Download App

‘बुलेट ट्रेन है मोदी की चुनावी ट्रेन, रेलवे सुरक्षा पर भी ध्यान दें पीएम’

कांग्रेस ने बुलेट ट्रेन की आधारशिला का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रेल में सफर करने वाले लोगों की चिंता करने की भी मांग की है. पार्टी का कहना है कि पिछले साल दुनिया में सबसे अधिक रेल दुर्घटनाएं भारत में हुई हैं. ऐसे में सरकार को रेलवे की सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने कहा कि रेल सुरक्षा के लिए एक लाख दस हजार करोड़ रुपये की जरुरत है. सरकार ने रेलवे को सिर्फ पांच हजार करोड़ रुपये दिए हैं. ऐसे में सरकार को रेलवे पर भी खर्च करना चाहिए.

खड़गे ने इसे चुनावी ट्रेन करार देते हुए कहा कि गुजरात चुनाव को ध्यान में रखते हुए इसकी शुरुआत की गई है. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने दिसंबर 2013 में व्यवहार्यता रिपोर्ट का काम सौंपा था. यह रिपोर्ट अगस्त 2015 में सरकार को मिल गई थी. प्रधानमंत्री ने गुजरात चुनाव में लाभ के लिए इसे जानबूझकर दो साल तक रोके रखा. पूर्व रेल मंत्री खड़गे ने कहा कि पिछले साढ़े तीन साल में प्रधानमंत्री ने खासतौर पर चुनावों के लिए बड़ी परियोजनाओं का इस्तेमाल किया है. पैकेज और परियोजनाओं की घोषणा हर चुनाव के पहले एक परिपाटी बन गई है.

रेल नेटवर्क बेहतर बनाने का प्रयास : मोदी

बुलेट ट्रेन परियोजना के शिलान्यास के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे में सुरक्षा एवं संरक्षा पर उठ रही चिंताओं पर कहा कि वर्तमान रेल व्यवस्था को सुधारने और आधुनिक तकनीक के जरिये नए रेल नेटवर्क के निर्माण दोनों पर बराबर ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हमने रेलवे ट्रैक, उसके दोहरीकरण और विद्युतीकरण के काम को भी तेजी से आगे बढ़ाया है और पहले से ज्यादा तेज गति से काम हो रहा है, जितना निवेश रेलवे में सरकार कर रही है, उतना इसके पहले कभी नहीं हुआ है.

चार राज्यों में इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनेंगी

भारत और जापान के बीच 12वें सालाना शिखर सम्मेलन के बाद गुरुवार को 15 समझौतों का ऐलान हुआ. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जापान के सहयोग से चार राज्यों में इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनाई जाएंगी. ये राज्य गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु हैं.

शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और अबे ने कारोबार, सुरक्षा और असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा बनाने पर चर्चा की. मोदी ने कहा कि भारत और जापान के रिश्ते द्विपक्षीय या क्षेत्रीय मसलों तक सीमित नहीं हैं, दोनों देश अंतरराष्ट्रीय विषयों पर भी गहरा सहयोग रखते हैं. दोनों नेताओं ने असैन्य परमाणु ऊर्जा करार को आगे बढ़ाने के लिए कार्यसमूह गठित करने का संकेत दिया है. नवंबर 2016 में इस समझौते पर दस्तखत हुए थे. उन्होंने बताया कि जापान ने साल 2016-17 में भारत में 4.7 अरब डॉलर का निवेश किया, जो पिछले साल की तुलना में 80 फीसदी ज्यादा है.

साझा बयान के अनुसार, दोनों देशों ने व्यापार-वाणिज्य समेत अन्य क्षेत्रों में संरक्षणवाद नीतियों का विरोध करने का फैसला किया. दोनों प्रधानमंत्रियों ने आईएमएफ, विश्व बैंक जैसे मंचों में निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायपूर्ण व्यवस्था कायम करने पर जोर दिया. गौरतलब है कि अमेरिकी सरकार जलवायु परिवर्तन समेत कई वैश्विक समझौतों को दरकिनार कर आगे बढ़ रही है. जापान ने 21 शक्तिशाली देशों वाले एपेक समूह में भारत की सदस्यता का समर्थन किया.

हिंद-प्रशांत महासागर में सहयोग बढ़ेगा

दोनों देशों ने चीन के बढ़ते दखल को देखते हुए हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने का फैसला किया. अबे ने मालाबार त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास का हवाला देते हुए कहा है कि जापान-भारत-अमेरिका सहयोग को और मजबूत किया जाएगा. दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागीरी देखते हुए दोनों देशों ने हिंद और प्रशांत महासागर में संप्रभुता, स्वतंत्र आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने का आह्वान किया.

भारत-जापान की दोस्ती चीन को संदेश

भारत और जापान के बीच प्रगाढ़ दोस्ती कूटनीतिक रिश्तों में मजबूती के साथ क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण साबित होगी. कूटनीतिक मामलों के जानकार जापान से भारत की बढ़ती नजदीकी को सामरिक, रणनीतिक और विकास की साझेदारी में फायदे के रूप में देख रहे हैं.

पूर्व विदेश सचिव शशांक ने कहा कि चीन के साथ उतार-चढ़ाव भरे रिश्तों के बीच जापान का भारत के निकट सहयोगी के रूप में उभरना पूरे एशिया क्षेत्र के लिए बेहतर साबित होगा. इससे क्षेत्र में संतुलन बनेगा. चीन जिस तरह से पूरे क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है, उस हिसाब से भारत और जापान का नजदीकी सहयोग संतुलन साधने का काम करेगा.

ऐसे बनेगा संतुलन

पूर्व विदेश सचिव ने कहा अगर जापान चाबहार परियोजना में भारत के साथ जुड़ता है तो यह मध्य एशिया के लिए भी बहुत अहम होगा. भारत ईरान और अफगानिस्तान के साथ चाबहार बंदरगाह को एक ट्रांजिट हब के रूप में विकसित करने के लिए समझौते पर विचार कर रहा है. इसका एक मकसद पाकिस्तान को किनारे कर मध्य एशिया तक पहुंच बनाना है. चाबहार बंदरगाह के विकास पर भारत 50 करोड़ डॉलर खर्च करने के वादे को पाक के ग्वादर में चीन की बंदरगाह परियोजना से संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर भारत और जापान अफ्रीका ग्रोथ गलियारे पर कदम आगे बढ़ाते हैं तो यह भी काफी अहम साबित होगा. इसे चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना का जवाब माना जा रहा है.

सामरिक सहयोग बढ़ेगा

कूटनीतिक विशेषज्ञ भारत और जापान के अलावा अमेरिका के साथ सामरिक गठजोड़ बनाने की कोशिश को भी एक नई शुरुआत के रूप में देख रहे हैं. हालांकि शशांक का कहना है कि भारत अमेरिका के लिए उस तरह से प्रॉक्सी का काम नहीं कर सकता जैसा पाकिस्तान उनके लिए करता रहा है इसलिए हमें इस लिहाज से थोड़ा हटकर देखना होगा.

विमान समझौते की उम्मीद

राजनयिक मामलों के जानकार जापान के साथ 12 शिनमायवा यूएस -2 एम्फीबियस (पानी में चलने और हवा में उड़ने) विमानों के प्रस्तावित सौदे से जुड़ी वार्ताओं पर भी निगाह जमाए हुए हैं. इसके तहत भारत को जापान से 12 विमान खरीदना है और इसके बाद 18 विमान भारत में मेक इन इंडिया तहत देश में बनाए जाने हैं.

हिन्दी सोशल नेटवर्क मूषक देगा ट्विटर को टक्कर

सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट ट्विटर के भारतीय विकल्प के तौर पर हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं में काम करने वाली सोशल मीडिया नेटर्विकग साइट ‘मूषक’ पेश की गई है. मूषक के संस्थापक अनुराग गौड़ ने बताया, मूषक एंड्राइड एप और वेबसाइट दोनों ही रूपों में इंटरनेट पर मौजूद है. स्मार्टफोन पर इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है तथा इसके अलावा कम्प्यूटर पर इसे गूगल सर्च में डब्लूडब्लूडब्लू डाट मूषक डाट इन के नाम से खोजा जा सकता है. यह सम्पूर्ण रूप से भारतीय और भारतीय युवाओं द्वारा तैयार किया गया है. यह देश का पहला स्वदेशी नेटवर्क है.’’ गौड़ ने कहा कि देश में अभी 2.5 लाख लोग मूषक का उपयोग कर रहे हैं तथा रोज हजारों लोग इससे जुड़ रहे हैं.

उन्होंने यह भी बताया कि जहां ट्विटर पर शब्दों की सीमा 140 शब्द हैं, वहीं हमने मूषक पर इसे 500 रखा है. कम्प्यूटर अथवा स्मार्टफोन पर हिन्दी टाइप करना रोमन लिपि पर आधारित है, इसलिए लोग हिन्दी लिखने से कतराते हैं. उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में बदलती तकनीक के साथ हिन्दी को लोगों से परिचित कराना होगा, ताकि लोग रोमन लिपि से पिछड़कर अपनी पहचान ना खो दें

फिलहाल मूषक हिन्दी के अलावा मराठी और गुजराती में उपलब्ध है. अंग्रेजी में यह उपलब्ध नहीं है. यह बाद में भारत की अन्य भाषाओं में भी लाया जाएगा. मूषक का उद्देश्य हिन्दी और देवनागरी को आज की पीढी के लिए सामयिक और प्रचलित करना है. इस सोशल नेटवर्किंग साइट पर हिन्दी भाषी रोमन में टाइप करने से वहीं तत्काल हिन्दी शब्द का विकल्प पा सकेंगे.

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मूषक के सीईओ ने कहा कि टिवटर, फेसबुक सरीखे सोशल नेटवर्किंग साइटस, जिसे हमारे नेताओं, अभिनेताओं और प्रतिष्ठित लोगों ने जोर-शोर से अपनाया है, वहां प्राथमिकता अंग्रेजी भाषा को दी जाती है और उसे ही देश की आवाज समझा जाता है. हिन्दी दोयम दर्जे की मानी जाती है. उन्होंने कहा कि मूषक द्वारा हम इस प्रक्रिया को सही मायनों में गणतांत्रिक बनाना चाहते हैं, जहां गण की आवाज गण की भाषा में ही उठे.

अब ‘एम-आधार’ के जरिए रेलयात्रा की फार्मेलिटी को पूरा कर सकेंगे आप

रेल मंत्रालय ने ट्रेनों में किसी भी रिजर्वेशन क्लास के यात्री के पहचान पत्र के तौर पर आधार कार्ड के डिजिटल ड्राफ्ट ‘एम-आधार’ को भी स्वीकार करने का फैसला किया है. रेल मंत्रालय ने कहा है कि यात्री चाहें तो अपने मोबाइल में ‘एम-आधार’ के जरिए भी सफर में आईडी दिखाने की फार्मेलिटी को पूरी कर सकते हैं. अब आपको सफर के दौरान आईडी (व्यक्ति पहचान पत्र) को साथ रखने की जरूरत नहीं है. आपके पास अपना मोबाइल तो रहता ही है, बस सफर के दौरान वही आपके आईडी की तरह काम करेगा.

गौरतलब है कि आज ही वित्त मंत्री ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि आधार से जुड़ा कानून पूरी तरह से संवैधानिक होगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पिछली केंद्र सरकार उस समय आधार की असल ताकत और उपयोगिता नहीं समझ पाई थी, जिस समय उसे लान्च किया गया था. तकनीकी रूप से आधार की तारीफ करते हुए जेटली ने कहा कि इसे कानूनी रूप से सशक्त बनाया जाना चाहिए था.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह जानकारी दी है कि सरकारी काम से लेकर टैक्स फाइल करने तक के लिए अब आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है. लेकिन कई लोग अभी भी ऐसे हैं जिनके पास आधार कार्ड नहीं है. ऐसे में वे सरकार के रुख को देखते हुए आधार कार्ड बनवा रहे हैं.

वहीं जिनके पास पहले से आधार है वे सरकार के हर नए आदेश के साथ उसे जरूरी दस्तावेजों के साथ लिंक करवा रहे हैं. लेकिन इस सब के बीच कहीं आप ठग तो नहीं लिए गए. कहीं आपने भी तो आधार पाने के लिए एनरोलमेंट सेंटर वाले को पैसे नहीं दिए? क्योंकि अगर आपने ऐसा किया है तो इसका मतलब ये है कि आप भी सेंटर वालों के जरिए ठग लिए गए हैं.

क्या है ‘एम-आधार’

आपको बता दें कि ‘एम-आधार’ आधार कार्ड का डिजिटल वर्जन है. ये एक मोबाइल ऐप है जो एंड्रायड प्लेटफार्म पर काम करता है. इसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने पेश किया है. इस ऐप में यूजर्स अपना नाम, जन्मदिन, लिंग, पते और फोटे के साथ आधार नंबर को जोड़ सकते हैं. फिर इस ऐप को आप आधार कार्ड की तरह ही रेल टिकट प्रूफ के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, इसे उसी मोबाइल नंबर के जरिए डाउनलोड किया जा सकता है जो आधार से जुड़ा हुआ है.

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आधार दिखाने के लिए यात्रियों को ऐप खोलना होगा और अपना पासवर्ड डालना होगा. भारतीय रेल की ट्रेनों में किसी भी रिजर्वेशन क्लास के डिब्बे में ‘एम -आधार’ को यात्री की पहचान के सबूत के तौर पर स्वीकार किया जाएगा.

औनलाइन काम करते वक्त रखें इन बातों का ध्यान

औनलाइन पैसे कमाने के कई तरीके हैं. आजकल घर पर रहते हुए भी हर महीने हजारों रुपए कमाए जा सकते हैं. ब्लागिंग से लेकर औनलाइन ट्यूशन देने जैसे कई तरीके हैं जिससे आप आसानी से पैसे कमा सकते हैं. पर काम जितना आसान लगता है उतना है नहीं, जरा सी असावधानी से आपको अपनी मेहनत की कमाई से हाथ धोना पड़ सकता है.

औनलाइन काम करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

फर्स्ट इंप्रेशन ही है लास्ट इंप्रेशन

चाहे आप किसी भी औनलाइन कार्य को करने के लिए प्रयास कर रहे हैं पर पहला प्रभाव अच्छा बनाना बहुत जरूरी है. अगर आपका पहला प्रभाव ही सही नहीं होगा तो कंपनी आपको काम पर नहीं रखेगी.

अगर आप ब्लागिंग या यूट्यूब चैनेल के जरिए पैसे कमाना चाहते हैं, तो कुछ अलग करने की सोचें. ध्यान रखें कि आपकी तरह सैंकड़ों लोग हैं जो अपनी किस्मत आजमाना चाह रहे हैं.

अपना कौशल दिखाएं

हो सकता है कि आप बहुत अच्छे लेखक या ग्राफिक डिजाइनर हों पर अगर आपको खुद को बेचना नहीं आता है तो आपका कौशल और टेलेंट को कोई महत्व नहीं देगा. आप बिना कुछ हासिल किए ही सालों बीता देंगे. इसलिए ये बहुत जरूरी है कि आप खुद को बेचने की कला विकसित करें.

पार्ट टाइम को भी वक्त देना जरूरी

आप अगर पार्ट टाइम में ही औनलाइन काम कर रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आप इसे दरकिनार कर दें. आपको अपने औनलाइन काम को भी जरूरत के अनुसार वक्त देना होगा. वक्त की कमी से आपका काम चौपट हो सकता है.

आर्थिक जरूरतों पर ध्यान दें

पहले तय करें कि आप ऐकस्ट्रा पैसे क्यों कमाना चाहते हैं. क्या आप यूं ही थोड़े से ज्यादा पैसे कमाना चाहते हैं या फिर आप किसी खास वजह से जल्द से जल्द ज्यादा पैसे कमाना चाहते हैं. जरूरत के हिसाब से ही आप अपने पार्ट टाइम काम में पैसे और समय लगाएं.

ईमानदारी है बहुत जरूरी

माना कि हम उस देश के वासी जिस देश में पैसा बोलता है. पर ईमानदारी बरतने से आपको नुकसान नहीं, उलटे फायदा होगा. अपने काम के प्रति ईमानदार रहें. किसे दूसरे के काम को खुद के नाम से प्रकाशित न करें. अगर आप घर पर काम कर रहे हैं यानि आपका कोई बौस नहीं है, अपनी मर्जी के मालिक हैं आप. पर इसका मतलब यह नहीं कि आप अपने काम से ही जी चुराने लगें. ध्यान रहे कि आप कुछ अतिरिक्त कमाई के लिए औनलाइन काम कर रहे हैं.

सबूतों के साथ फिर चुनाव आयोग जाएंगे शरद यादव

चुनाव आयोग द्वारा याचिका खारिज कर दिए जाने के बावजूद जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने दावा किया है कि उनके खेमे वाला जदयू ही असली है. जल्दी ही पूरे सबूतों के साथ वे चुनाव आयोग में जाएंगे. यादव ने कहा कि 17 सितंबर को दिल्ली में होने वाली कार्यकारिणी की बैठक में साफ हो जाएगा कि अधिकांश कार्यकारिणी के सदस्य उनके साथ है. राज्यसभा सदस्यता खत्म करने के मामले पर यादव ने कहा कि वे इस बारे में मिले नोटिस का कानूनी जबाब देंगे.

शरद यादव ने कहा है कि उनकी लड़ाई पद की नहीं, सिद्धांत और संविधान बचाने की है. उनके वकील चुनाव आयोग के संदेश व राज्यसभा सचिवालय से मिले नोटिस के सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं. उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची का उल्लंघन नहीं किया है.

राज्यसभा सदस्यता बचाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे पहाड़ से लड़ रहे हैं तो यह सोचकर तो लड़ ही रहे हैं कि चोट लगेगी ही. राज्यसभा सदस्यता बचानी छोटी बात है. उनकी लड़ाई पार्टी से आगे बढ़कर साझी विरासत को बचाने की है. सिद्धांतों का खातिर वे पहले भी दो बार संसद सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं.

पद से हटाए महासचिवों ने किया था दावा

यादव ने साफ किया कि चुनाव आयोग में उन्होंने नहीं बल्कि महासचिव पद से हटाए गए दो नेताओं ने दावा पेश किया था. वे इन महासचिवों के साथ हैं. जदयू के भविष्य के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका फैसला 17 सितंबर को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक व आठ अक्तूबर को राष्ट्रीय परिषद में हो जाएगा. जदयू बड़े रूप में सामने आएगा. जदयू खेमे ने कहा है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या 71 व परिषद के सदस्यों की संख्या लगभग 800 है. इनमें से चार राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों से आने वाले सदस्य उनके साथ हैं.

नीतीश ने खुद किया था गठबंधन

शरद यादव ने नीतीश कुमार की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनके मुख्यमंत्री मित्र ने खुद लालू यादव से मिलकर महागठबंधन बनाने की पहल की थी. लालू यादव इसके लिए तैयार नहीं थे. तब भी लालू यादव भ्रष्टाचार के आरोपों से बाहर नहीं थे. अब अचानक शुचिता की याद आ गई है और गठबंधन तोड़ दिया. यह बिहार से 11 करोड़ मतदाताओं के साथ धोखा है.

बढ़ानी है टाइपिंग स्पीड तो अपनाएं ये शार्टकट्स

आज के समय में ज्यादातर काम कंप्यूटर और लैपटाप पर किए जाते हैं. यही वजह है कि जब भी आप किसी नौकरी के लिए एप्लाई करते हैं तो आपसे ये उम्मीद की जाती है कि आपकी टाइपिंग स्पीड अच्छी हो. लेकिन आप यह सोच कर परेशान हो जाते हैं कि आपको टाइपिंग तो आती है लेकिन स्पीड नहीं है. घबराइए नहीं. यह कोई चिंता की बात नहीं है.

अंग्रेजी टाइपिंग बेहद आसान है लेकिन हिंदी टाइपिंग में आपको थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसा इसलिए क्योंकि हिंदी के कई फान्ट्स उपलब्ध हैं. हिंदी को कई अलग-अलग तरीके से टाइप किया जा सकता है. इसी कारण से हम आपको कुछ ऐसी टिप्स बताने जा रहे हैं जिनकी मदद से आप स्मार्टफोन और कंप्यूटर में आसानी से हिंदी टाइप कर पाएंगे.

स्मार्टफोन एप्स हैं मौजूद

गूगल प्ले या एप्पल स्टोर पर कई ऐसी एप्स मौजूद हैं जिनसे हिंदी टाइपिंग करना बेहद आसान है. यह सभी एप्स फ्री में डाउनलोड की जा सकती हैं. इन एप्स को फोन में इन्स्टाल करके इनमें दिए गए की-बोर्ड का यूज करना होता है. यहां यूजर्स हिंदी में टाइप कर पाएंगे. आपको बता दें कि कई एप्स में हिंदी टाइपिंग फीचर इन-बिल्ट होता है. इनमें से कुछ एप्स Google Indic Keyboard, Hindi Keyboard, Asan Hindi Keyboard हैं.

कम्प्यूटर पर कैसे करें हिंदी टाइपिंग

कंप्यूटर पर हिंदी टाइपिंग करने के लिए दो की-बोर्ड होते हैं. एक रेमिंगटन और दूसरा फोनेटिक. इन्हें आपको कंप्यूटर में इंस्टाल करना होता है. रेमिंगटन को क्रुतिदेव और फोनेटिक को मंगल के नाम से जाना जाता है.

फोन्ट ऐसे करें इन्स्टाल

सबसे पहले गूगल पर जाकर क्रुतिदेव और मंगल फान्ट को डाउनलोड करें. इसके बाद Control Panel में जाकर Fonts पर क्लिक करें. यहां से आप इन्हें इंस्टाल कर सकते हैं.

कैसे करें सेटिंग चेंज

ज्यादातर कंप्यूटर्स में मंगल फान्ट बाय डिफाल्ट दिया होता है. इसे लेंग्वेज सेटिंग में जाकर सेलेक्ट किया जा सकता है. इसके लिए आपको Control Panel में जाना होगा. फिर Regional and Language में जाकर Keyboards and Languages पर क्लिक करें. इसके बाद Change Keyboards और फिर Add पर क्लिक करें. अब हिंदी Hindi पर क्लिक कर Devanagari सेलेक्ट करें.

यहां हम आपको बताने जा रहे हैं टाइपिंग स्पीड बढ़ाने के कुछ ऐसे तरीके जिससे आप जल्द ही रफ्तार पकड़ लेंगे.

– अगर आप कंप्यूटर पर कुछ टाइप करना चाहते हैं और वो भी बिना कीबोर्ड देखें तो आपको कीबोर्ड के लेटर्स का ज्ञान होना बहुत ही जरूरी है क्योंकि जब तक ये पता नहीं होगा कि कीबोर्ड में कौन सा लेटर कहां है तब तक आपकी स्पीड नहीं बन सकती.

– अगला कदम सही तरीके से उंगलियों को कीबोर्ड पर रखने का है. सही तरीके से आपके दोनों हाथों की तर्जनी अंगुलियां F और J पर रखी होनी चाहिए ऐसा करने से बाकी सारी उंगलिया अपने आप सही जगह पड़ने लगेंगी.

– प्रैक्टिस से ही इंसान परफेक्ट बनता है इसलिए अगर आप कीबोर्ड के सभी लेटर्स को अच्छे से पहचान चुकें है तो अब बारी है रोजाना 1-2 घंटे प्रैक्टिस करने की.

– इसके अलावा भी कुछ जाने माने टाइपिंग साफ्टवेयर हैं (keybr.com, speedtypingonline.com, typingstudy.com) जिनकी मदद से आप आसानी से टाइपिंग स्पीड बढ़ा सकते हैं.

– आपको जानकर थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है लेकिन कई बार आपके बैठने का तरीका भी आपकी स्पीड पर असर डालता है. इसलिए टाइपिंग करते समय हमेशा पैरों को फर्श पर और अपनी कलाई को कीबोर्ड के संतुलन में रखना चाहिए.

पेट्रोल-डीजल के दाम रोज तय करने की व्यवस्था जारी रहेगी : प्रधान

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा है कि सरकार पेट्रोल और डीजल को भी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने पर विचार करेगी, ताकि इनके दाम में बहुत ज्यादा अंतर नहीं रहे. उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वर्तमान वृद्धि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में हुई वृद्धि का असर है. मंत्री ने कहा कि सुधार जारी रहेगा. हालांकि उन्होंने कीमतों की दैनिक समीक्षा में सरकारी हस्तक्षेप से इनकार किया.

ज्ञातव्य है कि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी से बाहर रखा गया है. पहले की तरह राज्य सरकारें इन पर वैट लगाती हैं, जिससे राज्य दर राज्य इनकी कीमतों में भारी अंतर देखने को मिलता है. इस साल 16 जून से देश भर में पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना तय किए जाते हैं.

देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी ऑयल इंडिया की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार इस साल 13 जुलाई के बाद से 61 दिन में पेट्रोल की कीमत एक बार भी कम नहीं की गई. पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 13 जुलाई को 63.91 रुपये थी जो बढ़कर 13 सितंबर को 70.38 रुपये प्रति लीटर पर पहुँच गई है.

डीजल में भी कमी नहीं

डीजल की कीमत 29 अगस्त के बाद से कम नहीं की गई है. राष्ट्रीय राजधानी में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंपों पर इसकी कीमत 13 सितंबर को 58.72 रुपये प्रति लीटर है जो 31 अगस्त 2014 (58.97 रुपये प्रति लीटर) के बाद का उच्चतम स्तर है. मंत्री ने कहा कि वह उपभोक्ताओं के हितों का पूरा ख्याल रखेंगे. उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम जल्द कम होंगे.

16 जून को दैनिक आधार पर कीमत समीक्षा के बाद एक पखवाड़े तक कीमतों में आई कमी की अनदेखी की गई और केवल अस्थाई तौर पर मूल्य वद्धि की प्रवृत्ति को जोर-शोर से उठाया जा रहा है. अमेरिका में चक्रवात जैसे कारणों से वैश्विक कीमतों में वृद्धि आई है और इसमें कीमत के संकेत पहले से दिख रहे हैं.      

– धर्मेन्द्र प्रधान, पेट्रोलियम मंत्री

अब पेटीएम देगा आपको 2 लाख तक का बीमा, ये है पूरी प्रक्रिया

पेटीएम की शाखा पेटीएम पेमेंट्स बैंक (पीपीबी) ने रूपे आधारित डिजिटल डेबिट कार्ड लाने के लिए नेशनल पेमेंट कारपोरेशन आफ इंडिया (एनपीसीआई) के साथ भागीदारी कर ली है. पीपीबी डिजिटल डेबिट कार्ड के जरिए ग्राहक उन सभी व्यापारियों को भुगतान करने में सक्षम होंगे जो क्रेडिट और डेबिट कार्ड स्वीकार करते हैं. इससे पेटीएम के ग्राहक औनलाइन भी भुगतान कर सकेंगे. इतना ही नहीं पेटीएम ने अपने ग्राहकों को फ्री बीमा का भी तोहफा दिया है. जिसमें ग्राहकों को दो लाख तक का कवर दिया जा रहा है.

पेटीएम पेमेंट्स बैंक में खाता खोलने वाले सभी ग्राहकों को रूपे आधारित डिजिटल डेबिट कार्ड जारी किया जाएगा. मौजूदा पेटीएम उपयोगकर्ताओं को पीपीबी का खाता धारक बनने के लिए केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करना होगा जिसके बाद उन्हें मुफ्त डिजिटल कार्ड जारी होगा.

मिलेगा दो लाख का बीमा

डेबिट कार्ड पर दो लाख रुपये का बीमा भी मिलेगा. मृत्यु या पूर्ण रूप से विकलांगता की स्थिति में ग्राहक को बीमा की राशि मिलेगी. पीपीबी की प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रेणु सत्ती ने बताया डिजिटल डेबिट कार्ड के साथ हमारे ग्राहक अब हर औनलाइन प्लेटफौर्म पर भुगतान करने में सक्षम होंगे और उन्हें उसी सुविधा का अनुभव होगा जो कि उन्हें पेटीएम प्रणाली में प्राप्त होता है.

आधार-पैन वेरिफिकेशन जरूरी

सभी भारतीय ग्राहक अब पेटीएम के पेमेंट बैंक में अपना खाता खोल सकते हैं और इसके फायदों से लाभ उठा सकते हैं. इसके लिए आपको पेटीएम का अपडेटेड वर्जन डाउनलोड करना होगा. पेटीएम के पेमेंट बैंक पर आपको सेविंग खातों पर 4 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा. ऐसे में किसी बैंक में खाता खोलने से अच्छा उपाय साबित होगा पेटीएम पर खाता खोलना. हालांकिा एयरटेल के पेमेंट बैंक पर आपको 7.5 फीसदी ब्याज दिया जा रहा है. पेटीएम का एक वेरिफाइड यूजर होने के लिए आपको अपने आधार कार्ड और पैन कार्ड को वेरिफाई करवाना होगा. यहां आपको बताते चलें कि जिन ग्राहकों का अकाउंट केवायसी द्वारा वेरिफाइड नहीं होगा उनके ऐप में पेमेंट बैंक नजर नहीं आएगा.

पेटीएम पेमेंट बैंक की शर्त

पेटीएम के पेमेंट बैंक में आप कम से कम जितना चाहें रुपया रख लें, यानी कि मिनिमन बैलेंस का कोई झंझट यहां नहीं है. वहीं दूसरी ओर अगर आप अधिक पैसे रखना चाहते हैं तो आपको सोचना होगा. पेटीएम के पेमेंट बैंक में आप अपने सेविंग खाते में सिर्फ एक लाख रुपए तक ही रख सकते हैं. यह भी बताया जा रहा है कि पेटीएम पेमेंट बैंक से आप पैसे भी ट्रांसफर कर सकेंगे जिसके लिए आपको कोई चार्ज नहीं देना होगा.

अपना बचत खाता खोलें

सबसे पहले आपको पेटीएम का वर्जन 6.0.0 इंस्टौल करना होगा. इसके बाद ऐप में लौगिन करें और प्रोफाइल सेक्शन में जाएं. यहां पर आपको माय सेविंग अकाउंट नाम का मेन्यू दिखेग  जिस पर क्लिक करें और बताए गए स्टेप फौलो करें. इतना करते ही आपको बचत खाता खुल जाएगा. इसके बाद आपको एक वर्चुअल पेटीएम पेमेंट बैंक रूपे कार्ड मिल जाएगा. आपका बैंक खाता आपका मोबाइल नंबर होगा.

बौलीवुड फिल्में हालातों से लड़ने का जज्बा पैदा करती हैं : प्रियंका चोपड़ा

भारत से हजारों मील दूर जार्डन में भी बौलीवुड कलाकारों के फैंस की कमी नहीं है और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि बौलीवुड फिल्में युद्धग्रस्त इस देश के लोगों में हालातों से लड़ने का जज्बा पैदा करती हैं. इसका अहसास अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को तब हुआ जब हाल ही में उन्होंने सीरिया के एक शरणार्थी शिविर में बच्चों के साथ कुछ वक्त बिताया.

प्रियंका ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बौलीवुड कलाकार और उनकी फिल्में इस विषम परिस्थिति में रह रहे इस देश के लोगों में जिंदा बचने की उम्मीद और हालात से लड़ने का जज्बा पैदा करती हैं. उन्होंने बताया कि यहां के बच्चे शाहरूख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार, करीना कूपर, कैटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा के प्रशंसक हैं.

प्रियंका ने इंस्टाग्राम पर एक किशोरी वफा का वीडियो भी साझा किया, जिसमें एक लड़की कैटरीना कैफ की प्रशंसा करती दिखाई दे रही है.

उन्होंने इस पोस्ट को कैटरीना को समर्पित करते हुए लिखा, ‘‘भारत के सबसे बड़े फिल्मी कलाकारों के लिए ये खास पेशकश. कैटरीना कैफ, जार्डन में जातारी शरणार्थी शिविर से यह वीडियो सिर्फ आपके लिये.’’

आपको बता दें कि एक्टिंग, सिंगिंग के अलावा प्रोडक्शन के क्षेत्र में अपनी अहम पहचान बना चुकीं बौलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा सोशल वर्क में भी सबसे अव्वल हैं. बिजी शेड्यूल से वक्त निकलकर वे कई सोशल प्रोग्राम्स का हिस्सा बनती हैं. पिछले 12 सालों से प्रियंका यूनिसेफ से जुड़ी हुई हैं और वह अभी जार्डन में हैं. रविवार को उन्होंने यूनिसेफ के ‘जार्डन कंट्री आफिस’ में बच्चों के साथ वक्त गुजारा, उनसे अरबी भाषा सीखी और बच्चों के साथ अलग-अलग खेल खेलती दिखीं. इसके अपडेंट्स प्रियंका चोपड़ा ने इंस्टाग्राम पर दिए.

देश छोड़ विदेश में बच्चों की मदद करने पहुंचीं प्रियंका को ट्रोलिंग का शिकार भी होना पड़ा. रविंद्र गौतम नाम के एक शख्स ने ट्विटर पर लिखा कि प्रियंका को देश के गांव में भी जाना चाहिए, जहां के बच्चे भूखे हैं और खाने के इंतजार में हैं.

इसपर यूजर को जवाब देते हुए प्रियंका ने लिखा, “मैं यूनिसेफ के साथ 12 सालों से काम कर रही हूं और ऐसी कई जगहों पर जा चुकी हैं. रविंद्र गौतम तुमने क्या किया है? एक बच्चे की परेशानी दूसरे से कम कैसी?

बताते चलें कि प्रियंका के पास अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी परियोजनाएं हैं. वह रिबेल विल्सन, लियाम हैम्सवर्थ, एडम डिवाइन के साथ ‘इजनाट इट रोमांटिक?’ और ‘ए किड लाइक जेक’ जैसी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं. इसमें उनके साथ जिम पार्सन्स, क्लेयर डेन्स, ओक्टाविया स्पेन्सर, ऐन डोड और माइकेला वाटकिंस जैसे सितारे प्रमुख भूमिकाओं में हैं.

क्या आप जानते हैं सलीम-जावेद के इस मजेदार किस्से के बारे में

हमेशा से सुनते आ रहे हैं कि नाम में क्या रखा है लेकिन दुनिया में हर शख्स इसी ‘नाम’ के पीछे जिंदगी भर भागता है. इसे हासिल करने के लिए एक से एक कई तरीके अपनाता है. नाम के लिए ऐसा ही कुछ काम 1973 में हुआ था.

यह किस्सा मशहूर स्क्रिप्ट राइटर जोड़ी सलीम और जावेद से जुड़ा है. जब फिल्म जंजीर बनी थी, जिसकी स्क्रिप्ट इन्हीं दोनों ने लिखी थी. उसकी रिलीज से पहले मुंबई भर में उसके पोस्टर्स लगवाए गए. अमिताभ बच्चन से लेकर जया और प्राण के उस पर चेहरे थे. फिल्म के डायरेक्टर प्रोडयूसर का नाम भी लिखा था. लेकिन स्क्रिप्ट राइटर जोड़ी का कहीं कोई जिक्र नहीं था.

दोनों ने दिन रात एक कर बड़ी मेहनत से फिल्म लिखी थी. वह कहानी को किसी हीरो से कम नहीं समझ रहे थे. ऐसे में जब उनकी फिल्म के पोस्टर पर नजर पड़ी, तो उन्हें इस बात से धक्का लगा. पोस्टर पर अपना नाम गायब देखकर दोनों के दिल में मानो खलबली सी मची थी. दोनों ने इस समस्या से निपटने का फैसला किया और एक तरीका निकाला.

दोनों ने एक पेंटर ढूंढा उसे पोस्टर दिखाया और कहा कि जहां भी यह दिखे इस पर सलीम जावेद लिख दो. रात वह पोस्टर खोज खोज कर सलीम और जावेद का नाम लिखता रहा. जुहू से लेकर ओपेरा हाउस तक जितने पोस्टर थे, उन पर हरी स्याही से दोनों के नाम लिखे थे. लेकिन हां पेंटर को यह पता नहीं था कि नाम कहां लिखे जाने हैं. सो जहां उसे समझ में आया उसने नाम लिख दिए. किसी पोस्टर पर अमिताभ के हाथ पर नाम लिखा मिला, तो कहीं रेखा के चेहरे पर स्क्रिप्ट राइटर जोड़ी का नाम लिखा था.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें