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इन ऐप्स के जरिए आप भी कमा सकते हैं एक्सट्रा इनकम

VIDEO : इस तरह बनाएं अपने होंठो को गुलाबी

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स्टार्टअप लौंच करने का और अपनी कंपनी पर खुद के मालिकाना हक होने का सपना डिजिटल होते भारत में अब अधिकतर लोग देखते हैं. इसके साथ ही युवाओं समेत हर वर्ग में फ्रीलांस काम करना पहली पसंद बनता जा रहा है. तकनीकी माध्यमों में हो रही लगातार तरक्की ने इस भावना को और बल दिया है.

फ्रीलांसिग काम में युवाओं समेत हर वर्ग को काम चुनने से लेकर काम के घंटे तय करने की आजादी मिलती है. वहीं कुछ लोगों को वरीयता में फ्रीलांस काम पारिवारिक या शारीरिक मजबूरियों के कारण भी होता है. इन सभी वर्गों के लिए फ्रीलांसिंग एक बहुत अच्छा विकल्प है. आज हम आपको फ्रीलांस काम दिलाने वाली ऐसी ही कुछ ऐप के बारे में बताऐंगे, जो आपको घर बैठे काम करने के लिए ‘एक्सट्रा मनी’ दिलवा सकती हैं.

इन ऐप पर आप अपने काम की कीमत तय कर सकते हैं और आपको हायर करने वाला आपके प्रोजेक्टस देख कर आपको पेमेंट कर देता है. आप अपनी पसंद का काम चुनकर उसपर बिडिंग (काम देने वाले के बजट के अनुसार बोली) कर सकते हैं. काम देने वाले के बजट के अनुसार अगर आप की बोली कम औऱ उसके बजट में हुई तो आपको काम अलौट हो जाता है.

काम मिलने के बाद आपको इसे समय पर पूरा भी करना होता है. इन ऐप में जब आपका पेमेंट किया जाता है, तो कुछ पैसे कमिशन फी के तौर पर भी काटे जाते हैं. यहां आपको उन 5 ऐप के बारे में बताया जा रहा है, जिनको गूगल प्लेस्टोर में यूजर्स ने फीडबैक में ठीक-ठाक रेटिंग दी है.

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Efii – Freelancers Near Me

गूगल प्लेस्टोर पर 4.7 की रेटिंग पाने वाली एफी एक फ्रीलांसिंग ऐप है. इस ऐप में दुनियाभर से ‘काम देने वाले/Job Provider’ और ‘काम करने वाले लोग/Job Seeker’ जुड़े हुए हैं. इस ऐप में आपको दुनियाभर के किसी भी कोने से काम देने वाला मिल सकता है. इसके साथ ही आप भी किसी और को काम दे सकते हैं.

इस ऐप में यूजर को प्रीमियम व बेसिक सब्सक्रिप्शन के विकल्प मिलते हैं, जिसके आधार पर आपको काम जल्द से जल्द मिलने और अच्छी कमाई होने का दावा किया जाता है. इस ऐप में 20 विभिन्न कैटेगरी हैं, जिसमें लोकेशन के आधार पर काम के चयन जैसे फीचर दिए गए हैं. इस ऐप में यूजर को ब्लौगिंग, वौयसओवर, प्रमोशन, डिजिटल मार्केटिंग, वेब डिजाइनिंग से लेकर फोटोग्राफी और कंटेंट से लेकर प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों में काम मिलता है.

Fiverr – Freelance Services

गूगल प्लेस्टोर पर 4.6 की रेटिंग वाली यह फ्रीलांसिंग ऐप आपको 116 तरह की कैटिगरी में काम दिलाने का दावा करती है. इस ऐप पर आप अनुवाद, प्रोडक्शन, स्क्रिप्ट लेखन, वेबसाइट डिजाइनिंग और वौयसओवर जैसे कई फ्रीलांस काम पा सकते हैं या किसी को काम दे सकते हैं. इस ऐप पर आप जो काम करना चाहते हैं, उसका ब्यौरा भर देने पर काम देने वाला क्लाइंट आपसे संपर्क करता है.

Taskkers – Local Freelancer

इस ऐप को गूगल प्लेस्टोर पर 4.6 रेटिंग मिली हैं. इस ऐप के द्वारा आप देश-विदेश तक के लोगों के लिए काम करने का मौका पा सकते हैं. यह ऐप ब्लौगिंग, वौयसओवर, प्रमोशन, डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में काम दिलाने का दावा करता है. भारत में इस ऐप का औफिस गुजरात के सूरत शहर में है.

Truelancer.com – Search Jobs & Hire Freelancer

ट्रूलांसर डौट कौम ऐप को गूगल प्लेस्टोर पर 4.4 रेटिंग मिली हैं. यहां भी आप काम ढूंढ सकते हैं और दूसरों को काम दे सकते हैं. इस ऐप पर पेमेंट के औप्शन के लिए पेपाल, पेटीएम जैसे वौलेट माध्यमों का प्रयोग किया जाता है. यहां आप किसी वेब डिजाइनिंग से लेकर फोटोग्राफी और कंटेंट से लेकर प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों में काम चुन सकते हैं.

Freelancer – Hire & Find Jobs

इस फ्रीलांसिंग ऐप की गूगल प्लेस्टोर पर 4.1 रेटिंग है. इस ऐप के जरिए आपको अनुवाद, प्रोडक्शन, स्क्रिप्ट लेखन, वेबसाइट डिजाइनिंग और वौयसओवर जैसे कई फ्रीलांस काम मिल सकते हैं. फ्रीलांसर डौट कौम का औफिस औस्ट्रेलिया में है. यह ऐप एंड्रौयड और आईओएस दोनों पर उपलब्ध है.

वीडियो : इस गेंदबाज के बाउंसर ने दिलाई फिलीप ह्यूज की याद

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क्रिकेट के मैदान पर एक बार फिर बड़ा हादसा होते-होते बच गया. औस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज सीन एबौट की बाउंसर से बल्लेबाज घायल होकर नीचे गिर गया, जिसके बाद फिजियो को बुलाया गया. दरअसल, एबट ही वो गेंदबाज हैं जिनकी गेंद पर उभरते औस्ट्रेलियाई बल्लेबाज फिलिप ह्यूज की मौत हो गई थी.

फिलिप ह्यूज की मौत के बाद एबौट खुद उस घटना को अभी तक भूल नहीं पाए हैं. शेफील्ड शील्ड में न्यू साउथ वेल्स की तरफ से खेलते हुए एबौट ने विक्टोरियन बल्लेबाज विल पुकोस्की को अपनी तेज बाउंसर से घायल कर दिया. एबौट की गेंद इतनी तेज थी कि वो हेल्मेट से टकराने के बाद भी काफी दूर तक चली गई.

इस मंजर को देख एबौट और आस-पास मौजूद खिलाड़ियों का ध्यान फिलिप ह्यूज के साथ हुए उस दर्दनाक हादसे की ओर चला गया, जिसमें उनकी मौत हो गई थी. बता दें कि एबट की बाउंसर की वजह से ही फिलिप ह्यूज की जान गई थी. खिलाड़ियों ने विल पुकोस्की को जब मैदान पर गंभीर अवस्था में गिरते हुए देखा तो तुरंत फिजियो को बुलाया गया.

पुकोस्की काफी देर तक उठ नहीं पाए और मैदान पर खिलाड़ियों ने उनको चारों ओर से घेर लिया. दोनों टीमों के खिलाड़ी उनकी सलामती की दुआ करने लगे. हालांकि, थोड़ी देर बाद फिजियो उन्हें होश में लाने में कामयाब रहे और इसके बाद वह पुकोस्की को लेकर मैदान से बाहर ड्रेसिंग रूम चले गए. पुकोस्की की हालत को देखकर गेंदबाज एबौट काफी परेशान नजर आए.

वो अपनी अगली गेंद डालने से पहले काफी समय तक सोच में डूबे नजर आए. नंवबर 2014 को उन्हीं की गेंद ह्यूज के गले में लगी थी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी. हालांकि, पुकोस्की पूरी तरह से सुरक्षित हैं. आने वाले समय में पुकोस्की औस्ट्रेलिया की तरफ से खेलते नजर आ सकते हैं. घरेलू सीजन में वह कमाल के फौर्म में नजर आ रहे हैं, अगर वह अपने इस फौर्म को यूं ही बरकरार रखते हैं तो जल्द ही उनका नाम बड़े क्रिकेटरों के लिस्ट में होगा.

‘मेंटल है क्या’ में अनोखे अंदाज में दिखेंगे राजकुमार राव और कंगना

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बौलीवुड एक्टर राजकुमार राव और एक्ट्रेस कंगना रनौत दोनों ही बड़े पर्दे के ऐसे कलाकार हैं जो अपने किरदार में जान डाल देते हैं. डायरेक्टर विकास बहल ही हैं जिन्होंने इस जोड़ी को बड़े पर्दे पर एक साथ उतारा था. दोनों पहली बार फिल्म ‘क्वीन’ में एक साथ नजर आए थे और अब यह जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ नजर आने वाली है और इस बार दोनों फिल्म ‘मेंटल है क्या’ में नजर आएंगे. इस फिल्म को एकता कपूर के बालाजी प्रोडक्शन द्वारा प्रोड्यूस किया जा रहा है.

कुछ देर पहले ही बालाजी मोशन पिक्चर्स ने फिल्म के फर्स्ट लुक को शेयर करते हुए फिल्म की जानकारी दी है. मेकर्स द्वारा एक कंगना की फोटो और एक राजकुमार राव की फोटो शेयर की गई है. इन तस्वीरों में दोनों अजीब से चेहरे बनाते हुए नजर आ रहे हैं. इस फिल्म का निर्देशन प्रकाश कोलेवमूडी करेंगे. बता दें, प्रकाश द्वारा निर्देशित तेलुगु फिल्म बोमालता के लिए वह राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं. ‘मेंटल है क्या’ की कहानी कनिका ढिल्लन ने लिखी है.

पहली तस्वीर कंगना की है. इस तस्वीर में कंगना के बाल छोटे नजर आ रहे हैं और वह आंखो से मस्ती करते हुए दिखाई दे रही हैं. वहीं दूसरी तस्वीर राजकुमार राव की है और इस तस्वीर में राजकुमार अपनी आंखों पर उंगली रखे हुए दिख रहे हैं और उनकी उंगली पर आंखे बनी हुई हैं. बता दें, दोनों की यह तस्वीरें फिल्म के टाइटल की साफ झलक दिखा रही हैं. बता दें, ‘मेंटल है क्या’ साइकोलोजिकल थ्रिलर फिल्म है और इसमें राजकुमार और कंगना का अलग अंदाज नजर आएग.

एमएसएमई की परिभाषा बदली

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सरकार ने कारोबार को और पारदर्शी बनाने के लिए अति लघु, लघु तथा मझोले उद्योग (एमएसएमई) की नई परिभाषा तय की है. इन तीनों श्रेणियों के उद्यमियों को अब नई परिभाषा के तहत परखा जाएगा और उसी आधार पर उन की श्रेणी तय की जाएगी. अब उन्हें उनके सालाना कारोबार के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा.

नई परिभाषा के तहत सालाना 5 करोड़ रुपए तक के कारोबार वाला उद्योग अति लघु श्रेणी, 5 से 75 करोड़ रुपए तक के राजस्व अर्जन करने वाले कारोबारी लघु तथा 75 करोड़ से 250 करोड़ रुपए तक का काम करने वाले मझोले श्रेणी के कारोबारी होंगे.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एमएसएमई के लिए 250 करोड़ रुपए तक के कारोबार पर 25 प्रतिशत कौर्पाेरेट टैक्स का प्रस्ताव किया है. पहले यह कर 30 प्रतिशत था. इस से पहले रिजर्व बैंक ने एमएसएमई के लिए रिपेमैंट की अवधि 90 दिन से बढ़ा कर 180 दिन कर दी है.

सरकार मानती है कि इस से उद्यमिता क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी और आसान कारोबार की कार्यशैली को बढ़ावा मिलेगा. इस के अलावा इन उद्योगों में निरीक्षण आदि का झंझट भी साफ हो जाएगा. पहले अपने संयंत्र पर 25 लाख रुपए तक का निवेश करने वाले उद्यम अति सूक्ष्म, 25 लाख से 5 करोड़ रुपए तक का निवेश करने वाले लघु तथा 10 करोड़ रुपए तक का निवेश करने वाली उद्यम मझोले उद्योग की श्रेणी में आते थे. पहले निरीक्षण करने के लिए इन कंपनियों का वर्गीकरण किया जाता था जिस में तरहतरह के घपले होते थे और एक तरह का इंस्पैक्टरराज कायम रहता था, लेकिन अब सबकुछ वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी में दी गई सूचनाओं के आधार पर स्वत: निर्धारित हो जाएगा. इस से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा.

जीएसटी में उद्यमी द्वारा दिए गए आंकड़ों को उस के उद्यम की श्रेणी का आधार माना जाएगा. एमएसएमई का निर्धारण अब उन के सालाना राजस्व के आधार पर होगा.

फोन के चोरी या गुम हो जाने पर ऐसे करें व्हाट्सऐप डाटा रिकवर

VIDEO : सिर्फ 1 मिनट में इस तरह से करें चेहरे का मेकअप

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फोन का खोना या फिर चोरी हो जाना आज के समय के किसी बुरे सपने से कम नहीं है. फोन का डाटा, बैंक अकाउंट के डिटेल्स, डिजिटल वौलेट, फोटो, चैट, ईमेल ये सारी चीजें किसी भी गलत हाथ में लग सकती हैं. फोन का खोना मतलब आपके कई जानकारियों का खो जाना है. ऐसे में अगर आपका फोन खो गया है, तो इस बात का ध्यान देना जरूरी है कि आपके फोन का डाटा चोरी न हो सके. हम आपको उन तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से फोन के खो जाने के बाद आप अपने व्हाट्सऐप अकाउंट को रिकवर कर सकते हैं.

सिम को लौक करें

फोन के चोरी होते ही सबसे पहले अपने मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर को फोन करें. ऐसा करने पर अब कोई भी आपके अकाउंट को औथेंटिकेट नहीं कर पाएगा. ऐसा इसलिए भी करना जरूरी है क्योंकि किसी भी कौल या मैसेज के लिए जरूरी है कि आपका फोन किसी अकाउंट से जुड़ा हो. ये अकाउंट आपके नंबर के जुड़े होते हैं. अगर आप अपना नंबर डिएक्टिव करा लेंगे तो सारे अकाउंट काम करना बंद कर देंगे.

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दूसरे हैंडसेट पर अपने अकाउंट को चलाएं

सिम लौक होने के बाद आप अपने व्हाट्सऐप अकाउंट को दूसरे हैंडसेट पर चला सकते हैं. इसके लिए जरूरी है कि आप अपने फोन नंबर का दूसरा सिम एक्टिवेट कराएं. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि व्हाट्सऐप एक बार में एक ही नंबर पर काम करता है.

व्हाट्सऐप टीम की मदद लें

फोन खोने पर आप एक और तरीके का इस्तेमाल कर सकते हैं. आप व्हाट्सऐप टीम को ई मेल कर सकते हैं. ध्यान रखें कि अपने ई मेल के सब्जेक्ट में ‘Lost/stolen: Deactivate my account’ लिखें. सब्जेक्ट में अपने मोबाइल नंबर को टेक्स्ट के बाद लिखना न भूलें. मोबाइन नंबर के शुरू में अपने देश के कोड को लिखना न भूलें. याद रखें नंबर वहीं डाले जो आपने स्मार्टफोन में इंटर किया था.

इसलिए जरूरी है व्हाट्सऐप टीम की मदद

व्हाट्सऐप अकाउंट को वाई फाई की मदद से एक्सेस किया जा सकता है. वाईफाई होने पर सिम कार्ड की जरूरत नहीं पड़ती है. इसलिए जरूरी है कि व्हाट्सऐप टीम को मेल करके अपने अकाउंट को डिएक्टिवेट करा लें. व्हाट्सऐप टीम द्वारा अकाउंट डिएक्टिवेट करने के 30 दिनों के भीतर आप इसे वापिस एक्टिवेट करा सकते हैं, लेकिन 30 दिनों के बाद आपका अकाउंट हमेशा के लिए डिलीट हो जाएगा. जिस दौरान आपका अकाउंट डिएक्टिवेट होगा आपके अकाउंट पर आया मैसेज पेंडिंग में रहेगा और 30 दिनों बाद ये हमेशा के लिए डिलीट हो जाएगा. इसलिए आप अपने फोन के कौन्टेक्ट को गूगल ड्राइव पर पहले से सेव कर लें.

मेरी कंटूरिंग मेकअप करने की इच्छा है. उस से चेहरे की कई कमियां छिप जाती हैं. मुझे कंटूरिंग मेकअप की जानकारी दें.

VIDEO : सिर्फ 1 मिनट में इस तरह से करें चेहरे का मेकअप

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सवाल
मेरी उम्र 33 साल है. मेरी कंटूरिंग मेकअप करने की इच्छा है, क्योंकि उस से चेहरे की कई कमियां छिप जाती हैं. कृपया मुझे कंटूरिंग मेकअप की जानकारी दें?

जवाब
– नाक को पतला दिखाने के लिए उस की दोनों तरफ डार्क शेड फाउंडेशन अप्लाई करें.

– यदि नाक लंबी है, तो उस के नीचे डार्क शेड लगाएं. ऐसा करने से वह छोटी नजर आएगी.

– डबल चिन को छिपाने के लिए चिन के नीचे ब्राउन कलर लगाएं.

– फौरहैड चौड़ा है तो ब्रौंजर की मदद से दोनों तरफ 3 बनाएं. ऐसा करने से फेस पतला नजर आएगा.

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क्‍या है कंटूरिंग मेकअप?

कॉन्टूरिंग मेकअप करने की एक तकनीक है, इसे रियैलिटी टीवी स्टार किम करदाशियां ने मशहूर कर दिया है. इसमें हाइलाइटर्स, ब्रॉन्जर्स और फाउंडेशन का यूज भी शामिल है. इससे चेहरे में डेफिनिशन ऐड किया जाता है और चेहरे को शेप भी मिलता है. बड़े-बड़े मेक-अप आर्टिस्ट और सेलीब्रिटीज अपने फीचर्स को और पतला दिखाने के लिए कॉन्टूरिंग की ही मदद लेते हैं. इस तकनीक से आप अपनी जॉलाइन को उभार सकते हैं और चिन को पतला दिखा सकते हैं. वैसे तो ये सुनने में मुश्किल लग रहा है पर कॉन्टूरिंग मेकअप के जरिए इसे करना आसान होता है. यह एक ऐसी कला है जिसमें मेकअप की मदद से आपके चेहरे पर बेहतरीन आकार और कर्व्स बनाए जा सकते हैं.

