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गणित चिह्नों की वंश कथा

जब से प्रत्यक्ष उदाहरण रखने की आवश्यकता का आभास हुआ, तब से एकएक चिह्न का निर्माण हुआ. जब चिह्न नहीं थे, तब मौखिक हिसाब किया जाता था. चिह्नों और 0 से 9 तक 10 संख्याओं के आधार पर कोई भी संख्या तैयार करना सहज और सरल है, परंतु इन संख्याओं पर कुछ विशिष्ट क्रिया करने की आवश्यकता ने ही धन (+), ऋण (-), गुणा और भाग चिह्नों को जन्म दिया. जानिए, इन के वर्तमान रूप में विकसित होने के पीछे का इतिहास :

धन चिह्न (+)

धन (जोड़ने) की क्रिया के लिए कुछ प्राचीन भारतीय गणितज्ञ किसी भी चिह्न का उपयोग नहीं करते थे. कुछ गणितज्ञ 2 अंकों के बीच बिंदु का उपयोग करते थे. इतालवी गणितज्ञ अंगरेजी के ‘प्लस’ (+) शब्द के पहले अक्षर ‘पी’ का उपयोग धन के लिए करते थे. मध्ययुग के यूरोपीय गणितज्ञ ‘और’ अर्थ वाले लैटिन शब्द ‘द्गद्व’ का उपयोग करते थे. फिर इस के लिए ‘%’ चिह्न का उपयोग होने लगा.

फिर माइकल स्टिफेल नामक गणितज्ञ ने वर्ष 1544 में ‘अरिथ्मेटिक’ नामक ग्रंथ में ‘+’ चिह्न को धन चिह्न दर्शाने के लिए प्रयोग किया और तब से हम उसी चिह्न को धन चिह्न के रूप में प्रयोग करते आ रहे हैं.

ऋण चिह्न (-)

धन चिह्न के साथ मौजूदा ऋण चिह्न (-) का प्रथम बार प्रयोग करने का श्रेय भी माइकल स्टिफेल को ही है. ऋण चिह्न के लिए इतालवी गणितज्ञ अंगरेजी के ‘माइनस’ शब्द के पहले अक्षर ‘एम’ का प्रयोग करते थे. गणितज्ञ पसिओली भी पहले ऋण के लिए ‘एम’ चिह्न का ही प्रयोग करते थे. किंतु बाद में पसिओली व हैक्टोग्लिआ ने भी ऋण दर्शाने के लिए ‘-’ चिह्न का प्रयोग शुरू कर दिया. ‘हिएटा’ नामक गणितज्ञ ‘अ-ब,’ इस रीति से ऋण दर्शाते थे.

यद्यपि स्टिफेल ने सन 1544 में सर्वप्रथम इस चिह्न (-) का प्रयोग प्रारंभ कर दिया था किंतु अन्य गणितज्ञों ने इसे 1630 में अपनाया.

गुणा चिह्न

गुणा दर्शाने के लिए 2 अंकों के बीच बिंदु लगाने की विधि का प्रारंभ हरिओट नामक गणितज्ञ ने किया था. किसी भी चिह्न का उपयोग न करने वाले फ्रैंच गणितज्ञ डेकार्ट, ‘अ ङ्ग ब’ को ‘अब’ लिखते थे. जरमन गणितज्ञ लायबनीत्स अर्धवर्तुलाकार चिह्न का उपयोग गुणा के लिए करते थे. गुणा चिह्न का प्रयोग गणितज्ञ आउट्रेड ने सर्वप्रथम सन 1631 में ‘ग्रंथ क्लासिक मैथेमेटिका’ में किया.

भाग चिह्न

अरब गणितज्ञ ‘अ’ में ‘ब’ द्वारा भाग दिखाने के लिए आधुनिक प्रचलित पद्धति ‘अ़ब’ को ’अ-ब‘ या अ/ब के रूप में लिखते थे. गणितज्ञ आउट्रेड ने भाग के लिए (:) चिह्न का प्रयोग किया. गणितज्ञ लायबनीत्स तत्कालीन गुणा चिह्न अर्धवर्तुलाकार (ड) का उलटा चिह्न ‘फ’ का भाग करने के लिए प्रयोग करते थे. गणितज्ञ जोहन हेनरीज राहन ने सन 1659 में ज्यूरिख में भाग के लिए चिह्न का उपयोग किया. इस तरह गणित चिह्नों धन (+), ऋण (-), गुणा व भाग का विकास हुआ.       

 

मैं 55 में भी फिट तो आप क्यों नहीं: सुनील शेट्टी

बौलीवुड के रफटफ हीरो और ‘अन्ना’ के नाम से मशहूर सुनील शेट्टी सेहत को ले कर काफी चाकचौबंद रहते हैं और वे आम लागों को भी सेहतमंद रहने के लिए जागरूक बनाने की मुहिम चला रहे हैं. वे कहते हैं, ‘‘सेहत को ले कर अकसर लोग फुरसत न मिलने का बहाना बनाते हैं, जो बाद में उन्हें महंगा ही पड़ता है. जब मैं 55 साल की उम्र में फिट रह सकता हूं, तो और लोग क्यों नहीं रह सकते हैं?’’

पटना में एक जिम का उद्घाटन करने पहुंचे हीरो सुनील शेट्टी एक ‘फिटनैस गुरु’ के रूप में नजर आए. बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश और देह को सेहतमंद रख कर हम अपनी तरक्की कर सकते हैं और देश का भी भला कर सकते हैं. हर इनसान को रोजाना नियमित रूप से कसरत करने के लिए कुछ समय निकालना चाहिए. पैदल घूमना भी एक बेहतरीन कसरत है. कसरत से फिट रहने में मदद मिलती है.

आज 55 साल की उम्र में भी अपनी अच्छी सेहत का राज बताते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी सेहत को ले कर जागरूक हैं और लोगों को भी जागरूक होने की सलाह देते हैं. सेहत को तरजीह दे कर ही लोग खुद, परिवार, कारोबार, नौकरी वगैरह को भी अच्छी तरह से संभाल सकते हैं.

लोग अकसर यह कहते हैं कि आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में कसरत करने के लिए समय ही नहीं मिलता है. वे सारा कुसूर खानपान और भागदौड़ की जिंदगी को ठहरा देते हैं. सच तो यह है कि सेहत की अनदेखी करने से मोटापा, डायबिटीज जैसी तमाम बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. जिम में ऐक्सपर्ट ट्रेनर की मदद से मोटापा, डायबिटीज और कई तरह की बीमारियों से नजात पाई जा सकती है या कंट्रोल में रखा जा सकता है. जो लोग जिम नहीं जा सकते हैं, वे रोज एकाध घंटा घर पर ही कसरत को जरूर समय दें. साल 1992 में हिंदी फिल्म ‘बलवान’ से हीरो के तौर पर अपना फिल्मी कैरियर शुरू करने वाले सुनील शेट्टी ने अपनी आने वाली फिल्मों के बारे में बताया कि अभी ‘हेराफेरी-3’ पर काम चल रहा है और कुछ और फिल्मों पर बात चल रही है.

बिहार के बारे में उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में बिहार की काफी अहमियत है. कई फिल्मों में बिहारी किरदारों को देखा जा सकता है, वहीं दूसरी ओर फिल्मों के कारोबार के लिहाज से भी फिल्म वालों का ध्यान बिहार पर टिका रहता है. बिहार और उत्तर प्रदेश में जब कोई फिल्म चलती है, तभी सुपरहिट मानी जाती है.

‘बलवान’, ‘मोहरा’, ‘गोपीकिशन’, ‘दिलवाले’, ‘टक्कर’, ‘शस्त्र’, ‘सपूत’, ‘धड़कन’,  ‘बौर्डर’, ‘भाई’, ‘विनाशक’, ‘हेराफेरी’, ‘रिफ्यूजी’, ‘एलओसी-कारगिल’ समेत तकरीबन 110 फिल्मों में तरहतरह के किरदारों को निभा चुके सुनील शेट्टी की बेटी आथिया शेट्टी ने भी बौलीवुड में धमाकेदार कदम रखा है.

आथिया शेट्टी के बारे में सुनील का कहना है कि उन में ऐक्टिंग का हुनर है और बौलीवुड में भलेबुरे की पहचान भी है. उन की पहली फिल्म ‘हीरो’ को लोगों ने काफी पसंद किया है और वे इंडस्ट्री में खुद अपना ठोस मुकाम बनाने का दम रखती हैं. अवार्ड वापसी के बारे में पूछने पर सुनील शेट्टी ने कहा कि सब से बड़ा पुरस्कार तो जनता का प्यार और सपोर्ट होता है. इस के बगैर किसी कलाकार, फिल्मकार, साहित्यकार का वजूद नहीं हो सकता है. सम्मान के तौर पर मिली किसी चीज को लौटा देने भर से सम्मान की वापसी नहीं हो जाती है. वैसे तो हर इनसान की अपनीअपनी सोच और समझ होती है. कोई भी अपनी मरजी का काम करने के लिए आजाद है.

