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पैन नंबर के बिना इस साल नही हो पाएंगे ये काम

नए साल में नई चीजों के लिए पैन नंबर अब अनिवार्य हो चुका है. लेनदेन में पारदर्शिता लाने और टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार पैन कार्ड को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है. पहले कुछ ही जगहों पर पैन कार्ड का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब लगातार इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है. सरकार ने इससे जुड़े कुछ नि‍यमों में कई संशोधन कि‍ए हैं, जि‍नकी बदौलत अब कई तरह के लेनदेन में पैन नंबर देना अनिवार्य हो गया है. इसकी वजह से अब आपको पैन की डिटेल्स साथ रखनी होगी. अगर आपके पास पैन कार्ड नहीं है तो आप महज 110 रुपए इसे बनवा सकते हैं. इसके लि‍ए आप औनलाइन अप्‍लाई कर सकते हैं. आइये जानते हैं किन कामों के लिए जरूरी है पैन नंबर.

इन 10 कामों के लिए जरूरी होगा पैन नंबर

  • बैंक अकाउंट खोलना या FD के लिए जरूरी.
  • एक दि‍न में 50 हजार या उससे ऊपर कैश जमा करने के लिए जरूरी.
  • प्रौपर्टी खरीदने के लिए जरूरी.
  • गाड़ी खरीदने के लिए जरूरी.
  • वि‍देश यात्रा के लि‍ए फ्लाइट टिकट बुक करने के लिए जरूरी.
  • होटल बि‍ल की पमेंट के लिए जरूरी.
  • शेयर, बौन्‍ड, म्‍युचुअल फंड या डिबेंचर खरीदने के लिए जरूरी.
  • क्रेडि‍ट, डेबिट कार्ड या डीमैट एकाउंट के लि‍ए अप्‍लाई करने के लिए जरूरी.
  • किसी भी तरह की कमाई के लिए, नहीं तो 20 परसेंट टीडीएस कटेगा.
  • प्री-पेड मनी वौलेट या गिफ्ट कार्ड से 50 हजार या उससे ऊपर की ट्रांजैक्‍शन के लिए जरूरी.

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औनलाइन बनवाएं पैन कार्ड

  • औनलाइन अप्लाई करने के लिए आप NSDL के पोर्टल tin-nsdl.com पर जाकर सर्विसेज पर जाएं.
  • इस लिंक पर क्लिक करें.
  • यहां आप अपनी बेसिक जानकारी नाम, मोबाइल, ईमेल आईडी भरें.
  • अपने डौक्युमेंट स्कैन करके अपलोड करें.
  • फीस औनलाइन ही जमा कराएं.
  • बस आपका पैन कार्ड बनकर तैयार हो जाएगा.

ऐसे भी बनवा सकते हैं पैन कार्ड

  • incometaxindia.gov.in पर जाएं.
  • PAN औप्शन में जाकर अप्लाई औनलाइन पर क्लिक करें.
  • NSDL या UTIITSL के जरिए फौर्म भरकर जमा कर सकते हैं.
  • इसकी फीस 96 रुपए है.
  • क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए यह पेमेंट करें.
  • पेमेंट होने के बाद और आवेदन जमा हो जाने के बाद एकनौलिजमेंट फौर्म का प्रिंटआउट लेकर उस पर अपना फोटो लगाएं और साइन करें.
  • जरूरी दस्तावेज लगाकर आपको कूरियर या स्पीड पोस्ट से NSDL/UTIITSL को भेजना होगा.
  • दस्तावेज औनलाइन अप्लाई करने के 15 दिनों के भीतर पहुंच जाने चाहिए.

मातृभूमि के सम्मान को ठेस पहुंचे ऐसा कोई काम नहीं करुंगा : यूसुफ पठान

भारतीय टीम से बाहर चल रहे औलराउंडर खिलाड़ी यूसुफ पठान पर डोप टेस्ट में फेल होने की वजह से पांच महीने का बैन लगाया गया है. यह बैन बीसीसीआई ने उन पर पिछले साल 15 अगस्त को लगाया गया था, जिसके बाद से वह क्रिकेट से दूर हैं. यह बैन 14 जनवरी 2018 तक यूसुफ पठान पर जारी रहेगा. बीसीसीआई ने डोपिंग को लेकर खिलाड़ियों को किसी भी तरह की छूट ना देने की पौलिसी बनाई हुई है.

पठान पर डोपिंग नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगने के बाद से उनका आईपीएल में खेलना भी मुश्किल नजर आ रहा है. हालांकि, आईपीएल के लिए खिलाड़ियों की नीलामी 27-28 जनवरी को होनी है और तब तक पठान पर से बैन हटाया जा चुका होगा. यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई फ्रेंचाइजी इस मामले के सामने आने के बाद पठान पर दांव लगाना पसंद करेगी.

इस मामले पर पठान ने ट्विट कर एक स्टेटमेंट जारी किया है. उन्होंने पहले तो बीसीसीआई को अपना केस सामने रखने के लिए धन्यवाद कहा, इसके बाद उन्होंने अपने बयान में कहा कि उस समय वह एक सीरप का सेवन कर रहे थे.

पठान ने कहा कि सीरप टीम के डौक्टर की अनुमति के बाद ही लिया गया था. गले के इन्फेक्शन की वजह से उन्हें उन दिनों काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. जिसके बाद डौक्टर के निर्देशानुसार उन्होंने सीरप का इस्तेमाल किया. सीरीप के अंदर कुछ नशीले पदार्थ होते हैं. पठान ने कहा कि मैं कभी कुछ ऐसा करने की कोशिश नहीं करूंगा जिससे मातृभूमि के सम्मान को ठेस पहुंचे या बड़ौदा की टीम की बदनामी हो. पठान ने अपनी गलती मान ली, जिसके बाद बीसीसीआई ने भी उन पर केवल पांच महीने का ही बैन लगाना उचित समझा.

पठान की बात जानने के बाद बीसीसीआई ने कहा कि पठान ने जिस पदार्थ का इस्तेमाल किया है वह सीरप में आमतौर पर पाया जाता है. उन्होंने कहा कि पठान की बात से वह पूरी तरह से सहमत है. पिछले साल बीसीसीआई के कहने पर ही सिलेक्टर्स ने युसूफ को बड़ौदा के रणजी टीम में नहीं शामिल किया था. आईपीएल में कोलकाता को अपने दम पर कई मैच जीताने वाले पठान को वहां भी रिटेन नहीं किया गया है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि खिलाड़ियों के नीलामी के दौरान यूसुफ पर कौन सी फ्रेंचाइजी भरोसा जताती है.

भारत में लौंच हुआ बजट प्रूफ रेस्पोकेयर एंटी-पोल्यूशन मास्क

घर के भीतरी और बाहरी वायु प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए अत्याधुनिक उत्पाद और समाधान पेश करने वाले अग्रणी ई-कौमर्स पोर्टल क्लीन एयर स्टोर ने दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले बेहद प्रभावी प्रदूषण विरोधी मास्क रेस्पोकेयर का लौंच किया. यह बाजार में उपलब्ध एकमात्र मास्क है जो उपयोगकर्ता को पीएम 2.5 कणों और नाइट्रोजन डाई औक्साईड जैसी विशैली गैसों से बचाता है. रेस्पोकेयर मास्क ‘पोल्यूशन इंडीकेटर’ से युक्त है जो हवा में मौजूद नाइट्रोजन डाई औक्साईड गैस के स्तर के बारे में भी जानकारी देता है.

रेस्पोकेयर एंटी-पोल्यूशन मास्क निजी सुरक्षा का पहला उत्पाद है जो हवा में मौजूद हानिकारक औक्सीडाइज़िंग गैसों को उदासीन करने की क्षमता रखता है. बिल्ट-इन एन 98 और एक्टीवेटेड कार्बन फिल्टर से युक्त मास्क 5 पदों की फिल्ट्रेशन प्रणाली के साथ आता है, जिससे उपयोगकर्ता की सांस के साथ साफ हवा भीतर जाती है, इसमें दो फिल्ट्रेशन लेयर्स है जो हवा में मौजूद धूल के कणों को भी फिल्टर कर सकती हैं,

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इसका सक्रिय रेस्पो लेयर नाईट्रोजन डाई औक्साईड और सल्फर डाई औक्साईड जैसी विशैली गैसों को 90 प्रतिशत तक उदासीन कर देता है. इसके ‘इंडीकेटर सिस्टम’ का अनूठा डिज़ाइन हवा में मौजूद नाईट्रोजन डाई औक्साईड के स्तर को पहचान लेता है. इंडीकेटर का रंग हवा में मौजूद विशैली गैसों की मात्रा के आधार पर सफेद से बदलकर हल्का पीला या गहरा भूरा हो जाता है. इस तरह उपयोगकर्ता मास्क का रंग बदलने के बाद आधार मास्क को बदल सकता है.

रेस्पोकेयर एंटी-पोल्यूशन मास्क के लौंच पर बात करते हुए क्लीन एयर स्टोर की संस्थापक मिस शिवानी गुप्ता ने कहा, ‘‘हवा में मौजूद पीएम 2.5, पीएम 10 पार्टीकुलेट्स और विशैली गैसें सांस के साथ हमारे भीतर चली जाती हैं और फेफड़ों एवं दिल की बीमारियों का कारण बनती हैं. हम चाहते हैं कि लोग चाहे घर के भीतर रहें या बाहर वे गुणवत्तापूर्ण हवा में सांस ले सकें. दोपहिया वाहन, साइकल चलाते समय, सैर या जौगिंग करते समय उनकी सांस के साथ शुद्ध हवा ही अंदर जाए. भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के स्तर को देते हुए हमने एंटी-पोल्यूशन मास्क बाज़ार में उतारा है जो आपको खतरनाक गैसों से सुरक्षित रहेगा. बेहतरीन डिज़ाइन वाला यह स्टाइलिश मास्क आपके बाहरी प्रदूषित हवा से भी बचाएगा.’’

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हाल ही में हुए अनुसंधान के अनुसार दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 शहर भारत में हैं. खतरनाक फाईन पार्टीकुलेट मैटर (पीएम 2.5) के कारण 2015 में 1.1 मिलियन लोगों की मौत समय से पहले हो गई. दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला रेस्पोकेयर मास्क इन्हीं प्रदूषकों से आपको बचाता है. मास्क आरामदायक और एडजस्टेबल नोज़ बैण्ड के साथ आता है जिससे हवा का रिसाव नहीं होता और मास्क आपकी नाक पर ठीक से फिट हो जाता है. यह मास्क हवा में मौजूद प्रदूषकों जैसे धूल, पराग, पीएम 10, पीएम 2.5, विशैली गैसों और धुएं को हमारे शरीर के भीतर जाने से रोकता है. इस तरह यह हमारे स्वास्थ्य के लिए प्रभावी उपकरण है.

रेस्पोकेयर की कीमत मात्र 399 रु है. यह कम्पनी की रीटेल साईट तथा दिल्ली एनसीआर के सभी फार्मेसी एवं कन्वीनिएन्स स्टोर्स पर उपलब्ध है. मास्क आपको प्रदूषण रहित साफ हवा में सांस लेकर सेहतमंद जीवन जीने का मौका देता है.

स्वौड्रस एंड स्केप्ट्रस : महिलाओं को प्रेरित करने के लिये बनाई गई है ये फिल्म

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर बायोपिक फिल्म बनाने के लिए केतन मेहता पिछले तीन वर्ष से प्रयासरत थे. वह इस फिल्म को कंगना रानौट के साथ बनाना चाहते थे. पर अचानक कंगना रानौट ने उन्हे धोखा देकर दक्षिण भारतीय फिल्मकार कृष के निर्देशन में फिल्म ‘मणिकर्णिका’ करने लगीं. कंगना रानौट का दावा है कि उनकी फिल्म ‘‘मणिकर्णिका’’ 27 अप्रैल को प्रदर्शित होगी, मगर अभी तक इसकी शूटिंग पूरी नहीं हुई है.

जबकि मूलतः भारतीय मूल की अमेरिका में रह रही मशहूर नृत्यांगना, शिक्षाविद तथा फिल्मकार स्वाती भिसे ने झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के जीवन व कृतित्व पर आधारित फिल्म ‘‘स्वौड्रस एंड स्केप्ट्रस’’ (Swords and Sceptres) का निर्माण व निर्देशन किया है. इस फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है. इस फिल्म से जुड़े सूत्र दावा कर रहे हैं कि स्वाती भिसे अपनी फिल्म को मार्च माह में ही भारत सहित पूरे विश्व में प्रदर्शित करने वाली हैं.

इस फिल्म को तथ्यपरक बनाने के लिए स्वाती भिसे ने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर गहराई से बहुभाषी शोध किया. ताकि परदे पर दिखाई जाने वाली रानी का चरित्र की पूर्णता और विषय का सांस्कृतिक परिवेश यथार्थ के धरातल पर हो सके. स्वाती भिसे के शोध में मदद करते हुए ऊषा गुप्ता ने कई संस्कृत और मराठी ग्रंथों का अनुवाद किया. ऊषा गुप्ता अनुवादित किताब में 1890 में विष्णु गोड़से लिखित मराठी भाषा की किताब ‘‘माझा प्रवास’’ है.

स्वाती भिसे ने महज रानी लक्ष्मीबाई (देविका भिसे) ही नहीं, बल्कि सभी किरदार की वेशभूषा की प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए उस काल की वेशभूषा, रहन सहन आदि का भी अध्ययन किया. यहां तक कि उस कालखंड में राजा रानी से लेकर आम इंसानों व औरतों द्वारा पहने जाने वाले गहनों से लेकर उनके मेकअप आदि का भी अध्ययन किया.

महज रानी लक्ष्मीबाई के चरित्र के लिए 50 से अधिक कास्ट्यूम सिलवाए गए. इनमें विशेष डिजाइन की परंपरागत महाराष्ट्रियन साड़ी का भी समावेश है. हर किरदार की वेशभूषा को गढ़ने के लिए चंदेरी, पैठानी, कोटा आदि तरह के कपड़ों की भी खोज की गई. फिल्मकार स्वाति भिसे ने नाना साहब(दीपल जोशी) की वेशभूषा को अपनी मित्र विधि सिंघानिया के साथ मिलकर तैयार किया. इसके लिए उन्होंने उस काल खंड में प्रचलित पैटर्नों की जानकारी हासिल करने के लिए पूरे एक वर्ष तक शोधकार्य किया. विधि सिंघानिया ने इन पोशाक के साथ मैच करने वाले जूते भी बनाए.

जबकि रियाज अली मर्चेंट ने झरकारीबाई (अरोपिका डे), मंदार (सिया पाटिल), सुंदर (मंगल सानप), काशी कुनबीन (पल्लवी पाटिल) और मोतीबाई (नैना सरीन) के किरदारों के साथ ही अन्य किरदारों के लिए भी वेशभूषा और घुड़सवारी योग्य जूते तैयार किए. मशहूर भारतीय मेकअप कलाकार विक्रम गायकवाड़ ने भी अपनी राय दी. तो वहीं मराठी और संस्कृत के विशेषज्ञ माधव आप्टे और क्रिकेटर गिरीश मुरूडकर ने किरदारों की पगड़ी डिजाइन करने में योगदान दिया.

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के लिए पारंपरिक शाही आभूषण के लिए फिल्मकार स्वाती भिसे ने अपने परिवार की विरासत के आभूषण यानी कि शिंदे शाही तोदा, महाराष्ट्रियन नथ व परंपरागत हीरे के कान के बाले का इस्तेमाल किया. इसके अलावा दूसरे उस काल खंड के आभूषण पुणे के जौहरी पी एन गाड़गील ने डिजाइनकर बनाए. श्री हरी डायजेम्स के विनय गुप्ता ने हीरों की कटाई की.

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अफसरों व बोर्ड रूम को ज्यों का त्यों परदे पर चित्रित करने के लिए स्वाती भिसे ने लंदन से मदद ली.

खुद स्वाती भिसे कहती हैं-‘‘ इस फिल्म का निर्माण करने के पीछे मेरा मूल मकसद महिलाओं को प्रेरित करने वाली इस वीरांगना की कथा को परदे पर सही ढंग से चित्रित करना रहा है. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने युद्ध के मैदान में किसी की मदद की आस नही लगाई, बल्कि अपने बेटे को पीठ पर बांधकर खुद एक योद्धा बन रणभूमि में उतरी थीं. लक्ष्मीबाई ऐसी विरांगना हैं, जिसने अपनी सेना के साथ ब्रिटिश व ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना का रणभूमि में सामना किया था. वह एक असाधारण नारी थी. वह आधुनिक नारियों के लिए सही मायनों में ‘नारी उत्थान’ की प्रतीक हैं. इस फिल्म में लोगों को वास्तविक झांसी की रानी लक्ष्मीबाई नजर आएगी.’’

स्वाती भिसे आगे कहती हैं-‘‘यदि आप हर पीढ़ी के लोगों को प्रोत्साहित करने वाले किसी असाधारण व्यक्तित्व को परदे पर पेश करना चाहते हैं, तो जरुरी हो जाता है कि उसके साहस, उसकी निडरता व उसकी स्प्रिट को सही अर्थो में परदे पर उकेरा जाए. हमने अपनी फिल्म में महज किसी पात्र या कालखंड का महिमा मंडन नहीं किया है, बल्कि यह कथा एक असाधारण नारी के धैर्य की है.’’

‘स्वौड्रस एंड स्केप्ट्रेस’ का निर्देशन करने के साथ ही चार्लस सलमान के साथ स्वाती भिसे ने निर्माण किया है. जबकि फिल्म की पटकथा स्वाती भिसे ने देविका भिसे के साथ मिलकर लिखी है. फिल्म में रानी लक्ष्मी बाई का किरदार भी देविका भिसे ने ही निभाया है. फिल्म के अन्य कलाकार हैं-डेरेक जोकोबी, रूपर्ट ईवर्ट, बेन लंब, जेाधी में जैसे विदेशी कलाकारों के अलावा  नागेश भोसले, यतिन कार्येकर, मिलिंद गुणाजी, आरिफ जाकरिया, अजिंक्य जैसे भारतीय कलाकार शामिल हैं.

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का किरदार निभाने वाली और फिल्म की सहलेखिका देविका भिसे इससे पहले ‘द मैन हू न्यू इंफीनिटी’, ‘इम्पेस्सबल मौन्स्टर्स’, ‘द ऐक्सिडेंटल पब्सन’ शामिल हैं.

फिल्म का फिल्मांकन पूरा हो चुका है. फिल्म पूरे विश्व में एक साथ प्रदर्शित की जाएगी, पर अभी तक प्रदर्शन की तारीख घोषित नहीं की गयी है.

क्या टीम इंडिया को सचमुच अगले ‘कपिल देव’ मिल गए हैं

टीम इंडिया के लिए पिछले दिनों में जिस तरह से हार्दिक पांड्या ने प्रदर्शन किया है, उनकी तुलना उसके बाद कपिल देव से होने लगी है. इससे पहले भी टीम इंडिया में पिछले तीन चार दशकों में अनेक ऐसे खिलाड़ी आए जिन्होंने कपिल को रिप्लेस करने की कोशिश की. रोबिन सिंह, इरफान पठान और स्टुअर्ट बिन्नी. इनके अलावा भी तमाम ऐसे नाम हैं जिनके बारे में कहा गया कि टीम इंडिया को नया ‘कपिल देव’ मिल गया है. हालांकि बाद में ये खिलाड़ी बहुल लंबे समय तक टीम इंडिया में रह नहीं पाए.

इस बारे में जब खुद कपिल देव से पूछा गया तो भारत के इसे सर्वश्रेष्ठ आलराउंडर ने यहां कहा कि हार्दिक पंड्या के पास योग्यता है, लेकिन यह समय ही बताएगा कि वह वास्तविक आलराउंडर बनेगा या नहीं. कपिल से पूछा गया कि क्या पंड्या भारत के लिये वास्तविक आलराउंडर बन सकता है, उन्होंने कहा, ‘समय बताएगा. थोड़ा इंतजार कीजिए. उसके पास योग्यता है.’ उन्होंने कहा, ‘टीम हमेशा उचित संयोजन की तलाश में रहती है. जब आपके पास एक आलराउंडर होता है तो कप्तान के लिये अच्छा रहता है. उसके पास विकल्प होते हैं.’

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90 के दशक से टीम इंडिया इस बात के लिए लगातार संघर्ष करती रही कि टीम में कोई ऐसा खिलाड़ी हो जो कपिल की तरह बेहतरीन औल राउंडर हो और टीम में संतुलन बना सके, लेकिन हार्दिक पांड्या के टीम इंडिया में आने के बाद से लगातार ऐसा कहा जा रहा है कि वह कपिल देव की जगह को भर सकते हैं. हालांकि, उनके अब तक के प्रदर्शन को देखकर कुछ भी कह पाना मुश्किल है, लेकिन फिलहाल उन्होंने कपिल देव की बराबरी एक रिकौर्ड में तो कर ली है.

क्या टीम इंडिया को सचमुच कपिल देवमिल गए हैं

दिसंबर 2017 में श्रीलंका के खिलाफ वाई राजशेखर रेड्डी एसीए-वीसीए स्टेडियम में खेले गए एक मुकाबले में हार्दिक पांड्या ने 31 साल बाद उसी कारनामे को दोहराया है, जिसे 1986 में कपिल देव ने करके दिखाया था. जुलाई 2017 में श्रीलंका के खिलाफ डेब्‍यू करने के बाद अपने शानदार प्रदर्शन से पांड्या ने टीम में अपनी जगह पक्‍की कर ली है. श्रीलंका के खिलाफ रविवार को पांड्या ने 2017 में अपना 30वां विकेट हासिल किया.

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इस विकेट को हासिल करने के साथ ही पांड्या, कपिल देव के बाद एक साल में 500 रन और 30 से ज्‍यादा विकेट लेने वाले दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं. कपिल देव ने 1986 में 27 मैच खेलकर 517 रन बनाए थे. इसके अलावा उन्‍होंने 32 विकेट्स भी लिए थे. इस दौरान कपिल का सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन 30 रन देकर 4 विकेट था.

सिर्फ 899 रुपए में करें हवाई सफर, इंडिगो ने शुरू की स्कीम

इंटरग्लोब एविशन की इंडिगो ने नए साल के मौके पर यात्रियों के लिए सबसे बड़ी न्यू ईयर सेल लेकर आई है. कंपनी सिर्फ 899 रुपए के बेस प्राइस पर हवाई सफर का मौका दे रही है. इस औफर के तहत एक फरवरी से 15 अप्रैल, 2018 के बीच यात्रा करने पर ही यह औफर लागू है. औफर का फायदा उठाने के लिए टिकट की बुकिंग 8 जनवरी से 10 जनवरी के बीच करानी होगी. इंडिगो का यह औफर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों पर लागू होगा.

और भी मिलेगा बड़ा फायदा

सस्ते हवाई टिकट के अलावा यात्रियों को 10 फीसदी का अतिरिक्त कैशबैक और एचडीएफसी बैंक क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर 600 रुपए के इंडिगो स्पेशल सर्विस वाउचर्स भी मिलेगा.

इन रूट्स पर मिलेगा सस्ता टिकट

दिल्ली से चंडीगढ़ के लिए शुरुआती टिकट 899 रुपए, दिल्ली से जयपुर के लिए 999 रुपए में है. मुबंई से बंग्लुरु के लिए न्यूनतम 1399 रुपए जबकि इंडिगो की टिकट मुबंई से चेन्नई के लिए 1499 रुपए में है. बैंकौक से कोलकता के लिए 4099 रुपए और दुबई से दिल्ली के लिए 5299 रुपए में है.

तिरुपति के लिए भी शुरू की उड़ान

इंडिगो ने रीजनल नेटवर्क का विस्तार करते हुए तिरुपति के लिए नई उड़ान शुरू की है. अब हैदाराबद से तिरुपति तक के लिए 3 डेली नौन स्टौप फ्लाइट जाएगी. साथ ही डबल डेली नौन स्टौप फ्लाइट के जरिए बंग्लुरु से जुड़ेगा. यह जानकारी कंपनी ने जारी की है. कंपनी की फ्लाइट तिरुपति से दिल्ली, मुंबई, कोलकता, दुबई और सिंगापुर सहित कई शहरों के लिए जाएगी. कंपनी ने हाल ही में अपने मौजूदा घरेलू नेटवर्क पर छह नई प्लाइट्स और पांच अतिरिक्त आवृत्तियों की घोषणा की थी। इंडिगो पहली बार उदयपुर, वाराणसी, पटना और लखनऊ से एक फरवरी से कनेक्ट होगा.

फेसबुक अकाउंट कब और कहां हुआ इस्तेमाल, ऐसे करें पता

सोशल मीडिया का इस्तेमाल समय के साथ बहुत बढ़ गया है. लोग अपनी जिंदगी से जुडी छोटी-बड़ी हर बात को औनलाइन शेयर करना पसंद करते हैं. अपने सोशल मीडिया अकाउंट का हम लोग कई डिवाइसेज पर इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल होता है की हमने किन डिवाइसेज पर लौग-इन किया था और किन डिवाइसेज पर हम लौग-आउट करना भूल गए हैं. हम आपको ट्रिक बताने जा रहे हैं जिससे आप पता लगा सकते हैं की आपने फेसबुक का सोशल मीडिया अकाउंट किन डिवाइसेज से लौग-आउट नहीं किया है.

इन स्टेप्स को करें फौलो

स्मार्टफोन यूजर्स कैसे करें पता

  • सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में फेसबुक एप को ओपन करें. इसमें ऊपर की तरफ नजर आ रहीं तीन लाइन्स को टैप करें। इसमें आपको एप सेटिंग का विकल्प मिलेगा।
  • इसमें अकाउंट सेटिंग के विकल्प का चुनाव करें.
  • इसके बाद ‘सिक्योरिटी और लौग इन’ के विकल्प पर जाएं.
  • यहां आपको ‘Where you’re logged in’ का विकल्प मिलेगा. इसमें आपको उन डिवाइसेज का ब्यौरा दिखेगा जहां आपने हाल ही में लौग-इन किया होगा. सभी डिवाइसेज को देखने के लिए ‘See more’ के विकल्प पर क्लिक करें.

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  • इस विकल्प का चुनाव करते ही सभी डिवाइसेज की लिस्ट आपके सामने आ जाएगी.
  • इसके तहत जहां-जहां आपने लौग-इन किया होगा, उन सभी से लौग-आउट करने का विकल्प मिलेगा.

लैपटौप यूजर्स कैसे करें पता

  • लैपटौप में भी यह प्रक्रिया लगभग एक सामान है. स्क्रीन पर ड्राप डाउन के आइकन पर क्लिक करें.
  • इसमें सेटिंग के विकल्प पर जाएं.
  • सेटिंग्स में फोन की ही तरह सिक्योरिटी और लौग-इन का विकल्प मिलेगा.
  • यहां आपको ‘Where you’re logged in’ का सेक्शन मिलेगा.
  • इसमें ‘See More’ के विकल्प पर क्लिक करें.
  • यहां भी आपको सभी डिवाइस से लौग आउट करने का विकल्प मिलेगा.

इस ट्रिक से आप पता लगा सकते हैं की आपने कहां-कहां अपना फेसबुक अकाउंट लौग-इन किया है और सुरक्षा के लिहाज से उसे लौग-आउट भी कर सकते हैं.

हैप्पी बर्थडे: एक्टर-सिंगर नही औल राउंडर हैं फरहान अख्तर

फरहान अख्तर को बौलीवुड में औल राउंडर सेलिब्रिटी के रूप में जाना जाता है. वह फिल्मों में एक्टिंग से लेकर सिंगिंग तक का हुनर दिखा चुके हैं. फरहान एक अच्छे एक्टर होने के साथ-साथ एक बेहतरीन लेखक, निर्माता और निर्देशक भी हैं. इसके साथ ही फरहान कुछ टीवी शो को होस्ट भी कर चुके हैं.

फरहान अख्तर का जन्म 9 जनवरी (1974) को मशहूर लेखक जावेद अख्तर के घर हुआ. फरहान की मां का नाम हनी ईरानी है. अपने जमाने की प्रसिद्ध एक्ट्रेस शबाना आजमी फरहान की सौतेली मां हैं. इनकी एक बहन भी हैं जिनका नाम जोया अख्तर हैं. वह भी एक निर्देशक और लेखक हैं. फरहान एक फिल्मी बैकग्राउंड से हैं.

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उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में फिल्म लम्हे से की. उस समय फरहान महज 17 साल के थे. उन्होंने साल 2001 में फिल्म ‘दिल चाहता है’ के जरिए एक लेखक और निर्देशक के रूप में डेब्यू किया. उनके निर्देशन में बनी ये फिल्म दर्शकों के बीच काफी पौपुलर हुई.

फरहान ने साल 2008 में फिल्म रौक आन से एक्टिंग में डेब्यू किया. इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट मेल एक्टर डेब्यू अवौर्ड मिला. फरहान इसके अलावा जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, भाग मिल्खा भाग, शादी के साइड इफेक्ट्स और रौक औन 2 जैसी फिल्मों में एक एक्टर के रूप में काम किया.

फरहान अख्तर ने फिल्मों में काम करने की चाहत के चलते अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की थी. उन्हें ग्रैजुएशन की दूसरे साल में कौलेज से निकाल दिया गया था.

फरहान अख्तर एक बेहतरीन लेखक भी हैं. उन्होंने फिल्म ‘दिल चाहता है’ कि स्क्रिप्ट खुद लिखी थी. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके पीछे उनकी मां का हाथ था. एक बार उन्होंने फरहान को धमकी देते हुए कहा था कि अगर जिंदगी में कुछ नहीं करोगे से घर से निकाल दूंगी. इसके बाद फरहान ने दिल चाहता है की कहानी लिखी. ये फिल्म काफी सफल रही.

फरहान अख्तर ने फिल्म जिंदगी ना मिलेगी दोबारा की शूटिंग के दौरान काफी एडवेंचर किया लेकिन बहुत कम ही लोग जानते हैं कि उन्हें कौकरोच से काफी डर लगता है.

आमिर खान की हिट फिल्म रंग दे बसंती पहले फरहान को ही औफर हुई थी. लेकिन तब उन्होंने फिल्म लेने से मना कर दिया था जिसका उन्हें आज भी अफसोस है.

फरहान को 22 साल तक कार और बाइक चलानी नहीं आती थी. उन्होंने फिल्म कार्तिक कौलिंग कार्तिक की शूटिंग के दौरान कार चलानी सीखी.

समोसे तरह तरह के

पहले जहां केवल आलू के समोसे ही बाजार में बिकते थे अब कई तरह के समोसे जिन में खोया वाले मीठे समोसे भी मिठाई की दुकानों में बिकने लगे हैं. खोया और आलू के समोसे ज्यादा दिन तक नहीं रखे जा सकते इसलिए इन्हें बनने के कुछ घंटे बाद ही खाना सही रहता है. अब मेवा और मसालों से ऐसे समोसे भी तैयार किए जाने लगे हैं, जो कई दिनों तक चलते हैं. यह नमकीन की तरह नाश्ते में इस्तेमाल होते हैं. पौष्टिक होने से इन को खाने के बाद भूख कम लगती है. मेवा मिला होने से यह शरीर को ताकत भी देते हैं.

समोसा भारत का ही नहीं पश्चिम एशियाई देशों का भी प्रमुख नाश्ता है. कमाल की बात यह है कि 1000 साल से इस का तिकोना आकार नहीं बदला है. अपने खास आकार के कारण ही इस को कई इलाकों में तिकोना भी कहा जाता है. यह छोटे से बडे सभी तरह के आकार में मिलता है. आकार के हिसाब से ही इस को कीमत तय होती है.

मुगलकाल में मीट वाला समोसा सब से ज्यादा प्रचलित था. भारत में आने के बाद समोसा के अंदर भरी जाने वाली सामग्री में बदलाव आया. ब्रिटिश काल में जब चाय का चलन बसे तो भारतीयों को चाय का स्वाद पसंद नहीं आता था. ऐसे में चाय और समोसे की जुगलबंदी तैयार हो गई. आज गलीचौराहों पर सब से ज्यादा चायसमोसा ही बिकता है.

आज समोसा भारत का सब से ज्यादा बिकने वाला स्ट्रीट फूड है. उत्तर भारत के हर कस्बे और शहर में समोसे की दुकान है. महाराष्ट्र के कुछ शहरों में रगड़ा समोसा चलन में है.

इस में समोसे के अंदर ब्रेड, आलू, भुजिया और दूसरी कई चीजें भरी जाती हैं. समोसे में स्वाद के लिए पनीर समोसा व मटरकाजू समोसे का इस्तेमाल भी होने लगा है. गोआ में कुछ खास दुकानों पर मीट वाला मांसाहारी समोसा मिलता है. समोसा अकेला ऐसा व्यंजन है जो इतना पुराना होने के बाद भी बदला नहीं है.

आलू भरे समोसे का अपना अलग बाजार है. समोसा भारतीय खानपान व संस्कृति के साथ पूरी तरह से रच बस गया है. यह रोजगार का भी बडा साधन है. कसबों और सड़क किनारे छोटी सी पूंजी लगा कर समोसा बनाने की दुकान खोली जा सकती है. समोसा लोगों को इतना पसंद है कि इस में नुकसान की आशंका नहीं रहती है.

समोसा बनाना आसान

समोसा बनाने के लिए सामग्री के रूप में मैदा, आलू , रिफाइंड तेल, नमक, धनिया पाउडर, गरम मसाला और पिसी खटाई का प्रयोग किया जाता है. सब से पहले आलू को उबाल लें. इस के बाद मैदा में तेल और नमक डाल कर अच्छी तरह से गूंथ लें. उबले आलू हाथ से ही मोटामोटा फोड़ दें. कढ़ाई में तेल डाल कर कर उस में धनिया पाउडर, गरम मसाला, नमक और अमचूर मिलाते हुए भून लें. अब इस में आलू डाल कर ठीक से मिला कर रख दें. पहले से तैयार मैदा के छोटेछोटे पीस तैयार करें. इन को गोल रोटी की तरह 8 इंच व्यास के आकार में तैयार करें. फिर चाकू से 2 हिस्सों में काट दें. एक भाग को तिकोना बनाते हुए उस में आलू मसाला भर लें. दोनों कोने चिपका दें. कढ़ाई में रिफाइंड तेल डाल कर तैयार समोसे तल लें. समोसे को मीठी और नमकीन दोनों ही चटनी के साथ खाया जाता है. मेवा और मसाला समोसे में आलू की जगह मेवा और मसाला पहले से तैयार कर के भरा जाता है.

मुनाफे का गणित

डेढ़ किलो आलू और 1 किलो मैदा से करीब 35 समोसे तैयार होंगे. यह सामान्य आकार के करीब 60-70 ग्राम वाले समोसे होंगे. इस को बनाने के लिए 30 रुपए का आलू, 30 रुपए का मैदा, 30 रुपए का बेजिटेबल आयल और 30 रुपए का मसाला लगता है. ऐसे में 120 रुपए खर्च कर करीब 35 समोसे तैयार होंगे. यह समोसे 8 रुपए प्रति समोसे के हिसाब से बिकेंगे. ऐसे में यह समोसे 280 रुपए के बिकेंगे. जिस में 95 रुपए का मुनाफा होगा. समोसा महंगा करने के लिए दुकानदार उस में कई बार मटर, काजू और पनीर डाल कर उस की कीमत दोगुनी कर देते हैं. जबकि ऐसा करने में प्रति समोसा केवल 2 रुपए की लागत बढ़ेगी.

भारत के साथ मैच ना खेल पाने से पाकिस्तान को हो रहा भारी नुकसान

भारत और पाकिस्तान के बीच 2012 के बाद से कोई भी बाइलेट्रल सीरीज नहीं खेली जा सकी है. पाकिस्तान की तमाम मिन्नतों और गुजारिशों के बावजूद बीसीसीआई ने पाकिस्तानी टीम के साथ दौरे को मंजूरी नहीं दी. अब भारत सरकार की ओर से भी ये कहा चुका है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाएगा, दोनों देशों के बीच कोई भी द्विपक्षीय सीरीज नहीं होगी. न तो भारत में और न ही किसी और देश में.

इसके बाद पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर जावेद मियांदाद का कहना है कि अब पीसीबी को बीसीसीआई के सामने गिड़गिड़ाना छोड़ देना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत के साथ न खेलने के कारण हम बर्बाद नहीं हो जाएंगे. हमें अपने क्रिकेट पर ध्यान देना चाहिए. इससे पहले दूसरे क्रिकेटर और अधिकारी भी इस तरह की बातें कर चुके हैं, लेकिन ये पूरी तस्वीर नहीं है.

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एक तरफ अधिकारी और क्रिकेटर इस तरह की बातें कर रहे हैं, लेकिन वहीं दूसरी तरफ पीसीबी आईसीसी के सामने बीसीसीआई से 7 करोड़ डौलर हर्जाने के रूप में मांग रहा है. दरअसल 2012 से दोनों देशों के बीच कोई भी सीरीज नहीं हुई है. 2015 में इन दोनों बोर्ड ने 2023 तक 6 बाइलेटरल सीरीज खेलने का करार किया था. लेकिन इसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों का असर क्रिकेट सीरीज पर भी पड़ा. दोनों देशों के बीच कोई भी सीरीज नहीं हुई.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को भारत के साथ एक सीरीज न खेलने के कारण 600 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है. पीसीबी से जुड़े सूत्रों के अनुसार टीम इंडिया के पाकिस्तान न आने से वह दो सीरीज नहीं खेल पाई. इस कारण उसे 20 करोड़ डौलर का नुकसान हुआ. यानी एक सीरीज पर 10 करोड़ डौलर. भारतीय रुपयों में ये नुकसान करीब 600 करोड़ रुपए बैठता है.

टीम इंडिया के साथ सीरीज न होने के कारण पीसीबी को एंडोर्समेंट से मिलने वाली राशि भी आधी हो जाती है. दोनों देशों के बीच सीरीज के कारण उसे पहले 15 करोड़ डौलर पांच साल के लिए मिलने वाले थे. लेकिन इसमें से आधे पैसे ही मिलेंगे.

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