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रक्षा खर्च पर सवाल

देश की रक्षा करना बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है और आमतौर पर रक्षा पर होने वाले खर्च पर सवालजवाब भी नहीं किए जाते. सरकारें रक्षा पर वास्तव में कितना खर्च करती हैं, यह सब देशों में छिपा रहता है क्योंकि बहुत सा खर्च कुछ और मदों में दर्ज कर छिपा दिया जाता है पर क्या 21वीं सदी में देशों को रक्षा पर इतना खर्च करना चाहिए जितना वे खर्च कर रहे हैं?

भारत सरकार ने हाल में 2,25,000 करोड़ रुपए 97 तेजस लड़ाकू विमान और 156 प्रचंड हैलिकौप्टर खरीदने के लिए मंजूर किए हैं. यह युद्ध के लिए खर्च नहीं है, अगर युद्ध हो जाए तो बचाव के लिए वे दुश्मन पर वार करने के लिए हैं. पिछले डेढ़दो सौ वर्षों के दौरान जनता पर हो रहे हमलों से जनता को बचाने के लिए कोई बड़ा युद्ध भारत में नहीं हुआ है जैसा पहले और दूसरे विश्वयुद्धों में हुआ था जिन में शहर के शहर दूसरों के हाथों में चले गए थे.

वर्ष 1945 के बाद एक सेना का दूसरे देश पर कब्जा केवल इक्कीदुक्की जगह हुआ. इजराइल ने 1967 में किया, इराक ने कुवैत पर किया. रूस अब यूक्रेन में कर रहा है. अफ्रीका के कुछ देशों में होता है. अफगानिस्तान में रूसी और अमेरिकी कब्जे के युद्ध हुए पर दोनों कहते यही रहे कि वे अफगानिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे हैं.

युद्ध का हौवा एक तरह से पुराने राजाओं की विरासत है जो चुने हुए प्रतिनिधियों वाले देशों के शासकों ने अपना ली है. रूस, अमेरिका, इंग्लैंड, भारत, चीन की सरकारें अब कहने को जनता के लिए काम करती हैं. ये जनता के सुख के लिए चुनी या नियुक्त होती हैं, जनता को युद्ध में ?ांकने के लिए नहीं. यह बात दूसरी है कि देशप्रेम व देशभक्ति का नाम ले कर जनता को बहकाया जाता है और वह नेता जो वादा कर के चुनाव लड़े कि वह देश की रक्षा करेगा, कुछ ज्यादा वोट पा जाता है.

जनता की आमतौर पर अपने देश की सीमाओं से ज्यादा घर की सीमा में हो रहे मामले में रुचि होती है. अपराधियों से सुरक्षा मिल रही है या नहीं, जनता की कमाई पर सरकारी व गैरसरकारी डाका तो नहीं डाला जा रहा, सरकार जनता को सडकें, पानी, बिजली, शिक्षा, बागबगीचे मुहैया करा रही है या नहीं आदि जनता के लिए ज्यादा जरूरी हैं.

पर ज्यादातर देशों की सत्ताधारी पार्टियां दूसरे देशों का हौवा खड़ा रखती हैं. अमेरिकी सरकार रूस व चीन का हौवा दिखाती है. भारत सरकार पाकिस्तान व चीन का और चीन अमेरिका का. एकदूसरे का नाम ले कर सब सरकारें जनता की मेहनत का बहुत बड़ा हिस्सा सैनिक सामान पर बरबाद कर देती हैं. एक सड़क टूटीफूटी होने पर बरसों चल जाती है, मैला स्कूल भी शिक्षा देता रहता है पर एक खास पेंच न हों, तो एक टैंक या हवाई जहाज कबाड़ में चला जाता है.

देशों के नेताओं को सब से बड़ी आमदनी सेना व ठेकों से होती है. सेना का सामान खरीदने में हेराफेरी पर राजीव गांधी की सरकार गई थी. दुनियाभर में कितनी ही हत्याएं उन की होती हैं जिन्होंने सैनिक सामान की बिक्री में हेरफेर की या उस की जानकारी एक्सपोज की. विकिलीक्स के जूलियन असांजे को कितनी ही सरकारें पकड़ कर बंद रखना चाहती हैं क्योंकि उस ने सैनिक खरीद का भंडाफोड़ किया. इंटरनैशनल कंसोर्टियम औफ जर्नलिस्ट्स बीचबीच में सैनिक लेनदेन में हुईं रिश्वतखोरी को एक्सपोज करता रहता है पर हमारा मीडिया और नेता आमतौर पर चुप ही रहते हैं.

भारत को सैनिक सामान खरीदना होगा क्योंकि चीन और पाकिस्तान दोनों खरीद रहे हैं. पर आदर्श स्थिति तो वह होगी जब तीनों देश जनता का खयाल रखें, अपने बमों का नहीं.

सोने के गहनों का रखरखाव

सोने के गहने हर महिला के शृंगार का अहम हिस्सा होते हैं. इन गहनों की खूबसूरती, चमक और वैल्यू अलग ही होती है. किसी भी फंक्शन में गोल्ड ज्वैलरी का आकर्षण दूर से ही नजर आता है. जो चीज जितनी ज्यादा महंगी होती है उतनी ही ज्यादा उस की देखभाल और मेंटिनैंस की जरूरत होती है. इसलिए सिर्फ सोने के गहने खरीद लेना और जरूरत के वक्त पहन लेना ही काफी नहीं, बल्कि उसे किस तरह से पहनना है, किस तरह की सावधानियां रखनी हैं और समयसमय पर कैसे उन की देखभाल करनी है, इन बातों का खयाल रखना भी उतना ही जरूरी है.

एक तरफ जहां रोज पहने जाने वाले सोने के गहनों में बारीक धूलमिट्टी फंस कर उन्हें गंदा कर सकती है तो वहीं खास मौकों पर इस्तेमाल किए जाने वाले भारी आभूषण भी लौकर के अंदर रखेरखे थोड़े डल नजर आने लगते हैं.

ऐसे में हम इन गहनों को सुनार के पास ले जा कर साफ करवा सकते हैं. मगर कई बार हमारे पास इतना समय नहीं होता कि हम बाहर जा कर गहनों को साफ करा सकें. ऐसे में कुछ घरेलू नुस्खे काम आ सकते हैं जिन की मदद से गहने चमका कर आप पैसे और समय दोनों की बचत कर सकती हैं.

सोने के गहनों की सफाई में ध्यान रखने योग्य बातें

सोना प्राकृतिक रूप से एक नरम धातु होता है. इसलिए सोने की वस्तुओं की सफाई के लिए हमें किसी भी तरह की कठोर धातु या फिर स्ट्रौंग कैमिकल का उपयोग नहीं करना चाहिए. अगर आप इस की सफाई में किसी हार्ड चीज का प्रयोग करते हैं तो आप का सोना खराब भी हो सकता है या फिर गल भी सकता है. इसलिए सोने की सफाई घर पर करते समय विशेष ध्यान रखना चाहिए.

सोने के गहनों की चमक समय के साथ धीरेधीरे कम होने लगती है. लेकिन अगर आप समयसमय पर इन की साफसफाई पर ध्यान दें तो ये कभी खराब नहीं होंगे.

आइए जानते हैं सोने के गहनों की घर पर सफाई कैसे की जा सकती है-

  • नमक के पानी से

सोने के गहनों को नमक के पानी से साफ किया जा सकता है. इस के लिए सब से पहले एक बाउल में हलका गुनगुना पानी लें. फिर उस में एक चम्मच नमक डाल कर उस में सोने के गहनों को डालें. थोड़ी देर बाद नमक के पानी से निकाल कर उस को हलके हाथों से साफ करें. अब साफ पानी से धो कर मुलायम कपड़े से सुखाएं. आप देखेंगे कि आप का सोने का गहना साफ हो गया है.

  • अमोनिया से गहनों की सफाई

अमोनिया से सोने के गहनों की सफाई के लिए सब से पहले एक बाउल में गुनगुना पानी लें. फिर उस में अमोनिया का पाउडर मिला कर कम से कम 2 मिनट के लिए उस में अपने गहनों को भिगों दें. इस के बाद गहनों को ब्रश से अच्छे से साफ करें. आप देखेंगे कि गहने साफ हो चुके हैं. अमोनिया से गहने साफ करते समय यह ध्यान जरूर रखें कि आप के गहनों पर कोई कीमती नग या कोई मोती न जड़ा हो.

  • हलदी से करें सफाई

आप अपने सोने के गहनों को हलदी से भी साफ कर सकते हैं. सोने के गहनों को हलदी से साफ करने के लिए सब से पहले एक कटोरी में एक चम्मच हलदी डालें. इस के बाद उस में थोड़ा सा कोई भी शैंपू डालें. फिर दोनों को मिला कर एक पेस्ट तैयार करें. उस के बाद जिन गहनों को साफ करना है उन पर थोड़ा सा हलदी वाला पेस्ट लगा कर कौटन के कपड़े से हलके हाथों से रगड़ें. अब अपने आभूषण साफ पानी से धो लें. इस प्रयोग में भी आप अपने सफेद नग वाले गहनों को न धोएं.

  • डिश सोप से गहनों की सफाई

लिक्विड डिश डिटर्जेंट की कुछ बूंदें हलके गुनगुने पानी से भरी एक कटोरी में डाल कर अच्छे से मिलाएं. सोने के गहनों को करीब 15 मिनट तक इस मिश्रण में भिगो कर छोड़ें जब तक यह पानी में भीगता है, गरम डिटर्जेंट का पानी गहनों की दरारों में घुस कर वहां जमी गंदगी को ढीला कर देगा.

गहनों को फिर नर्म दांतों वाले टूथब्रश से हलके हाथों से धोएं. टूथब्रश जितने नर्म दांतों का होगा, उतना बेहतर है. कड़े दांतों वाले ब्रश से गहनों की सतह पर खरोचें आ सकती हैं. अब बहते पानी में प्रत्येक गहने को अच्छे तरीके से धोएं. इस से ब्रश के रगड़ने से जितना भी ढीला पड़ा मैल शेष है, वह निकल जाएगा. अब इन्हें नर्म कपड़े से पोंछ कर सुखाएं.

  • बेकिंग सोडा से मिनटों में चमकाएं सोने के गहने

बेकिंग सोडा आमतौर पर कुकिंग में इस्तेमाल होता है हालांकि आप इस से अपने सोने के गहनों को भी साफ कर सकते हैं. इस के लिए आप को केवल 2 चम्मच सोडा को हलके गरम पानी में घोल कर पेस्ट बनाना है. अब इस में अपने गहनों को आधे घंटे के लिए डुबो कर छोड़ दें. फिर इसे स्पंज से आराम से रगड़ कर साफ कर लें.

  • नीबू से क्लीन करें गोल्ड ज्वैलरी

नीबू में नैचुरल रूप से क्लीनिंग एजेंट मौजूद होते हैं. ऐसे में आप इस का इस्तेमाल सोने के आभूषण को साफ करने के लिए भी कर सकते हैं. इस के लिए एक कटोरी गरम पानी में आधा नीबू निचोड़ लें. अब इस में गहनों को 20-30 मिनट के लिए रख कर छोड़ दें. फिर इसे ब्रश से आराम से साफ कर के साफ पानी से धो लें.

  • बियर से सफाई

आप सोने के गहनों को बियर से भी साफ कर सकते हैं. बियर से गहनों की सफाई के लिए कौटन के कपड़े पर थोड़ी सी बियर डाल लें. उस के बाद गहनों को बियर लगे कपड़े से हलके हाथों से रगड़ें. ऐसा तब तक करें जब तक गहने की चमक वापस न आ जाए. लेकिन ध्यान रखें, यदि सोने के

गहने पर स्टोन या हीरे जड़े हैं तो आप उन गहनों को बियर से साफ नहीं कर सकते.

कुछ जरूरी सावधानियां

सोना एक मुलायम मैटल है जिस पर स्क्रैच लगने की आशंका अधिक होती है. खासतौर पर सोने की अंगूठी, ब्रेसलेट या चूडि़यां पहनते वक्त सजग रहना जरूरी है. ऐसे में घर की साफसफाई या फिर बच्चों के साथ खेलने आदि के दौरान बेहतर होगा कि सोने के गहने न पहनें.

  • क्लोरीन से बचाएं ज्वैलरी

सोने के गहनों पर कई ऐसे रसायन हैं जो सूट नहीं करते. क्लोरीन भी ऐसा ही एक रसायन है जिस के संपर्क में सोना कमजोर हो जाता है. अगर अधिक समय तक सोने के गहनों का संपर्क क्लोरीन से होगा तो वे जल्दी टूटेंगे.

  • ज्वैलरी पहन कर स्विमिंग करने या नहाने से बचें

स्विमिंग पूल में क्लोरीन का स्तर उच्च होता है ताकि उसे कीटाणुओं से मुक्त रखा जा सके. लेकिन यही क्लोरीन मैटल को खराब करता है और उस के रंग को भी नुकसान पहुंचाता है. यहां तक कि अगर ज्वैलरी में पत्थर लगे हैं, तो यह उन को भी नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए स्विमिंग करने से पहले ज्वैलरी जरूर उतार दें. अगर आप गोल्ड ज्वैलरी को पहन कर नहाएंगी तो भी उस का रंग समय के साथ फीका पड़ता जाएगा.

क्लोरीन के अलावा एसिड, क्लीनर आदि के नियमित संपर्क में आने से भी सोने के गहने कमजोर हो जाते हैं. इन का उपयोग करते वक्त हाथों में रबड़ के दस्ताने पहनने से अंगूठी या ब्रेसलेट को बचाया जा सकता है.

जब लंबे समय के लिए स्टोर करने हों गहने

  • सोने के गहनों को अगर सही तरीके से स्टोर करें तो ये सालोंसाल चलते हैं. इन्हें हमेशा मैटल, मोती या स्टोन आदि के गहनों से अलग रखें.
  • इन्हें किसी मुलायम कपड़े या बटरपेपर में रैप कर के भी रख सकते हैं जिस से ये कम से कम हवा के संपर्क में आएंगे और उन की उम्र बढ़ेगी.
  • कभी भी अपने सोने के गहनों को किसी अन्य धातु के साथ मिला कर न रखें. चांदी, तांबा, पीतल जैसे सभी धातुओं को अलगअलग बौक्स में रखें.

बदलबदल कर पहनें

आप जिन ज्वैलरी को रोजाना पहनती हैं, वे वक्त के साथ पुरानी लगने लगती हैं. उन में धूल, मिट्टी, पसीना, बैक्टीरिया और स्किन प्रोडक्ट्स का प्रभाव पड़ता है. इस के अलावा सूरज की किरणों का भी ज्वैलरी पर बुरा असर पड़ता है. अगर आप को ज्वैलरी को साफ और नया जैसा रखना है तो उसे हर हफ्ते साफ करें और बदलबदल कर पहनें.

ज्वैलरी पहनने से पहले लगाएं कौस्मेटिक्स

त्वचा पर क्रीम, मेकअप या परफ्यूम लगाना हो तो ज्वैलरी सब से आखिर में पहनें क्योंकि इन प्रोडक्ट्स में मौजूद कैमिकल्स आप की सोने की ज्वैलरी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखें ताकि आप की ज्वैलरी खराब न हो.

सही तरीके से रखें

कई लोग ज्वैलरी के लिए खास बौक्स डिजाइन करवाते हैं. ऐसा करना अच्छा है क्योंकि लौकर के मैटल से रिएक्ट कर के ज्वैलरी की शाइन और खूबसूरती कम हो सकती है. साथ ही, हवा में मौजूद नमी भी ज्वैलरी की खूबसूरती को फीका कर देती है. हर ज्वैलरी को अलग बौक्स में रखना बेहतर होता है.

ज्वैलरी के मामले में बरती जाने वाली सावधानियां

अवामा के फाउंडर अभिषेक कहते हैं कि ज्वैलरी के मामले में कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं.

अलगअलग ज्वैलरी अलगअलग डब्बों में रखें. गोल्ड ज्वैलरी रखने के लिए सब से बेहतर औप्शन हैं कपड़ों के बौक्स. इन को वैलवेट बौक्स में कभी भी न रखें क्योंकि ऐसा करने से गहने जल्दी काले पड़ सकते हैं. कई ज्वैलर्स प्लास्टिक के बैग के अंदर कपड़े के बौक्स देते हैं. इन में ज्वैलरी सुरक्षित रहती है.

अगर गोल्ड ज्वैलरी की चमक थोड़ी फीकी पड़ गई है या वह गंदा हो गया है तो आप उसे गरम पानी में डालें. इस में थोड़ा लिक्विड सोप भी डालें और फिर साफ करें. इस से जो भी डस्ट है वह निकल जाती है और चमक भी वापस आ जाती है. अब इसे साफ कपड़े से पोंछ कर हेयर ड्रायर से सुखा लें. अगर थोड़ा पानी या नमी रह गई होगी तो वह भी सूख जाएगा. मगर ध्यान रखें कि गरम पानी में आप गोल्ड पर डायमंड लगे हुए गहने ही डाल सकते हैं. मगर यदि गहनों में कीमती स्टोन लगें हों तो ऐसा कतई ऐसा न करें. वरना वह पानी से लाल हो जाएगा.

इस बात का भी खयाल रखें कि आप कहीं जाने के लिए तैयार हो रही हैं तो गहने पहनने का काम सब से अंत में और आराम से करें. चलतेफिरते या बातें करते गहने न पहनें. ये लाखों के हैं जो टूट सकते हैं. ये मेकअप आदि के कैमिकल्स से खराब हो सकते हैं. इसलिए मेकअप के बाद ही ज्वैलरी पहनें.

रिलायंस ज्वैल्स के सुनील नायक द्वारा कुछ सुझाव दिए गए हैं जिन्हें रोजाना अमल करने से आप के कीमती आभूषणों की चमक सालोंसाल बरकरार रहेगी :

सर्दी के मौसम में पर्यावरण में नमी रहने के कारण आप के गहनों की चमक में कमी आ सकती है. ऐसे में सोने के आभूषणों को धूलमिट्टी या तापमान से बचाना आवश्यक है.

  • सोने के गहनों को रोजमर्रा में पहनने से उन पर आसानी से निशान पड़ सकते हैं. यह महत्त्वपूर्ण है कि आप घर की सफाई या ऐसे कोई भी काम करते समय अपने गहनों को उतार कर किसी सुरक्षित जगह पर रख दें. सफाई में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों में हानिकारक रसायन होने के कारण आप के गहनों को नुकसान पहुंचता है.
  • नहाते वक्त अपने गहनों को न पहनें. पानी और साबुन रोज लगाने से गहनों की चमक में कमी आ जाती है.
  • रोजाना इस्तेमाल होने वाले परफ्यूम, मौइस्चराइजर और बदन पर लगने वाले कैमिकल्स से अपने गहनों को दूर रखें. तैयार होने के आखिर में ही गहनों को पहनें.
  • इस बात पर ध्यान दें कि रोजाना पहनने वाले सोने के गहनों को हर 2 महीने में एक बार जरूर साफ कर लें.
  • गुनगुने पानी में अपने गहनों को 3 से 5 घंटे भीगने के लिए रख दें.
  • पानी में रहने से गहनों पर लगी गंदगी को साफ करना आसान हो जाता है.
  • गहनों को साफ करने के बाद उन्हें मुलायम कपड़े से पोंछें और कौटन या दूसरे मुलायम कपड़े में बांध कर रख दें.

ड्राई और सांवली त्वचा से छुटकारा पाने के उपायों के बारे में बताइए ?

सवाल

मैं 23 वर्षीय युवती हूं. मेरी त्वचा बहुत ड्राई और सांवली है. मैंने कई उपायों को अपनाया है लेकिन फिर भी त्वचा पर कोई असर नहीं हो रहा है. कृपया मुझे कोई ऐसे उपाय के बारे में बताइए जिससे मेरी त्वचा गोरी होने के साथ-साथ साफ हो जाए. इसके अलावा ड्राइनैस से छुटकारा पाने के उपायों के बारे में भी बताइएगा.

जवाब

त्वचा की रंगत निखारने के लिए चेहरे को साफ करने के लिए हमेशा कच्चे दूध का प्रयोग करें, साथ ही कच्चे दूध को चेहरे पर लगा कर हलके हाथों से चेहरे की मसाज भी करें व सूखने पर ठंडे पानी से धो लें. ऐसा करने से धीरेधीरे आपकी त्वचा की रंगत में निखार आने लगेगा.

इसके अलावा त्वचा की ड्राइनैस को दूर करने के लिए त्वचा को हमेशा मौइश्चराइज रखें. त्वचा को धूप से बचाएं और हर बार घर से बाहर निकलते समय चेहरे पर 30 एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन अवश्य लगाएं.

मुझे यकीन है कि इन उपायों को अपनाने से आपकी त्वचा में निखार तो आएगा ही. साथ ही आपको ड्राइनैस की समस्या से भी छुटकारा मिल जाएगा.

हैप्पी प्रैगनैंसी के लिए इन बातों का रखें ध्यान

मां बनना महिला के जीवन का सब से खूबसूरत पल होता है. लेकिन कई बार कुछ कारणों के चलते कोई महिला मां नहीं बन पाती है. ऐसी स्थिति में निराश होना स्वाभाविक है. मगर कई मामलों में कुछ बातों का ध्यान रख कर और डाक्टरी सलाह ले कर कमियों को दूर कर मां बनने का सुख हासिल किया जा सकता है.

जानतें हैं, प्रैगनैंसी के लिए किनकिन खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. साथ ही, प्रैगनैंसी प्रोसेस और उस से जुड़े कौंप्लिकेशंस पर भी एक नजर:

जरूरी सावधानियां

– 32 साल के बाद महिलाओं की गर्भधारण करने की क्षमता कम होने लगती है. इसलिए अगर किसी महिला की उम्र 32 साल हो गई है, तो उसे गर्भधारण में देर नहीं करनी चाहिए. अगर प्राकृतिक तौर पर वह गर्भवती नहीं हो पा रही है तो उसे तुरंत किसी विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए.

– धूम्रपान करने से भी मां बनने की क्षमता प्रभावित होती है. इतना ही नहीं, इस से गर्भपात का भी खतरा बना रहता है, इसलिए महिलाओं को धूम्रपान नहीं करना चाहिए.

– बहुत ज्यादा वजन होना भी मां बनने में बाधक होता है. अगर आप मोटी हैं और आप को गर्भधारण में परेशानी आ रही है, तो आप अपना वजन कम करें.

– जो महिलाएं शाकाहारी होती हैं, उन्हें अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में फौलिक ऐसिड, जिंक और विटामिन बी12 लेने की जरूरत होती है. शरीर में इन पोषक तत्त्वों की कमी भी गर्भधारण में रुकावट पैदा करती है.

– अगर आप 1 सप्ताह में 7 घंटे से ज्यादा ऐक्सरसाइज करती हैं, तो इसे कम करने

की जरूरत है. जरूरत से ज्यादा ऐक्सरसाइज के कारण ओव्युलेशन प्रौब्लम हो जाती है, जिस से गर्भधारण करने में परेशानी आती है.

– फिजिकल इनऐक्टिविटी भी कई बार गर्भधारण करने में बाधा उत्पन्न करती है. अगर आप बहुत ज्यादा सुस्त रहती हैं, फिजिकली इनऐक्टिव रहती हैं, तो आप को ऐक्टिव होना होगा.

– एसटीआई यानी सैक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के कारण भी गर्भधारण करने की क्षमता प्रभावित होती है. अगर आप को ऐसी किसी भी तरह की परेशानी है, तो तुरंत उस का इलाज करवाएं.

– पेस्टिसाइड्स, हर्बिसाइड्स, मैटल जैसे लेड सहित कुछ रासायनिक तत्त्व ऐसे होते हैं, जिन के संपर्क में आने से गर्भधारण की क्षमता प्रभावित होती है. इसलिए जहां तक हो सके इन के सीधे संपर्क में आने से बचें.

– मानसिक तनाव भी गर्भधारण की क्षमता को प्रभावित करता है. इसलिए अगर आप बहुत ज्यादा स्ट्रैस लेती हैं, तो उस से बचें.

कैसे होता है गर्भधारण

एक महिला जिसे हर महीने मासिक चक्र होता है, वही गर्भधारण कर सकती है. असल में 2 मैंस्ट्रुअल साइकिल के बीच ओव्युलेशन पीरियड होता है. यह वह पीरियड होता है जब ओवरी से एग रिलीज होते हैं यानी अंडे निकलते हैं. सामान्य अवस्था में एक महिला में ओव्युलेशन की प्रक्रिया अगले मैंस्ट्रुअल साइकिल के 2 सप्ताह पहले शुरू हो जाती है. ओव्युलेशन के दौरान रिलीज होने वाले एग 24 घंटे तक जीवित रहते हैं, उस के बाद मर जाते हैं. ओव्युलेशन के दौरान जब पतिपत्नी के बीच शारीरिक संबंध बनता है, तो एग और स्पर्म एकदूसरे के संपर्क में आते हैं. इसी समय स्पर्म द्वारा एग को फर्टिलाइज्ड यानी निशेचित करने से एक महिला गर्भधारण करती है.

गर्भधारण का सर्वोत्तम समय

गर्भधारण करने का सब से सही समय ओव्युलेशन के समय शारीरिक संबंध बनाना होता है. एक सामान्य महिला में ओव्युलेशन की अवधि 6 दिनों की होती है. ओव्युलेशन के बाद जहां एग्स मात्र 1 दिन ही जीवित रह पाते हैं, वहीं स्पर्म 1 सप्ताह तक जीवित रहते हैं. इस प्रकार ओव्युलेशन के बाद के 5 दिन गर्भधारण के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ओव्युलेशन के 1-2 दिन पहले शारीरिक संबंध बनाया जाए तो गर्भधारण की क्षमता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि इस से स्पर्म को एग के संपर्क में रहने का ज्यादा समय मिलता है.

गर्भधारण के समय होने वाली परेशानी

गर्भधारण के बाद महिला को काफी सावधानी बरतनी होती है. ऐसा न करने पर उसे कई समस्याएं हो सकती हैं.

हाई ब्लडप्रैशर: कई महिलाओं में प्रैगनैंसी के दौरान हाई बीपी की शिकायत देखी जाती है. ऐसे में नियमित जांच कराते रहना चाहिए.

ऐनीमिया: जब एक गर्भवती महिला पर्याप्त मात्रा में आयरन का सेवन नहीं करती है, तो उस के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है. इस स्थिति में लापरवाही बरतने पर मां और बच्चा दोनों की जान जा सकती है.

संक्रमण: एक गर्भवती महिला को संक्रमण से होने वाली बीमारियां जैसे, इन्फ्लुएंजा, हैपेटाइटिस ई, हर्पिस सिंपलैक्स, मलेरिया आदि से ग्रस्त होने का ज्यादा खतरा रहता है. इन बीमारियों का समय पर इलाज बहुत जरूरी है वरना मां और बच्चा दोनों की मृत्यु हो सकती है.

यूरिनरी इनकौंटिनैंस: गर्भावस्था के दौरान यूरिनरी इनकौंटिनैंस यानी मूत्र संबंधी विकार के मामले भी काफी देखने को मिलते हैं. इस प्रौब्लम के होने पर डाक्टर से सलाह लेना आवश्यक है.

स्ट्रैस: गर्भावस्था के दौरान और उस के बाद कई महिलाएं बेहद मानसिक तनाव में आ जाती हैं. इस तनाव का असर मां और बच्चे दोनों पर पड़ता है. इसलिए जितना जल्दी हो सके इस से बाहर निकलने की कोशिश करनी चाहिए.

– डा. साधना सिंघल, गायनेकोलौजिस्ट, श्री बालाजी ऐक्शन मैडिकल इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली

केलिकुंचिका : पलभर की गलती कैसे बनी जीवनभर की सजा ?

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तलाक भी चट मंगनी पट ब्याह जैसा होने लगे तो हर्ज क्या है ?

दिल्ली हाईकोर्ट के 2 ताजे फैसले चर्चा में हैं. दोनों ही तलाक के हैं. पहले में अदालत ने कहा है कि पत्नी द्वारा हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों का पालन न करने वाला व्यवहार दर्शाता है कि उस के मन में अपने पति के प्रति कोई प्यार और सम्मान नहीं बचा है. इस मामले में पत्नी ने पति के सामने ही अपनी मांग का सिंदूर मिटा दिया था, सुहाग की चूड़ियां तोड़ दी थीं और सफेद साड़ी पहन कर विधवाओं जैसा वेश रख लिया था.

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सुरेश कैत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह का बरताव दिखाना निश्चित तौर पर एक पति के लिए बड़े मानसिक आघात और क्रूरता से कम नहीं है. ऐसे में यह तलाक का ठोस आधार बनता है.

एक दूसरे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने ही एक और अहम फैसला देते हुए कहा है कि पतिपत्नी के बीच विवाद के दौरान पत्नी द्वारा पति की मर्दानगी पर सवाल उठाते हुए उसे नामर्द कहना और उसे मर्दानगी साबित करने के लिए मैडिकल टैस्ट कराने के लिए मजबूर करना मानसिक क्रूरता है.

पत्नी का इस तरह का व्यवहार भी तलाक का ठोस आधार बनता है. इस मामले में जस्टिस सुरेश कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बैंच ने तलाक की डिक्री के फैसले के खिलाफ पत्नी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया.

किसी आधार की बाध्यता क्यों ?

पहले मामले में अजीब बात यह है कि अदालत ने धर्मिक मान्यताओं और सुहागचिन्हों को इस बात का आधार माना है कि पत्नी के मन में पति के प्रति कोई सम्मान नहीं रह गया था. इस जोड़े की शादी साल 2009 में हुई थी और कुछ दिनों बाद ही दोनों में अनबन रहने लगी थी. क्या पतिपत्नी के बीच तलाक के लिए यही आधार काफी नहीं कि उन के विचार मेल नहीं खाते हैं. दोनों में कोई ट्यूनिंग नहीं है, पटरी नहीं बैठती है और इन्हीं वजहों के चलते दोनों को घुटन होती है और उन का एकसाथ एक छत के नीचे रहना अब संभव नहीं.

दूसरा मामला थोड़ा हट कर है और आम है. पति अगर नामर्द है तो कानूनन यह तलाक का आधार होता है. कोई पत्नी अदालत में इसे कैसे साबित कर सकती है. जाहिर है, मैडिकल टैस्ट से ही यह मुमकिन है. फिर इस में क्रूरता कैसी? क्या अदालत यह चाहती है कि कोई पत्नी जिंदगीभर शारीरिक सुख से वंचित रहे और यौनसंतुष्टि के लिए चोरीछिपे इधरउधर संबंध बनाए और उजागर हो जाने पर कुलटा व चरित्रहीन कहलाए. यह ठीक है कि इस मामले में पति मैडिकल टैस्ट में फिट पाया गया यानी पत्नी ने महज शक की बिना पर या जानबूझ कर पति पर नामर्दी का आरोप लगाया तो इसलिए वह दोषी है.

लेकिन इन और ऐसे मामलों में देखा और सोचा यह जाना चाहिए कि पतिपत्नी क्यों एकदूसरे पर सच्चेझूठे आरोप लगाने को मजबूर होते हैं.

तय है, इसलिए कि वे किसी भी कीमत पर तलाक चाहते हैं और तलाक बिना आरोप लगाए मिलता नहीं. पतिपत्नी एकदूसरे को नीचा दिखाने को आरोपों का सहारा लेने को मजबूर क्यों हों, यह अब अदालतों को सोचना चाहिए कि किसी एक पक्ष का इतना कह देना ही पर्याप्त क्यों नहीं माना जाए कि अब वह वैवाहिक जीवन और नहीं ढो सकता, इसलिए तलाक चाहता है. और आसान शब्दों में कहें तो तलाक के लिए किसी वजह का होना जरूरी क्यों.

धार्मिक होती अदालतें

असल में दिक्कत तो यह है कि छोटी से ले कर बड़ी अदालतें विवाह को एक धार्मिक संस्कार मानती हैं जबकि यह एक अनुबंध है. एक तलाक से यही कथित धार्मिक संस्कार अदालतों को ध्वस्त होते दिखता है तो उन की कोशिश यह रहती है कि तलाक या तो हो ही नहीं या फिर पतिपत्नी दोनों तारीख पर तारीख लेते इतने परेशान हो जाएं कि वे तलाक का ख़याल दिल से निकाल कर मजबूरी में साथ रहें. फिर भले ही उन की जिंदगी नर्क हो जाए. बिना तलाक लिए भी वे अलग रहें तो इस धार्मिक संस्कार पर आंच कम आती है.

पहले मामले पर बारीकी से गौर करें तो साफ होता है कि पत्नी को धार्मिक सुहागचिन्ह जकड़न लगने लगे थे, इसलिए उस ने इन्हें उतार दिया और करवाचौथ का व्रत रखना भी बंद कर दिया. अदालत ने इस पर हालांकि सीधा एतराज नहीं जताया है और इसे वक्तिगत स्वतंत्रता ही माना है लेकिन इसे पति के प्रति खत्म हो गए सम्मान से जोड़ कर अपना धार्मिक पूर्वाग्रह दिखा ही दिया है.

क्या सुहागचिन्ह धारण किए रहना और करवाचौथ जैसे व्रत करते व रखते रहना ही एक पत्नी के प्यार, समर्पण और पति के प्रति सम्मान है. फिर भले ही पत्नी उलटासुलटा कुछ भी करती रहे.

दूसरे मामले में भी मनुस्मृति की छाप और गूंज साफसाफ दिखती है कि पति नामर्द, लूलालंगड़ा, लम्पट, चोर, उचक्का, नालायक, नल्ला कैसा भी हो, पत्नी को उसे छोड़ना नहीं चाहिए. यह ठीक है कि इस मामले में पति शारीरिक तौर पर फिट पाया गया. हम यहां टैंपरेरी या परमानैंट नामर्दी की चिकित्सीय व्याख्या पर भी नहीं जा रहे बल्कि मकसद यह जताना भर है कि पत्नी को झूठा आरोप लगाने की नौबत ही क्यों आई ? और ऐसा एक नहीं बल्कि तलाक के हर मुकदमे में होता है कि दोनों पक्ष एकदूसरे पर अकसर झूठा आरोप ही मढ़ते हैं.

फैसलों में फुरती जरूरी

जब दोनों देखते हैं कि तलाक यह कहनेभर से नहीं मिल जाता कि योर औनर, हम एकदूसरे को नहीं झेल पा रहे हैं, इसलिए हमारा तलाक करवा दिया जाए. अब वे कानून और अदालत भी क्या जो सीधे से मान जाएं क्योंकि ज्यादा तलाक यानी धर्म की हानि और संस्कृति की बदनामी, जिस की आड़ ले कर हम पाश्चात्य समाज और संस्कृति को कोस कर खुश होते रहते हैं.

हालांकि कुछ फैसलों में अदालतों ने फुरती दिखाई है और पतिपत्नी की मानसिक, सामाजिक और दीगर परेशानियां व तनावों को देखते जल्द तलाक होने की बात भी कही है लेकिन यह हल्ला कुछ दिन ही रहता है और लोग भूल जाते हैं.

वकील भी चाहते हैं कि तलाक का मुकदमा लंबा खिंचे जिस से उन्हें हर पेशी पर दक्षिणा मिलती रहे. वे कभी अपने मुवक्किलों को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 बी के तहत तलाक की सलाह नहीं देते जिस में परस्पर सहमति से पतिपत्नी तलाक ले सकते हैं.

और सब से बड़ी बात, एकदूसरे पर सच्चेझूठे आरोप लगाने से बच जाते हैं जिन्हें अदालत में साबित करना टेढ़ी खीर होती है. अदालतों को चाहिए कि वे धार्मिक पूर्वाग्रह से बचते तलाक के मुकदमों की सुनवाई करें और फैसला दें. सुहागचिन्ह, करवाचौथ क्रूरता और नामर्दी जैसे शब्द और विचार न्याय को और जटिल बनाते हैं.

अगर यह कानून बन जाए कि किसी भी वजह से पतिपत्नी को सेम डे में तलाक मिल जाए तो जरूर पतिपत्नी छोटेमोटे सुलझ सकने योग्य विवादों और फसादों में अदालत जाने से कतराएंगे. कई मामलों में किसी एक पक्ष की मंशा दूसरे को सबक सिखाने की भी होती है, उस पर भी इस से रोक लगेगी. सुबह 11 बजे अदालत गए और शाम 5 बजे तलाक हो गया तो फिर किस बात की परेशानी?

तालिबान ने अफगानी लड़कियों से 6ठी कक्षा के बाद पढ़ाई का हक छीना, पर क्यों ?

सालभर पढ़ाई करने के बाद जब बच्चा परीक्षा उत्तीर्ण करता है तो नई कक्षा में पहुंचने का उत्साह और खुशी चरम पर होती है. भविष्य के सुंदर सपने आंखों में तैरते हैं. मगर अफगानिस्तान में 6ठी कक्षा पास करने वालि लड़कियों की आंखों में आंसू हैं. वहां भविष्य के सुंदर सपने नहीं बल्कि डर और अंधकार है. हताशा और अवसाद है क्योंकि अफगानिस्तान का दमनकारी तालिबानी शासन 6ठी कक्षा के बाद लड़कियों को आगे पढ़ने की इजाजत नहीं देता.

काबुल में रहने वाली 13 वर्षीया सेतायेश साहिबजादा अपने भविष्य को ले कर चिंतित है और अपने सपनों को साकार करने के लिए स्कूल नहीं जा पाने के कारण उदास है. साहिबजादा कहती है, ”मैं अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकती. मैं टीचर बनना चाहती थी लेकिन अब मैं पढ़ नहीं सकती, स्कूल नहीं जा सकती.”

बहारा रुस्तम (13) काबुल स्थित बीबी रजिया स्कूल में 11 दिसंबर को आखिरी बार स्कूल गई थी. उसे पता है कि उसे अब आगे पढ़ने का अवसर नहीं दिया जाएगा. तालिबान के शासन में वह फिर से कक्षा में कदम नहीं रख पाएगी. उस की सारी सहेलियां छूट जाएंगी. अब वह उन के साथ खेल नहीं पाएगी. उन से अपने सुखदुख नहीं बांट पाएगी.

लड़कियों की पढ़ाई पर रोक

अफगानी लड़कियां तालिबानी शासन, जो शरीयत पर चलता है, के तहत 6ठी कक्षा पास करने के बाद घरों में कैद कर दी जाएंगी. उन की शादी हो जाएगी, फिर वे बच्चे पैदा करेंगी, नौकरों की तरह ताउम्र किसी दूसरे के घर के काम करेंगी, मारीपीटी जाती रहेंगी, फिर एक दिन मर कर जलील जिंदगी से मुक्त हो जाएंगी.

अफगानी औरतें एक ऐसी जिंदगी जी रही हैं जहां वे अपना कोई फैसला नहीं ले सकती हैं. किसी के आगे अपनी कोई राय नहीं रख सकती हैं. अपनी मरजी से कोई काम नहीं कर सकती हैं. उन्हें कोई अधिकार नहीं है. वे सार्वजनिक स्थलों पर नहीं जा सकतीं. उन्हें नौकरियों से प्रतिबंधित कर उन के घरों तक ही सीमित कर दिया गया है.

अफगानिस्तान में इस साल औरतों की एक पूरी पीढ़ी से शिक्षा का अधिकार छीन लिया गया है. अगर यह सिलसिला जारी रहा तो अफगानिस्तान में महिला डाक्टर, महिला नर्से नहीं होंगी. महिलाओं की गर्भ संबंधी दिक्कतों का इलाज, बच्चे की डिलीवरी सब अशिक्षित घरेलू दवाइयां करेंगी. वे बचेंगी या मरेंगी, इस की चिंता किसी को नहीं है. शरीयत का शासन अफगानी औरतों की जिंदगी को उस काल में धकेल रहा है जब इंसान जंगलों में रहा करता था.

धर्म की सत्ता

धर्म की बुनियाद पर खड़े हुए राष्ट्र और दुनिया में जहां भी धर्म सत्ता चला रहा है उस देश और समाज में औरतों की औकात दासी की है. वे सिर्फ आदमी के हुक्म की गुलाम हैं. आदमी औरत को घर में कैद कर के रखे, जब चाहे उस के जिस्म को रौंदे, हर सालदरसाल में उस से बच्चे पैदा करवाए, यह आदमी के लिए धर्मसम्मत है. वह हुक्म देता है कि औरत उस का घर साफ करे, उस के लिए लजीज खाना पकाए, बरतन मांजे, उस के बच्चे पाले, उस के घरवालों की खिदमत करे और यदि उस ने इस में कहीं कोई कोताही दिखाई तो आदमी हंटरों की मार से उस का पूरा जिस्म लहूलुहान कर दे, या उसे गोली से उड़ा दे, इस की इजाजत धर्म देता है.

औरत के लिए धर्म से बड़ा शत्रु कोई नहीं है. अपनी बीवी का अन्य पुरुष से बलात्कार कराने का रास्ता धर्म बताता है. अपनी स्त्री को गर्भावस्था में त्याग देने और उसे जंगल जाने के लिए मजबूर करने पर धर्म पुरुष की भर्त्सना नहीं करता, बल्कि उसे पुरुषोत्तम बना देता है. एक स्त्री को भरी सभा में नंगा करने पर तमाम धार्मिक व्यक्तियों की जबान तालू से चिपक जाती है, बड़ेबड़े हथियार उठाने वाले सूरमाओं के हाथों को लकवा मार जाता है, नसों का खून बर्फ हो जाता है. धर्म के हाथों औरत की इस दुर्दशा की कहानियों से धर्मग्रंथ भरे पड़े हैं और मूर्ख औरतें ऐसे धर्मग्रंथों को सिर पर उठाए फिरती हैं. अफगानिस्तान में जब तालिबानी अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिशों में थे तब शरीयत का शासन चाहने वालों में औरतें भी शामिल थीं.

आश्चर्य होता है कि जिस धर्म को हथियार बना कर प्राचीन काल से पुरुष स्त्री पर हावी रहा, उस का उत्पीड़न करता रहा, उस को अपना गुलाम बनाए रखा, उस धर्म का त्याग करने के बजाय औरत दिनरात उस के महिमामंडन और प्रसार में क्यों लगी है?

दुनियाभर में चाहे कोई भी धर्म हो, स्त्रियां बढ़चढ़ कर खुशीखुशी सारे कर्मकांडों को पूरा करती हैं. क्या औरतों को आज तक यह समझ में नहीं आया कि धर्म की जंजीरों में उन का विकास, समृद्धि और स्वतंत्रता दम तोड़ रहे हैं. क्या औरत कभी यह बात समझेगी कि अशिक्षित लोग कभी भी स्वतंत्र और समृद्ध नहीं हो सकते.

न्यू ईयर की छुट्टियों में घूमने का प्लान पहले से बनाएं, वरना यह होगा नुकसान

नए साल की शुरुआत लोग कुछ यादगार तरीके से करना पसंद करते हैं. इस के लिए दोस्तों या परिजनों के साथ पार्टी या फिर कहीं घूमने जाने की योजना बनाने लगते हैं. वैसे भी, इस साल की शुरुआत वीकैंड के फौरन बाद हो रही है. यानी, 30 और 31 दिसंबर को शनिवार व रविवार की छुट्टी के बाद 1 जनवरी, 2024 को धमाल मचाने का मजा ही अलग होगा.

3 दिनों की लगातार छुट्टी की वजह से जाहिर है ज्यादातर लोग घूमने का प्लान बना रहे होंगे. सर्दी के मौसम में हिल स्टेशनों की खूबसूरती और अधिक बढ़ जाती है. इस वजह से 3 दिनों के एक खूबसूरत और यादगार ट्रिप के लिए आप भारत के पहाड़ी इलाकों की ओर रुख कर सकते हैं. कुछ लोग अपने आसपास कहीं घूमने जाने कि सोच रहे होंगे तो कुछ वृंदावन, ऋषिकेश जैसे स्थलों की सैर करने की योजना बना रहे होंगे.

आप कहीं भी जाने वाले हों, इस बात का खयाल रखें कि नए साल में हर जगह पर्यटकों की संख्या बहुत बढ़ जाती है. इसलिए किसी भी जगह जाने के लिए पहले से प्लान बनाना और तैयारी करना बहुत जरूरी है ताकि सफर का मजा किरकिरा न हो जाए.

नए साल पर पहाड़ों के रास्तों में जाम

हर बार नए साल के मौके पर शिमला-मनाली में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है. हिमालय की बर्फ से ढकी सफेद चादर का नजारा देखने को लोग दूरदराज से पहुंचते हैं. इस वर्ष महज क्रिसमस के मौके पर शिमला में एक दिन में 13 हजार से ज्यादा गाड़ियों की आवाजाही हुई है. मनाली की भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही. पर्यटकों से गुलजार पहाड़ी इलाकों में ट्रैफिक जाम की समस्या बहुत ज्यादा देखने को मिली.

पिछले साल भी नए साल के मौके पर हजारों यात्रियों की गाड़ियां घंटों ट्रैफिक जाम में फंसी रही थीं. क्रिसमस की छुट्टियों में मनाली में सैलानियों का सैलाब देखा गया. वहां एक लाख से अधिक टूरिस्ट पहुंचे. सड़कों पर भी वाहनों की लंबी कतारें नजर आईं.

पहले से कराएं बुकिंग

पर्यटकों की संख्या बढ़ने के कारण नए साल के मौके पर अधिकतर होटलों की बुकिंग पहले से हो जाती है और बाद में अच्छे व किफायती होटलों में कमरे मिलना मुश्किल हो जाता है. वहीं पर्यटन का सीजन होने के कारण होटलों में कमरे का रेट भी बढ़ जाता है. इसलिए ध्यान रखें कि अगर आप नए साल पर किसी भी पर्यटन स्थल पर जा रहे हैं तो पहले से ही औनलाइन होटल बुकिंग करा लें ताकि वहां पहुंच कर भटकना न पड़े और किराया बढ़ा कर न देना पड़े.

कई दफा ऐसा भी होता है कि भीड़ अधिक होने और बढ़ते जाम की स्थिति में प्रशासन भी सिर्फ उन लोगों को आगे जाने देता है जिन के पास होटल की पहले से बुकिंग है यानी जिन्होंने होटल पहले ही बुक कर रखे हैं. जिन के पास होटल बुक करने का कोई प्रूफ नहीं है उन्हें बीच रास्ते से ही लौटाया भी जाया जा सकता है.

ऐसे में खुद की गाड़ी से यात्रा कर रहे हैं तो वीकैंड से पहले ही यहां पहुंच जाएं. अगर आप ट्रेन, फ्लाइट या बस से जा रहे हैं तो पहले से रिजर्वेशन कराएं. वरना अंतिम समय में आप को तिगुनाचौगुना किराया दे कर रिजर्वेशन लेना होगा. एयरलाइन टिकट घोटालों में न फंसें. प्रयास करें कि किसी ऐसी जगह पर घूमने की योजना बनाएं जहां बहुत अधिक सैलानी न हों ताकि आप खुल कर नववर्ष के जश्न को एंजौय कर सकें.

अगर आप अंधविश्वासी प्रवृत्ति के हैं और किसी धार्मिक स्थल का रुख कर रहे हैं यानी मंदिरों के दर्शन करने जा रहे हैं तो भी ध्यान रखें कि वहां इतनी भीड़ होगी कि पैर रखने की जगह भी मुश्किल से मिलेगी. ऐसे स्थानों में होटल वगैरह पहले से बुक रहते हैं और रेट भी ज्यादा होता है. इसलिए बेहतर यही होगा कि उसी दिन वापस लौटने का प्लान रखें.

सैलिब्रेशन ट्रिप की तैयारी पहले से करें

  • बैग्स विद व्हील चुनें

ज्यादातर लोगों को बैकपैक ले कर चलने की आदत होती है. यह एक अच्छा औप्शन है मगर ध्यान रखें कि जब आप कहीं बाहर घूमने के लिए जाने वाले हों तब आप को जाम की वजह से कहीं भी काफी चलना पड़ सकता है. ऐसे में अगर आप बैकपैक लेना चुनते हैं और अपना सारा सामान उस में रखते हैं तो आप की पीठ की हालत खराब हो सकती है. इसलिए हमेशा ऐसा सूटकेस या बैग लेना समझदारी है जिस में पहिए हों. इन बैग्स के साथ ज्यादा सामान ले कर चलना और ले जाना आसान होता है.

  • दवाइयां और फर्स्टएड बौक्स न भूलें

आप जहां भी जाएं, अपनी सेहत का खयाल रखना बेहद जरूरी है. कभी भी कोई अप्रत्याशित स्थिति आ सकती है, जैसे ऐक्सिडैंट होना, जाम में फंसना, उलटी या सिरदर्द होना आदि. इस के लिए तैयारी कर के चलें. जो दवाइयां आप रैगुलर ले रहे हैं, जैसे थायराइड या शुगर आदि की मैडिसिन, उन्हें साथ ले जाना न भूलें. एक फर्स्टएड बौक्स भी साथ में रखें. इन के अलावा कुछ जरूरी दवाइयां भी साथ रखें. बुखार, सर्दी खांसी, सिरदर्द और वौमिटिंग की दवा हमेशा आप के साथ होनी चाहिए. इसी तरह ग्लूकोज, ओआरएस आदि रखना भी इंपोर्टेंट है.

  • ठंड के हिसाब से आरामदायक कपड़े पैक करें

ठंड के मौसम में भारी कपड़े जरूरी हो जाते हैं. मगर इस मामले में भी समझदारी से काम लें. कहीं भी आप को जाम का सामना करना पड़ सकता है. हो सकता है कि कमरा मिलने में असुविधा हो या कोई और परेशानी हो. ऐसे में बहुत कपड़े रखना मूर्खता ही है. आप एक भारी गरम जैकेट पहन लीजिए और दोचार एक्स्ट्रा स्वैटर रखिए. मगर क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी भली. यानी, कई गरम कपड़ों के बजाय कुछ ही बेहतरीन और भरपूर गरमाहट देने वाले कपड़े ले जाएं. ऐसे कपड़े पैक करें जो कम्फर्टेबल हों. पैकिंग करते वक्त जगह और मौसम का ख़याल भी रखें.

  • ट्रैवल से जुड़े इंपोर्टेन्ट डाक्यूमैंट्स रखें साथ

आप के बैग में एक फोल्डर के लिए जगह होनी चाहिए जिस में आप के सभी महत्त्वपूर्ण ट्रैवल डाक्यूमैंट्स मौजूद हों. आप की विभिन्न प्रकार की आईडी, टिकेट्स और होटल की जानकारी वगैरह आप के पास जरूर होने चाहिए. साथ ही, क्रैडिट कार्ड वगैरह के लिए भी अलग जगह रखें.

  • जरूरी कौस्मेटिकस ही रखें

पैकिंग करते वक्त आप को टूथब्रश, टूथपेस्ट, सनस्क्रीन और एक डिओडोरेंट जैसी सब से जरूरी चीजें एक छोटे बैग में रख लेनी चाहिए. यदि आप के पास कुछ चीजें हैं जिन के बिना आप कहीं नहीं जा सकते हैं तो उन्हें साथ रखें, जैसे लिपस्टिक, पाउडर आदि. लेकिन अगर आप ज्यादा ब्यूटी प्रोडक्ट्स लेते हैं तो यह आप के लिए मैनेज करना कठिन होगा. ज्यादातर होटल आप को जरूरी कौस्मेटिक्स, जैसे लोशन, क्रीम, शैंपू और कंडीशनर उपलब्ध करवाते हैं इसलिए बेजरूरत की चीजें न रखें.

  • गैजेट्स को साथ रखना न भूलें

आज के डिजिटल एरा में गैजेट्स साथ में होने बहुत जरूरी हैं, इसलिए आप जहां भी जाएं उन्हें अपने साथ ले जाना सुनिश्चित करें. मोबाइल के बिना तो वैसे भी आज के समय में कोई दो मिनट नहीं रह सकता. तसवीरें लेने और यादगार वीडियो बनाने के लिए कैमरा रखना भी जरूरी है. साथ ही, मोबाइल चार्जर, रिस्ट वौच आदि भी रखना न भूलें.

मैडिकल क्लेम के लिए अब 24 घंटे एडमिट रहना जरूरी नहीं

देश में बीमा खासतौर से स्वास्थ्य बीमा को ले कर जागरूकता नहीं है. आंकड़े इस की गवाही भी देते हैं कि महज 27 फीसदी लोगों ने ही स्वास्थ्य बीमा ले रखा है. इरडा यानी भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के एक आंकड़े के मुताबिक उस की और सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी लोग स्वास्थ्य बीमा लेने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. अब इरडा की कोशिश यह है कि जैसे यूपीआई की सुविधा पूरे देश में फैल गई है वैसे ही बीमा कंपनियों को भी अपने प्लान कुछ इस तरह बनाने चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा लोग स्वास्थ्य बीमा लें.

लेकिन यह आसान काम नहीं है क्योंकि बीमा कंपनियों के बारे में लोगों के अनुभव बहुत अच्छे नहीं हैं. क्लेम का पैसा उतनी आसानी से मिलता नहीं है जितना कि पौलिसी लेते वक्त बताया जाता है. दरअसल, बीमा कंपनियों के नियम और शर्तें बहुत ज्यादा कड़े होते हैं. इन की अधिकतर औपचारिकताएं भी गैरजरूरी होती हैं. देश में 24 बीमा कंपनियां और 34 सामान्य बीमा कंपनियां अपनी सेवाएं दे रही हैं लेकिन उन की पहुंच बहुत सीमित है.

हालांकि सरकारों की विभिन्न योजनाओं के चलते लोग इस से जुड़ रहे हैं लेकिन उन के अनुभव बहुत अच्छे नहीं हैं. एनएफएचएस-5 की एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी स्वास्थ सेवाओं की खराब गुणवत्ता के चलते लोग बीमा सहूलियत का इस्तेमाल ही नहीं करते. वहीं प्राइवेट सैक्टर की अपनी अलग दिक्कतें हैं.

दूर हुई बड़ी दिक्कत

सब से अहम दिक्कत थी अस्पताल में 24 घंटे भरति रहने की शर्त, जिसे अब इरडा ने दूर करने की कोशिश की है. इरडा के नए नियम के मुताबिक अब अस्पताल में बिना 24 घंटे भरती हुए भी मैडिकल क्लेम लिया जा सकता है. इस सहूलियत के लिए बीमा कंपनियों को अलग से इंतजाम करने होंगे. यह सहूलियत या क्लेम डे केयर ट्रीटमैंट के तहत मिलेगा.

दरअसल, लोग स्वास्थ्य बीमा इसलिए भी नहीं लेते कि कई बीमारियों में अस्पताल में भरती होने की जरूरत नहीं पड़ती. ऐसे में उन्हें स्वास्थ्य बीमा अनुपयोगी लगता है जो गलत भी कहीं से नहीं. अब यह परेशानी एक हद तक दूर होती नजर आ रही है. इरडा के मुताबिक अब जिन खास बीमारियों के इलाज के लिए क्लेम लिया जा सकता है उन में कीमोथेरैपी, टांसिल्स का औपरेशन, मोतियाबिंद का औपरेशन, रेडियोथेरेपी, कोरोनरी एंजियोग्राफी, साइनस का औपरेशन, हीमोडायलिसिस, स्किन ट्रांसप्लान्टेशन और घुटनों का औपरेशन शामिल हैं.

लेकिन डे केयर ट्रीटमैंट में बीमा कंपनियां अब क्लेम तो देंगी पर उन में डाक्टर परामर्श शुल्क जांचें और टैस्ट शामिल नहीं होंगे. यह बहुत ज्यादा घाटे का सौदा महंगे होते इलाजखर्च को देखते नहीं है क्योंकि भले ही 2 से 12 घंटे अस्पताल में भरती रहना पड़े, इन बीमारियों में 25-30 हजार रुपए खर्च हो ही जाते हैं.

मनमानी और फैसला

इरडा का यह फैसला आम लोगों के लिए राहत और सहूलियत देने वाला है लेकिन इस से बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक लग पाएगी, इस में शक है. यह फैसला भी इरडा ने एक अदालती फैसले के बाद ही लिया है. गुजरात के वड़ोदरा के रमेशचंद्र जोशी ने साल 2017 में उपभोक्ता फोरम में शिकायत की थी कि उन्होंने अपनी पत्नी को साल 2016 में डर्मटोमायो साइटिस नाम की बीमारी के इलाज के लिए अहमदाबाद के लाइफ केयर इंस्टिट्यूट औफ मैडिकल साइंस एंड रिसर्च सैंटर में भरती कराया था. एक दिन में ही इलाज हो कर पत्नी की अस्पताल से छुट्टी हो गई जिस पर कोई 45 हजार रुपए का खर्च आया था.

इस के बाद उन्होंने जब अपनी बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरैंस से क्लेम मांगा तो कंपनी ने क्लौज 3.15 का हवाला देते हुए उन का क्लेम खारिज कर दिया. इस पर रमेशचंद्र ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली, तो फैसला उन के पक्ष में आया.

फोरम का यह तर्क अपनी जगह एकदम सटीक था कि आज के आधुनिक युग में इलाज के लिए तरीके और दवाएं विकसित हुई हैं. ऐसे में डाक्टर उसी के मुताबिक इलाज करते हैं. ऐसे में भले ही मरीज को कम समय के लिए अस्पताल में भरती कराया गया था, फिर भी वह मैडिकल इंश्योरैंस क्लेम का हकदार है.

इस फैसले के बाद इरडा ने जो नियम बनाया उस से आम लोगों को राहत तो मिलेगी लेकिन जरूरत बीमा कंपनियों की मनमानी पर लगाम कसने की भी है. पौलिसी देते वक्त तो कंपनियां और उस के एजेंट लच्छेदार बाते करते हैं लेकिन जब मरीज इलाज के लिए अस्पताल में भरती होता है तो पौलिसी में तरहतरह की खामियां निकाल कर और नियमकायदेकानून बता कर क्लेम रिजैक्ट कर दिए जाते हैं.

पीड़ित लोग जब अपने अनुभव दूसरों को सुनाते बताते हैं तो हर किसी को हैल्थ इंश्योरैंस बेकार की चीज लगने लगती है. बिरले ही लोग हैं जिन्हें क्लेम मिल पाता है वरना लोग मन मसोस कर उस घड़ी को कोसते नजर आते हैं जब उन्होंने पौलिसी ली थी. देशभर की अदालतों में हजारों मुकदमे बीमा कंपनियों के खिलाफ चल रहे हैं जो बताते हैं कि सरकारी एजेसिंयों की लाख कोशिशों के बाद भी लोग स्वास्थ्य बीमा करवाने में कतराते हैं.

50 पार शादी में हैरानी क्यों ?

56 साल की उम्र में अरबाज खान एक बार फिर दूल्हा बन गए हैं. आज 24 दिसंबर 2023 को उन्होंने मेकअप आर्टिस्ट शौरा खान के साथ निकाह किया. अरबाज पिछले कुछ समय से मेकअप आर्टिस्ट शौरा खान को डेट कर रहे थे. अरबाज और शौरा ने अचानक शादी का डिसीजन लिया और शादी के बंधन में बंध गए. दोनों की मुलाकात फिल्म पटना शुक्ला के दौरान हुई थी. दोनों ने अपने रिलेशनशिप को प्राइवेट रखा था.

शौरा से पहले अरबाज जौर्जिया एंड्रियानी को डेट कर रहे थे लेकिन दोनों का रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया. कुछ दिनों पहले जौर्जिया ने अरबाज खान संग ब्रेकअप का खुलासा किया था. जौर्जिया एंड्रियानी को डेट करने से पहले अरबाज खान ने मलाइका अरोड़ा से शादी रचाई थी. दोनों की लव मैरिज थी लेकिन कुछ सालों बाद दोनों के रिश्ते में खटास आ गई. फिर दोनों ने साल 2017 में एकदूसरे से तलाक ले लिया था. मलाइका और अरबाज का एक बेटा भी है जिसका नाम अरहान खान है.

जब अधिक उम्र में शादी की बात चल रही हो तो भला पूर्व विदेश राज्य मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर को कैसे भूल सकते हैं. उन्होंने 54 साल की उम्र में सुनंदा पुष्कर से शादी की थी. दोनों लंबे समय से काफी अच्छे दोस्त थे और उन्होंने इस दोस्ती को अगस्त 2010 में शादी में बदल दिया. थरूर और सुनंदा दोनों की यह तीसरी शादी थी लेकिन उनका यह साथ ज्यादा समय तक नहीं चल सका. 2014 में सुनंदा की मौत की खबर मीडिया में आई.

वैसे 50 साल से भी अधिक उम्र में शादी करने वालों की लिस्ट काफी लंबी है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह 65 के पार जाने के बाद दूल्हा बने. उन्होंने 2015 में 67 साल की उम्र में पत्रकार रहीं अमृता राय के साथ सात फेरे लिए थे. दोनों की ही यह दूसरी शादी थी.

कांग्रेस के कद्दावर नेता और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी शादी करने वाले शायद दुनिया के सब से बुजुर्ग नेता हैं. उन्होंने मई, 2014 में 88 साल की उम्र में 62 साल की उज्जवला शर्मा के साथ लखनऊ में शादी रचाई. नारायण दत्त उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दो राज्यों के मुख्यमंत्री रहे हैं. हालांकि इस शादी के लिए उन के बेटे रोहित शेखर ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी.

रोहित ने 2005 में अदालत में यह दावा किया था कि नारायण दत्त तिवारी उन के पिता हैं. नौबत डीएनए टेस्ट तक पहुंची जिस में रोहित की बात साबित भी हुई. अंतत: उन्हें रोहित को अपनाना पड़ा. भारतीय समाज में किसी महिला का सार्वजनिक रूप से किसी रिश्ते की बात और विवाहेतर संबंध से बच्चे की बात स्वीकार करना बेहद असामान्य घटना है. लेकिन उज्जवला शर्मा ने इसे खुल कर स्वीकार किया और बेटे रोहित शेखर के साथ अपना हक पाने के लिए संघर्ष भी किया. इसी संघर्ष का नतीजा रहा कि उम्र के आखिरी पड़ाव में एनडी तिवारी को उज्जवला शर्मा से शादी भी करनी पड़ी.

दुनिया के महान नेताओं की सूची में शामिल और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ 27 सालों तक संघर्ष करने वाले नेल्सन मंडेला ने भी जीवन के उत्तरार्ध में शादी की. 1998 में उन्होंने अपने 80 वें जन्मदिन पर राजनेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रेसीया मासेल के साथ शादी की. यह उन की तीसरी शादी थी.

क्रिकेट के बाद पाकिस्तान की राजनीति में भी अपनी खास पहचान बनाने वाले 65 साल के इमरान खान ने 2015 में बीबीसी की पत्रकार रही रेहम खान के साथ शादी रचाई थी. तब उनकी उम्र 62 साल की थी. वैसे यह शादी महज 9 -10 महीने ही चल सकी. दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया. इमरान और रेहम दोनों की ही यह दूसरी शादी थी. इसके बाद इमरान खान ने पंजाब के राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखने वाली बुशरा बीबी से 65 साल की उम्र में 2018 में तीसरी शादी की. बुशरा की भी ये दूसरी शादी थी. बुशरा और इमरान की मुलाकात 2015 में पहली बार हुई थी. इस के बाद से दोनों एकदूसरे को डेट करने लगे थे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उन चंद राजनेताओं में शुमार हैं जिन्होंने 50 के पार जाने के बाद शादी रचाई थी. उन्होंने अब तक तीन शादियां की हैं. इस से उन के पांच बच्चे हैं. हालांकि जिस वक्त उन्होंने तीसरी शादी की तब तक राजनीति में कदम नहीं रखा था. 2005 में उन्होंने पूर्व मौडल मैलानिया क्नास के साथ 2005 में 59 साल की उम्र में तीसरी शादी की थी. दोनों के बीच 24 साल का अंतर है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक ने हाल ही में 60 साल की उम्र में रवीना खुराना से शादी की. 60 साल की उम्र में शादी कर के मुकुल सुर्खियों में आ गए थे.

दिग्गज एक्टर आशीष विद्यार्थी ने 25 मई 2023 को असम की रहने वाली रूपाली बरुआ संग दूसरी शादी की. दोनों की ये कोर्ट मैरिज थी. वहीं आशीष और उनकी पूर्व पत्नी राजोशी ने करीब 7 महीने पहले तलाक की अर्जी डाली थी. शादी के बाद उन्हें ये बोलकर ट्रोल किया गया कि 60 साल की उम्र में शादी कौन करता है.

तब आशीष विद्यार्थी ने एक वीडियो शेयर कर अपने मन की बात साझा की थी और कहा था, ‘ हम सब की अलगअलग जिंदगियां हैं, अलगअलग जरूरतें हैं, अलगअलग मोके हैं और हम सब जिंदगी खुशी से जीना चाहते हैं. मेरी जिंदगी में भी तकरीबन 22 साल पहले पीलू यानि राजोशी (पहली पत्नी) आई और हम दोनों बहुत अच्छी तरह पति-पत्नी की तरह चले. इस दौरान हमारा प्यारा बेटा अर्थ हुआ. वह बड़ा हुआ कालेज गया अब नौकरी कर रहा है. इस 22 साल की मजेदार जर्नी के दौरान हम लोगों ने कुछ ढाई साल पहले ऐसा पाया कि हम लोग भविष्य जैसा देखते हैं उस में कुछ फर्क आया है. जब हमें लगा कि हमारे बीच कुछ मतभेद है जिस से हम आगे खुश नहीं रह पाएंगे तब हम दोनों ने तय किया कि अब हम अलग-अलग रास्ते पर चलेंगे.’

अभिनेता मिलिंद सोमन अपनी निजी जिंदगी को ले कर काफी चर्चा में रहे हैं. चाहे वह बोल्ड फोटोशूट हो या फिर शादी. साल 2018 में मिलिंद ने 53 की उम्र में अंकिता कुंअर से दूसरी शादी थी. अंकिता कुंअर मिलिंद से 20 साल छोटी हैं.

बॉलीवुड में पौजिटिव रोल से लेकर विलेन तक के किरदार में नजर आ चुके जाने माने अभिनेता कबीर बेदी का नाम भी इसी लिस्ट में शामिल है. वह 70 की उम्र में दूल्हा बने थे. कबीर बेदी ने साल 2016 में मौडल परवीन दोसांझ से 70 की उम्र में शादी की थी और ये उन की तीसरी शादी है.

बौलीवुड के एक्शन हीरोज में एक संजय दत्त भी अपनी निजी जिंदगी को लेकर खूब चर्चा में रहे. उन्होंने साल 2008 में मान्यता दत्त से शादी की थी. उस समय अभिनेता की उम्र 50 साल से महज एक साल कम यानी 49 साल थी. यह संजय दत्त की तीसरी शादी है.

टीवी से लेकर फिल्मों तक में अपनी अदाकारी से अलग पहचान बनाने वाली दिग्गज अभिनेत्री सुहासिनी मुले की प्रेम कहानी भी बेहद ही दिलचस्प है. उन को सोशल मीडिया के जरिए भौतिकी वैज्ञानिक अतुल गुर्टू से प्यार हुआ था. वह पहले से शादीशुदा थे लेकिन उन की पत्नी का निधन हो चुका था. इस के बाद साल 2011 में सुहासिनी और अतुल गुर्टू शादी के बंधन में बंध गए. उस समय सुहासिनी मुले की उम्र 60 साल थी.

आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम एनटी रामाराव ने 20 साल की उम्र में 1943 में बसावा टाकाराम से पहली शादी की थी. साल 1985 में उनकी पत्नी का निधन हो गया था. अपनी पत्नी की मौत के दौरान वे राज्य के सीएम पद पर काबिज थे. बाद में राजनीतिक जीवन के दौरान ही उन्होंने 1993 में 70 साल की उम्र में तेलुगु लेखिका लक्ष्मी पार्वती से शादी कर ली. लेकिन एनटीआर के परिवार ने उन की दूसरी शादी को कभी भी स्वीकार नहीं किया.

भोजपुरी सिनेमा के अभिनेता सिंगर और राजनेता मनोज तिवारी ने पहली पत्नी से तलाक होने के बाद साल 2020 में सुरभि तिवारी से दूसरी शादी की. उस समय अभिनेता की उम्र 50 साल थी.

सच है कि जिंदगी वह है जिस में हम खुशी से रह सकें. हमें किसी और के लिए नहीं बल्कि अपने लिए जीना और खुश रहना होता है. अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद अगर हम खुश रहने के लिए दूसरी शादी करना चाहें तो इस में कुछ भी गलत नहीं है. वैसे भी बात उम्र की हो ही क्यों? हम किसी भी उम्र में खुश रहने का सपना देख सकते हैं और उस के लिए कदम उठा सकते हैं.

अधिक उम्र में दूसरी शादी करना अकेले रहने से बहुत अच्छा है. अगर इंसान तलाकशुदा है तो भी उसे खुश रहने और अपना परिवार बसाने का हक है भले ही उसकी उम्र कितनी भी हो. इस उम्र में भी इंसान जिम्मेदारी लेता है तो उसे निभाता भी है. गलत शादी में रह कर अपने जीवन में हमेशा निराश और तनावग्रस्त रहने की बजाय नई जिंदगी शुरू करना ज्यादा बेहतर है. इस में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

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