फिश बहुत ही स्वादिष्ट डिश है. यह क्रंची, टेस्टी और ​काफी फीलिंग और स्वाद से भरपूर होती है. आप इसे डिनर पार्टी में भी  सर्व कर सकती हैं.

सामग्री:

फिश के टुकड़े (बोनलेस 250 ग्राम)

बेकिंग पाउडर (1 टी स्पून)

कौर्नफलोर (1/2 कप)

मैदा (1/2 कप)

सोय सौस (2 टी स्पून)

सेलेरी बारीक कटा हुआ (2 टेबल स्पून)

कालीमिर्च (1 टी स्पून)

नमक (स्वादानुसार)

तेल (आवश्यकतानुसार)

गानिर्शिंग के लिए हरी प्याज

सौस के लिए:

1 टेबल स्पून अदरक (1 टेबल स्पून, टुकड़ों में कटा हुआ)

लहसुन  (1 टेबल स्पून, कद्दूकस किया हुआ)

हरी मिर्च (1 टेबल स्पून)

सोया सौस (4 टेबल स्पून)

टोमैटो सौस (5 टेबल स्पून)

चिली सौस (1 टेबल स्पून)

कौर्नफलोर (1 टेबल स्पून)

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बनाने की वि​धि

1.फिश को फिंगर पीस में काट लें.

2.कौर्नफलोर, मैदा, बेकिंग पाउडश्र, सौस सौस, सेलेरी, कालीमिर्च पानी और नमक डालकर एक बैटर तैयार करें.

3.फिश के पीसों को बैटर में डिप करके तेल में गोल्डन ब्राउन होने तक फ्राई करें, इसे सर्विंग प्लेट में निकालें.

सौस तैयार करने के लिए:

1.एक पैन में तेल गर्म करें.

2.इसमें लहसुन, अदरक और हरी मिर्च डालें, इसमें सोया सौस, चिली और टोमैटो सौस डालें.

3.फाइनली इसमें कौर्नफलोर में थोड़ा सा पानी मिलाकर डालें एक बार जब यह उबलने लगे तो इसे आंच से हटा लें.

4.सर्व करते समय, इस सौस को फिश के टुकड़ों पर डालें, हरी प्याज से गार्निश करके सर्व करें.

5.हरी प्याज से गार्निश करके सर्व करें.

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हृदय हमारे शरीर का प्रमुख अंग है, जो शरीर के प्रत्येक हिस्से के लिए कई गैलन ब्लड पंप करता है. इस की महत्त्वपूर्ण गतिविधियों को समझते हुए हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि हमारी खानपान की आदतें और जीवनशैली हृदय ही नहीं संपूर्ण शरीर को स्वस्थ रखें.

जब हृदय के समग्र स्वास्थ्य की बात आती है तो कई चीजें गलत भी हो सकती हैं. कुछ कारक हृदय से संबंधित समस्याएं भी उत्पन्न कर सकते हैं. उन्हीं में से एक प्रमुख कारण आप की रसोई में मौजूद है- आप का खाना पकाने का तेल. आइए जानते हैं इस के बारे में:

किसी भी भारतीय घर में खाना पकाने का तेल पहली चीज है जो खाना बनाते समय कड़ाही में डाला जाता है. खाना पकाने का तेल वसा यानी फैट से बना होता है, जिन में से कुछ हमारे लिए अच्छे होते हैं और कुछ नहीं तो क्या इस का यह मतलब है कि हमें खाना पकाने का तेल पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए? नहीं, बल्कि हमें यह विस्तार से जानना चाहिए कि खाना पकाने का तेल आखिर किन चीजों से बना है.

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जहां मार्केट में बड़ी संख्या में ऐसे खाना पकाने के तेल मौजूद हैं, जो एकदूसरे की तुलना में बेहतर होने का दावा करते हैं, यह जानना बेहद महत्त्वपूर्ण है कि आप के पास खाना पकाने के तेल को ले कर सही जानकारी हो. जब आप सही खाना पकाने का तेल चुनते हैं, तो आप यह सुनिश्चित करते हैं कि आप के द्वारा बनाया गया खाना स्वस्थ है और स्वाद में किसी समझौते के बिना आप की सेहत का ध्यान भी रखता है.

आइए जानते हैं उन 5 महत्त्वपूर्ण बातों को, जिन्हें आप को अगली बार खाना पकाने का तेल खरीदते समय ध्यान रखना है:

  1. हाई ओमेगा-3

ओमेगा-3 सूजन से लड़ता है और ब्लड कोलैस्ट्रौल स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है. ओमेगा-3 समुद्री भोजन में पाया जाता है. यदि शाकाहारी हैं, तो यह और जरूरी है कि आप के खाना पकाने के तेल में ओमेगा-3 हो जिस से आप को रोजाना की डाइट में ओमेगा-3 की जरूरी मात्रा प्राप्त हो सके.

2. ओमेगा-6 और ओमेगा-3 का सही अनुपात

यह हृदय के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए कारगर है. इंडियन काउंसिल औफ मैडिकल रिसर्च के अनुसार, खाने के लिए ओमेगा-6 और ओमेगा-3 का सही अनुपात 5 से 10 के बीच होना चाहिए. उच्च मात्रा में ओमेगा-3 और सही अनुपात के संयोजन से हृदय का संपूर्ण स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद मिलती है.

3. उच्च मोनोअनसैचुरेटेड फैटी ऐसिड (मुफा)

मोनोअनसैचुरेटेड फैट के कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं. यह खाने में तेल कम सोखने में मदद करता है, जिस से खाने का पाचन आसान हो जाता है. यह इस बात को भी सुनिश्चित करता है कि स्वास्थ्य और स्वाद से समझौता किए बिना खाने में पौष्टिक तत्त्वों की मात्रा बरकरार रखती है.

4. गामा औरिजेनोल

यह बैड कोलैस्ट्रौल को कम करता है. औरिजेनोल बैड कोलैस्ट्रौल को कम करने और गुड कोलैस्ट्रौल को बढ़ाने के लिए जाना जाता है. यह आप के हृदय के बेहतर स्वास्थ्य के लिए खाना पकाने के तेल में मौजूद होना आवश्यक है.

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5. विटामिन ए, डी और ई

ये पोषण बनाए रखने में मददगार होते हैं. विटामिन ए दृश्यता से संबंधित है और जीवनशैली व तनाव से हुए नुकसान को सुधारने में मदद करता है. विटामिन डी इम्यूनिटी के  लिए आवश्यक है और हड्डियों को मजबूत करने के लिए जाना जाता है. विटामिन ई ऐंटीऔक्सीडैंट है जो शरीर में मुक्त रैडिकल्स को कम करने में मदद करता है. ये सभी आप के संपूर्ण पोषण के लिए आवश्यक हैं. खाना पकाने के लिए अच्छा तेल अपनाने से आप हृदय से संबंधित समस्याओं को कम कर सकते हैं. यह भी सुनिश्चित करें कि आप की खुराक संतुलित हो.

डा. प्रियंका रोहतगी

हैड न्यूट्रीशनिस्ट, अपोलो हौस्पिटल, बैंगलुरु 

“भाजपा चाणक्य” अमित शाह का चुनावी पसीना…!

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जिस तरीके से भाजपा के विधायकों को क्षेत्र में घुसने नहीं दिया जा रहा है गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई है लगभग 14 विधानसभा क्षेत्रों में जहां जाट बाहुल्य है भाजपा की बोलती बंद कर दी गई है और भाजपा प्रत्याशियों को गांव में घुसने नहीं दिया जा रहा के बाद भारतीय जनता पार्टी के  चाणक्य अमित शाह के चेहरे पर पसीने की बूंदें उभर आई है.

दरअसल, उत्तर प्रदेश चुनाव वह रास्ता है जहां से केंद्र की सत्ता हासिल होती है योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री काल में उत्तर प्रदेश में सामंतशाही के बाद जाटों का गुस्सा नाराजगी चुनाव की घोषणा के साथ ही ही सतह पर आ गया है.

परिणाम स्वरूप गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व के दिन भी भाजपा के चाणक्य अमित शाह लगभग 250 जाट नेताओं के साथ लगातार चर्चा करते रहे और हाथ जोड़ कर  के भाजपा को वोट देने की चिरौरी करते रहे.

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दरअसल, भाजपा अब यह समझ चुकी है कि उत्तर प्रदेश की सत्ता हाथ से निकलना ही चाहती है मगर उसके बाद केंद्र की सत्ता भी नहीं रहेगी. परिणाम स्वरूप भाजपा के बड़े नेताओं के चेहरों के रंग बदलने लगे हैं अभी तक अपने हद अभिमान, अपने अलोकतांत्रिक कामकाज के बाद स्थितियां इतनी बिगड़ी जा चुकी है कि उसे बनाने में अब समय दे रहे हैं, मगर शायद अब देर हो चुकी है. जाट और किसानों से दूरी बनाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  और भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने देश के 73 वें गणतंत्र दिवस पर समय निकाल  पश्चिम उत्तर प्रदेश के बड़े जाट नेताओं से मुलाकात की. दिल्ली से बीजेपी के सांसद जाट नेता प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के आवास पर हुई इस बैठक में जाट समुदाय के करीब 250 प्रभावी नेताओं ने शिरकत की. इस बैठक को ‘सामाजिक भाईचारा बैठक’ का नाम दिया गया. बैठक में अमित शाह ने जाट समुदाय को साधने के लिए बड़ी बड़ी बातें कहीं.

अमित शाह की मीठी चुपड़ी बातें

इस बैठक में जाट नेताओं से जो कहा गया उस पर आपको गौर करना चाहिए क्योंकि इन्हीं बातों में भाजपा के हर एक सच को आसानी से पकड़ सकते हैं.

अमित शाह  ने कहा,-” हमारा घोषणापत्र आएगा तो देखना कि किसानों का ऋण चुकाने के लिए हम क्या कर रहे हैं. राहुल गांधी तो किसानों के लिए आलू की फैक्ट्री लगाने की बात कर रहे थे. उन्हें मालूम ही नहीं है कि रबी और खरीफ की फसल में क्या अंतर होता है. आज से 5 साल पहले यूपी गन्ना, चीनी, गेहूं, आलू, आंवला आदि के उत्पादन में देश में टॉप-5 में भी नहीं था. वहीं आज यूपी इन फसलों के उत्पादन में देश में नंबर-1 पर पहुंच गया है.”

भाजपा के चाणक्य अमित शाह यहां तक नहीं रुके उन्होंने उन्होंने राहुल गांधी राग अलापने के बाद कहा, -“योगी जी के आने के बाद उत्तर प्रदेश में क्या एक भी दंगा हुआ है. बहन बेटियां सुरक्षित जा सकती है कि नहीं. जो मोटरसाइकिल पर घूम-घूम कर मूंछों पर ताव देकर अपराध करते थे, वे अब उत्तर प्रदेश छोड़ गए है कि नहीं.”

पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के सुपुत्र सांसद प्रवेश वर्मा द्वारा आयोजित इस जाट मिलन समारोह में अमित शाह ने कहा,-” झगड़ा करना है तो हमसे कर लो भाई. घर से बाहर के लोगों को क्यों लाना है. आप को भी मालूम है कि भारतीय जनता पार्टी के अलावा दूसरा विकल्प क्या है. प्रत्याशियों को आप देख ही रहे हो. सपा और आरएलडी की सरकार बनेगी तो यह आजम खान छूट जाएगा कि नहीं छूट जाएगा. सोचने का काम आप मत करो. वोट हमें दे दो तो सोचने का काम हम करेंगे.”

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अब यह समझने वाली बात है कि लंबे समय तक किसानों से कोई बात नहीं करने वाली भाजपा सरकार के चाणक्य अमित शाह अब भी किसानों के बीच जाकर के वार्ता करने से गुरेज कर रहे और बंद कमरे में अपने ही पार्टी से जुड़े हुए जाट नेताओं से चर्चा करके माहौल को बदलने का प्रयास किया जा रहा है हद तो यहां तक हो गई जब यह तक कहा गया कि जयंत चौधरी के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हुए हैं.

भाजपा सत्ता के लिए कितनी  बेताब है यह अब धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है. आखिर यह सब उत्तर प्रदेश में अपनी सत्ता को बचाने की नीचे आने की कवायद ही तो है. जब भाजपा के बड़े चेहरों ने देख लिया कि अब तो उल्टी गिनती शुरू हो गई है तो इस तरह उनकी घबराहट  प्रदर्शित होने लगी है.

Anupamaa: अनुज को मालविका कहेगी ‘जोरू का गुलाम’, आएगा ये ट्विस्ट

सुधांशु पांडे और रुपाली गांगुली स्टारर सीरियल अनुपमा की कहानी में हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है. जिससे दर्शकों का फुल एंटरटेनमेंट हो रहा है. शो के आने वाले एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो के बिते एपिसोड में आपने देखा कि अनुपमा काव्या को एक और मौका देती है. काव्या अनुज-अनुपमा के ऑफिस में फिर से जॉब करती है. तो दूसरी तरफ वनराज गुस्से से आग बबूला हो जाता है. वह अनुज का बिजनेस हड़पने के लिए मालविका का इस्तेमाल कर रहा है. ऐसे में उसे लग रहा है कि काव्या बाधा बनेगी.

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काव्या, अनुज और अनुपमा के प्रोजेक्ट में काम कर रही है. अनुपमा अनुज से कहती है कि काव्या ने वादा किया है कि वह इस बार अच्छा काम करती रहेंगी और उन्हें निराश नहीं करेंगी क्योंकि यह उसके लिए आखिरी मौका है. लेकिन फिर भी हमे चौकन्ना रहना होगा.

 

तो दूसरी तरफ वनराज मालविका से मुंबई में अपना होटल शुरू करने के लिए कहता है. तभी अनुपमा उस फैसले पर आपत्ति जताएगी और वो कहती है कि मालविका अहमदाबाद में ही होटल शुरू करे, जरूरत पड़ने पर बाद में वह मुंबई के बारे में सोचे. अनुज भी अनुपमा की बातों का समर्थन करता है तभी मालविका गुस्सा हो जाती है और अनुज को कहती है कि तुम अभी सो जोरू का गुलाम बन गये हो. अनुपमा की कही हुई हर बात तुम्हें अच्छी लगती है. शो में अब ये देखना होगा कि क्या मालनविका वनराज के लिए अनुज-अनुपमा के खिलाफ जाएगी?

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शो में ये भी दिखाया गया कि नंदिनी को अपनी गलती का एहसास होता है और वह समर के साथ सुलह करने का फैसला करती है. नंदिनी, समर से कहती है कि वह उससे बहुत प्यार करती है. लेकिन समर कहता है कि उन दोनों को एक बार और इस रिश्ते के बारे में सोचना होगा. नंदिनी बहुत अकेला महसूस करती है और रोते हुए चली जाती है.

6 साल की उम्र में ही टीवी की ‘इमली’ ने झेला ये दर्द, Parents का हो गया था तलाक

टीवी सीरियल इमली की लीड एक्ट्रेस सुंबुल तौकीर खान (Sumbul Touqeer Khan) यानी इमली अपनी एक्टिंग से दर्शकों के दिल पर राज करती है. वह घर-घर में इमली के करिदार में काफी मशहूर हैं. इमली ने काफी कम उम्र में टीवी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना ली है. तो आइए इस खबर में आपको इमली के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं.

सुंबुल तौकीर खान (इमली) का बचपन बहुत तकलीफ में बीता है. जब वह बहुत छोटी थीं तो उनके माता-पिता का तलाक हो गया था.

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रिपोर्ट के मुताबिक सुंबुल 6 साल की थी तभी उनके Parents का तलाक हो गया था.  उन्होंने अपने पैरेंट्स के तलाक को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि जब मैं 6 साल की थी तो मेरे पैरेंट्स का तलाक हो गया था, लाइफ बहुत अलग थी फिर भी मुश्किल नहीं थी क्योंकि मैं अपने पिता से प्यार करती थी. उन्होंने मेरी और मेरी बहन की देखभाल एक पिता और मां की तरह की है.

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एक इंटरव्यू के अनुसार सुंबुल ने बताया था कि मेरे पिता कई डांस रिएलिटी शोज के कोरियोग्राफर रह चुके हैं और वह हमेशा से चाहते थे कि उनकी बेटियां अपनी लाइफ में कुछ बड़ा करें. उन्होंने देखा कि मेरा और मेरी बहन की डांस में बहुत दिलचस्पी है तो वह हमें साल 2016 में दिल्ली से मुंबई लेकर आ गए.

 

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सुंबुल ने आगे बताया कि इसके बाद उन्होंने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपनी किस्मत को आजमाना शुरू कर दिया. एक तरह से देखा जाए तो हमें पिता से ये एक्टिंग का कीड़ा मिला. मैंने और मेरी बहन ने दिल्ली में कृष्णा और राम लीला के कई प्ले किए हैं जहां से हमें एक्टिंग का शौक चढ़ा.

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हनी… प्रैग्नैंसी शादी के बाद

कई बार शादी से पहले ही लड़की का गर्भ ठहर जाता है. ऐसे कई मामले आसपास देखने को मिल जाते हैं. ऐसे मामले जैसेतैसे निबटा तो लिए जाते हैं पर इस के परिणाम बहुत बार लड़की को शारीरिक व मानसिक आघात पहुंचाते हैं

दोपहर को लगभग 1 बजा था. डाक्टर रमा श्रीवास्तव अपने अस्पताल में रोज की तरह इलाज के लिए आई महिलाओं को देख रही थीं. अगले मरीज के रूप में उन के सामने 24 साल की एक लड़की आई. डाक्टर रमा कुछ सवाल करतीं, उस से पहले ही लड़की बोल पड़ी-

‘‘बौयफ्रैंड से सैक्स करने के बाद मु?ो प्रैग्नैंसी कंसीव हो गई है. हम अभी शादी नहीं करना चाहते. इस कारण से एबौर्शन कराना चाहती हूं.’’

लड़की ने ऐसे आत्मविश्वास के साथ यह बात कही कि डाक्टर रमा चौंक गईं. वे संभल कर बोलीं, ‘‘तुम्हारे साथ कोई आया है, उसे अंदर बुला लो.’’

‘‘नहीं डाक्टर, मेरे साथ कोई नहीं आया है. एबौर्शन कराने भी मैं अकेली ही आऊंगी,’’ लड़की बोली.

‘‘तुम्हें इस बात का कोई अफसोस नहीं है कि तुम शादी से पहले मां बनने वाली हो. अगर वह लड़का शादी से इनकार कर देगा तो क्या होगा?’’ डाक्टर रमा ने उसे सम?ाने का प्रयास किया.

‘‘डाक्टर, मैं ने सैक्स अनजाने में नहीं किया. सेफ सैक्स पीरियड की गणना करने में गलती हो गई, जिस से प्रैग्नैंसी हो गई. मैं सर्विस में हूं. मु?ो इन बातों से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. मैं सेफ एबौर्शन चाहती हूं, इस के लिए आप के पास आई हूं.’’

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डाक्टर रमा लड़की के आत्मविश्वास और युवा पीढ़ी में आए बदलाव को महसूस करने की कोशिश कर रही थीं.

यह उदाहरण केवल एक डाक्टर के यहां देखने को नहीं मिलता है. दूसरे डाक्टरों से बात करने पर पता चलता है कि प्रैग्नैंसी को ले कर लड़कियों का नजरिया बदल रहा है.

डाक्टर नमिता के पास शाम को 6 बजे एक लड़की आई. अपनी परेशानी बताते उस ने कहा, ‘‘डाक्टर साहब, मु?ो एक माह की प्रैग्नैंसी थी. उस के एबौर्शन के लिए मैं ने एबौर्शन पिल्स खा ली थीं. उस के बाद मु?ो ब्लीडिंग हुई. दवा खाए 10 दिन बीत गए हैं. पर मु?ो अभी भी ब्लीडिंग होती है.’’

डाक्टर नमिता ने लड़की का अल्ट्रासांउड कर के देखा तो पाया कि एबौर्शन की दवा से लड़की के गर्भाशय की सफाई पूरी तरह से नहीं हुई है. गर्भ के कुछ टुकड़े उस में रह गए हैं, जिस से ब्लीडिंग हो रही है. इस के लिए डाक्टर ने लड़की को दोबारा एबौर्शन कराने की सलाह दी.

लड़की का लड़के से सैक्स रिलेशन है. जिस के चलते उसे प्रैग्नैंसी हो गई. लड़की ने यह भी बताया कि वे दोनों शादी नहीं करना चाहते. केवल दोस्ती को एंजौय कर रहे हैं. लड़की रात में एबौर्शन कराना चाहती थी. जिस से उसे रातभर अस्पताल में आराम करने को मिल जाए. अगले दिन वह सामान्य रूप से काम करना चाहती थी.

छोटे शहरों में भी बदली मानसिकता

शादी से पहले प्रैग्नैंसी को ले

कर मानसिकता में बदलाव केवल बड़े शहरों में ही नहीं हुआ है, छोटे शहरों में भी हालात बदल रहे हैं. लखनऊ के करीब के बाराबंकी जिले में रहने वाली एक लड़की का अपने दोस्त के साथ सैक्स करने से प्रैग्नैंसी कंसीव हो गई. यह बात उस के घरवालों को पता चली. वे लड़की का एबौर्शन कराने के लिए एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ले गए. वहां मौजूद दाई ने लड़की का एबौर्शन करने के दौरान कोई गलत इंजैक्शन लगा दिया. जिस के बाद लड़की की हालत खराब होने लगी. लड़की को लखनऊ के सिविल अस्पताल भेजा गया. इस के पहले कि सिविल अस्पताल के डाक्टर उस का इलाज करते, लड़की की मौत हो गई.

उत्तर प्रदेश महिला आयोग के कार्यालय में शिकायत की एप्लीकेशन लिए भटक रही एक लड़की से उस के प्रेमी ने शादी का ?ांसा दे कर सैक्स संबंध बनाए. इस बीच वह गर्भवती हो गई. जब लड़की ने शादी करने के लिए लड़के पर दबाव डाला तो वह घरवालों की नाराजगी की बात कह कर दूर हट गया. प्रेमी को सबक सिखाने के लिए लड़की पहले एसपी, लखनऊ, के पास गई. इस के बाद महिला आयोग आ गई. लड़की के घरवाले पूरे मामले को जानते हैं. वे लड़की को एबौर्शन कराने की सलाह भी दे रहे थे.

कई लड़कियों के बीच किए गए सर्वे समाज के हालात पेश करते हैं. सर्वे में 23 प्रतिशत लड़कों और 21 प्रतिशत लड़कियों ने माना कि शादी से पहले सैक्स के हालात उन के सामने आए थे. 19 प्रतिशत लड़कों और 9 प्रतिशत लड़कियों ने माना कि

शादी से पहले उन लोगों ने सैक्स किया है. 28 प्रतिशत लड़कों और 49 प्रतिशत लड़कियों ने माना कि उन के परिवार के लोग इस बारे में जानते थे.

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बदनामी का भय नहीं

इस तरह की ज्यादातर समस्याएं सब से पहले अस्पतालों और पुलिस के पास पहुंचती हैं. लड़कियों की गुमशुदगी के ज्यादातर मामले प्रेम संबंधों के कारण होते हैं. इन में बहुत सारे मामलों में लड़कियां अपनी मरजी से प्रेमी के साथ घर से बाहर जाती हैं. कुछ दिनों बाद जब घरपरिवार की नाराजगी कम हो जाती है तो वापस लौट आती हैं. जिन की लड़कियां वापस आ जाती हैं वे पुलिस के पास यह बताने नहीं आते कि लड़की वापस आ गई है. जब कोई अनहोनी हो जाती है, तभी मामला पुलिस के पास आता है.’’

समाजशास्त्री डा. दीपा सनवाल कहती हैं, ‘‘पहले लड़कियों को बदनामी का डर होता था. इसलिए वे शादी से पहले प्रैग्नैंसी से बचती थीं. अब शहर बड़े हो गए हैं, लोग एकदूसरे से कम मतलब रखने लगे हैं. ऐसे में किसी के बारे में सामने वाले को कम पता होता है. अगर किसी को पता होता भी है तो वह कुछ समय के बाद भूल जाता है.

‘‘पहले शादी का रिश्ता आपसी लोगों ओर रिश्तेदारों द्वारा तय कराया जाता था. इस कारण बदनामी का असर ज्यादा होता था. अब वैवाहिक विज्ञापनों से शादी तय होती है. जहां पर एकदूसरे के बारे में इतनी जानकारियां नहीं हो पाती हैं. इसलिए लड़कियों का राज खुलने का भय खत्म हो गया है.’’

गर्भनिरोधकों का असर

डाक्टर रमा श्रीवास्तव कहती हैं, ‘‘गर्भ निरोधकों, इमरजैंसी पिल्स और एबौर्शन पिल्स जैसी दवाओं ने सैक्स के बाद गर्भ ठहरने के भय को खत्म कर दिया है. इमरजैंसी पिल्स का उपयोग रैगुलर गर्भनिरोधक के रूप में किया जा रहा है. सैक्स अब लड़कियों के लिए भी कोई अजूबा नहीं रह गया है. बहुत सारी लड़कियां तो अनहोनी होने के बाद सबक नहीं लेतीं. उन्हें यह सब एक ऐक्सिडैंट सा लगता है. दुर्घटना से लगी चोट के ठीक होने के बाद दोबारा वही गलती दोहराते समय किसी तरह का कोई भय दिल में नहीं रहता है.’’

डा. रमा आगे कहती हैं, ‘‘इमरजैंसी पिल्स रैगुलर प्रयोग करने से शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं. हड्डियों की कमजोरी, कमरदर्द, हैवी ब्लीडिंग और बां?ापन जैसी मुसीबतें सामने आ सकती हैं. इस के अलावा बिना बाहरी सुरक्षा के सैक्स करने से यौनरोग और एड्स जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं. इमरजैंसी पिल्स केवल इमरजैंसी के लिए होती हैं, इन को रैगुलर लेना ठीक नहीं होता. इन के असर से पीरियड्स रैगुलर नहीं होते.’’

जल्दी हो जाती है शादी

शादी से पहले प्रैग्नैंसी की लाख हानियों के बाद भी इस का समर्थन करने वालों के भी रोचक तर्क हैं. 3 साल से लिवइन रिलेशनशिप में रह रही वंदना बताती है, ‘‘हम लोग शादी के लिए समय नहीं निकाल पा रहे थे. उसी बीच एक बार गर्भ ठहर जाने के बाद हम लोग शादी करने के लिए तैयार हो गए. हम ने अपने घरों में भी बात कर ली और वे लोग इस बात के लिए तैयार हो गए कि गर्भ का पता चलने से पहले ही शादी कर लो. वे चाहते थे कि समाज में बात फैलने से पहले शादी हो जाए.’’

लिवइन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों पर कानूनी और सामाजिक स्वीकृति मिलने के बाद डर पूरी तरह से खत्म हो गया है. लड़कियों को लगता है कि शादी से पहले गर्भवती होने के बाद जो प्रेमी शादी के लिए समय नहीं निकाल पा रहा था वह तुरंत इस के लिए तैयार हो जाता है. कुछ अविवाहित सैलिब्रिटी जब शादी के बिना बच्चा पैदा करने की बात कहते हैं तो समाज के लोगों को उस से बल मिलने लगता है. सैक्स अब पहले जैसा हौआ नहीं रहा.

शादी तक रहता है तनाव

शादी से पहले अगर गर्भ ठहर गया है तो तब तक मन परेशान रहता है जब तक शादी न हो जाए. यह तनाव मां और उस के पेट में पलने वाले बच्चे दोनों के लिए घातक होता है. बिना शादी के गर्भ ठहरने का रिस्क लेना भूल होती है. घरपरिवार के लोग भले ही दबाव में बात को मान लें पर पूरी जिंदगी एक कांटा सा मन में चुभता रहता है. कभीकभी पैदा होने वाले बच्चे को बड़े होने पर यह पता चलता है तो उसे भी खराब लगता है. तर्क कुछ भी दिए जाएं, पर शादी से पहले गर्भवती होना ठीक नहीं होता है. समाज की मानसिकता अभी नहीं बदली है.

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कई बार शादी से सगाई के बीच के समय में भी यह हो जाता है. ऐसे में कभीकभी शादी टूट जाने की घटना भी घट जाती है. मन पर जब तक सबकुछ सही से न हो जाए तब तक तनाव बना रहता है. प्रैग्नैंसी का सुखद एहसास मन नहीं कर पाता है. शादी से पहले गर्भवती होने में खतरे ज्यादा हैं. शायद यही वजह है कि लड़कियां ऐसे मामलों में सब से पहले गर्भ से छुटकारा पाना चाहती हैं. इस के लिए वे गोलियों से ले कर एबौर्शन तक का उपाय करती हैं जो कई तरह की बीमारियों को जन्म देती हैं. इसलिए शादी से पहले प्रैग्नैंसी को भूल जाना ही सम?ादारी होती है.

पौधशाला में जीवनाशी एकीकृत प्रबंधन

एक ही समय पर किसान खेत की जुताई कर के उस में गोबर, कंपोस्ट व बालू मिला कर अच्छी तरह तैयार कर लें. पौधशाला की क्यारी बनाते समय यह भी ध्यान रखें कि वह जमीन से 6-8 सैंटीमीटर उठी हुई हो और चौड़ाई 80-100 सैंटीमीटर ही रखें.

पौधशाला में ट्राईकोडर्मा और सड़ी हुई गोबर की खाद का मिश्रण अच्छी तरह से मिलाएं. जीवाणु आधारित स्यूडोसैल की 25 ग्राम प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मिट्टी में मिला कर बोआई करें.

बीजों की बोआई करते समय पौधशाला में बीज से बीज व लाइन से लाइन व बीज की गहराई का खास ध्यान रखें.

पौधों को जमने के बाद ट्राईकोडर्मा का 10 ग्राम प्रति लिटर पानी में घोल तैयार कर छिड़काव करें. पौधशाला में पौध उखाड़ते समय सही नमी होनी चाहिए.

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रोपाई के एक दिन पहले पौधशाला में से निकाल कर पौधे को ट्राईकोडर्मा 10 ग्राम प्रति लिटर पानी के हिसाब से खेत में छायादार जगह पर एक फुट गहरा गड्ढा खोद कर उस में पौलीथिन शीट बिछा कर नाप कर पानी भर कर दें और जरूरी मात्रा में ट्राईकोडर्मा को मिला लें, फिर उस में पौधे के गुच्छे बना कर रातभर खड़ा कर दें, जिस से निकट भविष्य में फसल में रोग लगने का खतरा खत्म हो जाता है.

सही समय पर किसान खेत की जुताई कर के उस में गोबर, कंपोस्ट व बालू मिला कर अच्छी तरह तैयार कर लें. पौधशाला की क्यारी बनाते समय यह भी ध्यान रखें कि वह जमीन से 6-8 सैंटीमीटर उठी हुई हो और चौड़ाई 80-100 सैंटीमीटर ही रखें.

पौधशाला में ट्राईकोडर्मा और सड़ी हुई गोबर की खाद का मिश्रण अच्छी तरह से मिलाएं. जीवाणु आधारित स्यूडोसैल की 25 ग्राम प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मिट्टी में मिला कर बोआई करें.

बीजों की बोआई करते समय पौधशाला में बीज से बीज व लाइन से लाइन व बीज की गहराई का खास ध्यान रखें.

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पौधों को जमने के बाद ट्राईकोडर्मा का 10 ग्राम प्रति लिटर पानी में घोल तैयार कर छिड़काव करें.

पौधशाला में पौध उखाड़ते समय सही नमी होनी चाहिए.

रोपाई के एक दिन पहले पौधशाला में से निकाल कर पौधे को ट्राईकोडर्मा 10 ग्राम प्रति लिटर पानी के हिसाब से खेत में छायादार जगह पर एक फुट गहरा गड्ढा खोद कर उस में पौलीथिन शीट बिछा कर नाप कर पानी भर कर दें और जरूरी मात्रा में ट्राईकोडर्मा को मिला लें, फिर उस में पौधे के गुच्छे बना कर रातभर खड़ा कर दें, जिस से निकट भविष्य में फसल में रोग लगने का खतरा खत्म हो जाता है.

चुनाव और प्रलोभन: रोग बना महारोग

चुनाव का सीधा मतलब अब कोई न कोई लोभ या प्रलोभन हो गया है. लगभग सभी राजनीतिक पार्टीयां मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रही है और यह सीधा सीधा लाभ नकद रुपए  और अन्य संसाधन का है जिसे सारा देश देख रहा है और संवैधानिक संस्थाएं तक असहाय स्थिति में दिखाई दे रही है, कुछ नहीं कर पा रही है.

क्या हमारे संविधान में कोई ऐसा प्रावधान है कि राजनीतिक दल देश के मतदाताओं को किसी भी हद तक लुभाने के लिए स्वतंत्र हैं? और मतदाता अपना विवेक गिरवी रख कर के अपने मत को ऐसे राजनेताओं को बेच देंगे जो सत्तासीन होकर 5 साल उन्हें भूला बैठते हैं क्या यह उचित है कि चुनाव जीतने के लिए लैपटॉप, स्कूटी, मोबाइल, रुपए पैसे दिए जाना आवश्यक हो, क्या अब विकास का मुद्दा पीछे रह गया है. क्या देश की अन्य महत्वपूर्ण मसले पीछे रह गए हैं कि हमारे नेताओं को रुपए पैसे का लाली पॉप मतदाताओं को देना अनिवार्य हो गया है या फिर यह सब गैरकानूनी है.

अब देश के उच्चतम न्यायालय ने इस मसले पर एक्शन ले लिया है और अब देखना यह है कि आगे आगे होता है क्या, क्या रुपए पैसे का लोभ लालच पर अंकुश लग जाएगा या फिर  और बढ़ता चला जाएगा यह प्रश्न आज हमारे सामने मुंह बाए खड़ा है.

विगत 25 जनवरी को उच्चतम न्यायालय  ने कहा है-” चुनाव में राजनीतिक दलों के मुफ्त सुविधाएं देने के वादे करना एक गंभीर मुद्दा है.”

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने इस मामले को लेकर देश में चुनाव संपन्न कराने वाली संवैधानिक संस्था “चुनाव आयोग” और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दिया है.

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चुनाव में “माले मुफ्त दिल ए बेरहम”जैसी हरकतें कर रहे राजनीतिक दलों  की मान्यता रद्द करने की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने यह कदम उठाया. इसके बाद अब यह बहुत कुछ संभव है कि आने वाले समय में कोई निर्णायक परिणाम सामने आ जाए.

आपको यह बताते चलें कि सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रमण ने कहा- ‘अदालत जानना चाहती है कि इसे कानूनी रूप से कैसे नियंत्रित किया जाए. क्या ऐसा इन चुनावों के दौरान किया जा सकता है? या इसे अगले चुनाव के लिए किया जाए.निश्चित ही यह एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि मुफ्त बजट तो नियमित बजट से भी तेज है.”

दरअसल,देश की चुनाव व्यवस्था और राजनीतिक दलों की मुफ्त घोषणाओं पर यह सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण और गंभीर तंज है.

 रहस्यमय निंद्रा में चुनाव आयोग

लंबे समय से देश में चुनाव आयोग मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा की जा रही घोषणाओं पर एक तरह से चुप्पी साथ कर बैठा हुआ है. लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव उसे निष्पक्ष संपन्न करवाने की जिम्मेदारी देश के संविधान ने चुनाव आयोग को सौंपी है और यह चुनाव आयोग  केंद्र सरकार की मुट्ठी में रहा है. ऐसे में राजनीतिक दलों के द्वारा किए जा रहे असंसदीय व्यवहार और कानून की दृष्टि से गलत सलत व्यवहार को देखते हुए भी  अनदेखा करता रहा है. अन्यथा लगभग 40 वर्ष पूर्व शुरू हुए मतदाताओं को लुभाने के प्रयासों पर प्रारंभ में ही अंकुश लगाया जा सकता था.

दक्षिण के बड़े नेता अन्नादुरई ने बहुत सस्ते में मतदाताओं को चावल देने की घोषणा के साथ यह चुनावी प्रलोभन की यात्रा शुरू हुई है, जिसके बाद एन टी रामाराव ने आंध्र प्रदेश में इसे आगे बढ़ाया.

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वर्तमान में उत्तर प्रदेश चुनाव में जो अपने सबाब पर है अखिलेश यादव ने मतदाताओं को लुभाने के लिए घोषणाओं की झड़ी लगा दी है अगर हमारी सरकार आई तो हम यह देंगे वह देंगे इसी तरह कांग्रेस की चुनाव कमान संभालने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी उत्तर प्रदेश चुनाव में मतदाताओं को कांग्रेस की सरकार बनने पर बहुत कुछ फ्री में देने का ऐलान कर दिया है.

पंजाब में कांग्रेस के नवजोत सिंह सिद्धू ने भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और फ्री में बहुत कुछ देने की योजनाएं जारी कर दी हैं. अब यह रोग देश भर में महारोग बन चुका है. यही कारण है कि उच्चतम न्यायालय ने इसे गंभीरता से लिया है.

आपको यह बताते चलें कि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ एक बैठक कर उनसे उनके विचार जानना चाहा था और फिर यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया था.

उच्चतम न्यायालय में मतदाताओं को प्रलोभन वाली यह याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है. याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दलों के चुनाव के समय मुफ्त चीजें देने की घोषणाएं मतदाताओं को अनुचित रूप से प्रभावित करती हैं. इससे चुनाव प्रक्रिया भी प्रभावित होती है और यह निष्पक्ष चुनाव के लिए ठीक नहीं है.

पीठ ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सुब्रह्मण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु सरकार मामले के एक पुराने फैसले का भी उल्लेख किया. उसमें अदालत ने कहा था कि चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों को जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण के रूप में नहीं माना जा सकता है. इस बारे में अदालत ने चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों के परामर्श से आदर्श आचार संहिता में शामिल करने की सलाह दी थी. याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील  ने दलील दी कि इस मामले में केंद्र सरकार से हलफनामा तलब करना चाहिए. राजनीतिक दल किसके पैसे के बल पर रेवड़ियां बांटने के वादे कर रहे हैं.  राजनीतिक दल मुफ्त उपहार की पेशकश कर रहे हैं.हर पार्टी एक ही काम कर रही है. इस पर न्यायमूर्ति रमण ने उन्हें टोका और पूछा कि अगर हर पार्टी एक ही काम कर रही है तो आपने अपने हलफनामे में केवल दो पार्टियों का ही नाम क्यों लिया है. जवाब में वकील साहब ने कहा कि वे पार्टी का नाम नहीं लेना चाहते. पीठ में शामिल न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने उनसे पूछा कि आपके बयानों में काफी कुछ स्पष्ट है. याचिकाकर्ता के वकील का सुझाव था कि इस तरह की गतिविधि में लिप्त पार्टी को मान्यता नहीं देनी चाहिए.

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अब देखिए आगे क्या होता है क्या उच्चतम न्यायालय यह इस कदम से देश में आने वाले चुनाव में लोभ प्रलोभन का खेल बंद होगा या फिर यह बढ़ता ही चला जाएगा.

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