Download App

वह राह जिस की कोई मंजिल नहीं: भाग 2

नंदू मना करती रही, पर वह माने तब न? आखिर अश्वित पैसा जमा ही कर आया. फिर तो नंदू को चारधाम की यात्रा पर जाना ही पड़ा. ‘बड़ा जिद्दी है,’ नंदू के मुंह से एकाएक निकल गया. बगल वाली सीट पर बैठी महिला ने उस की ओर चौंक कर देखा, पर तब तक उस ने आंखें बंद कर ली थीं. आंखें बंद किए हुए ही नंदू सोचने लगी, ‘इस समय वह क्या कर रहा होगा? इस समय तो सो रहा होगा, और क्या करेगा.’

नंदू का वेतन प्रबोधजी सीधे उस के बैंक खाते में पूरा का पूरा जमा कर देते थे. खर्च के लिए ऊपर से सौ,

दो सौ रुपए दे देते थे. वह पैसा अश्वित अपने क्रिकेट, बौल, खिलौनों और चौकलेट पर उड़ा देता था.

रंजना बड़बड़ातीं, ‘‘तू नंदू का पैसा क्यों खर्च करता है? तुझे जरूरत हो, तो मुझ से मांग.’’

‘‘आप मुझे जल्दी कहां पैसा देती हैं. पचास सवाल करती हैं. नंदू तो तुरंत पैसा दे देती हैं.’’

‘‘पर, तुम नंदू का पैसा इस तरह खर्च करते हो, यह अच्छा नहीें लगता.’’

‘‘क्यों अच्छा नहीं लगता?’’

‘‘यह लड़का तो…’’ रंजनाजी सिर पीट लेतीं.

ऐसा नहीं था कि रंजनाजी नंदू के बारे में कुछ नहीं सोचती थीं. न जाने कितनी बार उन्होंने नंदू से शादी के लिए कहा था, पर नंदू ने हमेशा सिर झटक दिया था, ‘‘अब यही मेरा घर है और आप ही लोग मेरे सबकुछ हैं. अब मुझे शादी नहीं करनी. मेरा जीवन इसी घर में कटेगा.’’

‘‘भला इस तरह कहीं होता है नंदू? शादी तो करनी ही पड़ेगी,’’ रंजना उसे समझाने की कोशिश करतीं, पर नंदू उन की बात पर ध्यान न देती.

प्रबोधजी ने नंदू के मामा से भी उस की शादी के लिए कहलवाया, पर उस ने कोई जवाब नहीें दिया.

आखिर एक दिन रंजनाजी ने कहा, ‘‘नंदू, अब तू 28 साल की हो गई है. कब तक शादी के लिए मना करती रहेगी. अंत में बैठी रह जाएगी इसी घर में, कोई नहीं मिलेगा.’’

‘‘पर, मुझे शादी करनी ही कहां है.’’

‘‘आखिर क्यों नहीं करनी शादी? तू जहां कहे, हम वहां कोशिश करें. मैरिज ब्यूरो में, तेरी जाति में, तू जहां कहे, वहां. तू कहे, तो एक बार इलाहाबाद चलते हैं. अब तुम 5 साल बाद कहोगी तो…”

“मैं कभी नहीं कहने वाली. पांच साल ही नहीं, पचास साल बाद भी नहीं, बस.’’

28 साल… उस समय नंदू 28 साल की थी और इस समय अश्वित भी 28 साल का है.

इस बीच कितने साल बीत गए. ये बीते साल उस का कितनाकुछ ले गए. नंदू के बाल, अब उन्हें काले रखने की कितनी कोशिश करनी पड़ती है. आंखें बिना चश्मे के कुछ पढ़ ही नहीं पातीं. अश्वित के हाथों में स्कूल बैग की जगह लैपटाप आ गया है. उछाल मारती समुद्र की लहरों जैसी उस की सहज प्रवृत्ति शांत हो कर पैसा कमाने की ओर घूम गई है. और रंजनाजी व प्रबोधजी? वे अब कहां हैं? समय का बहाव दोनों को बहा ले गया. प्रबोधजी की अचानक हार्टअटैक से मौत हो गई. रंजनाजी पति की मौत के गम को सहन न कर सकीं और 3 महीने बाद ही एक सुबह बिस्तर पर मरी हुई मिलीं. मां की मौत के बाद अश्वित का इंजीनियरिंग का रिजल्ट आया. उस दिन दोनों खूब रोए. अश्वित का रोना बंद ही नहीं हो रहा था. नंदू ने किसी तरह उसे चुप कराया.

इंजीनियरिंग का रिजल्ट आने के बाद एक दिन सुबहसुबह अश्वित नंदू के पास आया, ‘‘नंदू, अब मैं आगे क्या करूं?’’

‘‘क्या करना चाहते हो तुम?’’

‘‘मैं एमबीए करना चाहता हूं.’’

‘‘तो करो न, कौन मना करता है. जितना पढ़ना हो, पढ़ो.’’

‘‘हां, पर अब पापामम्मी नहीं हैं, इसलिए…  नंदू, मैं पैसों की बात कर रहा हूं. मैं जिस इंस्टीट्यूट से एमबीए करना चाहता हूं, उस की फीस ज्यादा है. अगर हम जमा पैसे से फीस भर देते हैं, तो घर के खर्च का क्या होगा?’’

दो पल नंदू ने सोचा. फिर अंदर गई और अपनी पासबुक ला कर बोली, ‘‘इस में जितने पैसे हैं, उतने में हो जाएगा.’’

अश्वित ने पासबुक ले कर देखा, ‘‘हां, हो जाएगा, पर यह तो तुम्हारा पैसा है.’’

‘‘अब तुम्हारा पैसा और मेरा पैसा क्या…? सब एक ही है. ये सब तुम्हारा ही तो है. तुम यह लो, अच्छी नौकरी मिल जाएगी, उस के बाद कोई चिंता ही नहीं रहेगी. जाओ, अपनी फीस भर दो.’’

खुश हो कर अश्वित ने नंदू को गोद में उठा लिया.

‘‘छोड़ो मुझे… अरे, गिर जाऊंगी.’’

नंदू ने बस की अगली सीट पर लगे हैंडिल को पकड़ लिया, ‘ओह, क्याक्या याद आ रहा है.’

Summer Special: क्या गरमी में आपको भी होती है खुजली ?

गरमी के मौसम में आपको सबसे ज्यादा खुजली की समस्या होती है. कई लोगों में ये समस्या घमौरियों का रूप ले लेती है. अगर आप भी गर्मियों में इस वजह से परेशान रहते हैं तो इन टिप्स  की मदद से आप राहत पा सकती हैं.

नमक, हल्दी मेथी का पेस्ट

खुजली से बचने के लिए नमक, हल्दी और मेथी तीनों को बराबर मात्रा में पीस लें. नहाने से पांच मिनट पहले इसे पानी में मिलाकर उबटन बनाएं. इसे अच्छी तरह से पूरे शरीर पर मल लें और पांच मिनट बाद नहा लें. हफ्ते में एक बार इसका इस्तेमाल करने से घमौरियों से निजात मिलती है.

ये भी पढ़े़ 7 टिप्स: ऐसे पाएं कर्ली हेयर्स

मुल्तानी मिट्टी

गरमी में त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी काफी फायदेमंद रहती है. अगर घमौरियां हो जाए तो मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाने से राहत मिलेगी.

बर्फ

अगर आप बहुत अधिक खुजली से परेशान रहती हैं तो बर्फ के टुकड़े प्रभावित हिस्सों पर लगाएं इससे आपको आराम मिलेगा. इसे कपड़े में डालकर पांच से दस मिनट के लिए लगाएं. इसे आप चार से छह घंटे के गैप में लगा सकती हैं.

रोज नहाना

खुजली से निजात पाने के लिए रोज स्वच्छ और ताजे पानी से नहाना चाहिए.

एलोवेरा

खुजली होने पर एलोवेरा एक रामबाण उपाय है. प्रभावित हिस्सों पर एलोवेरा का रस लगाने से आपको आराम मिलेगा.

