Download App

म्यूजिक वीडियो में रोमांस करके बुरा फंसे विराट-पाखी, देखें टीजर

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ फेम विराट और पाखी शो में अपने लवलाइफ को लेकर अक्सर सुर्खियों में छाये रहते हैं. शो में नील भट्ट (Neil Bhatt) और ऐश्वर्या शर्मा (Aishwarya Sharma) देवर भाभी का किरदार में है लेकिन असल जिंदगी में वो दोनों पति-पत्नी हैं. शो में किरदार की वजह से अक्सर इन दोनों को ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ता है.

हाल ही में नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा ने ऐलान किया था कि वो दोनों पहली बार किसी म्यूजिक वीडियो में काम करने जा रहे हैं. इस म्यूजिक वीडियो ‘मन जोगिया’ का टीजर भी सामने आया है. इस टीजर में आप देख सकते हैं कि नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा रजवाड़ा शान दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Aishwarya Sharma Bhatt (@aisharma812)

 

विराट-पाखी ने पोस्टर शेयर करके फैंस को अपने गाने का नाम बताया था. इस वीडियो में नील भट्ट  और ऐश्वर्या शर्मा जमकर रोमांस करते नजर आ रहे हैं. नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा का ये गाना 24 अगस्त के रिलीज होने वाला है. इस गाने को यसीर देसाई ने गाया है.

 

कुछ यूजर्स ने नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा को ट्रोल करना शुरू कर दिया है. यूजर्स का कहना है कि नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा ने असल जिंदगी में शादी करके सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ की कहानी को बेकार कर दिया है. तो वहीं कुछ यूजर्स नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा की जोड़ी को शानदार बता रहे है और अपना प्यार लूटा रहे हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Aishwarya Sharma Bhatt (@aisharma812)

 

पंजाबी डिश: घर पर ऐसे बनाएं दाल मखनी

सामग्री

– काले साबुत उरद (500 ग्राम)

– राजमा (50 ग्राम)

– खाना सोडा (1/4 टी स्पून)

– टमाटर (3)

– हरी मिर्च (3-4)

– अदरक (1 टुकड़ा)

– मक्खन (3-4 टी स्पून)

– देशी घी (2 टी स्पून)

– हींग (1-2 टुकड़े)

– 1-2 टी स्पून जीरा

– मेथी (1/4 टी स्पून)

– हल्दी पाउडर (1/4 टी स्पून)

– लाल मिर्च पाउडर (1/4 टी स्पून)

– गरम मसाला (1/4 टी स्पून)

– नमक (स्वादानुसार)

बनाने की विधि

– सबसे पहले जिस दिन आपको दाल मखनी बनानी है उसे एक रात पहले राजमा और उडद को पानी मे     भिगोकर रख दें.

– अगले दिन जब आपको दाल मखनी बनानी है उस भीगे हुए राजमा उडद को साफ पानी से अच्छे से धो लें.

– अब उसे कुकर मे डाले चाहे तो थोड़ा नमक भी डाल सकते है उसमे आवश्यकता अनुसार पानी डाले और    कुकर को गैस पर रख दें.

– जब सिटी आजाए तो प्रेशर निकलने के बाद कुकर खोले और देखे उड़द राजमा अच्छे से पके है या नहीं     ये  भी देख ले की वो नरम हो गए हो हल्का सा मसल दें.

– इतना करने के बाद एक कढ़ाई ले उसमे तेल डालकर उसमे जीरा डालें जब वो गरम हो जाए तब उसमे     प्याज़ डालकर भूनें जब उसका रंग हल्का सुनहरा हो जाए तब उसमे अदरक लहसून हरी मिर्च आदि     डालकर भूनें.

– जब भून जाए तब उसमे हल्दी, धनिया, नमक, गरम मसाला डाले और भुनें.

– अब सारे मसलो को अच्छे से मिलाए और उसमे टमाटर डालें तब तक भुने जब तक टमाटर गल ना जाए.

– जब टमाटर गल जाए और मिश्रण अच्छे से भून जाए तब उसमे उबले हुए उडद और राजमा डाल दें.

– अब इस मिश्रण मे थोड़ा सा पानी डाले और पकाएं.

– जब थोड़ा पक जाए तब इसमें बटर या क्रीम डाले और अच्छे से मिलाएं.

– कुछ देर ऐसे ही छोड़ने के बाद गैस बंद कर दें.

– आपकी गरमा गरम दाल मखनी तैयार है.

फुटबॉल खिलाड़ी शालिनी की अधूरी प्रेम कहानी

सौजन्य: मनोहर कहानियां

फुटबाल की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी शालिनी उर्फ रोली को फुटबाल खिलाड़ी रवि ठाकुर से प्यार हो गया. दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे. इस के बावजूद भी इन दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ कि इस खिलाड़ी की प्रेम कहानी अधूरी ही रह गई ?

20फरवरी, 2022 की शाम. समय यही कोई साढ़े 5-6 बजे के आसपास का रहा होगा. जाड़े की शाम थी. वैसे भी जाड़ों में दिन छोटे और रात बड़ी होती हैं. उस समय भी शाम हो चली थी और शाम के धुंधलके ने प्रयागराज हाईकोर्ट के पास स्थित पोलो ग्राउंड और सड़क को अंधेरे में घेर रखा था.

चूंकि यह सड़क वीआईपी है और लोगों का आवागमन लगा रहता है. खासकर सुबह और शाम को वाक करने वालों का. उसी पोलो ग्राउंड में एक बहुत ही पुराना और गहरा कुआं भी है.

ठंड के बावजूद उस पुराने कुएं से बदबू आ रही थी, जिस की असहनीय दुर्गंध ने वाक करने वालों और राहगीरों को अपने नथुनों पर रुमाल रख कर चलने पर मजबूर कर दिया था.

किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर कुछ लोगों ने पोलो ग्राउंड का चक्कर लगाया कि आखिर माजरा क्या है.

चूंकि आर्मी एरिया में स्थित पोलो ग्राउंड बहुत बड़े दायरे में फैला हुआ है, इसलिए बदबू कहां से आ रही है, यह जानने के लिए लोग सब से पहले कुएं के पास गए. कुआं मुख्य सड़क से सिर्फ 10 कदम की दूरी पर था.

सब से पहले कुएं के पास ही लोगबाग गए. जैसेजैसे लोग कुएं के पास बढ़ते गए, बदबू उतनी ही तेजी से उन के नथुनों में घुस रही थी.

शक होने पर वहां मौजूद एक वकील साहब ने फौरन 112 नंबर व संबंधित थाना सिविल लाइंस को सूचना दी कि कुएं से लगातार असहनीय दुर्गंध उठ रही है. जरूर उस में किसी की लाश हो सकती है.

हमेशा उस कुएं से लाश ही बरामद की गई है, इसलिए उसे मौत का कुआं ही कहते थे. इस बात में या यह कहनेसमझने में जरा भी समय नहीं लगा कि उस कुएं में किसी का काम तमाम कर के उस की लाश फेंक दी गई है.

बहरहाल, सूचना मिलते ही प्रयागराज के थाना सिविल लाइंस की पुलिस और गश्ती गाड़ी पोलो ग्राउंड के अंदर घुसे और जब कुएं के अंदर झांका तो पाया कि एक सफेद रंग का बोरा उस कुएं में (लगभग सूख चुका है कुआं फिर थोड़ाबहुत पानी उस में अब भी हमेशा रहता है) पड़ा था. कुछ ही देर में एसएसपी अजय कुमार और सीओ संतोष सिंह भी वहां पहुंच गए.

कुआं काफी गहरा था. बोरे को निकालने के लिए इंसपेक्टर वीरेंद्र यादव ने फायर ब्रिगेड को फोन कर दिया. फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने कुएं के अंदर एक लंबी सीढ़ी डाली और अपनेअपने मुंह ढक कर उस के अंदर उतरे. जैसेतैसे बोरे को कुएं से बाहर लाया गया. उसे उठाने में जवानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि बोरा काफी वजनी था.

बोरे में निकली लड़की की लाश

जब उस बोरे का मुंह खोला तो उस के अंदर एक युवती की लाश देख कर लोग दंग रह गए. अब जबकि बोरे को कुएं से निकाला जा चुका था तो उस में से और भी तेजी के साथ दुर्गंध चारों तरफ फैलने लगी थी.

युवती ने जींस टीशर्ट और पैरों में जूते पहन रखे थे. उस की लाश देख कर पुलिस ने अंदाजा लगाया कि उस की हत्या कोई एक हफ्ता पहले कर के उस की लाश को ठिकाने लगाने के लिए हाथपैर मोड़ कर उसे बोरे में ठूंसठूंस कर भरा गया था. उस के बाद सुतली और सूजे की मदद से बोरे को सिल कर कुएं में फेंका गया होगा.

पानी में पड़ेपड़े उस युवती की लाश लगभग फूल चुकी थी. चेहरा भी पहचानने में नहीं आ रहा था. सिविल लाइंस पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त करने को कहा, लेकिन वहां मौजूद कोई भी शख्स उसे पहचान पाने में असमर्थ था.

लड़की कौन थी? कहां की रहने वाली थी? यह सब जानने के लिए जब महिला पुलिस ने उस के कपड़ों की तलाशी ली तो उस में कुछ भी नहीं मिला. हां, मृतका की बाईं कलाई पर एक टैटू बना हुआ था और उस पर रवि नाम लिखा हुआ था.

बहरहाल, लाश का पंचनामा भरने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. एसएसपी अजय कुमार ने हत्या के इस मामले को सुलझाने के लिए सीओ संतोष सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में थाना वीरेंद्र सिंह यादव, एसएसआई इंद्रदत्त द्विवेदी, एसआई वजीउल्लाह खान, अरविंद कुमार कुशवाहा, कांस्टेबल राहुल कुमार गोला, राहुल कुमार, महिला कांस्टेबल इंदु आदि को शामिल किया.

अगले दिन कुएं में मिली जवान युवती की लाश की खबर शहर के सभी अखबारों में छपी और साथ ही उस की कलाई पर बने टैटू पर रवि नाम गुदे होने का जिक्र किया गया तो पुलिस को उस की शिनाख्त के लिए ज्यादा भागदौड़ की जरूरत नहीं पड़ी.

मृतका निकली राष्ट्रीय स्तर की फुटबाल खिलाड़ी

प्रयागराज के ही थाना शिवकुटी के मोहल्ला शिलाखाना में रहने वाले राजेंद्र प्रसाद ने अगले दिन यानी 21 अप्रैल को जब अखबार में यह पढ़ा कि एक जवान युवती की डेडबौडी पोलो ग्राउंड के अंदर पुराने कुएं से थाना सिविल लाइंस पुलिस ने बरामद की है, उस के हाथ पर बने टैटू पर ‘रवि’ नाम लिखा हुआ है तो वह थाने पहुंचे और इंसपेक्टर वीरेंद्र यादव से मिले.

वीरेंद्र यादव से उन्होंने डेडबौडी देखने की इच्छा जाहिर की तो बिना एक पल गंवाए इंसपेक्टर ने उन्हें अपने मातहतों के साथ पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया.

लाश के चेहरे से जब कफन हटाया गया तो उस के पिता और परिजन फफकफफक कर रोने लगे. शव की शिनाख्त हो चुकी थी. मृतका का नाम शालिनी धुरिया उर्फ रोली था. उस के पिता राजेंद्र प्रसाद, मां व भाईबहन ने उसे पहचान लिया.

घर वाले यह जान कर हैरान थे कि शालिनी तो गुड़गांव में नौकरी कर रही थी तो प्रयागराज कब आ गई.

शालिनी पूरे परिवार की लाडली थी. उस की हत्या से घर वालों का रोरो कर बुरा हाल था. पेशे से ईरिक्शा ड्राइवर राजेंद्र प्रसाद के 4 बच्चों में सब से बड़ी बेटी श्रद्धा, उस से छोटी शालिनी उर्फ रोली व उस से छोटे भाई बहन अंकित और स्वाति थे.

बहरहाल, उस के अंतिम संस्कार के बाद घर वालों से, खासकर शालिनी के पिता से जब यह पूछा गया कि उस की कलाई पर जो रवि नाम लिखा हुआ है, वह कौन है? शालिनी का उस से क्या संबंध है? शालिनी यहां से पहले कहां रहती थी?

पुलिस को इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी था, तभी वह शालिनी के हत्यारों तक पहुंच सकती थी. पूछताछ के दौरान शालिनी के पिता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि रवि उन की बेटी का दोस्त है.

‘‘उस का आप के घर भी आनाजाना था?’’ इंसपेक्टर वीरेंद्र यादव ने पूछा.

उन्होंने बताया कि शालिनी बहुत होनहार थी. वह राष्ट्रीय स्तर की फुटबाल प्लेयर थी. परिवार की माली हालत को देखते हुए 2021 में दूसरे लौकडाउन के खत्म होने के बाद वह नवंबर महीने में गुड़गांव चली गई थी. और एक प्राइवेट कंपनी में जौब करने लगी थी.

शालिनी ने एलडीसी कालेज से मार्केटिंग का कोर्स किया हुआ था. एक अच्छी फुटबाल खिलाड़ी होने के साथसाथ उसे मार्केटिंग का भी अच्छा अनुभव था. इसलिए उस की नौकरी लगने में कोई परेशानी नहीं हुई. दिल्ली में शालिनी किराए का कमरा ले कर रहती थी.

फरवरी में उस की मकान मालकिन ने हमारे घर फोन कर जब पूछा कि शालिनी प्रयागराज पहुंची कि नहीं तो हम सन्न रह गए. क्योंकि मकान मालकिन ने बताया कि शालिनी 13 फरवरी, 2022 को ही प्रयागराज के लिए रवाना हो गई थी.

पिता ने लिखाई बौयफ्रैंड के खिलाफ रिपोर्ट

जब हम लोगों ने यह सुना तो आश्चर्यचकित रह गए क्योंकि शालिनी ने कुछ ही दिनों पहले फोन कर के हमें बताया था कि वह अभी नहीं आ पाएगी. अभी उसे छुट्टी नहीं मिल रही है. होली के अवसर पर वह प्रयागराज आएगी. मकान मालकिन के अनुसार उसे अब तक दिल्ली वापस आ जाना चाहिए था. तभी से हम लोग परेशान थे.

इस के बाद उस के मोबाइल पर कई बार काल की, लेकिन हर बार उस का मोबाइल स्विच्ड औफ मिला. जब शालिनी की मकान मालकिन ने हमें बताया कि वह कह कर निकली थी कि प्रयागराज अपने घर जा रही है और 2-4 दिन में वापस आ जाएगी.

तभी किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर बिना पुलिस को सूचना दिए उस की खोजबीन कर रहे थे. उस की तलाश में शालिनी का प्रेमी रवि भी साथसाथ रातदिन  उन के साथ एक किए हुए था.

शालिनी का मोबाइल भी स्विच्ड औफ था, जिस से हमारी परेशानी और भी बढ़ गई थी. पूरा परिवार उस की चिंता कर रहा था और जब वह हमें मिली भी तो लाश के रूप में.

इतना कह कर राजेंद्र प्रसाद रोने लगे. राजेंद्र प्रसाद से रवि के खिलाफ तहरीर ले कर पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू कर दी.

आगे की काररवाई के लिए सिविल लाइंस थाना पुलिस को कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि शालिनी का प्रेमी जोकि रेलवे स्टाफ क्वार्टर की लोको कालोनी में अपने बड़े भाई के साथ रहता था. उस समय वह थाने में ही मौजूद था. शालिनी के परिवार के साथ उस की खोजबीन का नाटक वह शुरू से ही कर रहा था.

रवि ठाकुर को फौरन पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया और पूछताछ शुरू कर दी. शुरुआत में उस ने पुलिस को काफी बहकाने और भटकाने की कोशिश की लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो उस ने शालिनी धुरिया की हत्या कर के लाश को बोरे में भर कर कुएं में फेंकने से ले कर सभी जुर्म स्वीकार कर लिए.

वैलेंटाइंस डे पर मिलने इतनी दूर से आई शालिनी की हत्या की जो कहानी सामने उभर कर आई, वह इस प्रकार निकली—

शालिनी धुरिया उर्फ रोली और उस का प्रेमी रवि ठाकुर दोनों ही फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी थे. शालिनी के कोच अनिल सोनकर ने ‘मनोहर कहानियां’ को बताया कि शालिनी जब महज 6-7 साल की थी, तभी से उस का रुझान फुटबाल की तरफ था. सदर बाजार फुटबाल ग्राउंड में वह फुटबाल की प्रैक्टिस करती थी.

शालिनी एक अच्छी फुटबाल खिलाड़ी थी. गजब का स्टैमिना था उस के अंदर.  बहुत ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी थी वह. तपती दोपहर में भी वह बड़ी ही मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ इतने बड़े फुटबाल मैदान में अकेले दम पर बाउंड्री पर चूने का छिड़काव करती थी.

अपनी मेहनत और लगन से शालिनी धुरिया ने महिला फुटबाल खिलाड़ी के रूप में बेहतरीन खिलाड़ी की छवि बना ली थी. अपनी बेहतरीन परफार्मेंस के चलते स्टेट व नैशनल लेवल पर शालिनी ने सिर्फ उत्तर प्रदेश के जिलों में, बल्कि गोवा, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, समेत विभिन्न राज्यों व जिलों में प्रयागराज जिले का तो नाम रोशन किया ही, साथ ही सदर बाजार फुटबाल एकेडमी का भी परचम फहराया था. शालिनी ने खेल के साथसाथ अपनी पढ़ाईलिखाई भी जारी रखी थी और गंगापार इलाके से बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद पर्ल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, गुरुग्राम में नवंबर 2021 से जौब करने लगी थी.

खेल के दौरान ही शालिनी को रवि ठाकुर नाम के फुटबाल खिलाड़ी से प्यार हो गया था. रवि मूलरूप से बिहार के जिला जहानाबाद के गांव मकदूमपुर का रहने वाला था.

उस के पिता दिनेश सिंह रेलवे में नौकरी करते थे. उन की पोस्टिंग प्रयागराज में ही थी, इसलिए सिविल लाइंस की रेलवे कालोनी में उन्हें क्वार्टर मिला हुआ था. उन्होंने करीब 5-6 साल पहले वीआरएस ले लिया और अपनी जगह अपने बड़े बेटे दिनेश ठाकुर को नौकरी पर लगवा दिया था.

रवि इलाहाबाद स्पोर्टिंग फुटबाल एकेडमी का होनहार खिलाड़ी था. वह स्कूल नैशनल से अंडर 17  के तहत सीनियर स्टेट चैंपियनशिप खिलाड़ी भी रहा है.

खेल के साथ वह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीए सेकेंड ईयर की पढ़ाई भी कर रहा था.

शालिनी और रवि की प्रेम कहानी की शुरुआत लगभग 7-8 साल पहले खेल के दौरान मैदान में हुई थी.

दोनों ही फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी थे, इसलिए प्रेम परवान चढ़ने में समय नहीं लगा. दोनों के पास एकदूसरे से मिलने का भरपूर समय था. खेल के बहाने रोज मुलाकात स्वाभाविक थी.

इन की प्रेम कहानी के बारे में दोनों के ही परिजन भलीभांति परिचित थे. शालिनी तो रवि के प्यार में ऐसी दीवानी हो गई थी कि उस ने अपने हाथ पर प्रेमी रवि का नाम तक गुदवा लिया था. इस तरह इन का प्यार परवान चढ़ता गया.

लेकिन एक दिन रवि की थोड़ी सी गलतफहमी ने सब कुछ उजाड़ दिया. जब रवि को हिरासत में लिया तो पूछताछ करने पर रवि ने पुलिस को बताया, ‘‘हां सर, मैं ने उस चुड़ैल का गला दबा कर हत्या की है. वह थी ही इसी लायक. मेरी सच्ची मोहब्बत का उस ने गलत फायदा उठाया था बेवफा कहीं की. मोहब्बत तो बेपनाह मैं उस से करता था और उस के मर जाने के बाद भी करता हूं.

‘‘लेकिन क्या करूं उस के बिगड़ैल रवैए और हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल की चाह ने मुझे उस की हत्या करने पर मजबूर कर दिया. हालांकि मैं ऐसा नहीं करना चाहता था लेकिन उस के थप्पड़ से मैं इतना आहत हो गया था कि बरदाश्त नहीं कर पाया. रोक नहीं सका खुद को और…’’

रवि पुलिस को बतातेबताते अतीत के झरोखे में चला गया.

उस ने बताया कि अभी हफ्ता भर पहले की ही बात है. उस ने मुझे फोन कर के कहा कि वह मुझ से वैलेंटाइंस डे पर मिलने प्रयागराज आ रही है.

मैं ने उस से चहकते हुए पूछा, ‘‘सच बताओ रोली (शालिनी को रवि प्यार से रोली कहता था), मजाक मत करो. क्या सच में तुम मुझ से मिलने वैलेंटाइंस डे पर प्रयागराज आओगी? इतने दिनों बाद तुम ने फोन किया है, मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है कि मेरी तुम से बात हो रही है.’’

‘‘अरे बुद्धू, मैं तुम्हारी रोली ही हूं और तुम्हीं से बात कर रही हूं. तुम किसी भूत या चुड़ैल से बात नहीं कर रहे हो. यकीन नहीं आ रहा तो अपने कान में कस कर चिकोटी काट कर देखो पता चल जाएगा.’’ इतना कह कर  शालिनी बात करतेकरते हंसने लगी.

‘‘हांहां, चलो, यकीन हो गया. अच्छा, अब यह बताओ कि गुड़गांव से तुम आ कब रही हो?’’ रवि ने उत्सुकता से पूछा.

‘‘सुनो, मैं 14 फरवरी को प्रयागराज पहुंच जाऊंगी. उस दिन हम दोनों खूब मौजमस्ती और सैरसपाटा करेंगे. उस के बाद मैं वापस दिल्ली चली जाऊंगी.’’ शालिनी ने कहा.

‘‘क्यों, क्या तुम अपने घर नहीं जाओगी?’’

‘‘अरे नहीं बाबा. और यह बात तुम मेरे घर पर पापा या दीदी किसी से भी नहीं बताना क्योंकि मैं ने पापा से पहले ही कह रखा है कि मैं होली पर घर आऊंगी. मुझे इधर छुट्टी नहीं मिल रही है. समझे?’’ शालिनी ने बताया.

‘‘हां, समझा. ठीक है, मुझे तुम्हारे आने का बेसब्री से इंतजार है.’’ रवि बोला.

इस के बाद हम दोनों के बीच काफी देर तक बातें होती रहीं. अंतत: वह घड़ी भी आ गई जब 14 फरवरी की शाम शालिनी प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफार्म पर उतरी. उस के आने से पहले ही रवि ने 10 हजार रुपए का मोबाइल बतौर सरप्राइज गिफ्ट खरीद रखा था.

वह शालिनी को वैलेंटाइंस डे पर मोबाइल उपहार में देना चाहता था ताकि उस की प्रेमिका का प्यार और ज्यादा बढ़े.

14 फरवरी को तय समय पर शालिनी का प्रेमी रवि ठाकुर स्टेशन पहुंचा. उसे बाइक पर बिठाया और सीधे रेलवे स्टाफ की लोको कालोनी स्थित अपने आवास पर ले आया.

यहां गौरतलब है कि शालिनी धुरिया को 13 फरवरी को ही प्रयागराज आना था लेकिन ट्रेन मिस हो जाने के कारण वह 14 फरवरी को वहां पहुंची थी.

क्या शालिनी के और भी बौयफ्रैंड थे?

बहरहाल, जब रवि उसे ले कर अपने कमरे पर पहुंचा तो उस समय उस के घर वाले टीवी देख रहे थे. शालिनी फ्रैश होने चली गई.

जब वह फ्रैश हो रही थी तो रवि ने शक के आधार पर उस का मोबाइल चैक किया. उसे शक था कि उस की प्रेमिका दिल्ली जा कर बदल गई है. उस के कई लोगों के साथ संबंध बन गए होंगे.

मोबाइल की गैलरी में फोटो में शालिनी कई लड़कों के साथ स्टाइल में दिखी. फिर क्या था रवि को उस पर गहरा शक हो गया.

शालिनी जब बाथरूम से निकली तो रवि ने उस से पूछा, ‘‘रोली, तू दिल्ली जा कर बहुत बदल गई है. बेवफा है तू. अब तू पहले वाली रोली नहीं रही.’’

‘‘जुबान संभाल कर बात करो रवि, अगर मैं तुम से सच्चा प्यार न करती तो इतनी दूर तुम से मिलने नहीं आती. अपनी औकात में रह कर बात करो. क्या सबूत है तुम्हारे पास जो मुझ पर इतना बड़ा इलजाम लगा रहे हो.’’

‘‘अरे छिनाल, शरम कर जरा. सबूत है तेरा ये मोबाइल. इस में तेरे यारों के साथ खिंचवाई गई फोटो.’’ रवि गुस्से में बोला.

‘‘क्या कहा छिनाल? तेरी हिम्मत कैसे हुई, यह कहने की?’’

‘‘एक बार नहीं सौ बार कहूंगा मादर…कहीं कहीं.’’ रवि ने उसे गाली दी.

अब शालिनी से सहा नहीं गया. उस ने एक जोरदार थप्पड़ रवि के गाल पर जड़ दिया. रवि तिलमिला उठा. गुस्से में गाली देते हुए बोला, ‘‘तेरी मां की… साली, तेरी इतनी हिम्मत कि मुझे थप्पड़ मारा…’’

शालिनी भी आपे से बाहर थी, ‘‘और नहीं तो क्या तेरी पूजा करूं. तूने मुझे समझ क्या रखा है अपनी रखैल? साले, अपने भाई के टुकड़ों पर पलने वाला मुझ पर इलजाम लगाता है. मैं इतनी बड़ी कंपनी में काम कर रही हूं. मेरा सभी के साथ उठनाबैठना, खानापीना, घूमनाफिरना है तो सब क्या मेरे यार हो गए. मैं पागल हूं जो इतनी दूर तुझ से मिलने यहां आई.’’

‘‘पता नहीं किसकिस को बयाना दे रखा होगा तूने. कौन जाने क्या खेल खेल रही है मेरे साथ फुटबाल की तरह.’’

रवि का इतना कहना था कि शालिनी ने फिर उसे झन्नाटेदार तमाचा जड़ दिया. फिर क्या था दोनों के बीच ठेठ इलाहाबादी बोली में गालीगलौज और मारपीट होने लगी.

‘‘मादर…बहुत हाथ उठने लगे हैं तेरे. तू ऐसे नहीं मानेगी…’’ कह कर रवि ने जोर से शालिनी की गरदन पकड़ ली.

शालिनी गरदन छुड़ाने के लिए तड़पने लगी लेकिन अब रवि के ऊपर शैतान सवार हो चुका था. थोड़ी देर में शालिनी के प्राणपखेरू उड़ चुके थे. गला घोटे जाने से उस की जीभ और आंखें दोनों बाहर आ गई थीं.

रवि ठाकुर को जब होश आया तब तक काफी देर हो चुकी थी. अब उसे लाश ठिकाने लगानी थी.

उस ने अकेले ही शालिनी के शव को बोरे में भरा. सूजे और सुतली से बोरे का मुंह सिला और अकेले ही रात के 9 बजे उस की डेडबौडी बाइक पर रख कर पोलो ग्राउंड वाले पुराने कुएं में फेंक आया.

सब कुछ अकेले ही कर डाला उस ने और किसी को पता तक नहीं चला? सेना की गश्ती गाड़ी, क्यूआरटी और हाईकोर्ट पर हमेशा चैकिंग में लगे रहने वाले पुलिस के जवान सभी नदारद रहे उस समय?

न शालिनी की लड़ाईझगड़े के दौरान किसी ने चीखें सुनीं? जबकि पीछे वाले कमरे में रवि के घर वाले मौजूद थे. उन्हें भी इस की जरा भी भनक नहीं लगी? सवाल बहुत हैं मगर कोई फायदा नहीं.

इंसपेक्टर वीरेंद्र कुमार यादव ने रवि की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त मोबाइल और आलाकत्ल बरामद कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

अनवांटेड प्रैग्नैंसी के बारे में जानकारी दें

सवाल

मैं 30 वर्षीय वर्किंग गर्ल हूं और मैं और मेरा बौयफ्रैंड लिवइन में रहते हैं. वैसे मुझे अपने बौयफ्रैंड पर पूरा यकीन है, उस का मेरे सिवा किसी और के साथ कोई रिलेशन नहीं है, लेकिन सैक्स करते हुए मैं कभी भी उसे लापरवाही नहीं बरतने देती. हम सेफ सैक्स ही करते हैं लेकिन मुझे सेफ सैक्स के बारे में पूरी जानकारी नहीं है. कंडोम के अलावा और क्याक्या तरीके होते हैं, बताने की कृपा करें.

जवाब

आप सैक्स करते समय कंडोम का इस्तेमाल करते हैं तो यह सेफ सैक्स का बेहतरीन उपाय है. कंडोम अनवांटेड प्रैग्नैंसी से बचाता है और कई सैक्सुअल डिजीज से भी बचाव करता है. लुब्रिकेटेड कंडोम का इस्तेमाल अच्छा रहता है क्योंकि इस के फटने का खतरा नहीं रहता.

हार्मोनल कौंट्रासैप्शन के लिए कौंट्रासैप्टिव इंजैक्शन लगवा सकती हैं. यह 3 महीने में एक बार लगाया जाता है. रोजाना एक गर्भनिरोधक गोली का सेवन कर सकती हैं लेकिन गायनीकोलौजिस्ट से पहले परामर्श ले लें.

इमरजैंसी कौट्रासैप्टिव पिल का सेवन केवल इमरजैंसी में ही करें क्योंकि इन का नियमित रूप से सेवन नुकसानदायक हो सकता है. असुरक्षित सैक्स के 72 घंटों यानी 3 दिनों के अंदर इस का इस्तेमाल प्रभावकारी होता है.

पीरियड्स के दौरान सैक्स करना सेफ माना जाता है क्योंकि इस दौरान कंसीव करने के चांस कम होते हैं, लेकिन इस के लिए अपने पीरियड्स साइकल को सम?ाते हुए दिनों को कैलकुलेट कर के सैक्स करने से ही अनवांटेड प्रैग्नैंसी से सुरक्षित रह सकती हैं.

हमेशा याद रखें कि सैक्सुअल रिलेशनशिप में अपने पार्टनर के साथ ईमानदार रह कर न केवल आप अपनी सैक्सुअल लाइफ अच्छी तरह से एंजौय कर सकते हैं, बल्कि सैक्सुअल डिजीज के खतरों को भी कम कर सकते हैं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

हम तीन: आखिर क्या हुआ था उन 3 सहेलियों के साथ?

क्यों आते हैं दिन में सपने

हमारा मन विचारों की बौछार करता रहता है. हम एक के बाद दूसरा सपना दिन में ही देखने लगते हैं. इस के बावजूद डेड्रीमिंग को परिभाषित करना कठिन है. तात्कालिक स्थिति से इतर जो भी विचार मन में आते हैं, मनोवैज्ञानिक उन्हें दिवास्वप्न या डेड्रीमिंग कहते हैं.

मन का भटकना दिन में सपने देखने का प्रमुख रूप है. हम रोज, कुछ देर के लिए ही सही, जो कर रहे होते हैं उस से भिन्न दिशा में खो जाते हैं. यह खोना अपनी कल्पना में रमना भी हो सकता है और स्मृतियों में गोता लगाना भी. यह तब भी होता है जब हम पढ़ या सुन रहे होते हैं. यह अकस्मात खो जाना अपने ही भीतर होता है, जिस में हम अपनेआप को ही देखते हैं और एक नई ताकत से भर उठते हैं.

कोई कार्य करते समय, जिस में अधिक सावधानी की आवश्यकता होती है, हमारा मन पुरानी बातों की छानबीन में खो जाता है. हम किसी इंटरव्यू की कल्पना करते हैं, किसी खास तारीख की कल्पना करते हैं और उस अनुभव में खो जाते हैं जो घटित हो चुका है या होने वाला है. दिवास्वप्न में अकसर मनोभावों का योग होता है. कभी वे सुखद होते हैं, कभी डरावने, कभी गुस्सा दिलाने वाले.

ज्यादातर दिवास्वप्न मामूली चीजों के बारे में होते हैं, जैसे किराया देना, बाल कटवाना, सहकर्मी का व्यवहार, किसी खास दोस्त को ले कर किसी समस्या का समाधान आदि. इस किस्म के विचारों का तांता लगा ही रहता है. हम दिवास्वप्न कभी भी देख सकते हैं. जब दाढ़ी बनवा रहे हों, कोई योजना बना रहे हों या चिंतन कर रहे हों. हमारे दिवास्वप्न आगे की चीजों की याद दिलाने का भी काम करते हैं.

फ्रायड ने दिवास्वप्न को फैंटेसी माना है. उन का कहना है कि हर आदमी को फैंटेसी की आवश्यकता पड़ती है. मनुष्य को आनंद, जिस में सैक्स एंजौयमैंट भी शामिल है, को छोड़ना पड़ता है. किंतु यह त्याग उसे बुरा लगता है. सो, उसे उस के कम्पंसेशन की आवश्यकता होती है. इस हेतु व्यक्ति एक मैंटल ऐक्टिविटी डैवलप कर लेता है, जिस से आनंद के छोड़े गए सोर्स बने रहते हैं.

वास्तविक आनंद की प्राप्ति में बाधा देख कर मनुष्य मानसिक आनंद की सृष्टि करना चाहता है. यह मानसिक आनंद फैंटेसी से संभव होता है. जो वास्तविक जीवन में प्राप्त नहीं होता, वह फैंटेसी से प्राप्त हो जाता है. यह फैंटेसी हमारे आवेगों और इच्छाओं के नैराश्य की क्षतिपूर्ति करती है. यह क्षतिपूर्ति एक प्रकार का दिवास्वप्न यानी डे ड्रीमिंग है.

ज्यादातर दिवास्वप्न अपनेआप घटित होते हैं. किंतु कभीकभी आदमी जानबू?ा कर भी दिवास्वप्न देखता है. ऐसे दिवास्वप्नों द्वारा वह स्वयं को मजबूत बनाता है. लड़ाई में जाते समय सैनिक दुश्मन के कुकृत्यों की कल्पना कर अपनेआप को उत्तेजित करता है. उबा देने वाले काम करने वाला कारीगर दिवास्वप्न का जाल बुनता है. दिवास्वप्न व्यक्तियों में भिन्न होते हैं पर प्रकारों में समानता भी होती है. दोतिहाई दिवास्वप्न व्यक्ति की तात्कालिक जरूरतों या कामों से संबंधित होते हैं. बाकी का संबंध रोजमर्रा के कामों, भूत, भविष्य तथा रिश्तों से होता है.

दिवास्वप्नों के बारे में आम धारणा यह है कि वे रोमांटिक, कामुक या हिंसक होते हैं, पर ऐसा है नहीं. अध्ययनों से पता चला है कि इस कोटि के दिवास्वप्न मात्र 5 प्रतिशत होते हैं. डेड्रीमिंग एक व्यक्ति के अनेक पहलू दर्शाता है. जो लोग डरावने सपने देखते हैं, वास्तविक जीवन में उन के अनुभव नकारात्मक होते हैं. ऐसे लोगों को अनिद्रा रोग भी हो जाया करता है. सकारात्मक अनुभव सुखद डेड्रीम के जनक होते हैं. स्त्रीपुरुषों के डेड्रीम में एकजैसी बारंबारता होती है.

हम दिन में सपने क्यों देखने लगते हैं और उन की विषयवस्तु क्या होती है, इस पर अभी भी प्रश्नचिह्न लगा है. अब तक हुए अध्ययनों से पता चला है कि व्यक्ति उन्हीं मुद्दों से संबंधित डेड्रीम करता है जिन का सरोकार तात्कालिक बातों से होता है. नैतिक मूल्य, अपेक्षाएं, चेतावनियां, कुंठाएं जैसी स्थितियां हमारा ध्यान सब से ज्यादा आकर्षित करती हैं. लगता है जैसे मनोभाव ही वह सूत्र है जो हमारे विचारों को प्रभावित करता है.

मनोभावों को उत्तेजित करने वाले शब्दों या घटनाओं का प्रभाव हमारी मानसिक प्रक्रिया पर सर्वाधिक पड़ता है. एक तरह से मनोभावों और तात्कालिक सरोकारों का अंत: संबंध अत्यधिक है. इन्हीं का संबंध दिन के सपनों से भी है. हमारी खुशियां, भय, क्रोध, निराशा, उदासी आदि लक्ष्य प्राप्ति या अप्राप्ति से उत्पन्न प्रतिक्रियाएं ही हैं. लक्ष्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता तथा उसे पाना हमारे मनोभावों को नियंत्रित करता है और इसी माध्यम से हमारे सपने भी नियंत्रित होते हैं.

दिवास्वप्न कोई रोग नहीं है. अनुसंधान बताते हैं कि डेड्रीम के बारे में पुरानी धारणाएं पूर्णतया गलत हैं और ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता जिस से लगे कि दिन में सपने देखने से व्यक्ति खंडित मानसिकता वाला हो सकता है या उस में मनोवैज्ञानिक उल?ानें पैदा हो सकती हैं.

ज्यादातर अध्ययन बताते हैं कि दिन में सपने देखने से खंडित मन व्यक्ति या अन्य व्यक्तियों में कोई अंतर नहीं आता. इस के विपरीत, ऐसे प्रमाण अवश्य मिलते हैं कि जो लोग स्वप्न चित्रों यानी फैंटेसी में रुचि रखते हैं, उन में विशेष मानसिक क्षमता होती है. जो बच्चे आमतौर पर कल्पनाशील होते हैं वे अधिक सजग आकर्षक, कुंठामुक्त, निर्भय और विनोदप्रिय देखने में आते हैं. अकसर मुग्धकारी रात को सपने देखने वाले लोग उन लोगों से बेहतर पाए गए हैं जो दिन में कम सपने देखते हैं.

इस प्रकार दिवास्वप्न अपनेआप में बुरे नहीं होते हैं, पर कुछ मामलों में वे बुराई का आधार जरूर बन सकते हैं. भय की मानसिकता वाला व्यक्ति जब सड़क दुर्घटना की कल्पना करता है तो दिन के सपने में अपनेआप को दुर्घटनाग्रस्त पा कर वह अपने भय को और पुख्ता बना सकता है. अपनी विपत्तियों की कल्पना करते रहने वाला विषाद अवसाद की मानसिकता से ग्रस्त आदमी दिवास्वप्नों द्वारा अपना विषाद और अधिक बढ़ा सकता है.

जो लोग औसत से ज्यादा दिवास्वप्न देखते हैं, अकसर औसत से ज्यादा मानसिक ताकत वाले होते हैं और वे संकेत देते हैं कि दिन में सपने देखना वास्तव में लाभदायक हो सकता है. तात्कालिक बातें याद आना, समस्या का पुनरीक्षण, अतीत से सीखना और भावी व्यवहार में परिष्कार की पूर्व तैयारी दिवास्वप्न द्वारा होती है. अनेक साहित्यिक कृतियों की रचना या गणित की गुत्थियां सुल?ाने का रास्ता दिवास्वप्नों या दिवास्वप्न जैसी स्थितियों से हासिल हुआ है.

मनोचिकित्सकों तथा व्यवहारविदों ने निदेशित दिवास्वप्नों द्वारा अपने मरीजों की व्यक्तिगत समस्याओं का निदान किया है. मानसिक कल्पना के माध्यम से व्यक्तिगत अंतर्दिवष्टि प्राप्त की जा सकती है. ऐसे भी प्रमाण मिले हैं कि स्वप्न चित्र में शारीरिक या सामाजिक कुशलता के अभ्यास द्वारा वास्तविक कार्य, व्यापार में सुधार लाया जा सकता है.

हमारे मस्तिष्क का गठन ही ऐसा है कि हम दिन में सपने देखते हैं, काल्पनिक चित्र निर्मित करते हैं जो हमारे कार्यरत आंतरिक मनोवैज्ञानिक पहलुओं को प्रतिबिंबित करते हैं. जब हम अपने मन में दृश्य चित्रों का निर्माण करते हैं तो हम उन्हीं दिमागी प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं जिन से अपने आसपास की दुनिया का अनुभव करते हैं. गतिशील कल्पना चित्रों में दिमाग और शरीर की उन्हीं प्रक्रियाओं का उपयोग होता है जिन का संबंध दिन में सपने देखने वाले की अभिप्रेरणा की स्थितियों से भी होता है.

दिन में सपने देखना दिमाग की प्राकृतिक शक्ति का फलदायी उपयोग करना है. ये अकसर अपनेआप शुरू हो जाते हैं और हमारा दिमाग जो हम कर रहे होते हैं उस से हमारा ध्यान हटा कर, स्वचालित रूप से तात्कालिक बातों की ओर चला जाता है. दिवास्वप्न हमारे मन को सक्रिय बनाए रखते हैं और तालमेल व सृजन में सहायता करते हैं.

मैं ताउम्र अविवाहित रहना चाहता हू्ं, क्या मेरा यह फैसला सही है?

सवाल

मैं 28 वर्षीय अविवाहित युवक हूं. मातापिता दोनों इस दुनिया में नहीं हैं. हम 2 भाई हैं. मैं छोटा हूं और बड़े भाई का विवाह हो चुका है. वे अपने परिवार के साथ खुश हैं. वे मुझे भी शादी करने के लिए कहते हैं. लेकिन मैं शादी नहीं करना चाहता. इस के पीछे एक वजह है. जब मैं स्कूल में था तो पड़ोस की एक लड़की से प्यार करने लगा था, वह भी मुझे चाहती थी. हम दोनों के परिवार वालों को भी हमारे प्यार के बारे में पता था. लेकिन फिर भी लड़की के परिवार वालों ने उस की शादी कहीं और कर दी. मुझे यह जान कर बहुत दुख हुआ. लेकिन मैं ने अपने कैरियर पर ध्यान दिया और आज मैं नेवी में कार्यरत हूं. मैं उस लड़की के सिवा किसी और को अपनी पत्नी के रूप में नहीं देख सकता. मैं ताउम्र अविवाहित रहना चाहता हू्ं. क्या मेरा यह फैसला सही है?

जवाब

आप का फैसला बिलकुल भी सही नहीं है. आप पढ़ेलिखे हैं. अपने पैरों पर खड़े हैं. सिर्फ उस लड़की के बारे में सोच कर विवाह न करने का फैसला पूरी तरह से गलत है. आप के परिवार में आप के बड़े भाई के अलावा और कोई नहीं है. आप अपने बड़े भाई का कहा मान कर किसी अच्छी पढ़ीलिखी लड़की से विवाह कर लें. जब आप एक रिश्ते में बंध जाएंगे तो धीरेधीरे उस लड़की के बारे में सबकुछ भूल जाएंगे.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem 

 

Manohar Kahaniya: मोहब्बत का खूनी अंजाम

जब जब इश्क की कलम से दिल के कागज पर मोहब्बत की इबादत लिखी गई है, तबतब मोहब्बत करने वाले फना हुए हैं. इस तरह की कहानी में तब और दिलचस्प मोड़ आया है, जब वह त्रिकोण प्रेम पर आधारित हुई है और प्रेम त्रिकोण की कहानी में अकसर खूनी खेल सामने आता है. कुछ ऐसा ही इस त्रिकोण प्रेम में भी हुआ.

8 दिसंबर, 2017 की अलसाई सुबह चटख धूप के साथ खिली. लोग अपने घरों से निकल कर अपनी दिनचर्या में रम रहे थे.

उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ के बिलरियागंज थाने के भदाव गांव के कुछ लोग अपने खेतों की तरफ जा रहे थे. तभी गांव से बाहर कच्ची सड़क से दाईं ओर करीब 500 मीटर की दूरी पर कुदारन तिवारी के खेत में सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार लावारिस हालत में खड़ी दिखी. उत्सुकतावश लोग उस कार की ओर चले गए कि सुबहसुबह खेत में किस की कार खड़ी है.

लोगों ने जब कार के भीतर झांक कर देखा तो भीतर कोई नहीं था. कार का नंबर था यूपी53सी 3262. कार से कुछ दूरी पर एक युवक की लाश पड़ी थी. उस के सिर के घाव से लग रहा था कि किसी ने सिर में गोली मार कर उस की हत्या की है. उस का चेहरा खून से सना था.

मृतक काले रंग की पैंट और नीलेपीले रंग की धारीदार डिजाइन वाली जैकेट पहने था. उस के पैरों में कोई चप्पल या जूते नहीं थे. चेहरे पर दाढ़ी थी. वह शक्लसूरत और पहनावे से किसी अच्छे परिवार का लग रहा था.

लाश पड़ी होने की जानकारी मिलते ही आसपास के गांव के और लोग भी वहां जुटने लगे. उसी भीड़ में से किसी ने 100 नंबर पर फोन कर के इस की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. चूंकि मामला बिलरियागंज थाने का था, इसलिए पुलिस कंट्रोलरूम ने बिलरियागंज थाने को घटना की इत्तला दे दी. लाश मिलने की खबर पा कर बिलरियागंज के थानाप्रभारी विजय प्रताप यादव पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए.

घटनास्थल पहुंचने के बाद थानाप्रभारी ने अपने आला अधिकारियों को भी मामले की सूचना दे दी. इस के अलावा उन्होंने फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को भी सूचना दे कर मौके पर बुला लिया.

खबर पा कर एसपी अजय कुमार साहनी, एसपी (देहात) एन.पी. सिंह, सीओ (सगड़ी) सुधाकर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने कार के नंबर की जांच की तो वह नंबर गोरखपुर आरटीओ का था.

जांचपड़ताल से पता चला कि वह कार गोरखपुर के दीपक सिंह के नाम से रजिस्टर्ड थी. इस से यही अंदाजा लगाया गया कि मृतक गोरखपुर का रहने वाला होगा. फिर पुलिस ने मृतक के कपड़ों की तलाशी ली तो उस की जेब से सगड़ी के बाबू शिवपत्तर राय स्मारक कालेज का एक परिचयपत्र मिला. उस परिचयपत्र से उस की शिनाख्त एमए के छात्र विभांशु प्रताप पांडेय के रूप में हुई, जिस में उस का पता गांव भौवापार थाना बेलीपार लिखा था.

कार की तलाशी लेने पर डिक्की में उल्टी और खून के धब्बे मिले. कार में एक जोड़ी लेडीज चप्पल पड़ी मिली. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा था कि बदमाश हत्या कहीं और कर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे थे, लेकिन कार खेत में फंस जाने की वजह से दूर नहीं भाग सके और उस की लाश फेंक कर फरार हो गए. इस का मतलब साफ था कि कार में कोई महिला भी सवार थी. वह कौन थी? यह मामला और भी पेचीदा हो गया.

पुलिस इस मामले को प्रेम संबंधों से जोड़ कर देखने लगी थी. कार में लेडीज चप्पल और उल्टी ने गुत्थी बुरी तरह उलझा कर रख दी थी. विभांशु के मुंह से झाग निकले थे. वह झाग किसी जहरीले पदार्थ के सेवन से थे या किसी और के, यह बात जांच के बाद ही पता चलना था.

मौके की जरूरी काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दी. कागजी काररवाई पूरी करने के पहले पुलिस ने घटना की सूचना मृतक के परिजनों को दे दी थी. सूचना मिलने के बाद वह भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

मृतक के बड़े भाई जोकि पेशे से एक वकील थे, उन की तहरीर पर पुलिस ने रुचि राय पुत्री अरविंद राय, ग्रामप्रधान श्यामनारायण राय और उस के भाई सत्यम राय सहित 8 अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

सभी आरोपी कोतवाली जीयनपुर के बांसगांव के निवासी थे. घनश्याम पांडेय का आरोप था कि भाई को उस की प्रेमिका रुचि राय ने फोन कर के बुलाया था और उस की हत्या करवा दी. रिपोर्ट नामजद लिखाई गई थी, इसलिए पुलिस ने नामजद आरोपियों की तलाश शुरू कर दी.

चूंकि वादी घनश्याम पांडेय एक वकील के साथसाथ रसूखदार और ऊंची पहुंच वाला था, पुलिस की थोड़ी सी भी चूक कानूनव्यवस्था बिगाड़ सकती थी, इसलिए एसपी अजय कुमार साहनी ने सीओ सुधाकर सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम को निर्देश दे दिए थे कि नामजद आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए.

पुलिस टीम ने आरोपियों के घर दबिश डाली तो वह अपने ठिकानों पर नहीं मिले. उन के न मिलने पर पुलिस की समस्या और बढ़ गई. उन की तलाश के लिए पुलिस ने अपने सभी मुखबिरों को भी अलर्ट कर दिया.

9 दिसंबर, 2017 की सुबह थानाप्रभारी विजय प्रताप यादव को एक मुखबिर ने आरोपी ग्रामप्रधान श्यामनारायण राय के बारे में एक महत्त्वपूर्ण जानकारी दी. उस से मिली जानकारी के बाद थानाप्रभारी अपनी टीम के साथ सगड़ी-खालिसपुर मार्ग पर पहुंच गए. श्यामनारायण वहीं खड़ंजे के पास खड़ा मिल गया. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. वह वहां से कहीं भागने की फिराक में था.

तलाशी लेने पर उस के पास से एक पिस्टल .32 बोर व 2 जिंदा कारतूस के अलावा एक कारतूस का खोखा भी मिला. थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई, उस ने विभांशु की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया.

पुलिस ने उस के पास से जो पिस्टल बरामद किया था, उसी से उस ने विभांशु की हत्या की थी. उस ने उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह प्रेम त्रिकोण वाली निकली—

22 वर्षीय विभांशु प्रताप पांडेय उर्फ विभू मूलरूप से गोरखपुर के बेलीपार थाना क्षेत्र के ऊंचगांव (भौवापार) के रहने वाले रमाशंकर पांडेय का बेटा था. रमाशंकर पांडेय के 7 बेटों में विभांशु सब से छोटा और सब का दुलारा था. रमाशंकर पांडेय के सभी बेटे अपने पैरों पर खड़े थे. सब से बड़ा बेटा घनश्याम पांडेय अधिवक्ता था. अन्य बेटे भी अच्छे पदों पर कार्यरत थे.

विभांशु ही घर पर रह कर खेती के काम में पिता का हाथ बंटाता था. इस के साथ वह आजमगढ़ के बाबू शिवपत्तर राय स्मारक कालेज से एमए की पढ़ाई भी कर रहा था. वह काफी मेहनती युवक था. उस की एक खास बात थी कि वह जिस भी काम को करने की ठान लेता, उसे हर हाल में पूरा करने की कोशिश करता.

खैर, गोरखपुर से आजमगढ़ की कुल दूरी 85 किलोमीटर थी. विभांशु कालेज अपनी बाइक से आताजाता था. वैसे आजमगढ़ के रामगढ़ व जमसर गांव में उस की रिश्तेदारियां थीं. जिस दिन उस का मन कालेज से घर लौटने का नहीं होता तो वह इन में से अपनी किसी रिश्तेदारी में रुक जाता था. अपने रुकने की खबर वह फोन कर के घर वालों को दे देता था.

सन 2015 की बात है. रिश्तेदारी में आतेजाते एक दिन विभांशु की नजर एक खूबसूरत युवती पर पड़ी तो वह उसे अपलक निहारता रह गया. पहली ही नजर में वह उस के कजरारे नैनों के तीर से घायल हो गया था. उस ने अपने स्रोतों से पता किया तो जानकारी मिली कि उस का नाम रुचि राय है और वह पड़ोस के कल्याणपुर बांसगांव में रहती है.

रुचि के दिल में प्यार का रंग भरने के लिए विभांशु रिश्तेदारों के यहां ज्यादा समय बिताने लगा. वहीं रह कर पढ़ने लगा. घर वाले इस बात से बेखबर थे कि विभांशु पर प्रेम रोग का रंग चढ़ने लगा है. एक दिन की बात है. विभांशु कालेज से घर आ रहा था तभी सड़क पर उसे रुचि जाती हुई दिखाई दी. रुचि को देख कर उस का दिल जोरजोर से धड़कने लगा.

विभांशु ने तय किया कि आज वह उस से बात कर के ही रहेगा. थोड़ी दूर बढ़ने के बाद विभांशु ने अपनी बाइक उस के नजदीक ले जा कर रोक दी. अचानक पास बाइक रुकी देख रुचि सहम गई. इस से पहले कि वह कुछ कहती, विभांशु बोला, ‘‘मैं आप से कुछ बात करना चाहता हूं.’’

इतना सुनते ही रुचि चौंकते हुए बोली, ‘‘आप को मैं पहचानती नहीं. और मैं अजनबियों से बात नहीं करती.’’

‘‘लेकिन मैं आप को अच्छी तरह जानतापहचानता हूं. रुचि राय नाम है आप का और कल्याणपुर बांसगांव में रहती हैं.’’ उस ने कहा.

अपना नाम सुन कर रुचि हैरान रह गई कि अजनबी युवक को मेरा नाम और पता कैसे पता चला. बिना कोई उत्तर दिए वह आगे बढ़ गई पर विभांशु भी उस के पीछेपीछे बाइक से आ रहा था. रास्ता सुनसान था. पीछे बाइक सवार युवक को अपनी ओर आते देखा तो रुचि सहम गई.

वह तेजतेज कदमों से आगे बढ़ने लगी. विभांशु ने आगे बढ़ कर उस का रास्ता फिर रोक लिया और बोला, ‘‘मुझे गलत मत समझो, मैं कोई लुच्चालफंगा नहीं हूं.’’

‘‘रास्ता रोकने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी? हट जाओ मेरे रास्ते से वरना अभी शोर मचा दूंगी.’’ हिम्मत बटोर कर वह बोली, ‘‘मुझे ऐसीवैसी लड़की मत समझना, वरना अभी दिन में ही तारे दिखा दूंगी.’’

‘‘नाराज क्यों हो रही हैं. नहीं रोकूंगा, जाइए. वैसे मैं अपने बारे में तो बताना भूल गया. मेरा नाम विभांशु प्रताप पांडेय है और पड़ोस के गांव रामगढ़ में रहता हूं. अभी तुम जाओ, मैं फिर मिलूंगा.’’

कह कर विभांशु बाइक तेज गति से चला कर वहां से निकल गया. उस के जाने के बाद रुचि की जान में जान आई. रास्ते भर वह यही सोचती रही कि इस युवक को मेरा नाम और पता कैसे मालूम हुआ. सोचतेसोचते घर कब पहुंची उसे पता नहीं चला.

बात आईगई, खत्म हो गई और वह अपने कामों में लग गई. अब जब भी वह मिलती विभांशु हायहैलो कर के निकल जाता था. पर यह इत्तफाक था या कुछ और कि उस दिन के बाद रुचि से रास्ते में उस की मुलाकात अकसर हो जाया करती थी. विभांशु की आशिकी की निगाहें देख कर रुचि के दिल में भी उस के लिए चाहत के बीज अंकुरित होने लगे.

इस के बाद विभांशु जब भी उस से हायहैलो कहता, वह भी मुसकरा पड़ती थी. अपनी ओर उसे आकर्षित हुआ देख कर विभांशु की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. फिर उन के बीच बातचीत भी होने लगी.

मौका देख कर उन्होंने एकदूसरे से अपनी मोहब्बत का इजहार भी कर दिया. रुचि और विभांशु की मोहब्बत की गाड़ी पटरी पर दौड़ी तो वो भविष्य के सपने बुनने लगे और शादी तक के सपने देखने लगे. यह पंछी प्यार की उड़ान भरने लगे. दोनों बाइक पर इधरउधर खूब घूमने लगे. इस बात पर भी उन्होंने ध्यान नहीं दिया कि जानने वालों ने उन्हें देखा भी है या नहीं. लिहाजा उन के प्यार की चर्चा गलीमोहल्लों में होने लगी थी.

रुचि और विभांशु की मोहब्बत की खुशबू कल्याणपुर बांसगांव के ग्रामप्रधान श्यामनारायण राय तक पहुंची. श्यामनारायण राय रुचि का हमउम्र और अविवाहित था. लिहाजा उस का मन मचल गया और वह रुचि की ओर आकर्षित हो गया. रुचि को पाने की हसरतें उमंगें भरने लगीं. किसी के माध्यम से उस ने अपनी मोहब्बत का पैगाम रुचि तक भिजवाया पर रुचि ने उस का पैगाम ठुकरा दिया.

श्यामनारायण काफी दबंग और पहुंच रखने वाला था. उस की मोहब्बत एकतरफा थी, जबकि रुचि विभांशु से प्यार करती थी. रुचि द्वारा ग्रामप्रधान को लिफ्ट न देने पर वह बौखला गया. इसलिए उस ने तय कर लिया कि वह रुचि और विभांशु की मोहब्बत में बाधा को सफल नहीं होने देगा.

विभांशु भी कमजोर नहीं था. ग्रामप्रधान श्यामनारायण राय से मुकाबला करने के लिए उस के सामने आ खड़ा हुआ. यह बात श्यामनारायण को काफी नागवार लगी कि एक बाहरी युवक उसी के घर में घुस कर उसे ही चुनौती देने पर आमादा है. यह बात उस के बरदाश्त के बाहर थी.

रुचि को चाहने वाले 2 लोग थे लेकिन रुचि तो उन में से केवल एक को ही चाहती थी. लिहाजा रुचि को ले कर उन दोनों के बीच विवाद खड़ा हो गया जो थमने के बजाय बढ़ता ही गया.

अक्तूबर, 2017 की बात है. विभांशु दशहरे का मेला घूमने गया था. फोन कर के उस ने रुचि को भी मेले में बुला लिया था. काफी देर तक साथसाथ मेला घूमने के बाद दोनों अपनेअपने घरों को रवाना हुए. प्रेमिका से विदा होते विभांशु ने उसे फ्लाइंग किस दिया. रुचि ने मुसकरा कर इस का जवाब दे दिया.

इत्तफाक से उसी समय श्यामनारायण भी कहीं से उधर आ पहुंचा. उस ने दोनों को किस लेतेदेते देख लिया था. यह देख कर उस का खून खौल उठा. उस ने आव देखा न ताव, कुछ ग्रामीणों को आवाज लगा दी.

ग्रामप्रधान की आवाज सुन कर गांव के तमाम लोग वहां पहुंच गए. प्रधान ने विभांशु पर गांव की लड़की को छेड़ने का आरोप लगाया. इस के बाद तो ग्रामीण भड़क गए. विभांशु वहां से भागा तो उन्होंने दौड़ कर उसे दबोच लिया. इस के बाद उस की जम कर पिटाई की.

पिटाई के बाद भी उन्होंने विभांशु को नहीं छोड़ा बल्कि प्रधान श्यामनारायण ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया. जीयनपुर के थानाप्रभारी ने विभांशु को लड़की छेड़ने के आरोप में जेल भेज दिया. इस तरह प्रधान ने विभांशु को जेल भिजवा कर अपनी खुन्नस निकाल ली.

घर वालों को जब यह पता चला कि लड़की छेड़ने के आरोप में विभांशु जेल में बंद है तो वे परेशान हो गए. शर्म के मारे उन का चेहरा झुक गया. किसी तरह विभांशु के बड़े भाई वकील घनश्याम पांडेय ने उस की जमानत कराई. घर वालों ने विभांशु को खूब डांटा, साथ ही समझाया कि ये इश्कविश्क का चक्कर छोड़ कर पढ़ाई पर ध्यान दो. जब समय आएगा तो किसी अच्छी लड़की से शादी करा कर गृहस्थी बसा दी जाएगी.

परिवार के दबाव में आ कर उस समय तो कह दिया कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेगा, जिस से परिवार की बदनामी हो लेकिन वह दिल से रुचि को निकाल नहीं पाया. साथ ही वह श्यामनारायण द्वारा जेल भिजवा देने वाली बात से काफी आहत था. उस ने तय कर लिया कि वह इस का बदला जरूर लेगा.

वह प्रधान श्यामनारायण से बदला लेने का मौका ढूंढने लगा. इसी बीच 4 दिसंबर, 2017 को ग्रामप्रधान श्यामनारायण पर किसी ने हमला कर दिया. प्रधान का पूरा शक विभांशु पर आ गया. प्रधान ने तय कर लिया कि वह विभांशु को सूद के साथ इस का भुगतान करेगा. जबकि वास्तविकता यह थी कि विभांशु का उस हमले से कोई लेनादेना नहीं था और न ही उस ने ऐसा किया था.

बहरहाल, इश्क की जलन ने एक नाकाम प्रेमी श्यामनारायण राय को इंसान से शैतान बना दिया था. वह विभांशु के खून का प्यासा हो गया. वह मौके की तलाश में था लेकिन उसे मौका नहीं मिल पा रहा था.

7 दिसंबर, 2017 की शाम 6 बजे रुचि ने विभांशु को फोन कर के मिलने के लिए आजमगढ़ बुलाया. प्रेमिका के बुलावे पर वह बेहद खुश था. तैयार हो कर वह बाइक ले कर रुचि से मिलने निकल गया. घर से निकलते समय उस ने घर वालों से यही कहा था कि वह शहर जा रहा है और थोड़ी देर में आ जाएगा.

विभांशु पहले अलहलादपुर में रहने वाले अपने दोस्त दीपक सिंह के घर गया. वहां उस ने बाइक खड़ी की ओर उस की स्विफ्ट डिजायर कार ले कर प्रेमिका से मिलने आजमगढ़ रवाना हो गया. यह बात पता नहीं कैसे प्रधान श्यामनारायण को पता चल गई. फिर तो उस की बांछें खिल उठीं. वह कल्याणपुर बांसगांव से पहले खालिसपुर गांव के पास घात लगा कर बैठ गया. रात 11 बजे के करीब विभांशु स्विफ्ट डिजायर कार ले कर गुजरा.

प्रधान ने गाड़ी में विभांशु को जाते देख लिया. प्रधान मोटरसाइकिल पर था. उस ने कार का पीछा किया और ओवरटेक कर के उसे रोक लिया. सुनसान जगह पर प्रधान को देख विभांशु का माथा ठनक गया. वह कार ले कर वहां से भागना चाहा लेकिन कार के आगे प्रधान और उस की बाइक थी, इसलिए वहां से नहीं भाग सका.

सड़क पर ही दोनों के बीच बहस छिड़ गई. बात काफी बढ़ गई. मामला गालीगलौज से हाथापाई तक पहुंच गया. प्रधान श्यामनारायण का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया. उस ने कार का दरवाजा खोल कर विभांशु को खींच कर बाहर निकाल लिया. उसी समय उस ने कमर से लाइसेंसी पिस्टल निकाली और उस के सिर में गोली मार दी.

गोली लगते ही विभांशु कटे पेड़ की तरह धड़ाम से सड़क पर गिर गया और मौके पर ही उस की मौत हो गई. इस के बाद प्रधान ने फोन कर के छोटे भाई सत्यम राय उर्फ रजनीश को मौके पर बुला लिया.

श्यामनारायण और सत्यम दोनों ने मिल कर उसे कार की पिछली सीट पर डाला फिर लाश ठिकाने लगाने के लिए गांव के बाहर ले गए.

वह कार को सड़क से नीचे खेत में ले गए. वहां से वह नहर की ओर ले जा रहे थे, तभी कार कुदारन तिवारी के खेत में जा कर फंस गई. वहां से कार नहीं निकली तो वह वहीं खेत में छोड़ दी और लाश भी कुछ आगे डाल दी. इस के बाद वे घर लौट आए और इत्मीनान से सो गए.

उन्हें विश्वास था कि पुलिस को उन पर शक नहीं होगा पर जब मृतक के भाई घनश्याम पांडेय ने नामजद रिपोर्ट लिखाई तो प्रधान श्यामनारायण पुलिस से बचने के लिए घर से निकल कर सगड़ी-खालिसपुर मार्ग पर जा कर खड़ा हो गया और उधर से आने वाले वाहन का इंतजार करने लगा. इस से पहले कि वह वहां से कहीं जाता, थानाप्रभारी विजयप्रताप यादव ने उसे मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार कर लिया.

प्रधान श्यामनारायण राय से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. इस के 3 दिनों के बाद उस का छोटा भाई सत्यम राय उर्फ रजनीश भी बांसगांव से गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ में उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

कथा लिखे जाने तक पुलिस कार में मिली महिला की सैंडिल और उल्टी के बारे में जांचपड़ताल कर रही थी. आरोपी रुचि राय फरार चल रही थी. पुलिस उस की तलाश में जुटी हुई थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

VIDEO : रेड वेलवेट नेल आर्ट

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

कंचन अवस्थी को मिला ‘भारत सम्मान’-2022

बुद्धाजंलि रिसर्च फाउन्डेशन एवं बीइंग मदर स्टैंड यूनाइटेड, मुम्बई द्वारा दिल्ली के द अशोका में होटल में आयोजित एक भव्य समारोह में लखनऊ निवासी बालीवुड की जानी मानी अभिनेत्री कंचन अवस्थी को बालीवुड सिंगर उदित नारायण, संगीत निर्देशक अनु मलिक, अभिनेत्री एवं प्लेबैक सिंगर सलमा आगा, माननीया सांसद, लोक सभा श्रीमती सुनीता दुग्गल तथा केलाश मासूम, अध्यक्ष, बुद्धाजंलि रिसर्च फाउन्डेशन चैरिटेबुल ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया गया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में माननीय मंत्री भारत सरकार श्री रामदास अठावले ने दीप प्रज्जवलन कर के कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया.

कंचन अवस्थी को इसके पूर्व बेस्ट डांसर अवार्ड, मंजू श्री सम्मान, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री सम्मान, यू0पी0 आर्टिस्ट अकादमी द्वारा बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड,वर्ष 2018 में बेस्ट अपकमिंग एक्ट्रेस का सम्मान,ग्लोबल एचीवर्स अवार्ड, फिल्म बंधु,उत्तर प्रदेश द्वारा काशी फिल्म महोत्सव में दिये गये अवार्ड सहित  कई सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है.

कंचन अवस्थी ने फीचर फिल्म फ्राड सैंया, मंटो रीमिक्स ( अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शित),लव हैकर्स,  अंकुर अरोड़ा मर्डर केस, गन वाली दुलहनिया, भूत वाली लव स्टोरी,मैं खुदी राम बोस, चापेकर ब्रदर्स,जय जवान जय किसान, कुतुब मीनार सहित बहुत सी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया है. अभी हाल ही में भैया जी स्माइल सहित कई वेब सीरीज एवं  धारावाहिक अम्मा में भी अहम किरदार निभाया है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें