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रोहित वेमुला: हिंदुत्व की बर्बर सोच का शिकार

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दलित शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद पूरे देश में विक्षोभ का ज्वार उमड़ पड़ा है. दलित आक्रोशित हैं, कई शहरों में जुलूस, प्रदर्शन हो रहे हैं और राजनीतिक दलों के बीच सियासत गरमाई हुई है. केंद्र की भाजपा सरकार निशाने पर है. रोहित को जिन हालातों में आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा, वह समाज और व्यवस्था कठघरे में है. आत्महत्या की यह घटना आज 21वीं सदी में देश के शिक्षण संस्थानों में पनप रही जातीय भेदभाव, वैमनस्य की बर्बर और शर्मनाक प्रवृति की पराकाष्ठा है.

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पिछले साल से भाजपा के छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद [एबीवीपी] और अंबेडकर स्टूडेंड एसोशिएशन [एएसए] के बीच विभिन्न मुद्दों को ले कर अनबन चल रही थी. एबीवीपी नेता नंदनम सुशील कुमार ने एएसए नेता रोहित वेमुला द्वारा याकूब मेनन को फांसी देने का विरोध करने और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘मुजफ्फरपुर बाकी है’ डौकूमेंटरी के प्रदर्शन को ले कर अपने फेसबुक पर पोस्ट के बाद मामला तूल पकड़ गया. इस पर एएसए के छात्र आंदोलित हो गए और सुशील कुमार से माफी की मांग की.

सुशील कुमार ने विश्वविद्यालय में एएसए छात्रों की गतिविधियों की शिकायत सिकंदराबाद के सांसद एवं केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय से की. इस के बाद बंडारू दत्तात्रेय ने अगस्त माह में मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिख कर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय को जातिवादी और राष्ट्रविरोधी अड्डा बताते हुए इन छात्रों के खिलाफ एक्शन लेने का आग्रह किया. इसी दौरान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने विश्वविद्यालय को एएसए पर काररवाई के लिए एक के बाद एक 5 रिमाइंडर भेजे. इस दबाव के चलते 10 सितंबर को जांच बोर्ड ने रोहित समेत 5 छात्रों संकन्ना, डी प्रशांत, विजय कुमार  और सेसु चेमुदुगुंटा को निलंबन की सजा सुनाई.

रोहित और उस के साथियों को होस्टल से निकाल दिया गया और लाइब्रेरी व परिसर में जाने पर रोक लगा दी गई और रोहित को मिल रही 25 हजार की स्कौलरशिप बंद कर दी गई. इस पर ये छात्र यूनिवर्सिटी कैंपस में खुले में अनशन पर बैठ गए. इन लोगों ने वाइस चांसलर आरपी शर्मा से सजा वापस लेने का आग्रह भी किया. इसी बीच शर्मा की जगह अप्पा राव नए वाइस चांसलर आ गए. 2-2 केंद्रीय मंत्रियों की सक्रियता की वजह से विश्वविद्यालय दबाव में आ गया.

अचानक 17 जनवरी की रात को 26 वर्षीय रोहित द्वारा होस्टल में आत्महत्या करने की खबर आई. इस घटना के बाद मामले की परत खुलने लगी. इस बीच राजनीतिक बयानबाजी और हलचल बढने लगी. विपक्ष के निशाने पर दोनों केंद्रीय मंत्री आ गए. देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन होने लगे. हैदराबाद, दिल्ली, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता जैसे शहरों के छात्र विरोध जता रहे हैं. गुंटूर जिले के निकट गुरजला गांव के रहने वाले रोहित के पिता मनीकुमार एक प्राइवेट अस्पताल में सिक्यूरिटी गार्ड हैं जबकि मां वेमुला राधिका टेलरिंग का काम करती हैं. रोहित की एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई है. स्टाईपैंड बंद होने से उस पर कर्ज चढ गया था. इस सजा की वजह से रोहित का परिवार आर्थिक संकट में आ गया. प्रतिभाशाली रोहित को अपने सपने चूरचूर होते नजर आने लगे.

रोहित ने आत्महत्या से पहले एक मार्मिक पत्र लिखा. उस ने लिखा था,‘‘मैं हमेशा से एक लेखक बनना चाहता था. विज्ञान का लेखक, कार्ल सगन की तरह. मैं विज्ञान से तारों से, प्रकृति से प्रेम करता हूं पर इस के बाद भी मैं लोगों से प्यार करता हूं. यह जाने बिना कि मेरे लोगों को दूसरे से अलगथलग कर दिया गया है. हमारी भावनाओं को महत्व नहीं दिया जाता. हमारा प्रेम बनावटी है. हमारे विश्वास अंधे हैं. हमारी पहचान झूठी प्रथाओं द्वारा बनाई जाती है. वास्तव में यह बहुत कठिन हो गया है कि बिना दुख का सामना किए प्रेम किया जाए. इंसान की योग्यता उस की तात्कालिक पहचान और निकट संभावनाओं तक सीमित कर दी गई है. वोट के तौर पर.आंकडे के रूप में. वस्तु के तौर पर. व्यक्ति को एक इंसान के तौर पर कभी नहीं लिया जाता. हर क्षेत्र में, शिक्षा में सड़कों पर, राजनीति में और मरने व जीने में हमें अलग कर दिया गया है. मैं इस तरह का पत्र पहली बार लिख  रहा हूं. यह पहला और आखिरी पत्र है. अगर आप के अनुकूल बात नहीं लिख पाया तो मुझे क्षमा कर देना. मेरा जन्म एक खतरनाक दुर्घटना थी. मैं जीवन भर अपने बचपन की तन्हाई से निकल नहीं पाया. मैं एक ऐसा बच्चा था जिसे बचपन से ही दुत्कारा गया. हो सकता है मैं गलत हूं.

मैं तमाम जिंदगी दुनिया को समझ नहीं पाया हूं. प्यार, दर्द, जीवन और मृत्यु को नहीं समझ सका हूं. इस की कोई जल्दी भी नहीं थी पर इस पूरे समय में मैं ने पाया कि कुछ लोगों के लिए जीवन अभिशाप है. मुझे इस समय की चोट नहीं पहुंची, न मैं दुखी हूं. बस मेरे पास कुछ नहीं है, अपने बारे में कोई चिंता नहीं है, यह दयनीय है. यही कारण है कि मैं ऐसा कर रहा हूं. लोग मुझे स्वार्थी, मूर्ख कह सकते हैं पर मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं. मैं मौत के बाद की कहानियों में या भूतप्रेत में यकीन नहीं करता. अगर इस संसार में कुछ है जिस पर मेरा विश्वास है वह यह कि मैं तारों की यात्रा कर सकता हूं. और दूसरी दुनिया को जान सकता हूं.

कोई अगर मेरे लिए कुछ कर सकता है तो वह जान ले कि पिछले 7 माह से मुझे स्कौलरशिप नहीं मिली जो कि 1 लाख 75 हजार रुपए बनती है. अगर हो सके तो यह मेरे परिवार को दिलवा देना. मेरे ऊपर 40 हजार रुपए रामजी के उधार हैं. उस ने कभी मुझ से रुपए नहीं मांगे. मेरा अंतिम संस्कार शांति से और सादे तरीके से करना, ठीक उसी तरह जिस तरह मैं इस दुनिया में आया और इस दुनिया से जा रहा हूं. मेरे लिए कोई आंसू मत बहाना. जान लें कि जिंदा रहने के मुकाबले मर कर मैं खुश हूं. भाई उमा, मैं यह सब तुम्हारे कमरे में कर रहा हूं इस के लिए मुझे माफ करना. एएसए परिवार से भी उन्हें मायूस करने के लिए माफी चाहता हूं. आप सब मुझे बहुत प्यार करते हैं, यह मैं जानता हूं. मैं कामना करता हूं कि आप सब का भविष्य सुनहरा हो. अंतिम बार जय भीम.

हां, मैं औपचारिकताएं लिखना भूल गया. मेरी आत्महत्या के लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं है. किसी ने भी मुझे ऐसा करने के लिए नहीं उकसाया, न अपने कृत्यों से, न शब्दों से. यह फैसला मेरा है. इस के लिए मैं ही जिम्मेदार हूं. मेरे जाने के बाद मेरे दोस्तों और दुश्मनों को परेशान मत करना.’’

रोहित का यह पत्र इस देश की दकियानूसी सड़ीगली सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर बहुत कुछ कहता है. थोड़े से शब्दों में उस ने बहुत कुछ बयान कर दिया है. पत्र महज सुसाइड नोट नहीं, समाज की बेशर्मी का आईना है. आंख खोल देने वाला है. उस ने दलित होने की वजह से भेदभाव को ले कर अपनी पीड़ा व्यक्त की है. क्या समाज के ठेकेदार, सियासतबाज इस पत्र की गहराई को समझ कर उस पर मनन कर पाएंगे. नहीं, उन की नजर में यह पत्र महज एक डाइंग डिक्लैयरेशन है और उन के बचाव का रास्ता, जिस में रोहित ने अपनी मौत के लिए किसी को कसूरवार नहीं ठहराया है. पत्र में छिपा दलित होने का दंश, दर्द, महसूस कर पाएंगे.

इस घटना पर मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने प्रेस कांफ्रैस कर के सफाई दी कि रोहित का निष्कासन दलित प्रोफेसर की अध्यक्षता वाली कमेटी का फैसला था. इस बयान के तुरंत बाद हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित प्रोफेसरों ने ईरानी के बयान को झूठ और भ्रामक बताते हुए कहा कि जिस समिति ने रोहित और उस के 4 साथियों के निष्कासन का निर्णय लिया था, उस में कोई भी दलित नहीं था, सारे सदस्य गैरदलित थे. स्मृति ईरानी के बयान के विरोध में विश्वविद्यालय के 15 दलित प्रोफेसरों ने अपने प्रशासनिक पदों से इस्तीफे का ऐलान कर दिया. इन प्रोफेसरों ने कहा कि मंत्री महोदया देश को गुमराह कर रही हैं और मुद्दे को भटका कर जिम्मेदारी से भाग रही हैं. दलित प्रोफेसरों का कहना है कि सच्चाई यह है कि पैनल ने कोई सजा नहीं दी, बल्कि मंत्री की वाइस चांसलर को सिफारिश और दबाव के बाद सजा दी गई.

रोहित की आत्महत्या की घटना कोई नई नहीं है. इस घटना के बाद हिंदू कट्टरपंथी इस बयानबाजी करने लगे मानो वे धर्म की बनाई जाति व्यवस्था और उस की मान्यताओं को बचाव में उतर पड़े हो. इस मामले में संघ और भाजपा की ओर से जिस तरह की बयानबाजी हो रही है उस से उन के ब्राह्मणवादी विचारों की ही पुष्टि हो रही है. सियासी क्षेत्र में ही नहीं, सोशल मीडिया में भी रोहित और उस के दलित छात्र संगठन को दोषी ठहराया जाने लगा. मानो वे कह रहे हों कि एक दलित की मौत उचित ही है. वह जाति व्यवस्था के खिलाफ खड़ा हो रहा था.

हरियाणा के झज्जर में जब मरी हुई गाय की खाल उतारने पर दलितों की हत्या कर दी गई थीं तो विश्व हिंदू परिषद के नेता गिरिराज किशोर ने गाय को दलित से ज्यादा महत्वपूर्ण बताया था. जब से केंद्र में भाजपा सरकार आई है दलितों, अल्पसंख्यकों पर हमले बढे हैं. पिछले करीब डेढ साल में सैंकड़ों घटनाएं हुई हैं जिन में एक दर्जन वारदातों की चर्चा दुनिया भर में पहुंचीं. हर बार इन घटनाओं के पीछे कट्टर हिंदू मानसिकता सामने आई.

भारतीय शिक्षण संस्थानों में छात्रों के बीच जातिगत विद्वेष, हिंसा आम बात है. समाज के वंचित वर्ग को आरक्षण समानता लाने के उद्देश्य से दिया गया था, वही अब भेदभाव का सब से बड़ा कारण बन रहा है.

दिल्ली विश्वविद्यालय में एमकौम के छात्र उमेश मेहरा का कहना है कि यूनिवर्सिटी में दलित छात्रों के साथ भेदभाव होता है. कौलिजों में एससी, एसटी के छात्र जहां कम होते हैं, और वहां जाति का पता चलता है तो लोग कन्नी काटने लगते हैं. टीचर भेदभाव नहीं करते पर साथी स्टूडेंट करते हैं. जनरल को प्रोब्लम रहती है कि इन का कोटा है. इन्हें अच्छी नौकरी मिल जाती है. अगर 4-5 दलित छात्र मिल कर एक साथ रहते हैं तब तो कोई कुछ कहने की हिम्मत नहीं करता पर अकेले को या पीठ पीछे जाति को ले कर अपमानजनक बातें की जाती हैं. नीची जाति वाले हैं, ये लोग तो रिजर्वेशन वाले हैं. इन्हें तो नौकरी मिल जाएगी.

वाल्मीकि समाज के दिल्ली नगर निगम में इंस्पैक्टर राजेश खैरालिया कहते हैं कि जन्म से भेदभाव शुरू हो जाता है. दलित समाज संगठित नहीं है. हमारे नेता टिकाऊ नहीं, बिकाऊ है. हमें लालच दे दिया जाता है. दलित समाज ने संघर्ष किया है. आजादी के आंदोलन में दलित आगे रहे हैं पर जातीय भेदभाव और शोषण आज भी हमारी नियति है. दुर्गा माता की मूर्ति के लिए वेश्या के घर की मिट्टी उठा ली जाती है पर दलित उस से भी गए गुजरे हैं. अभी दिल्ली सरकार में सब से ज्यादा शिकायतें साफसफाई, कूड़े को ले कर आई है. पीडब्ल्यूडी में ऊंची जाति के लोग काम करते हैं इसलिए इस विभाग की कोई शिकायत नहीं है. सफाई के काम में क्यों नहीं ऊंची जाति के लोग आते. सफाई वाल्मीकि करते हैं और उन के ऊपर सुपरविजन ऊंची जातियों के लोग. यमुना एक्शन प्लान में दिल्ली में कई टौयलेट बनाए गए हैं. उन का ठेका ब्राह्मणों को दिया गया पर सफाई करने का काम वाल्मीकि कर रहे हैं.

दिल्ली विश्वविद्यालय में कर्मचारी राजेंद्र कुमार कहते हैं कि विश्वविद्यालय में हम 12 दलित कर्मचारी हैं. हम एक रहते हैं तो कोई मुंह पर कुछ कहने की हिम्मत नहीं करता पर हमारे साथ भी दोहरा व्यवहार किया जाता है. जी न्यूज में कैमरामैन अशोक कुमार कहते हैं हम लोग भेदभाव महसूस करते हैं.

देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ गया है. भाजपा सरकार आने के बाद वैचारिक संघर्ष की घटनाएं बढी हैं. हिंदुत्व की राजनीति दलित उभार के अस्तित्व में आने के साथ असहज हो रही है. संघ और भाजपा राजनीतिक फायदे के लिए अंबेडकर को अपनाने पर तो उतारू है पर अतीत की सामाजिक व्यवस्था को त्यागने से हिचकिचा रहे हैं. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, आल इंडिया इंस्टीट्यूट औफ मेडिकल साइंसेज [एम्स], एफटीआईआई, जामिया मिलिया, अलीगढ यूनिवर्सिटी जैसे विश्व विख्यात उच्च अध्ययन संस्थानों में संघ और भाजपा दखलंदाजी करने लगे हैं. ऐसे संस्थानों में जातीय वैमनस्य के बीज बोए जा रहे हैं. लोकतांत्रिक मूल्यों और विचारों की स्वतंत्रता को दबाया जा रहा है. पिछले दिनों केंद्र सरकार के एक मंत्री ने गजेंद्र चौहान का विरोध कर रहे एफटीआईआई के छात्रों को नक्सलियों से सहानुभूति रखने वाला बताया था.

विडंबना है कि जिन उच्च शिक्षण संस्थानों में विचारों की लोकतांत्रिक असहमति जताने की जगह होनी चाहिए, वहां संकीर्णता व्याप्त दिखाई देती है. इसी हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पिछले दशक में 8 दलित छात्रों की आत्महत्या दर्शाती हैं कि शिक्षा संस्थानों में सामाजिक विभाजन किस कदर बढ रहा है. रोहित की आत्महत्या के पीछे हताशा थी कि उसे इस व्यवस्था से न्याय नहीं मिल पाएगा.

सवाल है कि सत्ताधारी आज 21वीं सदी में देश को किस सामाजिक, राजनीतिक व्यवस्था से संचालित करना चाहते हैं. राजनीतिबाज इस व्यवस्था को पूरी ढिठाई के साथ सही साबित करने पर तुले दिखाई देते हैं. इस के लिए हिंदुत्व के स्वामियों, बाबाओं, गुरुओं की पूरी जमात है जो हर हिंसा, अमानवीयता, अत्याचार, असहिष्णुता को धर्मसम्मत जायज करार देने के लिए ऐड़ीचोटी का जोर लगा रही है. ये लोग विद्वेष, जातीय श्रेष्ठता को पूरी ताकत के साथ बनाए रखने की वकालत करते नजर आते हैं. भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी रोहित की आत्महत्या को जायज ही ठहरा रहे हैं.

हमारा ऐसा समाज बना दिया गया है जो वैचारिक विभिन्नता को जरा भी बर्दाश्त करने की क्षमता नहीं रखता. भिन्न विचार वालों से लड़नेमारने पर उतारू दिखता है. हम कैसे समाज का निर्माण कर रहे हैं? क्या विश्वगुरु ऐसे ही बनेंगे? क्या हमें सभ्य कहलाने का हक है?

असल में आज देश भर में विश्वविद्यालयों में पढ रहे दलित छात्रों में जागरूकता आई है. यह जागरूकता मौजूदा जातिवादी व्यवस्था के सामने चुनौती पेश कर रही है. रोहित वेमुला जाति व्यवस्था का भीषण विरोधी था. वह हिंदुत्व विचारधारा का तिरस्कार करता रहा. वह वामपंथी नेताओं पर भी दोहरे मापदंडों का आरोप लगाता था और कांग्रेस व भाजपा को उच्च वर्गीय ब्राह्मण अत्याचारी मानता था. रोहित के पत्र में स्पष्ट है कि वह हिंदू धार्मिक व्यवस्था से बेहद खिन्न है.

दलित छात्रों के ऐसे विचारों से हिंदू धर्म, जाति की कट्टरता के पैरोकार दूसरे विचारों को स्वीकार करने के बजाय हिंसा पर उतारू दिखने लगते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गणतंत्र दिवस के मौके पर आए हुए फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ आतंकवाद पर गंभीर मंत्रणा कर रहे हैं, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हिंसा के उपाय खोज रहे हैं और इस के खिलाफ विश्व जनमत बना रहे हैं पर देश में धार्मिक, जातीय बर्बर सोच का आतंक क्या है? इस पर नियंत्रक के लिए हमारे प्रधानमंत्री कुछ करते नजर नहीं आते. उन संगठनों को सत्ता पक्ष से खुल कर प्रश्रय, प्रोत्साहन मिल रहा है. ऐसे में हम किस मुंह से आतंकवाद से मुकाबले और उस के खात्मे की बात कर सकते हैं?

वार्नर ने बताया कैसे निपटना होगा इंडियन स्पिनरों से…

पहले टी-20 इंटरनेशनल मैच में हार के लिए बल्लेबाजों को जिम्मेदार ठहराते हुए डेविड वार्नर ने कहा कि मेजबान टीम को भारतीय स्पिनर के खिलाफ समझदारी से खेलना होगा और बड़े स्टेडियमों का पूरा फायदा उठाना होगा.

कप्तान एरोन फिंच (44) के अलावा ऑस्ट्रेलिया के अन्य बल्लेबाजों ने आसानी से भारतीय आक्रमण के सामने घुटने टेक दिए थे. वार्नर भी 17 रन बनाने के बाद डेब्यू कर रहे जसप्रीत बुमराह (23 रन पर तीन विकेट) का शिकार बने और वह अपनी गलतियों से सीखना चाहते हैं.

वार्नर ने एमसीजी पर शुक्रवार को होने वाले मैच से पहले कहा, 'बीच के ओवरों में हमारे में से कई खिलाड़ियों ने बड़े शॉट खेलने की कोशिश की और ऑस्ट्रेलिया के बड़े मैदानों का पूरा फायदा नहीं उठाया. मुझे लगता है कि भारत में आप बाउंड्री लगाने की कोशिश में आउट होने से बच सकते हो क्योंकि मैदान थोड़े छोटे होते हैं और फील्डर बल्ले के करीब होते हैं इसलिए आपको अपने शॉट पर अधिक फायदा मिलता है.'

'बल्लेबाजी बेसिक्स में हम फेल हुए'

उन्होंने कहा, 'लेकिन निश्चित तौर पर पिछले मैच में आपकी बल्लेबाजी में बेसिक्स की कमी दिखी और यह बड़े मैदान पर दो रन बनाने की कोशिश करना है.' शेन वाटसन (24 रन पर दो विकेट) ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल गेंदबाज रहे और वार्नर ने इंटरनेशनल क्रिकेट में उनकी वापसी का स्वागत किया.

वार्नर ने कहा, 'बेशक पिछले 18 महीने में उसकी फॉर्म वैसी नहीं रही जैसी वह चाहता था. उसे भी यह पता है. हम सभी को यह पता है. हम हमेशा चाहते हैं कि वह अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन करे और मुझे लगता है कि उसकी गेंदबाजी उसका मजबूत पक्ष है.'

'स्मिथ परिपक्व हो चुका है'

वार्नर ने साथ ही कप्तान (टेस्ट और वनडे में) और बल्लेबाज के रूप में स्टीव स्मिथ के योगदान की भी तारीफ की. स्मिथ के एक बार फिर एलेन बॉर्डर मेडल जीतने की संभावना पर वार्नर ने कहा, 'मुझे लगता है कि एक बार फिर स्टीव स्मिथ को यह मिलेगा. पिछले 24 महीने में उसने शानदार प्रदर्शन किया है.' उन्होंने कहा, 'वह परिपक्व हो गया है. रन बनाते समय वह दबाव में नहीं रहता. मैदान पर वह खुले दिमाग के साथ उतरता है. फिलहाल यह टीम के लिए काफी अच्छी चीज है और जो उसे सम्मान मिल रहा है वह उसका हकदार है.'

एशिया कपः एक साल बाद भिड़ेंगे भारत और पाकिस्तान

टीम इंडिया को वर्ल्ड कप से पहले बैक टू बैट टी-20 मैच खेलने हैं. टी-20 वर्ल्ड कप के मद्देनजर ही इस बार का एशिया कप भी इसी फॉरमैट में खेला जाएगा. एशिया कप 24 फरवरी से 5 मार्च तक बांग्लादेश की मेजबानी में खेला जाएगा.

टूर्नामेंट का फिक्स्चर आ गया है. टीम इंडिया और पाकिस्तान के बीच 27 फरवरी को टी-20 मैच खेला जाएगा. टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश के अलावा पांचवी टीम नेपाल, यूएई, हांगकांग या अफगानिस्तान में से कोई होगी. इन टीमों के बीच 19 से 22 फरवरी के बीच क्वालिफायर खेला जाएगा.

एशिया कप का फाइनल मैच 5 मार्च को शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में खेला जाएगा.

एशिया कप का फिक्स्चर-

24 फरवरी: बांग्लादेश बनाम भारत

25 फरवरी: श्रीलंका बनाम पांचवीं टीम

26 फरवरी: बांग्लादेश बनाम पांचवीं टीम

27 फरवरी: भारत बनाम पाकिस्तान

28 फरवरी: बांग्लादेश बनाम श्रीलंका

29 फरवरी: पाकिस्तान बनाम पांचवीं टीम

1 मार्च: भारत बनाम श्रीलंका

2 मार्च: बांग्लादेश बनाम पाकिस्तान

3 मार्च: भारत बनाम पांचवीं टीम

4 मार्च: पाकिस्तान बनाम श्रीलंका

साथ खेले 408 मैच, पर कभी साथ नहीं की बल्लेबाजी

दो खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगभग दो दशक तक 408 मैच साथ में खेले, लेकिन उन्होंने कभी एक साथ बल्लेबाजी नहीं की. है न हैरानी की बात. दो दशक तक ये दोनों खिलाड़ी श्रीलंका की टीम के अहम अंग बने रहे, लेकिन कभी बल्ला पकड़कर एक साथ क्रीज पर नहीं उतरे.

यहां बात हो रही है सनथ जयसूर्या और मुथैया मुरलीधरन की. दोनों अपने- अपने फन में माहिर. ये दोनों 90 टेस्ट, 307 एकदिवसीय और 11 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में साथ में खेले, लेकिन संयोग ऐसा बना कि वे कभी साथ में बल्लेबाजी नहीं कर पाये. जयसूर्या ने करियर की शुरूआत मध्य​ निचले क्रम के बल्लेबाज के रूप में की लेकिन बाद में वह सलामी बल्लेबाज के रूप में स्थापित हो गये. दूसरी तरफ मुरलीधरन हमेशा निचले क्रम के बल्लेबाज रहे. वह अपने करियर में अधिकतर 10वें या 11वें नंबर पर बल्लेबाजी के लिये उतरे. पांच पारियों में वह आठवें और 45 पारियों में नौवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिये आये.

हम उन मैचों की बात करेंगे जिनमें जयसूर्या और मुरलीधरन दोनों साथ में खेले. इस तरह के जिन 408 मैचों का ऊपर जिक्र किया गया है उनकी 267 पारियों में मुरलीधरन ने बल्लेबाजी की थी. संयोग से इन सभी पारियों में जयसूर्या पहले ही आउट हो गये और इसलिए उनके एक छोर पर रहते हुए मुरलीधरन कभी बल्लेबाजी के लिये नहीं उतर पाये. कुछ ऐसे अवसर जरूर आये जबकि जयसूर्या के क्रीज पर रहते हुए मुरलीधरन को बल्लेबाजी का मौका मिल सकता था. मसलन जब मुरलीधरन ने अपने टेस्ट करियर की शुरूआत की तो जयसूर्या तब छठे या सातवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिये आते थे. लेकिन संयोग ऐसा बना कि या तो तब 11वें नंबर ​के बल्लेबाज मुरलीधरन की बल्लेबाजी की नौबत नहीं आयी या फिर जयसूर्या जल्दी आउट हो गये. उस दौर में जयसूर्या टेस्ट मैचों में दो ऐसी पारियों में नाबाद रहे थे, जिनमें वह सातवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिये उतरे थे.

जयसूर्या की बात करें तो उन्होंने मुरलीधरन के टीम में रहते हुए कुल 468 पारियां खेली, 15964 रन बनाये, जिसमें 32 शतक और 87 अर्धशतक शामिल हैं लेकिन वह कभी दुनिया के दिग्गज आफ स्पिनर के साथ जोड़ी नहीं बना पाये. रिकार्ड पर गौर करें तो जयसूर्या ने मुरलीधरधन की मौजूदगी वाले मैचों में 39 जोड़ीदारों के साथ साझेदारियां निभायी. उन्होंने ऐसे मैचों में सर्वाधिक 219 बार मर्वन अटापट्टू और 101 बार रोमेश कालूवितर्णा के साथ जोड़ी बनायी. दिलचस्प बात यह है कि मुरलीधरन ने कालूवितर्णा के साथ चार और अटापट्टू के साथ दो पारियों में साथ में बल्लेबाजी की थी.

मुरलीधरन ने शीर्ष क्रम के अन्य बल्लेबाजों जैसे कि तिलकरत्ने दिलशान (दस बार), कुमार संगकारा (सात), माहेला जयवर्धने (पांच), रोशन महानामा, अरविंद डिसिल्वा और रोशन महानामा (तीन . तीन बार) के साथ मिलकर भी बल्लेबाजी की थी. यहां तक कि एशिया एकादश और आईसीसी विश्व एकादश की तरफ से मुरलीधरन ने जो मैच (वनडे और टेस्ट) खेले उनमें उन्हें राहुल द्रविड़ और जाक कैलिस जैसे बल्लेबाजों के साथ क्रमश: दो और चार मिनट तक साथ में बल्लेबाजी करने का मौका मिला था.

मुरलीधरन ने वैसे अपने करियर में सर्वाधिक 67 पारियों में चमिंडा वास के साथ बल्लेबाजी की. जयसूर्या के रहते हुए वह जिन 267 पारियों में बल्लेबाजी के लिये उतरे उनमें उन्होंने 1617 रन बनाये जिसमें एक अर्धशतक भी शामिल है. इनमें टेस्ट मैचों की 113, वनडे की 152 और टी20 की दो पारियां शामिल हैं. इसके उलट गेंदबाजी में आपको जरूर 44 बार कॉट जयसूर्या बोल्ड मुरलीधरन तथा 12 बार कॉट मुरलीधरन बोल्ड जयसूर्या पढ़ने को मिल जाएगा.

मनहूस साबित हुई ‘शुद्धि’, अब नहीं बनेगी

करण जौहर ने बड़े जोशो खरोश के साथ तीन साल पहले करण मल्होत्रा के निर्देशन में अति महत्वाकांक्षी फिल्म ‘‘शुद्धि’’ का निर्माण करने की घोषणा की थी. जिस दिन इस फिल्म की घोषणा हुई थी, तभी से इस पर मनहूसी का छायी रही. करण जौहर ने इस फिल्म के लिए करीना कपूर के साथ हृतिक रोशन को मुख्य भूमिका में लिया था. इससे यह तय हो गया था कि ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’, ‘यादें’, ‘मुझसे दोस्ती करोगे’ व ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी सफलतम फिल्मों की यह जोड़ी ‘‘शुद्धि’’की नैया पार लगाएगी. मगर अचानक कुछ ही माह बाद हृतिक रोशन ने इस फिल्म को करने से मना कर दिया. तब इस फिल्म के साथ सलमान खान को जोड़ा गया. मगर करीना कपूर ने इस फिल्म को यह कहकर करने से मना कर दिया कि वह तो ‘शुद्धि’ हृतिक रोषन के साथ काम करने के लिए कर रही थीं. यहीं से करण जौहर और करीना कपूर के बीच दूरियां बढ़ती चली गयी.

करण जौहर धीरे धीरे आलिया भट्ट को आगे बढ़ाने लगे. उसके बाद फिल्म ‘‘शुद्धि’’ के साथ दीपिका पादुकोण सहित कई कलाकारों को जोड़ने की चर्चा होती रही. पर अंततः करण जौहर ने अपने बैनर की फिल्म ‘‘स्टूडेंट ऑफ द इयर’’ के कलाकारों में से वरूण धवन और आलिया भट्ट को फिल्म ‘‘शुद्धि’’का चेहरा बनाया. मगर किसी न किसी वजह से फिल्म की शूटिंग शुरू नहीं हो पायी. सूत्रों की मानें तो बार बार कलाकारों के बदलते रहने की वजह से फिल्म की पटकथा को भी अब तक अंतिम रूप नही दिया जा सका है.

फिल्म ‘‘शुद्धि’’ के ना बनने और हमेशा के लिए बंद कर दिए जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं. सूत्रों की माने तो ‘‘शुद्धि’’ को निर्देशित करने वाले निर्देशक करण मल्होत्रा की फिल्म ‘‘बद्रर्स’’ के बाक्स आफिस पर असफल होने से करण जौहर को निराशा हुई. करण जौहर को लगा कि अब करण मल्होत्रा के निर्देशन में इस फिल्म को बनाना ठीक नहीं रहेगा और उन्होंने नए निर्देशक को तलाशना शुरू कर दिया. यूं तो कुछ माह पहले एक पत्रकार सम्मेलन में एक पत्रकार द्वारा ‘‘शुद्धि’’ की प्रगति को लेकर सवाल किए जाने पर करण जौहर ने झुंझलाहट के साथ कहा था-‘‘ओह गाड! मुझे बख्श  दो! आप लोग कब तक ‘शुद्धि’ को लेकर सवाल करेंगे? मुझे खुद नही पता कि ‘शुद्धि’ को किसकी बुरी नजर लग गयी है. शायद मैं यह फिल्म नही बना पाउंगा.’’

बालीवुड के सूत्रों की माने तो करण जौहर ने चार माह पहले ही हमेशा के लिए इस फिल्म को ठंडे बक्से में डाल दिया था. अपने इसी निर्णय के कारण करण जौहर ने झुंझलाहट में वह बयान दिया था. बहरहाल,अब तो करण जौहर के नजदीकी सूत्र भी बता रहे हैं कि अब यह फिल्म नहीं बनेगी.

 

प्रसून जोशी को सनी लियोनी का करारा तमाचा

एक टीवी चैनल पर सनी लियोनी के विस्तृत इंटरव्यू के प्रसारण के बाद आमिर खान सहित बालीवुड  की तमाम बड़ी बड़ी हस्तियां सनी लियोनी के पक्ष में खड़ी हो गयी थी. लेकिन दो दिन पहले मुंबई में एक फिल्म के कार्यक्रम में एक विज्ञापन एजेंसी से जुड़े तथा बालीवुड के चर्चित पटकथा व संवाद लेखक प्रसून जोशी ने सनी लियोनी के पेशे की तुलना ड्रग डीलर के साथ करते हुए सनी लियोनी के खिलाफ बहुत कुछ गलत कह डाला.

उस वक्त प्रसून जोशी ने कहा कि उनकी फितरत में नहीं है कि वह सरे आम किसी इंसान का अपमान करें, लेकिन इसके मायने यह भी नहीं है कि वह सनी लियोनी के व्यवसाय के पक्ष में हैं. उस वक्त प्रसून जोशी के बगल में बैठे आमिर खान भी चुप रहे.

मगर दो दिन बाद ही प्रसून जोशी के इस बयान पर जब सनी लियोनी से सवाल किया गया, तो सनी लियोनी ने बड़े भोलेपन के साथ कहा- ‘‘यह प्रसून जोशी कौन हैं? मुझे अब गूगल सर्च में जाकर देखना पड़ेगा कि वह कौन है? उसके बाद ही मैं कुछ कह सकूंगी.’’ कुछ लोग सनी लियोनी के इस जवाब को प्रसून जोशी पर बहुत बड़ा तमाचा मान रहे हैं. गूगल सर्च में सनी लियोनी सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं. कुछ लोग इसे सनी लियोनी की भलमनसाहत की संज्ञा दे रहे हैं. अन्यथा वह भी प्रसून को लेकर गलत शब्दों का उपयोग कर सकती थी?

वास्तव में दो दिन पहले एक फिल्म के कार्यक्रम के दौरान पत्रकार ने आमिर खान का ध्यान उनके उस बयान की ओर दिलाया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि सनी लियोनी चाहेंगी, तो वह सनी लियोनी के साथ फिल्म करना चाहेंगे. इस पर आमिर खान ने कहा था-‘‘जब मैंने सनी जी का इंटरव्यू चैनल पर देखा, तो मुझे बुरा लगा. उनसे जिस तरह के सवाल पूछ जा रहे थे,वह भी मुझे बुरा लगा. उनसे सवाल पूछा गया कि यदि आपको आमिर खान के साथ काम करने का मौका मिला तो करेंगी? शायद उनका जवाब था- नहीं! मुझे यह भी ठीक नहीं लगा. मुझे लगा कि वह ऐसा क्यों कह रही है? मेरा यह मानना है कि यदि कहानी सही हो, किरदार सही हो और उन किरदारों में हम दोनो फिट बैठते हों, तो मुझे कतई समस्या नहीं है उनके साथ काम करने में. उनकी निजी जिंदगी जो है,उससे मेरा कोई लेना देना नहीं है.वह एक इंसान हैं. वह एक औरत हैं. मैं उनकी इज्जत करता हूं’’

आमिर खान की बात पूरी होने से पहले ही प्रसून जोशी ने माइक लेकर सनी लियोनी के खिलाफ अपने विचार रखने शुरू कर दिए. जबकि इस पूरे प्रकरण में किसी भी पत्रकार ने प्रसून जोशी से कोई सवाल नहीं किया था. बहरहाल, प्रसून जोशी ने धाराप्रवाह बोलते हुए कहा-‘‘मैं एक प्वाइंट कहना चाहूंगा कि किसी को कोई प्रोफेशन बहुत अच्छा चलता होगा, उसकी निंदा नहीं करनी चाहिए. हम कलाकार के नाम पर व्यवसाय का बहुत ज्यादा महिमा मंडल करना शुरू कर देते हैं. यह जरुरी नहीं कि किसी के जीवन में जुड़ा व्यवसाय समाज के लिए अच्छा काम कर रहा हो. समाज के लिए किसी न किसी रूप से सकारात्मक होना चाहिए. क्योंकि सवाल उनका उठा है, तो कहना चाहता हूँ कि सनी लियोनी का जो व्यवसाय है,उसकी मैं कतई इज्जत नहीं करता हूं और मैं नहीं चाहूंगा कि उस व्यवसाय से हमारी युवा पीढ़ी प्रेरित हो. लेकिन उसके बारे में किसी व्यक्ति को कटघरे में खड़ा करना किसी भी कलाकार को शोभा नही देता. लेकिन इसका यह मतलब नहीं लगाया जाना चाहिए कि कल को आप कहें कि यह ड्रग डीलर है, यह इसका व्यवसाय है. यह इसका निजी मसला है. हो सकता है कि मैं उसकी इज्जत न करुं. मुझे लगता है कि यह उसका व्यवसाय गलत है. पर जब वह मेरे सामने आएगा, तो क्या मैं उसे बेइज्जत करूंगा, जी नहीं. उसका सम्मान नहीं करुंगा, तो शायद इसके लिए मेरा कल्चर मुझे इजाजत नहीं देगा. लेकिन साथ साथ उस व्यवसाय का महिमा मंडल भी मैं नहीं करूंगा. यदि कोई व्यवसाय समाज के लिए हानिकारक है, तो उसकी आलोचना की जानी चाहिए.’’

दो दिन पहले यानी कि 25 जनवरी को संपन्न एक फिल्म के कार्यक्रम के दौरान फिल्मकार राकेश ओमप्रकाश मेहरा, लेखक कमलेष पांडे, लेखक प्रसून जोशी, वहीदा रहमान, आमिर खान, अतुल कुलकर्णी, शर्मन जोशी, सिद्धार्थ के अलावा कई अन्य लोग मौजूद थे. इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि जब भी पत्रकारों ने आमिर खान से उनके भारत छोड़ने या असहिषणुता के बयान को लेकर सवाल किया, उस सवाल का जवाब आमिर ने भी दिया, पर बीच में आमिर खान की सफाई देने का काम प्रसून जोशी जरुर करते हुए नजर आए. अब वह ऐसा क्यों कर रहे थे, इसकी वजह तो वही ज्यादा बेहतर बता सकते हैं. आखिर वह नामचीन लेखक व कवि भी हैं.

खुशखबरी: अब 555 रुपए में लें हवाई सफर का मजा

अगर इस साल छुट्टियों में हवाई सफर का मजा लेना चाहते हैं, तो बेहतरीन मौका है. गोएयर, स्‍पाइस जेट और एयरकोस्‍टा जैसी एयरलाइन कंपनियां हवाई सफर पर जबर्दस्‍त डिस्‍काउंट दे रही हैं. एयरकोस्टा ने अपने सभी नौ घरेलू डेस्टिनेशन के लिए उड़ानों के किराए 555 रुपए तक घटा दिए हैं. वहीं बजट एयरलाइन गोएयर 1,826 रुपए (कर अतिरिक्‍त) में हवाई सफर का मौका दे रही है. इसके अलावा स्पाइसजेट ने 826 रुपए (कर अतिरिक्‍त) से एयर फेयर की शुरुआत की है.

आज खत्‍म हो रही है एयर कोस्‍टा की सेल
एयर कोस्टा की चार दिन की छूट की पेशकश सोमवार शुरू हुई है. इसके तहत सभी 9 घरेलू डेस्टिनेशन पर 555 रुपए में टिकट मिल रही हैं. एयर कोस्‍टा जयपुर, अहमदाबाद, विशाखापट्टनम, हैदराबाद, विजयवाड़ा, तिरुपति, चेन्‍नई, बैंगलुरू, कोयंबटूर के बीच सेवाएं देती है. यह योजना इकोनॉमी एवं इकोनॉमी-प्लस दर्जों दोनों पर लागू है. एयर कोस्टा ने कहा कि छूट की पेशकश के तहत बुक किए गए टिकटों पर यात्रा 8 फरवरी और 29 अक्तूबर, 2016 के बीच की जा सकती है.

स्‍पाइसजेट का ऑफर
स्‍पाइस जेट ने रिपब्लिक डे के मौके पर 826 रुपए में डोमेस्टिक और 3,026 रुपए में विदेशी हवाई सफर का ऑफर लॉन्‍च किया है. ऑफर के तहत 25 से 27 जनवरी के बीच टिकटों की बुकिंग की जा सकेगी. इस बुकिंग पर 1 फरवरी से 12 अप्रैल के बीच सफर किया जा सकेगा. स्‍पाइस जेट की ओर से लॉन्‍च किए गए ऑफर में डोमेस्टिक उड़ानों के लिए बेस फेयर 826 रुपए से शुरू होगा. इस बेस फेयर पर ग्राहकों को टैक्‍स अलग से देना होगा. यह ऑफर कुछ चुनिंदा रूट्स के लिए होगा. वहीं दूसरी ओर इंटरनेशनल उड़ानों के लिए बेस फेयर 3026 रुपए से शुरू होगा.

गो एयर का ऑफर
बजट एयरलाइन गोएयर ने रिपब्लिक डे पर प्रमोशनल ऑफर पेश किया है, जिसमें किराये की शुरुआत 1826 रुपए (बेस फ्यूल सरचार्ज) से होगी. 1826 रुपए का किराया दिल्‍ली-लखनऊ रूट पर लागू होगा. इसी ऑफर के तहत दिल्‍ली-मुंबई रूट का किराया 2268 रुपए से शुरू होग. यह ऑफर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा.

पिछले बजट की क्या ये 6 बातें याद हैं आपको

फाइनेंशियल ईयर 2015-2016 के खत्‍म होने से पहले आपकी टैक्‍स की टेंशन भी बढ़ गई होंगी. हर साल की तरह आप इस साल भी अपनी टैक्‍स देनदारी बचाने के लिए इंश्‍योरेंस, एफडी, पीपीएफ, एनएससी जैसे दूसरे विकल्‍पों में निवेश की प्‍लानिंग कर रहे होंगे. लेकिन टैक्‍स बचाने की हड़बड़ी में सरकार द्वारा बढ़ाई गई एक्‍जेम्‍प्‍शन लिमिट के बारे में सोचना ही भूल जाते हैं, जो हमारा टैक्‍स बचाने में भी मददगार होते हैं. सरिता टीम आपको आयकर के अलग अलग सेक्शन्स के अंतर्गत उन संशोधित सीमाओं के बारे में बता रही है जिनके बारे में जानना आपके लिए जरूरी है.

बढ़ गई है हैल्‍थ इंश्‍योरेंस की लिमिट
स्वयं, बच्चों के लिए और अपने पार्टनर के लिए दिए गए मेडिकल इंश्योरेंस का प्रीमियम पर इनकम टैक्स सेक्शन 80डी के तहत मिलने वाली छूट की लिमिट 15 हजार रुपए सालाना से बढ़कर 25 हजार रुपए सालाना कर दी गई है. अगर अपने माता पिता के मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम का भुगतान कर रहे हैं तो उस पर आप 30 हजार तक की कटौती की मांग कर सकते हैं. पहले आप आप केवल 20 हजार रुपए की क्लेम कर सकते थे. वरिष्ठ नागरिकों के मामले में जहां पहले 20 हजार रुपए सालाना की लिमिट थी अब वहां 30 हजार कर दी गई है.

एनपीएस में निवेश कर पा सकते हैं 50 हजार की छूट
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80 सीसीडी के सेक्शन-1बी के तहत अब आप नैशनल पेंशन स्कीम के अंतर्गत 50 हजार रुपए की अतिरिक्त कटौती की भी मांग कर सकते हैं. यह कटौती सेक्शन 80 सी के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपए के अलावा है. अब सेक्शन 80 सी और 80सीसीडी (1बी) की कुल कटौती 2 लाख रुपए है.

डिपेंडेंट के मेडिकल खर्च की लिमिट 25 हजार बढ़ी
सेक्शन 80डीडी के तहत आप 75 हजार रुपए सालाना की कटौती की मांग कर सकते हैं उन मेडिकल खर्चों पर जो आप अपने डिपैंडेंट रिश्तेदार जो विक्लांग (40 फीसदी से ज्यादा और 80 फीसदी से कम) है. पिछले साल तक यह राशि 50 हजार रुपए सालाना थी. गंभीर विक्लांगता (80 फीसदी के ज्यादा) की स्थिति में आप 1.25 लाख रुपए सालाना की मांग कर सकते हैं. ये पिछले साल तक 1 लाख रुपए थी. कटौती की मांग करते वक्त आपको मेडिकल ऑथोरिटी की तरफ से मिले गए सर्टिफिकेट को पेश करना अनिवार्य होत है.

गंभीर बीमारी के खर्च पर अतिरिक्‍त छूट
वरिष्ठ नागरिकों पर किए गए मेडिकल खर्चे जिनमें डिमैंशिया, कैंसर, एड्स आदि जैसी बीमारी शामिल हैं उस पर सालाना 60,000 रुपए की कटौती को बढ़ाकर 80,000 कर दिया गया है. ये कर कटौती सेक्शन 80डीडीबी के तहत है.

विकलांगता पर मिलती है टैक्‍स राहत
व्यक्ति की विकलांगता के मामले में सेक्शन 80यू के तहत कटौती की लिमिट 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपए कर दी गई है. गंभीर विकल्गता के मामले में लिमिट को 1 लाख से बढ़ाकर 1.25 लाख कर दी गई है. ये उस स्थिति में संभव है जब करदाता खुद किसी भी तरह की विक्लांग्ता से पीड़ित हो.

पिछले साल से दोगुना हुआ रेंट अलाउंस
आपके नियोक्ता की ओर से दिए जाने वाले किराया भत्ता पर आप 1600 रुपए प्रति महीना की मांग कर सकते हैं. पिछले साल तक यह लिमिट 800 रुपए प्रति महीना थी. साथ ही अगर व्यक्ति नेत्रहीन या ऑर्थियोपेडिकली विकलांग हो उस स्थिति में आप 3200 रुपए प्रति महीना तक की मांग कर सकते हैं. यह लिमिट पिछले साल तक 1600 रुपए प्रति महीना थी.

भारतीयों के लिए स्मार्टफोन सबसे जरूरी साथी

भारतीय लोग यात्रा करने के दौरान अपने स्मार्टफोन को सबसे जरूरी साथी मानते हैं और वे स्मार्टफोन को टूथब्रश, डियोड्रेंट तथा ड्राइविंग लाइसेंस से भी ज्यादा तरजीह देते हैं. मोबाइल फोन संबंधित आचरण के संबंध में यात्रियों के बीच कराए गए एक अध्ययन से यह जानकारी सामने आयी है. यह सर्वेक्षण उत्तरी अमेरिका, यूरोप, दक्षिण अमेरिका और एशिया..प्रशांत क्षेत्र में कराया गया.

यात्रा वेबसाइट एक्सपीडिया डाट काम की ओर से यह सर्वेक्षण नार्थस्टार कंपनी ने किया. इसमें 19 देशों के 9,642 यात्रियों ने भाग लिया. एक्सपीडिया समूह के अध्यक्ष अमन भूटानी ने कहा कि हमें पता लगा कि यात्रा की हर प्रक्रिया में यात्री मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं. इसमें जानकारी जुटाने से लेकर टिकट बुक करने और यात्रा के अनुभवों को साझा करने तक की प्रक्रिया शामिल है. हालांकि मोबाइल फोन पर अति निर्भरता हर देश में नहीं है.

सर्वेक्षण के अनुसार चीन और ताइवान में 94 प्रतिशत, थाइलैंड में 91 प्रतिशत लोगों ने स्मार्टफोन को यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण साथी बताया वहीं जर्मनी, नार्वे और स्वीडन में यह संख्या कम रही.

रिकॉर्ड मुनाफा, फिर भी आईफोन की रफ्तार सुस्त

एप्पल के इतिहास में आईफोन की बिक्री सबसे सुस्त रही है. अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान कंपनी ने 7.48 करोड़ आईफोन की बिक्री की है, जो कि पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 3 लाख अधिक है. 2007 में आईफोन की लॉन्चिंग के बाद से लेकर अब तक की सबसे कम ग्रोथ है. हालांकि, इसके बावजूद टेक्नोलॉजी सेक्टर की प्रमुख कंपनी ने रिकार्ड तिमाही मुनाफा दर्ज किया है. एप्पल का मुनाफा 26 दिसंबर को समाप्त तिमाही के दौरान दो फीसदी बढ़ा जो पिछले साल की तिमाही में 18.4 अरब डॉलर था, जबकि आय भी दो फीसदी बढ़कर 75.9 अरब डॉलर रही. इससे पहले दिसंबर में मॉर्गन स्टेनली ने कंपनी के इतिहास में पहली बार आईफोन की बिक्री घटने का अनुमान लगाया था.

एप्पल ने की रिकॉर्ड बिक्री, लेकिन चिंता बरकरार

एप्पल की बिक्री अपने रिकॉर्ड स्तर पर है और कंपनी को वृद्धि के नए स्रोतों की तलाश करनी होगी. बिक्री घटने के डर से पिछले साल एप्पल के शेयरों में 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. मुख्य कार्यकारी टिम कुक ने तिमाही नतीजे से जुड़े बयान में कहा, हमारी टीम ने एप्पल को विश्व के सबसे इनोवेटिव प्रोडक्ट्स और आईफोन, एपल वॉच और एपल टीवी की रिकार्ड बिक्री के जरिए जबरदस्त मुनाफा दर्ज करने में मदद की. रिजल्ट अच्छा आने के बावजूद हम सबसे खराब दौर की बात इसलिए कर रहे है, क्योंकि आईफोन जब से लॉन्च हुआ है इसकी बिक्री में जोरदार इजाफा देखने को मिला है. लेकिन इस ऐसा नहीं हुआ है.

2007 के बाद आईफोन की बिक्री की ग्रोथ सबसे कम

एप्पल ने इस दौरान एक अरब आईफोन, आईपैड, मैकिंटोश कंप्यूटर, आईपॉड टच उपकरण, एपल टीवी और एपल वाच बेचे. दिसंबर में समाप्त तिमाही में एप्पल के आईफोन की बिक्री 7.48 करोड़ इकाई रही, जो पिछले साल की इसी तिमाही में हुई 7.45 करोड़ इकाई के मुकाबले थोड़ी ही ज्यादा है और 2007 में पेश इस लोकप्रिय उपकरण की बिक्री की वृद्धि दर इस अवधि में सबसे कम रही.

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