जब किसी रचनात्मक इंसान के हाथ बंधे हों यानी कि रचनात्मक बंदिशों के साथ किसी विषय पर फिल्म बनानी हो, तो उस फिल्म का क्या हश्र हो सकता है, इसका नमूना है संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘‘पद्मावत’’. पटकथा लेखन में कुछ गलतियों के बावजूद सुकून की बात यह है कि फिल्म ‘‘पद्मावत’’ में राजपूतों की ‘आन बान व शान’ का बेहतरीन चित्रण है.

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