उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजम खां का नाम फायर ब्रांड वक्ता के रूप में जाना जाता है. यह बात अपनी जगह पूरी तरह से सही है कि आजम खां जैसे साफ-साफ और मीठा बोलने वाले लोग राजनीति में गिने चुने हैं. आजम खां बहुत ही मीठे तरह से अपनी बात पूरी शालीनता से करते है. परेशानी की बात यह है कि वह दूसरे तमाम नेताओं की तरह चिकनी-चुपड़ी बातें नहीं कर पाते और सवाल होगा तो आजम खां का जबाव भी आयेगा. मीठे अंदाज में कही कड़वी बात हर बार ब्रेकिंग न्यूज का हिस्सा बन जाती है. यही वजह है कि उनको फायर ब्रांड नेता भी कहा जाता है.

समाजवादी पार्टी में आजम खां को अमर सिंह विरोधी खेमें का माना जाता है. सपा में अमर सिंह के आने के बाद आजम खां ने तय किया है कि वह विवादों से दूर रहेंगे. सच्चाई यह है कि आजम खां के बयानों से दूसरे लाभ में उठाते हैं और आजम खां को नुकसान सहना पड़ता है. अब आजम खां ने तय किया है कि वह विवादों से खुद को दूर रखेंगे.

सपा में परिवार विवाद के समय जहां तमाम नेता अलग-अलग खेमे में नजर आये वहां आजम खां तटस्थ बने रहे और उनकी कोशिश रही कि परिवार का विवाद खत्म हो जाये. पार्टी में वह ऐसे नेताओं में शामिल थे जो दोनो गुट के बीच विवाद को खत्म करने में लगे रहे. आजम खां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के ज्यादा करीब है. इसके बाद भी आजम खां शिवपाल यादव के बेहद करीब नजर आये. आजम की कोशिश रही कि मुलायम परिवार में दूरी नजर न आये.

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