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जीवन सरिता : अपनों के बिना सफलता फीकी

जीवविज्ञान की कक्षा चल रही थी. अध्यापक छात्रों को ककून से तितली बनने की प्रक्रिया के बारे में बता रहे थे. उन के सामने एक ककून रखा हुआ था और उस में बंद तितली बाहर आने के लिए लगातार कठिन संघर्ष कर रही थी. इतने में ही अध्यापक कुछ कार्यवश थोड़ी देर के लिए कक्षा से बाहर निकल गए. छात्रों ने देखा कि तितली को अपने ककून से बाहर आने में काफी कष्ट व असहनीय पीड़ा हो रही है तो उन्होंने बालसुलभ सहानुभूतिवश ककून से तितली को निकलने में मदद करने की कोशिश की.

छात्रों ने ककून से बाहर आ रही अति नाजुक तितली को हाथ से पकड़ कर बाहर की तरफ खींच लिया. तितली बाहर तो आई किंतु इस प्रक्रिया के दौरान उस की मौत हो गई. जब अध्यापक कक्षा में वापस आए, छात्रों को मौन देख कर बड़ी हैरत में पड़ गए. किंतु पास में ही जब उन्होंने तितली को मृत देखा तो उन्हें सारी बातें समझने में तनिक भी देर नहीं लगी.

अध्यापक ने कहा, ‘‘तुम लोगों ने तितली को उस के ककून से बाहर आने में मदद कर उस की जान ले ली है. तितली अपने ककून से बाहर आने में जिस संघर्ष का सामना करती है, जिस दर्द को बरदाश्त करती है, वह उस के जीवन के अस्तित्व के लिए अनिवार्य होता है.

‘‘इस धरती पर जीवित रहने के लिए उसे वह पीड़ा सहनी ही पड़ती है. जन्म के समय के इस संघर्ष में जीवन जीने के लिए अनिवार्य गुणों को तितलियां बड़ी आसानी से सीख लेती हैं. कोई भी केटरपिलर अपने जीवन के इन कष्टों को सहन किए बिना जीवित नहीं रह सकता है. तुम लोगों ने उस तितली को उन जीवनदायी कष्टों से बचा कर उस की जान ले ली है.’’

सच पूछिए तो जीवन में कामयाबी प्राप्त करने तथा इस दुनिया में अपना अस्तित्व बनाए रखने का फार्मूला भी इस जीवनदर्शन से अलग नहीं है. इस धरती पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को अपने जीवन के हिस्से के दुखदर्द तथा संताप को खुद सहन करना होता है.

सफर आसान नहीं

महान कूटनीतिज्ञ तथा राजनीतिज्ञ बेंजामिन डिजरायली कहा करते थे, ‘सफलता प्राप्त करना एक नया जीवन प्राप्त करने सरीखा होता है. जैसे एक नए जीव के जन्म के लिए प्रसवपीड़ा अनिवार्य तथा सर्वविदित सत्य है, उसी प्रकार सफलता के मुरीद व्यक्ति को जीवन की बेशुमार पीड़ाओं का सामना करना होता है.

‘सफलता बहुत संघर्ष व बलिदान मांगती है. निश्चय सुदृढ़ हो तथा अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए यदि कोई शख्स आने वाली हर मुसीबत का सामना करने के लिए तैयार हो तो फिर कामयाबी पाने में कोई संदेह शेष नहीं रह जाता है.’

महात्मा गांधी के बारे में कहा जाता है कि वे अपनी पूरी जिंदगी में रोजाना 2 घंटे से अधिक कभी भी नहीं सोए. थौमस अल्वा एडीसन को अपने अनुसंधानों के समय रात और दिन का फर्क मालूम नहीं होता था. क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि बेतरतीब बाल तथा बढ़ी दाढ़ी के साथ घुटने तक फटे हुए पतलून में किसी ट्रेन के थर्ड क्लास कंपार्टमैंट में यात्रा करने वाले तथा अति साधारण दिखने वाले व्यक्ति के अंदर महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन का जादुई व्यक्तित्व भी छिपा हो सकता है?

आशय यह है कि जीवन के किसी क्षेत्र तथा मानव ज्ञान की किसी भी विधा में सफलता का सफर आसान नहीं होता. हमें हर मोड़ पर त्याग करने तथा कुरबानी देने की दरकार होती है.

त्याग काफी नहीं

किंतु केवल बलिदान तथा त्याग का होना ही सफलता की कसौटी नहीं है. अहम बात यह है कि सफलता के लिए किया जा रहा संघर्ष सच्चा है या नहीं. संघर्ष सही दिशा में किया जा रहा है या नहीं? क्योंकि समर्पण जितना सच्चा होता है, जितना सुदृढ़ होता है, सफलता उतनी ही निश्चित मानी जाती है.

यहां पर सब से अधिक जरूरी तथा विचारणीय प्रश्न यह उठता है कि संघर्ष करने तथा सफल होने की उत्कट लालसा में कहीं हम अपनों को ही नजरअंदाज तो नहीं कर रहे हैं? कामयाबी की रोशनी में चकाचौंध हो कर हम जिस अहम चीज को नकार जाते हैं वह होती है हमारी अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी का एहसास तथा कर्तव्य का भाव.

इस सच से कदाचित ही कोई इनकार कर पाए कि सफलता के लिए त्याग की जरूरत होती है, किंतु अहम प्रश्न यह उठता है कि सफलता त्याग की किस कीमत पर एवं कितनी कीमत पर?

कहानी जिंदगी की

प्रतीक की जिंदगी की कहानी उस के खुद के परिवार की खुशियों तथा निरंतर सफल होने की चाहत के मध्य की सुविधा से परे नहीं है. प्रतीक किसी मल्टीनैशनल कंपनी में काम करता था. वह अपनी महत्त्वाकांक्षा की प्राप्ति की राह में इस कदर व्यस्त हो गया था कि उस के पास अपनी पत्नी तथा बेटे के साथ अपने गम व खुशियों को बांटने का न तो वक्त होता था और न ही वह इस की कोई आवश्यकता समझता था. उस की पत्नी स्वाति को भी इस बात की हमेशा शिकायत रहती थी कि प्रतीक के पास उस के लिए कोई समय नहीं होता है. इस वजह से आएदिन परिवार में कलह तथा अशांति का माहौल रहता था. स्वाति ने कुछ दिनों के बाद इसे ही अपनी नियति मान कर प्रतीक से शिकायतें करनी बंद कर दीं.

प्रतीक के इकलौते बेटे आकाश को भी अकसर यही शिकायत रहती थी. ‘पापा, आप के पास तो मेरे लिए कोई वक्त ही नहीं है. आप तो मेरे साथ कभी खेलते भी नहीं हैं. यदि आप आज मेरे साथ नहीं खेलेंगे तो जान लीजिए, मैं कभी भी आप से बात नहीं करूंगा.’

सच पूछिए तो अपने बेटे की इन दोटूक बातों से प्रतीक के दिल को बहुत ठेस लगती थी और वह भावनात्मक रूप से थोड़ी देर के लिए परेशान हो उठता था. किंतु नौकरी की जिम्मेदारियों तथा सब से आगे बढ़ने की महत्त्वाकांक्षा के चक्रव्यूह में वह फिर से उलझ जाता.

वक्त गुजरता गया. प्रतीक व उस के परिवार के मध्य की नाराजगी धीरेधीरे उसे अपनों से दूर करती गई. सब लोगों ने उस से बातें करनी बंद कर दी. हां, उस का बेटा कभीकभी जरूर उस से आ कर चिपक जाता था, किंतु जब वह अपनी मम्मी को देखता तो शीघ्र भागने की कोशिश करने लगता. साथ रहते भी तनहातनहा रहने का क्रम कुछ दिनों तक इसी प्रकार जारी रहा.

सहसा एक दिन अपनी पत्नी के एक प्रश्न ने प्रतीक को अंदर से झकझोर कर रख दिया. ‘आखिर आप चाहते क्या हैं? आप को यदि अपनी नौकरी से इतनी ही मुहब्बत थी तो फिर आप ने मुझ से शादी क्यों की? यदि आप के पास अपनी पत्नी तथा अपने बेटे के लिए वक्त नहीं है तो फिर आप हम लोगों को छोड़ क्यों नहीं देते हैं?’

‘मैं आज जो कुछ भी कर रहा हूं,

वह तुम लोगों के सुखद जीवन के लिए कर रहा हूं. जीवन के भोगविलास तथा ऐशोआराम के लिए मेरी कोशिश केवल मेरे जीवन के लिए नहीं है, यह सब केवल और केवल तुम लोगों के लिए है,’ प्रतीक अकसर यही उत्तर दे कर अपनी पत्नी का मुंह बंद कर दिया करता था.

‘मैं मानती हूं कि आप की महत्त्वाकांक्षा में, आप के सपनों में हम सभी की सुख तथा सुविधाएं निहित हैं, किंतु सोच कर देखिए यदि मैं ही जीवित नहीं रही तो आप की शोहरत व सफलता की दुहाई देने वाले कौन होंगे? आप अपनी शानोशौकत किसे दिखाएंगे व आप किस पर गर्व करेंगे?

‘सफलता के शिखर पर पहुंच कर आप दुनिया की नजर में नाम तो कमा लेंगे, किंतु जब आप के खुद अपने ही आप के करीब नहीं होंगे तो क्या आप की वे खुशियां अधूरी तथा निरर्थक नहीं रह जाएंगी?’ प्रतीक की पत्नी ने बड़ी संजीदिगी से ये बातें कहीं.

अपनी पत्नी के आत्मदर्शन पर प्रतीक ने बड़ी गंभीरता से सोचा और आखिरकार उसे जो आत्मबोध हुआ, उस की स्निग्ध छांह में उस के मन पर वर्षों से जमी भ्रम की तपिश किसी मोम की तरह पिघलती गई और उसे अपने मन के जख्म पर किसी मरहम सरीखे ठंडक की अनुभूति हुई. उस आत्मानुभूति ने उस के जीवन की दिशा व दशा दोनों में कई अहम तबदीलियां ला दीं.

