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जानें, स्मार्टफोन के पानी में गिर जाने पर क्या करें, क्या ना करें

आजकल बाजार में बहुत से वाटरप्रूफ स्मार्टफोन मौजूद हैं लेकिन अभी भी ज्यादातर स्मार्टफोन वाटरप्रूफ नहीं होते. आइए, हम आपको बताते हैं कि अगर आपका स्मार्टफोन पानी में भीग जाए तो क्या करें और क्या ना करें…

– अगर आपका स्मार्टफोन पानी में गिर जाए या पानी से भीग जाए तो तुरंत उसे स्विच औफ कर दें. उसके बाद उसे साफ और सूखे कपड़े से पोंछ लें और फिर इसे किसी पेपर टिशू या किचन टावल में लपेट दें ताकि वह फोन में मौजूद पानी को सोख ले. इसके बाद तुरंत फोन से सिम कार्ड और मेमरी कार्ड निकाल लें और फोन को हर तरफ से झटकें ताकि उसके भीतर गया पानी बाहर आ जाए.

– इसके बाद अपने फोन को आप कच्चे चावलों से भरे डिब्बे में चावलों के बीच रखकर 24 से 48 घंटे के लिए डिब्बे को टाइट बंद कर दें. चावल के दाने फोन में मौजूद सारी नमी को सोख लेते हैं.

– आप फोन को सुखाने के लिए इसका बैक पैनल खोलकर सीधे धूप में भी रख सकते हैं. धूप में भी कुछ ही देर में फोन में मौजूद सारा पानी सूख जाता है. हालांकि ऐसा करने में यह ध्यान रखना चाहिए कि ज्यादा तेज धूप में बहुत देर तक फोन न रखें क्योंकि गर्मी से इसके प्लास्टिक कौम्पोनेंट पिघल भी सकते हैं.

कभी न करें ये काम

– याद रखें कि भीगे हुए फोन को इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है क्योंकि पानी फोन के सर्किट्स को नुकसान पहुंचा सकता है और स्मार्टफोन हमेशा के लिए खराब हो सकता है.

-फोन के पानी में भीग जाने पर कभी भी इसे हेयरड्रायर से सुखाने की कोशिश न करें. हेयरड्रायर की हवा बहुत गर्म होती है और इससे फोन के इलेक्ट्रौनिक कौम्पोनेंट्स खराब हो सकते हैं. इसके अलावा फोन को सुखाने के लिए उसे किसी हौट अवन या रेडियेटर पास भी न रखें.

-फोन के भीगने के बाद इसे चार्ज न करें क्योंकि इससे शौर्ट सर्किट हो सकता है जो डिवाइस को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है. इसके अलावा फोन में कोई नुकीली चीज डालने का प्रयास भी न करें क्योंकि अगर ऐसा होता है तो पानी आपके फोन के और भीतर जा सकता है और फोन के कौम्पोनेंट्स खराब हो सकते हैं.

अगर आप ऊपर बताई गई बातों का ध्यान रखें तो फोन के भीग जाने पर भी आप उसे सही कर सकते हैं.

BHEL ने किया ISRO से करार, बनाएगी लीथियम आयन बैटरी

बिजली उपकरण बनाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भेल ने विभिन्न क्षमता की लिथियम आयन बैटरी के विनिर्माण के लिये भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौता किया है. जिसके तहत कंपनी अंतरिक्ष स्तर के विभिन्न क्षमता के लिथियम आयन सेल (बैटरी) का विनिर्माण करेगी. जिसमें इसरो की तरफ से विकसित तकनीक का इस्तेमाल होगा और अभी इसरो विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) में इसका इस्तेमाल करता है.

भेल ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इसरो अभी तक इसरो अंतरिक्ष श्रेणी वाली लीथियम आयन बैटरी की सोर्सिंग विदेशी वेंडरों से करता है और बीएचईएल ऐसी आयातित बैटरी का असेंबलिंग व टेस्टिंग करती है और इसका इस्तेमाल उपग्रह व इसे भेजे जाने वाले वाहनों में होता है. इस प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण से भेल लिथियम आयन बैटरी इसरो तथा अन्य संबंधित कंपनियों के लिये बना सकेगी. लिथियम आयन प्रौद्योगिकी का उपयोग ऊर्जा भंडारण तथा इलेक्ट्रिक वाहनों में किया जा सकता है. भेल इस बैटरी के विनिर्माण के लिये बेंगलुरू के कारखाने में आधुनिक संयंत्र लगाएगी.

इसरो के अधिकारी ने कहा तिरुवनंतपुरम में इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर ने अंतरिक्ष श्रेणी वाली लीथियम आयन बैटरी के उत्पादन की तकनीक का कामयाबी के साथ विकास किया है, जिसने विभिन्न जांच परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन किया है. ऐसी बैटरी का इस्तेमाल अभी विभिन्न उपग्रहों आदि में हो रहा है. उन्होंने आगे कहा, हमें ऐसी बैटरी अपने उपग्रह के लिए काफी संख्या में चाहिए, लेकिन अपने पायलट प्लांट में हम बहुत ज्यादा उत्पादन नहीं कर सकते. हमें बड़ा संयंत्र चाहिए. औटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन औफ इंडिया ने ऐसी बैटरी का इस्तेमाल दोपहिया व चारपहिया वाहनों में कामयाबी के साथ किया है

सिंधु करेंगी कौमनवेल्थ गेम्स में भारतीय दल की अगुवाई

रियो ओलंपिक की सिल्वर मेडल विजेता और स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु कौमनवेल्थ गेम्स 2018 की ओपनिंग सेरिमनी में तिरंगा लेकर भारतीय दल की अगुवाई करेंगी. इस बार कौमनवेल्थ गेम्स 2018 गोल्ड कोस्ट में आयोजित होने हैं. बता दें भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) ने इस संबंध में बैठक की थी, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि कौमनवेल्थ खेलों में राष्ट्र ध्वज लेकर भारतीय दल का नेतृत्व यह बैडमिंटन स्टार करेंगी.

हैदराबाद की इस स्टार शटलर को उनकी नई भूमिका के बारे में जानकारी दे दी गई है. सिंधु को कौमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पदक जीतने का सबसे प्रमुख दावेदारों में से एक माना जा रहा है. इसलिए इस बार के कौमवेल्थ खेलों में देशवासियों को उनसे उम्मीद है कि वह इस बार कौमनवेल्थ खेलों में पहले के प्रदर्शन को और बेहतर बनाते हुए यहां महिला एकल में स्वर्ण पदक अपने नाम करेंगी.

मालूम हो कि शुक्रवार को सिंधु पिछले सप्ताह औल इंग्लैंड चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में पहुंची थीं. इससे पहले वर्ष 2014 में ग्लासगो में आयोजित हुए कौमनवेल्थ खेलों में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कौमनवेल्थ खेलों के पिछले तीन संस्करणों के बाद ऐसा पहली बार होगा जब कोई बैडमिंटन खिलाड़ी इन खेलों में भारतीय दल का नेतृत्व करेगा. इससे पहले साल 2006 में मेलबर्न में आयोजित कौमनवेल्थ खेलों में ऐथेन्स ओलिंपिक में रजत पदक विजेता शूटर राज्यवर्धन सिंह राठौर ने ध्वज लेकर भारतीय दल का नेतृत्व किया था. राठौर वर्तमान में केंद्रीय खेल मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

2010 में दिल्ली कौमनवेल्थ खेलों के दौरान बीजिंग ओलिंपिक में गोल्ड मेडल अपने नाम करने वाले शूटर अभिनव बिंद्रा ने भारतीय दल की अगुवाई की थी. इसके बाद साल 2014 में ग्लासगो कौमनवेल्थ खेलों के दौरान लंदन ओलिंपिक में शूटिंग में रजत पदक अपने नाम करने वाले विजय कुमार ने यह जिम्मेदारी निभाई थी.

इस नये लुक के साथ आईपीएल में उतरेंगे युवराज सिंह

भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे औलराउंडर क्रिकेटर युवराज सिंह लंबे अर्से बाद इस साल एक बार फिर किंग्स इलेवन पंजाब के लिए खेलते नजर आएंगे. युवराज सिंह आईपीएल की शुरुआती सीजनों में किंग्स के लिए कप्तानी कर चुके हैं. काफी समय बाद एक बार फिर पंजाब की टीम ने अपने इस पुराने खिलाड़ी पर भरोसा जताया है. किंग्स इलेवन पंजाब टीम ने 2 करोड़ की बेस प्राइज में युवराज सिंह को इस साल अपनी टीम में शामिल किया है.

आईपीएल में इस साल युवराज सिंह एक नये हेयरस्टाइल लुक में नजर आएंगे. युवराज ने इसकी जानकारी आफिशियल इंस्टाग्राम अंकाउट पर एक तस्वीर शेयर कर दी है. इस तस्वीर में युवराज सिंह बेहद अलग अंदाज में दिखाई दे रहे हैं. युवी ने तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा, ”लंबे बालों की वजह से काफी समस्याएं हो रही थी जो अब खत्म हो गई. अंगदबेदी और के एल राहुल से माफी चाहूंगा, जिन्होंने मुझे थोड़े से छोटे बाल कराने की नसीहत दी थी. इस नए लुक के लिए आलिम हकीम को धन्यावाद”. युवराज के तस्वीर पोस्ट करते ही फैन्स ने कमेंट्स की झड़ी लगा दी.

फैन्स युवी के इस नए लुक को बेहद पसंद कर रहे हैं और साथ ही उम्मीद कर रहे हैं कि युवी इस साल धमाकेदार अंदाज में सीजन की शुरुआत करेंगे. युवराज सिंह पंजाब टीम के अहम हिस्सा हैं और टूर्नामेंट में टीम को अच्छा करने के लिए युवी का बेहतर प्रदर्शन बेहद जरूरी है. युवराज सिंह से पहले भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली भी हेयर स्टाइल की एक तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर कर चुके हैं.

वहीं भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी अक्सर अपनी हेयर स्टाइल को बदलते रहते हैं. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि युवी अपने इस नये हेयर स्टाइल के साथ मैदान पर कितना सफल होते हैं. पिछले कुछ सीजनों में आरसीबी, दिल्ली और हैदराबाद जैसी टीमों के लिए खेल युवी अपनी पुरानी छाप छोड़ने में बुरी तरह से नाकाम रहे थे. ऐसे में यह सीजन युवी के करियर के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है.

आईफोन के लुक में वीवो ने लौन्च किया अपना यह स्मार्टफोन

स्मार्टफोन बनाने वाली चीनी कंपनी Vivo ने अपना फ्लैगशिप स्मार्टफोन भारत में Vivo V9 लौन्च कर दिया है. इस स्मार्टफोन की सबसे खास बात इसमें दी गई इसकी Apple iPhone X जैसी डिस्प्ले है. इसमें 6.3 इंच की बड़ी डिस्प्ले दी गई है. इसे शैंपेन गोल्ड, पर्ल ब्लैक और सैफायर ब्लू कलर में लौन्च किया गया है. इसे अमेजन और फ्लिपकार्ट से 23 मार्च को 3 बजे से प्री बुक किया जा सकता है. इसकी सेल 2 अप्रैल से शुरू होगी. इसे औफलाइन भी सेल किया जाएगा.

