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मैं पापा बनना चाहता हूं, क्या करूं?

सवाल

मैं 41 साल का हूं और मेरी बीवी 38 साल की है. मेरे वीर्य में शुक्राणु कम हैं. लिहाजा, बच्चे नहीं हो रहे. मैं क्या करूं?

जवाब

वैसे तो कम शुक्राणु होने पर भी औरतें देरसवेर पेट से हो जाती हैं, मगर आप ज्यादा इंतजार न करें. आजकल मौडर्न तकनीकों के जरीए बच्चा होना आसान हो गया है. आप शहर के नामी अस्पताल में जा कर इस बारे में पूरी सलाह व मदद ले सकते हैं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem

Manohar Kahaniya: दिल को रंगीन बनाने की चाहत

राजधानी दिल्ली के दरियागंज इलाके में दरगाह साबरी के पास बाइक रिपेयर की वर्कशाप चलाने वाला 50 वर्षीय मोइनुद्दीन कुरैशी 17 मई, 2022 की रात करीब 10 बजे वर्कशाप बंद करके घर जाने के लिए पैदल ही निकला था कि चंद कदम चलते ही उसे लघुशंका की जरूरत महसूस हुई.

कुछ आगे कालिदास मार्ग पर वह लघुशंका के लिए रुका कि तभी बाइक से उस के पीछे आए 2 बदमाशों ने काफी नजदीक से उसे गोली मार दी और फर्राटा भरते निकल गए.

मोइनुद््दीन अपने परिवार के साथ पटौदी हाउस, दरियागंज इलाके में ही रहता था. उस के परिवार में बुजुर्ग मां के अलावा पत्नी जेबा, 2 बेटे मुइज कुरैशी, गुल कुरैशी, 18 साल की बेटी व छोटा भाई रुकनुद्दीन हैं.

मोइनुद्दीन के परिवार की 50 साल से ज्यादा पुरानी दोपहिया वाहन की वर्कशाप दरियागंज में दरगाह साबरी के पास है. उस की दुकान पर कई लड़के काम करते हैं.

मोइनुद्दीन के पीछे से आए हमलावरों ने उस पर 2 गोलियां चलाईं. एक गोली उस के पेट में और दूसरी कमर में लगी. गोली लगते ही वह जमीन पर गिर कर तड़पने लगा और पल भर में खामोश हो गया. इस के बाद चारों तरफ हल्ला मच गया.

घटनास्थल के पास ही मौजूद मोइनुद्दीन का छोटा भाई रुकनुद्दीन व उस का दोस्त साजिद भागते हुए आए और मोइनुद्दीन को एलएनजेपी अस्पताल ले गए, जहां कुछ ही देर बाद मोइनुद्दीन को मृत घोषित कर दिया गया.

कुरैशी के परिवार वाले भी अस्पताल आ पहुंचे. हर तरफ मातम पसर गया. उस की बीवीबच्चे सिर पटकपटक कर रो रहे थे. अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को इस की सूचना दे दी.

कुछ देर में पुलिस घटनास्थल पर आई. आसपास के लोगों से पूछताछ की, मगर हमलावरों के बारे में कोई नहीं बता पाया. रात होने की वजह से लोग बाइक का नंबर भी नहीं देख पाए. बस पलक झपकते ही पूरा कांड हो गया.

मोइनुद्दीन के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया. दूसरे दिन मृतक के छोटे भाई रुकनुद्दीन के बयान पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया.

इस सनसनीखेज मामले की जांच के लिए एसीपी योगेश मल्होत्रा की देखरेख में कई थानों के तेजतर्रार पुलिसकर्मियों की एक टीम का गठन किया गया. वाहन चोरी निरोधक दस्ता टीम के इंचार्ज संदीप गोदारा और स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर शैलेंद्र कुमार शर्मा को भी टीम में शामिल किया गया. यानी पुलिस की अलगअलग टीमें विभिन्न बिंदुओं पर काम करने लगीं.

पुलिस ने सब से पहले घटनास्थल का मुआयना किया और वहां दुकानों और घरों में लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाई ताकि बाइक और हमलावरों की पहचान हो सके.

कई दिनों की मशक्कत के बाद पुलिस ने करीब 500 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले. इस छानबीन में हमलावर सफेद रंग की अपाची बाइक पर सवार दिखे. मगर उन के चेहरे हेलमेट से ढंके हुए थे. हां, बाइक का नंबर जरूर साफ नजर आ गया. पुलिस बाइक का पता कर ही रही थी कि तभी खबर आई कि वारदात में प्रयुक्त अपाची बाइक तारा होटल के नजदीक लावारिस हालत में पड़ी है.

पुलिस ने बाइक के मालिक का पता किया तो उस के मालिक ने बताया कि उस की बाइक दिसंबर, 2021 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से चोरी हो गई थी, जिस की एफआईआर बाकायदा थाने में दर्ज है.

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मोइनुद्दीन की हत्या करने वाले बेहद प्रोफेशनल थे. चलती बाइक से किसी पर निशाना लगाना आसान नहीं होता, मगर उन का निशाना बिलकुल सधा हुआ था. पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारों ने अगर बाइक मेरठ से चुराई है तो जरूर उन का संबंध यूपी से ही होगा.

पुलिस के पास हमलावरों तक पहुंचने का यह रास्ता बंद हो गया तो उस ने घटनास्थल के आसपास के लोगों से और मृतक मोइनुद्दीन कुरैशी के घरवालों एवं दोस्तों से पूछताछ शुरू की.

एक दूसरी पुलिस टीम ने मृतक मोइनुद्दीन के परिवार के लोगों के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स और इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म को भी खंगालना शुरू किया.

मृतक की पत्नी, बच्चों और अन्य स्वजनों समेत 100 से अधिक लोगों से पूछताछ हुई. पूछताछ में पता चला कि मृतक मोइनुद्दीन कुरैशी की पत्नी जेबा कुरैशी उस से उम्र में 10 साल छोटी है. मोइनुद्दीन से उस का निकाह करीब 25 साल पहले हुआ था.

मोइनुद्दीन और जेबा के 3 बच्चे हैं. 2 बेटे और एक बेटी. पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि मोइनुद्दीन अकसर जेबा को मारतापीटता था. 40 वर्षीय जेबा अपने पति के जुल्मों से काफी परेशान रहती थी. वह हर वक्त उस से डरीसहमी रहती थी. पता नहीं कब, किस बात पर मोइनुद्दीन खफा हो जाए और उस को रुई की तरह धुन कर रख दे, इस का कुछ पता नहीं होता था.

छोटीछोटी बात पर उस का पारा चढ़ जाता था और जवान बच्चों के सामने ही वह पत्नी की पिटाई शुरू कर देता था. उस की हरकतों से बच्चे भी डरेसहमे से रहते थे.

पुलिस ने मोइनुद्दीन की पत्नी जेबा से जब पूछताछ की तो वह काफी घबराई हुई थी. कई सवालों को घुमाफिरा कर पूछने पर उस ने अलगअलग जवाब दिए. इस से पुलिस को उस पर कुछ शक हुआ.

फिर जब जेबा के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स पुलिस ने खंगाली तो पता चला कि वह लगातार मेरठ के एक नंबर के संपर्क में रहती थी. घटना के दिन भी उस ने इस नंबर पर कई काल किए थे.

अब पुलिस ने जेबा कुरैशी से सख्ती से पूछताछ की. शुरू में तो वह पुलिस को बरगलाती रही, मगर सख्ती के आगे वह जल्दी ही टूट गई. उस ने मोइनुद्दीन की हत्या करवाने का जुर्म स्वीकार कर लिया.

जेबा ने बताया कि वह शौहर से तंग आ चुकी थी, इसलिए उस ने अपने प्रेमी और उस के साथियों के हाथों उस जालिम शौहर को हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया. जेबा 25 साल तक जिस आदमी के साथ रही, जिस के 3 बच्चों की वह मां बनी, उस के जुल्मों से वह इतनी आजिज आ चुकी थी कि उसे गोली मरवाने में उसे जरा भी झिझक नहीं हुई. आखिर क्यों जेबा के दिल में पति के लिए इतनी नफरत भर गई थी?

जेबा के 3 जवान बच्चे थे. उन की पढ़ाई, शादी सब होनी थी. मगर मानसिक और शारीरिक रूप से जेबा अपने पति के हाथों इस कदर प्रताड़ना सह चुकी थी कि उस ने एक बार भी इस बारे में नहीं सोचा.

वह तो बस जल्द से जल्द मोइनुद्दीन से मुक्ति पा लेना चाहती थी. और इस काम में उस का साथ दिया उस के प्रेमी शोएब ने, जो मेरठ का रहने वाला था और फेसबुक के जरिए उस का दोस्त बन गया था.

बीते 2 सालों में उन की दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल चुकी थी. हालांकि शोएब जेबा से 11 साल छोटा था और शादीशुदा भी था, मगर वह जेबा के प्यार में ऐसा दीवाना हुआ कि उस के लिए कत्ल करने को भी तैयार हो गया. दरअसल, 25 साल पहले जब जेबा का निकाह मोइनुद्दीन कुरैशी से हुआ था, तब जेबा मात्र 15 साल की थी. उस वक्त मोइनुद्दीन की उम्र 25-26 साल थी.

जल्दी ही जेबा 3 बच्चों की मां बन गई. घरगृहस्थी और बच्चों की परवरिश में उस का बचपन और जवानी दोनों खलास हो गए. उधर मोइनुद्दीन बाइक रिपेयर के काम के अलावा प्रौपर्टी डीलिंग का काम भी करने लगा था. प्रौपर्टी के धंधे में उस की दोस्ती बड़े घरों के बिगड़ैल लड़कों से हो गई. उन के संगसाथ में वह शराब पीने लगा.

बीवीबच्चों की उस ने कभी परवाह नहीं की. उस का ज्यादातर समय पतंगबाजी और शराब पीने में बीतता था. शराब पी कर मोइनुद्दीन अकसर जेबा को पीटता था. बच्चों के सामने जेबा अपने पति की मार खा कर बुरी तरह टूट जाती थी.

साल गुजरते गए और पति की मार और दुत्कार सहतेसहते जेबा ने किसी तरह बच्चों को बड़ा किया. वह बच्चों में ही मन लगाने की कोशिश करती थी, मगर दिल का एक कोना किसी के प्यार के लिए बिलकुल खाली पड़ा था.

इसी दौरान उस ने अपने मोबाइल फोन पर फेसबुक और वाट्सऐप चलाना सीख लिया. इस ने उस के सूनेपन को थोड़ा कम किया. फेसबुक पर उस के काफी दोस्त बन गए, जिन से वह अपने दिल की बातें शेयर करने लगी.

2 साल पहले फेसबुक पर उस की दोस्ती मेरठ के शोएब से हुई. मेरठ के वेस्ट कुशल नगर, लिसाड़ी रोड निवासी 29 वर्षीय शोएब ने जेबा की फोटो देखी तो वह उस पर फिदा हो गया. शादीशुदा होते हुए भी शोएब प्यार की राह पर फिसल गया. उस को इस बात से भी कोई फर्क नहीं पड़ा कि जेबा उस से उम्र में 11 साल बड़ी है और 3 जवान बच्चों की मां है.

दोनों के बीच सारा सारा दिन फोन पर प्यारमोहब्बत की बातें होने लगीं. मौका पा कर दोनों एकदूसरे से मिलने भी लगे. जेबा के सूने दिल में खुशियों की कलियां चिटखने लगीं. अरमानों ने करवट ली और जेबा शोएब के प्यार में पूरी तरह डूब गई.

ऐसा प्यार और नजदीकी उसे अपने पति मोइनुद्दीन से कभी नहीं मिली थी. जेबा ने शोएब के साथ निकाह करने का मन बना लिया, मगर इस मिलन में सब से बड़ा बाधक था उस का जालिम पति मोइनुद्दीन, जिसे ठिकाने लगाए बिना जेबा और शोएब का मिलन संभव ही नहीं था.

आखिरकार जब भावनाएं पूरी उफान पर पहुंचीं तो मोइनुद्दीन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई. जेबा ने शोएब पर दबाव बनाया कि वह जल्द से जल्द मोइनुद्दीन को खत्म कर दे. उस ने शोएब से कहा कि अब वह उस से तभी मिलेगी जब वह मोइनुद्दीन को ठिकाने लगा देगा.

मोइनुद्दीन को मारना किसी अकेले के बस की बात नहीं थी. लंबीतगड़ी कदकाठी के मोइनुद्दीन को कोई अकेला आदमी काबू में नहीं कर सकता था. शोएब ने मोइनुद्दीन को ठिकाने लगाने के लिए भाड़े के हत्यारों से संपर्क साधा जो सुपारी ले कर उस का यह काम निपटा सकते थे.

शोएब ने विनीत गोस्वामी नाम के अपराधी से संपर्क किया. बमहेटा, कविनगर, गाजियाबाद के रहने वाले विनीत पर पहले से हत्या के प्रयास समेत 3 आपराधिक मामले दर्ज हैं. 6 लाख रुपए की सुपारी ले कर विनीत ने मोइनुद्दीन की हत्या करने का 2 बार प्रयास किया, मगर वह सफल नहीं हुआ.

विनीत ने शोएब के साथ कई बार मोइनुद्दीन का पीछा किया. वह किस वक्त वर्कशाप खोलता है, किस वक्त बंद करता है, वर्कशाप के आसपास किस वक्त कितने लोग होते हैं, वह अकेले घर जाता है या किसी के साथ, ये सारी बातें दोनों ने नोट कीं. और फिर 17 मई की रात शोएब और विनीत के हाथ वह मौका लग गया.

रात 10 बजे जब मोइनुद्दीन अपनी दुकान बंद कर के पैदल ही घर चलने को हुआ तो उसे लघुशंका की जरूरत महसूस हुई और वह सड़क के किनारे रुक गया. कुछ दूर अंधेरे कोने में काफी देर से उस के निकलने का रास्ता देख रहे शोएब ने बाइक स्टार्ट की.

विनीत भरी पिस्तौल लिए उस के पीछे बैठा था. जैसे ही बाइक सड़क किनारे लघुशंका के लिए खड़े मोइनुद्दीन के करीब पहुंची, विनीत ने उस पर फायर झोंक दिया. गोली उसे भेदती हुई निकल गई. मोइनुद्दीन जमीन पर गिर कर तड़पने लगा और चंद सेकेंड बाद ही खामोश हो गया.

जेबा कुरैशी से सच उगलवाने के बाद पुलिस ने मेरठ से पहले 29 वर्षीय शोएब को गिरफ्तार किया और उस के बाद गाजियाबाद से 29 वर्षीय विनीत गोस्वामी को हिरासत में ले लिया.

गिरफ्तारी के वक्त आरोपियों के पास से पुलिस को एक पिस्टल, 2 कारतूस और सुपारी की रकम के 3 लाख रुपए बरामद हुए. वारदात में इस्तेमाल चोरी की बाइक पहले ही पुलिस अपने कब्जे में ले चुकी थी.

डीसीपी श्वेता चौहान ने बताया कि सभी आरोपियों को हत्या और हत्या की साजिश रचने के आरोप में जेल भेजा जा चुका है. सभी ने अपने गुनाह कुबूल कर लिए थे.   द्य

सोयाबीन की खास किस्में

भारत में सब से ज्यादा सोयाबीन की खेती मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व राजस्थान में होती है. मध्य प्रदेश का सोयाबीन उत्पादन में 45 फीसदी हिस्सा है, जबकि सोयाबीन उत्पादन में महाराष्ट्र का 40 फीसदी है.

सोयाबीन एमएसीएस 1407  : यह नई विकसित किस्म असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों में खेती के लिए उपयुक्त है. यह किस्म प्रति हेक्टेयर 39 क्विंटल पैदावार देती है और प्रमुख कीटपतंगों के लिए प्रतिरोधी है.

सोयाबीन की यह किस्म पूर्वोत्तर भारत की वर्षा आधारित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है. बिना किसी नुकसान के 20 जून से 5 जुलाई के दौरान बोआई के लिए यह अनुकूल है. इस किस्म को तैयार होने में लगभग 100 दिन लगते हैं.

सोयाबीन जेएस 2034 : इस की किस्म की बोआई का उचित समय 15 जून से 30 जून तक का होता है. इस किस्म में दाने का रंग पीला, फूल का रंग सफेद और फलियां फ्लैट होती हैं. यह किस्म कम वर्षा होने पर भी अच्छा उत्पादन देती है.

इस किस्म का उत्पादन तकरीबन एक हेक्टेयर में 24-25 क्विंटल तक होता है. फसल की कटाई 80-85 दिन में हो जाती है.

सोयाबीन फुले संगम/केडीएस

726 : यह किस्म साल 2016 में महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय, राहुरी, महाराष्ट्र द्वारा अनुशंसित किस्म है. इस का पौधा अन्य पौधे के मुकाबले ज्यादा बड़ा और मजबूत है. 3 दानों की फली है. इस में 350 तक ही फलियां लगती हैं. इस का दाना काफी मोटा है.

यह किस्म महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में अधिकतर लगाई जाती है. यह किस्म लीफ स्पौट और स्कैब के लिए भी प्रतिरोधी है. 5 राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इस किस्म की खेती के लिए सिफारिश की जाती है. यह किस्म  100 से 105 दिनों में तैयार होती है.

बीएस 6124  : सोयाबीन की इस किस्म की बोआई का उचित समय 15 जून से 30 जून तक का होता है. इस किस्म की बोआई के लिए बीज की मात्रा 35-40 किलोग्राम प्रति एकड़ पर्याप्त होती है. इस किस्म से एक हेक्टेयर में तकरीबन 20-25 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. सोयाबीन की यह फसल 90-95 दिनों में तैयार हो जाती है.

प्रताप सोया-45 (आरकेएस-45) : यह किस्म 30 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार देती है. सोयाबीन की इस वैरायटी की बढ़वार काफी अच्छी होती है. इस के फूल सफेद होते हैं. यह किस्म राजस्थान के लिए खास है. यह किस्म 90-98 दिन में पक कर तैयार हो जाती है. यह पानी की कमी को कुछ हद तक सहन कर सकती है. वहीं सिंचित क्षेत्र में उर्वरकों के साथ अच्छी प्रतिक्रिया देती है. यह किस्म यलो मोजैक वायरस के प्रति कुछ हद तक प्रतिरोधी है.

जेएस 2069 : इस किस्म की बोआई का उचित समय 15 जून से 22 जून तक का होता है. सोयाबीन की बोआई करने के लिए

40 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ की जरूरत होती है. यह फसल 85-86 दिनों में तैयार हो जाती है.

जेएस 9560 : इस किस्म की बोआई का उचित समय मध्य जून के बाद तक है. इस की बोआई के लिए तकरीबन एक एकड़ में 40 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है.

इस किस्म से एक हेक्टेयर में तकरीबन 25-28 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है. इस किस्म से सोयाबीन की फसल 80-85 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है.

जेएस 2029 : सोयाबीन की इस किस्म की बोआई का उचित समय 15 जून से 30 जून तक का होता है. इस किस्म की बोआई करने के लिए प्रति एकड़ 40 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है.

सोयाबीन जेएस 2029 किस्म का उत्पादन तकरीबन एक हेक्टेयर में 25-26 क्विंटल तक होता है. इस किस्म से सोयाबीन की बोआई करने पर फसल 90 दिन में तैयार हो जाती है. इस किस्म में पत्ती नुकली, अंडाकर और गहरी हरी होती है, वहीं शाखाएं 3 से 4 रहती हैं. बैंगनी रंग के फूल आते हैं, पीले रंग का दाना होता है और पौधों की ऊंचाई 100 सैंटीमीटर रहती है.

एमएयूएस 81 (शक्ति) : यह किस्म 93-97 दिन में पक कर तैयार हो जाती है. इस किस्म से 33 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार प्राप्त की जा सकती है.

इस किस्म के पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं, फूलों का रंग बैंगनी होता है और इस के बीज पीले आयताकार होते हैं. यह किस्म मध्य क्षेत्र के लिए उपयुक्त पाई गई है.

सेहत के लिए कितना फायदेमंद है शहद, जानिए यहां

शहद एक मीठा और स्वादिष्ठ खाद्य पदार्थ है, जो रसोई के अलावा औषधि के रूप में भी सालों से प्रयोग किया जाता है. इसे खाने और लगाने से त्वचा में निखार आ जाता है, साथ ही शरीर पर हुए किसी जख्म पर लगाने से यह प्राकृतिक रूप से घाव भर देता है. विज्ञान भी इस की गुणवत्ता को मानता है.

आज के दौर में शहद वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय है और पिछले कई सालों से शहद में वि-मान ऐंटीमाइक्रोबियल, ऐंटीऔक्सीडैंट और ऐंटीइन्फ्लैमेटरी आदि गुणों पर अनुसंधान चल रहा है ताकि कई प्रकार के कैंसर और दिल की बीमारियों को कुछ हद तक काबू में किया जा सके.

ऐपीस इंडिया के हैल्थ ऐक्सपर्ट, अमित आनंद कहते हैं कि शहद ऊर्जा, खूबसूरती, और पोषण का अच्छा स्रोत है. यह अल्सर और बैक्टीरियल बीमारियों के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है. इतना ही नहीं यह त्वचा में चमक बनाए रखने के लिए भी खास है. इसलिए अधिकतर ब्यूटी प्रोडक्ट्स मेकर इस का प्रयोग अपने उत्पाद में करते हैं.

इस के अलावा भी शहद के कई फायदे हैं. मसलन:

– शहद की शैल्फ लाइफ बहुत लंबी होती है, क्योंकि मधुमक्खियां इसे इकट्ठा करते समय इस में एक खास ऐंजाइम मिला देती हैं. यह आंखों की दृष्टि, बांझपन, वजन कम करने, यूरिन संबंधी बीमारियों, अस्थमा, खांसी आदि के लिए बेहद लाभप्रद है.

– शहद में मौजूद चीनी आम चीनी की तरह नहीं होती, यह फु्रक्टोज और ग्लूकोज का मिश्रण होती है और खून में शुगर के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करती है.

– काफी समय पहले से खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए ऐथलीट्स शहद का सेवन करते रहे हैं, क्योंकि यह शरीर में ग्लाइकोजन के स्तर को सामान्य बनाए रखने में सहायक होता है.

– शहद त्वचा के लिए क्लींजर का काम करता है. इसे नियमित खाने और लगाने से त्वचा मुलायम और चमकदार बनी रहती है.

– जई (ओट्स) में मिला कर इसे लगाने से यह ऐक्सफोलिएशन का काम करता है. यह मृत कोशिकाओं को आसानी से साफ कर नई कोशिकाओं को पैदा होने में मदद करता है.

– शहद के नियमित इस्तेमाल से ऐग्जिमा की रोकथाम में सहायता मिलती है.

