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तेलंगाना में सरकारी यज्ञ

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने गारंटी दी है कि तेलंगाना अब फलेगा फूलेगा. अब वहां सोने की वर्षा होगी. सूखा, बाढ़, भूख, किसानों की आत्महत्याएं सब खत्म हो जाएंगी. स्वयं इंद्र, विष्णु, शिव, राम, कृष्ण राजपाट चलाएंगे और रामराज्य नहीं, स्वर्ग ही उतर आएगा. उन्होंने यह भी बता दिया है कि राज्य के हर घर में चमक के लिए काम करने की जरूरत नहीं है. किसान खेतों में न जाएं, मजदूर फावड़ा न उठाएं, कारीगर फैक्टरियों में न जाएं, औरतें रसोइयों में न जाएं. बस, यज्ञहवन कराएं.

उन्होंने चंडी देवी को खुश करने के लिए 22 दिसंबर को हैदराबाद में 1500 श्रेष्ठ पुजारियों को बुला कर महान यज्ञ कराया. के चंद्रशेखर राव ने भगवा कपड़े पहने, अपनी पत्नी शोभा को भी भगवा साड़ी पहनवाई, राज्य के राज्यपाल भी भगवा कपड़ों में आए, तेलंगाना राज्य समिति पार्टी पूरे सबल सहित भगवाई या पीले कपड़ों में मौजूद थी. वीआईपीयों को खास जगह दी गई. बाकी लोग बस या कार पार्क करने के बाद मील 2 मील पैदल नंगे पांव चल कर यज्ञपंडाल तक पहुंचे.

जो सही जगह पहुंचीं उन भक्तिनों को कुमकुम की डब्बी, साड़ी, लड्डू मिले. जो पैसे चढ़ाए उस से प्रसादम की गिनती करना तो महापाप होगा. भक्तों और भक्तिनों ने खूब दिल खोल कर तेलंगाना की प्रगति के लिए दान दिया.

आंध्र प्रदेश सूखे से पीडि़त है पर यह पक्का है कि इस यज्ञ के बाद जम कर बारिश होगी. चंडी देवी इंद्र से कहेंगी कि चंद्रशेखर राव पर प्रसन्न हों और उन्हें लंबी चीफमिनिस्ट्री दें, साथ ही राज्य की जनता का घर भर दें.

जो लाखों लोग वहां आए वे ही प्रसन्न नहीं हुए, सभी ऋषिमुनि, पंडे, पुजारी, स्वामी प्रसन्न थे. सब के लिए बढि़या व्यवस्था थी. आखिर वे तेलंगाना के लिए अपने भगवान की अर्चना कर धनधान्य की वर्षा कराने वाले थे. मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया कि राज्य के हर घर को इस तरह के यज्ञ कराने चाहिए और नौकरी, मजदूरी, किसानी छोड़ देनी चाहिए. अगर चंडी देवी खुश तो सबकुछ बिना करेकराए मिल जाएगा. आखिर इन्हीं यज्ञों के कारण तो आंध्र प्रदेश का विभाजन हो सका और तेलंगाना राज्य बना जिस के चंद्रशेखर राव मुख्यमंत्री बने थे.

यह वही हैदराबाद है जिसे साइबराबाद कहा जा रहा था. पर बजाय कंप्यूटरों, विज्ञान, तकनीक के, यहां के मुख्यमंत्री तो मूर्खमंत्र पढ़वा रहे हैं जिस का उद्देश्य सदियों पुरानी पोंगापंथी को फिर से 21वीं सदी में थोपना है. सरकार की मशीनरी को इस प्रकार के नाटकों में लगाना गलत ही नहीं, अपराध है. जनता को यह संदेश देना कि प्रगति मेहनत और प्रतिभा से नहीं, मंत्र पढ़वाने और अधपढ़े रट्टूपीर पंडों के अनसुने से श्लोकों के माइकों पर चीखने से आती है, जनता के प्रति अपराध है.

आंध्र प्रदेश वह राज्य है जो हैदराबाद की कंप्यूटर सिटी के लिए जितना जाना जाता है उतना ही किसानों की आत्महत्याओं के लिए भी. यही वह राज्य है जहां माओवादी पनपते हैं, जिन्होंने आंध्र प्रदेश से ले कर असम तक पैर फैला रखे हैं. यह वही राज्य है जहां 1947 तक मुसलमानों का राज चला जबकि बहुमत हमेशा हिंदुओं का रहा और ऊंची जातियों के विशाल मंदिर चारों ओर बिखरे हैं. इस राज्य का मुखिया यह गलत संदेश दे कि आज भी शासन विधानसभा से नहीं, यज्ञसभा से होगा, देश के संविधान की आत्मा से खिलवाड़ है.

शायद स्वयं चंडी देवी भी प्रसन्न नहीं हुईं क्योंकि उक्त यज्ञशाला में आग लग गई. पंडाल का बड़ा हिस्सा जल कर नष्ट हो गया. वाह, इसे कहते हैं तुरंत डिलीवरी, पिज्जा हट के गरमागरम पिज्जा की तरह. स्वयं अग्निदेवता पधार कर यज्ञपंडाल को अपने साथ ले गए. क्या संदेश दिया इस सब ने आम गृहिणी को?

 

रिहायशी इलाकों में तेजी से पांव फैलाते चकलाघर

8 जनवरी को पटना के फ्रेजर रोड, रूपसपुर, बोरिंग रोड, मंदिरी आदि कई रिहायशी इलाकों में ताबड़तोड़ छापा मारा गया और एक लड़की समेत 2 दलालों को दबोच लिया. डाक बंगला चैराहे के आरपी टावर के तीसरे माले पर बने गेस्ट हाउस में बड़े पैमाने पर शराब की बोतलें, सेक्स ताकत को बढ़ाने वाली दवाएं, कंडोम आदि बरामद किए गए.

पटना के एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोग इंटरनेशनल लेवल पर सेक्स का धंधा चला रहे हैं और इसके मुख्य सरगना की तलाश की जा रही है. होटलों, रेस्ट हाउस, मसाज पार्लर में जब पुलिस ने सेक्स के धंधे को बंद करवाया, तो अब रिहायशी इलाकों में यह धंधा फलने-फूलने लगा है. रिहायशी इलाकों के लोगों को किसी घर में लड़कियों और मर्दो की आवाजाही बढ़ती दिखाई दे, तो तुरंत पुलिस को खबर करनी चाहिए.

पिछले साल ही पटना के कंकड़बाग मुहल्ले के इंदिरा नगर इलाके में एक किराए के मकान में जिस्म का धंधा चलाए जाने का खुलासा हुआ. उस मकान में आने-जाने वाले लोगों को तांता देख आस-पास के लोगों को शक हुआ और पुलिस को खबर किया गया. जब पुलिस ने छापा मारा तो वह 15 से 17 साल की लड़कियों के साथ कई मर्दो को पकड़ा गया.पुलिस को देखते ही लड़किया रोने लगी और बताया कि उनसे जर्बदस्ती गंदा काम कराया जा रहा है.

मकान की किरायदार महिला ने उन्हें नौकरी देने के लिए घर पर बुलाया था. वे लोग जब घर पर पहुंची तो कुछ लोगों नेउनके साथ गंदी हरकतें शुरू कर दी, जब हल्ला मचाने लगी तो महिला ने कहा कि उनकी फोटो खींच ली गई है. हल्ला मचाओगी तो सभी के मां-बाप को फोटो भेज दिया जाएगा. उस दिन से सभी को कैदी बनाकर घर में रखा गया है और रोज नए-नए लोग आकर उनकी इज्जत से खेलते हैं.

पिछले कुछ महीनों के दौरान शहर के कई रिहायशी इलाको में कई जिस्मों के धंधे का भंडाफोड़ हुआ है. राजा-बाजार के चैरसियालौज में 3 लड़कियां और 3 मर्द गिरफ्तार किए गए. प्रफेजर रोड के रेस्टोरेंट में 4 युवती एवं 12 युवक दबोचे गए. एसके पुरी कौलनी के मौंटेसरी लेन के एक मकान में 3 लड़कियां और 3 युवक को पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ा. पश्चिमी बोरिंग कैनाल रोड में एक औरत और 3 लड़के धरे गए. पटेल नगर मुहल्ले के एक मकान से 2 युवतियां और 2 मर्द पुलिस के हत्थे चढ़े. इन सभी पर मासूम लड़कियों को जबरन जिस्म के धंधे में धकेलने का आरोप लगाया था. पत्रकार नगर, आशियाना नगर, रूपसपुर आदि रिहायशी इलाकों के प्राइवेट मकानों में भी सेक्स रेकैट का भंडाफोड़ हो चुका है.

पुलिस अफसर मानते हैं कि पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए जिस्म के धंधेबाजों ने रिहायशी इलाकों को अपना सेफ जोन बना लिया है और बेरोक-टोक देह का धंधा चला रहे हैं. पिछले साल 12 जून को एसके पुरी कौलनी के फ्रेंडस अपार्टमेंट में छापा मार कर 3 लड़कियोंऔर 3 युवकों को गिरफ्तार किया तो अपार्टमेंट में रहने वाले बाकी लोग भी हक्के-बक्के रह गए. उन लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी कि उनके अपार्टमेंट में ही पिछले एक साल से चकलाघर चल रहा है. अपार्टमेंट में रहने वाले एक सरकारी अफसर बताते हैं कि धंधेबाज इतनी चालाकी और सफाई से धंधा चला रहे थे कि किसी को शक तक नहींहो पाया.

अशोक कुमार झा और उसकी बीबी प्रभा झा अपार्टमेंट में किराए पर फ्लैट लेकर देह का धंधा चला रहे थे. दोनों 3 लड़कियों को जबरन फ्लैट में रख कर उनसे जिस्म बेचने का कारोबार चला रहे थे. प्रभा झा तो पुलिस के हत्थे चढ़ गई पर अशोक अब भी रफरार है. इसी तरह पश्चिमी बोरिंग कैनाल रोड के माध्व विहार अपार्टमेंट से भी एक औरत और 3 लड़कों को दबोचा पर सरगना प्रशांत भारती भागने में कामयाब हो गया. भाड़े पर घर लेकर भारती पिछले 2 महीने से सेक्स का धंधा चला रहा था और आसपास के फ्लैटों को पता नहीं चल सका. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधर पर छापा मार कर सेक्स रैकेट का भंडापफोड़ किया.

शहर के रिहायशी और पौश इलाकों में तेजी से फैलते देह के धंधे के बारे में समाज विज्ञानी हेमंत राव कहते हैं कि तरक्की और लोगों की माली हालत में सुधर होने के साथ चारित्रिक गिरावट का नतीजा है देह का बाजार. जब लोगों की माली हालत ठीक होने लगती है तो पहले वह खुद और परिवार के लेबल को दुरूस्त करता है. उसके बाद बचे रूपयों को वह ऐश-मौज में खर्च करने लगता है. कोई लड़की या औरत अपनी मर्जी से अपना देह बेचती है तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है. जबरन धंधा करवाना या फिर उससे आसपास के लोगों को परेशानी होना गलत है. पहले घने बाजारों में देह व्यापार का काम चलाया जाता था और उसके लिए हर महीने पुलिस को ‘नजराना’ था. अब पुलिस की घौंस से बचने के लिए बड़ी ही सफाई और खामोशी से रिहायशी इलाकों में जिस्मों का धंधा चलाया जाने लगा है.

हैरानी की बात ही है कि रिहायशी इलाकों में जिस्मफरोशी का धंधा चलता रहा और जिस्मों की गरमाहट, फुसफुसाहट, सरगोशियां, सिसकारियों से आसपास के लोग अनजान रहे. बड़े-बड़े एलसीडी स्क्रीन पर चल रहे पोर्न फिल्मों के एक-एक सीन को सामने हकीकत में बदला जाता. रोज नए नए चेहरे आते-जाते रहते पर अपार्टमेंट में रहनेवालों को कुछ गलत होने का शुबहा तक नहीं हुआ. इसकी मुख्य वजह अपार्टमेंट संस्कृति ही है, जिसमें लोग आमने-सामने के फ्लैट में रहने वालों को भी एक दूसरे की खबर नहीं होती है. कोई मतलबनहीं होता है.

क्या कहता है प्रिवेंशन ऑफ इममारल ट्रैफिक एक्ट?

संगठित जिस्म कारोबार या वेश्यावृति पर काबू पाने के लिए 1950 में अमेरिका में यह कानून वजूद में लाया गया था. भारत में प्रिवेंशन ऑफ इममारल ट्रैफिक एक्ट साल 1956 में वजूद में आया. इस कानून का मकसद जिस्मों के कारोबार पर अंकुश लगाना है. इस कानून के तहत जबरन जिस्म का धंधा कराने वाले गिरोहों से औरतों या लड़कियों को आजाद कराने का पावर प्रशासन और पुलिस को दिया गया है. इस कानून का ध्येय यही है कि जिस्म के धंधा करने और कराने वाले संगठित गिरोहों पर अंकुशा लगाना है जो औरतों को ‘माल’ के रूप में इस्तेमाल करते हैं याने खरीदने और बेचने का काम करते हैं. इस एक्ट का मकसद यौन आचरणों की पहरेदारी करना या पुलिसिंग नहीं है.

क्या आप कम खर्च में चाहते हैं ज्यादा मोबाइल डेटा

अगर आपके फ़ोन पर अनलिमिटेड मोबाइल डेटा प्लान नहीं है या आप वाई-फाई नेटवर्क से जुड़े हुए नहीं हैं तो आप डेटा को जरा ध्यान से इस्तेमाल कीजिए. डेटा प्लान के बाहर अगर अधिक डेटा ख़र्च हो तो यह आपको काफ़ी महंगा पड़ सकता है.

एंड्रॉयड पर आप मोबाइल डेटा के लिए सीमा तय कर सकते हैं कि कौन-सा ऐप महीने में कितना डेटा इस्तेमाल कर सकता है. सिर्फ वीडियो देखने या फेसबुक पर समय बिताने से डेटा का इस्तेमाल बढ़ता नहीं है. ऐसे कई प्रोग्राम हैं जो डेटा सर्विस ऑन रहने की वजह से बैकग्राउंड में चलते रहते हैं, जैसे जीपीएस या ईमेल. ऐप अपडेट करने के लिए भी बहुत डेटा इस्तेमाल होता है. आप चाहें तो सेटिंग्स में बदलाव कर सकते हैं ताकि सिर्फ़ वाई-फ़ाई से कनेक्टेड होने पर ही ऐप अपडेट होगा, मोबाइल डेटा पर नहीं.

गूगल प्ले में जाकर जो ऊपर में बाईं तरफ तीन लाइन का आइकॉन है उस पर टैप करें और उसके बाद सेटिंग्स पर क्लिक करें. उसके बाद 'ऑटो अपडेट ऑफ़ ऐप ऑन वाई-फ़ाई ओनली' को चुन लीजिए.

महीने भर के लिए कितना डेटा का इस्तेमाल करना है यह आप तय कर सकते हैं, इसके लिए अपने बिलिंग साइकिल का ध्यान रखें ताकि पूरे महीने में अगला बिल आने तक आप इस्तेमाल की सीमा के भीतर ही रहें. अगर आप ऐप्स में जाकर बैकग्राउंड डेटा विकल्प को बंद कर देंगे तो आपके डेटा का इस्तेमाल घट जाएगा.

अपने स्क्रीन को नीचे की तरफ स्वाइप कीजिये, उसके बाद सेटिंग्स और फिर डेटा पर क्लिक कीजिए. उसके बाद आपको वो ऐप दिखाई देंगे जो आपके बैकग्राउंड डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं. 'डिज़ेबल बैकग्राउंड डेटा ऑन मोबाइल नेटवर्क' के विकल्प को चुन लीजिए.

एक मिनट में कपड़े सुखाएगी मशीन, लैपटॉप से हल्की

आप भी कहीं घूमने जाते हैं तो गंदे बदबूदार कपड़ों से परेशान हो जाते हैं न! अब हर जगह तो आपको न वॉशिंग मशीन मिलने वाली है न इतनी सुविधा कि कपड़े धुल कर सूखा सकें. लेकिन ये नई मशीन बिना आपका बोझा बढ़ाए ऐसा कर सकती है.

सिडनी के रहने वाले एक छात्र माथ्यू कॉरी ने ड्राई-गो नाम की 400 ग्राम की एक मशीन बनाई है जो सिर्फ एक मिनट में कपड़े सुखा देगी. इस मशीन में बने छेद गीले कपड़ों से पानी सोक कर उसे भाप में बदल देते हैं. इसके लिए कपड़ों को इस मशीन में लगी दो प्लेटों के बीच रखना होता है, बंद करना होता है और एक मिनट में सारे कपड़े सूख जाते हैं.

कॉरी को ये आईडिया अपनी एशिया की यात्रा के दौरान आया जहां उन्होंने लोगों को बसों की खिड़कियों पर अपने गीले मोजे, रुमाल सुखाते देखा. तभी उन्होंने तय किया कि ऐसी मशीन बनाई जाए जिसे आसानी से साथ भी ले जा पाएं और काम भी हो जाए.

कॉरी ने पिछले 10 महीनों में डिजाइनरों, इंजीनियरों के साथ मिल कर इसे तैयार किया है. इसे आगे बढ़ाने के लिए वे पैसे जुटा रहे हैं.

‘घायल वंस अगेन’ से पुराने अवतार में लौटेंगे सनी देओल

हिन्दी फिल्म अभिनेता सनी देओल का कहना है कि उन्होंने ‘घायल वंस अगेन' इसलिए बनायी क्योंकि वह उस तरह की फिल्मों से दर्शकों का मनोरंजन करना चाहते थे जैसी फिल्मों में वह पूर्व में काम कर चुके हैं. उनका कहना है कि वे पुरानी विधा को दोबारा वापस लाना चाहते हैं.

58 साल के अभिनेता ने माना कि उन्होंने ‘घायल वंस अगेन' इसलिए लिखी क्योंकि वह उन फिल्मों की विधा को दोबारा लाना चाहते थे जिनमें वे पूर्व में काम कर चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘जब मैंने काम करना शुरु किया, ‘बेताब' (रोमांटिक) और ‘अर्जुन' (एक्शन ड्रामा) आयीं और वे अपने साथ बॉलीवुड में एक नई फिल्म विधा लेकर आयीं और मैं इस तरह की फिल्मों में विश्वास करता हू.'

सनी ने कहा, ‘‘पिछले कुछ सालों में मैं खुद को दिशाहीन महसूस करने लगा और फिर मैंने सोचा कि मुझे अपनी फिल्में की उसी विधा में वापसी करनी चाहिए जिसमें मुझे विश्वास है. इसलिए मैंने ‘घायल वन्स अगेन' लिखीं ताकि अपनी जडों की तरफ लौटूं.'

‘घायल वन्स अगेन' 1990 में आयी सनी और मीनाक्षी शेषाद्रि अभिनीत सुपरहिट फिल्म ‘घायल' का सीक्वल है. सनी फिल्म में काम करने के अलावा उसके लेखक और निर्देशक भी हैं.

‘वजीर’ की सफलता पर अमिताभ ने दर्शकों से कहा शुक्रिया

बिजय नांबियार के निर्देशन में निर्मित फिल्म 'वजीर' में व्हीलचेयर पर बैठे शतरंज ग्रैंडमास्टर के किरदार में दर्शकों की वाहवाही लूट रहे महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने प्रशंसकों को प्यार और सराहना के लिए धन्यवाद दिया है.

फिल्म 'वजीर' ने अपने प्रथम सप्ताहांत में 21.01 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया. इसमें फरहान अख्तर, नील नितिन मुकेश, अदिति राव हैदरी और जॉन अब्राहम जैसे कलाकार हैं. अमिताभ ने ट्विटर पर लिखा, "फिल्म 'वजीर' की सफलता के लिए आपके प्यार, सराहना और संरक्षण के लिए धन्यवाद."

उन्होंने लिखा, "यह मुस्कान उपलब्धि है कि 'वजीर' बहुत खास है. दर्शकों का धन्यवाद." फिल्म 'पीकू' के अभिनेता ने कहा कि 'वजीर' की चाल सोमवार की तुलना में पहले दिन से अधिक है. फिल्म 'वजीर' की कहानी दो असामान्य मित्रों की कहानी पर आधारित है.

RBI को बताइये कर्ज देने के कुछ अनोखे तरीके

कुटीर, लघु और मध्यम उद्यमों को कर्ज देने के अनोखे तरीके तलाशने के लिए रिजर्व बैंक का पुणे स्थित कृषि बैंकिंग महाविद्यालय, बैंकों के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित करेगा. इस प्रतियोगिता का विषय है- केस स्टडी: एक एमएसएमई को नए ढंग से कर्ज आबंटन.

आरबीआई ने एक सर्कुलर जारी कर कहा, प्रतियोगिता आयोजित करने का उद्देश्य बैंकों को ऐसे मामलों का अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित करना है जहां कुटीर, लघु और मझोले उद्यमों को अनोखे तरीके से कर्ज दिया गया हो और ऐसे मामलों को लेकर दूसरे बैंकों को भी संवेदनशील बनाया जा सके.

केन्द्रीय बैंक ने कहा कि बैंकों के कर्मचारी सदस्य जिसमें बैंकों के प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों के फैकल्टी सदस्य, सिडबी, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों और शहरी सहकारी बैंकों के सदस्य शामिल हैं, इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं.

इनके अलावा, इन बैंकों के प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों से फैकल्टी सदस्य और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के कर्मचारी सदस्य भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं. आरबीआई ने यह केस स्टडी अंग्रेजी या हिंदी भाषा में 31 जनवरी तक मांगे हैं.

औद्योगिक उत्पादन में गिरावट, खान-पान महंगा

नवंबर माह में देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 3.2% की गिरावट आई है. यह इस क्षेत्र का चार साल का निम्नतम प्रदर्शन है और इससे गतिविधियों में सुधार की उम्मीद टूटी है.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) के आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन तथा पूंजीगत सामान के उत्पादन में भारी गिरावट से औद्योगिक उत्पादन घटा है. नवंबर, 2014 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 5.2% रही थी. यह अक्टूबर, 2011 के बाद आईआईपी का सबसे खराब प्रदर्शन है. उस समय औद्योगिक उत्पादन 4.7% घटा था.

अक्तूबर माह के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर के आंकड़े को संशोधित कर 9.9% किया गया है जबकि प्रारंभ में इसे 9.8% बताया गया था. आईआईपी में 75% का भारांश रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन नवंबर में 4.4% घट गया. एक साल पहले समान महीने में विनिर्माण क्षेत्र में 4.7% वृद्धि हुई थी. नवंबर, 2015 के दौरान विनिर्माण क्षेत्र के 22 उद्योग समूहों में से 17 में पिछले साल के समान महीने की तुलना में गिरावट दर्ज की गई.

निवेश का संकेतक देने वाले पूंजीगत सामान खंड का उत्पादन नवंबर में 24.4% घट गया. पिछले साल समान महीने में इस क्षेत्र का उत्पादन 7 प्रतिशत बढ़ा था. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 10% का हिस्सा रखने वाले बिजली क्षेत्र का प्रदर्शन भी समीक्षाधीन महीने में काफी खराब रहा. नवंबर, 2015 में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 0.7% रही. इससे पिछले साल समान महीने में बिजली उत्पादन 10% बढ़ा था. नवंबर में खनन क्षेत्र का उत्पादन 2.3% बढ़ा.

नवंबर, 2014 में यह 4% बढ़ा था. इसी तरह उपभोक्ता सामान क्षेत्र के उत्पादन में 1.3% की बढ़ोतरी दर्ज हुई जबकि एक साल पहले समान महीने में इस क्षेत्र का उत्पादन 1.6% घटा था. समीक्षाधीन महीने में टिकाउ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन 12.5% बढ़ा. वहीं नवंबर, 2014 में इस क्षेत्र का उत्पादन 14.5% घटा था. उपभोक्ता गैर टिकाउ सामान क्षेत्र के उत्पादन में नवंबर, 2015 में 4.7% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले समान अवधि में यह 7% बढ़ा था.

उद्योग मंडल एसोचैम के महासचिव डी एस रावत ने कहा, औद्योगिक उत्पादन की नकारात्मक वृद्धि से देश में मांग-आपूर्ति के मौजूदा असंतुलन की स्थिति और चिंताजनक हो गई है. पूंजीगत सामान तथा उपभोक्ता गैर टिकाउ सामान क्षेत्र के उत्पादन में गिरावट से पता चलता है कि उद्योग क्षेत्र की स्थिति में सुधार आने वाले दिनों की प्रमुख चुनौती होगी. इस कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. दाम बढ़ने से दिसंबर माह की खुदरा महंगाई दर बढ़ोतरी के साथ 5.61 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई. नवंबर महीने में यह दर 5.41 फीसदी थी.

साल 2014 के दिसंबर महीने में खुदरा महंगाई दर 4.28 फीसदी थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर माह में खाद्य वस्तुओं की खुदरा महंगाई दर 6.40 फीसदी रही, जबकि पिछले साल नवंबर में यह दर 6.07 फीसदी थी. आंकड़ों के मुताबिक गत दिसंबर माह में दाल व दाल उत्पाद की कीमतों में 45.92 फीसदी की बढ़ोतरी रही. पीएचडी चैंबर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष महेश गुप्ता ने कहा, आगे चलकर परिवारों की खर्च योग्य आय बढ़ाने के प्रयास होने चाहिए. इसके लिए कराधान प्रणाली को सरल करने और लोगों को कर प्रोत्साहन बढ़ाने की जरूरत है.

चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से नवंबर की अवधि में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 3.9% रही है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2.5% रही थी. इस अवधि में खनन क्षेत्र का उत्पादन 2.1% बढ़ा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2.5% बढ़ा था. इसी तरह कुल उपभोक्ता सामान उत्पादन 4.1% बढ़ा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-नवंबर की अवधि में 5.7% बढ़ा था. अप्रैल-नवंबर के दौरान टिकाउ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन 11.9% बढ़ा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 15.9% घटा था.

 

इस शुक्रवार चलेगा जूही और शबाना का ‘चॉक एंड डस्टर’

लंबा इंतजार हुआ खत्‍म और 15 जनवरी को रिलीज होने के लिए बिल्‍कुल तैयार है फिल्‍म 'चॉक एंड डस्‍टर'. फिल्‍म को निर्देशित कर रहे हैं निर्देशक जयंत गिलटर. वहीं फिल्‍म में नजर आएंगे बड़े जाने-माने चेहरे. जूही चावला, शबाना आजमी, जैकी श्रॉफ, अनुपम खेर, समीर सोनी, गिरीश कर्नाड भी प्रमुख भूमिका में और साथ में निगेटिव रोल में दिव्‍या दत्‍ता और आर्य बब्‍बर भी नजर आएंगे. फिल्‍म को प्रोड्यूस किया है अमिन सूरानी ने.

फिल्‍म में विद्या और ज्‍योति नाम की दो टीचर्स अहम भूमिका में नजर आती हैं. दोनों ही मुंबई के एक हाईस्‍कूल में टीचर्स हैं. अपने स्‍टूडेंट्स से इनका खासा लगाव दिखाया गया है. फिल्‍म की कहानी में टर्न उस समय आता है जब स्‍कूल में एक नई प्रिंसिपल आ जाती है. इस प्रिंसिपल का नाम है कामिनी गुप्‍ता. ये आते ही स्‍कूल के सारे मापदंडों को बदलकर रख देती हैं. इसके बाद शुरू होती है किरदारों के बीच की असली जद्दोजहद.

फिल्‍म के रिलीज होने से पहले ये खबरें सुनने को मिली थीं कि फिल्‍म में को-एक्‍ट्रेस शबाना आजमी के साथ काम करने को लेकर जूही चावला बेहद एक्‍साइटेड थीं. हों भी क्‍यों न, शबाना आजमी सरीखे प्रतीभाशाली कलाकारों संग काम करने का मौका कम ही मिलता है. इसको लेकर जूही ने ये तक कह दिया कि जब उनके सामने फिल्‍म की स्‍क्रिप्‍ट आई तो उसका मतलब सिर्फ शबाना आजमी था.

उधर, शबाना आजमी ने भी 'चॉक एंड डस्‍टर' में शामिल होने का श्रेय फिल्‍म में अपनी को-एक्‍ट्रेस जूही चावला को दिया. उन्‍होंने कहा कि फिल्‍म में काम करने को लेकर उनके मन में दुविधा थी, फिल्‍म के प्रति जूही के उत्‍साह को देखकर वह भी इसके लिए तैयार हो गईं. आगे उन्‍होंने बताया कि फिल्‍म की स्‍क्रिप्‍ट उनको पसंद आई थी, लेकिन फिल्‍म के निर्माता और निर्देशक को वह नहीं जानती थीं, इसलिए वह इससे जुड़ने में झिझक रहीं थीं. वहीं काम करने के बाद शबाना आजमी का अनुभव काफी अच्‍छा रहा.

अक्षय कुमार निभाएंगे ‘रोबोट 2’ में विलेन का किरदार

बॉलीवुड में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले अक्षय कुमार अब दक्षिण भारतीय फिल्मों में अपना जलवा बिखरने को तैयार हैं. रजनीकांत की फिल्म 'रोबोट 2' में खिलाड़ी अक्षय कुमार विलेन के किरदार में नजर आएंगे. ये पहला मौका है, जब बॉलीवुड का कोई एक्टर दक्षिण की तमिल फिल्म में काम करने जा रहा है.

रजनीकांत की फिल्म 'रोबोट 2' में काम करने को लेकर अक्षय कुमार ने कहा,' मुझे खुशी है कि मैं तमिल फिल्म में काम करने वाला पहला बॉलीवुड एक्टर हूं. मैं रजनीकांत का आभारी हूं, जिन्होंने इस फिल्म में मुझे काम करने का मौका दिया है. इस तरह की भूमिका मिलना मुश्किल है.'

आपको बता दें कि फिलहाल अक्षय कुमार को 22 जनवरी को रिलीज होने वाली अपनी फिल्म 'एयरलिफ्ट' का इंतजार है. राजा मेनन निर्देशित इस फिल्म में अक्षय कुमार के अपोजिट 'द लंचबॉक्स' की एक्ट्रेस निम्रत कौर नजर आएंगी. यह फिल्म इराक-कुवैत के बीच हुए युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है.

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