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धर्म की आड़ में डराने की साजिश

हमारे समाज में फैले ज्यादातर अंधविश्वासों की जड़ में फुजूल के डर हैं और वे सारे डर ढोंगीपाखंडियों की देन हैं. दरअसल, जन्म से ही बारबार ऐसी घुट्टी पिलाई जाती है कि लोग आंखें मूंद कर ऊलजुलूल बातों पर भरोसा करने लगते हैं.

ज्यादातर लोगों में तालीम, सूझबूझ व नए नजरिए की कमी है, इसलिए 21वीं सदी में भी बहुत से लोगों की सोच बहुत पीछे व नीचे है. नतीजतन, वे रोजमर्रा के मसलों को खुद नहीं सुलझा पाते. कर्ज, गरीबी, बीमारी व बेकारी को भी वे अपने पापों का फल या बदकिस्मती का नतीजा मान कर बाबाओं व तांत्रिकों की शरण में जाते रहते हैं.

शातिर लोग आम जनता की इसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं. भाग्य, भगवान, पाप, अपशकुन, ग्रह चाल, दिशाशूल, शनि की साढ़ेसाती, राहूकेतु मारकेश, मूल, पंचक, भद्रकाल सर्पयोग, पितृदोष और वास्तुदोष में ऊलजुलूल खराबी बताते हैं, इसलिए कई तरह के डर लोगों के मन में जानबूझ कर डाले जाते हैं ताकि उन्हें मनमाने तरीके से भुनाया जा सके.

कई पुश्तों से इसी घंधे में लगे एक शख्स ने बताया कि असल बात तो यह है कि बगैर डर के तो कभी कोई अपनी जेब से कुछ निकालता ही नहीं इसलिए बच्चों का पेट पालने के लिए कुछ न कुछ जुगाड़ तो करना ही पड़ता है.

इसी गरज से धर्म का प्रचार करने वालों ने सदियों से लोगों को झांसा देने, डराने व उस डर को भुनाने की तमाम साजिशें रची हैं. कथाओं, प्रवचनों, किताबों व तसवीरों के जरीए तमाम तरह के झूठे किस्सेकहानियां फैलाई गईं. जीने से मरने तक में कर्मकांड कराने को बेहद जरूरी बताया गया. ग्रह शांति के उपाय, दानपुण्य, तीर्थ, पूजापाठ, गंडेतावीज, यंत्र, तंत्र और मंत्र बनाए गए.

गौरतलब है कि बुरा होने के डर से बचने के लिए पांखडियों द्वारा जो भी उपाय बताए जाते हैं, उन में से कोई भी ऐसा नहीं होता जो बगैर पैसा खर्च किए मुफ्त में पूरा होता हो. पूजापाठ व गंडेतावीज जैसे ज्यादातर उपाय बहुत खर्चीले होते हैं, फिर भी लोग डर के मारे उन्हें करतेकराते रहते हैं इसलिए धर्म का प्रचार करने वालों की दुकानें चलती रहती हैं.

नतीजतन, बहुत से कम पढ़ेलिखे, कमजोर, पिछड़े व भोलेभाले भक्तों का खुद पर यकीन ही नहीं रहा. वे मानने लगते हैं कि जो कुछ भी होता है वह सब भगवान की मरजी से होता है. एक पत्ता भी हिलता है तो ऊपर वाले की मरजी से ही हिलता है. उसी की मेहर पाने के चक्कर में फंस कर वे अपनी जेब हलकी करते रहते हैं और डराने वाले अपना घर भरते रहते हैं.

डर के चक्कर में वक्त की बरबादी व माली नुकसान ही नहीं होता बल्कि जहांतहां जवान औरतें ढोंगी संतमहंतों व बाबाओं वगैरह के चक्कर में फंस कर अपनी इज्जतआबरू गंवाती रहती हैं और बाद में पछताती हैं.

कुलमिला कर इस गोरखधंधे में फायदा डरा कर लूटने वाले मक्कारों का होता है और हर तरह से नुकसान डरपोक लोगों का होता है.

बढ़ती गई साजिश

लोगों के मन में डर बिठाने का गोरखधंधा इतने जोरों से फलफूल रहा है कि हमारे समाज में हिम्मती लोग उंगलियों पर गिनने लायक रह गए हैं. ज्यादातर पढ़ेलिखों के मन में भी तरहतरह के डर समाए रहते हैं इसलिए आने वाले हादसों व बुरे वक्त से बचने के लिए लोग अपनी उंगलियों में तरहतरह की अंगूठियां पहने रहते हैं.

किसी को डराने के मामले में काले रंग को सब से ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. मसलन किसी ने भी आज तक यमराज को नहीं देखा, लेकिन तसवीरों में उन्हें बड़ीबड़ी मूंछों वाला, काले रंग का, डरावना व भैंसे पर सवार दिखाया जाता है.

लोगों के मन में सब से ज्यादा डर शनि की खराब दशा होने का डाला जाता है ताकि खूब दान मिले व चढ़ावा आए.

नतीजतन, जहांतहां सड़क किनारे शनिदेव के काले मंदिर भी खूब धड़ल्ले से बन, बढ़ व फलफूल रहे हैं. शनिदान का उपाय करने के लिए उकसाया जाता है और आखिरकार लोग डर कर ठगों के झांसे में आ ही जाते हैं.

बेहिसाब हैं डर

धर्म के ठेकेदारों ने अपने फायदे के लिए तमाम तरह की गलतफहमियां लोगों के दिमाग में भर रखी हैं. ज्यादातर लोग उन से उबर ही नहीं पाते इसलिए उन को हर कदम, हर बात व हर काम में डर ही डर बना रहता है. बिल्ली रास्ता काट जाए तो हादसे का डर, बिल्ली मर जाए तो पाप लगने का डर और चलते समय अगर कोई छींक दे तो बुरा होने का डर सताने लगता है.

डर के साए में रह कर जीने से तरक्की रुकती है. उपाय कर के डर से नजात पाने के चक्कर में लोग लुटते रहते हैं. हमारे समाज में जानबूझ कर ऐसा माहौल बनाया गया है जिस से लोग फुजूल की बातों में उलझ कर डरे रहें, उन की ऊलजुलूल बातों को मानते रहें और अपनी हिफाजत व बचने के लिए पंडेपुजारियों को चढ़ावा चढ़ाते रहें.

हर किसी की जिंदगी में छोटेबड़े कई तरह के मसले आतेजाते रहते हैं. धर्म के धंधेबाजों ने हर मसले को कर्मों का फल व पिछले जन्मों के पाप से जोड़ रखा है ताकि दिमाग कुंद रहे. ऐसे तमाम लोग हैं जो अपने मसलों को सुलझाने के लिए पंडेपुजारियों के पास जाते हैं. यहीं से डराने व उपायों के नाम पर ठगने की शुरुआत होती है.

यह है नुकसान 

डर के इस गोरखधंधे से बहुत से सामाजिक व माली नुकसान हैं. डर के चलते ही हमारे समाज में तमाम तरह की रूढि़यां आज भी बरकरार हैं. लोगों के मन में डाले गए इस डर की वजह से ही अनगिनत दाढ़ीचोटी वाले मौज मार रहे हैं. इन की वजह से ही गरीब और गरीब हो रहे हैं.

जहांतहां भटकने, चढ़ावा चढ़ाने, दान कर के ग्रह की दशा सुधारने व पंडेपुजारियों को हलवापूरी खिलाने से कभी कोई मसला हल नहीं होता. डर कर भागने से कभी किसी की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आ सकता है.

सोचने की बात है कि यदि ऐसा कुछ होता तो दुनिया में कहीं भी कोई गरीब, बीमार व परेशान नहीं होता इसलिए सच को समझना जरूरी है.

आज विज्ञान का जमाना है. नए नजरिए से हर बात को तर्क की कसौटी पर कसना और परखना बेहद जरूरी है. पुरानी, गलीसड़ी, बेकार व बेमतलब की बातों को पीछे छोड़ें. उन से नाता तोड़ें. फुजूल के खौफ अपने मन में कभी न पालें. डराने वालों से दूर रहें. साथ ही उन्हें भूल कर भी बढ़ावा न दें. तालीम, चौकसी और जागरूकता ही इनसान को हिम्मती बनाती है.

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अंधविश्वास के नाम पर बलि चढ़ते लोग

राजस्थान तो जैसे अंधविश्वास में ही जीता रहा है. गांवढांबी की बात तो छोड़ो, शहरी पढ़ेलिखे भी अंधविश्वास में जी रहे हैं. कसबों और शहरों में हर शनिवार को दुकान, मकान, गाड़ी में नीबूमिर्च टांगने का अंधविश्वास जोरों पर है.

लोगों की सोच है कि इस से नजर नहीं लगती और धंधा सही होता है. मगर वे लोग यह भूल जाते हैं कि बड़ीबड़ी कंपनियां, होटल व दफ्तरों में नीबूमिर्च नहीं बांधे जाते तो क्या उन का धंधा नहीं चलता?

जो लोग शनिदेव के नाम पर नीबूमिर्च हर शनिवार को बेचते हैं, उन की बल्लेबल्ले है. वे लोग इस के 10 रुपए लेते हैं. साथ ही, सरसों का तेल भी लेते हैं.

एक किलो हरी मिर्च व एक किलो नीबू तकरीबन सौ रुपए में आता है. इन को बांध कर बेचने से ऐसे लोग एक हजार से 15 सौ रुपए कमाते हैं और तेल अलग से मिलता है. वह तेल दुकान पर बेच देते हैं.

कहने का मतलब है कि इस धंधे से जुड़े लोग हर शनिवार को 2 हजार रुपए कमाते हैं. अगर महीने में 4 शनिवार हैं तो 8 हजार रुपए कमा लेते हैं, सिर्फ 4 दिन में.

इन्हीं की तरह बाबा लोग जटा बढ़ा कर, तिलक लगा कर झोलीझंडा लिए राजस्थान के गांवढांणी से ले कर शहरों तक में दानदक्षिणा लेते दिख जाते हैं.

ये लोग भोलेभाले लोगों को ऊपर वाले के नाम पर डरा कर और अच्छे दिन का झांसा दे कर लूटते फिरते हैं.

SOCIETY

जैसलमेर शहर में सैकड़ों ऐसे बाबा दिख जाएंगे जो दिनभर भीख के नाम पर लोगों की जेबें हलकी करते हैं. इन बाबाओं का ठिकाना गड़सीसर सरोवर के पास है. वहां रात में ये भगवाधारी बाबा दारूमीट की दावत उड़ाते दिख जाते हैं. हर रोज यहां ऊपर वाले के नाम पर लिए गए पैसे से पार्टी होती है.

इन बाबाओं के साथ ही कई दिव्यांग भी होते हैं जो दिनभर सड़कों पर घिसटघिसट कर भीख मांगते हैं. वे भी इन बाबाओं के साथ मुर्गमुसल्लम और दारू में उड़ा देते हैं. सुबह होने पर ये लोग फिर भीख मांगने निकल पड़ते हैं.

राजस्थान में रामदेवरा, जसोल, देशनोक,  केलादेवी, गोगामेड़ी, खाटू श्यामजी, पुष्कर और ख्वाजा गरीब नवाज अजमेर में 12 महीने मेला लगता है. इन जगहों पर जाने वाले लोगों की जेबें कोई जूतों की रखवाली के नाम पर, तो कोई तालाब में मिट्टी निकालने के नाम पर, तो कोई रामरसोड़ा व पानी की प्याऊ के नाम पर और कोई गायों के चारेपानी के नाम पर ढीली करता है.

रामदेवरा में हर साल लाखों लोग आते हैं. राजस्थान में यह इलाका जैसलमेर जिले में पड़ता है. भादवा मेले में हर साल यहां तकरीबन 25-30 लाख लोग आते हैं.

रामदेवरा मंदिर के बाहर जूते खोलते हैं, तब वहां पर पहले से बैठे लोग कहते हैं कि आप आराम से दर्शन कर के आओ. हम जूतों की रखवाली करते हैं.

दर्शन के बाद जब लोग जूते लेने वापस आते हैं तो जूतों की रखवाली के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं और खुशीखुशी लोग देते भी हैं.

इस के बाद वहां पर डायरियां ले कर घूम रहे धर्म के ठेकेदार तालाब से मिट्टी निकालने के नाम पर, रामरसोड़ा, प्याऊ और गायों के लिए चारापानी के नाम पर रुपए वसूलते हैं. पैसा न देने पर मारपीट तक की जाती है.

रामदेवरा मंदिर के बाहर जूतों की रखवाली कर रही कमला देवी ने कहा कि वह दिनभर में 4-5 हजार रुपए कमाती है. यह मेला 10 दिन तक चलता है और कमला देवी 10 दिन में तकरीबन 40 हजार रुपए कमाती है. उस का पति, बेटा, बेटी भी इसी काम में लगे होते हैं.

उन का कहना है कि हम जूतों की रखवाली करते हैं और लोग प्यार से 10-12 रुपए देते हैं. हम किसी से छीनते नहीं हैं. मगर वहां का नजारा देखें तब पता चले कि कैसे लूटा जाता है.

गांवोंढांणियों में तो अंधविश्वास इस कदर हावी है कि लोग बीमार पड़ने पर अस्पताल जाने के बजाय भोपों, तांत्रिकों की शरण में जाते हैं. भोपे उन्हें झूठ कहते हैं कि उन से फलां देवता रूठा है या फिर कहते हैं कि उन के स्वर्गवासी पिता, दादा, माता या कोई उन्हें परेशान कर रहा है. उस की आत्मा शांत नहीं है. ऐसे में भोपा उन के मरे हुए दादा, माता या पिता की मूर्ति बनवा कर उन के घर या खेत में लगवा देते हैं.

वहां रात्रि जागरण के अलावा दारूबकरे की दावत उड़ाई जाती है. अगर फिर भी उस परिवार की तकलीफ दूर नहीं होती तो भोपा कहता है कि मूर्ति सही नहीं चढ़ी. दोबारा पूरी कार्यवाही करनी पड़ेगी. फिर भी सही नहीं होता तो कहता है कि अब आप किसी और भोपे के पास जाओ.

भोपे न केवल झाड़फूंक करते हैं बल्कि भूतप्रेत को रोटी तक डलवाते हैं. मगर क्या विज्ञान के समय में यह अति नहीं है? कभी किसी ने भूतप्रेत देखा है? नहीं न…? तो उन से डरना कैसा? मगर लोग तो अंधविश्वास से बाहर निकलना ही नहीं चाहते. अनपढ़ ही नहीं पढ़ेलिखे भी भोपों के चक्कर में पड़े हैं.

जोधपुर जिले के एक गांव में तो कुछ महीने पहले एक भोपे ने एक औरत का दुख दूर करने के नाम पर मंदिर में ले जा कर बलात्कार तक कर दिया था.

उस महिला की रिपोर्ट पर उस बलात्कारी भोपे को पुलिस ने पकड़ लिया था. वह आज भी जेल में है. ऐसे भोपों से सावधान रहें. अगर भोपों के पास कुछ ताकतें होतीं तो वे खुद अपने घर में क्यों दुखी होते?

अजमेर जिले के केकड़ी कसबे में शर्मनाक घटना हुई. 40 साला कन्या देवी के पति की मौत क्या हुई, परिवार के लोग ही जान के दुश्मन बन गए. उसे डायन बताया गया. फिर शुरू कर दिया जोरजुल्म ढाने का दौर. लोहे की चेन से बुरी तरह पीटा गया. कपड़े उतरवा कर महल्ले में घुमाया गया. आंख और हाथ दोनों ही अंगारों से दाग दिए गए. इस से भी मन नहीं भरा तो धधकते अंगारों पर बिठा दिया गया. बुरी तरह से घायल कन्या देवी की अगले दिन मौत हो गई.

इस वारदात पर परदा डालने के लिए उन्हीं लोगों ने अंतिम संस्कार भी कर दिया. इस के बाद जो हुआ, वह और भी चौंकाने वाला था.

पंचपटेलों ने इस मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के सारे गुनाह माफ कर दिए. कहा कि पुष्कर सरोवर में डुबकी लगाओ और गायों के लिए एक बोरी अनाज, एक ट्रैक्टर चारा और 5 टैंकर पानी दे कर ‘पाप मुक्त’ हो जाओ.

दूसरी ओर पीडि़त परिवार से कहा गया कि किसी को इस बारे में बताया तो समाज से बाहर कर देंगे.

गनीमत यह रही कि कन्या देवी के भतीजे महादेव ने 12 अगस्त, 2017 को यह मामला केकड़ी थाने तक पहुंचा दिया. शिकायत में डायन बता कर मारने का आरोप लगाया गया है.

केकड़ी के थानाधिकारी हरीराम कुमावत ने शिकायत मिलने के बाद जांच एसआई को सौंप दी है.

अजमेर एसपी राजेंद्र सिंह के संज्ञान में मीडिया इस घटना को लाई तो उन्होंने निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने का आदेश दिया.

इस मामले में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा के निर्देश पर आयोग की टीम 14 अगस्त को कांदेड़ा, केकड़ी पहुंची और कन्या देवी के बेटे कालूराम और आसपास के लोगों से जानकारी ली. इस के बाद केकड़ी थाना पहुंच कर डीएसपी राकेशपाल सिंह और सीआई हरिराम कुमावत से बात की.

इस मामले में 2 औरतों समेत 5 और लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच कर रहे एसआई शंकरलाल ने बताया कि आरोपी चंद्रप्रकाश, सोनिया, पिंकी, गोपीचंद, महावीर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 दिन की रिमांड पर लिया गया. इस मामले में शामिल मनोहर को तलाशा जा रहा है.

3 अगस्त को कांदेड़ा, केकड़ी में कन्या देवी को उसी की ससुराल के लोगों ने डायन बता कर इतना मारापीटा कि उस की मौत हो गई. उस समय उस का 15 साला बेटा कालूराम घर पर था, जिसे कमरे में बंद कर दिया गया था.

कालूराम की सिक्योरिटी को ले कर महिला आयोग की टीम ने पुलिस से बात की. कालू की जिम्मेदारी चाइल्ड हैल्पलाइन को दी गई है.

राजस्थान सरकार ने सवा 2 साल पहले अप्रैल, 2015 में डायन प्रताड़ना निवारण कानून भी बना दिया, इस के बावजूद राजस्थान में डायन के नाम पर औरतों पर जुल्म ढाने के 37 मामले सामने आ चुके हैं.

पिछले 20 सालों में डायन बता कर औरतों को सताने के 162 मामले सामने आ चुके हैं, वो भी केवल 5 जिलों में.

कानून के माहिरों का मानना है कि यह कानून असरदार तरीके से लागू हो, इस के लिए जरूरी है कि पुलिस ऐसे मामलों में सख्त और तेज ऐक्शन ले. लापरवाही बरतने वाले पुलिस अफसरों पर कड़ी कार्यवाही करे. इस कानून की जानकारी के लिए सरकार समयसमय पर कैंपेन चलाए.

डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2015 में किसी भी औरत को डायन करार देने वाले शख्स को 5 साल की सजा और 50 हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है. साथ ही, किसी भी औरत के खिलाफ लोगों को उकसाने और जायदाद पर कब्जा करने पर 3 साल से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है. इस दौरान औरत के मरने पर आजीवन कारावास और एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है.

कन्या देवी के कातिलों को भी क्या आजीवन कारावास की सजा होगी, यह देखना होगा.

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जिसने लूटा वही बना सुहाग

जिस लड़की ने कुछ महीने पहले ही अपने करोड़पति बौयफ्रैंड पर बहका कर जिस्मानी संबंध बनाने, मारपीट करने और जातिसूचक गाली देने का आरोप लगा कर हंगामा खड़ा किया था, उस के ही गले में वरमाला डाली और उस के नाम का सिंदूर अपनी मांग में भर लिया.

बिहार के इस हाईप्रोफाइल केस में लड़का एक रिटायर्ड आईएएस अफसर का बेटा और करोड़पति औटोमोबाइल कारोबारी निखिल प्रियदर्शी है, वहीं लड़की बिहार के पूर्व मंत्री की बेटी सुरभि है.

9 महीने तक चले इस हंगामे के बाद दोनों ने शादी रचा कर मामले को ठंडा तो कर दिया, पर इस मामले में सुरभि ने निखिल के साथसाथ बिहार कांग्रेस के उपाध्यक्ष पर भी जिस्मानी शोषण का आरोप लगाया था.

इस आरोप में पिता समेत जेल जाने के बाद निखिल ने अदालत में समझौता याचिका दायर की और आरोप लगाने वाली सुरभि से शादी करने की बात कही थी. उस ने याचिका में कहा था कि सुरभि से अब उस का कोई झगड़ा नहीं है और दोनों शादी करने के लिए राजी हैं.

कोर्ट के आदेश के बाद 6 नवंबर, 2017 को पटना के रजिस्ट्रार के सामने निखिल और सुरभि ने शादी रचा ली.

इस शादी के पीछे एक लंबी कहानी है. 22 दिसंबर, 2016 को सुरभि ने निखिल, उस के भाई मनीष और पिता कृष्ण बिहारी प्रसाद के खिलाफ पटना के एससीएसटी थाने में एफआईआर दर्ज की थी. उस के बाद 8 मार्च, 2017 को पीडि़ता ने बुद्धा कालोनी थाने में उस की पहचान उजागर करने, एक करोड़ रुपए और औडी कार मांगने की बातों को सोशल मीडिया पर वायरल करने को ले कर निखिल और ब्रजेश पांडे पर एफआईआर दर्ज कराई थी.

सीआईडी की सुपरविजन रिपोर्ट में मुख्य आरोपी निखिल को कुसूरवार करार दिया गया था. अनुसूचित जाति थाने के आईओ द्वारा की गई जांच में सीआईडी के डीएसपी ने सुपरविजन किया था.

सीआईडी के एडीजे विनय कुमार ने सुपरविजन की समीक्षा करने के बाद निखिल के खिलाफ लगाए गए बलात्कार के आरोप को सही पाया था.

आईजी (कमजोर वर्ग) अनिल किशोर यादव ने भी कहा था कि निखिल पर लगे आरोप सही पाए गए हैं.

निखिल को करीब से जानने वाले बताते हैं कि पावर, पैसा, पौलिटिक्स और पुलिस से निखिल की खूब यारी थी. निखिल एक नामी कार कंपनी के शोरूम का मालिक है. उस के बूते उस ने नेताओं और अफसरों के बीच खासी पैठ बना रखी थी. रसूखदारों से मिलना, उन के साथ उठनाबैठना और पार्टियां करने में उसे खूब मजा आता था. इन सब पर वह जम कर पैसा खर्च करता था.

यौन उत्पीड़न और सैक्स रैकेट चलाने के साथ ही बैंकों से लेनदेन को ले कर भी निखिल के खिलाफ कानूनी मामला चल रहा है. कुछ बैंकों से करोड़ों रुपए के लोन लेने के मामले में वह डिफौल्टर करार दिया गया है और बैंकों ने उस पर केस कर दिया है. बैंकों को रुपए लौटने के मामले में निखिल हाथ खड़े कर चुका है.

मुंबई हाईकोर्ट के आदेश पर निखिल प्रियदर्शी के बेली रोड पर बने कार शोरूम को सील कर दिया था.

टाटा कैपिटल फाइनैंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निखिल की जायदाद जब्त करने का आदेश पुलिस को दिया था. टाटा कैपिटल का करोड़ों रुपए का लोन निखिल नहीं चुका रहा था. सगुना मोड़ के पास बना उस का दूसरा शोरूम पहले ही जब्त किया जा चुका है.

निखिल समेत कांग्रेस नेता ब्रजेश पांडे और संजीत शर्मा पर सुरभि ने बलात्कार और सैक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाया था. निखिल ऊंचे ओहदे पर बैठे कई नेताओं और अफसरों को लड़कियां सप्लाई किया करता था.

सुरभि ने एसआईटी को बताया था कि शादी का झांसा दे कर निखिल उसे महंगी गाडि़यों में घुमाता था. एक दिन वह उसे बोरिंग रोड इलाके के एक फ्लैट में ले गया. उसे कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए दी. उसे पीने के बाद वह बेहोश हो गई.

कुछ देर बाद जब उसे थोड़ा होश आया तो देखा कि ब्रजेश पांडे और संजीत शर्मा उस के साथ गलत हरकतें कर रहे थे. बाद में उस ने निखिल को फटकार लगाई और उस पर शादी करने का दबाव बनाया तो निखिल ने उस के साथ मारपीट की.

सुरभि ने मार्च महीने में पुलिस को दिए बयान में कहा था कि वह निखिल से प्यार करती थी और उस से शादी करना चाहती थी. निखिल ने उसे शादी करने का भरोसा दिया था, पर उस के बाद वह लगातार टालमटोल कर रहा था.

पहले तो कई महीनों तक शादी का झांसा दे कर निखिल ने उस के साथ जिस्मानी संबंध बनाए. उस के बाद उसे गलत कामों को करने पर जोर देने लगा. वह अपने दोस्तों के सामने उस के जिस्म को परोसना चाहता था.

एक दिन बोरिंग रोड के एक फ्लैट में ब्रजेश पांडे के सामने सुरभि को परोसने की कोशिश की. ब्रजेश ने उस के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की. जब पीडि़ता ने उस का विरोध किया तो उस के साथ मारपीट की गई.

सुरभि ने पुलिस को बताया था कि निखिल उस के साथ गलत हरकतें करता था. पहले वह इस बारे में खुल कर कुछ नहीं कह पाती थी, क्योंकि परिवार की बदनामी का डर था. अब उस का परिवार उस के साथ खड़ा है तो वह खुल कर बोल सकती है.

सुरभि ने बताया कि ब्रजेश उसे अपने साथ दिल्ली ले जाना चाहता था. उस ने कई बार उसे दिल्ली चलने को कहा. रुपयों का लालच भी दिया, लेकिन उस ने निखिल के साथ जाने से इनकार कर दिया.

निखिल गांजा पीता था और ज्यादा डोज लेने के बाद वह जानवरों की तरह बरताव करने लगता था. वह उस के जिस्म को नोचनेखसोटने लगता था.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फेसबुक और ह्वाट्सऐप के जरीए लड़कियों से चैटिंग करना निखिल का शौक था. कई लड़कियों को वह सैक्स के घिनौने खेल में जबरन उतार चुका था. लड़कियों को परोस कर उस ने सत्ता के गलियारों और पुलिस महकमे में अपनी गहरी पैठ बना रखी थी.

दिखावे के तौर पर तो निखिल कारों का कारोबार करता था, लेकिन लग्जरी कारों के साथसाथ खूबसूरत लड़कियां भी उस की कमजोरी थीं. अफसरों और नेताओं को औडी और जगुआर जैसी महंगी कारों में घुमा कर उन से दोस्ती गांठने में वह माहिर था.

सुरभि ने जब निखिल पर यौन शोषण का आरोप लगा कर केस दर्ज किया था तो निखिल फरार हो गया था. एसआईटी ने उस की खोज में देश के कई राज्यों में छापामारी की. उसे पता था कि पुलिस उस की खोज में भटक रही है, इसलिए वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा.

साढ़े 3 महीने तक फरार रहने और पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाला निखिल प्रियदर्शी और उस के रिटायर आईएएस पिता कृष्ण बिहारी प्रसाद को 14 मार्च को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया था.

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के लक्ष्मण झूला थाने के चीला ओपी इलाके से उन्हें सुबहसुबह दबोचा गया. बिहार पुलिस को निखिल के उत्तराखंड में होने की सूचना मिली थी.

पटना के एसएसपी मनु महाराज ने पौड़ी गढ़वाल जिले के एसएसपी और अपने बैचमेट मुख्तार मोहसिन को फोन कर उन्हें निखिल के बारे में सूचना दी. उस के बाद ही उत्तराखंड पुलिस निखिल की खोज में लग गई थी. चीला इलाके में गाड़ी चैकिंग के दौरान निखिल अपनी औडी गाड़ी के साथ पकड़ा गया. गाड़ी में उस के पिता भी बैठे हुए थे.

पुलिस ने बताया कि निखिल और उस के पिता के पास पहचानपत्र था. इस वजह से वे किसी होटल में नहीं रुक पा रहे थे. तकरीबन 3 महीने तक बापबेटे ने दिनरात औडी कार में ही गुजारे. वे किसी पब्लिक प्लेस पर कार खड़ी कर के आराम किया करते थे. सार्वजनिक शौचालय में फ्रैश होते और उस के बाद फिर से कार से ही आगे की ओर बढ़ जाते थे.

अब शादी करने के बाद निखिल और सुरभि की नई जिंदगी क्या करवट लेगी, यह देखने वाली बात होगी.

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सावधान : RBI के नाम से चल रही है फर्जी वेबसाइट

अगर आप भी रिजर्व बैंक की वेबसाइट का इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके लिए जानना बहुत जरूरी है. दरअसल, बात ये है कि रिजर्व बैंक के नाम पर एक फर्जी वेबसाइट चल रही है, जो लोगों से उनकी बैंकिग डिटेल मांग रहे है. अगर कोई बैंकिग वेबसाइट आपके बैंक खाते की डिटेल मांगे तो न दें. रिजर्व बैंक ने इसके बारे में चेतावनी जारी करते हुए फर्जी वेबसाइट का यूआरएल भी शेयर किया है.

रिजर्व बैंक के चीफ जनरल मैनेजर जोस जे कट्टूर की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि कुछ अज्ञात लोगों ने www.indiareserveban.org  यूआरएल से रिजर्व बैंक औफ इंडिया की फर्जी वेबसाइट बनाई हुई है. फर्जी वेबसाइट का ले आउट भी रिजर्व बैंक की ओरिजलनल वेबसाइट की तरह ही है. इसलिए यूजर थोड़ा ध्यान से यूआरएल चेक करें.

असली वेबसाइट के जैसी दिखती है फर्जी वेबसाइट

यह वेबसाइट एक दम आरबीआई की असली वेबसाइट के जैसी दिखती है. फर्जी वेबसाइट के होम पेज पर बैंक वेरीफिकेशन विद औनलाइन अकाउंट होल्‍डर्स नाम से सेक्शन बनाया गया है. ऐसा माना जा रहा है कि यह कौलम बैंकिग कस्‍टमर की गोपनीय और पर्सनल डिटेल हासिल करने के लिए बनाया गया है. शीर्ष बैंक ने अपना असली यूआरएल भी शेयर किया है. यह है RBI का असली पता- https://www.rbi.org.in..

कोई बैंकिंग डिटेल मांगे तो न दें

भारतीय रिजर्व बैंक यह बात कई बार स्पष्ट कर चुका है कि वह कस्टमर के बैंक अकाउंट से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मांगता है. इसी बात पर आरबीआई दोबार ये कहा है कि वह किसी इंडीविजुअल से बैंक अकाउंट डिटेल, पासवर्ड जैसे जानकारियां कभी नहीं मांगता है. रिजर्व बैंक ने आम लोगों को चेतावनी दी है कि ऐसी वेबसाइट को औनलाइन कोई जानकारी देना उनके लिए वित्‍तीय तौर पर नुकसानदेह हो सकता है. उनकी डिटेल का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.

मोबाइल एप के जरिए भी धोखाधड़ी

हाल ही में नकली वेबसाइट बनाकर क्रेडिट कार्ड ठगी करने वाले गैंग का पर्दाफाश हुआ था. वहीं 2015 में एक ऐसा ऐप सामने आया था जो अकाउंट के बैलेंस की जानकारी देने का दावा करता था. इस ऐप पर आरबीआई का लोगो बना हुआ था और इसी लोगो के साथ लिखा हुआ था ‘औल बैंक बैलेंस इंक्वायरी नंबर’. इस ऐप पर कुछ बैंको के कस्टमर केयर के नंबर की सूचीबद्ध किए गए थे. आरबीआई ने एक बार फिर से इसी तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए चेतावनी दी है.

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बर्थडे स्पेशल : जानिये क्रिकेट इतिहास के सबसे तेज गेंदबाज की कहानी

क्रिकेट के जिन फैंस ने 90 और 21वीं सदी के शुरुआती सालों के क्रिेकेट को देखा है, उन्हें पता है कि क्रिकेट की पिच पर तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा का खौफ किस कदर बल्लेबाजों के सिर पर चढ़कर बोलता था. दुनिया में ग्लेन मैक्ग्रा की बौल का सामना करने से दुनिया के अच्छे से अच्छे बल्लेबाजों के पसीने छूटते थे. क्रिकेट में उनसे ज्यादा विकेट किसी भी तेज गेंदबाज ने नहीं लिए. लेकिन मैक्ग्रा के लिए क्रिकेट की शुरुआत इतनी आसान नहीं थी.

9 फरवरी 1970 को न्यू साउथ वेल्स में जन्मे ग्लेन मैक्ग्रा की सचिन तेंदुलकर से प्रतिद्वंद्विता किसी से छिपी नहीं थी. उन्होंने सचिन को कई बार आउट किया तो सचिन ने भी कई मैचों में उनकी जमकर खबर ली. अपने 124 टैस्ट मैचों के करियर में मैक्ग्रा ने 563 विकेट लिए. वह दुनिया में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी हैं. आज हम आपको उनके क्रिकेट जीवन से जुड़ी कुछ बाते बताने जा रहे हैं जो आपको हैरान कर देंगे.

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उनके क्रिकेट करियर से जुड़े पहलू

  • मैक्ग्रा क्रिकेटर बनना ही नहीं चाहते थे. वह बास्केटबौल खेलना चाहते थे, लेकिन औस्ट्रेलिया के महान खिलाड़ी और धावक मेलिंडा गेंसफोर्ड ने उन्हें क्रिकेट के लिए बास्केटबौल छोड़ने के लिए कहा. इस तरह से मैक्ग्रा का क्रिकेट करियर शुरू हुआ.
  • जब वह युवा थे, तो उन्हें उनके साथी उनकी खराब बॉलिंग के कारण उन्हें बॉल भी नहीं करने देते थे, वह उस समय बॉल को सही ढंग से सीम भी नहीं करा पाते थे.
  • शुरुआत में मैक्ग्रा की बौलिंग इतनी कमजोर थी कि वह बौल को स्टंप पर हिट ही नहीं कर पाते थे. तब उन्हें बौलिंग सिखाने के लिए विकेट की जगह ड्रम का इस्तेमाल किया गया. इसके बाद उन्होंने बौलिंग स्टार्ट की. और जी तोड़ प्रैक्टिस करने लगे.
  • औस्ट्रेलिया में ग्रेड क्रिकेट खेलने के लिए मैक्ग्रा सिडनी आ गए. उन्हें यहां बीच केरावेन में रहना पड़ा. जीवन यापन के लिए एक बैंक में काम किया. लेकिन अपने ऊपर भरोसा इतना था कि बैंक में विड्राल स्लिप पर साइन कर अपने कलीग को देते और कहते मैं एक दिन बहुत फेमस आदमी बनूंगा.
  • पहली बार 1993 में जब औस्ट्रेलियाई टीम में सिलेक्शन हुआ तो लगा सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन हुआ नहीं. पहला टेस्ट न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला. लेकिन पहले 8 टेस्ट में कुछ कमाल नहीं कर सके. टीम से बाहर कर दिए गए. लेकिन वह अपने प्रयास से कभी पीछे नहीं हटे. 1994-95 में वेस्ट इंडीज के दौरे पर उन्हें फिर से टीम में चुना गया. यहां से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. और बन गए दुनिया के सबसे कामयाब तेज गेंदबाज.
  • आंकड़ों के हिसाब से भी बात करें तो ग्लेन मैक्ग्रा दुनिया के अब तक सबसे कामयाब और खतरनाक तेज गेंदबाज हैं. उनके नाम पर टेस्ट क्रिेकेट में 563 विकेट दर्ज हैं. उनसे आगे सिर्फ तीन स्पिनर, मुरलीधरन, शेन वार्न और अनिल कुंबले हैं.
  • इंग्लैंड टीम के कप्तान माइक अथर्टन को मैक्ग्रा ने 19 बार आउट किया. टेस्ट क्रिकेट में एक बौलर ने किसी भी बल्लेबाज को इतनी बार आउट नहीं किया है. ब्रायन लारा उन्होंने 13 बार टेस्ट क्रिकेट में आउट किया.
  • 2007 में वर्ल्डकप जिताने के बाद उन्होंने तब क्रिकेट को अलविदा कहा, जब वह पीक पर थे. वर्ल्डकप में उन्हें मैन औफ द टूर्नामेंट का खिताब दिया गया. वनडे क्रिकेट में मैक्ग्रा ने 250 मैचों में 381 विकेट लिए.
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ऐसे करें स्मार्टफोन पर होने वाली हर हरकत को रिकौर्ड

क्या आप भी अपने स्मार्टफोन की डिस्प्ले पर होने वाली हर हरकत पर नजर रखना चाहते हैं? उसे रिकौर्ड करना चाहतें है? लेकिन ऐसा करने के लिए आपके फोन पर कोई भी विकल्प नहीं है? तो आपको बता दें कि अब ऐसा बड़ी आसानी से हो सकता है. इसके लिए आपको अलग से कोई सर्विस लेने की जरूरत नहीं है और न ही किसी भी तरह का कोई खर्चा करने की जरूरत है और ना ही अलग से कोई डिवाइस खरीदने की जरूरत है.

ऐसा इसलिए क्योंकि गूगल प्ले स्टोर पर कई एप्स मौजूद हैं, जिन्हें डाउनलोड करके आप अपने फोन की स्क्रीन को रिकौर्ड कर सकते हैं. इस तरह आप अपने व्हाट्सऐप वीडियो कौल से लेकर मैसेंजर टेक्स्ट को वीडियो फौर्मेट में सेव कर पाएंगे.

DU Recorder, AZ Screen Recorder, HD Screen Recorder और Rec.(Screen Recorder) जैसे ऐप्स से आप अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन को रिकौर्ड कर सकते हैं. ये सभी ऐप डिस्प्ले पर होने वाली हर हरकत को रिकौर्ड करने में सक्षम है. हम आपको इन्ही ऐप्स में से एक Rec.(Screen Recorder) के बारे में बताने जा रहे हैं कि ये काम कैसे करता है.

तो चलिए जानके हैं कि कैसे ऐप को स्मार्टफोन पर इंस्टौल करना है और कैसे इससे वीडियो को रिकौर्ड करना है.

– सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर पर जाकर Rec. Screen Recorder ऐप को अपने फोन पर डाउनलोड करें और इंस्टौल कर लें.

– ऐप को ओपेन करने पर आपको कई विकल्प दिखाई देंगे. इनमें वीडियो का साइज, बिट रेट, टाइम और फाइल नेम दिखाई देगा.

– अपने मुताबिक ऐप की सेटिंग्स कर लें. ऐप की सेटिंग्स के बाद रिकौर्ड बटन पर क्लिक करें.

– ऐप आपसे फोटो, मीडिया और फाइल्स एक्सेस करने की इजाजत मांगेगा. Ok  के विकल्प पर टैप करें.

– इसके बाद ऐप आपके स्मार्टफोन की स्क्रीन की हर हरकत को रिकौर्ड करने की इजाजत मांगेगा. इसके लिए Start Now बटन पर टैप करें .

– अब यह ऐप आपके फोन की स्क्रीन पर चलना शुरू हो जाएगा और आपके डिस्प्ले पर होने वाली सारी हरकत को रिकौर्ड करना शुरू कर देगा.

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दो बहनों की शानदार जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर

दो बहनों की शानदार जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर नजर आने वाली है. हम बात कर रहें फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ की रेणुका शहाणे और माधुरी दीक्षित की. जी हां, दोनों अभिनेत्रियां बहुत जल्द ही एक मराठी फिल्म में नजर आने वाली हैं. बौलीवुड की धक-धक गर्ल और रेणुका शहाणे की जोड़ी 23 साल बाद एक बार फिर देखने को मिलेगी.

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इसको लेकर हाल ही में एक कार्यक्रम में रेणुका ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, यह उनके लिए सपने जैसा है जो एक बार फिर सच हो रहा है. उनका सपना था कि वे एक बार फिर माधुरी के साथ काम करें और उनका ये सपना अब 23 साल बाद पूरा हो गया. वह इसे लेकर काफी उत्साहित हैं. उन्हें लगता है अगर किसी को माधुरी दीक्षित के साथ काम करने का अवसर मिलता है तो उसे करना चाहिए, भले ही उसके लिए उन्हें पैसे ही क्यों न देने पड़े. वह इतनी शानदार अभिनेत्री हैं.

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गौरतलब है कि 1994 में आई सुपरहिट फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ में रेणुका ने माधुरी की बड़ी बहन का किरदार निभाया था. इस फिल्म में उनके अलावा सलमान खान मुख्य भूमिका में थे. किरदार के मुताबिक, रेणुका सीढ़ी पर से गिरने के कारण दम तोड़ देती हैं. दर्शकों ने इस पिल्म को काफी पसंद किया था. फिल्म ने बौक्स औफिस पर बहुत धमाल मचाया था. आज भी जब लोग इस फिल्म को देखने बैठते हैं तो उसी दिलचस्पी के साथ पूरा फिल्म देखते हैं जितने मजे के साथ किसी फिल्म को पहली बार देखा जाता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दोनों बड़े अभिनेत्रियां बड़े ही लंबे अरसे बाद मराठी फिल्म ‘3 स्टोरिज’ में साथ काम कर रही हैं. इस फिल्म में उनके अलावा पुलकित सम्राट भी हैं.

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बेटे से तुलना पर बोले सचिन तेंदुलकर, अर्जुन को अर्जुन ही रहना चाहिए

24 साल तक अपने बल्ले से क्रिकेट की दुनिया को सम्मोहित करने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अब क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं, लेकिन उनके बनाए अनगिनत रिकौर्ड उन्हें हर दिन क्रिकेट की दुनिया में चर्चा में बनाए रखते हैं. एक और खास बात है जो उन्हें लगातार खबरों में बनाए रखती है, वह हैं उनके बेटे अर्जुन तेंदुलकर. सचिन की तरह अर्जुन भी क्रिकेट खेलते हैं और आए दिन अपने प्रदर्शन से खूब सुर्खिया बटोरते हैं. हालांकि अर्जुन सचिन की तरह बल्लेबाजी नहीं, बल्कि गेंदबाजी करते हैं. वह बल्ले से भी कई बार कमाल करते हैं.

अभी हाल में अर्जुन तब चर्चा में आए, जब उन्होंने औस्ट्रेलिया में एक टूर्नामेंट में 24 गेंदों में 48 रन बनाए. इसके साथ ही उन्होंने मैच में 4 विकेट भी झटके. खबरों की दुनिया में आए दिन अर्जुन की तुलना सचिन तेंदुलकर के साथ की जाती है. इस बारे में जब सचिन से सवाल किया गया तो टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने अपने बेटे अर्जुन से खुद की तुलना पर अपनी राय रखते हुए कहा कि अर्जुन को अर्जुन ही रहना चाहिए, उसकी तुलना मुझसे नहीं होनी चाहिए. सचिन ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में जारी औटो एक्सपो में ये बात कही.

सचिन ने कहा कि अर्जुन को अपने खेल पर फोकस करना चाहिए और खेल के प्रति जूनून बनाये रखना चाहिए. किसी भी एक पीढ़ी को दूसरी पीढ़ी से तुलना नहीं करना चाहिए. एक पिता होने के नाते मैं चाहता हूं कि अर्जुन बेहतर बने, मैंने भी यही अपने पिता से सीखा है. जीवन में आने वाली हर चुनौती से दो चार होना और इन सबके बीच खेल के प्रति जूनून बनाये रखना ही उसे आगे ले जा सकता है.

वर्तमान टीम अब तक सबसे बेहतरीन टीमों में से एक है, इस सवाल के जवाब में सचिन ने कहा कि मैं टीमों की तुलना करना पसंद नहीं करता हूं. क्योंकि तुलना करते वक्त हम उन खिलाड़ियों का कुछ न कुछ छोड़ देते हैं. जिन्होंने अपने ढंग से इस खेल में अपना योगदान दिया है, आज इस खेल का स्तर इतना उठा है, तो इसमें सभी का योगदान है. इसलिए हमें तुलना करने से बचना चाहिए.

भारत के लिए सचिन तेंदुलकर ने अपने 24 साल के करियर में 34357 रन बनाये हैं. उन्होंने 100 शतक और 164 अर्धशतक अपने नाम किए. जो मौजूदा समय में रिकौर्ड है. भारतीय खेलों में सचिन तेंदुलकर के सराहनीय योगदान की वजह से उन्हें साल 2014 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा जा चुका है.

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अगर आपको भी पसंद है आइसक्रीम, तो आपके लिये है बुरी खबर

आइसक्रीम लवर्स को इस गर्मी झटका लग सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि अपनी फेवरेट आइसक्रीम खाने के लिए उन्हें ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस व्यापार से जुड़ी बड़ी कंपनियां इस गर्मी आइसक्रीम के दाम पांच प्रतिशत तक बढ़ाने के बारे में सोच रही हैं. कीमत में वृद्धि की वजह ड्राई फ्रूट्स, फ्यूल आदि के दाम समेत अन्य लागत बढ़ना बताई जा रही है.

एक खबर के मुताबिक, कीमतें बढ़ने के बावजूद आइसक्रीम का 8,000 करोड़ रुपये का संगठित उद्योग 15 से 18 प्रतिशत की सालाना वृद्धि की उम्मीद कर रहा है. वाडीलाल और क्रीमबेल जैसी बड़ी क्रीम कंपनियां जहां दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं, वहीं अमूल कंपनी का कहना है कि वह अभी कीमतों में इजाफा नहीं करेगी.

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दूसरी ओर मदर डेयरी की ओर से कहा गया है कि वे अभी स्थिति का आकलन कर रहे हैं, जिसके बाद ही कीमतों को लेकर कोई भी फैसला लिया जाएगा.

क्रीमबेल की ओर से इस मामले में कहा गया कि, छह महीनों में डीजल, वेतन-मजदूरी, और पैकेजिंग मटेरियल की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है. इस वजह से आइसक्रीम की लागत बढ़ी है, ऐसे में उसकी कीमतें बढ़ना तय है.

कंपनी ने कहा कि पिछले कुछ सालों से कीमतें स्थिर बनी हुई थीं. लेकिन अब लागत की बढ़ती कीमत से निपटने के लिए दाम बढ़ाना जरूरी हो गया. इस साल इसकी कीमतें पांच प्रतिशत बढ़ाई जाएंगी. यानी जो आइसक्रीम 20 रुपये में मिलती थी वो अब 25 रुपये में मिलेगी.

वहीं इंडस्ट्री का मानना है कि कीमतों में इजाफा होने पर भी ग्राहकों की संख्या में कमी नहीं आएगी. उनका मानना है कि हर साल की तरह इस साल भी आइसक्रीम की डिमांड बनी रहेगी और इंडस्ट्री का कारोबार बढ़ेगा.

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व्हाटसऐप पर अब नहीं दिखेगा आपका औनलाइन स्टेटस, करना होगा ये काम

अगर आप चाहते हैं कि आप किसी से व्हाट्सऐप पर चैट करें और वह आपको औनलाइन नहीं देख पाए और साथ ही मैसेज पढ़ने का नीला निशान भी नहीं आए. तो आज हम आपको इसके बारे में ही बताने जा रहे हैं. ऐसा करने के लिए आपको कोई पैसे नहीं देने हैं. इसके लिए आपको बस अपने व्हाट्सऐप की सेटिंग्स में कुछ बदलाव करना होगा. इसके अलावा एक ऐप भी इंस्टॉल करनी होगी, सबसे खास बात की इसके लिए अलग से कोई पैसा नहीं देना है, यह बिल्कुल फ्री है.

सेटिंग्स में बदलाव करने के लिए अपने व्हाट्सऐप को ओपन करें. इसके बाद सबसे ऊपर राइट साइड में आ रहे 3 डौट्स पर क्लिक करना है. यहां कुछ औप्शन आएंगे. यहां सबसे पहले आ रहे Privacy (प्राइवेसी) के औप्शन पर क्लिक करें. यहां क्लिक करने के बाद कई औप्शन आएंगे. यहां सबसे आखिर में आ रहे Read Receipts (रीड रिसिप्ट्स) का औप्शन आ रहा होगा.

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इसके सामने टिक का निशान आ रहा होगा, इस टिक के निशान पर क्लिक करके इसे हटा दें. इसे हटाने के बाद आप व्हाट्सऐप के किसी भी मैसेज को देखेंगे तो उस पर टिक का नीला निशान नहीं आएगा. मतलब सेंडर को पता ही नहीं चलेगा कि आपने मैसेज देख लिया है या नहीं.

यह सब करने के बाद सबसे पहले आप Unseen Ninja (अनसीन निंजा) ऐप को गूगल प्ले स्टोर से इंस्टौल करें इसे जब आप इंस्टौल कर लेंगे तो इसमें कुछ अलग से करने की जरूरत नहीं है. इसी ऐप में आपका व्हाट्सऐप चल जाएगा. जब भी कोई मैसेज आए तो इस ऐप से रिप्लाई करें.

इस ऐप से रिप्लाई करने पर व्हाट्सऐप पर आपको औनलाइन नहीं दिखाएगा. आप इसमें व्हाट्सऐप पर आने वाले सभी मैसेज पढ़ सकते हैं. इसके अलावा रिप्लाई भी कर सकते हैं. इस ऐप से रिप्लाई करने पर आपका लास्ट सीन टाइम भी नहीं बदलेगा. मतलब इस ट्रिक से आप व्हाट्सऐप पर आसानी से चैट कर सकते हैं लेकिन किसी को पता ही नहीं चलेगा.

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