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आटोमोबाइल क्षेत्र में चमकते भारतीय इंजीनियर

भारत के इंजीनियरों ने अब कार निर्माण क्षेत्र में भी अपनी दक्षता का ऐसा अनूठा परिचय दिया जिस का पूरी दुनिया लोहा मानने लगी है. भारतीय आटोमोबाइल इंजीनियर कई कारों के डिजाइन तैयार कर चुके हैं लेकिन इस बार जापानी बहुराष्ट्रीय कार निर्माता कंपनी निसान ने भारतीय इंजीनियरों के समक्ष यह चुनौती पेश की है. उस ने अफ्रीका, पश्चिम एशिया तथा भारतीय उपमहाद्वीप के लिए भारतीय इंजीनियरों को कारों के डिजाइन तथा उन के निर्माण का काम सौंपा है. इस के लिए कंपनी ने चेन्नई स्थित अपने निर्माण लेड में 600 इंजीनियरों का एक दल बनाया है. इस दल को सामान्य कीमत वाली मजबूत और बेहतरीन कारों के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इंजीनियरों से निर्धारित समय पर यह कार्य पूरा करने को कहा गया है.

अफ्रीका, पश्चिम एशिया तथा भारतीय उपमहाद्वीप में निसान की वैश्विक हिस्सेदारी 15 फीसदी के आसपास है. नए डिजाइन की कारों का निर्माण कर कंपनी ने वैश्विक बाजार में कारों की बिक्री की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है. निसान के कार निर्माता डिजाइन दल अब तक जापान के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस में हैं और अब भारत उस की इस कड़ी का हिस्सा बन गया है.

कंपनी का विश्वास है कि इस केंद्र में डिजाइन की गई तथा यहां की तकनीकी से निर्मित उस की कारें क्षेत्रीय बाजार में धूम मचा सकती हैं. इस केंद्र को विकसित करने के बारे में कंपनी ने 5 साल पहले फैसला लिया था लेकिन इस के लिए इस के निदेशक मंडल में तरहतरह की अड़चने आ रही थीं. बहरहाल, आज भरोसे के साथ कहा जा सकता है कि भारतीय इंजीनियरों की टीम कंपनी के विश्वास पर खरी उतरेगी और निसान को एक तोहफा देगी.        

निजता के उल्लंघन पर फेसबुक को फटकार

हाल ही में एक चौंकाने वाली खबर आई थी कि फेसबुक जैसी कंपनियों द्वारा हटाए गए कुछ कर्मचारियों ने दावा किया है कि कंपनी फेसबुक यूजर्स के पर्सनल चैटिंग को गुपचुप तरीके से रिकौर्ड कर रही है. यह गैरकानूनी कार्य है और इस से कई निजी बातों की गोपनीयता भंग हो सकती है. इस तरह की खबरें पहले भी आती रही हैं, इसलिए हाल में यूजर्स चैट रिकौर्ड की खबर ज्यादा चौंकाने वाली साबित नहीं हुई.

नागरिकों के अधिकारों के हनन को रोकने का जिम्मा शासन, प्रशासन का है, उसे इस पर ध्यान देना चाहिए. कुछ इसी तरह का कदम पिछले दिनों जरमनी सरकार ने उठाया है. उस ने फेसबुक से व्हाट्सऐप डाटा रिकौर्ड को खत्म करने के लिए कहा है. जरमनी के यूजर्स के हितों के संरक्षण पर ध्यान देने वाले संगठन ने कंपनी से कहा है कि वह इस संबंध में हुए समझौते का पालन करे.

समझौते में कहा गया था कि फेसबुक यूजर्स के फोन नंबर तथा अन्य डाटा को व्हाट्सऐप पर शेयर नहीं किया जाएगा लेकिन कंपनी इस का उल्लंघन कर निर्बाध गति से निजी डाटा रिकौर्ड कर रही थी. डाटा हटाने के लिए कोई कानूनी अधिकार भी जरमनी सरकार के पास नहीं था. इस के बावजूद जरमनी की सरकार ने सख्ती दिखाते हुए फेसबुक को उस दिशा में कदम उठाने के लिए कहा. फेसबुक ने भी डर के कारण यह घोषित कर दिया है कि वह जरमनी की भावना का सम्मान करती है. लेकिन सवाल यह है कि बिना इजाजत के फेसबुक किसी की निजता को कैसे बांट सकती है. यह निजता अधिकारों का उल्लंघन है और अमेरिकी कंपनियां इस तरह के उल्लंघन से हिचकिचाती नहीं हैं.