पठानकोट: सिक्योरिटी में लगी शर्मनाक सेंध

2 जनवरी, 2016. ठिठुरती सुबह के तकरीबन साढ़े 3 बजे थे. पठानकोट एयरबेस में डीएससी की मैस में लाइटें जल रही थीं, जबकि बाकी रिहायशी इलाके में अंधेरे का राज था. मैस में डीएससी के जवान एयरफोर्स के अफसरों व जवानों के लिए नाश्ता तैयार कर रहे थे. कुछ जवान गैस के चूल्हे पर चावल बना रहे थे, तो कुछ गाजर, टमाटर, पनीर, अदरक वगैरह काट रहे थे. अचानक वहां कुछ हलचल हुई. जवानों को कुछ समझ में आता, तब तक वहां कुछ अनजान बंदूकधारी घुस चुके थे. उन के इरादे ठीक नहीं थे, क्योंकि यह एक आतंकी हमला था, जो उन जवानों के लिए कड़ी चुनौती था.

मैस में काम कर रहे जवान जगदीश राज ने फौरन एक आतंकवादी को धर दबोचा और उस से गुत्थमगुत्था हो गए. उन्होंने उस आतंकवादी की राइफल छीनी और उसे गोलियों से भून डाला. इस बीच बौखलाए दूसरे आतंकवादी ने जगदीश राज और उन के साथ रसोईघर में काम कर रहे डीएससी के 4 जवानों पर गोलियां बरसा कर उन्हें शहीद कर डाला. 20 से 30 साल की उम्र के वे आतंकवादी रसोईघर से खानेपीने का सामान बटोर कर चल दिए. एक आतंकवादी के दोनों पैरों की उंगलियां नहीं थीं. एक आतंकवादी ने मूंछें रखी हुई थीं, जबकि बाकी क्लीन शेव थे. उन के पास वौकीटौकी थे, जिन से वे आपस में बातचीत कर रहे थे.

अचानक हुई गोलीबारी से एयरबेस में रैड अलर्ट जारी हो गया और इस के बाद शुरू हुआ आतंकवादियों के खिलाफ ऐसा आपरेशन, जो तकरीबन 100 घंटे तक चला. नैशनल सिक्योरिटी गार्ड, सेना व एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो ने इस आपरेशन में एयरबेस कैंप में घुसे आतंकवादियों में से 4 को 24 घंटे में ही मार डाला था, जबकि 5वें और 6ठे आतंकवादियों को मारने में 60 घंटे से भी ज्यादा का समय लग गया था. इस आतंकी हमले में भारतीय सेना का भी काफी नुकसान हुआ. नैशनल सिक्योरिटी गार्ड के लैफ्टिनैंट कर्नल निरंजन पी. कुमार समेत 7 जवान शहीद हुए, जबकि 20 जवान घायल हो गए.

पाकिस्तान की सरहद से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर बने इस एयरबेस में घुसे आतंकवादी सेना की वरदी में थे और वहां के असलहाघर, मुलाजिमों को सप्लाई की जाने वाली गैस के भंडार, सेना के अस्पताल और एक सैंट्रल स्कूल को अपना निशाना बना कर जान और माल का ज्यादा से ज्यादा नुकसान करना चाहते थे. इस आतंकी हमले से केवल पंजाब में ही दहशत नहीं मची, बल्कि भारत और पाकिस्तान के संबंधों में सुधार लाने की उम्मीदों को भी झटका लगा. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘इनसानियत के जो दुश्मन भारत की तरक्की नहीं देख सकते, ऐसे लोगों ने हमला किया. हमारे जवानों ने उन्हें कामयाब नहीं होने दिया. मुझे अपने जवानों और सिक्योरिटी बलों पर फख्र?है.’

इतना कह देने से बात नहीं बनती है, क्योंकि मामला जितना दिख रहा है, उस से कहीं ज्यादा गंभीर है. चूंकि इस आतंकी हमले के पीछे जैश ए मोहम्मद का हाथ बताया जा रहा है, इसलिए इतना तो साफ है कि आतंकवादी भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार नहीं होने देना चाहते हैं. साथ ही, उन्होंने यह भी साबित कर दिया है कि वे अब इतने ताकतवर हो चुके हैं कि भारत में कहीं भी घुसपैठ कर सकते हैं.

हर कदम पर चूक

पठानकोट को ही लें. वहां एक लाख से ज्यादा सेना के लोग तैनात हैं. वहां सेना का एक बड़ा असलहाघर है. इस भंडार के एक हजार गज के दायरे में सेना किसी भी तरह की इमारत नहीं बनने देना चाहती है, पर फिर भी ऐसा हो रहा है. कई इमारतें इतनी बड़ी हैं कि उन पर से सेना के हर छोटेबड़े काम पर नजर रखी जा सकती है. इस के अलावा जिस इलाके से आतंकवादी एयरफोर्स स्टेशन में घुसे थे, वहां का बहुत बड़ा हिस्सा बड़ेबड़े सरकंडों से ढका हुआ है. इस इलाके की उतनी बार साफसफाई नहीं की गई, जितनी होनी चाहिए थी. दुख की बात तो यह है कि साल 2015 में गुरदासपुर के दीनानगर पुलिस स्टेशन पर हुए आतंकी हमले के बाद भी पठानकोट में इंटरनैशनल बौर्डर को सौ फीसदी कंटीली तारों से नहीं बांधा जा सका है. पठानकोट जिले में 30 किलोमीटर लंबी सरहद में तकरीबन आधा किलोमीटर से भी ज्यादा हिस्से की कंटीली तार कट चुकी है. भारत की तरफ रावी नदी से जलालिया व तरनाह नाम के नाले भी निकलते हैं.

बारिश के दिनों में इन नालों में इतना तेज पानी आता है कि कंटीली तार भी बह जाती है. ऐसा माना जा रहा है कि एयरफोर्स स्टेशन पर हमला करने वाले आतंकवादी ऐसे ही सिक्योरिटी में हुए छेदों का फायदा उठा कर पठानकोट में घुसे थे. कोढ़ पर खाज यह कि दिसंबर, 2015 में ही ऐसी खुफिया रिपोर्टें आई थीं कि कुछ आतंकवादी पाकिस्तान से भारत में घुस आए हैं, जिन पर संजीदगी से काम नहीं किया गया. सुपरिंटैंडैंट सलविंदर सिंह, उन के एक ज्वैलर दोस्त राजेश वर्मा और रसोइया मदन गोपाल ने 1 जनवरी, 2016 को पुलिस को यह सूचना दी थी कि सेना की वरदी पहने 4-5 लोगों ने उन्हें बंधक बनाया और उन की गाड़ी लूट कर फरार हो गए. इस के बाद भी पुलिस ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं की. हालांकि बाद में एसपी के बयान पर शक भी किया गया और उन्हें कड़ी पूछताछ के लिए नैशनल सिक्योरिटी एजेंसी के हवाले कर दिया गया.

पर अगर तब एसपी सलविंदर सिंह की बात को संजीदगी से ले कर पंजाब पुलिस ने कथनौर पुल पर लगे नाके पर चैकिंग की होती, तो शायद आतंकवादी पकड़े जाते. लेकिन ऐसा हो न सका और आतंकवादी हथियारों के बड़े जखीरे के साथ तकरीबन 30 किलोमीटर के दायरे में 2 दिनों तक घूमते रहे और जिस जगह पर उन्होंने एसपी सलविंदर सिंह की गाड़ी छीनी थी, उसी के 5 सौ मीटर की दूरी पर वे गाड़ी की मदद से बेरोकटोक एयरबेस के अंदर घुसे थे. सवाल यह भी उठता है कि अगर इस तरह के आतंकी हमले की पहले से ही जानकारी थी, तो एयरफोर्स स्टेशन की चारदीवारी पर सिक्योरिटी क्यों नहीं बढ़ाई गई? एयरफोर्स ने हमले से एक दिन पहले पुलिस और मिलिटरी के आला अफसरों की मीटिंग की थी. इसी के मद्देनजर 1 जनवरी, 2016 को दिल्ली से एनएसजी के कमांडो पठानकोट भेज दिए थे. ऐसा होने के बाद भी एयरफोर्स स्टेशन का पूरा जिम्मा एनएसजी, आर्मी कमांडो और गरुड़ को नहीं सौंपा गया, बल्कि पहली जनवरी की रात सिक्योरिटी की जिम्मेदारी डीएससी के रिटायर्ड जवानों पर डाल दी गई, जिस से आतंकवादियों का एयरबेस में घुसने का रास्ता और भी आसान हो गया.

रची गई साजिश

ऐसा माना जा रहा है कि पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले की साजिश पिछले एक साल से रची जा रही थी. पुलिस ने इस बेस कैंप की जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाने के आरोप में 30 अगस्त, 2014 को सेना के एक जवान सुनील कुमार को गिरफ्तार किया था. वह एक सोशल नैटवर्किंग साइट के जरीए आईएसआई की एक तथाकथित एजेंट मीना रैणा के संपर्क में आया था और उसे एयरफोर्स के राज बताए थे. माना जा रहा है कि आतंकवादियों ने इसी जानकारी के तहत इस हमले की साजिश रची. यह भी कहा जा रहा है कि अगर पुलिस ने सुनील कुमार की गिरफ्तारी को संजीदगी से लिया होता, तो इतना बड़ा हमला नहीं होता. लेकिन हमला तो हो गया और वह भी इस तरह प्लान बना कर कि हमारी सुरक्षा एजेंसियां मुंह ताकती रह गईं. कहने को तो वे 5-6 आतंकवादी थे, लेकिन किसी कमांडो की तरह ट्रेनिंग पाए हुए, तभी तो उन्होंने हमारे 7 जांबाजों को ‘शहीद’ बना दिया.