ऐसा नहीं है कि प्रतीक ने सपने देखना छोड़ दिया है. आज भी वह जीवन के वही सारे सपने देखता है, किंतु उस के पास उन सपनों को साकार करने की वो बेचैनी अब नहीं रही. परिवार की खुशियों की कीमत पर प्रतीक ने सपनों का पीछा करना छोड़ दिया. वह अब अपने बेटे के साथ खेलने के लिए तथा भागनेदौड़ने के लिए पूरा वक्त निकालता है. ऐसे में पत्नी भी खुश रहने लगी है.

परिवार की भूमिका

सच पूछें तो आधुनिक अर्थव्यवस्था की सूचना क्रांति के वर्तमान जादुई युग में जनमानस की सोच तथा जीवनशैली में जिस प्रकार के बदलाव आए हैं, उन के चलते हम ने आज यदि कुछ खोया है, तो वह है मानसिक शांति व आत्मिक सुकून. भौतिक भोगविलास की अंतहीन खोज में हम ने यदि कुछ खोया है, तो वह पारिवारिक सुखसुकून की वो स्निग्धता, जिस के कोमल एहसास में जीवन का परम सुख निहित होता है.

कदाचित इस बात से हम इनकार नहीं कर सकते कि मानव जीवन में परिवार की भूमिका उस कुशन या गद्दे की तरह की होती है, जो हमें जीवन में सफलता की ऊंचाइयों से अचानक गिरने पर हमें जख्मी होने से बचाती है. इसीलिए सफलता पाने की कोशिश में केवल संघर्ष ही अनिवार्य नहीं है, बल्कि उन अपनों के प्यार व सहानुभूति की भी दरकार होती है जिन की उपस्थिति के बिना जीवन तथा जहान की सारी खुशियां अधूरी प्रतीत होती हैं.

आप के अपने आप के सपनों के पीछे भागने की रेस में आप के साथ होंगे तो आप को एक अद्भुत ऊर्जा तथा प्रेरणा का एहसास पलप्रतिपल होगा. अपनों के प्यार को खो कर पाई गई किसी भी कामयाबी की कीमत कभी भी इतनी अधिक नहीं होती, जो आप के जीवन की भावनात्मक कमी की भरपाई कर सके.

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ग्रीन टी: फायदे और नुकसान

सब से पहले ग्रीन टी का चलन चीन में हुआ था. कमीलिया सीनेसिस नाम की पत्तियों से इसे बनाया जाता है. यह चाय कई तरह से सेहत के लिए फायदेमंद है. आज के जमाने में यह पूरे संसार में पी जाती है. मोटे लोग चर्बी को घटाने और छरहरा दिखने के लिए इसे पीते हैं. कई खाने की चीजों जैसे पूरक भोजन, पीने की चीजों, सेहत के लिए फायदेमंद चीजों और कास्मेटिक सामान वगैरह में कच्चे माल के रूप में इसे इस्तेमाल किया जाता है. इस के पत्तों का रस निकाल कर एक दवा की तरह इस का इस्तेमाल किया जाता है.

ग्रीन टी किस तरह काम करती है

ग्रीन टी की पत्ती, कली और तने के हिस्से को इस्तेमाल में लाया जाता है. इस की ताजी पत्तियों को भाप से ऊंचे तापमान पर रख कर तैयार किया जाता है. इस विधि के दौरान इस में पाई जाने वाले तत्त्व जैसे पालीफिनाल आदि जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं, खत्म नहीं होते हैं. इस के इस्तेमाल से इनसान का दिमाग और बीमारियों से लड़ने की ताकत भी बनी रहती है और शरीर भी फुर्तीला बना रहता है.  यह एक ऐसी चीज है जो आसानी से बाजारों में मिल जाती है. हमारे देश में भी मोटापे को कम करने के लिए इस का इस्तेमाल काफी किया जा रहा है. इस की पीने की मात्रा, इस में पाए जाने वाली फायदेमंद चीजों और इस से शरीर को होने वाले नुकसान के बारे में जानना बहुत जरूरी है. ज्यादा मात्रा में ग्रीन टी का इस्तेमाल कई लोगों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. इसलिए डाक्टर की सलाह के बिना ग्रीन टी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

ग्रीन टी में मौजूद जरूरी तत्त्व

ग्रीन टी के फायदे और नुकसान को जानने के लिए यह जरूरी है कि इस में मौजूद चीजों के बारे में भी जाना जाए. कई बार जहां एक ओर यह हमारे शरीर के लिए फायदेमंद साबित होती है, वहीं दूसरी ओर इस से शरीर को नुकसान भी हो सकता है. इसलिए इस में मौजूद चीजों के लिए चौकसी रखना जरूरी है. ग्रीन टी में कैफीन, पालीफिनाल, थियोब्रोसाइस, कैराटिन, टैनिन, जरूरी वसा, थिपोफाइलाइन, वैक्स, सैपोनिन, मालिब्डिनम, विटामिन सी, ए, बी1, बी2, के, मिनरल, फ्लूराइड, मैग्नीशियम, कैल्शियम, कापर, निकिल व जिंक वगैरह तत्त्व पाए जाते हैं. ये तत्त्व फायदेमंद या नुकसानदाक हो सकते हैं, इसलिए ग्रीन टी का इस्तेमाल अपने शरीर को ध्यान में रख कर ही करना चाहिए.

सेहत के लिए फायदेमंद

वैसे तो ग्रीन टी का नाम आते ही हमारे दिमाग में फिटनेस का खयाल आता है और रोजाना ग्रीन टी पीने वालों को कई तरह की बीमारियों से छुटकारा भी मिलता है. लिहाजा इस के फायदे इस तरह से हैं : * ग्रीन टी में विटामिन ई, बी और सी ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं. ये एंटीआक्सीडेंट का काम करते हैं, जो कि हमें पुरानी बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं. * ग्रीन टी पीने से कैंसर का खतरा 25 फीसदी तक कम हो जाता है.

* इसे पीने से मधुमेह रोगी के खून में चीनी की मात्रा कम हो जाती है.

* ग्रीन टी से शरीर का नुकसानदायक कोलेस्ट्राल कम होता है और फायदेमंद कोलेस्ट्राल की मात्रा सही बनी रहती है.

* ग्रीन टी में थेनाइन होता है जिस से अमीनो एसिड बनता है. यह शरीर को तरोताजा बनाए रखता है और दिमागी शांति के साथसाथ थकावट व तनाव को भी कम करने में मदद करता है.

* ग्रीन टी में उम्र को कम करने वाली चीजें होती हैं, जो चेहरे की झुर्रियों को कम करती हैं, जिस से चेहरे की चमक तरोताजा बनी रहती है.

* खाने के बाद 1 कप ग्रीन टी पीने से खाना आसानी से पच जाता है, जिस के कारण व्यक्ति का वजन कम हो जाता है.

* यह जोड़ों की अकड़न के खतरे को भी कम करती है.

गलत प्रभाव

वैसे तो ग्रीन टी बहुत फायदेमंद होती है, परंतु इस में मौजूद कैफीन की मात्रा सदैव संदेह में डालती है, लिहाजा इस के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जो इस तरह से हैं :

* नींद में कमी होना.

* अधिक पीने से लिवर व किडनी में परेशानी हो सकती है.

* गर्भवती महिलाओं के लिए यह बहुत नुकसानदायक होती है.

* इस के पीने से बच्चों के वजन में कमी आती है.

* इस के सेवन से भू्रण की मौत भी हो सकती है व गर्भधारण में परेशानी होती है.

* इस में मौजूद कैफीन ब्लड प्रेशर को बढ़ा देती है.

* इसे खाली पेट लेने से गैस बनती है.

सावधानी व चेतावनी

ग्रीन टी को जब कम मात्रा में लिया जाता है, तो यह ज्यादातर लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाती है. कुछ लोगों में यह गैस और कब्ज को बढ़ावा देती है. इस के रस का ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करना जिगर की समस्याओं को बढ़ावा देता है. इस प्रकार ग्रीन टी की खुराक के बारे में काफी भिन्नता पाई जाती है. लेकिन आमतौर पर यह भिन्नता 1 से 10 कप के बीच पाई गई है. रोज इस की मात्रा 3 से 4 कप के बीच लेना काफी फायदेमंद होता है.

* सिरदर्द व दिमागी शांति के लिए प्रतिदिन 3 कप ग्रीन टी पीनी चाहिए.

* सोच में सुधार लाने के लिए तकरीबन 1 कप ग्रीन टी का इस्तेमाल ठीक रहता है.

* कोलेस्ट्राल की मात्रा को कम करने के लिए रोज 10 कप या उस से ज्यादा ग्रीन टी लेना लाभदायक रहता है.

* पार्किसंस बीमारी को रोकने के लिए रोजाना 5 से 33 कप ग्रीन टी पीना ठीक रहता है.

* महिलाओं के लिए 1 से 4 कप ग्रीन टी रोज लेना फायदेमंद होता है.

* गर्भवती औरतों को रोज 1 से 2 कप ग्रीन टी पीनी चाहिए.

लिहाजा यह कहा जा सकता है कि सेहत के प्रति जागरूक लोग ग्रीन टी जैसे पेय पदार्थ की मदद लेते हैं, जोकि उन के शरीर को कई बीमारियों से बचाती है.

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कोई पीछा तो नहीं कर रहा

मूलरूप से गुवाहाटी की रहने वाली नजमा 2012 में सिलचर में किराए पर मकान ले कर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी. घर से यूनिवर्सिटी तक का आनाजाना बस से करती. इस में करीब 45 मिनट का समय लगता था. उस दिन यूनिवर्सिटी में चल रहे यूथ फैस्टिवल की वजह से वह घर लौटने में लेट हो गई. 11 बज चुके थे. वह अपनी सहेली के साथ बस से उतरी. बस से उतर कर गली में करीब 3-4 मिनट की वाकिंग पर उस का घर था. सहेली का घर थोड़ी और दूर था. नजमा बताती है, ‘‘हम ने देखा कि रास्ते में कुछ लड़के हमें अजीब नजरों से देख रहे हैं. ये वही लड़के थे जो अकसर हम पर कमैंट करते थे. दरअसल, हाल ही में मैं ने जिम जौइन किया था. जिम में पहले से कोई लड़की नहीं थी. उस एरिया में लड़कियां जिम नहीं जातीं. यही नहीं, मैं जींस भी पहनती हूं. इसे ले कर भी वे लड़के अकसर मुझ पर कमैंट करते हुए पीछा करते. इन में से कुछ लड़के जिम में मेरे साथ ही थे.