दूसरा मतलब यह हुआ कि फेसबुक पूरी दुनिया की सूचना रखती है. वह किसी देश, कंपनी, संगठन या व्यक्ति की निजता का इस्तेमाल खुद के हितों के लिए कर सकती है. इस पर सभी सरकारों को पैनी निगाह रखने की जरूरत है.

छोटे शहरों में बीपीओ क्षेत्र में बढ़ेंगी नौकरियां

सरकार दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए वहां बिजनैस प्रोसेस आउटसोर्सिंग यानी बीपीओ केंद्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी. इस के लिए सरकार ने छोटे शहरों में 9 हजार बीपीओ सीटों को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है. सूचना और तकनीकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस संबंध में कहा है कि योजना को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति सीट पर वास्तविक खर्च की 50 प्रतिशत रकम केंद्र सरकार उपलब्ध कराएगी लेकिन प्रत्येक सीट पर सहयोग की अधिकतम राशि एक लाख रुपए होगी.

उन का कहना है कि इस के लिए 60 से ज्यादा कंपनियां देश के 18 शहरों में अपने बीपीओ केंद्र खोलने की सरकार को सूचना दे चुकी हैं. ये कंपनियां करीब 60 छोटे शहरों में अपना कारोबार शुरू करेंगी. भारत इस क्षेत्र में दुनिया की बड़ी ताकत है और विश्व में 38 प्रतिशत से ज्यादा बीपीओ कारोबार यहीं हो रहा है. इसे और गति देने के लिए ही केंद्र सरकार ने बीपीओ सेवा को महानगरों के साथ ही दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में स्थापित करने की योजना बनाई है.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बेंगलुरु में कुछ युवकों ने उन से मिल कर महानगरों में अपने जीवन की कठिनाइयों से अवगत कराते हुए कहा था कि वे पूर्वोत्तर तथा बिहार आदि राज्यों से बेंगलुरु आए हैं. इस तरह के केंद्र बिहार, झारखंड, ओडिशा आदि राज्यों में खुलने से वहीं स्थानीय लोगों को नौकरी मिल सकती है. भारतीय भाषाओं में बीपीओ सेवा की पर्याप्त संभावनाएं हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कंपनियों से बात की और बड़ी संख्या में बीपीओ कंपनियां महानगरों से बाहर जा कर कारोबार करने के लिए तैयार हुईं.

कुश्ती का मेला

पिछले कुछ वर्षों में कुश्ती को देखने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, यह सत्य है. इस को भांपते हुए धनकुबेरों ने कुश्ती के दंगल की प्रो कुश्ती लीग के नाम से दुकान खोल ली. देशी विदेशी पहलवानों का मेला शुरू हो गया. कुश्ती को धूलमिट्टी से निकाल कर मखमली कारपेट तक पहुंचा दिया. बड़ेबड़े पहलवानों की खरीद फरोख्त शुरू हो गई. पहलवानों पर पैसों की बारिश होने लगी.

आईपीएल की तर्ज पर इसे भुनाने का प्रयास शुरू हो चुका है, फार्मेट भी आईपीएल की ही तरह तैयार किया गया. प्रो कुश्ती लीग यानी पीडब्लूएल का दूसरा चरण 15 दिसंबर से शुरू होगा जिसमें 8 टीमें हिस्सा लेंगी. पिछली बार 54 खिलाडि़यों का पूल था, इस बार 80 खिलाडि़यों का पूल होगा.

इस बार हरियाणा, पंजाब, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, उत्तर प्रदेश के अलावा 2 टीमें और शामिल की गई हैं. साथ ही, विदेशी पहलवानों की संख्या 24 से बढ़ा कर 40 कर दी गई है.

प्रो. कुश्ती लीग से उन पहलवानों को भी पहलवानी दिखाने का मौका मिल जाता है जो गुमनाम हैं. उन्हें नएनए दांवपेंच सीखने का भी मौका मिलता है क्योंकि इस लीग में कई ऐसे देशीविदेशी नामीगिरामी पहलवान शामिल होते हैं जो ओलिंपिक पदक विजेता रहे हैं.

इस लीग की अच्छी बात यह है कि इस में उन खिलाडि़यों को मौका मिलता है जो छोटे शहरों व गरीब तबकों से आते हैं. अब इस लीग से मिली फीस से वे अपने खेल को और मांज सकते हैं. इन्हें खेल संघों पर आश्रित नहीं रहना पड़ेगा.

अर्थव्यवस्था के अनुकूल माहौल से बाजार में उत्साह

भारतीय सेना के सीमापार जा कर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने के बाद भारत व पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का बाजार पर नकारात्मक असर देखने को मिला.

बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई के सूचकांक में उतार चढ़ाव के बीच निवेशकों में उत्साह का माहौल रहा. सूचकांक में 7 अक्टूबर तक लगातार 3 दिनों की गिरावट के बावजूद बाजार में आटोमोबाइल्स क्षेत्र में वाहनों की बिक्री का आंकड़ा बढ़ने से मारुति व होंडा सहित कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों के साथ ही बैंकिंग क्षेत्र में तेजी का रुख रहा. रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के ब्याज दरों में कमी करने के निर्णय से भी बाजार में अच्छा संकेत गया.

हालांकि इस दौरान भारतीय सेना के सीमापार जा कर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने के बाद भारत व पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का बाजार पर नकारात्मक असर देखने को मिला लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ के भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत रहने संबंधी आकलन और सकल घरेलू उत्पाद  यानी जीडीपी दर 7.5 प्रतिशत से ज्यादा रहने के अनुमान से बाजार में अच्छा माहौल रहा.

सलमान संग ऐश्वर्या

जब से ऐश्वर्या राय बच्चन ने कुछ शर्तों के साथ सलमान खान के साथ फिल्म करने की मंशा जाहिर की है, तब से बौलीवुड में लोग आश्चर्यचकित हैं. सब को पता है कि सलमान खान और ऐश्वर्या राय के बीच कैसा रिश्ता रहा है और इस रिश्ते में किस तरह की कड़वाहट आई थी. एक पुरानी कहावत है, ‘मजबूरी में गधे को भी बाप बनाना पड़ता है.’ ऐश्वर्या के अति नजदीकी सूत्रों की मानें तो ऐश्वर्या इसी कहावत पर अमल कर रही हैं.

अभिषेक बच्चन के साथ विवाह करने के बाद से ऐश्वर्या राय बच्चन का कैरियर निरंतर पतन की ओर ही अग्रसर रहा. आराध्या की मां बनने के 5 साल बाद ऐश्वर्या राय ने अपने कैरियर की नई शुरुआत फिल्म‘जज्बा’ के साथ की लेकिन यह बौक्सऔफिस पर धराशायी हो गई. ‘सरबजीत’ की भी कमजोर कड़ी ऐश्वर्या राय बच्चन साबित हुईं. अपने अभिनय कैरियर को पटरी पर लाने के लिए ऐश्वर्या राय बच्चन ने करण जौहर के निर्देशन में मल्टीस्टारर फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में कई बोल्ड व किसिंग सीन दे डाले.

ऐसे में अपनेआप को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए तथा नई फिल्म पाने के लिए कुछ तो शिगूफा छोड़ना ही पड़ेगा.

प्रियंका की किरकिरी

इंटरनैशनल स्टारडम का लुत्फ उठा रहीं प्रियंका चोपड़ा ने एक मैगजीन के कवर पर कुछ ऐसा पहन लिया जिस ने उन की नींद हराम कर दी है. कवर पर छपी तसवीर में उन्होंने जो टीशर्ट पहनी है, उस पर रिफ्यूजी, इमिग्रेंट और ट्रैवलर लिखा है और ट्रैवलर  पर राइट मार्क लगा है जबकि शेष टैक्स्ट को क्रौस किया गया है. तसवीर में शरणार्थियों, प्रवासियों और विदेशियों के प्रति असंवेदनशीलता के चलते उन की आलोचना हो रही है.कइयों को यह प्रचार आपत्तिजनक लग रहा है और वे सीरिया शरणार्थी समस्या व विस्थापित लोगों का हवाला दे कर उन्हें जम कर कोस रहे हैं.   

इस बीच, पत्रिका ने सफाई में हालांकि कहा कि उस ने कवर में प्रवासी, विदेशियों और रिफ्यूजी से भेदभाव न करने और उन के प्रति घृणा नहीं रखने के संदेश की बात की है. लेकिन तब तक प्रियंका की जितनी किरकिरी होनी थी, हो गई. प्रियंका ने जरूर चुप्पी साध रखी है इस मसले पर.

अफवाहों के सहारे दीपिका

किसी ने कहा था कि अफवाहों के बल पर अभिनय कैरियर की नैया पार नहीं की जा सकती. मगर बेचारी दीपिका पादुकोण को तो महज अफवाहों का ही सहारा है. पर अफसोस की बात यह है कि दीपिका पादुकोण अपने प्रचारक या अपने बिजनैस मैनेजर अथवा अपने किसी शुभचिंतक की सलाह पर जो भी अफवाहरूपी गुब्बारा उड़ाती हैं, उस की हवा 2 दिनों में ही निकल जाती है और उन का दांव हर बार खाली जाता है.

फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ के बाद से दीपिका के कैरियर पर काला साया छाया हुआ है. इस साए से छुटकारा पाने के लिए प्रयासरत हैं. आएदिन वे किसी न किसी तरह की खबर को फैला या अफवाह उड़ा कर खुद को सुर्खियों में रखने का प्रयास कर रही हैं. अफसोस यही है कि उन की सारी खबरें या अफवाहें ज्यादा समय तक टिक नहीं पातीं. इतना ही नहीं, इस तरह खुद को सुर्खियों में बनाए रखने के बावजूद उन्हें फिल्म नहीं मिल पा रही है.

नील की सगाई

अभिनेत्रियों की तरह अब अभिनेता भी कैरियर की थमी गाड़ी देख घर बसाने का काम पूरा कर ले रहे हैं जो एक लिहाज से ठीक भी है. अब हर कोई सलमान खान नहीं हो सकता न. हाल में अभिनेता नील नितिन मुकेश ने मुंबई की रुक्मिणी सहाय से सगाई की है. और अगले साल शादी कर लेंगे.

मुंबई में हुए बेहद निजी समारोह में नील ने किसी फिल्मी सितारे को बुलाने के बजाय परिवार को ही अहमियत दी और सगाई कार्यक्रम को बिना वजह का पेजथ्री इवैंट नहीं बनने दिया. उन की होने वाली पत्नी रुक्मिणी एविएशन इंडस्ट्री से जुड़ी हैं.

खास बात यह है कि नील के लिए लड़की पसंद करने का काम उन के घर वालों ने किया है. यानी मामला अरेंज्ड है. वैसे, बौलीवुड में बहुत कम फिल्मी कलाकार ही अरेंज्ड मैरिज करते हैं. इस से पहले शहिद कपूर और मीरा राजपूत की अरेंज्ड मैरिज हुई थी.

सोशल मीडिया और कामचोरी

जब से सोशल मीडिया का क्रेज लोगों के सिर चढ़ा है और इंटरनैट के टैरिफ सस्ते हुए हैं, उन के आलस और कामचोरी में इजाफा हुआ है. ऐसा मानना है अभिनेत्री कंगना रानौत का. वे हमेशा से ही डिजिटल प्लेटफार्मों से दूरी बना कर रखती हैं क्योंकि उन्हें लगता है जिंदगी में सोशल मीडिया की घुसपैठ ने उन्हें सुस्त बना दिया है. वे कहती हैं कि सोशल मीडिया में बातों को नकारात्मक बना कर पेश किया जाता है. इस के अलावा सोशल मीडिया के चलते लोग अपनों के लिए भी वक्त नहीं निकाल पाते. सब स्मार्टफोन्स में बिजी हैं. इस की लत हमें बहाने बनाने पर मजबूर करती है. बात बिलकुल सही है. इस की लत अकर्मण्य और आलसी बना रही है. इस से एक जरूरी दूरी रखने में ही भलाई है.

फिलहाल कंगना अभिनेता सैफ अली खान व शाहिद कपूर के साथ विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘रंगनू’ की शूटिंग में व्यस्त हैं.  

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