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मेरी पत्नी के एक युवक से अवैध संबंध हैं. इसके कारण वह मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करती है. मैं क्या करूं.

सवाल
मैं विवाहित युवक हूं और एक बच्चे का पिता हूं. मैं अपनी वैवाहिक जिंदगी से बहुत परेशान हूं. मेरी पत्नी ने पहले एक युवक से दोस्ती की और धीरेधीरे उन की घनिष्ठता इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच अवैध संबंध तक बन गए. मुझे  जब पत्नी के इस व्यभिचार के बारे में पता चला तो हमारे बीच पहले काफी लड़ाईझगड़ा हुआ. साथ रहते हुए भी हम दोनों में दूरियां बढ़ने लगीं और एक दिन वह बेटे को मेरे पास छोड़ कर चली गई. अब वह 3 साल के बाद अचानक लौट आई है.

लगता है कि उस का दोस्त उस से पल्ला झाड़ चुका है, इसीलिए वह वापस आ गई है. उस के आने के बाद मैं ने सामान्य रहने का भरसक प्रयास किया, बावजूद इस के वह न तो मुझ से खुल कर बात करती है और न ही शारीरिक संबंध को तवज्जो देती है. एक ही छत के नीचे रहते हुए हम दोनों अजनबियों की तरह हैं. मैं क्या करूं?

जवाब
अब यह तो नहीं कहा जा सकता कि आप की पत्नी को अपने किए पर ग्लानि हो रही होगी और इसीलिए वह सामान्य नहीं हो पा रही. आप उम्मीद करें कि थोड़े वक्त बाद वह स्वयं ही सामान्य व्यवहार करने लगे. यदि ऐसा नहीं होता तो आप किसी मनोचिकित्सक से परामर्श ले सकते हैं. काउंसलिंग से ज्ञात होगा कि पत्नी के मन में क्या है. कानून हाथ में लेना आसान नहीं है, क्योंकि अदालतें ऐसी पत्नी की भी ज्यादा ही सुनती हैं.

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कामुकता का राज और स्त्री की संतुष्टि को कुछ इस तरह समझिए

मेरठ का 30 वर्षीय मनोहर अपने वैवाहिक जीवन से खुश नहीं था, कारण शारीरिक अस्वस्थता उस के यौन संबंध में आड़े आ रही थी. एक वर्ष पहले ही उस की शादी हुई थी. वह पीठ और पैर के जोड़ों के दर्द की वजह से संसर्ग के समय पत्नी के साथ सुखद संबंध बनाने में असहज हो जाता था. सैक्स को ले कर उस के मन में कई तरह की भ्रांतियां थीं.

दूसरी तरफ उस की 24 वर्षीय पत्नी उसे सैक्स के मामले में कमजोर समझ रही थी, क्योंकि वह उस सुखद एहसास को महसूस नहीं कर पाती थी जिस की उस ने कल्पना की थी. उन दोनों ने अलगअलग तरीके से अपनी समस्याएं सुलझाने की कोशिश की. वे दोस्तों की सलाह पर सैक्सोलौजिस्ट के पास गए. उस ने उन से तमाम तरह की पूछताछ के बाद समुचित सलाह दी.

क्या आप जानते हैं कि सैक्स का संबंध जितना दैहिक आकर्षण, दिली तमन्ना, परिवेश और भावनात्मक प्रवाह से है, उतना ही यह विज्ञान से भी जुड़ा हुआ है. हर किसी के मन में उठने वाले कुछ सामान्य सवाल हैं कि किसी पुरुष को पहली नजर में अपने जीवनसाथी के सुंदर चेहरे के अलावा और क्या अच्छा लगता है? रिश्ते को तरोताजा और एकदूसरे के प्रति आकर्षण पैदा करने के लिए क्या तौरतरीके अपनाने चाहिए?

सैक्स जीवन को बेहतर बनाने और रिश्ते में प्यार कायम रखने के लिए क्या कुछ किया जा सकता है? रिश्ते में प्रगाढ़ता कैसे आएगी? हमें कोई बहुत अच्छा क्यों लगने लगता है? किसी की धूर्तता या दीवानगी के पीछे सैक्स की कामुकता के बदलाव का राज क्या है? खुश रहने के लिए कितना सैक्स जरूरी है? सैक्स में फ्लर्ट किस हद तक किया जाना चाहिए?

इन सवालों के अलावा सब से चिंताजनक सवाल अंग के साइज और शीघ्र स्खलन की समस्या को ले कर भी होता है. इन सारे सवालों के पीछे वैज्ञानिक तथ्य छिपा है, जबकि सामान्य पुरुष उन से अनजान बने रह कर भावनात्मक स्तर पर कमजोर बन जाता है या फिर आत्मविश्वास खो बैठता है.

वैज्ञानिक शोध : संसर्ग का संघर्ष

हाल में किए गए वैज्ञानिक शोध के अनुसार, यौन सुख का चरमोत्कर्ष पुरुषों के दिमाग में तय होता है, जबकि महिलाओं के लिए सैक्स के दौरान विविध तरीके माने रखते हैं. चिकित्सा जगत के वैज्ञानिक बताते हैं कि पुरुष गलत तरीके के यौन संबंध को खुद नियंत्रित कर सकता है, जो उस की शारीरिक संरचना पर निर्भर है.

पुरुषों के लिए बेहतर यौनानंद और सहज यौन संबंध उस के यौनांग, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर निर्भर करता है. पुरुषों में यदि रीढ़ की हड्डी की चोट या न्यूरोट्रांसमीटर सुखद यौन प्रक्रिया में बाधक बन सकता है, तो महिलाओं के लिए जननांग की दीवारें इस के लिए काफी हद तक जिम्मेदार होती हैं और कामोत्तेजना में बाधक बन सकती हैं.

शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि एक पुरुष में संसर्ग सुख तक पहुंचने की क्षमता काफी हद तक उस के अपने शरीर की संरचना पर निर्भर है, जिस का नियंत्रण आसानी से नहीं हो पाता है. इस के लिए पुरुषों में मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और शिश्न जिम्मेदार होते हैं.

मैडिसन के इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल और मायो क्सीविक स्थित वैज्ञानिकों ने सैक्सुअल और न्यूरो एनाटोमी से संबंधित संसर्ग के प्रचलित तथ्यों का अध्ययन कर विश्लेषण किया. विश्लेषण के अनुसार,

डा. सीगल बताते हैं, ‘‘पुरुष के अंग के आकार के विपरीत किसी भी स्वस्थ पुरुष में संसर्ग करने की क्षमता काफी हद तक उस के तंत्रिकातंत्र पर निर्भर है. शरीर को नियंत्रित करने वाले तंत्रिकातंत्र और सहानुभूतिक तंत्रिकातंत्र के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए, जो शरीर के भीतर जूझने या स्वच्छंद होने की स्थिति को नियंत्रित करता है.’’

डा. सीगल अपने शोध के आधार पर बताते हैं कि शारीरिक संबंध के दौरान संवेदना मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी द्वारा पहुंचती है और फिर इस के दूसरे छोर को संकेत मिलता है कि आगे क्या करना है. इस आधार पर वैज्ञानिकों ने पाया कि उत्तेजना 2 तथ्यों पर निर्भर है.

एक मनोवैज्ञानिक और दूसरी शारीरिक, जिस में शिश्न की उत्तेजना प्रत्यक्ष तौर पर बनती है.

इन 2 कारणों में से सामान्य मनोवैज्ञानिक तर्क की मान्यता में पूरी सचाई नहीं है. डा. सीगल का कहना है कि रीढ़ की हड्डी की चोट से शिश्न की उत्तेजना में कमी आने से संसर्ग सुख की प्राप्ति प्रभावित हो जाती है. इसी तरह से मस्तिष्क में मनोवैज्ञानिक समस्याओं में अवसाद आदि से तंत्रिका रसायन में बदलाव आने से संसर्ग और अधिक असहज या कष्टप्रद बन जाता है.

स्त्री की यौन तृप्ति

कोई युवती कितनी कामुक या सैक्स के प्रति उन्मादी हो सकती है? इस के लिए बड़ा सवाल यह है कि उसे यौन तृप्ति किस हद तक कितने समय में मिल पाती है? विश्लेषणों के अनुसार, शोधकर्ता वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ऐसे लोगों को चिकित्सकीय सहायता मिल सकती है और वे सुखद यौन संबंध में बाधक बनने वाली बहुचर्चित भ्रांतियों से बच सकते हैं.

इस शोध में यह भी पाया गया है कि युवतियों के लिए यौन तृप्ति का अनुभव कहीं अधिक जटिल समस्या है. इस बारे में पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने माइक्रोस्कोप के जरिए युवतियों के अंग की दीवारों में होने वाले बदलावों और असंगत प्रभाव बनने वाली स्थिति का पता लगाया है.

वैज्ञानिकों ने एमआरआई स्कैन के जरिए महिला के दिमाग में संसर्ग के दौरान की  सक्रियता मालूम कर उत्तेजना की समस्या से जूझने वाले पुरुषों को सुझाव दिया है कि वे अपनी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं. उन्हें सैक्सुअल समस्याओं के निबटारे के लिए डाक्टरी सलाह लेनी चाहिए, न कि नीम हकीम की सलाह या सुनीसुनाई बातों को महत्त्व देना चाहिए. इस अध्ययन को जर्नल औफ क्लीनिकल एनाटौमी में प्रकाशित किया गया है.

महत्त्वपूर्ण है संसर्ग की शैली

डा. सीगल के अनुसार, महिलाओं के लिए संसर्ग के सिलसिले में अपनाई गई पोजिशन महत्त्वपूर्ण है. विभिन्न सैक्सुअल पोजिशंस के संदर्भ में शोधकर्ताओं द्वारा किए गए सर्वेक्षणों में भी पाया गया है कि स्त्री के यौनांग की दीवारों को विभिन्न तरीके से उत्तेजित किया जा सकता है.

आज की भागदौड़भरी जीवनशैली में मानसिक तनाव के साथसाथ शारीरिक अस्वस्थता भी सैक्स जीवन को प्रभावित कर देती है. ऐसे में कोई पुरुष चाहे तो अपनी सैक्स संबंधी समस्याओं को डाक्टरी सलाह के जरिए दूर कर सकता है.

कठिनाई यह है कि ऐसे डाक्टर कम होते हैं और जो प्रचार करते हैं वे दवाएं बेचने के इच्छुक होते हैं, सलाह देने में कम. वैसे, बड़े अस्पतालों में स्किन व वीडी रोग (वैस्कुलर डिजीज) विभाग होता है. अगर कोई युगल किसी सैक्स समस्या से जूझ रहा है तो वह इस विभाग में डाक्टर को दिखा कर सलाह ले सकता है.

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चोरी हुए स्मार्टफोन को खोजने के ये हैं तीन शानदार तरीके

हम अपना फोन काफी संभाल कर रखते हैं. हममें से ज्यादातर लोग का आधे से ज्यादा काम फोन पर ही होता है. स्मार्टफोन में हमारी जानकारी, जैसे- बैंक अकाउंट डिटेल्स, पर्सनल फोटो, वीडियोज, डौक्यूमेंट्स और कौन्टेक्ट नबर्स आदि सेव होते हैं. ऐसे में अगर हमारा फोन चोरी हो जाए तो हमें काफी परेशानी झेलनी पड़ती है और चोरी हुए फोन का मिलना तो लगभग नामुमकिन होता है. लेकिन अब आपका फोन खो जाने या चोरी हो जाने पर वापस मिल सकता है. आप सोच रहे होंगे कि भला ये कैसे मुमकिन है. तो आपको बता दें कि हमारे पास कुछ ऐसी ट्रिक्स हैं, जिनकी मदद से आप अपना फोन ट्रेस कर सकते हैं.

एंटी थेफ्ट अलार्मः  एंटी थेफ्ट अलार्म अपने फोन में डाउनलोड कर एक्टिवेट कर लें. इसके बाद यदि कोई और आपका मोबाइल छूने की कोशिश करेगा, तो मोबाइल में तेज अलार्म बजेगा. इसका मतलब कि किसी भीड़-भाड़ वाले इलाके में कोई फोन चोरी करने की कोशिश करेगा, तो आपको तुरंत पता चल जाएगा.

लुकआउट सिक्योरिटी एंड एंटीवायरसः इस ऐप में गूगल मैप की मदद से लोकेशन का पता लगाया जा सकता है. यदि चोरी के बाद कोई आपका फोन स्विच औफ भी कर दें, तो आपको फोन की आखिरी लोकेशन पता चल जाएगी. इससे आपको अपने फोन को ढूंढने में आसानी हो सकती है.

थीफ ट्रैकरः यह ऐप चोरी हुए फोन को ढूंढने में मददगार है. इसमें एक खास फीचर दिया गया है जिसका इस्तेमाल कर आप चोरी करने वाले व्यक्ति की पूरी जानकारी ढूंढ सकते हैं. ऐसा संभव इसलिए है क्योंकि फोन से छेड़छाड़ होने पर यह फीचर आपको छेड़छाड़ करने वाले की स्वतः फोटो क्लिक करके लोकेशन के साथ मेल भेज देगा.

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दिव्यांका ने ट्रोलर्स की उड़ाई धज्जियां, बोलीं- मुझे अपने सीने पर गर्व है…

‘ये है मोहब्बतें’ की अदाकारा दिव्यांका त्रिपाठी अगर अपने अभिनय से टेलीविजन पर तहलका मचाना जानता हैं, तो वह ये भी बखूबी जानती हैं कि किस तरह से गंदे और भद्दे कमेंट करने वालों से निपटा जाए. हाल ही दिव्यांका ने पति विवेक दहिया के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी. जिसमें उन्होंने नीले रंग का कुर्ता पहना हुआ था. कुछ ही देर के बाद उनके कपड़ों को लेकर ट्रोल किया जाने लगा. लोगों ने उनके कपड़ों को लेकर ना कि केवल भद्दे कमेंट किये बल्कि उनकी बौडी को लेकर काफी अपशब्द भी कहे.

दिव्यांका के लिए कमेंट में लिखा था, ‘तुम्हारे कपड़े हमेशा वल्गर रहते हैं. लगता है कि तुम चेस्ट एरिया पर जानबूझकर टाइट कपड़े पहनती हो. यह बेहद घटिया और फूहड़ लगता है. सुधर जाओ थोड़ा बेशरम.’

इस पर दिव्यांका ने खामोश रहने और कमेंट करने वालों को ब्लौक करने के बजाय मुंह तोड़ जवाब देते हुए कहा, “मुझे अपने सीने पर गर्व है…और किसी भी महिला को इस पर शर्मिंदा नहीं होना चाहिए. भगवान ने हमें किसी उद्देश्य से इस तरह बनाया है. इसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जिस पर शर्म महसूस किया जाए. अच्छी बात है, तुमने इस विषय को उठाया. मै तुम्हें बता दूं कि इंसान ने गर्मी और ठंड से बचने के लिए खुद को ढंकना शुरू किया था न कि तुम्हारी जैसी गंदी सोच के लोगों से, क्योंकि उस समय तुम जैसे लोगों का कोई अस्तित्व नहीं था. लेकिन अब ऐसा करना पड़ेगा…”

दिव्यांका ने इस अभद्र टिप्पणी करने वालों को यही नहीं बख्शा, उन्होंने आगे कहा, “अंजता-एलोरा जाओ और भारतीय भगवानों को प्राकृतिक अंदाज में देखो. हर औरत देवी है और देवियों को उनके कपड़ों से नहीं बल्कि कर्म और ताकत से परिभाषित किया जाता है. इसलिए इज्जत करो!” दिव्यांका के इस जवाब के बाद बाद फौलोअर्स ने उनकी जमकर तारीफ की.

बता दें कि दिव्यांका ने अपने करियर की शुरुआत 2006 में धारावाहिक ‘बनूं मैं तेरी दुल्हन’ से की थी लेकिन शो ज्यादा चर्चित नहीं हो पाया और शो खत्म होने के बाद दिव्यांका को लोग भूल से गए, लेकिन 2013 में शुरू हुए ‘ये है मोहब्बतें’ में इशिता के किरदार से उन्होंने लोगों को अपना दीवाना बना दिया.

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जियो ने मिलाया इस कंपनी से हाथ, अब इन कामों में होगी आपको आसानी

जियो मनी और सोडेक्सो किराने की दुकानों, रेस्तरां और कैफेटेरिया जैसे प्वाइंट्स पर डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देंगे. रिलायंस जियो और सोडेक्सो ने इस साझेदारी की घोषणा कर दी है. जियो और सोडेक्सो मिलकर भारतीयों के लिए एक अच्छा डिजिटल इको सिस्टम बनाने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगे. सोडेस्को अलग अलग कंपनियों में काम करने वाले लोगों को खाने के पास के जरिए फायदा पहुंचाने के मामले में सबसे आगे है.

जियो मनी अब सोडेक्सो मील कार्ड के साथ जुड़ गया है. जिससे अब सोडेक्सो कार्ड यूजर्स डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे. इस साझेदारी की वजह से सोडेक्सो का इस्तेमाल करने वाले सोडेक्सो मर्चेंट्स जैसे किराने की दुकान, कियोस्क, होटल और कैफे अब डिजिटल पेमेंट ले सकेंगे. सोडेक्सो मील पास को जियोमनी ऐप से जोड़ा जा सकता है, जिससे कभी भी, कहीं भी तुरंत भुगतान किया जा सकता है.

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इससे पूरे भारत में जियोमनी के यूजर्स को एक अतिरिक्त डिजिटल लेनदेन विकल्प हासिल होगा. उपभोक्ताओं को अब खाना, कोल्ड ड्रिंक आदि खरीदने के लिए सोडेक्सो का कार्ड रखने की जरुरत खत्म हो जाएगी. वे आसानी से सोडेक्सो मील कार्ड बैलेंस को जियोमनी ऐप में जोड़ सकते हैं और इसका इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं. दोनों ब्रांडों द्वारा पेश की गई सर्विसेज को यूज के लिए जियो और सोडेक्सो एक साथ काम करना जारी रखेंगे.

जियो मनी के बिजनेस हेड, अनिरबन एस मुखर्जी ने कहा कि, “हर भारतीय को डिजिटल टेक्नोलौजी का लाभ मिले और साथ ही वे डिजिटल लाइफ का भरपूर मजा ले सकें इसीलिए जियो और सोडेक्सो ने हाथ मिलाया है. यह साझेदारी भारत में जियोमनी और सोडेक्सो दोनों के यूजर्स के लिए नए डिजिटल लेनदेन का विकल्प होगा. आगे जाकर दोनों ब्रांड सहयोग बढ़ाने और भारत के बढ़ते डिजिटल इको सिस्टम में अपनी पहुंच और उपस्थिति का विस्तार करेंगे.”

सोडेक्सो बेनिफिट्स एंड फायर्ड सर्विसेज इंडिया की सीईओ स्टेफेन मिशेलिन ने कहा कि, “सोडेक्सो में हम सोडेक्सो मील कार्ड का उपयोग करने के नए तरीकों का विस्तार करके यूजर्स के अनुभव को अच्छा करने के लिए लगातार कोशिश करते हैं. हमारा प्रयास हमारे 30 लाख यूजर्स के लिए खुदरा अनुभव को बेहतर बनाना है.” इसे मुंबई में लौन्च किया जा चुका है और उपभोक्ताओं प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है. कुछ ही समय में पूरे देश भर में सोडेक्सो स्वीकार करने वाले वेंडर जियोमनी सौल्युशन को स्वीकार करेंगे. जियोमनी और सोडेक्सो के बीच यह साझेदारी पूरे देश के भुगतान परिदृश्य में एक व्यापक बदलाव लाएगी.