अमेजन से इस फोन को प्री और्डर करने पर इसपर 2,000 रुपए का एक्स्ट्रा एक्सचेंज औफर मिलेगा, एक बार स्क्रीन टूटने पर मुफ्त में सही कराने का औफर भी है. वहीं 12 महीने की नो कौस्ट ईएमआई पर भी इसे खरीदा जा सकता है. इसके साथ ही 500 रुपए के Bookmyshow के मूवी वाउचर भी मिलेंगे. इसके अलावा अमेजन पे से पेमेंट करने पर 5% का कैशबैक भी मिलेगा. इसकी कीमत की बात करें तो इसकी कीमत 22,990 रुपए रखी गई है.

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फीचर्स की बात करें तो Vivo V9 स्मार्टफोन में क्वालकौम का स्नैपड्रैगन 626 प्रोसेसर दिया गया है. फोन की स्पीड अच्छी रहे इसके लिए इसमें 4 GB की रैम दी गई है. इसमें 64GB की इंटरनल मैमोरी दी गई है. माइक्रोएसडी कार्ड से इसकी इंटरनल मैमोरी को 256GB बढ़ाया जा सकता है. यह स्मार्टफोन कंपनी के फनटच 4.0 पर आधारित लेटेस्ट एंड्रौयड 8.1 ओरियो पर काम करेगा.

Vivo V9 के कैमरे की बात करें तो फ्रंट पैनल पर 24 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है जो एफ/2.0 अपर्चर के साथ आता है. फ्रंट कैमरा एआर स्टीकर्स, फेस अनलौक और फेस ब्यूटी मोड जैसे फीचर दिए गए हैं. कंपनी का दावा है कि इन फीचर से बेहतर आउटपुट पाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस्तेमाल में लाया जाता है. फोन के रियर में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. इनमें प्राइमरी कैमरा 16 मेगापिक्सल का और सेकेंडरी 5 मेगापिक्सल का दिया गया है. रियर कैमरे का भी अपर्चर एफ/2.0 ही है.

फोन को पावर देने के लिए इसमें 3,260mAH की बैटरी दी गई है. Vivo V9 में कनेक्टिविटी के लिए 4G एलटीई, वीओएलटीई, वाई-फाई, ब्लूटूथ, जीपीएस और माइक्रो-यूएसबी पोर्ट शामिल हैं. सिक्योरिटी के लिए इसके बैक पैनल पर फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है. थाइलैंड में लौन्च किए गए इस फोन को गोल्ड व ब्लैक सेरामिक रंग में उपलब्ध कराया गया है.

इस खूबसूरत जगह पर होगी सोनम कपूर की शादी, तारीख हुई तय

सोनम कपूर इन दिनों अपनी फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ की शूटिंग में बिजी हैं. इसके अलावा वो अक्सर अपने ब्वायफ्रेंड आनंद आहूजा के साथ भी नजर आती रहती हैं. खबरों की मानें तो फिल्म की शूटिंग खत्म होने के तुरंत बाद वो अपने ब्वायफ्रेंड से शादी करने जा रही हैं. बता दें कि सोनम और आनंद दोनों एक-दूसरे को लंबे समय से डेट कर रहे हैं. पहले खबर आई थी कि सोनम और आनंद राजस्थान में शादी करेंगे. लेकिन हाल ही में आई खबरों के मुताबिक अब शादी राजस्थान में नहीं बल्कि स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में होगी.

मई, 2018 में होगी सोनम कपूर और आनंद अहूजा की शादी

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक सोनम कपूर अपने ब्वायफ्रेंड आनंद अहूजा के साथ इस साल मई के महीने में शादी कर लेंगी. शादी की तारीख 11 और 12 मई रखी गई है. सोनम ने हाल ही में दिल्ली पहुंचकर आनंद से मुलाकात की जिसके बाद अब वो रिलैक्स करने और स्पा लेने के लिए औस्ट्रिया गई हुईं हैं. कुछ दिन पहले सोनम को राज मेहतानी के हाई एंड ज्वेलरी स्टोर में शौपिंग करते हुए देखा गया था, जो कोलकाता में है.

जेनेवा में बजेगी शादी की शहनाई

बताया गया कि सोनम और उनके परिवार वाले शादी को और भी स्पेशल बनाने के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन की तलाश में थे. डेस्टिनेशन लिस्ट में उदयपुर और जयपुर का नाम सबसे टौप पर था. लेकिन, अभी जनवरी के महीने में सोनम जोकि एक वौच ब्रैंड की एम्बेसडर हैं, जेनेवा गई हुईं थी. तभी उन्हें वो जगह काफी पसंद आई. उस समय उनके साथ उनकी बहन रिया कपूर भी मौजूद थीं. सोनम और रिया ने जेनेवा के कई लोकेशन्स को देखा जिसके बाद उन्होंने इसी जगह को शादी की डेस्टिनेशन के तौर पर फिक्स करने का प्लान बनाया.

अनिल कपूर निजी तौर पर मेहमानों को फोन करके दे रहे हैं आमंत्रण

कहा जा रहा है कि अब डेस्टिनेशन बुक होने के बाद दिल्ली और मुंबई में मौजूद कपूर परिवार के मेंबर्स एयर टिकट्स की बुकिंग्स में लगे हुए हैं. साथ ही, पिता अनिल कपूर खुद निजी तौर पर मेहमानों को फोन करके आमंत्रण दे रहे हैं. कपूर परिवार ने शादी की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं.

हिंदू रीती रिवाज से होगी शादी

ये भी रिवील किया गया कि जेनेवा में सोनम और आनंद की सगाई की जाएगी जिसके बाद शादी के कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी. यहां संगीत, मेहंदी सेरेमनी भी रखी जाएगी और पूरे हिंदू रीती रिवाज के साथ शादी का कार्यक्रम संपन्न किया जाएगा.

आपको बता दें कि पेशे से आनंद दिल्ली के बिजनेसमैन हैं. आनंद फैशन ब्रांड Bhane के मालिक हैं. उन्होंने व्हार्टन बिजनेस स्कूल (यूएस) से पढ़ाई की है. बता दें, Bhane सोनम के फेवरेट फैशन ब्रांड्स में से एक है. कई मौके पर वे Bhane के डिजाइन्स कैरी करती हैं.

फिल्म “बागी” में आखिर कैसे एक्शन किंग बने टाइगर श्रौफ

बौलीवुड एक्टर टाइगर श्रौफ की फिल्म ‘बागी 2’ के ट्रेलर में दर्शकों ने उनके एक्शन को काफी पसंद किया. दर्शक पूरी फिल्म में टाइगर का एक्शन देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और इसी बीच फिल्म मेकर्स द्वारा इस फिल्म का मेकिंग वीडियो शेयर किया गया है. इस वीडियो में टाइगर ने किस तरह से एक्शन सीन्स किए हैं यह दिखाया गया है. बता दें, टाइगर के इस वीडियो को इस फिल्म के रिलीज होने से कुछ वक्त पहले ही शेयर किया गया है. फिल्म के इस मेकिंग वीडियो में टाइगर के एक्शन्स को आप काफी पसंद करने वाले हैं.

फिल्म के इस मेकिंग वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि टाइगर ने इन सीन्स के लिए काफी प्रेक्टिस और मेहनत की है. उन्होंने अपने स्टंट्स को खुद परफौर्म किया यह भी साफ नजर आ रहा है. इतना ही नहीं फिल्म के डायरेक्टर अहमद खान भी इस दौरान पूरी तरग से टाइगर को गाइड करते हुए नजर आएं. वहीं टाइगर ने भी किसी तरह की कसर नहीं छोड़ी. वीडियो में आप टाइगर को किक्स की, लौन्ग जम्प की प्रेक्टिस करते हुए देखेंगे. इस वीडियो को देखने के बाद आपकी भी फिल्म देखने की बेसब्री और बड़ जाएगी.

आपको बता दें, इस फिल्म के एक्शन को लेकर टाइगर ने मीडिया से बात-चीत के दौरान कहा था कि, उनके लिए इस फिल्म में एक्शन करना काफी मुश्किल और चेलेंजिंग था. फिल्म के एक्शन सीन्स को जहां फिल्माया गया वहां बार-बार बारिश होने की वजह से एक्शन सीन को जल्द से जल्द फिल्माना पड़ा और इस बीच बारिश होने पर बौडी वापस ठंडी हो जाती थी, जिस वजह से मुझे सीन को फिल्माने से पहले दोबारा वौर्म अप करना पड़ता था. इस फिल्म में टाइगर के साथ दिशा पटानी लीड रोल में नजर आएंगी और फिल्म 30 मार्च को रिलीज होगी.

5जी के आने के बाद आखिर कितनी बदल जाएगी हमारी जिंदगी

टेलिकौम औपरेटर कंपनी बीएसएनएल की अभी भी पूरे भारत में 4G सेवाएं उपलब्ध नहीं है. अब कंपनी 5G लाने की तैयारी में है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस क्रम में बीएसएनएल ने नोकिया और जेडटीई के साथ साझेदारी की है. अभी के लिए बीएसएनएल दिल्ली और मुंबई को छोड़कर पूरे भारत में अपनी 4G सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है.

क्या है कंपनी का कहना : बीएसएनएल के चेयरमैन और एमडी अनुपम श्रीवास्तव ने कहा – ”सरकार इक्विटी के रूप में 7000 करोड़ रुपये कंपनी को देने को तैयार है. वहीं, हम 5500 करोड़ रुपये के आस-पास निवेश करेंगे. हमे उम्मीद है की अप्रैल तक इसकी मंजूरी मिल जाएगी.”

बीएसएनएल ने नोकिया और जेडटीई के साथ 4G नेटवर्क लाने के लिए अनुबंध करार किया है. कंपनी ने डिपार्टमेंट औफ टेलीकम्यूनिकेशन से भी अलग से 4G स्पेक्ट्रम अलौट करने के लिए बात की है. इससे पहले, कंपनी ने सरकार से 4G सेवाएं लाने के लिए 2100 MHz में 5Mhz स्पेक्ट्रम (राजस्थान को छोड़कर) के लिए निवेदन किया था.

श्रीवास्तव के अनुसार, भारत में अगले वर्ष तक 5G आने की सम्भावना है. फिलहाल, कंपनी वाई-फाई हौटस्पौट लगा रही है. कंपनी का लक्ष्य एक साल में 100000 वाई-फाई हौटस्पौट्स लगाने का है और उससे 200 से 250 करोड़ रेवन्यू कमाने का है.

इसी के साथ आपको बता दें, भारती एयरटेल और हुवावे ने भारत में 5G को लेकर आने की योजना को अमल में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. दोनों कंपनियों ने मिलकर 5G का पहला ट्रायल रन कर लिया है. इस मामले में एयरटेल ने कहा की एक छोटा सा ट्रायल भी भारत में 5G क्रांति की शुरुआत कही जा सकती है. 5G मोबाइल नेटवर्क 4G नेटवर्क की तुलना में 100 गुना ज्यादा स्पीड देने में सक्षम हैं.

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भारती एयरटेल के नेटवर्क्स डायरेक्टर अभय ने कहा की – ” 5G को लेकर आने का वादा अंतहीन है. 5G नेटवर्किंग का पूरा गेम ही बदल देगा. इससे हमारे जीने, काम करने और घुलने-मिलने का तरीका बदल जाएगा. हम अपने पार्टनर के साथ भारत में 5G ईकोसिस्टम लाने के लिए प्रतिबद्ध है. ”

भारत में 2020 तक आ सकता है 5G: भारत में 5G नेटवर्क उपभोक्ताओं तक 2020 तक पहुंच सकता है. अभी के लिए 5G उपलब्ध कराने का लक्ष्य 2020 को रखा है. इसी अंतराल में कथित योजनाओं और लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने उच्च स्तरीय फोरम सेटअप किया है. इस फोरम के तहत भारत में 5G लाने के रोडमैप और एक्शन प्लान मंजूर किए जाएंगे.

टेलिकौम सेक्रेटरी अरुणा सुंदरराजन ने हाल ही में बताया है की टेलिकौम डिपार्टमेंट जून 2018 तक 5G रोडमैप को अंतिम रूप दे देगा. हालांकि टेलिकौम इंडस्ट्री जो 7 लाख करोड़ से ज्यादा के कर्जे में है (मार्किट में रिलायंस जियो के आने के बाद बढ़ी प्रतिस्पर्धा के कारण) सरकार से 5G स्पेक्ट्रम औक्शन को लेकर थोड़ा धीरे आगे बढ़ने का निवेदन किया है. लेकिन जाहिर तौर से एयरटेल 5G के लिए पहले से तैयार हो रही है.

एयरटेल और हुवावे ने किया 5G ट्रायल: 3.5GHz बैंड के अंदर 3Gbps स्पीड की हासिल एयरटेल ने हुवावे के साथ ट्रायल रन में 3Gbps तक स्पीड हासिल कर ली है. यह स्पीड 3.5GHz बैंड के अंदर किसी भी मोबाइल नेटवर्क द्वारा प्राप्त की गई उच्चतम स्पीड है. इस ट्रायल रन में 5G कोर और 50GE नेटवर्क स्लाइसिंग राऊटर का प्रयोग किया गया था.

हुवावे के वायरलेस मार्केटिंग डायरेक्टर ने भारत में किए गए ट्रायल टेस्ट को लेकर कहा की – ”हमें इंडस्ट्री प्लेयर्स के साथ काम करते रहना चाहिए. इससे मोबाइल ब्रौडबैंड और बड़े ईको सिस्टम के निर्माण को और बेहतर किया जा सकेगा.”

एयरटेल ने साउथ कोरियाई SK टेलिकौम के साथ भी की 5G के लिए साझेदारी: यह बात ध्यान देने लायक है की एयरटेल के 5G प्रयास हुवावे तक ही सीमित नहीं है. एयरटेल ने इससे पहले साउथ कोरियाई फर्म के साथ भी 5G विकास, सौफ्टवेयर, नेटवर्किंग और इंटरनेट औफ थिंग्स आदि पर काम करने के लिए साझेदारी की थी.

इतिहास और सौंदर्य का अद्भुत संगम ‘राजस्थान’

वीरों के कई किस्से सुने थे. हिंदी गद्य गरिमा में वीर और वीरांगनाओं के साहस की कहानियां और पद्य में वीररस में पगी कविताओं में राजपूतों व राणाओं के बलिदान की गाथा मन में रोमांच भर देती थी. कक्षा में जब इतिहास की मैडम पढ़ाती थीं तो मैं इतिहास की गलियों में घूमतेघूमते कहां से कहां पहुंच जाया करता था. राजस्थान के इतिहास से मैं खासा प्रभावित था. जेहन हमेशा से उन स्थानों पर व्यक्तिगत तौर पर जाने के लिए मचलता था जिन के बारे में मैं अपनी पाठ्यपुस्तकों में पढ़चुका था. मैं ने जब इस ऐतिहासिक धरती पर कदम रखा तो मेरी कल्पनाएं, मेरी अनुभूति के सामने छोटी पड़ गईं.

कुंभलगढ़

मेरे सफर की शुरुआत हुई जयपुर से. एक सुखभरी ड्राइविंग की बात की जाए तो मैं यही कहूंगा कि जयपुर से कुंभलगढ़ के बीच बना राजमार्ग सब से शानदार ड्राइविंग अनुभव कराता है. मैं इस रास्ते की तुलना रेशम से बनी कालीन से करूंगा जिस पर गाड़ी चलाने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती, बल्कि वह आसानी से आगे बढ़ती जाती है. मजे की बात यह है कि ड्राइविंग के साथ गुजरते वक्त में राजस्थान के ग्रामीण दृश्य किसी की भी आंखों की कूंची से उतर कर मन के कैनवास पर छप जाएंगे. जी हां, इन रास्तों पर दिखने वाला हर दृश्य आप को किसी राजस्थानी पेंटिंग की तरह लगेगा. कुंभलगढ़  के मोड़ पर गाड़ी घुमाते ही रंगबिरंगे कपड़ों और पगडि़यों में खेतीबाड़ी में मशगूल गांव की महिलाएं और पुरुषों को देख आप खुद को राजस्थानी संस्कृति के काफी करीब महसूस करेंगे. यदि आप ने भोर में ही जयपुर से अपनी यात्रा प्रारंभ कर दी है तो आप दिन के दूसरे पहर यानी दोपहर बाद कुंभलगढ़ पहुंचने में सफल रहेंगे. यात्रा के मध्य पड़ने वाले शहर अजमेर का भ्रमण करने का भी विचार है तो आप कुंभलगढ़  जाने से पहले यहां की सैर कर सकते हैं.

अरावली की चोटियों को छूते हुए हम जैसेजैसे आगे बढ़ते जा रहे थे, नजारे उतने ही खूबसूरत होते जा रहे थे. कुछ ही दूर पहाड़ी पर अपनी विशाल भुजाओं को फैलाए खड़ा कुंभलगढ़ का किला दिखा तो नजरें अटक सी गईं और जबान से एक ही शब्द निकल सका, ‘अद्भुत’. मैं किले के नजदीक आता जा रहा था मगर एक टी पौइंट से सहरा की तरफ गाड़ी को घुमाना पड़ा. दरअसल, कुछ ही किलोमीटर पर ‘वाइल्डलाइफ रिट्रीट’ रिजौर्ट में हम ने रहने के लिए पहले से ही बुकिंग करा रखी थी. यह रिजौर्ट एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और इस की खासीयत है इस की बनावट. रिजौर्ट में अपने कमरे की खिड़की खोलते ही जो दृश्य मुझे दिखा उस में एक ओर कुंभलगढ़  का किला और दूसरी ओर गहरी खाई और खाई में बसी कुंभलगढ़  वाइल्ड लाइफ सैंचुरी का अद्भुत नजारा देखने को मिला. यहां का वातावरण इतना शांत है कि आसानी से चिडि़यों की चहचहाहट और जानवरों की दहाड़ सुनी जा सकती है. जी हां, मैं ने खुद रात के लगभग 2 बजे एक बंदर की जोरदार खौखौ की आवाज सुनी और मेरी नींद टूट गई. जगह की सुंदरता के साथ यदि रहने का स्थल भी आरामदायक हो तो यात्रा का मजा दोगुना हो जाता है. इस रिजौर्ट में वे सारी विशेषताएं थीं जो किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करेंगी खासतौर पर इस के बड़े औैर आरामदायक कौटेज, जिन्हें खूबसूरत फर्नीचर और परदों से सजाया गया है.

रिजौर्ट आने के बाद भी मन में एक अजीब सी कुलबुलाहट थी. मन उस विशाल से किले में खोया हुआ था. दोपहर का भोजन और एक छोटी सी झपकी के बाद मैं खुद को उस किले की सैर करने से रोक न सका. वहां पहुंच कर मुझे उस किले की भव्यता का एहसास हुआ. इस ऐतिहासिक किले को महाराणा प्रताप के पिता राणा कुम्भा ने बनवाया था. इसी किले में महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था. पूरे किले की सैर करतेकरते हमें दिन से शाम हो गई. किले के पिछले भाग से हम ने सूर्यास्त का खूबसूरत नजारा भी देखा. साथ ही, किले में शाम को आयोजित होने वाले लाइट और साउंड शो का भी लुत्फ उठाया.

हल्दीघाटी

अगली सुबह एक शानदार नाश्ते के बाद हम कुंभलगढ़  से 80 किलोमीटर दूर स्थित हल्दीघाटी के लिए निकल पड़े. उदयपुर से मात्र 15 किलोमीटर दूर यह भूमि इतिहास की सैकड़ों गाथाओं को खुद में समाए हुए हैं. यह वही जगह है जहां महाराणा प्रताप के रणबांकुरों की सेना ने अकबर की विशाल सेना के छक्के छुड़ा दिए थे. हल्दी की तरह पीली इस घाटी की मिट्टी से आज भी महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की स्वामिभक्ति की खुशबू आती है. अब इस स्थान पर एक संग्रहालय बनाया गया है जहां युद्ध के मैदान के मौडल्स, पेंटिंग और डौक्यूमैंट्री के जरिए कोई भी उस वक्त की घटनाओं को महसूस कर सकता है. यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित है रक्त तलाई. दरअसल, युद्ध में इतने लोगों का रक्त बहा कि इस जगह का नाम ही रक्त तलाई पड़ गया. युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व कर रहे राजा मानसिंह ने महाराणा को मुगल सेना से बचाने के लिए उन का रूप धारण कर लिया था और अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था. इसलिए यहां उन का भी स्मारक है. रक्त तलाई से कुछ दूरी पर महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की भी समाधि बनी हुई है. युद्ध के दौरान घायल चेतक ने महाराणा को जिस सुरक्षित जगह पहुंचा कर अंतिम सांसें ली थीं, वहीं पर महाराणा ने चेतक की समाधि बनवा दी थी. हालांकि इस युद्ध में मुगलों की विजय हुई थी लेकिन महाराणा की भी हार नहीं हुई थी. अपने जीतेजी महाराणा ने मुगलों को मेवाड़ की धरती पर पैर नहीं रखने दिया. मुगलों ने महाराणा की मृत्यु के बाद ही चैन की सांस ली थी. खैर, वीरों की इस धरती से हम सैकड़ों यादें बटोरे वापस कुंभलगढ़  लौट आए.

बेरा

सफर का अगला पड़ाव बेरा था, इसलिए अगले दिन सुबह का नाश्ता कर हम बेरा के लिए निकल पड़े. गुजरात के बौर्डर से मात्र 100 किलोमीटर पहले स्थित बेरा में हम ने लेपर्ड लायर रिजौर्ट को रहने के लिए चुना था. इस रिजौर्ट के मालिक ठाकुर देवी सिंह रनावत और उन की पत्नी हैं. यह जगह उन के निजी और विशाल बाग में स्थित है. यहां कई कौटेज हैं, जिन्हें आज के समय के अनुसार सारी सुखसुविधाओं को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है. यह बहुत आलीशान तो नहीं लेकिन बहुत ही आरामदायक जगह है. खासतौर पर यहां का खाना लाजवाब है. खैर, बेरा को तेंदुओं का घर कहा जाता है, इसलिए हम ने भी बिन बुलाए मेहमान की तरह इन के घर में घुस कर इन की झलक पाने की कोशिश की. हमारी 4 बार की कोशिशों में सिर्फ एक बार ही हम इन की झलक पा सके, जो लाजवाब थी.

