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इस फिल्म में साथ दिखेंगे मिथुन और नसीरुद्दीन शाह

हेट स्टोरी, बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम जैसी कई फिल्में डायरेक्ट करने वाले विवेक अग्निहोत्री ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पर फिल्म बनाने की घोषणा की है. उन्होंने एक ट्वीट कर इसकी जानकारी दी कि इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और मिथुन चक्रवर्ती साथ नजर आएंगे. फिल्म का नाम ‘द ताशकंद फाइल्स’ होगा. अग्निहोत्री ने कहा कि स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े रहस्य पर बनने वाली फिल्म के लिए जरूरी है कि हम महान कलाकारों के साथ विश्वसनीयता से काम करें.

फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री ने ट्वीट किया कि हमारे दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई थी. यह हृदयाघात था या उन्हें जहर दिया गया था? 52 साल बाद भी आजाद भारत में गुप्त रखी गई इस बात का खुलासा नागरिकों, उनके परिजनों व समर्थकों के समक्ष नहीं हुआ है. कुछ लोग कहते हैं कि उनकी नैचुरल डेथ हुई थी जबकि कुछ लोगों को इसपर संदेह है.

उन्होंने आगे लिखा “हिंदुस्तान का नागरिक होने के नाते, हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है कि हमारे दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत कैसे हुई इसके बारे में जानें. कई साल के शोध के बाद मैं फिल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ बनाने जा रहा हूं और उनकी मौत के इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहा हूं.”

दरअसल, करीब पांच दशक गुजर जाने के बाद भी लालबहादुर शास्त्री की मौत कैसे हुई? यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है. भारत पाकिस्तान के बीच 1965 का युद्ध खत्म होने के बाद 10 जनवरी 1966 को शास्त्री जी ने पाकिस्तानी सैन्य शासक जनरल अयूब खान के साथ उज्बेकिस्तान के ताशकंद शहर में ऐतिहासिक शांति समझौता किया था.

आश्चर्यजनक रुप से उसी रात शास्त्री जी का निधन कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने से हुआ था. बता दें, वो पहले व्यक्ति थे, जिन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया था.

फिल्म के डायरेक्टर ने इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और मिथुन चक्रवर्ती के होने की पुष्टी तो कर दी है मगर लाल बहादुर शास्त्री की भूमिका में कौन नजर आएगा इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है. कहा जा रहा है कि फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री शास्त्री जी की भूमिका के लिए एक प्रसिद्ध कलाकार का चुनाव करेंगे और इसकी घोषणा भी जल्द ही की जाएगी. फिल्म की शूटिंग जल्द ही शुरू की जाने की उम्मीद है.

तो क्या जियो कौइन लेकर आ रहे हैं मुकेश अंबानी..?

रिलायंस जियो ने टेलीकौम में एंट्री के साथ ही धमाल मचा दिया था, तो क्या मुकेश अंबानी की टु-डु लिस्ट में अगली बारी क्रिप्टोकरेंसी की है? क्या अब जियो बिटकौइन की तरह क्रिप्टोकरेंसी लाने की तैयारी कर रही है? एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस जियो इन्फोकौम खुद की क्रिप्टोकरेंसी जियो कौइन लाने की योजना पर काम कर रही है. एक रिपोर्ट का दावा है कि 50 सदस्यों का एक दल ब्लौकचेन टेक्नोलौजी पर काम कर रहा है. यह टीम मुकेश के बड़े बेटे आकाश अंबानी की देखरेख में काम कर रही है.

रिपोर्ट् में कहा गया है कि कंपनी का टार्गेट 25 साल तक के 50 लोगों को भर्ती करके आकाश अंबानी की टीम तैयार की जाएगी.

क्या है ब्लौकचेन टेक्नोलौजी

ब्लौकचेन टेक्नोलौजी दरअसल एक तरह की ट्रांजैक्शन लिस्ट का रिकौर्ड है, जिसे क्रिप्टोग्राफी से लिंक और सिक्योर किया जाता है. हर ब्लौक में एक हैश प्वौइंटर होता है जो इसे दूसरे ब्लौक से जोड़ता है. यह टेक्नोलौजी दो लोगों के बीच हुए ट्रांजैक्शन को रिकौर्ड कर सकता है. इसमें रिकौर्ड की जानकारियां कौपी नहीं की जा सकती हैं. यह डेटाबेस क्लाउड पे होते हैं ताकि इसमें कोई भी किसी प्रकार का छेड़छाड़ न कर सके और न ही स्पेस की कमी हो.

साधारण शब्दों में कहें तो ब्लौकचेन एक ऐसी टेक्नोलौजी है जिससे बिटकौइन का कारोबार चलता है.

रिलायंस जियो के जियो कौइन लेकर आने की खबर उस वक्त आई है जब साउथ कोरिया में क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंजों और इन्हें मान्यता देनेवाले बैंकों पर सरकार की कठोर कार्रवाई करने के बाद दुनियाभर में बिटकौइन की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. दक्षिण कोरिया में क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंजों पर ताले जड़ने की तैयारी से क्रिप्टोकरंसी की दुनिया में मांग का सबसे बड़ा स्रोत सूख जाने का डर है. गौरतलब है कि दुनियाभर में क्रिप्टोकरंसी की खपत में अकेले 20 प्रतिशत हिस्सा दक्षिण कोरिया का है.