‘‘उस दिन रात में भी ये लड़के हमारा पीछा करने लगे. वे कार में थे. हम तेजी से आगे बढ़े. मेरा घर आ गया था. मैं ने अपनी सहेली से कहा कि तू मेरे घर ही रुक जा. पर उस के भाई को बुखार था, इसलिए वह नहीं रुकी और चली गई. मगर थोड़ी देर के बाद ही उस का फोन आया. वह रोती हुई बता रही थी कि ये लड़के उस का पीछा कर रहे हैं और कार में खींचने के प्रयास में हैं. मैं ने तुरंत उस के भाई और अपने पड़ोस में रहने वाले लड़के को उस की सहायता के लिए भेजा.

‘‘इस बीच मेरी सहेली स्वयं को बचाने के लिए मेन रोड छोड़ कर भागने लगी, वहां कंस्ट्रक्शन का मैटीरियल पड़ा था और गाड़ी का निकलना मुमकिन नहीं था. लड़के भी कार छोड़ कर पैदल ही उस के पीछे भागे. वे उसे दबोचने ही वाले थे कि उस का भाई और मेरे पड़ोस का लड़का वहां पहुंच गए. एक बड़ा हादसा होतेहोते बच गया.

‘‘पुलिस में शिकायत करने की बात पर सभी ने मुझे ऐसा न करने की सलाह दी. उन का कहना था कि पुलिस मदद तो करेगी नहीं उलटे आप परेशानी में फंस जाओगी.

‘‘अफसोस की बात तो यह थी कि मकानमालिक से ले कर जिम इंस्ट्रक्टर तक सभी मुझे ही दोषी ठहरा रहे थे. उन के मुताबिक हमारा इतनी रात तक घर से बाहर रहना या फिर जींस वगैरह पहनना गलत है.’’

फिलहाल नजमा दिल्ली में मिनिस्ट्री औफ सोशल जस्टिस में कंसलटैंट है. वह स्वीकार करती है कि अब दिल्ली में रहते हुए वह काफी एहतियात बरतती है. लेट नाइट बाहर नहीं रहती. मीडिया के दोस्तों से अच्छा रिश्ता बना कर रखती है. यदि कोई पीछा करता नजर आता है तो अपना रास्ता बदल लेती है. जहां तक संभव हो औटो में जाने से बचती है. कैब बुक करती है. स्टाकिंग यानी पीछा करना हमारे देश की एक अहम समस्या बन गई है. नैशनल क्राइम रिकौर्ड्स ब्यूरो के 2015 के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में सब से ज्यादा स्टाकिंग की घटनाएं होती हैं.

गत वर्ष इंडियन पीनल कोड की धारा 354 डी के अंतर्गत दर्ज कराई गई कुल 6,266 घटनाओं में से 18% यानी 1,124 घटनाएं दिल्ली की थीं. यदि दिल्ली जैसे शहर में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं तो दूसरे इलाकों की तो बात करना भी बेमानी है.

क्या है स्टाकिंग

स्टाकिंग लगातार और अनचाहा संपर्क, ध्यानाकर्षण, मानसिक प्रताड़ना या इसी तरह का और व्यवहार, जो व्यक्ति विश्ेष की ओर होता है. इस से व्यक्ति के मन में भय उत्पन्न होता है. स्टाकिंग के कारण पीडि़त या उस से जुड़े लोगों के जीवन को खतरा उत्पन्न हो सकता है. स्टाकर पूर्व प्रेमी/प्रेमिका, पूर्व पति/पत्नी, परिचित या अजनबी कोई भी हो सकता है. कई लोग सैलिब्रिटीज का भी पीछा करते हैं. स्टाकिंग पुरुष व स्त्री दोनों के ही द्वारा की जाती है, लेकिन पुरुष इस मामले में काफी आगे हैं.

शक भी हो सकती है वजह

अनुजा कपूर एक जानीमानी समाज सुधारिका, क्रिमिनल साइकोलौजिस्ट व ऐडवोकेट हैं. वे बताती हैं, ‘‘एक महिला हाथ धो कर मेरे पीछे पड़ गई है. वह मेरे कुलीग की पत्नी है. यह कुलीग मेरा फैमिली फ्रैंड है और मेरे एनजीओ ‘निर्भया एक शक्ति’ में साथ काम करता है.’’ ‘‘उस की पत्नी के दिमाग में शक घर कर गया है. उसे लगता है कि हम दोनों के बीच कुछ चल रहा है. इसी वजह से 4-5 सालों से वह मेरा पीछा कर रही है. पूरी तरह मेरी जिंदगी में घुसने का प्रयास करती है. मेरी हर गतिविधि पर नजर रखती है कि मैं कहां जाती हूं, क्या करती हूं. मेरे कहीं पहुचने से पहले वह या उस का जासूस वहां मौजूद होता है.

‘‘वह मेरे दोस्तों पर नजर रखती है. सोशल मीडिया में मेरे बारे में जानकारियां खंगालती है. अपने पति से मेरे बारे में पूछती है. इतना ही नहीं वह अपने पति के साथ घरेलू हिंसा भी कर रही है. उसे शांति से जीने नहीं दे रही. कभी खाना नहीं देती तो कभी घर में बंद कर देती है. बारबार उस से यही कहती है कि तेरा अनुजा के साथ गलत रिश्ता है. ‘‘दरअसल, प्रभावशाली लोग भी कईर् दफा स्टाकिंग के शिकार हो जाते हैं. इस का मकसद उन्हें डीफेम करना होता है, तो कुछ महिलाएं शक के आधार पर किसी का पीछा करने लगती हैं. अकसर मेरा गार्ड मुझे सूचित करता है कि मैडम जब आप आती हैं तो पीछे से एक गाड़ी आप का पीछा करती आती है. दरअसल, उस महिला ने मेरे खिलाफ डेढ़ लाख रुपयों में एक जासूस रख छोड़ा है, जो खास इवेंट्स वगैरह के दौरान हम दोनों की तसवीरें खींच कर उसे देता है. वह महिला यह बात पति के आगे स्वीकार चुकी है कि सुबूत इकट्ठे करने के लिए उस ने जासूस अपौइंट किया है.

‘‘अफसोस की बात यह है कि इस सारे मामलें में उस महिला को अपने मांबाप का समर्थन भी हासिल है. वह इस बात को नहीं समझती कि स्त्रीपुरुष भी आपस में दोस्त हो सकते हैं. हम एक औफिस में हैं तो क्या इवेंट्स के दौरान साथ नहीं दिखेंगे?

‘‘अब मैं ने तय कर लिया है कि जल्द ही उस महिला पर डीफेम, स्टाकिंग व हैरसमैंट का केस दायर करूंगी, क्योंकि उस ने मेरा और मेरे दोस्त का जीना मुहाल कर रखा है.’’

स्टाकिंग में क्या क्या सम्मिलित है

डा. संदीप गोयल के अनुसार स्टाकिंग के अंतर्गत बहुत सी बातें आते हैं, जिन में प्रमुख हैं:

– स्टाकर के द्वारा फोन, डाक या ईमेल द्वारा लगातार अनचाहे, अनुचित और भयभीत करने वाले संदेश पहुंचाना.

– पीडि़त के लिए बारबार अनचाही चीजें, उपहार या फूल छोड़ना या भेजना.

– घर, स्कूल, कालेज, औफिस या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान तक पीडि़त का पीछा करना या उस के इंतजार में वहां खड़े रहना.

– पीडि़त के बारे में निजी जानकारी प्राप्त करने के लिए निजी जासूसी सेवाएं लेना, सार्वजनिक रिकौर्ड तक पहुंच बनाना या इंटरनैट सर्च सर्विसेज का गलत इस्तेमाल करना.

– पीडि़त के घर से निकलने वाले कूड़े में से उस के बारे में निजी जानकारी जुटाने का प्रयास करना.

अपवाद

– पीछा करने वाला शख्स सरकार द्वारा अधिकृत हो.

– पीछा किसी नियम/कानून के अंतर्गत किया जा रहा हो.

– रीजनेबल और जस्टिफाइड स्टाकिंग.

स्टाकर की मानसिकता

स्टाकर आमतौर पर एकाकी व शर्मीले होते हैं. ऐसे लोग अकेले रहते हैं. उन के पास जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि परिवार या दोस्तों जैसे महत्त्वपूर्ण संबंध भी नहीं होते. स्टाकर नादसिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऔर्डर से पीडि़त होते हैं. वे महसूस करते हैं कि वे दुनिया के सब से महत्त्वपूर्ण व्यक्ति हैं. डा. समीर पारीख, डायरैक्टर मैंटल हैल्थ व बिहैवियरल साइंस, फोर्टिस अस्पताल बताते हैं कि स्टाकर या पागलों की तरह पीछा करने वाले व्यक्ति की मानसिकता ही ऐसी हो जाती है कि वह यह मानने को तैयार ही नहीं होता कि सामने वाला उस को स्वीकार नहीं करना चाहता. इस के विपरीत वह उस इनसान को अपनी जिंदगी का उद्देश्य बना लेता है, जिसे पाने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है. कभीकभी देखा गया है कि जो व्यक्ति पारिवारिक सपोर्ट न होने की वजह से पहले ही डिप्रैशन का शिकार हो, उस में इस तरह की जनूनी मानसिकता हो जाती है. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. इस तरह के लोग भावनात्मक रूप से कम और जनूनी तौर पर ज्यादा सोचते हैं. इसलिए यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि अपनी सोच या मीडिया मैसेज के प्रभाव से उत्पन्न हुई एक आपराधिक प्रवृत्ति है.

डा. संदीप गोयल के अनुसार, स्टाकर कई तरह के होते हैं:

अस्वीकृत स्टाकर: इस प्रकार के स्टाकर तब नाराज हो जाते हैं, जब उन के प्रेम संबंध खत्म हो जाते हैं. अस्वीकृत स्टाकर न सिर्फ आत्मकेंद्रित होते हैं, बल्कि ईर्ष्या से भरे हुए भी होते हैं.

विद्वेष या गुस्से से भरे स्टाकर: ऐसे स्टाकर किसी संबंध के समाप्त होने पर अपमानित महसूस करते हैं और दूसरे पक्ष से बदला लेने की भावना से भरे होते हैं.

अंतरंगता चाहने वाले स्टाकर: इस प्रकार के स्टाकर पीडि़त से अंतरंग व रोमानी संबंध चाहते हैं. अगर पीडि़त के द्वारा स्टाकर को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो वे लगातार उसे फोन करेंगे, खत लिखेंगे या उस के करीब आने का प्रयास करेंगे. अगर पीडि़त किसी और के साथ रिलेशनशिप में चली/चला जाता है तो वे ईर्ष्या से भर जाते हैं. कई बार ऐसे स्टाकर हिंसक भी हो जाते हैं.

लुटेरे या आक्रामक स्टाकर: इस प्रकार के स्टाकर यौन संतुष्टि की चाह में अनियंत्रित व हिंसक हो जाते हैं. यह जरूरी नहीं कि ऐसे स्टाकर पीडि़त को जानते हों. शायद पीडि़त को पता भी न हो कि कोई उस का पीछा कर रहा है.

अयोग्य प्रेमी: इस प्रकार के स्टाकर सामाजिक रूप से इतने कुशल नहीं होते. वे पीडि़त के साथ रिलेशनशिप में जाना चाहते हैं.

विकृत आकर्षण: इस प्रकार के स्टाकर महसूस करते हैं कि पीडि़त उन से प्यार करता है. इस प्रकार के मामलों में अकसर दूसरा पक्ष उन से उच्च सामाजिक वर्ग का होता है. फिर भी स्टाकर बारबार उस के करीब जाने की कोशिश करते हैं.

क्या कहता है कानून

दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुनाल मदान बताते हैं कि हमारे देश में आपराधिक कानून, भारतीय दंड संहिता 1860 के अंतर्गत महिला को सुरक्षा प्रदान की जाती है. निर्भया कांड के बाद कानून में मौजूद कमियों को देखते हुए 2013 में कुछ विशेष सुधार किए गए और आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2013 लाया गया, जिस के अंतर्गत किसी महिला का पीछा करना, प्राईवेट जगहों पर महिला को छिप कर देखना या इंटरनैट व सोशल मीडिया के जरीए महिला को सताना यानी साइबर स्टाकिंग आदि ऐक्ट 354 डी के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आते हैं. इस ऐक्ट के प्रावधान के मुताबिक अपराधी यदि पहली बार इस तरह के कृत्य में दोषी पाया जाता है तो उसे 3 साल की सजा व जुर्माना हो सकता है. यदि वह व्यक्ति दोबारा इसी अपराध में दोषी पाया जाता है तो उसे 5 साल तक की सजा व जुर्माना हो सकता है.

स्टाकिंग अपराध के लक्षण

अनचाहे तोहफे मिलना: यदि कोई आप को चुपकेचुपके तोहफे पहुंचा रहा है जैसे गुलाब, चौकलेट, टेडीबियर या लव लैटर, तो गुस्से में आ कर ऐसे तोहफों को घर के बाहर न फेंकें. इस के विपरीत संभाल कर रखें. यदि मामला गंभीर होता है, तो ये सभी तोहफे एक सुबूत के तौर पर इस्तेमाल हो सकते हैं. कई बार कुछ सनकी अपराधी डराने के लिए मरी हुई गिलहरी, खून से लथपथ पत्र आदि चीजें भेजते हैं. इन सब से डरें नहीं, संभाल कर रखें.

मारने की धमकी: यदि कोई आप को इंटरनैट से, मेल से या फिर सामने आ कर मारने की धमकी देता है, आप की हर ऐक्टिविटी पर नजर रखता है, आप को जलाने, खुद को/आप को दोनों को मारने की धमकी देता है.

साइबर स्टाकिंग: डा. संदीप गोयल बताते हैं, ‘‘सोशल मीडिया के बढ़ते चलन के कारण साइबर स्टाकिंग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. साइबर स्टाकिंग में स्टाकर पीडि़त का पीछा करने के लिए इलैक्ट्रौनिक माध्यमों जैसे इंटरनैट या सैलफोनका इस्तेमाल करते हैं. साइबर स्टाकिंग में स्टाकर स्वयं पीडि़त का पीछा नहीं करते बल्कि उस के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. कई स्टाकर पीडि़त को अपमानित करने के लिए इंटरनैट पर उस का झूठा प्रोफाइल डाल देते हैं या उस की निजी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं.’’

क्या करें सुरक्षा के लिए: कुनाल मदान कहते हैं कि यदि आप अपने आसपास इस प्रकार की कोई भी संदिग्ध हरकत महसूस करती हैं, तो पुलिस को बुलाने में जरा भी देर न करें. समय रहते ऐसे व्यक्ति को पुलिस के हवाले न किया जाए तो उस के हौसले बढ़ते जाते हैं. और वह कोई भी बड़ा अपराध कर सकता है.

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लाइफ पार्टनर की तलाश, वो भी औनलाइन

औनलाइन शौपिंग तो आप खूब करती होंगी, लेकिन औनलाइन जीवनसाथी खोजने के बारे में आप का क्या विचार है? यूनिवर्सिटी औफ शिकागो में मनोविज्ञान के प्रौफेसर जौन कासियोपो के शोध के मुताबिक, जिन प्रेमियों के रिश्ते की शुरुआत औनलाइन डेटिंग से होती है, वे दूसरे दंपतियों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा खुश रहते हैं.

अगर आप को अपने मातापिता व रिश्तेदारों के द्वारा दिखाए जा रहे रिश्ते पसंद नहीं आ रहे हैं या आप बारबार लड़कों के रिजैक्शन से परेशान हो चुकी हैं, तो औनलाइन लाइफ पार्टनर खोजना आप के लिए एक अच्छा विकल्प है.

आप औनलाइन अपनी पसंद के अनुसार लाइफपार्टनर खोज सकती हैं. इस में न तो रिश्तेदारों को बारबार रिश्ता बताने के लिए कहना पड़ता है और न ही उन के बताए रिश्ते को मना करने पर उन की नाराजगी का सामना करना पड़ता है. बस, अपना प्रोफाइल बनाया और जैसा पार्टनर चाहिए वैसा खोज लिया. नागपुर के राहुल और शिल्पा गोरखडे के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

शिल्पा कहती हैं, ‘‘मुझे लड़का नागपुर का चाहिए था, लेकिन घर वाले जो भी रिश्ता लाते, वह दूसरी जगह का होता. ऊपर से मुझे पसंद भी नहीं आता. अब तो हालत यह हो गई थी कि रिश्तेदारों ने रिश्ता बताने से मना कर दिया था. कहते थे कि कितना भी अच्छा रिश्ता ढूंढ़ कर लाओ, शिल्पा को पसंद नहीं आएगा. पता नहीं कैसा लड़का चाहिए. सब की बातें सुनसुन कर मैं परेशान हो चुकी थी. एक दिन मैं ने अपने भैया को अपनी चौइस के बारे में बताया कि मुझे कैसा जीवनसाथी चाहिए. मेरी चौइस जानने के बाद हम दोनों ने मिल कर भारत मैट्रिमोनियल पर प्रोफाइल बनाया. प्रोफाइल बनाने के 2 दिन के बाद ही राहुल ने मेरा प्रोफाइल देख कर रिक्वैस्ट भेजी. वे नागपुर के थे, तो मैं ने रिक्वैस्ट स्वीकार कर ली. फिर बातचीत के बाद वे अच्छे लगने लगे. इस दौरान हम एकदूसरे को अच्छी तरह जानने के लिए कई बार मिले. तब जा कर शादी का फैसला किया.’’

क्यों बढ़ रही है मांग

पहले किसी लड़के या लड़की की शादी करनी होती थी तो दूर के चाचा, बूआ व पुरानी रिश्तेदारी में रिश्ता खोजा जाता था, लेकिन अब समय बदल गया है. इंटरनैट पर बड़ी संख्या में लोग पार्टनर की तलाश कर रहे हैं, क्योंकि यहां बिना इधरउधर भटके मनमाफिक साथी की तलाश पूरी हो जाती है.

आज शादी के लिए एक अच्छे पार्टनर की तलाश करना वाकई बड़ा मुश्किल काम हो गया है. खासकर उन के लिए जो 12 से भी ज्यादा घंटे औफिस में बिताते हैं. कामकाजी लड़केलड़कियों के पास इतना समय नहीं है कि वे अपने मातापिता के द्वारा खोजे लड़के या लड़की को बारबार देखें.

आज इंटरनैट के माध्यम से लोगों की भौगोलिक पहुंच बढ़ी है. पहले लोग अपने शहर व आसपास की जगहों में ही लड़का खोजते थे, लेकिन इंटरनैट की मदद से देश के किसी भी शहर में लाइफपार्टनर की खोज की जा सकती है. यहां तक कि इस से विदेशों में भी शादी संभव है.

इंटरनैट की मांग बढ़ने का एक कारण यह भी है कि पारंपरिक रूप से रिश्ते तय करने की प्रक्रिया में लड़की की भूमिका एक वस्तु की तरह होती थी, जहां उस की पसंद न पसंद न के बराबर होती थी, लेकिन लड़कियों की बदली सामाजिक स्थिति, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता से उन का आत्मविश्वास बढ़ा है. वे भी अपने लिए योग्य जीवनसाथी की तलाश करने में बराबर रुचि ले रही हैं और साइट्स उन्हें इस में पूरी स्वतंत्रता देती हैं कि वे अपने लिए योग्य वर चुनें.

कहां से खोजें पार्टनर

यदि आप भी इंटरनैट की खुली दुनिया में अपना जीवनसाथी खोजना चाहती हैं, अपनी जिंदगी रोमांस से भरना चाहती हैं, तो सब से पहला सवाल मन में आता है कि शुरुआत कहां से और कैसे करें? मगर नई पीढ़ी के लिए इस सवाल का जवाब भी मुश्किल नहीं है. वह अच्छी तरह से जानती है कि जीवनसाथी कहां और किनकिन साइट्स के माध्यम से ढूंढ़ा जा सकता है. अगर आप मैट्रिमोनियल साइट्स के माध्यम से जीवनसाथी तलाशना चाहती हैं, तो इन साइट्स पर अपना प्रोफाइल बना कर स्मार्ट लाइफपार्टनर खोज सकती हैं.

इन मैट्रिमोनियल साइट्स पर अलअलग तरह की सुविधा होती है. आप फ्री मैंबरशिप भी ले सकती हैं. फ्री मैंबरशिप में आप केवल दूसरों का प्रोफाइल देख सकती हैं और इंटरैस्ट भेज सकती हैं. इस में आप को दूसरों के फोन नंबर दिखाई नहीं देते, जब तक कि सामने वाला खुद अपना नंबर न दे. इस के लिए दूसरे यूजर का पेड मैंबर होना जरूरी है. तभी वह आप को फोन नंबर भेज पाएगा.

अगर आप चाहती हैं कि आप के प्रोफाइल में आप का फोन नंबर दिखे और आप भी दूसरों से संपर्क कर पाएं, तो आप को पेड मैंबरशिप लेनी पड़ेगी. मैट्रिमोनियल साइट्स प्रीमियम पेड मैंबर की भी सुविधा देती हैं, जिस में आप दूसरे औनलाइन मैंबर से चैट भी कर सकती हैं. इन साइटों पर आप का फोटो, फोन नंबर और ईमेल के लिए प्राइवेसी और सिक्युरिटी का औप्शन होता है, इसलिए यहां घबराने वाली कोई बात नहीं होती. जब भी इस तरह की मैट्रिमोनियल साइट पर अपना प्रोफाइल बनाएं, तो इस बात का ध्यान रखें कि आप जिस साइट पर अपना प्रोफाइल बना रही हैं वह रजिस्टर्ड हो. ऐसा न करें कि किसी ने आप से कहा कि इस साइट पर अच्छे लड़के मिलते हैं, तो आप ने उस साइट पर प्रोफाइल बना लिया. प्रोफाइल बनाने से पहले यह भी अवश्य जान लें कि वह साइट किस तरह से काम करती है.

औनलाइन पार्टनर ढूंढ़ने के फायदे

कई सारे विकल्प: रिश्तेदार व मातापिता को अगर कोई लड़का पसंद आता है, तो वे उसी लड़के में सारे गुण दिखाने लगते हैं. भले ही वह अच्छा हो या न हो. लेकिन औनलाइन पार्टनर खोजने पर आप को सारे विकल्प मिलते हैं, आप कई लोगों से मिल कर तय करती हैं कि कौन आप के लिए अच्छा है, आप किस के साथ ऐडजस्ट कर सकती हैं.

रिजैक्शन की टैंशन नहीं: जब लड़के वाले देखने आते हैं और देखने के बाद मना कर देते हैं, तो लड़की का आत्मविश्वास कम होने लगता है. भले ही मना करने की वजह कुछ भी हो, लेकिन इस के लिए लड़की को ही दोषी माना जाता है. कई बार तो लड़कियां रिजैक्शन से इतना थक चुकी होती हैं कि किसी भी लड़के से शादी के लिए हां कर देती हैं. औनलाइन पार्टनर ढूंढ़ने का सब से बड़ा फायदा यही होता है कि इस में रिजैक्शन की कोई टैंशन नहीं होती. दोनों तरफ से रजामंदी के बाद ही बात आगे बढ़ती है.

पैसे की भी बचत: अगर घर पर लड़के वाले देखने आते हैं, तो उन की खातिरदारी में काफी पैसे खर्च होते हैं. कोशिश रहती है कि किसी चीज की कमी न रहे. लेकिन जब उन्हें लड़की पसंद नहीं आती, तो खर्च करना बेकार हो जाता है. औनलाइन कोई खर्च नहीं होता. लड़कालड़की अपने अनुसार पार्टनर खोजते हैं, बातचीत के माध्यम से एकदूसरे को जानतेसमझते हैं.

रिश्तेदारों में नाराजगी नहीं: अकसर ऐसा होता है कि रिश्तेदार जब कोई रिश्ता ले कर आते हैं, तो सोचते हैं कि वे रिश्ता ले कर आए हैं तो बस शादी हो जाए, भले ही लड़की को लड़का पसंद आए या न आए. अगर उन के द्वारा लाए रिश्ते को मना कर दिया तो नाराज हो जाते हैं. मगर यहां आप बिना किसी को नाराज किए साथी खोज सकती हैं.

समय की कमी के बाद भी अच्छे रिश्ते: सब से बड़ी बात आज लोगों के पास समय की कमी है. बिजी लाइफ में संभव नहीं हो पाता कि वे रिश्ते ढूंढ़ पाएं. ऐसे में इस तरह की साइटों से बस एक क्लिक में पार्टनर मिल जाता है.

कैरियर से समझौता नहीं: आजकल लड़कियां अपने कैरियर के साथ समझौता नहीं करना चाहतीं. ऐसे में उन के लिए जीवनसाथी खोजना मातापिता के लिए काफी मुश्किल हो जाता है. लेकिन मैट्रिमोनियल साइट्स से उन की पसंद का और एक ही पेशे का लड़का खोजना आसान होता है.

ध्यान रहे इन साइट्स पर मिले पार्टनर की सही तरीके से खोजबीन न की जाए तो इस के कई नुकसान भी हैं. अत: यहां पार्टनर खोजते समय इन बातों का ध्यान रखें:

– लड़का अपने बारे में झूठी जानकारी दे सकता है. ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिन में फोटो से ले कर सैलरी, पारिवारिक पृष्ठभूमि व अन्य तथ्यों के बारे में झूठी जानकारी दी गई.

–  प्रोफाइल में दी गई जानकारी के बारे में या अन्य पहचान की जांचपड़ताल के लिए उसी क्षेत्र में रहने वाले दोस्तों, रिश्तेदारों से संपर्क करें.

–  ध्यान रहे कई बार लोग अपने प्रोफाइल को आकर्षक बनाने के लिए छोटीछोटी बातों को बढ़ाचढ़ा कर प्रस्तुत करते हैं, जबकि वास्तविकता कुछ और ही होती है.

– केवल प्रोफाइल देख कर मिलने का निर्णय न लें. पहले थोड़ी बातचीत कर जानसमझ लें. फिर तय करें.

मैट्रिमोनियल साइट्स ही विकल्प नहीं

मैट्रिमोनियल साइट्स के अलावा सोशल साइट्स की भी अपनी विशेष जगह बनती जा रही है. वह इसलिए, क्योंकि ये लाइफपार्टनर चुनने के कई बेहतरीन विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं, जिस में परंपरागत तरीकों का थोपा हुआ एहसास नहीं है. यहां एक नयापन है, एक मजेदार व सुखद एहसास है.

निम्न सोशल साइट्स से आप पार्टनर खोज सकती हैं:

फेसबुक, गूगल प्लस, माई स्पेस, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, व्हाट्सऐप, वीचैट, लाइन, हाइक आदि.

इन साइटों पर प्रोफाइल बनाना काफी आसान है. इन में फेसबुक सब से ज्यादा लोकप्रिय है. यहां आसानी से एकदूसरे से जुड़ा जा सकता है, दोस्ती की जा सकती है, प्यार का इजहार किया जा सकता है.

डेटिंग ऐप से खोजें साथी

आज कई सारे डेटिंग ऐप्स आ गए हैं, जिन से आप डेटिंग व चैटिंग का मजा लेते हुए जीवनसाथी खोज सकती हैं. इस के लिए बस आप को ऐप डाउनलोड कर के रजिस्टर करना होगा. इस के बाद आप अपने साथी की तलाश कर सकती हैं.

ऐप डाउनलोड करने के बाद आप को साइन इन करना होगा. यह बहुत ही आसान है. इस के लिए बस अपनी सैल्फी क्लिक कर के अपलोड करें. यह सैल्फी आप के आसपास के लोगों को नजर आएगी और वे आप में रुचि लेना चाहेंगे तो एक नोटिफिकेशन भेजेंगे. आप को उन से बात करने के लिए वह नोटिफिकेशन स्वीकार करना होगा. फिर आप आराम से चैटिंग का मजा ले सकती हैं.

डेटिंग ऐप उन के लिए काफी मददगार है, जो ज्यादा लोगों के संपर्क में नहीं हैं. वे इस ऐप की मदद से जानसमझ कर अपना लाइफपार्टनर तलाश सकते हैं. सारे डेटिंग ऐप्स में लगभग एक ही तरह के फीचर होते हैं जैसे यूजर प्रोफाइल, मीडिया कंटैंट -फोटो, वीडियो, मैसेज, चैट फ्रैंड लिस्ट इत्यादि.

कुछ डेटिंग ऐप्स

ओकेक्यूपिड: इस में आप ईमेल व चैट कर सकती हैं, अपना विस्तृत प्रोफाइल बना सकती हैं और साथ ही दूसरे लोगों के प्रोफाइल को भी देख सकती हैं. यह ऐप आप से कुछ सवाल करता है और फिर आप जवाबों के आधार पर आप को ऐसा प्रोफाइल दिखाता है जिस के जवाब भी आप के जवाबों से मिलतेजुलते होते हैं.

टिंडर: यह मुफ्त डेटिंग ऐप फेसबुक के आधार पर आप के आसपास के लोगों का प्रोफाइल आप को दिखाता है और यदि दोनों परस्पर एकदूसरे को पसंद करते हैं, तो वे एकदूसरे से चैटिंग कर सकते हैं.

थ्रिल: यह ऐप लोकेशन के आधार पर आप को प्रोफाइल दिखाता है और फिर आप को दूसरों के प्रोफाइल को देख कर उन्हें आंकना होता है और अंकों के आधार पर यह आप को कुछ लोगों से जोड़ता है. महिलाएं कभी भी इस में शामिल हो सकती हैं, लेकिन पुरुषों को इस के लिए आवेदन करना पड़ता है. उन के आवेदन पर महिलाएं आकलन करती हैं और मिलने वाले ग्रेड के आधार पर उन्हें शामिल किया जाता है.

वू: वू समान सोशल नैटवर्क, साझा रुचियों के आधार पर आप को जोड़ता है. वू में शामिल होने के लिए एक गहन जांच प्रक्रिया होती है ताकि इस में केवल सिंगल लोग ही शामिल हों, जिन का उद्देश्य गंभीर रिश्ता हो न कि अनौपचारिक सैक्स.

ट्रुली मैडली: इस साइट पर प्रोफाइल बनाने के लिए भी आप की जांच की जाती है. उपयोग करने वालों को भरोसे के आधार पर रैकिंग दी जाती है.

औनलाइन पार्टनर से जरूर करें मुलाकात

सिर्फ चैटिंग के माध्यम से या फोन पर हुई बातचीत के आधार पर ही जीवनसाथी न चुनें. आप उसे जैसा समझ रही हैं, वह वास्तव में वैसा ही है या नहीं जानने के लिए उस से जरूर मिलें. मिल कर देखें कि वह कैसा है, बातचीत का तरीका क्या है. उस की अपने पार्टनर से क्याक्या उम्मीदें हैं. जब आप मिलने का प्लान बनाएं तो स्थान हमेशा अपने अनुसार ही चुनें, जिस स्थान के बारे में आप अच्छी तरह से जानती हैं, उसी स्थान का चुनाव करें. जब आप अपने औनलाइन पार्टनर से मिलने जाएं तो अपनी किसी फ्रैंड या फिर घर वालों को अवश्य बता दें कि आप कहां जा रही हैं.

जरूरी नहीं है कि आप एक मुलाकात में ही तय करें. आप को समझ न आए तो आप

कई बार मिल सकती हैं. आप जितना मिलेंगी, साथ समय बिताएंगी, आप उस के बारे में उतना ही ज्यादा जान पाएंगी. मिलने जाएं तो केवल प्यार में ही न डूबी रहें, बल्कि उसे समझने की भी कोशिश करें.

औनलाइन प्यार में ज्यादा मजा

आप को जान कर हैरानी होगी कि जो लोग औनलाइन प्यार करते हैं, वे प्यार को नएनए तरीके से ऐंजौय करते हैं. दरअसल, औनलाइन हमें सोचनेसमझने का समय मिलता है कि हमें क्या करना है, कैसे रिप्लाई करना है. यहां एकदूसरे से मिलने की तड़प होती है, जो पार्टनर को बांध कर रखती है.

आज कई तरह के इमोजी आ गए हैं जो आप के दिल की बात आसानी से सामने वाले को बयां कर देते हैं. आजकल तो डेटिंग ऐप में भी कई फीचर आ गए हैं, जो बस एक क्लिक पर बता देते हैं कि आप का दिल साथी के लिए कैसे धड़कता है. औनलाइन प्यार में आप साथी से किसी भी समय, किसी के भी सामने बात कर सकती हैं. आप को उस के लिए समय नहीं निकालना पड़ता. जब चाहा साथी को मैसेज भेज दिया.

‘‘औनलाइन पार्टनर ढूंढ़ने का सब से बड़ा फायदा यह होता है कि इस में रिजैक्शन की कोई टैंशन नहीं होती. दोनों तरफ से रजामंदी के बाद ही बात आगे बढ़ती है…’

सावधानी भी जरूरी

सोशल मीडिया पर दोस्ती करना जितना आसान है उतना ही ज्यादा संभावना फेक प्रोफाइल मिलने की भी है. यहां आप को प्यार में फंसाने वाले हजारों मिलेंगे. अत: थोड़ी सावधानी जरूरी है.

विनीत के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. विनीत जबलपुर की एक लड़की का फोटो देख कर काफी आकर्षित हुआ. उस ने लड़की को फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी. लड़की ने रिक्वैस्ट स्वीकार कर ली. इस के बाद दोनों के बीच खूब बातें होने लगीं. विनीत उस के प्यार में इतना पागल हो गया कि उस से मिलने जबलपुर पहुंच गया. जब वह वहां पहुंचा तो अपनी गर्लफ्रैंड को देख कर हैरान रह गया. उस की प्रेमिका की जगह पर एक 43 साल की महिला थी, जिस ने 20 वर्षीय लड़की बन कर अपना प्रोफाइल बनाया था.

आज फेसबुक पर इस तरह के फेक प्रोफाइलों की बाढ़ है, जहां लोग बस मजे के लिए प्यार करते हैं. आप को थोड़ा चौकन्ना रहना पड़ेगा. यहां दोस्त जरा सोचसमझ कर बनाएं. बस संख्या बढ़ाने और पार्टनर खोजने के लिए किसी को भी न जोड़ लें. अपना प्रोफाइल फोटो लौक कर के रखें. अकाउंट में प्राइवेसी सैटिंग रखें. अगर कोई आप को ज्यादा परेशान करे तो उसे ब्लौक करें. ब्लौक करने के बाद वह आप की किसी भी गतिविधि को नहीं देख पाएगा.

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किशोर पीढ़ी को चुनौती

जीवन का रंग लाल खून का ही नहीं होता पर अफसोस की बात है कि आज की प्रौढ़ व वृद्ध पीढ़ी कल की पीढ़ी को लाल रंग से रंगी दुनिया देने की तैयारी में है. हम प्रकृति के साथ भरपूर खिलवाड़ कर चुके हैं. दुनिया का आकाश जहरीले लाल धुएं से भरने लगा है. गरमी बढ़ने लगी है. नई तकनीक से जीवन सुखी हुआ है पर हवा का रंग लाल होने लगा है. इतना ही नहीं सोच भी लाल हो गई है. सारी दुनिया दहशत में जी रही है कि न जाने कब, कहां खून बिखरा दिख जाए. कश्मीर के उड़ी में 22 भारतीय जवानों का खून बहा और उन के परिवार बरबाद हो गए, क्योंकि पाकिस्तान से 4 आतंकवादी भारत में घुस आए पर यहां तो गलीकूचों में रोज खून बह रहा है. कभी गौमांस को ले कर, कभी दलितों को ले कर, कभी कावेरी के जल विवाद पर तो कभी माओवादियों द्वारा हिंसा फैला कर. यों कहना गलत नहीं होगा कि गुस्सा लोगों के सिर चढ़ कर बोलने लगा है.

समुद्र पार तो हालात और खराब हैं. पश्चिम एशिया में धूंधूं कर लाल धुआं फैल रहा है. लोगों को सदियों पुराने अपने शहर छोड़ कर भिखारियों की तरह दूसरे शहरों में खून बहा कर भागना पड़ रहा है. यह खून कितने ही देशों में बहे जा रहा है. जहां नहीं है या कम है, उन्हें भी अब डर लग रहा है कि कहीं कोई आतंकवादी उन के किसी शहर पर हमला न कर दे.

क्या यही हमारे प्रौढ़ व वृद्ध आज के किशोरों को दे कर जाना चाहते हैं? दुनिया को इंटरनैट और सैटेलाइट्स से युवाओं ने एक किया. किशोरों ने ही सोचा कि कौन सी तकनीक का कैसे इस्तेमाल किया जाए कि जमीन पर खींची लकीरों को ही बेमतलब का कर दिया जाए. उन्होंने व्हाट्सऐप और फेसबुक का ईजाद कर लिया. ईमेल से कहीं भी सस्ते में किसी से भी बातचीत कर सकते हैं. स्काइप से दूरदराज बैठे लोग पास आ गए.

प्रौढ़ और वृद्ध पीढ़ी ने इस का दुरुपयोग किया. उन्होंने धर्म, भाषा, जाति, देश और क्षेत्र के नाम पर इस तकनीक का इस्तेमाल लड़ाइयों में करना शुरू कर दिया. जो 4 आतंकवादी उड़ी में घुसे उन के पास जीपीएस था पर खूनखराबे के लिए, दोस्त बनाने के लिए नहीं. जहां किशोर पीढ़ी बिना धर्मजाति पूछे दोस्त बनाती है, इंटरनैट पर उपलब्ध ट्रांसलेशन की सुविधा से अनजानों से दोस्ती करती है, वहीं प्रौढ़ पीढ़ी इस का इस्तेमाल अपनी ताकत बढ़ाने में कर रही है, चाहे उस के लिए खून बहे, लोगों के घर उजड़ें, पतिपत्नी अलग हों, प्रेमीप्रेमिका बिछुड़ जाएं.

आज की किशोर पीढ़ी के लिए यह चुनौती है कि जो सुविधाएं उन से पहली पीढ़ी ने पैदा की थीं, उन्हें फिर से सुबह की लालिमा लाने के लिए ही इस्तेमाल किया जाए, खून बहाने के लिए नहीं.

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गर्मी की मार से बचने के लिए ऐसे चुनें स्मार्ट एसी

चूंकि अब पूरी तरह से गर्मी आ चुकी है, तो गर्मी से बचने की तैयारी भी जबरदस्त होनी चाहिए. क्यों सही कहा ना. आपको तो मालूम ही होगी कि बाजार में हर सीजन पर खुछ ऐसे इलेक्ट्रानिक गैजट्स आते हैं, जो आपको मौसम की मार से बचाते हैं. जब मौसम में तपिश बढ़ने लगती है तो कूलर और एसी की डिमांड भी बढ़ने लगती है. हमें धीरें धीरें एसी की जरूरत महसूस होने लगती है और हम जल्द से जल्द उसे खरीदने की सोचते हैं.

ऐसे में अगर आप एयर कंडिशनर खरीदने की सोच रहे हैं और इन सवालों में उलझे हुए हैं कि कौन सा एसी खरीदा जाए? एसी की क्षमता क्या हो? और कौन सा वेरिएंट आपके लिए बेहतर होगा?तो आपके लिए हमारे पास इसके कुछ जवाब हैं.

आइये जानें वो खास बात जिनपर ध्यान देकर आप अपने लिए सही एसी का चुनाव कर सकते हैं-

साइज या कैपेसिटी

एसी खरीदते समय सबसे बड़ी उलझन उसके साइज या कैपेसिटी को लेकर होती है. यह सीधे तौर पर कमरे, हाल या उस स्थान के साइज पर निर्भर करता है, जहां एसी को लगाया जाना है. स्क्वायर फीट के लिहाज से अगर आपके कमरे का फ्लोर 90Sqft से छोटा है तो आपके लिए 0.8 टन का एसी पर्याप्त है. जबकि 90- 120Sqft वाली जगह के लिए 1.0 टन का एसी, 120-180Sqft जगह के लिए 1.5 टन का एसी और 180Sqft से बड़ी जगह के लिए 2.0 टन का एसी खरीदना सही रहेगा.

विंडो, स्प्लिट या पोर्टेबल ए.सी.

आजकल तो दुनियाभर की तमाम छोटी-बड़ी कंपनियां इनका निर्माण कर रही हैं. विंडो और स्प्लिट के बाद अब पोर्टेबल एसी भी बाजार में आ गए हैं. ए.सी. के तीनों वेरिएंट की अपनी-अपनी खूबियां हैं. तो आइये जानें कौन सा एसी आपके लिए रहेगा सही-

विंडो : यह अन्य दो वेरिएंट के मुकाले थोड़ा सस्ता होता है. लेकिन इसमें आवाज थोड़ी ज्यादा होती है. यह सिंगल रूम और छोटे कमरों के लिए सही है. आसानी से लगाया जा सकता है, लेकिन खूबसूरती के मामले में यह स्प्लि‍ट एसी से पिछड़ जाता है.

स्प्लि‍ट : एयर फ्लो ज्यादा होने के कारण यह बड़े कमरों के लिए उपयुक्त है. इसमें शोर नहीं होता और दिखने में भी खूबसूरत होता है. लेकिन विंडो ए.सी. के मुकाबले थोड़ा महंगा होता है. यह दो हिस्सों में होता है, जिसमें एक हिस्सा कमरे के बाहर या छत पर लगाया जाता है और दूसरा कमरे के अंदर.

पोर्टेबल : पोर्टेबल एसी भी इन दिनों खूब चलन में है. इसके साथ सबसे बड़ी सुविधा या खूबी यह है कि इसे सुविधा अनुसार कमरे के किसी कोने में या जरूरत के हिसाब से हाल के किसी एरिया में रखा जा सकता है. इसे लगेने का झंझट नहीं है. आप खुद भी इसे एक जगह से दूसरी जगह शि‍फ्ट कर सकते हैं.

फिल्टर, एयर फ्लो, स्विंग

एसी में बढ़ि‍या फिल्टर का लगा होना जरूरी है. एयर फ्लो यह तय करता है कि आपका एसी कितनी देर में कमरे को ठंडा कर सकता है. जरूरी है एसी में कूलिंग स्पीड को तय करने की सुविधा हो. कम से कम दो फैन की स्पीड हो, जिसे आप अपने हिसाब से आन आफ कर सकें.

अब कुछ विंडो एसी में भी यह फीचर आने लगे हैं, हांलाकि यह थोड़ा महंगा भी होता है. एसी को समय-समय पर सर्विसिंग की भी जरूरत होती है. यह न सिर्फ इसलिए जरूरी है कि आपका एसी सालों-साल चले, बल्कि इसलिए भी कि आपके ए.सी. की सफाई हो और वह स्वच्छ हवा दे.

बिजली की खपत

एसी खरीदने के क्रम में एक और सबसे जरूरी बात यह देखने की होत है कि आपका एसी कितनी बिजली खपत करता है, क्योंकि महीने के आखि‍री में बिल आपको ही चुकाना है. अच्छी बात यह है कि अब हर इलेक्ट्रानिक सामान पर बिजली की बचत को लेकर स्टार रेटिंग चस्पा होती है. जितनी ज्यादा स्टार रेटिंग उतनी ज्यादा प्रोडक्ट की कीमत. लेकिन एसी खरीदने के क्रम में कम से कम तीन स्टार रेटिंग वाला प्रोडक्ट लेना ही सही रहेगा.

वोल्टेज स्टैबेलाइजर

एसी के साथ अमूमन वोल्टेज स्टैबेलाइजर खरीदने की भी सलाह दी जाती है. यह सही भी है और जरूरी भी. एसी 0.5-0.8 टन का है तो इसके साथ 2KVA का स्टैबेलाइजर लगाएं, 1.0 टन से 1.2 टन के एसी के लिए 3KVA का, 1.2-1.6 टन के एसी के लिए 4KVA का, 2.0-2.5 टन के लिए 5KVA और 3 टन से अधिक क्षमता वाले एसी के लिए 6KVA का स्टैबेलाइजर लेना आपके लिए सही रहेगा.

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फ्लोरिंग को दें स्टाइलिश लुक

आप अपने घर में कितनी भी महंगी चीजें क्यों न रखें, जब तक घर की फ्लोरिंग सही न होगी तब तक घर का इंटीरियर अच्छा नहीं लगेगा. फर्श के तौर पर टाइल्स बेहद टिकाऊ होती हैं तथा मजबूती के मामले में भी इन का मुकाबला नहीं होता. ये पानी से जल्दी खराब नहीं होतीं और साफसफाई में भी किसी तरह की दिक्कत नहीं होती.
टाइल्स में मैट फिनिश का चलन जोरों पर है. चमचमाती या ग्लौसी टाइल्स अब चलन से आउट हो गई हैं. कई कंपनियां आप की पसंद अनुसार भी टाइल्स बनाने लगी हैं, जिन्हें कंप्यूटर की मदद से बनाया जाता है. इन में आप अपनी पसंदीदा मोटिफ्स या परिवार के फोटो भी प्रिंट करा सकती हैं. टाइल्स फ्लोरिंग कराते समय इस बात का ध्यान रखें कि फ्लोरिंग आप की दीवारों से मैच करे. अगर आप के घर की दीवारें लाइट कलर की हैं, तो टाइल्स डार्क कलर की लगवाएं. अगर दीवारें डार्क कलर की हैं, तो लाइट टाइल्स लगवाएं.

कहां और कैसे लगवाएं टाइल्स

घर की अलगअलग जगहों पर टाइल्स के चयन का तरीका भी अलगअलग होता है:

– लिविंग एरिया वह स्थान होता है जहां आप अपने मेहमानों का स्वागत करती हैं, दोस्तों से मिलती हैं, उन से बातें करती हैं. इस स्थान को खास बनाना जरूरी है. यहां आप कारपेट टाइल्स लगवा सकती हैं.

– अगर आप का घर छोटा है, तो एक ही तरह की टाइल्स लगवा सकती हैं, जो घर को अच्छा लुक देती हैं. अगर घर बड़ा है तो अलगअलग डिजाइनों की टाइल्स लगवाएं. लिविंग एरिया में पैटर्न और बौर्डर वाली टाइल्स का भी ट्रैंड इन है.

– बैडरूम में कई लोग डार्क कलर फ्लोरिंग करा लेते हैं. ऐसा करने से बचें. बैडरूम में हमेशा टाइल्स फ्लोरिंग के लिए हलके और पेस्टल शेड्स का इस्तेमाल करें.

– किचन छोटी हो तो दीवारों पर हलके रंग की टाइल्स लगवाना ही सही रहता है. बड़ी किचन में सौफ्ट कलर का इस्तेमाल करना चाहिए. इन दिनों किचन में स्टील लुक वाली टाइल्स ट्रैंड में हैं.

– बाथरूम घर में सब से ज्यादा इस्तेमाल होने वाली जगहों में से एक है. इसे सुंदर व आरामदेह बनाना बहुत जरूरी है. बाथरूम में हमेशा सौफ्ट फील वाली टाइल्स लगवाएं. ये टाइल्स नंगे पैरों को रिलैक्स फील कराती हैं. बाथरूम के लिए कई तरह की टाइल्स आती हैं. आप बौर्डर वाली, क्रिसक्रौस पैटर्न वाली टाइल्स लगवा सकती हैं.

टाइल्स कई सालों तक चलती हैं. इन्हें साफ करना भी आसान होता है. कई महिलाएं टाइल्स को साफ करने के लिए हार्ड कैमिकल का प्रयोग करती हैं. ऐसा न करें. टाइल्स को साफ करने के लिए टौयलेट क्लीनर का इस्तेमाल कर सकती हैं. सर्फ के पानी से भी टाइल्स को साफ किया जा सकता है.

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गरमियों में भी दिखें हसीन

गरमी का मौसम आते ही त्वचा में नमी की मात्रा कम होने लगती है. इस की वजह धूप, धूल, गरम हवा, प्रदूषण और पसीना आना है. त्वचा में नमी की मात्रा कम हो जाने से वह बेजान और रूखी हो जाती है. ऐसे में सही मात्रा में पानी पीना, संतुलित आहार लेना, सनस्क्रीन से खुद को प्रोटैक्ट करना, धूप से बचना आदि जरूरी है. ब्यूटी ऐक्सपर्ट आकृति कोचर कहती हैं कि गरमी के मौसम में त्वचा की नमी का ध्यान रखना जरूरी है वरना कई प्रकार के रैशेज, रैडनैस, ऐलर्जी आदि होने का खतरा रहता है. ऐसे में सनस्क्रीन और मौइश्चराइजर अच्छी कंपनी का ही लगाएं ताकि त्वचा सुरक्षित रहे. इन्हें घर से निकलने से 20 मिनट पहले लगाएं. कम से कम 15 एसपीएफ वाला सनस्क्रीन त्वचा के लिए अच्छा होता है. अगर आप ने सही मात्रा वाले एसपीएफ का प्रयोग त्वचा के लिए नहीं किया, तो त्वचा की उम्र आप की उम्र से अधिक दिखेगी, इसलिए ऐक्सपर्ट की राय जरूरी है. गरमी के मौसम में सैलिब्रिटीज खासतौर पर अपनी त्वचा को ले कर संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उन्हें धूप, धूल, प्रदूषण आदि में शूटिंग करनी पड़ती है. आइए, जानें किस तरह वे गरमी का सामना करते हैं:

श्रद्धा कपूर: वीट की ब्रैंड ऐंबैसेडर अभिनेत्री श्रद्धा कपूर कहती हैं, ‘‘गरमी के मौसम में मैं बहुत ही साधारण दिनचर्या फौलो करती हूं ताकि मेरी त्वचा की खूबसूरती बनी रहे. मैं खूब पानी पीती हूं. इस के अलावा फल और सब्जियां मेरी डाइट में शामिल होती हैं. मैं अपने चेहरे को कई बार साफ पानी से धोती हूं ताकि प्रदूषण, धूलमिट्टी से बची रहूं.

‘‘मैं सनप्रोटैक्शन क्रीम लगाए बिना घर से नहीं निकलती हूं. ये सारी बातें मैं ने अपनी मां से सीखी हैं. शूटिंग के दौरान भी मैं इन बातों का खयाल रखती हूं. इस मौसम में मैं मेकअप कम करती हूं.’’

करीना कपूर खान: करीना की तरह खूबसूरत त्वचा हर लड़की चाहती है. अपनी स्किन त्वचा का श्रेय वे अपने मातापिता को देती हैं, जो उन्हें जन्म से मिली है. वे हमेशा अपनी स्किन को नमीयुक्त रखती हैं. गरमी के मौसम में वे खूब पानी, सूप, जूस आदि पीती हैं ताकि त्वचा डीहाइड्रेट न हो.

करीना कहती हैं, ‘‘मैं पंजाबी परिवार से हूं जहां खाना सब कुछ होता है. मैं भी खूब खाती हूं. पंजाब में जाने पर मैं वहां के अमृतसरी कुलचे अवश्य खाती हूं. अब मेरी जीरो फिगर में रुचि नहीं और न ही मेरी स्विमसूट पहनने की इच्छा है. यह सब मैं ने फिल्म ‘टशन’ के दौरान कर किया था. अब मैं खूब खा रही हूं और खुश रहती हूं. लेकिन वर्कआउट अवश्य करती हूं ताकि फिट रहूं. मैं मेकअप अधिक नहीं करती. धूप में निकलने पर सनस्क्रीन अवश्य लगाती हूं. रात को सोते समय मौइश्चराइजर लगाती हूं. खाने में मौसमी फल, सब्जियां अवश्य लेती हूं. इन के अलावा मैं हमेशा साधारण रहना पसंद करती हूं. घर से निकलते वक्त आंखों के मेकअप के लिए काजल और मौइश्चराइजर अपने पर्स में रखती हूं.’’

नरगिस फाखरी: त्वचा को चिकना और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए नरगिस क्लींजिंग, फेशियल, स्क्रब, मास्क आदि का प्रयोग करती हैं. जब वे बाहर शूट करती हैं, तो वालनट स्क्रब के द्वारा मेकअप को हटाती हैं. इस से मेकअप रोमछिद्रों से बाहर निकल जाता है, साथ ही इस से चेहरे का रक्तसंचार भी बढ़ता है. वे रात में सोते समय मौइश्चराइजर लगाती हैं.

नरगिस कहती हैं, ‘‘मैं उसी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती हूं, जो मुझ पर सूट करता है. मुझे अधिक मेकअप का शौक नहीं. धूप में अधिक नहीं जाती, संतुलित आहार लेती हूं. भारत में मैं मदर नेचर के पास हूं, जहां हर तरह की सब्जियां और फल आप के आसपास ताजा मिलते हैं. इन्हें खा कर और लगा कर मैं अपनी त्वचा को सुंदर रख सकती हूं. मुंबई में बाहर वाक या जौगिंग करना संभव नहीं, इसलिए घर पर डीवीडी लगा कर जुंबा वर्कआउट करती हूं. बालों के लिए हौट औयल मसाज अवश्य कराती हूं. अधिक शुगर नहीं लेती. भरपूर नींद लेती हूं.’’

दीपिका पादुकोण: दीपिका गरमी के मौसम में अपनी त्वचा का खास ध्यान रखती हैं. दीपिका कहती हैं, ‘‘रात में जो भी मेकअप मेरे चेहरे पर होता है, उसे मैं निकाल कर हाइड्रेटिंग क्रीम लगाती हूं. इस के अलावा खूब पानी पीती हूं. संतुलित आहार लेती हूं. नियमित वर्कआउट करती हूं और नींद पूरी करती हूं. इस मौसम में गरम और सूखी हवा से बाल बेजान से हो जाते हैं. ऐसे में सप्ताह में 1 बार टैंडर कोकोनट औयल से मसाज कराने से बाल खराब होने से बचते हैं.

‘‘मैं मेकअप अधिक पसंद नहीं करती. पर बीबी क्रीम अवश्य लगाती हूं. मुझे लाल लिपस्टिक बहुत पसंद है, जिसे लाइनर के साथ लगाती हूं.’’

गरमियों में खूबसूरत दिखने के कुछ टिप्स

– घर से बाहर निकलना हो तो सनस्क्रीन लगाएं.

– धूप में निकलते वक्त चुन्नी या दुपट्टा अथवा स्कार्फ से चेहरा ढक लें.

– ककड़ी, अंगूर, संतरा, तरबूज आदि फलों का सेवन अधिक से अधिक करें.

– बाहर निकलना हो तो पानी की बोतल साथ रखें.

द्य हफ्ते में 1 बार प्राकृतिक फेस पैक लगाएं जिस में चंदन का लेप, हलदी का लेप, ऐलोवेरा खासकर फायदेमंद होता है.

– चायकौफी का सेवन थोड़ा कम करें. ग्रीन टी पीएं.

– सोने से पहले चेहरे को धो कर मौइश्चराइजर लगाएं.

– ऐलोवेरा, रोजवाटर और ग्लिसरीन को मिला कर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं. इस से फ्रैश और रैडिएंस लुक मिलेगा.

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धोनी के पीठ दर्द ने बढ़ाई चेन्नई की चिंता, प्रेक्टिस सेशन में नहीं थे मौजूद

आईपीएल के इस सीजन में खिलाड़ियों की चोटों ने चेन्नई टीम की चिंता बढ़ा दी है. एक के बाद एक कई खिलाड़ी चोट के कारण टीम से बाहर होते जा रहे हैं. पहले केदार जाधव टीम से चोट के कारण बाहर हो गए, फिर टीम के सबसे खास खिलाड़ी सुरेश रैना दो तीन मैचों के लिए टीम से बाहर हो गए. अब चेन्नई की टीम पर सबसे बड़ा खतरा मंडराता दिख रहा है.

टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पीठ के दर्द से जूझ रहे हैं. पिछले मैच में वह इस दर्द के बावजूद पंजाब के खिलाफ खेलते रहे. उसी मैच में ये संदेह जताया जा रहा था कि धोनी खेल पाएंगे या नहीं. अब शुक्रवार को टीम राजस्थान रौयल्स के खिलाफ खेलेगी. लेकिन उससे पहले टीम के अभ्यास सत्र से धोनी नदारत रहे.

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चेन्नई से सभी मैच अब पुणे शिफ्ट कर दिए गए हैं. मैच से पहले प्रैक्टिस सेशन में धोनी नहीं दिखाई दिए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान  के खिलाफ तैयारियों में जुटी चेन्नई के प्रैक्टिस सेशन से धोनी नदारद रहे. धोनी को पीठ दर्द है. हालांकि राहत की बात यह रही कि सुरेश रैना नेट प्रैक्टिस में नजर आए.

संभावना यह भी जताई जा रही है कि धोनी केवल बल्लेबाज के रूप में खेले. एन जगदीसन या अंबाती रायडू को विकेटकीपर की जिम्मेदारी सौंपी जाए. चेन्नई ने 15 अप्रैल को पंजाब के साथ अपना मुकाबला खेला था, जिसमे धोनी ने अपनी कप्तानी पारी खेलते हुए धमाकेदार 79 रन बनाए थे. इस दौरान धोनी के बैक में काफी दर्द था, लेकिन वह इसके बावजूद भी मैदान पर अपनी टीम के लिए खेल रहे थे.

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क्या स्मार्टफोन को विदा कहने का समय आ गया है?

क्या स्मार्टफोन को विदा कहने का समय आ गया है? दुनिया की कई स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियां आजकल चिंतित हैं कि आखिर अचानक बढ़ती मांग क्यों रुक गई और लोगों ने नई तकनीक वाले फोन लेने क्यों कम कर दिए हैं? क्या इस का पर्सनल कंप्यूटर का सा हाल होगा जो घरों से निकल गए हैं और केवल बिजनैस टूल बन कर रह गए हैं? शायद ऐसा ही होना था. हुआ यह कि कंपनियों ने बहुत ज्यादा तकनीक स्मार्टफोनों में भर दी जिस को देख कर अच्छा लगता पर जिस की आवश्यकता नहीं थी. कंज्यूमर्स ने शुरू में तो महंगे फोन खरीदे पर जब लगा कि यह सौदा कुछ कमा कर नहीं दे रहा, तो उन्होंने इसे नकारना शुरू कर दिया है.

आईफोन की बिक्री कम होने की वजह उस की तकनीक हो सकती है. इस में इतनी सारी सुविधाएं हैं कि जब तक ग्राहक उसे समझे फोन ही पुराना होने लगता है. साधारण सा फोटो खींचने वाले कैमरों की तकनीक का आखिर कोई क्या करे? दूसरे आप के फोटो क्यों देखें और कब तक देखें? आप अपनी सैल्फी की कितनी और कब तक संभाल करेंगे? इतिहास क्या उन अरबों फोटोग्राफ्स का इस्तेमाल करेगा, जो इन करोड़ों फोनों ने दुनिया भर में खींचे हैं?

स्मार्टफोन ने जीवन सरल जरूर बनाया है पर प्राइवेसी भी समाप्त कर दी है. लोग यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि उन से अपनी कमाई कैसे बढ़ाएं, कैसे सुख बढ़ाएं. हाथ में फोन होने का अर्थ यह नहीं कि आप का कार्य सुधर गया है. इस का अर्थ तो यह भी हो सकता है कि आप काम छोड़ कर बेकार के कौपीपेस्ट मैसेज पढ़ने और दोस्तों के फोटो लाइक करने में समय लगा रहे हैं. आप की उत्पादकता बढ़ने की जगह घट रही है. अनजानों के साथ दोस्ती के चक्कर में आप पास बैठे लोगों को भूल रहे हैं. आप ज्ञान की जगह चुटकुलों और बेकार के उपदेशों में अपना समय बरबाद कर रहे हैं.

स्मार्टफोन लगता है अपनी ओवर स्मार्टनैस का शिकार हो रहे हैं. पहले तार से बंधे फोन से चिपके रहने के कारण आप को भी बंधना पड़ता था, स्मार्टफोन ने उस से मुक्ति दिलाई पर आप को अब स्क्रीन में कैद कर डाला जो हर कुछ सैकंड में चमक उठती है. दुनिया को नई तकनीक चाहिए पर अच्छे प्रशासन के लिए, ज्यादा उत्पादन के लिए, फालतू की बकवास के लिए नहीं.

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