जोधपुर

अगली सुबह हमें पाली होते हुए जोधपुर निकलना था. कार्यक्रम के मुताबिक हम नाश्ता कर सफर पर निकल पड़े. जोधपुर में हम ने पूरा एक दिन बिताया. यह जगह शौपिंग के लिहाज से बहुत अच्छी है. यहां शौपिंग के अलावा मेहरानगढ़ किला भी घूमा जा सकता है. इस किले की भव्यता देखते ही बनती है. किले को बारीक नक्काशी और विशाल प्रांगण के लिए जाना जाता है. फिलहाल, यहां एक संग्रहालय बना दिया गया है जहां अतीत की महत्त्वपूर्ण वस्तुओं का संग्रह किया गया है.

जैसलमेर

जोधपुर के बाद हम अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव यानी जैसलमेर पहुंच गए. प्रकृति के हर रूप को देखने के बाद मेरी हसरत रेगिस्तान देखने की थी. यात्रा की शुरुआत से ही थार मरुस्थल के बीचोंबीच बसा शहर जैसलमेर मेरी प्राथमिकता में था लेकिन कुंभलगढ़ से अपनी यात्रा प्रारंभ करने के बाद यह शहर मेरी यात्रा का अंतिम और खूबसूरत पड़ाव बना.

जैसलमेर शहर जोधपुर से तकरीबन 300 किलोमीटर दूर है पर अच्छी सड़क और कम यातायात होने की वजह से यह दूरी साढ़े 4 घंटे में तय की जा सकती है. हम 5 बजे सवेरे जैसलमेर-बाड़मेर हाईवे पहुंच चुके थे, जहां से हमें ऊंट की सवारी प्रारंभकरनी थी. यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व ही हमें हमारे ऊंट चालकों ने आगाह कर दिया था कि रेगिस्तान में खानेपीने के सामान को सुरक्षित बनाए रखना कठिन है और पानी को अधिक मात्रा में रखना जरूरी. साथ ही, चालक ने यह भी बताया कि किसी भी तरह की पीठ संबंधी दिक्कत है तो ऊंट की सवारी करना सही निर्णय नहीं रहेगा. मुझे यह दिक्कत नहीं थी इसलिए मैं आराम से ऊंट की सवारी कर सकता था. लेकिन यात्रा के समय पड़ने वाले हलके धचकों से मैं परिचित नहीं था. कुछ समय बीतने के बाद इन धचकों की मुझे आदत हो गई.

4 घंटे ऊंट की पीठ पर बिताने के बाद मुझे अपने चारों तरफ केवल रेत की सुनहरी चादर ही दिख रही थी. मैं ने सुना था कि जिस तरह समंदर का कोई छोर नहीं दिखता वैसे रेगिस्तान में रेत के अलावा कुछ और नहीं दिखता, लेकिन ऐसा वास्तव में नहीं था. यहां बबूल के पेड़ और झाडि़यों को आसानी से देखा जा सकता था. लेकिन बालुई पर्वतों के शिखर पर चारों ओर जो गहन शांति की अनुभूति थी उस की तो मैं व्याख्या करने में भी असमर्थ हूं. जमी हुई रेत पर दौड़ने और सूखी रेत पर धंसते जूतों को बाहर निकालने में जो सुकून मिल रहा था वह शहर की चहलपहल से कई गुना ज्यादा था. रेत में अठखेलियां करतेकरते कब चांद ने आसमान पर दस्तक दे दी, पता ही नहीं चला. रेत के सागर में हम बिछौना बिछाने की जगह तलाशने लगे. वैसे थोड़ीथोड़ी दूर में बसे छोटेछोटे  गांव हमें अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे. जब हम वहां से गुजरते तो छोटे बच्चे हमारे ऊंट के पीछे थोड़ी दूर तक हो लेते.

चालक से पूछने पर पता चला कि इन गांवों में एक ही दुकान होती है जहां खानेपीने का सारा सामान मिल जाता है. हालांकि बहुत अधिक वैराइटी नहीं होती लेकिन फिर भी जरूरतभर का सामान मिल जाता है. खैर, हमें कुछ दूरी पर बागजी बाबा की ढाणी मिल गई जहां हम ने लकड़ी एकत्र कर पहले भोजन बनाया, फिर बिछौना बिछा कर विश्राम किया. खुले आसमान के नीचे ढेर सारे तारों के संग हम पहली बार प्रकृति को खुद के इतना करीब महसूस कर रहे थे. इस एहसास के साथ ही यात्रा के 4 दिन बीत गए. अब बारी थी राजस्थान की स्मृतियों को समेट कर वापस अपने शहर की चहलपहल में लौटने की. लेकिन उन स्मृतियों में मैं अभी भी खोया हुआ हूं और शायद ही इन से बाहर निकलना चाहूं.

कंगला घाट : जहां रोज मनता है मौत का जश्न

बिहार की राजधनी पटना शहर का मुख्य और पुराना इलाका है-अशक राज पथ. करगिल चौक की ओर से इस सड़क में घुसने के बाद मिलता है बांकीपुर पोस्ट औफिस. उसी बिल्डिंग के बगल से सटी एक तंग गली गंगा नदी के किनारे बने कंगला घाट तक पहुंचती है. कुछ लोग इसे नाम कंटाहा घाट भी कहते हैं. इस घाट पर रहने वाले लोग हर दिन मौत का जश्नन मनाते हैं. उन्हें रोज ही इस बात का इंतजार रहता है कि शहर में कोई बड़ा आदमी मरे, तो उन्हें भरपेट लजीज खाना मिले.

अंधविश्वास में डूबे लोग अपने परिजनों की आत्मा को शांति पहुंचाने के टोटके के नाम पर इसी घाट के भिखारियों को खाना खाने बुलाते हैं या उनके बीच पूरी, सब्जी और मिठाई का पैकेट बांटते हैं. समाज में फैले अंधविश्वास ने इस घाट को जिंदा रखने में अहम भूमिका अदा की है. शहर में रोज कोई न कोई मरता ही है, इसलिए इस घाट के बाशिंदों को कभी पकवानों की कमी नहीं हुई. घाट के पास बनी झोपड़ी में पिछले 31 सालों से रह रहा रामखेलावन बताता है कि महीने में 20-22 दिन पूरी, सब्जी और मिठाई खाने का मजा मिलता हैं. उसके पिता और मां भी इसी घाट के पास में रहते थे, 12 साल पहले उनकी मौत हो गई. अब वह अपने 3 बच्चों और बीबी  के साथ छोटी सी झोपड़ी में रह रहा है.

शहर के अमीर और बड़े लोगों के मरने पर ही इस घाट के करीब 100 परिवारों की जिंदगियां चल रही हैं और उनका वंश आगे बढ़ रहा है. उनकी सुबह इसी उम्मीद के साथ होती है कि शहर में आज कोई मरे और उन्हें उम्दा खाना मिल सके. पिछले 70-75 सालों में शहर का रंग-रूप बदला. कई सरकारें बदल गईं. तरक्की के हजारों दावे और वादे हुए. पर इस घाट के पास बसी झोपड़पट्टी और उसमें रहने वालों तक रत्ती भर भी तरक्की नहीं पहुंच सकी है. अंधविश्वासियों के बूते उनकी पीढ़ी-दर-पीढ़ी पल रही हैं.

सच ही कहा गसा है कि जब बैठे ठाले मुफ्त में खाने को पुआ-पकवान मिल रहा हो और हराम का खाना खाने की आदत पड़ गई हो, तो कोई काम करने के लिए हाथ-पांव क्यों चलाए? भिखारियों की इस घाट के आसपास बसने, पनपने और बढ़ने के पीछे पोंगापंथ का ही हाथ रहा है. घाट के पास रहने वाला 15 साल का लड़का अपने साथियों के साथ कंचे खेल रहा है. जब उससे पूछा गया कि उसे लोग बढ़िया-बढ़िया खाना खाने के लिए क्यों दे जाते हैं तो वह तपाक से कहता है-‘जब तक लोग हम कंगलों को खाना नहीं खिलाएंगे, तब तक मरने वाले की आत्मा भटकती रहेगी. दूसरा जीवन पाने के लिए उसे कोई शरीर ही नहीं मिलेगा.’

उस बच्चे की बातों को सुन कर यही लगता है कि उसके मां-बाप ने भी उसे यह बात घुट्टी में पिला दी है कि लोग उसे खाना खिला कर या दान देकर कोई अहसान नहीं करते हैं. यह सब काम लोग अपना मतलब साधने के लिए ही करते हैं. हमारे समाज में अंधविश्वास की जडे़ किस कदर अपनी जड़ें जमायी हुई है कि बाबाओं और पंडों की बातें अमीरों से लेकर गरीबों दिमाग में कितनी आसानी से पैठ बना लेती हैं.

कंगला घाट में रहने वाले ज्यादातर भिखारी हट्टे-कट्टे हैं. वे किसी भी सूरत से अपंग और लाचार नहीं है. इसके बाद भी वह कोई काम नहीं करना चाहते हैं. मेहनत-मजदूरी का पैसा कमाने और पेट पालने के बारे में वह लोग सोचते ही नहीं है. अपने 4 बच्चों के साथ रहने वाला डोमन से जब पूछा गया कि वह कोई काम धंधा क्यों नहीं करता है? अपंग नहीं होने के बाद भी भीख और दान के भरोसे क्यों जिंदगी चला रहा है? मजदूरी करके अपनी कमाई को बढ़ाना क्यों नहीं चाहता है? अपने बच्चों को स्कूल क्यों नहीं भेजता है? इन सब सवालों के जबाब में वह उल्टा सवाल करता है-‘ अगर हम लोग दूसरा काम-धंधा करने लगेंगे तो मरने वालों को उद्वार कैसे होगा? लोग मरेंगे तो उनके परिवार वालों को कोई कंगला नहीं मिलेगा. समाज का नियम-कायदा ही गड़बड़ा जाएगा’.

सरकार और प्रशसन की बीसियों गाड़ियां सायरन बजता दनदनाती-हनहनाती कंगला घाट के पास से रोज गुजरती हैं, पर किसी का ध्यान उस ओर नहीं जाता है. बिहार वंचित जन मोर्चा के संयोजक किशरी दास कहते हैं कि हर सरकार और प्रशासन समस्या को मिटाने के बजाए उसे बनाए रखने में दिलचस्पी दिखाते हैं. कंगला घाट के पास बनी झोपड़पट्टी को हटाने के बारे में किसी ने कभी सोचा ही नहीं, क्योंकि यह मामला राजनीति के साथ-साथ पोंगापंथ से भी जुड़ा हुआ है. दूसरों से मिली भीख से मरने वाले का परलोक सुधरने वालों का इहलोक कई पीढी दर पीढी बर्बाद हो रही है, यह किसी को न दिखाई देता है और न ही समझ में आता है.

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