Download App

Anupamaa: दुनिया की सबसे लपरवाह मां बनी अनुपमा, देखें Video

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ की लीड एक्ट्रेस  रूपाली गांगुली (Rupali Ganguly) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह अक्सर फोटोज और वीडियोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं. अब उन्होंने एक ऐसा वीडियो शेयर किया है, जिसमें आप देख सकते हैं कि एक्ट्रेस ने अपने बेटे को भूखा रख दिया है.

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि रूपाली गांगुली जमकर मेकअप करती दिखाई दे रही हैं. मेकअप करने के चक्कर में रूपाली गांगुली अपने बेटे के लिए खाना बनाना ही भूल गईं. बेटे ने आते ही रूपाली गांगुली के सामने खाली थाली रख दी. जिसके बाद रूपाली गांगुली को अपनी गलती का अहसास हुआ. फैंस अनुपमा के इस वीडियो का खूब मजाक बना रहे हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Rups (@rupaliganguly)

 

शो के बिते एपिसोड में दिखाया गया कि वनराज पाखी को लेने के लिए कपाड़िया हाउस पहुंच जाता है और पाखी को जबरदस्ती अपने साथ ले जाता है. जिससे पाखी अपने घरवालों से नाराज हो जाती है.

 

शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुपमा और अनु बापूजी और बा से मिलने शाह हाउस जाते हैं. उन्हें देखते ही पाखी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है. वह अनुपमा से कहती है कि आप मेरे घर में क्यों आई हैं, आपने अपने घर में तो मुझे रहने नहीं दिया.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Serial (@tv_seriall)

 

अनुपमा पाखी को समझाती है और कहती है कि वह उसकी मां है. इस बात पर पाखी जवाब देती है, ये मां-मां का रोना मत शुरू कीजिए, आप मां के नाम पर कलंक हैं और कुछ नहीं.शो में अब ये देखना दिलचस्प होगा कि अनुपमा पाखी को सही रास्ते पर कैसे लाती है?

जैविक खेती का महत्त्व

हमारे देश में जैविक खाद आधारित खेती पुराने समय से की जा रही है. आजादी के बाद हरित क्रांति के दौर में रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का शीघ्रता से प्रयोग हुआ, जिस के परिणामस्वरूप खाद्य उत्पादन में वृद्धि हुई, परंतु अधिक मात्रा में रासायनिक खादों के प्रयोग से वातावरण दूषित हुआ, जिस से मानव जीवन प्रभावित हुआ.

जैविक खेती के लिए किसान निम्नलिखित तकनीकी को प्रयोग में लाएं :

* मिट्टी संरक्षण के लिए पलवार प्रयोग.

* मिट्टी में पोषक तत्त्व संतुलन के लिए दलहनी फसलों की एकल, मिश्रित और अंतरासस्यन.

* मिट्टी में कृषि अवशेष, वर्मी कंपोस्ट, जीवाणु खाद और बायोडायनामिक कंपोस्ट का प्रयोग.

* जैविक उर्वरकों के प्रयोग का महत्त्व है, जिस में राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, पीएसबी एवं बीजीए प्रमुख हैं. जैविक उर्वरकों के प्रयोग का मुख्य आकर्षण है उन के उत्पादन और उपयोग की सफलता एवं कम लागत.

* पौध सुरक्षा के लिए खरपतवार की सफाई और जैविक कीटनाशियों का प्रयोग.

* फसल चक्र, हरित खाद, भूपरिष्करण और खाद प्रबंधन द्वारा फसलों में खरपतवार प्रबंधन.

* उपरोक्त तकनीकी द्वारा जैविक किसान अपने फसलों में पोषक तत्त्व और कीट व रोग प्रबंधन करते हैं.

* पोषक तत्त्व प्रबंधन के लिए देश के विभिन्न भागों में समाहित देशी तकनीक.

* देश के विभिन्न भागों में मिट्टी में पोषक तत्त्व प्रबंधन के लिए किसानों द्वारा अपनाई जा रही तकनीकियों का अवलोकन करें, तो पता चलता है कि देश के अधिकतर हिस्से में किसान स्थानीय रूप से उपलब्ध पोषक तत्त्वों के जैविक श्रोतों का ही प्रयोग करते हैं.

* ऐसे स्थानीय खाद, जीवांश अथवा जैविक अवशिष्ट का प्रयोग किसानों के एक लंबे प्रयोग का परिणाम है.

* ये कृषि क्रियाएं क्षेत्र विशेष के किसानों की सामाजिक परंपराओं और मान्यताओं को भी अहमियत देते हैं.

