सवाल

मेरी 15 वर्षीया बेटी 9वीं क्लास में पढ़ती है. वह मानसिक रूप से कमजोर है. 7 वर्ष की उम्र से उस का मिर्गी का इलाज चल रहा है. वह पढ़ाई में और बौद्धिक तौर पर भी कमजोर है. स्पैशल एजुकेटर की देखरेख में वह पढ़ाई करती है. लेकिन इन दिनों वह स्कूल नहीं जाना चाहती क्योंकि स्कूल में बच्चे उस का मजाक उड़ाते हैं जिस से संघर्ष करने के बजाय वह बस अपनी दुनिया में ही खोए रहना चाहती है. हम उस की कैसे मदद करें?

जवाब

आप की बेटी ऐसे दौर से गुजर रही है जहां मानसिक के साथसाथ उस में शारीरिक बदलाव भी होने शुरू हो गए हैं. इस स्थिति में उस पर आप को सचमुच पहले से ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. सब से पहले तो आप अपनी बेटी को सामान्य स्कूल से निकलवा कर स्पैशल स्कूल में भरती कराएं. ऐसा इसलिए क्योंकि हम अकसर यह सोचते हैं कि सामान्य स्कूल में शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को डाल कर हम उन्हें सामान्य होने का एहसास दिला रहे हैं, लेकिन होता इस का बिलकुल उलटा ही है.

बच्चे बाकी बच्चों को देखदेख कर यह सोचनेसमझने लगते हैं कि उन में कोई कमी है. यह भावना समय के साथ गहरी होती जाती है. वहीं स्पैशल स्कूल में बच्चे के शारीरिक व मानसिक स्तर के अनुसार ही पढ़ाईलिखाई व दूसरी ऐक्टिविटीज होती हैं जो बच्चे के पूर्ण विकास के लिए बेहद जरूरी हैं. वहां वह अपने जैसे बाकी बच्चों से मिलेगी भी और काफी कुछ सीखेगी व उन्हें भी सिखाएगी, जो विकास की सही परिभाषा भी है. वहां कोई उस का मजाक नहीं उड़ाएगा.

आप उसे समय दें, उस से बातें करें. उसे यह एहसास न कराएं कि उस में कोई कमी है. इन सब के बाद भी यदि उस का मनोबल मजबूत न हो तो किसी काउंसलर या विशेषज्ञ की मदद लें.

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