– यह क्षतिग्रस्त त्वचा को भी बहुत हद तक ठीक कर सकता है.

– शहद में ऐंटीऔक्सिडैंट बहुत अधिक मात्रा में होता है, इसलिए इस का नियमित सेवन करने से त्वचा को यूवी किरणों के प्रभाव से बचाया जा सकता है.

– शहद रूसी से छुटकारे के लिए अच्छा घरेलू उपचार है. यह सूखे बालों को पोषण प्रदान कर उन्हें चमकदार और मुलायम बनाता है.

– ठंड के दिनों में गरम दूध में 1 चम्मच शहद मिला कर पीने से अनिद्रा की समस्या कम हो जाती है.

– वर्कआउट या व्यायाम के बाद इसे पीने से तुंरत ऊर्जा मिलती है.

– मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी शहद एक दवा के रूप में काम करता है. खासकर वृद्धावस्था में मानसिक स्वास्थ्य को सही रखता है. इस में उपस्थित प्राकृतिक शर्करा याद्दाश्त और एकाग्रता को बढ़ाने में सहायक होती है.

– शहद एक प्राकृतिक कामोत्तेजक है और इस के नियमित सेवन से शरीर में लिपिड्स को बढ़ाने में मदद मिलती है.

– रोजाना शहद का सेवन करने से शरीर में कैल्सियम, पोटैशियम और विटामिन बी मिलता है. इस में कोलैस्ट्रौल नहीं होता.

– इस में ग्लूकोस, फु्रक्टोस और अन्य लवण जैसे मैग्नीशियम, पोटैशियम, सल्फर, आयरन और फास्फेट होते हैं, जो काफी हद तक शरीर में जरूरी पोषक तत्त्वों को बनाए रखने में सहायक होते हैं.

– शहद शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है, साथ ही पाचनतंत्र में सुधार ला कर स्वस्थ बने रहने में सहायक होता है.

पारस कलनावत के बाद ‘अनुपमा’ छोड़ेंगे सुधांशु पांडे? पढ़ें खबर

टीवी सीरियल अनुपमा के समर यानी पारस कलनावत का शो से छुट्टी हो चुकी है. इस खबर ने फैंस के साथ साथ शो के कलाकारों को भी हैरत में डाल दिया है. हाल ही में वनराज यानी सुधांशु पांडे ने पारस कलनावत को लेकर बड़ा बयान दिया है. आइए बताते है, क्या कहा है सुधांशु पांडे ने..

बताया जा रहा है कि राजन शाही ने पारस कलानवत पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट तोड़ा है. पारस कलनावत ने मेकर्स को बिना बताए झलक दिखला जा 10 को साइन कर लिया है. ऐसे में प्रोडक्शन हाउस ने पारस कलनावत के खिलाफ एक्शन लिया है.

 

इसी बीच खबर आ रही है कि वनराज का किरदार निभाने वाले सुधांशु पांडे ने इस बात का ऐलान कर दिया है कि वो भी पारस कलनावत के बाद शो छोड़ सकते हैं.

 

एक इंटरव्यू  के अनुसार, सुधांशु पांडे ने कहा, पारस कलानवत को लेकर  अनुपमा की पूरी टीम शॉक में है. कुछ देर पहले ही मैंने पारस कलनावत से बात की थी. मुझे लगता है कि किसी बड़े कारण के चलते पारस कलनावत को शो से बाहर किया गया है.

 

उन्होंने आगे ये भी कहा कि कभी कभी लोग कुछ ऐसे फैसले ले लेते हैं जो कि आपको नुकसान पहुंचाते हैं. समय के साथ मेकर्स को भी इस बात का अंदाजा हो जाएगा. सुधांशु पांडे ने ये भी कहा कि वे अनुपमा के सेट पर पारस कलनावत को काफी मिस करने वाले हैं.

 

मुख्यमंत्री, राज्यपाल पद बिक रहे हैं बोलो खरीदोगे!

आजादी के बाद संवैधानिक रूप से देश में नेताओं का एक ऐसा समूह उत्पन्न हुआ जो आम जनता के बीच से निकलकर के देश सेवा के नाम पर  सत्ता का संचालन करने लगा. देश सेवा के नाम पर नेताओं का यह जत्था देशभर में किस तरह माफिया गिरी और लूट का पर्याय बन गया है यह आज दक्षिण की फिल्मों में विशेष रुप से फिल्मांकन किया जा रहा है. दरअसल, देश में राजनीति कितना नीचे गिर गई है इसकी आम जनता कल्पना भी नहीं कर सकती.

विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री पद तो बिकते हम देख रहे हैं सारी दुनिया  देख रही हैं यह सब संविधान की आड़ में होता रहा है, परिणाम स्वरूप आम जनता भी देख कर के मौन रह जाती है और देश का उच्चतम न्यायालय सुप्रीम कोर्ट भी, क्योंकि इस मर्ज का इलाज किसी के पास नहीं है.

मगर, अब तो हद हो गई है राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद भी बिकने लगे हैं, मूर्खता की हद देखिए की  करोड़ों खर्च करने के लिए धनपति इसके लिए तैयार हैं. इनमें इतनी भी समझ नहीं है कि राज्यपाल जैसा पद जो सीधे-सीधे केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के निर्णय पर ही नवाजा जाता है. किसी भी हालात में रुपए पैसे देकर के प्राप्त नहीं किया जा सकता. यह एक ऐसा पद है जो कोई भी पार्टी अपने वरिष्ठ चेहरों को ही देती आई है .

ऐसे में राज्यपाल पद के लिए रुपए लुटाना और ठगी का शिकार हो जाना, उदाहरण है हमारे यहां कैसे कैसे लोग हैं, जिन्हें न तो कानून का  ज्ञान है और न ही जनरल नालेज, साधारण ज्ञान.

ऐसा एक मामला देश में पहली दफा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने राज्यसभा सीट और राज्यपाल पद दिलाने का झूठा वादा कर लोगों से कथित तौर पर सौ करोड़ रुपए की ठगी की कोशिश करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर इसके चार बदमाशों को गिरफ्तार किया है. सीबीआई ने इस मामले में  दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सात स्थानों पर छापेमारी की आरोपियों को धर दबोचा है.

अधिकारियों के मुताबिक  सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर जिले के रहने वाले कमलाकर प्रेमकुमार बंदगर, कर्नाटक के बेलगाम निवासी रवींद्र विट्ठल नाइक और दिल्ली-एनसीआर के रहने वाले महेंद्र पाल अरोड़ा तथा अभिषेक बूरा को गिरफ्तार कर लिया. कार्यवाही के दौरान मोहम्मद एजाज खान नामक एक आरोपी फिल्मी स्टाइल में सीबीआइ अधिकारियों पर हमला कर फरार होने में कामयाब हो गया . फरार आरोपी के खिलाफ जांच एजंसी के अधिकारियों पर हमला करने के आरोप में स्थानीय थाने में एक अलग प्राथमिकी दर्ज  कराई गई है और उसे ढूंढा जा रहा है.

लगता फिल्म स्क्रिप्ट, मगर है सच

किसी को सांसद बनाने का मामला तो समझ में आता है, जाने कितने लोग सांसद बनाने की लालच में लुटे भी जा चुके हैं. मगर देश में शायद यह पहला मामला है जब किसी राज्य के राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठाने या नियुक्ति के नाम पर ठगी हुई है.

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मामले के सिलसिले में  पांच आरोपियों को प्राथमिकी में नामजद किया है. लेकिन यह भी तथ्य सामने है कि इतनी बड़ी ठगी के बाद भी सीबीआइ की एक विशेष अदालत ने एजंसी द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी चार लोगों को जमानत दे दी है.

सवाल है क्या सीबीआई की जांच अधूरी है, क्या इस जांच पर राजनीतिक नजर है, क्या सीबीआई ऐसे बड़े लोगों पर हाथ डाल चुकी है जिन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है या वे निर्दोष है. यह सब तो निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा मगर जो तथ्य आज हमारे सामने हैं उनकी बिनाह पर हम कह सकते हैं कि

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि बंदगर खुद को एक वरिष्ठ सीबीआइ अधिकारी के रूप में पेश करता था और उच्च पदस्थ अधिकारियों के साथ अपने ‘संबंधों का हवाला देते हुए बूरा, अरोड़ा, खान और नाइक से कोई भी ऐसा काम लाने को कहता था, जिसे वह भारी-भरकम रकम के एवज में पूरा करवा सके.

प्राथमिकी के मुताबिक, आरोपियों ने ‘राज्यसभा की सीट दिलवाने, राज्यपाल के रूप में नियुक्ति करवाने और केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों के अधीन आने वाली विभिन्न सरकारी संस्थाओं का अध्यक्ष बनवाने का झूठा आश्वासन देकर लोगों से भारी भरकम राशि ऐंठने के गलत इरादे से साजिश रची.’ प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि आरोपी सौ करोड़ रुपए के एवज में राज्यसभा की उम्मीदवारी दिलवाने के झूठे वादे के साथ लोगों को ठगने की कोशिशों में जुटे थे. प्राथमिकी के मुताबिक, सीबीआइ को सूचना मिली थी कि आरोपी वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक पदाधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करेंगे, ताकि किसी काम के लिए उनसे संपर्क करने वाले ग्राहकों को सीधे या फिर अभिषेक बूरा जैसे बिचौलिए के माध्यम से प्रभावित किया जा सके.

प्राथमिकी के अनुसार-  बंदगर ने खुद को सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश किया था और विभिन्न पुलिस थानों के अधिकारियों से अपने परिचित लोगों का काम करने को कहा था तथा विभिन्न मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश भी की थी.

सच तो यह है कि ऐसे मामलों में सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियां अपनी सफलता की बड़ी-बड़ी बातें मीडिया के माध्यम से देश के सामने रख देती हैं और अपनी छवि बनाने का काम कर लेती है मगर अंत में परिणाम यह आता है कि सबूत न होने के कारण आरोपियों को अदालत निर्दोष मान कर रिहा कर देती है.

ऐसे में आवश्यकता यह है कि जो सच है सांसद, राज्यपाल, मंत्री, मुख्यमंत्री यह पद आज देश में बिक रहे हैं इन्हें रोकने के लिए कानून के साथ-साथ सीबीआई जैसी एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए और चाहे यह काम सत्तापक्ष करें या विपक्ष उसे जेल की सीखचों में भेज देना चाहिए.

शाह हाउस में शिफ्ट होगी राखी दवे, पाखी को सबक सिखाएगी अनुपमा

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa) में  इन दिनों लगातार बड़ा ट्विस्ट दिखाया जा रहा है. ‘अनुपमा’ लगातार टीआरपी लिस्ट में टॉप पर बना हुआ है. शो के बिते एपिसोड में दिखाया गया कि पाखी को वनराज समझाने की कोशिश करता है और बाद में उसे मना लेता है.  तो दूसरी तरफ अनुज, बरखा और अधिक की क्लास लगाता है. और कहता है कि वो दोनों पाखी के साथ ऐसी हरकत न करे. शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए जानते हैं, शो के नए एपिसोड के बारे में…

शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि किंजल से मिलने देखने राखी दवे शाह हाउस आती है. वह किंजल की डिलीवरी के लिए सारी तैयारियां खुद करने का फैसला लेती है. जिससे उसके और वनराज के बीच बहस हो जाती है.

 

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तो दूसरी तरफ किंजल अपनी मां से कहती है कि वह डिलीवरी शाह हाउस में कराना चाहती है. ये सुनकर राखी दवे कहती है कि वह भी शाह हाउस में शिफ्ट हो रही है.

 

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शो में ये भी दिखाया जाएगा कि किंजल से मिलने के लिए अनुपमा और छोटी अनु शाह हाउस पहुंचते हैं. पाखी उन्हें देखते ही गुस्सा हो जाती है. पाखी अनुपमा से कहती है कि आपने मुझे अपने घर में नहीं रुकने दिया तो आप मेरे घर क्या करने आई हैं. वह अनुपमा को मां के नाम पर ‘कलंक’ कहती है. इस बात पर वनराज-काव्या पाखी को डांटते हैं. पर पाखी किसी की नहीं सुनती, वह काव्या को सौतन का टैग दे देती है.

 

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इतना ही नहीं, पाखी ये भी कहती है, जब तक उसके पास कुछ नहीं था, वह एक अच्छी मां, बेटी और बहू थी. लेकिन कपाड़िया बनते ही उसके अंदर घमंड आ गया है. अनुपमा भी इस बात का करारा जवाब देती है और कहती है कि हां तुम जैसी औलादों के लिए मां केवल वही है जो हमेशा रोती रहे. जरा सा अपने लिए सोच लिया तो मां बुरी हो जाती है.

Manohar Kahaniya: अपने ही परिवार की खूनी इंजीनियरिंग

नशे की लत इंसान के सोचने समझने की शक्ति ही नहीं छीनती, बल्कि उसे अपना गुलाम भी बना लेती है. नशे की लत में डूबा इंसान कभीकभी ऐसे खतरनाक कदम उठा लेता है, जिस के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता. ऐसा ही कुछ सुमित के साथ भी हुआ.सुमित गाजियाबाद के इंदिरापुरम ज्ञानखंड-4 में अपने परिवार के साथ टू बैडरूम फ्लैट में रहता था. परिवार में उस की पत्नी अंशुबाला के अलावा 3 बच्चे थे. बच्चों में बड़े बेटे प्रथमेश के बाद 4 साल के 2 जुड़वां बच्चे आकृति और आरव थे.

प्रथमेश रिवेरा पब्लिक स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ रहा था. जबकि उस की पत्नी अंशुबाला इंदिरापुरम के मदर्स प्राइड स्कूल में टीचर थी. दोनों जुड़वां बच्चे इसी स्कूल में मां अंशु के साथ पढ़ने जाते थे. स्कूल से लौटने के बाद अंशुबाला घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी.

बिहार के सारण जिले के गांव अंजनी मकेर के रहने वाले बी.एन. सिंह सेना से रिटायर हो चुके थे. उन्होंने सन 2011 में बेटी अंशुबाला उर्फ पूजा की शादी झारखंड के सिंहभूम के गांव आदित्यपुर के रहने वाले सुमित के साथ की थी. सुमित ने बीटेक कर रखा था.

सुमित के पिता सर्वानंद सिंह व मां की सन 2012 में मृत्यु हो गई थी. परिवार में कुल 4 बहनभाई थे. बड़ा भाई अमित बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी में इंजीनियर था और अपने परिवार के साथ वहीं रहता था. 4 बहनें थीं. बड़ी किरन व गुड्डी और 2 छोटी बेबी व रिंकी. 3 बहनों की शादी हो चुकी थी. सब से छोटी बहन रिंकी बड़े भाई अमित के साथ रह कर पढ़ रही थी.

अंशुबाला के परिवार में उस के मातापिता के अलावा 2 भाई थे पंकज और मनीष, दोनों ही शादीशुदा थे. पंकज गाजियाबाद वसुंधरा के सैक्टर 15 में अपने परिवार के साथ रहता था. जबकि छोटा भाई अपने परिवार के साथ दिल्ली के रोहिणी इलाके में रहता था.

अंशुबाला के पिता बी.एन. सिंह और मां मीरा देवी पिछले 4 सालों से बेटी अंशुबाला के साथ रह रहे थे. इस की वजह यह थी कि सुमित का औफिस के काम से बाहर आनाजाना लगा रहता था.

सेना से रिटायर बी.एन. सिंह इंदिरापुरम की एक सिक्योरिटी कंपनी में सिक्योरिटी औफिसर की नौकरी कर रहे थे. हालांकि वह बेटी के पास रहते थे, लेकिन अपना व पत्नी का खर्च खुद उठाते थे. बेटी के पास रहने की वजह बस यही थी कि दामाद अमित अकसर घर से बाहर रहता था.

बच्चे छोटे होने के कारण बेटी को किसी की मदद की जरूरत थी. बेटी के पास रहते हुए बी.एन. सिंह व उन की पत्नी मीरा देवी दोनों बेटों के पास आतेजाते रहते थे. दोनों बेटे भी जब तब उन से व बहन अंशु से मिलने के लिए आते रहते थे.

अक्तूबर 2018 तक सुमित गुरुग्राम की आईटी कंपनी में सौफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी पर था. इस के तुरंत बाद उस ने बेंगलुरु की अमेरिकन बेस आईटी कंपनी यूएसटी ग्लोबल में नौकरी शुरू कर दी थी. 14 लाख रुपए के पैकेज पर उस ने बतौर एप्लीकेशन मैनेजर जौइन किया था.

यूएसटी ग्लोबल कंपनी ने 2 महीने बाद अपना सिस्टम अपग्रेड किया तो सुमित काम नहीं कर पाया. नतीजतन बीती जनवरी में उस ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन घर वालों को इस बारे में पता नहीं था. परिवार को इस सब की जानकारी तब लगी जब वह मार्च में बेंगलुरु छोड़ कर हमेशा के लिए दिल्ली आ गया. बेंगलुरु में वह अपने भाई अमित के पास रहता था.

जनवरी में नौकरी छोड़ने के बाद से ही सुमित लगातार दूसरी नौकरी के लिए प्रयास कर रहा था. लेकिन उसे सफलता नहीं मिल रही थी. अंशुबाला का वेतन बहुत ज्यादा तो नहीं था, लेकिन वह अपने व बच्चों के छोटेमोटे खर्च पूरा करने लायक कमा ही लेती थी.

अब तक सुमित भी अच्छी कमाई कर रहा था. सासससुर भी घर के खर्चों में सुमित व अंशु की मदद करते थे, इसलिए ऐसा कोई कारण नहीं था कि 3 महीने की नौकरी के कारण सुमित या परिवार के लोग परेशान होते. कुल मिला कर सब कुछ ठीक चल रहा था. इन दिनों बेरोजगारी के कारण सुमित भी पूरे दिन परिवार के साथ ही रहता था.

बिहार के सारण जिले में एक करीबी रिश्तेदार की बेटी की शादी थी, लिहाजा 7 अप्रैल, 2019 को बी.एन. सिंह अपनी पत्नी के साथ शादी में शामिल होने के लिए सारण चले गए थे.

सुमित के सभी भाईबहन दूरदूर व अलग रहते थे. सभी की खैरखबर मिलती रहे इस के लिए उन्होंने माई फैमिली नाम से एक वाट्सएप ग्रुप बना रखा था. 21 अप्रैल की शाम करीब 6 बजे इस वाट्सऐप ग्रुप पर सुमित ने एक ऐसा वीडियो डाला जिसे देख कर पूरे परिवार में हाहाकार मच गया.

ये वीडियो सब से पहले सुमित की बिहार में रहने वाली बहन गुड्डी ने देखा था. वीडियो में सुमित जो कुछ बोल रहा था उसे सुन कर गुड्डी के पांव तले से जमीन खिसक गई.

दरअसल इस वीडियो में सुमित बता रहा था, ‘मैं ने पत्नी और बच्चों की हत्या कर दी है. मैं खुद भी आत्महत्या करने जा रहा हूं. ये मेरा आखिरी वीडियो है. मैं दुकान से पोटैशियम साइनाइड ले कर आया हूं. अब मैं परिवार पालने लायक नहीं रहा, इसलिए मैं ने सब को जान से मार दिया है. जाओ जा कर शव ले लो. 5 मिनट में मैं पोटैशियम साइनाइड खा लूंगा.’

वीडियो में ही उस ने बताया कि उस ने न्याय खंड के हुकुम मैडिकल स्टोर से 22 हजार रुपए में पोटैशियम साइनाइड खरीदा है, जिसे खा कर वह मरने जा रहा है. सुमित ने वीडियो में यह भी बताया कि वह नशे के लिए ड्रग्स भी हुकुम मैडिकल स्टोर से लेता था.

मैडिकल स्टोर के मालिक मकनपुर निवासी मुकेश ने ड्रग्स के नाम पर उसे काफी लूटा था, जिस के चलते उस पर लाखों का कर्ज हो गया था. उस ने भी मुकेश के खाते से मोबाइल बैंकिंग के जरिए एक लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए हैं.

2.40 मिनट के वीडियो में सुमित ने बताया कि वह इस समय काफी डिप्रेस है और उस ने अपने परिवार की हत्या कर दी है. ये पूरी वीडियो जैसे ही गुड्डी ने देखी तो उस ने बेंगलुरु में रह रहे अपने बडे़ भाई अमित को फोन पर सारी बात बताई तो वह भी बेचैन हो गया. अमित ने गुड्डी से बात करने के बाद खुद भी फैमिली ग्रुप पर डाली गई वह वीडियो देखी और गुड्डी से बात की.

अमित ने गुड्डी से कहा कि वह तुरंत अंशुबाला के भाई पंकज को बता दे. क्योंकि वही एक ऐसा शख्स था, जो सुमित के घर के सब से नजदीक रहता था. भाई की सलाह के बाद गुड्डी ने सुमित द्वारा ग्रुप में डाला गया वीडियो पंकज को भेज दिया और उस से फोन पर बात की. गुड्डी ने पंकज को सारी बात बताई तो पंकज का भी सिर घूम गया.

तब तक हकीकत किसी को मालूम नहीं  थी, इसलिए गुड्डी ने पंकज को सलाह दी कि वह तत्काल सुमित के घर जा कर देखे कि माजरा क्या है. तब तक किसी को यकीन नहीं हो रहा था, वे लोग सोच रहे थे कि सुमित ने कहीं मजाक तो नहीं किया.

हालांकि अमित, गुड्डी और पंकज सभी लोगों को जैसे ही इस वीडियो मैसेज के बारे में पता चला उन्होंने सुमित के मोबाइल फोन पर संपर्क करना चाहा ताकि उस से बात कर असलियत जान सकें. लेकिन सभी को उस का मोबाइल स्विच्ड औफ मिला. इस से सभी को शंका होने लगी.

लिहाजा उन्होंने अंशु बाला व घर के दूसरे मोबाइल फोन पर भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों फोन स्विच्ड औफ मिले तो पंकज का मन शंका से भर उठा.

पंकज ने यह सब सुनने के बाद अपने आसपड़ोस के एक दो लोगों को साथ लिया और ज्ञान खंड-4 में सुमित के मकान पर पहुंच गए. लेकिन वहां ताला लटका देख उन का दिल आशंका से भर गया. उन्होंने सुमित के पड़ोस में रहने वाले और कालोनी के कुछ लोगों को एकत्र कर उन्हें अपने बहनोई द्वारा भेजे गए वीडियो के बारे में बताया तो सभी ने सलाह दी कि घर का ताला तोड़ कर चैक किया जाए.