बंगले वाली: नेहा को क्यों शर्मिंदगी झेलनी पड़ी?

नेहा का तो पढ़ाई में मन नहीं लगा, परंतु कांची पढ़ने में होशियार थी. नेहा की जल्दी ही शादी कर दी गई. नेहा के सामने वाले बंगले में जब कांची रहने आई तो वह मिलने से कतराने लगी. पर एक दिन अचानक सुनार की दुकान से काम करवा कर लौट रही थी तभी कांची ने नेहा को पहचान लिया और उसे अपने साथ बंगले पर ले आई. बंगले पर नेहा ने ऐसी कौन सी गड़बड़ की कि उसे शर्मिंदगी झेलनी पड़ी?

Monsoon Special: बच्चों की इम्यूनिटी को बढ़ाएं ऐसे

छोटे बच्चों में इम्यूनिटी कम होने के चलते अधिक इन्फैक्शन होने का खतरा बना रहता है. इस कारण आजकल पेरैंट्स के सामने सब से बड़ा प्रश्न बच्चों की हैल्दी डाइट को ले कर रहता है. सो यहां जानते हैं कि बच्चों की इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं. 4 साल का रोहन बहुत ही दुबला है क्योंकि वह खाना ठीक से नहीं खाता. उस की मां कोमल उसे 2 से 3 घंटे घूमघूम कर हर रोज उसे खाना खिलाती है. वह बेटे को बहुत बार डाक्टर के पास भी ले गई पर डाक्टर की दवाई का कुछ खास फायदा नहीं हुआ. उसे चिप्स, बिस्कुट, चौकलेट और बाजार के जंकफूड पसंद हैं. उसे दाल, चावल, सब्जी खाना पसंद नहीं है.

परेशान हो कर मां ने डाक्टर के पास जाना बंद कर दिया और वह जो भी खाता है उसी में संतुष्ट रहने लगी. यह सही है कि आज छोटा बच्चा हो या शिशु, उसे सही पोषण के लिए सही मात्रा में खाना खिलाना बहुत मुश्किल है. घरेलू मां घंटों बैठ कर खाना खिलाती है जबकि वर्किंग वूमन को केयरटेकर के ऊपर निर्भर रहना पड़ता है. अगर बच्चा खाना न खाए तो खुद खा लेती है या फिर फेंक देती है. इस का सही इलाज न तो पेरैंट्स के पास है और न ही डाक्टर के. ऐसे बच्चे हमेशा बीमार रहते हैं और उन की इम्यूनिटी कम होती जाती है. इस बारे में एंड्रौयड बायोमेड लिमिटेड की प्रमुख डा. सुनैना आनंद कहती हैं, ‘‘पिछले कुछ सालों में चेचक, पोलियो और स्पैनिश फ्लू जैसी कई महामारियों से इम्यूनिटी बढ़ा कर ही नजात पाई गई है. यही बात कोरोना वायरस के साथ भी लागू होती है.

हालांकि यह नया वायरस है और मानव में इस की इम्यूनिटी नहीं है. इसलिए यह सब के लिए घातक सिद्ध हो रहा है. रोग प्रतिरोधक क्षमता ही शरीर को किसी संक्रमण से बचाती है.’’ डा. सुनैना आगे कहती हैं, ‘‘छोटे बच्चों में इम्यूनिटी कम होने की वजह से वे किसी भी इन्फैक्शन के लिए अति संवेदनशील होते हैं. इन्फैंट को मां से ब्रैस्ट फीडिंग द्वारा इम्यूनिटी ट्रांसफर होती रहती है लेकिन समय से पहले अगर बच्चे का जन्म हुआ हो तो उस की इम्यूनिटी अधिकतर कम होती है क्योंकि उसे पूरा पोषण पेट में रहते हुए नहीं मिला है जिस से उस में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है. इसलिए ऐसे बच्चों की देखभाल बहुत ही अच्छे तरीके से की जानी चाहिए.

