अपने हिस्से से ज्यादा लेने और ज्यादा से ज्यादा पैसे बनाने के अशोक के स्वभाव ने अपने ही भाई मनोज के लिए अचानक एक मुसीबत खड़ी कर दी. ऐसे में मनोज ने क्या तरकीब अपनाई जिस से न केवल सचाई की जीत हुई बल्कि अशोक को शर्मिंदा भी होना पड़ा?

दरवाजे की घंटी बजी. मीना ने दरवाजे पर जा कर मैजिक आई से बाहर झांका. जमाने का माहौल अच्छा नहीं था, इसलिए सावधानी से काम लेना पड़ता था. बाहर खड़ा उस इलाके का डाकिया शिवलाल था. मीना ने दरवाजा खोला.

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