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जिंदगी बदलने आ रही हैं नई तकनीकें

अगर आविष्कार नहीं होते, तो दुनिया को बदलने में शायद कुछ सदियां और लगतीं. बिजली और बल्ब के आविष्कार के साथ दुनिया में जो औद्योगिक क्रांति सौ डेढ़ सौ साल पहले शुरू हुई थी, आज वह कंप्यूटर, इंटरनैट जैसी तकनीक के साथ ऐसी क्रांति में बदल गई, जिस से लोगों को हर साल नई तकनीकों का इंतजार रहने लगा है. स्मार्टफोन्स ही नहीं, हर साल कुछ ऐसी चीजें दुनिया में बनाई जाने लगी हैं, जिन से लगता है कि आने वाले समय में मनुष्य को कई ऐसी सुविधाएं हासिल हो जाएंगी जिन के बारे में पहले कभी सोचा तक नहीं गया था.

आगे क्या होने जा रहा है, इस की झलक पिछले 2-3 साल में हुए आविष्कारों से भी मिल जाती है. हाल के वर्षों में कई ऐसे तकनीकी आविष्कार पहली बार सामने आए, जिन्होंने दुनिया को अचंभित कर दिया. जैसे, चीन में एक तकनीकी विश्वविद्यालय के पीएचडी के छात्र चुआन वांग ने एक ऐसी इलैक्ट्रिक छतरी का आविष्कार किया जो अपनी ताकतवर हवा के जरिए बारिश की बूंदों को छाते से हटा देती है. इस से लगता है कि उस छतरी को पकड़े व्यक्ति ने बारिश से बचने का कोई अदृश्य इंतजाम कर रखा है. यह आविष्कार इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि सदियों से बारिश में गीली हो जाने वाली छतरी का आज तक ऐसा चमत्कारी विकल्प किसी को सूझा नहीं था.

इसी तरह ड्रोन के अविश्वसनीय कारनामे अब तो हमारे देश में भी देखने को मिल रहे हैं. महंगी शादियों में ड्रोन पर लगे कैमरे शादी की पूरी चहलपहल रिकौर्ड कर रहे हैं, तो कुछ फिल्मों में ड्रोन से आसमानी दृश्य फिल्माए जाने लगे हैं. ड्रोन से पिज्जा डिलीवरी और दिल्ली से ले कर अहमदाबाद तक ट्रैफिक आदि की निगरानी में उन की मदद ली जा रही है. क्या किसी ने सोचा था कि हमें तकनीक के ऐसे करिश्मे देखने को मिल पाएंगे. पर यह सब सच हुआ, इसीलिए यह लग रहा है कि इस साल भी कुछ नए तकनीकी आविष्कार हमारी आंखें आश्चर्य से भर देंगे.

लाईफाई का चमत्कार

इंटरनैट से जुड़े लोगों ने अभी तक वाईफाई तकनीक का ही सुख भोगा है, जिस में बिना किसी तार का इस्तेमाल किए एकसाथ कई स्मार्टफोन्स टैबलेट, लैपटौप आदि पर इंटरनैट चलाया जा सकता है. वाईफाई कनैक्शन पर मिलने वाली स्पीड ने इंटरनैट सर्फिंग में काफी इजाफा भी किया है, पर अब इस में एक नया चमत्कार जुड़ने जा रहा है. इस तकनीकी चमत्कार का नाम है लाइट फिडिलिटी यानी लाईफाई.

वैज्ञानिकों का दावा है कि वाईफाई की तुलना में लाईफाई से चलाया जाने वाला इंटरनैट वाईफाई से 200 गुना से भी ज्यादा तेज होगा. इसे इस से समझा जा सकता है कि लाईफाई की मदद से पलक झपकते ही यानी एक सैकंड में 18 फिल्में किसी भी गैजेट पर डाउनलोड की जा सकती हैं. अमेरिका के एस्टोनिया में किए गए एक प्रयोग के दौरान लाईफाई कनैक्शन से प्रति सैकंड 1 जीबी (गीगाबाइट) डाउनलोडिंग की स्पीड हासिल की गई जो पारंपरिक वाईफाई के मुकाबले 100 गुना ज्यादा तेज है.

वाईफाई और लाईफाई में असली फर्क तरंगों का है, जिस से उन के जरिए मिलने वाले डाटा और संकेतों की गति में अंतर आता है. वाईफाई में ट्रांसमिट किया जाने वाला डाटा रेडियो तरंगों के जरिए मिलता है, जबकि लाईफाई का आधार हैं प्रकाश तरंगें. रेडियो तरंगों की सीमाओं के चलते इंटरनैट से डाटा (शब्द, वीडियो आदि) भेजना दिनोदिन मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि अब बहुत ज्यादा डाटा इस्तेमाल होने लगा है. इस कारण इंटरनैट के धीमे पड़ जाने का खतरा पैदा हो गया है. पर लाईफाई तकनीक इस का आसान समाधान हो सकती है, क्योंकि प्रकाश तरंगों का स्पैक्ट्रम रेडियो तरंगों के मुकाबले 10 हजार गुना ज्यादा होता है. हो सकता है कि लाईफाई को मूर्त रूप लेने में अभी कुछ और वक्त लगे, पर इतना तय है कि 2016 में इस कीठोस नींव रख ही दी जाएगी.

बाबू, समझो इशारे

कैसा हो अगर कमीज का कौलर छूने मात्र से आप का स्मार्टफोन चलने लगे या बैडरूम के परदे को हलके से छूने पर कमरे की लाइट्स को धीमा या तेज किया जा सके? अभी ये बातें किसी साइंस फिक्शन जैसा एहसास देती हैं, पर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की कई टीमें ऐसे आविष्कार दुनिया में लाने पर काम कर रही हैं जो हमारे इशारों को समझ कर सौंपे गए काम निबटा सकेंगी. ऐसे एक ‘प्रोजैक्ट सोली’ पर गूगल में काम चल रहा है जहां मनुष्य की भावभंगिमाओं को पढ़ कर काम करने वाली सैंसर तकनीक को वास्तविकता में ढाला जा रहा है. प्रोजैक्ट सोली के तहत छोटे माइक्रोचिप्स से बना राडार सिस्टम आसपास के क्षेत्रों (2 से 3 फुट की रेंज) में इंसान की उंगलियों के संचालन को पढ़ व समझ लेता है और उन के अनुसार खुद से जुड़े गैजेट्स को काम करने का आदेश देता है. यह तकनीक कारों, खिलौनों, फर्नीचर, घडि़यों और कंप्यूटर गेम्स आदि में आसानी से फिट की जा सकती है.