फलस्वरूप सुमित के घर का ताला तोड़ दिया गया. दरवाजा खोल कर अंदर का नजारा देखा तो सभी दंग रह गए. अंदर ड्राइंगरूम से ले कर बेडरूम तक तीनों बच्चों और अंशुबाला के खून से लथपथ शव पड़े थे. जबकि सुमित का कहीं अतापता नहीं था.

घर में 4 हत्याएं होने की खबर जल्द ही पूरी कालोनी में फैल गई. सुमित के घर के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ने लगी. इस बीच किसी के कहने पर पंकज ने पुलिस को सूचना दे दी थी. उस समय शाम के 7 बजे थे. पुलिस कंट्रोल रूम से यह सूचना अभयखंड चौकी को दी गई. सुमित का घर इसी चौकी के क्षेत्र में आता था.

अभय खंड चौकीप्रभारी एसआई प्रह्लाद सिंह 2-3 सिपाहियों को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने घर में एक साथ 4 लाशें देखीं तो इंदिरापुरम थानाप्रभारी संदीप कुमार को फोन कर के जानकारी दी. वैसे तो हत्या की वारदात ही पुलिस के लिए बड़ी बात होती है लेकिन यहां तो एक साथ 4 हत्याओं की बात थी.

इंसपेक्टर संदीप कुमार ने इंदिरापुरम क्षेत्र की एएसपी अपर्णा गौतम, एसपी (सिटी) श्लोक कुमार व गाजियाबाद के एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल को इस घटना से अवगत करा दिया.

8 बजतेबजते इंदिरापुरम का ज्ञान खंड 4 पुलिस छावनी में तब्दील हो गया. जिले का हर छोटा बड़ा अधिकारी और फोरैंसिक टीम वहां पहुंच कर जांचपड़ताल में जुट गई.

पंकज ने अपने मातापिता के साथ दिल्ली में रहने वाले अपने भाई व अन्य रिश्तेदारों को इस घटना से अवगत करा दिया था. पंकज के मोबाइल फोन पर सुमित की बहनों व भाई अमित के भी लगातार फोन आ रहे थे, उन्होंने उन्हें भी वास्तविकता से अवगत करा दिया.

इंदिरापुरम पुलिस के साथ दूसरे तमाम अधिकारी जब घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि 2 कमरों के फ्लैट में अंदर ड्राइंगरूम में खून से लथपथ प्रथमेश का शव पड़ा था. अंशुबाला का शव बेडरूम में जमीन पर पड़ा मिला. जबकि दोनों जुड़वां बच्चों के शव बेड पर पड़े थे. ऐसा लगता था जैसे उन्हें सोते समय बेहोशी की अवस्था में मारा गया था.

फर्श व बैड पर तथा 1-2 जगह दीवारों पर खून के निशान थे. बिस्तर पर पड़ाखून सूख कर काला पड़ने लगा था. तीनों बच्चों और अंशु के गले पर धारदार हथियार के निशान थे. अंशुबाला के पेट और छाती के अलावा हाथ पर भी कई जगह धारदार हथियारों के निशान थे. शरीर पर कई जगह खरोंचे भी थीं और कपड़े भी अस्तव्यस्त थे.

इस से पहली नजर में प्रतीत होता था कि मरने से पहले कातिल से उस की झड़प हुई थी और उस ने अपने बचाव में काफी संघर्ष किया था. शव को सब से पहले देखने वाले पंकज ने पुलिस को बताया कि तीनों बच्चों के मुंह के ऊपर तकिए  रखे हुए थे.

सुमित ने शायद परिवार के सभी लोगों को खाने की किसी चीज में कोई नशा दे कर बेहोश कर दिया था. इसीलिए जब उन की हत्या की गई तो आसपड़ोस के किसी भी व्यक्ति ने कोई चीखपुकार नहीं सुनी.

थानाप्रभारी संदीप कुमार ने फोरेंसिक टीम के साथ जब घर की छानबीन शुरू की तो उन्हें रसोई घर में सहजन की सब्जी के टुकड़े मिले. कोल्ड ड्रिंक की 2 खाली बोतलें व नशे की गोलियों के कुछ खाली पैकेट भी मिले. सभी चीजों को पुलिस ने जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया. क्योंकि पुलिस को शक था कि सब्जी में नशीली गोली या पदार्थ मिलाया गया था.

घर की तलाशी में पुलिस को अलगअलग साइज के 5 चाकू भी मिले, जिन में 3 एकदम नए थे. जबकि 2 चाकुओं का इस्तेमाल हत्या में किया गया था, क्योंकि धोने या कपड़े से साफ करने के बावजूद उन पर कहीं कहीं खून के निशान साफ दिखाई दे रहे थे. फोरैंसिक टीम ने जांच के बाद ये सभी सामान कब्जे में ले लिए.

कई घंटे की मशक्कत और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने तीनों बच्चों व अंशुबाला के शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिए. रात में पंकज के भाई मनीष व दूसरे रिश्तेदार भी गाजियाबाद पहुंच गए.

अंशुबाला के भाई पंकज की शिकायत के आधार पर इंदिरापुरम पुलिस ने 21 अप्रैल, 2019 को ही भादंवि की धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज कर लिया था. जांच का काम खुद थानाप्रभारी संदीप कुमार कर रहे थे.

सुबह होते ही पुलिस ने सुमित की खोजखबर लेने के लिए चौतरफा कोशिशें शुरू कर दीं. चूंकि सुमित का मोबाइल नंबर बंद था. इसलिए उस तक पहुंचने का जरिया सिर्फ उस का मोबाइल नंबर ही था.

हैरानी की बात यह थी कि घर में सुमित के अलावा 2 मोबाइल फोन और थे. इन में एक फोन अंशुबाला का था और दूसरा घर में रहता था. वे दोनों फोन भी घर की तलाशी में पुलिस को नहीं मिले थे. यह भी नहीं पता था कि सुमित जिंदा है या मर चुका है.

इसलिए एसएसपी उपेंद्र अग्रवाल से साइबर शाखा की टीम से सुमित व अंशुबाला के दोनों मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगवा दिए. इन मोबाइल नंबरों की लोकेशन के बारे में मिलने वाली पलपल की जानकारी इंदिरापुरम पुलिस को देने का काम सौंप दिया.

एसपी (सिटी) श्लोक कुमार व एएसपी अपर्णा गौतम ने थानाप्रभारी संदीप कुमार, एसआई प्रह्लाद सिंह और रामप्रस्थ चौकीप्रभारी इजहार अली के नेतृत्व में 3 टीमें बनाईं. पुलिस की टीमों ने सुबह होते ही सब से पहले घटनास्थल पर पहुंच कर आसपड़ोस के लोगों और सुमित कुमार के सभी रिश्तेदारों से बातचीत और पूछताछ करने का काम शुरू किया.

पड़ोसियों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि मृतक परिवार काफी मिलनसार था. पड़ोसियों से अंशुबाला और सुमित का बहुत अच्छा व्यवहार था.

कालोनी के गार्ड इंद्रजीत ने बताया कि सुबह 3 बजे सुमित यह कह कर बाहर गया था कि वह थोड़ी देर में आ रहा है. वह किस काम से और कहां गया, इस के बारे में उसे पता नहीं था. गार्ड का कहना था कि सुमित के चेहरे से यह आभास नहीं हुआ कि उस ने 4 हत्याएं की हैं.

पड़ोसियों ने 21 अप्रैल की सुबह से सुमित के परिवार के किसी भी सदस्य को नहीं देखा था. अलबत्ता 20 अप्रैल की शाम को अंशुबाला का बड़ा बेटा प्रथमेश अपनी मां के साथ बाहर जरूर देखा गया था. दोनों एकदम नार्मल थे. पता चला कि सुमित भी अकसर बच्चों के साथ बाहर खेला करता था.

22 अप्रैल की दोपहर तक पुलिस ने अंशुबाला व उस के तीनों बच्चों का पोस्टमार्टम करवा कर चारों के शव उन के परिजनों को सौंप दिए. 21 अप्रैल की रात में ही पंकज ने अपने पिता को फोन कर के इस हादसे की सूचना दे दी थी.

बेटी और नातीनातिन की हत्या की खबर सुनते ही अंशुबाला के मातापिता अगली सुबह बिहार के सारण से फ्लाइट पकड़ कर दोपहर तक दिल्ली और फिर दिल्ली से गाजियाबाद पहुंच गए. सुमित के भाई अमित व 2 बहनें भी दोपहर तक गाजियाबाद आ गए. दोनों परिवारों ने मिल कर चारों शवों का अंतिम संस्कार किया.

पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल चुकी थी, जिस में अंशु के गले के साथ शरीर के अन्य हिस्सों पर चाकू के 6 निशान पाए गए थे. वहीं, बच्चों की मौत गला रेतने से बताई गई थी. हत्या का समय 20 व 21 अप्रैल की रात 12 बजे के बाद का बताया गया. नशीले पदार्थ या नींद की गोली दिए जाने की पुष्टि नहीं होने के कारण चारों के बिसरा को सुरक्षित कर जांच के लिए भेज दिया गया.

अंतिम संस्कार के बाद अंशुबाला के मातापिता व परिवार के अन्य लोग इंदिरापुरम थाने पहुंचे और वहां उन्होंने थानाप्रभारी संदीप कुमार को बताया कि घर में कोई आर्थिक तंगी नहीं थी. सुमित ने सामूहिक हत्या कर घर में लूटपाट की है. वह गहने और नकदी ले कर फरार हुआ है.

परिजनों का तर्क था कि यदि उसे आत्महत्या करनी होती तो वह पत्नी और बच्चों के साथ ही जान दे देता. परिजनों ने हत्यारोपी सुमित के भाई और बहन को गिरफ्तार करने की मांग की.

परिजनों ने यह भी बताया कि 8 अप्रैल को ही आकृति व आरव का जन्मदिन हंसीखुशी मनाया गया था. अंशुबाला के पिता बी.एन. सिंह ने पुलिस को बताया कि वह चूंकि अपनी पत्नी मीरा सिंह के साथ बेटी अंशुबाला के साथ ही रहते थे, इसलिए उन्होंने देखा कि सुमित अकसर अंशु से लड़ाई करता था. वह उस से बारबार रुपए मांगता था. रुपए न देने पर पिटाई करता था.

बी.एन. सिंह का यह भी कहना था कि सुमित हर महीने एक लाख रुपए से अधिक कमाता था. उस ने नौकरी जरूर छोड़ दी थी लेकिन घरपरिवार चलाने के लिए उसे कोई परेशानी नहीं थी. जबकि सुमित ने वीडियो में आर्थिक तंगी के चलते पत्नी और बच्चों की हत्या करने का दावा किया था.

लेकिन पुलिस ने पूरी कालोनी के लोगों के अलावा किराना, कौस्मेटिक की दुकान और प्रैस वाले से पूछताछ की तो उन्होंने परिवार पर किसी प्रकार का उधार होने से साफ इनकार कर दिया. सभी का कहना था कि सामान खरीदने के बाद तुरंत भुगतान कर दिया जाता था.

सोसायटी में कपड़े प्रेस करने वाले रामलाल ने पुलिस को बताया कि सुमित के घर से उस के पास प्रतिदिन छह जोड़ी कपड़े प्रैस होने आते थे. शुक्रवार सुबह भी कपड़े प्रैस होने आए थे.

कपड़े प्रैस करने के एवज में प्रतिमाह सुमित के घर से 1500 रुपए मिलते थे. परिवार ने कभी रुपए उधार नहीं किए. सोसायटी के पास स्थित किराना दुकान संचालक ने बताया कि अंशुबाला प्रतिमाह 8 हजार रुपए का घरेलू सामान नकद ले कर जाती थी.

कपड़े प्रैस करने वाले धोबी रामलाल ने यह भी बताया कि सुमित जब भी यहां रहता था, घर के नीचे या सोसाइटी में घूम कर सिगरेट पीता था. वह सिगरेट पीने का इतना आदी था कि एक दिन में 3 से 4 डिब्बी सिगरेट पी जाता था. पूछने पर सुमित कहता था कि सिगरेट पर उस का महीने का खर्च 10 हजार रुपए से ज्यादा आता है.

इस पूरी पूछताछ से यह बात तो साफ हो गई कि आर्थिक तंगी की जो बात सामने आ रही थी, उस में बहुत ज्यादा दम नहीं था. इसलिए पुलिस ने अंशुबाला के परिजनों द्वारा हत्याकांड में सुमित के भाई और बहन के शामिल होने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग को दरकिनार कर दिया.

क्योंकि यह बात साफ हो चुकी थी कि परिवार न तो किसी आर्थिक मुसीबत में था न ही परिवार के दूसरे लोगों का सुमित के घर बहुत आनाजाना था. इसलिए पुलिस ने अब अपना सारा ध्यान सुमित की तलाश पर केंद्रित कर दिया.

पुलिस ने सुमित के मोबाइल नंबर की सीडीआर निकाल ली थी. उस में पुलिस को करीब आधा दरजन ऐसे नंबर मिले, जिन पर सुमित की बात होती थी. ये नंबर बिहार, बेंगलुरु, मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत अन्य कई स्थानों के थे. पुलिस ने संदिग्ध नंबरों की एकएक कर जांच पड़ताल शुरू कर दी.

सर्विलांस टीम को अचानक उस वक्त सुमित की लोकेशन मिल गई, जब उस ने कुछ देर के लिए अपना मोबाइल औन किया. उस वक्त उस की लोकेशन मध्य प्रदेश के रतलाम में थी. सुमित ने अपनी पत्नी के दोनों मोबाइल तो औन नहीं किए थे. हां, इस दौरान 1-2 बार उस ने अपने भाई अमित से बात करने के लिए अपना फोन खोला तो उस की लोकेशन ट्रेस हो गई.

उस की लोकेशन रतलाम की आ रही थी. सुमित ने जब भी अपने भाई से बात की तो उस ने यह तो नहीं बताया कि वह कहां है लेकिन उस ने बारबार यहीं कहा कि वह बहुत परेशान था, इसलिए उस ने इतना बड़ा कदम उठा लिया.

एसएसपी उपेंद्र अग्रवाल ने इस दौरान मोबाइल की लोकेशन मिलने वाले स्थानों पर वहां की जीआरपी को सुमित के फोटो के साथ जानकारी भेजी ताकि वह किसी को दिखे तो उसे पुलिस हिरासत में लिया जा सके.

आननफानन में एसआई प्रह्लाद व इजहार अली और कांस्टेबल रवि कुमार की टीम को रतलाम रवाना कर दिया गया. साथ ही उन्होंने सर्विलांस टीम को उन के साथ बराबर संपर्क बना कर सुमित की लोकेशन का अपडेट देने के भी आदेश दिया.

चूंकि सुमित के कई रिश्तेदार व जानने वाले मध्य प्रदेश में रहते थे, इसलिए आशंका थी कि वह वहां पर अपनी पहचान छिपा कर कहीं छिपा होगा. भले ही उस ने वीडियो में कहा था कि वह 5 मिनट में आत्महत्या कर लेगा, लेकिन रतलाम में उस की लाकेशन मिलने और अभी तक की जांच से ऐसा नहीं लग रहा था कि वह मौत को गले लगा चुका होगा.

इस दौरान 22 अप्रैल, 2019 की शाम को अचानक इंदिरापुरम पुलिस ने औषधि विभाग के निरीक्षक वैभव बब्बर के साथ न्याय खंड 3 में स्थित हुकुम मैडिकल स्टोर पर छापा मारा. सुमित ने भेजे गए वीडियो में इसी मैडिकल स्टोर का जिक्र किया था.

पुलिस ने मैडिकल स्टोर के संचालक मुकेश जो मकनपुर का रहने वाला था, को गिरफ्तार कर लिया. छापा मार कर जब पड़ताल की गई तो पता चला कि उस ने 2 सालों से मैडिकल स्टोर के लाइसैंस का नवीनीकरण नहीं कराया था. उस से पूछताछ में पता चला कि सुमित 2 साल में एक लाख रुपए की नशीली दवाइयां खरीद कर खा चुका था.

सुमित कुमार ने वीडियो में बताया था कि वह पोटैशियम साइनाइड खा कर 5 मिनट में अपनी जिंदगी भी खत्म कर लेगा. मगर हुकुम मैडिकल स्टोर के संचालक मुकेश से जब पूछताछ हुई तो उस ने बताया कि उस के पास पौटैशियम साइनाइड नहीं था. सुमित काफी जिद कर रहा था, जिस की वजह से उस ने पोटैशियम साइनाइड बता कर उसे दूसरी दवा दे दी थी.

विश्वास दिलाने के लिए उस ने नशीली दवाओं के एवज में उस से 22,500 रुपए वसूले थे. पुलिस को भी तलाशी में उस की दुकान से पोटैशियम साइनाइड नहीं मिला, अलबत्ता उस की दुकान की तलाशी में कई नशीली व प्रतिबंधित दवाइयां जरूर बरामद हुईं. पुलिस ने मैडिकल स्टोर से ऐसी 2 पेटी दवाइयां कब्जे में लीं.

पुलिस ने औषधि निरीक्षक की शिकायत पर मुकेश के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कर के उसे गिरफ्तार कर लिया और दुकान सील कर दी. लेकिन सुमित की गिरफ्तारी व उस के परिवार के चारों सदस्यों की मौत की गुत्थी अभी तक उलझी थी.

इस दौरान पुलिस को मिली फोरैंसिक रिपोर्ट से पता चला कि सुमित ने पत्नी व बच्चों की हत्या के लिए 2 चाकुओं का प्रयोग किया था. बाथरूम से जो चाकू बरामद हुए थे, उन्हें पानी से साफ किया गया था.

जांच पड़ताल में ये भी पता चला कि सुमित वारदात वाली रात 2 बजे तक वाट्सऐप पर औनलाइन था. यह बात पुलिस को उस ग्रुप से जुडे़ लोगों की मदद से पता चली. सुमित की लोकेशन ट्रेस करने के लिए पुलिस ने उस का फेसबुक अकाउंट खंगाला तो पता चला कि सुमित फेसबुक पर ज्यादा एक्टिव नहीं था.

इस दौरान पुलिस को अचानक एक सफलता  मिली. कर्नाटक के उडुपी शहर में रेलवे पुलिस के एक कांस्टेबल ने टीवी चैनलों पर गाजियाबाद में हुए चौहरे हत्याकांड से जुड़ी खबर देखी थी. इस खबर में हत्या के बाद लापता सुमित की तसवीर भी दिखाई गई थी.

उसी तसवीर के हुलिए से मिलतेजुलते एक शख्स को जब जीआरपी के जवान ने स्टेशन पर देखा तो संदिग्ध मान कर वह उसे थाने ले आया. उस की आईडी चैक करने पर जब उस का संबंध गाजियाबाद से जुड़ा पाया गया तो उडुपी जीआरपी ने इस की सूचना गाजियाबाद पुलिस को दी.

उडुपी पुलिस ने वाट्सऐप के जरिए उस की वीडियो गाजियाबाद पुलिस को भेजी. उस वीडियो को जब गाजियाबाद पुलिस ने पीडि़त परिजनों को दिखाया गया तो उन्होंने तसदीक कर दी कि वह सुमित ही है. इस के बाद तो पुलिस के लिए सब कुछ आसान हो गया. एसएसपी ने रतलाम में सुमित को खोज रही पुलिस टीम को फ्लाइट पकड़ कर उडुपी पहुंचने के आदेश दिए.

वहां पहुंच कर इंदिरापुरम पुलिस ने सुमित को अपनी कस्टडी में ले लिया. सुमित कुमार को उसी दिन उडुपी की कोर्ट में पेश कर पुलिस ने उस का ट्रांजिट रिमांड लिया और उसे ले कर अगले दिन यानी 24 अप्रैल को गाजियाबाद लौट आई. सुमित को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस ने 2 दिन के रिमांड पर लिया जिस के बाद खुलासा हुआ कि सुमित ने किस वजह से और क्यों इस वारदात को अंजाम दिया था.

सुमित ने अपने कनफेशन वीडियो में भी इस सच को स्वीकार किया था कि उसे ड्रग्स की लत है. दरअसल, सुमित बीटेक की पढ़ाई के दौरान ही ड्रग्स की लत का शिकार हो गया था. लेकिन उस के परिवार को ये बात कभी पता नहीं चली.

बीटेक की पढ़ाई के दौरान जब सुमित हौस्टल में रहता था तब उसे दोस्तों की संगत में ड्रग्स लेने, चरस की सिगरेट पीने और शराब पीने की आदत पड़ गई थी. इसी दौरान जब उस की शादी हो गई तो उस की नशे की लत कुछ कम जरूर हो गई, मगर उस के बाद भी चोरीछिपे वह ड्रग्स लेता रहता था.

1-2 बार उस की पत्नी अंशुबाला को उस पर शक हुआ तो उस ने इधरउधर की बात बना कर पत्नी को बहका दिया. डेढ़ साल पहले सुमित की नशे की लत उस वक्त फिर बढ़ गई जब वह गुरुग्राम की आईटी कंपनी में नौकरी करता था. वहां उस के 1-2 साथी भी नशा करते थे.

एक साल पहले अंशु ने सुमित के कपड़ों की जेब से नशे की गोलियां पकड़ीं तो दोनों के बीच पहली बार इस बात को ले कर झगड़ा हुआ था. अंशुबाला ने तब ये बात सुमित की बड़ी बहन गुड्डी को बताई थी. गुड्डी ने भी सुमित को डांटते हुए नशा न करने की हिदायत दी थी.

चूंकि सुमित अच्छा कमाता था और पैसे की कोई कमी नहीं थी इसलिए उस ने सोचा ही नहीं कि जब नशा करने के लिए उस के पास पैसा नहीं होगा तो वह क्या करेगा. जनवरी में जब सुमित की नौकरी चली गई तो एक महीना तो सब ठीक रहा. लेकिन जैसेजैसे वक्त बीतने लगा, उस का डिप्रेशन और नशे की लत दोनों बढ़ते गए. जाहिर है नशे की लत के साथ खर्चा भी बढ़ने लगा. जबकि आमदनी कुछ थी नहीं.

सुमित को खुद भी और परिवार को भी ठाठ की जिंदगी जीने की आदत थी. धीरेधीरे उसे लगने लगा कि आने वाले दिनों में पैसे के अभाव में उस की जिंदगी बेहद मुश्किल भरी हो जाएगी. इस बात को ले कर वह चिड़चिड़ा रहने लगा. अब पत्नी से भी उस की बातबात पर झड़प हो जाती थी.

अंशु भी बारबार उसे नशा करने को ले कर ताने देती थी कि नशे में अपना वक्त खराब करने से अच्छा है कि वह नौकरी तलाश करने में वक्त लगाए. दूसरी ओर भरी हुई सिगरेट पीने और नशे की गोलियां लेने की सुमित की क्षमता भी बढ़ चुकी थी.

वह हुकुम मैडिकल स्टोर से ही लाखों रुपए की नशे की दवाएं ले कर खा चुका था. अब धीरेधीरे वहां भी उस का उधार खाता शुरू हो गया था.

इस दौरान 8 अप्रैल, 2019 को आरव व आकृति का जन्मदिन मनाने के अगले दिन जब सुमित के सासससुर किसी शादी के लिए बिहार गए तो एकदिन अंशु ने सुमित पर ऐसा तंज कसा कि बात उस के दिल पर लगी. अंशु ने सुमित से कह दिया कि अगर ऐसा नशेड़ी पति ही किस्मत में लिखा था तो भगवान उसे कुंवारी ही रहने देता.

सुमित को उस दिन लगा कि उस के इतना करने के बावजूद घर में अगर उस की यही कदर है तो ऐसे परिवार से परिवार का न होना बेहतर है. उस दिन की बात सुमित के दिल में ऐसी बैठ गई कि वह दिनरात नशा करता और एक ही बात सोचता कि ऐसे परिवार की फिक्र करने से क्या फायदा जहां इंसान की कदर न हो, इस से तो अच्छा है कि बिना परिवार अकेले रहो और मस्ती से जियो.

एक बार दिमाग में इस विचार ने घर कर लिया तो बस वह इसी बात पर सोचने लगा. उस ने इरादा कर लिया कि वह पूरे परिवार को खत्म कर देगा और अकेला ऐश की जिंदगी जीएगा.

अंशु सुमित को नशे की हालत में देख कर उसे ताने मारती थी. इस से सुमित का इरादा और भी ज्यादा मजबूत होता चला गया. सुमित के पास जमापूंजी भी खत्म होने लगी थी, इसलिए वह और ज्यादा तनाव में रहने लगा था. उस ने परिवार को खत्म करने का पूरा मन बना लिया था.

18 अप्रैल, 2019 को वह अपनी नशे की दवा और पोटैशियम साइनाइड लेने के लिए मुकेश के मैडिकल स्टोर पर गया. दवा लेने के बाद उस ने पेमेंट की. वहां मुकेश के कहने पर उस ने किसी दवा व्यापारी को औनलाइन पेमेंट करने में उस की मदद की. उसी दौरान उस ने मुकेश के खाते से एक लाख रुपए अपने खाते में भी ट्रांसफर कर लिए.

वह जानता था कि 1-2 दिन में मुकेश को यह बात पता चल जाएगी कि चोरीछिपे उस ने उस के खाते से एक लाख रुपए ट्रांसफर कर लिए हैं. लिहाजा उसी दिन सुमित ने चाकुओं का एक सेट भी खरीद लिया. घर आ कर उस ने जब अंशु को चाकुओं का वह सेट दिया तो उस ने इस बात पर भी सुमित को फटकारा कि जिस चीज की जरूरत नहीं थी उसे वह क्यों लाया.

फिर 20 अप्रैल की वो रात आ गई जब उस ने परिवार को खत्म करने की ठानी. रात को उस ने पहले परिवार के सभी लोगों को खाने के बाद पीने के लिए कोल्डड्रिंक दी जिसमें उस ने नींद की दवा मिला रखी थी. बच्चों पर दवा का असर जल्दी हो गया और वे कोल्डड्रिंक पी कर बेसुध हो गए. लेकिन अंशु पर नशे का असर धीरेधीरे हो रहा था.

सुमित ने सब से पहले अपने बड़े बेटे प्रथमेश का गला काटा. क्योंकि वह प्रथमेश को सब से ज्यादा प्यार करता था. उसे मालूम था कि अगर उस ने प्रथमेश की हत्या पहले कर दी तो वह परिवार के दूसरे सदस्यों को आसानी से मार देगा. क्योंकि सब से ज्यादा प्यारी चीज को खत्म करने के बाद इंसान के लिए कम महत्व की चीजों को मिटाना ज्यादा आसान होता है.

प्रथमेश की हत्या के बाद सुमित अंशुबाला की हत्या करने के लिए उस के पास पहुंचा तो संयोग से तब तक अंशुबाला के ऊपर कोल्डड्रिंक में मिली दवा का असर कम हो चुका था. इसलिए उस ने सुमित का प्रतिरोध शुरू कर दिया.

यही कारण था कि सुमित ने उस का गला काटने से पहले चाकू के कई वार गले के अलावा शरीर के दूसरे अंगों पर भी किए. इस से अंशुबाला के शरीर पर कई जगह खरोचों के निशान आ गए थे. आखिर वह पत्नी की हत्या करने में सफल हो गया. इस के बाद उस ने बारीबारी से जुड़वां बेटाबेटी आरव और आकृति का भी गला काट कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया.

हत्या करने के बाद उस ने हत्या में इस्तेमाल चाकुओं को बाथरूम में जा कर धो दिया. उस ने अपने खून से लथपथ कपड़ों को बाथरूम में जा कर बदला और रात भर घर में बैठ कर अपने किए पर सोचताविचारता रहा.

उस के मन में विचार आया कि वह खुद भी आत्महत्या कर ले. लेकिन कई घंटे सोचविचार के बाद सुमित ने सुबह करीब 3 बजे एक बैग में कपड़े और घर में रखे गहने व नकदी रखे और घर का ताला लगा कर घर से निकल गया.

रास्ते में उसे गार्ड मिला तो सुमित ने उस से कह दिया कि वह थोड़ी देर में वापस लौट आएगा. घर के बाहर आ कर उस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए ओला कैब बुक की और वहां से स्टेशन पर पहुंच कर तत्काल टिकट ले कर त्रिवेंद्रम जाने के लिए तैयार खड़ी राजधानी एक्सप्रेस में चढ़ गया.

घर से चलते वक्त सुमित अपने घर के दोनों फोन भी साथ ले गया था. उस ने उन दोनों फोनों को ट्रेन में चढ़ते ही बंद कर दिया था. ट्रेन में ही सुमित ने अपना कनफेशन वीडियो बनाया और उसे अपने परिवार के वाट्सगु्रप में डाल दिया. 6 बजे ये वीडियो भेजने के बाद उस ने अपना फोन भी बंद कर दिया था.

सुमित ने बताया कि पहले तो वह आत्महत्या करना चाहता था, लेकिन जब ट्रेन में बैठ गया तो उस का इरादा बदल गया. उस ने तय किया कि वह कहीं दूर जा कर अपनी पहचान छिपा कर साधु संत बन कर जिंदगी गुजार लेगा ताकि उस की नशे की लत भी पूरी होती रहे. पुलिस ने पूछताछ के बाद सुमित को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया.द्य

— कथा पुलिस की जांच और आरोपी से पूछताछ पर आधारित

हिंदी में बात करने में शर्म कैसी: यश टोंक

सोनीपत हरियाणा में जन्में यश टोंक तो फौज में जाना चाहते थे  लेकिन उनकी तकदीर ने उन्हें अभिनेता बना दिया पिछले 25 वर्ष के अभिनय कैरियर में यश टोंक जस्ट मोहब्बत, क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कुंडली, कर्म अपना अपना जैसे दो दर्जन से अधिक सीरियल और किस-किस से प्यार करूं, जय हे, मणिकर्णिका सहित कई फिल्मों में अभिनय कर शोहरत बटोर चुके हैं. इन दिनों वह फिल्म हरियाणा को लेकर चर्चा में हैं.

प्रस्तुत है यश टोंक से हुई बातचीत के अंश

छोटे शहर से मुंबई आकर संघर्ष करने से लेकर अब तक के कैरियर के संदर्भ में क्या कहना चाहेंगें

मेरी पैदाइश सोनीपत हरियाणा की है मगर मेरी शिक्षा व परवरिश हिसार हरियाणा में हुई. वह फौज में थे लेकिन उन्होंने वहां से रिटायरमेंट ले ली उसके बाद वह हरियाणा अग्रीकल्चरल युनिवर्सिटी हरियाणा में चीफ सिक्यूरिटी ऑफिसर के रूप में कार्य करने लगे बचपन मेरा हिसार में बीता, 12वीं तक की पढ़ाई मैने वहीं पर की. उसके बाद बीकाम की पढ़ाई करने के लिए मैं दिल्ली अपनी मौसी के पास चला गया मैंने दिल्ली में रहकर बीकाम ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के साथ कालेज में मनाए जाने वाले फेस्टिवल में हिस्सा लिया करता था फिक एक दिन पता चला कि पिलानी ए राजस्थान में फैशन शो होता है जहां भारत के सभी कालेज हिस्सा लेते हैं तो हम भी अपने कालेज की टीम बनाकर पिलानी गए और फैशन शो में हिस्सा लिया उससे पहले हमारे कालेज से कभी कोई गया नहीं था लेकिन हमने पहली बार कोशिश की वहां मुझे सर्वश्रेष्ठ मॉडल का पुरस्कार मिला मुझे लगता है कि वहीं से एक शुरूआत हुई थी वास्तव में सर्वश्रेष्ठ मॉडल का पुरस्कार मिलने से एक पहचान मिली हर जगह चर्चा हुई कि हरियाणा के छोटे शहर के लड़के ने कमाल कर दिया इधर दिल्ली के कालेज में हर कोई मुझे पहचानने लगा उसके बाद कुछ अन्य फैशन शो किए पोर्टफोलियो भी बनवाया इसके बाद मैं प्रोफेशनल मॉडल के रूप में फैशन शो करने लगा तब कहीं मेरे पिता जी को लगा कि शायद बेटे में कुछ प्रतिभा है तो उन्होने स्वयं एबीसीएल का फार्म मंगवाकर कहा कि भर दो एबीसीएल ने टैलेंट हंट शुरू किया था एबीसीएल में टॉप पचास में मेरा चयन हो गया फिर दस दिन के लिए मुझे मुंबई बुलाया गया था तब मेरे पिताजी ने मुझसे कहा कि मुंबई ही रहे हो तो वहां कोशिश करना मैं तुम्हे दो वर्ष का समय दे रहा हूं यदि दो वर्ष मुंबई में कुछ नहीं कर पाए तो वापस आ जाना फिर मैं जो कहॅूंगा वह करना मैं मुंबई आया और तकदीर ने साथ दिया. मैं दो वर्ष के अंदर अभिनय करने लगा था.

कैसे शुरूआत हुई थी

मुंबई आने के दस बारह दिन में ही समझ में आ गया था कि एबीसीएल से कुछ नहीं होना है तो एक माह के अंदर ही मैं मकरंद देशपांडे के नाट्य ग्रुप से जुड़कर पृथ्वी थिएटर पर नाटक करने लगा था इससे कला की जानकारी मुझे मिलने लगी धीरे धीरे निर्माताओं तक मेरी तस्वीरें पहुंचने लगी थीं. लोग मुझे बुलाकर काम देते रहे.

आपके अब तक के कैरियर में टर्निंग प्वाइंट्स क्या रहे

मेरे कैरियर में रूकावटें बहुत कम आयी सब कुछ बहुत ही स्मूथली होता रहा है मैं खुद ही नहीं समझ पाया कि यहां इतना समय कैसे निकल गया पहले मैंने दिया टोनी सिंह, रवि राय आदि बेहतरीन सर्जकों के साथ साप्ताहिक रूप से प्रसारित होने वाले धारावाहिकों में काम करता रहा इससे बतौर अभिनेता मेरी अच्छी पहचान बनने लगी. सीरियल जस्ट मोहब्बत काफी लोकप्रिय हुआ था ण्रवि राय के साथ ष्टीचरष् सहित कई सीरियल किए इसी बीच बालाजी टेलीफिल्मस से बुलावा आ गया बालाजी के साथ क्योंकि सास भी कभी बहू थी सहित दर्जन भर से अधिक सीरियल किए डेली सोप के साथ ही फिल्मों में काम करने लगा मैं खुशनसीब हॅूं कि मेरे सभी सीरियल व फिल्में सफल होते रहे मुझे काम मिलता रहा.

आपके लगभग सभी सीरियलों को जबरदस्त शोहरत मिली और आपको भी शोहरत मिली पर फिल्मों में वैसी पहचान नही बन पायी

सच कहॅूं तो मुझे लगातार काम मिलता रहा मुझे काम मांगने के लिए किसी के पास जाने की जरुरत ही महसूस नहीं हुई जिस फिल्म के लिए मुझे बुलाया गया मैंने उस फिल्म में अभिनय किया फिल्म हो या टीवी कभी कहीं किसी भी कैंप में घुसने की मैंने अपनी तरफ से कोशिश ही नही की.

आपने फिल्म हरियाणा के निर्देशक संदीप बसवाना के साथ कई सीरियलों में अभिनय कर चुके हैं तो क्या इसी कारण आपने फिल्म हरियाणा से जुड़ने का निर्णय लिया

देखिए संदीप बसवाना से मेरे काफी पुराने संबंध हैं वह मेरे भाई जैसा है हम दोनों ही हरियाणा से हैं लेकिन इस फिल्म से जुड़ने की वजह इसकी कहानी रही संदीप बसवाना ने जिस बारीकी से इसकी कहानी लिखी है कि न करने का सवाल ही नहीं उठता संदीप लंबे समय से इस विषय पर काम कर रहे थे उन्होंने इस पर काफी शोध किया है उसी आधार पर कहानी में काफी बदलाव भी किए.

फिल्म हरियाणा किस तरह की फिल्म है

यह बहुत साधारण व यथार्थ परक पारिवारिक फिल्म है इसका एक भी किरदार लाउड या फिल्मी नजर नहीं आएगा फिल्म में किसी भी किरदार ने ठेठ देसी यानी कि हरियाणवी भाषा नही बोली है. टच हरियाणा का रखते हुए सभी ने हिंदी ही बोली है. इसमें हमने कई मुद्दे उठाए हैं मगर बहुत ही हल्के से ससलन पहले गांवो में संयुक्त परिवार हुआ करते थे संयुक्त परिवार में एक दूसरे के प्रति जो जुड़ाव है उनमें एक प्रेम होता है वह दिखाने का प्रयास है. तीनों भाइयों के प्रेम को दिखाया है अब आधुनिकता की बातें हो रही है इस आधुनिकता के चक्कर में ही संयुक्त परिवार की जगह एकाकी परिवार आ गए पर इससे हम कितना अकेले हो गए हैं पहले सभी भाई बहन एक जगह इकट्ठा हुआ करते थे पर अब एक एक फ्लैट में दो तीन लोग रह रहे हैं इसमें भाषा को लेकर भी बात की गयी है हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी है मगर छोटे शहर या गांव से आने वाले इंसान को हिंदी बोलने में शर्म आती हैं और सामने वाला जिसे हिंदी आती है वह भी हिंदी की बजाय अंग्रेजी ही झाड़ता है जबकि भाषा तो एक दूसरे को समझने और अपनी बात एक दूसरों से सहजता से कहने के लिए होती है हमारी फिल्म कहती है कि अगर किसी को हिंदी नही आती है तो कोई बात नहीं पर यदि हिंदी आती है तो फिर हिंदी में बात करने में शर्म कैसी इस मुद्दे को बहुत अच्छे से फिल्म में उठाया गया है बहुत ही यथार्थ परक फिल्म है

फिल्म हरियाणा के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगे

मैंने इसमे तीन भाईयों मे सबसे बड़े भाई महेंद्र का किरदार निभाया है परिवार के हर सदस्य से उसका अच्छा संबंध है सभी साथ में रहते हैं महेंद्र कर्मठी है एअपने भाईयों का ख्याल रखता है फिल्म में मेरा महेंद्र का किरदार कहीं न कहीं सूत्रधार है जब भाई मुसीबत में फंसता हैएतो महेंद्र उसकी मदद के लिए पहुंचता है.

हरियाणा की अपनी एक अलग पहचान है कहा जाता है कि हरियाणा के लोग उद्दंड होते हैंण्जब आप मुंबई आए तो इस पहचान के चलते किस तरह की समस्या आपको आयी थी

.देखिए ऐसा नही है हरियाणा में सभी बदतमीज नही है जो लोग हरियाणवी भाषा व कल्चर से वाकिफ नही है उन्हें ऐसा लगता होगा हकीकत में हरियाणा के लोग बहुत साधारण हैं पर मेरी राय में जैसा देश वैसा भेष होना जरुरी है तो हमें कुछ चीजें अपनानी चाहिए मान लीजिए कोई मुंबई से हरियाणा के गांव जाता है तो जब तक वह वहां की कुछ बारीक चीजों को सीखेगा नहीं एतब तक वह वहां अपनाया नहीं जाएगा तो जब मैं मुंबई पहुंचाए तो एक ही बात सीखी कि अब भेष बदलना पड़ेगा पर जड़े तो मेरे अंदर ही रहेगी बाकी चीजें अपना ली खुद की ग्रूमिंग करना बहुत जरुरी है जो भी हरियाणा ही नहीं कहीं किसी भी गांव या छोटे शहर से मुंबई महानगरी में फिल्म या टीवी में काम करने के लिए आना चाहते हैं उन सभी से कहूंगा कि जो आपके अंदर है उसे खत्म किए बगैर जो नही है उसे भी अपनाओ.

हमने देखा है कि हिंदी भाषी अंग्रेजी जानते हुए भी हिचकिचाता है ऐसा क्यों

मैं अपनी बात बताना चाहूंगा हिसार हरियाणा में हमने अंग्रेजी माध्यम से ही पढ़ाई की लेकिन हम आपस में बातें हमेशा हिंदी में करते थे यानी कि अंग्रेजी माध्यम में पढ़ते हुए भी अंग्रेजी में बातें करने का चलन नही था हमें अंग्रेजी आती थी मगर जब तक हम एक दूसरे से उस भाषा में बात नही करेंगे तब तक एक हिचक सी बनी रहती है जब मैं दिल्ली युनिवर्सिटी में पढ़ने गया तो वहां सभी अंग्रेजी में बातें करते थे उस वक्त मुझे शर्म आती थी लेकिन जहां चाह हो वहां राह अपने आप निकल आती है मैं सिर्फ छह माह के अंदर अंग्रेजी में बातें करने लगा थाएमगर मैं अपनी हिंदी भाषा को भी भूला नही था

आपके अनुसार आधुनिकता के चलते एकाकी परिवार के आनेके बाद किस तरह की समस्याएं आ रही हैं क्या संयुक्त परिवार होने चाहिए

इस संबंध में मुझे कुछ कहने की जरुरत नही हैण्एकाकी परिवार के रूप में रह रहे सभी लोग खुद अपने अंदर झांक कर देख लें तो उनकी समझ में आ जाएगा कि एकाकी परिवार से तकलीफ बढ़ी हैं अपनापन खत्म हुआ है संयुक्त परिवार में हर छोटी बड़ी समस्या के वक्त सभी एक दूसरे के साथ खड़े नजर आते हैं मगर एकाकी परिवार में रह रहे लोगों को अहसास होता है कि अरेए मेरे साथ तो कोई नही है इसलिए हर इंसान को अपने अंदर झांकने की जरुरत है कि हम आधुनिकता के चक्कर में आगे बढ़ तो जाते हैं पर यह नहीं सोचते कि हम अच्छे के लिए आगे बढ़ रहे हैं या बुरे के लिए इस पर तो हर इंसान को खुद ही आकलन करना होगा

इसके अलावा कोई दूसरी फिल्म कर रहे हैं

मैंने एक वेब सीरीज की शूटिंग पूरी की है जो कि सितंबर माह में एमएक्स प्लेअर पर आएगी सोनीपत या हिसार यानी कि हरियाणा में कला का कोई माहौल क्यों नही है वहां पर लोग सेना में जाना या खेलकूद में हिस्सा लेना पसंद करते हैं सच कहॅूं तो मैं भी फौज में जाना चाहता था या क्रिकेटर बनना चाहता था लेकिन पिलानी के फैशन शो के बाद किस्मत ने पलटा खायाण्एक के बाद एक कड़ी जुड़ती चली गयी और अब लोग मुझे अभिनय करते हुए देख ही रहे हैं

देखिए हरियाणा के सभी लोग सामान्य साधारण लोग हैं  हरियाणा में सभी के पास खेती ही मुख्य साधन है मेरे दादाजी भी किसान ही थे वह साधारण जिंदगी जीते हैं फिल्में वगैरह देखने का भी ज्यादा चलन नहीं रहा लेकिन मेरी पीढ़ी तक चीजे बदलने लगी थी और अब जो नई पीढ़ी है उसमें तो काफी बदलाव आ गया है अब तो हरियाणा से कई प्रतिभाशाली कलाकारए निर्देशक व तकनीशियन आ रहे हैं.

शमिता शेट्टी और राकेश बापट का हुआ ब्रेकअप, सोशल मीडिया पर किया ऐलान

बिग बॉस की मशहूर जोड़ी शमिता शेट्टी (Shamita Shetty) और राकेश बापट (Raqesh Bapat) अपने लवलाइफ को लेकर सुर्खियों में छाये रहते हैं. अब सोशल मीडिया से जानकारी मिली है कि उन दोनों का ब्रेकअप हो चुका है. आइए बताते है, क्या है पूरा मामला…

शमिता शेट्टी और राकेश बापट ने खुद ही सोशल मीडिया पर जानकरी दी है कि दोनों ने अपनी-अपनी राहें अलग कर ली हैं. दरअसल राकेश बापट और शमिता शेट्टी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर बताया है कि वो दोनों अब एक साथ नहीं हैं और इस बात को दोनों सोशल मीडिया पर क्लियर करना चाहते थे.

 

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राकेश बापट ने ब्रेकअप को लेकर इंस्टाग्राम स्टोरी शेयर की. एक्टर ने लिखा, मैं आप लोगों से यह बताना चाहूंगा कि मैं और शमिता एक साथ नहीं हैं. किस्मत ने हमारे रास्ते बहुत ही अजीब परिस्थितियों में मिलाए थे. मैं इस बात को सार्वजनिक तौर पर नहीं बताना चाहता था. आप सभी के प्यार और सपोर्ट के लिए शुक्रिया.

 

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राकेश बापट ने आगे लिखा,  मुझे पता है कि यह आपका दिल तोड़ेगा लेकिन उम्मीद करता हूं कि आप लोग अपना प्यार हमारे लिए यूं ही बनाए रखेंगे. आप सभी के प्यार का इंतजार रहेगा. यह वीडियो आप लोगों के लिए ही है.

 

तो वहीं शमिता शेट्टी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर बताया कि वह और राकेश अलग हो चुके हैं. शमिता शेट्टी ने इस बारे में बात करते हुए लिखा,  मुझे लगता है कि यह साफ करना जरूरी है कि मैं और राकेश अब एक साथ नहीं हैं.

 

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लेकिन यह म्यूजिक वीडियो उन सभी प्यारे फैंस के लिए है, जिन्होंने हमें खूब प्यार दिया और हमारा खूब सपोर्ट भी किया. हमें ऐसे ही अपना प्यार देते रहें.

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