सस्ती दरों की दुकानें गरीबों के लिए जीवनदायिनी हैं. इन दुकानों से गरीब पेट भरने के लिए सस्ती दर पर अनाज खरीदता है. यह व्यवस्था देश में लंबे समय से चल रही है लेकिन इस का फायदा ऐसे लोग भी उठा रहे थे जो इस के पात्र नहीं थे. गरीबों के हिस्से का राशन खाने के लिए इन लोगों ने फर्जी राशनकार्ड बनवाए थे, लेकिन अब राशनकार्ड आधार से जुड़ गए हैं.
सरकारी आंकड़े के अनुसार, 82 फीसदी राशनकार्ड आधार से जुड़ चुके हैं और इस से पौने 3 करोड़ फर्जी राशनकार्डधारियों की छुट्टी हुई है जिस से 17,500 करोड़ रुपए की बचत हुई है. बचत का यह राशन गरीबों को मिलेगा या नहीं, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है लेकिन गरीब के लिए अपने राशनकार्ड से कहीं भी राशन खरीदने की सरकार व्यवस्था कर रही है. यह व्यवस्था अब तक दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में शुरू की जा चुकी है. सरकार इसे पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से लागू करना चाहती है.
पूरे देश में इस व्यवस्था के लागू होने से रोजगार की तलाश में घर से बाहर रहने वाले मजदूरों को बड़ा फायदा होगा. अपने हिस्से का राशन वे कहीं भी खरीद सकेंगे. इस से उन्हें नगरों और महानगरों में सस्ती दर पर राशन मिल सकेगा. यह क्रांतिकारी कदम है. यह सब आधार के कारण संभव हो पा रहा है.
सरकार की गरीबों के लिए बनी योजना का लाभ उन्हें पारदर्शी तरीके से मिलता रहना चाहिए. गरीब को उस का हक मिलना ही चाहिए और उन के हिस्से पर डाका नहीं डाला जाना चाहिए. उम्मीद है कि इस योजना से गरीब को राहत मिलेगी.
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देश के पूर्वोत्तर में जो चुनावी सफलता भारतीय जनता पार्टी को मिली थी और जिस तरह उस ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को हार का तोहफा दिया, वह अप्रत्याशित है. भारतीय जनता पार्टी की त्रिपुरा विजय का कारण उस की छिपी पैदल सेना है
जो अन्य दलों के पास न के बराबर है. भाजपा को असली समर्थन लाखों मंदिरों, मठों, आश्रमों, ज्योतिषाचार्यों आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं, योग गुरुओं, वास्तु विशेषज्ञों, कुंडली पढ़ने वालों, विवाह कराने वालों, पिंडदान कराने वालों से मिलता है. भाजपा ने जाति का भेद बरकरार रखते हुए दलितों यानी पिछड़ों और पिछड़ों के संपन्न वर्गों को अपनेअपने देवीदेवता और आश्रम दे कर उन्हें जोड़ लिया है.
आज धर्म का धंधा विशाल हो गया है. ये सभी भाजपा के समर्थक हैं. इन का अस्तित्व ही भाजपाई सोच पर निर्भर है. देश की अंधविश्वासी जनता इन पर भरोसा करती है और ये भाजपा में अंधविश्वास रखते हैं.
ममता बनर्जी हों, मायावती हों, अखिलेश यादव हों, राहुल गांधी हों, हार्दिक पटेल हों या हों कन्हैया कुमार, सभी इस फौज के आगे जीरो हैं. चुनावी रण में यही फौज सब से अधिक उपयोगी है. भाजपा उक्त फौज वालों के लिए लगातार आय का इंतजाम कर रही है और अब वे भाजपा के लिए वोट जुटा रहे हैं. जनता को, दरअसल, ये सब चूस रहे हैं, निकम्मा बना रहे हैं, भटका रहे हैं, पर भाजपा यह बताएगी नहीं, और दूसरी पार्टियां यह बताने की हैसियत नहीं रखतीं. बिहार व उत्तर प्रदेश के उपचुनावों में भाजपा की हार इसलिए हुई कि इस फौज के आगे जनता ने सिर नहीं झुकाया.
दूसरी पार्टियां जब तक दिनरात बढ़ती इस फौज का मुकाबला तार्किक, व्यावहारिक, वैज्ञानिक सोच को जनता के आगे रख कर नहीं करेंगी, वे पूर्णतया सफल नहीं होंगी. वैसे यह फौज अनुत्पादक है, जनता को मूर्ख बनाने वाले निकम्मों की है पर फिर भी कोई इस फौज की पोल खोलने को तैयार नहीं. इस फौज की बेईमानी नीरव मोदी जैसों से 100 गुना ज्यादा है. पार्टियां इन का समर्थन करती रही है.
अखिलेश यादव और मायावती भाजपा की लगातार जीत से घबरा कर एकजुट हो गए, लेकिन इन दोनों के सहायकों में इस फौज के छिपे सिपाही मौजूद हैं. वे समयसमय पर अंदर से पलीता जरूर लगाएंगे. राहुल गांधी तो स्वयं फौज के हिस्सेदार हैं क्योंकि अपने जन्म से ही कांग्रेस इस फौज का हिस्सा रही है और भाजपा, उसी कांग्रेस का कट्टररूप भर है.
विपक्षी दलों को अगर एक होना है तो उन्हें इस फौज को नियंत्रित करना होगा, इस की चालबाजी का भंडाफोड़ करना होगा ताकि भाजपा को इस फौज के बचाव में आ कर इस की मिल्कीयत को मानना पड़े. यह आसान नहीं है. वैसे इस फौज पर नियंत्रण होने से जनता को तुरंत लाभ मिलेगा और वह धार्मिक धंधों के चक्रव्यूह से निकल सकेगी. पर इस के लिए जो तार्किक सोच चाहिए वह दिख नहीं रही.
आज देश को अंधविश्वासों के जंजाल से निकालना जरूरी है, हमारी प्रगति उसी पर निर्भर है. 2018 में हम 1518 की सोच से काम नहीं कर सकते.
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भारत ही नहीं बल्कि देशभर के लोग व्हाट्सऐप का उपयोग करते हैं ताकि वे अपने दोस्तों और परिवारजनों से, कभी भी और कहीं से भी संपर्क में रह सकें. ‘व्हाट्सऐप’ के जरिए उपयोगकर्ता ना केवल टेक्स्ट संदेश बल्कि औडियो, छवि, वीडियो तथा अपनी लोकेशन भी बेहद ही आसानी भेज सकता है. ऐसा माना जाता है कि व्हाट्सऐप मुफ्त, सरल, सुरक्षित, भरोसेमंद मेसेजिंग और कौलिंग प्रदान करता है. लेकिन हाल ही में देशभर में आ रहे डाटा चोरी की खबरों ने लोगो की नींद उड़ा दी है. अब इस तरह की चीजें ‘व्हाट्सऐप’ पर भी अपना सवालिया निशान लगा रहे हैं. अगर आपको ‘व्हाट्सऐप’ पर फ्री रिचार्ज या लौटरी जीतने जैसे मैसेज मिल रहे हैं तो सावधान हो जाइये, क्योंकि ये आपकी निजी जानकारी चुरा सकते हैं.
दरअसल, व्हाट्सऐप पर एक बहुत बड़ा ग्रुप यूजर्स की जानकारी एकत्रित करने के लिए काम करता है. ये ग्रुप आपके व्हाट्सऐप पर कई तरह के लुभावने मैसेज भेजते रहते हैं, जिनके चक्कर में आकर आप इन पर क्लिक कर देते हैं और आपको इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं होता कि आप केवल एक क्लिक नहीं कर रहे हैं बल्कि अपने फोन की जानकारी उन ग्रुपों से साझा कर रहे हैं. इसलिए अब आप थोड़ा सावधान हो जाइये और अगर आपको इस तरह का कोई भी लुभावना मैसेज दिखे तो पहले इन बातों पर गौर करें-
कोई भी सुविधा मुफ्त नहीं होती
सबसे पहले तो समझने वाली बात ये है कि कोई भी सुविधा मुफ्त नहीं होती. अगर व्हाट्सऐप मैसेज के द्वारा आपको फ्री रिचार्ज या आपके अकाउंट में कुछ रुपये आने की बात कही जाती है, तो ऐसे में सोचने वाली बात ये है कि कोई भी आपको मुफ्त सुविधा क्यों देगा. दरअसल इस तरह के मैसेज के पीछे आपके फोन की जानकारी लेना ही उनका मकसद होता है.
कैसे ली जाती है जानकारी
आपने ने देखा होगा कि अक्सर व्हाट्सऐप पर इस तरह के मैसेज के नीचे कोई लिंक दिया होता है. जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करेंगे आपके मोबाइल का ब्राउसर खुल जाएगा और आप किसी वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे. वेबसाइट पर आपको एक फौर्म भरने के लिए मिलेगा, जिसके बहाने से आपका नाम, पता, ई मेल आइडी या मोबाइल नंबर मांग लिया जाएगा. इन जानकारी को जैसे ही आप भरेंगे, आपके मेल या मोबाइल पर कई कंपनियों के विज्ञापन आने लगेंगे. ये भी हो सकता है कि आपके द्वारा दी गई जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जाए.
लिंक के जरिए डाउनलोड किये गएऐप से खतरा
व्हाट्सऐप पर दिए गए लिंक कई बार आपके मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड कर देते हैं. ये ऐप आपके और आपके फोन के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि जैसे ही आप फोन पर डाउनलोड किये गए उस ऐप को खोलेंगे ऐप आपके फोन के कुछ फीचर को एक्सेस करने की इजाजत मांगेगा. जैसे ही आप ऐप को इजाजत देंगे, वह आपके फोन की कई जानकारियों को एक्सेस करने लगेगा और जब तक आप उस ऐप को डिलीट करेंगे तब तक वह आपके फोन की कई जानकारी प्राप्त कर चुका होगा.
क्यों आते हैं ये मैसेज
व्हाट्सऐप पर इस तरह के मैसेज आने का दो ही कारण हो सकता है. या तो इस तरह के मैसेज विज्ञापनों को बढ़ावा देने के लिए आते हैं, या फिर यूजर की जानकारी इकट्ठा करने के लिए. इसलिए जितना हो सके इस तरह के मैसेज से बच कर रहें, क्योंकि इस काम के लिए एक कंपनी नहीं कई कंपनियां मिलकर काम करती हैं. ऐसे में आपकी और आपके फोन की जानकारी का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है.
क्या करें?
जब भी आपको ऐसा मैसेज व्हाट्सऐप पर दिखे, उसे बिलकुल न खोलें. नंबर को रिपोर्ट करें या सीधे ब्लौक कर दें. हो सके तो अपने व्हाट्सऐप की सिक्योरिटी और प्राइवेसी और बढ़ा दें.
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औस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 4 अप्रैल से कौमनवेल्थ गेम्स का आगाज हो रहा है. इस साल कौमनवेल्थ गेम्स में 71 देशों के 6,600 एथलीट्स और टीम अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं. गोल्ड कोस्ट का खेल गांव 29 हेक्टेयर में फैला हुआ है. इसमें 18 नई इमारतें हैं, जिनमें 1,170 अपार्टमेंट और 82 टाउनहाउस हैं. आइए आपको बताते हैं कौमनवेल्थ गेम्स 2018 की 5 ऐसी बड़ी बातें जो आपको जाननी जरूरी हैं.
स्वास्थय का खास ध्यान
गोल्ड कोस्ट CAG विलेज में एथलीट्स के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कुल 2 लाख 25 हजार फ्री कौन्डम बांटे गए हैं. मतलब हर एथलीट को औसतन 34 कौन्डम दिए गए हैं. साथ ही पूरे खेलगांव में 17 हजार टौयलेट रोल्स भी बांटे गए हैं.
डोपिंग के लिए खास स्टेशन
खेल गांव में डोपिंग की जांच के लिए भी खास व्यवस्था की गई है. गोल्ड कोस्ट में एक डोपिंग नियंत्रक स्टेशन भी है, जिसमें खिलाड़ियों के डोप नमूनों को 7 साल के लिए संभाल कर रखा जा सकता है.
24 घंटे खाने की सुविधा
खेल गांव के डाइनिंग रूम में 24 घंटे खाने की व्यवस्था की गई है. यहां हर एथलीट को रोजाना ढाई किलो तक खाना दिया जाएगा. यहां रोजाना 18 हजार व्यंजन परोसे जाएंगे, जिसे दुनिया के 300 बेस्ट शेफ्स तैयार करेंगे.
भारी मात्रा में दिये जाएंगे फल
खेल गांव में एथलीटों के लिए फलों की व्यवस्था भारी संख्या में की गई है. कुल 8 लाख फल खिलाड़ियों के लिए रखे गए हैं. खिलाड़ियों को इन खेलों के दौरान 121,000 केले बांटे जाने हैं.
मौज मस्ती का पूरा ध्यान
खेल गांव में खिलाड़ियों की मौज-मस्ती के लिए दूसरे खेलों का भी इंतजाम किया गया है. यहां 380 स्क्वायर मीटर में कौमन रूम बनाया गया है जहां पूल टेबल, टेबल टेनिस, वीडियो गेम्स खेलने का इंतजाम है.
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बैंकिंग सेक्टर के लिए बुरा दौर कब खत्म होगा? क्या बैंक की सबसे बड़ी समस्या एनपीए ही है? पिछले डेढ़ महीने में बैंकों की स्थिति को देखते हुए नहीं लगता कि बैंक आरबीआई नियमों को लेकर गंभीर हैं. पीएनबी घोटाला उजागर होने के बाद बैंकों की स्थिति की असलियत सामने आने लगी है. दरअसल, पीएनबी के बाद एक-एक बैंकों के घोटाले उजागर हुए. सरकारी बैंकों से शुरू हुई इस फेहरिस्त में अब प्राइवेट सेक्टर भी जुड़ गया है.
