संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म ‘पद्मावत’ का कई संगठन विरोध कर रहे हैं. हालांकि राहत की खबर यह है कि श्री राजपूत करणी सेना के संरक्षक लोकेंद्र सिंह कालवी ने भंसाली के आमंत्रण को स्वीकार कर लिया है. यानी कालवी रिलीज से पहले फिल्म देखेंगे. इसको लेकर करणी सेना में फूट पड़ने के भी आसार बनने लगे हैं. उधर, राजस्थान समेत कई राज्यों में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है. इसी बीच ‘पद्मावत’ में अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका निभाने वाले रणवीर सिंह ने खुद के किरदार को ‘दानव’ बता डाला है.

रणवीर सिंह ने ट्विटर पर अलाउद्दीन खिलजी के कई अवतारों वाला एक कोलाज शेयर किया. इसमें उन्होंने खिलजी को एक दानव बताया. बता दें कि इस फिल्म में दीपिका पादुकोण रानी पद्मावती, शाहिद कपूर महारावल रतन सिंह की भूमिकाओं में है.

राजस्थान ने दायर की पुनर्विचार याचिका

राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय के फिल्म पर प्रतिबंध के निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिका सोमवार (22 जनवरी) या मंगलवार (23 जनवरी) को दायर की जायेगी. उन्होंने याचिका को मजबूती देने के लिये करणी सेना को भी याचिका में पार्टी बनने का आग्रह किया है. करणी सेना के नेताओं के साथ एक बैठक के बाद कटारिया ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय का अध्ययन करने के बाद सरकार ने उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि आमजन की भावनओं का ध्यान रखा जाये.

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत पर जारी गतिरोध को खत्म की दिशा में कदम बढ़ाते हुए श्री राजपूत करणी सेना ने भंसाली प्रोडेक्शन की ओर से फिल्म देखने के आमंत्रण को स्वीकार कर लिया है. श्री राजपूत करणी सेना के संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने बताया कि हम रिलीज से पहले फिल्म देखने को तैयार है. हमने कभी नहीं कहा कि हम फिल्म नहीं देखेंगे. फिल्म निर्माताओं ने एक वर्ष पूर्व विश्वास दिलाया था कि फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग की जाएगी और अब उन्होंने हमें स्क्रीनिंग के लिए लिखा है हम उसके लिए तैयार है.

भंसाली प्रोडेक्शन ने 20 जनवरी को श्री राजपूत करणी सेना और राजपूत सभा जयपुर को एक पत्र लिखकर फिल्म देखने के लिए आमंत्रित किया था. पत्र में बताया गया था कि फिल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच किसी प्रकार का प्रेम प्रसंग को नहीं दिखाया गया है.

करणी सेना प्रमुख मिले योगी से

राजपूत करणी सेना के सदस्यों ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ से मुलाकात की और उनसे राज्य में फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की. राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह ने आज शाम पत्रकारों को बताया, ‘मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला और उनसे फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की.’ मुख्यमंत्री से करीब 20 मिनट की मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में फिल्म प्रदर्शित हुई तो सिनेमा हाल में ‘जनता कर्फ्यू’ लगायेगी.

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कालवी ने कहा कि उन्हें फिल्म में 40 बिन्दुओं पर आपत्ति है. महाराणा प्रताप और शिवाजी जैसे व्यक्तित्व पर फिल्म बनाओ और बौक्स औफिस पर फिल्म बाहुबली का रिकार्ड तोड़ो. इस बीच गोरखपुर में एसआरएस सिनेमा हाल के सामने आज लोगो ने फिल्म पद्मावत के विरोध में प्रदर्शन किया. इन लोगों ने फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली का पुतला भी फूंका और नारे भी लगाए.

प्रदर्शनकारियों ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने के लिये जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा. प्रदर्शन का नेतृत्व स्थानीय नेता संदीप सिंह कर रहे थे, उनके साथ हिन्दू समाज, शिव राष्ट्र सेना, अखंड राष्ट्रवादी सेना, राजपुताना शौर्य फाउंडेशन तथा क्षत्रिय महासभा से जुड़े लोग भी शामिल थे. सिंह ने कहा, ‘ फिल्म पद्मावत हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है, हम इसके प्रदर्शन के खिलाफ है. हम फिल्म पर प्रतिबंध की मांग को लेकर प्रदर्शन करते रहेंगे.’

पद्मावत के विरोध में चित्तौडगढ़ में प्रस्तावित जौहर निरस्त

राजस्थान के चित्तौड़घढ़ में विवादित फिल्म ‘पद्मावत’ के विरोध में महिलाओं द्वारा प्रस्तावित जौहर निरस्त कर दिया गया. अब महिलाओं ने प्रधानमंत्री से इच्छामृत्यु की स्वीकृति की मांग की है. जौहर स्वाभिमान मंच की महिलाओं ने फिल्म पर प्रतिबंध नहीं लगने की स्थिति में 24 जनवरी को जौहर करने की घोषणा की थी, लेकिन अब इसे वापस ले लिया गया है. चित्तौडगढ़ में श्री राजपूत करणी सेना के महासचिव विश्वबंधु सिंह ने बताया कि सर्व समाज की महिलाओं ने 24 जनवरी को जौहर करने का निर्णय निरस्त कर दिया गया है. कल एक रैली निकाली गई थी और महिलाओं ने इच्छामृत्यु की मांग की है. उन्होंने कहा कि रैली के बाद महिलाओं ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जिसमें फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है.

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उन्होंने बताया कि इससे पूर्व जौहर करने की इच्छुक महिलाओं को एक फार्म वितरित किया गया था, लेकिन अब यह निरस्त हो गया है. एक अन्य नेता धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि जौहर कानूनी रूप से सही नहीं था. इसलिये इसे वापस लेने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने बताया कि 24 जनवरी को फिल्म के विरोध में संगठन स्तर पर कोई योजना नहीं है. फिर भी कोई अपनी मर्जी से आकर प्रदर्शन करना चाहे तो विरोध प्रदर्शन कर सकता है.

1900 से अधिक महिलाओं ने फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर 24 जरनवरी को जौहर के लिये पंजीकरण कराया था. चित्तौड़घढ़ किले में अलाउद्दीन खिजली के आक्रमण के दौरान अपने आत्मसम्मान के लिये मेवाड की रानी पद्मिनी ने 16 हजार महिलाओं के साथ 1303 ईस्वी में जौहर किया था. चित्तौड़घढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी ने भी कहा कि जौहर जैसी किसी प्रकार की गतिविधि प्रस्तावित नहीं है.

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