इम्यूनिटी बढ़ाने के कुछ सु झाव द्य अगर बच्चा छोटा है तो उसे स्तनपान नियमित कराएं. इस से उस की इम्यूनिटी बढ़ती है क्योंकि मां के दूध में प्रोटीन, वसा, शर्करा, एंटीबौडी, प्रोबायोटिक्स आदि होते हैं जो बच्चे के लिए खास जरूरी होते हैं. द्य छोटे बच्चों का टीकाकरण निर्देशों के अनुसार करवाते रहना चाहिए क्योंकि यह गंभीर बीमारी से बच्चे को बचाने का एक प्रभावी व सुरक्षित तरीका है. हालांकि कोरोना संक्रमण के दौरान बहुत सारे पेरैंट्स ने इन्फैक्शन के डर से बच्चों का टीकाकरण समय से नहीं करवाया जो बच्चों के लिए ठीक नहीं रहा. बच्चे अधिकतर फर्श पर पड़ी वस्तुओं को हाथ लगाते या मुंह में डालते रहते हैं जिस से उन्हें कई बार खतरनाक बीमारी लग जाती है.

इसलिए समयसमय पर उन के हाथों को धोते रहना भी बहुत जरूरी है ताकि यह उन की आदतों में शामिल हो जाए, खासकर भोजन से पहले और भोजन के बाद. द्य पर्याप्त नींद भी बच्चों की इम्यूनिटी को बढ़ाती है. अपर्याप्त नींद शरीर में साइटोकिंस नामक प्रोटीन के उत्पादन करने की क्षमता को सीमित करती है जो संक्रमण से लड़ने व उस के प्रभाव को कम करने में मदद करती है. बच्चों को एक दिन में कम से कम 8 से 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए. द्य बच्चे की इम्यूनिटी उम्र के साथसाथ लगातार बदलती रहती है. इस में खाने की आदतों से उन्हें प्राकृतिक रूप से इम्यूनिटी मिलती है जो किसी भी इन्फैक्शन से लड़ने में सक्षम बनाती है. संतुलित भोजन और पूरक आहार बच्चों को हमेशा संक्रमण से दूर रखते हैं. बच्चे को संतुलित और पोषक आहार देना आज की मांओं के लिए समस्या है क्योंकि अधिकतर बच्चों को घर का बना खाना पसंद नहीं होता. पर इस से मायूस होने की कोई बात नहीं.

जब आप किचन या मार्केट में जाएं तो बच्चे को भी साथ ले कर काम करें और बच्चे से भी उस के अनुसार काम करवाएं. इस से उस की खाना खाने में रुचि बढ़ती है. इस बारे में डा. अनीश देसाई कहते हैं कुछ पोषक तत्त्व नियमित देने से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरेधीरे बढ़ती जाती है, जैसे- द्य स्कार्बिक एसिड के रूप में जाना जाने वाला विटामिन सी है जो खट्टे फल, जामुन, आलू और मिर्च में पाया जाता है. इस के अलावा यह टमाटर, मिर्च, ब्रोकली आदि प्लांट के स्रोतों में भी पाया जाता है. विटामिन सी एंटीबौडी के गठन को एक्साइट कर इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है. द्य विटामिन ई एक एंटीऔक्सिडैंट के रूप में काम करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. फोर्टिफाइड अनाज, सूरजमुखी के बीज, बादाम तेल (सूरजमुखी या कुसुम तेल) हेजलनट्स और पीनटबटर के साथ बच्चे के आहार में विटामिन ई जोड़ने से इम्यूनिटी को बढ़ावा देने में मदद मिलती है.

जिंक इम्यूनिटी को प्रभावी ढंग से काम करने में मदद करता है. इस के लिए जिंक के स्त्रोत पोल्ट्री, दूध, साबुत अनाज, बीज और नट्स हैं. द्य प्रोटीन बच्चे की इम्यूनिटी को बढ़ाता है जो किसी बीमारी से लड़ने में मदद करती है. इस के लिए अंडे, बीन्स, मटर, सोया उत्पाद, अनसाल्टेड नट्स, बीज आदि प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करना अच्छा रहता है. द्य प्रोबायोटिक्स भी इम्यूनिटी को बढ़ाने में कारगर सिद्ध होता है जो दही, किमची, फरमैंटेड सोया प्रोडक्ट आदि में होता है. ये हानिकारक बैक्टीरिया को दूर रखते और उन्हें आंत में बसने से रोकते हैं. द्य विटामिन ए, डी, बी12, फोलेट, सैलेनियम और आयरन सहित अन्य पोषक तत्त्व भी बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं.

मैं 27 वर्षीय युवक हूं मैं अपने ऑफिस के कलीग को बहुत ज्यादा पसंद करने लगा हूं क्या करुं?