अमेरिका में प्रोजैक्ट सोली से जुड़ कर कई तरह की चीजें तैयार हो रही हैं, जिन्हें इस साल में लोग बाजार में देख सकेंगे. जैसे धातु से बने धागों से बनी एक ऐसी स्मार्ट जींस इसी साल बाजार में आ जाने की उम्मीद है, जिसे पहनने वाले अपने कई गैजेट्स जींस के सहारे चला सकेंगे.

बिग डाटा से बड़ा क्या

कभी आप ने सोचा है कि फेसबुक, ट्विटर, माईस्पेस, यूट्यूब, जीमेल, गूगल आदि असंख्य वैबसाइट्स के जरिए पूरी दुनिया जो डाटा यानी शब्द, चित्र, संख्याएं, वीडियो आदि यहां से वहां भेज रही है, स्टोर कर रही है, उस का आखिर होता क्या है. इस डाटा को हालांकि एक संज्ञा, ‘बिग डाटा’ दी गई है, पर फिलहाल इस बिग डाटा का बहुत सा हिस्सा असल में व्यर्थ ही सर्वर में जमा होता रहता है और उस से काम की बातें जरा कम ही निकलती हैं.

इस साल एक बड़ी कोशिश बिग डाटा को काटछांट कर उस से दुनिया के लिए नायाब चीजें खोज निकालने की होने वाली है. यह कोशिश कैसे होगी, इस का जवाब जानने से पहले यह जानना उचित होगा कि पहले इस डाटा के भंडार का एक अनुमान लगाया जाए. 2010 में गूगल के कार्यकारी अध्यक्ष एरिक श्मिट ने बताया था कि प्रत्येक 2 दिन में दुनिया करीब 5 ऐक्साबाइट्स के बराबर डाटा पैदा करती है. 2014 आतेआते यह मात्रा दोगुनी हो गई यानी अब हर दिन में उस से भी कई गुना ज्यादा डाटा लोग अपने स्मार्टफोन और कंप्यूटरों के जरिए उत्पन्न कर रहे हैं, जितना 2010 में 2 दिन में जमा होता था.

पहले यह डाटा सिर्फ इंटरनैट के जरिए यहांवहां पहुंचता था, पर अब तो मोबाइल ऐप्स (फोन, टैबलेट आदि) के जरिए भी पैदा हो रहा है. अब कुछ प्रमुख कंप्यूटर कंपनियां जैसे आईबीएम और इंटेल सर्वर से हो कर गुजरने वाले इस डाटा को कुछ ऐसे ताकतवर कंप्यूटर्स में डाल कर संसादित करने वाली हैं, जो फिलहाल कुछ चुनिंदा उद्देश्यों से उन में से उपयोगी सूचनाएं छांट कर अलग कर सकेंगे. खासतौर से आईबीएम ने इस के लिए अपने सुपर कंप्यूटर, वाटसन को तैयार किया है और डाटा से संबंध रखने वाली इंडस्ट्री (जैसे औनलाइन शौपिंग वैबसाइट्स) के लिए विशेष कंप्यूटिंग डिवाइस तैयार की हैं, जो उन के काम की सूचनाएं डाटा के विशाल समुद्र में से खंगाल कर बाहर ला सकेंगी. मसलन, यदि किसी कंपनी को लगता है कि उसे विशेष प्रकार की व्यंजन विधियों की तलाश है और गूगल जैसे सर्च इंजन यह काम नहीं कर पा रहे हैं, तो वह इस के लिए आईबीएम से कह सकती है. तब आईबीएम वाटसन की मदद से ट्विटर से ले कर इंटरनैट तक के छिपे, खुले स्रोत की पड़ताल कर उपयोगी और एकदम सटीक जानकारियां बटोर कर उसे दे सकेगी.

नए मुकाम पर आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस

कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस का सपना साइंस बिरादरी अरसे से देख रही है और कहा जा रहा है कि कई मामलों में यह असली बुद्धिमत्ता यानी इंसान के दिमाग को पछाड़ देगी. मुमकिन है कि इस साल हम इस बड़े सपने को अमल में आते हुए देखें, पर यह आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस है क्या? आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस के जन्मदाता कहलाने वाले प्रख्यात साइंटिस्ट जौन मैकार्थी के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस साइंस और इंजीनियरिंग का ऐसा मिश्रण है जिस का उद्देश्य इंटैलिजैंट मशीनें बनाना है. ऐसी मशीनों को कोई काम करने के लिए इंसान से आदेश लेने की जरूरत नहीं होती. असल में यह कृत्रिम तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता है. यह कंप्यूटर और उस के प्रोग्राम को उन्हीं तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास है जिस के आधार पर मानव मस्तिष्क चलता है.

मोटे तौर पर आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस का उद्देश्य यह है कि कंप्यूटर यह चीज खुद तय कर लें कि उन की अगली गतिविधि क्या होगी. इस के लिए कंप्यूटर को अलगअलग परिस्थितियों के अनुसार अपनी प्रतिक्रिया चुनने के लिए तैयार किया जाता है.इस के पीछे यही कोशिश होती है कि कंप्यूटर मानव की सोचने की प्रक्रिया की नकल कर पाए. इस का उदाहरण है, शतरंज खेलने वाले कंप्यूटर. ये कंप्यूटर प्रोग्राम मानव मस्तिष्क की हर चाल की काट और अपनी अगली चाल सोचने के लिए तैयार किए  गए. अतीत में दुनिया देख चुकी है कि आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस की ताकत से लैस आईबीएम के सुपर कंप्यूटर डीप ब्लू ने किस तरह दुनिया के नंबर वन शतरंज खिलाड़ी गैरी कास्परोव को हरा दिया था.

पर अब दुनिया आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस का कौन सा नया करिश्मा देखने जा रही है, इस के 2 या 3 चमत्कार होने की उम्मीद है. जैसे, कंपनी माइक्रोसौफ्ट आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस से लैस मशीन को स्काइप ट्रांसलेटर के साथ जोड़ कर एक प्रयोग करने जा रही है. इस प्रयोग के तहत यह मशीन किसी एक भाषा की बातचीत के लहजे और भाव को समझते हुए रियल टाइम में दूसरी भाषा में उसी लहजे और भाव के साथ पेश करेगी. यह मशीन न केवल संवाद के टोन (लहजे) को पकड़ सकेगी, बल्कि उसी दक्षता के साथ उसे दूसरी (अनुवादित) भाषा में सुनाएगी. आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस का एक अन्य प्रयोग एक कंप्यूटर प्रोग्राम ईयुजीन गू्रट्समैन के साथ करने की योजना है जिस में यह दिमाग चकरा देने वाले करिश्मे कर सकता है. असल में यह कंप्यूटर अपनी बेमिसाल नकली बुद्धिमत्ता से ठीक उसी तरह इंसान को मूर्ख बनाने की कोशिश करेगा, जैसा कि अकसर ठग और जालसाज किया करते हैं. माना जा रहा है कि जिस दिन आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस से लैस कंप्यूटर इंसान को उल्लू बनाने में कामयाब हो गया, उस दिन बुद्धिमत्ता पर हमारी बादशाहत खत्म हो जाएगी और एक दिन दुनिया पर मशीनों का राज कायम हो जाएगा.

तीसरा प्रयोग गूगल के डेमिस हस्साबिस करने वाले हैं, जिस से आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस का भविष्य तय हो सकता है. वे असल में अपनी मशीनों से इंटैलिजैंस की पहेली को हल करने की कोशिश करने वाले हैं. उन की बेताबी यह पता लगाने की है कि क्या सिलीकौन जैसे तत्त्व और कंप्यूटर कोडों के बीच बुद्धिमत्ता पैदा की जा सकती है? अगर यह पहेली या समस्या सुलझ गई, तो समझिए कि यह साल अगले 20-40 वर्ष में साइंस की दिशा बदलने वाले साल के रूप में दर्ज हो जाएगा

क्या आपने पढ़ी 2016 की 5 अहम भविष्यवाणियां

2016 में तकनीक के क्षेत्र में क्याक्या परितर्वन हो सकते हैं, इसे ले कर कई महारथी कंपनियां भी अपनेअपने दावं खेल रही हैं. जैसे, इस बारे में कुछ अंदाजा, कंप्यूटर कंपनी आईबीएम ने भी लगाया है. आईबीएम के अनुसार, 2016 में 5 ऐसे क्रांतिकारी आविष्कार सामने आएंगे जो हमारी जिंदगी बदल सकते हैं, ये हैं :

खुद बनाएंगे बिजली

दुनिया के हर मुल्क में बिजली की खपत सिर्फ आबादी की वजह से नहीं बढ़ रही है, बल्कि बिजली से चलने वाले उपकरणों पर बढ़ती हमारी निर्भरता के कारण भी बिजली के इस्तेमाल में कई गुना बढ़ोतरी हो गई है. उत्पादन लागत बढ़ने की वजह से बिजली महंगी भी होती जा रही है. यही वजह है कि अब वैज्ञानिक और उद्योगपति उन तकनीकों के बारे में विचार करने लगे हैं, जिन से लोग अपने घर में ही बिजली बना सकें. सौर ऊर्जा इन में से एक है, पर बादल छाए रहने या फिर बारिश वाले दिनों में बिजली के लिए सूरज पर निर्भर नहीं रहा जा सकता.

इस का एक उपाय भारत में एक अरबपति उद्योगपति मनोज भार्गव ने सुझाया है. उन की कंपनी ने 15-20 हजार रुपए की कीमत वाली ऐसी साइकिल तैयार करवाई है, जिसे हर दिन एक घंटे चला कर एक छोटा परिवार अपनी कुछ जरूरतों के लिए खुद बिजली बना सकता है. हालांकि वैज्ञानिक इस से भी बड़ा करिश्मा करने की सोच रहे हैं. जैसे साइकिल के अलावा रोज पहने जाने वाले जूतों और घर में पाइप से हो कर आने वाले पानी में ऐसी तकनीक लगा दी जाए कि उन से बिजली बनने लगे. आईबीएम के अनुसार इस साल ऐसी तकनीकें लोगों के सामने आएंगी.

पासवर्ड से छुटकारा

कंप्यूटर, मोबाइल, क्रैडिट कार्ड, औनलाइन शौपिंग की वैबसाइट और न जाने कितनी जगहों पर हमें रोजाना तरहतरह के पासवर्ड  का इस्तेमाल करना पड़ता है. कई बार पासवर्ड भूल जाने या हैक कर लिए जाने की समस्या का भी सामना करना पड़ता है. अब साइंटिस्ट पासवर्ड से हमेशा के लिए छुटकारा दिलाने वाली तकनीक लोगों को मुहैया कराने की सोच रहे हैं. इस तकनीक के तहत हमारा चेहरा, आंखें (पुतलियां), उंगलियों की छाप को पढ़ने वाले इंतजाम हर जगह लग जाएंगे जिस से पासवर्ड के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी, यह तकनीक काफी सुरक्षित भी होगी, क्योंकि इस में पासवर्ड भूल जाने, चोरी हो जाने या गलत हाथों में इस्तेमाल होने के खतरे भी नहीं रहेंगे.

पढ़ेंगे दिमाग

इंसान के दिमाग को हूबहू पढ़ लेना विज्ञान के लिए एक सपना रहा है. अभी की तकनीकें हमारे दिमाग को पढ़ कर खुद काम नहीं कर सकतीं. उन्हें बोल कर या छू कर कोई आदेश देना पड़ता है. पर आईबीएम के अनुसार इस साल साइंटिस्ट ऐसीतकनीक का खुलासा कर सकते हैं, जिन की सहायता से स्मार्टफोन या कंप्यूटर आदि गैजेट्स हमारा दिमाग पढ़ कर कोई काम करने लगेंगे. यानी हमें किसी व्यक्ति को फोन करने के बारे में सिर्फ दिमाग में सोचना होगा और स्मार्टफोन खुद ही उस व्यक्ति का नंबर लगा देगा. है न कमाल?

डिजिटल डिवाइड

अमीरगरीब और स्त्रीपुरुष के बीच डिजिटल डिवाइड की समस्या पूरी दुनिया में है. महिलाएं तकनीक के क्षेत्र में पीछे हैं और गरीबों को अमीरों की तरह इंटरनैट या स्मार्टफोन हासिल नहीं हैं. आईबीएम के अनुसार, अब यह नजारा बदलने वाला है. इन दोनों ही मोरचों पर तकनीक महिलाओं और गरीबों की मदद करने वाली है ताकि उन्हें दुनिया में बराबरी का एहसास हो सके.

जंक ईमेल से निजात

इंटरनैट इस्तेमाल करने वाले अकसर अपने इनबौक्स में आने वाली अवांछित ईमेल (जंक मेल) से परेशान रहते हैं. कुछ लोगों के इनबौक्स में तो रोजाना सैकड़ों जंक मेल आ जाती हैं. पर अब जल्द ही ईमेल सेवा देने वाली कंपनियां ऐसे प्रबंध करने वाली हैं जिन से लोगों को जंक मेल से ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ेगा. उन्हें सिर्फ वे ईमेल दिखाई देंगी, जो वे देखना

बेंगलूरू कांड: हाईटेक सिटी में कबिलाई संस्कृति

कहते है कि शिक्षा सभ्यता को जन्म देती है. भारतीय लोगों में अपनी संस्कृति की तारीफ करने की प्रवृत्ति कुछ ज्यादा ही देखी जाती है. देश में समय समय पर ऐसी तमाम घटनायें होती है जिनमें हमारी इस संस्कृति की पोल खुलकर सामने आ जाती है. देश की सबसे हाईटेक सिटी बेंगलुरू में तंजानिया की लडकी के साथ जो हुआ वह कबीलों की संस्कृति की याद दिलाने के लिये काफी है. 31 जनवरी की शाम 7 बजे एक सडक दुर्घटना में 35 साल की महिला की मौत के बाद गुस्साई भीड ने कार में सवार अफ्रीकी मूल के युवकों को पकड लिया. इनके साथ 2 लडकियां भी थी. गुस्साई भीड ने यह भी समझने की कोशिश नहीं की कि घटना में उन युवतियों का क्या रोल है ?

भीड ने लडकी को 20 मिनट तक सडक पर दौडा कर पीटा, उसके कपडे फाड दिये. जब उस लडकी ही हालत देखकर एक युवक उसे अपनी शर्ट देने लगा तो भीड ने उस युवक को कपडे नहीं देने दिया और उसकी पिटाई भी कर दी. इससे शर्मनाक बात यह है कि बेंगलुरू पुलिस ने सही एक्शन लेने के बजाये घटना पर लीपापोती करने लगी. पुलिस ने लडकी के कपडे फाडने और उससे बदसलूकी को न मानते हुये मारपीट की साधारण घटना बताया. जब मामले ने तूल पकडा तब केन्द्र सरकार ने कडा रूख अपनाया.

कर्नाटक में कांग्रेस के नेता सिद्वरमैया मुख्यमंत्री हैं. कांग्रेस हाईकमान के मामले में हस्तक्षेप करने के बाद मुख्यमंत्री सिद्वरमैया हरकत में आये, जिसके बाद हमला करने वाले 5 लोगों को पकडा गया. मुख्यमंत्री ने पुलिस की गलती को भी संज्ञान में लिया.

घटना का दूसरा पक्ष हमारी संस्कृति पर बदनुमा दाग सा है. इस घटना में शामिल लोगों को पुलिस पकड लेगी उनको सजा भी मिल जायेगी. भारतीय संस्कृति पर इस घटना ने जो दाग लगाया है उसका साफ होना बहुत मुश्किल है. घटना के बाद तंजानिया की उस युवती ने बयान दिया कि अब उसे हर भारतीय को देख कर डर लगता है. आधुनिक से दिखने वाले समाज में भी औरतों और महिलाओं को अनैतिक समझा जाता है. जरा सा मौका हाथ लगते ही उनके शरीर पर हमला करने से परहेज नहीं किया जाता है. भीड में शामिल हर चेहरा यह सोचता है कि कानून उसकी पहचान नहीं कर पायेगा और उसको सजा नहीं हो पायेगी. ऐसे में वह कबिलाई संस्कृति पर उतर आता है. जहां महिला के शरीर पर हमला कर अपनी हवस पूरी करने की कोशिश होती है.

अगर मौका अलग संस्कृति के लोगों के साथ हो तो मामला और भी अध्कि संगीन हो जाता है. एक हमारे देश की सभ्यता पर सवाल खडा होता है, दूसरी तरफ देश में काम कर रही वैधनिक संस्थायें कानून की रक्षा करने के बजाय मामले को दबाने में उतर आती है. किसी घटना को हम सबक के रूप में नहीं लेते. यही वजह है कि एक के बाद दूसरी घटना हमें शर्मसार करती है. जरूरत है कि हम राजनीति से उपर उठ कर कानून के राज की बात करे तभी इस तरह की घटनाओं से मुक्ति मिल सकेगी. सभ्य संस्कृति की दुहाई भर देने से ऐसे मामले रूकने वाले नहीं है.

बौलीवुड में मावरा होकाने की एंट्री

बालीवुड में मावरा होकाने की पहली फिल्म है ‘सनम तेरी कसम’. लेकिन मावरा भारतीय दर्शकों के लिए बिल्कुल नया चेहरा नहीं है. जिंदगी चैनल के कई पाक सीरियलों में वह दिख चुकी है. उनकी कुछ चुनिंदा सीरियल हैं – ‘कितनी गिरहें बाकी है’, ‘गुलों में रंग’, हल्की-सी खलिस’ और ‘यहां प्यार नहीं है’. इन सीरियलों में मावरा अपनी एक्टिंग के हुनर की छाप छोड़ चुकी हैं. अपने किरदार को वे बखूबी निभाती हैं.

23 साल की मावरा होकाने, दरअसल, मावरा हुसैन है. लेकिन अपने आपको दूसरों से जरा हट कर पेश करने के मकसद से हुसैन के अक्षरों को उलट-पलट कर होकाने बना लिया है मावरा ने. दरअसल अंग्रेजी में हुसैन के डबल ‘एस’ को ‘सी’ लिख कर होकाने बना लिया. और यह काम मावरा ने टीवी में लोकप्रियता हासिल करने के बाद नहीं किया, बल्कि जब वे सातवीं क्लास में पढ़ती थी, तभी से अपना नाम उसने इसी तरह लिखने की शुरूआत की.

मावरा की देखा-देखी उसकी बड़ी बहन उर्वा ने भी हुसैन से होकाने को अपना लिया है. गौरतलब है कि मावरा की बहन उर्वा होकाने भी पाक सीरियल की जानीमानी एक्ट्रेस हैं. भारत में उर्वा की पहचान मिली सीरियल ‘कही अनकही’ से हुई. दोनों बहनों ने पाकिस्तान में वीजे और मौडलिंग में बहुत नाम कमाया है.

मावरा अपनी लोकप्रियता पर जरा भी नहीं इतरारी. वह कहती है कि मैं अपनी लाइफ से बहुत खुश हूं. अपना काम लगन से करती हूं. साथ में अपने किरदार को बखूबी जीने की कोशिश करती हूं. मावरा आज भी अपने स्कूली जीवन की मस्ती को बहुत मिस करती है. किताबें पढ़ना और म्युजिक सुनना मावरा की होबी है. म्युजिक के लिए तो वह एकदम से क्रेजी हो जाती है. इसीलिए पेशेवर जीवन की शुरूआत उसने वीजे के रूप में की.

हालांकि मावरा के नाम एक विवाद भी जुड़ चुका है. सैफ-कटरीना की ‘फैंटम’ को लेकर मावरा के ट्वीट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था. दरअसल, मावरा ने लिखा कि फैंटम आतंकवाद पर बन फिल्म है. आंतकी का कोई देश नहीं होता। आतंकी केवल आतंकी होता है. मावरा के इस ट्वीट को भारत में अच्छी तरह नहीं लिया गया. भारत में सोशल मीडिया में मावरा को टारगेट बनाया गया. 

मावरा के आइ‍डल एक्टर है हौलीवुड के ब्राड पिट। हालांकि सलमान खान भी उसके पसंदीदा हीरो हैं. लेकिन पाक एकट्रेस में सबा कमर की बड़ी फैन हैं. ‘थकन’ सीरियल फेम सबा पाक फिल्म और टीवी सीरियल दोनों की जानी-मानी एक्ट्रेस हैं. मावरा ने सबा के साथ जिंदगी चैनल में टेलीकास्ट ‘यहां प्यार नहीं है’ सीरियल में स्क्रीन शेयर कर चुकी हैं. ‘सनम तेरी कसम’ से बौलीवुड में मावरा ने कदम तो रख दिया है, लेकिन उसे स्कैंडल, फेक न्यूज से बड़ा डर लगता है. फैंटम विवाद का नतीजा वह भुगत चुकी है. इसीलिए वह इन बातों से बचना चाहती है. सनम तेरी कसम की शूटिंग के दौरान ही बौलीवुड ने मावरा को और दो अनाम फिल्मों के लिए साइन किया है. फिलहाल देखना यह है कि सनम तेरी कसम बौक्स औफिस पर क्या गुल खिलाती है!

 

ऐसा होगा ‘सरबजीत’ में रणदीप हुडा का लुक

सरबजीत सिंह की जिंदगी पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार उमंग कुमार एक फिल्म ‘सरबजीत’ निर्देशित कर रहे हैं, जिसमें सरबजीत का किरदार रणदीप हुडा निभा रहे हैं. रणदीप हुडा अपनी तरफ से इस किरदार के साथ न्याय करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं. इस फिल्म के अपने किरदार के लुक के लिए खुद रणदीप हुडा ने मेहनत की है. उन्होने न सिर्फ दाढ़ी व बाल बढ़ाएं हैं. बल्कि किरदार की मांग के अनुरूप अपना वजन भी घटाया है.

सूत्र बताते हैं कि 23 साल तक पाकिस्तान की जेल में बंद रहे निर्दोष भारतीय सरबजीत के लुक में खुद को ढालने के लिए रणदीप ने अपनी तरफ से प्रयास करके कई फोटो जुटाए. पर वह अपने लुक के लिए सारा श्रेय निर्देशक उमंग कुमार को देते हैं. रणदीप हुडा कहते हैं-‘‘मैं तो निर्देशक का कलाकार हूं. मैं निर्देशक के विजन को समझकर खुद को किरदार में ढालता हूं.’’ जबकि निर्देशक उमंग कुमार कहते हैं-‘‘मैंने सरबजीत के किरदार के लिए रणदीप हुडा को इसलिए चुना, क्योंकि मुझे यकीन था कि वह इस किरदार के साथ न्याय कर सकते हैं. रणदीप उन कलाकारों में से हैं, जो कि अपने काम के प्रति हमेशा समर्पित रहते हैं..’’

 

फोन पर अनचाहे एड करें परेशान, तो ऐसे करें बंद

आप अपने स्मार्टफोन पर न्यूज़ पढ़ने किसी न्यूज़ वेबसाइट पर जाएं या फेसबुक, ट्विटर औऱ लिंक्डइन जैसी किसी सोशल नेटवर्किंग साइट पर या फिर गेम्स डाउनलोड करने की सुविधा देने वाली मोबाइल वेबसाइट्स पर, आप हर जगह खुद को विज्ञापनों से घिरा पाएंगे. अगर आप एंड्रॉइड स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको हैरानी होगी कि आपकी ऑनलाइन सर्च करने की आदतों के हिसाब से ही गूगल आपको मोबाइल पर विज्ञापन दिखाता है.

कुकीज़ की वजह से आपको दिखते हैं अनचाहे विज्ञापन

दरअसल होता यह है कि अगर आप एक एड पर क्लिक कर दें, तो आप उस एड के वेबपेज पर पहुंच जाते हैं और आपके डिवाइस के ब्राउज़र पर एड देने वाली कंपनी के कुकीज़ आ जाते हैं. इसके बाद आप गूगल पर सर्च करके जो भी मोबाइल साइट्स खोलते हैं, वहां आपको पहले खोला गया विज्ञापन नज़र आ जाता है.

क्या स्मार्टफोन पर आने वाले अनचाहे विज्ञापनों से बचना है संभव?

ऐसे विज्ञापन जहां आपको आपकी ज़रूरत के प्रॉडक्ट्स औऱ सर्विसेज़ के बारे में बताते हैं, वहीं हर क्लिक पर एक नया एड आ जाने से आपकी सर्चिंग में बाधा भी पैदा करते हैं. लेकिन क्या स्मार्टफोन में मोबाइल साइट्स पर आने वाले विज्ञापनों से बचना संभव है? जी हां, यह संभव है. हम आपको बताते हैं कि ऐसा आप कैसे कर सकते हैं.

तीन स्टेप्स में बचें अनचाहे विज्ञापनों से

अपने एंड्राइड स्मार्टफ़ोन में गूगल सेटिंग्स पर जाएं और एड्स पर क्लिक कर दें. अब ‘ऑप्ट आउट ऑफ़ इंटरेस्ट बेस्ड एड्स’  की सेटिंग्स बदल दें. इसके बाद आपको अपने एंड्रॉइड स्मार्टफोन पर विज्ञापन नहीं दिखाई देंगे.

गूगल साइट्स में साइन्ड-इन होने पर इंटरेस्ट पर आधारित विज्ञापनों को कैसे बंद करें:

1. सबसे पहले www.google.com/settings/ads/authenticated पर जाएं

2. अब “Ads based on your interests” पर क्लिक करके ऑफ कर दें

3. अब जो डायलॉग बॉक्स खुलेगा, वहां स्विच-ऑफ लिंक पर क्लिक करके अपने सेलेक्शन की पुष्टि कर दें

गूगल के अलावा अन्य वेबसाइट्स पर सर्च के दौरान आने वाले विज्ञापनों को कैसे करें बंद:

1. सबसे पहले www.google.com/settings/ads/anonymous के एड्स सेटिंग्स पर जाएं

2. इसके बाद “Ads based on your interests” पर क्लिक करें औऱ स्विच ऑफ सेलेक्स कर लें

3. अब एक डायलॉग बॉक्स खुलेगा, जिस पर स्विच ऑफ लिंक पर क्लिक करके अपने सेलेक्शन को कन्फर्म कर दें.

अब आपको गूगल सर्च के दौरान आने वाले अनचाहे विज्ञापनों से मुक्ति मिल जाएगी.

इस तरह रघुराम राजन ने खोली कंपनियों की पोल

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने एक बार फि‍र मल्‍टीनेशनल कंपनियों पर हमला बोला है. उन्‍होंने कहा कि मल्‍टीनेशनल कंपनियां हमेशा अधिक टैक्‍स वसूलने का आरोप लगाती हैं, इसलिए उन्‍होंने इन कंपनियों से ज्‍यादा टैक्‍स का झूठा रोना बंद करने के लिए कहा है. उन्‍होंने कहा कि मल्‍टीनेशनल कंपनियां दुनियाभर में टैक्स बचाने और टैक्स चोरी करने के नए-नए हथकंडे अपनाती हैं. इसलिए यहां सरकार और एमएनसी के बीच लगातार लड़ाई चलती रहती है.

पिछले हफ्ते मुंबई में एक कार्यक्रम में बोलते हुए राजन ने कहा कि दुनियाभर की ज्यादातर मल्टीनेशनल कंपनियां अमेरिका के पास स्थित केमन आईलैंड का जिस तरह इस्तेमाल करती हैं उससे तो यह लगता है कि सभी कंपनियों का मैन्यूफैक्चरिंग फॉर्मूला (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) इस कुछ किलोमीटर वर्ग फुट में सिमटे द्वीप पर जन्म लेता है.

उन्‍होंने कहा कि जब कुछ मल्टीनेशनल कंपनियां लोकतांत्रिक ढांचे में सरकार के प्रमुख उद्देश्य को विफल करने का बीड़ा उठा लें तो जरूरी हो जाता है कि इससे निपटने के लिए कोई नया रास्ता अपनाया जाए. बड़ी कंपनियों जैसे गूगल और एप्‍पल समेत कई कंपनियों द्वारा टैक्‍स चोरी करने की वजह से दुनियाभर में इसकी रोकथाम के लिए नए कानून बनाए गए हैं. अमेरिका ने टैक्‍स बेनेफि‍ट के लिए दूसरे क्षेत्र की कंपनियों के साथ विलय करने पर रोक लगाने के लिए कानून बनाया है. वहीं यूरोप के कई देशों, चीन और जापान में इस संबंध में कठोर कदम उठाए जा रहे हैं.

मल्‍टीनेशनल कंपनियों की आलोचना इसलिए भी उल्‍लेखनीय है क्‍योंकि कुछ कंपनियों ने भारत द्वारा पिछली तारीख से टैक्‍स लगाने पर आपत्ति जताई थी. वोडाफोन और केयर्न ने भारत में पिछले तारीख से टैक्‍स लगाने और टैक्‍स डिपार्टमेंट द्वारा किए गए टैक्‍स डिमांड को चुनौती दी है और इस मामले को अंतरराष्‍ट्रीय अदालत में ले गई हैं.

राजन ने कहा कि सरकार और आरबीआई जैसे संस्‍थानों पर प्राइवेट बिजनेस को प्रमोट करने का दबाव है ताकि लोगों को ज्‍यादा से ज्‍यारा जॉब हासिल हो सके. उन्‍होंने कहा कि हमें करोड़ों जॉब पैदा करने हैं. इसकी जरूरत इसलिए है, क्‍योंकि अच्‍छी जॉब समावेश का सबसे अच्‍छा तरीका है. राजनीतिक और रेग्‍युलेटरी सिस्‍टम पर इन जॉब को पैदा करने का दबाव है. उन्‍होंने कहा कि जॉब के नए और ज्‍यादा अवसर पैदा करने के लिए सरकार ग्रोथ को बढ़ाने और बिजनेस आसान बनाने की दिशा में काम कर 

टी-20 वर्ल्ड कप में साथ दिखेंगे धौनी, यु़वराज और भज्जी

युवा आलराउंडर पवन नेगी एशिया कप और विश्व टी20 की टीम में एकमात्र नया चेहरा होंगे, जबकि चोटों से जूझने वाले तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को भी भारत की 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया जिसमें चयनकर्ताओं ने युवा और अनुभव का संतुलन बनाने की कोशिश की है.

ऑस्ट्रेलिया में टी20 सीरीज में क्लीनस्वीप करने वाली टीम के अहम खिलाड़ियों को चयनकर्ताओं ने बरकरार रखा है जिसमें युवराज सिंह, हरभजन सिंह और आशीष नेहरा जैसे अनुभवी खिलाड़ी शामिल हैं.

ऑस्ट्रेलिया में हाल में संपन्न सीरीज में प्रभावित करने वाले युवा खिलाड़ियों जसप्रीत बुमाराह और हार्दिक पांडया को भी टीम में मौका दिया गया है. बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर ने चयन समिति की बैठक के बाद टीम की घोषणा की.

चयन समिति के अध्यक्ष संदीप पाटिल ने समिति की बैठक के बाद कहा, यह 15 खिलाड़ियों का सर्वश्रेष्ठ संयोजन है जिसके बारे में हम सोच सकते हैं. चयनकर्ताओं ने 25 साल के शमी को चुनकर कुछ जोखिम उठाया है जो मांसपेशियों में चोट के बाद अब भी रिहैबिलिटेशन से गुजर रहे हैं. घुटने की चोट के कारण लंबे समय तक बाहर रहने के बाद पिछले महीने वह ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी चोटिल हो गए थे.

शमी का चयन फिटनेस पर निर्भर करेगा और अगर वे उबरने में नाकाम रहे तो भारत को उनके विकल्प के तौर पर किसी अन्य खिलाड़ी को चुनने की स्वीकृति होगी. पाटिल ने कहा कि शमी के पास विश्व टी20 से पहले 30 दिन हैं. शमी पर फैसला करने के लिए हमारे पास पर्याप्त समय है. वह हमारे सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में से एक है. फिलहाल मैं यही कह सकता हूं कि वह उबर गया है और उसने गेंदबाजी शुरू कर दी है.

इशांत शर्मा और भुवनेश्वर कुमार की तेज गेंदबाजी जोड़ी को भी टीम में जगह नहीं मिली है. इशांत ने 2013 से इस प्रारूप में भारत का प्रतिनिधित्व नहीं किया है जबकि ऑस्ट्रेलिया में एकदिवसीय मैचों में लचर प्रदर्शन के बाद वह चोटिल होने के कारण टी20 मैचों से बाहर हो गए थे.

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल मनीष पांडे को भी महेंद्र सिंह धौनी की अगुआई वाली टीम में शामिल नहीं किया गया है. एशिया कप का आयोजन बांग्लादेश में 24 फरवरी से छह मार्च तक होगा जबकि विश्व टी20 भारत में आठ मार्च से तीन अप्रैल तक खेला जाएगा. हाल में मिश्रित नतीजों के बावजूद पाटिल ने धौनी की कप्तानी पर भरोसा जताया.

उन्होंने कहा कि हमारे पास लोगों को यह कहने का अधिकार नहीं है कि वे कब संन्यास लें, हमें धौनी की कप्तानी पर पूरा भरोसा है. वह एशिया कप और विश्व टी20 में कप्तानी के लिए सही व्यक्ति हैं.

बाएं हाथ के स्पिनर और उम्दा बल्लेबाजी में सक्षम 23 साल के नेगी को घरेलू सर्किट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का इनाम मिला है. वह आईपीएल से निलंबित टीम चेन्नई सुपरकिंग्स का भी हिस्सा रहे हैं. श्रीलंका के खिलाफ इस महीने होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए जब उन्हें भारतीय टीम में शामिल किया गया था तो वह विश्व कप टीम में जगह बनाने के दावेदार बन गए थे.

अजिंक्य रहाणे को टीम में पांडे पर तरजीह दी गई है. पांडे ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांचवें और अंतिम एकदिवसीय मैच में नाबाद शतक जड़ते हुए भारत को सीरीज की एकमात्र जीत दिलाई थी. रहाणे के चोटिल होने के कारण उन्हें यह मौका मिला था और उन्होंने इसका फायदा भी उठाया लेकिन चयनकर्ताओं ने मुंबई के अनुभवी खिलाड़ी को प्राथमिकता दी.

पाटिल ने कहा कि मनीष पांडे ने ऑस्ट्रेलिया में शानदार प्रदर्शन किया, उसके नाम पर भी विचार किया गया. उन्होंने कहा कि जब चयनकर्ता टीम चुनते हैं तो हम हमेशा घरेलू प्रदर्शन को महत्व देते हैं. ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ सीनियर खिलाड़ियों पर गौर कर रहे थे, हमने घरेलू खिलाड़ियों के प्रदर्शन, फिटनेस और रिकार्ड पर भी ध्यान दिया. हमने सिर्फ 15 से 16 खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नहीं बल्कि सभी घरेलू खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर ध्यान दिया और फिर इन 15 का चयन किया.

ऑस्ट्रेलिया में सीनियर ऑफ स्पिनर हरभजन को एक भी मैच खेलने को नहीं मिला था लेकिन इसके बावजूद उन्हें टीम में बरकरार रखा गया है. पाटिल ने कहा कि हरभजन टीम का हिस्सा है. चयनकर्ताओं, टीम प्रबंधन और कप्तान को हरभजन, उसके रिकार्ड और टीम में उसके योगदान पर भरोसा है.

पाटिल ने कहा कि टीम प्रबंधन ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रयोग कर लिए हैं. उन्होंने कहा कि हमने ऑस्ट्रेलिया के दौरान प्रयोग किए और चर्चा की कि कौन खिलाड़ी विकल्प के तौर पर अच्छे होंगे. टी20 प्रारूप में काफी समय नहीं मिलता. छोटे प्रारूप में पिच के अनुसार खिलाड़ी चुनने की नीति काम करती है.

ओह, तो ये मोहतरमा होंगी रविंद्र जडेजा की हमसफर

भारतीय आलराउंडर रविंद्र जडेजा ने मैकेनिकल इंजीनियर रीवा सोलंकी के साथ सगाई कर ली है. जडेजा के स्वयं के रेस्टोरेंट में चुनिंदा लोगों की मौजूदगी में सगाई समारोह हुआ और इस क्रिकेटर ने उम्मीद जताई कि जीवन में महिला के आने के बाद भाग्य क्रिकेट और निजी जीवन दोनों में उनका साथ देगा.

रिंग सेरेमनी के बाद जडेजा ने कहा, क्रिकेट के खेल में भाग्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और जब मैंने रीवा से सगाई की तो उम्मीद की कि जीवन में महिला के आगे से भाग्य क्रिकेट और निजी जीवन में बेहतर करने में मदद करेगा.

साल की शुरूआत को अच्छी और सकारात्मक करार देते हुए जडेजा ने कहा, मुझे लगता है कि साल के पहले दो महीने में क्रिकेट में मैंने अच्छा प्रदर्शन किया और सगाई के बाद उम्मीद करता हूं कि अगले दो महीने मेरे क्रिकेट जीवन में और सफलता लेकर आएंगे.

शादी की योजना के बारे में पूछने पर इस आलराउंडर ने कहा, मेरा क्रिकेट कार्यक्रम काफी व्यस्त है लेकिन मैं शादी के लिए कुछ समय निकालने की कोशिश करूंगा. जडेजा ने कहा कि उनका पूरा ध्यान अब क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने पर है विशेषक आगामी विश्व टी20 चैम्पियनशिप में.

उन्होंने कहा, विश्व कप में खेलना प्रत्येक क्रिकेटर का सपना होता है और मैं भी उम्मीद करता हूं कि आगामी टी20 विश्व कप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा. जडेजा की मंगेतर रीवा की क्रिकेट में अधिक रूचि नहीं है लेकिन उन्होंने कहा कि वह अब मैच देखेंगी.

इस मौके पर सौराष्ट्र क्रिकेट संघ के सचिव निरंजन शाह और राजकोट शहर के पुलिस आयुक्त मोहन झा भी मौजूद थे. सौराष्ट्र की क्रिकेट टीम भी आमंत्रित थी लेकिन विजयनगर में विदर्भ के खिलाफ रणजी ट्राफी क्वार्टर फाइनल के कारण टीम कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकी.

 

घायल वंस अगेनः पुरानी कहानी, पुराने मुद्दे

1990 की सनी देओल अभिनीत सुपर हिट फिल्म ‘‘घायल’’ की रीमेक फिल्म ‘‘घायल वंस अगेन’ ’की शुरूआत वहीं से होती है, जहां पर ‘‘घायल’’ की कहानी खत्म हुई थी. पुरानी फिल्म के दो पात्र अजय मेहरा (सनी देओल) और एसीपी जॉय डिसूजा (ओमपुरी) इस फिल्म में हैं, बाकी नए पत्र आ गए हैं. इस फिल्म को बनाने के पीछे सनी देओल का मकसद यह संदेश लोगों तक पहुंचाना है कि ‘‘यदि आप सच के साथ हैं, तो जीतने तक हार नहीं माननी चाहिए.’’ 

फिल्म की कहानी शुरू होती अजय मेहरा के 14 साल तक जेल में रहने के बाद वापस आने से. वह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का मन बनाकर ही जेल से बाहर निकला है. इस बार उसके आदर्शों पर चलने वाले चार युवक भी हैं. अजय मेहरा आरटीआई का उपयोग कर सफेदपोश भ्रष्टाचारियों के खिलाफ लड़ाई शुरू करता है, मगर उसे सफलता नही मिलती है. अजय मेहरा अब पत्रकार बनकर आरटीआई के आधार पर जानकारी हासिल कर हार्ड हीटिंग समाचार छापता रहता है. उधर चार युवक (शिवमपाटिल, रिशभ अरोड़ा, अंचल मुंजाल व नेहा खान) एक भ्रष्ट नेता द्वारा एसीपी जॉय डिसूजा की हत्या करते हुए देख लेते हैं, इसलिए वह फंस जाते हैं. पर इन चारों युवकों की मदद के लिए अजय मेहरा सामने आता है.

फिल्म की शुरूआत बहुत बोरिंग लगती है. इंटरवल के पहले फिल्म के कई सीन ऐसे है, जिनसे आज की युवा पीढ़ी रिलेट नहीं कर सकती. इंटरवल के बाद फिल्म में कुछ मोड़ आते हैं. इस बार इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाने के साथ साथ इसके लेखन व निर्देशन में भी सनी देओल ने हाथ आजमाया है. उन्होने तमाम एक्शन सीन अपनी ईमेज के अनुरूप रखे हैं, पर वह यह भूल गए कि ‘घायल’ और ‘घायल वंस अगेन’ के बीच 26 साल का अंतराल आ चुका है. इन 26 वर्षों में समाज व देश में काफी बदलाव आ चुका है. युवा पीढ़ी काफी जागरूक हो चुकी है. अब बलात्कार पीडि़ता चुप रहने की बजाय इंसाफ की गुहार लगाती है. यह बात सनी देओल और उनकी लेखन टीम भूल चुकी है.

फिल्म में तमाम दृश्य दोहराए गए हैं. कहानी व सीन में कहीं कुछ भी नयापन नहीं है. फिल्म में अहंकारी गुंडे, चंचल राजनीति, भ्रष्ट उद्योगपति, बलात्कार जैसे सारे पुराने मुद्दे ही हैं. नई सोच का घोर अभाव है. इतना ही नहीं अब सनी देओल 56 साल के हो गए हैं. उनकी उम्र का असर एक्शन दृश्यों में साफ तौर पर नजर आता है. फिल्म में लेखन व निर्देशन की कमियां भी हैं. सनी देओल के प्रशंसक उनका एक्शन देखने के लिए ही यह फिल्म देखना चाहेंगे. इस फिल्म में एक्शन, अंगारे बरसाती आंखों के साथ ही दुश्मन को दहला देने वाले संवाद जरुर सनी देओल के प्रशंसकों को आकर्षित कर सकते हैं. फिल्म खत्म होने के बाद यह समझ में नहीं आता कि सनी देओल ने क्या सोचकर इस फिल्म का निर्माण किया है. अब वह सिर्फ एक्शन दृश्यों के बल पर फिल्म को सफलता दिलाना चाहते हैं, तो यह उनकी भूल साबित हो सकती है.

फिल्म ‘‘घायल वंस अगेन’’ का निर्माण ‘‘सनी साउंड्स प्रा.लिमिटेड’’ के बैनर तले किया गया है. फिल्म के निर्देशक सनी देओल, लेखक सनी देओल, सागर पंड्या व शक्तिमान तलवार, संगीतकार शंकर एहसान लाय, एडीटर चंदन अरोड़ा हैं.

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