ये भी पढ़ें- 200 के बजट में खरीदें ये 5 लिपस्टिक और पाएं ब्यूटीफुल लिप्स

Summer Special: गरमी में सत्तू के ये हैं फायदे

लेखिका- डा. साधना वेश

सत्तू में ऐसे कई तत्त्व होते हैं, जो डायबिटीज और मोटापे जैसी गंभीर बीमारियों को ही नहीं, बल्कि कई दूसरी बीमारियों को भी शरीर से दूर करते हैं. सत्तू खाने में स्वादिष्ठ ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. सत्तू के औषधीय गुण भी बहुत हैं. चना और जौ जब साथ में मिलाते हैं, तो गरमियों में यह मिश्रण दवा की तरह काम करता है. गरमियों में सत्तू खाने से अनेक बीमारियां दूर रहती हैं.
चना और जौ को पीस कर सत्तू बनता है, जो शरीर को ठंडक देता है. खास बात यह है कि इस का शरबत, भरवां परांठे या रोटी, पंजीरी, लड्डू, मठरी आदि के रूप में सेवन किया जा सकता है.

मोटापे का दुश्मन

सत्तू एक पूरा आहार है. इस में प्रोटीन के साथ मिनरल, आयरन, मैग्नीशियम और फास्फोरस बहुत होता है. साथ ही, यह फाइबर से भरा होता है. इसे खाने से पेट आसानी से भर जाता है और प्यास भी लगती है. पानी पीने से पेट और देर तक भरा रहता है. ऐसे में यह वजन कम करने के लिए बेहतर खाना है. लू से बचाए सत्तू की तासीर ठंडी होती है, इसलिए गरमी में इसे खाने से शरीर ठंडा भी रहता है और पानी ज्यादा पीने से यह डिहाइड्रेशन से भी बचाता है. इस से लू नहीं लगती है और यह शरीर का तापमान काबू करने में मददगार साबित होता है.

ये भी पढ़ें- इन 8 जेनेटिक रोग में न बरतें लापरवाही

एनीमिया में फायदेमंद
सत्तू कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन से भी भरा होता है. ऐसे में जिन्हें एनीमिया है, वे लोग इसे जरूर खाएं और किशोरावस्था में लड़कियों को ज्यादा से ज्यादा इस का सेवन करना चाहिए.

डायबिटीज में बढि़या
सत्तू में मौजूद बीटा ग्लूकोन शरीर में बढ़ते ग्लूकोज के अवशोषण को कम करता है. इस से ब्लड शुगर का लैवल कंट्रोल में रहता है. सत्तू कम ग्लाइसेमिक इंडैक्स वाला होता है और यह डायबिटीज को काबू रखने में मदद करता है.

ये भी पढ़ें- हार्ट अटैक: महिलाओं व पुरुषों में लक्षण अलगअलग

छात्र प्रतिनिधि- भाग 3: क्या छात्र प्रतिनिधि का चुनाव में जयेश सफल हो पाया?

यह सुन कर सभी वाणिज्य, कला और मैनेजमेंट के छात्र जोरों से हंस दिए. जयेश उस पर हो रहे सीधेसीधे आक्रमण से सुन्न हो गया था.

जब हंसी कम हुई, तो अनुरंजन ने कहना शुरू किया, “भले ही यह अद्भुत बात लगती हो, लेकिन उसे ऐसा लगता है कि हमारा कालेज खेल पर अपना पैसा बरबाद करता है.”

वहां मौजूद लगभग सभी छात्रों ने जयेश को हूट कर के अपनी नापसंदगी जाहिर की. जयेश चुपचाप बैठ अपना तिरस्कार होते देखता रहा.

अनुरंजन ने जयेश पर अपना आक्रमण जारी रखा, “क्या हम वास्तव में एक ऐसे छात्र प्रतिनिधि को चुनना चाहते हैं, जो खेलों की परवाह नहीं करता है?जिस को क्रिकेट की परवाह नहीं…?”

सभी छात्र जोरजोर से चिल्लाने लगे. जयेश को अपनेआप पर काबू पाना कठिन हो रहा था. सभी छात्र उस के खिलाफ हो रहे थे. अनुरंजन सभी छात्रों को उस के खिलाफ भड़काने में कामयाब हो रहा था.

अनुरंजन ने आगे कहा, “मुझे गर्व इस बात का है कि मैं खुद क्रिकेट खेलता हूं. और मैं चाहता हूं कि खेलों में हमारे महाविद्यालय का आर्थिक सहयोग और बढे.”

फिर उस ने थम कर कहा, “एक चीज और है, जिसे मैं क्रिकेट से ज्यादा पसंद करता हूं. और वह है जगन्नाथ.”

जाहिर है, उस का उल्लेख रांची के मशहूर जगन्नाथ मंदिर से था. उस के इतना बोलने पर सभी ने जोरों से तालियां बजाईं.

अनुरंजन ने जयेश पर अपने प्रहारों का अंत नहीं किया था, “मेरे मित्र जयेश के बारे में मैं आप को एक और दिलचस्प तथ्य बताता हूं. उस का ईश्वर में विश्वास नहीं है. न तो जगन्नाथ मंदिर ही वह कभी गया है, न ही पहाड़ी मंदिर.”

अब तो छात्रगण बेहद नाराज हो गए. शिव शांति पथ पहाड़ी मंदिर, शिवजी का मंदिर था. उस मंदिर में न जाना, खुद एक अपराध था.

अनुरंजन ने अपनी बात की समाप्ति करते हुए कहा, “आशा है कि अपना वोट डालते समय मेरी बताई इन बातों का आप पूरी तरह से ध्यान रखेंगे. धन्यवाद.” और तालियों की जबरदस्त गड़गड़ाहट के साथ वह वापस अपनी जगह पर आ बैठा.

नीलेंदु ने माइक संभाला, “अनुरंजन के बाद, मैं अपने दूसरे उम्मीदवार, जयेश को आमंत्रित करता हूं कि वह आए और अपना पक्ष रखे कि क्यों उसे छात्र प्रतिनिधि बनाया जाना चाहिए?”

जब जयेश अपनी जगह से उठ कर माइक के सामने आया तो सन्नाटा छा गया. किसी ने उस का तालियों से स्वागत नहीं किया. सिर्फ प्रसनजीत और संदेश तालियां बजा कर उस की हौसलाअफजाई कर रहे थे. माइक के सामने आज सभी जयेश को अपने दुश्मन नजर आ रहे थे. आज सचाई की जीत नामुमकिन थी. अपनी बात को कितने ही सुनहरे तरीके से वह पेश करे, लेकिन जो कीचड़ उस पर पड़ चुकी थी, उसे साफ करना भयंकर कठिन कार्य जान पड़ता था, मानो उसे चक्कर सा आ रहा हो. अब कुछ भी कहना व्यर्थ था. सभी उस के खिलाफ भड़क चुके थे. जयेश के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था. अपने विचारों के बल पर छात्रों को वापस अपने पक्ष में लाने की बात वह सोच भी नहीं सकता था. अगर वह झूठ का सहारा न भी लेना चाहे तो भी अपने प्रतिद्वंद्वी के स्तर तक तो उसे आज गिरना ही पड़ेगा, वरना सालों तक अपमान झेलते रहना पड़ेगा. और उस स्तर तक गिरने के लिए, उसे संदेश द्वारा खोजबीन कर प्राप्त हुए अनुरंजन के पृष्ठभूमि तथ्यों का इस्तेमाल करना ही पड़ेगा. और कोई चारा नहीं था.

यही सब सोच कर जयेश ने अपने भाषण की शुरुआत की, “मेरे प्रतिद्वंद्वी अनुरंजन नावे ने आप को मेरे बारे में बताया. अब मैं भी आप को उस के बारे में कुछ बताना चाहता हूं. ऐसी बात जो वो खुद नहीं बताना चाहता है. शायद आप लोगों को पता नहीं कि अनुरंजन नावे का इतिहास क्या है. अनुरंजन, झारखंड का मूल निवासी नहीं है.”

वहां बैठे सभी छात्र आपस में फुसफुसाने लगे. महाविद्यालय में लगभग सभी छात्र रांची से ही थे. जयेश ने अपना वक्तव्य जारी रखा, “मुझे तो इस बात का बेहद गर्व है कि मेरे पूर्वजों के भी पूर्वजों के नाम की यहां की जमीन का खतियान है. लेकिन मेरे विरोधी की रांची में तो क्या, पूरे झारखंड में कोई जमीन नहीं है, न ही उस के बापदादाओं की है या कभी थी.”

प्रांगढ़ में बैठे विद्यार्थियों में अब आपस में बोलचाल और बढ़ गई. जयेश ने कहा, “मैं शुद्ध झारखंडी हूं, और हमारे राज्य की 9 क्षेत्रीय भाषाओं को पाठ्यक्रम में लागू करवाने का जिम्मा लेता हूं. यह काम मेरा प्रतिद्वंद्वी कभी न कर सकेगा, क्योंकि उसे तो यह भी नहीं पता है कि हमारे राज्य की ये 9 भाषाएं कौन सी हैं. उसे कभी इस राज्य में सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती, क्योंकि वह स्थानीय नहीं है. क्या आप ऐसे व्यक्ति को अपना वोट देना चाहोगे, जिस के भविष्य में इस राज्य से पलायन करना ही लिखा है?”

विद्यार्थीगण अब तैश में आ गए थे. जयेश ने आगे कहा, “क्या बाहर वाला कभी हमारी ही तरह सोच पाएगा? अनुरंजन नावे भले ही खेलप्रेमी हो और ईश्वर में विश्वास रखता हो, लेकिन उस का जन्म माधोपुर में हुआ था.” इसी बात का संदेश ने पता लगाया था.

बाहरी राज्य के शहर का नाम सुन कर विद्यार्थी भड़क गए. जयेश ने उन्हें और भड़काया, “आप को ऐसा नहीं लगता कि रांची के प्रमुख महाविद्यालय का छात्र प्रतिनिधि, रांची या कम से कम झारखंड का होना चाहिए, ताकि आप की सोच और उस की सोच मेल खाती हो?”

छात्रों की भीड़ में अब होहल्ला मच रहा था. जयेश ने उस शोर के ऊपर जोर से माइक में कहा, “मेरे विरोधी ने झारखंड में तब पहली बार कदम रखा, जब अपनी बीएससी की पढ़ाई करने के लिए वह यहां आया था. उस को न तो राज्य से जुड़ी समस्याओं की सूझबूझ है, न ही प्रांतीय लोगों की समझ. हमारी राज्य सरकार ऐसे लोगों को अपने राज्य का हिस्सा नहीं मानती, और आप उसे अपना वोट देना चाहते हो? अगर आप ने ऐसा किया, तो आप राज्य सरकार के कानून के खिलाफ वोट करोगे. झारखंड के मूल निवासी के लोगों के अधिकार हमें सुरक्षित रखने हैं. हम बाहर वालों को ऐसी जिम्मेदारी सौंप कर यह गलती नहीं कर सकते.

“याद रखिएगा कि हमारे अधिकारों की रक्षा करने वाली जितनी भी संस्थाएं हैं, वे सभी हमेशा मेरा साथ देंगी, लेकिन मेरे विरोधी का वे कभी भी साथ नहीं देंगी.

“अगर आप चाहते हैं कि हम अपने अधिकारों की रक्षा करने वाली संस्थाओं के साथ जुड़े रहें, तो अपना वोट आप मुझे ही देंगे.”

इतना कह कर जयेश वापस अपनी जगह पर आ कर बैठ गया. जबरदस्त तालियों के साथ जयेश का नाम गूंजने लगा. नीलेंदु ने वादविवाद के समापन की घोषणा की.

अगले ही दिन चुनाव थे. कुछ ही दिनों में चुनाव के नतीजे आ गए. जयेश को भारी बहुमत की प्राप्ति हुई और वह अपने महाविद्यालय का छात्र प्रतिनिधि बन गया.

‘बाबा’ के सहारे एक्सचेंज चलाने वाली चित्रा रामकृष्ण

सौजन्य- सत्यकथा

शेयर बाजार की प्रोफेशनल सीईओ चित्रा रामकृष्ण का अज्ञात ‘हिमालयन योगी’ के प्रति आस्थावान और अंधभक्त बने रहना महंगा साबित हुआ.

बिते साल 2012 की बात  है. नवंबर में आने वाली दीपावली को ले कर बाजार में गहमागहमी शुरू हो चुकी थी. कई देशी कंपनियां इस मौके पर नया प्रोजेक्ट लांच करने की योजनाएं बना रही थीं तो पूंजी निवेशक भी शेयर बाजार पर नजर टिकाए हुए थे.

शेयर विश्लेषकों से ले कर ब्रोकर तक निवेशकों पर अपनी सलाह थोप रहे थे. शेयर की दुनिया के महारथियों को 1875 में स्थापित और भारत के 417 शहरों तक पहुंच रखने वाले बौंबे स्टाक एक्सचेंज (बीएसई) से अधिक भरोसा नैशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) पर था.

कारण उस में आधुनिक तकनीक से लैस डिजिटल सुविधाओं का होना था. वहां एडवांस्ड एल्गोरिद्म आधारित सुपरफास्ट ट्रेडिंग तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो चुका था. इस की बदौलत एनएसई ने 1994 में अपनी शुरुआत के एक साल के भीतर ही  अच्छी साख बना ली थी.

ये भी पढ़ें- मोहब्बत में खलल का अंजाम

सब कुछ ठीक चल रहा था. शेयर कारोबार से जुड़े लोगों को इस की डिजिटल सुविधाएं पसंद आई थीं. फिर अचानक 5 अक्तूबर, 2012 को उस में एक तकनीकी खराबी आ गई. उस का खामियाजा निवेशकों को भुगतना पड़ा. उन के लगभग 10 लाख करोड़ रुपए स्वाहा हो गए.

यह एनएसई की साख पर बहुत बड़ा बट्टा लगने जैसा था. इस वजह से न केवल उस के तत्कालीन सीईओ रवि नारायण पर अंगुली उठी, बल्कि उन्हें पद से भी हटा दिया गया. उस के कुछ महीने बाद 13 अप्रैल, 2013 को एनएसई की कमान चार्टर्ड अकाउंटेंट चित्रा रामकृष्ण को सौंप दी गई.

यह शेयर कारोबार की पुरुष प्रधान दुनिया में मचा नया हंगामा था. इस की मीडिया में चौतरफा चर्चा हुई. रातोंरात चित्रा उस ‘स्त्री शक्ति’ की श्रेणी में आ गईं, जिन्होंने असाधारण जिम्मा संभाला था. कुछ गिनीचुनी महिला सीईओ और बिजनैस वूमन में उन की भी गिनती होने लगी.

एनएसई के सीईओ के पास स्टाक एक्सचेंज संबंधी निर्णय लेने की भरपूर आजादी होती है. यह उस की सूझबूझ पर निर्भर करता है कि वह किस कंपनी को जगह दे और निवेश के लिए किसे कितनी हिस्सेदारी दे. निवेशक जब शेयर खरीदता है तब वह उस कंपनी में हिस्सेदार बन जाता है, जो उस के द्वारा खरीदे गए शेयरों की संख्या पर निर्भर करता है.

शेयर खरीदने और बेचने का काम ब्रोकर्स यानी दलाल करते हैं. हालांकि उन पर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की नजर बनी रहती है. इस की स्थापना 12 अप्रैल, 1992 को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के तहत हुई थी.

आज की तारीख में 59 वर्षीय वही चित्रा रामकृष्ण एक अजीबोगरीब घोटाले के केंद्र में आ गई हैं. इसे सेबी ने जब पकड़ा, तब मामला सीबीआई के पास चला गया.

सीबीआई की गहन छानबीन के बाद एक ऐसे व्यक्ति का नाम उजागर हुआ, जो वास्तव में था ही नहीं. वह हिमालय में विचरण करने वाला एक अदृश्य ‘हिमालयन योगी’ था.

इस संदर्भ में हैरानी की एक बात उजागर हुई, जिसे चित्रा ने अपने 20 साल के करियर में कभी देखा तक नहीं था. केवल मिलने के आश्वासन के साथसाथ उस की नजर में अध्यात्म की अनुभूति पाती रही, उसी के निर्देश पर एक्सचेंज का सारा काम दनादन करती चली गईं. देश में पूंजी बाजार और फाइनैंस के नियमकानून की शर्तों वाले कामकाज पर उन का हिमालयन योगी के प्रति गजब की अंधभक्त बन गईं.

उस के मेल से जो भी आदेश मिला, उस का पालन करती रही. इस सिलसिले में यहां तक कि उन्होंने उस के आदेशों का पालन करते हुए नियमों के खिलाफ जा कर अनैतिक नियुक्तियां तक कर डालीं. उन्हीं में एक नियुक्ति आनंद सुब्रमण्यम की मुख्य रणनीतिक सलाहकार के पद पर भी हुई.

इसे ले कर ही चित्रा रामकृष्ण पर आरोप लगे कि उन्होंने एनएसई की प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रहते हुए कई अनुचित फैसले लिए और नियुक्तियां कीं.

अपने कार्यालय का दुरुपयोग किया, एक्सचेंज के संचालन से संबंधित गोपनीय जानकारी छिपाने में विफल रहीं और सेबी को गलत एवं भ्रामक जानकारियां देती रहीं. इस पर सेबी ने कहा कि चित्रा ने सारे फैसले अपने अज्ञात आध्यात्मिक गुरु के प्रभाव में किए.

ये भी पढ़ें- बेवफाई की खूनी इबारत

हालांकि बाद में सीबीआई द्वारा की गई पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन के पहले के एमडी व सीईओ रवि नारायण और पूर्व समूह संचालन अधिकारी (जीओओ) आनंद सुब्रमण्यम के खिलाफ सर्कुलर जारी करने में अनदेखी की.

सेबी के आदेश के अनुसार चित्रा एनएसई के एमडी और सीईओ के पद पर दिसंबर 2016 तक रहते हुए कथित तौर पर हिमालय में विचरण करने वाले इस योगी को ‘शिरोमणि’ कह कर बुलाती थीं.

एक मेल में उस नाम का भी प्रयोग किया गया था. उन का दावा था कि वह हिमालय की पहाडि़यों में रहते हैं और 20 सालों से उन के व्यक्तिगत और पेशेवर मामलों के सलाहकार हैं.

एनएसई में घपले के बारे में सेबी को शिकायत साल 2015 में एक व्हिसलब्लोअर ने दी थी. शिकायत में ‘को-लोकेशन स्कैम’ की बात कही गई थी. इस में कहा गया था कि एनएसई में सीनियर मैनेजमेंट लेवल पर खूब धांधलेबाजी चल रही है. को-लोकेशन स्कैम का मतलब होता है एक्सचेंज की बिल्डिंग में सर्वर के करीब जगह दे कर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाना.

ऐसा कर अपने पसंदीदा निवेशकों को फायदा मिलता है, जिसे शेयर ब्रोकर शेयरों की खरीदबिक्री का अंजाम देते हैं. बदले में उन्हें कमीशन का अच्छाखासा मुनाफा मिल जाता है.

यानी 2015 में सेबी को शिकायत मिली थी कि कुछ ब्रोकरों ने एनएसई के कुछ शीर्षस्थ अधिकारियों के साथ मिलीभगत से को-लोकेशन फैसिलिटी का दुरुपयोग किया. इस सिलसिले में सेबी ने एनएसई को एक खास जगह पर स्थापित एक्सचेंज के कुछ सर्वर को कारोबार में कथित रूप से वरीयता देने के मामले में जुरमाना लगाया है.

उस सिलसिले में जब चित्रा का नाम सामने आया था, तब सेबी ने उन्हें शोकाज यानी कारण बताओ नोटिस भेज दिया था. दरअसल, यह मामला शेयर के 12 फीसदी सालाना ब्याज से जुड़ा हुआ था, जिस में अनियमितताएं पाई गई थीं.

एनएसई की को-लोकेशन सुविधा के माध्यम से हाई फ्रीक्वेंसी वाले कारोबार में अनियमितता के आरोपों की जांच के बाद सेबी ने एक महत्त्वूर्ण आदेश दिया था.

आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि एनएसई को 624.89 करोड़ रुपए और उस के साथ उस पर एक अप्रैल, 2014 से 12 फीसदी की दर से सालाना ब्याज सहित पूरी राशि सेबी द्वारा स्थापित निवेशक सुरक्षा एवं शिक्षा कोष (आईपीईएफ) में भरनी होगी.

नोटिस चित्रा रामकृष्ण के अलावा उन के पहले के एमडी को भी जारी किया गया था. उस नोटिस के जवाब के आधार पर सेबी ने जब अपनी जांच पूरी करने के बाद 190 पन्ने की रिपोर्ट शेयर की, तब अनैतिक नियुक्यों के पीछे की कहानी सामने आई.

सीबीआई ने आनंद सुब्रमण्यम को 24 फरवरी, 2022 की देर रात चेन्नई से गिरफ्तार किया था. एनएसई स्कैम मामले की छनबीन और जांचपड़ताल जैसेजैसे आगे बढ़ी, वैसेवैसे चौंकाने वाले सबूत भी सामने आ गए. इस मामले में करीब 10 साल बाद पहली गिरफ्तारी के साथ कई सबूत सामने आ चुके हैं.

सेंट्रल ब्यूरो औफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) के गिरफ्त में आया आनंद सुब्रमण्यम ही ‘हिमालयन योगी’ निकला, जिस के आदेश को चित्रा सिर आंखों पर बिठाए रखती थीं. यानी कथित हिमालयन योगी का राज भी खुल गया.

उस अदृश्य योगी का पता आनंद के पते से मात्र 13 मीटर की दूरी पर पाया गया. इस तरह से पूरा मामला आनंद सुब्रमण्यम, चित्रा रामकृष्ण और अनाम गुरु से जुड़ गया. जांच में पाया गया कि सारा खेल आनंद का किया कराया हुआ था. उस ने ही एक अदृश्य आध्यात्मिक गुरु की कल्पना कर चित्रा के मन में आस्था की अंधभक्ति का बीज बो दिया था.

चित्रा का मानना था कि गुरु की आध्यात्मिक शक्ति की बदौलत ही उन्हें चार्टर्ड अकाउंटेंट जगत में तरक्की मिलने से ले कर भारत की पहली और एशिया की चौथी स्टाक एक्सचेंज की बिजनैस वूमन बनने का गौरव हासिल हुआ था.

इस अचानक मिली बड़ी उपलब्धि के पीछे गुरु की सलाह का योगदान चित्रा के दिल और दिमाग में गहराई तक बैठ गया. इस कारण ही योगी के निर्देशों के जरिए चित्रा ने आंखें मूंद कर आनंद की नियुक्ति करवा दी.

एक के बाद एक प्रमोशन दिलवा दिए और वेतन में बेहिसाब बढ़ोत्तरी भी करवा दी. जबकि आनंद इस काबिल नहीं था.

यानी कि आनंद ने ही पूरे घपले की बिसात बिछाई थी. खुद योगी बन कर अपना फायदा पहुंचा रहा था. वह एक अप्रैल 2015 से ले कर 21 अक्तूबर, 2016 तक एनएसई के ग्रुप औपरेटिंग औफिसर (जीओओ) के साथसाथ  एमडी-सीईओ चित्रा रामकृष्ण का सलाहकार भी रहा.

इन दोनों पदों को चित्रा ने ही सृजित किया था. इस के लिए न कोई विज्ञापन निकाला गया और न ही विभागीय नोटिस जारी हुआ. यहां तक कि इस भरती की स्टाक एक्सचेंज के एचआर डिपार्टमेंट को भी कोई जानकारी दी गई. आनंद ही इस पद का इकलौता उम्मीदवार था.

चित्रा ने इंटरव्यू की महज मौखिक खानापूर्ति की. उस की कोई फाइल तक नहीं बनाई गई. इसी भरती को ले कर सेबी की जांच शुरू हुई और आनंद घपले की पहली कड़ी के रूप में पाया गया.

वह एनएसई में शामिल होने से पहले बामर लौरी एंड कंपनी लिमिटेड में काम करता था. वहां उस की तनख्वाह 15 लाख रुपए सालाना थी. पूंजी बाजार में उसे काम का कोई अनुभव नहीं होने के बावजूद उसे 1.68 करोड़ रुपए का सैलरी पैकेज दे दिया गया था. और तो और, वह हफ्ते में सिर्फ 4 दिन ही काम करता था.

चित्रा रामकृष्ण योगी से काफी प्रभावित थीं. इसी योगी ने चित्रा को ईमेल लिखे और उन्हें सुब्रमण्यम की भरती से ले कर उन की तनख्वाह तक निर्धारित की. वह ईमेल चित्रा के साथसाथ आनंद को भी भेजे जाते थे. रहस्यमयी योगी कई बार आनंद और दूसरे सीनियर अफसरों को प्रमोशन देने की भी सलाह दिया करता था.

सीबीआई को भी कथित योगी के मेल के कुछ स्क्रीन शौट मिले थे, जो अज्ञात आईडी द्वारा आनंद की आईडी पर फारवर्ड किए गए थे. इस के अलावा इस बात का सबूत भी मिला कि उन्होंने ही ईमेल आईडी बनाई थी.

बताते हैं कि आनंद ने अपने लैपटौप को नष्ट कर दिया था. बाद में जब उस की जांच की गई, तब उस का आईपी एड्रेस और ईमेल का आईपी एड्रेस एक ही पाया गया.

इस से पहले कंसल्टेंसी फर्म अर्नस्ट एंड यंग (ईएंडवाई)  के फोरैंसिक औडिट में भी कहा गया था कि चित्रा को आनंद डायरेक्ट कर रहा था. आनंद के डेस्कटौप पर ड्डठ्ठड्डठ्ठस्र.ह्यह्वड्ढह्म्ड्डद्वड्डठ्ठद्बड्डठ्ठ9 और ह्यद्बह्म्शठ्ठद्वड्डठ्ठद्ब.10 नाम से स्काइप अकाउंट भी मिले थे.

ईएंडवाई ने अपनी जांच में आनंद के चेन्नई स्थित आवास से महज 13 मीटर दूर स्थित 2 जियोटैग तसवीरें, हिमालयन योगी की ओर से बुक किया गया होटल, जिस का भुगतान आनंद ने किया था.

योगी को भेजे गए ईमेल अटैचमेंट और इस से कुछ मिनट पहले ही योगी एवं उस की बातचीच में इस्तेमाल किए गए वाक्यों में समानता जैसे मिले सुबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि योगी कोई और नहीं, बल्कि आनंद सुब्रमण्यम ही है.

ईएंडवाई का यह निष्कर्ष जनवरी 2000 और मई 2018 के बीच रामकृष्ण, सुब्रमण्यम और हिमालयन योगी के बीच बातचीत के विश्लेषण पर आधारित है. उस का कहना है कि उस ने अटैचमेंट वाले 17 ईमेल का विश्लेषण किया.

इन में 8 तसवीरें थीं, जिन में 2 तसवीरों को जियोटैग किया गया था. दोनों तसवीरों का स्थान चेन्नई में सुब्बू (सुब्रमण्यम) के आवासीय पते के करीब था. इन तसवीरों की कैप्चर की गई लोकेशन मेल ह्म्द्बद्द4ड्डद्भह्वह्म्ह्यड्डद्वड्ड की ओर से भेजी गई तसवीरों के कैप्चर किए गए स्थान के समान थी.

ईएंडवाई की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अन्य सुबूत उम्मेद भवन पैलेस में की गई एक बुकिंग है. एक दिसंबर, 2015 को ह्म्द्बद्द4ड्डद्भह्वह्म्ह्यड्डद्वड्डञ्चशह्वह्लद्यशशद्म. ष्शद्व से रामकृष्ण (सुब्रमण्यम के लिए भी चिह्नित) को एक ईमेल भेजा गया. इस में कहा गया था कि कंचन की (रेफरेंस टू सुब्रमण्यम) छुट्टी को मंजूरी मिल गई है और एमडी की ओर से उम्मेद भवन में बुकिंग हो गई है. सुब्बू के बैंक स्टेटमेंट के अनुसार 27 नवंबर, 2015 को होटल को 2,37,984 रुपए का भुगतान भी किया गया था.

इस के साथ ही आनंद सुब्रमण्यम को एनएसई से मिले डेस्कटौप पर इस्तेमाल किए गए स्काइप प्रोफाइल का भी विश्लेषण किया गया. इस में पाया गया कि साझा डेस्कटौप में सुब्रमण्यम के यूजर प्रोफाइल में सानंद का जिक्र था.

विंडोज प्रोफाइल सानंद से संबंधित डेस्कटौप डेटा की समीक्षा से पता चला कि ड्डठ्ठड्डठ्ठस्र.ह्यह्वड्ढह्म्ड्डद्वड्डठ्ठद्बड्डठ्ठ9 और ह्यद्बह्म्शद्वड्डठ्ठद्ब.10 के नाम से स्काइप खाते स्काइप एप्लिकेशन डेटाबेस में कन्फिगर किए गए थे.

योगी के मेल की जानकारी ईएंडवाई द्वारा किए गए फोरैंसिक औडिट और जांच में सामने आई कि आनंद खुद इस मेल आईडी से योगी के तौर पर चित्रा को ईमेल करता था. एक तरह से आनंद चित्रा को प्रभावित करने का एक हथकंडा अपनाया हुआ था.

चित्रा के ईमेल चैट से भी कई चौंकाने वाले खुलासे हुए और कुछ रहस्यमयी योगी के बीच की कई ‘सीक्रेट’ बातें सामने आईं. चित्रा और फेसलेस योगी के बीच के एक चैट को देख कर सेबी के अधिकारी भी चौंक गए, जिस में योगी के साथ सेशल्स घूमने में समंदर में तैरने की बात कही गई थी.

17 फरवरी, 2015 को कथित रूप से उस अज्ञात व्यक्ति से रामकृष्ण को भेजे एक ईमेल में लिखा था, ‘कृपया बैग तैयार रखिए. मैं अगले महीने सेशेल्स की यात्रा की प्लानिंग का रहा हूं, कोशिश करूंगा कि आप भी मेरे साथ चलें. इस से पहले कंचन, कंचना और बरघवा के साथ लंदन चले जाएं और आप 2 बच्चों के साथ न्यूजीलैंड जाएं. अगर आप स्वीमिंग जानती हैं, तो हम सेशेल्स में सी बाथ का आनंद ले सकते हैं और समुद्र तट पर आराम भी कर सकते हैं.’

ईमेल के अनुसार, हांगकांग और सिंगापुर ट्रांजिट और आगे की यात्रा के लिए एक पसंदीदा जगह होगी. मैं अपने टूर औपरेटर से पूछ रहा हूं कि वह हमारे सभी टिकटों के लिए कंचन से संपर्क करें.

इस मेल की जांच में सेबी के आदेश में कहा गया है कि ‘कंचन’ आनंद सुब्रमण्यम ही थे, जबकि कंचना, बरघवा और सेशु की पहचान का खुलासा नहीं किया गया था.

सेबी के आदेश के अनुसार 18 फरवरी, 2015 को एक अन्य ईमेल में उस अज्ञात व्यक्ति ने रामकृष्ण से कहा कि आज आप बहुत अच्छे लग रहे हैं. आप को अपने बालों को बांधने के लिए अलगअलग तरीके सीखने होंगे, जो आप के लुक को दिलचस्प और आकर्षक बना देंगे. बस एक मुफ्त सलाह दे रहा हूं. मुझे पता है कि आप इसे जरूर लपक लेंगे. अपने आप को मार्च के बीच में थोड़ा फ्री रखें.

नैशनल स्टाक एक्सचेंज दुनिया के सब से बड़े स्टाक एक्सचेंजों में से एक है. यह शेयर, औप्शन और फ्यूचर्स सहित कई तरह की सिक्योरिटी खरीदने और बेचने की सुविधा देता है. हालांकि, सामान्य लोगों का सीधा एनएसई से वास्ता नहीं पड़ता है, क्योंकि ब्रोकर एनएसई में प्रतिनिधि का बना रहता है और शेयरों की खरीदबिक्री का असल खेल इसी एनएसई में होता है.

एनएसई पहले भारत का इतना पावरफुल स्टाक एक्सचेंज नहीं था. यह गौरव बौंबे स्टाक एक्सचेंज को मिला हुआ था. एक समय में इस पर ब्रोकरों के कुछ समूहों का दबदबा होता था. वे अपने इशारे पर किसी भी शेयर को मुनाफे वाला बना देते थे. इस की खामियां 1992 में हुए हर्षद मेहता घोटाले में उजागर हुई थीं.

हर्षद मेहता शेयरों की कीमतें बढ़ाने में माहिर था. ऊंचे भाव पर अपने शेयर बेच कर भारी मुनाफा कमाता था, इस में बैंक के कमजोर नियमों का भी फायदा उठाता था. नतीजतन इस घोटाले में लाखों लोगों की गाढ़ी कमाई डूब गई थी.

उस के बाद भारत सरकार ने एक पारदर्शी, सिस्टमैटिक और नियमकानून से चलने वाले स्टाक एक्सचेंज शुरू करने का काम इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक औफ इंडिया को सौंपा. इसी के साथ कामकाज को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया. वह पेपरलेस इलेक्ट्रौनिक शेयर ट्रेडिंग की रूपरेखा तैयार की गई. फिर एनएसई वजूद में आ गया.

उस के बाद बीएसई का कारोबार लगातार घट गया. एनएसई में नए तरीके से सुविधाएं दीं. फिर वह बीएसई से काफी आगे निकल गया.

इस के शुरुआती टीम में आर.एच. पाटिल एनएसई के पहले एमडी बनए गए थे. उन के बाद रवि नारायण सीईओ बने. कुछ और लोग इस में शामिल हुए, जिन में चित्रा रामकृष्ण भी थीं.

एनएसई का कामकाज कुछ सालों तक काफी शानदार रहा, लेकिन उसे भी वही घोटाले की बीमारी लग गई. और फिर सेबी के सामने को-लोकेशन का मामला सामने आया.

को-लोकेशन स्कैम में कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया था. जांच एजेंसीज के मुताबिक, ओपीजी सिक्योरिटीज नामक ब्रोकरेज फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए उसे को-लोकेशन फैसिलिटीज का एक्सेस दिया गया था.

इस फैसिलिटी में मौजूद ब्रोकर्स को बाकियों की तुलना में कुछ समय पहले ही सारा डेटा मिल गया था. इस तरह एनएसई के घपलेबाजों ने अपनी जरूरतों और प्राथमिकता के आधार पर इस्तेमाल कर लेते थे और वे शेयरों की खरीद और बिक्री से मुनाफा कमा लेते थे.

एक अनुमान के मुताबिक ब्रोकर्स ने 50,000 करोड़ रुपए के प्रौफिट कमाए, जबकि इस गलत काम करने में सहायक बनने वालों में एनएसई समेत चित्रा पर जुरमाना लगाया. सेबी द्वारा चित्रा पर 3 करोड़ रुपए, नारायण और आनंद पर 2-2 करोड़ रुपए तथा वीआर नरसिम्हन पर 6 लाख रुपए का जुरमाना लगाया गया.

इस के साथ ही सेबी ने एनएसई को कोई भी नया उत्पाद पेश करने से 6 महीने के लिए रोक दिया है. इस तरह का प्रतिबंध चित्रा और सुब्रमण्यन पर भी लगया गया है. वे 3 साल तक किसी भी बाजार ढांचागत संस्थान या सेबी के साथ पंजीकृत संस्थान के साथ नहीं जुड़ सकते हैं. नारायण पर यह पाबंदी 2 साल के लिए लगाई गई है.

यही नहीं, सेबी ने एनएसई को चित्रा के अतिरिक्त अवकाश के बदले में भुगतान किए गए 1.54 करोड़ रुपए और 2.83 करोड़ रुपए के बोनस (डेफर्ड बोनस) को भी जब्त करने का भी निर्देश दिया है.

हालांकि जांच एजेंसियों के सामने कम मुश्किलें नहीं आई हैं. कारण एनएसई ने चित्रा समेत अन्य उच्च अधिकारियों के लैपटौप, कंप्यूटर हार्डवेयर को ई-वेस्ट के नाम काफी पहले नष्ट कर दिया था.

पूंजी बाजार नियामक सेबी जहां अपनी रिपोर्ट के आधार पर न केवल एनएसई के कामकाज के तौर तरीकों पर सवाल उठा रही है, बल्कि कई रहस्यमयी साजिशों की परतें भी खोल दी हैं.

सेबी के आदेश के बाद चित्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं. इनकम टैक्स छापा पड़ने के बाद वह बुरी तरीके से घिर चुकी हैं

इस महीने हो सकती है आलिया-रणबीर की सगाई

बॉलीवुड की पॉपुलर जोड़ी आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) अक्सर अपने लवलाइफ को लेकर चर्चे में छाये रहते हैं. हाल ही में आलिया और रणबीर ने फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ की शूटिंग खत्म की है. दर्शकों को इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार है. इसके अलावा दोनों के फैंस उन्हें जल्द से जल्द शादी के बंधन में बंधा देखना चाहते हैं.

कुछ दिन पहले खबर आई थी कि आलिया और रणबीर इस साल दिसंबर में शादी करेंगे. लेकिन अब खबर यह आ रही है कि आलिया भट्ट और रणबीर कपूर जल्द ही सगाई करने वाले हैं.

ये भी पढ़ें- शादी से पहले ‘अनुपमा’ ने मारी बाजी, जीता ये अवार्ड

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Alia Bhatt ?☀️ (@aliaabhatt)

 

एक रिपोर्ट के अनुसार, आलिया भट्ट और रणबीर कपूर अप्रैल महीने में सगाई कर सकते हैं. जी हां, दोनों से जुड़े सूत्रों ने बताया था कि अप्रैल का महीना दोनों की शादी के लिए बहुत जल्दी हो जाएगा. क्योंकि इस वक्त वे दोनों अपनी अपकमिंग फिल्म को लेकर काफी बिजी भी चल रहे हैं. ऐसे में दोनों दिसंबर में शादी के बंधन में बंधेंगे.

ये भी पढ़ें- GHKKPM: पाखी ने की ऐसी हरकत, भवानी ने की सरेआम पिटाई!

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Alia Bhatt ?☀️ (@aliaabhatt)

 

खबरों के अनुसार, अप्रैल के अंत में आलिया और रणबीर सगाई कर सकते हैं. बताया जा रहा है कि दिसंबर महीने में ही आलिया भट्ट और रणबीर कपूर को अपने काम से छुट्टियां मिलती हैं, ऐसे में दोनों शादी के लिए दिसंबर ही चुनेंगे.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Alia Bhatt ?☀️ (@aliaabhatt)

 

आपको बता दें कि जब रणबीर कपूर से भी उनकी शादी के सिलसिले में सवाल किया गया था. तो रणबीर ने तारीख बताने से साफ इंकार कर दिया था. आए दिन रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी का नकली कार्ड भी सोशल मीडिया पर वायरल होता है.

ये भी पढ़ें- अनुपमा ने हाथ-पैर जोड़ कर मांगी अनुज से माफी, देखें VIDEO

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Alia Bhatt ?☀️ (@aliaabhatt)

 

शादी से पहले ‘अनुपमा’ ने मारी बाजी, जीता ये अवार्ड

टीआरपी चार्ट में हर हफ्ते टॉप पर रहने वाला टीवी शो ‘अनुपमा’ (Anupamaa) की कहानी में नया मोड़ आ चुका है. शो में जल्द ही अनुपमा-अनुज की शादी का ट्रैक दिखाया जाएगा. तो वहीं शाह हाउस में अनुपमा-अनुज की शादी को लेकर हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है. फैंस अनुज-अनुपमा की केमिस्ट्री को काफी पसंद करते हैं. ऐसे में अनुपमा को इस किरदार के लिए कई अवार्ड से नवाजा जा चुका है.

अब अनुपमा ने एक औऱ अवार्ड अपने नाम किया है. शो के लिए अब रुपाली गांगुली ने बॉलीवुड लाइफ डॉट कॉम का अवॉर्ड जीता है. जी हां, इस अवॉर्ड को पाकर ‘अनुपमा’ यानी रुपाली गांगुली बेहद खुश हैं. उन्होंने टेबल पर इस अवॉर्ड को रखकर खुद जमीन पर बैठकर इसके साथ पोज दिए हैं.

ये भी पढ़ें- सपनों का जगह से कोई संबंध नहीं होता: समीक्षा भटनागर

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Rups (@rupaliganguly)

 

इन तस्वीरों में अनुपमा ब्लैक ड्रेस में काफी खूबसूरत नजर आ रही हैं. शो में अनुपमा का किरदार घरेलू महिला से शुरू होता है. वह अपने फैमिली के लिए काफी डेडिकेटेड है, लेकिन जब उसे अपने पति वनराज के एक्सट्रा मैरिटल अफेयर के बारे में पता चलता है तो वह पूरी तरह टूट जाती है. और आखिरी में उसे तलाक देने का फैसला करती है. इसके बाद अनुपमा की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आते है. लेकिन वह हर मुश्किल का सामना करती है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Rups (@rupaliganguly)

 

अनुपमा की जिंदगी में अनुज की एंट्री होती है, तब से उसकी जिंदगी ही बदल जाती है. कहते है न कि ‘एक अच्छा साथी जिंदगी के सफर में मिल जाये तो हर मुश्किल आसान हो जाती है.’ यहीं अनुपमा के साथ होता है. अनुज हर कदम पर उसके साथ है.  फैंस को अनुपमा (Rupali Ganguly) और अनुज कपाड़िया (Gaurav Khanna) का  रोमांस काफी पसंद आ रहा है.

ये भी पढ़ें- GHKKPM: पाखी ने की ऐसी हरकत, भवानी ने की सरेआम पिटाई!

 

बता दें कि रुपाली गांगुली ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए एक इमोशनल नोट भी लिखा है. उन्होंने सबसे पहले अपने पति अश्विन और बेटे रुद्रांश को यह अवॉर्ड डेडिकेट किया है. इसके साथ ही उन्होंने ‘अनुपमा’ के निर्माता राजन शाही को शुक्रिया कहा है. इसके साथ ही उन्होंने डायरेक्टर्स, राइटर्स और कास्ट के सभी लोगों को शुक्रिया कहा है.

 

‘अनुपमा’ में इन दिनों शाह हाउस में जंग छिड़ी हुई है. अनुपमा ने अनुज से शादी करने का ऐलान कर दिया है. वह इस बार अपने बच्चों और बा के भी विरोध में नजर आ रही हैं. लेकिन इस सबके बीच बा ने गुस्से में उसे शादी के दौरान अपशगुन होने की बद्दुआ दी है.

ये भी पढ़ें- अनुपमा ने हाथ-पैर जोड़ कर मांगी अनुज से माफी, देखें VIDEO

मिर्च की खेती बनी आमदनी का जरीया

कोई भी काम लगन और मेहनत से किया जाए, तो उस से फायदा ही होता है. खेतीकिसानी में भी खेती का रकबा भले ही कम हो, पर खेती के नए तौरतरीकों के जरीए भी ज्यादा आमदनी जुटाई जा सकती है.

इस बात को जबलपुर जिले के एक किसान ओमप्रकाश तिवारी ने साबित कर के दिखाया है. उन्होंने खेती के परंपरागत तौरतरीकों को छोड़ कर अपनी 5 एकड़ जमीन पर हरी मिर्च की खेती कर के लाखों रुपए की आमदनी ले कर एक मिसाल कायम की है.

जबलपुर जिले के घाट पिपरियां गांव के किसान ओमप्रकाश तिवारी बताते हैं कि तीखी मिर्च ने उन की जिंदगी में मिठास घोल दी है. प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप इरीगेशन सिस्टम से उन्होंने अपनी 5 एकड़ जमीन पर मिर्च की खेती कर 16 टन प्रति एकड़ का उत्पादन लिया है. ठंड के इस सीजन में 40 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से उन्होंने एक दफा में 4 लाख रुपए तक की बचत कर ली है.

ये भी पढ़ें- आम के बागों का प्रबंधन

जून में तैयार करते हैं नर्सरी

ओमप्रकाश तिवारी अपने खेतों में मिर्च की खेती के लिए बाजार से उन्नत किस्म के मिर्च के बीज लाते हैं और घर पर खुद ही नर्सरी तैयार करते हैं. बारिश के पहले उन्होंने जून महीने में नर्सरी तैयार की थी. अपने खेतों के लिए उन्होंने जवाहर मिर्च का उपयोग बीज के तौर पर किया है.

खेत में बारिश के समय जुलाई महीने में मिर्च की रोपाई का काम किया जाता है. वैसे तो किसान तीनों मौसम में मिर्च की रोपाई का काम कर सकते हैं. पौधे से पौधे की दूरी 30 सैंटीमीटर और क्यारी की दूरी साढ़े 4 फुट रख कर उन्होंने मिर्च की रोपाई की थी. 7 से 8 महीनों में मिर्च की फसल तैयार हो जाती है. जवाहर किस्म के बीज से मिर्च का उत्पादन 1 हेक्टेयर में तकरीबन 280 क्विंटल तक मिल जाता है.

क्यारी पर लगाएं मल्चिंग, फिर रोपें पौधा

मिर्च की खेती करने वाले किसानों को ओमप्रकाश तिवारी सलाह देते हुए कहते हैं कि मिर्च की बोआई ऐसे खेत में करनी चाहिए, जहां जल निकासी का समुचित इंतजाम हो. इस के लिए क्यारी को 1 मीटर के आधार में 20 सैंटीमीटर ऊंचाई पर बनाना चाहिए. इस में गोबर की सड़ी खाद मिला दें. 30 माइक्रोन मोटाई वाली प्लास्टिक मल्चिंग शीट से क्यारियों को कवर कर देना चाहिए.

ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई, समयसमय पर खाद का प्रयोग अच्छे उत्पादन के लिए जरूरी होता है. मल्चिंग का फायदा यह होगा कि इस से खरपतवार नहीं होगा और मिर्च के लिए जरूरी नमी बनी रहेगी.

मिर्च की मुख्य फसल जून से अक्तूबर महीने के बीच में होती है. कुछ लोग सितंबर से अक्तूबर महीने के बीच में और कुछ लोग फरवरी से मार्च महीने के बीच में भी मिर्च लगाते हैं.

ओमप्रकाश तिवारी के खेतों में लगी मिर्च की फसल अकेले उन्हें ही फायदा नहीं दे रही, बल्कि उन की खेती से गांव के 50-60 लोगों को रोजगार मुहैया करा रही है. खेत में रोज 50-60 गांव वालों को मिर्च तोड़ने का काम मिल जाता है. एक किलोग्राम मिर्च की तुड़ाई के एवज में उन्हें 7-8 रुपए मिलते हैं. रोजाना एक मजदूर 20 से 25 किलोग्राम मिर्च तोड़ लेता है.

ये भी पढ़ें- गरमियों में मूंग की खेती से मुनाफा कमाएं

मिर्च की खेती की तैयारी के समय सड़ी गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए. इस के बाद प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन 120 से 150 किलोग्राम, फास्फोरस 60 किलोग्राम और पोटाश 80 किलोग्राम लगता है.

ड्रिप इरिगेशन में इस की मात्रा 150 दिन में बांट कर हर दूसरे दिन देना ज्यादा फायदेमंद होता है. ड्रिप सिंचाई के साथ ही एनपीके 19:19:19 दे सकते हैं.

मिर्च में फूल आने के समय प्लेनोफिक्स

10 पीपीएम और उस के 3 हफ्ते बाद छिड़काव करने से अच्छी बढ़वार होती है और फल भी अधिक आते हैं. रोपाई के 18 और 43 दिन बाद ट्राईकेटेनाल 1 पीपीएम की ड्रेंचिंग करनी चाहिए.

मिर्च की खेती में लगने वाले रोग

मिर्च की खेती में ज्यादातर रोग पत्तियों को सिकोड़ने वाले होते हैं. रोग लगने से पौधों की बढ़वार रुक जाती है और इस का असर फसल उत्पादन पर पड़ता है.

मिर्च में आमतौर पर लगने वाले रोगों का उपचार इस तरह से किया जा सकता है.

थ्रिप्स : मिर्च की फसल में सब से घातक और नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी कुकड़ा रोग है. यह रोग वास्तव में थ्रिप्स कीट के कारण होता है. थ्रिप्स मिर्च के पौधों की पत्तियों का रस चूसते हैं. इस से पत्तियां नाव के आकार में ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं.

उपचार के लिए किसान रोगरोधी किस्मों का चयन करें. बीजों को थायोमेथाक्जाम 5 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से उपचारित कर लेना चाहिए.

रोग लगने पर नीम तेल का 4 फीसदी का छिड़काव  करना चाहिए. फिप्रोनिल 5 फीसदी एससी की डेढ़ मिली. मात्रा प्रति एक लिटर पानी में मिला कर स्प्रे कर करना फायदेमंद होता है.

सफेद मक्खी : इस कीट के शिशु व वयस्क पत्तियों की निचली सतह पर चिपक कर रस चूसते हैं, जिस से पत्तियां नीचे की तरफ मुड़ जाती हैं. कीट की लगातार निगरानी करते रहें.

संख्या के आधार पर डाईमिथोएट की 2 मिलीलिटर मात्रा को एक लिटर पानी में मिला कर छिड़काव करें. अधिक प्रकोप की स्थिति में थायोमेथाक्जाम 25 डब्ल्यूजी की 5 ग्राम को 15 लिटर पानी में मिला कर छिड़काव करने से फसल को सफेद मक्खी से बचाया जा सकता है.

माइट : इस कीट के प्रकोप से पौधों की पत्तियां नीचे की ओर मुड़ जाती हैं. मिर्च में लगने वाली माइट आंखों से दिखाई नहीं देती. यह कोई कीट ही नहीं होता, इसलिए इस की रोकथाम के लिए कीटनाशी काम नहीं करता है. ये पत्तियों की सतह से रस चूसते हैं. बचाव के लिए डायोकोफाल 2.5 मिलीलिटर या ओमाइट 3 मिलीलिटर प्रति लिटर में स्प्रे करना चाहिए. पाला पड़ने या बारिश में ज्यादा रोग लगने का खतरा रहता है.

बाजार की अच्छी जानकारी होनी चाहिए

ओमप्रकाश तिवारी बताते हैं कि मिर्च से अच्छा फायदा चाहिए, तो बाजार की अच्छी जानकारी होनी चाहिए. अगर ज्यादा मात्रा में मिर्च हो रही है, तो दूसरे शहरों में भी इसे बेच सकते हैं. मेरी मिर्च जबलपुर मंडी में जाती है. रोज दिनभर मिर्च की तुड़ाई होती है. इस के बाद ग्रेडिंग कर इस की पैकिंग की जाती है.

20 किलोग्राम की एक पैकिंग होती है. सुबह तड़के ही मंडी में माल पहुंचाना होता है. हरी मिर्च का भाव ज्यादा मिलता है. स्वाद में अधिक तीखी होती है. लाल मिर्च को भी 30 से 40 रुपए के भाव में बेच देते हैं.

मिर्च की तुड़ाई समय पर न होने से पौधों में कुछ मिर्च पक कर लाल हो जाती हैं. वैसे भी लाल मिर्च को सुखा कर बेचने का झंझट न पालें. हरी मिर्च से थोड़े कम दाम पर लाल मिर्च को भी तुरंत बेचना ही फायदेमंद होता है.

जबलपुर के आसपास के इलाकों में हरी मिर्च की खेती के लिए ओमप्रकाश तिवारी जानेपहचाने जाते हैं. ज्यादा जानकारी के लिए ओमप्रकाश तिवारी के मोबाइल फोन नंबर 7691916297 पर बात की जा सकती है.

प्रीत किए दुख होए

नंदीग्राम खगडि़या जिले का एक कसबा था, जो वहां से महज 10 किलोमीटर ही दूर था. कहलाता तो वह दलित बस्ती इलाका था, लेकिन वहां के सारे दलित ब्राह्मणों को ‘बाबू लोग’ पुकारते थे. इक्कादुक्का घर राजपूतों के भी थे.

नरेंद्र मोदी और “कृत्रिम महंगाई”

पहली दफा जब नरेंद्र दामोदरदास मोदी प्रधानमंत्री बने थे और अचानक पेट्रोल डीजल आदि के दाम कम होने लगे तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यह उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने आप हो रहा है-भावना यह थी कि स्थिति उनके “अच्छे कर्मों” और नेक कदम से, देश में महंगाई कम हो रही है. अन्यथा, कांग्रेस के समय तो देश में मंहगाई को लेकर त्राही त्राही मची हुई थी.

दरअसल, मामला सिर्फ सोच का है. कोई प्रधानमंत्री पद पर बैठा हुआ शख्स ऐसा कैसे कह सकता है कि मेरे पदभार ग्रहण करने के बाद महंगाई कम हो रही है और यह सिर्फ मेरे कारण हो रहा है, खुशहाली आ रही है. आखिर यह मैं मैं क्या है.

और देखिए कि किस तरह आज नरेंद्र दामोदरदास मोदी के प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहते आज महंगाई सर चढ़कर बोल रही है.और नरेंद्र मोदी की बोलती बंद है.

वस्तुत: कई ऐसी जींस है जहां कृत्रिम रूप से महंगाई लाई गई है,वह भी हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी के आशीर्वाद से. कैसे?

आइए! नीचे हम आपको विस्तृत रूप से बताने का प्रयास करते हैं.

 ये भी पढ़ें- बेटी का जन्म: महिला प्रताड़ना का अनवरत सिलसिला

आउट ऑफ कंट्रोल महंगाई

देश में महंगाई धीरे-धीरे आउट ऑफ कंट्रोल होती जा रही है. छोटी छोटी और बड़ी चीजें लगातार महंगी होती जा रही है लोगों के हाथों से खिसकती दिखाई दे रही है जिसमें पहली पंक्ति में है- रसोई गैस जो 7 वर्षों में लगभग दोगुने मूल्य पर मिल पा  रहा है.

दरअसल, हमारे यहां सबसे बड़ी बीमारी है जमाखोरी की. आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी जमाखोरों पर अंकुश लगाने का कोई कारगर सिस्टम हमारे देश में लागू नहीं हो पाया है.

अब जैसे कि भोज्य पदार्थ तेल है देखते ही देखते प्रति किलो पचहत्तर रूपए मंहगा हो गया है इस तरह लगभग यह दुगने दाम तक पहुंच गया है.

वैश्विक स्तर पर मंदी एवं रूस यूक्रेन युद्ध का असर  भी पड़ रहा है और महंगाई का “बम” लगातार फूट रहा है. खाद्य तेलों के बाद पेट्रोल, डीजल के दामों में लगातार उछाल आ रहा है. डीजल के रेट बढ़ते ही ट्रांसपोर्टिंग चार्ज भी बढ़ता जा रहा है. चांवल गेंहू की कीमतों में भी वृद्धि हुई है. आटा- मैदा के अलावा कई किराना सामानों के दामों में भी वृद्धि हुई है. इस बढ़ती महंगाई ने आम आदमी का जीना ही मुहाल हो गया है.

यह सच है कि पूरे देश में महंगाई का तांडव सामने आया है. महंगाई बढ़ने के कई कारण हैं. विश्वव्यापी मंदी के बाद रूस- यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर कई देशों के उत्पादन के आयात निर्यात पर भी पड़ा है. विदेशों से तेलों का बड़े पैमाने पर आयात होता है . माह भर पहले से खाद्य तेलों की कीमतों में भारी उछाल आया है. सभी खाद्य तेलों के दामों में वृद्धि हुई है. खाद्य तेलों के बढ़े दामों को लेकर मचे हाहाकार के बीच रसोई गैस के दाम भी सरकार ने बढ़ा दिया .

पेट्रोल डीजल के दाम तो सरकार के हाथों में है फिर भी है हफ्ते भर के अंतराल में 5 रूपये तक वृद्धि हुई है. पेट्रोल 106 रूपये में तो डीजल 97 रूपये 41 पैसे में बिक रहा है.

ये भी पढ़ें- नशे का कारोबार, युवाओं की चिंता

सच है कि सिर्फ तेलों के दामों पर ही आंच नहीं आई है बल्कि अनाज के दाम भी बढ़ गए हैं. चावल के दाम में बढोत्तरी हो गई है. चावल के साथ गेंहू के दाम में भी उछाल आया है. स्थानीय कृषि उपज मंडियों में अच्छी क्वालिटी का गेंहू 2150 तक बिक रहा.

बढ़ती महंगाई से आम लोग काफी परेशान हैं.

व्यवसायी संजय जैन के मुताबिक बढ़ती महंगाई से घर का बजट बिगड़ता जा रहा है. अब तो रोजमर्रा के सामानों की व्यवस्था करने में ही बड़ी परेशानी हो रही है. महिलाएं नरेंद्र मोदी सरकार के समय में बढ़ती मंहगाई से दुखी हैं .

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें