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राजस्थानी डिश: फैमिली के लिए बनाएं टेस्टी बेसनी पनीर सब्जी

बारिश के मौसम में हर किसी को कुछ चटपटा खाने का मन करता है. ऐसे में अगर बात की जाए बेसनी पनीर का  तो सभी के मुंह में पानी आ जाता है. आइए जानते हैं बेसनी पनीर बनाने की विधि.

सामग्री

– 3/4 कप बेसन

– 1 इंच अदरक

– 3 लहसुन

– 1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

– 1/2 छोटा चम्मच नमक

– 1/2 छोटा चम्मच जीरा

– 1 छोटा चम्मच रिफाइंड औयल

ग्रेवी के लिए

– 1/2 कप प्याज का पेस्ट

– 1 छोटा चम्मच अदरकलहसुन पेस्ट

– 1/2 चम्मच हलदी पाउडर

– 2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

– 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च

– 1 छोटा चम्मच कश्मीरी मिर्च पाउडर

– 1/4 कप टोमैटो प्यूरी

– 1/2 छोटा चम्मच गरममसाला

– नमक स्वादानुसार

– 2 चम्मच रिफाइंड औयल ग्रेवी भूनने के लिए

– धनियापत्ती सजावट के लिए.

विधि

– बेसन को तीन कप पानी में घोल लें.

– अदरकलहसुन को पीस कर हल्दी के साथ बेसन में मिला दें.

– एक नौनस्टिक कड़ाही में एक बड़ा चम्मच तेल गरम कर के जीरा चटकाएं फिर उस में बेसन का घोल और नमक डाल दें.

– लगातार चलाते हुए मीडियम गैस पर मिश्रण के इकट्ठे होने तक घोटें.

– जब मिश्रण कड़ाही छोड़ने लगे तो चिकनाई लगी थाली में फैला दें.

– ठंडा होने पर मनचाहे टुकड़े काट लें. एक बड़े चम्मच तेल में सभी टुकड़ों को सौटे करें. ग्रेवी बनाने के लिए बचे तेल में प्याज व अदरक लहसुन पेस्ट भूनें.

– मसाला की सभी सामग्री डाल कर 2 चम्मच पानी डाल कर पुन: तेल निकलने तक मसाला भूनें.

– इस में बेसनी पनीर व 2 कप पानी डालें.

– यदि सब्जी गाढ़ी लगे तो थोड़ा और डाल दें.

– 2 उबाल आने के बाद सब्जी ढक दें.

– 10 मिनट बाद पुन: गरम करें. सर्विंग बाउल में पलटें और ऊपर से गरममसाला व हरा धनिया बुरक कर सर्व करें.

मेरी एक्स गर्लफ्रेंड मैरिड लाइफ बर्बाद करना चाहती है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं विवाहित हूं. विवाह पूर्व प्रेमिका मुझे परेशान कर रही है. मैं अपनी पत्नी से बहुत खुश हूं. विवाह के बाद प्रेमिका से कोई संबंध नहीं रखा क्योंकि उस ने ही शादी के लिए मना किया था. मुझे लग रहा है कि वह मेरी खुशी बरदाश्त नहीं कर पा रही और मेरा वैवाहिक जीवन बरबाद करना चाहती है. कृपया बताएं ऐसे हालात में मैं क्या करूं?

जवाब

क्या आप की प्रेमिका के पास ऐसा कुछ है जिस से वह आप को ब्लैकमेल कर सकती है? यदि ऐसा है तो पत्नी को विश्वास में ले कर अपनी पूर्व प्रेमिका के बारे में बताना ठीक रहेगा. इस से प्रेमिका आप को ब्लैकमेल नहीं कर पाएगी. बस ध्यान रहे पत्नी को आप पर पूरा भरोसा होना चाहिए, वरना आप की शादीशुदा जिंदगी खतरे में पड़ सकती है.

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

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बंद कमरों में बढ़ रहे हैं मानसिक रोग

डर की भावना जब शक की सीमाएं लांघने लगती है तो वह फोबिया बन कर मानसिक रोगों को पैदा करने लगती है. कोरोना व लौकडाउन के दौरान बंद कमरे में रहने का सब से बड़ा दुष्परिणाम आइसोलेशन से पैदा हुई मानसिक बीमारियां रही हैं. मानसिक बीमारी की चपेट में कमोबेश कभी न कभी हर कोई आ जाता था. अवसाद, अनिद्रा, तनाव, चिंता, भय ये कुछ ऐसी मानसिक स्थितियां हैं जिन्हें बीमारी कहना किसी को नागवार भी गुजर सकता है. हालांकि मनोचिकित्सकों का मानना है कि एक हद तक तो ये स्थितियां ठीक हैं लेकिन जब ये एक सीमा से बाहर चली जाएं तो किसी को मानसिक तौर पर बीमार घोषित करने के लिए पर्याप्त होती हैं.

रोजमर्रा के जीवन में हम सब तनाव भय, नाराजगी, नफरत जैसी मानसिक स्थितियों से अच्छी तरह परिचित हैं. किसी परिजन की मौत के दुख से भी हम सब कभी न कभी गुजरते ही हैं, लेकिन ये मानसिक स्थितियां बहुत ज्यादा देर तक या दिनों तक नहीं टिकतीं. एक समय के बाद हम स्वाभाविक जीवन में लौट आते हैं. लेकिन अगर कोई ऐसी मानसिक स्थिति से लंबे समय से गुजर रहा हो तो यह खतरे की घंटी है.

कुछ समय पहले तक समाज में किसी भी तरह की मानसिक समस्या का हल ओझा, बाबा, तांत्रिक और झाड़फूंक में ढूंढ़ा जाता था. अंधविश्वास और कुसंस्कार के चलते किसी भी राह की मानसिक समस्या के लिए किसी दूषित हवा या बयार, भूतप्रेत का साया को जिम्मेदार मान कर लोग बाबाओं व तांत्रिकों की शरण में चले जाया करते थे. गनीमत है कि इस कोविड के आइसोलेशन से परेशान लोगों ने अंधविश्वासों की शरण कम ली, पर अब फिर इन अंधविश्वासों को बेचने वालों ने व्यापार शुरू कर दिया है.

कोलकाता के मनोचिकित्सक

डा. पारोमिता मित्र भौमिका का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हमारी आबादी में मोटेतौर पर महज एक प्रतिशत लोग जटिल और गंभीर मानसिक बीमारी के शिकार होते हैं और इस का इलाज करने में वक्त लग सकता है. बाकी 10 प्रतिशत कुछ सामान्य मानसिक बीमारी से ग्रस्त होते हैं, जो गंभीर नहीं होते हैं और काउंसलिंग से ठीक हो सकते हैं.

वहीं 30 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो कभी भी ऐसी किसी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं अगर समय रहते सचेत नहीं हो जाते. इस के अलावा जो लोग किसी शारीरिक तकलीफ को ले कर चिकित्सा के लिए अस्पताल या डाक्टर के क्लीनिक में जाते हैं उन में से 50 प्रतिशत लोग छिटपुट मानसिक समस्या के शिकार होते हैं. ऐसे मामलों में होता यह है कि ये लोग वाकई मानसिक तौर पर बीमार होते हैं या मानसिक बीमारी के कारण इन में तरहतरह के शारीरिक लक्षण उभर आते हैं. यह बात कोई ठीकठाक समझ भी नहीं पाता है और समझने की कोशिश भी नहीं करता है. इन में भी लगभग 4-5 प्रतिशत लोग झाड़फूंक और तंत्रमंत्र जैसे अवैज्ञानिक तरीके अपनाते हैं.

शरीर के आंखकान, हाथपैर, किडनी, दिल, लिवर और पाचन संस्थान में अगर कोई बीमारी हो तो इस के लक्षण सामने आते हैं. उसी प्रकार एहसास, आवेग, चिंता, दुख, क्रोध आदि मन के भाव हैं और अगर मन में कोई बीमारी घर कर रही हो तो इस के भी कुछ निदृष्ट लक्षण सामने आएंगे. चूंकि शरीर और मन दोनों एकदूसरे से हैं, इसीलिए शारीरिक बीमारी का असर मन पर पड़ता है और मानसिक लक्षण सामने आते हैं. वहां मानसिक बीमारी के शारीरिक लक्षण भी दिखाई देते हैं.

मानसिक बीमारी के 2 हिस्से हैं, न्यूरोसिस और साइकोसिस. न्यूरोसिस संबंधित मानसिक बीमारी में मन की भावना व आवेग एक स्वाभाविक सीमा से परे चले जाते हैं. जब किसी व्यक्ति के आवेग के कारण उस का अपना जीवन दुरूह बन जाता है बल्कि परिवार, शिक्षा, पेशेवर जीवन और यहां तक कि समाज को भी जब प्रभावित करने लगता है तब यह मानसिक बीमारी का रूप ले लेता है. इस के उलट, कभीकभी मानसिक तनाव के लक्षण शारीरिक तौर पर नजर आते हैं. ऐसे मामलों में लक्षण शारीरिक होने के बावजूद, इस के पीछे वजह मानसिक है, इस का प्रमाण शारीरिक जांच में नहीं मिल पाता है.