आतंकवादियों का पठानकोट एयरबेस पर हमले का संबंध सीधेसीधे भारत और यहां की सेना को चुनौती देना था. वे देश के सब से बड़े एयरबेस की सिक्योरिटी में सेंध लगा कर अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते थे. वे एयरबेस के भीतर घुसे, हमारे जवानों को निशाना बनाया और देश में बेचैनी बढ़ा दी. यह चिंता की बात है और दुश्मन के छक्के छुड़ाने, आतंकवाद को जड़ से मिटाने, शहीदों की याद में मोमबत्ती जलाने जैसे जुमलों से बात नहीं बनेगी, बल्कि अब यह मान लेना होगा कि पानी सिर से ऊपर जा रहा है. साथ ही, इस बात पर संजीदगी से विचार करना होगा कि हमारे सिक्योरिटी सिस्टम में आई खामियों को कैसे दुरुस्त करना है. अगर पहले से ही इस हमले की जानकारी हो चुकी थी, तो फिर हमारे 7 सेना के लोग कैसे मारे गए? उन की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा?

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि आतंकवादियों के पास एके-47, अंडर ग्रेनेड बैटल लौंचर, पिस्तौलें, स्विस और कमांडो चाकू, 40-50 किलो गोलियां, 3-4 दर्जन मैगजीन और मोर्टार बरामद किए गए. मौत का इतना साजोसामान ले कर किसी एयरबेस में घुसना हंसीखेल नहीं है. इस बात की जांच होनी चाहिए और कुसूरवारों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. यह ठीक है कि इस आतंकी हमले में मारे गए जवानों को शहीद का दर्जा दिया जाएगा और उन्हें लड़ाई जैसे हालात में अपनी जान देने वालों को मिलने वाले सभी फायदे दिए जाएंगे, मगर क्या यह सब उन के परिवार वालों के दिलों को ठंडक पहुंचा देगा? भारत द्वारा पाकिस्तान को भेजे गए सुबूतों पर तो बाद में फैसला होगा, फिलहाल तो हमें अपनी कमियों को ठीक करना होगा, क्योंकि ऐसा जल्दी नहीं किया गया, तो अगला आतंकी हमला झेलने के लिए तैयार रहिए. 

औरत के देहजाल से बचें

आजकल लोगों के दिलों में पैसे और ऐशोआराम की चाहत इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि मां बेटी से जिस्मानी रिश्ते की बात करते समय अपने रिश्ते की मर्यादा को भी भूल चुकी है. एक मामला ऐसी ही मां का है. मां ने कालेज में पढ़ने वाली अपनी बेटी से कहा कि वह अधेड़ उम्र के लैक्चरर को घर पर कोचिंग देने के लिए आने को तैयार कर के उसे अपना दीवाना बना कर उस से पैसे ऐंठे. इस से सैक्स का मजा भी मिलेगा और शादी का दहेज जुटाने में मदद भी मिलेगी.

मां की इन बातों को सुन कर 18 साला बेटी खुशी से मुसकरा उठी. अपनी मां की बात सुन कर उस ने सोचा कि सैक्स का पूरा मजा तो अब अपने घर पर ही लिया जा सकता है. वजह, उस ने अपने एक बौयफ्रैंड से पार्क की झाडि़यों में सैक्स का मजा चोरीचुपके से लिया हुआ था. दूसरे दिन ही उस बेटी ने अपने कालेज के 50 साला लैक्चरर को अपने घर पर कोचिंग देने के लिए राजी कर लिया. उस ने छुट्टी के दिन लैक्चरर को अपने घर पर बुला लिया था. वह लैक्चरर को अपने घर की दूसरी मंजिल के कमरे में ले गई थी और उस के शरबत में शराब मिला कर उसे मदहोश कर दिया था.

वह लड़की फिल्म हीरोइन जैसी खूबसूरत तो थी ही, उस ने कपड़े भी बहुत छोटे पहन रखे थे. लैक्चरर उस के सुडौल उभारों की ओर देख रहे थे. तभी लड़की ने अपने कपड़ों को उतार कर उन को उन्हें पूरी तरह से दिखा दिया. इस के बाद लैक्चरर भी अपना आपा खो बैठे. कुछ ही देर में उन्होंने उस से जिस्मानी रिश्ता बनाया, तो वह लड़की भी सैक्स का मजा लेते हुए खुशी से मुसकरा उठी. उस के बाद तो यह रोज का सिलसिला बन गया. लेकिन उन्हें नहीं पता था कि लड़की की मां मोबाइल फोन से रोजाना उन के सैक्स संबंधों की वीडियो बना रही थी.

एक दिन मांबेटी की योजना के मुताबिक, लैक्चरर लड़की से सैक्स संबंध बनाने के लिए उसे अपने पास बुलाने लगे, तो उस ने उन से कहा कि वे उस के कपड़ों को फाड़ते हुए उस से जबरदस्ती करने का नाटक करें. ऐसा करने से सैक्स में ज्यादा मजा आता है. लैक्चरर साहब ऐसा ही करने लगे थे और मां उन की इन हरकतों की वीडियो बना रही थी. जैसे ही वे उस से जिस्मानी रिश्ता बनाने लगे कि तभी उस लड़की की मां ने अपने साथ आए पति से बोली, ‘‘देखा आज के कलयुगी टीचर को, जो अपनी बेटी समान शिष्या से कैसी घिनौनी हरकत कर रहा है. अभी इस की पिटाई कर के इसे पुलिस में देते हैं.’’

यह देख कर लैक्चरर साहब तो दंग रह गए थे. वे रोते हुए उन से इस भूल की माफी मांग रहे थे. यह देख कर लड़की की मां उन से बोली कि अगर अपनी बदनामी और पुलिस से बचना चाहते हो, तो 50 लाख रुपए अभी अपनी घरवाली से मंगवा लो. यह सुन कर लैक्चरर साहब ने अपने मकान के कागजात अपनी घरवाली से मंगवा कर उन को दे दिए और स्टांप पेपरों पर लिख दिया कि वे अपना मकान उन्हें बेच रहे हैं.लैक्चरर साहब ने उसी दिन प्रोपर्टी डीलर से कार्यवाही करा कर अपना मकान उन के नाम करा दिया और उन के जाल से जैसेतैसे छुटकारा पा कर राहत की सांस ली.

इसी तरह की जयपुर के एक 40 साला कुंआरे की भी कहानी है. वह भजनों का बेजोड़ गायक था. उस के मातापिता की मौत बचपन में ही हो गई थी. उसे उस की नानी ने पाला. उस के घर में एक 25 साला औरत अपने पति और 2 छोटे बच्चों के साथ किराए पर रहती है.

एक दिन उस औरत के पति ने मकान हड़पने की योजना बनाई. उस ने अपनी पत्नी से कह दिया कि वह इस आदमी को अपने प्रेमजाल में फांस ले. बूढ़ी नानी को आंखों से कम दिखाई देता है और वे सुनने में भी लाचार हैं. अपने पति की इस योजना के मुताबिक, जब उस का पति गार्ड की नौकरी पर चला गया और उस गायक की नानी भी कहीं बाहर चली गई, तो वह उस के कमरे जा कर उस से लिपटते हुए बोली, ‘‘मुझे आप से प्यार हो गया है. मैं अपने पति से परेशान हूं. वह रोजाना मुझे परेशान करता है.’’ उस की इन बातों को सुन कर वह गायक खुश हो गया. उस ने उसी समय मौके का फायदा उठा कर उस से जिस्मानी रिश्ता बना कर भरपूर मजा लिया. उस के बाद तो वह दिनरात उस से जिस्मानी सुख भोगने लगा था. रात में जब वह औरत उस के पास आती, तो वह उस से पूछता कि उस का पति जाग गया, तो परेशानी खड़ी कर देगा.यह सुन कर वह औरत उस से कहती, ‘‘मैं उसे नींद की गोलियां दे कर बेहोश कर देती हूं. अब तो वह सुबह ही उठेगा.’’

इस तरह से उन का यह खेल कई सालों तक चलता रहा.

एक बार वह औरत उस से बोली, ‘‘अब मेरा मन यहां नहीं लगता है. तुम मुझे कहीं दूर ले चलो.’’यह सुन कर वह गायक उसे कोलकाता ले गया. वह औरत अपने दोनों बच्चों को पति के पास छोड़ गई थी. कुछ दिन कोलकाता में रहने के बाद वे मथुरा में रहने लगे.योजना के मुताबिक, एक दिन उस औरत ने अपने पति और घर वालों को मथुरा फोन कर के बुलवा लिया और उसे गिरफ्तार करवा दिया. अब वह गायक जयपुर की जेल में अपने किए की सजा भुगत रहा है.जब उस औरत से समझौते की बात की जाती है, तो वह उस का मकान अपने नाम करने की बात करती है. उस की इस शर्त को सुन कर जेल में बंद वह गायक सोचता है कि अगर वह अपनी नानी के मकान को उस के नाम करने के लिए कहेगा, तो उस की 90 साला नानी जीतेजी मर जाएंगी. लिहाजा, वह जेल में ही अपनी जिंदगी बिताने को मजबूर है.