आईसीआईसीआई बैंक इन दिनों 3250 करोड़ रुपए की ‘स्वीट डील’ के पेंच में फंसा है. अब यह बैंक की एमडी चंदा कोचर का नाम बदनाम करने की कोशिश है या फिर सच में बैंक के लिए कोई खतरे की घंटी. इसका जवाब तो जांच के बाद ही पता चलेगा. लेकिन, बैंक की एक गलती से आज निवेशकों के करीब 16 हजार करोड़ डूब चुके हैं. यह रकम तो पीएनबी घोटाले से भी ज्यादा है.
लोन या ‘स्वीट डील’?
आईसीआईसीआई बैंक और वीडियोकौन ग्रुप के बीच हुई 3250 करोड़ की डील कोई आम डील नहीं थी. इस डील में बैंक की एमडी चंदा कोचर पर गलत तरीके से वीडियोकौन ग्रुप को 3,250 करोड़ रुपए का लोन देने का आरोप लगा है. इस डील में उनके पति दीपक कोचर का भी नाम शामिल है. इसलिए चंदा कोचर को और ज्यादा शक के घेरे में खड़ा किया गया है. आलम यह है कि बैंक के बोर्ड को दो बार आकर सफाई देनी पड़ी. हालांकि, जांच अभी जारी है, लेकिन बैंक का बोर्ड चंदा कोचर को क्लीन चिट दे चुका है.
कैसे एक झटके में डूब गए 16 हजार करोड़?
वीडियोकौन ग्रुप ने बैंक को लोन के 2,810 करोड़ रुपए नहीं लौटाए और बैंक ने साल 2017 में इसे एनपीए घोषित कर दिया. मामला सामने आने के बाद से आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 8 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है. बैंक की इस एक गलती की वजह से निवेशकों के 16 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा डूब गए हैं.
3 दिन में साफ हुई मार्केट कैप
वीडियोकौन लोन मामला सामने आने के बाद से आईसीआईसीआई बैंक का शेयर टूट रहा है. निवेशक अपना पैसा निकाल रहे हैं. ब्रोकरेज हाउस भी पैसा डालने से इनकार कर रहे हैं. यही वजह है कि बैंक की मार्केट कैप में बड़ी गिरावट आई. 3 दिन में आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 8.80 फीसदी टूट चुका है. इससे बैंक का मार्केट कैप 16,090.64 करोड़ रुपए घट गया है. आपको बता दें, 27 मार्च को बंद हुए भाव 283.90 रुपए के लिहाज से बैंक का मार्केट कैप 1,82,725.35 करोड़ रुपए था, जो तीन दिन में घटकर 1,66,634.71 करोड़ रुपए हो गया है.
11% टूट चुका है बैंक का शेयर
लोन मामले की खबर आने और चंदा कोचर के खिलाफ जांच शुरू होने से आईसीआईसीआई बैंक के शेयर पर दबाव दिख रहा है. सोमवार को शेयर में 7 फीसदी की गिरावट देखी गई. कारोबार के दौरान बीएसई पर स्टौक 7 फीसदी टूटकर 258.90 रुपए के निचले स्तर पर आ गया था. हालांकि, बाद में थोड़ा रिकवर होकर 261.50 रुपए पर बंद हुआ. लेकिन, पिछले एक महीने में देखें तो बैंक का शेयर करीब 11 फीसदी टूट चुका है.
SEBI ने टेढ़ी की नजर
मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने भी आईसीआईसीआई बैंक समेत लेंडर्स ग्रुप से हुई इस स्वीट डील से वीडियोकौन और उसके प्रोमोटर पर नजरें टेढ़ी कर ली हैं. आईसीआईसीआई बैंक भी सेबी के रडार पर है. सेबी ने बैंक के खिलाफ कौरपोरेट गवर्नैंस से संबंधित खामियों की जांच शुरू कर दी है. उधर सीबीआई भी आईसीआईसीआई बैंक के अधिकारियों से पूछताछ कर रही है.
चंदा कोचर पर क्यों उठे सवाल?
एक इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियोकौन ग्रुप को आईसीआईसीआई बैंक ने 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया. बाद में यह लोन चुकाया नहीं गया. वीडियोकौन की मदद से बनी एक कंपनी आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के नाम कर दी गई. बैंक ने वीडियोकौन के लोन में से 86% यानी 2810 करोड़ रुपए डूबते खाते में डाल दिए और इसे एनपीए (नौन परफौर्मिंग असेट्स) घोषित कर दिया.
2008 में आई न्यूपावर
एक रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियोकौन ग्रुप के मालिक वेणुगोपाल धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के साथ एक नई कंपनी बनाई. दिसंबर 2008 में न्यूपावर के नाम से कंपनी की नींव रखी गई. इसमें दोनों पार्टी यानी कोचर परिवार और वेणुगोपाल धूत की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी थी. दीपक कोचर को इस कंपनी में बतौर एमडी नियुक्त किया गया. जबकि वेणुगोपाल धूत कंपनी के डायरेक्टर थें.
कैसे बेची गई कंपनी
जनवरी 2009 में वेणुगोपाल धूत ने न्यूपावर कंपनी में डायरेक्टर का पद छोड़ दिया. उन्होंने ढाई लाख रुपए में अपने 24,999 शेयर्स भी न्यूपावर में ट्रांसफर कर दिए. रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 से 2012 के बीच धूत ने 65 करोड़ की कंपनी को सिर्फ 9 लाख रुपए में दीपक कोचर को बेच दिया. 94.99 फीसदी होल्डिंग वाले शेयर महज 9 लाख रुपए में चंदा कोचर के पति को मिल गए. इस कंपनी को धूत की कंपनी से 64 करोड़ का लोन भी दिया गया.
सिर्फ 9 लाख में बेची कंपनी
खबरों के मुताबिक, इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दीपक कोचर को इस कंपनी का ट्रांसफर वेणुगोपाल द्वारा आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से वीडियोकौन ग्रुप को 3250 करोड़ रुपए का लोन मिलने के छह महीने के बाद किया गया.
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टाइगर श्रौफ के साथ फिल्म ‘‘बागी 2’’ में हीरोईन बनकर आ चुकी अभिनेत्री दिशा पाटनी की लौटरी लग गयी है. फिल्म ‘‘बागी 2’’ के हिट होते ही दिशा पाटनी को फिल्मकार मोहित सूरी ने अपनी अनाम रोमांचक फिल्म में आदित्य राय कपूर और सनी सिंह के साथ अभिनय करने के लिए अनुबंधित किया है.
मोहित सूरी ने आदित्य राय कपूर के साथ अतीत में दो फिल्में की हैं. जबकि सनी सिंह ने हाल ही में प्रदर्शित फिल्म ‘‘सोनू के टीटू की स्वीटी’’ में अभिनय किया था.
मोहित सूरी की इस फिल्म के मिलने से दिशा पाटनी काफी उत्साहित हैं, मगर वह यह भूल गयीं कि फिल्म ‘‘बागी 2’’ में उनके सामने सिर्फ एक हीरो टाइगर श्रौफ थे. जबकि मोहित सूरी की इस फिल्म में आदित्य राय कपूर और सनी सिंह दो हीरो हैं.
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मशहूर कैमरा ब्रांड ‘गोप्रो’(GoPro) ने भारत में अपना वाटरप्रूफ कैमरा लौन्च कर दिया है. कंपनी ने अपने इस एक्शन कैमरा का नाम ‘हीरो’ (HERO) रखा है. कंपनी के मुताबिक ‘गो प्रो हीरो’ 10 मीटर तक की पानी की गहराई में खराब नहीं होगा. ‘हीरो गो प्रो’ में वाइड एंगल व्यू, वौयस कंट्रोल और स्टेबलाइजेशन जैसे फीचर्स दिए गए हैं. भारत में कैमरे की बिक्री 2 अप्रैल से फ्लिपकार्ट पर शुरू हो चुकी है.
कीमत
GoPro HERO की भारत में कीमत 18,990 रुपये तय की गई है. फ्लिपकार्ट ने GoPro HERO एक्शन कैमरा को अपने वेबसाइट पर लिस्ट कर रखा है.
फीचर्स
कैमरे में 10 मेगापिक्सल का कैमरा है.
इसमें 1/2.3 इंच का सीएमओएस सेंसर लगा है.
डिवाइस से 60 एफपीएस और 30 एपपीएस पर 4K रिकौर्डिंग की जा सकती है.
कैमरे का आईओएस रेंज 100-1600 का है.
गो प्रो हीरो में 95 सेंटीमीटर का टच स्क्रीन है, जिसका रेजोल्यूशन 320×480 पिक्सल है.
डिवाइस में 4जीबी की इनबिल्ट स्टोरेज दी है, जिसे माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए 128 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है.
कैमरा 117 ग्राम भारी है.
भारत में गो प्रो के तीन कैमरा पहले से ही उपलब्ध हैं. इनमें, HERO6 Black, HERO5 Black और HERO5 Session शामिल हैं. इन कैमरे की क्रमश: कीमत 37,000 रुपये, 27,000 रुपये और 18,000 रुपये है.
फोटोग्राफी के शौकिनों के लिए ये कैमरे हो सकते हैं पहली पसंद
Olympus OM-D E-M10 Mark II mirrorless camera
फीचर्स
Olympus OM-D E-M10 Mark II मिरर लेस कैमरा है.
कैमरे में 16 मेगापिक्सल का सेंसर है.
इसमें 14-42 एमएम का जूम लेंस दिया गया है.
कैमरा 60एफपीएस और 1080 पिक्सल के साथ फुल एचडी क्वालिटी देता है.
इसमें 3 इंच का एलसीडी टच स्क्रीन दिया गया है.
कैमरे की कीमत करीब 32,325 रुपये है(कीमत में बदलाव हो सकता है).
Canon EOS Rebel T6
फीचर्स
सिंगल लेंस रिफेक्स के तौर पर ये शानदार कैमरा है.
कैमरे में 18 मेगापिक्सल का सेंसर है.
इसमें ईएप-एस 18-55 एमएम आइएस जूम लेंस दिया गया है.
कैमरा की मदद से 1080 पिक्सल की एचडी वीडियो रिकौर्ड की जा सकती है.
डीएसएलआर कैमरे की कीमत करीब 28,086 रुपये है(कीमत में बदलाव हो सकता है).
Nikon D3400 DSLR camera
फीचर्स
डिजिटल सिंगल लेंस रिफेक्स कैमरा के तौर पर निकौन का ये कैमरा बजट फ्रेंडली है.
कैमरे में 24.2 मेगापिक्सल का सेंसर है.
आपको पैकेज में 18-55 एमएम और 70-300 एमएम के एएफ-पी निकौन लेंसेस मिलेंगे.
कैमरे का आइएसओ रेंज 100 से 25,600 का है.
डीएसएलआर कैमरे की कीमत करीब 38,673 रुपये है(कीमत में बदलाव हो सकता है).
Yi M1 Mirrorless camera
फीचर्स
Yi M1 एक मिररलेस इंटर चेंजबल कैमरा है.
कैमरा 12-40 एमएम एफ3 5-5.6 जूम लेंस के साथ आता है.
कैमरे में 20 मेगापिक्सल का इमेज सेंसर है.
कैमरे से 4k रिकौर्डिंग की जा सकती है.
इसमें 3 इंच का एलसीडी टच स्क्रीन दिया हुआ है.
कैमरे की कीमत करीब 22,673 रुपये है(कीमत में बदलाव हो सकता है).
VIDEO : करीना कपूर मेकअप लुक फ्रॉम की एंड का मूवी
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अंततः तिग्मांशु धुलिया अपनी महत्वांकाक्षी फिल्म ‘‘मिलन टौकीज’’ की शूटिंग लखनउ में शुरू कर चुके है. जहां पर दक्षिण की स्टार अभिनेत्री श्रृद्धा श्रीनाथ के साथ अली फजल भी शूटिंग कर रहे हैं. इस फिल्म के सेट पर अली फजल को देखकर लोग आश्चर्य चकित हो रहे हैं. क्योंकि वेब सीरीज ‘मिरजापुर’ के पोस्टर में वह काफी मोटे व मसल्स बढ़ाए हुए नजर आए थें.
पर उन्हें ‘मिलन टौकीज’ के किरदार के लिए खुद को उपयुक्त बनाने के लिए काफी वजन कम करना पड़ा. इस संबंध में अली फजल कहते हैं – ‘‘वजन घटना या बढ़ाना तो हम कलाकारों के काम का एक हिस्सा है. पिछले दिनों जब मैं अमरीका के लास एजेंल्स शहर गया हुआ था, तभी मैंने अपना वजन कम करना शुरू कर दिया था. मैं वहां भी वर्कआउट कर रहा था. मुंबई पहुंचने के बाद भी वर्कआउट किया.’’
किन एक्टर्स ने किया बौडी ट्रांसफौर्म
आमिर खान
आमिर खान का नाम सुनते ही लोग अनुमान लगाते हैं मिस्टर परफेक्शनिस्ट का क्योंकि बौलीवुड में उन्हें इस नाम से भी जाना जाता है. आमिर खान ने साल 2016 में आई फिल्म दंगल में अपना वजन इस कदर बढ़ाया था कि उनसे झुका तक नहीं जा रहा था. कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर आमिर का एक पोस्ट तेजी से वायरल हुआ जिसमें आमिर जिम करते हुए काफी फिट दिखाई दे रहे थें.
रणदीप हुड्डा
रणदीप हुड्डा ने अपनी फिल्म दो लफ्जों की कहानी के लिये अपने वजन को बढ़ाकर 95 किलो तक किया था लेकिन ठिक उसके बाद आई फिल्म सरबजीत में रणदीप हुड्डा ने अपने बौडी को कुछ इस तरह ट्रांसफौर्म किया कि लोगों को उन्हें पहचानने में भी दिक्कत हुई थी. रणदीप ने फिल्म सरबजीत लिये 35 किलो तक वजन कम किया था.
रणवीर सिंह
रणवीर सिंह बौलीवुड में इन्हें पावरबैंक के नाम से भी जाना जाता है. इन्होंने अपनी फिल्म पद्मावत के लिये अपने वजन को बढ़ाया था लेकिन फिलहाल हो रहे फिल्म गली बौय के सेट से जो तस्वीरें आ रही हैं उसमें रणवीर सिंह काफी दुबले पतले दिख रहे हैं क्योंकि इस फिल्म में रणवीर को एक कौलेज में पढ़ रहे लड़के का किरदार निभाना है.
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अन्ना हजारे आज किसी परिचय के मुहताज नहीं हैं. आजादी के बाद शांतिपूर्ण आंदोलन कर सत्ता को उखाड़ फेंकने का बड़ा काम अन्ना हजारे ने किया था. महाराष्ट्र के अहमदनगर के रालेगण सिद्धि गांव में रहने वाले अन्ना हजारे का पूरा नाम किसन बाबू राव हजारे है. परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए वे बचपन में ही अपनी बूआ के साथ मुंबई आए और यहां उन्होंने फूल बेचने का काम शुरू किया.
अन्ना के दादाजी सेना में थे. अन्ना के बचपन पर उन का प्रभाव था. 1962 में जब भारतचीन युद्ध हुआ तो युवाओं से सेना में शामिल होने की अपील की गई, जिस के तहत अन्ना सेना में भरती हो गए. 15 साल उन्होंने सेना में काम किया. इस के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले कर वे अपने गांव वापस आ गए.
अन्ना के जीवन पर महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का काफी असर था. ऐसे में उन्होंने अपने गांव में सुधारकार्य शुरू किया. गांव में सिंचाई के साधन उपलब्ध कराए जिस से गांव तरक्की की राह पर आगे बढ़ा. आज यह गांव देश में एक मिसाल है. लोग इसे देखने के लिए यहां आते हैं. अन्ना हजारे को पद्मभूषण सहित कई सम्मान मिल चुके हैं.
अन्ना का नाम दोबारा चर्चा में तब आया जब 1991 में उन्होंने महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन शुरू किया. शिवसेना और भाजपा सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों को हटाने की मांग की. इस के बाद 1997 में अन्ना ने सूचना का अधिकार कानून बनाने के लिए अभियान शुरू किया. यह कानून बन गया. फिर वर्ष 2011 में लोकपाल कानून बनाने के लिए जन आंदोलन शुरू किया जो देश के सब से बड़े आंदोलनों में गिना जाता है. इस का ही असर था कि कांग्रेस सरकार को कई कानून बनाने पड़े. सरकार ने लोकपाल बिल तैयार किया.
अन्ना के इसी आंदोलन का असर था कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार बन गई. अन्ना अब एक बार फिर से आंदोलन की राह पर हैं. वे 22 प्रदेशों का दौरा कर चुके हैं. 2 दिनों के दौरे पर वे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आए और लखनऊ से सीतापुर तक कई जगहों पर उन्होंने जनसभाएं की. लखनऊ में लोकतंत्र की पाठशाला कार्यक्रम में हिस्सा लिया, युवाओं से बातचीत की. इसी दौरान इस प्रतिनिधि की अन्ना हजारे से बातचीत हुई, पेश हैं अंश :
आप के इस दौरे का उद्देश्य क्या है, किस तरह का बदलाव चाहते हैं?
हम चाहते हैं कि देश पर किसी एक पार्टी का शासन न हो. बल्कि संविधान का राज हो. अभी देश में पार्टी का राज चलता है. नेता बदलते हैं लेकिन कुरसी पर बैठते ही वे चुनावी वादे भूल जाते हैं. नेता सत्तापैसा के बीच ही चलता रहता है. हम लोगों को बताना चाहते हैं कि सरकार बदलने की चाबी उन्हीं के पास है. इसे जनता भूल गई है. जनता के सरकार गिराने का डर यदि नेताओं में बैठ जाएगा तो वे चुनावी वादे नहीं भूलेंगे. आज के नेताओं की बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता. विश्वास पानीपत की लड़ाई में खो सा गया है. चुनाव में सुधार हों ताकि जनता सही प्रत्याशी को चुन सके.
राजनीतिक बदलाव की बातें लोकपाल आंदोलन के समय हुई थीं, वे कैसे बेनतीजा हो गईं?
लोकपाल आंदोलन सफल रहा. पूरा देश एकसाथ खड़ा था. कांग्रेस के खिलाफ माहौल बना. सरकार बनाने के बाद भाजपा ने जो वादे किए, उन को पूरा नहीं किया. अब हम अपने साथ काम करने वाले लोगों से एक हलफनामा ले रहे हैं कि उन का उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं है.
हमारे साथ जुड़े 5 हजार लोग 100 रुपए के स्टांप पर यह लिख कर दे चुके हैं कि वे राजनीति में नहीं जाएंगे. ये लोग अगर बाद में अपने वादे से मुकरे तो मैं उन के खिलाफ कोर्ट में जाऊंगा. राजनीति में अच्छे लोग आने चाहिए. उस से पहले चुनाव प्रणाली, मतदान सुधार की दिशा में काम होना चाहिए. 1952 में ही संविधान की बातों को चुनाव में दरकिनार किया गया. उस समय चुनाव आयोग मौन था जिस का खमियाजा आज देश को भुगतना पड़ रहा है. ऐसे में चुनावसुधार की जरूरत है. तभी पार्टीतंत्र खत्म हो कर सही माने में लोकतंत्र आएगा.
लोकपाल को ले कर आप की क्या रणनीति है?
मजबूत लोकपाल की मांग है. अभी जो लोकपाल कानून बना है वह बेहद कमजोर है. कई ऐसे उपाय कर दिए गए हैं जिन से भ्रष्टाचार को रोका नहीं जा सकता. केंद्र सरकार ने बिना चर्चा के ही लोकपाल बिल पास कर दिया. लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में बिना चर्चा के बिल पास हो गया. संसद ने जिस तरह से लोकपाल बिल को पास किया उस से साफ है कि सरकार चर्चा में नहीं, हुक्म देने में विश्वास कर रही है. असल बात यह है कि कोई भी सरकार लोकपाल लाना ही नहीं चाहती, जिस से उस का सत्ताकुरसी का खेल चलता रहे, चुनाव जीतने के लिए पार्टियां झूठे आश्वासन देती हैं.
राजनीति मेें बदलाव कैसे होगा?
चरित्रवान लोग राजनीति में आएं, तभी कुछ सुधार हो सकता है. राजनीति में धर्म और जातपांत का प्रभाव भी चुनावी सुधार से रोका जा सकता है, जिस के बाद ही देश संविधान के अनुसार चल सकेगा. हम ने देशभर का दौरा कर के युवाओं को जागरूक किया है. बहुत सारे संगठन हमारे साथ जुड़ रहे हैं. यह काम किसी जादू की छड़ी से होने वाला नहीं है. यह धीरेधीरे संभव होगा. नेताओं की नफरत वाली राजनीति को लोग समझने लगे हैं. आने वाली पीढ़ी के लिए देश को बचाना जरूरी है.
केंद्र में सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार को कैसे देखते हैं?
कोई भी सरकार लोकपाल कानून को लागू नहीं करना चाहती. मोदी सरकार ने लोकपाल बिल को कमजोर किया, जिस की वजह से देश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है. अंगरेजी हुकूमत चली गई पर देश में लोकतंत्र नहीं आ पाया. आज किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है. किसान आत्महत्या कर रहा है, पर उस की बात नहीं सुनी जा रही है. 2013 में लोकपाल नियुक्ति कानून पास हो गया, पर 5 वर्षों के बाद भी उस को लागू नहीं किया जा सका. गोरे अंगरेज तो देश छोड़ कर चले गए पर देश के भ्रष्ट काले लोग यहां हावी हो गए हैं. केंद्र सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर रही है. कालाधन वापस ला कर सभी के खातों में 15-15 लाख रुपए देने की बात कह कर वोट तो ले लिए पर खातों में 15 रुपए भी नहीं आए.
दिल्ली में केजरीवाल सरकार के बारे में आप की क्या राय है?
केजरीवाल क्या काम कर रहे हैं, यह सब देख रहे हैं. मेरी उन से उस समय ही बातचीत बंद हो गई थी जब उन्होंने पार्टी बना कर चुनाव लड़ा था. लोकपाल बिल पर उन्होंने मुझ से कुछ सुझाव मांगे थे. सुझाव भेजने के बाद उस पर क्या हुआ, यह जानकारी नहीं है. जनता के हित में सरकार गिराने की ताकत जनता में होनी चाहिए.
आप ने इन्वैस्टर समिट के बाद उत्तर प्रदेश का दौरा किया, क्या लाभ दिख रहा है?
इन्वैस्टर समिट से बिजनैस करने वालों को लाभ हो सकता है, लेकिन किसानों और आम जनता को कोई लाभ नहीं होने वाला. किसानों को तब तक लाभ नहीं मिलेगा जब तक उन की उपज का सही दाम उन्हें नहीं मिलेगा. अभी किसानों की हालत ‘माल खाए मदारी नाच करे बंदर’ जैसी है. केंद्र सरकार को गरीबों और किसानों की नहीं, उद्योगपतियों की चिंता है. तभी तो देश का करोड़ों रुपया ले कर वे गायब हो रहे हैं. मोदी सरकार बनने के बाद मैं ने 22 पत्र लिखे पर एक का भी जवाब नहीं मिला. हम ने यह भी पूछा कि वे व्यस्तता के कारण जवाब नहीं दे रहे या ईगो के कारण, तो उस का भी जवाब नहीं दिया.
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वैसे तो नवविवाहित जोड़े विवाह के बाद अपनी अलग दुनिया में मग्न होते हैं लेकिन इस के बावजूद दोनों को एकदूसरे को जानने, समझने का पूरा मौका मिलना चाहिए. इस के लिए जरूरी है हनीमून पर जाना. यों तो हनीमून डैस्टिनेशन के लिए कई जगहें हैं लेकिन हनीमून ट्रिप यादगार बन सकता है जब सही जगह और समय का चुनाव किया जाए. तो चलिए हम बताते हैं आप को कुछ खूबसूरत हनीमून डैस्टिनेशंस :
जम्मू
हनीमून प्लान करते वक्त जिस जगह का नाम जेहन में सब से पहले आता है वह जम्मूकश्मीर है. 90 के दशक तक की हिंदी फिल्मों का रोमांस जम्मूकश्मीर का मुहताज हुआ करता था. कभी फिल्मी सितारों से गुलजार रहने वाले जम्मूकश्मीर को क्यों धरती के स्वर्ग के खिताब से नवाजा गया है, यह वहीं जा कर महसूस किया जा सकता है.
जम्मूकश्मीर राज्य की शीतकालीन राजधानी जम्मू है. सालभर यहां देशीविदेशी पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है, जिन में बड़ी तादाद नवविवाहित जोड़ों की रहती है. यह मिथक अब टूट चुका है कि जम्मू गरमी में ही जाना चाहिए, अब तो कड़कड़ाती सर्दी में भी सैलानी जम्मू की सैर करने लगे हैं.
जम्मू शहर देश के दूसरे शहरों जैसा ही है जिस में सभी वर्गों के लोग रहते हैं और धर्मस्थलों की यहां भी भरमार है. लेकिन जब पर्यटक जम्मू शहर से बाहर निकलते हैं तो मानो खुद को एक नई दुनिया में पाते हैं. तवी नदी के किनारे बसे जम्मू के बाहर का प्राकृतिक सौंदर्य, खूबसूरत वादियां, ऊंचीऊंची पहाडि़यां और घाटियों के बीच से बहती झीलें बरबस ही मूड को रोमांटिक बना देती हैं. फूलों से सजी पगडंडियां देख लगता है कि फिल्मी परदे से निकल कर सामने आ खड़ी हुई हैं जिन के इर्दगिर्द की खामोशी प्यार की भाषा बोलती नजर आती है.
तवी नदी के किनारे एक पहाड़ी पर स्थित अमर महल म्यूजियम जम्मू के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है. कभी महल रहे इस म्यूजियम में शाही परिवार के चित्र व अन्य स्मृतिचिह्न संग्रहीत हैं. पहाड़ी चित्रकला से भी दर्शक यहां परिचित होते हैं और पुस्तकालय में रखी दुर्लभ पुस्तकें भी उन का ध्यान अपनी तरफ खींचती हैं.
डोगरा आर्ट गैलरी जम्मू का दूसरा दर्शनीय स्थल है. पहाड़ी कला और चित्रकला से संबंधित सामग्री इस आर्ट गैलरी में संग्रहीत है. बसोहली शैली के आभूषण भी अपनी अलग डिजाइनों के कारण पर्यटकों को भाते हैं.
शहर से 4 किलोमीटर दूर स्थित तवी नदी के किनारे की पहाड़ी पर स्थित बाहू किला जम्मू का सब से पुराना किला है. लगभग 3 हजार साल पहले राजा बाहुलोचन द्वारा बनवाए गए इस किले के नीचे बने बगीचे में प्रेमी युगल एकदूसरे की बांहों में बाहें डाले रोमांस करते नजर आते हैं. यहां से पूरा जम्मू शहर दिखता है.
हनीमून मनाने आए कपल्स की पहली पसंद जम्मू की झीलें हुआ करती हैं. जम्मू से 65 किलोमीटर दूर स्थित मानसर झील एक रोमांटिक जगह है. यहां नौकायन की भी सुविधा है.
मानसर झील पर सुबह आ कर पूरा दिन गुजारा जा सकता है. यदि रात को रुकना चाहें तो यहां हट्स भी हैं और पर्यटन विभाग का बंगला भी है जिस की बुकिंग पहले करा लेना सुविधाजनक रहता है. मानसर झील के नजदीक ही सुरिनसर झील है जिस की प्राकृतिक दृश्यावली भी कम नहीं है.
कब जाएं : यों तो जम्मू साल में कभी भी जाया जा सकता है, लेकिन बरसात में यहां असुविधा होती है, इसलिए इस दौरान जम्मू नहीं जाना चाहिए.
कैसे जाएं : हवाईमार्ग द्वारा जम्मू जाया जा सकता है. प्रमुख एयरलाइंस की उड़ानें यहां के लिए उपलब्ध हैं. रेलमार्ग से जम्मू देश के सभी प्रमुख शहरों से सीधे जुड़ा है. सड़कमार्ग से दिल्ली व अमृतसर से जाया जा सकता है.
कहां ठहरें : जम्मू में ठहरने के लिए हर तरह के होटल उपलब्ध हैं.
क्या खरीदें : जम्मू के बाजार आकर्षक हैं जहां से ड्राइफ्रूट और ऊनी कपड़े खरीदे जा सकते हैं. अधिकांश पर्यटक जम्मू का राजमा, बासमती चावल, चैरी, अखरोट और बादाम जरूर खरीदते हैं.
श्रीनगर
जिस शहर की वजह से जम्मूकश्मीर दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है वह शहर श्रीनगर है, जो जम्मू से 300 किलोमीटर दूर है. जम्मू से श्रीनगर अगर सड़क से जाएं तो समझ आता है कि प्रकृति किस तरह यहां मेहरबान रही है. ठंडी हवा, चारों तरफ बिछी हरियाली और खूबसूरत वादियों को देख कर लगता है कि काश, यहीं बस जाएं.
श्रीनगर को देख कर ही मुगल बादशाहों ने इसे जन्नत कहा था और इसे बनाने व सजानेसंवारने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी. मुगल शैली के बागबगीचों की तो यहां भरमार है. ऐतिहासिक महत्त्व वाले श्रीनगर में सभी जातियों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं जिन की अपनी एक अलग कदकाठी, खूबसूरती और बातचीत का खास लहजा है.
हर दौर के कपल्स का हमेशा से ही एक सपना रहा है कि हनीमून श्रीनगर में मनाएंगे तो इस की वजह भी है. रोमांस के लिए जिस माहौल या आदर्श परिस्थितियों की जरूरत होती है वे श्रीनगर में सहज उपलब्ध हैं. यह कहना गलत नहीं है कि कश्मीर और श्रीनगर हर मौसम में अपना रंग बदलते हैं. फूलों से लदी पगडंडियां दुनिया में अगर कहीं दिखती हैं तो वह श्रीनगर है.
श्रीनगर में दर्शनीय स्थलों की भरमार है. झीलें और बागबगीचे यहां की जान और शान हैं जिन को देखने के लिए पर्यटक दौड़े चले आते हैं. समुद्रतल से 1,730 मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्रीनगर हर दौर में प्रकृतिप्रेमियों को लुभाता रहा है.
न्यू कपल्स को सब से ज्यादा यहां की झीलें लुभाती हैं. इन में से प्रसिद्ध डल झील शहर के बीचोंबीच स्थित है. अब इस झील का दायरा 28 वर्ग किलोमीटर से घट कर 12 किलोमीटर में सिमट कर रह गया है. पर इस का प्राकृतिक दृश्यावली पर कोई फर्क नहीं पड़ा है. डल झील पर कई द्वीप बने हुए हैं. न्यू कपल्स को सब से ज्यादा लुभाती हैं वहां की हाउसबोट जिन में जिंदगी का खास वक्त गुजारने का मजा ही कुछ और है. शिकारे पर बैठ कर झील की सैर करते पर्यटक अपनी सुधबुध खो बैठते हैं.
इस झील का ही एक हिस्सा नगीन झील के नाम से प्रसिद्ध है. इस झील की तुलना उंगली में हीरे की अंगूठी की तरह भी की जाती है. शहर से 8 किलोमीटर दूर इस झील की खूबसूरती बेजोड़ है जिस में अंगूठी के आकार के पेड़ों की भरमार है. नीले पानी वाली नगीन झील में तैराकी और वाटर स्कीइंग की सुविधा भी उपलब्ध है.
श्रीनगर कितना भी घूम लें, जी नहीं भरता. खूबसूरत बगीचों में बैठे और बतियाते कब वक्त गुजर जाता है, इस का पता ही नहीं चलता, यही यहां की विशेषता है कि पर्यटक अपनी तमाम परेशानियां और चिंताएं खुदबखुद भूल जाते हैं.
कब जाएं : श्रीनगर सालभर कभी भी जाया जा सकता है लेकिन ठंड के मौसम में यहां का तापमान शून्य से 2 डिगरी नीचे तक चला जाता है. श्रीनगर आते वक्त गरम कपड़े जरूर साथ लाने चाहिए.
कैसे जाएं : हवाईमार्ग से दिल्ली, चंडीगढ़, अमृतसर, मुंबई से सीधी उड़ानों द्वारा आयाजाया जा सकता है. रेलमार्ग से आने के लिए जम्मू उतर कर सड़क के रास्ते आना उचित रहता है.
कहां ठहरें : श्रीनगर में ठहरने के लिए हर बजट के होटल हैं. न्यू कपल्स आमतौर पर हाउसबोट्स में ठहरना पसंद करते हैं. जम्मूकश्मीर नगर निगम के कौटेज व बंगलों में भी ठहरा जा सकता है.
क्या खरीदें : कश्मीर के शौल सभी पर्यटक खरीदते हैं. इस के अलावा दूसरे ऊनी कपड़ों की भी खरीदारी श्रीनगर में की जा सकती है. यहां की सिल्क की साडि़यां भी प्रसिद्ध हैं. लकड़ी के आइटम भी खरीदे जा सकते हैं.
गुलमर्ग
खूबसूरती के जो नजारे जम्मू से शुरू होते हैं और श्रीनगर में नजर आते हैं वे वहां से 52 किलोमीटर और दूर आ कर गुलमर्ग में पूरे शबाब पर दिखते हैं. गुलमर्ग ऐसी जगह है जिस की तुलना किसी दूसरी जगह से नहीं की जा सकती. जो कपल्स अपने हनीमून को यादगार बनाना चाहते हैं उन के लिए गुलमर्ग वाकई आदर्श पर्यटन स्थल है. समुद्रतट से 2,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुलमर्ग एकदम शांत जगह है.
गुलमर्ग को 1927 के आसपास अंगरेजों ने बसाया था. यहां देश का सब से बड़़ा गोल्फ कोर्स है. अपने शाब्दिकअर्थ फूलों की वादी को चरितार्थ करते इस स्थल की बेशुमार खूबियां हैं. हरी घास मानो यहां बिछी ही रहती है और बर्फ से ढकी पहाडि़यां इस का अतिरिक्त आकर्षण हैं. बारामूला जिले की शान गुलमर्ग ढलान वाले मैदानों के लिए भी जाना जाता है.
सैकड़ों हिंदी फिल्मों की शूटिंग यहां हुई है. फिल्मकार हमेशा इस खूबसूरत जगह को कैमरे में कैद करने को बेताब रहे हैं. फिल्म ‘आप की कसम’ का मशहूर गाना ‘जयजय शिवशंकर कांटा लगे न कंकर…’ राजेश खन्ना और मुमताज पर गुलमर्ग में ही फिल्माया गया था. यहां सेब के बगीचे देखना एक अलग अनुभव है. गुलमर्ग की केसर भी दुनियाभर में मशहूर है. इस ठंडी जगह में जब सर्दी में बर्फबारी होती है तो नजारा वाकई देखने लायक होता है.
बर्फ के खेलों का आनंद लेते सैलानियों को देख कर लगता है कि जिंदगी अगर कहीं है तो बस यही है. स्कीइंग का लुत्फ उठाते न्यू कपल्स यहां हनीमून का सही मानो में आनंद लेते हैं.
गुलमर्ग बेहद साफसुथरा और व्यवस्थित कसबा है. कदमकदम पर फूल, ढलान और हरियाली पर्यटकों को जिंदगीभर याद रहते हैं. सड़क किनारे बनी दुकानों और होटलों पर अकसर भीड़ लगी दिखती है. रोपवे, जिसे स्थानीय भाषा में गंडोला कहा जाता है, से चारों तरफ का मनमोहक नजारा देख जम्मूकश्मीर देखना सार्थक हो जाता है.
खिलनमर्ग गुलमर्ग की फूलों की खूबसूरत घाटी है, जहां बैठ जाएं तो उठने का मन नहीं करता. चीड़ और देवदार के वनों से घिरी अलपायर झील भी रोमांटिक जगह है. निंगलीनगाह गुलमर्ग का प्रसिद्ध पिकनिक स्थल है. अलपायर झील पर घूमने का अलग ही आनंद है. इस झील का पानी जून के मध्य तक बर्फ की शक्ल में जमा रहता है.
गुलमर्ग जाने के लिए सभी मौसम उपयुक्त हैं. नवंबर से ले कर अप्रैल तक यहां खूब बर्फबारी होती है, जिस का लुत्फ उठाने खासतौर से पर्यटक यहां आते हैं. आने के लिए पहले जम्मू, फिर श्रीनगर हो कर रास्ता तय करना पड़ता है. गुलमर्ग में ठहरने के लिए अच्छे होटल उपलब्ध हैं. जब भी गुलमर्ग आएं, गरम कपड़े जरूर साथ रखें और पर्यटन विभाग से मौसम की जानकारी ले कर ही आएं.
सोनमर्ग
रोमांस के लुत्फ के साथसाथ अगर रोमांच का भी शौक पूरा करना हो तो उस के लिए सोनमर्ग से बेहतर जगह शायद ही कोई और हो. श्रीनगर से 70 किलोमीटर दूर स्थित सोनमर्ग, नाम के मुताबिक, सोने का मैदान ही लगता है. फरवरीमार्च में इस जगह की खूबसूरती शबाब पर होती है. ट्रैकिंग के लिए लोकप्रिय सोनमर्ग में बर्फ जब गिरती है तो पूरी वादी सफेद नजर आती है. समुद्रतल से इस की ऊंचाई 2,740 मीटर है.
सोनमर्ग में झीलें भी हैं, पर्वत और दर्रे भी हैं. गटसर, कृष्णसर और गंगाबल झीलें इस के सौंदर्य में चारचांद लगाती हैं. सोनमर्ग से 15 किलोमीटर दूर स्थित गटसर झील बर्फ के पहाड़ों और अल्पाइन फूलों से घिरी हुई है. यह दृश्य देख कर पर्यटक जैसे दूसरी दुनिया में पहुंच जाते हैं. नए जोड़ों को यह जगह बहुत भाती और लुभाती है. कृष्णसर झील समुद्रतट से 3,801 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जिस में दर्रे से हो कर पहुंचा जाता है. यहां पर्यटक मछली पकड़ने का शौक पूरा करते देखे जा सकते हैं. सत्सर झील तक सोनमर्ग से पैदल जाया जा सकता है जो यहां एक और आकर्षण पर्यटकों के लिए है.
सोनमर्ग का एक और आकर्षण निलागर्द है जोकि एक पहाड़ी नदी है. इस नदी का पानी लाल रंग का है.
सोनमर्ग भी अब सालभर जाया जा सकता है. नवंबर से अप्रैल के बीच यहां खूब बर्फबारी होती है जिस का लुत्फ उठाने के लिए खासतौर से पर्यटक आते हैं. आने के लिए श्रीनगर हो कर ही सड़कमार्ग से आना पड़ता है. ठहरने के लिए यहां भी अच्छे होटल मौजूद हैं.
पहलगाम
अनंतनाग जिले का यह कसबा मूलतया एक हिल स्टेशन है जो श्रीनगर से 93 किलोमीटर दूर है. पहलगाम की खूबसूरती किसी सुबूत की मुहताज नहीं. यहां की प्राकृतिक सुंदरता का चित्रण कई फिल्मों में किया गया है. कई फिल्मी हस्तियां छुट्टियां मनाने पहलगाम ही आया करती हैं.
न्यू कपल्स के लिए पहलगाम अब हनीमून मनाने की पसंदीदा जगह बनती जा रही है. जम्मूकश्मीर के सब से खूबसूरत नगरों में शुमार पहलगाम में भी पहाडि़यों और झीलों की भरमार है. केसर की पैदावार के लिए मशहूर इस जगह में कहीं भी चले जाएं, एक खूबसूरत एहसास होता है.
हौर्स राइडिंग, स्कीइंग, ट्रेकिंग और गोल्फ के लिए मशहूर पहलगाम में बर्फबारी के दिनों में नजारा अद्भुत होता है. स्थानीय लोग काफी सीधे हैं और वे पर्यटकों का स्वागत करने को हर वक्त तैयार रहते हैं. समुद्रतल से 2,120 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस जगह पर ठहरने व खानेपीने की खासी सहूलियतें हैं.
सुबह उठ कर कहीं भी चल पड़ें, एक अद्भुत दृश्य पर्यटकों को हैरान करने को हर जगह मौजूद रहता है. घाटियां, हरियाली, फूल और झीलें यहां भी इफरात से हैं. आमतौर पर पर्यटक यहां खगार की सवारी से भ्रमण करना उपयुक्त समझते हैं. एकांत में शांति से कुछ दिन गुजारने के लिए पहलगाम से बेहतर जगह कोई है ही नहीं.
पर्यटक यहां ऊनी कपड़े और केसर खूब खरीदते हैं. पहलगाम में मोलभाव कर ही सामान खरीदना चाहिए. पहलगाम के लोगों की आमदनी का बड़ा जरिया पर्यटक ही हैं, लिहाजा, स्थानीय लोग अनापशनाप भाव बताते हैं. यहां जाने से पहले मौसम का हाल जरूर जान लेना चाहिए.
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