सवाल
मैं 27 वर्षीय युवक हूं. औफिस की कलीग को बहुत पसंद करने लगा हूं. हमारी काफी अच्छी दोस्ती है. जब मैं ने उसे अपनी फीलिंग्स बताईं तो उस का कहना था कि वह मुझे अच्छा दोस्त मानती है,
मुझसे प्यार नहीं करती और न ही शादी करना चाहती है. मैं उस से दूर नहीं जा पा रहा. दिमाग में वह ही छाई रहती है. क्या करूं, समझ नहीं आ रहा?
जवाब
देखिए हम तो यही सलाह देंगे कि यदि वह लड़की आप से प्यार नहीं करती और शादी नहीं करना चाहती तो उस का खयाल अपने मन से निकाल देने में समझदारी है. आप किसी पर अपना प्यार थोप नहीं सकते.
जौब चेंज करना पौसिबल हो तो ठीक है अन्यथा औफिस में उस की तरफ ध्यान देना छोड़ दें. उस के सामने बिलकुल न जाएं. शादी के लिए ऐसी लड़की ढूंढें जो आप से प्यार करे.
हरेक को अपनी पसंद से शादी करने का अधिकार है. उस लड़की पर किसी तरह का दबाव न बनाएं. अगर उस के मन में आप के लिए प्यार पनपा तो वह खुद आप के पास आएगी या पास आने के बहाने ढूंढे़गी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem 

अहंकार और चुप्पी छोड़ ऐसे निबटाएं घरेलू झगड़े

एक रिटायर्ड सरकारी अफसर के 4 बेटों के बीच कई सालों से बोलचाल नहीं थी. सब का अलगअलग चूल्हा था, किसी का किसी से कोई लेनादेना भी नहीं था. इस के बाद भी सभी भाई एकदूसरे के दुश्मन बने हुए थे. हर कोई एकदूसरे को नीचा दिखाने और बेइज्जत करने का कोई मौका नहीं गंवाता था.

दरअसल, रसोई से शुरू हुआ विवाद धीरेधीरे इतना बढ़ गया कि एक दिन भाइयों में हाथापाई की नौबत आ गई और मामला पुलिस थाने में जा पहुंचा. थाने के चक्कर में फंसने और महल्ले व रिश्तेदारी में फजीहत होने के बाद आखिर सभी भाइयों ने बैठ कर बात की कि वे लोग आपस में क्यों लड़ रहे हैं. बातचीत के दौरान यह बात उभर कर सामने आई कि सब की बीवियों में तनातनी की वजह से भाई एकदूसरे के दुश्मन बन गए हैं. सभी भाइयों के बीच बातचीत शुरू हो गई और सारे गिलेशिकवे खत्म हो गए.

इस मिसाल से यह सबक मिलता है कि सच में बात करने से ही बात बनती है. किसी भी मसले पर अगर शांति के साथ बैठ कर बातचीत की जाए तो कोई न कोई हल निकल ही आता है. समाजविज्ञानी हेमंत राव कहते हैं कि हर समस्या का कोई न कोई समाधान होता है, अगर इस के लिए कोशिश की जाए. पुरानी बातों और विवादों को दरकिनार कर सुलह का रास्ता निकाला जा सकता है. ज्यादातर पारिवारिक झगड़ों में देखा गया है कि झूठे अहं और आपसी बातचीत बंद होने से ही फसाद की जड़ें गहरी होती जाती हैं.

रांची का रहने वाला दिनेश सिंह पारिवारिक झंझट में फंस कर पिछले 5 साल से कोर्ट, वकील और थाने का चक्कर लगा रहा है. दिनेश बताता है कि कोर्ट और थाने के चक्कर में लाखों रुपए बरबाद हो गए और प्राइवेट कंपनी की नौकरी भी छूट गई. छोटेमोटे घरेलू मामलों में अगर दोनों पक्ष जल्दी कोई फैसला चाहें तो हाईकोर्ट के मैडिएशन सैंटर यानी मध्यस्थता केंद्र में जाना चाहिए.

मुकदमों का बढ़ता बोझ

पटना हाईकोर्ट के वकील उपेंद्र प्रसाद कहते हैं कि ज्यादातर परिवारों में ‘मूंछ’ की लड़ाई की वजह से निचली अदालतों में मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है. ये मुकदमे जीतने के लिए नहीं बल्कि एकदसूरे को नीचा दिखाने, बरबाद करने की नीयत से लड़े जाते हैं. यह मुकदमेबाजी पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है. ऐसे झगड़ों और मुकदमों को कम करने के लिए बनाए गए मध्यस्थता कानून, ग्राम कचहरी, उपभोक्ता फोरम, ट्रिब्यूनल आदि कारगर तरीके से जनता के बीच पैठ नहीं बना सके हैं.