कॉन्टूरिंग को समझने का एक और तरीका, चेहरे के विभिन्न कोणों पर परछाई का निर्माण करना है. ये परछाइयाँ काफी प्रभावी होती हैं, क्योंकि ये आपके चेहरे के गुणों को और भी सामने लेकर आती हैं. अगर आप कॉन्टूरिंग की मदद से मेकअप करने के लिए तैयार हैं तो इस प्रक्रिया का कदम दर कदम पालन करना काफी महत्वपूर्ण होगा.

कॉन्टूरिंग करने का तरीका

कॉन्टूरिंग करने का सबसे सही तरीका है कि आप सबसे पहले एक सही बेस के साथ इसकी शुरुआत करें. इसके लिए आपको अपनी स्किन टोन का फाउंडेशन लेना होगा ताकि आपका रंग और साफ लगने लगे. फाउंडेशन अप्लाई करने के बाद और आई, चीक और लिप्स का मेकअप करने से पहले आप यह मेकअप ट्रिक्स अपना सकती हैं. इसके लिए आपको बस एक अच्छे कॉन्टूरिंग ब्रश, कॉन्टूरिंग पाउडर या क्रीम की जरूरत होती है. स्किन टोन से दो या तीन शेड डार्क फाउंडेशन भी इसके लिए इस्‍तेमाल किए जा सकते हैं.

ब्रोन्जर का इस्तेमाल चेहरे को कॉन्टूर करने के लिए किया जाता है, ना की उसे हाईलाइट करने के लिए. इसलिए आपका ब्रोन्ज मैट होना चाहिए. एक ऐसे ब्रोन्ज का इस्तेमाल करें जो आपकी त्वचा से दो शेड डार्क हो ताकि आपका नैचुरल लुक सामने आ सके. ब्रोंजर को लगाने के लिए आपके लिये चेहरे के छोटे भागों पर फैन ब्रश या फिर आई शैडो फ्लफ ब्रश का प्रयोग करना ही उचित रहेगा. चेहरे के बड़े भागों पर कोणों वाले ब्रश का प्रयोग करें.

कॉन्टूरिंग का एक और महत्वपूर्ण भाग हाईलाइटिंग करना है, जिससे आपके चेहरे पर एक उजला प्रभाव आएगा. अपने फाउंडेशन के साथ थोड़ा सा हाईलाइटर भी लगाएं, क्योंकि इससे आपकी त्वचा पर एक नयी चमक आएगी.चीक्स और चिन के कॉन्टूरिंग के लिए एंगल्ड ब्रश यूज कर सकते हैं.

अगर आप रात को कहीं घूमने जा रही हैं तो शिमर का प्रयोग भी कर सकती है. चेहरे को पतला दिखाने के लिए आप शिमर का भी प्रयोग कर सकती है इसे आप अपने कॉलरबोन और चिकबोन पर इस्तेमाल कर सकती है.

एक बार अगर आप अपने चेहरे पर कॉन्टूर कलर का इस्तेमाल करती हैं तो ऐसे में आपका चेहरा नैचूरल शेड बनाने लगता है. इसी के साथ आपको एक अच्छी गुणवत्ता और घना पैक ब्लेंडिंग ब्रश का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आपके चेहरे पर सब कुछ सहज लगे.

कॉन्टूरिंग को आप नियमित किये जाने वाले मेकअप में शामिल नहीं कर सकते, क्‍योंकि इसे लगाने में समय लगता है. लेकिन विशेष अवसरों में आपके चेहरे को स्लिम दिखाने के लिए यह खूबसूरती से काम करता है.

EPFO : 10 लाख से ज्यादा निकासी पर करना होगा औनलाइन आवेदन

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EPFO ने पीएफ का पैसा निकालने के नियम में बदलाव कर दिया है. अब पीएफ खाते से 10 लाख रुपए से ज्यादा रुपए निकालने के लिए औनलाइन आवेदन करना होगा. इसके लिए औफलाइन आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसके अलावा EPFO ने कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) 1995 से 5,00,000 रुपए से ज्यादा की निकासी के लिए भी औनलाइन आवेदन जरूरी कर दिया है.

मतलब इसके लिए भी अब औफलाइन किए गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. आपको बता दें कि पेंशन योजना के तहत, पेंशन की आंशिक राशि की निकासी का प्रावधान है. इसे पेंशन के पैसे का रूपान्तरण कहा जाता है. फिलहाल ईपीएफओ अंशधारकों को औनलाइन के साथ मैनुअल तरीके से भी दावा दाखिल करने की अनुमति है.

EPFO की तरफ से यह कदम क्लेम सेटलेमेंट के दौरान फ्रौड होने की आशंका के चलते उठाया गया है. इसका मतलब यह है कि अब आप अपना 10 लाख से ज्यादा का पीएफ औफलाइन मोड से नहीं निकाल पाएंगे. बता दें कि मौजूदा समय में आपकी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी पीएफ के तौर पर कटता है. इसका 8.66 फीसदी आपके पेंशन खाते में जाता है. अगर आप औनलाइन पीएफ निकालना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको अपना पीएफ अकाउंट अपने आधार से लिंक करना जरूरी है.

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अगर आपका पीएफ अकाउंट आधार से लिंक नहीं होगा, तो आप औनलाइन पीएफ निकालने के लिए अप्लाई नहीं कर पाएंगे. सिर्फ 10 लाख से ज्यादा की रकम ही नहीं, बल्क‍ि आप इससे कम पीएफ अमाउंट को निकालने के लिए भी औनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. हालांकि बिना आधार लिंक‍ किए आप यह काम औनलाइन नहीं कर पाएंगे.

आधार से ऐसे करें पीएफ अकाउंट लिंक

  • सबसे पहले EPFO की वेबसाइट gov.in पर जाएं, होम पेज पर ही मौजूद ‘Online Services’ के ‘e-KYC Portal’ के लिंक पर क्लिक करें.
  • ‘e-KYC Portal’ पर क्लिक करते ही नया वेबपेज खुलेगा. यहां पर आपको ‘LINK UAN AADHAAR’ के लिंक पर क्लिक करना होगा.
  • अब एक और नया वेबपेज खुलेगा जहां आपको अपनी जानकारी भरनी होंगी.
  • डीटेल्स में आपको अपना UAN और मोबाइल नंबर देना होगा. ध्यान रहे आपका मोबाइल नंबर UAN के साथ रजिस्टर होना चाहिए.
  • डीटेल्स देने के बाद रजिस्टर मोबाइल नंबर पर OTP आएगा.
  • OTP भरने के बाद आपको आधार नंबर भरना होगा और फिर से सबमिट पर क्लिक करना होगा.
  • इसके बाद एक और OTP आएगा. यह OTP उस मोबाइल नंबर पर आएगा जिससे आपका आधार लिंक होगा.
  • आखिरी OTP वैरिफिकेशन के बाद UAN आधार से लिंक हो जाएगा.

ये हैं आज की कौमेडी क्वीन्स

भारती सिंह लल्ली के किरदार में काफी मशहूर रहीं. फिलहाल वे कौमेडी के साथसाथ ऐक्टिंग की दुनिया में भी हाथ आजमा रही हैं.

महिलाओं से जुड़े कई टैबू सब्जैक्ट्स को अदिति मित्तल कौमेडी की आड़ में बड़ी सख्ती से कह जाती हैं.

सुमुखी हास्य को महिलाओं का मजाक उड़ाने वाले चुटकुलों से हट कर कुछ अलग तरह से कौमेडी करने में विश्वास करती हैं.

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सोनाली ठक्कर के अंधविश्वास, रूढि़वादी सोच व रीतिरिवाजों पर कटाक्ष करते हुए चुटकुले काफी पसंद किए जाते हैं.

दिल्ली में लड़कियों की शौपिंग व लड़कों की छेड़छाड़ जैसे विषयों पर मल्लिका दुआ के कौमिक वीडियोज काफी पौपुलर हैं.

कौमेडी का नया फंडा है ‘स्टैंडअप कौमेडी.’ इस के बारे में तो आप जानते ही होंगे और अगर नहीं जानते हैं, तो कपिल शर्मा को टीवी पर जरूर ही देखा होगा. उसी तरह की हास्यकला को दर्शाते हुए होती है ‘स्टैंडअप कौमेडी’ जिस में एक हास्य कलाकार स्टेज पर खड़ा हो कर अपने सामने बैठे दर्शकों को हंसाहंसा कर लोटपोट करता है. वह अपनी बातों व टिप्पणियों से अपने दर्शकों को हंसाता है. उस के चुटकुलों में समाज में चल रहे मुद्दे शामिल होते हैं.

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देश में बहुत से ऐसे पुरुष हास्य कलाकार हैं. मगर, अब कई महिलाएं भी इस क्षेत्र में काम कर रही हैं. कौमेडी क्वीन्स कही जाने वाली ये हास्य कलाकार अंधविश्वास, कुरीतियों, रूढि़यों, पुरुषप्रधान समाज आदि पर हास्य के माध्यम से चोट करती हैं.

भारती का हास्यनामा

भारत में किसी स्टैंडअप महिला हास्य कलाकार का नाम लें तो सब से पहले नाम आता है कौमेडी क्वीन का तमगा हासिल कर चुकीं छोटे परदे की लल्ली उर्फ अमृतसर की भारती सिंह का. जो अपनी फुजूल की निरर्थक व बचकानी बातों से दर्शकों को गुदगुदाती हैं. भारती सिंह लल्ली नाम के बारे में कहती हैं, ‘‘मैं जब 2008 में अपने पहले टीवी शो में आई, तो लल्ली नाम से फेमस हुई. अधिकतर लोग तो मेरा सही नाम जानते ही नहीं थे. लेकिन लल्ली अब समय के साथ जवान हो कर भारती बन गई है. हमेशा बच्ची थोड़े ही रहेगी.’’

भारती कौमेडी शो ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ सीजन 4 की दूसरी रनरअप भी रहीं, जहां इन की स्टैंडअप कौमेडी के काल्पनिक पात्र लल्ली की काफी प्रशंसा हुई. वे प्रतियोगी के रूप में ‘कौमेडी सर्कस’ की 2010 की सीरीज ‘कौमेडी सर्कस के सुपरस्टार्स’ और ‘कौमेडी सर्कस का जादू’ में भी शामिल हुईं. 2011 में उन्होंने ‘जुबिली कौमेडी सर्कस,’ ‘कौमेडी सर्कस के तानसेन’ और कौमेडी सर्कस का नया दौर’ में भी भाग लिया. 2011 में टीवी शो ‘प्यार में ट्विस्ट’ में भी अभिनय किया. इस के अतिरिक्त सैलिब्रिटी डांस रिऐलिटी शो ‘झलक दिख ला जा 5’ में भी वे एक प्रतियोगी के तौर पर आईं. ये सालों से स्टैंडअप ऐक्ट कर रही हैं.

ये कई टीवी रिऐलिटी शोज में दिखाई दीं और कई इनाम भी जीते. टीवी शोज के अलावा, वे पंजाबी फिल्मों जैसे ‘एक नूर’ और ‘यमला जाट यमला’ में भी दिखाई दीं. उन्होंने अपनी फिल्म ‘खिलाड़ी 786’ के साथ बौलीवुड में कदम रखा. भारती सिंह एक एपिसोड में अभिनय के लिए 25 से 30 लाख रुपए लेती हैं और 15 लाख रुपए लाइव इवैंट में परफौर्म करने के लेती हैं. उन की सालाना इनकम लगभग 8 करोड़ रुपए है.

व्यंगबाण छोड़तीं अदिति

अदिति मित्तल देश की चर्चित हास्य कलाकार हैं. उन का शो किसी अन्य की तुलना में काफी प्रभावशाली माना जाता है. वे एडिनबर्ग फैस्टिवल और बीबीसी में अपने शो के जरिए तेजी से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना मुकाम बनाती जा रही हैं. बीबीसी रेडियो पर उन्होंने एक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया ‘अ बिगनर्स गाइड टू इंडिया’ के नाम से. उन्होंने अपने पहले शो में दुनिया को भारत की महिलाओं के बारे में बताया.

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वे हर विषय पर बात करती हैं. वे 1991 से भारतीय अर्थव्यवस्था से ले कर राजनीति, भारतीय महिला धावकों को अनदेखा करने पर भी व्यंग्य करती हैं. अदिति असल में भारतीय समाज की सोच पर चोट करती हैं. उन के शोज के विषय ऐसे होते हैं कि आप हंसते हुए लोटपोट तो होंगे ही, साथ ही अंदर ही अंदर शर्म से पानीपानी भी हो जाएंगे.

अदिति ने भारतीय समाज की कड़वी सचाइयों को मजाक के रूप में प्रस्तुत किया है. उन के मजाक में महिलाएं तो ठहाके लगाती ही हैं, पर लड़कों के लिए वहां बैठे रहना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. वे देश में महिला हास्य कलाकारों की कमी पर भी मजाक करती है, कहती हैं, ‘‘आप देश में महिला कौमेडियनों की संख्या गिनो तो आप जीरो की खोज कर लेंगे.’’ अदिति अपनी कौमेडी से लोगों के दिलोदिमाग पर छा रही हैं.

अदिति मित्तल तमाम विषयों पर ऐसीऐसी बातें करती हैं कि आप हंसते ही रह जाओगे. उन्हें भारत की सब से फनी महिलाओं में और भारत के सब से अच्छे कौमेडियनों में से एक माना जाता है. विदेशों में भी उन्हें अपने ऐक्ट दिखाने के मौके मिल चुके हैं. अदिति की खास बात यह है कि वे ऐसी बातों को मजाकमजाक में कह जाती हैं जो आप भारत में लड़कियों से सुनने की उम्मीद भी नहीं कर सकते. वे ब्रा और ब्रैस्ट से जुड़ी बातों को बहुत तीखे अंदाज में कहती हैं. और साथ ही, वे संदेश भी देती हैं कि ब्रैस्ट कैंसर को ले कर जागरूक रहना चाहिए. सोशल नैटवर्किंग साइट ट्विटर पर स्टैंडअप कौमेडियन अदिति मित्तल ने अभिषेक बच्चन का मजाक उड़ाते हुए लिखा, ‘ऐश्वर्या को पहले एक पेड़ से शादी करनी पड़ी, ताकि बाद में वे एक चट्टान से शादी कर सकें मतलब अभिषेक से ऐक्टिंग नहीं होती, है न?’

महिला और कौमेडी!

‘‘हे भगवान, तुम एक औरत हो, तुम किसी को कैसे हंसा सकती हो?’’ कुछ ऐसी ही प्रतिक्रियाओं से गुजर कर भारत की युवा उभरती हास्य कलाकार जोड़ी ऋचा कपूर और सुमुखी सुरेश ने पुरुष प्रधान समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. ये बस कुछ ही पंक्तियां हैं जो ऋचा और सुमुखी को अकसर सुनने को मिलीं. हालांकि सुमुखी को एक और संदेश मिला वह भी किसी के मैट्रिमोनियल प्रोफाइल से, जिस में लिखा था कि वह अपने परिवार में एक ऐसे शख्स को चाहेंगे जो सब का मनोरंजन कर सके.

उन के सफर की कहानी जानने को उत्सुक लोगों को वे बताती हैं कि ये सब एक ऐसा सफर है जिस पर महिलाओं के कदम कभीकभी ही पड़े हैं. लोगों को लगता है कि महिलाएं लोगों को नहीं हंसा सकतीं. बस, यही धारणा तोड़ने के लिए उन्होंने इस ओर कदम बढ़ाया. इस दौरान कुछ ऐसे लोग मिले, जो थे तो बिलकुल अलग, फिर भी उन में कुछ अजीब तरह की समानताएं थीं.

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ऋचा और सुमुखी की मुलाकात एक केंद्रीय मंच ‘द इम्प्रूव’ के साधारण से कौमेडी शो में हुई. सुमुखी जब इस मंच से जुड़ीं तो ऋचा को यह शो करते 2 साल हो चुके थे. सुमुखी कहती हैं, ‘‘हम ने साथ मिल कर इस में सुधार की कोशिश की और तब हमें महसूस हुआ कि हम दोनों बिलकुल अलग हो कर भी आपस में काफी मिलतेजुलते हैं. इस से हमें यह समझ आया कि हम एक टीम के रूप में बेहतर काम कर सकते हैं. फिर हम ने अपने हास्य नाटक खुद लिखने और उन्हें रंगमंच पर उतारने का फैसला किया.’’

बहुत से नाटक करने के बाद उन्होंने फैसला लिया कि वे इसे आधिकारिक तौर पर शुरू करेंगी और फिर यूट्यूब पर ‘स्केच इन द सिटी’ नाम से एक चैनल शुरू हुआ. ऋचा और सुमुखी को इस बात पर बहुत गुस्सा आता है जब लोग हैरानी जताते हैं कि 2 लड़कियां लोगों को कैसे हंसा सकती हैं? क्या वाकई इन लड़कियों में वह कला है? हालांकि वे दोनों समझती हैं कि लोगों की इस विचारधारा को गलत साबित करने का एक ही तरीका है, और वह है हर बार बेहतर प्रदर्शन, अपने हर शो को ऐसे पेश करना जैसे यह उन का आखिरी शो हो.

उन दोनों का कहना है, ‘‘हम ने शर्मिंदा होने के मजे लिए और उन चीजों से भी प्यार किया जो अपमानित करने वाली थीं. इन चीजों में दिमाग लगाने के बदले काम पर ध्यान देने की हमारी सोच ने हमें बांधे रखा और हर जोखिम लेने के लिए तैयार किया.’’

जोखिम लेना जरूरी

सुमुखी के मुताबिक, ‘‘हमारे देश में लोग इतना नहीं हंसते जितना हंसना चाहिए और खुद पर तो बिलकुल भी नहीं. देश हंस तो रहा है, लेकिन ज्यादातर लोगों की हंसी की वजह ऐसे चुटकुले हैं जो आमतौर पर पत्नियों, महिलाओं, महिलाओं से जुड़ी बातों, परेशान करती प्रेमिकाओं और कपड़ों को ले कर होते हैं या फिर सैक्स को ले कर.’’ वे आगे कहती हैं, ‘‘इसे रोकने की जरूरत है. हम ने एक छोटी सी शुरुआत की है.

