यह कहावत सत्य है कि इंसान के हाथ की पांचों उंगलियां बराबर नहीं होतीं, यह भी कि उन के आकार के साथ ही उन की गुणवत्ता भी पृथक होती है. इसी प्रकार अरविंद और शांति के चारों बच्चे 4 स्वभाव के थे. सब से बड़े गौतम कुशाग्र बुद्धि के होने  के साथ ही सरल और निश्छल स्वभाव के थे. शांतिप्रिय होने के कारण उन की प्रशासनिक सर्विस में रुचि नहीं थी. एमएससी श्रेष्ठ नंबरों से उत्तीर्ण होते ही उन की डिगरी कालेज में प्रोफैसर के पद पर नियुक्ति हो गई. कुछ समय के बाद वे विश्वविद्यालय में कैमिस्ट्री के हैड औफ द डिपार्टमैंट नियुक्त किए गए.

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