मुकदमों की बढ़ती संख्या, जजों और न्यायिक अफसरों की कमी की वजह से मुकदमों का निपटारा जल्द नहीं हो पाता है. कई ऐसे मुकदमे हैं जिन का फैसला आने में 40-45 साल लग जाते हैं. साल 1968 में दायर 1 केस (केस नंबर-562/1961) सहदेव तिवारी बनाम कपिल मुनि और चिंतामणि बनाम राज्य सरकार (केस नंबर-426/1965) जैसे सैकड़ों मुकदमे ऐसे हैं जिन का कोई पक्ष फैसला जानने के लिए जिंदा बचा ही नहीं है.

मध्यस्थता के जरिए आम लोगों के आपसी विवादों को सुलझाया जा सकता है. यह तभी मुमकिन है जब लोग इस के बारे में जानेंगे. मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले वकील और न्यायिक अधिकारी को इस के लिए स्पैशल ट्रैनिंग देने की दरकार है. आम लोगों को इस के लिए जागरूक करने की जरूरत है.

मध्यस्थता केंद्र

कानून के जानकारों का मानना है कि हर तरह के पारिवारिक विवादों को मध्यस्थता के जरिए सुलझाया जा सकता है. जजों के पास ऐसे मामलों के लिए समय दे पाना मुमकिन नहीं होता है, इसलिए ऐसे मामलों को मध्यस्थता केंद्र के पास भेजना चाहिए. मध्यस्थता एक ऐसा ताकतवर जरिया है जिस से अदालत के बाहर दोनों पक्षों की रजामंदी से समस्या का हल किया जा सकता है. जिस तरह से बच्चों के झगड़ों को मांबाप सुलह कराते हैं, यह तकरीबन उसी का बड़ा रूप है.

पारिवारिक झगड़ों को सुलझाने में वकीलों की अहं भूमिका हो सकती है. मध्यस्थता से न सिर्फ दोनों पक्षों की जीत होती है, बल्कि समय और पैसे की बचत भी होती है. मध्यस्थता केंद्र में विवाद निबटाने पर वादी कोर्ट फीस ऐक्ट 1870 की धारा 16 के तहत पूरा न्यायालय शुल्क वापस पाने का हकदार भी होता है. आज समय की मांग है कि मध्यस्थता केंद्र के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए और उन्हें बेवजह अदालतों के चक्कर लगाने से बचाया जाए.

‘‘तब्बार’’ फेम अभिनेता साहिल मेहता को मिला जान्हवी कपूर और आनंद एल राय का साथ

मूलतः दिल्ली निवासी 24 वर्षीय साहिल मेहता ने ‘‘तब्बार’’ और ‘‘गिल्टी’’ में अपने उत्कृष्ट अभिनय से लोगों को मंत्रमुग्ध कर चुके हैं.जिसके चलते ही उन्हे जान्हवी कपूर व आनंद एल राय का साथ मिला है. आनंद एल राय निर्मित और जान्हवी कपूर की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘‘गुड लक जेरी’’ में साहिल मेहता अति महत्वपूर्ण किरदार में नजर आने वाले हैं. यह फिल्म डिज्नी़हॉटस्टार पर 29 जुलाई 2022 को रिलीज होगी.

फिल्म ‘‘गुड लक जेरी में साहिल मेहता पंजाब के 20 वर्षीय सिख लड़के जिगर की भूमिका में नजर आने वाले हैं, जिसकी वर्तमान समय के पंजाब के ज्यादातर युवा लड़कों की ही तरह ड्रग्स और अपराध के व्यवसाय से जुड़ने में रूचि है.

akshay-kumar

खुद ‘‘गुडलक जेरी’ की चर्चा चलने पर साहिल बताते हैं ‘‘मैने इसमें जिगर का किरदार निभाया है, जो कि ड्रग्स और अपराध की दुनिया से ताल्लुक रखता है.वह बहुत ही ज्यादा जुनूनी और ऊर्जा वाला एक युवा किशोर है. वह एक सिख है. इसलिए मैंने अपने बाल नहीं काटे, सिर्फ दाढ़ी ही नहीं बल्कि उस शरीर पर कहीं भी, ताकि मैं उसके साथ न्याय कर सकूं. मोनोब्रो जो हमचरित्र पर देखते हैं वह वास्तविक है, मैं अपने पूरे शरीर पर सरसों का तेल लगाता था और प्राकृतिक धूप में भिगोकर एक तनी हुई रंगत प्राप्त करता था,जो मेरे चरित्र को वह जंग लगा रंग देता है जैसा कि वह पंजाब के एक गाँव से है. हमें मेकअप भी करना था,इसलिए मैं स्वाभाविक रूप से बहुत अधिक तना हुआ नहीं हो सकता था.

bollywood

जान्हवी कपूर के साथ काम करने के अपने अनुभव सा-हजया करते हुए साहिल मेहता ने कहा ‘‘वह बहुत प्यारी व प्रतिभावान हैं.मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा.हम उम्र जान्हवी कपूर मु-हजये और भी कठिन काम करने के लिए प्रेरित करती थीं.’’

तो वहीं वह ग्यारह अगस्त को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली आनंद एल राय निर्देशित फिल्म ‘‘रक्षा बंधन’’ में अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर के साथ अहम किरदार में नजर आएंगे.

शिवाजी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से बायोकैमिस्ट्री ऑनर्स में विज्ञान स्नातक साहिल मेहता लंबे समय से दिल्ली में स्कूल व कालेज दिनों से ही थिएटर करते रहे हैं.बचपन से ही अभिनय के शौकीन साहिल मेहता अंततः अपने अभिनय कौशल का तराशने के लिए ‘‘पुणे फिल्म संस्थान’’ से जुड़े. फिर प्रोफेशनल थिएटर करना शुरू किया. उसके बादवह बौलीवुड से जुड़ गए. अभिनय के अलावा साहिल साइकिलिंग, स्कूबा डाइविंग, बास्केटबॉल, रोलर स्केटिंग और बैडमिंटन जैसे खेलों में बहुत सक्रिय हैं.अंग्रेजी, पंजाबी और हिंदी भाषा में उन्हें महारत हासिल है.साहिल मेहता इन दिनों इस बात से भी अति उत्साहित हैं कि उनकी नई लघु फिल्म ‘‘बिरहा’’ को हॉलीवुड शॉर्टस फिल्म फेस्ट 2022’’ में प्रदर्शन के लिए चुना गया है.

Bigg Boss 16 में होगा सब पानी-पानी! लीक हुई Photos

कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो ‘बिग बॉस 16’  का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार रहता है. इस शो से जुड़ी खबर आये दिन वायरल होता रहता है. रिपोर्ट्स के आधार पर शो से जुड़ी खबर आ रही है. बताया जा रहा है कि इसका सेट कैसा होगा, क्या थीम होगी? आइए बताते है, शो से जुड़ी अपडेट्स के बारे में…

‘बिग बॉस 16’ के प्रीमियर से जुड़ी खबरें आई थीं कि ये शो सितंबर के आखिरी या अक्टूबर के शुरुआती सप्ताह में शुरू होग. रिपोर्ट के अनुसार इसका प्रोमो सलमान खान अगस्त में शूट भी करेंगे.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Bigg Boss 16 (@bigg.boss16.updates)

 

खबर आ रही है कि सबसे पहले घर का प्री-प्रोडक्शन का सारा काम हो गया है. दरअसल फैनपेज ने फोटोज शेयर की है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Bigg Boss 16 (@bigg.boss16.updates)

 

‘बिग बॉस 16’  की थीम ‘वॉटर थीम’ है. सब स्काई ब्लू कलर से सजाया गया है. वॉटर थीम से इसे सजाया गया है. फोटोज में आप देख सकते हैं कि हर तरफ जितने भी पोस्टर्स लगे हैं, उनमें पानी वाले जानवर नजर आ रहे हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Bigg Boss 16 (@bigg.boss16.updates)

 

बता दें कि पिछले साल जंगल थीम थी. बिग बॉस के सेट को पूरी तरह से जंगल की तरह सजा दिया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, ‘बिग बॉस 16’ के लिए मुनव्वर फारूकी, सनाया ईरानी, जन्नत जुबैर, फैसल शेख, सृति झा, शाइनी आहूजा, दिव्यांका त्रिपाठी को अप्रोच किया गया है.

नसनस में धार्मिक भ्रष्टाचार

भारत मे भ्रष्टाचार कोई अपराध नहीं, बल्कि हिंदू संस्कृति का मूलभूत सिद्धांत है. भ्रष्टाचार भारत के लोगों के स्वभाव का हिस्सा बन चुका है, इसलिए यह कोई विचारणीय मुद्दा नहीं रहा है. यह राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक व धार्मिक व्यवस्था में अर्थात सर्वव्यापी है.