‘‘उम्मीद है कि हम आगे बढ़ेंगे. एक ऐसे देश में जहां हास्य अनकही बातों को कहने और असहज मुद्दों पर चर्चा का एक जरिया बन पाए और हास्य कलाकार को यह कहने में कोई डर न हो.’’

ऋचा कहती हैं, ‘‘आगे बढ़ो और अपने अंदर के बेवकूफ को बाहर निकालो. खुद को समझा लो, अभी नहीं, तो कभी नहीं.’’ ऋचा अपनी जोड़ी के लिए गाते हुए संदेश देती हैं, ‘‘जब तक हम अपने लक्ष्यों के प्रति सचेत हैं, दुश्वारियां कमजोर पड़ने लगती हैं. ऐसे मौकों पर आप को खुद को अपना सब से बड़ा हथियार बनाना पड़ेगा.’’

यह बात इन अदाकाराओं के बारे में दिए जाने वाले लगभग हर इंटरव्यू में कही जाती है, यहां तक कि अब ये खुद अपने कार्यक्रमों के दौरान यह बात दोहराना नहीं भूलतीं. कौमार्य झिल्ली वाला चुटकुला तो इन के द्वारा उठाए जाने वाले अनेक मुद्दों का एक छोटा सा उदाहरण मात्र है. इन के द्वारा चर्चा किए जाने वाले विषयों की लंबी फेहरिस्त है, जो सैक्स से जुड़े मुद्दों की है.

बढ़ती संभावनाएं

आज नीति पल्टा, वासु प्रिम्लानी और राधिका वाज के साथसाथ अदिति मित्तल की गिनती भारत की चुनिंदा 4 महिला कौमेडियनों में की जाती है. नीति पल्टा दिल्ली से हैं और एक फेमस स्टैंडअप कौमेडियन हैं. वे अपने ह्यूमर में नारीवादी सोच रखती हैं. अपने यूट्यूब चैनल के अलावा वे दूसरे चैनलों पर भी दिखती हैं. वे भारत के बेहतरीन स्टैंडअप कौमेडियनों में से एक हैं.

पिछले ढाई वर्षों से चार्टर्ड अकाउंटैंसी की छात्र सोनाली ठक्कर भी तेजी से इस क्षेत्र में उभर रही हैं. वे कहती हैं, ‘‘कौमेडी के क्षेत्र में संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. जितनी डिमांड है उतनी सप्लाई नहीं है.’’ सोनाली अंधविश्वासों और गुजराती होने पर जो चुटकुले और व्यंग्य सुनाती हैं वे काफी लोकप्रिय हैं.

बेंगलुरु हो, दिल्ली हो या फिर देश का कोई भी कोना, महिलाओं के लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है. वे छोटे कपड़े पहनें या फिर बुर्का, उन के साथ छेड़छाड़ तो होनी ही है, लेकिन कौमेडियन मल्लिका दुआ ने सारी लड़कियों को इस छेड़खानी से बचने का एक तरीका सुझाया है, मेकअप के जरिए. मल्लिका सोशल मीडिया पर मेकअप दीदी के नाम से वीडियो सीरीज करती हैं जिस में वे अलगअलग लुक्स के साथ कौमेडी करती दिखती हैं.

मल्लिका अपने सरोजिनी नगर वाले वीडियो से मशहूर हुईं और इस के बाद वे आज हर इंटरनैटप्रेमी के दिल में बसती हैं. उन्होंने एक वीडियो बनाया. यह वीडियो सरोजिनी नगर मार्केट पर बनाया गया था. इस में मल्लिका ने अलगअलग तरह की कई लड़कियों की भूमिकाएं निभाई थीं. मल्लिका कहती हैं कि उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ था कि उन का यह मजाकमजाक में बनाया गया वीडियो इतना हिट हो जाएगा.

दरअसल, इन दिनों हास्य कलाकारों की बाढ़ आई हुई है. ‘जो मांगोगे वही मिलेगा’ वाली हालत है. कोई परिवारों का मनोरंजन कर रहा है, तो कोई इस के जरिए सामाजिक व्यवस्था पर प्रहार कर रहा है, कोई सिर्फ चुटकुलेबाजी कर रहा है तो कोई सैक्स कौमेडी. तरीके भले ही बहुतेरे हों मगर हर कौमेडी का ही मकसद होता है हंसाना और उसे ये कलाकार पूरा करने की बखूबी कोशिश कर रहे हैं.

क्या मिला फौजिया को कंदील बलोच बन कर

VIDEO : सिर्फ 1 मिनट में इस तरह से करें चेहरे का मेकअप

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पाकिस्तानी पंजाब के जिला डेरा गाजीखान में 1 मार्च, 1990 को बलोच परिवार में पैदा हुई फौजिया अजीम की 5 बहन थीं और 6 भाई. बचपन से ही वह अपनी उम्र के बच्चों से हर मामले में आगे थी. पढ़ाई में वह ठीक थी. उस की आकांक्षाएं बहुत ऊंची थीं. बचपन से ही उस की खूबसूरती आंखों में बस जोने वाली थी. साधारण तरीके से बात करते हुउ भी उस की भावभंगिमाएं अलग ही नजर आती थीं.

फौजिया अपनी फ्रैंडस से अकसर कहा करती थी कि वह बड़ी हो कर पहले मौडल बनेगी और फिर अदाकारा. हकीकत यह है कि उस वक्त वह खुद नहीं जानती थी कि यह उस की महत्वाकांक्षा थी, या फिर शेखी बघारने की बालसुलभ प्रवृत्ति. लेकिन इस तरह की बातों से उस ने अपने लिए अच्छीखासी समस्या खड़ी कर ली. फौजिया की फ्रैंड्स घर जा कर उस की इन बातों को अपने परिवार में बताया करती थीं.

परिणाम यह निकला कि उन के परिवारों के बुजुर्ग यह सोच कर खौफजदा होने लगे कि कल को अगर उन की लड़़कियां भी फौजिया के नक्शेकदम पर चलने को आमादा हो गईं तो उन की बच्चियों का क्या होगा? लिहाजा वे बेटियों के सामने फौजिया की गलत तसवीर पेश कर के उन के भविष्य का स्याह पक्ष दिखलाने की कोशिश करते और उस से दूर रहने को कहते. फौजिया की आजाद सोच को ले कर होने वाले विरोध संबंधी कुछ शिकायतों का सामना उस के पिता मोहम्मद अजीम को भी करना पड़ा. सुन कर वह काफी परेशान हुए. लेकिन अपनी बेटी से प्यार और सकारात्मक सोच की वजह से उन्होंने फौजिया को कुछ नहीं कहा.

खानदान बाद की बात होती तो मोहम्मद अजीम संभाल लेते, लेकिन वे शिया सोच वाले अपने उस समुदाय के बनाए नियमों से बाहर जाने की सोच नहीं भी सकते थे, जो अपने कट्टरपन के लिए जाना जाता था.

दूसरा कोई चारा न देख, मोहम्मद अजीम ने बेटी का निकाह आशिक हुसैन से पढ़वा दिया. उस वक्त फौजिया की उम्र 18 साल थी. निकाह के साल भर के भीतर वह एक बेटे की मां बन गई. लेकिन अपने शौहर से उस की ज्यादा दिनों तक नहीं निभी. वह जब भी अपने अब्बू के पास आती थी तो शौहर के बारे में उन्हें बताती थी कि वह हमेशा उस से बुरा व्यवहार करता है.

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मोहम्मद अजीम बेटी को समझाया करते थे कि जैसे भी हो अपने शौहर का दिल जीतने की कोशिश करे और उस के साथ रहती रहे. अब तो वैसे भी वह एक बच्चे की मां बन गई है.

लेकिन फौजिया के लिए वह वक्त यूं ही बेकार गुजरने वाला नहीं, बल्कि बेशकीमती था. जिस समय वह अपनी प्रतिभा को उभारने के लिए ऊंची उड़ान भरने की सोच सकती थी. उस वक्त उस के पंख काट कर वैवाहिक जीवन में बांध दिया गया था.

इस मुद्दे पर फौजिया ने पूरी गहराई से सोचा. आखिर वह इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अगर उसे जिंदगी में ऊंचा उठने के सपने पूरे करने हैं तो सारे बंधन तोड़ कर एक बार खुले आसमान में उड़ान भरनी होगी.

और उस ने ऐसा ही किया भी…

उस रोज उस के निकाह को ठीक एक साल हुआ था. जब वह अपने शौहर व बच्चे को छोड़ कर अपनी ससुराल को हमेशा के लिए अलविदा कह गई.

ऐसे में न तो उस ने किसी अपने से सहारे की दरकार की, न किसी रिश्ते के साथसाथ पुराने नाम को अपने साथ घसीटा. अब उस ने अपना पुराना नाम बदल कर नया नाम रखा- कंदील बलोच. इस के साथ ही उस ने अपना गैटअप भी पूरी तरह बदल लिया. अपनी इस नई पहचान के साथ वह मौडलिंग की दुनिया में कूद गई.

कंदील का अर्थ होता है—प्रकाश. फौजिया को यह नाम बहुत रास आया. कुछ ही दिनों में न केवल उस का यह नाम बल्कि उस की प्रतिभा भी प्रकाश में आ गई. हालांकि मौडलिंग में उसे बड़ी कंपनियों के अनुबंध मिलने शुरू नहीं हुए थे, लेकिन वह दिन पर दिन इस क्षेत्र में लोकप्रिय होती जा रही थी. उस ने कुछ नाटकों व धारावाहिकों में अभिनय कर के काफी वाहवाही लूटी थी. वह गाती भी बहुत अच्छा थी. चर्चा यह थी कि वह जल्दी ही बड़े पर्दे पर दिखाई देगी.

अमूमन यह सब हो जाने के बाद ही कलाकार वांछित लोकप्रियता की सीढि़यां चढ़ने लगता है. मगर कंदील बलोच एक ऐसा ब्रांड नेम बनता जा रहा था जो इस मुकाम पर पहुंचने से पहले ही काफी प्रसिद्धि बटोरने लगा था.

कंदील की लोकप्रियता की मुख्य वजह थी आज के जमाने का ब्रह्मास्त्र कहलाए जाने वाला सोशल मीडिया. अपने फेसबुक एकाउंट से ले कर ट्विटर तक के सहारे वह अनगिनत लोगों से जुड़ती जा रही थी. वक्त के साथ उसे चाहने वालों की संख्या भी खूब बढ़ रही थी.

कंदील पहले अपनी सफलताओं का ब्यौरा ही फेसबुक पर साझा किया करती थी, जिन पर उसे खूब लाइक्स और कमेंटस मिला करते थे. फिर एक दौर ऐसा भी आया जब उस ने अपने थोड़े बोल्ड फोटो अपलोड करने शुरू कर दिए. साथ ही उस ने ट्विटर पर भी अजीबोगरीब जुमले कसने शुरू कर दिए. इस से जहां वह कुछ ज्यादा ही चर्चा में आने लगी, वहीं उस के विरोध में भी आवाजें उठने लगीं.

इन में कुछ आवाजें उस के अपनों की भी थीं. जो भी था, कंदील बलोच अपने तरीकों से खुद को स्थापित करने में लगी थी. उस का कहना था कि पाकिस्तान में औरतों की आजादी के लिए वह अपनी एक अलग जंग छेड़ेगी.

बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन को कंदील ट्विटर पर फौलो करती थी. दूसरी ओर कंदील के अपने फेसबुक एकाउंट पर उस के 7 लाख फौलोअर्स थे और ट्विटर पर थे 43 हजार. यह अपने आप में एक बड़ी बात थी.

कंदील के आचरण का एक पहलू यह भी सामने आया कि वह हर लिहाज से बेबाक थी. एक वीडियो में उस ने भारतीय प्रधानमंत्री को ‘डार्लिंग मोदी’ व ‘चाय वाला’ कह डाला था. हालांकि बाद में उस ने दूसरा वीडियो जारी कर के अपनी इस बेहूदगी पर माफी मांगते हुए यह भी कहा कि वह पीएम मोदी की दिल से इज्जत करती है और उन से संबंधित पूर्व में दी अपनी स्टेटमेंट पर बेहद शर्मिंदा है.

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मार्च, 2015 में टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान कंदील ने शाहिद अफरीदी को औफर दी कि अगर पाकिस्तानी टीम ने इस मैच में भारतीय टीम को हरा दिया तो वह उस के सामने स्ट्रिप डांस करेगी.

लेकिन जब भारतीय खिलाडि़यों के हाथों पाकिस्तानी टीम हार गई तो उस ने विराट कोहली को मैसेज भेजा ‘विराट बेबी, अनुष्का शर्मा ही क्यों?… फीलिंग इन लव…’

कई बार उस ने पूर्व क्रिकेटर एवं विपक्षी नेता इमरान खान के साथ निकाह करने की इच्छा भी जताई थी. तब तो हद हो गई, जब उस ने एक मुस्लिम धर्मगुरू के साथ अपनी विवादास्पद तसवीरें सोशलमीडिया पर पोस्ट कर दीं. अहम बात यही थी कि रूढि़वादी मुस्लिम देश में रह कर कंदील को सोशल मीडिया पर खुलेपन वाले वीडियो पोस्ट करने के लिए जाना जाता था. यहां तक कि उसे पाकिस्तान की पूनम पांडे भी कहा जाने लगा था.

इस तरह कंदील बलोच अपने बोल्ड अंदाज और विवादों में रहने की वजह से अकसर मीडिया में छाई रहती थी. भले ही अलग तरह से सही, दिन पर दिन उस की लोकप्रियता में इजाफा होता जा रहा था. इसी तरह वक्त अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता जा रहा था. कंदील बलोच को लोकप्रियता हासिल करते एक लंबा अरसा गुजर गया.

लेकिन 2016 आतेआते उसे इस तरह की धमकियां मिलने लगीं कि अगर उस ने प्रसिद्धि हासिल करने का अपना यह शर्मनाक रास्ता बंद नहीं किया तो उसे भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जिस में उस की जान भी जा सकती है. उसे अकसर धमकियों भरे फोन भी आने लगे थे.

कंदील ने पहले तो इस सब की परवाह नहीं की. वह ऐसी धमकियां को गीदड़भभकियां कहते हुए अपने ट्विटर पर साहसिक अंदाज में ट्वीट करती रही. एक ट्वीट में उस ने लिखा—‘आज के युग की एक महिला के तौर पर हमें अपने लिए खड़े होना है, दूसरी तमाम महिलाओं की आजादी के लिए.’ फिर एक दफा उस ने ट्वीट किया—‘जिंदगी ने कम उम्र में ही मुझे सबक सिखा दिया था. एक साधारण सी लड़की से आत्मनिर्भर महिला बनने का मेरा सफर इतना आसान नहीं था. अगर आप में इच्छाशक्ति है तो कोई भी आप को नहीं झुका सकता. मैं हक के लिए लडूंगी और अपने लक्ष्य तक जरूर पहुंचूंगी, इसे पाने से कोई मुझे रोक नहीं सकता.’

अपनी एक फेसबुक पोस्ट में कंदील ने लिखा, ‘भले ही मुझे कितनी ही बार गिराया जाए मैं गिर कर भी हर बार उठ खड़ी होऊंगी. मैं एक फाइटर हूं, वनमैन आर्मी. उन महिलाओं को मैं प्रेरणा देती रहूंगी, जिन के साथ बुरा व्यवहार होता है. मुझ से कोई कितनी भी नफरत करता रहे, मैं अपने चेहरे पर आत्मविश्वास लिए इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रहूंगी. कुछ लोग कहते हैं कि मैं पाकिस्तान को बदनाम कर रही हूं. लेकिन मैं रुकूंगी नहीं. इतना तो तय है कि मैं सिर पर दुपट्टा भी नहीं लेने वाली हूं.’

लेकिन कंदील को धमकियां देने वाले पीछे नहीं हटे. अब तो फोन पर उस से साफसाफ कहा जाने लगा कि जितना फुदकना है फुदक ले, तेरी जिंदगी अब चंद रोज की है. इस से कंदील थोड़ा भयभीत हुई. जून, 2016 के आखिरी ह़फ्ते में उस ने सुरक्षा हासिल करने के लिए गृहमंत्री, एफआईए (फेडरल इन्वेटिगेशन अथौरिटी) के महानिदेशक एवं इस्लामाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखे.

लेकिन इस से पहले कि उस की सुरक्षा के लिए कुछ हो पाता, 16 जुलाई की सुबह कंदील बलोच जिला मुल्तान के शहर करीमाबाद स्थित पिता के घर में अपने बिस्तर पर मृत पाई गई.

कंदील के पिता की तबीयत कुछ दिनों से नासाज चल रही थी, जिन की खैरियत जानने और ईद की मुबारकबाद देने वह 15 तारीख को उन के यहां आई थी. रात में हंसीखुशी का माहौल रहा. कंदील के छोटे भाई वसीम अजीम ने बहन के घर आने पर कुछ ज्यादा ही खुशी का इजहार किया था. मगर सुबह वह अपने बिस्तर पर मृत पाई गई.

कंदील के पिता मोहम्मद अजीम ने इस मौत को कत्ल की संज्ञा देते हुए पुलिस के पास जो एफआईआर लिखवाई, उस में अपने ही 2 बेटों वसीम अजीम व असलम शाहीन को नामजद किया.

मामला दर्ज कर के 16 जुलाई की शाम को पुलिस ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया. प्रारंभिक पूछताछ में ही वसीम ने अपना गुनाह कबूल करते हुए माना कि कंदील की हत्या उस ने अपने 3 दोस्तों के साथ मिल कर की है, इस में उस के भाई का कोई हाथ नहीं है. लिहाजा असलम शाहीन को छोड़ दिया गया.

वसीम ने अपना अपराध कुबूलते हुए पुलिस को बताया कि वह कंदील के फेसबुक पोस्ट और विवादित वीडियो से बहुत परेशान था. वह समाज, कौम और यहां तक कि अपने समुदाय की भी परवाह नहीं करती थी. इसे ले कर उस के कई दोस्तों ने उसे खूब जलील किया कि कंदील पूरी तरह बिगड़ चुकी है. वह अपने दोस्तों को समझाया करता था कि इस सब से वह खुद बहुत परेशान है, लेकिन जब भी उसे मौका मिलेगा, वह उन की मौजूदगी में ही अपनी बहन की हत्या करेगा.

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वसीम ने बताया, ‘‘मैं ने कंदील को गुप्त रूप से धमकियां दे कर समझाने और हड़काने की कोशिश की. मगर वह नहीं मानी. 15 तारीख को वह खुद हमारे यहां चली आई. मैं ने उस के आने पर खुशी का इजहार करने का नाटक किया. इस से उसे मुझ पर जरा भी शक नहीं हुआ. रात में मैं ने कंदील के खाने में नशे की गोली मिला दीं. बिस्तर पर लेटते ही वह गहरी नींद में चली गई.

घर में सभी के सो जाने के बाद आधी रात में मैं ने अपने दोस्तों हक नवाज अब्दुल बासित और जफर खोसा को बुलाया और हम सब ने मिल कर कंदील की गला दबा कर हत्या कर दी. मुझे अपनी बहन को मारने का कोई अफसोस नहीं है.’’

पुलिस ने वसीम के दोस्तों को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के बाद सभी को जेल भेज दिया गया. पुलिस ने समयावधि के भीतर चारों अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर अदालत में दाखिल कर दिया. इस के बाद 8 दिसंबर, 2016 को अदालत ने चारों के खिलाफ आरोप तय कर दिए.

मगर इस के बाद अचानक मोहम्मद अजीम ने केस वापस लेने की अर्जी लगा दी, जो अंतिम रूप से नामंजूर तो हुई ही अदालत ने इस सिलसिले में मोहम्मद अजीम के खिलाफ काररवाई करने की संस्तुति भी कर दी. तदनंतर, पाकिस्तान की अदालतों में हड़ताल चलती रही, जिस वजह से यह केस लटकता गया. अब इस में फिर से सुनवाई शुरू हो गई है.

बहरहाल, कंदील बलोच को ले कर लेखिका तस्लीमा नसरीन की यह टिप्पणी काबिलेगौर है कि कुछ लोगों के अनुसार कंदील अमेरिका की किम कार्दशियां की तरह थी, जिस ने अपना जिस्म दिखा कर नाम कमाया. जो काम करते हुए किम ने अमेरिका में करोड़ों डौलर कमाए, वही काम करते हुए पाकिस्तान में कंदील बलोच को अपनी जान गंवानी पड़ी.

पाकिस्तान में वह खूब लोकप्रिय थी, भले ही वह सस्ती लोकप्रियता रही हो. क्या सस्ती लोकप्रियता वाली शख्सियतों को जीने का अधिकार नहीं है? कल को कंदील के हत्यारों को भले ही बड़ी से बड़ी सजा मिले, लेकिन मुख्य मुद्दा यह है कि फौजिया को कंदील बलोच बन कर आखिर क्या मिला?

रौबिनहुड बनने के चक्कर में दिया कई चोरियों को अंजाम

VIDEO : सिर्फ 1 मिनट में इस तरह से करें चेहरे का मेकअप

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दिल्ली के बेहद पौश माने जाने वाले महारानी बाग निवासी गौरव कुमार बिजनैस के सिलसिले में सिंगापुर गए हुए थे. कोठी में उन की पत्नी स्वाति अकेली ही थीं. साफसफाई का काम करने वाली मार्गरिटा 23 मई, 2017 को बैडरूम की सफाई कर रही थी तो उसे लगा कि बैडरूम की खिड़की का शीशा अपनी जगह से थोड़ा हटा हुआ है. देख कर ही लगता था कि किसी ने शीशे को बाहर से खोलने की कोशिश की थी.

मार्गरिटा ने यह बात स्वाति को बताई तो उन्होंने भी शीशे को गौर से देखा. सचमुच खिड़की का शीशा अपनी जगह से हटा हुआ था. उन्होंने अन्य नौकरों को बुला कर दिखाया तो सभी ने एक राय से कहा कि कुछ गड़बड़ जरूर है. स्वाति ने नौकरों की मदद से कोठी के सामान की जांच की तो सब कुछ अपनी जगह था.

गौरव कुमार का औफिस कोठी में ही था. औफिस के रिसैप्शन पर रखी सेफ में काफी कैश रखा रहता था. स्वाति ने सेफ खोली तो उस में रखे करीब 3 लाख रुपए और 250 यूएस डौलर गायब थे. स्वाति ने फोन कर के यह बात पति को बताई तो उन के कहने पर स्वाति ने तुरंत कपड़े बदले और मार्गरिटा तथा अन्य नौकरों को साथ ले कर थाना न्यू फ्रैंड्स कालोनी जा पहुंची.

थानाप्रभारी सुशील कुमार से मिल कर उन्होंने अपनी कोठी पर घटी वारदात के बारे में बताया. थानाप्रभारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ड्यूटी अफसर को केस दर्ज करने का आदेश दे दिया.

ड्यूटी अफसर ने इस मामले को भादंवि की धारा 457, 180 के अंतर्गत दर्ज कर लिया. तत्पश्चात इस केस की जांच एएसआई सुरेश कुमार को सौंप दी गई. सुरेश कुमार शाम को महारानी बाग स्थित गौरव कुमार की कोठी पर गए. उन्होंने घटनास्थल का मुआयना करने के साथ स्वाति से पूछताछ की. स्वाति ने उन्हें बैडरूम में ले जाकर वह खिड़की भी दिखाई, जिस का शीशा हटा कर चोर बैडरूम में दाखिल हुआ था.

सुरेश कुमार ने उस खिड़की को गौर से देखा, जिस का शीशा बड़ी सफाई से हटा कर चोर अंदर आया था. उसे देख कर सुरेश कुमार को समझते देर नहीं लगी कि चोरी करने वाला काफी शातिर था. उन्होंने फोन कर के क्राइम टीम को बुला लिया और सारे सबूत जुटाए. क्राइम टीम ने चोर के फिंगरप्रिंट्स तथा पैरों के निशान भी उठाए. इस काररवाई के बाद सुरेश कुमार थाने लौट आए.

उन्होंने अपनी रिपोर्ट थानाप्रभारी सुशील कुमार को दे दी. थानाप्रभारी ने इस घटना की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी. चोरी का यह मामला दिल्ली जैसे महानगर के लिए कोई बड़ा तो नहीं था, लेकिन चूंकि इस तरह के कई मामले अन्य थानों में लगातार दर्ज हुए थे, इसलिए महत्त्वपूर्ण भी था और अपराध के नजरिए से गंभीर भी.

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इस घटना की सूचना मिलने के बाद दक्षिणपूर्वी दिल्ली के डीसीपी रोमिल बानिया ने इस केस को हल करने की जिम्मेदारी औपरेशन सेल के एसीपी के.पी. सिंह को सौंप कर चोरों को जल्दी से जल्दी पकड़ने का आदेश दिया.

एसीपी के.पी. सिंह ने चोरों को पकड़ने के लिए दिल्ली के दक्षिणपूर्वी जिले के स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर राजेंद्र सिंह, एसआई प्रवेश कसाना, एएसआई दयानंद, हैडकांस्टेबल नरेश कुमार और दयानंद की एक टीम बनाई. वह खुद भी टीम के साथ उन चोरों की तलाश में जुट गए, जो दक्षिणपूर्वी दिल्ली की पौश कालोनियों में चोरियां कर रहे थे. इन चोरों के निशाने पर कोठियां ही होती थीं.

इंसपेक्टर राजेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ महारानी बाग स्थित स्वाति की कोठी पर पहुंचे और उन से सारी जानकारी ली. अपना बयान दर्ज कराने के दौरान स्वाति ने उन्हें एक मोबाइल फोन देते हुए बताया कि यह फोन उन्हें बैडरूम में मिला था. हो सकता है, यह फोन उसी चोर का हो, जिस ने उन के यहां चोरी की थी.

मोबाइल फोन को देख कर राजेंद्र सिंह को लगा, इस से उन की राह आसान हो गई है. वह सैमसंग कंपनी का कीमती मोबाइल फोन था. मोबाइल एसआई प्रवेश कसाना को सौंप कर राजेंद्र सिंह कोठी के अन्य नौकरों से पूछताछ की. इस के बाद वह अपनी टीम के साथ वापस लौट आए.

मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की गई तो पता चला कि वह मोबाइल फोन इरफान नाम के किसी व्यक्ति का था. उस के दूसरे नंबरों के बारे में पता कर के उन्हें सर्विलांस पर लगा दिया गया. एसआई प्रवेश कसाना यह देख कर हैरान थे कि चोर न केवल बारबार अपना नंबर बदल रहा था, बल्कि वह अपना मोबाइल फोन भी कुछ ही दिनों में बदल देता था.

राजेंद्र सिंह ने चोर के ठिकाने का पता लगाने की जिम्मेदारी एसआई प्रवेश कसाना को सौंप रखी थी. वह उस चोर के बारे में पता करने के लिए रातदिन एक किए हुए थे. आखिर जुलाई के पहले सप्ताह में उन्होंने चोर का पता लगा ही लिया. उस का नाम इरफान ही था और वह बिहार के जिला सीतामढ़ी के गांव जोगिया का रहने वाला था. उस समय उस की लोकेशन उस के गांव की ही मिल रही थी.

6 जुलाई को स्पैशल स्टाफ की यह टीम बिहार के जिला सीतामढ़ी पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से इरफान को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर उस से पूछताछ की गई तो उस ने न्यू फ्रैंड्स कालोनी सहित दिल्ली में हुई कई अन्य चोरियों का अपराध स्वीकार कर लिया.

8 जुलाई को सीतामढ़ी की अदालत में पेश कर के इरफान को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया और दिल्ली की साकेत अदालत में पेश कर के चोरी का सामान बरामद करने के लिए उसे 7 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया गया. रिमांड अवधि के दौरान इरफान से की गई पूछताछ और चोरी के सामानों की बरामदगी की जो कहानी सामने आई, वह काफी दिलचस्प थी—

रफान उर्फ उजाला उर्फ आर्यन खन्ना बिहार के जिला सीतामढ़ी के थाना पुकरी के छोटे से गांव जोगिया का रहने वाला था. उस के परिवार में अब्बा मोहम्मद आबिद, मां रेहाना तथा 2 भाई सलमान और गुलफाम थे. गांव में इरफान का छोटा सा मकान था. पूरा परिवार उसी में रहता था. पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. गांव में मेहनतमजदूरी कर के वह किसी तरह परिवार को पाल रहे थे. जहां घर का खर्चा ही मुश्किल से चल रहा हो, वहां आबिद अपने बच्चों को पढ़ानेलिखाने की कहां से सोचता. उस के तीनों बेटे स्कूल तो गए, पर 8वीं से ज्यादा कोई नहीं पढ़ सका.

गरीबी की मार ने इरफान और उस के भाइयों को कमउम्र में ही रोजीरोटी की तलाश में घरपरिवार छोड़ कर बाहर जाने को मजबूर कर दिया. एकएक कर के तीनों भाई मांबाप को छोड़ कर नौकरी की तलाश में दिल्ली आ गए.

सब से पहले सलमान दिल्ली आया. वह बैग और पर्स बनाने का काम करने लगा. दिल्ली में पैर जमाने के बाद उस ने छोटे भाई गुलफाम को भी अपने पास बुला लिया. दोनों भाई दिल्ली से घर रुपए भेजने लगे तो घर की आर्थिक स्थिति कुछ संभल गई. धीरेधीरे सब कुछ ठीक हो गया. इस के बाद एकएक कर के तीनों भाइयों की शादियां भी हो गईं.

सब से छोटा इरफान गांव में ही बीवी के साथ रहता था. वह वहीं छोटामोटा काम कर के और बड़े भाइयों की मदद से अपना गुजारा कर रहा था. लेकिन जब वह एक बेटी का बाप बना तो जिम्मेदारी बढ़ने से वह भी गांव छोड़ कर दिल्ली चला आया और भाइयों के साथ बैग, लेडीज पर्स और बटुए बनाने का काम सीख कर काम करने लगा.

इरफान के ही गांव का सलीम भी दिल्ली में रहता था. ये सभी दिल्ली के तुर्कमान गेट में रहते थे. एक ही गांव के होने के कारण कुछ ही दिनों में सलीम और इरफान में गहरी दोस्ती हो गई. दोनों अपनी कोई भी बात एकदूसरे से नहीं छिपाते थे.

इरफान ने कुछ दिनों तक तो बैग, पर्स आदि बनाने का काम किया, उस के बाद उस ने सलीम के साथ मिल कर बाहरी दिल्ली के बवाना में बैग और पर्स की दुकान खोल ली. दोनों ने इस उम्मीद से दुकान खोली थी कि इस से उन्हें ठीकठाक कमाई होगी, लेकिन 2 साल तक दुकान चलाने के बाद फायदा होने की कौन कहे, उन्हें काफी नुकसान हो गया. मजबूरन उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी.

इस बीच इरफान एक और बच्ची का बाप बन गया था. खर्चा बढ़ गया था, जबकि कमाई का साधन खत्म हो गया था. वह घर रुपए नहीं भेज पाया तो परेशान हो कर उस की पत्नी दोनों बेटियों को उस के हवाले कर के मायके चली गई. इरफान दोनों बेटियों को मां को सौंप कर दिल्ली चला आया.

इरफान का दोस्त सलीम काम करने के अलावा छोटीमोटी चोरियां भी करता था, लेकिन वह कभी पकड़ा नहीं गया. उस ने इरफान को भी चोरी करने की सलाह दी. इरफान को थोड़ा डर तो लगा, लेकिन और कोई रास्ता न देख वह सलीम के साथ चोरी में किस्मत आजमाने के लिए तैयार हो गया. सलीम ने उसे चोरी के सारे गुर बता दिए.

उस के पास मोटरसाइकिल थी, जिस से वह ऐसे घरों की तलाश में निकलता था, जिस में रहने वाला परिवार कहीं बाहर गया होता था. इरफान उस घर में घुसता और सारा माल समेट कर कुछ दूरी पर इंतजार कर रहे सलीम को फोन कर देता. सिगनल मिलते ही वह उसे लेने पहुंच जाता. कुछ घरों में चोरी करने के बाद जब इरफान के हाथ काफी रकम और सोने के गहने लगे तो उन्हें बेच कर दोनों ठाठ की जिंदगी जीने लगे. अब दोनों की लाइफस्टाइल भी बदल गई थी.

इरफान बचपन से ही कपड़ों का शौकीन था. वह फिल्मी हीरो जैसे कपड़े पहनना चाहता था, लेकिन पैसों के अभाव में उस का यह शौक पूरा नहीं हो रहा था. लेकिन जब चोरी से पैसे आए तो सब से पहले उस ने ब्रांडेड कपड़े, महंगा स्मार्ट फोन और घूमने के लिए नई मोटरसाइकिल खरीदी. यही नहीं, पत्नी तो थी नहीं, इसलिए वह बाजारू लड़कियों के साथ अय्याशी करने लगा. उसे कोई रोकनेटोकने वाला था नहीं, इसलिए उस के मन में जो आता, वह वही करता था.

इरफान और सलीम ने चोरी को ही अपनी कमाई का जरिया बना लिया था. यह सौ फीसदी मुनाफे का धंधा था. चूंकि वे दोनों कभी पकडे़ नहीं गए, इसलिए उन की हिम्मत बढ़ती गई. इरफान काफी खुश था. वह जब भी गांव जाता, काफी बनठन कर जाता. उस के हावभाव और शाही खर्च देख कर गांव वाले हैरान थे. सभी को यही लगता था कि इरफान बहुत बड़ा बिजनैसमैन है. गांव वालों की नजरों में खुद को बड़ा आदमी दिखाने के लिए वह गांव वालों की भलाई के काम करने लगा. उस ने कई गरीब लड़कियों की शादी कराई, गांव में बीमार लोगों के इलाज के लिए हेल्थ कैंप लगवाए.

इरफान द्वारा किए गए कामों से घरघर में उस की चर्चा होने लगी. जिस का उस ने इलाज करवाया, जिन गरीबों की बेटियों की शादियां करवाईं, उन की नजर में वह भगवान तो नहीं, लेकिन वे उसे उस से कम भी नहीं मानते थे.

वह गांव में अकसर नेताओं की तरह कुरतापैजामा पहनता था, जबकि दिल्ली में अपटूडेट शहरी बन कर रहता था. उस ने दिल्ली में अपने लिए कार भी खरीद ली थी और शाहीन बाग में किराए का मकान भी ले लिया था.

उसे बेटियों की पढ़ाई की चिंता हुई तो उन का दाखिला दिल्ली के किसी अच्छे स्कूल में कराने के लिए वह उन्हें दिल्ली ले आया. लेकिन काफी प्रयास के बाद भी किसी अच्छे स्कूल में उन का दाखिला नहीं हो सका. मजबूर हो कर वह उन्हें अपनी मां के पास गांव छोड़ आया.

इरफान दिलफेंक और अय्याश युवक था. अय्याशी के लिए वह दिल्ली और मुंबई के डांस बारों के चक्कर लगाने लगा. अगर कभी उसे किसी डांसर से अपनी पसंद का गाना सुनना होता तो इस के लिए वह 10-20 हजार रुपए देने से भी पीछे नहीं हटता था.

वह लाखों रुपए दोस्तों और लड़कियों पर खर्च कर देता था. रुपयों के लालच में दिल्ली ही नहीं, मुंबई में भी उस की कई गर्लफ्रैंड थीं. जिन से वह अलगअलग समय पर मिल कर मौज करता था.

2 साल पहले उस की मुलाकात आगरा की रेशमा से हुई थी. वह अपनी छोटी बहन शबनम के साथ बिहार के दरभंगा में प्रोग्राम देने गई थी. इरफान भी वहां गया था. इरफान ने रेशमा और शबनम के एकएक ठुमके पर हजारों रुपए लुटा दिए थे. उस के ठाठबाट और शाही खर्च देख कर रेशमा उस पर मर मिटी.

प्रोग्राम खत्म होने के बाद रेशमा इरफान से मिली. इस मुलाकात में इरफान भी रेशमा को दिल दे बैठा. रेशमा भोजपुरी फिल्मों में छोटेमोटे रोल भी करती थी. इस के बाद इरफान कई बार रेशमा के साथ मुंबई गया, जहां दोनों ने खूब सैरसपाटे किए. इरफान के रुपए खत्म हो जाते तो वह चोरी करने दिल्ली आ जाता. एक बार उस ने जालंधर में भी चोरी की थी.

22 मई की रात को उस ने महारानी बाग के बिजनैसमैन गौरव कुमार की कोठी में चोरी की. माल समेटने के दौरान उस का मोबाइल गिर गया, जिस से सुराग लगा कर स्पैशल स्टाफ की टीम उस के गांव जा पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने उस की निशानदेही पर 250 ग्राम सोना बरामद किया है. उस के साथ धर्मेंद्र को भी गिरफ्तार किया गया है. इरफान चोरी का सारा सामान उसे ही बेचता था.

रिमांड अवधि खत्म होने पर इरफान को दिल्ली की साकेत की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक वह जेल में था.

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