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जीमेल वेब को नया डिजाइन देने की तैयारी में है गूगल

दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली जीमेल वेब सेवा को अब गूगल नये डिजाइन के साथ उतारने की तैयारी कर रहा है. हाल ही में जीमेल ऐप्स में कुछ बदलाव किए गए, लेकिन जीमेल वेब में कोई खास इंटरफेस चेंज नहीं दिखा. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गूगल वेब इंटरफेस को जल्द ही एक नया रूप दिया जाएगा. इसके डिजाइन में बदलाव के साथ यूजर इंटरफेस में भी कुछ बदलाव किये जा सकते हैं. जीमेल वेब में बदलाव के तहत इसमें नए फीचर्स भी जोड़े जाएंगे जो सभी जीमेल प्रयोगकर्ता के लिए होंगे.

गूगल ने वर्ज को दिए एक स्टेटमेंट में कहा है, ‘हम जीमेल में कुछ बड़े अपडेट्स पर काम कर रहे हैं जो अभी ड्राफ्ट फेस में हैं. हमें थोड़े और समय की जरूरत है, इसलिए अभी कुछ शेयर नहीं कर सकते आने वाले समय में आपको ज्यादा जानकारियां मिलेंगी’ रिपोर्ट के मुताबिक गूगल ने वादा किया है की जीमेल वेब यूजर्स को इसमें एक नया, फ्रेश और क्लीन लुक मिलेगा जिसमें स्मार्ट रिप्लाई, स्नूज ईमेल के साथ औफलाइन सपोर्ट जैसे फीचर्स भी शामिल किए जाएंगे.

स्मार्ट रिप्लाई फीचर पहले से ही जीमेल ऐप में मौजूद है. इसमें कस्टम रिप्लाई टेस्क्ट होते हैं और ईमेल के कौन्टेंट के आधार पर खुद से इसके सजेशन मिलते हैं जिसे आप ईमेल के रिप्लाई के तौर पर सेंड कर सकते हैं. बताया जा रहा है कि जीमेल का औफलाइन ऐक्सेस कंप्यूटर के लिए होगा जिसके तहत ईमेल को कंप्यूटर में औफलाइन स्टोर कर सकेंगे.

हालांकि, गूगल ने अभी पूरी तरह से यह स्पष्ट नहीं किया है कि जीमेल का नया डिजाइन किस तरह का होगा, लेकिन उम्मीद है कि नये वेब डिजाइन को मोबाइल ऐप के तर्ज पर बदला जाएगा. गौरतलब है कि गूगल ने 2014 में Inbox ऐप को पूरी तरह से नया डिजाइन दिया था.

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सिम कार्ड वाला लैपटौप लाने की तैयारी में जुटा जियो

टेलीकौम इंडस्ट्री में धमाल मचाने के बाद अब रिलायंस जियो एक और बड़ा धमाल करने जा रही है. अब कंपनी की तैयारी सिम कार्ड वाला लैपटौप लौन्च करने की है. दरअसल, कंपनी अपना ऐवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) बढ़ाने की कोशिश कर रही है. उम्मीद है कि सिम कार्ड वाले लैपटौप से जियो को अपना ARPU बढ़ाने में मदद मिलेगी. रिलायंस जियो ने पिछले साल ही अपना 4जी फीचर फोन लौन्च किया था. जियो के लौन्च से ही रिलायंस को तीसरी तिमाही में 500 करोड़ का मुनाफा हुआ था.

क्वालकौम के साथ बनाएगी लैपटौप

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी जियो अमेरिका की बड़ी चिप निर्माता कंपनी क्वालकौम के साथ बातचीत कर रही है. रिलायंस जियो के ये लैपटौप विंडोज 10 औपरेटिंग सिस्टम पर चलेंगे और भारतीय बाजार के लिए इन्हें बिल्ट-इन सेल्युलर कनेक्शन के साथ लौन्च किया जाएगा. क्वालकौम पहले ही 4जी फीचर फोन के लिए जियो और रिलायंस रिटेल के साथ काम कर रही है.

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सेल्युलर कनेक्टिविटी मिलेगी

क्वालकौम टेक्नौलजीज के प्रौडक्ट मैनेजमेंट, सीनियर डायरेक्टर Miguel Nunes ने एक खबर के माध्यम से बताया कि, ‘हम जियो के साथ बातचीत कर रहे हैं. वो हमसे डिवाइस लेकर इसे डेटा और कौन्टेंट के साथ जोड़ सकते हैं.’ इसके अलावा, चिपनिर्माता Internet of Things (IoT) ब्रैंड स्मार्ट्रोन के साथ सेल्युलर कनेक्टिविटी वाले स्नैपड्रैगन 835 वाले लैपटौप लाने पर भी बात कर रही है. स्मार्ट्रोन ने इस खबर की पुष्टि कर दी है.

दुनिया भर में टेक्नोलौजी की मांग

क्वालकौम पहले ही दुनिया की दिग्गज कंपनियां एचपी, आसुस और लेनोवो जैसे लैपटौप बनाने वाली कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है. इसके अलावा दुनिया के 14 बड़े औपरेटर्स ने भी इस नई पहल के साथ जुड़ने में रुचि दिखाई है. इसमें वेरिजोन, AT&T और स्प्रिन्ट्स जैसी कंपनियां शामिल हैं. इसके अलावा जर्मनी, इटली, यूके, फ्रांस और औस्ट्रेलिया जैसे देशों के औपरेटर भी इस तकनीक को चाहते हैं.

जियो ने नहीं की पुष्टि

हालांकि, जियो ने अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं की है. आपको बता दें, जियो पहले ही देशभर में रिलायंस रिटेल के जरिए वाईफाई डौंगल्स, लाइफ स्मार्टफोन्स और 4जी फीचर फोन बेचती है. काउंटरपौइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर नील शाह के मुताबिक, सिम कार्ड वाले लैपटौप से औपरेटर्स को ARPU बढ़ाने में मदद मिलेगी. काउंटरपौइंट के डेटा के मुताबिक, भारत में करीब पचास लाख लैपटौप हर साल बेचे जाते हैं. इनमें से अधिकतर को होम या पब्लिक वाई-फाई के जरिए कनेक्ट किया जाता है.

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जानें क्यों सुरक्षित करें अपने शिशु की गर्भनाल

शिशु की गर्भनाल को कैसे सुरक्षित करें और क्यों. यह सवाल आजकल हर तरफ पूछा जाता है. कुछ को इसका जवाब मिलता है कुछ को नहीं. तो आखिर क्या है ये गर्भनाल और क्या हैं गर्भनाल बैंक. सरल शब्दों में, यह एक लचीली, ट्यूब जैसी संरचना है जो मां को गर्भस्थ शिशु से जोड़ती है. जिसके द्वारा मां के रक्त से शिशु को आपूर्ति होती है .

आपके शिशु की गर्भनाल स्टेम सेल का समृद्ध स्रोत है जो कई बीमारियों का इलाज कर सकती हैं. शिशु के जन्म लेते ही इन स्टेम कोशिकाओं को संरक्षित करने से भविष्य में इनका उपयोग कर अपने बच्चे और परिवार को गंभीर बिमारियों से सुरक्षा प्रदान की जा सकती है.

शिशु के जन्म लेते ही इस गर्भनाल के रक्त को सावधानी से संरक्षित कर लिया जाता है| जिसके लिए ब्लड बैंक की तरह ही गर्भनाल बैंक होते हैं. कुछ मूल्य देकर आप अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए इसे सरंक्षित कर सकते हैं, जिससे भविष्य में होने वाली गंभीर बिमारियों से लड़ने में ये आपकी सहायता करेगा.

गर्भनाल में ऑक्सीजन युक्त रक्त और पोषक तत्व पेट के माध्यम से गर्भ को जाता है . यह भ्रूण से प्लेसेंटा तक डीओक्सेनेटेड रक्त और अपशिष्ट उत्पादों को भी ले जाता है. जन्म के तुरंत बाद इसे शिशु के शरीर से काट के हटा दिया जाता है| गर्भनाल प्रेगनेंसी के पांचवे हफ्ते में अस्तित्व में आती है और यह 20 इंच तक लम्बी हो सकती है .

संरचना: चिकनी मांसपेशियों की एक बाहरी परत, और एक आंतरिक परत जिसमें व्हार्टन जेली नामक एक जिलेटिनस तरल पदार्थ होते हैं. इस पदार्थ के भीतर आमतौर पर एक शिरा और दो धमनियां होती हैं . शिरा ऑक्सीजन और पोषक तत्व युक्त रक्त को प्लेसेंटा से भ्रूण तक ले जाती है, और धमनियों में भ्रूण से डीओक्सीजनित और पोषक तत्व-रहित रक्त दूर होता है.

नाभिरज्जु रक्त या गर्भनाल रक्त का महत्व :

  • गर्भनाल रक्त शिशु के जन्म के बाद गर्भनाल में बचा अवशिष्ट रक्त होता है. यह रक्त एक प्रकार की स्टेम कोशिकाओं में समृद्ध होता है जो कि थैलेसीमिया, ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, मायलोमा सहित 80 से अधिक रक्त संबंधित बीमारियों का इलाज कर सकते हैं.
  • पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में 30,000 से अधिक प्रत्यारोपण में से अधिक में गर्भनाल रक्त स्टेम सेल का इस्तेमाल किया गया है.

नाभि गर्भनाल रक्त स्टेम कोशिकाओं का लाभ:

  • प्रत्यारोपण के दौरान, गर्भनाल रक्त स्टेम कोशिकाओं के अस्वीकृति होने का जोखिम ना के बराबर है.
  • गर्भनाल रक्त स्टेम सेल immunologically अपरिपक्व हैं और इस प्रकार अन्य स्टेम कोशिकाओं की तुलना में इनके रोगी के शरीर से आसानी से मिल जाने की सम्भावना अधिक होती है .
  • अन्य स्रोतों से स्टेम कोशिकाओं के लिए 6/6 मैच की आवश्यकता होती है, जबकि एक 4/6 मैच गर्भनाल रक्त स्टेम कोशिकाओं के उपयोग के लिए पर्याप्त होता है और अपनी इसी विशिष्टता के कारण गर्भनाल रक्त स्टेम सेल शिशु के भाई बहनों के उपचार के लिए भी उपयुक्त साबित हो सकता है.
  • वयस्क स्टेम कोशिकाओं की तुलना में, नाभि गर्भनाल रक्त स्टेम कोशिका को भ्रूण स्टेम कोशिकाओं की तरह प्रयोग करना आसान होता है, जिससे उनकी पुनर्योजी क्षमता बढ़ जाती है.

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अपराधियों के बुलंद हौंसले : कोर्ट रूम में क्यों हुई गैंगवार

17 जनवरी, 2018 का दिन था. दोपहर के करीब पौने एक बजे का समय रहा होगा. अजय जैतपुरा अपने कुछ साथियों के साथ राजस्थान के चुरू जिले के सादुलपुर शहर की मुंसिफ अदालत में अपनी तारीख पर आया था. उस दिन जज साहब नहीं आए थे. उन के न आने की वजह से पेशकार मोहर सिंह राठौर ही पेशी पर आने वालों को अगली तारीख दे रहे थे.

अजय जैतपुरा भी अपने वकील के साथ पेशकार के सामने  खड़ा था. उस के वकील रतनलाल प्रजापति ने पेशकार से अगली तारीख मांगी. पेशकार ने अजय जैतपुरा की फाइल निकाली. वह फाइल के पन्ने पलट ही रहे थे, तभी 4-5 युवक अदालत के कमरे में आए. पेशकार ने उन पर उड़ती हुई सी एक नजर डाली. तभी वे युवक अचानक अंधाधुंध फायरिंग करने लगे.

कोर्ट रूम में फायरिंग होने से भगदड़ मच गई. फायरिंग होते देख वह भाग कर बगल में बने जज साहब के चैंबर में घुस गए और दरवाजा बंद कर लिया.

जब फायरिंग की आवाज बंद हो गई तो कोर्टरूम में शोर होने लगा. पेशकार को जब यह यकीन हो गया कि बदमाश जा चुके हैं तो वह जज साहब के चैंबर का दरवाजा खोल कर कोर्ट रूम में आए. कोर्ट रूम का दृश्य देख कर उन की आंखें फटी रह गईं. अजय जैतपुरा लहूलुहान पड़ा था. उस के साथ आए वकील रतनलाल प्रजापति और 2 अन्य लोग प्रदीप व संदीप भी घायल पड़े थे. चारों के गोलियां लगी थीं.

क्रिमिनल ने क्रिमिनल को बनाया निशाना

जिन 4 लोगों को गोलियां लगी थीं, उन में से अजय की हालत सब से ज्यादा गंभीर थी. सभी घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया. हालत गंभीर होने की वजह से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हरियाणा में हिसार के अस्पताल रैफर कर दिया गया.

अस्पताल पहुंचने पर डाक्टरों ने अजय जैतपुरा को मृत घोषित कर दिया. चूंकि यह पुलिस केस था, इसलिए पोस्टमार्टम के लिए उस का शव हिसार से सादुलपुर भेज दिया गया. बाकी तीनों घायलों को आईसीयू में भरती कर के इलाज शुरू कर दिया गया.

अजय एक हार्डकोर अपराधी था. 12 दिन पहले ही वह जमानत पर जेल से छूटा था. उस के खिलाफ जघन्य अपराधों के 40 से ज्यादा मामले चल रहे थे. अजय ने 23 सितंबर, 2015 को बैरासर गांव में हमीरवास थाने के थानेदार व सिपाहियों को अपनी गाड़ी से कुचलने का प्रयास किया था.

सादुलपुर के अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश की अदालत ने अजय को इस मामले में 14 नवंबर, 2017 को 7 साल की सजा सुनाई थी. इसी साल 5 जनवरी को ही हाईकोर्ट से उस की जमानत हुई थी. इस के 12 दिन बाद ही उस की हत्या हो गई थी.

हरियाणा के अनिल जाट गैंग ने 2 दिन पहले ही अजय जैतपुरा को धमकी दी थी. दरअसल, हरियाणा के 2 लाख रुपए के इनामी बदमाश अनिल जाट को हरियाणा पुलिस ने 25 जून, 2015 को एनकाउंटर में मार गिराया था. यह एनकाउंटर हरियाणा के ईशरवाल गांव में हुआ था.

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अनिल जाट के गिरोह के सदस्यों को शक था कि उन के बौस का एनकाउंटर कराने में अजय जैतपुरा और चूरू जिले के थाना राजगढ़ के सिपाही नरेंद्र का हाथ था. अजय ने ही फोन कर के अनिल को बुलाया था. उस की मुखबिरी पर ही पुलिस ने अनिल को घेर कर मार दिया.

10 हजार रुपए के इनामी बदमाश अजय जैतपुरा को सादुलपुर के तत्कालीन थानाप्रभारी ने अपनी टीम के साथ 12 फरवरी, 2016 को जयपुर के जवाहर सर्किल से गिरफ्तार किया था. वह हमीरवास के थानेदार और सिपाहियों को गाड़ी से कुचलने की कोशिश करने के बाद फरार हो गया था. तब 23 अक्तूबर, 2015 को बीकानेर के तत्कालीन आईजी ने उस पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था.

कहा जाता है कि सन 2006 में मारपीट के मामले में नामजद होने के बाद अजय अपराध की दलदल में फंसता चला गया. इस के बाद उस ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. वह अपराध की दुनिया में अपना नाम कमाने के लिए एक के बाद एक अपराध करता चला गया. सन 2007 में उस की हिस्ट्रीशीट खुली थी.

चुरू जिले के हमीरवास थाना इलाके के गांव जैतपुरा के रहने वाले साधारण परिवार के विद्याधर जाट का बेटा अजय जैतपुरा 2 भाइयों में बड़ा था. उस के छोटे भाई का नाम विजय जैतपुरा है. शादीशुदा अजय का एक बेटा भी है.

कोर्ट रूम में अंधाधुंध गोलीबारी कर के हार्डकोर अपराधी की हत्या करने की वारदात से चुरू जिला मुख्यालय से ले कर जयपुर तक हड़कंप मच गया था. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए.

पुलिस ने खोजबीन में लगाया पूरा जोर

लोगों से पूछताछ में सामने आया कि हमलावरों के दोनों हाथों में पिस्टल थीं. कोर्ट रूम में फायरिंग के बाद वे हवाई फायर करते हुए मंडी की तरफ के गेट से निकल कर भाग गए.

फायरिंग से लोगों में दहशत फैल गई. लोगों ने पुलिस को बताया कि हमलावरों ने करीब 50 फायर किए थे. भागते समय उन्होंने अदालत परिसर में खड़ी अजय जैतपुरा की स्कौर्पियो गाड़ी पर भी गोलियां चलाई थीं.

पुलिस ने कोर्ट परिसर से एक दरजन से ज्यादा कारतूस के खोखे बरामद किए. ये सभी कारतूस 9 एमएम के थे. मौके पर एक जिंदा कारतूस और एक मैगजीन भी मिली.

पुलिस ने हमलावरों का पता लगाने के लिए अदालत परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. थानाप्रभारी भगवान सहाय मीणा ने हिसार जा कर घायलों के बयान लिए.

फायरिंग में घायल हुए जैतपुरा गांव के प्रदीप कुमार स्वामी ने पुलिस को बताया कि उस की और अजय की अदालत में पेशी थी. वे लोग अपने साथियों के साथ स्कौर्पियो व फार्च्युनर गाड़ी से आए थे.

मुंसिफ न्यायालय में जब वे पेशकार के पास खड़े थे, उसी दौरान संपत नेहरा, मिंटू मोडासिया, राजेश, प्रवीण, अक्षय, विपिन, कुलदीप, नवीन, संदीप आदि अपने हाथों में पिस्टल ले कर कोर्ट रूम में घुस आए और उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. इस अप्रत्याशित हमले में उस के अलावा अजय जैतपुरा, संदीप गुर्जर व वकील रतन प्रजापति को गोली लगी. बाद में हमलावर हवाई फायर करते हुए भाग गए.

अदालत में मौकामुआयना करने पहुंचे एसपी राहुल बारहठ के समक्ष वकीलों ने वारदात पर आक्रोश जताते हुए अदालत परिसर में पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने और पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की.

वकीलों ने एसपी को बताया कि घटना के दौरान अदालत में चालानी गार्ड मौजूद थे, लेकिन वे निहत्थे होने के कारण हमलावरों का मुकाबला नहीं कर सके.

अजय जैतपुरा की हत्या के दूसरे दिन सादुलपुर के सरकारी अस्पताल में 5 डाक्टरों के मैडिकल बोर्ड ने उस के शव का पोस्टमार्टम किया. पोस्टमार्टम में पता चला कि अजय के शरीर में कुल 7 गोलियां लगी थीं. इन में 5 गोलियां उस के शरीर के आरपार निकल गई थीं और 2 गोलियां उस के शरीर में ही फंसी हुई मिलीं.

इस से पहले अजय के परिजनों ने उस के शव का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया था. बाद में एसपी राहुल बारहठ को 6 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन दे कर पोस्टमार्टम करवाने पर राजी हुए.

इस में अजय के परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक मदद, उस की पत्नी को सरकारी नौकरी व भाई विजय को शस्त्र लाइसैंस, अजय के परिवार और उस के साथी प्रदीप जांदू के घर पर सुरक्षा गार्ड मुहैया कराने, अजय की हत्या की जांच पुलिस के स्पैशल औपरेशन ग्रुप से कराने तथा मामले के सभी गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग शामिल थी. एसपी ने इन मांगों पर यथासंभव काररवाई करने का आश्वासन दिया.

पोस्टमार्टम के बाद अजय का शव उस के घर वालों को सौंप दिया गया. वे लोग शव को जैतपुरा गांव की ढाणी ले गए. तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए एसपी ने शव के साथ राजगढ़ के थानाप्रभारी को भारी पुलिस बल के साथ जैतपुरा भेज दिया, जिस की मौजूदगी में अजय का अंतिम संस्कार किया गया.

वकील भी उतरे हड़ताल पर

दूसरी ओर सादुलपुर के वकीलों ने अदालत परिसर में घुस कर गोलीबारी करने और अजय के साथ वकील रतनलाल प्रजापति को गोली लगने के विरोध में मिनी सचिवालय परिसर में अनिश्चितकालीन हड़तान शुरू कर दी.

वकीलों का कहना था कि जब अदालत परिसर में ही वकील सुरक्षित नहीं हैं तो आम लोगों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है. इस गोलीबारी के विरोध में चुरू जिला मुख्यालय और कई अन्य शहरों में भी वकीलों ने न्यायिक कार्य स्थगित रखा.

पुलिस की जांच में सामने आया कि अजय की हत्या करने में पंजाब के वांटेड गैंगस्टर संपत नेहरा का हाथ था. चुरू जिले के कालोड़ी गांव के रहने वाले रामचंद्र का बेटा संपत नेहरा पंजाब के कुख्यात लारेंस बिश्नोई से जुड़ा हुआ था. उसे लारेंस का दाहिना हाथ माना जाता था.

लारेंस आजकल राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद है. जेल में रहते हुए वह राजस्थान और पंजाब में कई बड़ी वारदातें करवा चुका है. लारेंस और संपत का मकसद एनकाउंटर में आनंदपाल की मौत के बाद राजस्थान में अपना वर्चस्व कायम करना था.

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वकीलों के आंदोलन से पुलिस पर आरोपियों को गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ रहा था, इसलिए एसपी राहुल बारहठ ने अभियुक्तों की तलाश में कई टीमें विभिन्न जगहों पर भेजीं. राजस्थान पुलिस ने इस मामले में हरियाणा पुलिस की मदद ली.

हरियाणा पुलिस की स्पैशल टास्क फोर्स ने सादुलपुर पहुंच कर पूरे मामले की जानकारी ली. बीकानेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक विपिन पांडेय भी दूसरे दिन सादुलपुर आए. उन्होंने न्यायिक अधिकारियों व एसपी के साथ मिल कर वकीलों से भी बात की.

आईजी ने वकीलों को आश्वासन दिया कि कोर्ट परिसर में सशस्त्र गार्ड तैनात किए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अजय जैतपुरा के घर पर भी सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएंगे.

तीसरे दिन भी कई जगह दबिश देने के बावजूद पुलिस को अजय के हत्यारों का सुराग नहीं लगा. इस के बाद चुरू के एसपी ने नामजद 9 आरोपियों में से हरेक पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया.

20 जनवरी को सादुलपुर में बार एसोसिएशन के आह्वान पर वकीलों ने मौन जुलूस निकाला. उन्होंने उपजिला कलेक्टर को ज्ञापन दे कर न्यायालय परिसर को संवेदनशील घोषित करने, घायल वकील रतनलाल प्रजापति को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने, अदालत परिसर में पुलिस चौकी स्थापित करने आदि की मांग की.

पूर्व मंत्री नटवर सिंह की निकली कार

फायरिंग की घटना के पांचवें दिन 21 जनवरी को पुलिस ने हमलावरों की फार्च्युनर गाड़ी हरियाणा में बरामद कर ली. हमलावर इस गाड़ी से सादुलपुर आए थे और इसी गाड़ी से भागे थे. बदमाश इस गाड़ी को हरियाणा के मौजा लाडावास एवं काकडोली के बीच रोही में छोड़ कर भाग गए थे.

जांच में पता चला कि यह गाड़ी पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री नटवर सिंह की है. 25 दिसंबर, 2017 की शाम को यह गाड़ी उन के चालक से गन पौइंट पर गुरुग्राम के सुशांत लोक इलाके से लूटी गई थी. इस गाड़ी को उन का विधायक बेटा जगत सिंह रखता था.

चालक सेवा सिंह जगत सिंह के यहां पिछले 15 सालों से नौकरी कर रहा है. 25 दिसंबर की शाम को सेवा सिंह व माली रामप्रसाद इस गाड़ी से गुरुग्राम के सुशांत लोक गोल्फ चौक गए थे. इसी दौरान लाल रंग की बोलेरो में सवार 2 युवकों ने गन पौइंट पर उन से मारपीट कर के गाड़ी छीन ली थी. इस की रिपोर्ट सुशांत लोक थाने में दर्ज थी.

24 जनवरी को जिला एवं सैशन जज योगेंद्र पुरोहित सादुलपुर पहुंचे. उन्होंने पिछले 7 दिनों से हड़ताल, धरना व अनशन कर रहे वकीलों की बातें सुनीं. जिला जज ने कहा कि उन्होंने इस घटना को गंभीरता से लिया है. वे पूरी सुरक्षाव्यवस्था को चाकचौबंद करवाने में लगे हैं. फायरिंग में घायल हुए एडवोकेट रतनलाल प्रजापति को पीडि़त पक्षकार स्कीम के तहत अधिकतम राशि दिलवाई जाएगी.

आखिर पुलिस की कोशिश रंग लाई

आखिर 29 जनवरी को पुलिस को इस मामले में नामजद आरोपी संदीप कुमार जाट को गिरफ्तार करने में कामयाबी मिली. वह हरियाणा के लोहारू थानाक्षेत्र के गांव सिंघाणी का रहने वाला था. संदीप के खिलाफ बहल, पिलानी सहित कई अन्य थानों में अनेक मामले दर्ज थे. वह हरियाणा में हुए जाट आंदोलन का भी आरोपी था. उसे हरियाणा की एक अदालत ने भगोड़ा घोषित किया था. संदीप अजय जैतपुरा हत्याकांड में नामजद आरोपी मिंटू मोडासिया का साथी था.

संदीप ने बताया कि सादुलपुर में अजय जैतपुरा की हत्या के बाद सभी आरोपी हरियाणा चले गए और वहां से अलगअलग हो गए. संदीप इस वारदात के बाद बेंगलुरु चला गया था. वह इस से पहले बेंगलुरु में काम कर चुका था.

संदीप हवाईजहाज से बेंगलुरु से दिल्ली आ कर अपने साथी प्रवीण व राजेश के गांव कैर की ढाणी जा रहा था, तभी पुलिस ने उसे रास्ते में धर दबोचा था.

पुलिस की जांच में इस मामले में शार्पशूटर अंकित भादू का नाम और सामने आया. पंजाब के शेरावाला बहाववाला, फाजिल्का निवासी अंकित भादू पर 31 जनवरी, 2018 को चुरू एसपी ने 5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया. अजय की हत्या के मुख्य आरोपी संपत नेहरा पर 1 फरवरी को बीकानेर आईजी ने 10 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया. कथा लिखे जाने तक अन्य आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े थे.

926 करोड़ की डकैती, जो हो नहीं पाई

पुलिस कांस्टेबल सीताराम की जयपुर की सी स्कीम के रमेश मार्ग स्थित एक्सिस बैंक की चेस्ट ब्रांच में ड्यूटी थी. 5 फरवरी की रात करीब 2 बजे वह बैंक की चेस्ट ब्रांच पर पहुंच गया. सीताराम जब पहुंचा तो बैंक का निजी सुरक्षा गार्ड प्रमोद मेनगेट पर तैनात था. सीताराम को आया देख कर प्रमोद ने उसे नमस्कार किया. सीताराम ने भी उस के अभिवादन का जवाब देते हुए पूछा, ‘‘प्रमोदजी, बैंक के अंदर आज ड्यूटी पर कौनकौन हैं?’’

कड़ाके की ठंड में रात में बैंक के बाहर ड्यूटी दे रहे प्रमोद ने जवाब में कहा, ‘‘साहब, रतिराम और मानसिंह ड्यूटी पर हैं.’’

‘‘ठीक है प्रमोदजी, उन दोनों से मेरी अच्छी पटरी बैठती है.’’ सीताराम ने अपनी टोपी सिर पर लगाते हुए कहा, ‘‘दोनों से बात करते हुए पता ही नहीं लगता कि कब रात गुजर गई.’’

कह कर कांस्टेबल सीताराम बैंक के अंदर जाने लगा, तभी जैसे उसे कुछ याद आया. उस ने पलट कर प्रमोद से कहा, ‘‘भैयाजी, ठंड ज्यादा पड़ रही है. रात का समय है. संभल कर होशियारी से ड्यूटी करना.’’

सीताराम की इस बात पर प्रमोद ने हंसते हुए कहा, ‘‘भाईसाहब, आप देखते ही हो कि मैं अपनी ड्यूटी पर किस तरह मुस्तैद रहता हूं.’’

प्रमोद की बात सुन सीताराम हंसते हुए अंदर बैंक में चला गया.

सीताराम ने बैंक के अंदर पहुंच कर देखा तो उस के साथी पुलिसकर्मी रतिराम और मानसिंह रेस्टहाउस में थे. सीताराम ने अपनी बंदूक संभाली और ड्यूटी पर खड़ा हो गया.

सीताराम को बैंक के अंदर आए हुए करीब आधा घंटा ही हुआ होगा कि उस ने बैंक के बाहर मेनगेट से किसी के कूद कर आने और कुछ टूटने जैसी आवाज सुनी. सीताराम चौंकन्ना हो गया. वह बैंक के अंदर बनी खिड़की से मुंह बाहर निकाल कर चिल्लाया, ‘‘कौन है?’’

सीताराम के चिल्लाने पर जवाब में कोई आवाज नहीं आई तो उस ने बाहर झांक कर देखा. उसे 4-5 लोग नजर आए. रात करीब ढाई बजे बैंक के अंदर लोगों को देख कर सीताराम एक बार तो घबरा गया, लेकिन तुरंत ही उस ने खुद को संभाला और हिम्मत से काम लेते हुए बंदूक ले कर थोड़ा बाहर तक आया.

बाहर देखा तो उसे 10 से भी ज्यादा लोग नजर आए. उन के हाथों में हथियार थे. किसी ने रूमाल से तो किसी ने मंकी कैप से और किसी ने मफलर से चेहरे ढंक रखे थे. इन में से 4-5 लोग बैंक का मेनगेट फांद कर अंदर आ गए थे. इन्होंने बैंक की बिल्डिंग का चैनल गेट भी खोल लिया था.

इतने सारे हथियारबंद लोगों को देख कर सीताराम समझ गया कि उन लोगों के इरादे ठीक नहीं हैं. वे बदमाश हैं और बैंक लूटने आए हैं. सीताराम ने इधरउधर देखा कि बैंक का गार्ड प्रमोद कहीं नजर आ जाए, लेकिन उसे वह कहीं नजर नहीं आया. सीताराम को लगा कि इन बदमाशों को नहीं रोका गया तो ये लोग बैंक लूट ले जाएंगे और हो सकता है किसी को मार भी डालें.

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सीताराम का समय पर लिया गया निर्णय सही साबित हुआ

सीताराम ने एक पल सोचा कि अंदर रेस्टहाउस से अपने साथी पुलिसकर्मियों रतिराम व मानसिंह को बुलाने जाए या नहीं. इतना समय नहीं था. अगर वह साथी पुलिसकर्मियों को बुलाने जाता तो हो सकता था तब तक बदमाश बैंक के अंदर चेस्टरूम तक पहुंच जाते. सीताराम ने तुरंत फैसला लिया. उस ने बदमाशों को ललकारा और अपनी बंदूक से हवाई फायर कर दिया.

फायर होते ही बदमाश हड़बड़ा गए और तेजी से मेनगेट फांद कर वापस भागने लगे. उन के साथी जो बैंक के बाहर खड़े थे, वे भी फटाफट वहां खड़ी गाड़ी में बैठ गए. इस के बाद सभी बदमाश गाड़ी से भाग गए.

बदमाशों के भागने पर सीताराम बैंक की बिल्डिंग से बाहर निकला तो देखा बाहर ड्यूटी पर तैनात बैंक के गार्ड प्रमोद के हाथपैर बंधे हुए थे. सीताराम ने उस के हाथपैर खोले. प्रमोद  बेहद घबराया हुआ था. वह सीताराम से लिपट कर बोला, ‘‘भाईसाहब, आज तो आप ने हमारी जान बचा ली वरना वे बदमाश हमें मार सकते थे.’’

सीताराम ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा कि चिंता मत करो, जो बदमाश आए थे, वे भाग गए हैं. तब तक हवाई फायर की आवाज सुन कर बैंक के रेस्टहाउस से पुलिसकर्मी रतिराम व मानसिंह भी वहां आ गए.

यह सारा घटनाक्रम मुश्किल से 3 मिनट में हो गया था. कांस्टेबल सीताराम ने सब से पहले फोन कर के पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी. सूचना देने के 5-7 मिनट में ही पुलिस गश्ती दल बैंक के बाहर पहुंच गया.

पुलिस के गश्ती दल ने बैंक के निजी सुरक्षा गार्ड प्रमोद कुमार से पूछताछ की. करौली के रहने वाले प्रमोद ने बताया कि एक्सिस बैंक प्रशासन ने उसे बाहरी हिस्से में सुरक्षा की जिम्मेदारी दे रखी है.

प्रमोद ने पुलिस को बताया कि रात करीब ढाई बजे वह बैंक के बाहरी हिस्से में राउंड ले रहा था. जब वह पीछे की ओर चैकिंग करने गया था, तभी बैंक के आगे वाले हिस्से के गेट से किसी के कूदने की आवाज आई. इस पर वह मेनगेट की तरफ आया तो देखा कि 2 युवकों ने मुंह पर नकाब पहना हुआ था और उन के हाथों में पिस्तौलें थीं.

मैं उन्हें रोक ही रहा था कि 3 और युवक मेनगेट से बैंक के अंदर आ गए. उन लोगों ने पिस्तौल कनपटी पर लगा कर मुझे पकड़ कर नीचे गिरा दिया. मुझ से चाबी छीन ली, उसी चाबी से एक युवक ने चेस्ट ब्रांच के गेट से पहले वाले चैनल गेट का ताला खोल लिया. एक युवक ने मेरा मुंह बंद कर दिया और 2 युवक मेरे ऊपर बैठ गए. बाकी बचे एक युवक ने मेरे हाथ बांध दिए.

वे मेरे पैर बांध रहे थे, तभी बैंक के अंदर से सीताराम के चिल्लाने की आवाज आई. इस पर बदमाश घबरा गए. इस के कुछ सैकेंड बाद ही गोली चलने की आवाज सुनाई दी. गोली चलने की आवाज सुन कर सभी बदमाश बैंक के गेट को फांद कर बाहर भाग गए. प्रमोद ने बताया कि जो बदमाश बैंक के अंदर घुसे थे, उन्होंने आपस में कोई बात नहीं की थी. फायरिंग की आवाज सुन कर सिर्फ इतना कहा कि भागो यहां से. इस के बाद सीताराम ने आ कर मुझे संभाला और पुलिस को सूचना दी.

926 करोड़ रुपए थे लुटेरों के निशाने पर

रात को ही एक्सिस बैंक के अफसरों को मौके पर बुलाया गया. राजधानी जयपुर में बैंक लूटने के प्रयास की सूचना मिलने पर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के आला अफसर रात को ही मौके पर पहुंच गए. बैंक के अफसरों ने बताया कि राजस्थान में एक्सिस बैंक की सभी शाखाओं में इसी चेस्ट ब्रांच से पैसा जाता है.

पूरे राज्य से जमा हो कर पैसा भी इसी चेस्ट ब्रांच में आता है. बैंक अफसरों से पुलिस अधिकारियों को पता चला कि इस चेस्ट ब्रांच में वारदात के समय 926 करोड़ रुपए रखे हुए थे. इतनी बड़ी रकम की बात सुन कर पुलिस अफसर हैरान रह गए.

अगर पुलिस कांस्टेबल सीताराम हिम्मत दिखा कर गोली नहीं चलाता तो शायद बदमाश बैंक लूटने में कामयाब हो जाते. अगर यह बैंक लुट जाती तो यह भारत की अब तक की सब से बड़ी बैंक डकैती होती. सीताराम के गोली चलाने से यह बैंक डकैती होने से बच गई थी.

कांस्टेबल सीताराम की ओर से बदमाशों को ललकारने के लिए चलाई गई गोली बैंक के सामने बाईं ओर एक मकान की खिड़की में जा कर लगी. गोली लगने से खिड़की का कांच टूटा तो मकान मालिक और उन के परिवार की नींद खुल गई. उन्होंने बाहर आ कर पता किया तो बैंक में डकैती के प्रयास का पता चला. तब तक पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी.

पुलिस ने रात को जयपुर से बाहर निकलने वाले सभी रास्तों पर कड़ी नाकेबंदी करवा दी. 6 फरवरी को कांस्टेबल सीताराम की रिपोर्ट के आधार पर जयपुर के अशोक नगर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

6 फरवरी को सुबह से पुलिस और एक्सिस बैंक के आला अफसरों का मौके पर जमावड़ा लगा रहा. जयपुर के पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल ने भी मौके पर पहुंच कर बैंक के सुरक्षा इंतजामों के बारे में जानकारी ली. पुलिस को जांचपड़ताल के दौरान 4 बड़े खाली कट्टे (बोरी) मिले. ये कट्टे बदमाश अपने साथ लाए थे, लेकिन गोली की आवाज सुन कर भागते समय छोड़ गए.

बदमाशों का पता लगाने के लिए पुलिस ने बैंक के अंदरबाहर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी तो पता चला कि बदमाश 7 सीटर इनोवा गाड़ी से आए थे. इस गाड़ी से 11 बदमाश बाहर निकले और 2 बदमाश अंदर ही बैठे रहे. बाहर निकले सभी बदमाशों के चेहरे ढंके हुए थे. इन में से 4-5 बदमाशों के हाथ में पिस्तौल और बाकी के हाथों में डंडे और सरिए थे. इस इनोवा का नंबर तो साफ दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन राजस्थान के नागौर जिले की नंबर सीरीज जरूर नजर आ रही थी.

पुलिस की जांच में पता चला कि बैंक की इस चेस्ट ब्रांच में लिमिट से करीब 3 सौ करोड़ रुपए ज्यादा रखे हुए थे. नियमानुसार बैंक को यह राशि रिजर्व बैंक में जमा करानी चाहिए थी. यह बात सामने आने पर करेंसी चेस्ट में सुरक्षा मापदंडों को ले कर चूक और लिमिट से ज्यादा कैश रखने के मामले में रिजर्व बैंक के महाप्रबंधक करेंसी पी.के. जैन ने एक्सिस बैंक से रिपोर्ट मांगी.

बहरहाल, एक्सिस बैंक में देश की सब से बड़ी डकैती टल गई थी. कांस्टेबल सीताराम की सूझबूझ से बदमाशों को भागना पड़ा. सीताराम जयपुर का हीरो बन गया था. सीताराम की सतर्कता और बहादुरी से 926 करोड़ रुपए की बैंक डकैती टल जाने पर जयपुर पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक ओ.पी. गल्होत्रा से बात की और कांस्टेबल सीताराम को पुरस्कृत करने की सिफारिश की.

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पुलिस के लिए आसान नहीं था लुटेरों का सुराग ढूंढना

डकैती तो टल गई थी, लेकिन जयपुर पुलिस के लिए बैंक में घुसने वाले बदमाशों का पता लगाना सब से पहली चुनौती थी. इस के लिए पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल ने अपने मातहत अधिकारियों की मीटिंग कर के वारदात के लिए आए बदमाशों का पता लगाने को कहा.

विचारविमर्श में यह बात सामने आई कि 7 सीटर इनोवा में 13 लोगों का बैठना आसान नहीं है. इस का मतलब बदमाशों के पास कोई दूसरा वाहन भी रहा होगा, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में दूसरा वाहन नजर नहीं आ रहा था. इनोवा गाड़ी भी चोरी की होने या उस पर फरजी नंबर प्लेट होने की आशंका थी. इस बात पर भी विचार किया गया कि बैंक में वारदात करने से पहले बदमाशों ने रैकी जरूर की होगी. अगर उन्होंने रैकी की थी तो उन्हें इस बात का पता रहा होगा कि बैंक की इस चेस्ट ब्रांच में 3-4 पुलिसकर्मी हमेशा मौजूद रहते हैं.

एक सवाल यह भी उठा कि बदमाशों की संख्या करीब 13 थी और उन में 4-5 के पास पिस्तौल भी थी तो वे केवल एक गोली चलने से घबरा क्यों गए? बैंक में डकैती डालने की हिम्मत करने वाले बदमाश डर कर भागने के बजाय मरनेमारने पर उतारू हो जाते हैं. इस से संदेह हुआ कि बदमाश कहीं नौसिखिया तो नहीं थे. इस के अलावा बदमाशों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि बैंक में 926 करोड़ रुपए होंगे.

पुलिस ने वारदात की जानकारी मिलने के तुरंत बाद जयपुर से बाहर निकलने वाले रास्तों पर नाकेबंदी कर दी थी. फिर भी बदमाशों का कोई सुराग नहीं मिला था. इस से यह बात भी उठी कि बदमाश जयपुर शहर के ही रहने वाले तो नहीं हैं.

पचासों तरह के सवालों का हल खोजने के लिए पुलिस कमिश्नर ने 4 आईपीएस अधिकारियों के सुपरविजन में एक दर्जन टीमें गठित कीं. इन टीमों में सौ से ज्यादा पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. अलगअलग टीमों को अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं.

पुलिस टीमों ने मुख्य रूप से बैंक कर्मचारियों और वहां तैनात गार्डों से पूछताछ, बैंक से रुपए लाने ले जाने वाली 3 निजी सिक्योरिटी एजेंसियों के मौजूदा और पुराने कर्मचारियों से पूछताछ, जयपुर से निकलने वाले रास्तों पर स्थित टोल नाकों पर सीसीटीवी फुटेज, जयपुर के आसपास हाइवे और कस्बों में स्थित होटल, ढाबों पर हुलिए के आधार पर बदमाशों की जानकारी हासिल करने, इस तरह की वारदात करने वाले गिरोहों की जानकारी जुटाने आदि बिंदुओं पर अपनी जांचपड़ताल शुरू की.

दूसरी ओर, पुलिस कमिश्नर ने रिजर्व बैंक में जयपुर के सभी पब्लिक सैक्टर और निजी सैक्टर के बैंक अधिकारियों, रिजर्व बैंक के अधिकारियों और गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. इस मीटिंग में पुलिस कमिश्नर ने कहा कि सभी बैंक सुरक्षा व्यवस्था के बारे में रिजर्व बैंक की गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करें.

इस के अलावा उन्होंने सुरक्षा के खास प्रबंधों के साथसाथ अलार्म और हौटलाइन की आवश्यक व्यवस्था करने को भी कहा. कैश लाने ले जाने से पहले मौकड्रिल करने की भी बात की. उन्होंने राय दी कि बैंक के सीसीटीवी कैमरे अपग्रेड किए जाएं, जिन में कम से कम 90 दिन का बैकअप होना चाहिए. अलार्म सिस्टम भी जरूर लगाए जाएं.

हताशा में आशा की किरण नजर आई पुलिस को

वारदात के दूसरे दिन पुलिस के अधिकारी और जवान सभी बिंदुओं पर विचार कर जांचपड़ताल करते रहे, लेकिन यह भी पता नहीं चल सका कि बदमाश किस रास्ते से वापस गए. दूसरे और तीसरे दिन भी पुलिस को बदमाशों के बारे में कोई महत्त्वपूर्ण सुराग हाथ नहीं लगा. इस बीच जयपुर से पुलिस की टीमें नागौर, पाली, अजमेर, भीलवाड़ा, सीकर व झुंझुनूं आदि जिलों में गईं और संदिग्ध बदमाशों की तलाश की.

9 फरवरी को जयपुर पुलिस को इस मामले में उम्मीद की कुछ किरणें नजर आईं. कई जगह फुटेज में नजर आया कि बदमाशों की इनोवा गाड़ी के पीछे वाली बाईं ओर की लाइट टूटी हुई थी. इसी वजह से गाड़ी चलने पर यह लाइट नहीं जलती थी. इसी आधार पर पुलिस जयपुर से अजमेर की ओर टोल नाकों पर ऐसी इनोवा कार की तलाश में जुटी रही.

इसी दिशा में पुलिस आगे बढ़ी तो पता चला कि दूदू के पास एक बार के बाहर इनोवा कार रुकी थी. वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कुछ लोगों की तसवीर आ गई थी. इन लोगों ने कानों में सोने की मुर्की पहन रखी थीं. चेहरे भी ढंके हुए नहीं थे. इस से यह अंदाजा लगाया गया कि बदमाश जोधपुर-पाली की तरफ के हो सकते हैं. दूदू में होटल पर रुकने के बाद यह गाड़ी ब्यावर की ओर चली गई थी.

इसी बीच जांचपड़ताल में पता चला कि एक्सिस बैंक में बदमाश जो कट्टे छोड़ गए थे, वे पाली जिले की रायपुर तहसील के बर गांव में एक दुकान से खरीदे गए थे. इन कट्टों पर बर गांव की परचून की दुकान का नाम लिखा था. पुलिस उस दुकानदार तक पहुंची. हालांकि दुकानदार से बदमाशों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली, लेकिन इस से यह अंदाजा जरूर लग गया कि बदमाशों का पाली जिले से कोई न कोई संबंध जरूर था.

पुलिस को बदमाशों की इनोवा कार की लोकेशन ब्यावर तक मिल गई थी. इस बीच महाराष्ट्र के नंबरों का पता चलने पर एक पुलिस टीम महाराष्ट्र भेजी गई. ब्यावर से पुलिस टीम सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इनोवा कार का पीछा करते हुए जोधपुर तक पहुंच गई.

10 फरवरी को पाली जिले की पुलिस को कुछ जानकारियां मिलीं. इस के अगले  दिन 11 फरवरी को जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के महामंदिर थानाप्रभारी सीताराम को सूचना मिली कि जोधपुर के कुछ बदमाश कहीं बाहर कोई बड़ी वारदात कर के आए हैं.

आखिर पकड़ में आ ही गए लुटेरे

इस पर जोधपुर पुलिस की एक टीम बदमाशों की तलाश में जुटी और शाम तक 6 बदमाशों प्रकाश जटिया, पवन जटिया, धर्मेंद्र जटिया, जयप्रकाश जटिया, दिनेश लुहार और प्रमोद बिश्नोई को पकड़ लिया. ये छहों लोग जोधपुर के रहने वाले थे. जोधपुर पुलिस कमिश्नर अशोक कुमार राठौड़ ने इस की सूचना जयपुर पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल को दी. इस पर जयपुर से एक टीम रवाना हो कर रात को ही जोधपुर पहुंच गई.

पकड़े गए 6 बदमाशों से बाकी लुटेरों का भी पता चल गया. जयपुर व जोधपुर पुलिस उन की तलाश में जुट गई. 12 फरवरी को पुलिस ने 2 और बदमाशों को पकड़ लिया. इन में अनूप बिश्नोई को जोधपुर के बनाड इलाके से पकड़ा गया, जबकि झुंझुनूं के बदमाश विकास चौधरी को जैसलमेर से गिरफ्तार किया गया. विकास चौधरी आजकल जैसलमेर के शिकारगढ़ इलाके में रह रहा था.

लादेन था गिरोह का सरगना

इन बदमाशों से की गई पूछताछ में सामने आया कि लूट की योजना जोधपुर के ओसियां  के सिरमंडी निवासी हनुमान बिश्नोई उर्फ लादेन ने बनाई थी. लादेन ही इस गिरोह का सरगना है. लादेन ने जयपुर में एक्सिस बैंक की चेस्ट ब्रांच की रैकी कर रखी थी. तिजोरी के ताले तोड़ने के लिए उस ने प्रमोद बिश्नोई के सहयोग से जोधपुर की जटिया कालोनी के रहने वाले प्रकाश, पवन, धर्मेंद्र व जयप्रकाश को तैयार किया था.

तिजोरी तोड़ने के लिए ये बदमाश जोधपुर से ही औजार ले कर चले थे. हनुमान उर्फ लादेन इस योजना में प्रकाश बिश्नोई से बराबर का हिस्सा मांग कर पार्टनर बना था. बाकी बदमाशों को 20 हजार से 10 लाख रुपए तक का लालच दिया गया था. लादेन और प्रकाश ने अपने भाड़े के साथियों को यह नहीं बताया था कि जयपुर में बैंक लूटने जाना है. उन्हें बताया गया था कि जयपुर में हवाला की रकम लूटनी है.

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5 फरवरी को लादेन के नेतृत्व में 15 बदमाश जोधपुर से 2 गाडि़यों में सवार हो कर जयपुर के लिए चले. उन्होंने रास्ते में जयपुर-अजमेर के बीच दूदू के पास एक गाड़ी छोड़ दी. इनोवा गाड़ी से सभी बदमाश उसी रात जयपुर पहुंचे और एक्सिस बैंक की चेस्ट ब्रांच पर धावा बोल दिया. बैंक में तैनात पुलिस कांस्टेबल के गोली चलाने से सभी बदमाश डर कर भाग निकले थे.

प्रकाश बिश्नोई जनवरी 2014 में राइकाबाग में रोडवेज बस स्टैंड पर रात्रि गश्त कर रहे पुलिस के एक एएसआई राजेश मीणा की हत्या का भी अभियुक्त था. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. घटना के समय वह जमानत पर छूटा हुआ था.

पुलिस को लादेन के अन्य साथियों के नामपता चल गए हैं. कथा लिखे जाने तक जयपुर व जोधपुर पुलिस उस की तलाश में जुटी थी. गिरफ्तार किए गए आठों बदमाशों को पुलिस जोधपुर से जयपुर ले आई. बदमाशों से उन के साथियों और आपराधिक वारदातों के बारे में पूछताछ की गई.

सीताराम को किया गया सम्मानित

एक्सिस बैंक में लूट के प्रयास के दौरान उपयोग किए गए हथियारों के बारे में भी पता लगाया गया. गिरफ्तार व फरार बदमाशों का आपराधिक रिकौर्ड भी खंगाला गया. यह भी पता लगाया गया कि इस वारदात में बैंक के किसी नएपुराने कर्मचारी का सहयोग तो नहीं था.

देश की सब से बड़ी बैंक लूट की वारदात को विफल करने का हीरो कांस्टेबल सीताराम ही रहा. हालांकि जयपुर पुलिस ने वैज्ञानिक तरीकों से जांचपड़ताल के जरिए बदमाशों को पकड़ कर अपनी साख जरूर बचा ली.

यह भी दिलचस्प रहा कि 11 फरवरी को जोधपुर में जब 6 बदमाश पकड़े जा रहे थे, उसी समय जयपुर में राजस्थान के पुलिस महानिदेशक ओ.पी. गल्होत्रा ने कांस्टेबल सीताराम को हैडकांस्टेबल के पद पर विशेष पदोन्नति दी. जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में आयोजित समारोह में पुलिस महानिदेशक ने कहा कि ड्यूटी के दौरान उत्कृष्ट कार्य कर के सीताराम ने राजस्थान पुलिस की शान बढ़ाई है.

राजस्थान के सीकर जिले के पूनियाणा गांव के रहने वाले सीताराम के मातापिता पढ़लिख नहीं सके थे. वे मेहनतमजदूरी करते थे. पिता टोडाराम व मां प्रेम ने अपने एकलौते बेटे सीताराम को अपना पेट काट कर पढ़ाया लिखाया. सीताराम ने सीनियर सेकैंडरी तक की पढ़ाई सीकर में दांतारामगढ़ से की. 12वीं में वह क्लास टौपर रहा. कालेज की पढ़ाई रेनवाल से की. मातापिता की ख्वाहिश थी कि सीताराम शिक्षक बन जाए. सीताराम ने बीएड करने के साथ शिक्षक बनने की तैयारी शुरू भी की थी, लेकिन तभी उस का कांस्टेबल भर्ती में चयन हो गया.

उस ने साल 2015 में नौकरी जौइन की. प्रोबेशन पीरियड पूरा होने के बाद उसे बैंक की चेस्ट ब्रांच में सुरक्षा के लिए तैनात कर दिया गया था. डेढ़ साल पहले ही उस की शादी हुई थी. सीताराम के मातापिता और गांव के लोगों ही नहीं, आज राजस्थान पुलिस के कांस्टेबल से ले कर पुलिस महानिदेशक तक सभी को उस पर गर्व है.

VIDEO : टेलर स्विफ्ट मेकअप लुक

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परिवार और ऐक्टिंग के बारे में बता रही हैं सुहासी धामी

ननद दृष्टि के साथ बौंडिंग वही ननदभाभी वाली है या फिर दोस्त जैसी?

वह मेरी ननद बाद में बनी हैं. हम दोस्त पहले से थे. इंडस्ट्री में हमारी ऐंट्री लगभग साथ हुई है. उस ने शुरुआत ऐड से की थी. मैं ने शो पहले साइन किया, इसलिए मैं टीवी शोज में पहले आ गई थी. हमारी बौंडिंग तो पहले से ही काफी अच्छी है. अब हम एकदूसरे के साथ अपने काम से ज्यादा परिवार और बच्चों के बारे में बातें करती हैं. ननदभाभी वाला रिश्ता है, लेकिन टशन वाला नहीं फ्रैंडशिप वाला.

शादी करने के बाद लाइफ में ट्विस्ट आया?

शादी करने तक तो ठीक था, लेकिन मां बनने के बाद जिंदगी बदल गई. अब मेरी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई हैं. मां बनने का एहसास कितना सुखद होता है यह मैं ने मां बनकर ही जाना. हमारी शादी भी एक ट्विस्ट ही थी. हम लोग कई सालों से एकदूसरे को जानते थे. जब लगा कि इस दोस्ती को कोई नाम दे दिया जाए तो शादी कर ली. मेरी सासूमां बहुत अच्छी हैं. बेटे के जन्म के बाद उन्हीं ने मुझे दोबारा ऐक्टिंग में आने को प्रोत्साहित किया. वह कहती हैं कि अगर काम नहीं करोगी तो कोई आगे पहचानेगा नहीं.

क्या बड़ी उम्र की महिला और कम उम्र के लड़के की शादी संभव है?

जब इस शो ‘आप के आ जाने से’ की कहानी मेरे पास आई तो मैं भी सोच में पड़ गई. लेकिन कलाकार होने के नाते हमारा फर्ज है कि हम ऐसे विषयों को सामने लाएं. मुझे 42 साल की महिला का किरदार निभाना है. जिस की 15 साल की बेटी है और उसे 24 साल के लड़के से प्यार करना है. मैं ने एक कलाकार होने के नाते हां कर दी. लेकिन मेरी डांस टीचर का उदाहरण मेरे सामने था, जिन्होंने डायवोर्स के बाद जिस लड़के से शादी की थी उस से वे 12 साल बड़ी थीं.

हमारे समाज में सैकड़ों लोग होंगे जो समाज के डर से ऐसे रिश्ते को स्वीकारने से डरते हैं. मैं ने ऐसे भी कपल्स देखे हैं जो समान उम्र के होते हुए भी शादी को नहीं निभा पाते. इस से तो यही अच्छा है कि जिस से प्यार हो उसी से शादी की जाए. भले उम्र में कितना ही अंतर हो.

बौलीवुड जाने की जल्दी नहीं

2005 में ही ऐक्टिंग में अपना कैरियर बनाने वाली सुहासी ने बहुत हिंदी शोज किए हैं. लेकिन बौलीवुड के लिए वे अभी भी उत्साहित नहीं हैं. उन का कहना है कि उन्हें यहां काफी पहचान मिल रही है फिल्मों में जा कर कहीं भीड़ में न खो जाऊं.

ऐक्ट्रैस न होती तो डांसर होती

मैं ने बचपन से अपनी मम्मी को ऐक्टिंग करते हुए देखा है, उन्होंने गुजराती और हिंदी थिएटर के साथसाथ टीवी के लिए भी काम किया है. ऐसा नहीं है कि मैं उन्हीं की वजह से ऐक्टिंग में आई. मैं तो डांस के लिए पागल थी. जब ऐक्टिंग की तो मुझे मजा आया. फिर तो मैं पूरी तरह से इसी में रम गई.

मैच्योर दिखना बड़ी चुनौती है

42 साल की महिला का किरदार निभाने का औफर मिलने पर सुहासी सोच में पड़ गईं. वे कहती हैं, ‘‘सिंगल मदर की भूमिका की प्रेरणा मुझे अपनी नानी से मिली है, क्योंकि उन्होंने जिंदगी अकेले रह कर बिताई है. मैं हर शौट करने से पहले तुरंत उन के जीवन को याद कर लेती थी.’’

कंपीटिशन की भावना कभी नहीं रही

सुहासी का अफेयर ऐक्ट्रैस दृष्टि धामी के भाई जयशील के साथ रहा. बाद में दोनों ने शादी कर ली. सुहासी कहती हैं, ‘‘जयशील प्रोफैशनल आईटी इंजीनियर हैं. हम दोनों ने कभी एकदूसरे के प्रोफैशन में टांग नहीं अड़ाई. मेरा और मेरी ननद का प्रोफैशन सेम है, लेकिन हम लोगों में कंपीटिशन जैसी भावना कभी नहीं रही है.’’

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