भारतीयों ने भ्रष्ट व्यक्तियों को न केवल स्वीकार करने की आदत बनाई है बल्कि भ्रष्ट लोगों को सम्मान की नजरों से देखना शुरू कर दिया है. लड़के की नौकरी में ऊपरी कमाई को देख कर रिश्ते तक होते है.

भारत की जनता परंपरागत रूप से भ्रष्ट है.भ्रष्टाचार भारतीयों की जीवनशैली का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है. भारत को कोई ऐसा वयस्क नहीं मिलेगा जो भ्रष्टाचार की संस्कृति का हिस्सा न रहा हो.

भारत में धर्म में भी लेनदेन का विषय है यानि धार्मिक भ्रष्टाचार खुलेआम चलता है. अपने भगवान को नकद धन देना व उस के बदले में उच्चतम इनाम पाने की चाहत रखते हैं. धार्मिक भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए साहित्य रचते है और लिखते है कि दान/धर्म करने से धन में बढ़ोतरी होती है.

नौकरियों में जो पैसे के बल पर पहुंचता है, उस को पता होता है कि मैं योग्य लोगों का हक मार रहा हूं. अपनी अयोग्यता जानते हुए भी, योग्य व्यक्ति पर भ्रष्ट तरीके से खुद को तरजीह देना उन्हें गलत नहीं लगता और मांबाप इस प्रक्रिया में शामिल होते है, समाज के लोग भी शामिल होते है और समाज इसे गलत नहीं बल्कि कुछ बड़ा नैतिक कार्य करने की तरह लेता है.

धर्मस्थलों के भीतर हो रहे इस रिश्वत के कारोबार को कोई अनैतिक नहीं समझता, जब कि सत्ता/सिस्टम के साथ इस तरह के लेनदेन को ही “भ्रष्टाचार” की श्रेणी में सरकारी तौर पर माना जाता है.

भारत का धनिक वर्ग मंदिरों में नकदी, हीरेजेवरात देने को नैतिक कार्य मानता है, लेकिन वह ग़रीबों की मदद नहीं करता. किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद उस की नजर में व्यर्थ की बर्बादी है, उसे वो धर्म नहीं मानता है.

कर्नाटक के पूर्व मंत्री जनार्दन रेड्डी ने तिरुपति को 45 करोड़ रुपए के सोने और हीरे के मुकुट चढ़ाये.अम्बानी ने भी श्रीनाथजी को सोने का मुकुट भेंट किया था. इस तरह के हजारों उदाहरण भरे पड़े है.

इन धनिक भक्तों द्वारा बड़ी चाहत के बदले दी रिश्वत से इतनी संपत्ति इन धर्मस्थलों के पास एकत्रित हो गई कि हीरे/मोती/जवाहरात तहखानों में धूल खा रहे हैं. धर्मस्थलों पर काबिज लोगों की बुद्धि का स्तर मानवीय सभ्यता से सैंकड़ों साल पीछे का है. यही कारण है कि भारत मे करोड़ों लोग भूखे पेट सो रहे है, देश विदेशी कर्ज तले दबता जा रहा है. इस पूंजी का समाज व देश निर्माण में कोई उपयोग नहीं है.

जब अंग्रेज भारत मे आये तो उन्होंने स्कूल खोले और हम भारतीय बाहर जाते है तो अमेरिका, लंदन, अबूधाबी तक मंदिर बनाते है. भारत के लोगों की अंतश्चेतना में यह स्थापित है कि भगवान कृपा के बदले नकदी लेते है तो काम के बदले रिश्वत लेने में अनैतिकता जैसा कुछ नहीं है. यही कारण है कि भारत में रिश्वत का लेनदेन कोई नैतिक कलंक नहीं है.

भ्रष्टाचार हमारे स्वभाव में है और इस को पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तानांतरण करते जाते है. हजारों सालों से हम भारतीय यही करते आये है. विदेशी आक्रमणकारियों को बुलावा भेजना, मार्ग बताना, गढ़किलों के गेट जानबूझ कर खुले छोड़ देना, सेनापतियों द्वारा रिश्वत ले कर आत्मसमर्पण कर देने जैसे सैंकड़ों उदाहरणों से हमारा इतिहास भरा पड़ा है. मुगलों से ले कर अंग्रेजों तक, भले नाम संधि का दिया गया हो लेकिन पैसे के बदले में ही अधीनता स्वीकार की थी.

भारत के लोगों ने कभी एकजुट हो कर विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ युद्ध नहीं लड़ा. विदेशियों को भारत के लोगों की भ्रष्ट संस्कृति का जैसे ही पता चलता, वैसे ही नकदी ले कर युद्ध के मैदान में आ जाते थे. पड़ौसी राजा या जिस के साथ युद्ध होना था उस के सैन्य कमांडर ही खरीद लिए जाते थे. आंग्ल-सिक्ख व प्लासी के “युद्ध” में भारतीयों द्वारा थोड़ा प्रतिरोध किया गया लेकिन यहां भी अंत मे मीर जाफर बिक गए.

भारतीय सदा से एकजुटता, अखंडता, देशभक्ति पर रिश्वत द्वारा निज हित को तवज्जो देते है.आईएसआई के लिए जासूसी करते जब पकड़े जाते है तब नाम भले ही हनी-ट्रेप का दे दिया जाएं लेकिन पैसे के बदले जमीर बेचना एक सामान्य घटना है. जिस के स्वभाव में स्वहित है, रिश्वत है तो विखंडन का शर्तिया गुण भी साथ होता है.

भारतीय सामाजिक व्यवस्था में कुछ जन्मजात उच्च होते हैं, तो कुछ जन्म से ही निम्न. समानता की बुनियाद तक इस समाज मे नहीं है. पूरा का पूरा समाज जात व धर्म मे विखंडित है. यहां हिन्दू है, मुस्लिम है, सिक्ख है, ईसाई है लेकिन भारतीय ढूंढे नहीं मिलता है. जाट है, तिवारी है, यादव है, राजपूत है, मेघवाल है, कुर्मी है, कोइरी है लेकिन भारतीय नहीं है. भारतीय सिर्फ कागजी तमगा है. आपसी विश्वास की खाई बहुत गहरी है. हम भूल चुके है कि हमारी ऐतिहासिक आस्था एक ही थी.

विभाजन की इसी सड़ी हुई संस्कृति और असमानता ने ही भारतीय समाज को भ्रष्टाचार के रोग से ग्रसित किया है. समाजहित, देशहित पर इसी कारण स्वहित भारी पड़ जाता है. जहां सोच सामूहिकता से एकाकीपन पर सिमटती है वहां भ्रष्टाचार की जड़ें जमती है. समाज ही अनैतिक रवायत में हलक तक डूबा हुआ है, इसलिए सरकारों के खिलाफ आंदोलन करने से भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं हो सकता.

समानता, स्वतंत्रता व बंधुता की भावना पैदा करने वाली शिक्षा जिस की बुनियाद विज्ञान पर टिकी हो, ही इस समस्या का समाधान है. यहां भारतीय जनता का मतलब समाज, धर्म, सत्ता, न्यायपालिका, मीडिया के शीर्ष पर काबिज लोगों से है.

GHKKPM: पाखी के खिलाफ लीगल एक्शन लेगी सई, आएगा ये ट्विस्ट

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ इन दिनों लगातार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. जिससे दर्शकों का फुल एंटरटेनमेंट हो रहा है. शो में आपने देखा भवानी सई का सपोर्ट करती है. ऐसे में सई और भवानी की दोस्ती देखकर पाखी भड़क जाती है. और वह सई के साथ एक बड़ा गेम खेलती है. शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते है, शो के नये एपिसोड के बारे में.

शो में दिखाया जाएगा कि पाखी आइसक्रीम खाने की जिद करेगी. वह कहेगी कि  विराट के साथ आइसक्रीम पार्लर जाएगी. सई पाखी को बाहर जाने से रोकेगी. सई पाखी को घर में ही आइसक्रीम खाने को देगी. ऐसे में पाखी भड़क जाएगी.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by ayeshu_4ever (@ayeshu_4ever)

 

शो के अपकमिंग एपिसोड में दिखाया जाएगा कि सई पाखी के खिलाफ लीगल एक्शन लेगी. सई पाखी को एक लीगल पेपर देगी. सई कहेगी कि बच्चा पैदा करने के बाद पाखी का उस पर कोई अधिकार नहीं रहेगा.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by ayeshu_4ever (@ayeshu_4ever)

 

तो दूसरी तरफ भवानी पाखी को पेपर्स पर साइन नहीं करने देगी. जिसके बाद चौहान परिवार में खूब हंगामा होगा. इसी बीच सई अपने बेडरूम में बेहोश हो जाएगी. शो में अब ये देखना होगा कि पाखी और सई का झगड़ा कैसे खत्म होता है?

 

View this post on Instagram

 

A post shared by ayeshu_4ever (@ayeshu_4ever)

 

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें