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इच्छामृत्यु का हक और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक नए फैसले में मरने का हक भी बुनियादी हकों में शामिल कर लिया है. इस का मतलब है कि अब न तो आत्महत्या एक जुर्म रहेगा और न ही बीमार पड़े हिलनेडुलने लायक न रहे आदमियों को मरने देने पर डाक्टरों को कातिल माना जाएगा. इस नए हक के बारे में बहुतकुछ अभी धुंधला है पर धीरेधीरे कानून और नियम बनने लगेंगे तो साफ हो जाएगा कि कब कौन सा मरना सम्मानजनक माना जाएगा और कब डाक्टर मरीज को जहालत व जिल्लत की जिंदगी से आसानी से छुटकारा दिला सकेंगे.

पहले कानून साफ था कि अस्पताल, डाक्टर, मातापिता या बच्चे किसी बीमार को अपनेआप मरने नहीं दे सकते थे और जहां तक कोशिश हो सके उसे बचाने के लिए लगना पड़ेगा. अब यदि किसी ने अपनी वसीयत कर रखी है कि उसे शांति से मरने दिया जाए तो डाक्टर वैसा फैसला ले सकते हैं.

ऐसा नहीं कि डाक्टर पहले ऐसा नहीं करते थे. जब मरीज को ठीक न किया जा सके तो हर अस्पताल में डाक्टर अपनेआप मरीज का इलाज बंद कर देते हैं. कई बार पूरा पैसा न मिलने पर ऐसा कर दिया जाता है.

यह मुसीबत आमतौर पर कैंसर, एचआईवी, दिल, किडनी, फालिज, याददाश्त खोने जैसी बीमारियों के मरीजों के साथ होती है जिन के ठीक होने की उम्मीद बहुत कम होती?है जब मरीज अपनेआप मर भी न रहा हो या बहुत धीरेधीरे तड़पतड़प कर मर रहा हो. डाक्टरों और घर वालों के लिए सांपछछूंदर की सी हालत हो जाती है न छोड़ते बनता है, न मरने देने के लिए हां करते बनता है. यदि थोड़ीबहुत जमीनजायदाद हो तो वह डाक्टरों या देखभाल करने में स्वाहा हो जाती है. बेहद बीमार जने की देखभाल एक आफत हो जाती है और घर वाले बेहद थक जाते हैं.

इस तरह के बीमारों से छुटकारा क्या मिल सकेगा, यह इस फैसले को ढंग से पढ़ने पर और सरकार के इसे लागू करने के तौरतरीकों पर तय होगा. इतना जरूर है कि सुप्रीम कोर्ट ने संविधान में दिए गए अनुच्छेद 21 में जीने के हक को और फैला दिया है.

दुनिया के कम ही देशों में इस हक का इस्तेमाल हो रहा है. आज जहां भी अपने हकों की जागरूकता है वहां इतना पैसा है कि बरसों तक डाक्टर बेहोश पड़े जने को जिंदा रख सकते हैं. जिन देशों में गरीब ही गरीब हैं, जैसे भारत, वहां जिंदगी की कीमत ही क्या है?

इस हक का सब से बड़ा फायदा धर्म से जुड़े लोग उठाएंगे. जैन धर्म में तो यह प्रथा बाकायदा मौजूद है जिस में लोग खानापीना छोड़ कर मौत का इंतजार करने लगते हैं. बनारस में मुक्ति घाट में रह कर लोग अपनी इच्छा से मरने का इंतजार करते हैं. क्या इस तरह के पागलपनों को अब कानूनी हक मिलेगा? क्या बाबा स्वामी लोग अमीर भक्तों को बहलाफुसला कर राजी कर लेंगे कि उन का आखिरी समय आ गया है और बजाय तिलतिल कर के मृत्युदान कर के पैसा उन्हें दे कर विदा हो जाएं?

हमारे यहां कानूनों का गलत इस्तेमाल बहुत होता है. छेड़छाड़ के बारे में कानून को जम कर पैसा लूटने के लिए आजमाया जा रहा है. दहेज कानून का डर दिखा कर औरतें पतियों और उन के घर वालों को जम कर धमकाती हैं.

इस नए कानून में भी लोभ हो सकते हैं फिर भी यह अच्छा है. जैसे पेट गिराने का कानून करोड़ों औरतों के लिए वरदान साबित हुआ कि उन्हें अनचाहे बच्चों का बोझ नहीं सहना पड़ रहा वैसे ही लाखों घर वाले आखिरी सालों में अपने सगों से छुटकारा आसानी से पा सकेंगे और उन्हें तड़पना नहीं पड़ेगा.

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कम बजट में शादी का लुत्फ उठाना क्या संभव है? आइए जानते हैं

डैस्टिनेशन वैडिंग यानी वैडिंग के दौरान पूरी मस्ती और रोमांच. आजकल सैलिब्रिटीज हों या आमजन सभी अपनी शादी के लमहों को यादगार और खुशगवार बनाने के लिए डैस्टिनेशन वैडिंग का चुनाव करते हैं.

हाल ही में फिल्म अदाकारा अनुष्का शर्मा और क्रिकेटर विराट कोहली की डैस्टिनेशन वैडिंग काफी चर्चा में रही. शादी का कार्यक्रम इटली में संपन्न हुआ. अपने खास दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ इन्होंने फेयरी टेल की तरह अपने सात फेरों का सफर यादगार बनाया.

लग्जरी वैडिंग कंसल्टैंट और मेकओवर के क्षेत्र में जानामाना नाम बन चुकीं आशमीन मुंजाल ने हाल ही में अपनी बेटी ऐनी मुंजाल के साथ मिल कर अपने वैडिंग वैंचर स्टार्सट्रक वैडिंग की शुरुआत की है.

बतौर वैडिंग डिजाइनर, आशमीन मुंजाल बताती हैं कि डैस्टिनेशन वैडिंग का मतलब अपने घर और शहर से दूर (कम से कम 100 मील) किसी खूबसूरत जगह पर जा कर विवाह कार्यक्रम संपन्न करना है. यहां दूल्हादुलहन अपने परिवार, चुनिंदा रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ 3-4 दिन क्वालिटी टाइम बिताते हैं और कुछ इस तरह का अनुभव प्राप्त करते हैं जिस का उन्होंने कभी सपना देखा था.

थीम पर आधारित डैस्टिनेशन वैडिंग

डैस्टिनेशन वैडिंग किसी न किसी खास थीम पर आधारित होती है. शादी के अलगअलग फंक्शनों के लिए भी अलगअलग थीम चुनी जा सकती है. कुछ प्रमुख थीम हैं- हवाइन थीम, बौलीवुड थीम, रजवाड़ा और मुगल थीम, फेयरी टेल थीम, जंगल बुक थीम, वाटर, कोरल और रैड कारपेट थीम.

लोकेशन का चयन

आप चाहें तो अपने शहर के आसपास की लोकप्रिय लोकेशन का चुनाव कर सकते हैं. मसलन गोवा, केरल, जयपुर, आगरा, उदयपुर, वगैरह या फिर विदेशी लोकेशंस जैसे मैक्सिको, हवाई, यूरोप, दुबई जैसे ड्रीम प्लेसेज में से किसी एक स्थान, जो आप के बजट में हो, का चयन कर सकते हैं.

आशमीन कहती हैं कि डैस्टिनेशन वैडिंग का मतलब यह नहीं कि आप को अपनी जेब अधिक ढीली करनी पड़ेगी. आप हर बजट में अपने मनोनुकूल शादी का आनंद ले सकते हैं.

जब बजट 2 लाख से कम हो: बेवजह के खर्चे बचाते हुए आप कम बजट में ही अधिक से अधिक रोमांचक शादी का आनंद उठा सकते हैं.

वैन्यू: आसपास स्थित बैंक्वेट हौल, फार्म हाउस, कम बजट के विला आदि बहुत से विकल्प होते हैं जहां ज्यादा सजावट की भी आवश्यकता नहीं होती. रात के बजाय शादी दोपहर में की जाए तो बिजली का खर्च बचाया जा सकता है. गरमी के मौसम में शाम के समय ओपन एरिया में शादी का कार्यक्रम रख कर बेकार के तामझाम से बचा जा सकता है.

सजावट: सजावट का काम असली फूलों के बजाय बनावटी फूलों से भी किया जा सकता है. इस में पैसे कम लगेंगे पर सौंदर्य में कमी नहीं आएगी. इसी तरह सजावट के लिए रिबन, गोटा, पेपरवाल, ग्लास फ्लौवर, आर्टिफिशियल प्लांट आदि का इस्तेमाल कर कम खर्च में खूबसूरत नजारा पाया जा सकता है.

कैटरिंग: नौनवैज के बजाय वैजिटेरियन खाना कम कीमत में तैयार होता है. वैजिटेरियन खाने में भी काफी वैराइटी मिलती है.

ढोल के साथ डीजे: जरूरी नहीं कि डीजे महंगा ही हो. राजस्थानी थीम लिया तो ढोलमजीरे के साथ बेहतर संगीत का आनंद लिया जा सकता है. इस में ज्यादा कोरियोग्राफी की भी जरूरत नहीं होती.

थीम: राजस्थानी थीम लिया जाए तो हर तरह का खर्च कम किया जा सकता है. मसलन, इस थीम में मेहमानों के बैठने के लिए सोफों, चेयर्स के बजाय तख्त और झूलों का इस्तेमाल होता है. मेहमानों के लिए पगडि़यां किराए पर ली जा सकती हैं. साडि़यां और लहंगाचोली भी किराए पर मिल जाती हैं. जयपुरिया थीम के तहत दुलहन द्वारा पहना जाने वाला लहरिया लहंगा भी महंगा नहीं होता. आभूषण भी आर्टिफिशियल लिए जा सकते हैं.

वीडियोग्राफी: यादों को संभाल कर रखना है तो वीडियोग्राफर और कैमरामैन शादी के आवश्यक हिस्से हो जाते हैं. यह काम भी कम खर्च में हो सकता है. शादी वाले दिन ही सिंपल वीडियोग्राफी हो सकती है. इस से प्रीशूट का खर्च बच जाता है.

30 लाख तक की शादी

30 लाख तक की शादी में आप के पास बहुत से विकल्प होते हैं. आप अपना हर अरमान पूरा कर सकते हैं.

वैन्यू: आप चाहें तो करीब 200 लोगों के लिए मानेसर, अलवर, जयपुर, दिल्ली, एनसीआर में फार्महाउस, फाइवस्टार होटल वगैरह बुक कर सकते हैं.

थीम: आप मुगल थीम, विक्टोरियन थीम, इटैलियन थीम आदि का चयन कर लैविश अरेंजमैंट का आनंद ले सकते हैं. थीम के अनुरूप ही आप को खाना भी सर्व किया जाएगा.

अलगअलग फंक्शन में अलगअलग थीम प्ले हो सकते हैं. मैजिकल अलादीन नाइट, बौलीवुड नाइट, ओम शांति ओम, इटैलियन हवाइन, ऐंजिल्स और डैविल्स, फ्रेंचरवीरा जैसे कितने ही थीम हैं जिन का आनंद लिया जा सकता है.

चाहें तो दूल्हादुलहन की ड्रैस जोधाअकबर स्टाइल में रखी जा सकती है.

कैटरिंग: आप इतने बजट में वैज और नौनवेज दोनों तरह का भोजन पूरी वैराइटी के साथ रख सकते हैं.

पैसा खर्च कर लग्जीरियस वैडिंग चाहते हैं तो आप थाइलैंड, मौरिशस, दुबई, मैक्सिको, इटली, स्विट्जरलैंड जैसी जगहों पर लैविश अरेंजमैंट करा कर अपने मन की मुरादें पूरी कर सकते हैं.

इन शादियों में आप सिंगर्स, टेलीविजन स्टार्स, मौडल्स, बौलीवुड स्टार्स से ले कर दूसरे सैलिब्रिटीज को भी बतौर गैस्ट या परफौर्मर बुला सकते हैं.

सिक्युरिटी से ले कर गैस्ट हैंडलिंग, वीडियोग्राफी, प्रीवैडिंग शूट और मीडिया में प्रचार आदि सारी जिम्मेदारियां वैडिंग प्लानर की होती हैं.

यूनीक वैडिंग टिप्स

हम सभी ऐसी शादी का सपना देखते हैं जो हमेशा के लिए हमारी यादों में रह जाए. मैरिज ऐक्सपर्ट शिंजिनी चावला बता रही हैं कुछ आसान तरीके जो आप की शादी को स्पैशल बनाएंगे:

निमंत्रणपत्र: शादी में रचनात्मक निमंत्रणपत्र आज के समय की मांग है. मखमली कागजों वाले गोल्डन कार्ड्स अब बोरिंग हो गए हैं, जिन में केवल आप के उपनाम की स्पैलिंग लिखी होती है. इस तरह के कार्ड्स में कपल के नाम के अलावा उन के बारे में कुछ भी नहीं होता. व्यावहारिक तौर पर यह काम एक एसएमएस भेज कर भी हो सकता है.

कुछ रचनात्मक बनिए: अपने निमंत्रण पत्र में इस बारे में भी जानकारी दीजिए कि आप कौन हैं, आप के होने वाले जीवनसाथी में क्या स्पैशल है. कार्ड में एक प्यारी सी कविता डाल कर उस की कीमत बढ़ाइए.

अपनी कहानी बताएं: आप विवाहस्थल के प्रवेश द्वार या फिर सभी जगहों पर स्क्रीन, फोटो फ्रेम्स टांग सकते हैं. इस में एक के बाद एक आते हुए फोटो हो सकते हैं. यह बड़ी स्क्रीन पर बौलीवुड गाने पर चलने वाली शो रील से बेहतर होगा.

मेहमानों के आगमन को यादगार बनाएं: आप के मेहमान जब विवाहस्थल में प्रवेश कर रहे हों तो उन की उम्र, लुक, ड्रैस आदि पर आधारित कुछ मस्त व खास गाने चलवाएं. उन्हें खास महसूस कराएं.

मंडप का डिजाइन: मंडप भी स्पैशल होना चाहिए. इसे बिलकुल फ्लोरल लुक दे सकते हैं या मंडप की दीवारों पर कपल्स की तसवीरें लगा सकते हैं.

मेहंदी: अपनी मेहंदी में कुछ अलग करें. अपनी पारंपरिक मेहंदी के साथसाथ मेहमानों के लिए नेल आर्ट और हैंड आर्ट के साथसाथ मेहंदी डिजाइन लगवाएं.

परिधान: शादी में लाल ब्राइडल लहंगा और क्रीम शेरवानी तो आम पहनावा है. आप कुछ और आजमाएं. जमदानी वर्क से ले कर इक्कत सिल्क तक पारंपरिक एैंब्रौयडरी डिमांड में हैं. कुछ अनोखा ट्राई करें.

कलर थीम: अपनी शादी में एक थीम और कलर स्कीम चुनें. मेहमानों को भी खास कलर या स्टाइल के कपड़े पहन कर आने को कह सकते हैं.

सजावट: सजावट में रचनात्मकता लाएं. मसलन विवाहस्थल में कंदीलों के रूप में टंगे फूलों के गुच्छों के अंदर लगे बल्ब सजीले भी लगेंगे और रचनात्मक भी.

समर वैडिंग टिप्स

गरमी का मौसम शादी के लिए उपयुक्त होता है. लोग इस मौसम में शादी ऐंजौय करते हैं. खुल कर हर रस्म का आनंद लेते हैं. पर गरमी की शादी की भी अपनी चुनौतियां हैं. इस समय शादी प्लान करने से पहले इन बातों का खयाल जरूर रखें:

– वैडिंग के लिए इनडोर अरेंजमैंट या आउटडोर अरेंजमैंट में से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं. बेहतर होगा कि आप कुछ रस्में इनडोर रखें और कुछ आउटडोर. मसलन, सगाई के लिए पूरी तरह इनडोर अरेंजमैंट बेहतर होगा. मगर मेहंदी जैसी रस्में आउटडोर ही अच्छी लगती हैं. पूल साइट या लौन के खुले माहौल में मेहंदी, संगीत आदि का आनंद ही कुछ और होता है.

– इस मौसम में भी कभीकभार बारिश हो जाती है. अत: थोड़ा बैकअप प्लान जरूरी है.

– गरमी में गहरे रंगों के प्रयोग से बचना चाहिए. आप रिफ्रैशिंग कलर्स जैसे पेस्टल, यलो, कोरल आदि का ज्यादा प्रयोग करें.

– फ्लोरल रेंज में भी ऐसे फूलों का चयन करें जो जल्दी खराब नहीं

होते जैसे आर्किड,

लिली वगैरह.

– फंक्शन का समय भी सही चुनना जरूरी है. दोपहर 12 से 3 बजे तक का समय अवौइड करें, क्योंकि इस समय सब से ज्यादा धूप होती है. लेट ईवनिंग फंक्शन काफी ऐंजौय किए जा सकते हैं.

– अंब्रैला कवर सिटिंग या टैंट आदि का अरेंजमैंट रखें.

– अपने मेहमानों को ऐसे यादगार तोहफे दें जिन्हें वे उपयोग में ला सकें. सनग्लासेज, स्टाइलिश फैन, बच्चों के कलरफुल कैप जैसे तोहफे उपयोगी साबित होंगे.

– फंक्शन स्मार्टली प्लान करें, फ्लो औफ इवेंट्स और रिफ्रैशमैंट टाइम का खयाल रखें. पूरा दिन लगातार वैडिंग फंक्शन होने पर मेहमान थक जाते हैं.

कैटरिंग पार्ट: बहुत लैविश खाने के बजाय स्नैक्स और बेवरेजेज ऐसे रखें जो लाइट और रिफ्रैशिंग हों. फ्रूट चाट, आइसक्रीम, रिफ्रैशिंग कौकटेल जैसे विकल्प चुनें.

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बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण हुआ खत्म

काफी समय से चले आ रहे आरक्षण विरोध का असर बुधवार को देखने मिला जब बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कोटा समाप्त करने पर अपनी मुहर लगा दी.

बांग्लादेश के प्रधान मंत्री शेख हसीना ने बुधवार को घोषणा की कि वे सरकारी नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली को समाप्त कर देंगी. यह निर्णय आरक्षण नीति के विरोध में हजारों छात्रों और नौकरी चाहने वालों की जीत के रूप में देखा जा रहा है. यह सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में से एक था, जिसमें हसीना के एक दशक से पुराने शासन के दौरान और इस तरह के पैमाने पर एकजुट जन विरोध प्रदर्शन देश में शायद ही पहले कभी देखा गया होगा.

ढाका में छात्रों की भीड़ ने प्रमुख सड़कों और ढाका विश्वविद्यालय को अवरुद्ध कर दिया था, जिसने 15 लाख की आबादी वाली राजधानी को पूरी तरह से ठप्प कर दिया.

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने ढाका विश्वविद्यालय के कुलपति के परिसर के निवास में प्रवेश किया, जिससे उनके परिवार को छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा. प्रधानमंत्री ने इस हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि जिन लोगों ने उन पर हमला किया, उन्हें दंडित किया जाएगा.

प्रदर्शनकारियों को ढाका की सड़कों पर रोकने के लिए, पुलिस ने रबर की गोलियां और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसमें करीब सौ लोग घायल हो गए.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान जो पाकिस्तान से आज़ादी मिलने के बाद बांग्लादेश के आर्किटेक्ट भी थे ने कोटा ख़त्म करने की अपने समय की सभी मांगों को खारिज कर दिया था.

डुप्लेसिस ने शर्ट उतार कर बनाया खाना, हरभजन ने वायरल किया वीडियो

आईपीएल 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत की है. पहले उन्होंने मुंबई को एक करीबी मुकाबले में पराजित किया और फिर दो साल बाद अपने ‘घर’ लौटकर चेपौक स्टेडियम में कोलकाता के मुंह से लगभग हारा हुआ मैच छीन लिया. जाहिर है टीम के भीतर खुशी का माहौल बन गया और इसे सेलिब्रेट करने के लिए कोच स्टीफन फ्लेमिंग और टीम के बल्लेबाज फाफ डुप्लेसिस ने टीम के लिए शेफ बन गए. मजेदार बात यह रही कि हरभजन सिंह ने शर्टलेस शेफ फाफ डुप्लेसिस का एक वीडियो भी शूट कर लिया और इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर भी कर दिया है.

बता दें कि दो साल के प्रतिबंध के बाद आईपीएल में वापस लौटी चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जाने वाले सभी मैच पुणे में शिफ्ट कर दिए गए हैं. यह कावेरी जल विवाद के कारण किया गया है. हालांकि, इस टीम के फैन्स और खिलाड़ी भी इससे खुश नहीं हैं, लेकिन अब अपने सभी मैच चेन्नई को पुणे में खेलने होंगे.

चेन्नई और कोलकाता के बीच 10 अप्रैल को हुए इंडियन प्रीमियर लीग के मैच के दौरान दर्शकों के बीच से शरारती तत्वों ने भारतीय टीम के खिलाड़ी रवींद्र जडेजा पर जूता भी फेंका, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. यह घटना मैच में पहले बल्लेबाजी कर रहे कोलकाता की पारी के आठवें ओवर में घटी. कुछ लोगों ने लौन्ग औन पर फील्डिंग कर रहे जडेजा पर जूता फेंका. हालांकि, जूता उन्हें नहीं लगा. इसी समय दक्षिण अफ्रीका के कप्तान फाफ डुप्लेसिस और तेज गेंदबाज लुंगी एनगिडी भी वहां चहल कदमी कर रहे थे.

चेन्नई टीम के खिलाड़ी और फैन्स सोशल मीडिया पर भावुक ट्वीट कर चुके हैं. भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना ने ट्वीट करके अपने निराश प्रकट भी की है. इन सबके बीच चेन्नई के खिलाड़ी काफी खुश हैं और फैन्स को भी खुश करने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में हरभजन सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है.

इस वीडियो में दक्षिण अफ्रीका के कप्तान और चेन्नई के बल्लेबाज फौफ डुप्लेसिस शेफ बने नजर आ रहे हैं. डुप्लेसिस शर्ट उतारकर साथी खिलाड़ियों के लिए खाना बना रहे हैं. हरभजन सिंह ने इस वीडियो को शेयर किया है.

बता दें कि आईपीएल के सात मैचों का आयोजन 10 अप्रैल से 20 मई के बीच होना था. चेन्नई से मैचों के पुणे शिफ्ट होने के बाद चेन्नई के फैन ही नहीं, बल्कि टीम के खिलाड़ी भी भावुक हो गए. टीम के खिलाड़ियों ने मैचों के चेन्नई से शिफ्ट होने के बाद खिलाड़ियों ने भावुक ट्वीट किए हैं. खास बात है कि सिर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि टीम के विदेशी खिलाड़ियों ने भी मैदान बदले जाने को लेकर ट्वीट किए हैं.

पूर्व औस्ट्रेलियाई क्रिकेटर और इस सत्र में सीएसके की तरफ से खेल रहे शेन वाटसन ने ट्वीट किया, ‘‘हमारी टीम @चेन्नईआईपीएल और यहां चेन्नई के प्रशंसकों के लिए दुखद है कि हम इस सत्र में आगे यहां कोई मैच नहीं खेलेंगे. पिछले मैच में माहौल शानदार था. उम्मीद है कि तमिलनाडु में स्थिति में जल्द ही सुधार होगा.’’ भारतीय बल्लेाज सुरेश रैना ने कहा, ‘‘हमें इस सत्र में अपने घरेलू मैदान पर ना खेलने और चेन्नई के दर्शकों का मनोरंजन नहीं कर पाने की कमी खलेगी. आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे.’’

हरभजन सिंह ने तो तमिल में ट्वीट किया है. हरभजन सिंह ने कहा, ‘‘यह दिल तोड़ने वाली खबर है. चेन्नई में कोई आईपीएल मैच नहीं होगा. चेन्नई के प्रशंसकों ने दो साल तक इंतजार किया. उम्मीद है कि मामले का जल्द समाधान होगा और चेन्नई में जल्द मैचों की वापसी होगी.’’

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने कावेरी नदी के जल के बंटवारे में तमिलनाडु के हिस्से का पानी घटा दिया और कर्नाटक का हिस्सा बढ़ा दिया था. इसके अलावा कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का अभी गठन नहीं हुआ. इन बातों को लेकर तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन जारी है. कुछ तत्वों ने कावेरी प्रबंधन बोर्ड (सीएमबी) और कावेरी जल नियामक समिति (सीडब्ल्यूआरसी) का गठन नहीं करने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हेतु आईपीएल के मैचों के आयोजन के खिलाफ आंदोलन करने की धमकी दी थी.

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युवा जोड़ों में यौनसंबंधों के प्रति बढ़ती अरुचि की क्या है वजह

सैक्सलैस विवाह के 70% केस युवा जोड़ों के हैं और यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. इस के लिए एक ही उपाय है कि दूसरी चीजों की तरह सैक्स के लिए भी समय निकालें, क्योंकि जब आप इस का स्वाद जानेंगे तभी इसे करेंगे. कुछ समय एकदूसरे के साथ जरूर बिताएं. कन्फ्यूशियस ने कहा था कि खाना व यौन इच्छा दोनों मानव की प्राकृतिक जरूरतें हैं.

मनोविज्ञानी और मनोचिकित्सक डा. पुलकित शर्मा इस बढ़ते रोग के संबंध में कुछ सवालों के जवाब दे रहे हैं:

सैक्सलैस विवाह सामान्य होने का कोई सूचक है?

हां, है. विवाहित लोग कैरियर के तनाव से घिरे हैं और अब उन के पास अंतरंगता के लिए बिलकुल भी समय नहीं है. दूसरा, अब चिड़चिड़ाहट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. विवादों को सुलझाने के बजाय स्त्री तथा पुरुष सैक्स की इच्छापूर्ति को बाहर ढूंढ़ रहे हैं.

क्यों कोई विवाह सैक्सलैस होता है?

यदि हम इन बातों को छोड़ दें कि किसी साथी को सैक्स संबंधी या मानसिक समस्या हो तो भी विवाह की शुरुआत सैक्सलैस नहीं होती, लेकिन बाद में हो जाती है. शुरुआत में अपनी यौन क्षमता को ले कर पुरुषों में विशेष घबराहट होती है. उन्हें डर रहता है कि वे अपने साथी को संतुष्ट कर पाएंगे या नहीं और यह डर इतना ज्यादा होता है कि वे अपनी यौन क्रिया को सही अंजाम नहीं दे पाते. शुरुआत में जोड़े सैक्स तथा अपने संबंधों को अच्छा बताते हैं, लेकिन समय के साथ प्यार तो बढ़ता है, परंतु विवाह सैक्सलैस हो जाता है.

तनाव से डिप्रेशन बढ़ता है, जिस से सैक्सुल इच्छा घटती है व प्रदर्शन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है. तीसरा कारण है पोर्नोग्राफी. यह लोगों की कल्पनाओं को रंग देती है, जिस से वे जो रील में देखते हैं वैसा ही रियल में करने की कोशिश करते हैं.

क्या सैक्सलैस विवाह वाले जोड़े कम खुश रहते हैं?

भले ही रिश्ता अच्छा हो, परंतु सैक्सहीन विवाहित जोड़े नाखुश रहते हैं, क्योंकि सैक्स प्यार व आत्मीयता का जरूरी हिस्सा है. इस विवाह को कोई एक साथी इच्छाहीन व बेकार महसूस करता है.

क्या सैक्स को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है?

हां. बस पहले यह जानने की जरूरत है कि समस्या कहां है? क्या यह समस्या बाह्य है जैसे तनाव, पारिवारिक माहौल आदि. इस बारे में खुल कर बात करें व बिना साथी की इच्छा से कोई फैसला न करें ताकि दूसरा साथी बुरा न महसूस करे. काम का तनाव घटा कर एकदूसरे के साथ ज्यादा समय बिताएं, आपसी विवाद सुलझाएं, यौन क्रियाओं को बढ़ाएं, एकदूसरे की जरूरतों को समझें व इच्छापूर्ति की कल्पना करें, साथी को आराम दें, उसे उत्साहित करें. मनोवैज्ञानिक से सलाह भी ले सकते हैं.

क्या सैक्सहीन विवाह वाले तलाक की ओर बढ़ रहे हैं?

हां, ऐसा हो रहा है, क्योंकि एक साथी अपनेआप को उत्तेजित महसूस करने लगता है या वह महसूस करने लगता है कि उसे धोखा दिया जा रहा है. इसलिए वह भी सैक्स का विकल्प बाहर खोजने लगता है, जिस से बंधेबंधाए रिश्ते में समस्या आने लगती है.

यौन संतुष्टि दर में कमी

भारत में हुए सैक्स सर्वे दर्शाते हैं कि पिछले दशक में यौन संतुष्टि की दर मात्र 29% रह गई. सैक्स से बचने के लिए पत्नियों की पुरानी आदत है कि आज नहीं हनी. आज मुझे सिरदर्द है. 50% पुरुष भी अपनी पत्नी से सैक्स न करने के लिए सिरदर्द का झूठा बहाना बनाते हैं. 43% पति मानते हैं कि उन की आदर्श बिस्तर साथी उन की पत्नी नहीं है. 33% के करीब पत्नियां मानती हैं कि विवाह के कुछ सालों बाद सैक्स अनावश्यक हो जाता है. 14% स्त्रीपुरुषों को नहीं पता कि वे बैडरूम में किस चीज से उत्तेजित होते हैं जबकि 18% के पास कोई जवाब नहीं है कि वे सैक्स के बाद भी संतुष्ट हुए हैं. 60% जोड़े यौन आसन के बारे में कल्पना करते हैं. फिर भी आधे से ज्यादा जोड़े नए आसन के बजाय नियमित आसन ही अपनाते हैं. 39% जोड़े ही यौन संतुष्टि पाते हैं.

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अक्टूबर : कमजोर कहानी में कलाकारों का दमदार अभिनय

‘विक्की डोनर’, ‘पिकू’ और ‘पिंक’ जैसी फिल्मों के सर्जक शुजीत सरकार की प्यार में कोई शर्त नहीं होती के साथ ही पैशनेट प्यार की बात करने वाली फिल्म ‘‘अक्टूबर’’ दर्शकों को अवसाद व उदासी ही बांटती है.

फिल्म की कहानी दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल से शुरू होती है, जहां होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद कुछ लड़के व लड़कियां ट्रेनी के रूप में काम कर रहे हैं. इनके साथ शर्त है कि इन्हे ट्रेनी के दौरान उपस्थित बनाए रखते हुए शिकायत का मौका नहीं देना है. बीच में खुद छोड़ कर गए या होटल प्रबंधक ने उन्हे निकाल दिया, तो उनके माता पिता को होटल प्रबंधक को तीन लाख रूपए चुकाने पड़ेंगे.

इन ट्रेनी लड़के व लड़कियों में 21 साल का दानिश वालिया उर्फ डैन (वरुण धवन) और शिवली अय्यर (बंदिता संधू) भी हैं. डैन करियर ओरिएंटेड है और ट्रेनीशिप खत्म होने के बाद वह अपना रेस्टारेंट खोलने का सपना देख रहा है. हर दिन उससे कुछ न कुछ ऐसी गड़बडी होती रहती है कि उसे डांट सुननी पड़ती है. शिवली को अक्टूबर माह में खिलने वाले एक खास फूल से काफी लगाव है. डैन व शिवली के बीच कोई अच्छी दोस्ती भी नहीं है.

31 दिसंबर की रात होटल में नए वर्ष की पार्टियां हो रही हैं. यह सारे ट्रेनी भी तीसरी मंजिल की छत पर पार्टी मना रहे हैं. कुछ लड़के व लड़कियों ने शराब पी है. शिवली ने शराब नहीं ली. अचानक वह पूछती है कि ‘डैन कहां है?’ और फिर वह छत की दीवार पर जाकर बैठ जाती है. बैठते ही वह नीचे गिर जाती है. डाक्टर व एम्बूलेंस आती है, बुरी तरह से घायल शिवली को अस्पताल ले जाया जाता है. डाक्टर घोष उसका आपरेशन करते हैं. पर वह कोमा में चली जाती है. उसे वेंटीलेटर पर रखा गया है. पता चलता है कि शिवली की मां प्रोफेसर है और उसकी एक छोटी बहन व एक भाई भी है.

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पिता का आठ वर्ष पहले ही देहांत हो गया था. शिवली के चाचा नहीं चाहते कि अब शिवली के इलाज पर पैसे खर्च किए जाएं, डाक्टरों को भीशिवली के कोमा से बाहर आने व जिंदा होने की उम्मीदें कम हैं. पर मां का दिल नहीं मानता. इधर डैन भी शिवली को देखने आता है. एक दिन उसके साथी बताते हैं कि छत से गिरने से पहले शिवली ने पूछा था था कि ‘डैन कहां है?’ इस बात से डैन को लगता है कि शिवली उसे चाहती है. उसके बाद वह हर दिन अस्पताल में शिवली के पास रहने का प्रयास करता है.

डैन बार बार कहता है कि शिवली के इलाज के लिए डाक्टरों को कुछ वक्त दिया जाना चाहिए. खैर, शिवली कोमा से बाहर आ जाती है. पर अपाहिज हो गयी है. होटल में डैन की अनुपस्थिति व गलत व्यवहार के कारण उसे होटल से निकाल दिया जाता है. इससे उसकी मां बहुत नाराज होती हैं. उन्हे तीन लाख रूपए भी चुकाने पड़ते हैं. इसी के चलते होटल वाले उसे निकाल देते हैं. डैन की मां इस बात से नाराज है कि डैन ने सही ढंग से अपनी ट्रेनिंग नहीं पूरी की और अब उन्हे तीन लाख रूपए भी चुकाने पड़ेंगे. उसके बाद शिवली की मां डैन को समझाकर काम करने के लिए कहती है.

डैन को कुलू के एक होटल में मैनेजर की नौकरी मिल जाती है. इधर शिवली हिंसक हो जाती है. अंततः डैन वापस आता है. और फिर से अस्पताल में शिवली के आस पास रहने लगता है. कुछ दिन बाद अस्पताल से शिवली को घर ले जाया जाता है. अब डैन, शिवली के घर जाकर उसकी देखभाल करता है, कभी कभी व्हील चेअर पर शिवली को बैठाकर गार्डेन में घुमाने ले जाता है. मगर कुछ दिन बाद शिवली इस संसार को छोड़कर चली जाती है. शिवली की मां अक्टूबर माह में खिलने वाले फूल का पौधा डैन को सौंपकर दिल्ली छोड़कर चेन्नई चली जाती हैं.

फिल्मकार शुजीत सरकार की फिल्म  ‘अक्टूबर’ एक अनकहे और पैशनेट प्यार की कहानी है. मगर कहानी में बहुत ज्यादा नवीनता नहीं है. इस फिल्म को देखते हुए दर्शक की नजरों के सामने 27 मई 2016 को प्रदर्शित फिल्म ‘‘वेटिंग’’ जरुर घूमती है, जिसमें नसिरूद्दीन शाह व कलकी कोचलीन की अहम भूमिकाएं थी. कहानी लगभग वही है, सिर्फ पात्रों की अदला बदली है.

खैर, शुजीत सरकार ने भी अपनी इस फिल्म में बिना शर्त वाले प्यार की बात की है, पर फिल्म उदासी लिए हुए धीमी गति से चलती है. फिल्म का क्लायमेक्स अवसाद के अलावा कुछ नहीं देता. प्यार को रूह से महसूस करने व प्यार को गहराई से समझने के लिए एक लघु फिल्म के रूप में यह फिल्म अच्छी बन सकती थी, मगर फीचर फिल्म के लिए जिस तरह से कहानी धीमी गति से बढ़ती है, जिस तरह से फिल्म में दर्द, गम व उदासी को पिरोया गया है, उससे  भी दर्शक के सब्र का बांध टूटता है. वैसे कुछ भावनात्मक दृश्य काफी अच्छे बन पड़े हैं.

आम हिंदी फिल्मों से एकदम भिन्न और पूरी फिल्म जिस तरह से सुस्त गति से आगे बढ़ती है, उसके चलते फिल्म को देखते रहने का दर्शकों का सब्र का बांध टूट जाता है. परिणामतः फिल्मकार दर्शकों को किरदारों की जिंदगी की तह में जाकर निश्छल जज्बातों से जोड़ नही पाते हैं. पैशनेट प्यार को दर्शाते समय निर्देशक व लेखक यह भूल गए कि आज तेज गति से भागती जिंदगी के दौर में दर्शक इतना सब्र नहीं दिखा सकता, जितना उन्हे दर्शकों से अपेक्षा है.

‘कौफी डे से शुरू और कौफी डे पर खत्म होने वाले प्यार’ के युग में प्यार की गहराई को समझने का किसके पास वक्त है. इसलिए बेहतरीन कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद इस फिल्म को बाक्स आफिस पर दर्शक मिलेंगे, ऐसी उम्मीद कम है. इतना ही नहीं फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि फिल्म का एक भी किरदार दर्शक की रूह को हिलाने का काम भी नहीं करता. कोई भी किरदार दर्शकों के दिलो दिमाग पर अमिट छाप नहीं छोड़ता है.

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जहां तक अभिनय का सवाल है, तो वरुण धवन ने एक बार फिर बाजी मार ली है. डैन के किरदार को वरुण धवन ने अपने अभिनय से जीवंत कर दिया है. शिवली के किरदार में बंदिता संधू ने अपनी आंखों के भावों से काफी कुछ कहने का प्रयास किया है और एक कलाकार के रूप में वह काफी उम्मीदें जगाती है. शिवली की मां के किरदार में गीतांजली राव ने भी बेहतरीन अभिनय किया है.

कैमरामैन अविक मुखोपाध्याय की भी प्रशंसा की जानी चाहिए जिन्होंने दिल्ली को भी अति खूबसूरत तरीके से परदे पर उकेरा है.

एक घंटा पचपन मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘अक्टूबर’’ का निर्माण ‘राइजिंग सन फिल्मस’ के बैनर तले रौनी लाहिरी और शील कुमार ने किया है. फिल्म के निर्देशक शुजीत सरकार, लेखक जूही चतुर्वेदी, संगीतकार शांतनु मोयत्रा, कैमरामैन अविक मुखोपाध्याय तथा कलाकार हैं – वरुण धवन, बंदिता संधू, गीतांजली राव, साहिल वेंडालिया, प्रशांत सिंह व अन्य.

नेहा कक्कड़ ने हिमांश कोहली को बनाया अपना हमसफर

बौलीवुड की जानी मानी गायिका नेहा कक्कड़ और यारियां फेम अभिनेता हिमांश कोहली के अफेयर के चर्चे बहुत समय से हैं. हालांकि दोनों ने कभी भी अपने रिश्ते को सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन हाल ही में नेहा ने एक बयान दिया है, जिसमें उन्होंने अपने और हिमांश कोहली के रिश्ते के बारें में खुलकर बात की.

नेहा ने कहा ‘चर्चे बिल्कुल सही हैं. लेकिन, लोगों का ध्यान हम पर बहुत देर से गया. जबकि, हमारा रिश्ता तो चार साल पहले आई यारियां फिल्म से ही शुरू हो गया था.

नेहा ने कहा, हम बहुत अच्छे दोस्त हैं और अब तो हमसफर बन चुके हैं. क्योंकि, काम के सिलसिले में हम ज्यादातर साथ में सफर करते हैं. इसके बाद नेहा ने कहा कि वो दोनों अच्छे दोस्त बन कर ही खुश हैं और फिलहाल अपने इस ‘यारियां’ को इससे आगे बढ़ाने के बारे में कुछ भी नहीं सोचा है’, अगर उनका यह रिश्ता दोस्ती तक ही रहे तो ही ज्यादा ठीक है.

खबरों के मुताबिक दोनों ने न्यू ईयर और वेलेंटाइन डे भी साथ में मनाया था. दोनों भले ही अपने रिश्ते को औफिशियल न करें, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों की नजदीकियां साफ देखी जा सकती हैं.

बता दें कि हाल ही में नेहा ने ऐ हमसफर नामक वीडियो सौन्ग की शूटिंग की है जिसमें वो हिमांश के साथ रोमांस करती नजर आएंगी. इस गाने को नेहा और उनके भाई टोनी कक्कड़ ने गाया है. यह वीडियो सौन्ग 17 अप्रैल को रिलीज होगा.

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माफी मांगने में उस्ताद हैं मार्क जुकरबर्ग?

सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग अमेरिकी संसदीय समिति के समक्ष दो दिवसीय गवाही में हाजिर हुए. यहां पर उनसे कई तीखें सवाल पूछे गए. जैसा कि आप जानते हैं कि जुकरबर्ग कैंब्रिज एनालिटिका डेटा लीक के मामले पर सवालों से घिरे हुए हैं. वो जिस तरह से पहले भी अपनी गलतियां मान रहे थे और माफी मांग रहे थे. ठीक वैसा ही नजारा अमेरिकी संसदीय समिति में भी देखने को मिला उन्होंने वहां कई सवालों का जवाब तो दिया, लेकिन कुछ सवालों के जवाब में वो उलझते हुए दिखे. कई सवालों का उन्होंने गोलमोल जवाब दिया और माफी मांगी.

फेसबुक के लिए यह सेशन काफी अहम था, क्योंकि ऐसे समय में जब दुनिया भर में फेसबुक की कड़ी आलोचना हो रही है मार्क जुकरबर्ग तीखे सवालों के जवाब देने के लिए अमेरिकी सांसदों के समक्ष पेश हुए. आपको बता दें कि जुकरबर्ग पहले और दूसरे दिन 44 अमेरिकी सांसदों द्वारा पूछे जाने वाले कई सवालों का जवाब दे चुके हैं. दूसरे दिन लगभग 5 घंटे तक सवाल और जवाब का सिलसिला चला जिसमें उन्होंने डेटा शेयर को लेकर माफी मांगी. साथ ही उन्होंने भारत में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के बारे में कहा कि वे इसमें पूरी सावधानी बरतने की कोशिश करेंगे.

रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्क जुकरबर्ग कई हफ्तों से इन सांसदों के सामने सवालों के जवाब देने की तैयारी कर रहे थे. दूसरे दिन सेनेटर्स को दिए गए जवाब मे जुकरबर्ग अपने टौप एडवाइजर्स और लौयर्स के साथ सदन में मौजूद थे और सवालों के जवाब दे रहे थे. उनके पास कुछ दस्तावेज भी रखे थे, रिपोर्ट्स के मुताबिक उनमें मुख्य बिंदु लिखे थे जिनके इर्द-गिर्द के सवालों का ही जवाब उन्होंने दिया है.

ऐसा पहली बार भी नहीं हो रहा है जब फेसबुक पर डाटा की निजता के हनन का आरोप लगा हो और इस आरोप के लिए माफी मांगी गई हो. आठ साल पहले इलेक्ट्रानिक फ्रंटियर फाउंडेशन नाम की संस्था ने दावा किया था कि फेसबुक ने अपनी स्थापना के कुछ समय बाद ही डाटा गोपनीयता की सेटिंग में ऐसे बदलाव किए थे जिनके तहत यूजर अपना कुछ डाटा सार्वजनिक करने पर मजबूर थे.

फेसबुक पर क्या है आरोप?

– फेसबुक पर आरोप है कि उसने बिना इजाजत यूजर्स के निजी डेटा कैंब्रिज एनालिटिका के साथ शेयर किए थे.

– राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अमेरिका के फेसबुक यूजर्स के निजी डेटा का इस्तेमाल किया गया था.

जुकरबर्ग की महज माफी ही काफी नहीं

फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की माफी एक अच्छा कदम जरूर है लेकिन यह काफी नहीं है. वक्त आ गया है कि लोग फेसबुक, गूगल जैसी चीजों के सच को समझें. सोमवार को जुकरबर्ग अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेश होने से पहले वाशिंगटन में सांसदों से मुलाकात कर सांसदों के सामने माफी मांगी. उन्होंने माना कि फेसबुक से गलती हुई है और भविष्य में बेहतर तरीके से काम करने का वादा भी किया.

यह माफी बहुत जरूरी थी क्योंकि जुकरबर्ग केवल फेसबुक के संस्थापक, सीईओ और अध्यक्ष ही नहीं हैं, बल्कि कंपनी के 60 प्रतिशत मताधिकार भी उन्हीं के पास है. ऐसे में वे कंपनी के एक ऐसे नेता हैं, जो उसकी हर हरकत के लिए जिम्मेदार हैं. लेकिन जुकरबर्ग के झांसे में मत आइए. वह अब इन नियमों को मान रहे हैं क्योंकि यह उनकी मजबूरी है. अमेरिका में 2016 के चुनावों में रूस का हाथ होने और ब्रेक्जिट में कैम्ब्रिज एनेलिटिका की भूमिका की खबर के बाद, दुनिया भर में ना ही जनता और ना सरकारें अब फेसबुक को नजरअंदाज कर सकती हैं. इसलिए जुकरबर्ग को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है और कुछ अस्पष्ट से वादे कर दिए हैं कि वह अपने हर ऐप की जांच कराएंगे. यह कतई काफी नहीं है.

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अब 1 रूपये में किराए पर मिलेगी कार, पढ़ें पूरी खबर

दिल्ली-एनसीआर में सड़कों पर जल्द ही और ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें दिखने वाली है, किराए पर कार देने वाली कंपनी जूमकार लोगों को इलेक्ट्रिक कार उपलब्ध कराने की कोशिश में लगी है. इसके लिए जूमकार ने महिंद्रा के साथ समझौता किया है. इस समझौते के तहत महिंद्रा इलेक्ट्रिक दिल्ली में 100 इलेक्ट्रिक कार उपलब्ध कराएगी, जो कि e20Plus कार होंगी. जूमकार के मुताबिक यह कार जल्द ही मिलनी शुरू हो जाएंगी.

दोनों कंपनियों ने मैसूर, हैदराबाद और जयपुर के बाद अपनी इस सेवा का विस्तार दिल्ली-एनसीआर में करने का निर्णय लिया है. जूमकार के को-फाउंडर ग्रेग मोरन ने बताया कि “शुरुआत में इन इलेक्ट्रिक कारों को 1 रुपए प्रति घंटे की दर से किराए पर लिया जा सकेगा. जूमकार, कार को फुल चार्ज करके देगी. अगर आप ज्यादा दिन के लिए कार को किराए पर लेते हैं तो आप इसे घर पर भी चार्ज कर सकते हैं. इस इलेक्ट्रिक कार को दिल्ली एयरपोर्ट और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से भी लिया जा सकेगा.”

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महिंद्रा e2o Plus कार एक बार फुल चार्ज होने पर 140 किलोमीटर की दूरी तय कर लेती है, यह कंपनी का दावा है. यह कार 85 किलोमीटर प्रति घंटे की टौप स्पीड पकड़ने में सक्षम है. यह महिंद्रा की लेटेस्ट ड्राइवट्रेन तकनीक पर आधारित इलेक्ट्रिक कार है. इस कार में कस्टमर्स 4 ट्रिम लेवल्स (P2, P4, P6, P8) के बीच चुनाव कर सकते हैं.

इसके साथ ही महिंद्रा ने इस इलेक्ट्रिक कार के लिए चार कलर औप्शन भी दिए हैं, महिंद्रा की इस e20 प्लस इलेक्ट्रिक कार के पी2, पी4 और पी6 वैरियंट्स में 48 वोल्ट की बैटरी लगी है. जबकि पी8 वेरिएंट 72 वोल्ट की बैटरी के साथ आता है.

48 वोल्ट की बैटरी 3 फेज इंडक्शन मोटर्स को पावर भेजती है और इससे 25.5bHP का पावर और 70 न्यूटन मीटर का टौर्क जेनरेट होता है. जबकि 72 वोल्ट बैटरी से 40bHP का पावर और 91 न्यूटन मीटर का टौर्क जेनरेट होता है. इस कार में टेलिमैटिक के जरिए रिमोट डायग्नोस्टिक, स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, नया और अडवांस इन्फोटेनमेंट सिस्टम, रीजेनरेटिव ब्रेक्स, हिल होल्ड कंट्रोल्स जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं.

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चंकी पांडे की बेटी ने किया कुछ ऐसा, कि 8 घंटे में हो गए 98,000 फौलोअर्स

बौलीवुड के जानेमाने हीरो चंकी पांडे की बेटी अनन्या पांडे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अचानक बढ़े फौलोअर्स की संख्या को लेकर चर्चा में हैं. अभी तक उनके फौलोअर्स की संख्या 1,901 थी. मगर स्टूडेंट औफ द ईयर का पहला पोस्टर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर करते ही कुछ ही घंटों के भीतर उनके फौलोअर्स की संख्या 98,000 पहुंच गयी. फौलोअर्स की संख्या में हुआ ये इजाफा नीचे दी गईं तस्वीरों से जाहिर होता है.

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जाने माने एक्टर चंकी पांडे और भावना पांडे की बेटी अनन्या इंटरनेट पर काफी एक्टिव रहती हैं. अन्य स्टार बच्चों की तरह, अनन्या भी इंस्टाग्राम पर लोकप्रिय हैं. पूर्व में भी वो अपनी पोस्ट्स को लेकर अक्सर चर्चाओं में आयी हैं. हालांकि वो अभी बस 19 वर्ष की ही हैं और पढ़ाई कर रही हैं.

बताते चलें की ‘स्टूडेंट औफ द ईयर 2’ फिल्म का निर्माण धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले किया जा रहा है और जैसा की नाम से ही जाहिर है, ये इस कड़ी की दूसरी फिल्म है. फिल्म का निर्देशन पुनीत मल्होत्रा कर रहे हैं. टाइगर श्राफ, तारा सुतारिया आदि सितारों से सजी यह फिल्म 23 नवंबर को प्रदर्शित होगी.

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