मामला राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के एक 55 साला विधुर प्राचार्य का है. 30 साल की उम्र में ही दूसरे बच्चे को जन्म देने के 4 साल बाद ही उन की पत्नी की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी. प्राचार्य ने जैसेतैसे बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ालिखा कर सरकारी नौकरी में लगवाया. उन के दोनों बेटों में से बड़े बेटे की शादी के कुछ दिन बाद ही उन के बड़े बेटे और बहू ने सोचा कि पिता की पैंशन के बाद उन्हें काफी पैसा मिलेगा. उस पैसे पर उन के छोटे बेटे का हक नहीं रहे और उन का खरीदा हुआ मकान भी उन के नाम हो जाए, इस के लिए उन्हें अपने काबू में किया जाए. वे दूसरी औरतों पर भी रोजाना पैसे लुटाते हैं, इसलिए वे पैसे अपने घर में ही आएं. इस के लिए एक ही उपाय है कि उन्हें औरत का सुख घर में दिया जाए. ‘‘लेकिन इस के लिए औरत लाएंगे कहां से?’’ बड़े बेटे की बीवी ने कहा, तो बेटा आंख मारते हुए बोला, ‘‘यह सुख तुम उन्हें दोगी.’’

‘‘मैं… यह तुम क्या कह रहे हो?’’ उस की बीवी ने हैरान हो कर उस से पूछा, तो वह बोला, ‘‘तुम तो सतीसावित्री जैसी बातें कर रही हो. कालेज में तुम ने अपने फ्रैंड्स को भी तो खूब मजे दिए थे. अपने बूढ़े ससुर को मजे देने में तो तुम्हें उन का आशीर्वाद और ढेर सारा पैसा भी मिलेगा.

‘‘तो यह बात है,’’ यह सुन कर वह बोली, ‘‘आने दो उन्हें, मैं आज से ही अपना काम शुरू करती हूं. तुम 2-3 दिन घर के बाहर ही रहना. मैं उन से कह दूंगी कि तुम किसी काम से बाहर गए हो, इसलिए उन्हें तुम से डर नहीं लगेगा.’’ बड़ा बेटा 3 दिन के लिए घर से बाहर चला गया था. प्राचार्य ससुर अपने विद्यालय से घर लौटे, तो वे अपनी बहू की सैक्सी ड्रैस में उस के जिस्म के दिखते हुए मादक अंगों को देख कर हैरान रह गए थे. जब वे अपने कमरे में खाना खाने का इंतजार कर रहे थे कि तभी बहू उन के कमरे में आ कर उन से लिपट गई.

वे उस की ओर हैरानी से देखने लगे, तो बहू उन से बोली, ‘‘आप का बेटा तो कई महीने से मुझ से दूर है. शायद उन का किसी और से इश्क का चक्कर चल रहा है. मैं भी औरत हूं. मेरा जिस्म भी मर्द के प्यार को तरसता है. अगर मैं कहीं बाहर अपनी जरूरत पूरी करूंगी, तो इस में हमारी बदनामी होगी. इसलिए मैं ने सोचा कि…’’ इतना कह कर वह अपने कपड़े उतारने लगी.

बहू के इस रूप को देख कर प्राचार्य खुश हो कर उस से जिस्मानी रिश्ता बना बैठे. सालों तक उन का यह सिलसिला चलता रहा. वे अपनी तनख्वाह भी बहू को देने लगे थे, पर बहू से खुश हो कर जब वे अपना मकान उस के नाम करने लगे, तो उन के छोटे बेटे को बहुत बुरा लगा. एक दिन जब उसे अपने पिता और भाभी की इस प्रेम कहानी के बारे में मालूम हुआ, तो उस ने उन्हें खूब फटकारा और अपने पड़ोसियों को भी बताने की धमकी दी. इस से प्राचार्य को इतना ज्यादा पछतावा हुआ कि उन्होंने खुदकुशी कर ली. औरत के देहजाल के नतीजे इतने भयानक होते हैं कि लोग अपनी धनदौलत लुटा देते हैं. कितने ही लोग इस सामाजिक बुराई के चलते आज देश की जेलों में नरक से भी बदतर जिंदगी बिताने को मजबूर हैं. 

नौसिखिया डाक्टरों से रहें सावधान

अजमत खान उत्तर प्रदेश पुलिस में सर्विलांस ऐक्सपर्ट सिपाही था. वह बुखार से पीडि़त हुआ. 11 अक्तूबर, 2015 को वह उत्तर प्रदेश के जनपद बुलंदशहर के जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा.

उस वक्त वहां तैनात इमर्जैंसी प्रभारी डाक्टर सचिन ने अजमत खान को 2 इंजैक्शन लगा दिए. अजमत खान खुश था कि अब उसे आराम मिल जाएगा, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. घर पहुंचने के 24 घंटे के अंदर ही अजमत खान के बदन में सूजन आ गई. हालत ज्यादा बिगड़ने पर उसे तुरंत एक प्राइवेट अस्पताल में भरती कराया गया. वहां पता चला कि बिना जांचपड़ताल किए और मर्ज को ठीक से समझे बिना ही दिए गए इंजैक्शनों ने उस की यह हालत की थी.

डाक्टर की यह करतूत जब सुर्खियों में आई, तो बजाय कोई कार्यवाही करने के अस्पताल प्रशासन ने उसे छुट्टी पर ही भेज दिया. उधर अजमत खान का शरीर गलना शुरू हो गया. गंभीर हालत के चलते उसे दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भरती कराया गया. उस के शरीर से खून रिसने लगा. वह कोमा में चला गया और उस के गुरदों ने भी काम करना बंद कर दिया. कई दिनों के बाद उस ने दम तोड़ दिया.

मामले ने तूल पकड़ा और आरोपी डाक्टर को मरीज की अनदेखी का जिम्मेदार माना गया. डाक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया. नौसिखिया डाक्टर भी हर बड़ेछोटे अस्पतालों में पाए जाते हैं. कहने को उन के पास डिगरियां होती हैं, लेकिन वे असल होती हैं या थोड़ीबहुत पढ़ाई कर के हासिल की गई होती हैं, इसे कोई नहीं जानता. कई बार डिगरी लेने के तुरंत बाद ही डाक्टर अपना निजी अस्पताल खोल कर बैठ जाते हैं. वे अनुभव को तवज्जुह नहीं देते, जिस के नतीजे कभीकभी घातक साबित होते हैं.

गाजियाबाद के रहने वाले फूड इंस्पैक्टर शिवराज सिंह दिल की बीमारी से पीडि़त थे. 29 नवंबर, 2015 को उन्होंने एक लैब में ब्लड सैंपल दिया. सैंपल लेने वाला नौजवान नौसिखिया था. उस की लापरवाही से हाथ में इंजैक्शन से हवा चली गई. नतीजतन, शिवराज का हाथ सूज कर नीला पड़ गया. उस लैब को चलाने वालों ने अपनी लापरवाही से पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस को खबर की गई, तो उन्होंने गलती मानी.

पता चला कि लोगों का ब्लड सैंपल एक नौसिखिया ले रहा था. उस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई. बरेली जिले की एक डाक्टर ने तो अनाड़ीपन की हदों को ही लांघ दिया. जचगी के दर्द के बाद नाजिम नामक नौजवान ने अपनी पत्नी मेराज को सुभाष नगर इलाके में डाक्टर राधा शर्मा के घर में बने अस्पताल में भरती कराया. डिलीवरी के दौरान उस से 10 हजार रुपए जमा कराने को कहा गया, जो उस ने जमा करा दिए. मेराज ने नौर्मल डिलीवरी से एक बेटी को जन्म दिया. डाक्टर ने सिंकाई की बात कह कर नवजात के सीने पर इलैक्ट्रौनिक सिंकाई मशीन रख दी. इस से उस का सीना जल गया. कुछ देर बाद ही उस की मौत हो गई.

मामला बिगड़ने पर डाक्टर राधा शर्मा ने समझौते की कोशिश की, लेकिन इस बात की शिकायत पुलिस से की गई, तो पुलिस ने डाक्टर राधा शर्मा को गिरफ्तार कर लिया. जांच में पता चला कि राधा शर्मा के पास एक ट्रेनिंग सैंटर से प्रसव सहायक का सर्टिफिकेट था. इस के बल पर उस ने खुद को डाक्टर घोषित कर के घर में ही अस्पताल खोल लिया था. 4 कमरों के अस्पताल में उस ने एक कमरे में ओपीडी बनाई हुई थी. फरवरी महीने में वह 2 नवजात बच्चों की मौत के मामले में जेल गई थी, लेकिन हाईकोर्ट से जमानत ले कर बाहर आ गई थी. जेल से बाहर आ कर भी डाक्टर राधा शर्मा का अनाड़ीपन खत्म नहीं हुआ और न ही कोई सबक लिया गया. उस ने फिर से नया कारनामा कर दिया. इस के बाद पुलिस ने न केवल उस के अस्पताल को सील कर दिया, बल्कि उसे पेशेवर अपराधी घोषित कर दिया.

सहारनपुर के रहने वाले अनिल कुमार को बुखार था. वह एक डाक्टर के पास पहुंचा. उसे वहां इंजैक्शन लगाया गया. इस के बाद उस की तबीयत अचानक बिगड़ गई और देखते ही देखते उस की मौत हो गई. इस मामले में मुकदमा दर्ज करा दिया गया. पता चला कि जिस ने अनिल को इंजैक्शन लगाया था, वह नौसिखिया कंपाउंडर टीटू था. बुलंदशहर जिले के किसान छोटू गिरी के 6 साला बेटे अजय की खेलते समय कुहनी की हड्डी टूट गई. वे उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गए. डाक्टर ने उस का एक्सरे कराया और प्लास्टर लगा दिया गया. अगले 5 दिनों में आराम मिलना तो दूर अजय की हालत और भी ज्यादा बिगड़ गई. बाद में उन्होंने दिल्ली ले जा कर बेटे का इलाज कराया, तो पता चला कि डाक्टर ने हड्डी ही गलत तरीके से जोड़ दी थी, जिस की वजह से अजय बहुत परेशान था.