न्यूरोसिस बीमारी के मामले में पीडि़त आमतौर पर वास्तविकता से अपना संबंधविच्छेद नहीं करता. यहां तक कि पीडि़त के व्यक्तित्व में ऊपरी तौर पर भी कोई बदलाव नजर नहीं आता है. न्यूरोसिस संबंधित मानसिक बीमारी में डिप्रैसिव डिसऔर्डर, एंग्जाइटी डिसऔर्डर, फोबिक डिसऔर्डर, औब्सेसिव कंप्लसिव डिसऔर्डर आते हैं. अगर केवल एंग्जाइटी डिसऔर्डर की बात करें तो यह 3 तरह का होता है.

जनरलाइज्ड एंग्जाइटी : इस से पीडि़त हमेशा किसी न किसी बात को ले कर बेचैन व चिंतित रहता है.

फोबिक एंग्जाइटी : इस एंग्जाइटी से पीडि़त व्यक्ति किसी स्थान या माहौल में जाने पर आशंकित हो जाता है या असुरक्षा महसूस करता है. ऐसा व्यक्ति नए माहौल और व्यक्तियों का सामना करने से कतराता है. ऐसी स्थिति एक्रोफोबिया कहलाती है. कुछ को अनजान लोगों के बीच बलात्कार का भय होता है.

पैनिक डिसऔर्डर : किसी विशेष व्यक्ति, माहौल या परिस्थिति के सामने न पड़ने के बावजूद कल्पना के वशीभूत हो कर पीडि़त उत्कंठा बेचैन या व्याकुल हो उठता है. मसलन, आज रात दिल का दौरा पड़ सकता है, इस डर से रात आंखों ही आंखों में कट जाती है.

साइकोसिस से पीडि़त व्यक्ति हरेक को अपना दुश्मन मान लेता है. उस के दिमाग में यह बात घर कर जाती है कि हर कोई उसे नुकसान पहुंचाने वाला है.

हर तरफ उसे अपने खिलाफ षड्यंत्र की आशंका सताती रहती है. कुल मिला कर वह वहम के वशीभूत हो जाता है. पीडि़त अजीबअजीब सी आवाजें सुनाई पड़ने या भूतप्रेत दिखाई देने का दावा करता है. लोगों में आने वाले ऐसे बदलावों से मानसिक डिसऔर्डर का पता चल जाता है. सिजोफ्रेनिया, मेनिया बाईपोलर डिसऔर्डर आदि साइकोसिस मानसिक बीमारी की मिसालें हैं.

कई बार देखने में आता है कि पीडि़त अपनेआप से बारबार बातें करता है. हावभाव में अजीब सी बेचैनी होती है. कुल मिला कर व्यक्तित्व व हावभाव में कोई तारताम्य नजर नहीं आता.

कुछ केस हिस्ट्री

हम यहां ऐसे ही कुछ मामलों का हवाला दे रहे हैं. एमबीए करने के बाद पल्लवी को एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी में अच्छे पद पर काम करने का मौका मिला. 10वीं मंजिल पर एक छोटी सी क्यूबिकल पैनोरैमिक ग्लास लिफ्ट से चढ़नेउतरने में उसे डर लगता है. यह डर एक तरह से आतंक का रूप लेने लगा. जाहिर है, काम पर जाना उस के लिए मुश्किल हो गया. दफ्तर न जाने के बहाने ढूंढ़ने में काफी समय लगाने लगी. खोईखोई सी रहती. मन ही मन बड़बड़ाती रहती. हर वक्त सिरदर्द, उबकाई की शिकायत रहती. इन सब से उस के काम और कैरियर पर असर पड़ने लगा. सिरदर्द और उबकाई की शिकायत ले कर वह डाक्टर के पास गई. डाक्टर ने कुछ दवा प्रिस्क्राइब तो की और मन में किसी तरह के डर की बात कह कर काउंसलिंग के लिए कहा.

डाक्टर के यहां से निकल कर पल्लवी सोचने लगी कि वह किसी भी तरह से डरपोक लड़की तो नहीं है. फिर डाक्टर ने डर की बात क्यों कही. लेकिन इस बात को उस ने ज्यादा तूल नहीं दिया और प्रिस्क्राइब की गई दवा लेने लगी. कुछ दिन बाद सिरदर्द और उबकाई की शिकायत में कमी आई. लेकिन फिर जस का तस. इस बीच दफ्तर में सबकुछ गड़बड़ नजर आने लगा. अकसर बौस की झिड़कियां, सहयोगियों की बेरुखी का सामना होने लगा.

तब पल्लवी ने काउंसलिंग का जरिया आजमाने का फैसला किया. काउंसलिंग के दौरान जो तथ्य निकल कर आया वह इस प्रकार का था- पल्लवी बचपन में बहुत ही चंचल स्वभाव की थी. अकसर एडवैंचरस किस्म की बदमाशियां किया करती थी. तब मां उसे भूत का डर दिखा कर शांत किया करती थी. यह भूत का डर बचपन से उस के भीतर घर कर गया था और यह डर क्यूबिकल ग्लास व पैनोरेमिक एलिवैटर से उतरनेचढ़ने में तबदील हो गया. एलिवेटर से चढ़नेउतरने के दौरान अगर कभी भूल से पल्लवी की नजर नीचे की ओर जाती तो उसे यही एहसास होता कि वह अब गिरी कि तब गिरी, या फिर लिफ्ट अब टूट कर गिरी. काउंसलिंग के दौरान साफ हुआ कि पल्लवी एक्रोफोबिया की शिकार है. दरअसल यह एक्रोफोबिया ऊंचाई का भय है. इस का इलाज कुछ मैडिसिन के साथ काउंसलिंग है.

एक अन्य मामले को लें. विवाहित और 3 बच्चों की मां लावणी की उम्र 35 साल है. पति का अपना कारोबार है. घर पर किसी चीज की कोई कमी नहीं है. न तो पति के परिवार से कोई करीबी है और न ही उस के मां के परिवार से. दोनों अपनेअपने परिवार में इकलौते हैं. किसी तरह का कोई पारिवारिक मामला भी नहीं है. बावजूद इस के कुछ दिनों से रात को वह सो नहीं पाती है. अगर आंख लगी भी तो महज घंटे या दो घंटे के लिए. इस के बाद नींद एकदम से जाने कहां हवा हो जाती है और फिर सारी रात बिस्तर पर करवट बदलती रहती है.

नतीजा, सुबह से चिड़चिड़ापन उसे घेर लेता है. छोटीमोटी बातों पर गुस्सा और इस तरह घर का माहौल बिगड़ जाता है. किसी भी काम में मन नहीं लगता. भूख भी नहीं लगती. हर वक्त मन में एक अजीब सी छटपटाहट रहती है. काउंसलिंग से पता चला कि लावणी फोबिया एंग्जाइटी डिसऔर्डर से पीडि़त है. उस के मन में अचानक यह डर बैठ गया है कि हो सकता है किसी दिन उसे दिल का दौरा पड़ जाए, तब उस के बच्चों का क्या होगा.

मनोचिकित्सक पारोमिता मित्र भौमिक कहती हैं कि हमारी आजकल की जीवनशैली भी एक हद तक मानसिक बीमारी के लिए जिम्मेदार है. समाज के लिए यह बड़ी चुनौती बन गई है. लोग सिमट गए हैं, समाज सिमट गया है. लोग अपनीअपनी कोठरियों में बंद हैं. एक पड़ोसी को दूसरे पड़ोसी की खबर नहीं होती. टीवी की संस्कृति ने लोगों को अपनीअपनी फैंटेसी में जीने की आदत डाल दी है और यही सब स्थितियां मानसिक बीमारी का कारण बन रही हैं.

माफी: क्या सुमन भाभी के मुस्कुराहट के पीछे जहर छिपा था?

सुमन भाभी के प्रति अंजलि के मन में नफरत भर गई थी, इसीलिए बरसों बाद भी आज उन का अपनत्वभरा व्यवहार अंजलि को चालाकी व मतलबभरा नजर आ रहा था. क्या सच में उन की मीठी मुसकराहट के पीछे जहर छिपा था?

मेरी पत्नी सेक्स के मामले में बहुत ज्यादा चिड़चिड़ी सी हो गई है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 45 साल का एक शादीशुदा मर्द हूं. मेरे 3 बच्चे हैं. मेरी पत्नी की उम्र मुझसे 2 साल ज्यादा है और काफी समय से सैक्स के मामले में वह बहुत ज्यादा चिड़चिड़ी सी हो गई है. मैंने उसे बहुत बार समझाया कि सुरक्षित सैक्स में कोई बुराई नहीं है, पर वह मानती ही नहीं है. बोलती है कि 3 बच्चों की मां से अब कोई उम्मीद मत रखो. उस की इस बेवजह की बात से मैं परेशान रहता हूं. मैं क्या करूं?

जवाब

इस उम्र में सेहत और घरेलू वजहों के चलते कई औरतों का सैक्स से मन उचटना बेहद आम बात है. कई औरतों की तरह आप की बीवी ने भी यह मान लिया है कि बच्चे हो जाने के बाद हमबिस्तरी बहुत जरूरी नहीं है.

अब यह आप की जिम्मेदारी है कि पत्नी की इस ऊब को लुत्फ में बदलें. इस के लिए आप को थोड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी, मसलन उस की नजदीकियां दोबारा हासिल करें, उसे सैक्स के लिए उकसाएं. इस के लिए कभीकभार ऐसी वीडियो भी दिखाएं, जो आजकल मोबाइल फोन में आसानी से मिल जाती हैं.

पत्नी के साथ अकेले घूमेंफिरें, उसे होटल में ले जाएं. उस की पसंद की खरीदारी कराएं और एकांत पाते ही उस के नाजुक अंगों को सहलाएं. साथ ही, खुद की फिटनैस और रहनसहन पर भी ध्यान दें.

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ममता के रंग: प्राची ने कुणाल की अम्मा की कैसी छवि बनाई थी?

‘‘दीदी, वे लोग आ गए,’’ कहते हुए पोंछे को वहीं फर्श पर फेंकते हुए कजरी जैसे ही बाहर की तरफ दौड़ी, प्राची का दिल जोर से धड़क उठा. सिर पर पल्ला रखते हुए उस ने एक बार अपनेआप को आईने में देख लिया. सच, एकदम आदर्श बहू लग रही थी.

मन में उठ रही ढेरों शंकाओं ने प्राची को परेशान कर दिया. जब नईनवेली दुलहन ससुराल आती है, तब सास उस की आरती उतारती है. लेकिन यहां पर किस्सा उलटा था, बहू के घर सास पहली बार आ रही थी.

अम्मा प्राची और कुणाल के विवाह के खिलाफ थीं, इसलिए दोनों ने कोर्टमैरिज कर ली थी. शादी को साल भर होने जा रहा था कि अम्मा ने सूचित किया कि  वे आ रही हैं.

कई बार प्राची ने सोचा था कि स्टेशन जाने से पहले वह कुणाल से विस्तार से बात करेगी कि अम्मा के आते ही उसे उन का सामना कैसे करना है? लेकिन अम्मा के आने की सूचना मिलते ही घर सजानेसंवारने की व्यस्तता और खुशी से रोमांचित प्राची तो जैसे सबकुछ भूल गई थी.

‘‘प्राची,’’ बाहर से कुणाल की पुकार सुनते ही उस का चेहरा लाल हो गया. अम्मा का स्वागत उन के चरणों को छू कर ही करेगी, यह सोचते हुए वह बाहर निकल आई.

पर अम्मा को देखते ही जैसे पैरों में ब्रेक लग गए. उन का रूपरंग तो उस की कल्पना के उलट था. बौयकट बाल, होंठों पर गुलाबी लिपस्टिक और साड़ी के स्थान पर बगैर दुपट्टे का सूट देख कर वह स्तब्ध रह गई.

अम्मा की आधुनिक छवि को देख कर वह जैसे अपने ही स्थान पर जड़ हो गई थी. न आगे बढ़ कर चरणों को छू पाई, न ही हाथ जोड़ कर नमस्ते तक करने की औपचारिकता निभा पाई.

‘‘कुणाल, तुम्हारा चुनाव अच्छा है,’’ अम्मा ने अंगरेजी में कहा और प्राची के गालों को चूम लिया. पर प्राची का चेहरा शर्म से गुलनार न हो पाया.

कुणाल प्राची की उधेड़बुन से अनजान मां के कंधों को थामे लगातार बड़बड़ाता जा रहा था.

प्राची की आंखें यह सोच कर भर आईं कि मां की जो कमी उसे प्रकृति ने दी थी, वह कभी पूरी नहीं हो पाएगी. रसोई में अपने काम को अंतिम रूप देते हुए वह सोच रही थी, कितनी तारीफ करता था कुणाल अपनी अम्मा की, उन के ममत्व की. जो तसवीर कुणाल ने अपने कमरे में लगा रखी थी, उस में तो वास्तव में अम्मा आदर्श मां ही लग रही थीं. नाक में नथ, बड़ी सी बिंदी, कानों में झुमके, सीधे पल्ले की जरी वाली साड़ी, घने काले बाल…

प्राची के मन में अपनी मां की जो छवि रहरह कर उभरती, उस से कितनी मिलतीजुलती थी, कुणाल की अम्मा की तसवीर. इसीलिए तो अम्मा के प्रति प्राची बेहद भावुक थी.

जब भी कुणाल अम्मा की ममता का जिक्र करता, प्राची का ममता के लिए ललकता मन तड़प उठता. वह अम्मा को देखने और उन के प्यार को पाने की उम्मीद लगा बैठती.

अम्मा के ममत्व का जिक्र करते हुए कुणाल कहा करता था, ‘जब अम्मा थकीहारी रसोई का काम निबटा कर बैठती थीं, तब बजाय उन को आराम देने के, मैं उन की गोद में सिर रख कर लेट जाया करता था. जानती हो, तब वे अपने माथे का पसीना पोंछना भूल कर अपने हाथों को मेरे बालों पर फेरती रहतीं…सच…कितना सुख मिलता था तब. जब मुझे मैडिकल कालेज जाना पड़ा, तब उन की याद में नींद नहीं आती थी…’

‘अम्मा बहुत ममतामयी हैं न? उन्हें गुस्सा तो कभी नहीं आता होगा?’ प्राची पूछती.

‘नहीं, तुम गलत कह रही हो. अम्मा जितनी ममतामयी हैं, उतनी ही सख्त भी हैं. झूठ से तो उन्हें सख्त नफरत है. मुझे याद है, एक बार मैं स्कूल से एक बच्चे की पैंसिल उठा लाया था और अम्मा से झूठ कह दिया कि मेरे दोस्त ने मुझे पैंसिल तोहफे में दी है. जाने कैसे, अम्मा मेरा झूठ भांप गई थीं. अगले रोज वे मेरे साथ स्कूल आईं और मेरे दोस्त से पैंसिल के बारे में पूछा. उस के इनकार करने पर मुझे जो डांट पिलाई थी, वह मैं आज तक नहीं भूला,’ कुणाल ने कहा, ‘तब से ले कर आज तक मैं ने कभी अम्मा से झूठ नहीं बोला.

‘पिताजी के निधन के बाद अम्मा हमेशा इस बात से आशंकित रहती थीं कि मैं और मेरे भैया कहीं गलत राह पर न चले जाएं.’

प्राची हमेशा अपनी सास की तसवीर में उन के चेहरे को देखते हुए उन के व्यक्तित्व को आंकने का प्रयास करती रहती. अम्मा की तसवीर की तरफ देखते हुए कुणाल उस से कहता, ‘जानती हो, यह अम्मा की शादी की तसवीर है. इस के अलावा उन की और कोई तसवीर मेरे पास नहीं है.’

‘कुणाल, मैं कई बार यह सोच कर खुद को अपराधी महसूस करती हूं कि मेरी वजह से तुम अम्मा से दूर हो गए, न तुम मुझ से विवाह करते, न अम्मा से जुदा होना पड़ता.’

‘प्राची, क्या पागलों जैसी बात कर रही हो. अम्मा को मैं अच्छी तरह से जानता हूं. वे हम से ज्यादा दिनों तक अलग नहीं रह सकतीं. वे हमें जल्दी ही अपने पास बुलाएंगी.’

‘काश, वह दिन जल्दी आता,’ प्राची धीमे स्वर में कहती, ‘मैं ने अपनी मां को नहीं देखा है. मैं 6 माह की थी जब उन की मृत्यु हो गई. पिताजी ने मेरी देखरेख में कोई कमी नहीं की थी, लेकिन मां की ममता के लिए हमेशा मेरा मन ललकता रहता है. कल रागिनी आई थी. जब उसे पता चला कि मैं गर्भवती हूं तो मुझ से पूछने आ गई कि मेरी क्या खाने की इच्छा है? मेरा मन भर आया. रागिनी मेरी सहेली है, उस के पूछने में एक दर्द था. मेरी मां नहीं हैं न, इसीलिए शायद वह अपने स्नेह से उस कमी को थोड़ा कम करने का प्रयास कर रही थी,’ आंखों को पोंछते हुए प्राची बोली.

कुणाल ने उसे सीने से लगाते हुए कहा, ‘यह कभी मत कहना कि तुम्हारी मां नहीं, अम्मा तुम्हारी भी तो मां हैं?’

‘जरूर हैं, इसीलिए तो उन से मिलने को ललचाती रहती हूं. पर न जाने उन से कब मिलना हो पाएगा. और फिर यह भी तो नहीं पता कि मुझे माफ करना उन के लिए संभव होगा या नहीं.’

