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VIDEO: क्या आपने देखा मौनी का ये हॉट और बोल्ड अवतार

टीवी शो 'नागिन' में लीड रोल कर रहीं मौनी रॉय ने बॉलीवुड फिल्म 'तुम बिन 2' में आइटम सॉन्ग किया है. हाल ही में उनका ये गाना 'नाच अउंदा नहीं' रिलीज हो गया है. जिस में उनका बेहद बोल्ड अवतार देखने को मिल रहा है.

इस गाने की शूटिंग मुंबई में हुई है. इस गाने को गायक हार्डी संधु, नेहा कक्कड़ और रफ्तार सिंह ने गाया है, जबकि रेमो डिसूजा इसके कोरियोग्राफर हैं. गाने में मौनी रॉय के साथ बॉलीवुड एक्ट्रैस नेहा शर्मा का भी बेहद हॉट और बोल्ड अवतार देखने को मिला है.

आप भी देखिए इस गाने का ये वीडियो.

 

गुजरात में दलित दमन

गुजरात ही वह राज्य रहा है, जहां विकास की नहीं दलितों पर होने वाले जुल्मों की कहानियां लिखी जा रही हैं. दलितों के साथ गुजरात में सदियों से बुरा बरताव होता रहा है और तभी वहां बहुत समय तक अछूत लोग इसलाम को अपनाते रहे. चाहे धर्म बदलने के बाद भी उन का काम न बदला हो, पर चूंकि गुजरात लंबे समय तक मुसलिम शासकों के हाथों में था, वे अपनेआप को थोड़ा बचे रहना समझते थे. यह उन की भूल थी, क्योंकि मराठों का राज आने के बाद हालात फिर वैसे ही हो गए और अंगरेजों के समय सुधरे नहीं. महात्मा गांधी का हरिजन प्यार भी दलितों को कोई खास जगह नहीं दिला सका. हिंदू जनता को खुश करने के लिए अकसर ये दलित ही मुसलिमों के साथ झगड़ा करते थे, पर पौराणिक हिंदू की सोच सदियों से नहीं बदली. ऊना में दलित युवकों के साथ जो हुआ, वह हिंदू पौराणिक सोच के हिसाब से उन के पापों का फल है.

भारतीय जनता पार्टी और उस से पहले कांग्रेस भी दलितों को दूर ही रखती रही है. अब चूंकि गौरक्षा का हथियार मिल गया है, दलितों की फटकार का बहाना मिल गया है, क्योंकि हिंदू मानी जाने वाली कुछ दलित जातियां ही चमड़े का काम करती हैं. यह अब भाजपा को महंगा पड़ सकता?है. एक तरफ पाटीदार समझने लगे हैं कि कट्टर हिंदुओं के लिए केवल ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य हिंदू हैं, पिछड़े, किसान, पटेल नहीं. वहीं दूसरी तरफ दलितों को अब समझ आ गया है कि सदियों से उन का इस्तेमाल हो रहा है, मुसलिमों व दूसरों से झगड़ा करने में. 2002 के दंगों में मारपीट में ऊंची जातियां आगे नहीं थीं, उन्होंने तो अपने से नीचों को भड़काया था.

हार्दिक पटेल पाटीदारों का और जिग्नेश मेवाणी दलितों के नेता बन कर उभरे हैं और उन्होंने ऊंची जातियों के दबदबे और जुल्मी बरताव के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. अब सरकार को एहसास होने लगा है कि उन्हें गिरफ्तार करने से फायदा न होगा. हार्दिक पटेल 8 महीने बंद रहा, पर पाटीदार आंदोलन चलता रहा. जिग्नेश मेवाणी को इसीलिए केवल एक दिन के लिए बंद किया गया, जब नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन पर अहमदाबाद गए.