हड्डी जोड़ने वाले उस डाक्टर के खिलाफ पुलिस में शिकायत की गई. गाजियाबाद जनपद में मोतियाबिंद के आपरेशन के चक्कर में 8 मरीजों की जिंदगी में अंधेरा छा गया. आंखों के एक अस्पताल के बाहर औफर वाला बोर्ड लगा था कि उन के यहां मोतियाबिंद का सफल आपरेशन केवल 2 हजार रुपए में किया जाता है. डाक्टरों ने एक ही दिन में कई आपरेशन कर डाले. इसे लापरवाही कहें या नौसिखियापन, 8 मरीजों की एक आंख की रोशनी जाती रही. इन मरीजों में फूलवती, राजेंद्री देवी, जगवती, फरजाना, जुम्मन, अमाना खातून, शिक्षा देवी व नेपाल शामिल थे. मामले के खुलने पर अस्पताल के खिलाफ जांच बैठा दी गई. इस तरह के मामले यह बताने के लिए काफी हैं कि मरीजों की जिंदगी से नौसिखिया डाक्टर किस हद तक खिलवाड़ कर रहे हैं. लाला लाजपतराय मैडिकल कालेज के सुपरिंटैंडैंट डाक्टर सुभाष सिंह कहते हैं कि किसी डाक्टर को डिगरी मिल जाना ही काफी नहीं होता, उसे प्रैक्टिस भी करनी होती है. डाक्टरी का पेशा गंभीर है. मामूली सी लापरवाही भी किसी मरीज की जिंदगी ले सकती है. इस मसले पर डाक्टर वीपी सिंह कहते हैं कि किसी डाक्टर पर शक हो, तो उस की जांच कराई जा सकती है. लापरवाही और अनाड़ीपन से बचने के लिए डाक्टर के बारे में उचित जांचपड़ताल भी मरीजों को कर लेनी चाहिए. 

भूरिया मुच्छड़

राजस्थान के उदयपुर जिले में देवली नाम का एक छोटा सा गांव था. तकरीबन 700-800 घरों की बस्ती. वहां सभी जाति के लोग रहते थे, जो बहुत मेहनतकश थे. उसी गांव में सूरज नाम का एक मेहनती किसान रहता था. वह अपनी पुश्तैनी 10-12 बीघा जमीन पर खेतीबारी किया करता था. उस का खेत महावली की पहाड़ी के बीच मैदान में था, जिस में वह एक कुएं से सिंचाई करता था. सूरज 6 फुट हट्टाकट्टा नौजवान था. घर में उस की बूढ़ी मां व पत्नी संध्या रहती थी. संध्या का गोरा रंग और भरापूरा बदन लोगों के दिलों की धड़कनें तेज कर देता था. भोर में ही सूरज खेत पर चला जाता था. खेतों में उस के पास ट्रैक्टर, ट्रौली व खेती संबंधी सभी जरूरी सामान थे, जिस से वह गन्ने की उपज की सिंचाई, निराईगुड़ाई वगैरह अकेला ही करता था.

संध्या दिन में सूरज के लिए जब खाना ले कर घर से निकलती थी, तो घाघरे से उस की गोरीगोरी पिंडलियां साफ नजर आती थीं. छाती ढकने के लिए कस कर चोली बंधी रहती थी. सिर पर सतरंगी ओढ़नी का एक पल्लू चोली में खोंसा होता था.

सिर पर एक पोटली में 8-10 मक्के की मोटीमोटी रोटियां, सरसों का साग व हाथ में दही या छाछ का बरतन लिए जब वह कमर मटका कर चलती थी, तो कई मनचले मक्खियों की तरह उस के चारों ओर मंडराने लगते थे, पर वह किसी को भी नजदीक फटकने नहीं देती थी. पर देवली गांव में एक मुच्छड़ लट्ठबाज खुद को बड़ा तीसमारखां मानता था. वह अपनी मूंछों पर ताव दे कर खोमचे वालों, सब्जी वालों, दुकानदारों व राहगीरों को तंग कर उन का माल हड़पता था और औरतों को गंदे इशारे करता. मौका मिलने पर वह छेड़खानी भी कर देता था. उस का नाम वैसे तो भूरा राम था, पर सभी उसे भूरिया मुच्छड़ कहते थे.

गांव वाले भूरिया मुच्छड़ से डरते थे. पुलिस चौकी के 2 सिपाहियों और उस की खिचड़ी साथ पकती थी. एक दिन भूरिया मुच्छड़ बाजार में बवाल मचा रहा था कि तभी किसी ने उस से कह दिया कि यहां क्या अपनी धाक जमा रहा है? हिम्मत है तो सूरज की घरवाली संध्या को वश में कर के दिखा, फिर तुझे मर्द मानें?

तभी भूरिया मुच्छड़ पलट कर गरजते हुए बोला, ‘‘उस छोकरी को मैं चिडि़या की तरह अपनी कैद में न ले आऊं, तो मेरा नाम भी भूरा नहीं.

‘‘मैं कल ही संध्या पर डोरे डालना शुरू कर दूंगा.’’

दूसरे दिन जब संध्या सूरज के लिए खाना ले कर सजधज कर कमर मटकाती हुई अपने खेत की ओर चली, तो भूरिया मुच्छड़ उस के आगेपीछे मंडराने लगा.

संध्या ने उस से कहा, ‘‘भूरिया, मधुमक्खी के छत्ते में हाथ मत डालना, वरना बुरा हाल हो जाएगा.’’

उस की धमकी सुन कर भूरिया मुच्छड़ चुपचाप वहां से बिना कुछ किए चला गया. उसी दिन जब शाम को संध्या ने भूरिया मुच्छड़ की गंदी हरकतों के बारे में सूरज को बताया, तो वह बोला, ‘‘ऐसी बात है, तो मैं कल ही उस मच्छर को मसल देता हूं.’’

इस पर संध्या ने कहा, ‘‘ऐसा मत करना. जब किसी को मीठी गोली देने से मारा जा सकता है, तो जहर नहीं देना चाहिए. मैं भी चित्तौड़गढ़ की बेटी हूं. मुझे केवल गुलाब के फूल जैसी नाजुक मत समझना. उस लठैत से तो मैं अकेले ही निबट लूंगी.’’

इस के बाद संध्या ने सूरज के कान में अपनी योजना कही, जिसे सुन कर वह मुसकरा दिया. सूरज बोला, ‘‘वाह मेरी दिलदार, क्या योजना बनाई है. चलो, ट्रैक्टर पर गन्ने का खेत देख कर आते हैं.’’

अगले दिन जब संध्या भोजन ले कर खेत की ओर चली, तो भूरिया मुच्छड़ फिर आ धमका. इस बार संध्या ने आंख के इशारे से उसे अपने पास बुलाया और कहा, ‘‘देख भूरिया, तेरा पहलवान जैसा बदन देख कर मेरा भी मन ललचा गया है. अगर मेरी खूबसूरती और तेरी जवानी मिल जाए, तो जो औलाद पैदा होगी, उस में हम दोनों के गुण आ जाएंगे. ‘‘वैसे, सूरज नामर्द है. 4 साल हो गए, पर मेरी गोद अभी भी सूनी है. शाम को ही मेरे खेत में गन्नों के बीच बने चबूतरे पर मेरा इंतजार करना. मैं सूरज को घर भेज दूंगी और तेरे पास आ जाऊंगी. पर एक बात है…’’

भूरिया मुच्छड़ खुशी के मारे बोला, ‘‘क्या बात है? मैं तो तेरे लिए जान भी देने को तैयार हूं.’’

भूरिया मुच्छड़ को अपने जाल में फंसता देख संध्या बोली, ‘‘जान तेरे दुश्मन की जाए. मैं तो यह कहती हूं कि तेरी ये लंबीलंबी मूंछें मेरे गुलाब की कलियों जैसे गोरेगोरे गालों व होंठों का रसपान करने में अड़चन आएंगी. इसलिए इन मूंछों को कटा कर सफाचट हो जाओ.’’

‘‘ओह, यह बात है. मैं अभी जा कर मूंछें साफ करा देता हूं,’’ भूरिया मुच्छड़ खुशी से चहकते हुए बोला.

संध्या ने कहा, ‘‘याद रखना, अपना लट्ठ जरूर साथ लाना और रात को 8 बजे से पहले मत आना. चबूतरे पर मेरा इंतजार करना,’’ इतना कह कर संध्या घर चली गई और भूरिया मुच्छड़ अपनी मूंछें मुंड़वाने. योजना के मुताबिक, सूरज चबूतरे के पास ही गन्नों के झुरमुट में छिप गया. रात को भूरिया मुच्छड़ चबूतरे पर संध्या की बाट देखते हुए मन ही मन मुसकरा रहा था कि आज तो उन दोनों का मिलन हो ही जाएगा. उस की बांछें खिल रही थीं.

थोड़ी देर बाद संध्या भी सजधज कर उस के पास आ गई. उसे देख कर भूरिया मुच्छड़ की लार टपकने लगी. उस ने उसे अपनी बांहों में लेना चाहा, पर संध्या ने कहा, ‘‘इतनी भी जल्दी मत कर. पहले मैं अपनी चोली की डोरी कमर से खोल लेती हूं, फिर तू पूरा मजा ले लेना.’’ इस के बाद संध्या ने अपनी कमर के पीछे खोंसी हुई दरांती निकाली और फुरती से भूरिया मुच्छड़ की नाक पर वार कर उस की नाक काट कर अलग कर दी.

भूरिया दर्द के मारे चिल्लाया और बोला, ‘‘धोखा. मैं तुझे नहीं छोड़ूंगा.’’

इतना कह कर भूरिया मुच्छड़ ने अपने पास रखे लट्ठ पर हाथ मारा, पर वह गायब था. सूरज ने वह लट्ठ उठा लिया था और उस ने उसी का लट्ठ उसी पर धड़ाधड़ मारना शुरू कर दिया.

संध्या ने 2 बार के हमले में ही उस के दोनों कान भी काट दिए. भूरिया मुच्छड़ लहूलुहान हो कर इस तरह भागा, जैसे बंदूक से गोली चली.

सूरज ने अपनी पत्नी संध्या को बांहों में भर कर उस की पीठ थपथपाई और इस के बाद वे दोनों खुशीखुशी अपने घर चले आए. जब गांव वालों को मालूम हुआ कि भूरिया मुच्छड़ अपनी नाक और कान दोनों ही एक औरत से कटवा कर गांव छोड़ कर भाग गया है, तो सब ने राहत की सांस ली. इस तरह बहादुरी दिखाते हुए संध्या ने अपने गांव को बदमाश भूरिया मुच्छड़ से नजात दिलाई. अब उस का रुतबा पूरे गांव में और भी ज्यादा बढ़ गया था. जहां तक भूरिया मुच्छड़ की बात है, तो वह उस के बाद गांव के आसपास कहीं नहीं दिखाई दिया.

इस ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर को लग रहा है टीम इंडिया से डर…!

इंडियन प्रीमियर लीग के 9वें सीजन के लिए सबसे महंगे बिके क्रिकेटर और ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर शेन वाटसन का मानना है कि अगले महीने 9 मार्च से शुरू होने वाले आईसीसी वर्ल्ड ट्वेंटी20 में ऑस्ट्रेलिया को मेजबान भारत से कड़ी टक्कर मिलेगी.

ऑस्ट्रेलिया को 27 मार्च को मोहाली में मेजबान भारत से भिड़ना है. वाटसन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को भारत से सतर्क रहने की जरूरत है. भारत ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर तीन मैचों की टी-20 सीरीज में 3-0 से हराकर क्लीन स्वीप किया था.

घरेलू परिस्थिति का मिलेगा भारत को फायदा
वाटसन ने कहा, 'मेरा मानना है कि घरेलू परिस्थितियों के कारण टीम इंडिया एक मजबूत टीम बनकर उभरेगी. इसलिए वर्ल्ड कप में भारत से कड़ी टक्कर मिलेगी. भारतीय टीम अपनी परिस्थितियों से अच्छी तरह से वाकिफ है और घरेलू मैदान पर बड़े टूर्नामेंटों में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है.'

आईपीएल में सबसे अधिक कीमत 9.50 करोड़ रुपये में बिके वाटसन ने कहा कि महेंद्र सिंह धौनी की अगुवाई वाली टीम इंडिया के पास कई अच्छे खिलाड़ी जिन्होंने अब तक हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया है.

भारत के खिलाफ तीसरे टी-20 मैच में सेंचुरी जमाने वाले वाटसन ने कहा, 'भारत के पास कई अच्छे हरफनमौला खिलाड़ी हैं. इसके अलावा उनके पास कई विस्फोटक बल्लेबाज और वर्ल्ड क्लास अच्छे अनुभवी स्पिन गेंदबाज भी हैं जो जल्दी-जल्दी विकेट निकालते हैं.'

नेहरा-बुमराह की जोड़ी खतरनाक
वाटसन ने कहा, 'काफी समय के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी करने वाले तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने शानदार गेंदबाजी की है और तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भारत के लिए एक अच्छी खोज है. उन्होंने टी-20 सीरीज में कमाल का प्रदर्शन किया है, इसलिए मुझे लगता है कि मेजबान टीम विरोधी टीमों के लिए बड़ी चुनौती पेश करेगी.'

राइमा सेन को है स्क्रीन टेस्ट का फोबिया

गैर फिल्मी माहौल से बौलीवुड में प्रवेश करने वाली लड़कियों को यदि स्क्रीन टेस्ट फोबिया हो, तो बात समझ में आती है. मगर फिल्मी माहौल में परवरिश पायी अभिनेत्रियों को भी ‘‘स्क्रीन टेस्ट’या ‘ऑडीशन’ का फोबिया हो सकता है, बात सुनने में अजीब सी लगती है. पर यह कटु सत्य है. राइमा सेन बौलीवुड के साथ साथ बंगला फिल्मों की अतिव्यस्ततम और चर्चित अदाकारा हैं. मगर उन्हे स्क्रीन टेस्ट का फोबिया शुरू से ही रहा है. इसी के चलते उन्हे कई बड़े बजट की फिल्मों से हाथ भी धोना पड़ा. राइमा सेन जितनी बंगला फिल्में करती हैं, उससे बहुत कम हिंदी फिल्में करती हैं.

हिंदी फिल्में कम मिलने और अपने फोबिया की चर्चा करते हुए राइमा सेन कहती हैं-‘‘वास्तव में शुरुआत में मुझे स्क्रीन टेस्ट का फोबिया था. जब कोई फिल्मकार मुझे स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाता था, तो मैं स्क्रीन टेस्ट देने नहीं जाती थी. स्क्रीन टेस्ट के नाम से मुझे इतना डर लगता था कि मैं जाती ही नहीं थी. जिसके चलते मेरे हाथ से कई बड़ी फिल्में चली गयीं. मेरे इस कदम की वजह से लोगो ने मेरे बारे में अनप्रोफेशनल कलाकार होने की अफवाह फैला दी. लेकिन स्क्रीन टेस्ट न देने के कारण मैंने कई बड़ी फिल्में खोयी. पर आज मुझे इस बात का ‘रिग्रेट’ है. आज मुझे लगता है कि मुझे स्क्रीन टेस्ट देने के लिए जाना चाहिए था. पर मैं गयी ही नहीं, इसलिए स्वीकृत या रिजेक्शन का मसला ही नहीं आया. तो आज मुझे स्क्रीन टेस्ट के लिए मना करने को लेकर अफसोस है.’’

स्क्रीन टेस्ट देने से इंकार करने की वजह से राइमा सेन के हाथ से कई बेहतरीन हिंदी फिल्में चली गयी थी. जिनके लिए अब राइमा सेन को बहुत अफसोस है. वह खुद कहती हैं-‘‘मुझे ‘दिल्ली बेले’ में आडीशन देने के लिए बुलाया था. मणि रत्नम ने एक फिल्म के लिए स्क्रीन टेस्ट देने के लिए बुलाया था. ‘मोहब्बते’ के लिए भी बुलाया गया था. अनुराग कश्यप के आफिस में आडीशन देने गयी थी, पर कुछ देर बाद मैं भाग आयी थी. इसी तरह से कई बड़ी बड़ी फिल्मों के लिए मैने स्क्रीन टेस्ट महज डर की वजह से नहीं दिया.’’

इस साल राइमा सेन की चार फिल्में रिलीज होने वाली हैं. और यह सभी फिल्में राइमा सेन को बिना स्क्रीन टेस्ट दिए ही मिली हैं. इस बात को स्वीकार करते हुए राइमा सेन कहती हैं-‘‘2015 में मैने चार हिंदी फिल्मों की शूटिंग पूरी की. जो कि अब 2016 में रिलीज होंगी. इनमें से किसी भी फिल्म के लिए मैंने स्क्रीन टेस्ट नहीं दिया. यह चारों फिल्में मुझे ‘लक’ से मिली. प्रतीक बब्बर वाली फिल्म के निर्देशक मेरे पास आए, वह कम उम्र की अभिनेत्री चाहते थे. मुझसे मिले और मेरा चयन हो गया.‘ ‘बालीवुड डायरीज’’ के लिए कोलकाता में ऑडीशन हो रहे थे. उस वक्त मैं मुंबई में थी, तो मैं आडीशन देने नहीं गयी. कुछ दिन बाद फिल्म के निर्देशक के डी सत्यम मुंई में मेरे घर पर आए. उन्होने कहा कि वह मुझे अपनी फिल्म का हिस्सा बनाना चाहते हैं. उसके बाद उन्होने मुझे फिल्म की स्क्रिप्ट सुनायी,मुझे स्क्रिप्ट व मेरा किरदार पसंद आया.’’

लेकिन राइमा सेन ने फिल्म ‘‘एकलव्य’’ के लिए आडीशन दिया था. यह बात याद दिलाए जाने पर राइमा सेन कहती हैं-‘‘मशहूर फिल्म निर्देशक प्रदीप सरकार के निर्देशन में मैं फिल्म ‘परिणीता’ कर चुकी थी. तो प्रदीप सरकार को पता था कि मुझे स्क्रीन टेस्ट का फोबिया है. इसलिए जब विधू विनोद चोपड़ा ने मुझे फिल्म ‘एकलव्य’ के लिए स्क्रीन टेस्ट देने बुलाया, तो मैंने मना कर दिया. मैने कहा कि मैं तो ‘परिणीता’ कर चुकी हूं, तो आप लोगों को नहीं पता कि मैं कैसा काम करती हूं. मैं आडीशन नहीं दूंगी. दो दिन बाद मुझे बुलाया गया कि फिल्म ‘एकलव्य’ की शूटिंग कल से शुरू हो रही है और कल पहला सीन फिल्माया जाएगा. इसके लिए मुझे स्टूडियो पहुंचना है. मैं स्टूडियो पहुंच गयी. सेट लगा हुआ था. मुझे पूरा घाघरा पहनने के लिए कहा गया. शूटिंग पूरी करके जब में वैनिटी वैन के अंदर पहुंची, तो वहां पर दो तीन दूसरी अभिनेत्रियां वैसा ही घाघरा पहने हुए मौजूद थी. मैने उनसे पूछा कि वह क्या कर रही हैं? तो पता चला कि वह आडीशन/स्क्रीन टेस्ट देने आयी थी. मैने प्रदीप सरकार दा से पूछा कि यह क्या है? तो उन्होने कहा कि,‘तुम स्क्रीन टेस्ट के नाम से डरती हो, इसलिए हमने तुमसे कहा कि सीन फिल्माया जाना है और मुझे फिल्म ‘एकलव्य’ मिल गयी थी.’’

राइमा सेन के मन में ‘‘स्क्रीन टेस्ट’’ का फोबिया कब पैदा हुआ? इस सवाल पर राइमा सेन ने कहा-‘‘यह उस वक्त की बात है,जब मैं बहुत छोटी थी. तब एक नाटक के आडीशन में गयी थी और मैं कर नहीं पायी थी. बीच में ही स्टेज छोड़कर भाग आयी थी. तभी से मेरे अंदर एक डर समा गया. मैं सभी के सामने चलते नाटक में भाग गयी थी. उसके बाद मैने सोच लिया था कि मैं ऑडीशन या स्क्रीन टेस्ट देने नहीं जाउंगी. मैंने उसके बाद कभी भी स्टेज नहीं किया. मेरे पास कई नाटकों में अभिनय करने के आफर आए, पर मैंने मना कर दिया. अब तो सिनेमा और फिल्म इंडस्ट्री की कार्यपद्धति काफी बदल चुकी है. अब कोई मुझे स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाए, तो मैं निश्चित रूप से जाउंगी. अब मुझे अहसास हो चुका है कि स्क्रीन टेस्ट का अर्थ फिल्म की स्क्रिप्ट के अनुसार किरदार के लुक, उसके मैनेरिज्म, सह कलाकार के साथ केमिट्री वगैरह को जज करना जरुरी होता है. लेकिन मेरे अंदर स्क्रीन टेस्ट का फोबिया खत्म हुआ या नहीं, इसका अहसास मुझे नहीं है. मै अभी सोच रही हूं कि  अब मैं स्क्रीन टेस्ट के लिए जाउंगी. पर अभी तक गयी नहीं.’’

 

निकिता दत्ता को भी चढ़ा प्यार का बुखार

इन दिनों टीवी सीरियल में एक साथ काम करते हुए कलाकारों का एक दूसरे के प्रति आकर्षित होना और फिर प्यार में पड़ जाना आम बात होती जा रही है. यह एक सच्चाई है. इन दिनों टीवी की एक जोड़ी की चर्चा उनकी अभिनय क्षमता को लेकर नहीं, बल्कि उनके रोमांस के कारण हो रही है. टीवी इंडस्ट्री में चर्चाएं गर्म हैं कि सीरियल ‘‘ड्रीम गर्ल’’ में अभिनय कर रही अभिनेत्री निकिता दत्ता इसी सीरियल में मानव का किरदार निभा रहे अभिनेता खालिद सिद्दिकी के बीच रोमांस की खिचड़ी पक रही है.

नेवी में कार्यरत पिता की बेटी निकिता दत्ता ने असफल फिल्म ‘‘लेकर हम दीवाना दिल’’ से की थी. इस फिल्म की असफलता के बाद उनका संघर्ष शुरू हो गया, तभी उन्हें सीरियल ‘‘ड्रीमगर्ल’’ में मुख्य भूमिका निभाने का अवसर मिला, जिसे निकिता दत्ता ने तुरंत स्वीकार कर लिया. इस सीरियल की शूटिंग शुरू होने के एक माह के अंदर ही खालिद सिद्दिकी के साथ उनके रोमांस की खबरें गर्मा गयी.

यूं तो सूत्रों के अनुसार खालिद सिद्दिकी और निकिता दत्ता ने अपनी इस प्रेम कहानी को काफी गुप्त रखा हुआ है. लेकिन सीरियल ‘‘ड्रीमगर्ल’’ में ही अभिनय कर रहे कुछ कलाकारों को इनके रोमांस की ऐसी भनक लगी कि उन्होने इसकी चर्चा करनी शुरू कर दी. वैसे इस प्रेम कहानी के उजागर होने से कुछ कलाकार आश्चर्यचकित भी हैं. क्योकि सूत्रों के अनुसार खालिद सिद्दिकी न सिर्फ तलाकशुदा बल्कि दो बच्चों के पिता भी हैं. टीवी इंडसट्री में जो खबरें गर्म हैं, उनके विपरीत निकिता दत्ता और खालिद सिद्दिकी दोनों ही एक दूसरे को अपना खास व अच्छा दोस्त ही बताते हैं.

व्हाट्सऐप कौलिंग की शिकार लड़कियां

रीता दिल्ली से सटे गाजियाबाद के एक पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा की छात्रा थी. 9वीं में अच्छे अंक आने पर उस ने पिता से जिद कर के एक नया ऐंड्रौयड मोबाइल फोन ले लिया. मोबाइल में इंटरनैट पैक न लिया जाए आजकल ऐसा नहीं होता, क्योंकि स्मार्टफोन के अधिकांश फीचर्स इंटरनैट बेस ही होते हैं.

रीता ने बहुचर्चित सोशल मैसेंजर व्हाट्सऐप भी अपने फोन में डाउनलोड कर लिया. कुछ दिन बाद ही उसे व्हाट्सऐप के जरिए एक कौल आई. रीता ने कौल अटैंड की, तो दूसरी तरफ कोई युवक  था, ‘‘हाय, आप की प्रोफाइल पिक्चर बहुत प्यारी है.’’

रीता सकपका गई, ‘‘आप कौन?’’

‘‘एक ऐसा साथी जो आप को चाहता है और हां, एक बात तो कहना भूल ही गया आप की आवाज भी बहुत प्यारी है.’’

रीता कोई जवाब देती उस से पहले ही कौल डिस्कनैक्ट हो गई. रीता को पता नहीं था कि वह कौन था. उस ने कोई बदतमीजी भी नहीं की थी. उस की बातों से उस के मन में गुदगुदी पैदा हो गई. जिज्ञासावश उस ने कौलिंग नंबर को सेव कर के व्हाट्सऐप पर उस का प्रोफाइल फोटो देखा तो वह एक मौडल की तरह दिखने वाला खूबसूरत युवक था.

नाजुक उम्र के दौर में रीता को यह अच्छा लगा. इस के बाद वह रीता को गुडमौर्निंग मैसेज के साथ खूबसूरत ग्रीटिंग पिक्चर्स भेजने लगा. शुरू में तो रीता ने इस का जवाब नहीं दिया, लेकिन उसे लगा कि जो भी हो वह उस की तारीफ करता है. नए मोबाइल के साथ उसे यह बात भी अच्छी लग रही थी कि अन्य यूथ की तरह वह भी व्हाट्सऐप का इस्तेमाल कर रही है.

रीता ने जब जवाब देने शुरू किए तो वह धीरेधीरे उस में इतना डूब गई कि उस ने एक रैस्टोरैंट में उस से मिलने का प्रोग्राम भी बना लिया. रीता विश्वास कर के उस से मिलने भी चली गई. युवक उसे घुमाने के बहाने कार में बैठा कर दिल्ली ले गया. उस के जाल में फंस कर रीता को एहसास हुआ कि वह किसी गैंग के चंगुल में फंस गई है. टौयलेट जाने के बहाने रीता ड्राइंगरूम से निकली और फ्लैट का दरवाजा खोल कर वहां से भाग निकली और अपने परिजनों को फोन कर सूचित किया.

सूचना मिलने पर परिजन वहां पहुंचे और उसे वहां से वापस ले कर आए. परिजनों को जब पूरा किस्सा पता चला तो उन्हें बेटी को मोबाइल दिलाने के अपने निर्णय पर पछतावा हुआ.

मामला पुलिस तक पहुंचा, लेकिन बदनामी के डर से परिजन खामोश रह गए. पुलिस ने उन से कहा कि अगर कोई उन्हें परेशान करे तो चुप न रहें. पुलिस ने गोपनीय ढंग से गैंग की पड़ताल शुरू कर दी. रीता के परिवार को खुशी थी कि उन की बेटी सुरक्षित बच गई थी, लेकिन सभी ऐसे खुशनसीब हों यह जरूरी नहीं.

रश्मि 7वीं क्लास की छात्रा थी. उस के परिजनों ने उसे ऐंड्रौयड मोबाइल दिला दिया. एक लड़के ने व्हाट्सऐप के जरिए उस से दोस्ती कर ली. उस ने दोस्ती की आड़ में उस की मासूमियत का फायदा उठा कर उस से मुलाकातें शुरू कर दीं. रश्मि नाजुक उम्र के दौर में थी और वह युवक की चाल को समझ नहीं पाई. एक दिन मौका पा कर उस ने रश्मि का शारीरिक शोषण किया. इस के बाद तो उस का लगातार शोषण किया जाने लगा. जब रश्मि के परिजनों को शक हुआ, तब जा कर मामला खुला. उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया.

उत्तर प्रदेश के एक गांव की रहने वाली किशोरी को व्हाट्सऐप के जरिए एक युवक ने अपने प्रेमजाल में फंसा लिया. किशोरी जब उस के जाल में फंस गई, तो उस युवक ने उस के साथ दुराचार किया. साथ ही उस ने इस दुराचार की वीडियो फिल्म भी बना ली. इस के बाद उसे ब्लैकमेल किया जाने लगा. युवक ने वीडियो के बल पर किशोरी के संबंध अपने दोस्तों के साथ भी बनवाए. जब मामला खुला तो हर कोई दंग रह गया.

कुछ समय पहले ही व्हाट्सऐप मैसेंजर ने नया फीचर जोड़ते हुए मुफ्त कौलिंग की सुविधा भी प्रदान की. इस में इंटरनैट के जरिए ही बात हो जाती है. लाखों यूजर्स इस का फायदा उठा रहे हैं. खासकर इस का जादू यूथ के तो सिर चढ़ कर बोल रहा है, क्योंकि वहाट्सऐप ही एक ऐसा मैसेंजर है जिस के जरिए मैसेज, औडियो, वीडियो व फोटो फाइलें सैकंडों में एकदूसरे के मोबाइल में पहुंच जाती हैं.

लड़कियों को शिकार बनाने वाला गैंग अनजान नंबरों को पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर सेव करता है, फिर व्हाट्सऐप पर उन का प्रोफाइल देखता है. यदि लड़की या महिला का फोटो होता है, तो उस से व्हाट्सऐप कौलिंग की जाती है. दूसरी तरफ से यदि किसी लड़की या महिला की आवाज आती है तो उस से लच्छेदार बातें करना शुरू कर देते हैं. यदि कोई पुरुष हुआ तो सौरी कह कर कौल कट कर देते हैं.

शिकार यदि उन के जाल में फंसने लगता है तो धीरेधीरे उस से रोमांचक चैटिंग शुरू करते हैं. फिर कौलिंग करते हैं और बातोंबातों में उस का फैमिली प्रोफाइल भी पता करते हैं? इस के बाद उसे अपना टारगेट बनाते हैं. जो लड़कियां इन के जाल में फंस जाती हैं उन का जम कर शारीरिक शोषण किया जाता है. चोरीछिपे उन की वीडियो क्लिपिंग बनाई जाती हैं और फिर ब्लैकमेलिंग का सिलसिला शुरू हो जाता है. इस तरह ये गैंग लड़कियों को देह व्यापार के धंधे में धकेलने से भी नहीं हिचकते.

अधिकतर ग्रामीण लड़कियां ही उन का शिकार होती हैं. शहरों में वे छात्राएं इन के निशाने पर होती हैं जो अकसर इंटरनैट के जरिए मैसेंजर आदि पर ऐक्टिव रहती हैं. व्हाट्सऐप कौलिंग में गैंग के पकड़े जाने का खतरा न के बराबर रहता है. अभी तक ऐसी कोई सुविधा नहीं है जिस से इंटरनैट कौल को रिकौर्ड किया जा सके या यह पता लगाया जा सके कि वह किस स्थान से की जा रही है. नंबर की जांच की जाए तो वह फर्जी पतों पर आधारित होते हैं. केवल नंबर से यह साबित करना मुश्किल हो जाता है कि कौन किस से क्या बात कर रहा है.

पेरैंट्स रहें सावधान

यदि पेरैंट्स बच्चों को ऐंड्रौयड मोबाइल देते हैं तो उन्हें सावधान रहने की जरूरत है. मोबाइल दे कर यह न सोचें कि लड़कियां सेफ हैं. इंटरनैट के जरिए मोबाइल पर पूरी दुनिया मौजूद है. बेटी कब किस का शिकार बन जाए, कोई नहीं जानता. ऐसे गैंग घात लगा कर सक्रिय रहते हैं जो लड़कियों को फेसबुक और व्हाट्सऐप के जरिए फंसाने का काम करते हैं. उन का मकसद लड़कियों को अपने जाल में उलझा कर उन का इस्तेमाल कर ब्लैकमेल करना व कभीकभी देह व्यापार के धंधे में उतारना भी होता है, क्योंकि यूथ के सिर पर मोबाइल इंटरनैट का जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है, वे इसी का फायदा उठाते हैं.

–       पेरैंट्स देखें कि बच्चे मोबाइल की जिद क्यों कर रहे हैं.

–       यह ध्यान दें कि क्या बच्चे को वास्तव में मोबाइल की जरूरत है.

–       व्हाट्सऐप कितना इस्तेमाल होता है इस पर भी नजर रखें.

–       बच्चा यदि छिप कर बात या चैटिंग करता है तो भी ध्यान दें.

–       बच्चे को आजादी की सीमा के दायरे में रखें.

–       बच्चों से उन के दोस्तों के बारे में भी पूछताछ करें.

–       बच्चों को समझाएं कि अनजान लोगों से बात न करें.

–       उन्हें समझाएं कि अपना फैमिली प्रोफाइल किसी को न दें.

–       बच्चों से पूछें कि कोई उन्हें परेशान तो नहीं कर रहा है.

–       यदि कोई परेशान करता है तो उस की सूचना पुलिस को दें.

व्हाट्सऐप कौलिंग : पुलिस के लिए चुनौती

व्हाट्सऐप द्वारा शुरू की गई मुफ्त कौलिंग की सुविधा पुलिस के होश उड़ा रही है. टैक्नोलौजी के दौर में पुलिस व अपराधियों के बीच शहमात का खेल चलता रहता है. इस तकनीक का इस्तेमाल यदि अपराधियों ने किया, तो पुलिस के लिए यह बहुत बड़ी मुसीबत होगा. इस नई तकनीक पर पुलिस किसी तरह अंकुश लगा पाएगी यह भी समझ से परे है. इस को ले कर पुलिस अधिकारी चिंतित हैं. ऐसी कोई तकनीक नहीं निकली तो भारत में इस तरह की सुविधा को सुरक्षा कारणों से बंद भी किया जा सकता है.

व्हाट्सऐप कौलिंग सभी स्मार्टफोन पर उपलब्ध है. इंटरनैट के जरिए यूजर्स एकदूसरे से बात कर सकते हैं. इंटरनैट इस्तेमाल करने वालों का सिर्फ आईपी एड्रैस होता है. ऐसी बातचीत को किसी भी सूरत में नहीं सुना जा सकता. अब यदि कोई अपराध होता है, तो पुलिस सर्विलांस व कौल रिकौर्ड के जरिए ही अपराधों का खुलासा करती है. बड़ेछोटे मामलों में यह तकनीक बेहद कारगर साबित होती है. इतना ही नहीं पुलिस लोकेशन को ट्रेस करने के साथ ही बातचीत भी सुन लेती है. परंतु व्हाट्सऐप में ऐसा कुछ नहीं है. पुलिस सीडीआर से पता नहीं लगा सकती कि अपराधी ने किसकिस को कौल की. सिर्फ यह पता चल सकता है कि नंबर कहां इस्तेमाल हो रहा है और किस के नाम रजिस्टर्ड है? इस से भी बड़ी मुसीबत यह है कि व्हाट्सऐप का सर्वर भारत में नहीं है? न सिर्फ आईपी एड्रैस ट्रेस करना मुश्किल है बल्कि डिटेल भी आसानी से उपलब्ध नहीं होगी.

अमीरजादे भी होते हैं शिकार

व्हाट्सऐप के माध्यम से कुछ गिरोह अमीरजादों को फंसा कर उन्हें ब्लैकमेल करने का भी काम कर रहे हैं. प्रोफाइल पर आकर्षक फोटो लगाया जाता है. मजेदार चैटिंग की जाती है. जब शिकार जाल में फंस जाता है, तो उस से वूसली की जाती है. हरियाणा के यमुना नगर निवासी एक व्यापारी का बेटा राहुल ऐसे ही गिरोह का शिकार हो गया. उसे व्हाट्सऐप के जरिए एक युवती ने अपने प्रेमजाल में फंसा लिया. लड़की ने उसे मिलने के लिए बुलाया और फिर अपने साथियों के साथ उस का अपहरण कर के एक कमरे में बंद कर दिया? राहुल के साथ मारपीट की गई और फिर उस के परिजनों से 10 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई. मामला पुलिस में पहुंचा तो पुलिस ने राहुल को सकुशल बरामद कर लिया.

पिछले दिनों हरियाणा की रोहतक पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था जो अमीर लड़कों को युवतियों के जरिए फंसाता था. जनता कालोनी निवासी शिवम ने व्हाट्सऐप पर मैसेज के आने के बाद एक युवती से दोस्ती कर ली. बाद में वह युवती से मिलने होटल भी चला गया. इस के बाद युवती उस से रुपए की मांग करने लगी. शिवम ने रुपए नहीं दिए तो युवती ने केस दर्ज कराया कि शिवम नामक युवक ने उसे झांसा दे कर उस के साथ दुराचार किया. पुलिस ने मामले की जांच की तो चौंक गई, क्योंकि लड़की की चैटिंग और उस के भेजे गए फोटो कुछ दूसरी कहानी बता रहे थे. लड़की समझौते के नाम पर 2 करोड़ रुपए मांगने लगी. इस पर पुलिस ने लड़की व उस के साथियों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस जांच में सामने आया कि वह 5 लोगों का गिरोह था, जिस में 3 युवक और 2 युवतियां थीं. गिरोह ने फर्जी पते के आधार पर सिमकार्ड ले रखे थे. वे अमीरजादों की सूची बनाते थे और युवतियां व्हाट्सऐप के जरिए उन्हें फंसा कर ब्लैकमेल करती थीं

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