‘सबकुछ ठीक हो जाएगा,’ कहते हुए कुणाल ने प्राची के माथे पर हाथ फेरते हुए उसे यकीन दिलाने की कोशिश की.

प्राची की अम्मा के प्रति छटपटाहट और उन के स्नेह को पाने की ललक देख कर कुणाल का मन पीडि़त हुआ करता था. अम्मा चाहे कुणाल को पत्र लिखें या न लिखें. लेकिन कुणाल हर हफ्ते उन्हें पत्र जरूर लिखता.

प्राची कई बार कुणाल से जिद करती कि वह अम्मा से टैलीफोन कर बात करे, ताकि प्राची भी कम से कम उन की आवाज तो सुन सके. लेकिन जब भी कुणाल फोन करता, अम्मा रिसीवर रख देतीं.

कुणाल द्वारा पिछले हफ्ते लिखे गए खत में प्राची के गर्भवती होने की सूचना के साथसाथ उस की मां का प्यार पाने की इच्छा का कुछ ज्यादा ही बखान हो गया था, तभी तो अम्मा पसीज गई थीं और फोन पर सूचित किया था कि वे आ रही हैं.

प्राची अम्मा के आने की खबर सुन कर पूरी रात सो न पाई थी. उस ने कल्पना की थी कि अम्मा आते ही उसे सीने से लगा लेंगी, हालचाल पूछेंगी, लेकिन यहां तो सबकुछ उलटा नजर आ रहा था.

कुणाल और अम्मा की बातों का स्वर काफी तेज था. अम्मा शायद भैया के व्यापार के बारे में कुछ बता रही थीं और कुणाल अपने को अधिक बुद्धिजीवी साबित करने का प्रयास करते हुए उन की छोटीमोटी गलतियों का आभास कराता जा रहा था.

गर्भावस्था में भी अब तक प्राची को काम करने में कोई असुविधा नहीं हुई थी, लेकिन पूरी रात न सो पाने से वह असहज हो उठी थी. साथ ही, अम्मा को अपने खयालों के मुताबिक न पा कर उस में एक अजीब सा तनाव आ गया था. अचानक उसे कुणाल भी पराया सा लगने लगा था.

किसी तरह नाश्ता बना कर प्राची ने डाइनिंग टेबल पर लगा दिया और अम्मा व कुणाल को बुलाने कमरे में आ गई.

अम्मा पलंग पर बैठी थीं और कुणाल उन की गोद में सिर रख कर लेटा था. अम्मा की उंगलियां कुणाल के बालों में उलझी हुई थीं. प्राची ने देखा, अम्मा का एक भी बाल सफेद नहीं है. ‘शायद बालों को रंगती हों,’ प्राची ने सोचा और मन ही मन हंस दी, ‘युवा दिखने का शौक भी कितना अजीब होता है. बच्चे बड़े हो गए और मां का जवान दिखने का पागलपन.’

प्राची के मनोभावों से परे अम्मा और कुणाल अपनी ही बातचीत में खोए हुए थे. अम्मा कह रही थीं, ‘‘बेटा, तू अब वहीं आ जा, अपना अस्पताल खोल ले. अब दूरदूर नहीं रहा जाता.’’

‘‘अभी नहीं, अम्मा, मैं करीब 5 साल मैडिकल अस्पताल में ही प्रैक्टिस करना चाहता हूं. यहां रह कर तरहतरह के मरीजों से निबटना तो सीख लूं. जब भी अस्पताल खोलूंगा, वहीं खोलूंगा, तुम्हारे पास, यह तो तय है.’’

‘‘अम्मा, नाश्ता तैयार है,’’ दोनों के प्रेमालाप में विघ्न डालते हुए प्राची को बोलना पड़ा.

‘‘अच्छा बेटी, चलो कुणाल, तुम दोनों से मिल कर मेरी तो भूख ही मर गई,’’ अम्मा ने उठते हुए कहा.

‘‘पर अम्मां, मेरी भूख तो दोगुनी हो गई,’’ कुणाल ने उन के हाथों को अपने हाथ में लेते हुए कहा.

‘‘पागल कहीं का, तू तो बिलकुल नहीं बदला,’’ अम्मा ने लाड़ जताते हुए कहा.

नाश्ते की मेज पर न तो अम्मा और न कुणाल को इतनी फुरसत थी कि नाश्ते की तारीफ में कुछ कहें, न ही यह याद रहा कि प्राची भी भूखी है. रात अम्मा से मिलने की उत्सुकता में उस की नींद और भूख, दोनों मर गई थीं.

पर अब प्राची भूख सहन नहीं कर पा रही थी. उसे लग रहा था, अम्मा उस से भी साथ खाने को कहेंगी या कम से कम कुणाल तो उस का खयाल रखेगा. पर सबकुछ आशा के उलट हो रहा था. अब तक प्राची के बगैर चाय तक न पीने वाला कुणाल बड़े मजे से कटलेट सौस में डुबो कर खाए जा रहा था. प्राची के मन में अकेलेपन का एहसास बढ़ता ही जा रहा था.

मां व बेटे के इस रूप को देख कर प्राची को भी संकोच को दरकिनार करना पड़ा और वह अपने लिए प्लेट ले कर नाश्ता करने के लिए बैठ गई. नाश्ता स्वादहीन लग रहा था, पर भूख को शांत करने के लिए वह बड़ी तेजी से 2-3 कटलेट निगल गई. फलस्वरूप, उसे उबकाई आने लगी. रातभर के जागरण और सुबह से हो रहे मानसिक तनाव से पीडि़त प्राची को कटलेट हजम नहीं हुए.

प्राची तेजी से उठ कर बाथरूम की ओर दौड़ पड़ी. भीतर जा कर जो कुछ खाया था, सब उगल दिया. माथे पर छलक आई पसीने की बूंदों को पोंछते हुए बाथरूम में खड़ी रही. ऐसा लग रहा था जैसे अभी गिर पड़ेगी. सिर भी चकराने लगा था. तभी 2 कोमल भुजाओं ने प्राची को संभाल लिया. ‘‘चल बेटी, तू आराम कर.’’ लेकिन प्राची वहां से हट न पाई. थोड़ी सी गंदगी बाथरूम के बाहर भी फैल गई थी. सो, यह बोली, ‘‘अम्मा, वह वहां भी थोड़ी सी गंदगी…’’

‘‘मैं साफ कर लूंगी, तू चल कर आराम कर,’’ अम्मा प्राची को सहारा दे कर उसे उस के कमरे तक ले आईं. फिर बिस्तर पर लिटा कर उस के चेहरे को तौलिए से पोंछ कर साफ किया.

कुणाल ने एक गिलास पानी से प्राची को एक गोली खिला दी. अब कुणाल के चेहरे पर परेशानी के भाव साफ नजर आ रहे थे. ‘‘ज्यादा भागदौड़ हो गई होगी न. अब तुम आराम करो.’’

‘कुणाल, मुझे उबकाई आ गई थी. बाथरूम के बाहर भी जरा सी गंदगी हो गई है. अम्मा साफ करेंगी तो अच्छा नहीं लगेगा. सास से कोई ऐसे काम नहीं करवाता.’’

‘‘पागल,’’ प्राची के गालों पर प्यार से चपत मारता हुआ कुणाल बोला, ‘‘वे तुम्हारी मां हैं मां. और उन्हें जो करना है, वह करेंगी ही. मेरे कहने से मानेंगी थोड़े ही.’’

‘‘फिर भी,’’ प्राची ने उठने का प्रयास करते हुए कहा.

‘‘तुम चुपचाप लेटी रहो और सोने का प्रयास करो,’’ कुणाल धीरेधीरे उस के माथे पर हाथ फेरता रहा. कब नींद आ गई, प्राची को पता ही न चला.

जब उस की आंख खुली तो अम्मा को अपने सिरहाने बैठा पाया. वे नेलपौलिश रिमूवर से अपने नाखून साफ कर रही थीं, प्राची ने उठने का प्रयास किया तो अम्मा ने रोक दिया, ‘‘न बेटी, तुम आराम करो. तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं. मैं आ गईर् हूं और सिर्फ तुम्हें आराम देने के लिए ही आई हूं.’’

‘‘अम्मा, मुझे अच्छा नहीं लग रहा, मैं आप की सेवा भी नहीं कर पा रही हूं.’’

‘‘नहीं बेटी, मैं अपने हिस्से का आराम करती रहूंगी, तुम चिंता मत करो. जब से योगाभ्यास करने लगी हूं, खुद को काफी स्वस्थ महसूस कर रही हूं. अपने योग शिक्षक से तुम्हारे करने योग्य योग भी सीख कर आई हूं, तुम्हें जरूर सिखाऊंगी, लेकिन पहले तुम्हारे डाक्टर से मिलना होगा. तुम मेरी और कुणाल की चिंता छोड़ दो. तुम्हारे प्रसव तक घर की देखभाल मैं करूंगी.’’

‘‘अम्मां, तब तक आप यहीं रहेंगी?’’

‘‘हां,’’ उन्होंने मुसकराते हुए कहा.

प्राची एकटक अम्मा को ताकती रही, वे ममता की प्रतिमूर्ति लग रही थीं. वह सोचने लगी कि केवल वेशभूषा से किसी के दिल को भला कैसे आंका जा सकता है. अम्मा ने लिपस्टिक भी लगाई थी, चेहरे पर पाउडर और कटे बालों में हेयरबैंड भी. पर अब प्राची को सबकुछ अच्छा लग रहा था क्योंकि अम्मा के मेकअप वाले आवरण की ओट से झांकती उन की अंदरूनी खूबसूरती और ममत्व का रंग उसे अब स्पष्ट दिखाई देने लगा था.

ऐंडोमैट्रिओसिस से बढ़ता बांझपन का खतरा

ऐंडोमैट्रिओसिस गर्भाशय से जुड़ी एक समस्या है. यह समस्या महिलाओं की प्रजनन क्षमता को सर्वाधिक प्रभावित करती है, क्योंकि गर्भधारण करने और बच्चे को जन्म देने में गर्भाशय की सब से महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है. कई महिलाओं में यह समस्या अत्यधिक गंभीर हो शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित करती है. वैसे आधुनिक दवा और उपचार के विभिन्न विकल्पों ने दर्द और बांझपन दोनों से राहत दिलाई है. ऐंडोमैट्रिओसिस का यह अर्थ नहीं है कि इस से पीडि़त महिलाएं कभी मां नहीं बन सकतीं, बल्कि यह है कि इस के कारण गर्भधारण करने में समस्या आती है.

क्या है ऐंडोमैट्रिओसिस

ऐंडोमैट्रिओसिस गर्भाशय की अंदरूनी परत की कोशिकाओं का असामान्य विकास होता है. यह समस्या तब होती है जब कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर विकसित हो जाती हैं. इसे ऐंडोमैट्रिओसिस इंप्लांट कहते हैं. ये इंप्लांट्स आमतौर पर अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब्स, गर्भाशय की बाहरी सतह पर या आंत और पैल्विक गुहा की सतह पर पाए जाते हैं. ये वैजाइना, सरविक्स और ब्लैडर पर भी पाए जा सकते हैं. बहुत ही कम मामलों में ऐंडोमैट्रिओसिस इंप्लांट्स पैल्विस के बाहर लिवर पर या कभीकभी फेफड़ों अथवा मस्तिष्क के आसपास भी हो जाते हैं.

ऐंडोमैट्रिओसिस के कारण

ऐंडोमैट्रिओसिस महिलाओं को उन के प्रजनन काल के दौरान प्रभावित करता है. इस के ज्यादातर मामले 25 से 35 वर्ष की महिलाओं में देखे जाते हैं. लेकिन कई बार 10-11 साल की लड़कियों में भी यह समस्या होती है. मेनोपौज की आयु पार कर चुकी महिलाओं में यह समस्या बहुत कम होती है. विश्व भर में करोड़ों महिलाएं इस से पीडि़त हैं. जिन महिलाओं को गंभीर पैल्विक पेन होता है उन में से 80% ऐंडोमैट्रिओसिस से पीडि़त होती हैं.

इस के वास्तविक कारण पता नहीं हैं. हां, कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि ऐंडोमैट्रिओसिस की समस्या उन महिलाओं में अधिक है, जिन का बौडी मास इंडैक्स (बीएमआई) कम होता है. बड़ी उम्र में मां बनने वाली या कभी मां न बनने वाली महिलाओं में भी यह समस्या हो सकती है. इस के अलावा जिन महिलाओं में पीरियड्स जल्दी शुरू हो जाते हैं या मेनोपौज देर से होता है, उन में भी इस का खतरा बढ़ जाता है. इस के अलावा आनुवंशिक कारण भी इस में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

ऐंडोमैट्रिओसिस के लक्षण

ज्यादातर महिलाओं में ऐंडोमैट्रिओसिस का कोई लक्षण दिखाई नहीं देता, लेकिन जो लक्षण दिखाई देते हैं उन में पीरियड्स के समय अत्यधिक दर्द होना, पीरियड्स या अंडोत्सर्ग के समय पैल्विक पेन ऐंडोमैट्रिओसिस का एक लक्षण है. लेकिन यह सामान्य महिलाओं में भी हो सकता है. इस दर्द की तीव्रता हर महीने बदल सकती है और अलगअलग महिलाओं में अलगअलग हो सकती है.

द्य पैल्विक क्षेत्र में दर्द होना यानी पेट के निचले भाग में दर्द होना और यह दर्द कई दिनों तक रह सकता है. इस से कमर और पेट में दर्द भी हो सकता है. यह पीरियड शुरू होने से पहले हो सकता है और कई दिनों तक चल सकता है. मल त्यागने और यूरिन पास करने के समय दर्द हो सकता है. यह समस्या अधिकतर पीरियड्स के समय अधिक होती है. पीरियड्स के समय अत्यधिक रक्तस्राव होना, कभीकभी पीरियड्स के बीच में भी रक्तस्राव होना, यौन संबंध के दौरान या बाद में दर्द होना, डायरिया, कब्ज और अत्यधिक थकान होना. छाती में दर्द या खांसी में खून आना अगर ऐंडोमैट्रिओसिस फेफड़ों में है, सिरदर्द और चक्कर आना अगर ऐंडोमैट्रिओसिस मस्तिष्क में है.

रिस्क फैक्टर

कई कारक ऐंडोमैट्रिओसिस की आशंका बढ़ा देते हैं जैसे:

– कभी बच्चे को जन्म न दे पाना.

– 1 या अधिक निकट संबंधियों (मां, मौसी, बहन) को ऐंडोमैट्रिओसिस होना.

– कोई और मैडिकल कंडीशन जिस के कारण शरीर से मैंस्ट्रुअल फ्लो का सामान्य मार्ग बाधित होता है.

– यूरिन की असामान्यता.

ऐंडोमैट्रिओसिस और इनफर्टिलिटी

जिन महिलाओं को ऐंडोमैट्रिओसिस है, उन में से 35 से 50% महिलाओं को गर्भधारण करने में समस्या होती है. इस के कारण फैलोपियन ट्यूब्स बंद हो जाती हैं, जिस से अंडाणु और शुक्राणु का निषेचन नहीं हो पाता है. कभीकभी अंडे या शुक्राणु को भी नुकसान पहुंचता है. इस से भी गर्भधारण नहीं हो पाता. जिन महिलाओं में यह समस्या गंभीर नहीं होती है. उन्हें गर्भधारण करने में अधिक समस्या नहीं होती है. डाक्टर सलाह देते हैं कि जिन महिलाओं को यह समस्या है उन्हें बच्चे को जन्म देने में देर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि स्थिति समय के साथ अधिक खराब हो जाती है.

पहली बार ऐंडोमैट्रिओसिस का पता ही तब चला जब कुछ महिलाएं बांझपन का उपचार करा रही थीं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 25 से 50% बांझ महिलाएं ऐंडोमैट्रिओसिस की शिकार होती हैं, जबकि 30 से 50% महिलाएं, जिन्हें ऐंडोमैट्रिओसिस होता है वे बांझ होती हैं. सामान्य तौर पर संतानहीन दंपतियों में से 10% का कारण ऐंडोमैट्रिओसिस होता है.

बांझपन की जांच करने के लिए किए जाने वाले लैप्रोस्कोपिक परीक्षण के समय ऐंडोमैट्रिअल इंप्लांट का पता चलता है. कई ऐसी महिलाओं में भी इस का पता चलता है, जिन्हें कोई दर्द अनुभव नहीं होता. ऐंडोमैट्रिओसिस के कारण महिलाओं की प्रजनन क्षमता क्यों प्रभावित होती है, यह पूरी तरह समझ में नहीं आया है, लेकिन संभवतया ऐनाटोमिकल और हारमोनल कारणों के कारण यह समस्या होती है. संभवतया हारमोन और दूसरे पदार्थों के कारण अंडोत्सर्ग, निषेचन और गर्भाशय में भू्रण के इंप्लांट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

ऐंडोमैट्रिओसिस और कैंसर

कुछ अध्ययनों के अनुसार जिन महिलाओं को ऐंडोमैट्रिओसिस होता है उन में अंडाशय का कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है. यह खतरा उन महिलाओं में अधिक होता है जो बांझ होती हैं या कभी मां नहीं बन पाती हैं.

अभी तक ऐंडोमैट्रिओसिस और ओवेरियन ऐपिथेलियल कैंसर के मध्य संबंधों के स्पष्ट कारण का पता नहीं है. कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि ऐंडोमैट्रिओसिस इंप्लांट ही कैंसर में बदल जाता है. यह भी मानना है कि ऐंडोमैट्रिओसिस आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों से भी संबंधित हो सकता है. ये महिलाओं में अंडाशय का कैंसर होने की आशंका भी बढ़ा देते हैं.

डायग्नोसिस

ऐंडोमैट्रिओसिस का पता लगाने के लिए ये टैस्ट किए जाते हैं:

पैल्विक ऐग्जाम: इस में डाक्टर हाथ से पैल्विक का परीक्षण करता है कि कोई असामान्यता तो नहीं है.

अल्ट्रासाउंड: इस से ऐंडोमैट्रिओसिस होने का पता तो नहीं चलता है, लेकिन उस से जुड़े सिस्ट की पहचान हो जाती है.

लैप्रोस्कोपी: यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐंडोमैट्रिओसिस है एक छोटी सी सर्जरी की जाती है, जिसे लैप्रोस्कोपी कहते हैं. इस में ऊतकों के सैंपल भी लिए जाते हैं, जिन की बायोप्सी से पता चल जाता है कि ऐंडोमैट्रिओसिस कहां स्थित है.

उपचार

पीरियड्स के दौरान होने वाले रक्तस्राव और दर्द भरे संभोग को गंभीरता से लें. स्थिति और अधिक गंभीर होने से पहले फर्टिलिटी विशेषज्ञ से मिलें. इस के उपचार के लिए दवा और सर्जरी का उपयोग किया जाता है. हारमोन थेरैपी भी इस के उपचार के लिए उपयोग की जाती है, क्योंकि मासिकधर्म के दौरान होेने वाले हारमोन परिवर्तन के कारण भी यह समस्या हो जाती है. हारमोन थेरैपी ऐंडोमैट्रिओसिस के विकास को धीमा करती है और ऊतकों के नए इंप्लांट्स को रोकती है.

ऐंडोमैट्रिओसिस के कारण होने वाले दर्द की समस्या के लिए डाक्टर सर्जिकल उपचार बेहतर मानते हैं तथा बांझपन की समस्या के लिए आईवीएफ तकनीक की सलाह दी जाती है ताकि सामान्य से अधिक नुकसान होने से पहले संतान प्राप्ति की जा सके.

– डा. क्षितिज मुर्डिया,  इंदिरा इनफर्टिलिटी क्लीनिक ऐंड टैस्ट ट्यूब बेबी सैंटर, नई दिल्ली

मेरी पत्नी नशा करती है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 31 वर्षीय पुरुष हूं. शादी हुए एक महीना ही हुआ है. मु?ो हाल ही में एक व्हाट्सऐप मैसेज आया कि मेरी पत्नी गांजे का नशा करती है. मैं तब से परेशान हूं क्योंकि पत्नी मेरे औफिस जाने के बाद घर पर ताला लगा कर अपनी मां के घर चली जाती है. उस का कहना है कि मेरे औफिस जाने के बाद वह घर पर अकेली क्या करेगी. शाम को मेरे वापस आने से पहले लौट आती है क्योंकि मायका दूर नहीं है. उस की कुछ हरकतें अब मु?ो अजीब लगने लगी हैं, जैसे चुपचाप दूसरे कमरे में जा कर बैठ जाना, खोईखोई सी रहना, घर के कामकाज में रुचि न लेना, सैक्स में भी ज्यादा रुचि नहीं दिखाती. सम?ा नहीं पा रहा क्या करूं? क्या साफसाफ उस से इस बारे में बात करूं? क्या उस से तलाक ले लूं?

जवाब

देखिए, आजकल बहुत लड़कियां कालेज लाइफ से ही नशा करने लगी हैं. पार्टियों में शराब, हुक्का, गांजा फैशन बन गया है. लेकिन सिर्फ इस कारण से उस से तलाक लेना सम?ादारी नहीं होगी और न ही तलाक लेने की यह कोई अहम वजह है.

अभी आप की शादी को महज एक महीना हुआ है. आप अपने प्यारमोहब्बत से स्थिति को काफीकुछ संभाल सकते हैं. पत्नी का मूड देखते हुए उस से बात कीजिए. उसे यकीन दिलाइए कि आप हर हालत में उस के साथ हैं. उसे किसी नशा मुक्ति केंद्र में ले जाइए और वहां काउंसलिंग व दवाएं दिलाइए. कोशिश कीजिए, नशे की लत छूट जाएगी. चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, गांजा कोई बहुत बड़ी चीज नहीं है कि आदत छूट न पाए.

पत्नी को व्यस्त रखें. अपना पूरा वक्त, प्यार दीजिए. उसे घुमाइएफिराइए. उस से अपनी बातें शेयर कीजिए. उस के मन की बातें जानने की कोशिश कीजिए. आपस में हंसीखुशी का माहौल बना कर रखेंगे तो उस का ध्यान नशे से दूर रहेगा. चिंता छोडि़ए और पत्नी पर ध्यान दीजिए.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

Manohar Kahaniya: ये तो प्यार नहीं

सौजन्य: मनोहर कहानियां

रिमझिम चतुर्वेदी पटना के जानेमाने दंत चिकित्सक विश्वजीत चतुर्वेदी की पत्नी थी. धनाढ्य और उच्चशिक्षित होते हुए भी वह तंत्र विद्या का धंधा करती थी. डा. विश्वजीत चतुर्वेदी के चेहरे पर परेशानियों की लकीरें साफ झलक रही थीं. वह कमरे में चहलकदमी कर रहे थे, वहीं से वह बारबार मुख्यद्वार की ओर झांक रहे थे. जैसे किसी के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हों.

इस की वजह यह थी कि रात के करीब 10 बज रहे थे और उन की पत्नी रिमझिम चतुर्वेदी अब तक घर लौटी नहीं थी. उन का मोबाइल फोन भी नहीं लग रहा था. बारबार वह स्विच्ड औफ बताया जा रहा था. इस से विश्वजीत चतुर्वेदी परेशान हो गए थे. ऐसा उन के साथ पहली बार हुआ था, जब पत्नी का मोबाइल फोन स्विच्ड औफ आ रहा हो.

रात काफी गहरा चुकी थी. ऐसे में उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा था कि वह करें तो क्या करे. जबकि सभी परिचितों और रिश्तेदारों के पास फोन कर के पत्नी के वहां आने के बारे में पूछ रहे थे. वहां से उन्हें पता चला कि रिमझिम उन में से किसी के भी घर नहीं पहुंची थी. इस से उन का दिल और बैठा जा रहा था. यह 23 नवंबर, 2021 की घटना है.

बहरहाल, डा. विश्वजीत ने पूरी रात आंखों में काटी और सुबह होते ही श्रीकृष्णपुरी थाने पहुंचे. उन के साथ बहनोई संजय पाठक भी थे. थानाप्रभारी एस.के. सिंह ने संजय से तहरीर ले ली और रिमझिम चतुर्वेदी की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर आगे की काररवाई शुरू कर दी थी.

रिमझिम चतुर्वेदी कोई मामूली महिला नहीं थी. वह पटना के जानेमाने डेंटिस्ट विश्वजीत चतुर्वेदी की पत्नी थी. यानी मामला हाईप्रोफाइल था. यह बात 24 नवंबर, 2021 की है.

खैर, उसी दिन पटना के ही नौबतपुर थाने के डीहरा शेखपुरा गांव स्थित पुनपुन सुरक्षा बांध के किनारे सुनसान इलाके में एक खूबसूरत युवती की लाश मिली. किसी ने गोली मार कर उस की हत्या कर दी थी. शक्लोसूरत और पहनावे से वह किसी अच्छेभले घर की लग रही थी.

लाश मिलने की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी दीपक सम्राट टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए और काररवाई में जुट गए. उन्होंने लाश की बारीकी से जांच की तो देखा हत्यारों ने युवती के मुंह में गोली मार कर हत्या की थी.

युवती का सिर खून में तरबतर था. पहनावे से वह अच्छेभले घर की लग रही थी. पैरों में उस के हाईहील वाली सफेद रंग की कीमती सैंडल थीं. दाहिनी जांघ के पास आसमानी रंग का मास्क गिरा हुआ था. जांचपड़ताल करने पर मौके से एक फायरशुदा खोखा बरामद हुआ.

मौके से बरामद सभी सामानों को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया और इस की जानकारी दीपक सम्राट ने डीएसपी और एसएसपी उपेंद्र कुमार शर्मा को दे दी. मौके की प्रारंभिक काररवाई करने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए एम्स पटना भिजवा दी.

थानाप्रभारी दीपक सम्राट ने पटना के सभी थानों में लाश की फोटो भिजवा दी ताकि किसी थाने में किसी युवती के गायब होने का मुकदमा तो दर्ज नहीं है.

लाश की तसवीर श्रीकृष्णपुरी थाने में भी पहुंची. फोटो देख कर थानाप्रभारी एस.के. सिंह चौंक गए. वह तसवीर गुमशुदा रिमझिम चतुर्वेदी से काफी हद तक मेल खा रही थी. फौरन उन्होंने फोन कर के वादी संजय पाठक को थाने बुलवाया. उन के साथ उन की पत्नी श्वेता पाठक भी थाने पहुंची.

थानाप्रभारी एस.के. सिंह ने मोबाइल में आई वह तसवीर उन्हें दिखाई, जो नौबतपुर थाना पुलिस ने उन्हें भेजी थी. खून में सने फोटो को देखते ही ननद श्वेता पाठक पहचान गई. लाश उन की भाभी रिमझिम चतुर्वेदी की थी. फिर क्या था, रिमझिम की हत्या की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया और रोनापीटना शुरू हो गया.

थानाप्रभारी ने सब से पहले मृतका रिमझिम के फोन नंबर की की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पहले सहदेव महतो मार्ग बोरिंग रोड स्थित रिमझिम के ब्यूटीपार्लर पहुंच कर वहां के कर्मचारी राजू से पूछताछ की.

राजू ने बताया कि शाम करीब 4 बजे मैडम के मोबाइल पर किसी का काल आया. काल रिसीव करने के बाद वह पार्लर से यह कहते हुए निकलीं कि थोड़ी देर बाद लौटती हूं फिर पार्लर बढ़ा कर घर चली जाऊंगी. लेकिन काफी देर बीत जाने के बाद भी मैडम घर नहीं लौटी थी. अब उन की हत्या की खबर आई.

राजू से पूछताछ करने के बाद थानाप्रभारी थाने वापस लौट आए थे.

बहरहाल, एस.के. सिंह ने रिमझिम के फोन की काल डिटेल्स का गहन अध्ययन किया. 23 नवंबर, 2021 की शाम 4 बज कर 23 मिनट पर उन के फोन पर एक काल आई थी. फिर 6 बजे के बाद रिमझिम का फोन बंद हो गया था.

आखिरी काल का नंबर जांचने पर पता चला कि वह नंबर किसी रोहित सिंह के नाम था, जो पटना के पालीगंज थाना क्षेत्र के जलपुरा का रहने वाला था.

पुलिस रोहित सिंह को उस के घर जलपुरा से पूछताछ के लिए श्रीकृष्णपुरी थाने ले आई. थाने ला कर थानाप्रभारी एस.के. सिंह ने उस से कड़ाई से घंटों तक पूछताछ की.

रोहित कोई आदतन अपराधी तो था नहीं जो पुलिस को यहांवहां घुमाता. वह तो पुलिस के सवालों से टूट गया था और रोते हुए कहा, ‘‘क्या करता सर, रिमझिम से मैं हार चुका था. उस से छुटकारा पाना चाहता था. पर उस ने मुझे बरबाद करने की बारबार धमकी दे कर मेरा जीना मुहाल कर दिया था, इसलिए उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई और 4 लाख की सुपारी दे कर उसे मौत के घाट उतरवा दिया.’’

और फिर विस्तार से उस ने पूरी कहानी पुलिस के सामने उगल दी.

हैरान कर देने वाली कहानी सुन कर पुलिस ने दांतों तले अंगुली दबा ली कि मृतका रिमझिम ऐसा भी कर सकती थी. रोहित की निशानदेही पर पुलिस ने रिमझिम चतुर्वेदी हत्याकांड में शामिल 5 और आरोपियों कमल शर्मा, सूरज कुमार, पवन कुमार, रंजीत और राहुल यादव को गिरफ्तार कर लिया. इन सभी में राहुल यादव और रंजीत शार्पशूटर थे. सभी आरोपियों ने अपनेअपने जुर्म कुबूल कर लिए थे.

हत्या में रोहित सिंह का नाम सामने आते ही मृतका के घर वाले हैरान रह गए थे. क्योंकि रोहित सिंह रिमझिम का मुंहबोला भाई था. जिस मुंहबोले भाई की कलाई पर वह 2 साल से राखी बांध रही थी, वही उस का कातिल कैसे हो सकता है, वह यही सोच रहे थे.

हाईप्रोफाइल रिमझिम चतुर्वेदी हत्याकांड का खुलासा होने के बाद 29 नवंबर, 2021 की दोपहर में एसएसपी उपेंद्र कुमार शर्मा ने पुलिस लाइन में एक पत्रकारवार्ता आयोजित कर इस केस के खुलासे की जानकारी दी.

उस के बाद सभी को अदालत के समक्ष पेश किया, जहां से अदालत ने सभी आरोपियों को बेउर जेल भेजने का आदेश दिया.

पुलिस की पूछताछ में इस हत्याकांड की कहानी कुछ ऐसे सामने आई. 40 वर्षीय खूबसूरत रिमझिम चतुर्वेदी मूलरूप से बिहार के बक्सर जिले की रहने वाली थी. संपन्न घराने की रिमझिम ने सन 2001 में डा. विश्वजीत चतुर्वेदी से प्रेम विवाह किया था. विश्वजीत चतुर्वेदी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले थे.

डाक्टरी पढ़ाई के दौरान दोनों के बीच में प्यार हुआ. फिर उन्होंने एकदूसरे को जीवनसाथी बनाने का फैसला कर लिया. इन के इस फैसले पर इन के घर वालों ने भी स्वीकृति की मोहर लगा दी थी.

कालांतर में रिमझिम और विश्वजीत दोनों ही पटना, बिहार आ कर रहने लगे. तब उन की प्रैक्टिस कोई खास नहीं चल रही थी. बाद में दोनों की ही मैडिको केयर की दुकानें अच्छीभली चल निकलीं. शहर के मानेजाने दांत के डाक्टरों में से एक डा. विश्वजीत को गिना जाने लगा था.

उन की पत्नी रिमझिम ने हेल्थकेयर ब्यूटीपार्लर खोल लिया था और दुकान चलाती थी. इस प्रोफेशन में बेशुमार पैसे हैं, वह अच्छी तरह जानती थी.

थोड़ी सी मेहनत के बाद रिमझिम का भी पार्लर अच्छा चल निकला था और उस की उम्मीद से कहीं ज्यादा पैसे घर में आने लगे थे. दोनों पतिपत्नी अपनी कमाई से खुश थे. फिर बाद के दिनों में श्रीकृष्णपुरी इलाके में कृष्णकुंज अपार्टमेंट में रहने लगे थे.

रिमझिम खुद को तंत्र विद्या में पारंगत समझती थी. इस बात को उस की पक्की सहेली पूनम बखूबी जानती थी. बताया जाता है कि रिमझिम ने तंत्रविद्या की शक्ति से कइयों की डूबती नैया पार लगाई थी और उस की बातें जो नहीं मानता था, उसे सबक सिखाने से भी वह नहीं चूकती थी.

बात 2019 की है. पूनम भुटेडा रोहित सिंह नाम के एक युवक को रिमझिम से मिलवाया. बताया कि वह काफी परेशान रहता है. इस की कमाई में कोई बरकत नहीं होती है. कोई ऐसा उपचार कर दो, जिस से इस की माली हालत में सुधार हो जाए और वह भी सुख की नींद सोए.

पूरी तन्मयता के साथ रिमझिम ने रोहित की कहानी सुनी और सहेली पूनम को यकीन दिलाते हुए कहा, ‘‘भरोसा रखो, जब तुम इसे साथ ले कर आई हो तो काम अच्छा क्यों नहीं होगा भला. अब यह मेरा मरीज है, मैं इसे खुद ही देख लूंगी. तुम मुझ पर आंख बंद कर के यकीन कर सकती हो.’’

इस के बाद दोनों हंस पड़ीं. ठगा सा रोहित खिलखिला कर हंसती हुई सुंदर रिमझिम को अपलक निहारता रह गया था. रिमझिम की नजरें रोहित की नजरों से टकराईं तो रोहित ने घबरा कर अपनी नजरें दूसरी ओर घुमा लीं.

रिमझिम को समझते देर न लगी कि इश्किया नजरों से रोहित उसे ही देख रहा था. यह देख हौले से वह मुसकराई. फिर अपनी आपबीती रोहित ने रिमझिम को सुना दी.

करीब 35 वर्षीय रोहित सिंह मूलरूप से पटना के पालीगंज थानाक्षेत्र के जलपुरा का रहने वाला था. उस के परिवार में मांबाप, भाई और बहन थे. बहनों की शादियां हो चुकी थीं. अपने परिवार के साथ वे ससुराल में खुश थीं. खूबसूरत रोहित भी कुछ कम नहीं था. वह मेहनतकश और कर्मठी किस्म का इंसान था.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रोहित ने पटना में ही एक प्राइवेट फर्म में 50 हजार रुपए महीने की नौकरी जौइन कर ली थी.

मनचाही मिली नौकरी से रोहित बेहद खुश था. लेकिन उस की किस्मत में यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकी रह सकी. जिस काम में भी वह हाथ डालता था, काम बनने की बजाय बिगड़ जाता था. जिस से रोहित कर्ज में डूब गया.

ऐसे में उस की प्रेमिका पूनम भुटेडा सहारा बनी थी. 50 हजार रुपयों में से 40 हजार रुपए तो कर्ज के बंट जाते थे, बाकी बचे 10 हजार रुपए में घर चलाना होता था. इस से रोहित बहुत परेशान रहता था.

दरअसल, रोहित ने अपने क्रेडिट पर एक बड़ी रकम बालू कारोबारी अपने बहनोई को दिलवा दी थी. बहनोई का कारोबार रफ्तार भी नहीं पकड़ पाया था कि एक सड़क हादसे में उन की मौत हो गई. बहनोई की मौत से रोहित बुरी तरह टूट गया. इस चिंता में वह डूब गया था कि इतनी बड़ी रकम आखिर वह कहां से भरेगा.

बताया जाता है कि रिमझिम तंत्र साधना के लिए एक कब्रिस्तान में जा कर अपनी कलाई काट कर खून भी चढ़ाती थी. इस बात को उस की सहेली पूनम जानती थी, तभी तो वह अपने प्रेमी रोहित को उस के पास ले कर आई थी.

रिमझिम ने रोहित की परेशानियों को सुन कर उसे चांदी का कड़ा दाहिनी कलाई में धारण करने का मशविरा दिया. साथ ही 4 अलगअलग रंगों की शर्ट भी पहनने की सलाह दी.

रोहित ने रिमझिम के कहे अनुसार काम किया. पहले दाहिनी कलाई में चांदी का कड़ा धारण किया और फिर चारों शर्ट को बारीबारी से पहना. कल तक परेशान रहने वाले रोहित के चेहरे पर कुछ ही दिनों में खुशियां झलकने लगीं.

रिमझिम के टोटके और तंत्रमंत्र ने अपना असर दिखाया. उस दिन से रिमझिम के प्रति रोहित की आस्था बढ़ गई और दोनों के बीच में मधुर संबंध बन गए थे.

भले ही रोहित और रिमझिम के बीच में मधुर संबंध बन गए थे लेकिन पैसों के मामले में रिमझिम किसी से समझौता करने वाली नहीं थी. रोहित से पूजापाठ के नाम पर वह कभी 10 हजार तो कभी 20 हजार तो कभी 40 हजार रुपए मांगती रहती थी. जबकि रोहित की माली हालत पहले से ही खराब थी.

रिमझिम द्वारा आए दिन रुपए मांगने से वह परेशान रहने लगा था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह रुपए कहां से लाए.

रुपयों की मांग से रोहित और रिमझिम के रिश्तों में खटास आने लगी. रोहित अब रिमझिम से हमेशाहमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहता था, इसलिए वह चुपके से उस से अलग हो गया. लेकिन रिमझिम भी कम शातिर नहीं थी. वह रोहित को इतनी आसानी से अपनी गिरफ्त से जाने नहीं देना चाहती थी.

रिमझिम ने उसे धमकाया. उस के देवर की हाल ही में मौत हो गई थी. रिमझिम ने रोहित को बताया कि देवर ने उस की बात नहीं मानी थी तो उस ने उसे दुनिया से ही रुखसत कर दिया. तुम भी गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाओ.

रिमझिम की बात सुन कर रोहित बुरी तरह डर गया. रोहित रिमझिम और उस के काले जादू से छुटकारा पाना चाहता था. पर कैसे? रोहित डिप्रेशन में रहने लगा था.

घटना से कई दिनों पहले की बात है. रोहित चाय की दुकान पर बैठा कुछ सोच रहा था. तभी वहां उस के दोस्त कमल शर्मा, सूरज कुमार और पवन आ गए.

तीनों को अपने पास देख कर रोहित चौंका. फिर कुछ देर तक वे आपस में गप्पें हांकने लगे थे लेकिन रोहित के चेहरे पर वह चमक नहीं थी, जो पहले हुआ करती थी.

कमल शर्मा दोस्त रोहित को देख कर भांप गया था कि जरूर कोई न कोई बात है. फिर उस ने उस की परेशानियों के बारे में पूछा. परेशान रोहित ने आखिर आपबीती दोस्तों से बता दी.

सचमुच मामला काफी गंभीर था और जीवन से जुड़ा था. फिर क्या था? उसी समय रिमझिम का काम तमाम करने का फैसला उन सभी ने ले लिया. इस के लिए कमल शर्मा ने 2 शूटरों रंजीत कुमार और राहुल यादव को 4 लाख की सुपारी दे कर तैयार कर लिया.

रिमझिम की हत्या की सुपारी का पैसा खुद रोहित ने रिमझिम से जमीन खरीदने के बहाने धोखे से लिया था और उसी पैसे से उसी की सुपारी दे डाली थी.

योजना के अनुसार, 23 नवंबर, 2021 की शाम 4 बज कर 23 मिनट पर रोहित ने रिमझिम को फोन कर के पूछा कि वह कहां है. इस पर रिमझिम ने बताया कि पार्लर में है.

राहुल ने कहा, ‘‘एक जमीन देख रखी है. वहां चल कर के देखना कि बिजनैस के लिए अच्छी होगी या नहीं. आप भी साथ चलतीं तो मेरा काम बन जाता.’’

रोहित ने अपनी बात कुछ इस अंदाज में कही कि रिमझिम चाह कर भी मना नहीं कर सकी और साथ चलने के लिए हामी भर दी.

यही रोहित चाहता भी था. उस के जाल में रिमझिम फंस चुकी थी. उसे क्या पता था कि मौत उस का इंतजार कर रही है. ब्यूटीपार्लर से निकली रिमझिम फिर कभी लौट कर नहीं आई.

इधर रिमझिम के हां करते ही रोहित के चेहरे पर कुटिल मुसकान तैर गई. उस ने यह बात दोस्तों को बता दी और योजना पर अमल करने के लिए तैयार हो जाने के लिए कह दिया.

योजना के मुताबिक, रिमझिम को उस के पार्लर से लाने के लिए कमल शर्मा को कार ले कर उस के पास भेजा और दोनों शूटरों रंजीत और राहुल यादव को नौबतपुर थाने के सुनसान पुनपुन सुरक्षा बांध भेज दिया था.

घंटे भर बाद कमल शर्मा रिमझिम को साथ ले कर पुनपुन सुरक्षा बांध के पास पहुंचा, जहां रोहित और उस के 2 दोस्त सूरज व पवन बेसब्री से उस का इंतजार कर रहे थे. उसे देख कर चारों चौंकन्ने हो गए.

नवंबर का महीना था. 5 बजते ही अंधेरा घिर चुका था. मौके पर कई लोगों को देख कर रिमझिम घबरा गई. मानो उस ने खतरे को भांप लिया हो.

रिमझिम ने रोहित से उस जमीन के बारे में पूछा जिसे देखने के लिए उस ने बुलाया था. फिर रोहित ने एक जमीन दिखाई और जांचने के लिए उस की थोड़ी सी मिट्टी उठा कर रिमझिम को दी. मिट्टी देख कर रिमझिम ने कहा कि बिजनैस के लिए अच्छी है.

इतना कह कर वह कार की ओर लौटने लगी. तभी अचानक वहां 2 और युवकों को देख कर वह घबरा गई. दोनों में से एक युवक राहुल यादव के हाथ में पिस्टल थी.

इस से पहले रिमझिम कुछ समझ पाती, पिस्टल उस के मुंह में डाल कर ट्रिगर दबा दिया. गोली गले को चीरती हुई दूसरी ओर से निकल गई. वह जमीन पर धड़ाम से गिर पड़ी. कुछ ही देर में उस का जिस्म ठंडा पड़ने लगा.

रिमझिम मर चुकी थी. शूटर रंजीत और राहुल यादव उसी बाइक पर सवार हो कर फरार हो गए जिस से आए थे. जबकि रोहित सिंह, कमल शर्मा, सूरज कुमार और पवन कमल के कार में सवार हो कर भाग निकले.

आखिर पुलिस ने रिमझिम चतुर्वेदी के कातिलों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. लेकिन मृतका की ननद डा. श्वेता पाठक ने आरोपियों के तंत्रमंत्र और काला जादू वाले कथन को सिरे से नकार दिया.

उस ने कहा कि पूनम ने रिमझिम से 35 लाख 30 हजार रुपए का कर्ज ले लिया था तो वहीं रोहित ने 30 लाख 90 हजार रुपए उधार लिए थे. इस के अलावा अन्य आरोपियों ने भी उस से कर्ज ले रखा था.

श्वेता पाठक ने कहा कि इन लोगों ने रिमझिम से लगभग 83 लाख रुपए कर्ज ले रखा था. रिमझिम इन लोगों से अपना पैसा वापस मांग रही थी. श्वेता ने बताया कि रिमझिम जिस किसी को पैसे देती थी, उस का विवरण अपनी डायरी में दर्ज करती थी और स्टांप पेपर भी तैयार कराती थी. पुलिस श्वेता पाठक के बयान की भी जांच कर रही है.

इस पर पुलिस का कहना है कि डा. श्वेता पाठक ने पुलिस को एक स्टांप पेपर की फोटोकौपी दी थी, जिस पर पूनम भुटेडा को 5 लाख रुपए दिए जाने की बात लिखी थी. लेकिन उस पर रिमझिम के दस्तखत नहीं थे. कथा लिखे जाने तक पुलिस डा. श्वेता पाठक के बयानों की जांच कर रही थी.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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