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दुनिया की सबसे तेज एसयूवी लौन्च, 305 किमी प्रति घंटे की है रफ्तार

लंबौर्गिनी ने आज भारत में अपनी सुपर लग्जरी एसयूवी Urus लौन्च कर दी है. उरुस लंबौर्गिनी की दूसरी एसयूवी है, इससे पहले कंपनी ने LM002 एसयूवी लौन्च की थी. कंपनी ने कार को दमदार लुक दिया है. MLB प्लेटफौर्म पर बनी इस कार की कीमत 3 करोड़ रुपए रखी गई है. हालांकि, कंपनी भारत में सिर्फ 25 यूनिट ही बेचेगी.

जबरदस्त हैं फीचर्स

लंबौर्गिनी उरुस में 4.0 लीटर का ट्वीन टर्बो वी8 इंजन दिया गया है, जो 650पीएस की ताकत और 850 एनएम का टौर्क उत्पन्न करता है. इस ताकत के साथ यह दुनिया की सबसे तेज रफ्तार वाली एसयूवी बन जाती है. कार की टौप स्पीड की बात करें तो यह 305 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है.

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8 स्पीड औटोमेटिक ट्रांसमिशन

कार महज 3.6 सेकेंड में 0-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है. कार 8 स्पीड औटोमेटिक ट्रांसमिशन के साथ आती है. कार में औफ रोड, सैंड, स्नो रोड, स्पोर्ट और ट्रैक ड्राइविंग मोड का विकल्प मिलता है. उरुस में 23 इंच के व्हील्स दिए गए हैं, साथ ही हेडलैम्प को ऐंग्री लुक दिया गया है. कार में आपको 616 लीटर का बूटस्पेस मिलता है.

3 करोड़ रुपए है कीमत

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लंबौर्गिनी उरुस की कीमत लगभग 3 करोड़ रुपए के आसपास होगी. परफौर्मेंस के मामले में इस कार का कोई मुकाबला नहीं है, हालांकि बेंटले बेंटायगा और रेंज रोवर एसवीआर जैसी गाड़ियों को उरुस से कड़ी टक्कर मिलने वाली है. यह कार बाजार में कई कलर्स में उपलब्ध है.

निरर्थक होती हैं धार्मिक प्रार्थनाएं

विनायक शाह मध्यप्रदेश के महकौशल क्षेत्र के शहर जबलपुर के जाने माने वकील हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते इस बात पर एतराज जताया था कि देश भर के केन्द्रीय विद्यालयों में सुबह जो प्रार्थना होती है वह पूरी तरह असंवैधानिक है. बकौल विनायक सरकारी स्कूलों में धार्मिक मान्यताओं और ज्ञान को प्रचारित करने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए. अपनी दलील में दम लाने हालांकि इन वकील साहब ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 28 का हवाला दिया था, पर यह उनकी दलीलों का ही असर था कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने केंद्र सरकार और केंद्रीय स्कूलों को नोटिस जारी करते 4 सप्ताह में जबाब मांगा है.

यहां विनायक शाह के दूसरे तर्कों पर भी ध्यान देना जरूरी है, जिनके चलते जस्टिस आरएफ नरीमन और नवीन सिन्हा की पीठ ने सरकार और स्कूलों से सफाई मांगी है. विनायक खुद भी एक केंद्रीय स्कूल में पढ़े हैं, उनका कहना है कि प्रार्थना के कारण बच्चों में वैज्ञानिक द्रष्टिकोण विकसित होने में मुश्किल आती है, क्योंकि भगवान और धार्मिक आस्था का जो पूरा नजरिया है, वो बच्चों की सोचने समझने की प्रक्रिया में आधार हो जाता है और वे उसी तरह सोचने लगते हैं (जाहिर है उस तरह जैसे कि धर्म के ठेकेदार चाहते हैं).

विनायक यह भी कुछ गलत या अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं कह रहे कि आम जीवन की मुश्किलों का समाधान खोजने की जगह बच्चे द्वारा अंदर भगवान को याद करना और उससे भीख मांगने की भावना बनने लगती है और ऐसे में जांचने-परखने और सुधार करने की भावना कहीं न कहीं खो जाती है.

अपनी याचिका में विनायक ने यह भी कहा है कि प्रार्थना बच्चों पर थोपी जाती है , ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय के, नास्तिक और दूसरे बच्चों और उनके अविभावकों को लगता है कि ये संवैधानिक रूप से गलत है. संविधान के अनुच्छेद 28 के तहत धार्मिक निर्देश हैं और इसलिए इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. संविधान का अनुच्छेद 28 (1) कहता है कि ऐसे किसी भी शिक्षण संस्थान में धार्मिक आदेश नहीं दिये जा सकते जो पूरी तरह सरकार के पैसे से चलता हो.

संविधान की आड़ से परे देखें तो विलाशक कोई नया सवाल विनायक ने नहीं किया है. ईश्वर के अस्तित्व और फिर उसकी आड़ में पनपती दुकानदारी पर एतराज हर वक्त में तर्कवादियों द्वारा जताया जाता रहा है और जताया भी जाता रहेगा. बात अकेले स्कूलों की नहीं बल्कि हर उस जगह की है जहां भगवान होता नहीं, लेकिन उसका होना मानना पड़ता है. बात अकेले बच्चों की भी नहीं बल्कि उन तमाम वयस्कों की भी है, जो उम्र के एक मुकाम पर आकर महसूसने लगते हैं कि कैसे वे धर्म की ओट में ठगे जाते रहे हैं, लेकिन भगवान और उसके कथित चमत्कारों का नशा उनकी रग रग में इस तरह दौड़ने लगता है कि वे ईश्वर नाम की परिकल्पना से हटकर कुछ और सोचने में ही थर्राने लगते हैं, भगवानवादी टाइप लोग इसे आस्था और श्रद्धा करार देकर उनका नशा और बढ़ाते रहते हैं.

स्कूली प्रार्थना में भगवान आया क्यूं और कैसे इस सवाल का जबाब बेहद साफ है कि यह साजिश किसी 1964 में नहीं बल्कि सदियों पुरानी है कि बस एक बात बच्चे के होश संभालने के पहले ही उसकी नसों में खून के साथ बहा दो कि तेरा कुछ नहीं है, तू कुछ नहीं है जो कुछ भी है वह उस ऊपर वाले का है, जो इस सृष्टि का निर्माता और संचालक है और वही इसे नष्ट करेगा. तमाम धर्म इसी परिकल्पना के इर्द गिर्द परिक्रमा करते रहते हैं और ईश्वरीय गाज से बचने उसके मानने बाले दक्षिणा पंडों को अर्पित करते रहते हैं.

और जो लोग इस ठगी पर एतराज जताते हैं उन्हें झट से नास्तिक करार दे दिया जाता है पर चूंकि अब नास्तिक शब्द पहले की तरह गाली नहीं रह गया है इसलिए उन्हें देशद्रोही, कम्युनिस्ट या वामपंथी बगैरह कहते हतोत्साहित करने का कुचक्र रचा जाने लगा है, इस पर भी बात नहीं बनती तो देखते ही देखते धर्म के नाम पर आग लगने लगती है, दंगे फसाद होने लगते हैं, जहां धर्म तो कतई नहीं दिखता, दिखता है तो धर्म रक्षा के नाम पर उठता धुंआ और कीड़े मकोड़े सरीखे मरने वाले लोग जिन्हें ईश्वर की सर्वोत्तम कृति करार दिया जाता है.

दरअसल में केंद्रीय स्कूलों में धार्मिक प्रार्थना का मुद्दा ऐसे वक्त में उठा है जब सारे देश में धार्मिक उन्माद चरम पर है, लोग बिना सोचे समझे भक्तिकाल की तरह पंडे पुजारियों के डमरू पर बंदरों की तरह नाच रहे हैं और इस तरह नाच रहे हैं कि खुद भी नाचने की वजह भूल गए हैं. राजनैतिक पैमाने जो अपेक्षाकृत ज्यादा आसान है पर देखें तो विकास देशहित संवैधानिक अधिकार और लोकतन्त्र कभी कभार भी नहीं दिख रहे. सामने है तो भगवा हज हाउस, कोरेगांव का वर्ग संघर्ष, दलित अत्याचार, शंकराचार्यों का सरकारी तौर पर पूजन, सरकारी पैसे से बूढ़ों की तीर्थयात्राओं जैसे सैकड़ों बेहूदे गैरज़रूरी लेकिन धार्मिक कृत्य.

इन से देश का भला होने की उम्मीद अगर किसी को है तो उसे पूरा हक है कि वह देश की सबसे बड़ी अदालत को कोसे और ऊपर वाले की अदालत की दुहाई दे पर यह पूछने का हक उसे कतई नहीं रह जाएगा कि देश में यह क्या हो रहा है, मंहगाई और बेरोजगारी क्यों बढ़ रहे हैं आम लोगों का सुकून कहां गया और समाज में इतनी बैचनी क्यों है.

यही वह साजिश है जिसके शिकार लोग सदियों से ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं, भजन पूजन कीर्तन और आरतियां करते खुद पंडों के लिखे इन शब्दों को दोहरा रहे हैं ‘मैं मूरख खल कामी कृपा करो भरता…’

…तो हंसाते और डराते नजर आएंगे श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव

अब आप डरने और हंसने के लिए तैयार हो जाइये, क्योंकि अब आपको एक ही फिल्म में ये दोनों चीजे मिलेंगी. जी हां, राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर बेहद जल्द ही हौरर कौमेडी फिल्म में नजर आएंगे. राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर अभिनीत हौरर कौमेडी फिल्म का नाम ‘स्त्री’ रखा गया है. इस फिल्म के जरिए राजकुमार व श्रद्धा पहली बार पर्दे पर साथ नजर आएंगे.

राजकुमार ने गुरुवार को फिल्म के क्लैपबोर्ड के साथ एक तस्वीर साझा कर इस बात की सूचना दी. उन्होंने तस्वीर शेयर करते हुए इसके कैप्शन में लिखा, “अब हमारे पास फिल्म का नाम है. हौरर कामेडी ‘स्त्री’ की शूटिंग बेहद जल्द ही शुरू होने वाली है. ये शूटिंग काफी रोमांचक होने वाली है. फिल्म ‘स्त्री’ को अमर कौशिक द्वारा निर्देशित या जाएगा. इसे राज और डीके द्वारा लिखित और दिनेश विजन, राज और डीके द्वारा निर्मित किया जाएगा.”

‘स्त्री’ का निर्देशन ‘शोर इन द सिटी’, ‘गो गोआ गौन’ और ‘हैप्पी एंडिंग’ जैसी फिल्मों के लिए मशहूर राज और डीके कर रहे हैं.

इस फिल्म से जुड़ी अधिक जानकारी का फिलहाल खुलासा नहीं हुआ है. लेकिन माना जा रहा है कि राजकुमार व श्रद्धा बेहद ही अलग अंदाज में नजर आने वाले हैं. यह पहला मौका है जब एक्टर राजकुमार राव हौरर कौमेडी जैसी फिल्म में नजर आएंगे. इससे पहले वह यूपी की कहानियों पर बनी फिल्म्स में दिखे हैं.

बता दें कि श्रद्धा कपूर इनदिनों बाहुबली प्रभास के साथ फिल्म ‘साहो’ की शूटिंग में व्यस्त हैं. इस फिल्म को पूरा करने के बाद श्रद्धा कपूर अपनी अगली फिल्म ‘स्त्री’ की शूटिंग शुरू करेंगी.

मुक्काबाज : जिम्मी शेरगिल और विनीत कुमार सिंह का दमदार अभिनय

‘‘बांबे वेल्वेट’’ की असफलता के साथ ही अनुराग कश्यप और नए तरह का सिनेमा हाशिए पर चला गया था. मगर अब अनुराग कश्यप निर्देशित फिल्म ‘‘मुक्काबाज’’ से एक बार फिर उनकी वापसी होगी, इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन ‘‘मुक्काबाज’’ से अनुराग के अंध प्रशंसकों को निराशा होगी. ‘‘मुक्काबाज’’ भीं अनुराग की चिर परिचित शैली के अनुसार सिस्टम के खिलाफ बात करती है, पर इस बार शैली व अंदाज कुछ अलग है. ‘मुक्काबाज’ महज बाक्सिंग/मुक्केबाजी के खेल पर आधारित फिल्म नहीं है. बल्कि अनुराग कश्यप ने अपने अंदाज में इस फिल्म में खेल जगत में व्याप्त भ्रष्टाचार व सिस्टम पर उंगली उठाने के साथ ही जातिगत भेदभाव आदि का भी सटीक चित्रण किया है.

उत्तर प्रदेश के बरेली शहर की पृष्ठभूमि में ‘‘मुक्काबाज’’ की कहानी के केंद्र में बरेली शहर के बाहुबली राजनेता व कुश्ती फेडरेशन के अध्यक्ष भगवान दास मिश्रा (जिम्मी शेरगिल) और कुश्ती बाज श्रवण कुमार (विनीत कुमार सिंह) के इर्दगिर्द घूमती है. इसी के साथ इसमें भगवानदास मिश्रा की भतीजी सुनयना मिश्रा (जोया हुसेन) और श्रवण कुमार की प्रेम कहानी भी है.

फिल्म की कहानी के अनुसार नीची जाति के बाक्सर/मुक्केबाज श्रवण, भगवान दास मिश्रा के जिम में ट्रेनिंग लेते हैं और उनके शागिर्द हैं. भगवान दास मिश्रा अपने यहां के सभी बाक्सरों से अपने घरेलू काम करवाने से लेकर अपने शरीर की मालिश भी करवाते हैं. भगवान दास की गूंगी भतीजी सुनयना पर नजर पड़ते ही वह अपना दिल उसे दे बैठते हैं और फिर एक दिन गरीब व खुद्दार श्रवण, भगवान दास के शरीर की मालिश करने से मना कर देता है. वह भगवान दास की इस आव्हान का ‘‘हम ब्राम्हण है, हम आदेश देते हैं’’ को तवज्जो नहीं देता. इस पर भगवान दास को गुस्सा आता है.

बात बढ़ने पर श्रवण, भगवान दास को मुक्का जड़ देता है. फिर भगवान दास के इशारे पर बाकी के सारे बाक्सर उसकी पिटाई कर देते हैं. उसके बाद भगवान दास अपनी ताकत का उपयोग कर उसे जेल भिजवा देते हैं, जहां जेलर उसे सलाह देता है कि वह जेल में बाक्सिंग की प्रैक्टिस पर ध्यान दे. जेल से निकलकर वह सुनयना से मिलता है. उनका प्यार पल्लवित होने लगता है. सुनयना को अहसास होता है कि श्रवण पहला पुरुष है, जिसने उसके गूंगी होने पर उस पर तरस खाने की बजाय उसके सपनों को पूरा करने में उसका साथ देने की बात कही है.

इधर भगवान दास ने सारी ताकत श्रवण के बाक्सिंग/मुक्केबाजी के करियर को खत्म करने पर लगा रखी है. जबकि श्रवण मानता  है कि ‘‘नाम भगवान होने से कोई भगवान नहीं हो जाता.’’

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एक दिन अपने दोस्त गोपाल तिवारी (श्रीधर दुबे) की सलाह पर श्रवण बरेली से वाराणसी पहुंचता है, जहां उसे संजय कुमार (रवि किशन) का साथ मिलता है. संजय कुमार उसे मदद करने का भरोसा दिलाने के साथ ही मुक्केबाजी की प्रतियोगिताओं में हिसा लेने का मौका दिलाते हैं. वह खुद भी बाक्सर रहे हैं और अब वह भाटिया के साथ मिलकर बाक्सरों को प्रशिक्षित करने का काम भी करते हैं.

भगवान दास वाराणसी पहुंचकर संजय कुमार को धमकाते हैं कि वह श्रवण का साथ न दे. पर संजय कुमार, श्रवण का साथ देता है. श्रवण कुमार, राज्य स्तर पर विजेता बनकर उभरता है. उसे रेलवे में नौकरी भी मिल जाती है. इससे भगवानदास तिलमिला जाते हैं. उधर अचानक सुनयना के पिता गोपाल की आत्मा उन्हे झकझोरती है और वह अपने छोटे भाई भगवानदास की मर्जी के खिलाफ सुनयना व श्रवण की शादी करवा देते हैं. भगवान दास का मानना है कि उसकी भतीजी की वजह से गलत हुआ है.

अब भगवान दास पहले अपने बडे़ भाई गोपाल व उनकी पत्नी को घर से बेघर कर देते हैं. फिर साजिश रचकर अपने भाई, भाभी व सुनयना को अगवा कर बंदी बना देता है. भाई गोपाल की टांग तोड़ हमेशा के लिए अपाहिज कर देता है. सुनयना को को एक इंजेकशन देना शुरू करते हैं.

उधर श्रवण के पास भगवान दास, सुनयना से तलाक के कागज भिजवाते हैं, पर वह साइन नहीं करता है. श्रवण से वह कहते हैं कि वह मुक्केबाजी में राष्ट्रीय चैम्पियन बनने का सपना छोड़ दे. भगवानदास की साजिश के ही चलते घायल अवस्था में श्रवण व संजय कुमार अस्पताल पहुंचते हैं. इससे भी श्रवण हार नहीं मानता. राष्ट्रीय चैंपियन के मैच में वह भगवान के चुने प्रतियोगियों का धूल चटाना शुरू करता है. तभी उसे उस जगह का पता चलता है, जहां सुनयना को बंदी बनाकर रखा गया है. वह रात में सुनयना को छुड़ाने जाता है. वहां भगवान दास के आदमियों के हाथों श्रवण घायल होता है, पर विजयश्री बनकर उभरता है.

अब एक बार फिर उसे घायल होने की वजह से बाक्सिंग मैच खेलने नहीं दिया जाता. पर भगवान दास इस शर्त पर उसे खेलने की अनमति देते है कि इसके बाद वह मुक्केबाजी से संन्यास ले लेगा. बाक्सिंग रिंग के अंदर श्रवण जान बूझकर परास्त हो जाता है.

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जहां तक अभिनय का सवाल है,तो श्रवण के किरदार में विनीत कुमार सिंह ने दमदार परफार्मेंस दी है. वह परदे पर एक वास्तविक बाक्सर को न सिर्फ जीवंत करते हैं, बल्कि उसकी यथार्थ परक जिंदगी को जीते हुए नजर आते हैं. विनीत कुमार सिंह ने खुद ही पटकथा लिखी है और खुद भी वाराणसी के रहने वाले हैं, इसलिए उन्होंने इस क्षेत्र की भाषा के लहजे को बाखूबी फिल्म में अपने किरदार के माध्मय से पेश किया है. भ्रष्ट, अति पक्षपाती, गुस्सैल, बदले की भावना से काम करने वाले खेल संघ के अध्यक्ष व बाहुबली भगवान दास मिश्रा के किरदार को जिस तरह से परदे पर जीवंतता जिम्मी शेरगिल ने प्रदान की है, उसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है.

दर्शक विनीत कुमार सिंह व जिम्मी शेरगिल की परफार्मेंस के लिए भी इस फिल्म को देखना चाहेगा. जोया हुसेन ने गूंगी सुनयना के रूप में अच्छा काम किया है, मगर जिस तरह से उनकी निडरता व साहस का चित्रण किया गया है, वह कई जगह भद्दा लगता है. रवि किशन व श्रीधर दुबे भी अपने अपने किरदारों को बड़ी सहजता से जिया है.

फिल्म की लंबाई कुछ ज्यादा हो गयी है, जिसे कम किया जा सकता था. फिल्म के नायक विनीत कुमार सिंह ने खुद ही पटकथा लिखी है, जिसमें कुछ बदलाव अनुराग कश्यप ने किया है. इसके चलते भी पटकथा में बेवजह के कुछ सीन जोडे़ गए हैं. विनीत कुमार सिंह ने प्रेम संबंधो के सीन ज्यादा पिरो दिए हैं, जो कि कोई मायने नहीं रखते. प्रेम कहानी में जो ताजगी व नयापन होना चाहिए था, वह भी गायब है. फिल्म का क्लायमेक्स बेवजह रबर की तरह खींचा गया है. यही वजह है कि इंटरवल के बाद की फिल्म प्रभावित नहीं करती.

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फिल्म के संवाद काफी बेहतरीन बन पड़े हैं. फिल्म के अंदर जहां कुछ गीत बेमानी लगते हैं, वहीं व्यंगात्मक गीत फिल्म के साथ न्याय करते हैं. लेखक के तौर पर अनुराग कश्यप व विनीत कुमार सिंह को इस बात के लिए बधाई दी जानी चाहिए कि उन्होंने ‘बुरे’ को ‘बुरा’ कहने से परहेज नहीं किया. मगर श्रवण कुमार जिस अंदाज में अपने पिता से बात करता है, वह थोड़ा सा  अखरता है.

दो घंटे 35 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘मुक्काबाज’’ का निर्माण  आंनद एल राय की कंपनी ‘कलर एलो प्रोडक्शन’ के साथ अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटावणे, मधु मेंटोना व विकास बहल की कंपनी ‘फैंटम’ ने किया है. निर्देशक अनुराग कश्यप, लेखक अनुराग कश्यप, विनीत कुमार सिंह, मुक्ति सिंह, केडी सत्यम , रंजन चांडेल व प्रसून मिश्र, संगीतकार प्रशांत पिल्लैय, कैमरामैन राजीव रवि, शंकर रमण, जय पटेल व जयेश नायर तथा कलाकार हैं-विनीत कुमार सिंह, जिम्मी शेरगिल, रवि किशन, जोया हुसेन, श्रीधर दुबे, नीरज गोयत, दीपक तंवर व अन्य.

केसरी में अक्षय कुमार के साथ नजर आएंगी ये एक्ट्रेस

अक्षय कुमार की फिल्म ‘केसरी’ की हीरोइन का नाम रिवील कर दिया गया है. करण जौहर के ट्वीट के बाद सामने आया कि इस फिल्म में अक्षय के साथ परिणीति चोपड़ा नजर आने वाली हैं. करन जोहर ने ट्विटर पर अभिनेत्री को टैग करते हुए कहा, “ फिल्म ‘केसरी’ की मुख्य अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा हैं.” यह फिल्म ‘सारागढ़ी’ के युद्ध पर आधारित है.

हाल ही में परिणीति की गोलमाल फिल्म ने कमाई के नए रिकौर्ड बनाए हैं. ऐसे में उनके हाथ अक्षय के साथ मूवी का होना किसी जैकपौट जैसा है. अक्षय कुमार की फिल्में बैक टू बैक हिट होने के साथ कमाई भी अच्छी कर रहीं हैं.

बता दें कि अक्षय ने भी कुछ दिन पहले अपनी फिल्म ”केसरी” का फर्स्ट लुक जारी किया. इस फर्स्ट लुक में अक्षय कुमार केसरिया रंग की पगड़ी पहने सिख के किरदार में नजर आ रहे हैं. अक्षय कुमार ने अपनी इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा, ”इस तस्वीर को शेयर करते हुए असीमित गर्व और आभार व्यक्त करना चाहता हूं. नए साल 2018 की शुरुआत मेरे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट और फिल्म केसरी से कर रहा हूं. आपकी दुआओं और प्यार की जरूरत हमेशा रहेगी.

बता दें कि पहले इस फिल्म से सलमान का नाम भी जुड़ रहा था. लेकिन बाद में सलमान इस प्रोजेक्ट से हट गए. सलमान के इस प्रोजेक्ट से हटने की पुष्टि खुद अक्षय ने की थी. इस साल अक्षय की पहली फिल्म ‘पैडमैन’ होगी. अक्षय साल 2018 की पारी की शुरुआत इस बायोपिक से कर रहे हैं. यह फिल्म अरुणाचलम मुरुगनाथम की जिंदगी पर आधारित है. उन्होंने कम पैसों में सैनिटरी नैपकिन बनाने की मशीन का आविष्कार किया था. इस आविष्कार के बाद उन्हें पदम श्री से सम्मानित भी किया गया था.  आर बाल्की निर्देशित इस फिल्म को अक्षय की पत्नी ट्विंकल खन्ना ने प्रोड्यूस किया है. ये फिल्म 26 जनवरी 2018 यानि इस गणत्रंत दिवस पर रिलीज होने वाली है.

आखिर क्यों RBI ने बंद की सिक्कों की छपाई, जानिए क्या है कारण

अब देश में सिक्कों की छपाई बंद कर दी गई है. देश की चारों टकसाल(सिक्के बनाने का कारखाना) ने इनके उत्पादन का काम रोक दिया है. दरअसल, टकसालों में सिक्कों का ज्यादा भंडार होने की वजह से इनकी छपाई बंद की गई है. सूत्रों के मुताबिक, नोटबंदी के दौरान लोगों की ओर से बैंकों में जमा कराई करेंसी के चलते आरबीआई टकसाल से कम सिक्के उठा रहा है. इसके चलते टकसाल में सिक्कों की मात्रा ज्यादा हो गई है. इसी के चलते सिक्के बनाने पर रोक लगा दी गई है. सिक्यौरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कौरपोरेशन औफ इंडिया के पास मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और नोएडा में टकसाल हैं.

तत्काल प्रभाव से रोका उत्पादन

मुंबई मिंट के इंटरनल नोटिस में कहा गया, ‘एसपीएमसीआईएल से मिले निर्देश के अनुसार इंडिया गवर्नमेंट मिंट, मुंबई में सर्कुलेशन कौइंस का उत्पादन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा.’ हालांकि, सिक्के का उत्पादन रुकने से आम पब्लिक को कोई परेशानी नहीं होगी. क्योंकि, आरबीआई के पास पर्याप्त सिक्के नहीं हैं. 24 नवंबर 2016 को आरबीआई के पास करीब 1, 2, 5 और 10 रुपए के 676 करोड़ रुपए मूल्य के सिक्के थे.

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ये है इसका असली कारण

एक रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि टकसालों से सिक्के इसलिए कम उठाए जा रहे हैं क्योंकि, आरबीआई के कोषागार में पर्याप्त जगह ही नहीं है. कोषागार में पुराने 500 और 1000 रुपए के नोट भरे हैं. नवंबर 2016 में नोटबंदी के चलते उस वक्त सर्कुलेशन में रहे नोटों का करीब 85 पर्सेंट हिस्सा अवैध करार दिया गया था.

कर्मचारियों को हुआ नुकसान

टकसालों में सिक्के ढलाई का काम रोकने से कर्मचारी को नुकसान हुआ है और इससे वे खुश नहीं हैं. दरअसल, काम रुकने से कर्मचारियों का ओवरटाइम खत्म हो गया है. मुंबई मिंट के नोटिस में कहा गया है कि मिंट में अब से सामान्य वर्किंग टाईम रहेंगे. अगले आदेश तक कोई ओवरटाइम नहीं होगा.

नोएडा टकसाल में 2.53 अरब रुपए के सिक्के

नोएडा यूनिट के स्टौक में करीब 2.53 अरब रुपए के सिक्के मौजूद हैं. लेकिन, आरबीआई ने इन्हें लेना बंद कर दिया है. आरबीआई की 2016-17 की सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि सर्कुलेशन में मौजूद सिक्कों की वैल्यू 14.7 पर्सेंट बढ़ी है. इनमें 1 और 2 रुपए के सिक्कों का हिस्सा 69.2 पर्सेंट था. आरबीआई 5 और 10 रुपए के नोटों के बजाय इनके सिक्कों के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है क्योंकि, कागज के मुकाबले मेटल ज्यादा लंबा चल सकता है.

जन्मदिन विशेष : सबसे ‘सेक्सी’ खिलाड़ी राहुल द्रविड़ के बारे में जानिए कुछ खास

भारतीय क्रिकेट के महानतम बल्लेबाज राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को हुआ. इस बल्लेबाज की प्रशंसा दुनिया भर में उनके खेलने के अंदाज को लेकर हुई. खासतौर पर टेस्ट क्रिकेट में उन्हें ‘द वौल’ के नाम से जाना गया. उनकी अनेक टेस्ट पारियों ने भारत को जीत दिलवाई. 12 साल की उम्र में क्रिकेट शुरू करने वाले राहुल की बल्लेबाजी में अंत तक स्थायित्व दिखाई पड़ता रहा. उनके 45वें जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें.

– कम लोग जानते हैं कि राहुल द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे अधिक गेंदों का सामना किया है. टेस्ट की 286 पारियों में उन्होंने 31, 258 गेंदों का सामना किया और 13288 रन बनाए. टेस्ट में सबसे अधिक (210) कैच पकड़ने का रिकौर्ड भी राहुल के नाम है. किसी भी गैर विकेटकीपर द्वारा लिए गए यह सबसे अधिक कैच हैं.

विदेशी पिचों पर राहुल सबसे अधिक सफल बल्लेबाज रहे हैं. 20 जून 1996 को इंग्लैंड के लौर्ड्स में टेस्ट डेब्यू करने वाले राहुल ने 95 रन बनाए थे.

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आधुनिक क्रिकेट में राहुल इकलौते ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने लगातार चार टेस्ट में चार शतक लगाए. उन्होंने 115,148 और 201 रनों की पारी में इंग्लैंड दौरे पर लगाए. इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ मुंबई में राहुल ने शतक लगाया.

राहुल की रक्षात्मक तकनीक के कारण उन्हें ब्रांडेड टेस्ट क्रिकेटर कहा गया. हालांकि, वह वनडे के भी शानदार बल्लेबाज थे. 1999 के वर्ल्ड कप में उन्होंने सबसे ज्यादा 461 रन बनाए. वर्ल्ड कप मैचों में वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज रहे. उनका औसत 61.42 का था, जो सिर्फ विवियन रिचर्ड्स (63.31) से पीछे था.

सबसे लंबी पार्टनरशिप का रिकौर्ड भी भारत में द्रविड़ के नाम है. जनवरी 2006 में राहुल ने वीरेंद्र सहवाग के साथ पाकिस्तान के खिलाफ 410 रनों की पार्टनरशिप की. इसके अलावा राहुल ने वीवीएस लक्ष्मण के साथ कोलकाता में मार्च 2001 में औस्ट्रेलिया के खिलाफ 376 रनों की पार्टनरशिप की थी. ये साझेदारियां भारत के द्वारा टेस्ट क्रिकेट दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी साझेदारियां थीं.

जब टीम इंडिया किसी विकेटकीपर का खेलना अफोर्ड नहीं कर पा रही थी तो द्रविड़ ने यह भूमिका बखूबी निभाई. वह श्रेष्ठ विकेटकीपर साबित हुए. विकेट कीपर के रूप में द्रविड़ ने 73 एक दिवसीय मैचों में 2300 रन बनाए, जो धोनी के बाद सबसे ज्यादा हैं.

द्रविड़ के ऊपर टेस्ट प्लेयर का तमगा लग चुका था लेकिन उन्होंने एक दिवसीय में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया. वह वनडे क्रिकेट में नवें नंबर पर सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बने. वह तीसरे ऐसे भारतीय बल्लेबाज बने, जिन्होंने वनडे में दस हजार से अधिक रन (10889) रन बनाए.

नवंबर 2003 में द्रविड़ ने न्यूजीलैंड के खिलाफ हैदराबाद में 22 गेंदों पर 50 रन बनाए. यह उस समय अजित अगरकर के बाद दूसरा सबसे तेज अर्धशतक था.

राहुल द्रविड़ टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे सफल कप्तान रहे. उनकी कप्तानी में भारत ने लगातार 14 टेस्ट जीते. वनडे में भी उनकी जीत का प्रतिशत 62.16 रहा.

टेस्ट क्रिकेट में तकनीकी रूप से मजबूत और डिफेंस के कारण राहुल को ‘द वौल’ के नाम से जाना गया.

टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद राहुल द्रविड़ इंडिया अंडर 19 और इंडिया ए टीम के कोच बने.

राहुल बचपन में हौकी खेलना चाहते थे. वह कर्नाटक स्टेट जूनियर हौकी टीम के लिए चुने भी गए थे.

राहुल द्रविड़ को अर्जुन अवौर्ड और पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है.

2004-05 में एक औनलाइन सर्वे में राहुल द्रविड़ को भारत के सबसे सेक्सी पुरुष का खिताब मिला था.

राहुल द्रविड़ ने अपने करियर में 1654 चौके लगाए हैं. उनसे अधिक चौके केवल सचिन तेंदुलकर के हैं.

‘रेस 3’ के सेट पर हथियारबंद शख्स के आने से मचा हड़कंप

फिल्म ‘रेस 3’ के सेट पर उस वक्त हंगामा मच गया जब एक व्यक्ति हाथों में हथियार लिए वहां पहुंच गया. सलमान की फिल्म ‘रेस 3’ की शूटिंग बुधवार को मुंबई के फिल्म सिटी में हो रही थी. तभी पुलिस ने भांपा कि एक्टर सलमान खान की जान को खतरा है. इसके चलते शूटिंग को तुरंत कैंसल कर दिया गया. वहीं दूसरी ओर सलमान खान को सुरक्षित घेरे में रखा गया. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘फिल्म सिटी में ‘रेस 3′ के सेट पर पुलिस पहुंची. पुलिस ने सलमान खान और प्रोड्यूसर रमेश तुरानी को कहा कि शूट कैंसल करना होगा. जितनी जल्दी हो सके सलमान को घर सुरक्षित छोड़ना होगा. इसके चलते सलमान 6 पुलिस वालों सहित एक अन्य गाड़ी में बैठे और सुरक्षित घर पहुंचाए गए.’

सलमान खान की सुरक्षा में इस वक्त पुलिस तैनात है. बता दें, राजस्‍थान के गैंगस्‍टर लौरेंस बिश्‍नोई ने बौलीवुड सुपरस्‍टार सलमान खान को खुलेआम जान से मारने की धमकी दी थी. लौरेंस को शुक्रवार 5 जनवरी को कोर्ट में पेशी पर लाया गया था. छात्र नेता से गैंगस्‍टर बने लौरेंस पर हत्‍या का प्रयास, वसूली और आर्म्‍स एक्‍ट जैसे गंभीर मामलों में 20 से ज्‍यादा केस दर्ज हैं. फरीदकोट पुलिस ने उसे 5 मार्च, 2015 को गिरफ्तार किया था. माना जा रहा है कि लौरेंस बिश्‍नोई ने वर्ष 1998 में काले हिरण का शिकार करने को लेकर सलमान खान को धमकी दी.

Inke Aane se Race 3 ka cast aur ho gaya jhakas @anilskapoor @RameshTaurani #Race3

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सलमान खान के साथ इस फिल्म में अनिल कपूर भी नजर आएंगे. फिल्म की शूटिंग के पहले दिन ही अनिल कपूर और सलमान खान की एक तस्वीर सेट से जारी हुई थी. इस तस्वीर में अनिल अपना जन्मदिन रेस 3 के सेट पर मना रहे थें. वहीं इस बीच सलमान ने अनिल कपूर के साथ एक तस्वीर इंस्टाग्राम पर भी शेयर की थी. तस्वीर को कैप्शन देते हुए सलमान ने लिखा, ‘इनके आने से रेस 3 का कास्ट और हो गया झकास’.

ऐसे करें किसी भी फोन के लोकेशन को ट्रैक

किसी की लोकेशन पता करना आसान काम नहीं होता है, वो भी लाइव लोकेशन. आज हम आपको एक ऐसे ही ऐप के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आप किसी के भी फोन की लाइव लोकेशन का आसानी से पता लगा सकते हैं. अगर आपका फोन कहीं खो भी जाता है तो आप अपने फोन की लोकेशन का भी आसानी से पता लगा सकते हैं.

तो चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे आप फोन की लोकेशन का पता लगा सकते हैं. सबसे पहले आपको अपने स्मार्टफोन में एक ऐप इंस्टौल करनी होगी. इस ऐप का नाम है GPS tracker Followme. इसे इंस्टौल करने के बाद इस ऐप में आपको रजिस्टर करना होगा. आपको बता दें कि जिस फोन को ट्रैक करना है उसमें यह ऐप होना जरूरी है. अगर यह ऐप नहीं होगा तो ट्रैक नहीं कर पाएंगे.

technology

ऐप इस्टौल करने के बाद जैसे ही आप ऐप को खोलेंगे, तो खोलते ही कई औप्शन आएंगे. यहां सेटिंग्स में जाना है. अब नया पेज खुल जाएगा. अब सबसे ऊपर नए यूजर के रजिस्ट्रेशन का औप्शन आएगा. अब इसपर क्लिक करें. क्लिक करते ही यहां आपको यूजर नेम, पासवर्ड और ईमेल आईडी डालनी हैं. अब कंटीन्यू पर क्लिक करें. इसके बाद नया पेज खुल जाएगा. यहां ट्रेक इंटरवौल को 1 मिनट कर दें, ताकि फोन के हर एक मिनट की लोकेशन मिलती रहे. इसके बाद इसे सेव कर दें, अब आपका काम पूरा हो चुका है.

ऐसे करें ट्रैक

फोन ट्रैक करने के लिए अपने फोन या कंप्यूटर के ब्राउजर से https://www.followmee.com/m/login.aspx पर लौगिन करना होगा. जैसे ही आप लौगिन करेंगे तो दो औप्शन मिलेंगे. इनमें से दूसरे नंबर पर आ रहे Continue to My Map पर क्लिक करना है. जैसे ही आप मायमैप पर क्लिक करेंगे तो उस फोन की लोकेशन आ जाएगी. जिस जगह पर फोन वह जगह गूगल मैप पर दिखाई देगी. इसके साथ इसका पता भी आएगा. अगर आपके फोन की लोकेशन बदलती है तो भी आपको इसका पता चलता रहेगा.

अब 2 मार्च को होगी ‘परी’ की दहशत… देखें टीजर

संजय लीला भंसाली की फिल्म “पद्मावत” को लेकर आ रही खबरों की वजह से बौक्स औफिस पर जैसे घमासान सा मच गया है. कहा जा रहा है कि “पद्मावत” 25 जनवरी को रिलीज होगी. जिसकी वजह से फिल्म निर्माता नफा-नुकसान का आंकलन करते हुए अपनी फिल्मों की रिलीज आगे-पीछे कर रहे हैं. “पद्मावत” से जुड़ी इस खबर का असर अनुष्का शर्मा की “परी” पर भी पड़ा है. इसके कारण फिल्म “परी” की रिलीज डेट एक महीना आगे खिसका दी गयी है.

अनुष्का शर्मा आनंद एल राय की फिल्म जीरो के साथ अपनी तीसरी होम प्रोडक्शन फिल्म “परी” की रिलीज पर भी काम कर रही हैं. ये फिल्म पहले 9 फरवरी को रिलीज होने वाली थी. अनुष्का ने ये तारीख बड़े सोच-विचारकर रखी थी, क्योंकि इस दिन कोई बड़ी फिल्म मुकाबले में नहीं थी. मगर, “पद्मावत” की रिलीज 25 जनवरी तय होने से अनुष्का की योजनाओं को ठेस लगी है, क्योंकि “पद्मावत” से बचने के लिए कई फिल्मों के लाइन-अप्स डगमगा गये हैं.

25 तारीख को पहले सिर्फ “पैडमैन” और “अय्यारी” रिलीज हो रही थीं. ऐसे में “पद्मावत” के आते ही सबसे पहले “अय्यारी” ने जगह छोड़ी. बता दें कि “अय्यारी” के निर्देशक नीरज पांडे हैं. इस फिल्म में मनोज बाजपेयी और सिद्धार्थ मल्होत्रा लीड रोल्स में हैं. निर्माताओं का मानना था कि दो बड़ी फिल्मों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला. लिहाजा “अय्यारी” को वे 9 फरवरी की तारीख पर ले गये. वहीं अक्षय कुमार की “पैडमैन” अपने ही समय पर रिलीज होगी.

“अय्यारी” के सामने “परी” को टिकना थोड़ा मुश्किल होता, लिहाजा एक समझदार निर्माता की तरह अनुष्का ने अपनी फिल्म की रिलीज एक महीना आगे खिसका दी. “परी” अब 2 मार्च को होली के मौके पर रिलीज होगी, यानि जब देश में गुलाल उड़ेगा, तब “परी” लोगों के चेहरे का रंग उड़ाएगी, क्योंकि ये साइकोलौजिकल थ्रिलर फिल्म है, जिसमें हौरर का जबर्दस्त तड़का है.

अनुष्का ने अपनी अगली फिल्म ‘परी’ का मोशन पिक्चर भी शेयर किया है, जो काफी दमदार है. अनुष्का ने टीजर शेयर करते हुए लिखा है- दोस्तों मधुर स्वप्न में खो जाइए.

इस विडियो का टाइटल ‘होली विद परी’ यानी परी के साथ होली दिया गया है. यह पोस्टर काफी मजेदार और थ्रिल से भरा नजर आ रहा है. जिसे देखकर उनके फैन्स की बेचैनी और बढ़ जाएगी. फिल्म की कहानी एक परी की है, जो इंसानों की दुनिया में फंस जाती है. वैसे कहानी क्या है, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है. प्रोसित राय निर्देशित परी में अनुष्का के साथ बंगाली सिनेमा के जाने-माने एक्टर परमब्रत चैटर्जी लीड रोल में हैं. इससे पहले अनुष्का ‘एनएच 10’ और ‘फिल्लौरी’ जैसी फिल्में प्रड्यूस कर चुकी हैं.

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