दलितोंपिछड़ों के बिना इस देश का विकास संभव नहीं है. ऊंची जातियां बातें बना सकती हैं, काम नहीं कर सकतीं. जमीनी काम तो यही जातियां करेंगी और अब इन्हें पिछले जन्म के पापों का हवाला दे कर झांसे में नहीं रखा जा सकता. पहले इन के नेता पढ़ेलिखे, समझदार, पर ऊंची जातियों के होते थे, पर अब इन्हीं में से निकलने लगे हैं और सैकड़ों कांशीराम पैदा होने लगे हैं. गुजरात में यह शुरुआत इसलिए हुई है, क्योंकि वहां का दलित दूसरों से ज्यादा समझदार है और उसे बहकाना या डराना आसान नहीं. अगले कुछ सालों में सामाजिक बदलाव की आंधी आने लगे, तो कोई अचरज न होगा.

मुझे पीरियड्स के बाद हलका गाढ़ा सफेद पानी जैसा डिस्चार्ज होता था. मैं किस तरह का इलाज करा सकती हूं.

सवाल

मेरी उम्र 34 वर्ष है. मेरा एक 5 साल का बेटा भी है. मुझे पीरियड्स के बाद हलका गाढ़ा सफेद पानी जैसा डिस्चार्ज होता था. बारबार पेशाब के लिए जाना पड़ता था. डाक्टर को दिखाने पर पता चला कि चावल के दाने बराबर पथरी की शिकायत है, जिस का इलाज चल रहा है. इस के ठीक होने के बाद मैं दोबारा मां बनना चाहती हूं. लेकिन जब मेरा बेटा डेढ़ साल का था तब मैं ने गर्भपात करा लिया था. तभी से गर्भधारण नहीं हुआ. मैं जल्द दूसरा बच्चा चाहती हूं. दोबारा मां बनने के लिए मैं किस तरह का इलाज करा सकती हूं? मेरा पहला बच्चा औपरेशन से हुआ था.

जवाब

आप अभी गर्भधारण कर सकती हैं. लेकिन बेहतर होगा कि पहले पथरी निकल जाए ताकि सुरक्षित गर्भधारण हो सके. हो सकता है कि आप की फैलोपियन ट्यूब ब्लौक हो गई हो. जिस की वजह से आप गर्भपात के बाद गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं. इसलिए आप को एक एक्सरे, जिसे एचएसजी कहते हैं, कराना चाहिए. इस से पता चल जाएगा कि आप को लैप्रोस्कोपी की जरूरत है या आईवीएफ की.

अपने पति के सीमन की भी जांच करवाएं. यदि रिपोर्ट सामान्य है व आप की फैलोपियन ट्यूब पेटैंट है तो इंट्रायूट्रीन इंसेमिनेशन करवा सकती हैं. इस को करवाने में ज्यादा खर्च नहीं आता. 3 से 6 साइकिल में यह पूरा हो जाता है. यदि आईयूआई टैस्ट फेल हो जाए तब आप आईवीएफ की तरफ जा सकती हैं और एक खास बात कि आप अपना इलाज किसी अच्छे फर्टिलिटी सैंटर में ही करवाएं.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

अपने पति की किस बात से परेशान होती हैं विद्या बालन

फिल्मों में सशक्त नारी पात्र निभाने के अलावा नारी सशक्तिकरण के लिए कार्यरत अभिनेत्री विद्या बालन की शादी के चार वर्ष दिसंबर में पूरे होने जा रहे हैं, पर उन्हे लगता है कि अभी कल ही उनकी शादी हुई थी. वह एक पत्नी बनकर बहुत आनंद की अनुभूति कर रही हैं, मगर उन्हे भी अपने पति की एक आदत परेशान करती है. उन्होंने यह बात खुद हमसे बात करते हुए कबूल की.

विद्या बालन ने अपने पति सिद्धार्थ राय कपूर की इस इरीटेट करने वाली आदत का जिक्र करते हुए कहा-‘‘मैं उनकी एक बात आज तक नही समझ पायी. शादी के पहले दिन से आज तक वह हर दिन सुबह 6.45 को उठ जाते हैं. फिर चाहे जो हो जाए. हमारे घर पर सभी पेपर आते है. वह सुबह 6.45 पर उठकर सभी अखबार पढ़ते हैं. छुट्टी का दिन हो तो भी वह सुबह 6.45 बजे उठकर अखबार पढ़ेंगे, उसके बाद भले ही वह दोबारा सो जाएं. मैं उनसे कहती हूं कि यदि आप सुबह पौने सात बजे नहीं उठेंगे, तो क्या दुनिया रुक जाएगी? मैं हमेशा कहती हूं कि आपने सुबह सुबह अखबार नहीं पढ़ा, तो क्या दुनिया रुक जाएगी. पर मेरी इस बात का उन पर असर नही होता. उनकी यही बात मुझे इरीटेट करती है.’’

फिल्म अवार्ड को लेकर क्या बोले अर्जुन रामपाल

हमारे देश में हर वर्ष करीबन पचास से अधिक फिल्म अवार्ड समारोह होते हैं, जिनमें कई कलाकार शिरकत करते हैं. यह कलाकार अवार्ड समारोह में पहुंचे लोगों का नाच गा कर मनोरंजन करते हैं और फिर अपना अवार्ड लेकर अपने घर चले जाते हैं. दूसरे दिन से यह कलाकार प्रचारित करना शुरू करते हैं कि उन्हे ‘फलां अवार्ड’ मिला. मगर बौलीवुड में आमिर खान, अजय देवगन, कंगना रानौट सहित कुछ कलाकार शुरू से ही इन फिल्म अवार्ड समारोहों का बहिष्कार करने, अवार्ड लेने से इंकार करने के अलावा इनकी आलोचना करते आए हैं.

मगर कल तक लगभग हर अवार्ड समारोह का हिस्सा बनते आए अभिनेता अर्जुन रामपाल ने भी अंततः अब इन अवार्डों के खिलाफ बयान दे ही डाला. अर्जुन रामपाल ने अपनी आगामी फिल्म ‘‘राक आन 2’’ का प्रमोशन करते हुए अचानक फिल्म अवार्ड पर बयान देते हुए कहा-‘‘हमारे देश के सभी फिल्म अवार्ड बेमानी हो गए हैं.’’ पर अब बौलीवुड से जुडे कुछ लोग अर्जुन रामपाल से सवाल कर रहे हैं कि उन्हे यब बात समझने में इतना वक्त क्यों लग गया?

विद्या बालन को कौन सी बात बुरी लगती थी

विद्या बालन एक संजीदा अदाकारा ही नहीं बल्कि संजीदा इंसान भी हैं. आज की तारीख में भले ही उन्हे एक बेहतरीन अदाकारा माना जाता है, मगर उनकी अभिनय जिंदगी की शुरुआत मुंबई के पृथ्वी थिएटर से ही शुरू हुई थी. इन दिनों वह सुज्वाय घोष निर्देशित फिल्म ‘‘कहानी 2-दुर्गा रानी सिंह’’ को लेकर चर्चा में हैं, मगर वह तीन नवंबर को ‘पृथ्वी थिएटर फेस्टिवल’ में नाटक ‘‘चलती का नाम गाड़ी’’ देखने पहुंची, तो उन्हे आनंद की अनुभूति हुई. विद्या बालन ने बाकायदा ट्वीट कर इस नाटक की प्रशंसा की और लोगों से कहा कि वह भी इस नाटक को जाकर देखे.

मगर बहुत कम लोगों को पता है कि इस बार ‘‘पृथ्वी थिएटर फेस्टिवल’’ में जाकर उन्होंने उस कमी को पूरी किया, जिसको लेकर उन्हे बड़ा बुरा लगता था. खुद विद्या बालन ने इस बारे में ‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए कहा-‘‘हर वर्ष जब भी पृथ्वी थिएटर फेस्टिवल होता था, तो मैं जा नहीं पाती थी. मुंबई में होते हुए भी शूटिंग की वजह से या अन्य वजह से व्यस्त रहती थी. इस वर्ष मैंने पहले ही निर्णय कर लिया था कि इस बार तीन नवंबर को मैं पृथ्वी थिएटर नाटक देखने जरुर जाऊंगी. मैं पृथ्वी थिएटर से पांच मिनट की दूरी पर रहती हूं, पर नाटक देखने नहीं जा पाती थी, तो मुझे अंदर से बुरा लगता था. इस बार गयी तो आनंद आया. मैंने एक नाटक ‘चलती का नाम गाड़ी’ देखा. नसिरूदद्दीन शाह, नादिरा बब्बर, रत्ना पाठक शाह सहित कई दिग्गज रंगकर्मियों को मंच पर देखा. संजना कपूर से मुलाकात हुई. अच्छा लगा. वास्तव में मैं करियर की बात नहीं कर रही हूं, मगर मेरे अभिनय की जो जिंदगी है, वह पृथ्वी थिएटर से ही शुरू हुई थी. जब मेरी उम्र 15 वर्ष की थी, तब मैंने पहली बार पृथ्वी थिएटर पर एक वर्कशाप किया था. तब से पृथ्वी थिएटर मेरी जिंदगी का एक हिस्सा हैं.’’

जब हमने उनसे पूछा कि यह  अभिनय का वर्कशाप था या..? तो विद्या बालन ने कहा-‘‘यह बच्चों के लिए अभिनय का वर्कशाप था. हम लोग वहां रिहर्सल करते थे. कुछ कसरतें भी कर लेते थे. वर्कशाप के अंत में हम लोगों ने एक नाटक किया था. जिसका मैंने निर्माण किया था, उसमें अभिनय भी किया था. जिसके दो तीन शो हुए थे. चीत्री खानवलकर जी हमारे वर्कशाप के गुरू थे. उसके बाद मैंने थिएटर कभी किया नहीं, पर मैं नाटक देखती रही हूं.’’

फरहान अख्तर : कथनी और करनी का अंतर

11 नवंबर को प्रदर्शित हो रही अपनी फिल्म ‘‘राक आन 2’’ के संदर्भ में फरहान अख्तर का कहना है कि यह फिल्म हर इंसान को एक संदेश देती है कि, ‘जो भी प्राब्लम है लाइफ में, उससे लड़ने के लिए आपको पहले खुद के अंदर की स्ट्रेंथ को जगाना जरुरी है.’ वाह ! संदेश तो बहुत अच्छा है..अब यदि इसी संदेश के आधार पर फरहान अख्तर की की कार्यशैली पर नजर दौड़ायी जाए, तो एक ही सवाल उठता है कि खुद फरहान अख्तर यह जो संदेश फिल्म के माध्यम से हर किसी को दे रहे हैं, उसे अपनी जिंदगी में अमल में क्यों नहीं लाते हैं?

क्या वह अपने अंदर की ताकत को जगाने में बुरी तरह से असफल हैं. क्योंकि वह अपने मित्र रितेष सिद्धवानी के साथ जिस फिल्म निर्माण कंपनी ‘‘एक्सेल इंटरटेनमेट’’ को चला रहे हैं, जिस कंपनी ने ‘राक आन 2’ और ‘रईस’ जैसी फिल्म बनायी हैं, उसी कंपनी ने हाल ही में करीबन तीन फिल्मों का निर्माण स्थगित कर दिया है.

खरीद रहे हैं सेकंड हैंड स्मार्टफोन तो…

सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीदना जेब के लिए फायदेमंद रहता है. मगर जब भी सेकंड हैंड फोन खरीदने की सोचें, कुछ बातों का ध्यान रखें. इससे न सिर्फ आप अच्छा फोन खरीद पाएंगे, बल्कि अन्य तरह की मुश्किलों से भी बच सकेंगे.

कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीदते वक्त..

बिल, बॉक्स और अक्सेसरीज मांगें

बिल मांगकर आप यह क्लियर कर सकते हैं कि फोन बेचने वाला आपको चोरी की डिवाइस नहीं दे रहा है. बिल है तो आगे भी इस फोन को बेचने या रिप्लेस करने में आसानी होती है. फिर अगर आप वेरिफिकेशन करना चाहें तो बॉक्स पर आपको IMEI नंबर भी मिल जाता है. अगर आपको ऑरिजनल अक्सेसरी नहीं मिली है तो आप बेचने वाले को और पैसे कम करने के लिए भी कह सकते हैं.

चेक करें, कहीं चोरी का न हो फोन

कई बार सेकंड हैंड फोन बेचने वाले आपको चोरी का फोन बेच देते हैं. अगर ऐसा हो तो उन्हें फोन का बॉक्स देने के लिए कहें. किसी चोर ने बॉक्स के साथ फोन चोरी किया हो इसके चांस कम ही होते हैं. अगर बॉक्स नहीं हो तो *#06# डायल कर फोन का IMEI नंबर चेक करें.

इसके बाद इस नंबर को IMEIdetective.com जैसे वेबसाइट्स पर चेक करें. अगर डिवाइस चोरी का हुआ और उसके मालिक ने उसका नंबर ट्रैकिंग के लिए डाला हुआ तो आप चोरी का फोन खरीदने से बच जाएंगे.

जरूर देखें रैम और प्रोसेसर

अब तो 10,000 रुपये से नीचे भी 2जीबी रैम वाले फोन मिलने लगे हैं. इसलिए जरूरी है कि जो भी यूज किया हुआ फोन आप खरीदने जा रहे हैं उसमें कम से कम 2 जीबी रैम हो. लेकिन अगर आपका बजट ही 5000 से 6000 रुपये है तो 1 जीबी रैम वाला फोन ही मिल सकेगा.

फोन का प्रोसेसर भी चेक करें. मीडियाटेक प्रोसेसर करीब सालभर पुराने हो गए हैं और इन प्रोसेसर के साथ आने वाले फोन अच्छी परफॉर्मेंस नहीं देते. क्वॉलकॉम स्नैपड्रैगन चिप वाला सेकंड हैंड स्मार्टफोन ढूंढें, वह लंबा चलेगा. इंटेल पावर्ड स्मार्टफोन्स भी अच्छे रहेंगे, लेकिन बैटरी के मामले में दिक्कत हो सकती है.

हार्डवेयर चेक करें

फोन की बॉडी पर ज्यादा निशान हैं या नहीं, स्क्रीन ठीक है या नहीं, यह तो आप देखेंगे ही, लेकिन जरूरत है थोड़ा और ध्यान देने की. अगर आप खुद फोन खरीदने जा रहे हैं तो लैपटॉप और एक यूएसबी केबल लेकर जाएं. लैपटॉप को स्मार्टफोन से कनेक्ट करें और देखें कि वह ठीक से चार्ज हो रहा है या नहीं.

यह भी देखें कि डेटा ट्रांसफर करने में कोई दिक्कत तो नहीं आ रही. अपना सिम कार्ड डालकर देखें कि नेटवर्क कैच कर रहा है या नहीं. वेब सर्फिंग करें, कुछ ऐप डाउनलोड करें, फोटो खींचकर कैमरा भी टेस्ट कर लें. हर तरह से दुरुसत होन पर ही खरीदें.

सिक्यॉर तरीके से पेमेंट करें

अगर आप ऑनलाइन फोन खरीद रहे हैं तो पेमेंट हमेशा सिक्यॉर चैनल से ही करें. इससे आपको फोन लौटाने पर पैसा आसानी से वापस मिल जाएगा.

फेसबुक पर खरीदें

इन दिनों चीजें खरीदने-बेचने के लिए फेसबुक बढ़िया जगह बन गया है. यहां आपको फोन बेचने वाले का प्रोफाइल देखने को मिल जाता है (कम से कम एक हद तक). आप उस ग्रुप में उनकी ऐक्टिविटी देख सकते हैं जहां वे चीजें बेच रहे हैं और उसी स्मार्टफोन के लिए दूसरे कितना ऑफर कर सकते हैं, यह भी देख सकते हैं. अगर आपका अनुभव खराब रहा हो तो आप दूसरों को उसके बारे में बताकर उन्हें उस सेलर का शिकार बनने से भी बचा सकते हैं.

फोन वॉरंटी में हो तो अच्छा रहेगा

कई बार खरीदार अपने फोन को हैंडसेट खरीदने के तुरंत बाद अपग्रेड कर लेते हैं. कई बार तो कुछ ही महीनों में अपग्रेड कर लेते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि उन हैंडसेट्स पर ऑफिशल वॉरंटी अभी भी लागू हो सकती है. इससे आपको बहुत फायदा होगा.

इसलिए ऐसे बेचने वालों को ढूंढें जो थोड़ी-बहुत ही सही, वॉरंटी के साथ फोन बेच रहे हों. थर्ड पार्टी वॉरंटी वाले फोन पर भी नजर रखें, इससे कुछ तो डैमेज प्रोटेक्शन मिलेगी ही. कुछ भी न मिलने से तो यह बेहतर है.

क्या आपके अकाउंट से भी पैसे होते हैं हैक

पिछले कुछ समय से देश में बहुत सारे लोग ऑनलाइन शॉपिंग करने लगे हैं. फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन जैसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों ने सेल के जो आंकड़े दिए हैं, वे बताते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग भारत में हिट हो रही है.

शॉपिंग के अलावा ऑनलाइन बैंकिंग और बिल पेमेंट जैसे कई काम किए जाते हैं. इससे सुविधा तो होती है, मगर हैकर्स का खतरा भी बना रहता है. पिछले दिनों एसबीआई, यस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और ऐक्सिस बैंक जैसे बड़े बैंक भी हैकिंग से प्रभावित हो गए.

हैकर्स से बचना है तो यह पता होना चाहिए कि वे आपका पैसा चुराते किस तरह से हैं. अगर आपको उनके तौर-तरीकों का पता होगा तो आप सावधान रह सकते हैं. जानें, किन 6 ट्रिक्स से वे फर्जीवाड़ा करते हैं.

फार्मिंग (Pharming)

इस तकनीक के तहत धोखाधड़ी करने वाले आपको नकली वेबसाइट पर ले जाते हैं, जो देखने में एकदम असली लगेगी. जैसे ही आप ट्रांजैक्शन करने के लिए अपन नेटबैंकिंग या कार्ड की डीटेल्स डालेंगे, उसे हैकर्स चुरा लेंगे और बाद में मिसयूज करेंगे.

कीस्ट्रोक लॉगिंग (Keystroke logging)

आप गलती से कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर लेते हैं, जो चुपके से आपकी जानकारियां (नेटबैंकिंग के पासवर्ड और कार्ड की डीलेट्स आदि) हैकर्स को भेजता रहता है.

मालवेयर ( Malware)

हैकर्स ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार करते हैं जो एटीएम या बैंक सर्वर्स के कंप्यूटर सिस्टम को डैमेज कर देते हैं. इससे वे गोपनीय जानकारियां हासिल कर लेते हैं.

फिशिंग और विशिंग (Phishing & Vishing)

फिशिंग में स्पैम मेल के जरिए बेवकूफ बनाया जाता है. आपको लगेगा कि ईमेल असली सोर्स से आई है, मगर वह हैकर्स द्वारा भेजी गई होती है. इसी तरह से मोबाइल फोन के मेसेज या SMS के जरिए ऐसा करने को विशिंग कहा जाता है. इस तरीके से आपको बातों में फंसाकर आपका पासवर्ड, पिन या अकाउंट नंबर हासिल कर लिया जाता है.

सिम बदलना (SIM swipe fraud)

इस तरीके से धोखाधड़ी करने वाले लोग आपके फर्डी आईडी प्रूफ की मदद से आपके मोबाइल ऑपरेटर से ड्यूप्लिकेट सिम कार्ड हासिल कर लेते हैं. ऑपरेटर आपके असली सिम को डीऐक्टिवेट कर देता है और ठग आपके नंबर पर वन टाइम पासवर्ड (OTP) जेनरेट करके भारी-भरकम ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस कर लेता है.

अनसेफ ऐप्स (Unsafe apps)

जेनुइन ऐप स्टोर्स के अलावा किसी वेबसाइट वगैरह से ऐप डाउनलोड करना खतरनाक होता है. ऐसे ऐप्स भी कई बार डाउनलोड हो जाते हैं, जो आपके फोन से पासवर्ड वगैरह चुराकर हैकर्स को भेज देते हैं. इन डीटेल्स की मदद से वे गलत ट्रांजैक्शंस को अंजाम दे देते हैं.

स्मार्ट बल्ब से होगा अगला साइबर अटैक

बहुत सारी कंपनियां अपने प्रॉडक्ट्स में इंटरनेट कनेक्टिविटी दे रही हैं, ताकि वे एक-दूसरे से 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स' के जरिए कम्यूनिकेट कर सकें. इससे यूजर्स को भी इन डिवाइसेज को अपने कंप्यूटर या स्मार्टफोन से कंट्रोल करने की सुविधा मिल जाती है. मगर ताजा रिसर्च में सामने आया है कि वायरलेस स्मार्ट टेक्नॉलजी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है. स्मार्ट लॉक्स से लेकर स्मार्ट लैंप तक हैक किए जा सकते हैं. हैकर्स LED लाइट को हैक करके तो रोशनी का ऐसा झिलमिलाता हुआ पैटर्न सेट कर सकते हैं कि लोगों को मिरगी के दौरे तक पड़ सकते हैं.

रिसर्चर्स ने एक रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने वायरलेस टेक्नॉलजी में एक खामी का पता लगाया है. लाइट, स्विच, लॉक और थर्मोस्टैट जैसे 'स्मार्ट होम' वाले डिवाइसेज इस खामी की वजह से हैक किए जा सकते हैं. इजरायल के तेल अवीव के पास स्थित वीज़मन इंस्टिट्यूट ऑफ सायंस और कनाडा के हैलीफैक्स की डलहौजी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने इस खामी का पता लगाया है.

रिसर्चर्स ने फिलिप्स ह्यू स्मार्ट लाइट बल्ब पर रिसर्च का फोकस रखा. उन्होंने पाया कि एक खामी के चलते हैकर बल्बों को अपने कंट्रोल में ले सकते हैं. बेशक पहली नजर में यह बड़ी बात नहीं लगती, मगर हजारों इंटरनेट कनेक्टेड डिवाइसेज आसपास रखे हों तो हैकर्स द्वारा बनाए गए मैलवेयर से उन सभी में तुरंत फैल सकता है. एक ही जगह पर बहुत सारे वायरेलेस से जुड़े डिवाइसेज रखना हैकिंग के खतरे को बढ़ा सकता है. इससे हैकर्स को मैलवेयर वाले कोड को फैलाने में आसानी होती है.

रिसर्चर्स ने एक बिल्डिंग के अंदर स्थित नेटवर्क में बड़ी आसानी से मैलवेयर फैला दिया. उन्होंने बिल्डिंग से 229 फीट दूरी से कार ड्राइव की और उसी की मदद से यह काम किया. इससे 2 हफ्ते पहले कुछ हैकर्स ने अमेरिकी कंपनी Dyn के सर्वर्स पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक भेजकर इंटरनेट का ऐक्सेस कुछ देर के लिए ब्लॉक कर दिया था. यह कंपनी इंटरनेट के महत्वपूर्ण हिस्सों को मैनेज करती है. सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि हैकर्स ने इंटरनेट कनेक्टेड डिवाइसेज की बड़ी रेंज का कंट्रोल हासिल करके इस अटैक को अंजाम दिया था.

हैकर्स ने यह नहीं बताया है कि उन्होंने इस काम को कैसे अंजाम दिया. मगर वायरलेस कैमरे बनाने वाली चीन की एक कंपनी ने कहा कि हमारे प्रॉडक्ट्स के कमजोर पासवर्ड्स को भी इस अटैक के लिए कुछ हद तक जिम्मेदार माना जा सकता है.

हैक हुए डिवाइसेज के साथ हैकर्स क्या कर सकते हैं?

हैकर्स LED लाइट को ऐसे झिलमिलाते हुए पैटर्न में सेट कर सकते हैं कि लोगों को मिरगी के दौरे पड़ सकते हैं या फिर वे असहज हो सकते हैं. बेशक यह काल्पनिक सी बात लगती है मगर शोधकर्ताओं ने इसे साबित करके दिखाया है.

फिलिप्स ह्यू बल्ब के कलर और ब्राइटनेस को एक कंप्यूटर या स्मार्टफोन की मदद से कंट्रोल किया जा सकता है. रिसर्चर्स ने दिखाया कि कैसे एक बल्ब की मदद से कुछ ही मिनटों में अन्य नजदीकी बल्बों का कंट्रोल भी हासिल किया जा सकता है. वाइरस वाला सॉफ्टवेयर उन लाइट्स पर भी भेजा जा सकता है, जो किसी अन्य नेटवर्क पर हों.

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