ब्लूमबर्ग के जुटाए आंकड़ों के मुताबिक, बिटकौइन की कीमत 12 प्रतिशत गिरकर 12,801 डौलर पर आ गई. बाद में 6 प्रतिशत तक सुधार आया. वहीं, रिपल 14 प्रतिशत जबकि इथेरियम 4 प्रतिशत टूट गई. दरअसल, दुनियाभर की सरकारें डिजिटल करेंसीज के बढ़ते दाम से लोगों में इसके प्रति बढ़ती दीवानगी से चौकन्ना हो गई हैं. लोगों से लेकर वौल स्ट्रीट बैंक्स तक को क्रिप्टोकरेंसीज आकर्षित कर रही है.

मौजूदा दौर में भारत में क्रिप्टोकरेंसी लीगल नहीं है. भारत में भी वित्त मंत्री अरुण जेटली और रिजर्व बैंक औफ इंडिया (आरबीआई) ने भी चेतावनी दे दी है कि लोग बिटकौइन का लेनदेन अपने रिस्क पर करें. लेकिन अगर जियो ऐसी कोई तैयारी कर रहा है तो संभव है आने वाले समय में यहां इसे लीगल किया जाए.

भारत में फिलहाल यूजर्स बिटकौइन से पैसे कमाने के लिए जेब पे नाम के एक ऐप का सहारा लेते हैं. यहां बिटकौइन को खरीदा और बेचा जा सकता है. बहरहाल, जियो ने डिजिटल करंसी बनाने से जुड़ी खबरों को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि स्मार्ट कौन्ट्रैक्ट्स के लिए ब्लौकचेन टेक्नौलजी का फायदा उठाने की अंबानी की योजना अभी आरंभिक चरण में है.

कभी छूट गई थी इनकी नौकरी, अब वारेन बफे की जगह लेगा ये भारतीय

दुनिया के सबसे बड़े निवेशक और शीर्ष धनकुबेरों में शामिल वारेन बफे की कंपनी बर्कशियर हैथवे इंक की कमान एक भारतीय संभाल सकता है. बर्कशियर हैथवे इंक ने बुधवार को अपने दो टौप एग्जिक्युटिव्स ग्रेगरी एबल और अजित जैन को प्रमोट किया गया. अब ये दोनों कंपनी के संचालन के लिए वारेन बफे का उत्तराधिकार हासिल करने के बेहद करीब पहुंच गए हैं. अजित जैन भारतीय मूल के हैं. उनका जन्म ओडिशा में हुआ था. भारतीय मूल के अजित जैन बफे के उत्तराधिकारी की दौड़ में सबसे आगे हैं. हालांकि, बफे ने इसकी अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की है.

किसे क्या मिला प्रोमोशन

बर्कशियर हैथवे एनर्जी के चीफ एग्जिक्युटिव 55 वर्षीय ग्रेगरी एबल को नौन-इंश्योरेंस कारोबार के लिए बर्कशियर का वाइस चेयरमैन नियुक्त किया गया है. वहीं, कंपनी के टौप इंश्योरेंस एग्जिक्युटिव 66 वर्षीय अजीत जैन को इंश्योरेंस कारोबार का वाइस चेयरमैन बनाया गया है. इसके साथ ही, दोनों को बर्कशियर के बोर्ड में भी शामिल किया गया है. उनके बोर्ड में शामिल होने से अब कंपनी के डायरेक्टरों की संख्या 12 से बढ़कर 14 हो गई है.

बफे बने रहेंगे चेयरमैन

87 वर्षीय वारेन बफे बर्कशियर हैथवे के चेयरमैन और चीफ एग्जिक्युटिव बने रहेंगे और चार दशकों तक बफे की ओर से काम करने वाले 94 वर्षीय चार्ली मंगर वाइस चेयरमैन के पद पर कार्यरत रहेंगे. दोनों अभी बड़ी पूंजी के आवंटन और अधिग्रहण समेत निवेश से जुड़े बड़े फैसले लेते रहेंगे.

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कौन हैं अजित जैन?

अजित जैन का जन्म 1951 में ओडिशा में हुआ था. 1972 में उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से ग्रैजुएशन किया और मेकनिकल इंजिनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की. 1973 से 76 के बीच वह आईबीएम में सेल्समैन रहे. 1976 में आईबीएम ने भारत में अपना औपरेशन बंद कर दिया और जैन की नौकरी चली गई. साल 1978 में वह अमेरिका चले गए और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए डिग्री लेकर मैककिंजी ऐंड कंपनी ज्वौइन की.

न्यूयौर्क में सेटेल्ड हैं जैन

80 के दशक में वह भारत लौटे और यहां शादी कर ली. फिर वह अपनी पत्नी के साथ अमेरिका लौट गए. 1986 में उन्होंने मैंककिंजी को छोड़कर वौरने बफे की कंपनी बर्कशियर हैथवे जौइन कर ली. अजित जैन अभी न्यूयौर्क में रहते हैं.

12,000 करोड़ रुपए के हैं मालिक

सेल्समैन के रूप में करियर की शुरुआत करने और फिर कंपनी बंद होने के बाद बेरोजगार होने वाले जैन आज की तारीख में करीब 12,000 करोड़ रुपए से अधिक (दो अरब डौलर) की संपत्ति के मालिक हैं.

जैन ने बफे को बनाया मालामाल

दुनिया के सबसे बड़े निवेशक और शीर्ष धनकुबेरों में शामिल बफे कई बार यह बात दोहरा चुके हैं कि जैन की वजह से उन्होंने अरबों डौलर की कमाई की. वर्ष 2015 में निवेशकों के नाम पत्र में भी बफे ने जैन की जमकर तारीफ की थी.

कालाकांडी : कहानी शून्य अति वाहियात फिल्म

कहानी शून्य अति वाहियात फिल्म क्या हो सकती है? यह जानने के लिए अक्षत वर्मा लिखित व निर्देशित फिल्म ‘‘कालाकांडी’’ देखनी चाहिए. यह अक्षत वर्मा वही हैं, जिन्होंने आमिर खान निर्मित फिल्म ‘‘दिल्ली बेले’’ का लेखन किया था. अब लेखक के साथ ही बतौर निर्देशक वह पहली फिल्म ‘‘कालाकांडी’’ लेकर आए हैं. फिल्म ‘‘कालाकांडी’’ देखकर आमिर खान ने दावा किया है कि ‘दिल्ली बेले’ के बाद ‘कालाकांडी’ वह पहली फिल्म है, जिसे देखकर उन्हे सबसे ज्यादा हंसी आयी. अब आमिर खान की इस बात को सच मानकर सिनेमाघर के अंदर जाने वाला दर्शक रोता हुआ सिनेमाघर से बाहर निकलने वाला है.

फिल्म की कहानी के केंद्र में रिलीन (सैफ अली खान) और उनके दो भाई अंगद (अक्षय ओबेराय) और कुणाल (कुणाल राय कपूर) तथा दो गैंगस्टरों (विजय राज और दीपक डोबरियाल) के इर्द गिर्द घूमती है. पर इनकी कहानी का एक दूसरे से कोई संबंध नजर नहीं आता. फिल्म शुरू होती है रिलीन से, जो कि अपने पेट दर्द के सिलसिले में डाक्टर के पास गया है. डाक्टर कहता है कि उसे पेट का कैंसर है. रिलीन को यकीन नहीं होता, क्योंकि वह शराब, सिगरेट, नान वेज कुछ नहीं लेता. पर डाक्टर कह देता है कि उसकी जिंदगी सिर्फ दो से छह माह की ही है. वह घर वापस आने लगता है तो रास्ते में उसका दोस्त उसे एक नशे की गोली खिला देता है.

इधर घर पर छोटे भाई अंगद की रेखा (ईशा तलवार) के साथ शादी की तैयारी चल रही है. अचानक अंगद के पास एक लड़की का फोन आता है, जो कि उसके साथ गंदी व अति सेक्सी बातें करती है. अंगद को उसके साथ बात करने में मजा आता है. वह लड़की उसे मिलने के लिए एक होटल के कमरे में बुलाती है. तभी रिलीन घर पहुंचता है, तो उनकी मां कहती है कि अंगद को साथ लेकर जाए और अंगद के बाल कटवाकर लाए.

तीसरा भाई कुणाल अपनी प्रेमिका (शोभिता धूलीपाला) के घर में उसके साथ लगभग नग्नअवस्था में है. प्रेमिका को दूसरे दिन अमेरिका जाना है. कुछ समय बाद दोनों इंज्वाय करने के लिए एक पार्टी में पहुंचते हैं, जहां पुलिस का छापा पड़ता है. कुणाल अपनी प्रेमिका के साथ भागता है.

Kaalakaandi movie review:

इधर दो गैंगस्टर एक फिल्म निर्देशक से अपने बास के कहने पर फिरौती की रकम लेकर आए हैं. पर वह चाहते हैं कि यह रकम दोनों हजम कर जाएं, तो उसकी योजना बनाने लगते हैं.

घर से कार में बैठकर रिलीन व अंगद निकलते हैं. रिलीन पर गोली का असर शुरू होता है. वह रोमांटिक हो जाते हैं. उन्हे अजीब सी चीजे नजर आने लगती है. सड़क के किनारे खड़ी तीन वेश्याओं में से एक हिजड़े के पास जाकर रिलीन कहते हैं कि वह उसे नग्न देखना चाहते हैं. उसे लेकर वह होटल जाते हैं. अंगद लड़की से मिलने होटल के कमरे में जाता है और रिलीन उस हिजड़े के साथ होटल के ट्वायलेट में जाते हैं. इधर अंगद उस लड़की के साथ हम बिस्तर होता है, तभी उस लड़की का प्रेमी आ जाता है, तो अंगद को आधे अधूरे कपड़ों में भागना पड़ता है. अब अंगद अपने भाई रिलीन से कहता है कि उसे रेखा से शादी नहीं करनी है. पर जब वह यह बात रेखा से कहने जाता है, तो रेखा की सुंदरता पर मोहित होकर इरादा बदल देता है. अंगद की शादी होती है और फिर पार्टी चलती है.

Kaalakaandi movie review:

दोनों गैंगस्टर रकम हथियाने के लिए एक दूसरे को घायल करने की योजना बनाते हैं. दीपक, विजय राज पर गोली चलाता है और विजय राज मर जाता है. दूसरी गोली से वह खुद को घायल कर अपने बास के पास पहुंचता है, पर बास उसकी कहानी को झूठा करार देता है. अब वह सड़क के किनारे आकर बैठ जाता है.

रिलीन घर की पार्टी छोड़कर खुशी खुशी बाहर निकलता है और उसी खुशी में बंदूक से गोली चलाता है, जो कि सीधे उपर जाती है, पर नीचे आकर दीपक को लग जाती है.

कुणाल अपनी प्रेमिका को एयरपोर्ट पहुंचाता है. पर एयरपोर्ट पर उसका अमेरिका जाने का इरादा बदल जाता है. अब कुणाल व उसकी प्रेमिका समुद्र किनारे आकर बैठ जाते हैं.

Kaalakaandi movie review:

फिल्म ‘‘दिल्ली बेले’’ की ही तरह ‘‘कालाकांडी’’ में भी अस्सी प्रतिशत संवाद अंग्रेजी भाषा में हैं. वह भी अंग्रेजी भाषा का एसेंट/ लहजा ऐसा है कि हर दर्शक आसानी से नहीं समझ सकता. फिल्म में गालियों की भी भरमार है. फिल्म की भाषा की वजह से सिंगल थिएटर का दर्शक इस फिल्म से दूरी बनाकर रखेगा. मल्टीप्लैक्स में भी आधे लोगों के सिर के उपर से फिल्म के संवाद  जाएंगे.

जहां तक फिल्म की कहानी व पटकथा का सवाल है, तो फिल्म में कहानी का कोई सिर पैर नहीं है. पटकथा भी बड़ी वाहियात है. फिल्म में न रोमांस है, न रोमांच है और न ही हास्य के पल हैं. फिल्म में अति वाहियात व मूर्खतापूर्ण दृश्यों की भरमार है. सबसे अहम बात यह है कि कहानी जहां से शुरू हुई थी, उससे अक्षत वर्मा पूरी तरह से भटक गए हैं. कहानी में कैंसर की वजह से मौत के दिनों को गिन रहे रिलीन किस तरह खुशी तलाशते हैं या उन पर क्या बीतती है, उससे परे हो गई है. बेवजह ड्रग्स व पुलिस की कार्यशैली को भी कहानी में पिरोकर फिल्म को चूं चूं का मुरब्बा बना दिया गया है. ‘दिल्ली बेले’ के मुकाबले भी ‘कालाकांडी’ बहुत ही ज्यादा निचले स्तर की फिल्म है. निर्देशक के तौर भी अक्षत वर्मा पूरी तरह से असफल नजर आते हैं.

Kaalakaandi movie review:

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो किसी भी कलाकार की अभिनय क्षमता असरदार नहीं है. सभी का परफार्मेंस काफी निराशाजनक है. कुछ दृश्यों को नजरंदाज कर दें तो सैफ अली का भी अभिनय अति साधारण है. नील गोपालन की प्रतिभा को जाया किया गया है. फिल्म का गीत संगीत भी प्रभावहीन है. बाक्स आफिस पर इस फिल्म की दुर्गति होती नजर आ रही है.

एक घंटा 52 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘कालाकांडी’’ का निर्माण रोहित खट्टर और आशी दुआ ने किया है. फिल्म के लेखक व निर्देशक अक्षत वर्मा, कहानी लेखक देवेश कपूर, संगीतकार समीर उद्दीन व शाश्वत सचदेव, कैमरामैन हिमान धमीजा तथा कलाकार हैं – सैफ अली खान, अक्षय ओबेराय, कुणाल राय कपूर, दीपक डोबरियाल, विजय राज, शोभित धोलीपाला, ईशा तलवार, शिवम पाटिल व अन्य.

स्मार्टफोन पर ये काम पहुंचा सकता है भारी नुकसान

स्मार्टफोन का इस्तेमाल आज हर कोई करता है. इसका इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही साथ कई सारी दिक्कतें भी बढ़ती जा रही हैं. हम आज आपको कुछ ऐसे काम के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका प्रयोग अक्सर ही लोग अपने स्मार्टफोन में करते हैं. यह काम कभी नहीं करने चाहिए. इससे आपके फोन को भारी नुकसान हो सकता है.

अननोन सौर्सेज से एप इंस्टौल करना

अननोन सौर्सेज से किसी भी तरह के ऐप्स इंस्टौल करने से बचें. गूगल प्ले स्टोर के अलावा किसी और जगह से कोई भी ऐप इंस्टौल करना आपके फोन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. वह कोई वायरस भी हो सकता है. इससे आपका डेटा भी चोरी हो सकता है.

रिसेंट ऐप्स बंद करना

अगर आप सोचते हैं कि रिसेंट ऐप्स को मेनुअली बार बार बंद करने से आपका फोन फास्ट हो जाता है, तो आप गलत हैं. ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है, बल्कि ऐसा करने से अगली बार जब ऐप को खोलेंगे तो वह फिर से शुरू होगी और बैटरी और प्रोसेसर पर ज्यादा लोड डालेगी.

एंटीवायरस और बैटरी सेवर

एंड्रायड फोन में एंटीवायरस की जरूरत नहीं पड़ती है. अगर आप गूगल प्ले स्टोर से ऐप्स को इंस्टौल करते हैं तो एंटीवायरस की कोई जरूरत नहीं है. यह उल्टा आपके फोन को स्लो करता है.

फोन में बैटरी सेवर को भी इंस्टौल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह किसी काम का नहीं होता है. यह सिर्फ ऐप्स को बंद करने का काम करता है. इससे ज्यादा कुछ असर नहीं होता.

फेक ऐप्स और फेक मैसेज

फेक ऐप्स को फोन में इंस्टौल न करें. कुछ ऐप्स दावा करती हैं कि अगर आपके फोन में फिंगर प्रिंट स्कैनर नहीं है तो ऐप से आ जाएगा. फिंगर प्रिंट स्कैनर हार्डवेयर का काम है तो सौफ्टवेयर से कैसे आ जाएगा. इस तरह का कोई भी दावा करने करने वाले ऐप्स को कतई इंस्टौल करें.

फेक मैसेज के झांसे में आकर फालतू के ऐप इंस्टौल न करें. ऐसे ऐप आपके फोन के लिए खतरनाक होते हैं. इनका कोई फायदा नहीं होता है. यह आपके फोन में वायरस लाने के साथ ही कई तरह की समस्याएं पैदा कर देती हैं.

इग्नोर ऐप परमिशन

अगर कोई भी ऐप फोन का ऐसा एक्सेस मांगे जिसे उसकी जरूरत ही न हो तो इसका इजाजत बिलकुल न दें. जैसे कि टौर्च की ऐप कौन्टेक्ट्स की परमिशन मांगती है तो उसे परमिशन न दें. इससे आपका डेटा चोरी हो सकता है.

क्लियर कैश मेमोरी

किसी भी कैश मैमोरी क्लीयर करने वाले ऐप को इंस्टौल न करें. इसका कोई फायदा नहीं होता. बल्कि नुकसान हो जाता है. अगर मैमोरी कम पड़ रही है तो या तो मैमोरी कार्ड लगाएं या फिर मेनुअली फोन की मैमोरी को खाली करें.

फोन रीस्टार्ट करें

फोन को लगातार इस्तेमाल करते रहते हैं. इसलिए फोन को ब्रेक देने के लिए उसे 5-6 दिन में एक बार रीस्टार्ट जरूर कर लें.

करण के शो में एक बार फिर कंगना ने ली करण की चुटकी

डायरेक्टर करण जौहर और एक्ट्रेस कंगना रनौत के बीच पिछले दिनों ‘नेपोटिज्म’ को लेकर बहस छिड़ी थी. यह बहस पूरी बौलीवुड इंडस्ट्री में फैल गई थी. हालांकि कंगना रनौत अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं और उनसे झूठ या किसी का दिल खुश करने वाले कमेंट कम ही सुनने को मिलते हैं. पिछले साल कंगना और करण जौहर के बीच हुआ विवाद तो आपने सुना ही होगा और अब साल की शुरुआत में कंगना ने फिर करण जौहर की उन्‍हीं के शो पर चुटकी ले ली है.

गुरुवार को कंगना रनौत ‘इंडियाज नेक्‍स्‍ट सुपरस्‍टार’ के सेट पर बतौर मेहमान पहुंची. इस शो के जज फिल्‍ममेकर करण जौहर और रोहित शेट्टी हैं. करण और कंगना के बीच पिछले दिनों कई मनमुटाव नजर आए थे. बावजूद इसके शो के सेट पर करण और कंगना कैमरा के लिए प्ले करते हुए नजर आए. इस दौरान दोनों एक दूसरे से बातचीत भी कर रहे थे और हंसी भरी बातों में एक दूसरे को तंज भी कस रहे थे. इन सबके बीच इस शो के सेट पर एक गेम खेला गया, जिसमें यह बताना था कि आप लोग एक दूसरे को कितने अच्‍छे से जानते हैं.

इस खेल के दौरान कंगना से पूछा गया कि करण अपने टौक शो में मेहमानों को क्या औफर करते हैं? तो कंगना ने यहां मौके पर चौका मारने में देर नहीं लगायी. कंगना ने कहा, ‘जहर पिलाता है मुझसे पूछो.’ हालांकि कंगना के इस डायलौग के बाद वहां सब जोर से हंसने लगे और खुद कंगना भी हंस पड़ीं.

प्रियंका चोपड़ा भी बन चुकी हैं गेस्‍ट

बता दें कि इस इस शो की पहली मेहमान बनकर प्रियंका चोपड़ा पहुंची. प्रियंका के बाद सिद्धार्थ मल्‍होत्रा भी इस शो की शूटिंग कर चुके हैं. कंगना को जब चैनल की तरफ से इस शो का न्यौता भेजने की खबरें आईं तो कयास लगाए जा रहे थे कि शायद करण जौहर से सामना टालने के चलते कंगना यहां न आएं, लेकिन कंगना ने ऐसा नहीं किया.

करण के टौक शो में शुरू हुआ विवाद

बता दें कि अपनी फिल्‍म ‘रंगून’ के प्रमोशन के लिए कंगना रनौत, करण के टौक शो ‘कौफी विद करण’ में सैफ अली खान के साथ पहुंची थीं. यहां कंगना ने करण जौहर के बौलीवुड में भाई-भतीजावाद को प्रमोट करने वाला व्‍यक्ति कह दिया था. इस शो के बाद करण, कंगना पर काफी बरसे थे और कंगना ने भी एक ओपन लेटर लिखा था. लेकिन पिछले साल चले विवाद के बाद इस साल की शुरुआत इन दोनों ने फिर से दोस्‍ती के साथ की है. अब देखते हैं कि यह दोस्‍ती कितनी चलती है.

दो रन के हेर फेर पर अंबाती रायडू ने टीम के साथ किया हंगामा

विशाखापत्तनम में सैयद मुश्ताक अली टी20 टूर्नामेंट कर्नाटक और हैदराबाद के बीच चल रहे मैच में एक अजीब वाकया हुआ. कर्नाटक ने पहले बल्लेबाजी की लेकिन उनकी पारी खत्म होने के बाद, थर्ड अंपायर ने रीप्ले देखकर ‘भूल’ सुधार की औ स्कोर में दो रन पारी खत्म होने के बाद जोड़ दिए. मजेदार बात यह रही कि हैदराबाद मैच को दो ही रन से हार गया. इसी पर हैदराबाद के खिलाड़ियों ने आपत्ति उठाई और हंगामा कर दिया.

बताया जा रहा है कि कुछ गलती हैदराबाद के कप्तान अंबाती रायडू की भी जिन्हें हैदराबाद की पारी शुरू होते समय ही मामला स्पष्ट करवा लेना था, लेकिन रायडू का कहना है कि उन्होंने अंपायरों से बात की थी जिसके जवाब में अंपायरों ने कहा की वे मैच खत्म होने के बाद इसपर फैसला करेंगे.

एक घंटे चले इस हंगामे की वजह से आंध्र और केरल के बीच होने वाले अगले मुकाबले को 13-13 ओवर का करवाना पड़ा. बीसीसीआई ने इस मामले में संज्ञान लिया है और रिपोर्ट मांगी है. पूरी संभावना है कि बीसीसीआई इस मामले में कार्यावाही कर सकती है क्योंकि बीसीसीआई ने मामले को पूरी गंभीरता से लिया है.

क्या थी वह गलती

कर्नाटक जब टौस जीत कर पहले बल्लेबाजी कर रही थी, तब कर्नाटक के ओपनर करुण नायर ने मोहम्मद सिराज की बौल को मिडविकेट की बाउंड्री तक पहुंचाया. चौका बचाने के चक्कर में हैदराबाद के मेहंदी हसन का पैर फील्डिंग के दौरान बाउंड्री की रस्सी को छू गया था, लेकिन अंपायरों को पता नहीं चला और जहां 4 रन मिलने चाहिए थे सिर्फ 2 रन ही दिए गए. पारी समाप्त होने पर जब टीवी रिप्ले देखने के बाद कर्नाटक के खिलाडियों ने थर्ड अंपायर को इस बारे मे सूचना दी, तो कर्नाटक के स्कोर में 2 रन जोड़ दिए गए. लेकिन स्कोरर और मैदानी अंपायरों के बीच तालमेल की गड़बड़ी के चलते वे 2 रन स्कोर में नहीं जुड़ सके.

दो रन से हुआ फैसला और फिर हंगामा

205 रन का पीछा करने उतरी हैदराबाद की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 203 रन बना दिए. लेकिन मैच खत्म होने के बाद हैदराबाद के कप्तान अंबाती रायडू अपनी टीम के साथ मैदान पर आए और सुपर ओवर करवाने की मांग करने लगे. रायडू का कहना था कि, उन्हें भी नियमों के बारे में पता है, अगर अंपायर किसी को आउट देते हैं और वह मैदान के बाहर चला जाता है. यदि उसके बाहर जाने के बाद पता चले कि बल्लेबाज़ को गलत आउट दिया गया है, तो क्या उसे वापस बल्लेबाज़ी के लिए बुलाया जाता है? रायडू का कहना था कि अगर कोई अंपायर किसी गेंद को नो-बौल न दे और बाद में पता चले कि वो गेंद नो बौल थी, तो क्या उसका रन बाद में स्कोर में जोड़ा जाता है? लेकिन अंपायर अपना फैसला दे चुके थे और वो कर्नाटक को विजेता घोषित कर चुके थे.

सचिन तेंदुलकर के बेटे ने कुछ इस तरह औस्ट्रेलिया में मचाया धमाल

क्रिकेट के मैदान पर लगातार अपने प्रदर्शन से सुर्खियों में रहने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन से लोगों का दिल जीत लिया है. हाल ही में कूच बिहार ट्रौफी में पांच विकेट लेने वाले अर्जुन ने अब औस्ट्रेलिया में अपना परचम लहराया है.

18 साल के अर्जुन ने औस्ट्रलिया में स्प्रिट औफ ग्लोबल चैलैंज में हिस्सा लेते हुए सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर बल्ले और गेंद से शानदार प्रदर्शन किया. हाल ही में अर्जुन ने स्पिरिट औफ ग्लोबल चैलेंज में हिस्सा लिया. सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर हुए इस मैच में अर्जुन टीम इंडिया के क्रिकेटर्स क्लब की ओर से खेल रहे थे. टी20 फौर्मेट में खेले गए इस मैच में हांगकांग के खिलाफ अर्जुन ने 27 गेंद पर 48 रन बनाए और जब बारी गेंदबाजी की आई तो उन्होंने चार अहम विकेट भी झटके.

अपने इस शानदार प्रदर्शन के बाद पहली बार अर्जुन ने अपने आदर्श खिलाड़ी के बारे में बताया. एक हिन्दी न्यूज चैनल से बात करते हुए अर्जुन ने कहा कि उन्हें बचपन से ही तेज गेंदबाजी करना पसंद है. अर्जुन से उनके रोल मौडल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने मिचेल स्टार्क और बेन स्टोक्स का नाम लिया.

बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्जुन ने आगे कहा कि मुझे लगा कि भारत में तेज गेंदबाज ज्यादा नहीं है. बड़े होने के साथ साथ में मजबूत भी हो रहा हूं मैं भारत के लिए एक तेज गेंदबाज के रूप में पहचान बनाना चाहता हूं.’

जब अर्जुन से पूछा गया कि क्या उनपर मैदान पर उतरते समय किसी तरह का दबाव रहता है? इसके जवाब में अर्जुन ने कहा, ‘मैं किसी प्रकार का दबाव नहीं लेता. बात जब गेंदबाजी की आती है तो हर गेंद में अपना सब कुछ झोंक देता हूं. वहीं, जब बल्लेबाजी करता हूं तो इस बात पर ध्यान देता हूं कि किस बौल पर शौट खेलने हैं और किस पर संभल कर रहना है.’

इसरो ने रचा इतिहास, कामयाब हुआ 100वां सैटेलाईट लौन्च

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष में सेंचुरी लगा दी है. थोड़ी देर पहले श्रीहरिकोटा से इसरो का 100वां सैटेलाइट लौन्च हुआ. इसरो ने एक साथ 31 सैटेलाइट अंतरिक्ष में लौन्‍च किए. PSLV C-40 अपने साथ सबसे भारी कार्टोसैट 2 सीरीज के उपग्रह के अलावा 30 दूसरी सैटलाइट भी अंतरिक्ष में ले गया है.

इसमें एक भारतीय माइक्रो सैटेलाइट और एक नैनो सैटेलाइट के अलावा 28 छोटे विदेशी उपग्रह हैं. इसरो के वैज्ञानिक एएस किरण ने बताया कि पिछले पीएसएलवी लौन्च के दौरान हमें समस्याएं हुईं थी और आज जो हुआ है उससे यह साबित होता है कि समस्या को ठीक से देखा गया और उसमें सुधार किया गया.

देश को इस नए साल का उपहार देने के लिए शुभकामनाएं. आपको बता दें कि चार महीने पहले 31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था. पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है.

ISRO के 100वें सैटेलाइट लौन्च की 10 खास बातें

  • PSLV C-40 अपने साथ 31 सैटेलाइट लेकर उड़ा, जिसमें कार्टोसैट-2 सीरीज़ के निगरानी सैटेलाइट के अलावा एक भारतीय माइक्रो सैटेलाइट और एक नैनो सैटेलाइट है.
  • 28 छोटे विदेशी सैटेलाइट भी अंतरिक्ष में भेजे गए, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, फिनलैंड और दक्षिण कोरिया के सैटेलाइट हैं, जिनमें अकेले अमेरिका के 19 सैटेलाइट हैं.
  • कार्टोसैट 2 सैटेलाइट सीरीज एक निगरानी उपग्रह है जिसकी मदद से अब डिफेंस और कृषि क्षेत्र की तत्‍काल जानकारी मिलेगी. इसका इस्‍तेमाल तटीय क्षेत्रों और शहरों की निगरानी के लिए इस्‍तेमाल किया जाएगा.
  • कार्टोसैट 2 सैटेलाइट सीरीज में हाईरेजुलेशन कैमरा लगा है जिससे खींची फोटो का इस्‍तेमाल किया जाएगा. ये लौन्‍च चार स्‍तर पर है और अब तक तीन लौन्‍च सफल रहे हैं.
  • इसरो के एएस किरण ने बताया कि पिछले पीएसएलवी लौन्च के दौरान हमें समस्याएं हुईं थी और आज जो हुआ है उससे यह साबित होता है कि समस्या को ठीक से देखा गया और उसमें सुधार किया गया. देश को इस नए साल का उपहार देने के लिए शुभकामनाएं.
  • पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का काटरेसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है. इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं.
  • चौथे चरण के पीएसएलवी-सी-40 की ऊंचाई 4 मीटर और वजन 320 टन होगा. पीएसएलवी के साथ 1332 किलो वजनी 31 उपग्रह एकीकृत किए गए हैं ताकि उन्हें प्रेक्षपण के बाद पृथ्वी की ऊपरी कक्षा में तैनात किया जा सके.
  • 42वें मिशन के लिए इसरो भरोसेमंद कार्योपयोगी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी40 को भेजेगा जो कार्टोसेट-2 श्रृंखला के उपग्रह और 30 सह-यात्रियों, जिनका कुल वजन करीब 613 किलोग्राम है.
  • श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लौन्च पैड से इस 4 मीटर लंबे रौकेट को प्रक्षेपित किया जाएगा. सह-यात्री उपग्रहों में भारत का एक माइक्रो और एक नैनो उपग्रह शामिल है जबकि छह अन्य देशों – कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के तीन माइक्रो और 25 नैनो उपग्रह शामिल किए जा रहे हैं.
  • इसरो और एंट्रिक्स कौर्पोरेशन लिमिटेड के बीच हुए व्यापारिक समझौतों के तहत इन 28 अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों को प्रक्षेपित किया जाएगा. यह 100वां उपग्रह कार्टोसेट -2 श्रृंखला का तीसरा उपग्रह होगा. कुल 28 अंतर्राष्ट्रीय सह यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं.

26/11 जैसा हमला रोकने में मदद करेगा इसरो

इस साल 26/11 जैसे आतंकी हमलों से बचने के लिए सरकार इसरो की मदद लेने जा रही है. सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए गृह मंत्रालय जल्द ही इसरो की मदद लेगी. इसरो आने वाले समय में सेटेलाइट तस्वीरों के जरिए संदिग्ध जहाजों और नौकाओं का निगरानी की जाएगी. साथ ही समुद्र से सटे तटीय इलाको और समुद्र की सुरक्षा के लिए इसरो मार्च 2018 तक 100 ट्रांसपोर्डर भी देगा. इसके तहत सैटेलाइट निगरानी के लिए 20 मीटर कम लंबी नावों के लिए प्रस्तावित किया गया है.

10 दिन में रौकेट बनाने का प्लान

इस साल इसरो ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस साल इसरो ने सैटालाइट लौन्च सिस्टम में एक बड़ी क्रांति लाई है. इसरो ने इस साल घोषणा की है कि वो एक छोटे लौन्च व्हीकल को तैयार करने में जुटा है, जिसे सिर्फ तीन दिनों में असेंबल किया गया जा सकेगा. पीएसएलवी जैसे रौकेट्स को तैयार करने में आमतौर पर 30 से 40 दिन लग जाते हैं, ऐसे में इसरो का यह प्रयास सैटलाइट लौन्चिंग की दिशा में बड़ी क्रांति जैसा होगा. यही नहीं इस रौकेट को तैयार करने में पीएसएलवी की तुलना में 10 फीसदी राशि ही खर्च होगी.

दुनिया भर में लौन्च व्हीकल की मैन्युफैक्चरिंग कौस्ट फिलहाल 150 से 500 करोड़ रुपये तक होती है. यह 2018 के अंत या फिर 2019 की शुरुआत तक तैयार हो सकता है. इस व्हीकल की कीमत पीएसएलवी के मुकाबले 10 फीसदी ही होगा. हालांकि यह रौकेट 500 से 700 किलो तक के सैटलाइट्स को ही लौन्च कर सकेगा.

2021 तक पहला प्राइवेट रौकेट लौन्च करेगा इसरो

इसरो ने फैसला किया है कि प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर स्पेस रौकेट बनाएगा. ऐसा पहली बार होगा कि पूरी तरह से प्राइवेट एजेंसी के द्वारा इस तरह के रौकेट बनाए जाएंगे. 2021 तक इस रौकेट को लौन्च करने का प्लान किया गया है. इसरो की ही एक वैज्ञानिक का कहना था कि हम मौजूदा लौन्च पैड्स से ही सैटेलाइट को लौन्च करने की संख्या बढ़ाना चाह रहे हैं. हम श्रीहरिकोटा में तीसरे लौन्च पैड का प्लान भी कर रहे हैं. इससे हमारी क्षमता बढ़ेगी.

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अभी भी हमारे पास संचार प्रणाली के मद्देनजर कम सैटेलाइट हैं, इसलिए इसरो सैटेलाइट लौन्च करने की प्रकिया को दोगुना करने के प्रयास में है. अभी हम एक साल में 8 से 10 सेटेलाइट लौन्च करते हैं. 2018 तक ये 20 के करीब होगा. हमारा टारगेट अगले 5 साल में 60 सैटेलाइट लौन्च करने का है.

सबसे विशाल रौकेट के प्रक्षेपण के लिए तैयार है इसरो

भारत में विकसित करीब 200 बड़े हाथियों के बराबर वजन वाला रौकेट ‘भारतीय जमीन से भारतीयों को अंतरिक्ष में पहुंचा सकता है.’ आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित रौकेट केंद्र पर देश के सबसे आधुनिक और भारी जियोसिंक्रोनस उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क तीन (जीएसएलवी एमके-3) को रखा गया है जो अब तक के सबसे वजनदार उपग्रहों को ले जाने में सक्षम है. इसके साथ ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने विश्व के कई करोड़ डौलर के प्रक्षेपण बाजार में मजबूत स्थिति बना ली है.

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